Home Blog Page 3711

‘काली मिर्च, अदरक और शहद… भारतीय स्टूडेंट ने खोजा कोरोना का इलाज, WHO ने दी मान्यता’: वायरल नुस्खों में कितना दम

कोरोना काल में सोशल मीडिया पर तरह-तरह के घरेलू नुस्खे वायरल होने का सिलसिला अब भी जारी है। कभी बताया जाता है कि पान के पत्ते खाकर कोरोना से बचा जा सकता है तो कभी कहते हैं कि कच्चे प्याज का सेंधा नमक के साथ सेवन आपको कोरोना से सुरक्षित कर सकता है।

इन नए-नए नुस्खों को इजाद करने वाले स्रोत का पता लगाना तो संभव नहीं है। लेकिन इनकी हकीकत से रूबरू हुआ जा सकता है। इसलिए प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्टचेक टीम ने इन वायरल संदेशों की सच्चाई बताई है। पीआईबी फैक्टचेक के ट्विटर हैंडल पर एक छोटी सी क्लिप शेयर करते हुए बताया गया है कि इन फर्जी घरेलू नुस्खों से खुद को बचाना है।

वीडियो में एक संदेश दिखाया गया है जिसमें लिखा है कि खूब चाय पीने और पिलाने से कोरोना संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। पीआईबी की वीडियो बताती है कि इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि चाय के सेवन से कोविड-19 के संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

अगली अफवाह है कि पान के पत्ते का सेवन करने से कोरोना वायरस से बचा जा सकता है। इस पर फैक्टचेक टीम का दावा है कि पान के पत्ते का सेवन कैसे भी करके कोरोना से बचाने में कारगर नहीं है।

फिर, काली मिर्च, अदरक और शहद को लेकर भी एक अफवाह उड़ी कि भारतीय छात्र ने कोरोना संक्रमण का घेरलू इलाज ढूँढा है और इसे WHO ने भी स्वीकृति दे दी है। हालाँकि सच्चाई ये है कि काली मिर्च, अदरक और शहद के चलते कोविड-19 का उपचार नहीं हो सकता।

एक वीडियो सोशल मीडिया पर पिछले दिनों वायरल हुई थी जिसमें बताया गया था कि नाक में नींबू का रस डालने से कोरोना वारयस खत्म होता है। लेकिन हकीकत यह है कि नाक में नींबू का रस डालने से कोरोना खत्म होता है इसके वैज्ञानिक प्रमाण कहीं भी नहीं है। हाँ, इसके उपयोग से नकसीर की समस्या बंद हो जाती है।

इसके बाद, कच्चे प्याज के साथ सेंधा नमक के सेवन से कोरोना पॉजिटिव लोग नेगेटिव हो रहे हैं- ये दावा पिछले दिनों सोशल मीडिया पर खूब घूमा। इस संदेश में ये भी कहा गया कि ये नुस्खा एकदम सच है और यदि यकीन न हो तो लोग इसे करके देखें। इसके सेवन से ही कोरोना मर जाएगा।

पीआईबी इस दावे पर भी बताता है कि कच्चे प्याज और सेंधा नमक के सेवन से कोरोना से ठीक होने के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसी तरह फिटकरी का पानी पीने से भी कोरोना से बचाव के कोई सबूत नहीं मिलते।

पीआईबी ने अपने ट्वीट में बताया है कि कोरोना के उपचार के लिए चिकित्सकीय परामर्श ज़रूरी है। ऐसे घरेलू नुस्ख़े कभी-कभी सहायक होने की जगह हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए इन्हें आजमाने से बचें।

‘बीफ खाना हमारा संवैधानिक अधिकार’: लक्षद्वीप के MP मोहम्मद फैजल, भास्कर को इंटरव्यू में विकास कार्यों पर बरसे

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने केंद्र शासित प्रदेश में कुछ प्रशासनिक सुधारों को मँजूरी दी है। कट्टरपंथी और कम्युनिस्ट इसका विरोध कर रहे हैं। मुस्लिम बहुल द्वीप के सांसद पीपी मोहम्मद फैजल ने भी इन सुधारों को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बीफ खाना यहाँ के लोगों का संवैधानिक अधिकार है। साथ ही कहा है कि 15 मीटर चौड़ी सड़कें और खनन की योजना बनाई जा रही है, जिससे लक्षद्वीप तबाह हो जाएगा।

दैनिक भास्कर को दिए गए इंटरव्यू में फैजल ने न केवल इन कानूनों को लक्षद्वीप का विरोधी बताया है, बल्कि इन प्रशासनिक सुधार कानूनों के पीछे प्रशासक प्रफुल्ल पटेल का निजी हित बताया है।

एनसीपी सांसद पीपी मोहम्मद फैजल ने लक्षद्वीप डेवलपमेंट अथॉरिटी पर निशाना साधते हुए कहा है कि पटेल ने जो दमन एवं दीव में किया, वही यहाँ भी करने का प्रयास कर रहे हैं। अपने निजी हित वाले कॉन्ट्रैक्टर को काम देने के लिए वे लक्षद्वीप में विकास की बाते कर रहे हैं। फैजल के अनुसार अपनी पसंद के ठेकेदारों और कार्पोरेट कंपनियों को सहायता पहुँचाने के लिए पटेल ऐसे नियम लक्षद्वीप में लागू कर रहे हैं।

