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24 मिनट में 7 फोन कॉल, BJP विधायक को हत्या और उपचुनाव की धमकी: 10 साल पहले पीछे पड़ा था जैश

उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित महसी के भाजपा विधायक सुरेश्वर सिंह को जान से मार डालने की धमकी मिली है। मात्र 24 मिनट के भीतर खुद को सुपारी किलर बताने वाले एक व्यक्ति ने उन्हें 7 बार फोन कॉल कर के धमकी दी। उत्तर प्रदेश प्राक्कलन समिति के सदस्य सुरेश्वर सिंह ( 11 जुलाई, 2021) को ये धमकियाँ मिलीं। विधायक ने स्थानीय डीएम और एसपी को कॉल कर के सारी जानकारी दे दी है।

साथ ही उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिख कर भी कहा है कि वो इस मामले में जाँच करा के कार्रवाई का निर्देश दें। विधायक ने जानकारी दी कि रात 10:21 बजे उनके मोबाइल नंबर 9415036649 पर 5944248 नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने बताया कि उसे विधायक की हत्या की सुपारी मिल चुकी है और वो उन्हें जान से मार डालेगा। उसने 10:45 तक 7 बार फोन कॉल किया।

इस दौरान उसने ये भी कहा कि सुरेश्वर सिंह की हत्या के बाद महसी में विधानसभा का उपचुनाव होगा। बहराइच शहर व महसी में स्थित कुछ पेट्रोल पंपों सहित कुछ अन्य स्थानों के उसने नाम भी गिनाए। विधायक ने आनन-फानन में उसी रात 10:47 बजे पुलिस अधीक्षक सुजाता सिंह को फोन पर मामले की जानकारी दी। तत्पश्चात जिलाधिकारी दिनेश चंद्र को घटना के बारे में बताया। सुरेश्वर सिंह खानदानी भाजपाई हैं और उनके पिता सुखदाराज सिंह जनसंघ से जुड़े हुए थे।

उनके पिता भी विधायक रहे थे। उनकी माँ नीलम सिंह भी भाजपा से विधायक रही हैं। वो केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के करीबी हैं। अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने उनके पत्र का त्वरित संज्ञान लिया है। उन्होंने 2 बार विधायक को फोन कॉल कर के घटना की न सिर्फ जानकारी ली, बल्कि कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। विधायक ने स्थानीय एसपी में इस मामले में शिथिलता बरतने का आरोप लगाया।

जबकि एसपी का कहना है कि बहराइच के विधायक सुरेश्वर सिंह को धमकी दिए जाने के मामले में कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है और मामले की पूरी गंभीरता के साथ जाँच कराई जा रही है। विधायक ने बताया कि 11 वर्ष पूर्व भी उन्हें आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की ओर से एक माह तक धमकियाँ मिलती रही थीं। 2011 में उनके घर छुरा फेंका गया था। उनके व उनके सहयोगी अवधेश सिंह के यहाँ आगजनी हुई थी। उनके घर पर पत्र फेंके गए थे।

‘शादी के बिना भी अधूरी नहीं मेरी जिंदगी, जो चाहती हूँ वो करती हूँ’: पूजा भट्ट ने इंटरव्यू में खोले कई राज

90 के दशक में बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस पूजा भट्ट ने हाल में फिल्मफेयर मैग्जीन को दिए इंटरव्यू में कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने अपनी शराब की लत से लेकर शादी से नाता तोड़ने पर खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि महिला ने अपने जीवन में क्या हासिल किया है या क्या नहीं। उसकी उपलब्धियों को हमेशा ये कहते हुए कम कर दिया जाता है कि रात के खाने में क्या है।

‘खुशहाल शादी’ के मुद्दे पर जब इंटरव्यू में पूजा भट्ट से पूछा गया तो उन्होंने कहा, “इस बात से फर्क ही नहीं पड़ता कि हम महिलाएँ विश्व में क्या हासिल कर रही हैं। हम में से कई घर आती हैं और हमारी सफलता को लेकर कह दिया जाता है- ‘हाँ ठीक है न तुमने नोबल प्राइज जीत लिया मगर अभी खाने में क्या है? तुम एक माँ हो या नहीं? तुम शादीशुदा हो या नहीं? मुझसे कई लोगों ने पूछा कि मैं दोबारा शादी क्यों नहीं कर रही और मैंने उन्हें यही जवाब दिया कि मैं ‘वे खुशी-खुशी रहते थे’ से ‘वह खुश रहती थी’ सोचकर मैं आगे बढ़ी हूँ। मैंने शादी की, कोशिश की और लोगों को रिकमेंड भी किया। लेकिन अब मेरा जीवन अधूरा नहीं है क्योंकि मैं वैसे ही जीना चाहती हूँ जैसे मैं रहती हूँ।”

