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‘केजरीवाल के आवास पर खर्च हो रहे ‘आम आदमी’ के ₹9 करोड़’: बीजेपी नेता ने दिखाए दस्तावेज, पूछा- स्विमिंग पूल बन रहा या वाटर पार्क?

भारतीय जनता पार्टी के नेता नवीन कुमार जिंदल का दावा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने सीएम आवास को अपग्रेड कराने के लिए टैक्सपेयर्स के करोड़ों रुपयों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिंदल के मुताबिक, आवास को आलिशान महल बनाने में 9 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री आवास के बाहर खड़े होकर एक वीडियो शेयर करते हुए जिंदल ने दावा किया कि जब लोग महामारी के बीच स्वास्थ सुविधाओं से जूझ रहे थे, उस वक्त मुख्यमंत्री अपने बंगले का मेकओवर कराने में करोड़ों खर्च कर रहे थे।

अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “मुझे गाड़ी, बंगला, सिक्योरिटी कुछ नही चाहिए मै तो एक आम आदमी हूँ। टैक्सपेयर के पैसों से अपने बंगले मे करीब 9 करोड़ खर्च कर आलिशान महल बनवाने मे लगा है दिल्ली का मालिक। अरविंद केजरीवाल को ऐशों आराम के सब ठाठ चाहिए और दिल्ली की जनता गन्दा पानी पिए, बिना अस्पताल और ऑक्सीजन के मरे।”

जिंदल ने प्रूफ के तौर पर कई कागज दिखाते हुए कहा, “ऐसे समय में जब दिल्लीवासी 1 लीटर साफ पानी के लिए तड़प रहे हैं। कई-कई घंटे लाइन में लग रहे हैं। ऐसे समय में दिल्ली का मुखिया जो खुद को दिल्ली का मालिक कहता है वह अपने घर में सरकारी पैसे से करीब 9 करोड़ की लागत से अंदर निर्माण करवा रहा है। पता नहीं अंदर स्विमिंग पूल बन रहा है या फिर वाटर पार्क।”

वह कहते हैं कि जिस समय दिल्ली के लोग पानी के लिए तड़प रहे हैं उस समय अरविंद केजरीवाल के बच्चे स्विमिंग पूल में नहाएँगे। ये हालत है दिल्ली का। कोई इसके बारे में बोल नहीं सकता, कोई इसके बारे में कुछ कह नहीं सकता, क्योंकि मीडिया के मुँह पर चाँदी का जूता मारा जाता है और वह चुप हो जाता है।

वीडियो में जिंदल ने एक ठेकेदार को जारी किया गया दिल्ली सरकार का आदेश दिखाकर बताया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के आवास में एडिशन/ऑल्ट्रेशन के लिए टेंडर को मंजूरी दे दी गई है, और इसके लिए 8,61,63,422 की राशि स्वीकृत की गई है। भाजपा इसी राशि को देखकर हैरानी जताती है कि आखिर इतनी बड़ी रकम से सीएम आवास में क्या होगा। भाजपा नेता ने अपनी बात रखते हुए टैक्सपेयर्स के पैसे को खर्च करने पर सीएम केजरीवाल पर सवाल खड़ा किया।

मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए जिंदल ने सोशल मीडिया यूजर्स से इस मामले में आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने केजरीवाल के फ्री वैक्सीनेशन के फर्जी दावे पर भी उन्हें आड़े हाथों लिया। आम आदमी पार्टी द्वारा ‘राम मजन्मभूमि ट्रस्ट’ पर लगाए गए भूमि घोटाले के इल्जामों पर उन्होंने सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि ये लोग राम मंदिर बनने में बाधा डाल रहे हैं जबकि खुद अपने ऐशोआराम के लिए ऐसे पैसे खर्च रहे हैं। 

बता दें कि इससे पहले अरविंद केजरीवाल द्वारा इस तरह जनता का पैसा बर्बाद करने का इल्जाम अप्रैल में लगा था। उस समय सामने आया था कि कैसे केवल 2021 के तीन महीनों में केजरीवाल सरकार ने मीडिया में एड देने के लिए 150 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। वहीं दो साल में विज्ञापनों पर 800 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

Mars पर इंसान कर पाएँगे प्रजनन! 200 साल तक जिंदा रहेगा Sperm: वैज्ञानिकों ने नए शोध में किया खुलासा

मंगल ग्रह पर इंसानी जीवन को लेकर आए दिन कई तरह की रिसर्च होती हैं। ऐसे में इंसान Mars पर प्रजनन कर सकता है या नहीं, इसका जवाब भी वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है। वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया जाँच में पाया है कि आने वाले समय में इंसान मंगल ग्रह पर प्रजनन करने में सक्षम होगा क्योंकि वहाँ स्पर्म 200 साल तक सर्वाइव कर सकता है।

बता दें कि मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना को लेकर जहाँ इस रिसर्च ने एक रौशनी डाली है। वहीं ये सवाल अब भी उठता है कि आखिर मंगल ग्रह पर कम ग्रैविटी के साथ लोग शारीरिक संबंध कैसे बना सकते हैं?

