Home Blog Page 3610

5 पुलिस वालों की हत्या और 13 आतंकी हमले: J&K का वो ‘गद्दार’ पुलिस कॉन्स्टेबल, जो ड्यूटी पर लेता था Pak से आदेश

जम्मू-कश्मीर में देशविरोधी गतिविधियों को लेकर कार्रवाई करते हुए 11 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। इसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस के दो कॉन्स्टेबल भी शामिल हैं, जिन पर आरोप है कि पुलिस विभाग के भीतर से आतंकवाद का समर्थन किया और आतंकवादियों को अंदरूनी जानकारी और मदद भी प्रदान की है। बताया जा रहा है कि एक कॉन्स्टेबल अब्दुल राशिद शिगन ने तो खुद सुरक्षा बलों पर हमले किए थे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस कॉन्स्टेबल अब्दुल रशीद शिगन ने वर्ष 2011 से लेकर अगस्त 2012 में श्रीनगर में 13 बड़े हमलों को अंजाम दिया। इसने पुलिस के एक रिटायर्ड डीएसपी समेत पाँच पुलिसकर्मियों की हत्या करने के अलावा तत्कालीन कानून मंत्री अली मोहम्मद सागर पर भी हमला किया था।

वह सिर्फ उन्हीं पुलिसकर्मियों व अधिकारियों को निशाना बनाता था, जो आतंकरोधी अभियान में आगे होते थे। इसके अलावा वह इस्लाम की कट्टरपंथी विचारधारा के साथ सहमत न होने वाले इस्लामिक विद्वानों और मुख्यधारा की राजनीति से जुड़े लोगों को निशाना बनाता था।

शिगन कोड नाम उमर मुख्तार के नाम से हिंसा करता था और मीडिया में बताता था कि इसे कश्मीर इस्लामिक मूवमेंट ने अंजाम दिया है। वह हिजबुल मुजाहिदीन के इशारे पर वारदातें करता था। इसको ऑपरेशन विशेष के लिए आतंकी संगठन में मुखबिर बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। शिगन बच जाता, अगर वह इनके पकड़े जाने पर कुछ समय तक शांत रहता। लेकिन अंततः पुलिस को उसकी खबर हो गई और वह पकड़ा गया। वह पीएसए के तहत बंदी भी रहा, लेकिन अदालत के हस्तक्षेप पर वह दोबारा पुलिस का हिस्सा बन गया।

जब उसे पाकिस्तान से वारदात का आदेश मिलता, वह ड्यूटी से गायब हो जाता और फिर लौट आता। किसी को पता नहीं चलता था कि वह कब गया और कब आया। शिगन ने 24 दिसंबर 2011 को नेशनल कॉन्ग्रेस नेता बशीर अहमद की, 17 मार्च 2012 को सूफी विद्वान पीर जलालुदीन की, 20 अप्रैल 2012 को पुलिस कॉन्स्टेबल सुखपाल सिंह की हत्या की थी। इसके अलावा उसने 30 मई 2012 को सीआरपीएफ जवानों पर हमला किया और 22 अगस्त 2012 को उसने बटमालू में एक मस्जिद की सीढ़ियों पर पुलिस के एक सेवानिवृत्त डीएसपी अब्दुल हमीद बट की हत्या कर दी थी।

गौरतलब है कि हिजबुल मुजाहिद्दीन के संस्थापक सैयद सलाहुद्दीन के बेटों को भी नौकरी से बर्खास्त किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सलाहुद्दीन के बेटे सैयद अहमद शकील और शाहिद यूसुफ को आतंकी गतिविधियों के फंड मुहैया कराने का दोषी पाया गया है। 

फरहान की ‘तूफ़ान’ में लव जिहाद: अज़ीज़ अली और डॉक्टर पूजा शाह के किसिंग सीन पर बहिष्कार की अपील

फरहान अख्तर की फिल्म ‘तूफ़ान (Toofan)’ ऑनलाइन रिलीज के लिए तैयार है, लेकिन इससे पहले इसे लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि इस फिल्म के माध्यम से ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा दिया जा रहा है। ये फिल्म वीडियो पोर्टल ‘अमेज़न प्राइम’ पर 16 जुलाई, 2021 को रिलीज होने वाली है। हालाँकि, इसका ट्रेलर यूट्यूब पर आ चुका है, जिससे फिल्म की कहानी साफ़ हो गई है।

इस फिल्म के विरोध का आलम ये है कि ट्विटर पर कई घंटों तक शीर्ष ट्रेंड्स में ‘Boycott Toofan (तूफ़ान फिल्म का बहिष्कार)’ शामिल रहा। ‘तूफ़ान’ की समीक्षा के कारण ‘सब लोकतंत्र’ नामक यूट्यूब चैनल को भी YouTube ने प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे लोग आक्रोशित हैं। ‘तूफ़ान’ का विरोध करते समय लोगों ने ये भी याद किया कि किस तरह सुशांत सिंह राजपूत को बॉलीवुड में किनारे किया गया था।

एक व्यक्ति ने लिखा कि फरहान अख्तर वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने रिया चक्रवर्ती के लिए ‘न्याय’ माँगते हुए कई बार बयान दिए थे। साथ ही उन पर अर्णब गोस्वामी को भी निशाना बनाने का आरोप लगा। लोगों ने उन्हें ‘राष्ट्र विरोधी’ भी करार दिया। साथ ही लोगों ने यूट्यूब पर ‘तूफ़ान’ के ट्रेलर को डिस्लाइक भी किया। अब तक इस ट्रेलर को 48,000 से भी अधिक लोग डिस्लाइक कर चुके हैं। फरहान अख्तर ने कहा था कि अगर मिल्खा सिंह उनकी इस फिल्म को देखते तो गर्व की अनुभूति करते।

