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बीजेपी MP वरुण गाँधी ने नोटिस पर ट्विटर को लताड़ा, शशि थरूर बोले- मेरा अकाउंट भी कर दिया था ब्लॉक

ट्विटर और भारत सरकार के बढ़ते विवाद के बीच कई नेता माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म की मनमानियों को लेकर लगातार मुखर हैं। पीलीभीत से भाजपा सांसद वरुण गाँधी ने नोटिस भेजने पर ट्विटर को लताड़ लगाई है। वहीं कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने बताया है कि उनका अकाउंट भी ब्लॉक कर दिया गया था। इसी तरह शुक्रवार (25 जून 2021) को केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद के अकाउंट को भी करीब एक घंटे के लिए ट्विटर ने ब्‍लॉक कर दिया था।

वरुण गाँधी को ट्विटर ने नियम उल्लंघन को लेकर एक मेल भेजा है। उन्होंने इस मेल का स्क्रीनशॉट शेयर कर कंपनी से इस संबंध में जवाब माँगा है। वरुण गाँधी ने ट्वीट कर कहा, “मैंने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। मेरे ट्वीट में कुछ भी आपत्तिजनक चीजें नहीं थीं और ट्विटर को इस मेल के लिए स्पष्टीकरण देना चाहिए कि यह किस आधार पर भेजा गया है।”

अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि ट्विटर लंबे समय से उन नागरिकों की बुलिंग करने में लगा है जो भिन्न राजनीतिक मत रखते हैं। बता दें कि वरुण गाँधी द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में लिखा है, “पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए हम आपको इस बारे में जानकारी दे रहे हैं। हमने रिपोर्ट किए गए कंटेंट के बारे में कोई एक्शन नहीं लिया है। हम अपने यूजर्स की आवाज का सम्मान और बचाव करते हैं। हमारी यह नीति है कि अगर हमें किसी सरकारी एजेंसी से कानूनी अनुरोध मिलता है तो हम यूजर्स को इस बारे में सूचित करते हैं।”

गौरतलब है कि ट्विटर और भारत सरकार के बीच नियमों को लेकर चल रही खींचतान में आज आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का अकांउट एक घंटे के लिए ब्लॉक कर दिया गया था। ट्विटर ने अमेरिकी कानून का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक किया था। हालाँकि चेतावनी देने के बाद फिर से अकाउंट को बहाल कर दिया गया है।

रविशंकर प्रसाद ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद शशि थरूर ने रविशंकर प्रसाद के ट्वीट को साझा करते हुए बताया कि उनके साथ भी ऐसा ही हुआ था। हालाँकि दूसरा हैशटैग इस्तेमाल करने पर उनका अकाउंट अनलॉक कर दिया गया।

शशि थरूर ने कहा, “सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन के तौर पर मैं कह सकता हूँ कि हम ट्विटर इंडिया से रविशंकर प्रसाद और मेरा अकाउंट ब्लॉक करने और भारत में संचालन के नियमों और प्रक्रिया पर जवाब माँगेंगे।” उल्लेखनीय है कि भारतीय नेताओं के विरुद्ध ट्विटर की कार्रवाई उस समय की गई है जब नए आईटी नियमों का पालन न करने के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कई बार फटकार पड़ चुकी है।

तंग कोठरी, पेशाबघर के नाम पर छेद और वो चीखें जो वाजपेयी ने सुनी थी: प्रताड़ना ऐसी की रूह काँप जाए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को कानून की औकात दिखाई। 24 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसा ही किया। लेकिन 25 जून को इंदिरा ने संविधान की आड़ लेकर कानून और कोर्ट के साथ-साथ देश की जनता से खिलवाड़ किया, जिसे हम आपातकाल यानी इमरजेंसी के नाम से जानते हैं।

25 जून 1975 की सुबह ऑल इंडिया रेडियो पर इंदिरा गाँधी की आवाज में जो संदेश प्रसारित हुआ, उसे पूरे देश ने सुना। इस संदेश में इंदिरा गाँधी ने कहा “भाइयो और बहनो! राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है। लेकिन इससे सामान्य लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।” आपातकाल के नाम पर लोकतंत्र को किस कदर कुचला गया, किस तरह प्रेस की आवाज को खामोश कर दिया गया, इससे हम सब परिचित हैं। इस दौर में विरोधियों को प्रताड़ित करने की भी एक से एक खौफनाक घटनाएँ सामने आईं। इनमें से ही एक कहानी है, स्नेहलता रेड्डी की।

एक ऐसी अभिनेत्री जिसका आपातकाल के दौरान सीधा कसूर कुछ नहीं था, लेकिन उसे महंगा पड़ा कॉन्ग्रेस की नजर में चढ़ने वाले राजनेता से दोस्ती करना…। आपातकाल के समय स्नेहलता पर कॉन्ग्रेस ने बेहिसाब अत्याचार केवल इसलिए किए क्योंकि वह बड़े समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस की मित्र थीं जिन्हें इमरजेंसी के समय पुलिस पकड़ने की कोशिश में थी। 

2 मई 1976 को स्नेहलता को डायनामाइट केस में शामिल होने का आरोप लगाकर गिरफ्तार किया गया। इसके बाद बेंगलुरु जेल में कैद कर उनके साथ ऐसी अमानवीयता की गई जिसे सुनकर किसी भी रूह काँप जाए।

1976 का आपातकाल वही दौर था जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने भाषणों के कारण जेल में डाल दिए गए थे जबकि बाद में उनके साथ लाल कृष्ण आडवाणी भी रखे गए थे। भारतीय जनसंघ के इन दो दिग्गज नेताओं की बगल वाली कोठरी में ही रखी गई थीं कन्नड़ की मशहूर अदाकारा- स्नेहलता। 

स्नेहलता पर आरोप लगाया गया था कि वो डाइनामाइट से दिल्ली में संसद भवन और अन्य मुख्य इमारतों को धमाका कर उड़ाना चाहती थीं। स्नेहलता पर IPC की धारा 120, 120A के तहत आरोप लगाए गए थे। हालाँकि आखिर में इनमें से कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ। लेकिन ‘मीसा’ के तहत स्नेहलता की कैद जारी रही। मीसा (मैंनेटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) वही एक्ट है जिसके तहत आपातकाल में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियाँ हुई। इसी के तहत 8 माह तक स्नेहलता को तड़पाया गया।

स्नेहलता के साथ जेल में क्या हुआ?