बता दें कि पूजा भट्ट ने मनीष मखीजा से साल 2003 में शादी की थी लेकिन शादी के 11 साल बाद यानी 2014 में दोनों एक दूसरे अलग हो गए। उस समय उन्होंने ट्वीट कर बताया था, “मैं अपनी शर्तों पर जीवन जीना चुनती हूँ और सबके सामने दिखावा करने से इंकार करती हूँ। सर्टिफिकेट न तो शादी बनाते हैं और न उन्हें तोड़ते हैं। जिंदगी करती हैं। हर किसी के लिए जो इस बात की परवाह करते हैं और खासकर मेरे और मेरे पति मुन्ना के 11 साल बाद अलग होने पर पर बात कर रहे हैं… हमारा अलग होना सहमति से है। हम हमेशा एक दूसरे का सम्मान रखते हैं। लेकिन इसका कारण मैं समझती हूँ कि हम पब्लिक डोमेन में हैं। हमारे दोस्त, शुभचिंतक और दुश्मन सारे के सारे अटकलें लगाने के लिए स्वतंत्र हैं।”

अपने हालिया इंटरव्यू में पूजा ने अपनी शराब की लत पर भी बात रखी। उन्होंने कहा, “हम कई चीजें छिपाने का प्रयास करते हैं। लेकिन चार साल पहले जब मैंने शराब छोड़ने का फैसला किया, तो मैंने इसके बारे में खुलकर बात करने का फैसला किया। मैंने अपने करियर की शुरुआत डैडी जैसी फिल्म से की थी, जो एक युवा लड़की के अपने पिता को शराब पीने से रोकने के बारे में थी। और वहाँ, मैं उसी समस्या से निपट रही थी।”

उन्होंने कहा, “मैं लोगों के पास यह बताने के लिए गई कि यह ऐसा कुछ है जो किसी के साथ भी हो सकता है। महिलाओं को विशेष रूप से इसके बारे में थोड़ा और अधिक खुला होने की आवश्यकता है। और मैं रैंडम लोगों से मिलने वाली प्रक्रिया से अभिभूत है।”

उल्लेखनीय है कि पूजा भट्ट हमेशा से मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए जानी जाती रही हैं। उन्होंने अपने पिता महेश भट्ट की डैडी फिल्म से 1989 में बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद वह ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’ और ‘चाहत’ जैसी फिल्मों में दिखीं। इसके बाद साल 2009 में उनकी ‘सनम तेरी कसम’ में झलकी दिखने के बाद उन्होंने फिल्म दुनिया को अलविदा कह दिया था। लेकिन हाल में वह नेटफ्लिक्स की एक सीरिज बॉम्बे बेगम में दिखीं थी।

जैकब जुमा को सजा से भड़का दंगा- लूट, हिंसा और आगजनी के बीच भारतीय समुदाय ने उठाए हथियार: जानें क्यों बनाया गया निशाना

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को इसी महीने 7 जुलाई 2021 को गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसके बाद से वहाँ पर अराजकता औऱ दंगे के हालात हैं। देश में लूटपाट, आगजनी और हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं। ऐसे में वहाँ रहने वाले भारतीय मूल के लोगों, उनके घरों व व्यवसायों को भी खतरों को सामना करना पड़ा रहा है। इन हालातों से निपटने के लिए अब वहाँ रहने वाली भारतीय समुदाय ने अपनी सुरक्षा और लुटेरों के खिलाफ जंग छेड़ दी है।

हिंसा के पीछे का मुख्य कारण

दक्षिण अफ्रीका में कभी रंगभेद की लड़ाई के अगुआ रहे जैकब जुमा को अदालती आदेश की अवहेलना करने के मामले में एस्टकोर्ट सुधार गृह में 15 महीने के लिए कैद किया गया है। कथित तौर पर उन पर 2009-2018 के बीच भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और इसी मामले की जाँच न्यायिक आयोग कर रहा था, जिसके सामने पूछताछ के लिए उन्हें उपस्थित होना था। लेकिन, जैकब जुमा आयोग के सामने उपस्थित ही नहीं हुए। इसी मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। देश की सुप्रीम कोर्ट ने जब उनकी सजा को खत्म करने से इनकार कर दिया तो इसके विऱोध में लोग सड़कों पर उतर गए। जुमा के समर्थकों ने गौतेंग, और क्वाज़ुलु-नताल (केजेडएन) प्रांतो की सड़कों पर आगजनी व हत्या जैसे अपराधों को अंजाम देने में लगे हैं।

