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अल्पसंख्यक आयोग में ऋतुराज जैन, अनीता जैन, नवेन्दु सिंह: UP माइनोरिटी बोर्ड का पुनर्गठन, जानिए कौन-कौन बने सदस्य

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने शुक्रवार (जून 25, 2021) को उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक आयोग का पुनर्गठन किया। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने आयोग और इसके सदस्यों के पुनर्गठन को लेकर सूची जारी की। आगरा के अशफाक सैफी को ‘उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग’ का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सुरेश जैन ऋतुराज और अनीता जैन को भी आयोग का सदस्य बनाया गया है।

आयोग के सदस्य हैं – आगरा के अशफाक सैफी, वाराणसी के हैदर अब्बास चाँद, मेरठ के सुरेश जैन, शाहजहाँपुर के नवेन्दु सिंह, अलीगढ़ के सम्मान अफरोज खान, गोरखपुर के बक्सीस अहमद वारसी, लखनऊ की रूमाना सिद्दीकी और अनीता जैन। जैन समुदाय के लोगों ने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में अपने समुदाय से दो लोगों को प्रतिनिधित्व दिए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया।

बता दें कि आयोग के अध्यक्ष तनवीर हैदर उस्मानी का निधन अप्रैल 2019 में हो गया था, तभी से इस पद पर किसी की बहाली नहीं हुई थी। मौजूदा आयोग में कुल 8 सदस्य हैं। इन सभी का कार्यकाल 3 वर्षों का होगा। हालाँकि, किन्हीं अन्य कारणों से बीच में सरकार इन्हें हटा भी सकती है। नए अध्यक्ष अशफाक सैफी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव रहे हैं और भारत सरकार के मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के उपाध्यक्ष हैं।

वहीं सुरेश जैन ऋतुराज मेरठ के जैन समाज के बीच अच्छी पैठ रखते हैं। वो लगातार 10 बार से ‘मेरठ महानगर जैन समाज’ के अध्यक्ष हैं। अक्टूबर 2012 में उन्हें भाजपा महानगर अध्यक्ष चुना गया था। उससे पहले वो पार्टी के महानगर संयोजक थे। उन्हें भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी का करीबी माना जाता था। उन्हें फरवरी 2018 में भी राज्य के अल्पसंख्यक आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था।

वहीं नवेन्दु सिंह भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश मंत्री रह चुके हैं। साथ ही वो पार्टी के पुवायां नगर मंडल प्रभारी भी थे। हैदर अब्बास चाँद भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने तीन तलाक बिल का समर्थन किया था और इसके पक्ष में अभियान चलाया था। रूमाना सिद्दीकी पिछली बार भी आयोग की सदस्य थीं। मंत्री नंदी ने भरोसा जताया कि ये सभी अल्पसंख्यक के समस्याओं के समाधान में बेहतर प्रयास करेंगे।

बताते चलें कि पिछले अल्पसंख्यक आयोग में एक सदस्य पंजाबी और एक जैन समुदाय से था। पिछले 32 सालों से भाजपा से जुड़े अशफाक सैफी ने अध्यक्ष चुने जाने के बाद कहा, “मेरे जैसे एक छोटे से कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए मैं भाजपा का आभारी हूँ। मैं अल्पसंख्यक समुदायों के हित के लिए योजनाओं पर गंभीरता से कार्य करूँगा। उन्हें रोजगार और शिक्षा देने समेत अन्य विकास के कारकों पर हमारा ध्यान रहेगा।”

हाल ही में योगी सरकार द्वारा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग (SC-ST आयोग) की घोषणा की गई थी, जिसमें डॉक्टर रामबाबू हरित को एससी-एसटी आयोग में अध्यक्ष मनोनीत किया गया। जबकि मिथिलेश कुमार व राम नरेश पासवान को आयोग में उपाध्यक्ष नामित किया गया था। इसके अलावा 15 अन्य सदस्य भी मनोनीत किया गए थे। सभी का कार्यकाल एक वर्ष या 65 वर्ष तक की आयु तक होगा।

2.33 kg सोने की तस्करी, एक एक्सिडेंट और 5 मौत: कस्टम विभाग की जाँच में केरल CPI(M) ‘नेता’ रडार पर

दुबई से केरल के कोझीकोड में तस्करी कर लाए गए 2.33 किलोग्राम सोना लूटने का प्रयास करने वाले गिरोह के पाँच सदस्यों की मौत की जाँच में सत्तारूढ़ माकपा से जुड़े एक व्यक्ति का पता चला है। 2.33 किलोग्राम सोना यानी कि 2330 ग्राम सोने की तस्करी का प्रयास किया गया। आज की तारीख में 24 कैरेट सोना के 10 ग्राम की कीमत 47,130 रुपए है – यानी लगभग एक करोड़ 10 लाख का सोना!