शुरुआत मे जब अभिनेत्री को जेल में बंद किया गया तो वह एक ऐसी कोठरी थी, जिसमें बामुश्किल एक व्यक्ति ही रह पाए। सोचिए एक मशहूर अभिनेत्री जो अपनी कला के चलते बहु पुरुस्कार विजेता रहीं हों और ऐशोआराम का जीवन जीती हों, उन्हें बिना कोई गलती बताए या सवाल किए एक ऐसी कोठरी में रखा गया जिसमें पेशाबघर की जगह पर कोने में एक छेद बना हुआ था और दूसरे छोर पर लोहे का एक जालीदार दरवाजा लगा हुआ था।

स्नेहलता कन्नड़ की मशहूर अभिनेत्री थीं लेकिन उन्होंने कारावास के समय कई रातें फर्श पर सोकर गुजारीं। इस बीच उनके परिवार के साथ क्या हो रहा है क्या नहीं, इसका अंदाजा भी उन्हें कुछ नहीं था। क्योंकि न तो कोई उनसे मिलने आया था और न ही कहीं से किसी का कुछ पता चल पाया था। कुछ समय बाद स्नेहलता के परिवार को मालूम हुआ कि उनको किस जेल में बंद किया गया है।

पूरे 8 माह तक एक फेक केस में स्नेहलता को असीम प्रताड़नाएँ दी जाती रहीं। जेल में उनके बगल की कोठरी में बंद किए गए अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी ने बाद में बताया था कि कारावास के समय उन्हें किसी महिला के चीखने की आवाज सुनाई देती थी। बाद में पता चला कि वह कन्नड़ अभिनेत्री स्नेहलता थीं।

दोनों नेताओं के अलावा मधु दंडवते जो कि उस समय उसी बेंगलोर के जेल में थे, उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा था कि उन्हें रात के सन्नाटे में स्नेहलता की चीखती हुई आवाजें सुनाई देतीं थीं।

जेल में लिखी हुई एक छोटी सी डायरी में स्नेहलता ने लिखा-

“जैसे ही एक महिला अंदर आती है, उसे बाकी सभी के सामने नग्न कर दिया जाता है। जब किसी व्यक्ति को सजा सुनाई जाती है, तो उसे पर्याप्त सजा दी जाती है। क्या मानव शरीर को भी अपमानित किया जाना चाहिए? इन विकृत तरीकों के लिए कौन जिम्मेदार है? इन्सान के जीवन का क्या मकसद है? क्या हमारा मकसद जीवन मूल्यों को और बेहतर बनाना नहीं है? इन्सान का उद्देश्य चाहे कुछ भी हो, उसे मानवता को आगे बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।”

अंतहीन प्रताड़नाओं को झेलने के बाद भी स्नेहलता टूटी नहीं। उन्होंने अन्य कैदियों को मनोबल बढ़ाया। वहाँ भूख हड़ताल की। नतीजन जिन महिलाओं को जेल में बुरी तरह पीटा जाता था, उसमें वहाँ बड़ी कमी आई। बाद में कैदियों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता में भी सुधार किया गया।

स्नेहलता द्वारा जेल में लिखी गई डायरी के पन्ने

जेल से छूटने के 5 दिन बाद मौत

स्नेहलता अस्थमा की मरीज थीं, बावजूद इसके उन्हें घोर यातनाएँ दीं जाती और जेल में उन्हें निरंतर उपचार भी नहीं दिया गया। यह बातें स्वयं स्नेहलता ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के समक्ष रखीं थीं। जेल में मिलने वाली क्रूर यातनाओं ने और उस वास्तविकता ने स्नेहलता को बेहद कमजोर कर दिया और उनकी हालत गंभीर हो गई। इसके बाद जनवरी 15, 1977 को उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया। और रिहाई के 5 दिन बाद ही 20 जनवरी को हार्ट अटैक के कारण उनकी मृत्यु हो गई।

जून, 2015 में ‘द हिंदू’ के एक लेख में स्नेहलता की बेटी नंदना रेड्डी ने बताया कि उनकी माँ औपनिवेशिक ब्रिटिश राज की प्रबल विरोधी थीं। जब वह कॉलेज गईं तो उन्होंने अपने भारतीय नाम को वापस अपना लिया था और वह केवल भारतीय कपड़े और एक बड़ा ‘बॉटू’ पहनती थी। नंदना ने लिखा कि उनकी माँ ने प्रसिद्ध श्री किट्टप्पा पिल्लई से भरतनाट्यम सीखा और एक बहुत ही कुशल नर्तकी बन गईं।

केजरीवाल की सरकार, महामारी में भी नहीं आई बाज: ऑक्सीजन ऑडिट रिपोर्ट से वेंटिलेटर पर AAP 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई ऑक्सीजन ऑडिट कमिटी ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की जरूरत और कमी सम्बंधित अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सरकार ने अप्रैल और मई के महीने में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान केंद्र सरकार से ऑक्सीजन की जो माँग की थी वह आवश्यकता की चार गुने अधिक थी। अप्रैल और मई के दौरान दिल्ली के कुछ अस्पतालों ने ऑक्सीजन की लगातार कमी की बात दोहराते हुए यह सूचना भी दी थी कि ऑक्सीजन की कमी के चलते कई अस्पतालों में कोरोना संक्रमित रोगियों की मृत्यु हो गई थी।

