Home Blog Page 3712

लद्दाख में सिर्फ स्थानीय लोगों को मिलेगी सरकारी नौकरी, लंबे समय से की जा रही माँग को प्रशासन ने किया पूरा

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सरकारी नौकरियाँ स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित होंगी। इसकी घोषणा लद्दाख प्रशासन के श्रम और रोजगार विभाग ने सोमवार (7 जून 2021) को की। रिपोर्ट के अनुसार, लद्दाख प्रशासन ने स्थानीय लोगों के लिए 100% नौकरियों को आरक्षित करते हुए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश रोजगार (अधीनस्थ) सेवा भर्ती नियम, 2021 को अधिनियमित किया है।

लेह के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के ट्वीट में कहा गया है, “लद्दाख ने केंद्र शासित प्रदेश रोजगार (अधीनस्थ) सेवा भर्ती नियम 2021 तैयार किया है। नौकरियाँ विशेष रूप से स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित होंगी।” एसओ 282 (ई) दिनांक 21.01.2020 द्वारा प्रवर्तित इस नियम को उपराज्यपाल आरके माथुर ने बनाया है। राजपत्र में जारी होने के साथ ही यह कानून लागू हो जाएगा।

अधिसूचना के खंड 11 में कहा गया है, “कोई भी व्यक्ति सेवा में नियुक्ति के लिए तब तक योग्य नहीं होगा, जब तक कि वह व्यक्ति केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का निवासी न हो।” इसके अलावा, नई अधिसूचना में जोर दिया गया है कि जम्मू-कश्मीर रोजगार (अधीनस्थ) सेवा संवर्ग में पहले से ही नियुक्त व्यक्ति, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 89 (2) के अनुसार सेवा के गठन के बाद से नियुक्त माना जाएगा। लद्दाख के लोग लंबे समय से इसकी माँग कर रहे थे।

इस मामले पर लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद-कारगिल के मुख्य कार्यकारी पार्षद फिरोज अहमद खान ने बताया, “लगभग दो साल पहले हुए जम्मू-कश्मीर के विभाजन के बाद से यह हमारी माँग थी। यह स्वागत योग्य कदम है। वर्तमान में इस केंद्र शासित प्रदेश के अंतर्गत आने वाली भूमि दो निर्वाचित परिषदों, लेह और कारगिल के अंतर्गत आती हैं।” उन्होंने बताया कि लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद-कारगिल (LAHDC) भी नई भर्तियों में ऊपरी आयु सीमा में छूट और स्थानीय शासन के लिए नियम बनाने की माँग करेगी।

भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में अनुच्छेद 370 जो जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था को निरस्त करने का वादा किया था। 5 अगस्त 2019 को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अपना वादा पूरा किया। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों, लद्दाख और जम्मू एवं कश्मीर में विभाजित कर दिया गया। यह निर्णय 31 अक्टूबर 2019 से प्रभावी हुआ था।

मदरसे में ब्लास्ट के बाद मर्द भागे, औरतों के होठ सिले: पहले भी हुई है बमबाजी-पत्थरबाजी, स्थानीयों का दावा- मौलाना बनाता था बम

बिहार के बांका में एक मस्जिद के पास स्थित मदरसे में बम ब्लास्ट होने के बाद मौलाना की मौत हो गई। ये बम कहीं बाहर से नहीं आया था, बल्कि मदरसा में ही रखा हुआ था। फॉरेंसिक टीम ने भी अपनी जाँच में पाया कि मदरसा बम ब्लास्ट से उड़ा है। 4 लोग घायल भी हुए हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। आसपास के इलाके के सभी पुरुष घर छोड़ फरार हो गए हैं। महिलाओं ने घटना को लेकर चुप्पी साध रखी है।

ये घटना नवटोलिया में हुई, जहाँ आम दिनों में काफी चहल-पहल होती थी और सड़कें बालू ढोने वाले ट्रकों से भरी रहती थीं। नूरी मस्जिद इस्लामपुर के परिसर में स्थित मदरसे में धमाके से मौलाना अब्दुल सत्तार मोकिन की मौत के बाद उन सड़कों पर सन्नाटा है, जहाँ आवाजाही के लिए लोग परेशान रहते थे। कोई मौलाना का नाम भी न जानने के दावे कर रहा था, जबकि वो 8 साल से वहीं रहता था। लोग कुछ दबाना चाहते हैं।

शाम को गाँव के बहियार में एक गाड़ी से मौलाना का शव फेंक कर कोई भाग गया, तब पुलिस को इसकी जानकारी हुई। मदरसा कमिटी के लोगों ने घटना के कई घंटों बाद तक पुलिस को कुछ सूचना नहीं दी। खड़िहारा और अमीनपुर जैसे गाँवों में जख्मी लोगों की तलाश के लिए छापेमारी की गई, लेकिन कोई नहीं मिला। बताया गया है कि मौलाना पल्सर से चलता था और इलाके के एक दर्जन से अधिक युवा उसके संपर्क में थे।