इस हालिया निष्कर्ष से पहले तक एक्सपर्ट्स को लगता था कि स्पेस के रेडिएशन से DNA खराब हो जाएगा और प्रजनन नामुमकिन होगा। लेकिन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 6 साल तक चूहे का स्पर्म रखा रहने के बाद भी स्वस्थ पाया गया। जिसे देखते हुए वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष दिया।

मालूम हो कि इस खोज के लिए 66 चूहों से लिए गए सैंपल्स को 2012 में 30 से ज्यादा ग्लास ऐंप्यूल्स में रखा गया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने सबसे बेहतर सैंपल से बच्चे को पैदा करने का फैसला किया। 4 अगस्त, 2013 को 3 सैंपल्स को ISS के लिए लॉन्च किया गया और तीन को जापान के सुकूबा में वैसी ही कंडीशन्स में रखा गया जिनमें कई रेडिएशन शामिल थे।

पहला बॉक्स 19 मई, 2014 को वापस लाया गया और सैंपल के विश्लेषण के बाद प्रॉजेक्ट जारी रखा गया। दूसरा बॉक्स 11 मई, 2016 को लाया गया। तीसरा 3 जून, 2019 को लौटा। धरती पर लौटने के बाद टीम ने RNA सीक्वेंसिंग की मदद से देखा कि सैंपल्स में कितना रेडिएशन पहुँचा है। अपनी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि अंतरिक्ष ट्रिप से स्पर्म के न्यूक्लियस पर फर्क नहीं होता है। इसके बाद धरती पर रखे बॉक्स भी जापान की यामानाशी यूनिवर्सिटी पहुँचाए गए।

इस शोध के साथ ही कुछ वैज्ञानिकों ने अब दावा किया है कि लाल ग्रह यानी मंगल पर भी इंसान बच्चे पैदा कर सकता है। माना जाता है कि रेडिएशन की वजह से डीएनए  खराब हो सकते हैं और प्रजनन की क्षमता कम हो सकती है। लेकिन नए प्रयोग ने इस सोच को बदल दिया। इस काम के लिए वैज्ञानिकों ने चूहों पर किए गए प्रयोग में उनके स्पर्म को फ्रीज करके करीब 6 सालों तक हाई रेडिएशन वाले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में रखा था।

प्रेमी संग निकाह करना चाहती थी 20 साल की तसीम, छोटे भाई ताजुद्दीन और अम्मी-अब्बू ने पेट्रोल डाल आग लगा दी

आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ पर एक 20 साल की लड़की के अफेयर से नाराज माता-पिता और उसके छोटे भाई ने मिलकर उसको आग के हवाले कर दिया। फिलहाल, युवती अस्पताल में भर्ती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घर वाले लड़की की शादी दूसरी जगह करना चाहते थे, लेकिन वो किसी और से प्यार करती थी। पुलिस के मुताबिक, लड़की ने अपने माता-पिता को स्पष्ट रूप से बताया था कि वह किसी से प्यार करती है और उसी से शादी करना चाहती थी। इसी कारण वह उनके द्वारा लाए गए सभी रिश्तों को अस्वीकार कर रही थी।

रायचिटी सर्कल इंस्पेक्टर राजू के मुताबिक, “रायचोटी शहर के कोथापल्ली इलाके की 20 वर्षीय तसीम ने बताया कि उसके माता-पिता लंबे समय से उसकी शादी के लिए रिश्ता देख रहे थे, लेकिन वह उन सभी को अस्वीकार कर रही थी। वह एक लड़के से प्यार करती थी, लेकिन उसके माता-पिता उससे शादी करने के खिलाफ थे।” उन्होंने बताया कि वो तसीम को किसी और से शादी करने के लिए मजबूर कर रहे थे। इस वजह से घर में कई झगड़े हुए और मंगलवार (15 जून 2021) की शाम को परिवार में कहासुनी हो गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़की के माता-पिता और भाई उसकी शादी अपनी पसंद के लड़के से कराने पर अड़े थे। वहीं, वह अपने प्रेमी के साथ शादी करना चाहती थी। इस बात से नाराज होकर दोनों ने लड़की की पिटाई की। पिटाई के बाद उन्होंने उससे कहा कि वह किसी भी सूरत में दूसरे लड़के से शादी नहीं करेगी।

लड़की ने अपने बयान में कहा हो कि उसके माता-पिता और छोटे भाई ताजुद्दीन ने उस पर पेट्रोल डाल कर उसे आग लगा दी। महिला की बहन उसे सरकारी अस्पताल ले गई जहाँ उसे इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। पुलिस ने कहा, “सूचना मिलने पर हम अस्पताल पहुँचे और उसका बयान दर्ज किया। लड़की के माता-पिता और छोटे भाई के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। हम उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लेंगे।”

14 साल में 83 इंसानों को खा गया ‘ओसामा’, न बच्चों को छोड़ा और न बुजुर्गों को

अफ्रीकी देश युगांडा की विक्टोरिया नदी में एक समय में इंसानों को खाने वाला दुनिया का बेहद खतरनाक मगरमच्छ रहता था। इस खतरनाक जीव का नाम खूँखार आतंकी ओसामा बिन लादेन के नाम पर है। 1991-2005 के बीच में ओसामा नाम के इस मगरमच्छ ने लुगंगा के गाँव में तकरीबन 83 लोगों को निगला था

धीरे-धीरे इसकी जुबान पर इंसानी गोश्त का स्वाद चढ़ गया। जिसके बाद लगभग 5 मीटर लंबे ओसामा ने गाँव की 10% आबादी का सफाया कर दिया। इस बीच इसने न तो किसी बुजुर्ग को छोड़ा और न ही किसी छोटे बच्चे को। जब कभी बच्चे नदी किनारे अपनी बाल्टी भरने आते तो ये उन्हें खींचते हुए नदी में ले जाता।  

