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ट्रस्ट द्वारा जमीन के सौदे में घोटाले का आरोप एक सुनियोजित दुष्प्रचार, समाज में उत्पन्न हुई भ्रम की स्थिति: चंपत राय

हाल ही में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा एक जमीन के सौदे पर सवाल उठाया जा रहा है और यह आरोप लगाया जा रहा है कि इस सौदे में घोटाला किया गया है। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि एक ही दिन में उस जमीन का कई गुणा कीमत पर सौदा किया गया। हालाँकि ऑपइंडिया ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में यह बताया है कि मंदिर ट्रस्ट पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और यह सौदा कानून के दायरे में ही हुआ है।

विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महा सचिव चंपत राय ने इस पूरे मामले को एक दुष्प्रचार बताते हुए इस जमीन के सौदे से संबंधित कुछ जानकारियाँ ट्विटर के माध्यम से साझा की हैं।

उन्होंने कहा कि श्री राम जन्म-भूमि तीर्थ क्षेत्र, श्री राम जन्म-भूमि मन्दिर को वास्तु शास्त्र के अनुसार भव्य स्वरूप प्रदान कराने, शेष परिसर को सभी प्रकार से सुरक्षित तथा दर्शनार्थियों के लिए सुविधापूर्ण बनाने के लिए कार्य कर रहा है इसके लिए मन्दिर के पूर्व व पश्चिम भाग में निर्माणाधीन परकोटा व रिटेनिंग वॉल की सीमा में आने वाले महत्वपूर्ण मन्दिरों/स्थानों को परस्पर सहमति से क्रय किया जा रहा है। न्यास का निर्णय है कि इस प्रक्रिया मे विस्थापित होने वाले प्रत्येक संस्थान/व्यक्ति को पुनर्वासित किया जायेगा।

चंपत राय ने बताया कि पुनर्वास हेतु भूमि का चयन सम्बन्धित संस्थानों/व्यक्तियों की सहमति से किया जा रहा है। बाग बिजेसी, अयोध्या स्थित 1.20 हेक्टेयर भूमि इसी प्रक्रिया के अन्तर्गत महत्वपूर्ण मन्दिरों जैसे कौशल्या सदन आदि की सहमति से पूर्ण पारदर्शिता के साथ क्रय की गई है। यह वही भूमि है जिस पर विवाद है। इसके विषय में उन्होंने कहा कि यह ध्यान देने योग्य है कि उपर्युक्त वर्णित भूमि अयोध्या रेलवे स्टेशन के समीप मार्ग पर स्थित एक प्रमुख स्थान (प्राइम लोकेशन) है। इस भूमि के सम्बन्ध में वर्ष 2011 से वर्तमान विक्रेताओं के पक्ष में भिन्न-भिन्न समय (2011, 2017 व 2019) में अनुबन्ध सम्पादित हुआ।

उन्होंने बताया कि खोजबीन करने पर भूखण्ड ट्रस्ट के उपयोग हेतु अनुकूल पाए जाने पर सम्बन्धित व्यक्तियों से सम्पर्क किया गया। भूमि का जो मूल्य माँगा गया, उसकी तुलना वर्तमान बाजार मूल्य से की। अन्तिम देय राशि लगभग 1,423/-रूपए प्रति वर्गफीट तय हुई जो निकट के क्षेत्र के वर्तमान बाजार मूल्य से बहुत कम है। उन्होंने यह भी बताया कि मूल्य पर सहमति हो जाने के पश्चात् सम्बन्धित व्यक्तियों को अपने पूर्व के अनुबन्धों को पूर्ण करना आवश्यक था, तभी सम्बन्धित भूमि तीर्थ क्षेत्र को प्राप्त हो सकती थी और तीर्थ क्षेत्र के साथ अनुबन्ध करने वाले व्यक्तियों के पक्ष में भूमि का बैनामा होते ही तीर्थ क्षेत्र ने अपने पक्ष में पूर्ण तत्परता एवं पारदर्शिता के साथ अनुबन्ध हस्ताक्षरित किया व पंजीकृत कराया।

पारदर्शिता के विषय में चंपत राय ने कहा कि तीर्थ क्षेत्र का प्रथम दिवस से ही निर्णय रहा है कि सभी भुगतान बैंक से सीधे खाते में ही किए जाएँगे, सम्बन्धित भूमि की क्रय प्रक्रिया में भी इसी निर्णय का पालन हुआ है। यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सरकार द्वारा लगाए गये सभी कर आदि का भुगतान हो जाए। इस भूमि के सौदे में लगाए जा रहे आरोपों पर उन्होंने कहा कि आरोप की भाषा में वक्तव्य देने वाले व्यक्तियों ने आरोप लगाने से पहले तीर्थ क्षेत्र के किसी भी पदाधिकारी से तथ्यों की जानकारी नहीं की, इससे समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने समस्त श्री राम भक्तों से निवेदन किया है कि वे ऐसे किसी दुष्प्रचार में विश्वास न करें।

सीएम योगी ने कैबिनेट मीटिंग में राम मंदिर को लेकर लिए कई निर्णय, जून-जुलाई के लिए किया मंत्रियों का टास्क तय

