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हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर ‘इस्लाम की शेरनी’ ने डाले थे अश्लील कंटेंट: फेसबुक-इंस्टाग्राम को दिल्ली HC का नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने इंस्टाग्राम पर ‘इस्लाम की शेरनी’ हैंडल द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर ‘अत्यधिक घृणित और आपत्तिजनक समाग्रियों’ के प्रकाशन के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करते हुए नोटिस जारी किया है। अधिवक्ता आदित्य सिंह देशवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और इसकी ऑनर कम्पनी फेसबुक को नोटिस जारी किया। इस मामले की अगली सुनवाई अब 16 अगस्त को होगी।

जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने केंद्र, इंस्ट्रग्राम और फेसबुक से प्रतिक्रिया माँगी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए कंटेंट में न सिर्फ हिन्दू देवी-देवताओं के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया था, बल्कि कार्टून्स और ग्राफिक्स के रूप में उन्हें काफी अश्लील रूप में प्रदर्शित किया गया था। इंस्टाग्राम ने कोर्ट को बताया कि जिस कंटेंट को लेकर आपत्ति जताई गई है, उसे पहले ही प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।

याचिकाकर्ता ने नए IT नियमों ‘(Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code), Rules, 2021’ का जिक्र करते हुए कहा कि इंस्टाग्राम ने इसे अब तक लागू नहीं किया है, ऐसे में उसे आदेश दिया जाए कि वो पूरी तरह से इन नियमों को लागू करे। हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि वो इंस्टाग्राम को ऐसी सामग्रियों से जुड़ी जानकारियों को लेकर सूचना दे, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट्स का प्रकाशन करने वाले हैंडल्स की जानकारी प्रशासन को देने के बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि केवल पोस्ट को हटा देना ही एकमात्र निदान नहीं है। इंस्टाग्राम ने कहा है कि उसने नए IT नियमों के हिसाब से एक ग्रीवांस अधिकारी की नियुक्ति कर दी है। लेकिन, याचिकाकर्ता ने कहा कि एक ही व्यक्ति को इंस्टाग्राम और फेसबुक, दोनों का ग्रीवांस अधिकारी बना दिया गया है।

याचिका में दलील दी गई है कि भारत में करोड़ों लोग इन दोनों प्लेटफॉर्म का प्रयोग करते हैं और इनका असर व्यापक है, ऐसे में एक ही व्यक्ति को दोनों का ग्रीवांस ऑफिसर नहीं बनाया जा सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता जी तुषार राव और आयुष सक्सेना ने याचिकाकर्ता की तरफ से दलीलें पेश की, जबकि इंस्टाग्राम की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के अलावा वकीलों की एक पूरी फ़ौज थी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा सहित दो अन्य वकीलों ने केंद्र का पक्ष रखा।

बता दें कि ‘इस्लाम की शेरनी’ हैंडल से हिन्दू देवी-देवताओं पर ऐसी टिप्पणी की गई थी, जिसे लिखा भी नहीं जा सकता। ये याचिका उन्हीं कंटेंट्स को आधार बना कर दायर की गई है। इसके अलावा हाल ही में सामने आए एक अन्य वीडियो में हैदराबाद के दो इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर्स भगवान शिव पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आए थे। वीडियो को Youel.in इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया गया था।

AAP के गुजरात दफ्तर में दिल्ली के MLA का जेब कटा, हमले के डर से केजरीवाल ने उतरवा लिए थे जूते-चप्पल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात दौरे के दौरान ऐलान किया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 182 सीटों पर आम आदमी पार्टी (AAP) उम्मीदवार उतारेगी। इसी क्रम में सोमवार (14 जून 2021) को अहमदाबाद में वे पार्टी के प्रदेश कार्यालय का उद्घाटन करने पहुँचे थे। इस दौरान पार्टी के कई नेताओं की जेब पर हाथ साफ हो गया।

जिस वक्त केजरीवाल पार्टी दफ्तर की रिबन काट रहे थे, उस समय उनके साथ दिल्ली के विधायक एवं आप के गुजरात प्रभारी गुलाब सिंह यादव भी मौजूद थे। जेबकतरों ने यादव को भी नहीं छोड़ा। उनके अलावा वहाँ मौजूद चार अन्य लोगों की भी जेब कट गई। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन के पीआई आरजे चुडासमा का कहना है, “पॉकेट काटने की बात हमारे ध्यान में आई है, जिसको लेकर एफआईआर दर्ज की गई है।”

आप दफ्तर के उद्घाटन के समय कोरोना नियमों की धज्जियाँ भी उड़ती नजर आईं। उद्घाटन समारोह में शामिल हुई भीड़ ने न तो सोशल डिस्टेसिंग को अपनाया और न ही मास्क पहनने का ध्यान रखा।

गौरतलब है कि सोमवार की ही अहमदाबाद में आयोजित केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में आने वाले लोगों के जूते-चप्पल बाहर ही उतरवा लिए गए थे। इन लोगों में पत्रकार, पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं समेत सभी लोग शामिल थे। इस दौरान केवल पुलिसकर्मी जूते पहने हुए नजर आए।

खबर की मानें तो केजरीवाल पर हमले की आशंका से लोगों के जूते-चप्पल उतरवा लिए गए थे। केजरीवाल पर हमले की कई घटनाएँ हो चुकी है। थप्पड़ मारने के अलावा स्याही, मिर्ची पाउडर और जूते-चप्पल फेंकने की घटनाएँ भी सामने आ चुकी है। अप्रैल 9, 2016 को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक युवक ने उन पर जूता उछाल दिया था।

गलवान में चीन के 45 फौजियों को मारा, फिर 43% भारतीय ने नहीं खरीदा चीनी माल: बीजिंग की ऐसे कमर तोड़ रहा है भारत

भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुए संघर्ष को 1 साल पूरे हो चुके हैं। भारतीय जवानों ने देश की जमीन पर साम्राज्यवादी चीन के कब्जे की कोशिशों को नाकाम किया था। चीन ने इसके बाद हेकड़ी दिखाई थी, लेकिन सख्त मोदी सरकार ने उसके सामने झुकने से इनकार करते हुए सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई और ड्रैगन पर डिजिटल स्ट्राइक किया। अब पता चला है कि43% भारतीय नागरिकों ने पिछले 1 साल में कोई चीनी उत्पाद नहीं खरीदे।

एक सर्वे से ये खुलासा हुआ है, जो बताता है कि भारतीय सैनिकों के बलिदान के बाद चीनी सामान के बहिष्कार की अपील सफल रही और लोगों ने स्वेच्छा से चीन की कंपनियों के उत्पाद नहीं खरीदे। इस अवधि में जिन लोगों ने चीनी सामान खरीदे भी, उनमें से भी 60% का कहना है कि उन्होंने चीन में बने 1-2 से ज्यादा उत्पाद नहीं खरीदे। कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LocalCircles ने इस सम्बन्ध में सर्वे कराया था।

ये रुझान भारत के लिए भी सुखद हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने और उनके प्रति लोगों में रुचि पैदा करने का अभियान चला रखा है। चीन की सैकड़ों वेबसाइटों और ऐसे एप्स को बंद किया गया, जिन्होंने भारत सरकार के नियमों के हिसाब से चलना उचित नहीं समझा या जिन पर शक था कि वो भारतीय नागरिकों का डेटा चीन के साथ साझा करते हैं।

TikTok जैसे एप्स को बैन करने के कारण भारत विरोधी चीनी प्रोपेगंडा भी धीमा पड़ा। नवंबर 2020 के फेस्टिव सीजन में LocalCircles ने सर्वे कराया तो पाया कि पर्व-त्योहारों के दौरान खरीददारी में भी 71% ऐसे थे, जिन्होंने चीन के उत्पादों में कोई रुचि नहीं दिखाई। हालिया सर्वे में देश के 281 जिलों के 18,000 लोगों की राय ली गई। लेकिन, चीन की सामान खरीदने का कारण अब भी उसका कम दाम में बेहतर प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराना बना हुआ है।

चीन में निर्मित माल खरीदने वालों में से 70% ने यही कहा कि उन्होंने ‘वैल्यू फॉर मनी’ की वजह से ये प्रोडक्ट्स खरीदे, क्योंकि उन्हें लगता था कि कम मूल्य में ज्यादा फीचर्स वाले प्रोडक्ट्स चीन उपलब्ध करा रहा है। कुछ लोगों ने चीन में बनी वस्तुओं के यूनिक और आकर्षक होने की भी बात कही। चीन का उत्पाद ख़रीदने वालों में 14% ने 3-5 तो 7% ने 5-10 चीन निर्मित आइटम्स की खरीददारी की।

बता दें कि चीन निर्मित इलेक्ट्रिकल उत्पाद, एप्लायंसेज, फार्मा-ड्रग्स और मोबाइल फोन्स जैसी वस्तुओं के लिए भारत अब भी एक बड़ा बाजार बना हुआ है। भारत के ‘इंटरमीडिएट गुड्स इम्पोर्ट्स’ में चीन का शेयर 12% है। कैपिटल गुड्स के मामले में ये आँकड़ा 30% और कंज्यूमर गुड्स के मामले में 26% है। LocalCircles का कहना है कि ग्राहकों के मन में बड़ा बदलाव भले गलवान संघर्ष के बाद आया हो, लेकिन भारतीय प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता और मूल्य ठीक रहे तो वो अपने इस रुख पर कायम रहेंगे।

रिपोर्ट्स से पता चला था कि इस संघर्ष में चीन के 45 सैनिक भी मारे गए थे, लेकिन काफी दिनों तक वो ये आँकड़ा छिपाता रहा। गलवान में जून 15, 2020 को हुए इस संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा पर 50-50 हजार सैनिकों की तैनाती कर दी थी। मई 2020 की शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव शुरू हो गया था। ऊँचाई वाले इस इलाके में कई युद्ध उपकरण भी तैनात किए गए थे।

भारत ने TikTok समेत 59 चीनी एप्स को नोटिस भेज कर उन्हें भारत में हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। भारत में प्रतिबंधित किए जाने के बाद TikTok की पैरेंट कंपनी Bytedance को 600 करोड़ डॉलर (उस दौरान की करेंसी एक्सचेंज के अनुसार लगभग 45300 करोड़₹ रुपए) का नुकसान हुआ था। मई 2021 में बाइटडांस के को-फाउंडर और सीईओ झांग यिमिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

‘इस बार माफी पर न छोड़े’: राम मंदिर पर गुमराह करने वाली AAP के नेताओं ने जब ‘सॉरी’ कह बचाई जान

आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने अयोध्या राम मंदिर के लिए जमीन की खरीद में घोटाले का आरोप लगाया। कुछ ही घंटों में यह साफ हो गया कि उन्होंने तथ्यों को लेकर गुमराह करने की कोशिश की। उसके बाद से उन पर राम मंदिर के निर्माण में अड़ंगा डालने और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश के आरोप लग रहे हैं। कानूनी कार्रवाई की माँग उठ रही है।

माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में राजनीतिक जमीन की तलाश में जुटी आप ने हिंदुओं में फूट डालने के मकसद से ऐसा जान-बूझकर किया। वैसे भी इस पार्टी और उसके नेताओं का बेबुनियाद आरोप लगाने और बाद में माफी माँग लेने का इतिहास रहा है।