इसके अलावा नदी में मछली पकड़ने आए लोगों को भी मार देता। ये पहले उनकी नाव के इर्द-गिर्द घूमता। फिर उनकी नाव पलटता और बाद में उन्हें बुरी तरह चीर कर खा जाता। कई बार इसने नाव पर कूदकर भी लोगों का शिकार किया था।

75 साल के ओसामा का खौफ सबसे ज्यादा 1991 से 2005 के बीच था। लेकिन अभी इस वर्ष मार्च में युगांडा वाइल्डलाइफ अथॉरिटी के अधिकारियों ने और 50 स्थानीय लोगों ने ने दक्षिणी युगांडा में इसे पकड़ने में सफलता पाई। सबने गाय की आंत को चारा बनाकर इसके सामने डाला। लोगों ने गाय की आंत वही फेंकी जहाँ ओसामा अक्सर छिपता था। इसके बाद जैसे ही ओसामा अपनी जगह से बाहर निकला, सबने इसको पकड़ लिया।

दरअसल, ओसामा को पकड़ने के लिए गाय की आंत पर तांबे का फँदा लगाया गया था जो उसके झपट्टा मारते ही मुँह में फँस गया। इसके बाद 50 लोगों ने उसे रस्सी से पकड़ा और उसे बाहर लाए। बाद में उसे युगांडा क्रॉस लिमिटेड को सौंप दिया। एक मगरमच्छ को पकड़ने में 7 दिन की मेहनत लगी। बाद में वह इटली और दक्षिण कोरिया में फैशन उद्योगों में ब्रीडिंग स्टॉक के इस्तेमाल के लिए भेज दिया गया।

जहाँ जाकर इसकी इंसानी गोश्त खाने की तलब भी शांत हो गई। हाल में वहाँ ये मुर्गे का माँस खाते पाया गया था। लेकिन वाइल्डलाइफ अधिकारियों ने ये देखने के बाद कि उसे ब्रीडिंग स्टॉक की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, हरकत को शर्मनाक बताया। वहीं लुगंगा के लोगों का कहना है कि इस आदमखोर मगरमच्छ को बड़े हल्केे में यहाँ से ले जाया गया। 

2005 में ओसामा के बारे में बात करते हुए युगांडा क्रोक्स के मालिक एलेक्स मुताम्बा ने कहा था, “ओसामा जैसे सभी नदी के मगरमच्छ इंसानों को खा लेंगे यदि उन्हें लगेगा कि उनके क्षेत्र पर अतिक्रमण किया जा रहा है। लेकिन हमारे मगरमच्छ पूरी तरह सुरक्षित हैं, इसलिए मुझे ज्यादा चिंता नहीं है।” कथित तौर पर, युगांडा क्रोक्स में लगभग 5000 मगरमच्छ हैं, जहाँ उनका उपयोग हैंडबैग इंडस्ट्री में किया जाता है।

बता दें कि साल 2011 के नवंबर माह में 40 साल के आर्मी मेजर मरियस एल्स को उनके 1.2 टन के हिप्पो ने मार दिया था। उनका शव एक नदी में मिला था, जहाँ तमाम जानवरों ने उनके शव को नोचा हुआ था। एल्स का शरीर जिस नदी में डूबा हुआ पाया गया था, वही से उन्होंने छह साल पहले अपने हिप्पो को बाढ़ से बचाया था।

मास्टरमाइंड बरकत अली, गैंग मेंबर मेवाती: लड़कियों की फेक प्रोफाइल बना ‘सेक्स जाल’ में फाँसे 200

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ‘सेक्सटॉर्शन रैकेट’ का पर्दाफाश करते हुए इसके मास्टरमाइंड बरकत अली को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है। पड़ताल में मालूम चला है कि यह रैकेट मेवात के अपराधियों द्वारा संचालित किया जा रहा था। रैकेट से जुड़े अन्य अपराधियों की तलाश में पुलिस मेवात क्षेत्र में छापेमारी कर रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस रैकेट के लोग सोशल मीडिया पर लड़की की फेक आईडी बनाकर सेक्स चैट की शुरुआत करते थे। कुछ दिन बाद जब लड़के इस जाल में फँस जाते थे तो रैकेट के सदस्य उन्हें वीडियो कॉल करने के लिए कहते थे। वीडियो ऑन होते ही वे उन्हें एक लड़की दिखाते थे, जो कपड़े उतार रही होती थी। इसके बाद वह टारगेट को भी ऐसा करने को कहते थे।

ज्वाइंट कमिश्नर बीके सिंह ने बताया, “यह गैंग स्क्रीन रिकॉर्डर का प्रयोग करके वॉट्सएप की वीडियो कॉल रिकॉर्ड करते थे और बाद में अश्लील वीडियो को अपलोड करने की धमकी देकर पैसे हड़पने में लग जाते थे।” खबर के अनुसार, आरोपित स्क्रीन रिकॉर्ड के जरिए अपने टारगेट की वीडियो रिकॉर्ड करते थे। वहीं एक एप के जरिए आवाज बदलकर उन्हें बेवकूफ भी बनाते थे। गैंग के अपराधी अपने आप को यूट्यूबर बताते हुए टारगेट लोगों को वीडियो वायरल करने की धमकी देते थे। इस तरह यह गैंग पिछले कुछ माह में 200 से ज्यादा लोगों को अपना निशाना बना चुका है।

