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पॉक्सो और IT एक्ट में Twitter पर दिल्ली पुलिस ने किया केस दर्ज: चाइल्ड पोर्नोग्राफी दिखाने पर NCPCR ने की थी शिकायत

आईटी नियमों को न मानने के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर लंबे समय से विवादो में है। ऐसे में अब दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने भी ट्विटर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है। ये केस प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड पोर्नोग्राफिक कंटेंट दिखाने के लिए किया गया है। मामले के संबंध में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिकायत की थी।

जानकारी के अनुसार, ट्विटर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है। इसमें बाल यौन शोषण से संबंधित लिंक / सामग्री की उपलब्धता का हवाला दिया गया है। शिकायत ट्विटर इंक और ट्विटर कम्युनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब संभव है कि दिल्ली पुलिस इस मामले में पूछताछ और आगे की कार्रवाई के लिए जल्द ही ट्विटर इंडिया को नोटिस भेज सकती है।

बता दें कि इससे पहले NCPCR ने ये मामला उठाते हुए 29 जून 2021 को दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम डिपार्टमेंट के डीसीपी को पेश होने का आदेश दिया था। इसके साथ ही ट्विटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा था। आयोग ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी अन्येश रॉय से पूछा था कि पिछले महीने 29 मई 2021 को पत्र लिखने के बाद भी ट्विटर के खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लिया।

NCPCR के प्रमुख प्रियंक कानूनगो ने एएनआई को बताया था कि डीसीपी साइबर क्राइम को ट्विटर के खिलाफ फाइल होने वाले एफआईआर की एक कॉपी के साथ व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने को कहा है। आयोग ने कहा, “ट्विटर ने पोर्नोग्राफिक और बाल यौन दुर्व्यवहार को लेकर NCPCR द्वारा की गई पूछताछ के दौरान झूठी और भ्रामक जानकारी दी थी, जो पॉक्सो अधिनियम के तहत एक गंभीर अपराध था।”

उल्लेखनीय है कि नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने दिल्ली पुलिस को अपनी हाल की पूछताछ के आधार पर ट्विटर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था। आयोग ने पत्र में दावा किया था कि माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफार्म ट्विटर पर बाल यौन दुर्व्यवहार सामग्री (सीएसएएम) आसानी से मिल जा रही है। आयोग ने यह भी कहा था कि ट्विटर पर डार्क वेब टूलकिट भी उपलब्ध है। ऐसे में यह कंटेंट आसानी से सभी तक पहुँच रहा है।

दिल्ली पुलिस के कमीशनर एस एन श्रीनिवासन को लिखी शिकायत में ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर का भी नाम था। बताया गया था कि आयोग को मो जुबैर द्वारा ऑनलाइन स्टॉकिंग करने के मामले में शिकायत मिली जहाँ नाबालिग लड़की तो धमकियाँ मिल रही हैं और साइबर सेल द्वारा मामला दर्ज होने के बाद भी ट्विटर उसके हैंडल पर कार्रवाई नहीं कर रहा। आयोग ने कहा था कि वह इस मामले पर संज्ञान ले रहे हैं जिसमें नाबालिग की तस्वीर सर्कुलेट की जा रही है। साथ ही बाकी बिंदुओं में अपनी बात रखते हुए प्रियंक कानूनगो ने दिल्ली पुलिस से पॉक्सो एक्ट की धारा 11, 15 और 19 व आईटी एक्ट व आईपीसी के प्रावधानों के तहत ट्विटर के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।

जबरन इस्लाम कबूल करवा निकाह था ‘प्यार’, सिख से ब्याह ‘पागलपन’: कट्टरपंथियों-लिबरलों ने बदली चाल

जम्मू कश्मीर में दो सिख लड़कियों का अपहरण कर लिया गया था और जबरन उनका धर्मान्तरण करवा दिया गया था। उन्हीं दो लड़कियों में से एक हैं मनमीत कौर। मनमीत कौर का कथित तौर पर अपहरण करने के बाद जम्मू कश्मीर में एक मुस्लिम से उनका निकाह करवा दिया गया था। पंज प्यारों की अनुमति मिलने के बाद उनकी शादी सुखबीर सिंह से दोबारा कराई जाएगी। शादी मंगलवार दोपहर को पुलिस और लड़की के परिजनों के सामने होनी थी।

इस मामले में सिख कार्यकर्ता अमन बाली ने ट्विटर पर जानकारी दी कि कौर पंज प्यारों की अनुमति के बाद सुखबीर सिंह नाम के एक व्यक्ति से दोबारा शादी करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इसके लिए हामी भी भर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक मनमीत कौर का अपहरण कर लिया गया था और कथित तौर पर मुस्लिम व्यक्ति से उनका निकाह कराने से पहले उन पर इस्लाम कबूलने का दवाब डाला गया था। बताया गया था कि कौर मानसिक रूप से विक्षिप्त थीं और उसे एक मुस्लिम व्यक्ति ने प्रेम और निकाह के बहाने उसका धर्म परिवर्तन करने की कोशिश की थी।