दक्षिण अफ्रीका में शॉपिंग सेंटर, फार्मेसियों को लूटा जा रहा है और कोरोना वायरस टीकाकरण अभियान को ठप कर दिया गया है। अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है और कुल 489 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रदर्शनकारियों के इस कृत्य को लेकर दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा, “अब हम जो देख रहे हैं वह अपराध और अवसरवादी कृत्य हैं। लोगों के कई समूह अराजकता को केवल लूटपाट और चोरी के लिए भड़का रहे हैं। हम इन कृत्यों को अंजाम देने वाले लोगों को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाने में जरा सा भी संकोच नहीं करेंगे। साथ ही हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारा कानून इनका मजबूती से सामना करे।”

अफ्रीकन नेशनल कॉन्ग्रेस (एएनसी) ने सोमवार (12 जुलाई 2021) को बयान दिया है कि जैकब जुमा के समर्थकों के इस दंगे में सबसे ज्यादा गरीब लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ा है। पूर्व राष्ट्रपति पर वर्ष 1999 में 2 बिलियन डॉलर (करीब डेढ़ खरब रुपए) के हथियारों के सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। इसके अलावा जुमा पर देश के संसाधनों के मामले में भारतीय मूल के गुप्ता परिवार के तीन भाइयों अतुल, अजय और राजेश गुप्ता की मदद करने का भी आरोप था। हालाँकि, उनके समर्थकों ने इस तरह के आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से शिकार बनाने का आरोप लगाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दंगाइयों से जान-माल की सुरक्षा करने के लिए देश के कई स्थानों पर आवासीय समुदायों ने सशस्त्र समूह बना लिए हैं। कथित तौर पर डरबन शहर के कई हिस्सों में नागरिकों ने अपनी सुरक्षा का जिम्मा खुद ही उठाते हुए हथियारबंद ग्रुप्स का गठन किया है। दरअसल, पुलिस बल औऱ निजी सुरक्षा बल पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहे हैं। ऐसे नागरिकों ने व्यवसायों की सुरक्षा करने के लिए कानून को अपने हाथ में लेना शुरू कर दिया है।

अपनी सुरक्षा के लिए भारतीयों ने खुद उठाया हथियार

रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के गुप्ता बंधुओं के साथ जुड़ाव होने के कारण डरबन और जोहान्सबर्ग में रहने वाले भारतीय समुदायों को टारगेट किया जा रहा है। इसी तरह से एक ट्विटर हैंडल ने भारतीयों के खिलाफ दंगे को भड़काते हुए लिखा, ‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जैकब जुमा ने हमारे देश को इंडियन मोनोपोली कैपिटल (IMC) को बेच दिया है। यूजर्स ने दोषी गुप्ता बंधुओं की एक तस्वीर भी साझा की है।

एक अन्य ट्विटर यूजर एनिमी स्लेयर ने दक्षिण अफ्रीका के कई शहरों में अराजकता के माहौल के बीच अपनी दुकानों को लूटने से बचाने की कोशिश करते हुए भारतीयों की तस्वीरेों के विजुअल्स को शेयर किया है।

इसमें भारतीय समुदाय दंगाइयों, लुटेरों और आगजनी करने वालों को भगाने के लिए हथियारों से लैस दिख रहा है। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका के टैक्सपेयर्स यूनियन के अध्यक्ष विलेम पेटज़र ने ट्वीट किया, “मुझे कहना होगा, आज जो कुछ भी हुआ उसे देखने के बाद मैं डरबन के भारतीय समुदाय को दूसरे नजरिए से देख रहा हूँ। इन लोगों ने हमें दिखाया है कि जब भी उन्हें खतरा होता है तो वे अपने समुदायों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार रहते हैं, चाहे कुछ भी करना पड़े।”

दूसरे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक भारतीय निजी सुरक्षाकर्मी दक्षिण अफ्रीका में दंगाइयों को भगाने की कोशिश कर रहा है।

भारतीय समुदाय के द्वारा आत्मरक्षा के लिए किए गए साहसिक कार्यों को लेकर सोशल मीडिया यूजर डेवी मालन ने ट्वीट किया, “आज रात मैं भारतीय समुदायों को कानून अपने हाथ में लेने के लिए सलाम करता हूँ।”