इससे पहले यह गैंग खुद को भारतीय सेनाकर्मी बताकर लोगों को वॉट्सएप के जरिए कार-बाइक बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का काम करता था। सितंबर 2020 में बरकत अली और इसके साथियों ने 12.8 लाख रुपए कैश लूटे थे। यह लूट उन्होंने कर्नाटक के मैसूर में एचडीएफसी बैंक की एटीएम मशीन तोड़कर की थी। बाद में यह गैंग सोशल मीडिया के जरिए सेक्स रैकेट चलाने लगा।

पिछले कुछ महीनों में सेक्सटॉर्शन से संबंधित पुलिस के पास तमाम शिकायतें आ रही थीं। इसी क्रम में पुलिस ने निगरानी बढ़ानी शुरू कर दी। पड़ताल में यह भी पता चला कि यह गैंग अपने टारगेट से सिर्फ 15 हजार रुपये माँगते थे, ताकि पीड़ित व्यक्ति शर्मिंदगी से बचने के लिए बिना आनाकानी किए इनकी माँग पूरी कर दे और मामला तूल भी न पकड़े।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में जाल बिछाकर आरोपित को गिरफ्तार किया गया। आरोपित के गुरुग्राम आने की सूचना एएसआई ब्रिजलाल और कॉन्सटेबल मिंटू को मिली थी। बरकत अली पलवल का रहने वाला है और उसने केवल हाईस्कूल तक पढ़ाई की है।

LJP की फाइट से ‘यौन शोषण’ बाहर निकला , चिराग ने कहा- ‘शेर के बेटे को चाचा ने कर दिया अनाथ’

बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) न सिर्फ टूटी है, बल्कि इसके शीर्ष परिवार में भी विभाजन पैदा हो गया है। अब चिराग पासवान के चचेरे भाई और सांसद प्रिंस राज के खिलाफ एक महिला ने यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई है। प्रिंस के खिलाफ पहले भी वो महिला ये आरोप लगा चुकी है। प्रिंस के पिता रामचंद्र पासवान समस्तीपुर से सांसद थे, लेकिन उनके निधन के बाद हुए उप-चुनाव में प्रिंस को जीत मिली।

प्रिंस पासवान लोजपा के 5 बागी सांसदों में शामिल हैं और अपने व चिराग के चाचा पशुपति कुमार पारस के गुट में हैं। चिराग ने दावा किया है कि वो अभी भी लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और साथ ही पाँचों सांसदों को पार्टी से निष्काषित करने का ऐलान किया है। दिल्ली के क्नॉट प्लेस थाने में प्रिंस राज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। हालाँकि, अभी तक इसे FIR में तब्दील नहीं किया गया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि जाँच जारी है। प्रिंस पहले चिराग के करीबी हुआ करते थे।

उधर बुधवार (जून 16, 2021) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के जमुई से सांसद चिराग पासवान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से तबीयत खराब होने के कारण वो सक्रिय नहीं रह पाए। उन्होंने कहा कि ये समस्या एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से ख़त्म नहीं होगी, बल्कि ये एक लंबी लड़ाई है। उन्होंने कहा कि वो चाहते थे कि बंद कमरे में परिवार का मतभेद निपट जाए। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में उनके पिता रामविलास पासवान के निधन के बाद से ही मुश्किलें बढ़ गई थीं, क्योंकि चुनाव सिर पर था।

उन्होंने बताया कि इन सबके बावजूद उन्होंने मेहनत की और पार्टी को 25 लाख वोट्स मिले। उन्होंने जदयू के कारण NDA गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने की बात भी कबूल की। चिराग ने कहा कि उनके भरोसा नीतीश कुमार की नीतियों पर नहीं था, इसीलिए उन्होंने किसी के सामने न झुकने का फैसला लिया। साथ ही कहा कि पार्टी में जो लोग संघर्ष के पथ पर नहीं थे, उन्होंने अलग रुख अपनाया। चिराग ने आरोप लगाया कि उनके चाचा पशुपति कुमार पारस ने चुनाव प्रचार में कोई भूमिका नहीं निभाई।

चिराग पासवान ने कहा कि जब वो बीमार थे, तब उनके पीठ पीछे पार्टी को तोड़ने की साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि इस बार की होली पर परिवार का कोई भी व्यक्ति साथ नहीं था तो उन्होंने अपनी चिट्ठी में चाचा से बात करने की अपील की थी। उन्होंने इस पत्र को हाल ही में सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उन्होंने कहा कि चाचा ने अगर उन्हें कहा होता तो वो उन्हें ही संसदीय दल का नेता बना देते।

चिराग ने कहा, “मैं रामविलास पासवान का बेटा हूँ, मैं शेर का बेटा हूँ। पहले भी लड़ा था और आगे भी लड़ता रहूँगा। चाचा ने मुझे नाथ कर दिया। बिहार की जनता हमारे साथ है। जदयू की तरफ से बाँटने की कोशिश की जा रही है। इन्होंने पहले भी दलितों को बाँटने की कोशिश की है।” विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने खुद को पीएम मोदी का हनुमान बताया था। अब उन्होंने कहा है कि अगर हनुमान को राम से मदद मांगनी पड़े, तो हनुमान काहे के और राम काहे के।

उधर चिराग पासवान द्वारा अब लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला भी को चिट्ठी लिखी गई है। चिराग ने अपील की है कि पार्टी के संसदीय दल के नेता के रूप में पशुपति पारस को मान्यता देने के फैसले पर फिर से विचार किया जाए। पशुपति पारस के आवास के बाहर चिराग पासवान के समर्थकों ने प्रदर्शन भी किया। पारस ने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह का विरोध होता रहता है। सूरजभान सिंह को उनके गुट ने कार्यकारी अध्यक्ष बना कर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने को कहा गया है।