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (14 जून 2021) को कैबिनेट मीटिंग में अयोध्या राम मंदिर को लेकर कई निर्णय लिए। उन्होंने कैबिनेट मीटिंग में फैसला लिया कि संस्कृति विभाग की 9 एकड़ की जमीन परिवहन विभाग को दी जाएगी। इस जमीन पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बस स्टेशन बनाया जाएगा, जिसमें 400 करोड़ की लागत आएगी। इस प्रोजेक्ट के लिए पीपीपी मॉडल की संभावना तलाशी जाएगी।

इसके साथ ही सीएम योगी ने मंत्रियों को जून-जुलाई के लिए टास्क दिया है। उन्होंने निर्देश दिया कि मंत्री अपने जिले के विकास कार्ययोजनाओं का निरीक्षण करें। मंत्री अपने प्रभार वाले जिले के हर ब्लॉक में जून-जुलाई के महीने में दौरा करें। इस दौरान बैठक में सभी मंत्रियों की जिम्मेदारी तय की गई।

वहीं इसके साथ ही सीएम योगी कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए भी हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने रेहड़ी, पटरी व्यवसायियों के लिए आज (14 जून 2021) से प्रारंभ हुए विशेष टीकाकरण के तहत संचालित टीकाकरण केंद्रों का निरीक्षण किया।

इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों को कोरोना संक्रमण से बचाने टीका-कवर उपलब्ध कराने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। फेरी लगाकर आजीविका कमाने वाले नागरिकों, ऑटो रिक्शा, टैंपो, ई-रिक्शा चालकों आदि के टीकाकरण के लिए आज से प्रदेशव्यापी अभियान प्रारंभ हुआ है। सीएम आदित्यनाथ ने कहा, “आप भी अविलंब लगवाएँ ‘टीका जीत का’।”

मुख्यमंत्री ने अपने अधिकारिक ट्वीटर हैंडल पर लिखा, ”कोरोना की संभावित ‘थर्ड वेव’ के लिए प्रदेश सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ तैयारी कर रही है।” उन्होंने कहा कि अभिभावक स्पेशल बूथ का निर्माण, हर जनपद में पीडियाट्रिक ICU का निर्माण और कल (15 जून) से बच्चों के लिए भी मेडिसिन किट हर जनपद में उपलब्ध कराने की का निर्णय भी उसी तैयारी का एक हिस्सा है।

उन्होंने आगे लिखा, ”कोरोना के विरुद्ध देश की लड़ाई को सबको मिलकर प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाना चाहिए। कोविड वैक्सीन अवश्य लगवाएँ। कुछ लोगों ने भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया था, लेकिन आज हर व्यक्ति इस बात को स्वीकार कर रहा है कि वैक्सीन ही एक मात्र सुरक्षा कवच है।”

मालूम हो कि उन्होंने बैठक में 21 जून को योग दिवस पर विशेष कार्यक्रम को लेकर भी जानकारी दी। साथ ही कहा कि अयोध्या-सुल्तानपुर मार्ग के ट्रैफिक को लेकर भी विचार किया गया है। यह मार्ग नए एयरपोर्ट से जुड़ता है। इसलिए यहाँ 4 लेन का फ्लाईओवर बनाने का फैसला किया गया। इस प्रोजेक्ट में 20.17 करोड़ की लागत होगी। बता दें कि अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में एक बार फिर यूपी में फतह करने के लिए भाजपा एक्शन मोड में नजर आ रही है।

श्रीराम मंदिर के लिए सदियों तक मुगलों से सैकड़ों लड़ाई लड़े तो कॉन्ग्रेस-लेफ्ट-आप इकोसिस्टम से एक और सही

कल लिबरल सेक्युलर इकोसिस्टम ने श्रीराम मंदिर निर्माण को रोकने के उद्देश्य से एक और लड़ाई छेड़ दी। इस इकोसिस्टम की विशेषता ही यह है कि ये कभी निर्माण करने की लड़ाई नहीं छेड़ता, हमेशा निर्माण रोकने के लिए लड़ाई छेड़ता है। कभी कोडनकुलम न्यूक्लीयर पावर प्लांट के निर्माण को रोकने की लड़ाई लड़ता है तो कभी सेंट्रल विस्टा के निर्माण को रोकने की। कभी हाईवे परियोजना का निर्माण रोकने के लिए आंदोलन करता है तो कभी किसी स्टील प्लांट का निर्माण रोकने के लिए। इकोसिस्टम है भी बहुत बड़ा, विकट विस्तार लिए। अलग-अलग मुंड, हाथ, पैर, नेत्र वगैरह को खुद में समेटे। इसका फायदा यह है कि कौन कब लड़ाई छेड़ दे, यह कह पाना मुश्किल होता है। 

निर्माण शब्द से तो इसे इतनी चिढ़ है कि निर्माणों को रोकने के लिए ये किसी भी हद तक जा सकते हैं। किस हद तक जा सकते हैं उसका अंदाज़ा इस बात से लगाएं कि एक न्यूज़ चैनल, माने एनडीटीवी ने सागरमाला प्रोजेक्ट के निर्माण को रोकने के लिए नॅशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में लड़ाई छेड़ दी थी। एक राजनीतिक दल, यानी कान्ग्रेस ने ओडिशा में स्टील प्लांट के निर्माण रोकने के लिए लड़ाई छेड़ दी थी। कहने का अर्थ यह है कि आवश्यकता पड़ने पर राजनीतिक दल का काम टीवी चैनल कर देता है और टीवी चैनल का काम राजनीतिक दल। बीच में जोर लगाना रहता है तो एनजीओ हई सा बोलने के लिए घुस लेता है।