बाली ने एक ऑडियो क्लिप भी शेयर की है, जिसमें पीड़ित लड़की के पिता ने अपनी व्यथा व्यक्त की है। इससे पहले इस बात की अटकलें लगाई जा रही थीं कि वास्तव में लड़की का अपहरण किया गया था या नहीं? लेकिन, लड़की के पिता ने इन सभी कयासों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि उनकी बेटी का अपहरण किया गया था। बाली द्वारा शेयर किए गए ऑडियो क्लिप में पिता को रोते हुए सुना जा सकता है। इसमें वो अपनी पीड़ा बयाँ करते हुए कश्मीर में उन सिख लड़कियों को बचाने की भीख माँगते हैं, जो अपहरण और जबरन धर्मान्तरण की पीड़ित हैं।

लड़की के पिता ने मामले में पुलिस की मिलीभगत को लेकर भी खुलासा किया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में पुलिस की मिलीभगत है, इसीलिए उसने पीड़ित परिवार की कोई मदद नहीं की। पीड़िता के पिता की ऑडियो बातचीत को अमान बाली ने अपने ट्विटर पेज पर शेयर किया था। ऑपइंडिया इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

पीड़िता के पिता ने सिख समुदाय से भी मदद की गुहार लगाते हुए कहा है कि वह दोबारा से अपनी बच्ची को नहीं बचा पाएँगे और अपराधी उनकी बेटी के लिए फिर से वापस आएँगे। मनमीत कौर की सहमति के बाद ही पंज प्यारों ने सुखबीर से उनकी शादी की घोषणा की।

अब माफी, पिघले इस्लामिस्ट

मनमीत कौर की शादी को लेकर पंच प्यारों के ऐलान के बाद अब इस्लामिस्ट माफी माँगने लगे हैं। जबकि, इससे पहले मुस्लिमों ने अपहरण और जबरन धर्नमान्तरण की वारदात को सहमति से किया गया निकाह बताया था। कट्टरपंथी इस्लामी लड़की को बचाए जाने और उसकी मर्जी से उसी के समुदाय के लड़के से शादी किए जाने से नाराज थे।

सोशल मीडिया यूजर इफरा जान को यह विश्वास ही नहीं हो रहा है कि लड़की की दोबारा से सिख व्यक्ति के साथ शादी की जा रही है। इससे पहले इफरा ने इसे सहमति से किया गया निकाह बताते हुए 18 साल की लड़की की कथित जबरन निकाह का बचाव किया था। लेकिन अब वह लड़की के सुखबीर से विवाह करने पर उसके मानसिक संतुलन पर सवाल उठा रही है। जान ने इस शादी को जबरन की जा रही शादी करार दिया है।

इसी तरह से दूसरे इस्लामिक समर्थक भी मनमीत कौर के सुखबीर सिंह से विवाह करने पर स्तब्ध हैं। कल तक जो दावा करते थे कि लड़की अपने लिए लिए खुद निर्णय ले सकती है, आज वही उसके मानसिक संतुलन पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में दो सिख लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला

जम्मू-कश्मीर में इसी महीने 26 जून 2021 को दो सिख लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कश्मीर के बडगाम जिले की रहने वाली एक 18 वर्षीय सिख लड़की को बहला-फुसलाकर उससे इस्लाम कबूल करवा लिया गया। इसी कड़ी में दूसरा मामला श्रीनगर के महजूर का सामने आया। उस मामले में सिख लड़की अपने मुस्लिम दोस्त के साथ एक कार्यक्रम में शामिल हुई। वहाँ से कथित तौर पर उसे किडनैप कर उसका निकाह एक मुस्लिम से करा दिया गया। लड़की बालिग थी।

इस मामले के सामने आने के बाद इंटरनेट पर काफी हंगामा खड़ा हुआ। मामले में लोगों ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की। शिरोमणि अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से सोशल मीडिया पर उठाया और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

इस मामले में बडगाम गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार संतपाल सिंह के मुताबिक, उस लड़की की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम युवक ने प्यार और शादी का झाँसा देकर उसे फँसाया। उन्होंने कहा कि एक सिख लड़की को जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया गया। उन्होंने कहा कि ये स्पष्ट रूप से ‘लव जिहाद’ का मामला है और सरकार इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।”

सरदार संतपाल ने कहा कि उन्होंने बताया कि एसपी ने लिखित में आश्वासन दिया था कि सिख लड़की को खोज कर परिवार के हवाले किया जाएगा, लेकिन कोर्ट का आदेश उनके खिलाफ आ गया। उन्होंने कहा, “पुलिस निरीक्षक ने हमें लिखित में आश्वासन दिया था कि लड़की को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे उन्हें सौंप दिया जाएगा। हालाँकि, जज ने मुस्लिम पक्ष के हक़ में फैसला दिया और लड़की को उसे ही सौंप दिया।”

वायनाड में विकास पैदा करेगा बॉलीवुड, राहुल गाँधी बस पत्र लिखेंगे: फटी जेब वाले MP का ‘मसीहा’ भी सोनू सूद

अब राहुल गाँधी के वायनाड का विकास एक बॉलीवुड अभिनेता करेगा। जी हाँ, आपने बिलकुल ठीक सुना। जो काम देश पर सबसे लंबे समय तक राज़ करने वाले परिवार के वारिस से नहीं हो पा रहा है, उसे फिल्म इंडस्ट्री में अधिकतर सहायक किरदार निभाने वाला एक अभिनेता करेगा। बात ये है कि राहुल गाँधी ने वायनाड में मोबाइल नेटवर्क के समस्या की बात उठाई है, जिसके बाद सोनू सूद ने वहाँ मोबाइल टॉवर लगवाने का वादा किया है।