एक ट्विटर यूजर ने ‘तूफ़ान’ फिल्म में फरहान अख्तर और अभिनेत्री मृणाल ठाकुर का एक किसिंग सीन भी शेयर किया। तस्वीर शेयर करते हुए उसने फिल्म के किरदारों के नाम बताते हुए लिखा कि अज़ीज़ अली डॉक्टर पूजा शाह को किस कर रहा है। साथ ही पूछा कि ये ‘लव जिहाद’ नहीं तो क्या है? ट्विटर यूजर्स ने इस फिल्म को अपनी संस्कृति और धर्म के खिलाफ बताते हुए इसके बहिष्कार की बात की।

लोगों ने याद दिलाया कि इन्हीं फरहान अख्तर ने जम्मू कश्मीर का छेड़छाड़ किया हुआ नक्शा शेयर किया था, जिसे अक्सर कश्मीरी अलगाववादी और भारत विरोधी तत्व आगे बढ़ाते हैं। साथ ही पूछा कि हम भारतीय उनकी इस हरकत के बाद इस फिल्म को क्यों रिलीज होने दें? एक अन्य यूजर ने लिखा कि हिन्दू बहुल देश में इस तरह से हिन्दू धर्म और देवी-देवताओं का मजाक बनाया जा रहा है।

क्यों हो रही फरहान अख्तर की ‘तूफ़ान’ के बॉयकॉट की अपील: ‘लव जिहाद’ के आरोप

फरहान अख्तर कहानीकार से गीतकार और गीतकार से ट्विटर ट्रोल बने जावेद अख्तर के बेटे हैं। दोनों भाजपा और नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए जाने जाते हैं। फरहान अख्तर को CAA विरोधी प्रदर्शनों में भी देखा गया था, जबकि उन्हें इस कानून का एबीसी तक पता नहीं था। उनका कहना था कि इतने लोग प्रदर्शन कर रहे हैं तो वो भी कर रहे हैं। फिल्म में अभिनेता का नाम होता है ‘अज़ीज़ अली’ और उसके साथ जो अभिनेत्री होती है, उसका नाम होता है ‘पूजा शाह’।

इसके अलावा उन्होंने ट्विटर के माध्यम से एक झूठ फैलाया था कि CAA और NRC लागू होने के बाद आदिवासियों, दलितों और महिलाओं को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। ‘तूफ़ान’ फिल्म का ट्रेलर देखते ही पता चलता है कि उन्होंने इसमें एक मुक्केबाज का किरदार अदा किया है। इसमें उनका नाम ‘अज़ीज़ अली उर्फ़ अज्जू भाई’ होता है, जिसका लाइसेंस सस्पेंड हो गया रहता है लेकिन वो अभिनेत्री के हौसला बढ़ाने पर कई सालों बाद फिर से बॉक्सिंग की तरफ लौटा।

अहमदाबाद से सांसद रहे वरिष्ठ अभिनेता परेश रावल ने इस फिल्म में उनके कोच का रोल अदा किया है, जिनका नाम नाना प्रभु होता है। इसके एक दृश्य में कोच अज़ीज़ अली को कहता है, “अभी तू जिसे मानता है, उसे मत्था टेक के आ।” इसके बाद अज़ीज़ अली अभिनेत्री पूजा शाह को आदाब करता नज़र आता है। अभिनेत्री, जो कि हिन्दू हैं, वो भी उसे बदले में आदाब करती है। ये किरदार मृणाल ठाकुर ने निभाया है।

इसके अगले दृश्य में फरहान अख्तर को बॉक्सिंग रिंग में पड़े हुए दिखाया गया है और खबर में कोई महिला एंकर कह रही होती हैं, “तूफ़ान ने अपने प्रशंसकों का दिल तोड़ दिया। जिस मंदिर की आप पूजा करते हैं, आपने उसके साथ विश्वासघात किया।” गौर कीजिए, ‘मंदिर’। इस फिल्म को ‘अमेज़न प्राइम’ पर रिलीज किया जा रहा है। वही ‘अमेज़न प्राइम’, जहाँ हाल ही में हिन्दू विरोधी भावना को ‘तांडव’ वेब सीरीज के जरिए आगे बढ़ाया गया था

‘हिंदुत्व विरोधी है मेरी पार्टी कॉन्ग्रेस, मुझे पूजा-पाठ से रोकती है’: ब्लॉक चुनावों में हार पर बोले रायबरेली के विधायक, CM योगी के हुए मुरीद

उत्तर प्रदेश के जिस रायबरेली से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी लगातार 5 बार से सांसद हैं, ब्लॉक चुनावों में कॉन्ग्रेस को वहाँ भी निराशा हाथ लगी। राज्य भर में 852 में से ब्लॉक प्रमुख के 600 से भी अधिक सीटें जीतने वाली भाजपा ने रायबरेली में भी 18 में से 11 सीटें अपने नाम की, जबकि कॉन्ग्रेस का खाता तक न खुला। इस हार पर रायबरेली के हरचंदपुर से विधायक राकेश सिंह ने कहा कि पंचवटी परिवार के कॉन्ग्रेस से दूर होने के कारण ये सब हो रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले यहाँ जीत होती थी तो कॉन्ग्रेस को लगता था कि ये सब उसके कारण हो रहा है, लेकिन उसकी ये ग़लतफ़हमी दूर हो गई होगी क्योंकि पंचवटी परिवार के बिना कॉन्ग्रेस यहाँ नहीं जीत सकती। बता दें कि पंचवटी परिवार में दिनेश प्रताप सिंह, उनके भाई राकेश प्रताप सिंह और अन्य नेता शामिल हैं। राकेश और अदिति कॉन्ग्रेस के बागी विधायक हैं। दिनेश ने सोनिया गाँधी के खिलाफ 2019 लोकसभा का चुनाव लड़ा था।