बीफ बैन के सवाल पर फैजल ने कहा कि बीफ को बैन करने का निर्णय यहाँ के लोगों की ईटिंग हैबिट में दखलअंदाजी की कोशिश है। फैजल ने कहा, “लक्षद्वीप में लोग इतने सालों से बीफ खाते आ रहे हैं। हमारी ईटिंग हैबिट हमारा अधिकार है। यहाँ के बच्चों के मिड डे मील से नॉनवेज निकाला जा रहा है। यह हमारे संवैधानिक अधिकारों पर चोट है। यह सही नहीं है।“

फैजल ने पंचायत में दो बच्चों के नियम को लागू करने और शराब की बिक्री प्रारंभ करने का भी विरोध किया। फैजल ने कहा कि जहाँ शराब बंद है वहाँ शराब की बिक्री शुरू करने की क्या जरूरत है? फैजल ने यह भी कहा कि विकास के लिए पंचायत से दो बच्चों से अधिक वाले लोगों को बाहर करने की क्या जरूरत है?

फैजल ने लक्षद्वीप की कानून-व्यवस्था में सुधार का विरोध किया। फैजल के अनुसार ये सुधार कानून नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को जेल में बंद करना है। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप में कानून सुधार की बात इसलिए की जा रही है ताकि सरकार का विरोध करने वालों को बिना कारण जेल में डाला जा सके।  

फैजल से पहले लक्षद्वीप की एक्टर व मॉडल आयशा सुल्ताना ने एक मलयालम न्यूज चैनल पर डिबेट के दौरान केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। मीडिया वन टीवी पर सुल्ताना ने कहा कि केंद्र सरकार कोरोना को स्थानीय लोगों के खिलाफ़ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा, “केंद्र द्वारा ध्यान देने से पहले, लक्षद्वीप में COVID-19 के 0 मामले थे और अब हर दिन 100 से ज्यादा मामले आ रहे हैं। केंद्र ने जो (कोरोना) यहाँ तैनात किया है वह बॉयोवेपन है। मैं साफ-साफ कहती हूँ कि केंद्र सरकार ने लोगों के ख़िलाफ़ बॉयोवेपन तैनात किया है।”

इससे पहले मलयाली फिल्म अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन ने सुधारों का विरोध कर रहे लक्षद्वीप के मुस्लिमों का समर्थन किया था। पृथ्वीराज ने कहा था कि लक्षद्वीप के लोगों को सुनने की जरूरत है और वे जो चाहते हैं उससे बेहतर कोई नहीं जानता।

हालाँकि लक्षद्वीप में किए जा रहे सुधारों का विरोध यहीं तक सीमित नहीं है। राहुल गाँधी से लेकर केरल और तमिलनाडु के कई नेताओं ने भी लक्षद्वीप के प्रशासनिक सुधारों का विरोध किया। ऑर्गनाइज़र की रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ इस्लामी संगठन प्रशासन के खिलाफ ‘विरोध’ के लिए कमर कस रहे हैं, सीपीआईएम नेता और राज्यसभा सांसद एलामनम करीम ने प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को पत्र लिखकर लक्षद्वीप से उनको वापस बुलाने का आग्रह किया।

हालाँकि लक्षद्वीप में लागू किए जाने वाले इन सुधार कानूनों के विषय में सरकार पहले ही यह बता चुकी है कि इन कानूनों का मकसद लक्षद्वीप का विकास करना है, जैसे मालदीव ने अपने क्षेत्र का विकास किया। लेकिन चूँकि लक्षद्वीप की 96% जनसंख्या मुस्लिम समुदाय की है अतः तुष्टिकरण के ईंधन से चलने वाली राजनीति में लक्षद्वीप में किए जा रहे सुधारों का विरोध निश्चित ही है।

सोनू शुक्ला बन इमरान ने भजन गायिका को फँसाया: राजू बना दो बच्चों का बाप अराफात, हिंदू लड़की का किया यौन शोषण

उत्तर प्रदेश से लव-जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद) का नया मामला सामने आया है। यह घटना कुशीनगर जिले के हाटा थाने की है। यहाँ एक भजन गायिका से इमरान हाशमी नाम का युवक सोनू शुक्ला बनकर मिला और बाद में दुष्कर्म कर उसकी वीडियो बना ली। लड़की ने दूरी बनानी शुरू की, तो इमरान ने सोशल मीडिया पर उसकी अश्लील तस्वीरें डाल दीं। साथ ही उस पर धर्मांतरण कर निकाह का दबाव डालने लगा।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह एक जागरण परिवार में भजन गायिका है। उसी जागरण टीम में ऑर्गन बजाने वाला इमरान नाम का युवक कुछ दिन पहले अपना नाम सोनू शुक्ला बताकर मिला और धीरे-धीरे उसे प्रेम जाल में फँसाता गया। कुछ दिन बाद इमरान लड़की को अपना घर बताकर एक किराए के कमरे पर ले गया। जब लड़की ने वहाँ मुस्लिम समुदाय से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखी तो वह हैरान रह गई। लड़की ने इसे लेकर सवाल पूछा, लेकिन युवक ने उसे कहा कि वो पहले खाना खाए फिर सब बताएगा।