कहीं ऐसा तो नहीं है कि राहुल गाँधी बहती गंगा में हाथ धोना चाहते हैं और इसीलिए खुद को ‘गरीब’ दिखा कर सोनू सूद से मदद के लिए ये सब कर रहे हैं? कहीं उन्हें ऐसा तो नहीं लगता कि सोनू सूद उनकी ‘फ़टे कुर्ते वाली गरीबी’ पर पसीज जाएँगे और वायनाड में उनकी जगह वही विकास पैदा कर डालेंगे? अगर पत्र लिखने से विकास पैदा होता तो जवाहरलाल नेहरू के 17 साल राज करने के बाद भी भारत गरीब नहीं रहता।

आगे बढ़ने से पहले पूरे मामले को समझ लेते हैं। केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ने अपने संसदीय क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्रीय IT मंत्री रविशंकर प्रसाद को लिखे पत्र में कहा है कि इससे जंगल में रहने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने इंटरनेट को ‘मूलभूत मानवाधिकार’ की श्रेणी में रखते हुए केंद्र सरकार से कहा कि वो वायनाड के लोगों को मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराए।

उन्होंने दावा किया कि लोग मोबाइल इंटरनेट का प्रयोग करने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं और विद्यार्थी पढ़ नहीं पा रहे हैं, किसानों-छोटे व्यापारियों को बाजार तक पहुँच नहीं मिल रही है और इंटरनेट पर आधारित सार्वजनिक सेवाओं का लोग इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बच्चे कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़ सकते हैं, जिससे बाल-विवाह बढ़ेगा। उनका कहना है कि इससे पिछड़े समुदाय के बच्चे अपनी योग्यता अनुसार आगे नहीं बढ़ पाएँगे।

क्या 4 बार का सांसद और 10 साल पर्दे के पीछे से केंद्र सरकार चलाने वाली सोनिया गाँधी के बेटे राहुल इतने लाचार हैं कि एक मोबाइल टॉवर लगवाने के लिए उन्हें पत्र लिखना पड़ रहा है? फिर तो उन्हें वायनाड में आवगमन की सुविधा बढ़ाने के लिए अमिताभ बच्चन से मदद माँगनी चाहिए, ‘सूर्यवंशम’ में उन्होंने ऐसा कर दिखाया था। या फिर वो महेश बाबू को वायनाड भेज कर वहाँ के गाँवों का विकास क्यों नहीं करवा देते, वो दक्षिण के भी हैं।

इधर अभिनेता सोनू सूद ने वायनाड में एक टीम भेज कर मोबाइल टॉवर इनस्टॉल कराने का वादा किया। सोनू सूद के लिए ये कोई नई बात नहीं है, क्योंकि हरियाणा के मोरनी स्थित दपना गाँव में वो ऐसा कर चुके हैं। उन्होंने वहाँ एयरटेल का एक टॉवर इनस्टॉल करवाया था। एक बच्चे की पढ़ाई के लिए पेड़ के नीचे नेटवर्क खोजते हुए तस्वीर वायरल हुई थी, जिसके बाद उन्होंने ऐसा किया। इसीलिए, आश्चर्य नहीं होना चाहिए जब वो वायनाड में भी ऐसा कर दें।

‘गरीब’ राहुल गाँधी अगर चाहें तो अपने फ़टे कुर्ते को सिलाने के लिए ‘सूई-धागा’ के वरुण धवन या फिर ‘स्त्री’ के राजकुमार राव की सहायता भी ले सकते हैं। सार ये है कि राहुल गाँधी सिर्फ पत्र लिखने में खुद को व्यस्त रखेंगे और वायनाड का विकास बॉलीवुड करेगा। राहुल गाँधी अपना फटा कुर्ता दिखाएँगे और वायनाड में मोबाइल टॉवर सोनू सूद लगवाएँगे। 15 सालों में अगर उन्होंने अमेठी के लिए एक भी ऐसा पत्र लिखा होता तो वहाँ की तस्वीर बदल गई होती और उन्हें हरा कर नहीं भेजा जाता।

लेकिन, सवाल ये है कि वायनाड के लिए वायनाड के सांसद के अलावा बाकी सब काम केंद्र सरकार और सोनू सूद करें? भारत में पहला मोबाइल फोन कॉल अगस्त 1995 में पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति ने तब के केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री सुखराम को किया था। उसके 9 साल बाद यूपीए सत्ता में आई और 10 साल कॉन्ग्रेस की सरकार रही। उस दौरान वायनाड की नेटवर्क कनेक्टिविटी के लिए क्या किया गया?