कस्टम अधिकारी अर्जुन अयंकी की तलाश में है, जो पुलिस के अनुसार तस्करी का सोना लेने के लिए कोझीकोड हवाई अड्डे पर पहुँचा था। अर्जुन माकपा प्रचारक के रूप में सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है और इससे पहले अपने पैतृक स्थान कन्नूर में माकपा की युवा शाखा डीवाईएफआई के इकाई सचिव का पद सँभाल चुका है।

अर्जुन फिलहाल छुपा हुआ है लेकिन एक फेसबुक पोस्ट में कहा गया है कि पार्टी उसके खिलाफ व्यक्तिगत आरोपों के जवाब देने के लिए उत्तरदायी नहीं है। अर्जुन ने लिखा, “मैं पिछले तीन वर्षों से सीपीआई (एम) या डीवाईएफआई का सदस्य नहीं रहा हूँ। मैं बिना किसी इनाम की उम्मीद के पार्टी के लिए एक वैचारिक अभियान में लगा हुआ हूँ। मैं अपनी बेगुनाही साबित करूँगा।”

जानकारी के मुताबिक सोना दुबई से कोझीकोड जिले के कोडुवल्ली स्थित एक गिरोह के लिए एक यात्री द्वारा तस्करी कर लाया गया था और बताया जा रहा है कि अर्जुन कथित तौर पर इसे लेने के लिए हवाई अड्डे के बाहर इंतजार कर रहा था। हालाँकि पलक्कड़ जिले के चेरपुलस्सेरी से एक और गिरोह सोना लूटने एयरपोर्ट पहुँचा।

पुलिस के अनुसार, जब कस्टम ने सोना जब्त किया तो गिरोह और अर्जुन दोनों की योजना विफल हो गई। जैसे ही अर्जुन खाली हाथ वापस गया, चेरपुलसेरी गिरोह ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया, लेकिन यह महसूस करने के बाद कि सीमा शुल्क द्वारा सोना जब्त कर लिया गया था, वापस हवाई अड्डे की ओर मुड़ गया।

इसी वापसी यात्रा के दौरान चेरपुलसेरी गिरोह की तीन एसयूवी में से एक का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें पाँच की मौत हो गई। कन्नूर जिले में, राजनीतिक दलों ने अतीत में राजनीतिक हमलों के लिए कथित तौर पर गिरोहों को काम पर रखा था। हालाँकि, पार्टियाँ अब उन गैंग से दूरी बना रही हैं। 

सीपीआई (एम) कन्नूर के जिला सचिव एमवी जयराजन ने कहा कि गैंग की पार्टी में कोई भूमिका नहीं होगी। उन्होंने कहा, “पार्टी ने सोशल मीडिया प्रचार के कार्य को किसी गिरोह को नहीं सौंपा है। सोने की तस्करी से जुड़े कुछ नाम सामने आए हैं। उन्होंने समाज में स्वीकृति पाने के लिए सोशल मीडिया अभियान चलाया है। लोगों को गिरोह के सदस्यों की सोशल मीडिया गतिविधियों के पीछे के विश्वासघात का एहसास होना चाहिए।”

इस मामले से जुड़े सीमा शुल्क सूत्रों ने कहा कि यह पहली बार है जब अर्जुन उनके रडार पर आया है। एक अधिकारी ने कहा, “हमने एक नोटिस दिया है कि उसे अगले सोमवार को सीमा शुल्क के सामने पेश होना चाहिए। गिरफ्तार यात्री, जिसके पास से सोना जब्त किया गया था, ने कहा था कि उसका अर्जुन से कोई पूर्व परिचय नहीं था।”

सोशल मीडिया अकाउंट्स के मुताबिक अर्जुन पूर्व माकपा कार्यकर्ता आकाश थिलनकेरी का करीबी है, जिसे कन्नूर में युवा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता शुहैब की 2018 में हत्या के लिए गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद आकाश को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था।

50-60 की संख्या में मुस्लिम भीड़ रात में घरों में घुसी, दलितों ने लगाए ‘पलायन’ के पोस्टर: मुलायम सिंह के इलाके की घटना

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में हिन्दुओं ने पलायन के पोस्टर लगाए हैं। ये घटना कुसमरा कस्बे की है। बता दें कि मैनपुरी समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा है। पिछले 9 चुनावों से यहाँ सपा की ही जीत हुई है, जिसमें से 5 बार खुद पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव सांसद बने। फ़िलहाल वही यहाँ से सांसद हैं। कुसमरा कस्बे में एक मुस्लिम समाज की लड़की गायब हो गई, जिसके बाद कोरी समुदाय के लोगों ने अपने घर के बाहर पलायन के पोस्टर लगाए।

कोरी समुदाय ने हिन्दुओं ने बताया कि उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है, इसीलिए वो अपने घर और संपत्ति बेच कर यहाँ से चले जाएँगे। गुरुवार (जून 24, 2021) को इस घटना के सामने आने के बाद यूपी पुलिस वहाँ पहुँची और लोगों की बात सुनी। पुलिस ने सुरक्षा का आश्वासन देकर समझाया-बुझाया और पोस्टर उतरवाए। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि मंगलवार को दूसरे समुदाय की एक 13 साल की लड़की गायब हो गई थी।

नाबालिग लड़की के गायब होने के बाद परिवार ने पुलिस में शिकायती पत्र दिया और पुलिस ने इस आधार पर लड़की की तलाश शुरू की। इसी बीच मोहल्ले में अल्पसंख्यक हिन्दुओं ने प्रताड़ित किए जाने की वजह से अपने घरों के बाहर पलायन के पोस्टर लगा दिए। पुलिस ने लोगों से पूछा कि अगर कोई समस्या है तो वो बताएँ। पुलिस ने समाधान का आश्वासन दिया और पोस्टर हटवा कर स्थिति को नियंत्रित किया।