युवक के इरादों से अंजान लड़की ने उस कमरे पर खाना खाया और इसके बाद वह बेहोश हो गई। युवक ने खाने में नशीला पदार्थ मिला रखा था। युवती के बेहोश होने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया और पूरे कारनामे की वीडियो बना ली गई। होश में आने के बाद जब लड़की ने उस युवक से कभी न मिलने की बात कही तो उसे पीटा गया और दुष्कर्म का वीडियो दिखा उसे वायरल करने की धमकी दी गई। इसके बाद इमरान लड़की पर धर्म परिवर्तन करके निकाह करने का दबाव बनाता रहा और तस्वीरों के बूते कई बार उसका रेप भी किया। 

बाद में उसके नाम का इस्तेमाल करके वह फेसबुक अकाउंट पर दूसरे लोगों से चैट करता और फोटोज भी अपलोड करता। युवती का आरोप है कि आरोपित ने उसकी माँग में जबरन सिंदूर भरकर फोटो खींची थी और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था। इतना ही नहीं, जब युवती की किसी और से सगाई हुई तो युवक ने उसकी तस्वीर फेसबुक पर अपलोड कर उसकी शादी तुड़वा दी। जब लड़की के परिजनों को पूरे मामले की जानकारी हुई तो मामला थाने पहुँचा और गुहार न सुने जाने पर एसपी सचिन्द्र पाटिल से इंसाफ दिलाने की माँग की गई। एसपी का इस संबंध में कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है। आरोपित को किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।

इसके अलावा झारखंड के बोकारो से भी एक ऐसा ही लव जिहाद का मामला सामने आया है। वहाँ 25 साल के अराफात ने हिंदू समाज की एक लड़की को अपना नाम राजू बताकर फँसाया और वहाँ उसका यौन शोषण किया। जब लड़की ने राजू उर्फ आराफात पर शादी के लिए दबाव बनाया, तब उसने सच्चाई उगली और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा।

अब इस मामले में त्वरित कार्रवाई के बाद आरोपित गिरफ्तार हो चुका है। लड़की का कहना है कि उसके दो दोस्तों ने उसका परिचय अराफात से कराया था। दोनों को मालूम था कि वह मुस्लिम है लेकिन ये बात उससे छुपाई गई। उसे ये भी नहीं पता चलने दिया कि वह शादीशुदा और दो बच्चों का बाप है। पुलिस इनकी भी तलाश कर रही है।

‘वो मेरा पति नहीं, मेरा कपड़ा-गहना रख लिया, रात में पैसे निकाल लिए… ये शादी नहीं लिव इन था’ – TMC सांसद नुसरत जहाँ

बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री नुसरत जहाँ ने कहा है कि कारोबारी निखिल जैन के साथ उनकी शादी तुर्की में हुई थी, जो भारतीय कानून के हिसाब से अमान्य है। ये पहली बार है जब निखिल जैन से अलग होने को लेकर उन्होंने चुप्पी तोड़ी है। नुसरत ने अपने बयान में कहा कि वो भारतीय सरजमीं पर हैं, इसीलिए ‘तुर्किश मैरिज रेगुलेशन’ के तहत ये शादी समारोह अमान्य है। साथ ही उन्होंने बताया कि ये एक इंटरफेथ मैरिज था, इसे भारत के ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ के तहत मान्यता नहीं दिलाई गई।

नॉर्थ 24 परगना के बसीरहाट से सांसद नुसरत जहाँ ने कहा कि अदालत के हिसाब से ये एक शादी नहीं, बल्कि लाइव इन रिलेशनशिप था – इसीलिए, तलाक का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने जानकारी दी कि दोनों काफी समय पहले ही अलग हो गए थे, लेकिन अपनी प्राइवेट लाइफ को खुद तक रखने की इच्छा के कारण उन्होंने इस पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा कि ‘अलग होने’ को आधार बना कर उनसे सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए।

31 वर्षीय तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता ने कहा कि ये कथित शादी वैध, कानूनी और मान्य नहीं है, इसीलिए कानून की नजर में ये शादी है ही नहीं। 7 पॉइंट्स में जारी किए गए बयान के दूसरे पॉइंट में उन्होंने कहा कि खाली समय बिताने के लिए या कामकाज के लिए वो कहाँ जाती हैं, इसकी चिंता उसे नहीं होनी चाहिए जिससे मैं अलग हो चुकी हूँ। उन्होंने निखिल की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उनके दावे के विपरीत उन्होंने हमेशा अपना खर्च खुद उठाया है।

तीसरे पॉइंट में नुसरत जहाँ ने कहा कि अपनी बहन की शिक्षा और परिवार का खर्च भी पहले दिन से ही उन्होंने अकेले ही उठाया है, क्योंकि ये उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने सबूतों का हवाला देते हुए कहा कि जिसके साथ वो रहती ही नहीं हैं, उसका क्रेडिट कार्ड रखने की भी उन्हें कोई ज़रूरत नहीं है तो वो ऐसा क्यों करेंगी? चौथे पॉइंट में उन्होंने आरोप लगाया कि ‘अमीर’ होने का दावा करने वाला ‘एक व्यक्ति’ कह रहा है कि मैंने उसका यूज किया।

इसका जवाब देते हुए नुसरत ने कहा कि अलग होने के बाद भी ‘उसी व्यक्ति’ ने गैर-कानूनी माध्यमों का इस्तेमाल कर उनके बैंक अकाउंट को अवैध रूप से एक्सेस कर के रात के समय उसमें से रुपए निकाले हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले की पुलिसिया शिकायत दर्ज कराई जाएगी और बैंक प्रशासन को इससे अवगत करा दिया गया है। नुसरत ने आरोप लगाया कि साथ रहने के वक़्त निखिल को उनके निवेदन के बाद उनके और पूरे परिवार के बैंक एकाउंट्स डिटेल्स सौंप दिए गए थे और बैंक में क्या किया जा रहा है, इसका किसी को पता नहीं था।