राम मंदिर में ‘जमीन घोटाले’ के आप के आरोपों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कड़ा रुख दिखाया है। वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने ट्रस्ट को मानहानि का केस करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि इस बार इन्हें माफी माँगने पर न छोड़े और इसे इसकी परिणति तक लेकर जाएँ।

यह पहला मौका नहीं है जब आप नेताओं पर मानहानि का केस करने की बात हो रही है। ऐसे कई मामलों में उन्होंने बाद में माफी मॉंग कर अपनी जान भी बचाई है। इनमें आप के सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं।

2018 में केजरीवाल, संजय सिंह, राघव चड्ढा और उस समय आप के नेता रहे आशुतोष ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को एक संयुक्त पत्र लिखा था। इसमें तीनों ने जेटली से मानहानि मामले को लेकर माफी माँगी थी। यह मामला दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (DDCA) में घोटाले के आरोपों से जुड़ा था। आप नेताओं के गंभीर आरोपों के बाद जेटली ने दिसंबर 2015 में केजरीवाल और अन्‍य पाँच आप नेताओं के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में आपराधिक मानहानि का दावा ठोकते हुए 10 करोड़ रुपए का केस किया था। हालाँकि आप नेताओं की माफी के बाद जेटली ने केस वापस ले लिया था।

2018 के मार्च में केजरीवाल ने इसी तरह का एक पत्र लिखकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से माफी माँगी थी। इसमें कहा गया था, “हम दोनों अलग-अलग दलों में हैं। मैंने आपके बारे में बिना जाँचे कुछ आरोप लगाए, जिससे आपको दुख हुआ होगा। इसलिए आपने मेरे खिलाफ मानहानि का केस दायर किया। मुझे आपसे निजी तौर पर कोई दिक्कत नहीं है, इसलिए मैं आपसे माफी माँगता हूँ।” इसके बाद गडकरी ने भी आप नेता को माफ कर दिया था।

केवल बीजेपी ही नहीं अन्य दलों के नेताओं से भी केजरीवाल इसी तरह माफी माँग चुके हैं। केजरीवाल ने कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल और उनके बेटे अमित सिब्बल पर भी आरोप लगाए थे। मानहानि का मुकदमा होने पर उनसे भी माफी माँग ली थी। 2017 के पंजाब ​चुनाव के वक्त केजरीवाल ने विक्रम सिंह मजीठिया पर ड्रग्स के धंधे में संलिप्त होने का आरोप लगाया था। यह भी कहा था कि आप की सरकार बनने पर उन्हें जेल भेजेंगे। लेकिन इस मामले में भी मजीठिया ने जब मानहानि का दावा किया तो केजरीवाल ने लिखित तौर पर माफी माँग ली थी। यही कारण है कि इस बार आप नेताओं को केवल माफी माँगने पर ही बख्श नहीं देने की बात कही जा रही है।

गाय चोरी के शक में हिंदू भीड़ ने 28 साल के मुस्लिम व्यक्ति को मार डाला: वायरल खबर का Fact Check

सोशल मीडिया पर कुछ तत्व लगातार हिन्दुओं और हिन्दू धर्म को बदनाम करने की जुगत में लगे रहते हैं और इसी क्रम में झूठी खबरें शेयर कर के ऐसा दिखाया जाता है जैसे हिन्दुओं ने मुस्लिमों की हत्या कर दी हो। अब सोशल मीडिया पर असम के तीनसुकिया जिले की एक घटना वायरल हो रही है, जहाँ एक व्यक्ति को जानवरों की चोरी के शक में भीड़ ने पीटा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। फिर क्या था, गिरोह विशेष को एक नैरेटिव मिल गया।

ऑस्ट्रेलियाई लेखक सीजे वर्लमैन ने ‘द वायर’ की खबर शेयर करते हुए लिखा कि एक 28 साल के मुस्लिम व्यक्ति की ‘हिंदुत्व भीड़’ ने हत्या कर दी, वो भी गायों की चोरी का झूठा आरोप लगा कर। वर्लमैन ने हाल ही में लिखा था, “मैं ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में न्यूजीलैंड का समर्थन कर रहा हूँ। ऐसा इसीलिए, क्योंकि 50 करोड़ हिंदुत्व कट्टरपंथियों को मैं एक सेकेंड के लिए भी खुश नहीं देख सकता।”

सीजे वर्लमैन ने ‘द वायर’ की खबर शेयर कर चलाया प्रोपेगंडा

इसी तरह कुछ अन्य लोगों ने भी ऐसी ही खबर चलाई। इसके आधार पर ‘मुस्लिमों पर अत्याचार’ और ‘हिंदुत्व मॉब की क्रूरता’ वाला नैरेटिव फैलाया गया। वामपंथी मीडिया पोर्टलों में अपनी हैडिंग में भी स्पष्ट किया कि पूरा मामला क्या है। असल में मृतक की उम्र भी 28 वर्ष नहीं थी, उसकी उम्र 34 वर्ष है। ऊपर से सच्चाई ये है कि मृतक मुस्लिम भी नहीं था। उसका नाम शरत मोरन था, जो हिन्दू धर्म से था।

ये घटना शनिवार (जून 12, 2021) की है। ये घटना बाघजन पुलिस थानांतर्गत स्थित कोरजोंगा गाँव की है। उसे पुलिस ने बचा कर दुमदुमा के FRU अस्पताल में शिफ्ट किया, जहाँ उसकी मौत हो गई। मृतक कोर्दोईगूरी गाँव का रहने वाला है। तीनसुकिया के एसपी देबोजीत देओरी ने बताया कि ये चोरी के आरोप में लोगों के शक का नतीजा है। मृतक के शरीर पर कटे के कई निशान पाए गए। इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है।

