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नताशा, देवांगना, आसिफ की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची दिल्ली पुलिस: दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में हैं आरोपित

दिल्ली पुलिस ने UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपितों को जमानत देने के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पुलिस ने जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे भमभानी की बेंच द्वारा मंगलवार को दिए गए फैसले के खिलाफ बुधवार सुबह (16 जून 2021) सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना था कि प्रथम दृष्टया तीनों आरोपितों पिंजरा तोड़ कार्यकर्ता देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और जामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा के खिलाफ दिल्ली दंगों के मामले में रिकॉर्ड की गई सामग्री के आधार पर धारा 15, 17 या 18 यूएपीए के तहत कोई अपराध नहीं बनाया गया था। हाईकोर्ट की बेंच ने दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता इन आरोपितों को मंगलवार को 50 हजार के निजी बॉन्ड पर जमानत दी थी।

गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी में दिल्ली की सड़कों पर हिंदू विरोधी दंगे फैलाने में इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर संख्या 59/2020 में दिल्ली पुलिस ने आसिफ तन्हा, नताशा नरवाल और देवांगना कलिता समेत कुल 15 लोगों को नामजद किया था। पुलिस ने दावा किया कि तन्हा ने नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के विरोध में दिल्ली में दंगे कराने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र और 2014 से छात्र व इस्लामवादी संगठन SIO के सदस्य आसिफ को मई 2020 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत पूर्वी दिल्ली के दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

वहीं, हिंदू विरोधी दिल्ली दंगे के मामले में पिंजरा तोड़ की नताशा नरवाल और देवांगना कलिता 23 मई 2020 को गिरफ्तार किया था। सीलमपुर, जाफराबाद और ट्रांस-यमुना के स्थानीय लोगों ने पिंजरा तोड़ कार्यकर्ताओं पर राष्ट्रीय राजधानी में दंगे भड़काने का आरोप लगाया था।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ 24 फरवरी 2020 में हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 400 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इस मामले में खालिद, इशरत जहाँ, ताहिर हुसैन, मीरान हैदर, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता, आसिफ इकबाल तन्हा और शिफा उर रहमान का नाम सामने आया था।

WhatsApp ग्रुप में ‘जय श्रीराम’ लिखने पर NSUI ने 7 नेताओं को 3 साल के लिए निष्कासित किया

कॉन्ग्रेस की छात्र ईकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के 7 नेताओं को ‘जय श्रीराम’ लिखने पर निष्कासित कर दिया गया है। मामला झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले का है। रिपोर्ट के अनुसार जिन नेताओं पर कार्रवाई की गई है उन्होंने संगठन के ऑफिशियल वॉट्सएप ग्रुप में ‘जय श्रीराम’ लिखा था। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रोज तिर्की ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि कमल अग्रवाल, राज महतो, राहुल गिरि, आनंद सिंह, प्रशांत कुमार, लव कुमार और जयंतो प्रमाणिक को निष्कासित कर दिया गया है।

तिर्की ने इन नेताओं पर एनएसयूआई जिलाध्यक्ष के खिलाफ़ गुटबाजी को बढ़ावा देने और एनएसयूआई के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में एक विशेष धर्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि इन सभी नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों, पार्टी लाइन संगठनात्मक प्रोटोकॉल के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट और संगठन के भीतर गुटबाजी को बढ़ावा देने के लिए एनएसयूआई से तीन साल के लिए निष्कासित किया गया है।

रोज ने कॉन्ग्रेस और एनएसयूआई का आधार सेकुलरिज्म को बताया। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस और एनएसयूआई किसी विशेष धर्म की ओर झुकाव नहीं रखते। ये किसी धर्म की पार्टी या संगठन नहीं है। यहाँ ऐसी हरकत करने वाले नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है। इसके अलावा ये लोग जिलाध्यक्ष के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डाल रहे थे जो कि मानसिक तनाव पैदा करता है। वह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे और गुटबाजी को बढ़ावा देकर वह एनएसयूआई को नई टीम बनाने की धमकी दे रहे थे।”

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन से निष्कासित किए गए कमल अग्रवाल ने इस संबंध में कहा है कि उन्हें ऐसा कोई ऑर्डर नहीं मिला। वह बोले,

“मुझे अभी तक निष्कासित किए जाने वाला कोई आदेश नहीं मिला है, लेकिन मीडिया के जरिए इसकी सूचना पाई है। मैंने हाल ही में हमारे प्रदेश अध्यक्ष आमिर हाशमी के साथ संगठनात्मक मामलों पर विस्तृत बातचीत की थी। क्या इस देश में सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार नहीं है? हमने जय श्री राम के साथ एक-दूसरे को शुभकामनाएँ दीं जैसे सिख वाहे गुरु कहते हैं।”

इस मामले पर भाजपा के जिला महासचिव राकेश सिंह ने भी बयान दिया। उन्होंने इस कदम को ‘हिंदू विरोधी’ करार दिया। उन्होंने कहा,

“यह फैसला तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रहा है। अब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के बाद झारखंड में जय श्री राम पर कॉन्ग्रेस को आपत्ति है। भगवान राम के देश में भगवान राम का नाम लेने के लिए कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा ने अपने सदस्यों को निष्कासित कर दिया। कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता भगवान राम के अस्तित्व पर संदेह जताते हैं, जो अरबों हिंदुओं के लिए पूज्य हैं।”