उन्होंने बिना नाम लिए आरोप लगाया कि निखिल जैन ने बिना उनकी जानकारी के उनके बैंक एकाउंट्स और उसके फंड्स का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि वो अब भी बैंक से इस सम्बन्ध में बात कर रही हैं और ज़रूरत पड़ने पर सबूत भी देंगी। पाँचवें पॉइंट में ‘योद्धा: द वॉरियर (2014)’ जैसे लोकप्रिय बंगाली फिल्म की अभिनेत्री ने कहा कि उनके कपड़े, आभूषण, पर्स और कुछ संपत्ति भी अब उनके पास नहीं रहा, सब ‘उसने’ रख लिया।

छठे पॉइंट में उन्होंने कहा कि किसी के अमीर होने का ये अर्थ नहीं है कि कोई खुद को विक्टिम प्रदर्शित करे और किसी महिला को नीचा दिखाए। नुसरत ने कहा कि उन्होंने कड़ी मेहनत कर के खुद की अपनी पहचान बनाई है, इसीलिए वो खुद की लाइमलाइट या फॉलोवर्स को किसी अन्य के साथ शेयर नहीं होने देंगी। अंतिम पॉइंट में नुसरत ने मीडिया से निवेदन किया कि वो ‘साधारण व्यक्ति’, जैसे कि कुछ लोग दावा करते हैं, से सवाल पूछ-पूछ कर उसे ‘हीरो’ न बनाए।

इससे पहले खबर आई थी कि टीएमसी सांसद और बंगाली एक्ट्रेस नुसरत जहाँ कथित तौर पर 6 महीने की प्रेग्नेंट हैं और अपने पहले बच्चे के जन्म का इंतजार कर रही हैं। हालाँकि न तो नुसरत और न ही उनकी टीम ने इस खबर की पुष्टि की है लेकिन उनकी प्रेग्नेंसी से जुड़ी खबर पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया में छाई है। लेकिन नुसरत के पति निखिल ने मीडिया से कहा है कि उन्हें नुसरत की प्रेग्नेंसी के बारे में कुछ नहीं पता है। उन्होंने नुसरत के बच्चे का पिता होने से भी इनकार किया। निखिल ने दावा किया कि नुसरत की प्रेग्नेंसी की खबर से वह खुद भी हैरान हैं।

BJP में जितिन प्रसाद, यूपी में कॉन्ग्रेस की ‘ब्राह्मण पॉलिटिक्स’ को तगड़ा झटका: सोनिया के वंशवाद से पिता भी लड़े थे

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता जितिन प्रसाद भाजपा में शामिल हो गए हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इसे बड़े फेरबदल के रूप में देखा जा रहा है। दोपहर में भाजपा मुख्यालय में जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने का कार्यक्रम हुआ। शाहजहाँपुर में अच्छी पैठ रखने वाले जितिन प्रसाद फ़िलहाल दिल्ली में ही थे।

इस अवसर पर जितिन प्रसाद ने कहा कि उनकी तीन पुश्तें कॉन्ग्रेस से जुड़ी रही हैं, इसीलिए उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद ये महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 8-10 वर्षों में उन्हें महसूस हुआ है कि एक ही पार्टी ऐसी है जो पूरी तरह राष्ट्रीय है और वो है भारतीय जनता पार्टी। जितिन प्रसाद ने कहा कि अन्य राजनीतिक दल क्षेत्रीय हैं, लेकिन भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है। उन्होंने कहा कि यही एक पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कठिन परिस्थिति में देशहित के लिए खड़े हैं।

गौर करने वाली बात है कि 47 वर्षीय जितिन प्रसाद कॉन्ग्रेस के उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने आलाकमान को पत्र लिख कर संगठन में चुनाव कराने और बदलाव की माँग की थी, जिसके बाद यूपी के ही कुछ कॉन्ग्रेस नेता उनके पीछे पड़ गए थे। जितिन प्रसाद को ब्राह्मणों के अधिकार के लिए आवाज़ उठाने के लिए भी जाना जाता है। हाल ही में उन्होंने जब ‘ब्रह्म चेतना संवाद’ कार्यक्रम की घोषणा की थी तो उनकी ही पार्टी ने खुद को इससे अलग कर लिया था।

भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद

कॉन्ग्रेस ने कहा था कि इससे पार्टी का कोई लेनादेना नहीं है और ये जितिन प्रसाद का निजी मसला है। जितिन प्रसाद 2004 में शाहजहाँपुर और 2009 में धौरहरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। ये क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े जिले लखीमपुर खेरी और सीतापुर में स्थित है। पहले देहरादून के दून स्कूल और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज शाहजहाँपुर ऑफ कॉमर्स से शिक्षा प्राप्त करने वाले जितिन यूपी के बड़े कॉन्ग्रेस नेता रहे जितेन्द्र प्रसाद के पुत्र हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी में बतौर उपाध्यक्ष काम करने वाले जितेन्द्र प्रसाद की बात करें तो भारत के दो प्रधानमंत्रियों के राजनीतिक सलाहकार रह चुके थे – राजीव गाँधी और पीवी नरसिंहा राव। 2001 में 62 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था। 2000 में उन्होंने सोनिया गाँधी के खिलाफ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार मिली थी। शाहजहाँपुर से 4 बार सांसद रहे जितेंद्र प्रसाद राज्यसभा और यूपी विधान परिषद के सदस्य भी रहे थे।

कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने अगस्त 2020 में ही ट्वीट कर के आरोप लगाया था कि यूपी कॉन्ग्रेस में जितिन प्रसाद को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है, वो भी आधिकारिक रूप से। उन्होंने तभी आगाह किया था कि कॉन्ग्रेस को अब भाजपा को निशाना बनाते हुए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करनी चाहिए, लेकिन वो अपनों को ही निशाना बनाने में व्यस्त है। आज उनकी चेतावनी का असर दिखा और एक बड़े नेता ने कॉन्ग्रेस का दामन छोड़ दिया।

जितिन प्रसाद को केंद्रीय केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भाजपा की सदस्यता दिलाई। यूपीए-2 में जितिन प्रसाद को पेट्रोलियम और सड़क-परिवहन जैसे अहम मंत्रालय की बतौर राज्य मंत्री जिम्मेदारी मिली थी। लेकिन, 2014 लोकसभा चुनाव में मिली हार ने उनको राजनीतिक गलियारे से किनारे के दिया था। प्रभारी प्रियंका गाँधी और प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू द्वारा गठित समितियों में उन्हें जगह नहीं दी गई थी।

कई बार सार्वजनिक रूप से भी उन्होंने पार्टी के रवैये के प्रति नाराजगी जताई थी। पार्टी की लखीमपुर खीरी यूनिट ने उन्हें निष्काषित करने का प्रस्ताव भी भेजा था। 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल में पार्टी का प्रभारी बना कर यूपी से दूर कर दिया गया था, जिससे वो नाराज थे। हालाँकि, तब उन्होंने भाजपा में शामिल होने वाले सवाल को ‘काल्पनिक’ करार दिया था। कभी उनके पिता ने कॉन्ग्रेस में वंशवाद को लेकर आवाज़ उठाई थी। ब्रेन हेमरेज के कारण उनकी मृत्यु हुई थी।

हिंदू मंदिरों की 47000 एकड़ जमीन गायब, 36 साल में किया गया यह खेल: हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से माँगा जवाब

मद्रास हाई कोर्ट ने लॉस्ट टेम्पल्स के मामले में बड़ा कदम उठाते हुए तमिलनाडु सरकार से कथित तौर पर गायब हो चुकी मंदिर की 47,000 एकड़ जमीन को लेकर स्पष्टीकरण माँगा है। 1984-85 के पॉलिसी नोट के मुताबिक यह जमीन 5.25 लाख एकड़ थी, जबकि 2019-20 के नोट में इसे केवल 4.78 लाख एकड़ बताया गया है।

मद्रास उच्च न्यायालय के जस्टिस एन किरुबाकरण और टीवी थमिलसेल्वी ने सरकारी वकील रिचर्ड विल्सन को ‘हिंदू रिलीजियस ऐंड चैरिटेबल एंडोमेंट्स डिपार्टमेंस’ की ओर से एक नोटिस को लेकर आगामी 5 जुलाई, 2021 तक इस मामले में एक जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। जजों ने स्पष्ट कहा कि दो पॉलिसी नोट का अध्ययन करने से ऐसा प्रतीत होता है कि 47,000 एकड़ जमीन गायब हुई है।

कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) को राज्य के भीतर ऐतिहासिक/पुरातात्विक महत्व के साथ सभी संरचनाओं, स्मारकों, मंदिरों, प्राचीन वस्तुओं की पहचान करने के लिए 17 सदस्यीय विरासत आयोग का गठन करने का आदेश भी दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने राज्य सरकार को इसके पर्यवेक्षण के साथ ही मदिरों या स्मारकों की मरम्मत का आदेश भी दिया है।

खास तौर पर कोर्ट ने हर मंदिर में स्ट्राँग रूम सहित मूर्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वीडियो सर्विलांस और सभी मूर्तियों के कम्प्यूटरीकृत डेटा समेत उनकी तस्वीरों की सुरक्षा के लिए निर्देश भी दिए।

जजों ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार को वर्ष 1984-85 की पॉलिसी नोट में दिए गए जमीनों के विवरण और नए नोट के विवरण और सर्वे के साथ एक जवाबी हलफनामा दायर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मानव संसाधन और सीई विभाग को इससे संबंधित जानकारी को जमा करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि इस बात की उम्मीद है कि इसके कब्जे की डिटेल्स उसी में होगी।

अदालत ने अंतरिम आदेश एक याचिका के आधार पर दिया है, जिससे मंदिर में पूजा और अनुष्ठान करने के अलावा संस्थानों को बनाए रखने के लिए किया जा सके।

28 बीवी, 135 बच्चे, 126 पोते-पोतियों के सामने 37वीं बार निकाह: Video वायरल

हमने राजा-महाराजाओं की कई शादियों के किस्से सुने हैं। हालाँकि, आज के वैज्ञानिक युग में कई ऐसे समाज हैं जहाँ बहुविवाह प्रचलित है। लेकिन यह 2-4 शादियों तक ही सीमित हैं। आधुनिक एवं सभ्य समाज इन्हें सहर्ष स्वीकार नहीं करता। लेकिन, इसी वैज्ञानिक युग में कोई व्यक्ति 37वीं शादी करे तो आश्चर्यचकित होना लाजमी है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक बुजुर्ग 37वीं शादी कर रहा है। बुजुर्ग की इस शादी में उसकी 28 पत्नियाँ, 135 बच्चे और 126 पोते-पोतियाँ भी शामिल हैं।