ऑक्सीजन की आवश्यकता से अधिक दिल्ली सरकार की लगातार माँग के कारण उसके और केंद्र सरकार के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी और मामला पहले दिल्ली हाई कोर्ट में पहुँच गया था। कोर्ट के हस्तक्षेप के पश्चात केंद्र सरकार को अन्य राज्यों के कोटे की गैस दिल्ली को देनी पड़ी थी। रिपोर्ट के अनुसार जब दिल्ली को 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता थी तब दिल्ली की सरकार ने अपनी माँग बढ़ाकर 1200 मीट्रिक टन कर दिया था।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि दिल्ली सरकार के इस माँग की वजह से 12 अन्य राज्यों के ऑक्सीजन का कोटा कम कर दिल्ली को ऑक्सीजन दिया गया, जिसके कारण अन्य राज्यों में कोरोना संक्रमित रोगियों की जान को खतरा उत्पन्न हुआ होगा। यह रिपोर्ट दिल्ली सरकार की नाकामियों और अव्यवस्थाओं का चिट्ठा है। रिपोर्ट के अनुसार 13 मई के दिन अस्पतालों के सामने खड़े टैंकरों को इसलिए खाली नहीं किया जा सका क्योंकि अस्पतालों के ऑक्सीजन टैंक 75 प्रतिशत तक भरे हुए थे।

दिल्ली सरकार की रिपोर्ट के अनुसार अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत 1140 मीट्रिक टन थी। पर जाँच में पाया गया कि तब खपत मात्र 209 मीट्रिक टन थी। रिपोर्ट में इस तरह की तमाम और अनियमितताओं की बात की गई है। साथ ही रिपोर्ट में कमेटी ने सलाह भी दी है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। 

कमेटी की रिपोर्ट हमें अनुमान लगाने का एक आधार देती है। यह अनुमान कि दिल्ली की सरकार के काम करने का तरीका कैसा है। वैसे तो दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही हमें इस बात की एक झलक मिल गई थी कि सरकार ने कोरोना संक्रमण के दौरान कैसा काम किया है, पर यह रिपोर्ट इस सोच को और पुख्ता करती है कि दिल्ली सरकार में बैठे लोग एक महामारी के दौरान भी कैसा आचरण करते हैं।

जिस तरह की बातें दिल्ली के मुख्यमंत्री, बाकी मंत्रियों और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं द्वारा कही गई, वह जिम्मेदारी के प्रति सरकार में बैठे लोगों की गंभीरता को दर्शाती हैं। सबसे अधिक निराश सरकार के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने किया जिन्होंने इस बात की जरा भी चिंता नहीं की कि महामारी काल आम समय नहीं होता। उनके अलावा पार्टी के राज्यसभा सदस्य और और मंत्रियों ने बात-बात पर केंद्र सरकार पर आरोप लगाए और साबित किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों के प्रति कितने गंभीर हैं। 

दिल्ली सरकार और उसमें बैठे लोगों का आचरण वैसे तो आश्चर्यचकित नहीं करता पर फिर भी यह आशा बनी रहती है कि ये नेता महामारी काल में अपने आम आचरण से बाज आएँगे। ऐसे में जो कुछ हुआ वह किसी भी भारतीय के लिए निराशाजनक होगा। कभी-कभी यह लगता है कि बिना सोचे-समझे सार्वजनिक मंचों पर कुछ भी कहा जा सकता है, इन नेताओं के ऐसी सोच का आधार क्या होता होगा?

जब से कोरोना संक्रमण भारत में आया है, दिल्ली सरकार का आचरण दर्जनों बार निराशाजनक रहा है। लॉकडाउन के शुरूआती दिनों में प्रवासी मज़दूरों को दिल्ली से भगाने के प्लान से लेकर ऑक्सीजन की ऐसी अनुचित माँग और सिंगापुर वैरिएंट को लेकर बयान तक, ऐसे कई मौके आए जब सरकार में बैठे लोगों ने गैर जिम्मेदारीपूर्ण आचरण किया। 

अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद न्यायालय दिल्ली सरकार से कैसे सवाल करती है। अभी तक सरकार में बैठे लोगों ने कभी सवाल का सामना नहीं किया है। सवाल पूछे जाने पर अभी तक ये उसे टालते आए हैं पर अभी तक अक्सर ये सवाल केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और समर्थकों की ओर से उठाए गए हैं। मीडिया, पत्रकार और संपादक वैसे भी केजरीवाल सरकार और उसके नेताओं से सवाल नहीं पूछते। अब शायद पहली बार न्यायालय की ओर से सवाल उठ सकता है। जब ऐसा होगा तब दिल्ली की सरकार का जवाब जानना दिलचस्प रहेगा। पर अंत में प्रश्न वही है; सरकार में बैठे लोग सवालों का जवाब देंगे या सवालों का सवाल।

विज्ञान का मास्टर हबीब मोहम्मद, 9वीं की छात्रा को कॉल कर करता था तंग: स्कूल की कई छात्राओं पर किए गंदे कमेंट

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के मुदुकुलाथुर में एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में कार्यरत 38 वर्षीय शिक्षक को कक्षा 9 की एक छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु पुलिस ने शिक्षक की पहचान ए. हबीब मोहम्मद के रूप में की है, जो स्कूल में विज्ञान पढ़ाता था। हबीब मोहम्मद फोन कॉल के जरिए कक्षा 9 की छात्रा का यौन उत्पीड़न करता था। इसके बाद पुलिस ने शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस को इस कथित बातचीत का ऑडियो क्लिप मिला है, जिसमें एक व्यक्ति को बच्चे के साथ यौन अनुचित बातचीत करते हुए और उसके माता-पिता की जानकारी के बिना उसे अपने घर में बुलाते हुए सुना गया था। बताया जा रहा है कि यह आवाज हबीब मोहम्मद की ही है।