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब भगवान राम को लेकर कॉन्ग्रेस ने इस तरह का रुख दिखाया है। इसी साल फरवरी में एक ऐसा मामला कॉन्ग्रेस शासित प्रदेश राजस्थान से आया था। वहाँ जयपुर के जवाहरलाल नेहरू रोड स्थित कॉमर्स कॉलेज में एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक चौधरी ने ‘1 रुपया राम के नाम’ अभियान शुरू किया था। इस पर पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पवन बंसल ने कहा था कि यह कॉन्ग्रेस का यह स्टैंड नहीं है।

अविवाहित रहे, राम मंदिर के लिए जीवन खपा दिया, आपातकाल में 18 महीने की जेल झेली: जानिए कौन हैं VHP के चंपत राय

राम मंदिर की जमीन खरीद मामले में AAP और सपा ने विश्व हिन्दू परिषद (VHP) नेता चंपत राय पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा कर अपना उल्लू सीधा किया है। इधर राय ने एक-एक आरोप का स्पष्टीकरण तथ्यों के साथ दिया और श्रद्धालुओं को राजनीति से प्रेरित बयानों पर भरोसा न करने को कहा। क्या आपको पता है कि ‘राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय ने अपना पूरा जीवन इसी मंदिर के लिए संघर्ष करते हुए खपा दिया?

राम मंदिर के निर्माण में VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय का बड़ा किरदार है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित नगीना कस्बे के सरायमीर मोहल्ले के निवासी चंपत राय के पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल और माता का नाम सावित्री देवी था। नवंबर 18, 1946 में जन्मे चंपत राय की उम्र 75 वर्ष से भी ज्यादा है। उनके पिता भी अपने शुरुआती दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए थे।

चंपत राय भी संघ के कामकाज से इतनी प्रभावित हुए कि युवावस्था में ही वो RSS के पूर्णकालिक सदस्य बन गए। पढ़ाई-लिखाई में भी वो तीव्र बुद्धि के थे। उन्हें धामपुर के RSM डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर का पद मिला। 1975 में जब इंदिरा गाँधी ने देश में लोकतंत्र ख़त्म कर के आपातकाल की घोषणा की, तब राय उसी कॉलेज में प्रवक्ता थे। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस उनके कॉलेज पहुँची।

प्रधानाध्यापक के कक्ष में चंपत राय को बुलाया गया। उस समय भी वो विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ा रहे थे। प्राचार्य कक्ष में उन्होंने पुलिस से कहा कि वो घर से कपड़े लेकर सीधे कोतवाली पहुँचेंगे। अपने कहे के अनुसार उन्होंने वादा निभाया और फिर उन्हें गिरफ्तार कर के उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल में उनके 18 महीने गुजरे। आपातकाल ख़त्म होने के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। 1980-81 में चंपत राय ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और RSS के प्रचारक बन गए।

देहरादून और सहारनपुर में उन्हें प्रचारक का दायित्व सौंपा गया। 1985 में उन्हें मेरठ विभाग का प्रचारक नियुक्त किया गया। 1986 में विहिप में प्रान्त संगठन मंत्री बना कर भेजा गया। वर्ष 1991 में चंपत राय को क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेज दिया गया। 1996 में विहिप ने उन्हें संगठन का केंद्रीय मंत्री बनाया। 2002 में संयुक्त महामंत्री और फिर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री के रूप में प्रमोट किया गया।

चंपत राय अविवाहित हैं और अपने घर न के बराबर ही आते-जाते हैं। चंपत राय सुप्रीम कोर्ट में चली राम मंदिर के मुकदमे की सुनवाई में मुख्य पैरोकार एवं पक्षकार रहे हैं। राम जन्मभूमि के पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने और सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। राम मंदिर भूमिपूजन समारोह के आयोजन का प्रबंधन भी उन्होंने ही किया था। राम मंदिर निर्माण का कार्य उनकी ही निगरानी में हो रहा है।

क्या कोवैक्सीन में इस्तेमाल हुआ गाय के बछड़े का सीरम? कॉन्ग्रेस नेता के ट्वीट का स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिया जवाब

कोवैक्सिन बनाने में गाय के बछड़े का सीरम इस्तेमाल करने के कॉन्ग्रेस के नेशनल कॉर्डिनेटर गौरव पांधी के दावे को स्वास्थ्य मंत्रालय में गलत बताया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा, “कोवैक्सिन बनाने के संबंध में कुछ सोशल मीडिया पोस्ट द्वारा बताया गया है कि इसमें नवजात बछड़े का सीरम होता है। इन पोस्ट में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।” स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अंतिम रूप से तैयार कोरोना के टीके में गाय का सीरम नहीं होता है और टीका निर्माण की अंतिम प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सामग्री में भी इसका प्रयोग नहीं होता है। 

मंत्रालय ने कहा है कि नवजात बछड़े के सीरम का इस्तेमाल केवल वायरो सेल्स के विकास एवं उसकी तैयारी में किया जाता है।वायरो सेल्स के विकास में दुनिया भर में अलग-अलग जानवरों के सीरम का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक मानक रूप है। कोशिकाओं का जीवन बढ़ाने के लिए वायरो सेल्स का इस्तेमाल किया जाता है और वैक्सीन के उत्पादन में मदद मिलती है। इस पद्धति का इस्तेमाल पोलियो, रैबीज एवं इन्फ्लुएंजा के टीकों के निर्माण में होता आया है। 

मंत्रालय का कहना है कि वायरो सेल्स के विकास के बाद उन्हें कई बार पानी एवं रसायन से साफ किया जाता है। इस प्रक्रिया में वायरो सेल्स पर बछड़े का सीरम दूर हो जाता है। इसके बाद वायरल ग्रोथ के लिए वायरो सेल्स को कोरोना वायरस के साथ संक्रमित किया जाता है। वायरल ग्रोथ के दौरान वायरो सेल्स पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। इसके बाद मरे हुए वायरस का इस्तेमाल फाइनल वैक्सीन बनाने में किया जाता है। अंतिम टीके की सामग्री में बछड़े के सीरम का इस्तेमाल नहीं होता है।    