वो स्त्री थी लेकिन पुरुष बन गई, फिर बच्चे को दिया जन्म: दुनिया का वो मर्द जो पहली बार बना था ‘माँ’

गूगल पर आप सर्च Thomas Beatie (थॉमस बैटी) सर्च करें तो एक अमेरिकी पुरुष के बच्चे पैदा करने की खबरों के ढेरो लिंक मिल जाएँगे। पर क्या आप जानते हैं कि बैटी पहली बार ‘माँ’ 2008 में 29 जून को ही बने थे। वे दुनिया के पहले ऐसे पुरुष हैं जो प्रेग्नेंट हुए और 2008 में एक बेटी (सुसान) को जन्म दिया।

पेशे से पब्लिक स्पीकर और वकील बैटी के चार बच्चे हैं। वे खुद 1974 में अमेरिका के हवाई में पैदा हुए थे। पैदाइश स्त्री के तौर पर हुई। तब उनका नाम ट्रेसी था। जेंडर चेंज करवा 2002 में वह महिला से पुरुष बन गए। इसके बाद वर्ष 2003 में उन्होंने नैंसी से शादी की। 2007 में थॉमस प्रेग्नेंट हुए और उन्होंने 2008 में एक बच्चे को जन्म दिया। यह सब उनके शरीर में महिला प्रजनन अंगों के होने के कारण संभव हुआ है।

दरअसल, इस लिंग परिवर्तन में हार्मोन टेस्‍टोस्‍टेरॉन का इस्‍तेमाल किया जाता है। इससे महिला की आवाज पुरुषों की तरह भारी हो जाती है और अन्य शारीरिक बदलाव भी होते हैं। इससे प्रजनन तंत्र में भी बदलाव आता है। लेकिन बैटी ने लिंग परिवर्तन के वक्त इस हार्मोन का इस्तेमाल नहीं किया था। इसकी वजह से उनके प्रजनन तंत्र में बदलाव नहीं आया था।

थामस बेटी के इंस्टाग्राम अकाउंट की तस्वीर

पत्नी के लिए माँ बने बेटी

थॉमस बैटी ने 2003 में नैंसी से शादी की। हर दंपति की तरह ही उन्होंने भी फैमिली प्लानिंग शुरू करने की ठानी। लेकिन, नैंसी के शरीर में गर्भाशय नहीं होने के कारण वह बच्चे पैदा नहीं कर सकती थी। बावजूद इसके ये कपल अपने बच्चे को खुद ही पैदा करना चाहता था। तब बैटी ने डॉक्टर की तलाश शुरू की जो गर्भाधान में उनकी मदद कर सके। 9 डॉक्टरों ने इससे इनकार दिया। इसके बाद बेटी ने खुद से अपना गर्भाधान किया।

बैटी की पत्नी नैंसी ने पालतू जानवरों की दुकान से एक सीरिंज खरीदकर उसी के जरिए अपने पति का गर्भाधान किया। बैटी ने बताया था कि उन्हें इस बात का आश्चर्य होता था कि गे, लेस्बियन और ट्रांसजेंडर ग्रुप्स ने भी उन्हें सपोर्ट नहीं किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2008 में बच्ची पैदा होने के बाद थॉमस बैटी ने अपनी बच्ची को स्तनपान नहीं कराया था। उनकी जगह उनकी पत्नी नैंसी ने बच्चे को स्तनपान कराया।

31 जुलाई तक ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ स्कीम लागू करें सभी राज्य: प्रवासी मजदूरों के हित में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तमाम राज्य वन नेशन वन राशन कार्ड की स्कीम 31 जुलाई तक लागू करें। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने मंगलवार (जून 29, 2021) को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि हर राज्य अनिवार्य तौर पर वन नेशन वन राशन कार्ड की स्कीम लागू करें। ताकि प्रवासी मजदूरों को देश के किसी भी हिस्से में राशन कार्ड पर सरकारी स्कीम फायदा मिल सके।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्रशासित प्रदेश कोरोना की महामारी जब तक है, तब तक वो प्रवासी मजदूरों के लिए सामुदायिक रसोई संचालित करें। शीर्ष अदालत ने राज्यों को 1979 के कानून के तहत सभी ठेकेदारों को रजिस्टर करने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के वेलफेयर के लिए अन्य निर्देश भी जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह एनआईसी से संपर्क करे सभी असंगठित मजदूरों और प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल तैयार करे। ये प्रक्रिया 31 जुलाई तक शुरू हो जानी चाहिए।

राज्‍यों को डिमांड के आधार पर अनाज मुहैया कराए केंद्र

केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया है कि वह प्रवासी मजदूरों के अनाज की आपूर्ति के लिए राज्यों के डिमांड के आधार पर उन्हें अनाज मुहैया कराए। साथ ही राज्यों को कहा है कि वह मजदूरों को जब तक कोरोना महामारी की स्थिति बनी हुई है ड्राई राशन मुहैया कराता रहे। साथ ही राज्यों को कहा है कि वह कम्युनिटी किचन चलाता रहे और जब तक कोरोना महामारी की स्थिति है कम्युनिटी किचन चले ताकि प्रवासी मजदूरों को उसका लाभ मिल सके। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को कहा है कि तमाम संबंधित संस्थान और कॉन्ट्रैक्टर को इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कर्स एक्ट 1979 के तहत रजिस्टर्ड किया जाए।

मजदूरों की रजिस्‍ट्रेशन प्रक्रिया तेज की जाए

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले आदेश में कहा था कि प्रवासी मजदूरों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया काफी धीमी है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया निश्चित तौर पर तेज किया जाए ताकि कोविड के समय इन प्रवासी मजदूरों को बेनिफिट वाली योजनाओं का लाभ मिल सके। अदालत ने कहा कि प्रवासी मजदूरों और गैर संगठित क्षेत्रों के मजदूरों के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तेज की जाए। रजिस्ट्रेशन के बाद ही अथॉरिटी से उनकी पहचान सुनिश्चित होगी और उन्हें तमाम बेनिफिट योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कोविड के मद्देनजर प्रवासी मजदूरों को होने वाली परेशानी के मद्देनजर संज्ञान लिया था और उस मामले की सुनवाई के दौरान उक्त आदेश पारित किए गए हैं।

