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ओलंपियन मयूखा ने दोस्त के रेप केस में लगाए गंभीर आरोप, कहा- आरोपित को बचा रहे त्रिशूर के बिशप और केरल के एक मंत्री

ओलंपिक खिलाड़ी मयूखा जॉनी ने सोमवार (28 जू 2021) को उनकी एक दोस्त के साथ वर्ष 2016 में हुए कथित बलात्कार मामले की जाँच को लेकर केरल पुलिस और राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने बलात्कार और उत्पीड़न के आरोपित बिजनेसमैन को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इस बीच सोमवार को ही त्रिशूर पुलिस ने मामले की नए सिरे से जाँच के लिए महिला अधिकारियों के साथ नई टीम का ऐलान किया।

त्रिशूर में मीडिया से मुखातिब होते हुए ओलंपियन ने कहा के वो पीड़िता की तरफ से बोल रही हैं। उन्होंने कहा कि पीड़िता (उनकी दोस्त) को त्रिशूर के आरोपित बिजनेसमैन से अभी भी खतरा है।

महिलाओं के ट्रिपल जंप में नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाली जॉनी ने मीडिया को बताया कि उनकी दोस्त ने इस साल (2021) मार्च में पुलिस में शिकायत की थी, बाद में मजिस्ट्रेट ने भी उसका बयान दर्ज किया। शुरुआत में तो पुलिस बहुत तेजी से कार्रवाई की, लेकिन बाद में उनका रवैया उदासीन हो गया। पीड़िता त्रिशूर ग्रामीण के एसपी जी पूंगुझाली से भी मिली थी। उन्होंने शुरुआत में मामले में काफी दिलचस्पी दिखाई, लेकिन बाद में इस केस को ढंडे बस्ते में डाल दिया।

नई जाँच टीम गठित की गई

इस मामले में एसपी जी पूंगुझाली ने सोमवार (28 जून 2021) को कहा, “मैंने मामले की समीक्षा की है और अब तक हुई जाँच में किसी प्रकार की कोई चूक नहीं मिली। शिकायत घटना के कई सालों के बाद की गई है, इसलिए मामले में कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हम हालात के मुताबिक सबूतों के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं और इस तरह के कदमों में कुछ समय लगेगा”

उन्होंने कहा, “मैंने महिला पुलिस अधिकारियों के साथ एक नई जाँच गठित की है और केस की जाँच को स्थानीय पुलिस से लेकर जिला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। साथ ही मयूखा द्वारा लगाए गए आरोपों को इंटेलीजेंस विंग की स्पेशल ब्राँच देख रही है।”

मयूखा के आरोप

जॉनी मयूखा ने आरोप लगाया है कि त्रिशूर के कैथोलिक बिशप ने पुलिस को बुलाकर आरोपित का साथ दिया। इसके अलावा पिछली एलडीएफ सरकार के एक मंत्री ने भी कथित तौर पर जाँच को प्रभावित करने की कोशिश की। हालाँकि, एसपी पूंगुझाली ने किसी भी तरह के राजनीतिक या अन्य दवाबों से इनकार करते हुए कहा कि हम मामले की स्वंतत्र रूप से जाँच कर रहे हैं।

जॉनी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने महिला आयोग से भी शिकायत करने की कोशिश की थी। लेकिन जब हमें यह पता चला कि महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष जोसेफिन ने ही कथित तौर पर पुलिस को जाँच रोकने के लिए कहा था, तो हम रुक गए।

वहीं पिछले हफ्ते आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाली जोसेफिन ने इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है।

जॉनी ने मीडिया से कहा, “मैं ये खुलासा इस आस में कर रही हूँ कि ये लोग इस मामले से दूर रहेंगे। आरोपित अभी लोकल लीडर्स और बिशप का समर्थन पाकर आजाद घूम रहा है।”

जॉनी मयूखा ने कहा, “आरोपित और पीड़िता दोनों ही त्रिशूर जिले के रहने वाले हैं। साल 2016 में आरोपित ने लड़की के घर में घुसकर उसके साथ बलात्कार किया था। उसने उसके न्यूड वीडियो बना लिए थे। उस दौरान पीड़िता अविवाहित थी और अपने बीमार माता-पिता की बदनामी के कारण चुप रह गई। हालाँकि, 2018 में शादी के बाद भी आरोपित फोन पर उसे धमकाता और परेशान करता रहा।”

उन्होंने कहा, “पिछले हफ्ते पीड़िता ने मुख्यमंत्री से भी मामले की शिकायत की थी, लेकिन बाद में पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सबूत नहीं होने के कारण इस केस को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। हम चाहते हैं कि महिला को इंसाफ मिले और आरोपित को बचाने वाले पुलिस अधिकारियों को मामले की जाँच से दूर रखा जाए।”

‘बंगाल में एक खास पार्टी को वोट नहीं देने वाले बने निशाना’: फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने ममता सरकार को बताया फेल, पुलिस भी बेनकाब