क्लिप में उस व्यक्ति को स्कूल में पढ़ने वाली कई अन्य लड़कियों के बारे में अभद्र टिप्पणी करते हुए सुना जा सकता है। आरोप है कि शिक्षक हबीब मोहम्मद ने अच्छे अंक देने के बदले बच्चे को यौन क्रिया के लिए मजबूर करने की कोशिश की थी। लड़की ने अपने परिवार को यौन उत्पीड़न के बारे में सूचित किया था, जिसके बाद शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।

शिकायत मिलने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एस लोयोला इग्नाटियस और मुदुकुलाथुर पुलिस के नेतृत्व में एक टीम ने मामले की जाँच की। मुदुकुलाथुर पुलिस ने शिकायत के आधार पर हबीब मोहम्मद को गिरफ्तार किया और POCSO अधिनियम की धारा 11 एवं 12 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

घटना के बाद रामनाथपुरम जिला पुलिस ने उस शिक्षक के यौन हिंसा का सामना करने वाली छात्राओं को आगे आने और ऐसे मामलों के बारे में जानकारी देने का आग्रह किया है। पुलिस ने वादा किया है कि छात्राओं के नाम को गुप्त रखा जाएगा।

एसपी ई कार्तिक ने ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस बीच, मुख्य शिक्षा अधिकारी सत्य मूर्ति ने कहा कि नौ साल से इस स्कूल में पढ़ा रहे आरोपित शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है।

बाड़ी के पटुआ तीत: मात्र एक दिन में पूरे इजरायल की आबादी से ज्यादा टीका, ‘बुद्धिजीवी’ खोज रहे विदेशी मीडिया की रिपोर्ट

बिहार के मिथिला क्षेत्र में एक कहावत बहुत प्रचलित है- बाड़ी के पटुआ तीत। इसका तात्पर्य यह कि लोग एक-दूसरे पर भरोसा करने के बजाय बाहरी लोगों पर अधिक यकीन करना चाहते हैं।

आजकल कुछ लोगों की यही सोच हो गई है कि अपने निहित स्वार्थ और खुद को अधिक बुद्धिजीवी दिखाने के लिए वो पश्चिमी देशों पर अधिक भरोसा करते हैं, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है। 21 जून 2021 को भारत में टीकाकरण महाअभियान को नई गति दी गई, तो इजरायल की कुल जनसंख्या के बराबर लोगों को टीका लगाया गया। अमेरिका से कम दिनों में उससे अधिक लोगों को भारत ने कोरोना वैक्सीन लगा दिया।

कोरोना महामारी हो या टीकाकरण अभियान की बात हो, केन्द्र सरकार के साथ राज्य सरकारें जिस शिद्दत के साथ काम कर रही हैं, उसकी सराहना नहीं करते हैं। क्योंकि, ये तो हमारी सरकार है। लोग भरोसा इस पर अधिक करना चाहते हैं कि विदेशी मीडिया ने क्या कहा और क्या लिखा?

बीते कुछ सालों से देखें, तो विदेशी मीडिया ने तो हमेशा ही भारत की गरीबी और कमियों को गिनाया और बेचा है। वहाँ की मीडिया भारत को लेकर एक अलग तरीके से नेगेटिव नेरेटिव सेट करने की कोशिश करती है और छह लोग उसी पर लहालोट होते हैं। ऐसे लोगों का अपना निहित और छद्म स्वार्थ होता है। उनकी यह सोच होती है कि केवल व्यवस्था की कमियों को ही गिनाएँगे, तो बहुसंख्यक लोग उन्हें बेहतर बुद्धिजीवी के रूप में स्वीकार करेंगे। ऐसे लोग जानबूझकर सच को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं।

उन्हें यह नहीं पता है कि सच अपनी गवाही खुद देता है। अच्छे काम सामने आते ही हैं। 21 जून को भारत ने एक दिन में सबसे अधिक कोविड टीकाकरण किया। सरकार की ओर से कहा गया कि देश में 86 लाख 16 हजार 373 लोगों को कोविड वैक्सीन लगाया गया। बता दें कि जून महीने में इजरायल की जनसंख्या 87 लाख 86 हजार 955 है। इस हिसाब से यदि लिखा जाए तो हम कह सकते हैं कि भारत ने एक दिन में लगभग पूरे इजरायल का टीकाकरण कर दिया। मगर, जब इसे विदेशी मीडिया लिखेगी तो इसे सकारात्मक रूप से नहीं लिखेगी और न ही यह संख्या देगी। वह तो इसे प्रतिशत में बताएगी और कहेगी कि बेहद कम रफ्तार है।

अमेरिका को सबसे अधिक विकसित देश माना जाता है। कोविड वैक्सीन की बात करें, तो अमेरिका में 165 दिनों में 29 करोड़ लोगों को टीका लगाया गया, वहीं भारत में 158 दिन में ही 29 करोड़ 46 लाख लोगों को कोविड वैक्सीन लगाई गई। बता दें कि इसमें करीब साढ़े पाँच करोड़ लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगाई जा चुकी है। यह आँकडा 23 जून, 2021 का है।

यदि हम आँकडों के आधार पर बात करें, तो भारत में 2.2 प्रतिशत लोग कोरेाना की चपेट में आए, जबकि अमेरिका के 10.3 प्रतिशत लोगों को कोरोना की जद में आना पडा। इसके पीछे की कारण को समझें, तो जिस प्रकार से भारत सरकार ने तुरंत लॉकडाउन आदि का बेहतर पालन करवाया और कोविड गाइडलाइन आदि के पालन करने के लिए हर ओर प्रयास किया गया, उसका ही नतीजा है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अनुसार, 39,49,630 सत्रों के माध्यम से टीके की कुल 29,46,39,511 खुराक दी जा चुकी है। ज्यादा लोगों के कोविड-19 संक्रमण से ठीक होने के साथ, भारत में रोजाना ठीक होने वालों की संख्या लगातार 41वें दिन दैनिक नए मामलों से ज्यादा बनी हुई। पिछले 24 घंटों के दौरान 68,817 लोग ठीक हुए। महामारी की शुरुआत से अभी तक संक्रमित लोगों में से 2,89,94,855 लोग पहले ही कोविड-19 से ठीक हो चुके हैं। इस प्रकार कुल रिकवरी रेट 96.56 प्रतिशत है, जिससे लगातार सुधार का रुझान प्रदर्शित हो रहा है।