देश में अराजकता के माहौल पर नेटिजन्स ने राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा को आड़े हथों लिया। नेटिज़न्स ने मौजूदा राष्ट्रपति को आगजनी, लूटपाट और दंगों को रोक पाने से फेल रहने का आरोप लगाया। क्राइम स्टॉपर्स इंटरनेशनल के वीपी यूसुफ अब्रामजी ने ट्वीट किया, “राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा किसका इंतजार कर रहे हैं? क्या वे चाहते हैं कि और मॉल जलें? क्या वे और अधिक लूटपाट चाहते हैं? यह अराजकता रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। देश जल रहा है।”

इस मामले में जोहान्सबर्ग के पूर्व मेयर हरमन माशाबा ने ट्वीट किया, “दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय रक्षा बल को तैनात किया जा रहा है। इस गलत कार्यों को समझने में राष्ट्रपति रामफोसा को इतना अधिक समय क्यों लगा? उन्हें यह देखने में इतना समय क्यों लगा कि हमारे लोग निराशा में हैं? आज सुबह हमने जो देखा है, वह निर्णय लेने में अक्षम नेतृत्व की कीमत है!”

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने देश में हिंसा को नियंत्रित करने के लिए कुछ स्थानों पर सेना को तैनात करने का फैसला किया है। सेना के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

18 साल के लड़के की हत्या, BSP के पूर्व विधायक वहाब चौधरी (अभी भीम आर्मी नेता) को UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद जिले के मुरादनगर के रहने वाले 18 वर्षीय युवक समीर की हत्या करने का मामला प्रकाश में आया है। मामले में बसपा के पूर्व विधायक वहाब चौधरी समेत उनके दो भतीजों अहद और आफताब को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने जानकारी दी है कि बीते शनिवार (10 जुलाई, 2021) की शाम को समीर अचानक से गायब हो गया था। इसके बाद अगले दिन रविवार (11 जुलाई 2021) को प्रीत विहार कालोनी स्थित कब्रिस्तान में उसका शव मिला।

इस मामले में समीर के पिता ने शिकायत की थी। गाजियाबाद के एसपी (ग्रामीण) ईरज राजा ने हरसाँव पुलिस लाइन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि आरोपितों की पहचान अहद, वहाब चौधरी के रूप में हुई है। वहाब चौधरी मुरादनगर से बसपा के पूर्व विधायक रहे चुके हैं और वर्तमान में भीम आर्मी पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण और आफताब से जुड़े हैं। पुलिस ने उनके पास से 32 बोर की एक पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद किया है।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि बसपा के पूर्व विधायक वहाब चौधरी राजनैतिक लाभ लेना चाहते थे। इसके अलावा वह बिरादरी में अपना वर्चस्व कायम करना चाहते थे। इसीलिए चौधरी ने इस हत्याकांड की साजिश रची थी। वहाब चौधरी के बेटे आदिल ने ही अहद को पिस्टल दी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक एसपी ईरज राजा ने बताया है कि पूर्व विधायक वहाब चौधरी के भाई आस मोहम्मद ने मई 2020 में अपनी पत्नी सहाना की हत्या कर दी थी। इस केस में आस मोहम्मद, उसके बेटे अहद, अहद के दोस्त समीर, शाहरुख व आस मोहम्मद की दूसरी पत्नी तबस्सुम उर्फ भूरी को जेल भेजा गया था। अहद के मुताबिक, हत्या के केस में अन्य लोगों को जमानत मिल गई है, लेकिन उसके अब्बा अभी भी जेल में बंद हैं।

अहद ने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि समीर और वो दोनों अच्छे दोस्त थे। वहाब ने ही उसे समीर की हत्या करने के लिए उकसाया था। जाँच में सामने आया है कि सहाना की हत्या के मामले में जेल में बंद आस मोहम्मद भी समीर की हत्या की साजिश में शामिल था।

पुलिस के मुताबिक, आस मोहम्मद पत्नी की हत्या का आऱोप समीर पर डालकर अपने ऊपर लगे कलंक को मिटाना चाहता था। जबकि समीर की हत्या के बाद अहद भी जेल चला जाता। तो दूसरा एंगल यह भी है कि ऐसे में वहाब चौधरी उसकी संपत्ति को हड़पना चाहता था।