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा पर एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में प्रदेश में हुई हिंसा को पूर्व नियोजित बताया गया है। साथ ही इस बात पर गौर करवाया गया कि 2 मई 2021 की रात से राज्य के अलग-अलग शहरों और गाँवों में हुई हिंसा केवल एक पार्टी को वोट न देने वालों के साथ हुई।

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने रिपोर्ट में बताया है कि राज्य के बड़े माफिया और क्रिमिनल जिनके खिलाफ बंगाल में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं उन्होंने इस काम को अंजाम दिया। इससे साबित होता है कि ये एक राजनीतिक बदला लेने का प्रयास था। रिपोर्ट ये भी बताती है कि हिंसा में सिर्फ उन लोगों को निशाना बनाया गया जिन्होंने अपना वोट एक निश्चित पार्टी को नहीं दिया। ऐसे ही लोगों के घर जलाए गए। तोड़फोड़ हुई और उनकी लड़कियों और महिलाओं के साथ रेप भी किया गया। हिंसा के दौरान उन लोगों को टारगेट किया गया जो रोजी-रोटी के लिए हर रोज कमाते और खाते हैं।

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट कहती है कि राज्य में न केवल हिंसा हुई बल्कि लोगों को इतना डराया गया कि कोई भी पुलिस से शिकायत न करे। वहीं पुलिस ने भी पीड़ितों को कोई प्रोटेक्शन नहीं दी, बल्कि उसके बदले उन्होंने भी उन्हें डराया-धमकाया और उनसे उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड, जबरदस्ती ले लिए गए। उनसे कहा गया कि वह एक विशेष राजनीतिक पार्टी को सपोर्ट देना बंद करें।

बता दें कि बंगाल हिंसा मामले की सच का पता लगाने के लिए बनाई गई पाँच सदस्यीय कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी को सौंपी है। इसमें बंगाल सीएम को राज्य में हिंसा रोकने में नाकाम बताया गया है और ये भी बताया गया कि उन्हें कई जगहों पर क्रूड बम और पिस्टल की अवैध फैक्ट्री मिली है। कमेटी के सदस्यों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट 63 पेज की है। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए टीम पश्चिम बंगाल गई थी, जहाँ से 200 से ज्यादा तस्वीरें, करीब 50 से ज्यादा वीडियो एनालिसिस कर इसे तैयार किया गया। इतना ही नहीं, यह टीम ग्राउंड पर भी लोगों से मिली।

मालूम हो कि अपनी जाँच के बाद राज्य सरकार का चेहरा उजागर करने वाली इस टीम को पहले प्रदेश में आने से मना किया जा रहा था। कमेटी के चेयरमैन ने चीफ सेक्रेट्री को ग्राउंड रिएलिटी के लिए 11 मई को पत्र लिखा था, लेकिन 12 मई को वहाँ के चीफ सेक्रेट्री ने जवाब दिया कि कोरोना के चलते आप ग्राउंड पर नहीं आ सकते। साथ ही यह भी हवाला दिया गया कि अभी मामले में कोर्ट की सुनवाई होनी है इसलिए राज्य में आना ठीक नहीं है।

जाधवपुर में जले मिले 40 बीजेपी कार्यकर्ताओं के घर, NHRC टीम पर TMC गुंडों का हमला: NCM उपाध्यक्ष ने बताई बंगाल की जमीनी हकीकत

पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं व समर्थकों के खिलाफ हुई हिंसा का दौर अभी भी नहीं थमा है। इस दौरान वहाँ इस तरह की घटनाओं की जाँच करने जाने वालों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश के बाद ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)’ ने इन घटनाओं की जाँच के लिए टीम गठित की थी। इसी टीम के सदस्य आतिफ रशीद के साथ बंगाल में बदसलूकी हुई है।

आतिफ रशीद ने बताया, “मैं NHRC की जाँच टीम के सदस्य के नाते जाधवपुर में दंगा प्रभावित इलाक़े का दौरा करने गया था। वहाँ गुंडों द्वारा मेरे साथ अभद्र बर्ताव किया गया। मैंने वहाँ पर 40 से ज़्यादा घर टूटे हुए पाए और उनकी रिकॉर्डिंग की, जिसके बाद ये लोग खुल्लम-खुल्ला मुझे भी धमकी दे रहे थे। जब यह घटना मेरे साथ हुई, तब स्थानीय पुलिस चुप-चाप ग़ायब हो गई, ताकि ये लोग खुल कर मेरे साथ बुरा सुलूक कर सकें।”

उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके साथ बदसलूकी करने वाले राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के लोग थे और यही वो लोग थे, जिन्होंने इन घरों को ध्वस्त किया था। उन्होंने देखा कि भाजपा समर्थकों के घर जला दिए गए थे और ध्वस्त कर दिए गए थे। भाजपा से जुड़े रहे आतिफ रशीद ‘राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NMC)’ के उपाध्यक्ष भी हैं। साथ ही वो DU के सत्यवती कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मौके पर पहुँचते ही जाँच टीम को घेर लिया गया और गुंडों ने पत्थरबाजी का भी प्रयास किया। NHRC के राजीव जैन की अध्यक्षता में ये टीम 3 दिन के पश्चिम बंगाल दौरे पर गई थी। इस टीम में एक सदस्य ‘राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)’ की भी थी। जून 18 को ही कोर्ट में बंगाल में चल रहे मानवाधिकार उल्लंघन की जाँच के लिए कमिटी गठित करने को कहा था। स्थानीय गुंडे उन्हें कैसे धमका रहे हैं, इसके कई वीडियो भी सामने आए हैं।

आतिफ रशीद को धमकी देने वालों में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएँ भी शामिल थीं। वीडियो में आतिफ रशीद बार-बार उन्हें समझा रहे हैं कि वो इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकते और वो पीछे हट जाएँ। वहीं एक वीडियो में उन्होंने भीड़ से हट कर कैमरे के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही स्थानीय लोगों ने उन पर हमला बोला, पश्चिम बंगाल पुलिस वहाँ से चली गई। उन्होंने कहा कि ये वीडियो कलकत्ता हाईकोर्ट में एक सबूत के रूप में काम करना चाहिए, जो दिखाता है कि किस तरह बंगाल में आतंक का राज चल रहा है।

आतिफ रशीद ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें जमीन पर जाकर वहाँ की स्थिति का आकलन करने को कहा गया था। उन्होंने बताया कि न सिर्फ जाधवपुर में 40 घर जले और ध्वस्त किए हुए मिले, बल्कि कई भाजपा कार्यकर्ताओं का 2 महीने से कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये घर भाजपा कार्यकर्ताओं के थे और इनका ये हाल करने वाले तृणमूल के गुंडे हैं। उन्होंने बताया कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई FIR नहीं दायर की।

इसकी ही जाँच के दौरान लोगों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और धमकाने लगे। वो स्थिति का आकलन करते हुए वीडियो बना रहे थे, इसीलिए ये लोग भड़क गए। पश्चिम बंगाल में 2 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद से अब तक कई भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की ख़बरें आ चुकी हैं। खासकर हिन्दू समाज को इसका दंश झेलना पड़ा। मारपीट से लेकर यौन शोषण तक का सहारा लेकर TMC के गुंडों पर भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने के आरोप लगे।

ट्विटर MD के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में UP सरकार, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से दी थी अंतरिम राहत

उत्तर प्रदेश सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में बुजुर्ग से मारपीट के वायरल वीडियो मामले में ट्विटर के प्रबंध निदेशक मनीष माहेश्वरी को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। माहेश्वरी ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट अर्जी दाखिल की है ताकि सुनवाई के दौरान उनका पक्ष भी सुना जाए।

बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में लोनी पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी में माहेश्वरी को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की थी। बेंगलुरु के रहने वाले माहेश्वरी ने सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत यूपी पुलिस की ओर से जारी नोटिस के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।

रिपोर्टों के अनुसार, इसमें माहेश्वरी के वकील ने तर्क दिया था कि वे केवल ट्विटर के एक कर्मचारी हैं, इसलिए उन्हें कथित अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जाँच अधिकारी ने 17 जून को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 160 के तहत ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक को नोटिस जारी किया था, लेकिन माहेश्वरी प्रबंध निदेशक नहीं हैं। जिसके बाद माहेश्वरी को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई और कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुलिस पूछताछ के लिए पेश होने की अनुमति दी गई।

इससे पहले ट्विटर इंडिया के अधिकारियों ने पुलिस को सूचित किया था कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ के लिए उपलब्ध होने के लिए तैयार हैं, जिसे पुलिस ने खारिज कर दिया था। गाजियाबाद पुलिस ने ट्विटर, समाचार वेबसाइट द वायर, पत्रकार मोहम्मद जुबैर और राणा अय्यूब के अलावा कॉन्ग्रेस नेताओं सलमान निजामी, मस्कूर उस्मानी, शमा मोहम्मद और लेखक सबा नकवी के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

उन पर उस वीडियो को शेयर करने का आरोप लगाया गया था कि जिसमें एक बुजुर्ग अब्दुल शमद सैफी ने दावा किया था कि कुछ युवकों ने उनकी कथित रूप से पिटाई की थी, जिन्होंने उनसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए भी कहा था। पुलिस का दावा है कि सांप्रदायिक अशांति फैलाने के लिए वीडियो शेयर किया गया था। पुलिस ने बताया कि हमला इसलिए हुआ क्योंकि आरोपित बुलंदशहर निवासी सैफी द्वारा बेचे गए ‘ताबीज’ से नाखुश था। पुलिस ने इस मामले में सांप्रदायिक एंगल से इनकार किया था। 