गाँव में दो लोगों की संदिग्ध गतिविधियों से ग्रामीणों में शक पैदा हुआ, जिसके बाद उन्होंने इन दोनों की खोज शुरू कर दी। ग्रामीणों ने दोनों को खदेड़ कर उनमें से एक को पकड़ लिया और उसकी पिटाई की। पीड़ित अपने एक दोस्त के यहाँ रात में रुका हुआ था। रात में ही उसे पकड़ लिया गया और रात भर बाँध कर एक कमरे में रखा गया। भीड़ ने उसे प्रताड़ित भी किया। लेकिन, न वो मुस्लिम था और न ही ये घटना सांप्रदायिक थी।

​अक्सर हिंदू घृणा से सने ट्वीट करने वाले और इस्लामी समर्थक सीजे वर्लमैन के ऊपर शेखर गुप्ता की वेबसाइट द प्रिंट ने प्रोफाइल किया, उसे एक पत्रकार के रूप में घोषित किया। सच्चाई यह है कि सीजे वर्लमैन एक स्तंभकार है और जगह-जगह अपने लेख छपवाता है।

जाखू मंदिर: जानिए क्यों पहुँचे थे हनुमान जी शिमला के जाखू पहाड़ पर, स्थापित है 108 फुट की प्रतिमा

अक्सर आपने सोशल मीडिया में हनुमान जी की विशालकाय सिंदूरी प्रतिमा देखी होगी जो शिमला में स्थित है। 108 फुट ऊँची इस प्रतिमा को शिमला के किसी भी कोने से देखा जा सकता है। यह विशालकाय प्रतिमा स्थित है जाखू मंदिर में जो समुद्र तल से 8040 फुट की ऊँचाई पर जाखू पहाड़ पर स्थित है। तो आइए जानते हैं कि इस दिव्य मंदिर की स्थापना के पीछे क्या कारण था? और इसका संबंध हनुमान जी से किस प्रकार से है?

जब शिमला पहुँचे थे हनुमान जी

भगवान राम और लंका नरेश रावण के मध्य युद्ध चल रहा था। कई दिनों तक युद्ध चलने के बाद भी जब रावण की सेना भगवान राम की वानर सेना के आगे निर्बल दिखाई दे रही थी। तब रावण के पुत्र मेघनाद ने लक्ष्मण पर शक्ति बाण चला दिया जिसके प्रभाव से वह मूर्छित हो गए। वैद्य के कहने पर लक्ष्मण के इलाज के लिए हनुमान जी हिमालय से संजीवनी बूटी लाने के लिए निकाल पड़े।

आकाश मार्ग से जा रहे हनुमान जी की नजर जाखू पहाड़ पर तपस्या कर रहे एक यक्ष ऋषि पर पड़ी। मार्ग में विश्राम कर और संजीवनी बूटी का पता पूछने के लिए हनुमान जी इसी स्थान पर उतरे। यक्ष ऋषि से संजीवनी की जानकारी लेने के बाद हनुमान जी ने उनसे दोबारा मिलने का वादा किया।

कालनेमि नामक राक्षस के मायाजाल के कारण हनुमान जी को कुछ देर हो गई इसलिए वह एक छोटे मार्ग से लौट आए और अपने वचन के अनुसार यक्ष ऋषि से मुलाकात नहीं कर पाए। इस पर ऋषि व्याकुल हो उठे। उनकी व्याकुलता दूर करने के लिए अंततः हनुमान जी ने यक्ष ऋषि को दर्शन दिया। इसके बाद इस स्थान पर हनुमान जी की स्वयंभू प्रतिमा प्रकट हुई। इसे लेकर यक्ष ऋषि ने हनुमान जी का यह मंदिर बनवा दिया। हनुमान जी की यह स्वयंभू प्रतिमा आज भी मंदिर के आँगन में स्थापित है।

शिमला स्थित जाखू मंदिर (फोटो : माय तीर्थ इंडिया)

बाद में मंदिर में जब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई तब यहाँ हनुमान जी की 108 फुट की विशालकाय प्रतिमा का निर्माण कराया गया। यह प्रतिमा इतनी विशाल है कि लगभग शिमला के प्रत्येक कोने से देखी जा सकती है। ‘प्राइड ऑफ शिमला’ कही जाने वाली यह प्रतिमा विश्व की कुछ सबसे ऊँची प्रतिमाओं में से एक है। हिमाचल प्रदेश की यात्रा में जाने वाले श्रद्धालु शिमला के इस हनुमान मंदिर की यात्रा अवश्य करते हैं।

बर्फबारी के दौरान हनुमान जी की विशालकाय प्रतिमा (फोटो : न्यूज 18)

कैसे पहुँचे?

शिमला, हिमाचल प्रदेश की राजधानी है। यहाँ हवाई अड्डा है जो शहर से 23 किमी दूर जुबरहट्टी में स्थित है। दिल्ली से यहाँ पहुँचने के लिए विमान सेवा उपलब्ध है। शिमला का निकटतम हवाई अड्डा चंडीगढ़ भी है। रेलमार्ग से भी शिमला देश के बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। शिमला की रेल लाइन अपनी सुंदरता के लिए विश्व विख्यात है। कालका-शिमला रेल लाइन को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा प्राप्त है।

शिमला उत्तर भारत के सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। चंडीगढ़, शिमला से निकटतम स्थित प्रमुख शहर है जो यहाँ से 120 किमी की दूरी पर है। दिल्ली से शिमला की दूरी लगभग 380 किमी है, लेकिन दिल्ली से शिमला पहुँचने के लिए कई सारे साधन उपलब्ध हैं।

‘मुस्लिम बुजुर्ग को पीटा-दाढ़ी काटी, बुलवाया जय श्री राम’: आरोपितों में आरिफ, आदिल और मुशाहिद भी, ज़ुबैर-ओवैसी ने छिपाया