पुलिस की पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपित अहद ने बताया कि उसने ही समीर को शनिवार (10 जुलाई 2021) की शाम को बाहर खाने के बहाने बुलाया था। इसके बाद उसी रात 10 बजे उसने अपने साथियों के साथ प्रीत विहार के कब्रिस्तान के पास एक खेत में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।

डेढ़ महीने पहले ही जेल से छूटा था समीर

समीर पूर्व विधायक वहाब चौधरी के भाई आस मोहम्मद की पत्नी सहाना की हत्या में शामिल था। लेकिन, नाबालिग होने के कारण वह जेल से बाहर आ गया था। हालाँकि, बाहर आते ही पुलिस ने उसे गैंगस्टर एक्ट में फिर से अंदर कर दिया था। वह डेढ़ महीने पहले ही जेल से बाहर आया था।

इसके बाद पूर्व विधायक वहाब चौधरी ने अहद को घर पर बुलाया और कहा कि उसके अब्बू अभी भी जेल में बंद हैं, जबकि वो (समीर) और उसकी सौतेली अम्मी आजाद घूम रहे हैं। इससे उनकी (वहाब चौधरी) की इमेज को नुकसान पहुँच रहा है। इसी कारण समीर की हत्या करने के लिए पूर्व विधायक ने अहद को उकसाया।

‘हिल स्टेशंस और बाजारों में बिना मास्क पहने भारी भीड़ का उमड़ना ठीक नहीं’: PM मोदी ने लोगों को चेताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से कोरोना वायरस संक्रमण, इसके दुष्प्रभाव और इससे बचने की सावधानियों को अपनाने को लेकर लोगों को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि ये सही है कि कोरोना की वजह से पर्यटन, व्यापार-कारोबार बहुत प्रभावित हुआ है। लेकिन, साथ ही उन्होंने चेताया, “आज मैं बहुत जोर देकर कहूँगा कि हिल स्टेशंस में, मार्केट्स में बिना मास्क पहने, भारी भीड़ का उमड़ना ठीक नहीं।

बता दें कि देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों से पिछले कुछ दिनों में ऐसी कई तस्वीरें सामने आई हैं, जहाँ लोगों को भारी भीड़ जुटाते हुए देखा गया। इस दौरान मास्क लगाने जैसी मेडिकल सलाहों को भी लोगों ने नज़रअंदाज़ किया। खासकर मनाली, नैनीताल और मसूरी जैसे हिल स्टेशंस से इस तरह की तस्वीरें सामने आई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर-पूर्वी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बैठक के दौरान इस बारे में लोगों को जगह किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें टेस्टिंग और ट्रीटमेंट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार करते हुए आगे चलना है। उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में इसके लिए कैबिनेट ने 23,000 करोड़ रुपए का एक नया पैकेज भी स्वीकृत किया है, जिससे नॉर्थ-ईस्ट के हर राज्य को अपने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमें कोरोना वायरस के हर वेरिएंट पर भी नज़र रखनी होगी।उन्होंने कहा कि म्यूटेशन के बाद ये कितना परेशान करने वाला होगा, इस बारे में विशेषज्ञ लगातार स्टडी कर रहे हैं। ऐसे में प्रिवेंशन और ट्रीटमेंट बहुत जरूरी है।

ख़बरों में कहा जा रहा है कि जहाँ मनाली जैसे शहरों में पर्यटकों के बड़ी संख्या में आने के कारण वहाँ का व्यापार तो चल पड़ा है लेकिन अधिकतर लोग कोरोना दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। कुल्लू प्रशासन का कहना है कि पर्यटन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगाई जा रही है। पर्यटकों को लगातार जगह किया जा रहा है। मॉनसून में देरी के कारण पर्यटक बड़ी संख्या में निकले हैं।

‘मजा आया, आप बहुत मेधावी हैं’: रेहान वाड्रा के फोटो एग्जीबिशन में पहुँचीं स्वरा भास्कर, कहा – आप सब भी जाओ

प्रियंका गाँधी और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान राजीव वाड्रा फोटोग्राफी का शौक रखते हैं और उन्होंने अपनी खींचीं कुछ तस्वीरों की एक एग्जीबिशन लगाई है। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर भी उस एग्जीबिशन में पहुँचीं और उन्होंने रेहान वाड्रा के साथ एक तस्वीर भी शेयर की। एक अन्य तस्वीर में उन्होंने एग्जीबिशन का बोर्ड शेयर किया। इस दौरान उन्होंने सोनिया गाँधी के नाती की जम कर तारीफ़ भी की।

स्वरा भास्कर ने तस्वीरें शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “रेहान वाड्रा के फोटोग्राफी एग्जीबिशन में मजा आया। उन्होंने काफी शानदार और नाटकीय किस्म की तस्वीरें क्लिक की हैं। इन्हें काफी नफासत के साथ सजाया गया है। ‘इमर्सिव व्यूइंग (3D और वर्चुअल रियलिटी में में तस्वीरें देखना)’ का अनुभव मुझे खासा पसंद आया। साथ ही जिस ‘बीकानेर हाउस’ में ये आयोजित हो रहा है, वो भी कितना भव्य है!”