देश भर में वायरल हुए उस वीडियो में सैफी ने कथित तौर पर कहा था कि उन पर कुछ युवकों ने हमला किया और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर किया। लेकिन जिला पुलिस के मुताबिक घटना के दो दिन बाद सात जून को दर्ज अपनी प्राथमिकी में उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा। 15 जून को दर्ज प्राथमिकी में कहा गया था कि गाजियाबाद पुलिस ने घटना के तथ्यों के साथ एक बयान जारी किया था लेकिन इसके बावजूद आरोपितों ने अपने ट्विटर हैंडल से वीडियो नहीं हटाया।

‘अल्लाह के बंदे, मुतक्की, सलात, रहमत..’: सामने आए धर्मांतरण गिरोह के कोड वर्ड्स, नहीं पता चला कौन है ‘कौम का कलंक’

मूक-बधिर बच्चों को बरगला कर उनके इस्लामी धर्मांतरण कराने वाले गिरोह ने अलग-अलग चीजों के लिए अलग-अलग कोड वर्ड्स भी बना रखे थे, जिन्हें डिकोड करने में यूपी पुलिस लगी हुई है। यूपी ATS ने बताया है कि अभी तक ऐसे 7 कोड वर्ड्स सामने आए हैं। इनमें से 6 को जहाँ डिकोड कर लिया गया है, एक को डिकोड करने का प्रयास जारी है। जिन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया जाता था, वो हैं:

  • 1. रिवर्ट बैक टू इस्लाम प्रोग्राम (इसका आशय धर्म-पिरवर्तन अभियान से है) – डेफ सोसाइटी की शिक्षक इसके तहत काम करती थी। छात्रों को धर्मांतरण की तरफ ले जाया जाता था।
  • 2. मुतक्की (अपने अधिकार और सच्चाई की तलाश) – इसे बार-बार बोला जाता था बच्चों के बीच इस्तेमाल किया जाता था।
  • 3. सलात (नमाज पढ़ना) – इस्लामी धर्मांतरण करने वाले को इसकी जिम्मेदारी दी जाती थी।
  • 4. रहमत (विदेश से आने वाला फंड) – इससे किसी को शक नहीं होता था कि फंडिंग विदेश से आ रही है।
  • 5. अल्लाह के बंदे (सोशल मीडिया पर डाले गए वीडियो को लाइक करने वाला) – सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाता था।
  • 6. मोबाइल नंबर, जन्मतिथि (धर्म परिवर्तन करने वाले का नाम) – एक आईडी के रूप में इनका इस्तेमाल किया जाता था, ताकि पहचान बाहर न आए।
  • 7. कौम का कलंक (इसे अभी तक डिकोड नहीं किया जा सका है)

मूक-बधिर बच्चों से बात करने के लिए और उन्हें बरगलाने के लिए भी सांकेतिक भाषा और इन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया जाता था। भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा है कि वो धर्मांतरण गिरोह के मुद्दे को संसद में भी उठाएँगे। वहीं उत्तर प्रदेश के 400 ऐसे मदरसे हैं, जिन पर पुलिस की नजर है क्योंकि ऐसे ही संस्थानों के जरिए इस गिरोह का नेटवर्क फैला हुआ था। फ़िलहाल गिरफ्तार हुए लोगों से और पूछताछ जारी है।

सोमवार (जून 28, 2021) को इस गिरोह के दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब तक इस मामले में 5 लोग दबोचे जा चुके हैं। मौलाना मोहम्मद उमर गौतम और काजी जहाँगीर इस मामले के मुख्य आरोपित हैं। इरफान शेख, मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान और राहुल भोला के नाम भी इन्हीं दोनों से पूछताछ के दौरान सामने आए थे। इनके पास से इस्लामी धर्मांतरण से जुड़े दस्तावेज, विभिन्न बैंकों की चेक बुक, पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

धर्मांतरण गिरोह के तार अब महाराष्ट्र भी पहुँच गए हैं। इरफ़ान शेख नामक व्यक्ति को यहीं से गिरफ्तार किया गया, जो केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में कार्यरत है। वो कमजोर और दिव्यांग बच्चों की सूची ‘इस्लामी दावा सेंटर’ को मुहैया कराता था, जिसके बाद गिरोह उन्हें निशाना बनाता था। बीड के रहने वाले इरफ़ान से पहले इसी मंत्रालय के एक और अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था। इस तरह दोनों मौलानाओं को छोड़ दें तो 5 अन्य की गिरफ़्तारी हुई है।