45 सेकंड की इस क्लिप को IPS अधिकारी रूपिन शर्मा ने ट्विटर पर साझा किया है। कैप्शन में शर्मा ने लिखा है, “सबसे बहादुर आदमी… जीवित। 28 पत्नियों, 135 बच्चों और 126 पोते-पोतियों के सामने 37वीं शादी।”

रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि यह वीडियो कब और कहाँ शूट किया गया है। इस वीडियो पर कई यूजर ने कमेंट किए हैं। एक ने लिखा है, “क्या खूब किस्मत है, यहाँ एक ही सँभालना मुश्किल है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “अभी तक एक शादी भी नई करने का हिम्मत है, ये 37वाँ वाह।” एक अन्य ने कहा है, “सिंगल तो देख कर RIP हो जाएँगे।”

इससे पहले, ताइवान के एक व्यक्ति ने एक ही महिला से चार बार शादी की और 37 दिनों की अवधि में उसे तीन बार तलाक दिया। ताइपे के इस बैंक क्लर्क की शादी पिछले साल 6 अप्रैल को हुई थी। शादी की छुट्टी खत्म हो जाने के बाद उसने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया और अगले दिन फिर उससे शादी कर ली, ताकि उसे छुट्टी मिल सके। इस तरह, वह कुल 32 दिनों में चार बार शादी करने में कामयाब रहा।

रोगी शेख इस्माइल की मौत के बाद भड़के परिजनों ने ऑन ड्यूटी डॉक्टर को पीटा, कपड़े फाड़े: बंगाल पुलिस ने नहीं की कोई गिरफ़्तारी

पश्चिम बंगाल के हुगली जिला अंतर्गत पांडुआ ग्रामीण अस्पताल में एक रोगी की मृत्यु के बाद उसके परिवार वालों और रिश्तेदारों ने डॉक्टर के साथ मारपीट की। इसके प्रतिवाद में अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों ने हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा की माँग करते हुए आंदोलन चला रहे हैं। इस घटना और डॉक्टरों की हड़ताल वजह से अन्य रोगियों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार (जून 7, 2021) के दिन अस्पताल में भर्ती शेख इस्माइल नामक एक युवक की मृत्यु हो गई। जब रोगी के परिवार वालों और रिश्तेदारों को उसकी मृत्यु का पता चला तो भारी संख्या में लोग अस्पताल पहुँचे और वहाँ तोड़फोड़ की और उस समय ड्यूटी पर उपस्थिति डॉक्टर शिव शंकर राय के साथ मारपीट की गई। घटना के विरोध में अस्पताल के डॉक्टर, नर्सों और अन्य स्वस्थ्य कर्मियों ने काम न करने का फैसला लेते हुए प्रशासन से हमलावरों की गिरफ्तारी की माँग रखी। 

घटना के 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस द्वारा अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। इधर अस्पताल के डॉक्टर, नर्स आउटर स्वास्थ्य कर्मियों ने हमलावरों की गिरफ्तारी के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए सरकार से अस्पताल परिसर में ही एक पुलिस कैंप बैठाने की माँग की है। अस्पताल के एक कर्मचारी के अनुसार, इस समय अस्पताल में OPD के साथ ही कई और विभाग बंद हैं और केवल  जरूरी सेवाएँ ही जारी हैं।

उक्त अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें छुट्टी भी नहीं रही, वो बिना रुके काम करते – फिर भी ऐसा व्यवहार किया जा रहा है। वहीं भाजपा ने इसका आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर लगाया है। पार्टी ने कहा कि ये राज्य में कानून-व्यवस्था की समस्या को दिखाता है, जहाँ एक प्रतिष्ठित डॉक्टर को भी गुंडों ने नहीं बख्शा। पार्टी ने आरोप लगाया कि पुलिस इस घटना की मूकदर्शक बनी रही। वहीं टीएमसी नेता सौगात रॉय ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार डॉक्टरों की देखभाल कर रही है।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि डॉक्टर के कपड़े फ़टे हुए हैं और कुछ लोग उनके साथ मारपीट कर रहे हैं। इधर अस्पताल में भर्ती रोगियों का आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मियों के काम न करने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटनाएँ हाल के दिनों में बढ़ गई हैं। हाल ही में आसाम के होजाई जिले में इसी तरह एक मृत रोगी गियाजुद्दीन के रिश्तेदारों द्वारा एक जूनियर डॉक्टर सेऊज कुमार सेनापति की नृशंसता के साथ पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

ऐसा होने के असम सरकार तुरंत हरकत में आई थी और मुख्यमंत्री हिमंत विस्व सरमा के आश्वासन के बाद हमलावरों की पहचान करके दूसरे दिन से ही उनकी गिरफ्तारी शुरू हो गई थी और अब तक उस केस में कुल 24 हमलवारों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि इस तरह की असभ्य हरकत को उनके प्रशासन द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने खुद कार्रवाई की निगरानी की थी।

पंजाब सलटा नहीं, राजस्थान-छत्तीसगढ़ में भी बगावत की चिंगारी: पायलट और ‘महाराज’ इस बार बिगाड़ देंगे कॉन्ग्रेस का गेम?