असल में भारत लोकतांत्रिक देश है। यहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुछ लोग सोशल मीडिया के कई मंचों से गलत सूचनाएँ प्रसारित करते हैं। अधिकतर लोग इसे सच भी मान लेते हैं। इससे समाज में भ्रांति फैलती है। इस प्रकार की सूचनाएँ खूब वायरल भी कराई जाती हैं – सच की पड़ताल किए बिना। हालाँकि, भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की ओर से यह व्यवस्था की गई है कि आप किसी भी गलत सूचना को वहाँ सत्यापित कर और करा सकते हैं। लेकिन वैक्सीन को लेकर कई प्रकार की भ्राँति कुछ विशष समाज और तबकों में हैं। कई लोग इसे नपुसंकता, मौत, धर्म आदि से जोड़ देते हैं। तमाम वैक्सीन विशेषज्ञों ने इसे तथ्यहीन करार दिया है।

हाल ही में सूचना आई कि एक महिला स्वास्थ्यकर्मी ने उफनती नदी पार करके झारखंड में लोगों को टीका लगाने के अपने काम को पूरा किया। ऐसी ही खबरें जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से आईं। मगर, विदेशी मीडिया और कहें कि उनका अनुसरण करने वाली देश की मीडिया ने इसे देखना तक शायद गँवारा नहीं समझा। मगर, जैसे ही पश्चिमी देशों की मीडिया में कुछ नकारात्मक रिपोर्ट छपती है, चाहे उसका तथ्य हो या न हो, तुरंत देश के कुछ लोग उसका अनुसरण करने लगते हैं।

गौर करने योग्य यह भी है कि 21 जून, 2021 से कोविड टीकाकरण महाअभियान का आगाज हो चुका है। बेशक, चुनौती बड़ी है। प्रति सौ लोगों पर कुल टीकाकरण में अभी भारत सातवें स्थान पर बताया जाता है। पूरी तरह सुरक्षित यानी दोनों खुराक लेने वाले लोगों का फीसद धीरे-धीरे बढ़ रहा है। टीकाकरण केन्द्रों पर लोग आ रहे हैं। कुछ क्षेत्रों के लोगों में जागरूकता की कमी है। संसाधन आड़े आते रहे हैं। लेकिन हमारी खामियाँ ही हमारी खूबियाँ बन जाती हैं। तमाम अभियानों में ये बात देखी गई है। राजनीति से इतर जब समग्र देश किसी समस्या के समूल नाश को जुटता है, तो पोलियो जैसी बीमारियाँ भाग जाती हैं। पोलियो को खत्म करने में भारत की सहभागिता को पूरा विश्व सराह रहा है।

लेखक : सुभाष चंद्र

पायल रोहतगी को अहमदाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार, सोसायटी के चेयरमैन से झगड़ा और गाली-गलौच का आरोप

सोशल मीडिया पर अपने बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहनी वाली एक्ट्रेस पायल रोहतगी को सोसायटी के चेयरमैन को गाली देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने चेयरमैन के साथ गाली-गलौच तो की ही, साथ ही उनको जान से मारने की धमकी भी दी।

पूरा मामला अहमदाबाद के सुंदरवन एपिटॉम सोसायटी का है। इस सोसाइटी में 4-5 साल पहले पायल के पिता ने घर खरीदा था। लेकिन कुछ समय से पायल का सोसायटी में झगड़ा चल रहा था। ऐसे में 20 जून को वहाँ एक मीटिंग हुई जहाँ पायल बिन बुलाए पहुँच गईं। जब उन्हें रोका गया तो उन्होंने धमकाने के अंदाज में बात की।

घटना के बाद इस संबंध में सोसायटी के चेयरमैन ने पायल रोहतगी के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई। चेयरमैन का कहना था कि सोसायटी की सदस्य न होने के बाद भी वह 20 जून को चल रही मीटिंग में आईं और कई लोगों से झगड़ा तथा गाली-गलौच की। बच्चों के सोसायटी में खेलने को लेकर भी उन्होंने लोगों से जमकर झगड़ा किया।

शिकायत के बाद अहमदाबाद पुलिस ने एक्ट्रेस को अरेस्ट कर लिया है। उनके पति संग्राम सिंह मुंबई से अहमदाबाद के लिए निकल गए हैं। एबीपी न्यूज के अनुसार, संग्राम ने बताया कि सोसायटी को पायल द्वारा घर के अंदर और बिल्डिंग के परिसर में किसी भी तरह के वीडियो को बनाने को लेकर आपत्ति थी और वो ऐसा करने से बार-बार उन्हें रोकते और टोकते थे। संग्राम के मुताबिक इसके अलावा सोसायटी डेवलेपमेंट चार्ज के तौर पर पायल के परिवार से 5 लाख रुपए माँग रही थी और ये भी विवाद का एक बड़ा मुद्दा था।

उल्लेखनीय है कि पायल रोहतगी अक्सर अपनी वीडियो और पोस्ट के कारण चर्चा में रहती हैं। कुछ वक्त पहले कंगना रनौत का अकाउंट सस्पेंड होने पर उन्होंने बंगाल हिंसा पर वीडियो शेयर की थी। मालूम हो कि ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी विवाद के चलते रोहतगी को पुलिस ने पकड़ा हो। साल 2019 में उन्होंने नेहरू-गाँधी परिवार के बारे में एक पोस्ट किया था। तब भी उनकी गिरफ्तारी हुई थी और कोर्ट ने इस मामले में उन्हें हिरासत में भेज दिया था। हालाँकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