विदेश से इस गिरोह को 1 करोड़ रुपए से भी अधिक की फंडिंग की बात पता चली है। मौलाना उमर ने अपने निजी, परिजनों और फातिमा चैरिटेबल ट्रस्ट के बैंक खातों में विदेश से बड़ी रकम मँगाई थी। IDC के बैंक खाते से 50 लाख रुपए मिले हैं। असम की संस्था मारकाजुल मारिफ ने भी डोनेशन दिया। क़तर, दुबई और अबुधाबी से बड़ी रकम आई। 27 जिलों के एसपी को पत्र लिख कर धर्मांतरण कराने वालों का सत्यापन कराने को कहा गया है।

1 मिनट में दागी 8 गोलियाँ, 10 महीने के बच्चे को जमीन पर पटका: आतंकियों ने ऐसे उजाड़ा पूर्व SPO भट का परिवार

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा स्थित हरिपरिगाम गाँव खेतों और पेड़ों से घिरा है। रविवार (जून 27, 2021) को यह गाँव गोलियों की आवाज से थर्रा उठा। आतंकियों ने पूर्व विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) फैयाज अहमद भट के घर पर हमला किया। हमले में 50 वर्षीय भट की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी पत्नी 46 वर्षीय रजा बेगम और 22 वर्षीय बेटी राफिया को भी आतंकियों ने गोली मारी थी। दोनों ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया।

भट के जनाजे में पूरा गाँव उमड़ पड़ा। ताबूत को कंधा देते वक्त लोगों की आँखों से आँसू नहीं रुक रहे थे। मीडिया रिपोर्टों में भट के जीवित परिजनों, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों के हवाले से इस हमले का जो विवरण सामने आया है वह बेहद खौफनाक है। इससे पता चलता है कि हमले के दौरान पूरा गाँव सहम गया। आतंकियों के जाने के बाद केवल चीखें ही सुनाई पड़ी। आतंकियों ने हमले के दौरान 10 महीने के मासूम को भी नहीं छोड़ा और जमीन पर पटक दिया।

The kashmir walla के मुताबिक एक मिनट के अंदर भट के ऊपर 8 गोलियाँ चलाई गई। पत्नी और बेटी जब उन्हें बचाने के लिए उनके शरीर पर लेट गईं तो उन्हें भी गोली मार दी गई। भट की बहू ने बताया कि पूरी घटना उनकी 10 महीने की बेटी के सामने हुई। उनके पति लियाकत अहमद भट सेना में हैं और हमले के वक्त ड्यूटी पर थे। उन्होंने बताया कि पूरा गाँव भट परिवार की चीख से गूँज उठा। उनके घर की दीवारों पर आतंकियों द्वारा चलाई गई गोलियों के निशान इसके गवाह हैं।

रुकाया ने कहा, “जब मैंने तीन लाशें पड़ी देखीं तो मैं चिल्लाने लगी। आतंकियों ने मुझे लात मारी। मेरी छोटी बेटी रोई और हम दोनों बेहोश हो गए। आतंकियों ने जाने से पहले मुझे और मेरी छोटी बेटी को जान से मारने की धमकी दी।” भट के 35 वर्षीय भतीजे मुजफ्फर अहमद, जो पास में ही रहते हैं, ने कहा, “गोली चलने की आवाज आते ही मैंने चाचा को फोन किया था। मैंने केवल रोना सुना। मैं उनके घर पहुँचा तो उन्हें खून से लथपथ पाया।” अहमद के अनुसार, “सितंबर 2018 में जब आतंकवादियों ने एसपीओ को पुलिस से इस्तीफा देने की चेतावनी दी, तो भट दो महीने के लिए घर पर रहे और बाद में फिर से ड्यूटी पर चले गए थे।” 

Kashmirlife को एक पड़ोसी ने बताया कि उन्होंने 10:30 बजे के आस-पास गोलियाँ चलने की आवाजें सुनी। मगर डर की वजह से वह वहाँ जा नहीं पाए। सब कुछ शांत होने के बाद वो वहाँ पहुँचे तो भट के रिश्तेदार उनकी पत्नी और बेटी को लेकर अस्पताल चले गए थे। भट की बहू के हवाले से नवभारत टाइम्स ने बताया है, “मैंने उनसे जान की भीख माँगी, लेकिन उन्होंने मेरे बच्चे को भी नहीं छोड़ा। ससुरालवालों की तरह कहीं मुझे भी गोली न मार दी जाए, इस डर से मेरी चीखने की हिम्मत नहीं हुई। मैं अपने बच्चे को उठाकर दूसरे कमरे में भागी। जब आतंकी चले गए तब ही जाकर मेरी चीख निकली और मैं जोर-जोर से रोने लगी।”

हमले के बाद कश्मीर के आईजी विजय कुमार भट के घर पहुँचे थे। उनके अनुसार एक आतंकी कश्मीरी में तो दूसरा उर्दू में बात कर रहा था। उन्होंने कहा, “हमें इलाके में जैश आतंकियों के मूवमेंट की सूचना मिली है। इस बात के कई सबूत हैं कि एक आतंकी पाकिस्तानी था।”