दरअसल, गौरव पांधी ने दावा किया था कि कोवैक्सिन बनाने में गाय के बछड़े के सीरम का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए 20 दिन से भी कम उम्र के बछड़े की हत्या की जाती है। पांधी ने एक RTI के जवाब में मिले दस्तावेज शेयर किए। उन्होंने दावा किया है कि यह जवाब विकास पाटनी नाम के व्यक्ति की RTI पर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने दिया है।

पांधी ने आरटीआई के जवाब का स्क्रीनशॉट भी ट्विटर पर शेयर किया है। उन्होंने एक वीडियो मैसेज के जरिए केंद्र की बीजेपी सरकार पर लोगों की भावनाओं को आहत करने के आरोप लगाए हैं। पांधी ने कहा कि सरकार ने मान लिया है कि भारत बायोटेक की वैक्सीन में गाय के बछड़े का सीरम शामिल है। यह बहुत बुरा है। इसकी जानकारी पहले ही लोगों को दी जानी चाहिए थी।

इससे पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के रिसर्च पेपर में भी ये बात बताई गई थी कि कोवैक्सिन बनाने के लिए नवजात पशु के ब्लड का सीरम उपयोग किया जाता है। इसे पहली बार किसी वैक्सीन में उपयोग नहीं किया जा रहा है। यह सभी बायोलॉजिकल रिसर्च का जरूरी हिस्सा होता है।

रिसर्च में दावा किया गया था कि कोवैक्सिन के लिए नवजात बछड़े के 5% से 10% सीरम के साथ डलबेको के मॉडिफाइड ईगल मीडियम (DMEM) को इस्तेमाल किया जाता है। DMEM में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो सेल को बाँटने के लिए जरूरी होते हैं।

मुस्लिम बुजुर्ग की दाढ़ी काटने वाला कार्टून The Quint ने वापस लिया: ‘जय श्रीराम’ पर फेक न्यूज को हवा देने में आया था काम

द क्विंट ने ‘जय श्रीराम’ के नारे को बदनाम करने वाला कार्टून वापस ले लिया है। गाजियाबाद के लोनी में मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई वाले प्रोपेगेंडा को हवा देने के लिए यह कार्टून बनाया गया था। लेकिन जाँच में पता चला कि बुजुर्ग को नारा लगाने के लिए मजबूर नहीं किया गया था। साथ ही यह आपसी विवाद था जिसमें मुस्लिम भी आरोपित हैं।

असल में कथित ‘फैक्ट चेक’ वेबसाइट ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने बिना तथ्यों की जाँच किए 14 जून 2021 को सोशल मीडिया पर मुस्लिम बुजुर्ग के साथ मारपीट का एक म्यूट वीडियो अपलोड किया था। इस मामले में उसके खिलाफ गाजियाबाद पुलिस ने प्राथमिकी भी दर्ज की है।

अपने ट्वीट में जुबैर ने लिखा था, “एक बुजुर्ग आदमी, सूफी अब्दुल समद सैफी पर गाजियाबाद के लोनी में 5 गुंडों ने हमला किया। उन्हें बंदूक की नोक पर मारा गया, प्रताड़ित किया गया और जबरदस्ती उनकी दाढ़ी काट दी गई।” उसने आगे कहा कि बुजुर्ग से जबरदस्ती ‘जय श्रीराम’ का नारा बुलवाया गया। ये वीडियो जैसे ही वायरल हुआ द क्विंट के साथ कई वामपंथी वेबसाइटों ने जोर-शोर से इस फेक न्यूज का प्रचार करना शुरू कर दिया था।

क्या है पूरा मामला

फेक न्यूज फैलाने के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर राम का नाम बदनाम करने और यूपी में दंगा भड़काने के लिए संज्ञान लेने के लिए ​कहा था। गाजियाबाद पुलिस के बताया कि उन्होंने मामले को संज्ञान ले लिया है और आगे नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में द वायर के साथ-साथ कई वामपंथी मीडिया वेबसाइट यूपी सरकार द्वारा फर्जी खबरें फैलाने वालों पर नकेल कसने और एफआईआर में इनका नाम शामिल किए जाने के बाद से बेहद काफी नाराज हैं। द क्विंट ने भी हिंदूओं के पवित्र मंत्र ‘जय श्रीराम’ को बदनाम करने वाला एक विस्तृत 6 मिनट में पढ़ा जाने वाला लेख प्रकाशित किया है।

गाजियाबाद क्राइम पर द वायर और द क्विंट द्वारा प्रकाशित हिंदूफोबिक लेख

दोनों के लेख की सब हेडिंग में लिखा था, पीड़ित से जबरदस्ती ‘जय श्रीराम’ का नारा बुलवाया गया। साथ ही द वायर ने यह भी दावा किया था कि ‘वंदे मातरम’ बोलने के लिए भी मजबूर किया गया था।

द क्विंट का कार्टून

द क्विंट ने अपने हिंदूफोबिक प्रचार को आगे बढ़ाने के प्रयास में दो पूरी तरह से अलग घटनाओं को जोड़ते हुए एक कार्टून प्रकाशित किया। द क्विंट ने लिखा था, “भारत ने रविवार को ‘खुले समाज’ (Open Societies) की अवधारणा पर जी-7 और अतिथि देशों के एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों के मूल्यों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मजबूती के साथ पुष्टि और प्रोत्साहित करता है। एक स्वतंत्रता के रूप में जो लोकतंत्र की रक्षा करती है और लोगों को भय और दमन से मुक्त रहने में मदद करती है।”