हिन्दुओं का कहना है कि नाबालिग लड़की दिल्ली में मिल गई थी, लेकिन इसके बाद भी बुधवार की रात 50-60 की संख्या में मुस्लिम भीड़ ने उनके घरों में घुस कर तलाशी ली। घर के लोग बेहद डर गए थे। महिलाएँ खासकर डरी हुई थीं। सोनू, शंभूदयाल, मुकेश, प्रमोद कुमार और संतोष कुमार सहित कई स्थानीय हिन्दुओं ने पलायन के पोस्टर लगाए। पुलिस ने इसे माहौल बिगाड़ने की साजिश बताते हुए कहा कि अराजक तत्वों पर कार्रवाई की जाएगी।

‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, क्षेत्राधिकारी (CO) अमर बहादुर सिंह ने दावा किया कि अब वहाँ पर किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि अराजक तत्वों के बहकावे में आकर ये पोस्टर लगाए गए हो सकते हैं। स्थानीय महिलाओं ने माँग की कि उन्हें ठीक से रहने दिया जाए, वरना घर छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है। उन्होंने न्याय की माँग की। एक लड़की ने बताया कि घर के सभी लोग सो रहे थे और किसी को कुछ खबर नहीं थी, तभी मुस्लिम भीड़ ने घरों में घुस कर तलाशी लेनी शुरू कर दी।

उसने बताया कि घरों में घुस कर एक-एक सामान, यहाँ तक कि कबाड़ निकलवा कर भी तलाशी ली गई। स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर तलाशी के दौरान साथ में पुलिस होती तो वो कुछ नहीं बोलते। जिसकी बेटी गायब हुई थी, उसका नाम गियासुद्दीन बताया जा रहा है। वो अपने-आप दिल्ली गई थी या किसी के साथ, इस बारे में लोगों को कुछ नहीं पता। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भी कुछ कार्रवाई नहीं की है।

एक हिन्दू बुजुर्ग ने बताया, “हमलोग कमजोर हैं। कोरी जाति के लोग हैं। हमलोगों को सबकी बात माननी ही है। इसीलिए, जब पुलिस ने आकर जो कहा हमने मान लिया। हम शांति चाहते हैं।” एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि पूरे मोहल्ले के हिन्दुओं (12-13 घरों) की कुण्डी जबरन खुलवा कर तलाशी ली। हिन्दुओं ने कहा कि वो इंतजार कर रहे थे कि लड़की मिल जाए, फिर कोई एक्शन लेंगे। महिलाओं ने बताया कि तलाशी के दौरान उन्हें भी नहीं बख्शा गया।

‘दैनिक जागरण’ के स्थानीय संस्करण में प्रकाशित खबर

उन्होंने पूछा कि इस इलाके में हम कैसे सुरक्षित हैं? महिलाओं ने स्पष्ट बताया कि ‘मुस्लिमों’ ने ऐसा किया है। अगले दिन रात को उनके घरों में रोटी तक नहीं बनी। आधी रात को घरों में घुस कर तलाशी ली गई थी। एक परिवार के घर में मुस्लिम भीड़ रात के 1 बजे घुसी। ‘हिन्दू जागरण मंच’ के पदाधिकारी भी मोहल्ले में पहुँचे और न्याय की माँग की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अब तक इस मामले में मुकदमा भी दर्ज नहीं किया है।

हिन्दू कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इलाके के मुस्लिम माँस की सप्लाई भी करते हैं। उन्होंने चौकी पहुँच कर शिकायत दर्ज करने की माँग की। कोरी समुदाय अनुसूचित जाति (SC) में आते हैं। मैनपुरी के कैथपुर में भी हिन्दुओं के प्रताड़ित होने की बात कही जा रही है। ‘हिन्दू जागरण मंच’ ने इन घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करने की बात कही है। फ़िलहाल इलाके में शांति है।

ऑपइंडिया ने भी स्थानीय लोगों से संपर्क किया, जिन्होंने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उनके घर में महिलाएँ हैं, लड़कियाँ हैं – ऐसे में किसी भीड़ का घर में घुस जाने से वो लोग सहमे हुए। हैं। उन्होंने पूछा कि उनके पास पुलिस या ‘बड़े लोगों’ बात मानने के अलावा और क्या विकल्प है? उन्होंने कहा कि पुलिस आकर अगर 10 बार भी तलाशी लेती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि आगे भी ऐसा किया जा सकता है।

हमने इस पूरे मामले के बारे में पुलिस का पक्ष जानने के लिए किशनी थाने से भी संपर्क किया। प्रभारी निरीक्षक एके सिंह ने बताया कि स्थानीय लोगों ने लिखित में दे दिया है कि वो आपस में मिलजुल कर रहते हैं और उनमें सामंजस्य है, इसीलिए अब इस मामले में कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि अराजक तत्वों के बहकावे में आकर वो पोस्टर लगाए गए थे। घर में घुस कर तलाशी लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने आपस में मिल-बैठ कर मामला सुलझाने की बात कही है।

हाल ही में कानपुर से भी ऐसी ही खबर सामने आई थी। कर्नलगंज में 10 हिन्दू परिवारों ने अपने घर छोड़ने का निर्णय ले लिया था। वहाँ के हिन्दू परिवारों का कहना था कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि या तो वो इस्लाम मजहब अपना कर मुस्लिम बन जाएँ, या फिर घर छोड़ कर चले जाएँ। एक परिवार ने बताया कि उनके घर की बेटी के साथ छेड़छाड़ की गई और जब भाइयों ने मना किया तो घर में घुस कर मारपीट की गई।

UP में माफिया कर रहे बाप-बाप: 16 महीनों में 1128 करोड़ रुपयों की संपत्तियाँ जब्त, 5558 मुकदमे दर्ज