स्वरा भास्कर ने रेहान वाड्रा को ‘बहुत-बहुत बधाइयाँ’ देते हुए कहा कि वो काफी मेधावी हैं। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से भी अपील की कि वो रेहान वाड्रा के इस फोटोग्राफी एग्जीबिशन को देखने के लिए समय निकालें और ज़रूर जाएँ। बता दें कि 8 एकड़ में विकसित किया गया ‘बीकानेर हाउस’ कला-संस्कृति प्रदर्शनी के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इसे अंग्रेजों ने बनवाया था। ये नई दिल्ली के इंडिया गेट से कुछ ही दूरी पर स्थित है।

रेहान वाड्रा ने भी अपने एग्जीबिशन में आने के लिए स्वरा भास्कर को धन्यवाद दिया और कहा कि वो उनके आभारी हैं कि उन्हें उनकी तस्वीरें पसंद आईं। रेहान के मात्रा-पिता ने भी ट्वीट कर के उन पर गर्व जताया। प्रियंका गाँधी भी सोमवार (12 जुलाई, 2021) को उनका एग्जीबिशन देखने पहुँचीं। 20 वर्षीय रेहान वाड्रा ने ‘डार्क परसेप्शन’ नाम से अपनी तस्वीरों की एक पुस्तक भी प्रकाशित की है। प्रियंका गाँधी ने कहा कि रेहान ने अपना रास्ता खुद चुना है, इसीलिए उन्हें उस पर गर्व है।

रेहान राजीव वाड्रा का कहना है कि उनकी माँ प्रियंका गांधी वाड्रा, पिता रॉबर्ट वाड्रा और मामा राहुल गाँधी ने हमेशा फोटोग्राफी के लिए उन्हें प्रोत्साहन दिया है। रेहान ने बताया कि उनके मामा राहुल गाँधी ने इस एक्जीबिशन को लगाने में उनका पूरा साथ दिया और इसमें उनकी सबसे अधिक सहायता भी की है। उन्होंने जानकारी दी कि उनकी बहन मिराया वाड्रा ने भी फोटोग्राफी के पैशन में उनका साथ दिया है।

शाहिद पिच्चा और मोहम्मद अनस भागते-भागते गोली चला रहा था… UP पुलिस ने टाँग में मारी गोली

उत्तर प्रदेश के कानपुर का हिस्ट्रीशीटर अपराधी शाहिद पिच्चा और उसके साथी अन्नू पिस्टल उर्फ मोहम्मद अनस की सोमवार (12 जुलाई 2021) की देर रात पुलिस से मुठभेड़ हो गई। इस दौरान दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। दोनों ही अपराधियों पैर में गोली लगी। इस बीच मौका पाकर तीसरा आरोपित भागने में कामयाब रहा। बताया जाता है कि शाहिद पिच्चा पुलिस की टॉप 10 अपराधियों की हिट लिस्ट में शामिल था।

दोनों को हिरासत में लेकर पुलिस ने इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है। फिलहाल दोनों के हालत में सुधार है। उनके पास से दो अवैध असलहे, 30 एमएम की पिस्टल और कारतूस के साथ क्रेटा कार बरामद हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि शाहिद पिच्चा अपने साथियों के साथ चकेरी की ओर जा रहा है। इसी के आधार पर रेल बाजार थाना क्षेत्र में आने वाले सीओडी पुल के पास पुलिस ने चेकिंग लगाई थी।

चेकिंग के समय एक कार को पुलिस ने रोका तो वो भागने लगा। पुलिस की टीम ने कार का पीछा किया तो आरोपितों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने भी पलटवार किया। एनकाउंटर के दौरान दो बदमाशों के पैर में गोली लग गई, जबकि अन्य फरार हो गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, शाहिद और अनस के खिलाफ शहर के विभिन्न थानों में कई केस दर्ज हैं। पुलिस लंबे समय से इनकी तलाश कर रही थी। चमनगंज के तलाक महल इलाके में बीते दिनों शाहिद और उसके साथियों की सबलू गैंग के साथ गैंगवार हुआ था। दोनों गैंग के बीच हुई वर्चस्व की इस लड़ाई में शाहिद ने सुब्हान रायनी को गोली मार दी थी। गोली उसके हाथ में लगी थी। इस मामले में शाहिद समेत आठ आरोपितों के खिलाफ बेकनगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। फिलहाल, पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