राज्य में गाँधी परिवार के खासमखास रहे अखिलेश सिंह भी अपने निधन से पहले एक दशक से भी अधिक समय तक बागी हो गए थे और आज उनकी बेटी अदिति सिंह कॉन्ग्रेस की बागी विधायक है। राकेश सिंह ने कहा कि रायबरेली में पंचवटी परिवार की बदौलत कॉन्ग्रेस है, ये परिवार कॉन्ग्रेस की बदौलत नहीं है। उन्होंने कहा कि वो कॉन्ग्रेस में हैं, लेकिन उसकी नीतियों के खिलाफ हैं, उसके प्रभारी किशोरी लाल शर्मा के खिलाफ हैं।

राकेश सिंह ने कहा कि कॉन्ग्रेस सिर्फ मुस्लिम परस्त राजनीति करती है, जो उन्हें पसंद नहीं है। उन्होंने भाजपा की तारीफ़ करते हुए कहा कि इसमें अच्छे-अच्छे नेता हैं। उदाहरण देते हुए राकेश सिंह ने कहा कि कॉन्ग्रेस विधायक होने के बावजूद वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से क्षेत्र के लिए जो भी काम कराने को कहते हैं, वो पूरा कर देते हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस विधायक होने के बावजूद कोई अच्छा काम करने पर उनकी ही पार्टी उनसे नाराज़ हो जाती है।

कॉन्ग्रेस के विधायक राकेश सिंह ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आइना

उन्होंने बताया, “जब भी मैं कोई पूजा-पाठ कराता हूँ या अखंड रामायण का पाठ कराता हूँ तो कॉन्ग्रेस मुझे ये सब करने से रोकती है। कॉन्ग्रेस की ये नीति ही रही है कि कोई अच्छा काम न हो। ये पार्टी शत प्रतिशत हिंदुत्व की विरोधी है। मई पार्टी छोड़ नहीं रहा, बस कॉन्ग्रेस को आगाह करना चाह रहा हूँ कि अगर वो 85% को छोड़ कर केवल 15% को लेकर चलती रही तो कई नेता कॉन्ग्रेस छोड़ेंगे।”

उन्होंने कहा कि अगर उन्हें 2022 में कॉन्ग्रेस टिकट नहीं देती है तो वो निर्दलीय भी जीत सकते हैं। भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये सब भविष्य के गर्भ में है। बता दें कि राकेश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर यज्ञ का आयोजन भी करवाया था। साथ ही उनके परिवार ने राम मंदिर के लिए 11 किलो चाँदी की शिलाएँ भी दान में दी थी। राकेश सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में कोई पार्टी के जिलाध्यक्षों का नाम तक नहीं जानता है।

इस चुनाव में अमावा से दिवंगत विधायक अखिलेश कुमार सिंह की पत्नी ब्लॉक प्रमुख के रूप में चुनी गईं। जबकि हरचंदपुर से दिनेश प्रताप सिंह के बेटे पीयूष प्रताप ब्लॉक प्रमुख बने। ये क्षेत्र राकेश सिंह का ही है। शिवगढ़ ब्लॉक में भाजपा के प्रत्याशी पूर्व एमएलसी राकेश प्रताप सिंह के बेटे हनुमंत सिंह की जीत हुई। रायबरेली में दो सीटें समाजवादी पार्टी और 5 सीटें निर्दलीय के खाते में गई, लेकिन कॉन्ग्रेस शून्य पर अटकी रही।

उत्तर प्रदेश के ब्लॉक प्रमुख के पदों पर भाजपा की भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता का वीडियो ट्वीट किया था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी है। PM मोदी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव में भी यूपी भाजपा ने अपना परचम लहराया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों और जनहित की योजनाओं से जनता को जो लाभ मिला है, वो पार्टी की भारी जीत में परिलक्षित हुआ है। इस विजय के लिए पार्टी के सभी कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं।

हिंदुत्व की शुरुआत 5000 साल पहले, अधिकांश धर्मों के अनुयायी हिंदुओं के वंशज: असम के CM हिमंत बिस्व सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार (जुलाई 10, 2021) को कहा कि हिंदुत्व जीवन का एक तरीका है। उन्होंने दावा किया कि अधिकतर धर्मों के अनुयायी हिंदुओं के वंशज हैं। CM सरमा ने राज्य में उनकी सरकार के दूसरे महीने के पूरा होने के मौके पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हिंदुत्व की शुरुआत 5,000 साल पहले हुई थी और इसे रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, हिंदुत्व जीवन का एक तरीका है। मैं या कोई इसे कैसे रोक सकता है? लगभग हम सभी हिंदुओं के वंशज हैं।

सीएम के मुताबिक, ‘‘हिंदुत्व को ‘हटाया’ नहीं जा सकता, क्योंकि इसका मतलब होगा अपनी जड़ों और मातृभूमि से दूर जाना।’’ आगे ‘लव जिहाद’ के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री बोले, “मुझे इस शब्द को लेकर आपत्ति है।” हालाँकि, उन्होंने कहा कि किसी को भी महिला को धोखा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार किसी भी महिला को किसी के द्वारा धोखा दिए जाने को बर्दाश्त नहीं करेगी। हमारी बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अपराधियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।’’

पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा तनाव पर सरमा ने कहा, “असम-नागालैंड और असम-मिजोरम दोनों सीमाओं पर कुछ तनाव चल रहा है। हमारी संवैधानिक सीमा की रक्षा के लिए असम पुलिस को तैनात किया गया है। पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार होने के नाते, हम हमेशा चर्चा के लिए तैयार रहते हैं लेकिन अपनी जमीन पर अतिक्रमण मंजूर नहीं है।”

इससे पहले शनिवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य मंत्रिमंडल में विभागों में फेरबदल किया। सरमा ने कहा कि राज्य में स्वदेशी आस्था और संस्कृति का एक नया स्वतंत्र विभाग होगा। वहीं मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि सरकार ‘दो बच्चों की नीति’ को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ लेने में इसे लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “हम सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए धीरे-धीरे दो बच्चों की नीति अपनाएँगे। आप इसे एक घोषणा मान सकते हैं। ऋण माफी हो या अन्य सरकारी योजनाएँ, जनसंख्या मानदंडों को ध्यान में रखा जाएगा। यह चाय बागान श्रमिकों/एससी-एसटी समुदाय पर लागू नहीं होगी। भविष्य में, जनसंख्या मानदंडों को सरकारी लाभों के लिए पात्रता के रूप में शामिल किया जाएगा। जनसंख्या नीति शुरू हो गई है। स्कूलों और कालेजों में मुफ्त नामांकन या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान देने में इसे लागू नहीं किया जा सकता।”