संजय चौहान बन इमरान खान ने तलाकशुदा महिला से की शादी: जबरन धर्म परिवर्तन, बेटी से रेप

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक व्यक्ति को उसकी धार्मिक पहचान छिपाकर एक महिला से शादी करने और बाद में उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपित ने कथित तौर पर महिला की बेटी के साथ दुष्कर्म भी किया था।

गुडम्बा थाना क्षेत्र के एक गाँव की रहने वाली 35 वर्षीय महिला ने पुलिस को बताया कि उस शख्स का नाम इमरान खान है और वह कानपुर का रहने वाला है। उसने संजय चौहान के रूप में अपना फर्जी परिचय दिया था।

तलाकशुदा महिला की पिछली शादी से एक नाबालिग लड़की थी। महिला ने दावा किया कि शादी के कुछ दिनों बाद ही इमरान ने उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करना शुरू कर दिया। महिला ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि जब महिला ने धर्म परिवर्तन से इनकार किया तो इमरान ने कथित तौर पर उसे परेशान किया और उसकी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार भी किया। 

पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से कई फर्जी पहचान पत्र और वोटर आईडी कार्ड भी बरामद हुए हैं। घटना की पुष्टि करते हुए डीसीपी नॉर्थ जोन देवेश पांडे ने कहा, “महिला ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने का भी आरोप लगाया। जाँच के बाद हमने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।”

हाल ही में गुजरात से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है। इसमें पीड़िता ने वडोदरा के फतेहगंज थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए पति मोहिब पठान पर जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया है। महिला ने बताया कि पठान ने उसे उससे शादी करने के लिए कहा और उसे आश्वासन दिया कि उसे उसके धर्म का पालन करने की अनुमति दी जाएगी। हालाँकि, शादी के एक महीने बाद से ही पठान ने उसे अपना नाम बदलने के लिए मजबूर करना शुरू कर दिया। बाद में, पठान ने एक काजी को बुलाया और इस्लाम के अनुसार निकाह की रस्में निभाईं।

पीड़ित महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पठान ने उसे उसके धर्म के अनुसार पूजा करने की अनुमति नहीं दी और उसके द्वारा लाई गई देवी-देवताओं की मूर्तियों को फेंक दिया। महिला ने शिकायत में पठान के पिता इम्तियाज पठान और बड़े भाई मोहसिन पठान का भी नाम लिया था।

‘पिता को मुझे दर्द देना पसंद है… ऐसा सिर्फ सेक्स ट्रैफिकिंग में होता है’: अमेरिकी सिंगर ब्रिटनी स्पीयर्स ने लगाई आजादी की गुहार

अमेरिकी पॉप सिंगर ब्रिटनी स्पीयर्स और उनके पिता जेमी स्‍पीयर्स के बीच विवाद बढ़ने लगा है। बुधवार (जून 23, 2021) को सिंगर ब्रिटनी ने इस संबंंध में कोर्ट में अपना बयान दर्ज करवाया। उन्होंने फोन पर हुई कार्रवाई में कोर्टरूम में रोते हुए कहा कि उन्हें 13 साल हो गए सब कुछ सहते हुए अब उन्हें बस उनकी आजादी वापस चाहिए।

कोर्ट के समक्ष उन्होंने उस ‘कंजरवेटरशिप’ (संरक्षण व्यवस्था) को समाप्त करने का अनुरोध किया, जिसके जरिए 2008 से उनका जीवन एवं धन नियंत्रित किया जा रहा है। 39 वर्षीय स्पीयर्स ने कोर्ट में अपनी बात रखते हुए बताया कि उन्हें हमेशा से नकारा गया जिसके चलते वह शॉक में हैं और आहत हैं।

बता दें कि मानसिक तौर पर ठीक नहीं होने की वजह से कानूनी तौर पर 2008 से ब्रिटनी की देखभाल उनके पिता कर रहे हैं। जेमी स्पीयर्स के पास कानूनी अधिकार है, जिससे वो अपनी बेटी के जीवन से जुड़ा हर फैसला ले सकते हैं। इसमें उनकी पर्सनल लाइफ और पैसों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

ब्रिटनी इस कंजरवेटरशिप से निकलने के लिए बहुत पहले से लगी हुई हैं। लेकिन इससे पहले कभी उनका बयान सार्वजनिक नहीं किया गया। आखिरी दफा उन्होंने 2019 में कोर्ट के सामने बात रखी थी। इस बार कोर्ट की सुनवाई के दौरान ब्रिटनी का समर्थन करने वाली अदाकारा जेनिफर प्रेस्टन ने कहा,

“मैं एक माँ और उनकी एक प्रशंसक हूँ। हम यहाँ सुनने आए हैं कि वह क्या कहना चाहती हैं। उनके साथ पिछले 13 साल से एक बच्चे की तरह व्यवहार किया जा रहा है, उनका उनके या उनके मंगेतर के जीवन पर कोई नियंत्रण नहीं है, जबकि वह यह सब संभालने में सक्षम हैं।”

उल्लेखनीय है कि स्पीयर्स ने कोर्ट में दिए अपने भावुक बयान में कहा, “मैं चाहती हूँ कि बिना किसी मूल्यांकन के इस ‘कंजरवेटरशिप’ को समाप्त किया जाए।” वह कहती है, “अगर मैं काम कर सकती हूँ तो मुझे कंजरवेटरशिप में नहीं रहना चाहिए। कानून को बदलने की जरूरत है। मुझे लगता है कि ये कंजरवेटरशिप एक अभिशाप है जिसमें मैं अपनी पूरी जिंदगी नहीं जी पा रही।”