राजस्थान में 2020 में वो जून-जुलाई का ही महीना था, जब अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद सार्वजनिक हो गया था। सचिन पायलट को जुलाई 2020 में राज्य के उप-मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया था। तब उन्होंने सत्य के परेशान होने और पराजित न होने वाला ट्वीट भी किया था। अब इस साल में जून-जुलाई का महीना आते-आते सुगबुगाहट तेज़ हो रही है। राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार और कुछ राजनीतिक नियुक्तियाँ अटकी पड़ी हैं। इसे लेकर पायलट कैम्प ने सीएम गहलोत को अल्टीमेटम दिया है।

पायलट कैम्प ने कहा कि अगर मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियाँ नहीं की जाती हैं तो वो आगे फैसले लेने के लिए स्वतंत्र हैं। पिछले 2 दिन में सचिन पायलट के घर लगभग एक विधायकों की अलग-अलग बैठकें हुई हैं और उन्होंने अपने रुख से कॉन्ग्रेस आलाकमान को अवगत कराने का निर्णय लिया है। अगले महीने अध्यक्ष सोनिया गाँधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और महासचिव प्रियंका गाँधी से मिलने का समय भी माँगा जा सकता है।

ये सब ऐसे समय में हो रहा है, जब दौसा से लगातार 4 बार सांसद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट की पुण्यतिथि भी शुक्रवार (जून 11, 2021) को आने वाली है। कभी राज्य के सबसे बड़े गुर्जर नेता माने जाने वाले राजेश पायलट की पुण्यतिथि को उनके बेटे सचिन पायलट का खेमा शक्ति-प्रदर्शन के मौके के रूप में भी इस्तेमाल कर सकता है। सचिन पायलट जिला प्रमुख, प्रधान, स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों और जिला स्तर के कॉन्ग्रेस नेताओं से संपर्क में हैं।

उधर अशोक गहलोत के इंटेलिजेंस ब्यूरो ने उन्हें एक बार फिर से संभावित बगावत को लेकर आगाह किया है, जिसके बाद दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात से सटी सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है। आशंका जताई गई है कि सचिन पायलट फिर दूसरे प्रदेश में विधायकों के साथ जाकर डेरा जमा सकते हैं। वहीं इस बार गहलोत कैम्प के विधायकों के भी उनसे संपर्क में होने की बात कही जा रही है।

राजस्थान में इंटेलिजेंस ब्यूरो राज्य का कम और पार्टी के लिए ज्यादा काम करने के आरोपों के लिए जाना जाता है। पिछले साल भी राजस्थान में सचिन पायलट सहित उनके खेमे के विधायकों फोन टैप किए जाने का मामला सामने आया था। अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान में फ़ोन-टैपिंग की बात स्वीकार तो की, लेकिन बताया नहीं कि किसका। अब फिर सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल बगावत दबाने के लिए हो तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

गहलोत के विश्वस्त संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, राज्यमंत्री सुभाष गर्ग, विधानसभा में सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी और उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी को गहलोत कैम्प ने अपने विधायकों का मन टटोलने का काम सौंपा है। कुछ से फोन पर बात हुई, कुछ से व्यक्तिगत मुलाकात की गई। पायलट के विश्वस्त विधायक रमेश मीणा, मुरारी मीणा व वेदप्रकाश सोलंकी अपने खेमे के विधायकों को एकजुट करने में लगे हैं।

6 विधायक ऐसे हैं जो बसपा से कॉन्ग्रेस में आए थे। साथ ही 12 निर्दलीय विधायकों का भी सरकार को समर्थन है। सचिन पायलट खेमे की नजर इन सब पर है। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी अजय माकन से बातचीत कर सचिन पायलट खेमे ने पूछा है कि पंजाब में सक्रियता दिखाने वाला आलाकमान राजस्थान पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है। पंजाब के नेताओं से लगातार बैठक हुई, लेकिन राजस्थान के लिए बनाई गई समिति की एक बार भी बैठक नहीं हुई।

बता दें कि पंजाब में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ नवजोत सिंह सिद्धू ने मोर्चा खोल रखा है, जिसके बाद राज्य के सभी विधायकों को दिल्ली बुला कर उनसे बात की गई। खुद सीएम और सिद्धू को तलब किया गया। तीन सदस्यीय कमिटी ने सभी कैबिनेट मंत्रियों की भी राय ली। पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में उससे पहले सीएम अमरिंदर ने अपना खेमा मजबूत करने के लिए AAP के 3 विधायकों को भी अपने पाले में किया है।

पंजाब में तो अब पोस्टर वॉर भी शुरू हो गया है। सिद्धू के क्षेत्र अमृतसर में जहाँ उनके ‘गायब’ होने के पोस्टर लगे, सीएम अमरिंदर के गढ़ पटियाला में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। अब ‘कैप्टेन कौन’ पोस्टर के जवाब में ‘कैप्टेन एक ही होता है’ जैसे पोस्टर-वॉर चल रहे हैं। सिद्धू को उप-मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलों के बीच सीएम अमरिंदर के पक्ष में पोस्टर-बैनर लगा कर पार्टी आलाकमान को सन्देश दिया गया है।