मुख्यमंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण कानून को समय की आवश्यकता बताते हुए आठ अलग-अलग समितियों का गठन किया है। यह समितियाँ स्वास्थ्य, शिक्षा, जनसंख्या नियंत्रण, सांस्कृतिक पहचान, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास के मुद्दों से जुड़ी हुई हैं।

श्री शांतादुर्गा मंदिर: पठानों ने चुराई मूर्ति, पुर्तगालियों ने तोड़ा… माँ दुर्गा के शांत स्वरूप को छत्रपति शिवाजी के पोते का फिर मिला साथ

आज हम जिसे गोवा के नाम से जानते हैं, उसका त्रेतायुगीन इतिहास हमारी वर्तमान परिभाषाओं से कहीं अधिक समृद्ध और सुसांस्कृतिक रहा है। पौराणिक समय से ही गोवा सनातन के प्रमुख स्थानों में से एक था। हालाँकि समय के साथ गोमंतक या गोपपुरी को गोवा कहा जाने लगा लेकिन आज भी यहाँ कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो गोवा के सनातन इतिहास की गाथा कहते हैं। गोवा के इन्हीं मंदिरों में से एक है श्री शांतादुर्गा मंदिर, जो गोवा की राजधानी पणजी से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्री शांतादुर्गा, माता पार्वती का ही रूप हैं, जिन्होंने महादेव और भगवान विष्णु के बीच छिड़े भयानक युद्ध को शांत करने के लिए अवतार लिया था।

मंदिर का इतिहास

वैसे तो भगवान विष्णु और भोलेनाथ एक दूसरे को ही अपना ईश्वर मानते हैं लेकिन आदिकाल में एक बार दोनों के बीच भयानक युद्ध प्रारंभ हो गया। ब्रह्मांड के पालक और संहारक के बीच शुरू हुए इस भीषण युद्ध से सम्पूर्ण संसार पर अनचाहा संकट आ पड़ा। इस युद्ध को लगातार बढ़ता हुआ देख ब्रह्मा जी ने आदिमाया दुर्गा अथवा माता पार्वती से प्रार्थना की।

ब्रह्मा जी की प्रार्थना सुनकर सम्पूर्ण पृथ्वी को इस युद्ध के दुष्परिणाम से बचाने के लिए माता पार्वती ने शांतादुर्गा का अवतार लिया। श्री शांतादुर्गा ने महादेव को अपने एक हाथ में पकड़ लिया और भगवान विष्णु को दूसरे हाथ में। इस तरह युद्ध रुक गया और ब्रह्मांड की रक्षा हो सकी। माता पार्वती के इसी शांत स्वरूप को समर्पित है श्री शांतादुर्गा मंदिर।

यह मंदिर गोवा की राजधानी पणजी से 30 किलोमीटर दूर पोंडा तहसील के कवलम नामक गाँव में स्थित है। श्री शांतादुर्गा देवी का मूल स्थान पहले केलोशी गाँव था लेकिन जब गोवा में पुर्तगालियों के शासनकाल में मूल मंदिर को 1566 में नष्ट कर दिया गया तब इन्हें कवलम स्थानांतरित किया गया। हालाँकि श्री शांतादुर्गा देवी का यह मंदिर हिन्दू गौर सारस्वत ब्राह्मणों का निजी मंदिर है लेकिन इसे गोवा के प्रमुख मंदिरों में से एक माना जाता है।

इस मंदिर का प्राचीनकाल से ही अस्तित्व रहा लेकिन वर्तमान दृश्य मंदिर की स्थापना सन् 1713 से सन् 1738 के दौरान सतारा के मराठा शासक छत्रपति साहू जी महाराज द्वारा की गई। साहू जी महाराज, मराठा गौरव और माँ दुर्गा के अनन्य भक्त छत्रपति शिवाजी महाराज के पोते थे।

मंदिर की संरचना और मुख्य देवी

श्री शांतादुर्गा मंदिर का सम्पूर्ण परिसर पश्चिमी घाट की पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी में स्थित है। इस परिसर में एक मुख्य मंदिर के साथ तीन अन्य मंदिर भी हैं। मंदिर की छत का निर्माण पिरामिड आकार में किया गया है। इसके अलावा मंदिर के स्तम्भ और फर्श के निर्माण में कश्मीरी पत्थरों का उपयोग किया गया है।

मंदिर परिसर में मुख्य गर्भगृह के अतिरिक्त जल कुंड, दीपस्तंभ और अग्रशाला भी मौजूद हैं। मंदिर के शिखर और सभामंडप भी इसका मुख्य आकर्षण है। मंदिर में एक स्वर्ण पालकी भी है, जिसे त्यौहारों के दौरान मंदिर के देवी-देवताओं की शोभायात्रा के लिए उपयोग में लाया जाता है।

मंदिर के गर्भगृह में श्री शांतादुर्गा की एक महमोहक मूर्ति स्थापित की गई है। हालाँकि देवी की मूल प्रतिमा को 1898 में पठान चुरा कर ले गए थे। इसके बाद श्री लक्ष्मण कृष्णाजी गायतोंडे के द्वारा बनाई गई प्रतिमा 19 मार्च 1902 को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित की गई।

गर्भगृह में स्थापित देवी शांतादुर्गा की प्रतिमा के अलावा महादेव और भगवान विष्णु की दो छोटी प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं। देवी शांतादुर्गा ने अपने दोनों हाथों में दो साँप पकड़ रखे हैं, जो भगवान विष्णु और महादेव के प्रतीक स्वरूप माने जाते हैं। इसके अलावा गर्भगृह में देवी की प्रतिमा के अतिरिक्त एक शिवलिंग भी स्थापित है।

श्री शांतादुर्गा देवी (फोटो : shreeshantadurga.com)

कैसे पहुँचें?