इसके बाद द क्विंट ने अपने कार्टून में नीचे की तरफ एक व्यक्ति को एक मुस्लिम व्यक्ति की दाढ़ी को जबरदस्ती काटते हुए और उसे जबरदस्ती ‘जय श्रीराम’ का नारा बुलवाते हुए दिखाया था। ऊपर वाले कार्टून में उसने एक व्यक्ति को समाचार पढ़ते हुए दिखाया था।

गाजियाबाद क्राइम पर द क्विंट का कार्टून

हालाँकि, आरोपितों के नाम सामने आने और ट्विटर पर ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर, द वायर और कुछ अन्य वामपंथी हस्तियों के खिलाफ फर्जी खबरें फैलाने को लेकर एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद द क्विंट ने अपना कार्टून हटा लिया है।

गाजियाबाद पुलिस ने जानकारी दी कि उन्होंने वीडियो की जाँच की थी और उसमें ‘जय श्रीराम’ का कहीं कोई जिक्र नहीं था। इसके अलावा, आरोपितों में मुस्लिम भी शामिल थे और यह एक मामूली अपराध था, जहाँ एक बूढ़े व्यक्ति को टोना-टोटका करने और ताबीज देने के लिए पीटा गया था। अपराध में कोई सांप्रदायिक दृष्टिकोण नहीं था।

द क्विंट ने अपने एक ट्वीट में कहा, “द क्विंट ने लोनी की हालिया घटना पर अपना काफी REAL कार्टून वापस ले लिया है, जहाँ 5 जून को एक 72 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति पर हमला किया गया था। पुलिस ने बताया है कि मुस्लिम व्यक्ति को जय श्रीराम का नारा लगाने के लिए मजबूर नहीं किया गया था। हम आपके लिए मामले के घटनाक्रम को सामने लाना जारी रखेंगे। धन्यवाद।”

इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर इंडिया के खिलाफ गाजियाबाद क्राइम के बारे में झूठी खबर फैलाने वाले ट्वीट्स को हटाने में विफल रहने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।

यूपी में एक्शन ट्विटर का सुरक्षा कवच हटने का आधिकारिक प्रमाण: IT और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 9 ट्वीट में लताड़ा

आज केंद्रीय कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लगातार कई ट्वीट करके सोशल मीडिया दिग्गज ट्विटर पर न सिर्फ हमला किया बल्कि स्पष्ट शब्दों में भारतीय IT कानूनों का पालन करना होगा यह सन्देश भी दिया। इसके साथ ही उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया कि माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर 26 मई से लागू दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने के लिए कोई न कोई सुरक्षित रास्ता निकाल लेगा।

सोशल मीडिया कंपनियों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए भारत सरकार द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल पोर्टल्स को तीन महीने का समय दिया गया था। बाद में तीन सप्ताह का विस्तार देने के बावजूद, ट्विटर नए आईटी नियमों के अनुसार वैधानिक अनुपालन और शिकायत निवारण अधिकारियों को नियुक्त करने में विफल रहा। नतीजतन, सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी ट्विटर अपने मध्यस्तता प्लेटफॉर्म होने का स्टेटस खो चुकी है, अब वह यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए उत्तरदायी हो जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने ट्विटर की मनमानी पर लताड़ा

रविशंकर प्रसाद ने अपने नौ ट्वीट्स वाले एक लंबे थ्रेड में, ट्विटर के भारतीय IT कानून को समय से पालन न करने के निर्णय को एक जानबूझकर लिए गए निर्णय के रूप में चिह्नित किया।

ट्विटर पर सेफ हार्बर प्रोटेक्शन अर्थात उसे अभी तक जो एक मध्यस्थता प्लैटफॉर्म होने की वजह से छूट मिली हुई थी, के खोने पर उठने वाले प्रश्नों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा, “ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्विटर सुरक्षित हार्बर प्रावधान का हकदार है। हालाँकि, अब इस मामले का साधारण तथ्य यह है कि ट्विटर 26 मई से लागू हुए मध्यवर्ती दिशानिर्देशों का पालन करने में विफल रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, ट्विटर को इसका अनुपालन करने के लिए कई अवसर दिए गए थे, हालाँकि हर बार इसने जानबूझकर गैर-अनुपालन का रास्ता चुना है।”

इस बात की ओर इशारा करते हुए कि कैसे बिना निगरानी वाली फर्जी खबरें देश में खतरा पैदा कर सकती हैं, रविशंकर प्रसाद ने कहा, “भारत की संस्कृति अपने बड़े भूगोल की तरह बदलती है। कुछ परिदृश्यों में, सोशल मीडिया के प्रसार के साथ, यहाँ तक ​​कि एक छोटी सी चिंगारी भी आग का कारण बन सकती है, खासकर फेक न्यूज़ फ़ैलाने के खतरे को देखते हुए, यही मध्यस्थ दिशानिर्देश लाने के उद्देश्यों में से एक भी था।”

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फ्री स्पीच का समर्थन करते हुए सरकार के साथ अपारदर्शी होने के लिए सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर पर कटाक्ष भी किया।

प्रसाद ने ट्विटर को उनके चयनात्मक निर्णय के लिए जिसमें बिना कोई सबूत प्रस्तुत किए चुनिंदा ट्वीट पर “मैनीपुलेटिव मीडिया’ लेबलिंग को भी याद दिलाया।