बयान में उन्होंने ऐसे कानून-व्यवस्था और अपने पिता की निंदा की जिन्होंने उनके अधिकतर अस्तित्व को नियंत्रित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘ कंजरवेटरशिप’ से मेरा भला होने से अधिक नुकसान हो रहा है। मैं एक जिंदगी पाने की हकदार हूँ।”

उन्होंने कहा कि वह अपने प्रेमी से शादी करना चाहती हैं और एक और बच्चा चाहती हैं, लेकिन ‘कंजरवेटरशिप’ व्यवस्था उन्हें इसकी अनुमति नहीं दे रही है। सुनवाई के दौरान स्पीयर्स के करीब 100 प्रशंसक अदालत के बाहर एकत्रित हुए और हाथ में ‘ब्रिटनी को अब आजाद करें’ और ‘ब्रिटनी की जिंदगी से बाहर निकलो’ की तख्ती लिए नजर आए।

रिपोर्ट्स बताती है कि स्पीयर्स लंबे समय से कंजरवेटरशिप को खत्म करने का प्रयास कर रही थीं। उन्होंने कोर्ट के सामने बयान देते हुए बताया भी कि वह पिछली बार जब कोर्ट में आई तो उनकी सुनवाई हुई। इस बीच उनके साथ कई चीजें हुई। उन्होंने बताया कि उन्हें 2018 में एक टूर पर भेजा गया, जहाँ वह जाना भी नहीं चाहती थी। जब उन्होंने इनकार किया तो उन्हें कहा गया कि ऐसा करने पर उनपर कार्रवाई हो सकती हैं।

कोर्ट में जज के सामने आपबीती सुनाते हुए स्पीयर्स ने ये भी कहा कि वो चाहती है कि जज के सामने हमेशा फोन के सामने बैठी रहें क्योंकि जैसे ही वह यहाँ से हटेंगी उन्हें बस और बस ना सुनने को मिलेगा। वह अपने अकेलेपन की बात भी जज को बताती हैं और कहती हैं कि उन्हें बच्चा पैदा करने का और जिंदगी जीने का अधिकार है जैसे कि सबको होता है।

हालाँकि जब भी उन्होंने अपने परिवार विस्तार की बात सोची उन्हें हमेशा कंजरवेटरशिप की उलाहना दे दी गई। साथ ही उन्हें डॉक्टर के पास भी नहीं जाने दिया गया। उनके मुताबिक उन्हें ऐसा लगता है कि वह एक रीहैब प्रोग्राम में हैं। जबकि जहाँ वह रहती हैं वह उनका घर हैं। वह चाहती हैं कि वह अपने प्रेमी के साथ उसकी कार में घूमें और थेरेपिस्ट से हफ्ते में एक बार मिलें वो भी अपने घर पर, न कि दो-दो बार, क्योंकि वह जानती हैं कि उन्हें कम इलाज की जरूरत है।

वह बताती हैं, “मेरे पिता को मेरे ऊपर कंट्रोल रखकर मुझे दर्द देने में मजा आता है। उन्हें ये सब बहुत पसंद है।” अपने पिता की मनमानियों और उनकी इच्छा के विरुद्ध उनसे काम कराए जाने की तुलना ब्रिटनी सेक्स ट्रैफिकिंग से भी करती हैं। वह कहती हैं, “इन सबके जैसा सिर्फ सेक्स ट्रैफिकिंग होता है। किसी को उसकी मर्जी के बिना काम करवाना उनसे हर चीज ले लेना- क्रेडिट कार्ड, कैश, फोन, पासपोर्ट… और फिर उसे ऐसे घर पर रखना जहाँ अन्य काम करने वाले लोग भी हों…।”

ब्रिटनी बताती हैं कि उनके घर में सब उनके साथ रहते हैं। एक नर्स है जो 24 घंटे सातों दिन सुरक्षा में रहती हैं। एक शेफ है जो आता है और खाना बनाता है। ब्रिटनी के अनुसार, ये सब उन्हें देखते हैं हर दिन-हर सुबह, हर दोपहर और हर रात- वो भी नंगा। उनके मुताबिक उनकी कोई प्राइवेसी नहीं रह गई।

अपने बयान में ब्रिटनी यह भी कहती हैं कि उन्हें जो कहने को कहा जाता है उन्हें करना पड़ता है अगर वह नहीं करती तो वह अपने बच्चों और बॉयफ्रेंड को नहीं देख पाती। वह बताती हैं कि उन्होंने दुनिया से झूठ बोला कि वो ठीक हैं खुश हैं। उन्हें लगा ऐसा बोल देने से वो खुश रहेंगी, लेकिन उन्हें हमेशा नकारा गया। अब वह सच बता रही हैं कि वो इन सबसे खुश नहीं हैं। इनके कारण सो नहीं पाती हैं। बहुत सहने के बाद उन्हें गुस्सा निकालना पड़ रहा है। वह हर रोज रोती हैं। कोर्ट के सामने ब्रिटनी ने अपने पिता और प्रबंधन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि वो अपने पिता के लिए पिछले 13 साल से काम कर रही हैं। वह चाहती हैं कि वह अपने परिवार के ख़िलाफ़ केस करें और दुनिया के साथ अपनी कहानी साझा करें।

भारत के IT मंत्री के ट्विटर अकाउंट पर रोक, देश के बजाय अमेरिकी कानून बना कारण: ट्विटर की मनमानी कब तक?

सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर ने आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का अकांउट एक घंटे के लिए ब्लॉक कर दिया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक ट्विटर ने अमेरिकी कानून का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री का ट्विटर अकाउंट ब्लाक किया था। हालाँकि चेतावनी देने के बाद फिर से अकाउंट को बहाल कर दिया गया है।

रविशंकर प्रसाद ने खुद ट्वीट करके खुद इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, “ट्विटर ने कथित आधार पर लगभग एक घंटे तक के लिए मेरा अकाउंट बंद कर दिया। इसके पीछे उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट के उल्लंघन का मामला बताया। हालाँकि बाद में अकाउंट को खोल दिया गया।”

आईटी मंत्री ने बताया कि ट्विटर की कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 4 (8) का घोर उल्लंघन था। ट्विटर उनका अकाउंट ब्लॉक करने से पूर्व इसकी सूचना देने में असफल रहा।  

SC ऑडिट पैनल की रिपोर्ट: केजरीवाल सरकार के ड्रामे के कारण खड़े रहे ऑक्सीजन टैंकर, दूसरे राज्यों को भी झेलनी पड़ी कमी

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए ऑडिट पैनल ने अपनी रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब पूरा देश मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए संघर्षरत था, तब अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने 4 गुणा अधिक ऑक्सीजन की माँग की थी।

इस दौरान राजनैतिक लाभ लेने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनके मंत्रियों ने लगातार यह कहा था कि दिल्ली को उचित मात्रा में ऑक्सीजन नहीं प्राप्त हो रही है, इसके कारण दिल्ली को आवश्यकता से अधिक ऑक्सीजन प्रदान करनी पड़ी। यह सब तब हुआ जब बाकी राज्य लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के लिए लगातार प्रतीक्षा कर रहे थे।

ऑडिट पैनल की रिपोर्ट में PESO के द्वारा किए गए अध्ययन को शामिल किया गया है। इसमें यह बताया गया है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्य टैंकर और कंटेनर की कमी से जूझ रहे थे, वहीं दिल्ली के 4 कंटेनर सूरजपुर आईनॉक्स में खड़े थे। ये कंटेनर इसलिए खड़े थे, क्योंकि दिल्ली में आपूर्ति आवश्यकता से ज्यादा थी और लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन को स्टोर करने की कोई जगह नहीं थी। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि दिल्ली द्वारा जितनी ऑक्सीजन की माँग की जा रही थी, वास्तविक आवश्यकता उससे कहीं कम थी।

PESO के द्वारा किए गए अध्ययन के कुछ निष्कर्ष

अब चूँकि दिल्ली के अस्पतालों में आवश्यकता से अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध थी। इसलिए ऑक्सीजन निस्तारण में अधिक समय लगने लगा। इससे रिलायंस जैसे अपूर्तिकर्ताओं को भी अपने कंटेनर प्राप्त करने और उन्हें रिफिल करके भेजने में औसत से अधिक समय लग गया।

अंतरिम रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली न तो ऑक्सीजन के वास्तविक उपयोग का ऑडिट कर रही थी, न ही इसकी वास्तविक माँग का आकलन कर रही थी। इससे केंद्र सरकार उत्तरी भारत के अन्य राज्यों को ऑक्सीजन आवंटित कर सकने में असमर्थ थी, जहाँ अस्पतालों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) की वास्तविक आवश्यकता थी।

ऑडिट पैनल की रिपोर्ट के अनुसार, 5 मई से 11 मई के बीच पेट्रोलियम एंड ऑक्सीजन सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) द्वारा किए गए अध्ययन में यह भी पाया गया था कि दिल्ली के लगभग 80% प्रमुख अस्पतालों में 12 घंटे से अधिक समय तक LMO का स्टॉक था। औसत दैनिक खपत 282 मीट्रिक टन से 372 मीट्रिक टन के बीच पाई गई और दिल्ली में उस समय मांग की जा रही 700 मीट्रिक टन LMO के लिए पर्याप्त भंडारण सुविधाएँ नहीं थीं।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली सरकार द्वारा LMO की कमी का दावा किया गया था। उसके बाद जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखने का निर्देश दिया था। वहीं, केंद्र ने विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर 415 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति निश्चित करने की बात कही थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 9 मई से केजरीवाल सरकार पड़ोसी राज्यों में वैकल्पिक भंडारण स्थान प्राप्त करने की कोशिश कर रही थी क्योंकि उनके पास LMO के लिए भंडारण स्थान समाप्त हो गया था। दिल्ली सरकार ने भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण एयर लिक्विड कंपनी से आवंटित LMO (150 एमटी) की तुलना में कम मात्रा में ऑक्सीजन उठाई थी। केजरीवाल सरकार ने कंपनी से पानीपत और रुड़की में अपने संयंत्रों में उनके लिए LMO स्टोर करने के लिए भी कहा था।

इतना ही नहीं, दिल्ली की AAP सरकार के कारण ओडिशा में लिंडे और JSW झारसुगुड़ा जैसे संयंत्रों को अपने टैंकर होल्ड करने और अन्य राज्यों को आपूर्ति में देरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। दरअसल, दिल्ली सरकार ने उपलब्ध और आवंटित ऑक्सीजन टैंकरों का उपयोग ही नहीं किया अथवा अस्पतालों में स्टोरेज की अनुपस्थिति के कारण टैंकर वापस कर दिए गए। गोयल गैसेस ने सूचित किया था कि दिल्ली के अस्पतालों के पास आवश्यक ऑक्सीजन उपलब्ध है और उनके पास कोई अतिरिक्त भंडारण सुविधा उपलब्ध नहीं है इसलिए उनके टैंकर लंबे समय तक इंतजार करते रहे जिसके परिणामस्वरूप अन्य राज्यों को ऑक्सीजन आपूर्ति में कमी हो गई।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बड़े पैमाने पर हंगामा किया और दिल्ली की ऑक्सीजन को रोके रखने के लिए अन्य राज्यों को भी जिम्मेदार ठहराया था। केजरीवाल ने तो प्रोटोकॉल को भी तोड़ा और पीएम मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की गोपनीय बैठक के वीडियो फुटेज को टीवी पर दिखा दिया। मीटिंग में उन्हें यह कहते हुए देखा गया कि दिल्ली को ऑक्सीजन की बहुत अधिक जरूरत है। दिल्ली सरकार का राजनैतिक और मीडिया का ड्रामा इतना अधिक हो गया था कि अंततः सुप्रीम कोर्ट को इसमें दखल देना पड़ा।