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके आधार पर आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मुस्लिम व्यक्ति से जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया। मुस्लिम बुजुर्ग ने 4 अज्ञात लोगों पर पिटाई और जबरन दाढ़ी शेव कराने का आरोप लगाया। उक्त बुजुर्ग ने दावा किया कि उसका अपहरण कर के एक सुनसान इलाके में स्थित घर में ले जाया गया और वहीं ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया।

मीडिया और राजनीति के एक वर्ग में हमेशा से हिन्दू प्रतीक चिह्नों को बदनाम करने की होड़ मची रहती है। इस बार भी AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और AltNews के जुबैर ने ‘जय श्री राम’ को बदनाम करने का बीड़ा उठाया। ओवैसी ने कहा कि हिंदुत्व में बुजुर्गों और बच्चों पर हमला करना ही वीरता कहलाती है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को टैग करते हुए उन्होंने प्रतिक्रिया की माँग की। साथ ही कहा कि ‘हिन्दू हमलावर’ हमेशा भीड़ में होते हैं, अकेले नहीं।

वीडियो शेयर करते हुए ओवैसी ने लिखा कि ये लोग उसी विचारधारा के हैं और मुस्लिमों की प्रतिष्ठा ‘हिंदूवादी गुंडों’ द्वारा छीने जा रहे हैं। इसी तरह ज़ुबैर ने भी इस खबर को शेयर कर झूठ फैलाया। लेकिन, जब पुलिस ने कल्लू और आदिल नाम के आरोपितों को इस मामले में गिरफ्तार किया तो ज़ुबैर ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और सिर्फ इसे ‘गाजियाबाद पुलिस से ताज़ा अपडेट’ करार दिया। लेकिन, आरिफ और मुशाहिद का नाम छिपा लिया।

गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में सच्चाई बताई है। पुलिस ने बताया कि ये घटना जून 5, 2021 की है, जिसके बारे में पुलिस के समक्ष 2 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जब पुलिस ने जाँच की तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था। वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए।

वहाँ पर बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता है। आरोपितों का कहना है उसके ताबीज से उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा। अब्दुल समद गाँव में कई लोगों को ताबीज दे चुका था। आरोपित उसे पहले से ही जानते थे। पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपित पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। कल्लू और आदिल भी गिरफ्तार कर लिए गए। अन्य अभियुक्तों की जल्द गिरफ़्तारी का आश्वासन भी पुलिस ने दिया है।

ToolKit पर कॉन्ग्रेस को हाई कोर्ट का झटका: रमन सिंह, संबित पात्रा के खिलाफ जाँच रोकी, कहा- राजनीतिक दुर्भावना से FIR

टूलकिट (ToolKit) मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमन सिंह तथा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के खिलाफ जाँच पर रोक लगा दी है। दोनों ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को निरस्त करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

कॉन्ग्रेस की छात्र ईकाई NSUI के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा की शिकायत पर रायपुर सिविल लाइन पुलिस ने 19 मई को एफआईआर दर्ज की थी। सिंह और पात्रा को पूछताछ का नोटिस भी भेजा गया था। शर्मा ने आरोप लगाया था कि संबित पात्रा कॉन्ग्रेस के लेटरहेड के माध्यम से फर्जी दस्तावेज शेयर कर रहे हैं और टूलकिट के बहाने कॉन्ग्रेस पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। वहीं रमन सिंह पर समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न करने का आरोप लगाया गया था।

हाई कोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने सुनवाई करते हुए कहा कि दोनों के खिलाफ एफआईआर दुर्भावना और राजनीतिक द्वेष के कारण दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा, “तथ्यों और प्राथमिकी के अवलोकन के बाद प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता के खिलाफ दुर्भावना या राजनीतिक द्वेष के कारण कार्यवाही की गई है।” इस आधार पर अदालत ने दर्ज एफआईआर के आधार पर जाँच जारी रखने पर रोक लगा दी। अदालत ने माना कि जाँच जारी रखना कानून का दुरुपयोग होगा।

एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष की शिकायत के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 505 (सार्वजनिक शरारत), 469 (जालसाजी) और 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा) के तहत मामला दर्ज किया था।

हाई कोर्ट ने कहा कि धारा 504 और 505 के तहत अपराध नहीं बनता क्योंकि ट्वीट से सार्वजनिक शांति प्रभावित नहीं हुई। धारा 469 के तहत जालसाजी के आरोप को लेकर कहा कि जो दस्तावेज इन्होंने ट्वीट किए थे वे पहले से ही पब्लिक डोमेन में थे। अब मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों कॉन्ग्रेस का कथित टूलकिट लीक हुआ था। इसमें कोरोना वायरस से पैदा हालात का फायदा उठाकर केंद्र की मोदी सरकार और उसके मंत्रियों को बदनाम करने के दिशा-निर्देश दिए गए थे। साथ ही विदेशी मीडिया से साँठ-गाँठ की बातें भी कही गई थी। इसमें कुंभ को भी बदनाम करने की साजिश रची गई थी। कॉन्ग्रेस का दावा था कि ये दस्तावेज जाली हैं। उसने दिल्ली पुलिस से भी शिकायत की थी जो बाद में यह कहते हुए वापस ले ली गई कि वह छत्तीसगढ़ में मामले को आगे बढ़ाएगी।

टूलकिट से संबंधित भाजपा नेता के ट्वीट पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग लगाने के बाद दिल्ली पुलिस ने ट्विटर को नोटिस भेजा था। पूछताछ के लिए पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दिल्ली और गुरुग्राम स्थित दफ्तरों में भी दबिश दी थी। दिल्ली पुलिस ने Twitter से पूछा था कि उसके पास टूलकिट को लेकर क्या सूचनाएँ हैं और किन तथ्यों के आधार पर उसने इन्हें ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ करार दिया।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा किए गए जमीन के सौदे की पूरी सच्चाई, AAP के खोखले दावों की पूरी पड़ताल