क्या है वन नेशन वन राशन कार्ड

वन नेशन-वन राशन कार्ड हर राज्य में लागू होगी। प्रवासी किसी भी राज्य के राशन डिपो से इस कार्ड की मदद से राशन ले सकता है। अगस्त 2020 तक यह व्यवस्था पूरे देश में लागू होगी। वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना में देश में रहने वाली किसी भी नागरिक का एक ही राशन कार्ड होगा। वह कहीं से भी राशन ले सकेगा। इस स्कीम का फायदा उन लोगों को मिलेगा, जिसके पास राशन कार्ड होगा। राशनकार्ड धारक देश के किसी भी हिस्से की सरकारी राशन दुकान से कम कीमत पर अनाज खरीद सकेंगे।

स्कीम से क्या-क्या होगा फायदा

इस स्कीम का सबसे बड़ा फायदा गरीबों को मिलेगा। एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होने वालों को फायदा मिलेगा। फर्जी राशन कार्ड पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। सभी राशन कार्डों को आधार कार्ड से जोड़ने और प्वाइंट ऑफ सेल मशीन के जरिए अनाज बाँटने की व्‍यवस्‍था जल्द शुरू होगी।

‘संदिग्ध PIL सिस्टम के लिए बड़ा खतरा’: सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (29 जून 2021) को सेंट्रल विस्टा के निर्माण कार्य को रोकने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इसमें इंडिया गेट के आसपास निर्माण कार्य को रोकने को लेकर निर्देश देने को लेकर याचिका दायर की गई थी। शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का समर्थन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने कोरोना का कारण बताया था, जो कि सेलेक्टिव है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को संभावित दृष्टिकोण करार दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि कोरोना का हवाला देकर एक ही प्रोजेक्ट रोकने की माँग क्यों की? क्या उसने अन्य प्रोजेक्ट के बारे मे कोई रिसर्च की थी? सिर्फ एक प्रोजेक्ट को क्यों चुना?

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के ठेकेदार द्वारा कोरोना की गाइडलाइंस का पालन करने के बावजूद याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका को आगे बढ़ाया।

इस केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने की। इसमें जस्टिस एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और अनिरुद्ध बोस शामिल रहे। बेंच ने याचिकाकर्ता को एक ही परियोजना को टार्गेट करने के लिए फटकार लगाते हुए कहा कि इसी तरह की परियोजनाएँ कई जगह चल रही हैं।

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने याचिकाकर्ताओं के वकील सिद्धार्थ लूथरा से स्पष्ट रूप से पूछा कि आखिर एक ही परियोजना को क्यों चुना गया? उन्होंने कहा, “क्या जो निर्माण कार्य पहले से चल रहे थे उनके बारे में रिसर्च किया? क्या आपकी याचिका में ये सारी चीजें दिखाई देती हैं?”

इस पर याचिका के एनेक्सचर का जिक्र करते हुए लूथरा ने जवाब दिया, “हमने सेंट्रल विस्टा के लिए मिली अनुमति को चुनौती दी थी। साथ ही हमने DDMA के आदेश को भी रिकॉर्ड में रखा था, जिसने साइट पर निर्माण की अनुमति दी थी। हमने CPWD से आवाजाही के लिए जारी किए गए परमीशन लेटर को भी रिकॉर्ड में शामिल किया है, जिसमें इसे इशेंसियल सर्विस करार दिया है। हमने कहा है कि यह एक आवश्यक सेवा नहीं है।”

हालाँकि, सुनवाई के दौरान बेंच ने ये कई बार स्पष्ट किया कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के सभी कार्यों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में भी यही कहा गया है।

मामले में जस्टिस एमएम खानविलकर ने कहा, “आपकी चिंता यह थी कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट नियमों का पालन नहीं किया गया। लेकिन, जब यह पाया गया है कि इसमें नियमों का पालन किया जा रहा है तो याचिका पर कार्रवाई कैसे की जा सकती है।”

इस पर तर्क वकील लूथरा ने तर्क दिया कि उन्होंने निर्माण को रोकने की दलील ऐसे समय में दी थी, जब महामारी फैल रही थी। लूथरा के इस जवाब पर बेंच ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने की उनकी मंशा पर सवाल उठाया। क्योंकि लूथरा ने दावा किया था कि उनकी चिंता केवल निश्चित समय के लिए थी, जिस पर सरकार और उच्च न्यायालय ने जवाब दिया था।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, याचिका की पेंडेंसी के दौरान यह ऑन रिकॉर्ड है कि परियोजना का सही तरीके से पालन किया गया है। इस हलफनामें को चुनौती नहीं दी गई थी। बावजूद इसके याचिकाकर्ताओं ने उन कारणों के लिए याचिका को आगे बढ़ाया, जिसके बारे में वे पहले से जानते थे।”

इसके बाद लूथरा ने अपने क्लाइंट और याचिकाकर्ता अनुवादक अन्या मल्होत्रा और इतिहासकार सोहेल हाशमी व एक डॉक्युमेंट्री फिल्म निर्माता पर लगाए गए जुर्माने पर भी सवाल उठाया।