श्री शांतादुर्गा मंदिर का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गोवा का डाबोलिम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा है, जो यहाँ से लगभग 34 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हवाईअड्डे से मंदिर तक पहुँचने के लिए कई स्थानीय साधन उपलब्ध हैं। मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वास्को डी गामा रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 35 किलोमीटर दूर है।

सड़क मार्ग से भी श्री शांतादुर्गा मंदिर पहुँचा जा सकता है। पणजी का मुख्य बस अड्डा मंदिर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है, जहाँ से न केवल गोवा के अन्य शहरों बल्कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के लिए परिवहन के साधन आसानी से उपलब्ध रहते हैं।

‘अपने CM योगी आदित्यनाथ को हमें दे दो’: ऑस्ट्रेलियाई सांसद को भाया कोरोना प्रबंधन का यूपी मॉडल, मीडिया को नहीं दिख रहा

उत्तर प्रदेश में अब कोरोना वायरस संक्रमण के मात्र 1608 सक्रिय मामले बचे हैं। तुलना के लिए बता दें कि ये आँकड़ा केरल में 1.15 लाख और महाराष्ट्र में 1.14 लाख है। लेकिन, भारत की मीडिया को ये सब नहीं दिख रहा है। उसके लिए अब भी उद्धव ठाकरे ‘बेस्ट सीएम’ और ‘केरल मॉडल’ सबसे अच्छा है। पर यहाँ से 7800 किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया के सांसद क्रैग केली को सीरम योगी का कुशल प्रबंधन दिख रहा है।

क्रैग केली ने कई महीनों से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज पर नजर रखी हुई है और जिस तरह से अपने कुशल प्रबंधन से उन्होंने राज्य में कोरोना को मात दी है, इससे ऑस्ट्रेलियाई सांसद प्रभावित हैं। हाल ही में उन्होंने लिखा कि भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के लिए ताली बजनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के ह्यूजेस से सांसद क्रैग केली ने कहा कि काश ऐसा कोई विकल्प होता कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हम कुछ दिनों के लिए ले सकते।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में आइवरमेक्टिन दवा की कमी और नेतृत्व की अक्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ ही इन चीजों को ठीक कर सकते हैं। उन्होंने एक डेटा एनालिस्ट के ट्वीट को कोट करते हुए ये बातें लिखीं। उन्होंने अपने आँकड़े में बताया था कि भारत के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य में पिछले 1 महीने में कोरोना के मात्र 1% मामले सामने आए हैं और 2.5% मौतें हुई हैं।

जबकि उत्तर प्रदेश में भारत की 17% जनसंख्या रहती है। उक्त डेटा एनालिस्ट जे चमी ने उदाहरण के लिए महाराष्ट्र के आँकड़े गिनाए, जहाँ देश की 9% जनसंख्या रहती है। उन्होंने बताया कि इस राज्य में कोरोना के देश के कुल 18% मामले हैं और आधी से अधिक मौतें तो यहीं हो रही हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ महाराष्ट्र भारत का फार्मा हब है, लेकिन आइवरमेक्टिन के प्रयोग में उत्तर प्रदेश ने सफलता हासिल की है।

ऐसा नहीं है कि क्रैग केली ने पहली बार सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ की हो। जून 2021 के अंत में भी बताया था कि कैसे 23 करोड़ की जनसंख्या वाले उत्तर प्रदेश ने कोरोना के ‘डेल्टा वैरिएंट’ पर विजय हासिल की है। उन्होंने 30 जून को ये ट्वीट करते हुए बताया था कि जहाँ उस दिन उत्तर प्रदेश में कोरोना के 182 नए मामले सामने आए, वहीं यूके में ये आँकड़ा 20,479 रहा। उन्होंने इवरमेक्टिन दवा के सही उपयोग को लेकर भी सीएम योगी की प्रशंसा की।

मई में ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)’ ने भी इसकी तारीफ़ की थी कि किस तरह उत्तर प्रदेश में घर-घर जाकर कोविड टेस्टिंग की जा रही है। गाँवों तक में स्वास्थ्यकर्मी जाकर कोरोना के लक्षणों वाले मरीजों के आइसोलेशन की व्यवस्था करते हैं। WHO ने बताया था कि किस तरह 97,941 गाँवों में ये चल रहा है। तब भी क्रैग केली ने कहा था कि उत्तर प्रदेश कोरोना को मात दे रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और WHO ये किसी को नहीं बता रहा कि ये सब कैसे संभव हो रहा है।

बता दें कि कोरोना वायरस से संक्रमित रोगियों के इलाज के लिए यूपी सरकार ने स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की सलाह के बाद प्रदेश में आइवरमेक्टिन को कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रयोग किया। इसके साथ ही डॉक्‍सीसाइक्लिन को भी कोरोना मरीजों के लिए प्रयोग में लाया गया। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्‍य था, जिसने बड़े पैमाने पर रोगनिरोधी और मेडिकल उपयोग में आइवरमेक्टिन का प्रयोग किया।

आतिफ ने नाम बदल नाबालिग लड़की को फँसाया: अश्लील तस्वीरों से धर्मांतरण का दबाव, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र में शनिवार (10 जुलाई 2021) को जबरन धर्मांतरण का एक मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर नाम बदलकर एक मुस्लिम युवक ने नाबालिग लड़की को झाँसा देने के बाद उससे साथ दोस्ती की और फिर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। इस दौरान आरोपी ने नाबालिग की अंतरंग तस्वीरें ले लीं और उसे धमकी देने लगा। युवक ने लड़की को धमकी दी कि अगर उसने अपना धर्म नहीं बदला तो वह उसकी सभी तस्वीरें वायरल कर देगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़की की अश्लील तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर उस पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने वाले आरोपित युवक आतिफ को ​गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस केस दर्ज कर मामले की जाँच में जुट गई है।