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने मार्च 2021 में अपने महासचिव चंपत राय के जरिए कुछ अतिरिक्त भूमि को खरीदने के लिए समझौता किया था, ताकि उस भूमि पर भविष्य में मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों के लिए उचित सुविधाओं का निर्माण किया जा सके। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित भूमि को ट्रस्ट के हवाले कर दिया था, लेकिन ट्रस्ट ने भक्तों के लिए सुविधाओं का विस्तार करने के लिए अतिरिक्त भूमि के अधिग्रहण का निर्णय लिया। खुद चंपत राय लगातार ऑन रिकॉर्ड यह बात कहते आ रहे हैं कि मंदिर के आसपास की अतिरिक्त भूमि को भी वास्तु शास्त्र और भक्तों की सुविधाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से अधिग्रहीत किया जा रहा है।

इस संबंध में एक विशेष मामले की बात करते हैं। दरअसल, ट्रस्ट के द्वारा सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी से 1.208 हैक्टेयर जमीन 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी गई। अंसारी तथा अन्य लोगों ने यह जमीन कुसुम पाठक से 2 करोड़ रुपए में खरीदी थी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा इस जमीन को अयोध्या रेलवे स्टेशन के नजदीक भक्तों की सुविधाओं के विस्तार के उद्देश्य से खरीदा गया था। इसी जमीन को लेकर पूरा विवाद पैदा किया जा रहा है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब आम आदमी पार्टी (आप) ने कुसुम पाठक और अंसारी के बीच हुए लेन-देन के बिक्रीनामे और ट्रस्ट एवं अंसारी के बीच हुए एग्रीमेंट को दिखाकर ट्रस्ट द्वारा मंदिर के लिए भूमि खरीद में घोटाले का आरोप लगाया था। आप नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने महासचिव चंपत राय के माध्यम से अत्यधिक ऊँचे दाम पर जमीन खरीदी है। समाजवादी पार्टी के नेता पवन पाण्डेय ने भी कुछ ऐसा ही आरोप लगाया।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री के समय जमीन की कीमत लगभग 2 करोड़ रुपए थी, लेकिन ट्रस्ट ने 5 मिनट बाद ही इसके लिए 18.5 करोड़ रुपए का भुगतान किया। चूँकि भुगतान चंपत राय के नाम से हुआ इसलिए ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा, ऋषिकेश उपाध्याय और अयोध्या के महापौर इस रजिस्ट्री के गवाह थे। संजय सिंह ने इस मामले में सीबीआई और ईडी से जाँच की माँग की है।

हालाँकि, पूरे तथ्यों और दस्तावेजों को ध्यान से देखने पर यह पता चलता है कि जैसा आप के नेता कह रहे हैं वैसा कोई घोटाला हुआ ही नहीं। आगे आम आदमी पार्टी के द्वारा लगाए गए कुछ आरोप और ऑपइंडिया के द्वारा प्राप्त हुए दस्तावेजों के आधार पर उन आरोपों के तथ्यात्मक जवाब हैं।

दावा : अंसारी और अन्य लोगों ने कुसुम से 18 मार्च 2021 को जमीन खरीदी और 15 मिनट बाद ही राम मंदिर ट्रस्ट को बेच दी थी। सिर्फ 15 मिनट में ही जमीन के दाम कई गुणा कैसे हो गए?

सच्चाई : घोटाले के आरोपों के बीज उन दस्तावेजों (ऊपर जानकारी दी गई है) से पड़े जो AAP ने दिखाए। AAP के अनुसार दोनों दस्तावेज एक ही दिन में सिर्फ 15 मिनट के अंदर ही बने इसलिए जमीन की कीमत का 2 करोड़ रुपए से 18.5 करोड़ रुपए होना एक घोटाला है। हालाँकि, ऐसा नहीं है। दोनों दस्तावेजों के एक ही दिन बनने का मतलब हमेशा यह नहीं है कि बिक्री भी एक ही दिन हुई है।

इस मामले में सबसे पहले कुसुम पाठक द्वारा अपनी जमीन अंसारी एवं अन्य को बेचने का एग्रीमेंट 17 सितंबर 2019 को हुआ। यह सौदा 2 करोड़ रुपए में तय हुआ और कुसुम को 50 लाख रुपए अंसारी से एडवांस में प्राप्त हुए। यह एग्रीमेंट पूरी तरह से रजिस्टर्ड है।

कुसुम और अंसारी एवं अन्य के बीच बिक्री एग्रीमेंट
कुसुम और अंसारी के बीच बिक्री एग्रीमेंट
कुसुम और अंसारी एवं अन्य के बीच बिक्री एग्रीमेंट
कुसुम और अंसारी के बीच बिक्री एग्रीमेंट
कुसुम और अंसारी के बीच बिक्रीनामा
मंदिर ट्रस्ट और अंसारी के बीच बिक्री एग्रीमेंट

एग्रीमेंट के मुताबिक अंसारी को बाकी बचे डेढ़ करोड़ रुपए चुकता करने के लिए सितंबर 2022 तक का समय दिया गया है। अब चूँकि कुसुम द्वारा एडवांस ले लिया गया था और एग्रीमेंट भी पूरा हो गया था अतः कुसुम इस समझौते से बाहर नहीं निकल सकती थी। जमीनों के दाम 09 नवंबर 2019 को राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तेजी से बढ़े लेकिन कुसुम अपनी जमीन 2 करोड़ रुपए में बेचने के लिए बाध्य थी।