उत्तर प्रदेश में माफियाओं और उनके गुर्गों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। बीते एक साल में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी समेत 25 माफियाओं की 11 अरब 28 करोड़ 23 लाख 97 हजार 846 रुपए की संपत्तियाँ जब्त की गई हैं। एडिशनल डीजीपी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने आँकड़ा जारी करते हुए बताया कि कुख्यात अपराधियों की सूची में शामिल अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की सबसे ज्यादा संपत्तियाँ जब्त की गई हैं।

ADG प्रशांत कुमार ने बताया कि जनवरी 2020 से अप्रैल 2021 के बीच 25 माफियाओं के 22259 सहयोगियों के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के 5558 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही उनकी संपत्तियाँ जब्त करने की कार्रवाई की गई। अवैध तरीके से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करके इन माफियाओं की कमर तोड़ दी गई है। आर्थिक चोट पहुँचने की वजह से अब यह माफिया भविष्य में अपराध करने के काबिल नही रहेंगे।

अतीक अहमद पहले पायदान पर

गुजरात के साबरमती जेल में बंद प्रयागराज के माफिया और विधायक राजू पाल के हत्यारोपित अतीक अहमद के गिरोह के 89 सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अतीक व उसके सहयोगियों की 3.25 अरब रुपए से ज्यादा की संपत्ति जब्त हुई है। कई अवैध कब्जे भी मुक्त कराए गए। अतीक गिरोह के 60 सदस्यों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के साथ ही गैंग के खिलाफ 21 एफआईआर दर्ज कर 9 आरोपितों को जेल भेजा गया है।

दूसरे नंबर पर मुख्तार का नाम

पंजाब की रोपड़ जेल से यूपी के बांदा जेल लाए गए गाजीपुर के माफिया और मऊ जिले से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी सरकार के माफियाओं की सूची में दूसरे नंबर पर है। मुख्तार के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार हर रोज नए फरमान जारी कर रही है। इस गैंग के सदस्यों के खिलाफ 102 केस दर्ज करके 158 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, इस गैंग के 122 शस्त्र लाइसेंस निरस्त करवाए गए हैं। गैंग के 37 सदस्यों की हिस्ट्रीशीट भी खोली गई है।

नोएडा के माफिया सुंदर भाटी गैंग के भी कसे पेंच

सोनभद्र जेल में बंद गौतमबुद्ध नगर के माफिया सुंदर भाटी गिरोह के 9 सदस्यों की 63.24 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। इसके अलावा आजमगढ़ के माफिया बलिया जेल में बंद कुख्यात ध्रुव कुमार उर्फ कुंटू सिंह गिरोह के 43 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इस गिरोह की करीब 18 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त हुई है।

25 अन्य माफियाओं की 625 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त

ADG प्रशांत कुमार ने बताया कि डीजीपी हेडक्वार्टर से चिन्हित 25 माफिया व 8 कुख्यात अपराधियों के गिरोह के सदस्यों की भी काली कमाई से जुटाई गई 625 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति जब्त व ध्वस्त कराई गई है। ADG का कहना है कि विभिन्न अपराधों में लिप्त 515 गैंग के सदस्यों व सहयोगियों के खिलाफ 203 एफआईआर दर्ज कराई गई है। हालाँकि ADG कानून व्यवस्था ने प्रदेश के 25 माफियाओं में से सिर्फ चार कुख्यात माफियाओं और उनके गुर्गों की संपत्ति जब्त का ही ब्यौरा जारी किया है। अन्य के नाम नहीं दिए हैं।

इस्लामी आक्रान्ताओं ने लूटा, भूकंप से हुआ तबाह… कांगड़ा में माता ब्रजेश्वरी मंदिर का वैभव फिर भी नहीं हुआ कम

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नगरकोट में स्थित है माता ब्रजेश्वरी देवी मंदिर (Mata Brajeshwari Devi Kangra Mandir) जो शक्तिपीठों में से एक है और प्रसिद्ध नौ देवी यात्रा में तीसरे स्थान पर आता है। ब्रजेश्वरी देवी मंदिर को हिमाचल प्रदेश के भव्य मंदिरों में से एक माना जाता है। हालाँकि इस मंदिर की भव्यता और सुंदरता भी इस्लामिक कट्टरपंथ की भेंट चढ़ गई। मुस्लिम आक्रान्ताओं ने कई बार इस मंदिर को लूटा और नुकसान पहुँचाया, लेकिन हर बार यह मंदिर हिंदुओं के अथक प्रयासों के कारण पुनः स्थापित हो जाता।

पांडवों के द्वारा बनवाया गया ब्रजेश्वरी देवी मंदिर

भगवान शिव के द्वारा माता सती की मृत देह को लेकर क्रोध में तांडव किए जाने के कारण भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता की देह को कई टुकड़ों में विभाजित कर दिया था। इस दौरान इस स्थान पर माता सती का बायाँ वक्ष गिरा था। यही कारण है कि यह मंदिर शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

हालाँकि मूल मंदिर की स्थापना महाभारत काल के दौरान पांडवों ने की थी। एक दिन पांडवों ने अपने स्वप्न में देवी दुर्गा को देखा था, जिसमें उन्होंने पांडवों को बताया कि वह नगरकोट गाँव में स्थित हैं और यदि पांडव चाहते हैं कि वे सुरक्षित रहने के साथ हमेशा विजयी रहें तो उन्हें उस क्षेत्र में एक मंदिर बनाना चाहिए। उसी रात पांडवों ने नगरकोट गाँव में उनके लिए एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया।