छह बार विधायक रहे पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने मई में अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया था, जिसके बाद विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने कहा था कि केवल चौधरी ही पीड़ित नहीं हैं, बल्कि बहुत से विधायकों की ऐसी हालत है। उन्होंने कहा था कि कई विधायक अंदर ही अंदर घुट रहे हैं, लेकिन कई मजबूरी के कारण चुप हैं, चौधरी सहन नहीं कर सके तो वे खुलकर बोल गए। उन्होंने चौधरी को ईमानदार और स्वच्छ छवि का नेता बताते हुए कहा कि अशोक गहलोत की सरकार में कॉन्ग्रेस विधायकों की ही सुनवाई नहीं हो रही है।

सचिन पायलट खेमे के विधायक हेमाराम चौधरी, रमेश मीणा, पीआर मीणा, राकेश पारीक ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान दलित और अल्पसंख्यक विधायकों की आवाज दबाने का मुद्दा उठाया था। सोलंकी ने कहा था कि भाजपा सरकार में लाठियाँ खाने वाले आंदोलनकारी नेता परेशान हैं और तब 5 साल AC में बैठने वाले मजे ले रहे हैं। भाजपा भी कह रही है कि राजस्थान कॉन्ग्रेस की नाव में छेद हो गया है। खुद पायलट ने अपने एक हालिया बयान में कहा था कि विधायकों की बात सुनी जानी चाहिए।

खुद दलित समाज से आने वाले वेदप्रकाश सोलंकी ने कहा था कि दलित समाज जो कि कॉन्ग्रेस का मजबूत वोट बैंक है उसके बावजूद भी उस समाज से आने वाले मंत्रियों को महत्वपूर्ण समितियों में तवज्जोह नहीं देना समझ से परे है। किसी भी मंत्रिमंडलीय समिति में दो दलित मंत्रियों टीकाराम जूली और भजनलाल जाटव को शामिल नहीं किया गया है। पहली बार विधायक बनने वाले राष्ट्रीय लोकदल के सुभाष गर्ग को सीएम का खास बताते हुए इन फैसलों के लिए उन्हें भी दोषी ठहराया जा रहा है।

उधर छत्तीसगढ़ में सीएम भूपेश बघेल के ढाई साल पूरे हो गए हैं, जिसके बाद सरगुजा राजपरिवार के मुखिया टीएस सिंह देव ने कहा कि आलाकमान जैसी जिम्मेदारी देगा, निभाते रहेंगे। वो राज्य में स्वास्थ्य मंत्री हैं और सीएम पद के दावेदार भी। ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की चर्चा राज्य के सियासी महकमों में है। उन्होंने कहा कि राजनीति में कुछ भी लिखित नहीं होता है। लेकिन, साथ ही कहा कि छत्तीसगढ़, पंजाब नहीं है और ये अपने हिसाब से चलेगा।

डीजे, डांस, आतिशबाजी गैर इस्लामी, हुआ तो निकाह नहीं करवाएँगे उलेमा: लड़कियों से कहा- शरीयत के हिसाब से रहो

डीजे, डांस, दहेज, आतिशबाजी… उत्तर प्रदेश के उलेमाओं के एक संगठन ने इन सबको ‘गैर इस्लामी’ करार दिया है। साथ ही कहा है कि वे ऐसा निकाह नहीं करवाएँगे जिनमें ये सब होगा। यह फैसला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की स्वर तहसील के खेमपुर गाँव में ‘रज-ए-मोहम्मद मुस्तफा’ नामक इस्लामी संगठन ने शुक्रवार (4 जून 2021) को किया।

उलेमाओं के इस संगठन ने लड़कियों को शरीयत के मुताबिक जीवन जीने को कहा है। उनसे मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करने को भी कहा है। खेमपुर गाँव में हुई बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव पारित किया गया। फैसले की घोषणा शुक्रवार की नमाज के बाद की गई, जहाँ कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत पाँच लोग ही उपस्थित थे।

दहेज और डीजे डांस पार्टियों को ‘गैर-इस्लामी’ करार देते हुए मौलवियों की समिति ने कहा कि निकाह में जो भी इस फतवे को नहीं मानेगा उनके परिवार में किसी की अमृत होने पर भी मौलवी वहाँ दसवें, तीजे, बीसवें, चालीसवें और कफन-दफन तक में शामिल नहीं होंगे।

संगठन द्वारा लिए गए फैसले की निगरानी करने के लिए गाँव में एक कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी गाँव में होने वाले निकाह पर नजर रखेगी और उसकी रिपोर्ट उलेमाओं को देगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी के चेयरमैन नियाज अहमद ने कहा कि दहेज की लगातार बढ़ती माँग के कारण लड़कियों को दुल्हा नहीं मिल रहा था। वहीं खेमपुर गाँववकील मुहम्मद तारिक ने कहा, “गाँव के मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है।”

इससे पहले उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में इसी साल अप्रैल 2021 में ‘मरकज सुन्नी जमीयत उलेमा ए हिंद’ ने शादी समारोहों में दहेज और संगीत समारोह को गैर इस्लामी बताते हुए निकाह का बायकॉट करने का एलान किया था।

कमेटी के चेयरमैन मौलाना नजाम अली खान ने कहा था कि दहेज प्रथा के कारण समाज में लड़कियों की शादी नहीं हो पा रही थी। मुस्लिम बॉडी के संरक्षक मुफ्ती अब्दुल खालिक ने कहा था, “मिर्जापुर में दहेज लेने और खड़े होकर खाना खाने वालों के खिलाफ आंदोलन शुरू हो गया है।” मुस्लिम संगठन ने शादियों में म्यूजिक के इस्तेमाल को बेफिजूल खर्ची और आर्थिक बर्बादी बताया था।