कभी-कभी तो इसके लिए निर्माण रोकना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना निर्माण को तोड़ना। स्मरण रहे, इसी इकोसिस्टम का प्रयास था कि रामसेतु तोड़ दिया जाय ताकि इतने पुराने और धार्मिक महत्त्व के सांस्कृतिक धरोहर वाले निर्माण के साथ-साथ हिन्दुओं का मनोबल भी तोड़ा जा सके। 

तो इकोसिस्टम ने निर्माण रोकने के इसी क्रम में कल ट्रस्ट पर कुछ जमीन की खरीद को लेकर आरोप लगाते हुए कहा कि पंद्रह मिनट में जमीन की कीमत दो करोड़ से अट्ठारह करोड़ हो गई। इस इकोसिस्टम को पता है कि यह आरोप टिकने वाला नहीं है पर उसका उद्देश्य अनायास एक लड़ाई खड़ी कर देना है। उद्देश्य यही है कि आरोप लगाकर हिन्दुओं के मन में ट्रस्ट के विरुद्ध एक संदेह पैदा कर दिया जाए। जिन आस्थावान हिन्दुओं ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी तरफ से अंशदान किया है उनके मन में संदेह पैदा कर दिया जाय।

फर्क इससे नहीं पड़ता कि किसने यह आरोप लगाए हैं। आम आदमी पार्टी ने शुरुआत की है पर उसे आगे ले जाने के लिए सपा, कान्ग्रेस, मीडिया, पत्रकार, एजेंडाकार, परजीवी, आंदोलनजीवी लगभग सब आ गए हैं। यह शोर जो शुरू हुआ है, यह तब तक चलेगा जब तक टूलकिट के अगले पेज पर लिखा हुआ कोई और मुद्दा नहीं मिल जाता। 

ये लोग आज श्री राम का नाम लेकर तथाकथित स्कैम के लिए दुखी हैं। ये वही लोग हैं जिन्होंने देश के उच्चतम न्यायालय में यह एफिडेविट दिया था कि श्रीराम काल्पनिक चरित्र थे। ये वही लोग हैं जो यह पूछते थे कि रामसेतु यदि श्रीराम ने बनवाया था तो उनके इंजीनियर का नाम कहाँ लिखा है? ये वही लोग हैं जो अंत तक यह कहते रहे कि मंदिर न बनाकर अयोध्या में अस्पताल बनना चाहिए। यह कहते हुए साथ ही यह भी जोड़ देते थे कि श्रीराम भी यही चाहते होंगे, वही श्रीराम जिन्हें ये काल्पनिक मानते रहे हैं, वही श्रीराम जिन्हें इसी इकोसिस्टम के लोग अपने विश्वविद्यालयों, अपने टीवी स्टूडियो और अपनी पत्रिकाओं में न केवल काल्पनिक बताते रहे हैं बल्कि उन्हें लेकर हिन्दुओं का अपमान करना नहीं भूलते।

ये वही लोग हैं जो श्रीराम और उनकी माता तक पर भद्दी टिप्पणी करने से बाज नहीं आते। ये वही लोग हैं जो मंदिर निर्माण के लिए इकठ्ठा किए जा रहे अंशदान को लेकर भ्रम और अफवाह फैलाते हैं, खुद कुछ न दें पर मंदिर के प्रति देश के हिन्दुओं की भावना को आहत करने का एक भी मौका जाने नहीं देते। समाजवादी पार्टी के लोग भी इस बात से दुखी हैं कि मंदिर के लिए खरीदी गई जमीन में तथाकथित घोटाला हुआ है, उसी समाजवादी पार्टी के लोग जिनके नेता ने हिन्दुओं पर गोली चलवायी थी और अयोध्या को स्वतंत्र भारत का जलियांवाला बाग़ बना दिया था।

ये अपने वक्तव्यों से देश के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के प्रति आज भी देश की जनता के मन में संदेह पैदा करते हैं। ये आज सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाते हैं कि मंदिर निर्माण के हित में निर्णय देकर सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय नहीं किया और यही हिन्दुओं के साथ हुई तथाकथित बेईमानी से भी दुखी हैं।

मंदिर निर्माण को रोकने की लड़ाई का स्वरुप “वहाँ पर अस्पताल बनना चाहिए” से चलकर “हिन्दुओं के साथ धोखा हो रहा है” तक पहुँच चुकी है। जमीन की खरीद से सम्बंधित दस्तावेज भले ही सार्वजनिक कर दिए गए हैं पर ये इकोसिस्टम उसे स्वीकार नहीं करेगा और इससे सम्बंधित बयान, झूठ और प्रोपेगंडा के मकड़जाल की बुनाई इतनी जल्द खत्म नहीं होगी। जो कुछ भी शुरू किया गया है वह हवन कुंड में हड्डी डालने जैसा है पर सदियों से लड़ी गई सैकड़ों लड़ाई के साथ एक लड़ाई और सही।