मंदिर की संरचना और माता ब्रजेश्वरी देवी

मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार किसी किले के प्रवेश द्वार की तरह बनाया गया है। मंदिर का परिसर भी किले की ही तरह पत्थर की दीवारों से घिरा हुआ है। मुख्य मंदिर के पीछे छेत्रपाल और भगवान शिव का भी मंदिर बना हुआ है। मंदिर परिसर में ही भगवान शिव के ही एक रूप भैरव का मंदिर भी है। इसके अलावा मंदिर में ध्यानु भक्त की भी एक मूर्ति मौजूद है, जिसने माता के चरणों में अपना शीश अर्पित कर दिया था।

मंदिर के गर्भगृह में माता ब्रजेश्वरी देवी तीन पिंडी के रूप में विराजमान हैं। पहली प्रमुख पिंडी माता ब्रजेश्वरी देवी हैं। दूसरी पिंडी माँ भद्रकाली और तीसरी सबसे छोटी पिंडी माँ एकादशी हैं। मंदिर में अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य भी तीन भागों में माँ को अर्पित किया जाता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का प्रयोग वर्जित है लेकिन यहाँ माँ एकादशी को चावल का ही भोग लगाया जाता है।

नष्ट हुआ लेकिन हर बार अपने मूल वैभव की ओर लौटा मंदिर

धन-धान्य से संपन्न माता ब्रजेश्वरी देवी का यह मंदिर इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर भी आया। सन् 1009 के दौरान महमूद गजनवी ने इस मंदिर को लूटा और यहाँ से कई टन सोना और अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ अपने साथ ले गया। गजनवी ने इस मंदिर को 5 बार लूटा और नष्ट किया। गजनवी के बाद मोहम्मद बिन तुगलक और सिकंदर लोधी ने भी इस मंदिर को लूटा और साथ ही साथ मंदिर को भारी नुकसान पहुँचाया। हालाँकि हर बार हिन्दू अथक परिश्रम करके और अपने सामर्थ्य के अनुसार मंदिर को पुनः उसका वैभव प्रदान कर देते थे।

इसके बाद सन् 1905 में एक तीव्र भूकंप के कारण मंदिर पूरी तरह से नष्ट हो गया लेकिन अंततः एक बार फिर भक्तों और सरकार के अथक प्रयासों के कारण मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। आज हम जो मंदिर देखते हैं, यह भूकंप के बाद ही बनाया गया है।

भविष्य की घटनाओं की जानकारी देता है मंदिर

जम्मू कश्मीर की खीर भवानी माता की तरह इस मंदिर में स्थित भैरव बाबा भी भविष्य में होने वाली अनहोनी घटना की पूर्व जानकारी देते हैं। कहा जाता है कि जब भी आसपास के क्षेत्र में कोई अनहोनी होने की आशंका होती है तो मंदिर में स्थापित लगभग 5000 साल पुरानी भैरव बाबा की प्रतिमा से पसीना और आँखों से आँसू गिरने शुरू हो जाते हैं। मंदिर के पुजारी इसके बाद विशाल यज्ञ का आयोजन करते हैं और माता बज्रेश्वरी देवी से संकट को टालने का अनुरोध करते हैं।

कैसे पहुँचें?

कांगड़ा से सात किलोमीटर की दूरी पर एक हवाईअड्डा है, जो दिल्ली से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से 23 किमी की दूरी पर स्थित जुबरहट्टी में भी एक हवाईअड्डा है, जहाँ दिल्ली से विमान के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। जुबरहट्टी से कांगड़ा की दूरी लगभग 215 किमी है। इसके अलावा कांगड़ा से चंडीगढ़ हवाईअड्डे की दूरी भी लगभग 215 किमी ही है। पठानकोट, कांगड़ा से सबसे नजदीक स्थित ब्रॉड गेज रेल मुख्यालय है, जिसकी दूरी लगभग 90 किमी है। सड़क मार्ग से भी कांगड़ा पहुँचना काफी आसान है। कांगड़ा, धर्मशाला से लगभग 18 किमी दूर ही स्थित है, जो कई बड़े शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।

‘किसान आंदोलन’ पर ISI की नज़र, निशाना बनाए जा रहे हैं जवान: 7 महीने पूरे होने पर निकलने वाला है मार्च, अलर्ट जारी

दिल्ली की सीमा पर और पंजाब-हरियाणा में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ पर पाकिस्तान की भी नज़र है। पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ‘इंटर-सर्विलेंस इंटेलिजेंस ISI’ अब ‘किसान आंदोलन’ के माध्यम से भारत में अराजकता का माहौल पैदा करना चाहती है। दिल्ली पुलिस के साथ-साथ ‘सेन्ट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF)’ को भी सतर्क कर दिया गया है। CISF ही दिल्ली मेट्रो सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा का दायित्व संभाले हुए है।

ISI की योजना है कि किसान प्रदर्शनकारियों के माध्यम से सुरक्षा बलों को भड़काया जाए। भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों को भेजे गए पत्र में इस तरफ ध्यान दिलाया है। दिल्ली पुलिस ने भी इस दिशा में तैयारियाँ शुरू करते हुए सुरक्षा के समुचित इंतजाम किए हैं। मेट्रो स्टेशनों के बाहर अतिरिक्त जवान तैनात किए जा रहे हैं। शनिवार (जून 26, 2021) को दिल्ली के 3 मेट्रो स्टेशन बंद रखे जाएँगे।