ट्विटर के बाद अब Google ने दिखाया भारत का गलत नक्शा, जम्मू कश्मीर और लद्दाख को हटा दिया

दिग्गज सर्च इंजन गूगल (Google) भी अब माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर की राह पर चल पड़ा है। गूगल ने अपने ‘ट्रेंड्स’ सेक्शन में भारत का गलत नक्शा दिखाया, जिसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख के हिस्सों को गायब कर दिया गया है। अगर आप गूगल के ट्रेंड सेक्शन में जाएँगे और भारत के मौजूदा ऑनलाइन सर्च ट्रेंड्स को चेक करेंगे तो पाएँगे कि उसी वेबपेज पर जो भारत का नक्शा है, वो गलत है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने गूगल (Google) को भारत का गलत नक्शा दिखाए जाने पर आपत्ति जताई और उसे नक्शा जल्द से जल्द सुधारने की सलाह दी। लोगों ने इस दौरान भारत सरकार द्वारा डाले गए नक़्शे को भी शेयर किया। भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने के बाद दोनों का स्पष्ट नक्शा जारी कर दिया था, बावजूद इसके Google और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म इन्हें भारत का हिस्सा नहीं दिखा रहे हैं।

Google ने ऐसा तब किया है, जब आज ही अमेरिकी माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान और लद्दाख को चीन का हिस्सा दिखाने के बाद भारत के गलत नक्शे को हटा लिया है। लेकिन, इससे उसकी मुश्किलें कम नहीं हुई। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में बजरंग दल के एक नेता की शिकायत पर ट्विटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) मनीष माहेश्वरी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

सोमवार (28 जून, 2021) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के नक़्शे से अलग दिखाया था। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट की इस हरकत के बाद ही सरकार ने इसका खामियाजा भुगतने का इशारा कर दिया था। हालाँकि, मामला गरमाते ही ट्विटर ने वेबसाइट के कैरियर सेक्शन में दिख रहे नक्शे को बिना किसी स्पष्टीकरण के हटा लिया था। बीजेपी की आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने भी ट्विटर को उसकी गैर जिम्मेदाराना हरकत के लिए आड़े हाथों लिया था।

वायुसेना स्टेशन पर हमले के बाद सीमा पर फिर दिखा ड्रोन, NIA को सौंपी गई जाँच: मुठभेड़ में 2 आतंकी ढेर

जम्मू कश्मीर के वायुसेना स्टेशन पर दो ड्रोन से विस्फोट के मामले को अब NIA को सौंप दिया गया है। ‘राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG)’ के एक बॉम्ब स्क्वाड टीम ने जम्मू एयर फोर्स स्टेशन पर जाकर उस जगह का मुआयना किया, जहाँ विस्फोट हुआ था। आशंका है कि इस ब्लास्ट में RDX या TNT जैसे पदार्थों का प्रयोग किया गया था। इन ड्रोन्स को सीमा पार पाकिस्तान से नियंत्रित किया जा रहा था। इसमें स्थानीय स्तर पर कौन-कौन शामिल हैं, इसकी जाँच की जा रही है।

जम्मू के रत्नुचक-कालुचक वायुसेना स्टेशन पर ड्रोन से हमले के एक दिन बाद ही सीमा पर एक और ड्रोन दिखा। सोमवार (जून 28, 2021) की रात कुंजवानी क्षेत्र में ड्रोन की सक्रियता पकड़ी गई। ये लगातार तीसरी बार ऐसा हो रहा है, जब इस क्षेत्र में ड्रोन देखा गया हो। साथ ही लगातार दो दिन इस तरह की गतिविधियाँ शंका पैदा करने वाली हैं। सैन्य प्रतिष्ठानों में एंटी-ड्रोन बंदूकों के साथ कमांडो को तैनात किया गया है।

खतरे को देखते हुए किसी भी प्रकार के ड्रोन को उड़ते देख कर उस पर हमला करने का आदेश दिया गया है। सभी सेना मुख्यालयों, यूनिटों और कैम्पों में जवानों को एलर्ट पर रखा गया है। कुंजवानी, पुरमंडल मोड़, बाड़ी ब्राह्मणा, रत्नूचक और नजदीकी नेशनल हाईवे पर वाहन तलाशी अभियान भी चलाया गया। सभी पुलिस प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है।

हालाँकि, जम्मू एयरपोर्ट से फ्लाइट सेवाएँ सामान्य रूप से यथावत चल रही हैं। NIA की टीम ने भी जम्मू के वायुसेना स्टेशन पर जाकर जाँच की है। त्रिकुटा नगर पुलिस थाना क्षेत्र में स्थित एक मॉल के पास से एक आतंकी को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से 5 किलो IED बरामद हुआ है। वहीं श्रीनगर के परिमपोरा इलाके में सुरक्षा कर्मियों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैय्यबा के एक आतंकी और एक पाकिस्तानी आतंकी को मार गिराया।