नवीनतम गाजियाबाद लोनी में घटित अपराध के बारे में बात करते हुए, जहाँ फर्जी खबरों को बढ़ावा देने के लिए एक सचेत प्रयास किया गया था, प्रसाद ने कहा, “यूपी में जो हुआ वह फर्जी खबरों से लड़ने में ट्विटर की मनमानी का उदाहरण था। हालाँकि ट्विटर अपने फैक्ट चेकिंग मैकेनिज्म को लेकर अति उत्साही रहा है, लेकिन यूपी जैसे कई मामलों में कार्रवाई करने में इसकी विफलता हैरान करने वाली है और गलत सूचना से लड़ने में इसकी असंगति को इंगित करती है।”

कंपनी की मंशा पर सवाल उठाते हुए, प्रसाद ने सवाल किया, “भारतीय कंपनियाँ चाहे फार्मा हों, आईटी हों या अन्य जो संयुक्त राज्य अमेरिका या अन्य विदेशी देशों में व्यापार करने जाती हैं, स्वेच्छा से स्थानीय कानूनों का पालन करती हैं। फिर ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म दुर्व्यवहार और दुरुपयोग के शिकार लोगों को आवाज देने के लिए बनाए गए भारतीय कानूनों का पालन करने में अनिच्छा क्यों दिखा रहे हैं?”

अंत में, मंत्री ने चेतावनी दी कि कोई भी विदेशी संस्था भूमि के कानून अर्थात उस देश के कानून से बच नहीं सकती है।

योगी सरकार ने किया ट्विटर पर FIR

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में एक अपराध के बारे में फेक न्यूज़ फैलाने वाले ट्वीट्स को हटाने में विफल रहने के लिए ट्विटर इंडिया के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इसी सिलसिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।

यह एक्शन इस बात का प्रमाण भी है कि मध्यस्थता प्लेटफार्म के रूप में ट्विटर को जो कानूनी छूट प्रदान की गई थी, वह अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई है।

कोर्ट की चल रही थी वचुर्अल सुनवाई, अचानक कैमरे पर बिना पैंट के दिखे कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी

वर्चुअल मीटिंग्स और कॉन्फ्रेंस में भाग लेने वालों के पास ये ऑप्शन होता है कि वह फुल ड्रेस अप न भी हों तो उनसे कोई सवाल करने नहीं आता। ऐसा कई नौकरी पेशे वाले लोग करते होंगे। लेकिन हाल में वर्चुअल कोर्ट की प्रोसीडिंग के दौरान वरिष्ठ वकील व कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता अभिषेक मनु सिंघवी को ऐसा करना भारी पड़ गया। कोर्ट की वर्चुअल प्रोसीडिंग के दौरान सिंघवी कैमरे पर बिन पैंट के पकड़े गए।

सिंघवी अलग-अलग स्क्रीन का इस्तेमाल करके कई कोर्ट प्रोसीडिंग्स अटेंड कर रहे थे। ऐसे में उनकी एक स्क्रीन जो कलकत्ता हाईकोर्ट से कनेक्ट हो रखी थी, अचानक जमीन पर गिर गई। सिंघवी जो पहले सभी लोगों को एकदम सुर्ख सफेद रंग की शर्ट में दिख रहे थे। इस स्क्रीन के गिरने के बाद पता चला कि उन्होंने ऊपर बस शर्ट पहनी हुई थी जबकि नीचे वह बिना पैंट के सिर्फ शॉर्ट्स में थे। स्क्रीन के गिरने से सिंघवी का ये रूप प्रोसीडिंग अटेंड कर रहे हर व्यक्ति ने देखा।

इस घटना के बाद न्यायधीशों ने जहाँ सिंघवी के बर्ताव पर आपत्ति जताई। वहीं उनके प्रतिद्वंदी वकील जो उस दौरान अपनी दलील दे रहे थे, उन्होंने दबी मुस्कान के साथ अपनी बातों को कहना जारी रखा। कोर्ट सिंघवी के इस रवैये को देख नाराज हुआ और इस तरह डेकोरम को बिगाड़ने पर अपनी आपत्ति जाहिर की। वहीं सिंघवी ने अपने बचाव में कहा कि वह अपने घर से अलग एक एकांतवास में धूप में हैं।

इन सभी के बीच ऑनलाइन प्रोसीडिंग से कनेक्ट किसी शख्स ने सिंघवी के बिन पैंट में बैठे स्क्रीनशॉट ले लिया और थोड़ी देर में ये तस्वीर वकीलों के सर्कल में घूमने लगी। बाद में सोशल मीडिया पर भी इसे देखा गया। इस बीच किसी ने सिंघवी के दफ्तर की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं। इसमें भी वह वर्चुअल कोर्ट मीटिंग में सिर्फ शॉर्ट्स और शर्ट में दिख रहे हैं। उन्होंने कोई ट्राउजर नहीं पहना।

सोशल मीडिया पर जैसे ही ये तस्वीरें वायरल हुई लोगों ने इस बात पर गौर करवाना शुरू कर दिया कि ये पहली बार नहीं है जब सिंघवी को बिन पैंट के देखा गया हो। 2012 की एक घटना का जिक्र करके लोगों ने याद दिलाया कि कैसे वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता एक महिला वकील के साथ प्रेम फरमाते नजर आए थे जो दिल्ली हाईकोर्ट में जज बनना चाहती थी। वीडियो की शुरुआत इसी से हुई थी, “जज कब बना रहे हो।” उस समय एक सेक्स वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर सिंघवी दिख रहे थे, जिसे कोर्ट चैंबर के कमरे में शूट किया गया था। हालाँकि, उन्होंने वीडियो में होने से इनकार किया था।