शीर्ष अदालत ने याचिकाओं को मोटिवेटेड करार देते हुए कहा, जुर्माने को माफ नहीं किया जा सकता है। वे (याचिकाकर्ता) हाई कोर्ट के निष्कर्षों को चुनौती नहीं दे सकते हैं, क्योंकि वो एक संभावित दृष्टिकोण था। हाई कोर्ट ने एक लाख रुपए का जुर्माना इसलिए लगाया था क्योंकि याचिका मोटिवेटेड थी। हम याचिका को खारिज करते हैं।”

इसी के साथ शीर्ष अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में कोई हस्तक्षेप आवश्यक नहीं है।

जस्टिस माहेश्वरी ने टिप्पणी की, “हमारी व्यवस्था को संदिग्ध जनहित याचिकाओं ने काफी दिक्कतें दी हैं। पीआईएल की अपनी पवित्रता है, जो कि हम सभी के लिए है। लेकिन, इसे दायर करने का यह सही तरीका नहीं है।”

पिछले महीने दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका

सेंट्रल विस्टा परियोजना पर रोक के लिए दायर याचिका को पिछले महीने ही दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने मोटिवेटेड याचिका दायर करने के लिए याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

वहीं केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिका परियोजना को रोकने के लिए एक “मुखौटा” और “स्वांग” थी, जिस पर खंडपीठ ने सहमति व्यक्त किया। साथ ही याचिको को हाईली मोटिवेटेड करार दिया।

सिख महिला का इस्लामी धर्मांतरण, उस्मान ने किया निकाह: जम्मू-कश्मीर के बाद अब UP से सामने आई घटना

जम्मू-कश्मीर में सिख लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आने के बाद अब उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से भी ऐसी ही घटना उजागर हुई है। खबर है कि यहाँ पहले एक सिख महिला को डरा-धमकाकर उसका धर्म परिवर्तन करवाया गया और फिर उससे निकाह कर लिया गया। शिकायत दर्ज होने पर एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने इस संबंध में ट्वीट कर बताया है कि मामले में खतौली थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। मामले को उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्मपरिवर्तन अध्यादेश 2020 की धारा 3 और 5 (1) के तहत दर्ज किया गया है। आरोपितों की पहचान उस्मान और नदीम के तौर पर हुई है। पीड़िता की पहचान अमनदीप कौर के तौर पर बताई गई है।

अमनदीप ने शिकायत में बताया है कि खतौली कस्बे के उस्मान ने अपने भाई नदीम के साथ मिलकर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करवाए। बाद में इन्हीं सर्टिफिकेट के आधार पर अमनदीप कौर का नाम जन्नत कुरैशी, पुत्री इकबाल कुरैशी, निवासी खतौली दिखाकर उसके साथ निकाह कर लिया। शिकायत के अनुसार, अमनदीप कौर और उस्मान एक-दूसरे को 2 साल से जानते थे। इस दौरान उस्मान ने शादी का झाँसा देकर पीड़िता का यौन शोषण भी किया।

उस्मान पर ये भी आरोप है कि उसने पीड़िता की 3 लाख रुपए की एफडी तुड़वाकर उससे 2 लाख रुपए उधार लिए और बाद में फर्जी तरीके से 19 मई 2021 को निकाह कर लिया। मामला प्रकाश में उस समय आया जब 21 जून 2021 को उस्मान ने एक अन्य मुस्लिम लड़की से निकाह किया। बाद में अमनदीप ने जब उस्मान से अपने रुपए माँगे और दूसरी शादी के बारे में पूछा तो उसके साथ उस्मान के भाई नदीम ने मारपीट की। इस मामले के उजागर होने के बाद सिख समुदाय में रोष था लेकिन योगी सरकार की ओर से त्वरित कार्रवाई ने माहौल शांत करवा दिया। अब नदीम की तलाश की जा रही है।

हिंदू जागरण मंच ने इस इस मामले में रविवार को प्रदर्शन किया था। संगठन के जिला संयोजक नरेंद्र पंवार का कहना था कि खतौली कस्बे में 2 दिन पूर्व हमीरपुर की दो लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम लड़कों द्वारा निकाह करने का मामला सामने आया था और अब फिर एक युवती का धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। इसे हिन्दू जागरण मंच बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा।

रामपुर से भी सामने आया था मामला

बता दें कि जम्मू कश्मीर में सिख लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन के मामले के बीच यूपी से यह सिख महिला से जुड़ा दूसरा मामला आया है। इससे पहले वाले मामले में एक सिख महिला के पति की मौत के बाद महफूज नाम के युवक ने सहारा देने के नाम पर उसका धर्मांतरण कर उसके साथ निकाह किया था। इतना ही नहीं उसके दोनों बेटों का खतना भी करवाया था। मामले में 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

महफूज पीड़ित महिला हरजिंदर कौर के पति का दोस्त था। घटना रामपुर जिले के बेरुआ गाँव की थी। इस मामले में सेफनी चौकी के इंचार्ज प्रवीण कटियार की तहरीर पर केस दर्ज किया गया था। पुलिस 12 मई 2021 की रात इस घटना की सूचना मिलने पर जब पहुँची तो एक चरपाई पर हरजिंदर और दूसरे पर उसके दो बेटे लेटे हुए थे जिनका खतना कराया गया था। उसका बड़ा बेटा 12 तो छोटा 10 साल का है।