दो एके-47 राइफलों सहित कई हथियार और बम सामग्रियाँ भी बरामद की गई हैं। इससे पहले बडगाम के नर्गल से नदीम अबरार नाम LeT आतंकी को गिरफ्तार किया गया। वो कई हत्याओं में वांछित था। वो LeT सरगना युसूफ कान्ट्रू का भी करीबी है। जिन पाकिस्तानी आतंकी को मुठभेड़ में मार गिराया गया, वो भी इसका ही सहयोगी था। हाइवे पर हमले की सूचना के बाद CRPF और जम्मू कश्मीर पुलिस पहुँची, जिसके बाद मुठभेड़ हुआ।

परिमपोरा नाका पर एक संदिग्ध गाड़ी को रोका गया। जब गाड़ी में पीछे बैठे व्यक्ति ने अपना बैग खोल कर उसमें से ग्रेनेड निकालना शुरू कर दिया। जब उसमें बैठे आतंकी को पुलिस पकड़ कर ले गई तो वो नदीम अबरार निकला। उसने बताया कि मलूरा के एक घर में आतंकियों ने हथियार रखे हैं। वहाँ जब पुलिस पहुँची तो एक पाकिस्तानी आतंकी गोलीबारी करने लगा। इस एनकाउंटर में एक CRPF जवान घायल हो गया और सर्च पार्टी के साथ गया नदीम अबरार भी मारा गया।

‘सिख लड़की 27 की, मुस्लिम लड़का 37 का, 7 साल का इश्क…’: जबरन धर्मान्तरण पर जफर सरेशवाला का पर्दा

जम्मू-कश्मीर में सिख लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। इसी मामले में मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के पूर्व चांसलर और बिजनेसमैन जफर सरेशवाला पर कट्टरपंथियों की करतूत पर पर्दा डालने का आरोप लगा है। सरेशवाला ने सिख लड़कियों के धर्मान्तरण पर दावा किया कि एक सिख लड़की 27 साल की है। 37 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति से 7 साल से प्यार करती थी और अपनी मर्जी से इस्लाम में परिवर्तित हुई।

हालाँकि, सरेशवाला का यह प्रोपेगेंडा ज्यादा देर नहीं चल सका। लेखक अमन बाली ने अपने ट्वीट में जफर सरेशवाला द्वारा किए गए दावों का खंडन कर दिया। बाली ने जफर के दावों को फर्जी करार दिया और कहा कि वह दो सिख लड़कियों के कथित जबरन धर्म परिवर्तन को व्हाइटवॉश करने के लिए दो अलग-अलग मामलों को आपस में जोड़ रहे हैं।

बाली ने ट्वीट किया, “झूठ। यह सत्य नहीं है। दो मामले हैं। रैनवारी मामले में लड़की उम्र 18 साल है और वह मानसिक तौर पर अस्थिर है। मेहजूर नगर वाले मामले में लड़की 32 साल की है। अपराध पर पर्दा डालने की यह कैसी कोशिश है।”

बाली ने यह ट्वीट जफर सरेशवाला के उस ट्वीट के जवाब में किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि जबरन धर्म परिवर्तन पर लोगों का गुस्सा पहले से प्रेरित है। जफर ने दावा किया था कि उन्होंने कश्मीर में ‘महत्वपूर्ण लोगों’ से बात की है, जिनसे उन्हें इस बात का पता चला है कि सिख महिला के जबरन धर्मांतरण और निकाह की कहानी में कोई सच्चाई नहीं है।

सरेशवाला ने ट्वीट किया, “सिख लड़की 27 साल की है, मुस्लिम लड़का 37 साल का है और वे पिछले 7 सालों से प्यार में थे। मजिस्ट्रेट के सामने अदालत में लड़की ने अपने प्यार का इजहार किया और कहा कि उसने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन किया है। अब जहर फैलाने वाले घर जाएँ और आराम करें।”

सिख लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला

जम्मू-कश्मीर में इसी महीने 26 जून 2021 को दो सिख लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कश्मीर के बडगाम जिले की रहने वाली एक 18 वर्षीय सिख लड़की को बहला-फुसलाकर उससे इस्लाम कबूल करवा लिया गया। इसी कड़ी में दूसरा मामले श्रीनगर के महजूर का सामने आया। उस मामले में सिख लड़की अपने मुस्लिम दोस्त के साथ एक कार्यक्रम में शामिल हुई। वहाँ से कथित तौर पर उसे किडनैप कर उसकी शादी एक मुस्लिम से करा दी गई। लड़की बालिग थी।

इस मामले के सामने आने के बाद इंटरनेट पर काफी हंगामा खड़ा हुआ। मामले में लोगों ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की। शिरोमणि अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से सोशल मीडिया पर उठाया और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