डेढ़ साल के बेटे को घर छोड़ कर बेखौफ रेत माफियाओं से लोहा ले रही ये महिला वन अधिकारी, 8 बार हो चुका है हमला

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में महिला वन अधिकारी के खौफ से रेत माफ‍ियाओं के हौसले पस्त पड़ गए हैं। वन विभाग व एसएएफ की टीम पर रेत माफियाओं का हमला आम बात है। ऐसे में एक महिला वन अधिकारी श्रद्धा पांढरे द्वारा बेखौफ होकर अपने कर्तव्‍य का निर्वहन करना, बेहद काबिलेतारीफ है। एसडीओ (SDO) के पद पर कार्यरत श्रद्धा पांढरे ने रेत माफिया को नाकों चने चबाने को मजबूर कर दिया है।

जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, मुरैना जिले में रेत माफिया एसडीओ को रोकने के लिए उन पर 8 बार हमला कर चुका है। इसके बावजूद वह बिना डरे अपने कार्य को अंजाम दे रही हैं। अपने डेढ़ साल के बेटे को घर पर नौकर के भरोसे छोड़कर पांढरे अवैध रेत माफियाओं को रोकने के लिए दिन-रात अपनी ड्यूटी में जुटी रहती हैं। वह माफिया का सामना करने से पीछे नहीं हटती हैं। यही कारण है वे उनसे डरे रहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, रेत माफिया तीन महीने में वन टीम पर 8 पर हमला कर चुके हैं। हमले की शुरुआत 24 अप्रैल 2021 को आरटीओ बैरियर व वन चौकी के बीच सोलंकी पेट्रोल पंप के पास हुई थी। उस वक्त अवैध रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़ा गया था। इसी दौरान एक रेत माफिया ने कट्टा निकाला और एसडीओ श्रद्धा की गाड़ी पर चला दिया। इसके बाद एसडीओ पर 22 मई 2021 को दूसरा हमला हुआ था, लेकिन वो बच गई थीं। तीसरा हमला 25 मई 2021 को वन विभाग के नाके पर हुआ था। इसी तरह रेत माफिया के गुर्गों ने वन टीम पर आठ बार हमले किए।

बता दें कि रेत माफिया अब तक अपने रास्ते में आने वाले कई पत्रकारों और अधिकारियों की जान ले चुके हैं। मध्य प्रदेश में रेत माफिया हर उस आवाज, उस आदमी, उस कदम को बेरहमी से कुचल डालता है, जो उसके काले कारोबार के रास्ते में आड़े आते हैं। यही नहीं, कभी बंधक बनाकर, कभी गोलियाँ चलाकर, कभी ट्रक या ट्रैक्टर चढ़ाकर, कभी खिलाफत करने वाले में खौफ पैदा कर उसे यहाँ से जाने के लिए मजबूर करना इन माफिया के लिए बेहद आम बात है। ऐसे में महिला वन अधिकारी द्वारा इनका डटकर सामना कर अनूठी मिसाल कायम करता है।

महाराष्ट्र में अब अकेले ही चुनाव लड़ेगी कॉन्ग्रेस, नाना पटोले ने सीएम उम्मीदवार बनने की जताई इच्छा

महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में उठापठक का दौर जारी है। राज्‍य की महाविकास आघाड़ी गठबंधन सरकार में जहाँ कॉन्ग्रेस अपने आपको अलग-थलग महसूस कर रही है। वहीं, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) और शिवसेना के बीच लगातार नजदीकियाँ बढ़ रही हैं। इसी बीच महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने सोमवार (14 जून 2021) को ऐलान किया है कि राज्य का अगला विधानसभा चुनाव उनकी पार्टी अकेले ही लड़ेगी। खास बात यह है कि पटोले ने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा भी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (12 जून 2021) को पटोले ने अमरावती में कहा, ”2024 के चुनाव में कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। केवल कॉन्ग्रेस की विचारधारा ही देश को बचा सकती है।” उन्होंने आगे यह भी कहा कि अगर आलाकमान फैसला लेता है तो वह मुख्यमंत्री का चेहरा बनने के लिए भी तैयार हैं। अमरावती के तिवास में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने पूछा, ”क्या आप नाना पटोले को 2024 में सीएम नहीं बनाना चाहते हैं?”

पटोले ने कहा, “मैं कॉन्ग्रेस का राज्य प्रमुख हूँ। इसलिए मैं अपनी पार्टी की बात बताऊँगा। मुझे नहीं पता कि उन्होंने (शरद पवार) क्या कहा, लेकिन कॉन्ग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है हम सभी स्थानीय निकाय चुनाव और विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेंगे।”