भदोही के पुलिस अधीक्षक रामबदन सिंह ने बताया, “21 वर्षीय आतिफ ने एक नाबालिग लड़की से सोशल मीडिया पर अपना नाम बदल कर दोस्ती की। इसके बाद उसे अपने प्यार के जाल में फँसाया और उससे संबंध बनाए। इस दौरान आतिफ ने उसकी कुछ अंतरंग तस्वीरें भी ले लीं, जिसके बाद वह लड़की को ब्लैकमेल करने लगा और उस पर लगातार पैसे देने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा।”

पुलिस अधीक्षक ने आगे बताया कि इस मामले में पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज कराई है। लड़की के घरवालों ने आतिफ पर आरोप लगाया है कि आतिफ ने उसकी बेटी से पैसों की माँग की और धर्म बदलने का दबाव बनाया। उन्होंने बताया कि आतिफ बीते कुछ दिनों से लगातार अंतरंग तस्वीरें वायरल करने की धमकी दे रहा था।

पुलिस ने बताया कि नाबालिग लड़की और आतिफ ने शादी नहीं की है और न ही नाबालिग ने इस्लाम मजहब को अपनाया है। पुलिस ने शुक्रवार (9 जुलाई 2021) को लड़की का बयान दर्ज किया और उसके पिता की शिकायत पर आतिफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

825 में से 600+ सीट पर भगवा लहर, 5 जीत के साथ कॉन्ग्रेस फुस्स: PM मोदी ने CM योगी को दी बधाई

उत्तर प्रदेश में हाल ही हुए जिला पंचायत में ऐतिहासिक जीत के बाद शनिवार (10 जनवरी 2021) हुए ब्लॉक प्रमुख चुनावों में भी भाजपा ने परचम लहराया है। ब्लॉक प्रमुख चुनावों में 600 से अधिक सीटें लाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की है। ब्लॉक प्रमुख चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

उत्तर प्रदेश में 825 ब्लॉक प्रमुख की सीटें हैं, जिनमें में से 600 से अधिक सीटें भाजपा और उसके सहयोगी दलों के खाते में आईं हैं। अमर उजाला और लाइव हिंदुस्तान के अनुसार, भाजपा+ को 648 सीटें मिली हैं। वहीं समाजवादी पार्टी को 100 के करीब सीटें मिली हैं, जबकि निर्दलीय व भाजपा के समर्थकों को 70 सीटें मिली हैं। टाईम्स नाउ हिंदी ने भाजपा+ को 630 जीतने की बात कही है।

जी न्यूज के अनुसार, ब्लॉक प्रमुख चुनावों में भाजपा+ को 635, समाजवादी पार्टी (सपा) को 103 और 87 सीटों पर अन्य लोगों की जीत हुई है। नवभारत टाइम्स के अनुसार, भाजपा को 626, सपा को 98, कॉन्ग्रेस को 5 सीटों पर जीत मिली है, जबकि 96 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। वहीं, आजतक ने भाजपा को 609 सीटें और समाजवादी पार्टी को 98 सीटें जीतने की बात कही है।

दरअसल, कुल 825 सीटों में से 349 सीटों पर चुनाव कराने की नौबत ही नहीं आई, क्योंकि इन पर ब्लॉक प्रमुख निर्विरोध चुन लिए गए थे। भाजपा का दावा है कि 349 निर्विरोध चुने गए ब्लॉक प्रमुखों में से 334 ब्लॉक प्रमुख उसकी पार्टी के हैं। वहीं, 476 सीटों पर ही चुनाव कराए गए हैं। ब्लॉक प्रमुख पद के लिए आज (शनिवार, 10 जुलाई 2021) को 11 बजे सुबह से 3 बजे शाम तक मतदान हुआ था।

उत्तर प्रदेश के ब्लॉक प्रमुख के पदों पर भाजपा की भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता का वीडियो ट्वीट किया था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी है। PM मोदी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव में भी यूपी भाजपा ने अपना परचम लहराया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों और जनहित की योजनाओं से जनता को जो लाभ मिला है, वो पार्टी की भारी जीत में परिलक्षित हुआ है। इस विजय के लिए पार्टी के सभी कार्यकर्ता बधाई के पात्र हैं।”

इससे पहले ब्लॉक प्रमुख के चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत व बढ़त पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को बधाई दी है। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ सबका विकास’ मूलमंत्र का जीवंत उदाहरण है प्रदेश का पंचायत चुनाव परिणाम। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 7 साल पहले इस देश को दिए गए मूलमंत्र के कारण लोगों को लाभ हुआ है। प्रदेश में भी सरकार ने योजनाएँ बनाईं और उसका लाभ लोगों को मिला। उन्होंने कहा कि राज्य में जो योजनाएँ बनाई गईं, उसे लोगों तक पहुँचाने में प्रदेश सरकार के अलावा संगठन ने लोगों का बहुत बड़ा योगदान है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जनता का रुझान भाजपा की ओर था। जिला पंचायत चुनाव में भी भाजपा शीर्ष पर रही और ब्लॉक प्रमुख चुनावों में भी भाजपा शीर्ष पर है। उन्होंने कहा कि 825 में से 735 ब्लॉक में भाजपा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे, जबकि 90 सीटें छोड़ दी गई थीं।

वहीं, भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं के कारण इन चुनावों में भाजपा की जीत मिली है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में कानून-व्यस्था की स्थिति चुस्त है और लड़कियाँ रात 12 बजे भी घर से निकल सकती हैं।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भी स्पष्ट किया भाजपा को 500 से अधिक सीटें मिली हैं। ट्विटर पर उन्होंने लिखा, “उत्तर प्रदेश ब्लॉक प्रमुख चुनाव 2021 !!! ताजा नतीजों में भाजपा 500+ ब्लॉक जीत के साथ एक बार फिर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है… #भाजपा_का_पंच