बता दें कि हाल ही में चिराग पासवान ने चाचा पशुपति कुमार पारस के समक्ष अंतिम प्रस्ताव ये रखा था कि पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी पत्नी, अर्थात चिराग की माँ रीना पासवान सबसे वरिष्ठ हैं और उन्हें ही अध्यक्ष का पद दिया जाए। वो खुद कार चला कर चाचा के घर गए थे, जहाँ आधे घंटे हॉर्न बजाने के बाद दरवाजा खुला। चिराग पासवान अपने मित्र राजू तिवारी के साथ चाचा के बंगले पर डेढ़ घंटे रुके, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई।

जैसे-जैसे फूटा लेफ्ट-कॉन्ग्रेस-इस्लामी इकोसिस्टम का बुलबुला, वैसे-वैसे बढ़ता गया ‘जय श्रीराम’ पर प्रोपेगेंडा 

पिछले सात वर्षों में विपक्ष के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक विमर्शों में फेक न्यूज़ का शेयर लगातार बढ़ता रहा है। दर्जनों उदहारण रहे हैं जब लेफ्ट-कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम की ओर से न केवल फेक न्यूज़ फैलाने का काम किया गया, बल्कि उसके फेक न्यूज़ साबित हो जाने के बाद भी उसे सही ठहराने के प्रयास किए गए। संपादक, पत्रकार, कलाकार, न्यूज़ वेबसाइट, बुद्धिजीवी, आन्दोलनजीवी वगैरह ने तालमेल बनाए रखा, एक-दूसरे की सहायता की और तमाम विषयों पर फैलाए गए प्रोपेगेंडा में फेक न्यूज़ का इस्तेमाल किया और उसे सही साबित करने के लिए फैक्ट चेकिंग जैसे आधुनिक मीडिया टूल का बेझिझक इस्तेमाल किया। इकोसिस्टम के इस कार्य प्रणाली में ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी योगदान रहा जिसने वैचारिक आधार पर इस इकोसिस्टम के फेक न्यूज़ पर लगाम लगाने के लिए कुछ नहीं किया।

राजनीतिक लड़ाई में प्रोपेगेंडा का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। राजनीतिक दल, उनके नेता और अलग-अलग क्षेत्रों से आनेवाले उनके सहयोगी इसका इस्तेमाल करते रहे हैं पर सोशल मीडिया के फैलाव के परिणाम स्वरुप प्रोपेगेंडा के इस खेल में फेक न्यूज़ की मात्रा बढ़ती गई है। यह शायद इसलिए भी हुआ है कि फेक न्यूज़ को राजनीतिक दलों ने हमेशा एक वैचारिक दृष्टिकोण सामने रखकर देखा। फेक न्यूज़ यदि लेफ्ट-कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम द्वारा फैलाई गई है तो बड़ी बेशर्मी से उसे डिफेंड किया जाता रहा है। ऐसा इसलिए भी हो सका कि अधिकतर सरकारें फेक न्यूज़ के विरुद्ध सार्वजनिक तौर पर कार्रवाई करने से बचती रही हैं। कभी यदि उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई कार्रवाई करने की कोशिश की तो उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताकर नए सिरे से झूठ फैलाने का काम किया गया।

विमर्शों और प्रोपेगेंडा में फेक न्यूज़ के लगातार इस्तेमाल के पीछे कई कारणों में से एक कारण यह भी रहा है कि पिछले वर्षों से विपक्षी दलों, खासकर कॉन्ग्रेस ने, अपनी राजनीतिक लड़ाई बिना किसी झिझक के मीडिया आधारित इकोसिस्टम को आउटसोर्स कर रखी है। जिन्हें यह लड़ाई आउटसोर्स की गई है उनके लिए राजनीति दांव-पेंच न्यूज़ से शुरू होकर न्यूज़ में ही खत्म होता है। मेरे विचार से इतने बड़े पैमाने पर फेक न्यूज़ के इस्तेमाल के पीछे इकोसिस्टम की यह सोच रही है कि उनके अनुकूल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फैक्ट चेकर हर झूठ को उचित ठहराने में इनकी लगतार मदद करते रहेंगे। यही कारण है कि पिछले ढाई-तीन वर्षों में फेक न्यूज़ के इस मकड़जाल को देसी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का काम तेज़ी से हुआ है। इकोसिस्टम का हिस्सा रहे संपादकों, पत्रकारों, बुद्दिजीवियों और नेताओं को विदेशी अखबारों और मीडिया में मिलने वाला स्पेस इस बात का सबसे बड़ा उदहारण है।