पवार द्वारा शिवसेना की प्रशंसा करने से बौखलाए पटोले ने कहा, “कॉन्ग्रेस बड़ी पार्टी है। हमें किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। यहाँ तक ​​कि अगर कोई (पवार) हमें दरकिनार कर रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कॉन्ग्रेस को दरकिनार कर दिया जाएगा। 2024 तक महाराष्ट्र में शीर्ष पार्टी केवल कॉन्ग्रेस ही रहेगी।।” इसके अलावा, उन्होंने ऑक्सीजन, दवाओं और इंजेक्शन की कमी को उजागर करते हुए कोविड-19 स्थिति के कुप्रबंधन का आरोप मोदी सरकार पर लगाया। उन्होंने आगे कहा ​कि पीएम मोदी के पास 6 महीने से विरोध कर रहे किसानों से मिलने का समय नहीं है।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक राम कदम ने दावा किया कि पटोले का खुद को मुख्यमंत्री घोषित करना उद्धव ठाकरे की दक्षता पर उनके संदेह का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि शिवसेना-राकांपा कॉन्ग्रेस को दरकिनार कर रही है, उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस प्रमुख के बयान से य​ह दुख स्पष्ट झलक रहा है। पटोले ने अक्सर अपने ही सहयोगियों के खिलाफ टिप्पणी की है, फिर चाहे वह सचिन वाजे का मामला हो, ईवीएम, वीर सावरकर आदि।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पटोले के इस बयान के बाद से महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। ये चर्चाएँ जोर पकड़ रही हैं कि राज्य की महाविकास अघाड़ी सरकार में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। इस मामले में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीम खान ने कहा कि अगर उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ती है तो उसे इसका फायदा होगा।

वहीं, पटोले के इस बयान के बाद महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि महाविकास अघाड़ी के तीनों घटक दल (शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस) सरकार चलाने के मुद्दे पर एकजुट हैं। हालाँकि, साल 2024 में होने वाले राज्य विधानसभा और लोकसभा का चुनाव साथ लड़ने पर अब तक फैसला नहीं हुआ है।

दरअसल, हाल ही में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पवार के साथ बैठक से महाराष्ट्र का सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। NCP चीफ शरद पवार ने महाविकास अघाड़ी गठबंधन की सरकार को लेकर दावा किया था ये ना सिर्फ अपना कार्यकाल पूरा करेगी, बल्कि आगे होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी साथ लड़ेगी। हालाँकि, वर्तमान परिदृश्य को देखकर उनका ये दावा धराशायी होता नजर आ रहा है।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री व रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (RPI) के चीफ रामदास आठवले ने कहा था कि महाराष्ट्र में बहुत जल्द बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। उन्होंने ये तक कह दिया था कि शिवसेना और बीजेपी ढाई-ढाई साल के लिए सीएम पद बाँट सकती हैं।

चीन की वुहान लैब में जिंदा चमगादड़ों को पिंजरे के अंदर कैद करके रखा जाता था: वीडियो से हुआ बड़ा खुलासा

दुनिया के कई देश खतरनाक कोरोना वायरस के पैदा होने की जगह चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को मानते हैं। इसी क्रम में स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया ने रविवार (13 जून 2021) को खुलासा किया कि नए सबूत सामने आए हैं, जो ये साबित करते हैं कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (Wuhan Institute of Virology) में जिंदा चमगादड़ों को पिंजड़े में कैद करके रखा गया था।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें आप देख सकते हैं कि वुहान लैब में चमगादड़ रखे गए थे। इस प्रकार वीडियो ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के उस दावे को भी खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चमगादड़ों को लैब में रखना और कोरोना के वुहान लैब से पैदा होने की बात करना महज एक ‘साजिश’ है। ऑस्ट्रेलिया की पत्रकार शैरी मार्कसन ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर वीडियो शेयर कर यह जानकारी दी है।

चाइना अकादमी ऑफ साइंस के मई 2017 के 10 मिनट के आधिकारिक वीडियो में चमगादड़ों को पिंजड़े में कैद करके रखा हुआ दिखाया गया था। इस वीडियो को वुहान लैब में नए बॉयोसेफ्टी लेवल 4 के हिसाब से सुरक्षा शुरू होने पर जारी किया गया था। इसमें हादसा होने पर सुरक्षा मानकों को लेकर बताया गया था। साथ ही वीडियो में लैब के निर्माण को लेकर फ्रांसीसी सरकार के साथ विवाद के बारे में भी बताया गया था।

चमगादड़ों को कीड़े खिलाते हुए भी देखा गया

वीडियो में चीनी वैज्ञानिकों को चमगादड़ों को कीड़े खिलाते हुए भी देखा जा सकता है। इस 10 मिनट के वीडियो को पूरी तरह से वुहान लैब के निर्माण पर केंद्र‍ित किया गया है। इसमें कई वैज्ञानिकों के इंटरव्यू भी दिखाए गए हैं। इससे पहले डब्‍ल्‍यूएचओ (WHO) ने अपनी कोरोना की उत्‍पत्ति की जाँच रिपोर्ट में यह नहीं बताया था कि वुहान लैब में चमगादड़ों को रखा जाता था। जाँच रिपोर्ट में सिर्फ इतना ही कहा था कि वुहान लैब में पशुओं की विभिन्न प्रजातियों को उनके कमरे SARS-CoV-2 में संभाल कर रखा जाता था।

डब्‍ल्‍यूएचओ के एक विशेषज्ञ पीटर दास्‍जाक ने तो यहाँ तक कह दिया था कि वुहान लैब में चमगादड़ रखे जाने का दावा महज एक साजिश है। चाइना अकादमी ऑफ साइंस के इस वीडियो की खोज शोधकर्ताओं के एक ऐसे दल ने की है, जो खुद को DRASTIC बुलाते हैं। ये शोधकर्ता कोरोना वायरस के उत्‍पत्ति का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं। इससे पहले कई शोधकर्ताओं ने दावा किया था कि वुहान लैब में चमगादड़ रखे जाते हैं।