परिणामों के अनुसार, भाजपा ने लखनऊ के कुल 8 सीटों में से 7 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं, गोरखपुर जिले से ब्लॉक प्रमुख चुनाव में समाजवादी पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। जिले के 20 में से 18 सीटों पर भाजपा के प्रमुख चुने गए हैं, जबकि आगरा के सभी 15 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है। सपा का गढ़ कहे जाने वाले फिरोजाबाद में 9 ब्लॉक हैं, जिनमें 3 पर भाजपा प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं और 6 ब्लॉक में हुए मतदान में 4 ब्लॉक प्रमुख के पद भाजपा के खाते में गए हैं।

अगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें तो मुजफ्फरनगर की 9 सीटों में से 8, मेरठ की 22 सीटों में से 12, सहारनपुर के 5 सीटों में से 4, बिजनौर के 5 सीटों में से 4, शामली के 3 सीटों में से 2 पर भाजपा ने जीत हासिल की है। वहीं, आजमगढ़ के 22 में 11 सीटों पर, बरेली के 15 में से 11 सीटों पर, शाहजहाँपुर के सभी 5 सीटों पर भाजपा को जीत मिली है।

वहीं, चुनावों से पहले और चुनावों के दौरान कई जगह से हिंसा की खबरें भी सामने आईं। मतदान के दौरान बाराबंकी, रायबरेली, सुलतानपुर, लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों में भाजपा और सपा कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। हाथरस में भी सपा-भाजपा कार्यकर्ताओं की झड़प के बाद पथराव और फायरिंग हुई। सुलतानपुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर दी है। बाराबंकी और लखीमपुर खीरी में भाजपा-सपा प्रत्याशी आमने सामने आ गए। रिपोर्ट के मुताबिक, चंदौली, इटावा, कानपुर देहात और हमीरपुर से भी हिंसा की खबरें आई हैं।

इटावा में सिटी पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार को किसी ने थप्पड़ मार दिया। इसके बाद गुस्साई पुलिस ने कई राउंड हवाई फायरिंग की और आँसू गैस के गोले छोड़े। दरअसल, इटावा में मतदान के दौरान बवाल होने की सूचना प्रशांत कुमार को मिली थी, इसके बाद वे वहाँ पहुँचे थे।  

वहीं, कल लखीमपुर खीरी में एक महिला के साथ बदतमीजी का मामला सामने आया था, जिसके बाद थाने के सभी पुलिसकर्मियों को सीएम योगी के निर्देश पर निलंबित कर दिया गया। इस पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी ने भाजपा का मास्टरस्ट्रोक कहकर हँसी उड़ाई थी।

CM फारूक अब्दुल्ला की मदद से आतंकी सलाउद्दीन के बेटे का MBBS में एडमिशन? – R&AW प्रमुख ने किया था खुलासा

भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (रॉ) के पूर्व प्रमुख एएस दुलत ने जुलाई 2015 में खुलासा किया था कि हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाउद्दीन ने अपने बेटे को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए एक बार श्रीनगर में एक आईबी अधिकारी से संपर्क किया था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने दाखिले की व्यवस्था की थी। हालाँकि, 6 साल बाद शनिवार (10 जुलाई 2021) को जम्मू-कश्मीर सरकार ने सैयद सलाउद्दीन के दोनों बेटों (सैयद शकील अहमद और शाहिद यूसुफ) समेत कुल 11 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है।

उस दौरान यानी साल 2015 के मीडिया रिपोर्ट्स में हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख के बेटे अब्दुल वाहिद ने पूर्व रॉ प्रमुख के दावे का खंडन करते हुए इसे सबसे बड़ा झूठ बताया था। वाहिद ने कहा था कि उसके पिता सैयद सलाउद्दीन ने मेडिकल कॉलेज में सीट के लिए किसी से संपर्क नहीं किया। अब्दुल वाहिद ने इसे अपने पिता को बदनाम करने की साजिश बताई थी।

उसी साल सलाउद्दीन के बेटे वाहिद ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए अपने इंटरव्यू में दुलत (साल 2000 तक रॉ प्रमुख रहे) के सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। इस इंटरव्यू में वाहिद ने कहा था, ”मेरे पिता की छवि खराब करने के लिए एक सोची समझी साजिश के तहत मनगढ़ंत कहानी बनाई गई है।”

वाहिद ने स्पष्ट किया था कि न तो उनके पिता ने किसी को फोन किया है और न ही उनके परिवार के सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए कभी मुलाकात की। सलाउद्दीन के बेटे वाहिद ने साथ ही यह दावा भी किया था कि उसे साल 2000 में एमबीबीएस के लिए आयोजित एक सामान्य प्रवेश परीक्षा के जरिए चुना गया था।

वाहिद ने कहा कि उसका जम्मू स्थित आचार्य श्री चंदर कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल में दाखिला कराया गया था। मेरिट लिस्ट में उसकी रैंकिंग 92 थी। उसने बताया कि आतंकवादी पृष्ठभूमि वाले परिवार से होने के कारण जम्मू में अक्सर उसे सुरक्षा का डर सताता था, इसलिए वह अपना स्थानांतरण श्रीनगर करवाना चाहता था। उसने बताया कि उसे सुरक्षा और आईबी एजेंसियों के लोगों द्वारा अक्सर संदेह की दृष्टि से देखा जाता था। उसने आरोप लगाया था कि सुरक्षा जाँच के बहाने उसे धमकी और प्रताड़ना दी जाती थी और क्लास व लैब छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता था।