इसके बाद ट्रस्ट ने 2021 में जमीन खरीदने का फैसला किया। इसके लिए ट्रस्ट ने अंसारी से 2019 में हुए समझौते को पूरा करने का अनुरोध किया। इसके बाद 18 मार्च 2021 को कुसुम और अंसारी के बीच सौदा पूरा हुआ। सौदा पूरा होने के तुरंत बाद ही अंसारी ने जमीन मंदिर ट्रस्ट को बेच दी। इस सौदे के द्वारा अंसारी के नाम हुई जमीन को ट्रस्ट ने अपने नाम कर लिया।

दावा : बिक्रीनामा और बिक्री समझौते के बीच क्या अंतर है? दोनों के बीच अंतर बताना घोटाले को छुपाने का प्रयास है।

सच्चाई : इस पूरी खरीद-बिक्री को लेकर कई दस्तावेजों का उपयोग करके भ्रम फैलाया गया। पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने ट्विटर पर यह दावा किया कि अयोध्या के महापौर ने यह स्वीकार किया है कि एक ही जमीन की दिन में दो बार रजिस्ट्री कराई गई।  

दोनों दस्तावेजों के मध्य बहुत बड़ा अंतर है। बिक्री समझौते के अंतर्गत संपत्ति का हस्तांतरण भविष्य की तारीख पर सुनिश्चित किया जाता है। जबकि बिक्रीनामे के अंतर्गत संपत्ति के अधिकार तुरंत ही हस्तांतरित हो जाते हैं। इसलिए खरीददार और विक्रेता के मध्य समझौते के आधार पर ही ये दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। 

अब यह ध्यान देने योग्य बात है कि कुसुम और अंसारी के बीच 2019 में बिक्री समझौता हुआ था न कि बिक्रीनामा बनाया गया था। इस एग्रीमेंट में बिक्री की रकम, एडवांस और पूरी कीमत चुकता करने की समय सीमा दी गई थी। यही कारण था कि 2021 में अंसारी से जमीन खरीदने से पहले यह तय हुआ कि जमीन का मालिकाना कुसुम से अंसारी को हस्तांतरित किया जाएगा। दोनों के बीच 2019 में हुआ बिक्री समझौता उस वक्त निरस्त हो गया जब 18 मार्च 2021 को दोनों के बीच जमीन के सौदे को लेकर बिक्रीनामा तैयार कर दिया गया। इसके बाद जमीन का मालिकाना हक़ अंसारी को दे दिया गया।

अंसारी को जमीन का मालिकाना मिलने के बाद मंदिर ट्रस्ट और अंसारी के बीच बिक्री समझौता हुआ। अंसारी ने जमीन को 18.5 करोड़ रुपए में ट्रस्ट को बेचने की सहमति जताई। यह कीमत जमीन के वर्तमान मूल्य पर आधारित है। ट्रस्ट और अंसारी के बीच फिलहल कोई बिक्रीनामा नहीं बना है।

दावा : 2019 में जमीन का दाम 2 करोड़ रुपए था, लेकिन 2021 में यह 18 करोड़ हो गया, यह घोटाला ही है क्योंकि जमीन का दाम दो सालों में इतना नहीं बढ़ सकता है।

सच्चाई : 09 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट में हिंदुओं के पक्ष में फैसला आया और अयोध्या में 67 एकड़ की विवादित भूमि को हिंदुओं को दे दिया गया। इसके बाद राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया और इस कार्य के लिए ट्रस्ट का गठन भी किया गया। इसके बाद ही पूरे अयोध्या में जमीन के दाम बढ़ने शुरू हो गए थे। दिसंबर 2019 में ही फोर्ब्स ने अयोध्या में जमीन के दामों में हुई बढ़ोत्तरी के संबंध में रिपोर्ट जारी की थी जिसमें किसी प्रॉपर्टी डीलर के हवाले से कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जमीन के दाम लगभग 6 गुणा तक बढ़ गए हैं। रिपोर्ट में प्रॉपर्टी डीलर ने बताया कि प्रस्तावित राम मंदिर के 4 किमी के दायरे में ही जमीनों के दाम तिगुने हो चुके हैं। जो जमीन 400 रुपए वर्ग फुट बिकती थी वह अब 1200 रुपए वर्ग फुट बिकने लगी थी।

यहाँ यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण के समय सर्किल रेट पर 4 गुणा दाम दिया जाता है। AAP के द्वारा दिए गए दस्तावेजों में जमीन का सर्किल रेट 5.79 करोड़ रुपए है। अतः सरकार के द्वारा तय रेट के हिसाब से इस जमीन का मूल्य लगभग 23 करोड़ रुपए होता है लेकिन मंदिर ट्रस्ट ने 3 गुणा कीमत पर ही जमीन का सौदा किया है जो बाजार दर से भी कम है।

दावा : ट्रस्ट ने इतनी जल्दबाजी क्यों की? क्यों ट्रस्ट ने अंसारी एवं अन्य को इतना लाभ कमाने दिया?