महिला ने पुलिस को बताया था कि 8 मई 2021 को उसके पति का उत्तराखंड में एक सड़क हादसे में निधन हो गया। इसके बाद सहारा देने के नाम पर उसके पति का दोस्त महफूज उसे अपने गाँव ले आया। यहाँ उसने महिला का धर्म परिवर्तन करा उससे निकाह कर लिया। उसका नाम हरजिंदर कौर से बदलकर गुलिस्ता रख दिया। उसके दोनों बेटों का खतना कराने के बाद एक का नाम फरमान और दूसरे का अनस रख दिया गया था।

‘ट्विटर पर भारत का गलत नक्शा दिखाना गंभीर मसला, हलके में नहीं लेंगे’: MP के गृह मंत्री ने दिया कार्रवाई का आदेश

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ट्विटर द्वारा भारत का गलत नक्शा दिखाए जाने के सम्बन्ध में कार्रवाई का निर्देश दिया है। मिश्रा ने कहा, “लंबे समय से देश के विरोध में लगातार कुछ न कुछ चल रहा है। कभी भारत माता के बारे में अनर्गल बोलना तो कभी ट्विटर पर देश का गलत नक्शा दिखाना, ये सब गंभीर मसले हैं। इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता है। केंद्र और प्रदेश सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया है।

नरोत्तम मिश्रा ने आगे बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) विवेक जोहरी को निर्देश दिया है कि वो इस प्रकरण की जाँच कर के कानूनी कार्रवाई करें। अब इस मामले में केस दर्ज कर के सभी पहलुओं की जाँच की जाएगी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार इस घटना को लेकर गंभीर है। बता दें कि ट्विटर ने विरोध के बाद भारत के उस नक़्शे को हटा दिया था, जिसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख को भारत से अलग दिखाया गया था।

इधर अभी ट्विटर वाला मामला थमा भी नहीं था कि दिग्गज सर्च इंजन गूगल (Google) भी अब माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर की राह पर चल पड़ा है। गूगल ने अपने ‘ट्रेंड्स’ सेक्शन में भारत का गलत नक्शा दिखाया, जिसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख के हिस्सों को गायब कर दिया गया है। अगर आप गूगल के ट्रेंड सेक्शन में जाएँगे और भारत के मौजूदा ऑनलाइन सर्च ट्रेंड्स को चेक करेंगे तो पाएँगे कि उसी वेबपेज पर जो भारत का नक्शा है, वो गलत है।

सोमवार (28 जून, 2021) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के नक़्शे से अलग दिखाया था। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट की इस हरकत के बाद ही सरकार ने इसका खामियाजा भुगतने का इशारा कर दिया था। हालाँकि, मामला गरमाते ही ट्विटर ने वेबसाइट के कैरियर सेक्शन में दिख रहे नक्शे को बिना किसी स्पष्टीकरण के हटा लिया था। बीजेपी की आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने भी ट्विटर को उसकी गैर जिम्मेदाराना हरकत के लिए आड़े हाथों लिया था।

इश्तियाक ने किशोरी को सिर से पाँव तक अगरबत्ती से दागा: मीडिया ने बताया ‘तांत्रिक’, मजार को बना दिया ‘देवस्थल’

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक किशोरी को सिर से लेकर पाँव तक अगरबत्ती से दाग दिया गया। कई दिनों तक उसकी बेल्ट से पिटाई की गई। बाद में गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इस पूरे कृत्य को झाड़ फूँक के नाम पर इश्तियाक ने अंजाम दिया। उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। लेकिन मुख्यधारा की मीडिया ने अपनी रिपोर्टों में उसे ‘तांत्रिक’ बताकर पाठकों को गुमराह करने की कोशिश की। इतना ही नहीं इन रिपोर्टों में मजार को ‘देवस्थल’ भी बताया।

ये पूरा मामला रामकोट थाना क्षेत्र के साहबगंज स्थित मजार का है। इस मामले में पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर आरोपित इश्तियाक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक महोली कोतवाली क्षेत्र के एक गाँव की रहने वाली किशोरी अपनी मौसी के घर मिश्रिख कोतवाली क्षेत्र में घूमने गई थी। इस दौरान किशोरी बीमार हो गई और उसके पेट में दर्द होने लगा। इसके बाद परिवार वाले उसे रामकोट थाना क्षेत्र के साहब गंज में स्थित एक मजार पर ले गए।

हिंदुस्तान ने रिपोर्ट में मजार को देवस्थल बताया
साभार: दैनिक भास्कर
साभार: दैनिक जागरण

मजार पर बैठे इश्तियाक के द्वारा बताया गया कि किशोरी के ऊपर 11 भूतों ने कब्जा कर रखा है, जिसके बाद उसने किशोरी को 6 दिन रोकेने की परिजनों से बात कही। परिजन इस बात को मान गए और किशोरी को मजार पर ही छोड़ दिया। फिर इश्तियाक ने अपना घिनौना खेल शुरू किया और उसके शरीर को अगरबत्ती जलाकर जगह-जगह पर दाग दिया।