ऑस्ट्रेलियाई रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में कहा गया है कि लैब के निर्माण के दौरान उन्हें पर्दे के पीछे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यह शुरू में फ्रांसीसी और चीनी सरकारों का एक संयुक्त उद्यम था, लेकिन यह उस तरह से आगे नहीं बढ़ा। उन्होंने (चीन) कहा, “इस परियोजना पर फ्रांस के साथ हमारा सहयोग हमारी विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और आपसी सहयोग के परिणामस्वरूप एक दशक से अधिक संघर्षों से गुजरा।”

लैब के पूरा होने के बाद फ्रांसीसी वैज्ञानिक और उन अधिकारियों को हटा दिया गया था, जिन्होंने इस तरह की लैब में चीन द्वारा किए जा रहे जैविक शोध पर फ्रांसीसी खुफिया जानकारी के बीच चिंता जताई। वीडियो में बैट लेडी शी झेंगली को भी दिखाया गया है। उसकी टोपी से एक चमगादड़ को लटका हुआ देखा गया। नरैटर ने कहा, “एक दशक से अधिक समय में शि झेंगली की शोध टीम ने चीन और अफ्रीका के कई देशों में 15000 से अधिक चमगादड़ों के नमूने एकत्र किए हैं, जो सार्स SARS की उत्पत्ति की खोज कर रहे हैं।”

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डब्‍ल्‍यूएचओ के एक विशेषज्ञ पीटर दास्‍जाक के संगठन इकोहेल्थ एलायंस ने WIV में कोरोना वायरस की शोध के लिए फंड दिया था। एक अन्य ट्वीट में, डॉ दास्‍जाक ने कहा, “यह एक साजिश है। जिन लैब में मैंने 15 वर्षों अपना योगदान दिया, उनमें जिंदा या मरे हुए चमगादड़ नहीं पाए जाते हैं। कहीं भी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि ऐसा हुआ है। यह एक गलती है, मुझे आशा है कि इसे ठीक किया जाएगा।”

दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इस महीने अपना रुख बदला और स्वीकार किया कि वुहान लैब के अंदर चमगादड़ रखे होंगे। उन्होंने यह भी माना कि डब्ल्यूएचओ की टीम ने वुहान लैब से इसके बारे में नहीं पूछा। उन्होंने कहा, ”हमने उनसे यह नहीं पूछा कि क्या उनके पास चमगादड़ हैं। मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर, कई अन्य वायरोलॉजी लैब की तरह वे एक बैट कॉलोनी बनाने की कोशिश कर रहे थे। मुझे पता है कि यह यहाँ और अन्य देशों की लैब में हो रहा है।”

इस वीडियो की खोज शोधकर्ताओं ने की थी, जिसे DRASTIC के रूप में जाना जाता है। यह कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जाँच कर रहा था। ग्रुप के डिजिटल आर्काइविस्ट जेसी ने यह वीडियो देखा था। ग्रुप के कॉर्डिनेटर Billy Bostickson ने उन सबूतों के बारे में बात की थी, जो दिखाते हैं कि चमगादड़ वुहान लैब में रखे गए थे।

वेटिकन ने तीसरी बार खारिज की सिस्टर लूसी कलपूरा की अपील, केरल कॉन्वेंट से अपना निष्कासन रद्द करने की थी माँग

वेटिकन ने निष्कासित सिस्टर लूसी कलपूरा की तीसरी याचिका भी खारिज कर दी है। इस याचिका में कलपूरा ने अपने निष्कासन को रद्द करने की माँग की थी। दरअसल दो साल पहले बलात्कार के आरोपित पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल का विरोध करने के बाद कलपूरा से नन की पदवी छीन ली गई थी।

सिस्टर लूसी कलपूरा ने बताया कि उन्हें शनिवार (12 जून) को वैटिकन ने इस मामले में नोटिस भेजा जिसमें उनके द्वारा की गई अपील को खारिज करने की बात कही गई है। इसके बाद एर्नाकुलम के फ्रान्सिस्कन क्लैरिस्ट कॉंग्रेगेशन ने कलपूरा को कॉन्वेंट खाली करने का आदेश दे दिया।   

इस नोटिस के मिलने पर कलपूरा ने रिपब्लिक से कहा, “मुझे नहीं पता कि क्या हो रहा है? मैं दुनिया को सच्चाई बताना चाहती हूँ। वैटिकन ने मेरे मामले में एक बार भी ट्रायल नहीं किया। मुझे पता नहीं यह कैसे होगा लेकिन मैं कॉन्वेंट में ही रहूँगी।“

अगस्त 2019 में बलात्कार आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने वाली नन सिस्टर लूसी कलपूरा को ईसाइयों के धार्मिक संगठन फ्रान्सिस्कन क्लैरिस्ट कॉंग्रेगेशन (एफसीसी) से निकाल दिया गया था। इसके बाद वह अपने निष्कासन के लिए दो बार पहले भी अपील कर चुकी है।