सच्चाई : यह सभी जानते हैं कि लगभग 500 वर्षों की लड़ाई के बाद अयोध्या में हिंदुओं के सबसे पवित्र धार्मिक स्थान पर मंदिर बनने का रास्ता साफ हुआ। इसलिए यह जाहिर है कि कोई भी दोबारा इस मुद्दे पर विवाद नहीं चाहता है।

17 सितंबर 2019 को बिक्री समझौता हुआ और मंदिर ट्रस्ट और अंसारी के बीच बिक्री 18 मार्च 2021 को हुई। इस समय अंतराल में अंसारी के पिता ने जमीन पर अपना दावा ठोक दिया। इसलिए मंदिर ट्रस्ट जमीन की खरीदी के बारे में पूरी पारदर्शिता चाहता था और उसका यही उद्देश्य था कि किसी भी प्रकार का कोई विवाद शेष न रह जाए।

अब यहाँ समझना चाहिए कि मंदिर ट्रस्ट जल्दबाजी में क्यों था, क्योंकि अभी ही इतने सालों से चले आ रहे मामले का निपटारा हुआ था और जमीन के एक छोटे से टुकड़े के लिए ट्रस्ट फिर से मुकदमे में नहीं उलझना चाहता था। 

दावा : ट्रस्ट अंसारी एवं अन्य के स्थान पर सस्ते दाम पर सीधे ही कुसुम से जमीन खरीद सकता था।

सच्चाई : ट्रस्ट कुसुम से सीधे ही जमीन खरीद सकता था जब कुसुम और ट्रस्ट के बीच समझौता हुआ होता लेकिन कुसुम ने एग्रीमेंट के तहत पहले ही अंसारी से 50 लाख रुपए एडवांस के तहत ले रखे थे। अब यदि कुसुम अंसारी से किए गए अपने एग्रीमेंट से पीछे हटने का निर्णय करती तो उसे एक न्यायिक प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता और साथ ही वर्तमान बाजार मूल्य पर अंसारी को मुआवजा भी देना पड़ता। चूँकि कुसुम न्यायिक तौर पर अंसारी को 2 करोड़ रुपए में जमीन बेचने के लिए बाध्य थी इसलिए ट्रस्ट के लिए यह संभव नहीं था।

यदि इसके बाद भी ट्रस्ट कुसुम से जमीन खरीदने की कोशिश करता तो यह एक विवाद का मामला बन जाता जो ट्रस्ट नहीं चाहता था।

वैसे भी किसी भी कीमत पर कुसुम अपनी जमीन को ट्रस्ट को 2 करोड़ रुपए में नहीं बेच सकती थी क्योंकि जमीन का सर्किल रेट 5.79 करोड़ रुपए है और इससे कम में सौदा किया जाना स्टाम्प ड्यूटी का उल्लंघन ही कहलाएगा।

अब भले ही कुछ पत्रकार और AAP नेता इस मामले में घोटाले की बात करें लेकिन वास्तविकता यह है कि इस पूरे सौदे के दौरान पारदर्शिता बरती गई और जो प्रक्रिया अपनाई गई वह पूरे नियम कानूनों के हिसाब से ही थी। इस सौदे से जुड़े पूरे दस्तावेज उत्तर प्रदेश सरकार के पास उपलब्ध हैं जिन्हें कोई भी चेक कर सकता है। लगभग 500 सालों बाद आज जब हिन्दू अपने आराध्य भगवान राम के भव्य मंदिर को बनता हुआ देख पा रहे हैं तब AAP और सपा जैसी पार्टियों के नेता घोटाले का आरोप लगाकर राम मंदिर निर्माण में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।

नोट: इंग्लिश में मूल रिपोर्ट इस लिंक पर पढ़ी जा सकती है।

(वकील अभिषेक द्विवेदी द्वारा प्राप्त इनपुट के साथ )

2030 तक 2.6 करोड़ एकड़ बंजर जमीन का होगा कायाकल्प, 10 साल में बढ़ा 30 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र: UN वर्चुअल संवाद में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को (14 जून 2021) को संयुक्त राष्ट्र में मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे पर उच्च स्तरीय वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने इन मुद्दों से निपटने के लिए भारत द्वारा अपनाए जा रहे हैं उपायों पर भी चर्चा की।

पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (UNCCD) के दलों के सम्मेलन के 14वें सत्र के अध्यक्ष हैं। सितंबर 2019 में पीएम मोदी नई दिल्ली में यूएनसीसीडी-सीओपी के उच्च स्तरीय 14वें सत्र का शुभारंभ कर चुके हैं।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के सभी पक्षों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में हमने हमेशा भूमि को महत्व दिया है और पवित्र भूमि को अपनी माँ के रूप में मानते हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भूमि क्षरण के मुद्दों को उजागर करने का बीड़ा उठाया है।

पीएम मोदी ने वर्चुअली उच्च स्तरीय कार्यक्रम में कहा कि भूमि जीवन और आजीविका के लिए मूलभूत अंग है और सभी को इसे समझने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, ”दुख की बात है कि भूमि क्षरण आज दुनिया के दो तिहाई हिस्से को प्रभावित करता है। अगर इसे अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो यह हमारे समाजों, अर्थव्यवस्थाओं, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता की नींव को ही नष्ट कर देगा।”

पिछले 10 साल में लगभग 30 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र जोड़ा गया

उन्होंने कहा कि भारत में पिछले 10 साल में लगभग 30 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र जोड़ा गया है। इसने संयुक्त वन क्षेत्र को देश के कुल क्षेत्रफल के लगभग 1/4 भाग तक बढ़ा दिया है। हम भूमि क्षरण तटस्थता की अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को प्राप्त करने की राह पर हैं।

भारत 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को बहाल करने पर काम कर रहा

उन्होंने कहा कि हम 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को बहाल करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। यह 2.5-3 बिलियन टन CO2 के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक को प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता में योगदान देगा। पीएम ने कहा कि जमीन सभी के जीवन और आजीविका के लिए जरूरी है। हम सभी समझते हैं कि जीवन का जाल एक दूसरे से जुड़े हुए तंत्र के रूप में कार्य करता है।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि वैश्विक रूप से पृथ्वी के भूमि क्षेत्र का दो अरब हेक्टेयर से ज्यादा के क्षेत्र का क्षरण हो गया है, जिसमें कृषि भूमि का आधे से ज्यादा हिस्सा शामिल है। अगर हमने मृदा का प्रबंधन नहीं किया तो 2050 तक 90 प्रतिशत से अधिक भूमि का अवक्रमण (Land degradation) हो सकता है।