फेक न्यूज़ में जय श्रीराम 

प्रोपेगेंडा में फेक न्यूज़ के बढ़ते शेयर का एक ख़ास पहलू यह रहा है कि इसे चलाने वालों ने अक्सर बॉलीवुडिया फिल्मों के स्क्रीनप्ले में इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूले के प्रति बड़े जोर-शोर से अपना विश्वास दिखाया है। दर्जनों फेक न्यूज़ में जय श्रीराम का इस्तेमाल कई तरह से किया गया। कभी किसी चोर की पिटाई को लेकर यह झूठ फैलाया गया कि हिन्दू उसे जय श्रीराम बोलवाना चाहते थे और नहीं बोलने पर पिटाई की तो कभी किसी अल्पसंख्यक के साथ किसी हिन्दू के साधारण झगड़े में भी जय श्रीराम को जानबूझकर बीच में लाया गया। पिछले सात-आठ वर्षों में कई बार झूठ के खुलासे के बाद भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ट्वीट या वीडियो नहीं हटाए गए। मजाल है कि जिन्होंने झूठ फैलाया उन्होंने जरा भी शर्म दिखाते हुए अपने फेसबुक या ट्विटर पोस्ट डिलीट किया हो। सबसे बड़ी विडंबना यह हुई है कि बार-बार उन्होंने झूठ फैलाया जो फैक्ट चेकर होने का दावा करते हैं। 

हाल ही में ग़ाज़ियाबाद में हुई घटना का जो वीडियो वायरल किया गया उसमें भी जय श्रीराम को जानबूझकर जोड़ा गया, वो भी तब जब ऐसे कोई सबूत नहीं थे कि जिस अब्दुल समद नामक जिस बुजुर्ग की पिटाई आदिल एंड कंपनी ने की, उससे जय श्रीराम बोलवाने की कोशिश की गई थी। पर इकोसिस्टम के इस विश्वास ने उससे इस वीडियो को वायरल करवाया कि एक बार फैक्ट चेकिंग की मुहर लगने के बाद वह कुछ भी कर सकता है। इस बार भी वीडियो वायरल कराने का काम फैक्ट चेकर ज़ुबैर ने किया।

यह इकोसिस्टम का ही खेल है कि पुलिस के वक्तव्य के बाद जब सब समझ रहे थे कि अब दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है और मामला शांत हो जाएगा तभी राहुल गाँधी ने पुलिस के वक्तव्य की परवाह किए बिना एक ट्वीट कर इस घटना को जय श्रीराम से जोड़ दिया। इसका असर यह हुआ कि राहुल गाँधी के ट्वीट के आधार पर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह मिल गई और एक बार फिर से इकोसिस्टम हिन्दुओं के विरुद्ध माहौल बनाने में कामयाब रहा। यह एक ऐसी कार्य प्रणाली है जिसे लेकर लेफ्ट-कॉन्ग्रेस का यह इकोसिस्टम जरा भी शर्मिंदगी महसूस नहीं करता। 

जय श्रीराम के पीछे क्यों पड़ा है लेफ्ट-कॉन्ग्रेस-इस्लामिक इकोसिस्टम?

लगभग चालीस वर्षों तक विकास करते हुए कम्युनिस्ट-कॉन्ग्रेस-मीडिया-बुद्धिजीवियों का जो गठबंधन पुख्ता होकर स्थापित हुआ था उसमें पहली बार अस्सी के दशक में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा चलाए गए श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा की वजह से एक चोट लगी। यही वह समय था जब जय श्रीराम के नारे ने भारत भर के हिन्दुओं को एक करना शुरू किया। निज व्यक्तित्व और हिंदुत्व की पहचान लिए इस नए नारे ने हिन्दू चेतना पर जो प्रभाव डाला वह काफी हद तक स्थायी साबित हुआ। कालांतर में इसी नारे की वजह से लोकतान्त्रिक राजनीति में हिन्दू एकता का महत्व उजागर हुआ। इसका परिणाम यह हुआ कि एक साधारण हिन्दू भी बिना किसी हिचक के इस नारे का इस्तेमाल करने लगा। 

2010 के बाद सोशल मीडिया के साथ ही जय श्रीराम के बेझिझक प्रयोग का भी फैलाव हुआ। हिंदुओं ने सोशल मीडिया पर जिस तरह से इस नारे का प्रयोग किया उसके कारण इसका राजनीतिक महत्व बढ़ता गया। मेरे विचार से उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिगत समीकरण के दरकने में इसका एक प्रमुख योगदान रहा है। हिन्दुओं को अभिवादन के लिए भी एक ऐसा संक्षिप्त नारा मिला जिसका प्रसार समय के साथ-साथ बढ़ता गया। दूसरी तरफ राजनीति पर पड़ने वाले इसके असर के कारण विपक्षी दल न केवल इससे दूर होते गए, बल्कि हालत यह हो गई कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री नारे से लगातार सार्वजनिक मंचों पर भी चिढ़ती रहीं। यही कारण है कि लेफ्ट-कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम इस नारे के पीछे पड़ा है और हर संभव कोशिश करके न केवल इसे बदनाम करने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देता, बल्कि मौका न रहे तो बना लेता है। 

आज हाल यह है कि इकोसिस्टम जय श्रीराम को बदनाम करने के उद्देश्य से इतना आगे जा चुका है, या कहें कि इस स्ट्रेटेजी पर इतना इन्वेस्ट कर चुका है कि उसके लिए इसे छोड़ना अब आसान नहीं है। हर मैन्युफैक्चर्ड प्रोपेगेंडा का शायद यही चरित्र होता है कि शुरू के दिनों में उसे शुरू करने वाले उसे नियंत्रित करते हैं पर कुछ समय बाद प्रोपेगेंडा उसे चलाने वालों को नियंत्रित करने लगता है और तब दोनों के लिए एक-दूसरे से अलग होना लगभग असंभव हो जाता है। 