हालाँकि उन पर अपनी शिकायत वापस लेने का दबाव भी बनाया जा रहा था जिस पर उन्होंने पुलिस से अपनी शिकायत वापस लेने और माफ़ी माँगने से भी इनकार किया था। कैथोलिक क्रिश्चन सोसायटी एफसीसी ने कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे माफ़ी माँगने और शिकायत वापस लेने को कहा था। सिस्टर लूसी का कहना था कि सितंबर 2018 के बाद उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उन्हें जिस तरह टॉर्चर किया गया, इसके लिए एफसीसी को उनसे माफी माँगनी चाहिए।

जून 2018 में एक 43 वर्षीय नन ने एक पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए पूर्व बिशप फ्रेंको मुल्लकल पर आरोप लगाया था कि, 2014 में एक जरूरी मुद्दे पर चर्चा करने के बहाने मुलक्कल ने उसे बुलाकर उसका यौन उत्पीड़न किया था। इसके बाद यह क्रम लगातार दो वर्ष तक जारी रहा। इसके बाद इस मामले की जाँच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। सिस्टर लूसी कलपूरा उन पॉंच ननों में शामिल हैं जिन्होंने बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर रेप का आरोप लगाने वाली नन का समर्थन किया था।

‘लौट आओ, रोज दूँगी मालपुआ’: सुशांत की बरसी पर रिया चक्रवर्ती का पोस्ट, मौत के बाद बताया था ड्रग एडिक्ट और मानसिक बीमार

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को साल भर हो गए। 2020 में आज ही के दिन (14 जून) को सुशांत मुंबई में अपने घर में मृत अवस्था में मिले थे। हालाँकि इतना समय बीत जाने के बाद भी अभी तक उनकी मौत की गुत्थी सुलझाई नहीं जा सकी। 14 जून को पहली बरसी पर सुशांत के फैंस ने उन्हें अलग-अलग तरीकों से याद किया और उनके लिए न्याय की माँग की। उनकी गर्लफ्रेंड रही अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने भी सुशांत को याद करते हुए इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल पोस्ट लिखा है।

रिया ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि सुशांत के बिना कोई जीवन ही नहीं है और सुशांत सब कुछ अपने साथ ही ले गए। रिया ने लिखा, “मेरे स्वीट सनशाइन बॉय, प्लीज मेरे पास वापस आ जाओ। मैं तुम्हें रोज मालपुआ दूँगी और पढ़ने के लिए दुनिया भर की क्वांटम फिजिक्स की किताबें भी।“

हालाँकि सुशांत की मौत के बाद रिया की भूमिका सवालों के घेरे में रही। खुद सुशांत के परिवार ने रिया चक्रवर्ती को ही मुख्य आरोपी बनाया था और उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। सुशांत के पिता ने 28 जुलाई को रिया चक्रवर्ती समेत 6 लोगों के ख़िलाफ़ अपने गृहनगर पटना में एफआईआर दर्ज करवाई थी। उन्होंने इस केस में रिया पर सुशांत को प्रेम में फँसाकर पैसे ऐंठने का आरोप लगाया था।

सीएनएन- न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि रिया के भाई शौविक चक्रवर्ती के बैंक खाते में सीधे सुशांत के एकाउंट से पैसे ट्रांसफर किए गए थे। इसके बाद रिया ने अपना बचाव करने के लिए ही उल्टा सुशांत को ही मानसिक बीमार और ड्रग एडिक्ट बता दिया था। हालाँकि इस मामले में ड्रग का एंगल भी तेजी से सामने निकल कर आया जिसके बाद नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने रिया और उनके भाई शौविक को गिरफ्तार भी किया था। फिलहाल दोनों जमानत पर हैं।

6 अगस्त 2020 को सुशांत की मौत की जाँच सीबीआई को सौंपी गई। साथ ही सुशांत के पैसों की हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सक्रिय हो गया था। इस तरह से सुशांत की मौत की जाँच फिलहाल तीन एजेंसियों द्वारा की जा रही है और इस पूरे मामले में कई गिरफ्तारियाँ भी हो चुकी हैं।

पिछले दिनों मीडिया रिपोर्ट में यह बताया गया था कि रिया ने एनसीबी के सामने यह कबूल किया था कि उन्होंने सारा अली खान के साथ ड्रग्स ली और सारा ने ही केदारनाथ की शूटिंग के दौरान सुशांत को इसकी लत लगवाई।

सोमवार (14 जून) को ही न्यूज एजेंसी एएनआई के ट्विटर एकाउंट के माध्यम से सीबीआई ने भी सुशांत की मौत पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सीबीआई के अधिकारियों ने कहा कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जाँच अभी भी चल रही है और इस मामले की पूरी बारीकी से जाँच की जा रही है।

हालाँकि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के एक साल बाद भी कई सवाल अनसुलझे ही हैं और जिस एक पहलू पर सबसे ज्यादा प्रश्न उठाया जा रहा है, वह है सुशांत की मौत में रिया चक्रवर्ती की संदिग्ध भूमिका।

आरा बैग कारोबारी हत्याकांड: कुख्यात खुर्शीद कुरैशी, अब्दुल समेत 10 को फाँसी, 6 दिसंबर 2018 को हुई थी दिनदहाड़े हत्या

बिहार के आरा शहर में दिसंबर 2018 में चर्चित बैग कारोबारी इमरान खान की हत्या के मामले में कुख्यात आरोपित खुर्शीद कुरैशी एवं उसके भाई अब्दुल्ला सहित 10 आरोपितों को सोमवार (14 जून) को फाँसी की सजा दी गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार की कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपितों को सजा सुनाई है साथ ही उन पर कुल 260,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।