हिन्दू नाबालिग लड़की का ₹20,000 में सौदा, करवाते देह-व्यापार: जमील, तस्लीम सहित 4 को उम्रकैद

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में एक नाबालिग बच्ची को बेचने के मामले में माँ और बुआ सहित 4 दोषियों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई है। इन लोगों ने मिल कर 20,000 रुपए में नाबालिग बच्ची का सौदा किया था, जिसके बाद उसे ले जाकर देह-व्यापार में धकेलने की साजिश रची जा रही थी। इस मामले में एक और दोषी था, जिसकी पहले ही मौत हो चुकी है। ये घटना 2015 में पिथौरागढ़ के तिलढुकरी में सामने आई थी।

उत्तराखंड पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम और कुछ जागरूक लोगों ने नाबालिग का सौदा कर रहे इन लोगों को पकड़ा था। नाबालिग की माँ विमला कार्की डीडीटाह की रहने वाली है, वहीं आरोपितों में शामिल मुँहबोली बुआ का नाम गंगा है। उत्तर प्रदेश के रहने वाले अकरम खान, जमील अहमद और तस्लीम को भी धर-दबोचा गया था। अकरम खान शादी के बहाने नाबालिग को उत्तर प्रदेश ले जाकर उसे वेश्यावृत्ति में धकेलने की तैयारी में लगा हुआ था।

जब पुलिस ने इन्हें पकड़ा, तब नाबालिग इनके साथ ही थी। न्यायालय में तभी से चल रहे इस मामले में सोमवार (13 जुलाई, 2021) को फैसला आया। पीड़िता की तरफ से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत व अधिवक्ता प्रेम सिंह भंडारी ने पुलिस का पक्ष रखा। विशेष सत्र न्यायाधीश डॉक्टर ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने चारों दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। अकरम खान पहले ही मर चुका है।

‘दैनिक जागरण’ का पिथौरागढ़ संस्करण में पहले पन्ने पर प्रकाशित खबर (साभार)

साथ ही दोषियों में से प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। घुपौड़ क्षेत्र में हुई इस घटना के दो दोषी अकरम और जमील उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित बहेड़ी के रहने वाले थे। नाबालिग की मुँहबोली बुआ नेपाल के दार्चुला में रहती थी। पुलिस ने पाँचों के खिलाफ IPC और अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। जमील अहमद और तसलीम खान पर अलग से सात-साल के कारावास और 15-15 हजार रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।

बुआ गंगा देवी इस मामले में दलाल की भूमिका में थी, जिसे नाबालिग का सौदा तय कराने के लिए अलग से 5000 रुपए मिलने थे। नाबालिग का जबरन कोर्ट मैरिज के लिए न्यायालय तक ले जाया गया था, लेकिन जन्म-प्रमाण पत्र न होने के कारण ये शादी नहीं हो पाई। इसके बाद पुलिस ने पाँचों को गिरफ्तार कर लिया था। पीड़िता हिन्दू समुदाय से आती है, जबकि उसकी शादी जबरन मुस्लिम परिवार में कराई जा रही थी।

हालाँकि, ये सजाएँ साथ-साथ ही चलेंगी। अदालत ने राज्य सरकार और बाल कल्याण विभाग को पीड़िता के भरण-पोषण की व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया है। चूँकि उसकी माँ ही इस मामले की आरोपित है, इसीलिए अदालत को पीड़िता के भविष्य को लेकर चिंता थी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अगली बैठक में इस मामले को रखा जाएगा, ताकि नाबालिग के पुनर्वास व शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था की जा सके।

’24 घंटे में डिलीट करो सारे ट्वीट’ – साकेत गोखले को दिल्‍ली HC का आदेश, लक्ष्मी पुरी मामले में चलेगा मानहानि का मुकदमा

दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉन्ग्रेस समर्थक और स्वघोषित पत्रकार साकेत गोखले को सिर्फ 24 घंटे की मोहलत दी है। इन 24 घंटों में साकेत गोखले को वो सभी ट्वीट डिलीट करने हैं, जो उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पुरी के खिलाफ किए थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि साकेत गोखले न सिर्फ इस मामले से संबंधित सारे ट्वीट डिलीट करें बल्कि वो लक्ष्मी पुरी के खिलाफ कोई नया ट्वीट भी नही करेंगे। इसके अलावा कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर ये ट्वीट डिलीट नहीं किए जाते हैं तो ट्वीटर इन्हें हटाए। इसके बाद कोर्ट ने मानहानि का मुकदमा चलाने की भी मंजूरी दी।

साकेत गोखले ने लक्ष्मी पुरी की संपत्ति को लेकर ट्वीट किया था। इसी मामले में साकेत गोखले के खिलाफ अवमानना का मामला चल रहा है। आपको बता दें कि लक्ष्मी पुरी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी हैं और पूर्व भारतीय विदेश सेवा अधिकारी भी।

क्या है मामला

साकेत गोखले ने जून 2021 में ट्वीट करके लक्ष्मी पुरी के द्वारा स्विट्जरलैंड में संपत्ति खरीदने का हवाला दिया था। ट्वीट में उन्होंने लक्ष्मी पुरी के साथ-साथ उनके पति एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का भी संदर्भ दिया था। इसके बाद लक्ष्मी पुरी ने मानहानि की याचिका दाखिल की थी, जिसमें गोखले के ट्वीट को डिलीट करने और 5 करोड़ रुपए मुआवजे की माँग की गई थी।

कोर्ट ने क्या कहा अब तक

8 जुलाई 2021 को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने साकेत गोखले के ट्वीट पर आपत्ति जताई हुए कहा था कि वह लोगों को बदनाम कैसे कर सकते हैं, खासकर जब उनके द्वारा किए गए ट्वीट प्रथम दृष्टया गलत थे?

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने सुनवाई के दौरान साकेत गोखले से पूछा था कि ट्वीट करने से पहले क्या उन्होंने वादी से संपर्क किया था या स्पष्टीकरण माँगा था?

जिनके कारण वर्ल्ड कप में पहली बार भारत ने वेस्टइंडीज को दी थी मात, क्रिकेटर यशपाल शर्मा का हार्ट अटैक से निधन

पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा का का मंगलवार (13 जुलाई, 2021) को हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया। वो 66 वर्ष के थे। वो 1983 वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य थे। पिछले कुछ वर्षों से वो बतौर क्रिकेट एक्सपर्ट टीवी पर दिखते थे। 70 और 80 के दशक में उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाया। 11 अगस्त, 1954 को पंजाब के लुधियाना में जन्मे यशपाल शर्मा मिडल ऑर्डर में खेलते थे।

1983 के वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में वो भारत की तरफ से दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले क्रिकेटर थे। मैनचेस्टर में 9 जून, 1983 को वेस्टइंडीज के साथ हुए मैच में उन्होंने 120 गेंदों पर 89 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, जिसके कारण भारत ने पहली बार वेस्टइंडीज को वर्ल्ड कप में मात दी। अपनी इस पारी के दौरान वो 133 मिनट तक मैदान में डटे रहे थे और 9 चुके जड़े थे। उन्हें इस पारी के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का ख़िताब मिला था।

पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा ने अपनी करियर में भारत की तरफ से 37 टेस्ट और 42 वनडे मैच खेले। उन्होंने टेस्ट में 1606 रन और वनडे में 883 रन बनाए। यशपाल शर्मा ने टेस्ट मैचों में 2 शतक भी लगाए थे। उनका नाम पहली बार 1972 में सामने आया था, जब उन्होंने पंजाब स्कूल्स की तरफ से खेलते हुए जम्मू कश्मीर स्कूल्स के खिलाफ 260 रनों की बड़ी पारी खेली थी। फिर उन्होंने दिलीप ट्रॉफी में नॉर्थ जोन की तरफ से 173 रनों की पारी खेली।

सिर्फ वेस्टइंडीज ही नहीं, 1983 वर्ल्ड कप सेमी फाइनल में इंग्लैंड पर भारत को जो जीत मिली, उसमें भी उन्होंने अच्छी पारी खेली थी। 61 रनों की पारी खेल कर उन्होंने उस मैच में सबसे ज्यादा रन बनाए थे। इससे भारत को या मैच 6 विकेट से जीतने में आसानी हुई। हालाँकि, वर्ल्ड कप के बाद उनका फॉर्म गिरा और पाकिस्तान व वेस्टइंडीज के खिलाफ खराब प्रदर्शन के कारण वो टेस्ट स्क्वाड से भार हो गए।