बता दें कि ऑनलाइन प्रोसीडिंग्स के दौरान ये पहला मामला नहीं है, जब किसी वकील ने डेकोरम का मजाक बनाया हो। पिछले साल राजीव धवन राजस्थान हाईकोर्ट की ऑनलाइन हियरिंग में हुक्का पीते दिखे थे। इसी तरह हाल में जूही चावला ने जब कोर्ट की कार्यवाही का लिंक ऑनलाइन शेयर कर दिया था तो उनके फैन्स ने ऑनलाइन जुड़कर गाना गुनगुना दिया था।

हत्या, बच्चे को गोली मारी, छात्रों को सस्पेंड किया: 15 घटनाएँ, जब ‘जय श्री राम’ कहने पर हिन्दुओं के साथ हुई क्रूरता

हिन्दुओं के लिए अब ‘जय श्री राम’ बोलना भी कुछ लोगों की नजर में अपराध हो गया है। जहाँ एक तरफ इस नारे को लेकर झूठी खबरें फैलाई जाती हैं कि ‘हिन्दू गुंडों ने जबरदस्ती जय श्री राम बुलवाया’, वहीं दूसरी तरफ ‘जय श्री राम’ कहने पर हिन्दुओं के सात आपराधिक वारदात की कई खबरें आई हैं। खासकर पश्चिम बंगाल में ऐसी कई घटनाएँ सामने आईं। क्या अब राम और सीता की जय बोलना भी पाप है?

हम पहले ही ऐसी घटनाओं के बारे में आपको बता चुके हैं जब ‘जय श्री राम’ को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाए गए, लेकिन अब ऐसी घटनाओं को देखिए, जहाँ ‘जय श्री राम’ कहने पर हिन्दुओं की हत्या तक कर दी गई। गौर करने वाली बात ये कि इस तरह की घटनाओं पर कोई आउटरेज नहीं हुआ, किसी ने चूँ तक नहीं किया। हिन्दुओं पर अत्याचार की ख़बरें कॉन्ग्रेस से लेकर मीडिया गिरोह तक के लिए बेकार हैं।

  1. एक घटना पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के स्वरूपनगर से सामने आई, जहाँ स्वरूपगंज क्षेत्र के फकीरतल्ला इलाके के सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता कृष्ण देवनाथ को जय श्रीराम का नारा लगाने पर इस कदर पीटा गया कि उसकी मौत हो गई। आरोप लगा कि तृणमूल के स्थानीय नेताओं के निर्देश पर एक समूह द्वारा निशाना बनाया गया और पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी।
  2. पश्चिम बंगाल बीजेपी के अनुसार, बांकुरा ज़िले के पंचायसर में उनके 3 कार्यकर्ताओं को ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने की वजह से गोली मार दी गई, जबकि 14 साल का सौमन गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना उस वक्त हुई जब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद सुवेंदु अधिकारी बांकुरा में एक सार्वजनिक सभा में आए थे। यहाँ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए।
  3. रिंकू शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया कि रिंकू की हत्या इसीलिए की गई, क्योंकि वो हिंदूवादी थे और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते थे। बीजेपी बाहरी दिल्ली के जिलाध्यक्ष बजरंग शुक्ला ने इस घटना के विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा था,  “हम इसके जरिए जय श्रीराम कहने पर रिंकू की हत्या करने वाले आतताइयों और जुल्मी लोगों को संदेश देना चाहते हैं। रिंकू बलिदान हो गया। ​लेकिन आज भी लोग जय श्रीराम बोलने के लिए खड़े हैं। आप बोलो कितने लोगों की हत्या करोगे? हत्या आपका उद्देश्य है तो हम उससे डरने वाले लोग नहीं हैं। भय खाने वाले लोग नहीं हैं। जय श्रीराम।”
  4. पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में जय श्रीराम बोलने पर भाजपा कार्यकर्ता को कुछ लोगों ने दिनदहाड़े गोली मार दी। भाजपा कार्यकर्ता का नाम राम प्रसाद मंडल था। इस हमले में 38 वर्षीय कार्यकर्ता के दाहिने पैर में गोली लगी। भाजपा ने इस हमले का आरोप टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगाया था।
  5. ऑक्सफोर्ड के एक फैकल्टी मेंबर ने स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष रश्मि सामंत के माता-पिता को विवाद में घसीटते हुए एक पोस्ट किया, जिसमें उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर भगवान श्री राम की तस्वीर दिखाने के लिए हमला करते हुए आरोप लगाया गया कि रश्मि के छात्र परिषद चुनावों को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वित्त पोषित किया गया था। रश्मि ने कहा कि ‘जय श्री राम’ कहना अपराध नहीं है और इस्तीफा दे दिया।
  6. हावड़ा के श्री रामकृष्ण शिक्षालय नामक स्कूल में जुलाई 11, 2019 को एक शिक्षक ने पहली कक्षा में पढ़ने वाले छात्र आर्यन सिंह की सिर्फ इसलिए बेरहमी से पिटाई कर दी, क्योंकि उसने क्लास में जय श्री राम बोल दिया था। पिटाई से छात्र काफी डरा हुआ था और कई दिनों तक स्कूल जाने से मना कर रहा था।
  7. कलकत्ता यूनिवर्सिटी में कर्मचारी का तबादला सिर्फ़ इसलिए कर दिया गया क्योंकि उसने इंस्टीट्यूट में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाया था। पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी कर्मचारी परिषद ने बताया था कि कलकत्ता यूनिवर्सिटी अथॉरिटी ने कॉलेज कैंपस के एक कर्मचारी का तबादला मात्र इस बात पर कर दिया क्योंकि उसने ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाया था।
  8. ममता बनर्जी की पुलिस ने बंगाल में भाजपा नेता अमानिश अय्यर को गिरफ्तार कर लिया। अमानिश अय्यर का ‘अपराध’ ये था कि वो ‘जय श्री राम’ का मास्क पहनकर ऐसे ही मास्क लोगों में बाँट रहे थे। भाजपा नेता अमानिश अय्यर श्रीरामपुर सांगठनिक जिला के महासचिव हैं।
  9. केरल की पुलिस ने दिसंबर 17, 2020 को तमाम भाजपा कार्यकर्ताओं पर एक विशालकाय बैनर फहराने के लिए मामला दर्ज कर लिया। यह बैनर पलक्कड़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की इमारत पर फहराया गया था और इस बैनर पर ‘जय श्रीराम’ लिखा हुआ था। यह घटना केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में हुई भारतीय जनता पार्टी के अच्छे प्रदर्शन के बाद हुई थी।
  10. अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन की खुशियाँ सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में मनाई गई। इस ख़ुशी में शामिल होने वालों में से एक नाम पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया का भी था। उन्होंने अमेरिका के न्यूयॉर्क, टाइम्स स्क्वायर में श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के शो की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा – “जय श्री राम।” लेकिन दानिश कनेरिया ने यह ट्वीट कुछ देर बाद डिलीट कर दिया। इस्लामी संगठनों ने उन्हें धमकी दी थी।
  11. झारखंड के जमशेदपुर जिले के बिष्टुपुर स्थित बेल्डीह चर्च स्कूल में सितंबर 24, 2019 को खेल-खेल में जय श्री राम का नारा लगाने पर 17 छात्रों को स्कूल से निलंबित कर दिया गया।
  12. हुगली जिले के स्कूल में परीक्षा के दौरान छात्रों से इस नारे को लेकर ऐसे अजीब सवाल पूछे गए, जो हैरतअंगेज हैं। दसवीं की परीक्षा के दौरान छात्रों से पूछा गया– “जय श्री राम नारे से समाज को होने वाले दुष्परिणाम बताएँ“। यह स्कूल पोलबा क्षेत्र में स्थित है। हालाँकि, मामला प्रकाश में आने के बाद स्कूल के शिक्षक ने माफ़ी माँग ली।
  13. उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में सेना के एक जवान रामनरेश की कुछ मुस्लिम युवकों ने पिटाई कर दी। जवान ने गाय को काटने पर आपत्ति जताई थी। साथ ही जय श्री राम का नारा लगाया था। पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
  14. दिल्ली दंगों में विनोद कुमार की हत्या सिर्फ इसी वजह से हो गई कि उनकी मोटरसाइकिल पर ‘जय श्री राम’ का स्टिकर लगा था। 
  15. ममता बनर्जी ने कार से जाते समय जैसे ही ‘जय श्री राम’ नारा सुना, उन्होंने वहाँ सड़क पर उतर कर आक्रोश जताया और पुलिस ने उन सभी लोगों को गिरफ्तार करने को कहा। नॉर्थ 24 परगना में ये घटना हुई।