‘दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC)’ ने पुलिस की सलाह के बाद ये फैसला लिया है। ये मेट्रो स्टेशन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद रहेंगे। पिछले कुछ सप्ताह से किसान आंदोलन के स्थलों पर छिटपुट अपराध की कई खबरें सामने आई हैं। इधर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन 7 महीने से शांतिपूर्ण ही है, लेकिन पुलिस बल प्रयोग कर के उन्हें परेशान कर रही है। हरियाणा में भाजपा और जजपा नेताओं के कार्यक्रमों को भी प्रदर्शनकारी निशाना बना रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने सिंधु बॉर्डर पर स्थिति के आकलन के लिए दो स्पेशल ब्रांच ऑफिसर्स को भेजा था, जिनके साथ किसान प्रदर्शनकारियों ने मारपीट की। इस मामले में नरेला पुलिस थाने में मामला भी दर्ज किया गया है। हालाँकि, ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि पुलिस और सरकार की मंशा किसानों को भड़काने की है। योगेंद्र यादव ने दावा किया कि सरकार विभिन्न हथकंडों का प्रयोग कर के आंदोलन को दबाना चाहती है।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही कह चुके हैं कि भारत सरकार किसानों से बातचीत के लिए हमेशा तैयार है और बस एक कॉल की दूरी पर है। शनिवार को किसानों के आंदोलन के 7 महीने भी पूरे हो रहे हैं, ऐसे में उन्होंने एक बार फिर से आंदोलन को तेज़ करने का फैसला लिया है। किसानों ने रैलियाँ निकालने की भी योजना बनाई है। दिल्ली-गाजियाबाद सीमा पर प्रदर्शनकारी फिर से ट्रैक्टर लेकर उतरेंगे।

याद हो कि फरवरी 2020 में खालिस्तानी आतंकवादी और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) प्रमुख मुहम्मद हाफिज सईद के करीबी सहयोगी, गोपाल सिंह चावला ने घोषणा की थी कि वह भारत में चल रहे ‘किसानों के विरोध के समर्थन में पाकिस्तान में एक ट्रैक्टर रैली का आयोजन करेगा। चावला एक ISI आतंकी है और उस पर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप है। वो भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहा हैं।

विराट कोहली के गले में पट्टा और महिला: न्यूजीलैंड की वेबसाइट ने भारतीय कप्तान का किया अपमान

हाल में ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में न्यूजीलैंड की जीत के बाद वहाँ की मीडिया ने उत्साह दिखाने के चक्कर में भारतीय कप्तान विराट कोहली का अपमान कर दिया। वहाँ की एक स्थानीय वेबसाइट ने ज्यादा क्रिएटिव होने के चलते मीम की तरह एक तस्वीर शेयर की जिसमें कोहली की तुलना पट्टे से बँधे व्यक्ति से की गई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर न्यूजीलैंड की वेबसाइट The AccNZ ने यह तस्वीर शेयर की। तस्वीर में सफेद ड्रेस पहने एक महिला और एक शख्स दिख रहा है। शख्स के गले में पट्टा बँधा है और उसकी रस्सी को एक महिला ने पकड़ रखा है। वेबसाइट ने शख्स को विराट कोहली और महिला को न्यूजीलैंड का तेज गेंदबाज काइल जेमिसन दिखाया है।

मालूम हो कि अपना उत्साह दिखाने के कारण एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का ऐसा मजाक बनाने वाली The AccNZ न्यूजीलैंड की एक वेरिफाइड वेबसाइट है। ये अधिकतर क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी न्यूज कवर करती है। इंस्टाग्राम पर इसके 45 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में न्यूजीलैंड ने 8 विकेट से बाजी जीती थी। मैच में सिर्फ 61 रन देकर 7 विकेट लेने पर काइल जेमिसन को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। उन्होंने पहली पारी में 5 और सेकेंड इनिंग में 2 विकेट लिए थे। साथ ही 8वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए जेमिसन ने पहली पारी में 21 रन भी बनाए थे। मैच के दौरान दोनों पारियों में विराट कोहली को जेमिसन ने ही आउट किया था। कोहली पहली पारी में 44 और दूसरी पारी में 13 रन बना पाए थे। जेमिसन की ऐसी परफॉर्मेंस को देख कोहली ने भी उनकी तारीफ की थी। 

राजस्थान में सियासी तूफान लाने वाली भंवरी देवी के बेटे पर रेप का आरोप, पीड़िता ने कहा- पति के सामने करता है दुष्कर्म

साल 2011 में राजस्थान की राजनीति में तूफान मचा देने वाली भंवरी देवी का नाम फिर से चर्चा में है। इस बार भंवरी देवी के परिवार के दो सदस्यों पर दुष्कर्म का आरोप लगा है। आरोपितों में उसके बेटा साहिल भी है। पीड़िता ने सामूहिक दुष्कर्म और दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज करवाया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता भी भंवरी देवी की रिश्तेदार ही है। उसका आरोप है कि साहिल उसके पति के सामने उसका बलात्कार करता था। कई दिन तक प्रताड़ना झेलने के बाद उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया। जोधपुर जिले के बोरुंदा इलाके में पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उसका पीहर खेड़ापा थाने क्षेत्र के अंतर्गत आता है। साल 2016 में उसकी शादी हुई थी। इसके बाद 22 वर्षीय पीड़िता बीएड करने लगी और उसका खेड़ापा लगातार आना-जाना लगा रहा।