यही कारण है कि इस्लामिक चरमपंथियों और उनके अपोलॉजिस्ट द्वारा तथाकथित हिन्दू टेरर को इस नारे के साथ जोड़ने की बार-बार कोशिश की गई। यह शायद इस सोच का परिणाम है कि पिछले तीन दशकों में वैश्विक पटल पर इस्लामिक आतंकवाद की घटनाओं के साथ जिस तरह से अल्लाह हु अकबर का प्रयोग किया गया, उसी तरह से तथकथित हिन्दू आतंकवाद से जय श्रीराम को जोड़ दिया जाए तो इस नारे को बदनाम करना आसान हो जाएगा। शायद यही कारण है कि इसे बदनाम करने के उपक्रम बार-बार लगातार किए जाते रहे हैं। यह बात और है कि जैसे मोदी विरोध में इकोसिस्टम कब भारत विरोध पर उतर आया, यह उसे पता ही नहीं चला, ठीक उसी तरह जय श्रीराम का विरोध करते हुए वो हिन्दू विरोधी हो गया, उसे पता नहीं चला। 

उत्तर प्रदेश सरकार ने गाजियाबाद की घटना को लेकर फैलाए गए फेक न्यूज़ और वायरल किए गए वीडियो के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की शुरुआत कर दी है। इस बार इकोसिस्टम के हिस्सा रहे ट्विटर भी इस कार्रवाई से शायद न बच पाए। देखना यह होगा कि इकोसिस्टम निकट भविष्य में क्या नीति अपनाता है। पूर्व के अनुभवों के आधार पर कहा जा सकता है कि वह पहले से जारी कार्य प्रणाली को आगे बढ़ाने के लिए कोई नई रणनीति अपनाएगा, वह रणनीति क्या होगी, इसका उत्तर शायद जल्द ही पता चले।

नताशा, देवांगना, आसिफ की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची दिल्ली पुलिस: दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में हैं आरोपित

दिल्ली पुलिस ने UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपितों को जमानत देने के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पुलिस ने जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे भमभानी की बेंच द्वारा मंगलवार को दिए गए फैसले के खिलाफ बुधवार सुबह (16 जून 2021) सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना था कि प्रथम दृष्टया तीनों आरोपितों पिंजरा तोड़ कार्यकर्ता देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और जामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा के खिलाफ दिल्ली दंगों के मामले में रिकॉर्ड की गई सामग्री के आधार पर धारा 15, 17 या 18 यूएपीए के तहत कोई अपराध नहीं बनाया गया था। हाईकोर्ट की बेंच ने दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता इन आरोपितों को मंगलवार को 50 हजार के निजी बॉन्ड पर जमानत दी थी।

गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी में दिल्ली की सड़कों पर हिंदू विरोधी दंगे फैलाने में इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर संख्या 59/2020 में दिल्ली पुलिस ने आसिफ तन्हा, नताशा नरवाल और देवांगना कलिता समेत कुल 15 लोगों को नामजद किया था। पुलिस ने दावा किया कि तन्हा ने नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के विरोध में दिल्ली में दंगे कराने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र और 2014 से छात्र व इस्लामवादी संगठन SIO के सदस्य आसिफ को मई 2020 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत पूर्वी दिल्ली के दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

वहीं, हिंदू विरोधी दिल्ली दंगे के मामले में पिंजरा तोड़ की नताशा नरवाल और देवांगना कलिता 23 मई 2020 को गिरफ्तार किया था। सीलमपुर, जाफराबाद और ट्रांस-यमुना के स्थानीय लोगों ने पिंजरा तोड़ कार्यकर्ताओं पर राष्ट्रीय राजधानी में दंगे भड़काने का आरोप लगाया था।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ 24 फरवरी 2020 में हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 400 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इस मामले में खालिद, इशरत जहाँ, ताहिर हुसैन, मीरान हैदर, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता, आसिफ इकबाल तन्हा और शिफा उर रहमान का नाम सामने आया था।

WhatsApp ग्रुप में ‘जय श्रीराम’ लिखने पर NSUI ने 7 नेताओं को 3 साल के लिए निष्कासित किया

कॉन्ग्रेस की छात्र ईकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के 7 नेताओं को ‘जय श्रीराम’ लिखने पर निष्कासित कर दिया गया है। मामला झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले का है। रिपोर्ट के अनुसार जिन नेताओं पर कार्रवाई की गई है उन्होंने संगठन के ऑफिशियल वॉट्सएप ग्रुप में ‘जय श्रीराम’ लिखा था। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रोज तिर्की ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि कमल अग्रवाल, राज महतो, राहुल गिरि, आनंद सिंह, प्रशांत कुमार, लव कुमार और जयंतो प्रमाणिक को निष्कासित कर दिया गया है।

तिर्की ने इन नेताओं पर एनएसयूआई जिलाध्यक्ष के खिलाफ़ गुटबाजी को बढ़ावा देने और एनएसयूआई के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में एक विशेष धर्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि इन सभी नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों, पार्टी लाइन संगठनात्मक प्रोटोकॉल के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट और संगठन के भीतर गुटबाजी को बढ़ावा देने के लिए एनएसयूआई से तीन साल के लिए निष्कासित किया गया है।

रोज ने कॉन्ग्रेस और एनएसयूआई का आधार सेकुलरिज्म को बताया। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस और एनएसयूआई किसी विशेष धर्म की ओर झुकाव नहीं रखते। ये किसी धर्म की पार्टी या संगठन नहीं है। यहाँ ऐसी हरकत करने वाले नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है। इसके अलावा ये लोग जिलाध्यक्ष के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डाल रहे थे जो कि मानसिक तनाव पैदा करता है। वह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे और गुटबाजी को बढ़ावा देकर वह एनएसयूआई को नई टीम बनाने की धमकी दे रहे थे।”