इस मामले में बडगाम गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार संतपाल सिंह के मुताबिक, उस लड़की की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम युवक ने प्यार और शादी का झाँसा देकर उसे फँसाया। उन्होंने कहा कि एक सिख लड़की को जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया गया। उन्होंने कहा कि ये स्पष्ट रूप से ‘लव जिहाद’ का मामला है और सरकार इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।”

सरदार संतपाल ने कहा कि उन्होंने बताया कि एसपी ने लिखित में आश्वासन दिया था कि सिख लड़की को खोज कर परिवार के हवाले किया जाएगा, लेकिन कोर्ट का आदेश उनके खिलाफ आ गया। उन्होंने कहा, “पुलिस निरीक्षक ने हमें लिखित में आश्वासन दिया था कि लड़की को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे उन्हें सौंप दिया जाएगा। हालाँकि, जज ने मुस्लिम पक्ष के हक़ में फैसला दिया और लड़की को उसे ही सौंप दिया।”

बीवी ने ‘मौलवी’ का गुप्तांग काटा, हिन्दू पुजारी की तस्वीर लगा लिखा ‘इंडियन प्रीस्ट’: विरोध के बाद न्यूयॉर्क पोस्ट ने डिलीट किया ट्वीट

अमेरिकी मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क पोस्ट (NYP) ने अपना हिन्दू विरोधी रवैया दिखाया है। NYP ने हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए एक खबर में ‘Indian Priest’ लिखा, जिससे ऐसा प्रतीत हो कि ‘भारतीय पुजारी’ की बात हो रही है। साथ ही उसने एक हिन्दू साधु की तस्वीर भी लगा डाली। जबकि ये खबर वकील अहमद नाम के एक मौलवी को लेकर थी, जिसकी पत्नी ने उसका गुप्तांग काट डाला। क्या इस नाम का कोई मौलवी हिन्दू हो सकता है?

NYP ने अपनी खबर के शीर्षक में लिखा, “तीसरी शादी की चाहत करने पर भारतीय प्रीस्ट की पत्नी ने उसके गुप्तांग को काट डाला”। साथ ही खबर के भीतर भी मौलवी वकील अहमद को ‘द होली मैन ऑफ इंडिया’ कह कर सम्बोधित किया गया। इसके बाद बताया गया कि उस 57 वर्षीय व्यक्ति का नाम वकील अहमद है। हालाँकि, खबर को लेकर विरोध होने के बाद NYP ने एक पुलिस कर की प्रतीकात्मक तस्वीर लगा दी।

NYP की इस करतूत का दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भी विरोध किया। उन्होंने लिखा, “न्यूयॉर्क पोस्ट एक हिन्दू पुजारी की तस्वीर का उपयोग कर रहा है, जबकि अपराधी का नाम मौलवी वकील अहमद है। ये NDTV की तरह नीच प्रोपेगंडा और घृणा फ़ैलाने वाली पत्रकारिता का एक उदाहरण हुआ।” साथ ही उन्होंने लिखा कि NYP को शर्म आनी चाहिए। कपिल मिश्रा ने साथ ही खबर ला स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।

अब न्यूयॉर्क पोस्ट ने उस खबर की ट्वीट को भी डिलीट कर दिया है और खबर की तस्वीर भी बदल दी है। दरअसल, ये घटना उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की है। एक मौलवी को तीसरी बीवी की चाहत कुछ ऐसी हुई कि उसकी जान ही चली गई। निकाह की जिद करने पर पहली बीवी ने मौलवी के प्राइवेट पार्ट पर छूरी से हमला कर दिया, जिससे मौलवी की मौत हो गई। पुलिस ने हत्या के आरोप में मौलवी की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने मृतक की पहली पत्नी हाजरा से पूछताछ की, जिसने हत्या की बात कबूल कर ली। हाजरा ने पुलिस को बताया कि मृतक मौलवी वकील अहमद ने पहले ही दो निकाह कर रखे थे। पहली पत्नी हाजरा ही थी। दोनों की 5 बेटियाँ थीं, जिनमें से एक बेटी अविवाहित थी। मौलवी ने दूसरा निकाह भी कर लिया, लेकिन दूसरी पत्नी 6 महीने में ही उसे छोड़ गई। हाजरा ने पुलिस को बताया कि मौलवी तीसरा निकाह करने की बात कर रहा था, जबकि हाजरा चाहती थी कि उसकी अविवाहित बेटी का निकाह पहले हो।

असल में मौलवी का दोनों पत्नियों के साथ खासा झगड़ा भी हुआ था। भैरों कला थाना क्षेत्र के शिकारपुर गाँव में हुई इस घटना से पहले मौलवी ने अपनी एक बीवी की पिटाई भी की थी। इसीलिए, बीवी ने किचन के चाकू का इस्तेमाल कर के उसके प्राइवेट पार्ट पर हमला किया। साथ ही वो जल्दी-जल्दी में मौलवी का अंतिम संस्कार भी करना चाहती थी, लेकिन आसपास के लोगों को शक हो गया और पुलिस पहुँच गई।