बताते चलें कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थिर लोनी थाने में मोहम्मद जुबैर और ट्विटर के अलावा सलमान निजामी, राना अयूब, डॉक्टर शमा मोहम्मद, सबा नकवी और मशकूर अहमद के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है, क्योंकि इन सभी ने हिन्दू-मुस्लिम दंगा भड़काने के आपराधिक षड्यंत्र के तहत फेक न्यूज़ फैलाया कि एक मुस्लिम बुजुर्ग को हिन्दुओं ने पीटा और जबरन ‘जय श्री राम’ कहलवाया। जबकि पुलिसिया जाँच में ये एक नॉन-सांप्रदायिक और व्यक्तिगत झगड़े का मामला निकला।

क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने हटाई 2 बोतलें, पानी पीने की दी सलाह और कोका-कोला को लग गया ₹29300 करोड़ का झटका

पुर्तगाल फुटबॉल टीम के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो के एक अंदाज ने कोका-कोला को जबर्दस्त झटका दिया है। दरअसल, रोनाल्डो यूरो 2020 को लेकर हंगरी के बुडापेस्ट में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने सामने रखी कोका-कोला (Coca-Cola) की दो बोतलों को हटाकर अलग रख दिया। फिर पानी की बोतल उठाकर कहा, “इसकी बजाए ये लो।”

उनके इस कदम के बाद कोका कोला के शेयर मूल्य में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। इससे कोका-कोला को 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 293 अरब रुपए) का नुकसान हुआ है। कोका-कोला इस टूर्नामेंट के प्रायोजकों में भी शामिल है।

रोनाल्डो के ऐसा करने के तुरंत बाद कोका-कोला के शेयरों की कीमत $ 56.10 से 1.6% गिरकर $ 55.22 हो गई। इससे कोका-कोला का बाजार मूल्य $242 बिलियन से घटकर $238 बिलियन रह गया, जो $4 बिलियन कम है।

कोका-कोला ने मंगलवार को एक बयान में कहा, “अलग-अलग स्वाद और जरूरतों के साथ हर कोई अपनी पेय वरीयताओं का हकदार है।” यूरो के एक प्रवक्ता ने कहा, “हमारे प्रेस कॉन्फ्रेंस में आने पर खिलाड़ियों को पानी के साथ-साथ कोका-कोला और कोका-कोला जीरो शुगर की पेशकश की जाती है।”

36 वर्षीय रोनाल्डो सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 3 करोड़ फॉलोवर हैं। वह अपने स्वास्थ्य को लेकर भी बेहद सजग रहते हैं। रोनाल्डो इससे पहले एक मर्तबा कह चुके हैं जब उनका बेटा सॉफ्टड्रिंक या ऐसा कोई पेय लेता तो उन्हें यह ठीक नहीं लगता।