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन से निष्कासित किए गए कमल अग्रवाल ने इस संबंध में कहा है कि उन्हें ऐसा कोई ऑर्डर नहीं मिला। वह बोले,

“मुझे अभी तक निष्कासित किए जाने वाला कोई आदेश नहीं मिला है, लेकिन मीडिया के जरिए इसकी सूचना पाई है। मैंने हाल ही में हमारे प्रदेश अध्यक्ष आमिर हाशमी के साथ संगठनात्मक मामलों पर विस्तृत बातचीत की थी। क्या इस देश में सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार नहीं है? हमने जय श्री राम के साथ एक-दूसरे को शुभकामनाएँ दीं जैसे सिख वाहे गुरु कहते हैं।”

इस मामले पर भाजपा के जिला महासचिव राकेश सिंह ने भी बयान दिया। उन्होंने इस कदम को ‘हिंदू विरोधी’ करार दिया। उन्होंने कहा,

“यह फैसला तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रहा है। अब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के बाद झारखंड में जय श्री राम पर कॉन्ग्रेस को आपत्ति है। भगवान राम के देश में भगवान राम का नाम लेने के लिए कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा ने अपने सदस्यों को निष्कासित कर दिया। कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता भगवान राम के अस्तित्व पर संदेह जताते हैं, जो अरबों हिंदुओं के लिए पूज्य हैं।”

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब भगवान राम को लेकर कॉन्ग्रेस ने इस तरह का रुख दिखाया है। इसी साल फरवरी में एक ऐसा मामला कॉन्ग्रेस शासित प्रदेश राजस्थान से आया था। वहाँ जयपुर के जवाहरलाल नेहरू रोड स्थित कॉमर्स कॉलेज में एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक चौधरी ने ‘1 रुपया राम के नाम’ अभियान शुरू किया था। इस पर पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पवन बंसल ने कहा था कि यह कॉन्ग्रेस का यह स्टैंड नहीं है।

अविवाहित रहे, राम मंदिर के लिए जीवन खपा दिया, आपातकाल में 18 महीने की जेल झेली: जानिए कौन हैं VHP के चंपत राय

राम मंदिर की जमीन खरीद मामले में AAP और सपा ने विश्व हिन्दू परिषद (VHP) नेता चंपत राय पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा कर अपना उल्लू सीधा किया है। इधर राय ने एक-एक आरोप का स्पष्टीकरण तथ्यों के साथ दिया और श्रद्धालुओं को राजनीति से प्रेरित बयानों पर भरोसा न करने को कहा। क्या आपको पता है कि ‘राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय ने अपना पूरा जीवन इसी मंदिर के लिए संघर्ष करते हुए खपा दिया?

राम मंदिर के निर्माण में VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय का बड़ा किरदार है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित नगीना कस्बे के सरायमीर मोहल्ले के निवासी चंपत राय के पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल और माता का नाम सावित्री देवी था। नवंबर 18, 1946 में जन्मे चंपत राय की उम्र 75 वर्ष से भी ज्यादा है। उनके पिता भी अपने शुरुआती दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए थे।

चंपत राय भी संघ के कामकाज से इतनी प्रभावित हुए कि युवावस्था में ही वो RSS के पूर्णकालिक सदस्य बन गए। पढ़ाई-लिखाई में भी वो तीव्र बुद्धि के थे। उन्हें धामपुर के RSM डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर का पद मिला। 1975 में जब इंदिरा गाँधी ने देश में लोकतंत्र ख़त्म कर के आपातकाल की घोषणा की, तब राय उसी कॉलेज में प्रवक्ता थे। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस उनके कॉलेज पहुँची।

प्रधानाध्यापक के कक्ष में चंपत राय को बुलाया गया। उस समय भी वो विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ा रहे थे। प्राचार्य कक्ष में उन्होंने पुलिस से कहा कि वो घर से कपड़े लेकर सीधे कोतवाली पहुँचेंगे। अपने कहे के अनुसार उन्होंने वादा निभाया और फिर उन्हें गिरफ्तार कर के उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल में उनके 18 महीने गुजरे। आपातकाल ख़त्म होने के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। 1980-81 में चंपत राय ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और RSS के प्रचारक बन गए।

देहरादून और सहारनपुर में उन्हें प्रचारक का दायित्व सौंपा गया। 1985 में उन्हें मेरठ विभाग का प्रचारक नियुक्त किया गया। 1986 में विहिप में प्रान्त संगठन मंत्री बना कर भेजा गया। वर्ष 1991 में चंपत राय को क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेज दिया गया। 1996 में विहिप ने उन्हें संगठन का केंद्रीय मंत्री बनाया। 2002 में संयुक्त महामंत्री और फिर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री के रूप में प्रमोट किया गया।

चंपत राय अविवाहित हैं और अपने घर न के बराबर ही आते-जाते हैं। चंपत राय सुप्रीम कोर्ट में चली राम मंदिर के मुकदमे की सुनवाई में मुख्य पैरोकार एवं पक्षकार रहे हैं। राम जन्मभूमि के पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने और सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। राम मंदिर भूमिपूजन समारोह के आयोजन का प्रबंधन भी उन्होंने ही किया था। राम मंदिर निर्माण का कार्य उनकी ही निगरानी में हो रहा है।