साभार: Zeenews

जब इश्तियाक का इससे भी मन नहीं भरा तो उसने बेल्ट से किशोरी की जमकर पिटाई की। गाँव के लोग बताते हैं कि किशोरी के साथ हो रही इस क्रूरता को देख वे भी सहम गए। फिलहाल पुलिस ने आरोपित इश्तियाक पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि मीडिया अक्सर मौलवियों को और फकीरों को ‘बाबा’ या ‘तांत्रिक’ लिख कर चलाता है, जिससे ऐसा लगता है जैसे आरोपित कोई हिन्दू साधु-संत ही हो। साथ ही फकीरों के झाड़-फूँक को भी ‘तंत्र-मंत्र’ लिख कर चलाता है। तांत्रिक शब्द से ऐसा प्रतीत होता है जैसे रेप का प्रयास करने वाला हिंदू हो, इसलिए मीडिया भी फकीरों और मौलवियों के पकड़े जाने पर भी ‘धर्मगुरु’ और ‘तांत्रिक’ शब्द का धड़ल्ले से इस्तेमाल तो करता ही है, उसकी असली पहचान छिपाने के लिए खबर की हेडिंग से भी खेलता है।

इससे पहले भी NDTV से लेकर कई मीडिया संस्थान भ्रामक हेडिंग्स के जरिए हिन्दुओं को बदनाम करते रहे हैं। मीडिया इससे पहले भी इस तरह का खेल कर चुका है। इसी तरह निकाह-हलाला के नाम पर एक युवती का बलात्कार करने वाले आरोपित अनवर खान का नाम NDTV ने उसे ‘बाबा’ कह कर छिपाया था, जैसे वो कोई हिन्दू साधु हो। इसी तरह एक अन्य बलात्कारी के मामले में नई दुनिया समेत कई मीडिया पोर्ट्ल्स ने इस खबर को प्रकाशित किया था और हेडलाइन में मुस्लिम इश्तियाक की जगह ‘तांत्रिक’ शब्द का प्रयोग किया था।

इसी तरह उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार में एक मस्जिद में बलात्कार की घटना सामने आई थी। मस्जिद में पानी लेने गई 12 साल की लड़की का मौलवी इलियास ने रेप किया था। ‘दैनिक भास्कर’ ने लिखा था– ‘धार्मिक स्थल पर हुई वारदात। जब किसी छोटे से छोटे मामले में भी मंदिर की पहचान नहीं छिपाई जाती, तो फिर मस्जिद की पहचान छिपाने का क्या उद्देश्य था? कई अन्य मीडिया संस्थान ने भी ऐसा किया।

मुख्तार अंसारी की जज से जेल में मनोरंजन के लिए टीवी और फिजियोथेरेपी के लिए डॉ की डिमांड, लगाया सौतेले व्यवहार का आरोप

उत्तर प्रदेश की बाँदा जेल में बंद बसपा के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी की सोमवार (28 जून 2021) को एंबुलेंस मामले में बाराबंकी की सीजेएम (CJM) कोर्ट में दूसरी वर्चुअल पेशी हुई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई के दौरान अंसारी ने नियमों का हवाला देते हुए अदालत से दो माँग की। पहली उसे डॉक्टरों की सलाह पर फिजियोथेरेपी कराने और दूसरी बैरक में मनोरंजन के लिए टेलीविजन लगाने की सुविधा दी जाए।

कोर्ट में मुख्तार अंसारी ने कहा, ”पूरे उत्तर प्रदेश में बंद कैदियों के मनोरंजन के लिए बैरकों में टेलीविजन की सुविधाएँ दी गई हैं। मेरे बैरक में भी टेलीविजन लगवा दें। मुझे बाँदा जेल प्रशासन तन्हाई में रख रहा है। अगर आप आदेश करेंगे तो मुझे टीवी की सुविधा मिल जाएगी।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मऊ से बसपा के पूर्व विधायक ने राज्य सरकार पर उसके साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उसने सीजेएम कोर्ट से आगे कहा कि मेडिकल बोर्ड ने फिजियोथेरेपी की सलाह दी है। मुझे यह सुविधा भी यहाँ नहीं मिल रही है। डॉक्टरों की सलाह को भी बाँदा जेल प्रशासन मानने को तैयार नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश कुमार ने सोमवार को मुकदमे के विवेचना अधिकारी के नहीं आने पर अगली सुनवाई 5 जुलाई को रखी है।

गौरतलब है कि अप्रैल 2021 में भी यूपी की बाँदा जेल में बंद अंसारी ने डॉक्टरों को अपनी कई नई बीमारियों के बारे में बताया था। उसने कहा था कि उसे आँखों से धुँधला दिख रहा है। इस पर डॉक्टरों ने कहा था कि उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, सिर्फ चश्मा बदला जाना है। इससे दो दिन पहले उसने गले में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम ने उनकी मेडिकल जाँच की थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं है।

बता दें कि फर्जी एंबुलेंस मामले के अभियुक्त मुख्तार अंसारी पंजाब की रोपड़ जेल में पेशी के दौरान फर्जी पते और दस्तावेजों के आधार पर एंबुलेंस UP-41 AT-7171 प्राप्त की थी। इसको लेकर मुख्तार अंसारी समेत 10 लोगों पर धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाकर एंबुलेंस रजिस्टर्ड कराए जाने समेत एंबुलेंस से अवैध हथियारों की सप्लाई किए जाने के मामले में कई धाराओं में बाराबंकी नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था।