दुलत का दिमाग खराब

आतंकवादी के बेटे ने उस समय कहा था कि उसका परिवार चिंतित था, इसलिए उसने बीओपीईई (सीईटी आयोजित करने वाले बोर्ड) अधिकारियों से संपर्क किया। हालाँकि, अधिकारियों ने असहाय होने की बात कही। वहीं, कोर्ट ने भी स्थानांतरण को नियमों के खिलाफ मानते हुए मदद नहीं की। वाहिद ने कहा कि उसके परिवार ने मदद के लिए तत्कालीन राज्य सरकार से संपर्क किया, जिसने राजनीतिक गतिविधियों को भाँपते हुए उसे जम्मू से श्रीनगर में शिफ्ट करने में मदद की थी। वाहिद ने कहा था, “दुलत का दिमाग खराब हो गया है, वह पूरी तरह से बकवास कर रहे हैं। मेरा चयन मेरी योग्यता के दम पर हुआ था।”

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, हिजबुल के तत्कालीन प्रवक्ता सलीम हाशमी ने कहा था कि सलाहुद्दीन ने कभी किसी सरकारी अधिकारी से संपर्क नहीं किया। हाशमी ने एक बयान में कहा था, “यह आरोप निराधार है। कश्मीर के स्वतंत्रता संग्राम (आम जनता को भ्रमित करने के लिए आतंकवाद को ये लोग इसी शब्द से बुलाते हैं) को लेकर आम लोगों के मन में संदेह पैदा करने के मकसद से इस तरह की भ्रांतियाँ फैलाई जा रही हैं।” उसने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग जानते हैं कि भारतीय खुफिया एजेंसियाँ और उसकी लड़ाई को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।

4 बेटे और एक बेटी सरकारी नौकरी में

चार साल पहले सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, सैयद सलाउद्दीन के 4 बेटे और 2 बेटियाँ हैं। इनमें से 4 बेटे और एक बेटी सरकारी नौकरी में हैं। सलाहुद्दीन का बेटा वाहिद यूसुफ शेर-ए-कश्मीर हॉस्पिटल में डॉक्टर है। दूसरा भाई सैयद अहमद शकील मेडिकल असिस्टेंट है। जावेद यूसुफ एजुकेशन ऑफिस में कम्प्यूटर ऑपरेटर है। वहीं, शाहिद यूसुफ एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में है। इसके अलावा आतंकी सरगना की एक बेटी सरकारी टीचर है।

गौरतलब है कि सलाउद्दीन के बेटे सैयद अहमद शकील और शाहिद यूसुफ को आतंकी गतिविधियों के फंड मुहैया कराने का दोषी पाया गया है। इसके अलावा, जम्मू और कश्मीर पुलिस के दो कॉन्स्टेबल भी आतंकी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए। इनमें से एक कॉन्स्टेबल अब्दुल राशिद ने तो सुरक्षा बलों पर हमले की प्लानिंग को अंजाम दिया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पावर डिपार्टमेंट का इंस्पेक्टर शाहीन अहमद लोन भी हिज़्बुल मुजाहिदीन के लिए हथियारों की तस्करी में संलिप्त था। इसके चलते उसे भी सेवा से बर्खास्त किया गया है।

2 बच्चों वाले लोगों के लिए विशेष पैकेज-योजना: असम में नसबंदी पर भी महत्वपूर्ण निर्णय, घोषणा बजट सत्र में

असम में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। शनिवार (10 जुलाई 2021) को उन्होंने घोषणा की है कि राज्य के आगामी बजट में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ ऐसी विशेष योजनाओं की घोषणा भी की जा सकती है, जो 2 बच्चों वाले लोगों के लिए ही होंगी।

सीएम सरमा ने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण नीति के मुद्दे पर तेजी से काम चल रहा है और अगस्त में इसके लिए अधिसूचना भी जारी की जा सकती है। इसके अलावा सीएम सरमा ने यह भी कहा कि आगामी बजट में जन-कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की जाएगी लेकिन कुछ ऐसी विशेष पैकेज या योजनाएँ होंगी, जो केवल उन्हीं लोगों के लिए होंगी जिनके 2 बच्चे होंगे। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि बजट में जनसंख्या नियंत्रण और स्वैच्छिक नसबंदी को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

सीएम सरमा लगातार अलसंख्यकों के बारे में बात करते रहते हैं। उनके अनुसार अल्पसंख्यकों का कल्याण उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है लेकिन जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर वो प्रतिबद्ध हैं। सीएम सरमा ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण बिल या दो बच्चों की नीति पर कोई भी निर्णय लेने से पहले अगस्त में उनकी सरकार अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों से बातचीत करके इन मुद्दों पर अधिसूचना जारी कर देगी।

असम में राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) को लागू हो चुकी है। कर्जमाफी या अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए इस नीति का परिपालन करना अनिवार्य होगा। हालाँकि, यह भी निर्णय लिया गया कि चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर फिलहाल यह नीति लागू नहीं होगी।

असम सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) सबके लिए अनिवार्य होगी और सभी समुदायों पर इसे लागू करने के लिए चरणबद्ध तरीका अपनाया जाएगा।

ज्ञात हो कि रविवार (04 जुलाई 2021) को सीएम सरमा ने मुस्लिम समुदाय के 150 बुद्धिजीवियों और प्रतिष्ठित नागरिकों से जनसंख्या नियंत्रण नीति और परिवार नियोजन के विषय में चर्चा की। सीएम के साथ बैठक में शामिल होने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को 8 समूहों में बाँटा गया। इनसे शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, मुस्लिम महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूह के बारे में चर्चा की गई तथा उनसे सुझाव लिए गए। हालाँकि सीएम सरमा ने यह भी कहा था कि वह मुस्लिम समुदाय से चर्चा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण पर उनका रुख स्पष्ट है।

सीएम सरमा ने अल्पसंख्यक समुदाय से अपील करते हुए कहा था कि वे जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन की नीति अपनाएँ। उन्होंने कहा था कि गरीबी का मुख्य कारण लगातार आबादी बढ़ना है, लिहाजा समुदाय के सभी प्रतिनिधियों को आगे आकर इस दिशा में सरकार का समर्थन करना चाहिए।