ज्ञात हो कि 6 दिसंबर 2018 को आरा के धर्मन चौक स्थित शोभा मार्केट में बेल्ट एवं बैग कारोबारी इमरान खान के ऊपर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस दौरान इमरान खान पर काफी नजदीक से गोलीबारी की गई थी जिससे उसका शरीर छलनी हो गया था। इस गोलीबारी में जहाँ इमरान खान की मौत हो गई थी वहीं उसका भाई अकील अहमद और बीएसएनएल कर्मचारी गोली लगने से घायल हो गए थे।  

बाद में इमरान के भाई अहमद के बयान पर टाउन थाना में खुर्शीद कुरैशी और उसके भाई अब्दुल्ला सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें कहा गया गया था कि आरोपितों ने इमरान खान से 10 लाख रुपए रंगदारी की माँग की थी और मना करने पर उसकी हत्या कर दी गई।

दोषियों में नजीरगंज के राजू खान, रौजा मोहल्ला के अनवर कुरैशी, मिल्की मोहल्ला के अहमद मियाँ, खेताड़ी मोहल्ला के बब्ली मियाँ, तौशिफ आलम व फुरचन उर्फ फुचन मियाँ, रोजा के गुड्डू मियाँ व अबरपुल मुहल्ला शमशेर मियाँ भी शामिल हैं। इन सभी के ऊपर हत्या, अपराधिक षड्यन्त्र, रंगदारी के लिए भय पैदा करने और आर्म्स ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

हालाँकि पहले 24 मार्च को ही आरोपितों को सजा सुनाई जानी थी। बाद में सोमवार (14 जून) को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार ने आईपीसी की धारा 387/34, 302/34, 307/34,120 (बी ) एवं 27 आर्म्स एक्ट तहत सभी आरोपितों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फाँसी की सजा सुनाई।

केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर होने वाली थी पिटाई? लोगों से पहले ही उतरवा लिए गए जूते-चप्पल: रिपोर्ट

आम आदमी पार्टी (AAP) के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल एक दिवसीय दौरे पर सोमवार (जून 14, 2021) को गुजरात पहुँचे, जहाँ उन्होंने आगामी 2022 विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, अहमदाबाद में आश्रम रोड स्थित वल्लभ सदन हवेली मंदिर के बगल वाले हॉल में आयोजित केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंदर जाने वाले लोगों से जूते-चप्पल पहले ही उतरवा लिए गए।

भास्कर ने अपनी खबर में बताया है कि लोग इस बात की चर्चा करते रहे कि सीएम केजरीवाल के प्रेस कॉन्फ्रेंस में घुसने वाले लोगों से जूते-चप्पल क्यों उतरवाए जा रहे हैं। पत्रकारों, आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं समेत सभी लोगों से जूते-चप्पल बाहर ही उतरवा लिए गए थे। हालाँकि, इस दौरान पुलिसकर्मी जूते पहने हुए नजर आए। बी-डिवीजन के ACP एलबी झाला और गुजरात यूनिवर्सिटी के PI वीजे जडेजा जूते पहने हुए दिखे।

खबर की मानें तो केजरीवाल पर हमले की आशंका से लोगों के जूते-चप्पल उतरवा लिए गए, ऐसी संभावना है। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि AAP के कई कार्यकर्ता प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल के बाहर ही खड़े हैं। ये भी ज्ञात हो कि अरविंद केजरीवाल पर हमले की घटनाएँ कोई नई बात नहीं है और उन्हें थप्पड़ मारने के अलावा स्याही, मिर्ची पाउडर और जूते-चप्पल फेंकने की घटनाएँ भी सामने आ चुकी हैं। अप्रैल 9, 2016 को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक युवक ने उन पर जूता उछाल दिया था।

अहमदाबाद के प्रेस कॉन्फ्रेंस में आसपास के कई जिलों से AAP कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे थे। कईयों के पास पार्टी का ID कार्ड न होने के चलते उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस वाले हॉल में एंट्री की अनुमति ही नहीं मिली। सिर्फ आईडी कार्ड वाले कार्यकर्ताओं को ही भीतर जाने की अनुमति मिली। प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने भाजपा-कॉन्ग्रेस पर अपनी-अपनी दुकान चलाने का आरोप लगाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा को ज़रूरत पड़ने पर कॉन्ग्रेस ही माल सप्लाई करती है और दोनों में 27 सालों की दोस्ती है।

केजरीवाल ने “आज कॉन्ग्रेस, भाजपा की जेब में है। गुजरात में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों का बुरा हाल है। व्यापारी वर्ग डरा हुआ है। इसकी जिम्मेदार ये दोनों पार्टी हैं। गुजरात का मॉडल आज खराब हालत में हैं और इसे हम अच्छा करेंगे।” अटकलें ये भी लगाई जा रही हैं कि कॉन्ग्रेस आलाकमान से नाराज़ हार्दिक पटेल को AAP अपना चेहरा बना सकती है। हार्दिक ने इन अटकलों के बाद स्पष्टीकरण देकर इन्हें नकारा।