अनुशासित डाइट के लिए प्रसिद्ध पुर्तगाली सुपरस्टार ने एक बार बताया था कि पूरे दिन में छह बार हल्का-फुल्का खाते हैं जिसमें फल-सब्जियों के अलावा प्रोटीन युक्त खाना शामिल है। मछली और बिना तेल के पका चिकन शामिल है। नाश्ते में वह जूस लेते हैं और रात्रिभोज में कभी-कभार वाइन लेते हैं।   

वह हफ्ते में पाँच दिन रोजाना तीन-चार घंटे कड़ा अभ्यास करते हैं। इसके अलावा खुद को शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए तमाम एक्सरसाइज करते हैं। मानसिक मजबूती के लिए उनका जोर आठ घंटे की नींद पर रहता है। उनकी गिनती दुनिया के सबसे फिट इंसानों में की जाती है। 

पिछले वर्ष उन्होंने कहा था कि उन्हें इस बात से चिढ़ होती है कि वह फिटनेस को लेकर जितना सतर्क हैं, वैसा उनका बेटा नहीं करता। वह सॉफ्टड्रिंक पीता और कुरकुरे चिप्स खाता है जो उन्हें अच्छा नहीं लगता। रोनाल्डो ने कहा था कि ट्रेडमिल पर दौड़ने के बाद मैं कई बार अपने बेटे को कहता हूँ ठंडे पानी में नहा लो लेकिन वो कहता है, डैडी बहुत ठंडा है। पर चलो अभी वह दस साल का ही है। समझ जाएगा।

रेप के बाद BSC छात्रा की पिटाई, रस्सी से गला दबाया, फिर चाकू से 16 वार: मोहम्मद कैफ साथियों के साथ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के लखनऊ के सरोजनी नगर में रविवार (13 जून 2021) को बीएससी की एक छात्रा का शव मिला था। पोस्टमार्टम से पता चला है कि बेहद क्रूरतापूर्वक उसकी हत्या की गई थी। रेप के बाद हत्यारों ने उसे पीटा। फिर रस्सी से गला दबाया और आखिर में धारदार हथियार से उसके पीठ, पेट, गर्दन और हाथ पर ताबड़तोड़ 16 वार किए थे। लखनऊ की एक ज्वैलरी शॉप पर सेल्स गर्ल का काम करने वाली इस छात्रा के शरीर पर कुल 24 घाव मिले हैं।

सोमवार को हुए पोस्टमार्टम में पता चला है कि लड़की के शरीर पर ताबड़तोड़ प्रहार किए गए थे। इस दौरान पीठ पर जब वार किया गया तो चाकू टूट गया। चाकू के आगे का करीब आठ इंच का हिस्सा छात्रा के पेट से मिला। पुलिस ने लड़की के दोस्त मोहम्मद कैफ और उसके साथियों आकाश यादव और विशाल कश्यप को गिरफ्तार किया है।

डीसीपी सोमेन वर्मा ने बताया कि छात्रा मूल रूप से सीतापुर जनपद के खैराबाद क्षेत्र की रहने वाली थी। वह सिधौली स्थित एक कॉलेज से बीएससी कर रही थी। छात्रा पिता के साथ स्कूटर इंडिया के पास एक किराए के मकान में रहती थी। कैफ से छात्रा की दोस्ती थी। शनिवार शाम जब छात्रा के पिता ड्यूटी गए थे, उसी दौरान कैफ ने उसे फोन किया। कैफ छात्रा के घर बाइक से पहुँचा और उसे घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया।

वर्मा ने बताया कि उसी समय विशाल और आकाश का फोन कैफ के पास आया। कैफ ने उन्हें बताया कि वह छात्रा के साथ है। विशाल और आकाश ताड़ी पी रहे थे। दोनों नशे में थे। विशाल ने कैफ से कहा कि वह अपनी दोस्त को लेकर नवोदय विद्यालय के पास जंगल में पहुँचे। विशाल के कहने पर कैफ वहीं पहुँच गया। वहाँ जंगल में कैफ ने छात्रा से दुष्कर्म किया। उसके बाद विशाल और आकाश ने दुष्कर्म की कोशिश की। छात्रा के विरोध पर विशाल पीटने लगा। इसके बाद चाकू से पेट पर प्रहार कर दिया। आकाश ने रस्सी से छात्रा का गला कसा। फिर ताबड़तोड़ चाकू से प्रहार किए। छात्रा की हत्या कर सभी फरार हो गए। 

पुलिस ने छात्रा के मोबाइल की कॉल डिटेल्स के आधार पर पड़ताल की, जिसमें कैफ का नंबर मिला। फिर पुलिस ने कैफ को पकड़ा। पूछताछ में उसने सारी वारदात कबूली। इसके बाद उसके दोनों साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया। युवती के शव से कुछ दूरी पर शराब और पानी की बोतल, पान मसाला, गिलास मिले थे। साथ ही कपड़े बिखरे हुए थे।

डीसीपी ने बताया कि एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह की अगुवाई में पुलिस टीम गठित की गई थी। एडीसीपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि छात्रा जब विशाल और आकाश के साथ संबंध बनाने के लिए तैयार नहीं हुई तो विशाल ने उसके पेट में चाकू से वार किया। छात्रा जब खून से लथपथ होकर गिर गई तो कैफ ने कहा कि अब इसे मार ही डालो नहीं तो हम सब फँस जाएँगे। फिर आकाश ने रस्सी से गला कसा और अन्य ने ताबड़तोड़ चाकू से प्रहार कर उसकी हत्या कर दी। करीब दो माह से छात्रा की कैफ से दोस्ती थी।