दिसंबर 2020 में ससुर का जोधपुर में ऑपरेशन होना था। पति ने उसको जोधपुर बुलाया और कहा कि वो अमरचंद के बेटे साहिल के साथ जोधपुर आ जाए। महिला इसके लिए मान गई। लेकिन रास्ते में साहिल ने सुनसान जगह पर गाड़ी को रोक दी और पिस्टल के दम पर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान उसने मोबाइल से उसके कुछ फोटो भी खींच लिए। पीड़िता ने पूरे घटनाक्रम से पति और ससुराल पक्ष को अवगत कराया, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई करने के बजाए बात दबा दी।

बाद में साहिल लगातार घर आने लगा। पीड़िता कहती है कि साहिल और उसका पति दोनों साथ में शराब पीते और फिर उसके साथ दुष्कर्म होता। यह सब उसके साथ दिसंबर 2020 से जनवरी 2021 तक चला। इसके बाद वह अपने मायके चली गई। कुछ दिन बाद साहिल पीहर आया और धमकी देनी शुरू कर दी। पीड़िता बताती है कि दुष्कर्म के समय साहिल ने उसकी फोटो खींची थीं, जिसे वह धमकी देने के लिए इस्तेमाल करता था कि यदि वह ससुराल नहीं आई तो उसे मार देगा।

साहिल के रवैये से परेशान होकर 18 जून को पीड़िता ने कीटनाशक पी लिया, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। वहाँ समय से उपचार मिलने पर स्थिति सँभल गई। 24 जून को पुलिस के सामने दिए बयान में महिला ने साहिल पर आरोप लगाए। अब पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले को आईपीसी की धारा 498ए, 376 व 376-डी के तहत दर्ज किया गया है।  आगे की जाँच चल रही है।

भंवरी देवी केस

उल्लेखनीय है कि भंवरी देवी का मामला अगस्त 2011 का है। उस समय एएनएम भंवरी देवी के अचानक गायब होने पर उनके पति अमरचंद ने प्रदेश के तत्कालीन मंत्री महिपाल मदेरणा पर पत्नी को गायब कराने का आरोप लगाया था। कुछ समय बाद मामला परत दर परत खुला और एक के बाद एक कर कई लोग इस पूरी कहानी में जुड़ते गए, लेकिन भंवरी का कहीं पता नहीं लग पाया। बाद में सीबीआई मामले की जाँच में जुटी और तभी भंवरी देवी और महिपाल मदेरणा की एक सीडी वायरल हो गई। उसके बाद से महिपाल मदेरणा के अलावा तत्कालीन विधायक मलखान सिंह व भंवरी के पति अमरचंद सहित 14 लोग जेल में बंद हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

पहले दावत, फिर गीता और आखिर में कुरान: इस तरह इस्लाम कबूल करवाता था मौलाना उमर का गैंग, 24 राज्यों में नेटवर्क

इस्लामी धर्मांतरण रैकेट से जुड़े मोहम्मद उमर गौतम और जहाँगीर आलम की गिरफ्तारी के बाद से उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता (यूपी एटीएस) लगातार पूछताछ कर रही है। रोज नए खुलासे हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इनका नेटवर्क 24 राज्यों में फैला है। इस बीच उमर और उसकी संस्था के यूट्यूब चैनल से कुछ वीडियो डिलीट किए गए हैं। अधिकारी यह जानने की कोशिश में हैं कि उन वीडियो में क्या था।

पूछताछ में उमर ने एटीएस को फंडिंग से संबंधित कुछ अहम जानकारी दी है। मामला संवेदनशील होने के कारण यह भी जानने का प्रयास किया जा रहा है कि इन आरोपितों और उनकी संस्था को दी जाने वाली फंडिंग कहाँ से हो रही थी और इसके पीछे का वास्तविक उद्देश्य क्या था। क्या इसके पीछे सिर्फ धर्मांतरण ही उद्देश्य है या कुछ और, इस तथ्य की विशेष रूप से छानबीन की जा रही है।

इसके साथ ही उन संस्थाओं की भी छानबीन की जा रही है, जिससे उमर किसी न किसी रुप में जुड़ा रहा है। उमर के अन्य ठिकानों के साथ-साथ उसके मददगारों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उमर की स्पीच के वीडियो को भी एटीएस खँगाल रही है। इस्लामिक दावाह सेंटर के नाम से यूट्यूब चैनल भी है। इस पर उमर की स्पीच के कई वीडियो अपलोड हैं। कुछ वीडियो पूरा मामला सामने आने के बाद डिलीट भी कर दिए गए हैं। उनके बारे में भी पड़ताल की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के एडीजी (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि धर्मांतरण से जुड़े सभी संगठनों की विस्तृत जाँच की जा रही है। जिन लोगों का धर्मांतरण किया गया है उनके परिजनों से पुलिस लगातार संपर्क में है। उन्होंने कहा कि जिन 24 राज्यों के बारे में उमर व जहाँगीर ने बताया है, वहाँ की पुलिस से संपर्क कर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है। मौलाना उमर और मुफ्ती जहाँगीर आलम को धर्मांतरण के लिए इस्लामिक देशों से लगातार मदद मिलती थी। इनका लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों का मतांतरण कराना था। उमर ने बताया है कि असम से सांसद बदरुद्दीन अजमल के कहने पर 2011 से 2012 के बीच दिल्ली में इस्लामिक दवाह सेंटर की स्थापना की गई थी। 

उत्तर प्रदेश शासन में अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि मतांतरण के प्रकरण में विदेशों से फंडिंग के पुख्ता सुबूत मिले हैं। एक खाता भी कनफर्म हो गया है, जिसमें विदेशों से रकम आती थी। यह धनराशि क्यों और कैसे आती थी, इसकी जाँच की जा रही है। जाँच में पता चला कि मौलाना उमर के पास इस्लामिक देशों से मिले फंड से अरबों की संपत्ति भी है। उमर की गाजियाबाद के साथ ही नई दिल्ली में भी संपत्ति का पता चला है। इसके अलावा, उसकी गौतमबुद्ध नगर की संपत्ति के कागजों की जाँच चल रही है। यह भी सामने आया है कि मौलाना गाजियाबाद के किसी स्कूल में फंड देने का भी काम करता था। एटीएस अब मौलाना उमर के बैंक डिटेल्स भी चेक कर रही है।

मौलाना उमर ने पूछताछ में बताया कि मतांतरण के लिए दावत का इंतजाम किया जाता था। मतांतरण के लिए सबसे पहले गीता पढ़ाया जाता था। फिर कुरान पढ़ाते थे। दोनों का अंतर और गीता में कमी बताई जाती थी। उसके बाद हदीस पढ़ाया जाता था। हदीश पढ़ाने के बाद पूरी तरह से ब्रेन वॉश किया जाता है और फिर लोगों को धीरे-धीरे इस्लाम के प्रति आकर्षित कर लिया जाता है।

बता दें कि यूपी एटीएस ने उमर गौतम और जहाँगीर आलम को गिरफ्तार कर बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण का खुलासा किया था। उमर गौतम दिल्ली के जामिया नगर स्थित बटला हाउस में इस्लामिक दावा सेंटर नामक संस्था का संचालक है। यहीं से धर्मान्तरण का सारा खेल खेला जाता है। उमर पर आरोप है कि उसने नोएडा के मूक-बधिर स्कूल के दर्जनों छात्रों का उसने धर्मांतरण कराया है। उमर गौतम पहले हिंदू ही था। वह करीब 30 साल पहले धर्मान्तरण कर मुस्लिम बन गया था।

महिला मित्र के घर खाना, Oyo होटल में रात: पुलिस ने कहा- पत्रकार ने ‘पारिवारिक कारणों’ से गढ़ी लूट की कहानी

नोएडा पुलिस ने शुक्रवार (25 जून 2021) को बताया कि हिंदी खबर के प्रमुख और वरिष्ठ पत्रकार अतुल अग्रवाल ने ‘पारिवारिक कारणों’ से लूट की कहानी गढ़ी थी। अग्रवाल ने दावा किया था कि 19-20 मई की रात उत्तर प्रदेश के नोएडा एक्सटेंशन में उनके साथ मारपीट और लूटपाट की गई थी।

अतुल अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि बंदूक की नोंक पर मारपीट और लूटपाट की गई। इसके बाद नोएडा पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। जाँच में पुलिस ने पाया कि अतुल अग्रवाल की कहानी मनगढ़ंत थी और जैसा उन्होंने आरोप लगाया था वैसा कुछ नहीं हुआ था।

पुलिस जाँच में पाया गया कि अग्रवाल 19 मई की शाम लगभग 7 बजे अपनी एक महिला मित्र के घर खाने के लिए गए थे। इसकी पुष्टि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से भी हुई है। महिला मित्र ने पुलिस को बताया कि जब अग्रवाल उनके यहाँ थे तो उनकी पत्नी का फोन आया था और उन्होंने उनसे तुरंत घर पहुँचने को कहा था। अग्रवाल रात 10:40 बजे घर वापस जाने के लिए जल्दबाजी में निकले।

इसके बाद रात के 1:20 बजे अग्रवाल ने अपनी महिला मित्र को फोन किया और बताया कि वह सड़कों पर घूम रहे हैं और रात बिताने के लिए ओयो रूम की तलाश कर रहे हैं। महिला ने पुलिस को बताया कि अग्रवाल ने उन्हें किसी भी प्रकार की लूट की सूचना नहीं दी थी। बाद में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से यह भी साबित हुआ कि अग्रवाल ने अपने बैंक खाते के माध्यम से ओयो रूम के लिए भुगतान किया था। होटल के सीसीटीवी कैमरों से भी उनके होटल में होने की पुष्टि हुई है।

नोएडा पुलिस बताया, “सभी सबूतों के आधार पर यह साबित होता है कि अतुल अग्रवाल के साथ कोई लूट की घटना नहीं हुई। लूट की यह फर्जी बात उनके द्वारा अपने व्यक्तिगत पारिवारिक कारणों से सोशल मीडिया पर फैलाई गई।”

हाल ही में पत्रकार अतुल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी थी कि पिछले महीने नोएडा में उनके साथ कुछ बदमाशों ने लूट और मारपीट की। अग्रवाल ने यह भी कहा था कि उन बदमाशों ने एटीएम से पैसे निकालने के लिए भी कहा लेकिन अग्रवाल के अनुसार उन्होंने पेटीएम के जरिए बदमाशों को पैसे देने की बात कही। अग्रवाल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में यह भी बताया था कि बदमाशों ने उनका फोन लेकर उसे अनलॉक करवा लिया, लेकिन जब अग्रवाल ने बदमाशों को यह बताया कि वो पत्रकार हैं तब बदमाश उनका फोन कार की पिछली सीट पर फेंक कर चले गए।