इसीलिए, मौत के सामान को सुरक्षित रखने के लिए भी मदरसे का सहारा लिया गया। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि मौलाना बम बनाता था और 3 युवक उसका सहयोग करते थे। क्षेत्र में छोटी-छोटी बात पर बमबारी होती थी। भागलपुर से बारूद लाकर काम किया जाता था। पिछले साल शंकरपुर स्थित धर्मकाँटा पर बम ब्लास्ट हुआ था और पुलिस ने 7 अपराधियों को 65 हजार रुपए के साथ दबोचा था।

लोगों की चुप्पी के कारण मौलाना के साथियों का पता नहीं चल सका है। आम तौर पर गाँव में एक मौत होने पर भी मिलने-जुलने वालों का ताँता लगा रहता है। उक्त मौलाना झारखंड के देवघर स्थित सारठ के कालीजोत गाँव का रहने वाला था। परिजनों ने बताया कि उन्हें मदरसे के छत गिरने से मौलाना के घायल होने की बात बताई गई थी। उक्त मौलाना बच्चों को उर्दू और मजहब की शिक्षा देता था। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि मौलाना 3 महीने से छुट्टी पर था।

‘दैनिक भास्कर’ के बांका संस्करण में प्रकाशित खबर (साभार)

कुछ लोगों ने बताया कि जख्मी लोग एक ऑटो में बैठ कर गुप्त रूप से इलाज कराने के लिए फरार हो गए, वहीं मौलाना की मौत हो गई। पुलिस ने घटना की वैज्ञानिक तरीके से जाँच की बात कहते हुए बताया कि मौलाना के चरित्र को खँगाला जा रहा है। बम ब्लास्ट शक्तिशाली था, क्योंकि मदरसा का आधा हिस्सा सड़क के उस पार जा गिरा। कोरोना काल के कारण वहाँ बच्चे नहीं था, वरना और बड़ी घटना हो सकती थी।

मदरसे की इमारत पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। डॉग स्क्वाड और फॉरेंसिक टीम को जाँच के लिए लगाया गया। ग्रामीणों ने पुलिस को गैस सिलिंडर से ब्लास्ट होने की बात बताई। घटनास्थल से 5 लिटर के 2 गैस सिलिंडर, बम की सुतरी, बारूद के अवशेष, और मौलवी का खून से सना कुर्ता बरामद किया। दोनों सिलिंडर सुरक्षित हैं। नवटोलिया और पड़ोस के मजलिसपुर में पत्थरबाजी और बमबारी आम थी।

कहा जा रहा है कि मदरसे के दफ्तर में एक ट्रंक के भीतर बम रखा हुआ था। आसपास के कई घरों में इस ब्लास्ट की वजह से दरारें आई हैं। मजलिसपुर और नवटोलिया के बीच कई सालों से विवाद चलता है। इसमें दोनों तरफ के कई लोगों की मौत हुई है। जून 2020 में दोनों गाँवों के बीच बमबारी और गोलीबारी हुई थी। कई लोग जेल भी गए थे। तब कम से कम 50 बम चले थे। हालिया बम ब्लास्ट के बावजूद इमाम की अनुपस्थिति में एक युवक ने अजान के समय मस्जिद में जाकर दैनिक प्रक्रिया को निभाया।

ताज़ा घटना में एक साथ कई बम फटने की आवाज़ आई और लोगों ने धुआँ भी देखा। पड़ोसी गाँव के लोगों ने ये जानकारी दी। इमाम का शव फेंक कर भागने वालों को भी पुलिस पकड़ नहीं पाई है। मदरसा कमिटी के लोग भी गायब हैं। घटनास्थल पर थानाध्यक्ष, एसपी, एएसपी और एसडीपीओ समेत कई बड़े अधिकारियों ने कैम्प किया। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही अब पुलिस आधिकारिक रूप से कारणों की पुष्टि करेगी

₹780 में कोविशील्ड, ₹1410 में कोवैक्सीन और ₹1145 में स्पूतनिक का टीका: प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए रेट फिक्स

प्राइवेट अस्पतालों के लिए कोरोना के टीके की अधिकतम कीमत केंद्र सरकार ने तय कर दी है। कोविशील्ड की 780, कोवैक्सीन की 1410 और स्पूतनिक वी की कीमत 1145 रुपए तय की गई है। इस संबंध में नया सर्कुलर जारी कर दिया गया है और को-विन पोर्टल पर वैक्सीन की नई रेट अपडेट की जाएगी।

यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्राइवेट अस्पतालों में दी जाने वाली वैक्सीन के सर्विस चार्ज को 150 रुपए तक सीमित करने के एक दिन बाद आया है। 7 जून 2021 को देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने नई वैक्सीन पॉलिसी की घोषणा की थी। इसके मुताबिक सरकारी अस्पतालों में सबका मुफ्त टीकाकरण होगा।

मंगलवार (8 जून 2021) को केंद्रीय स्वास्थ्य और वित्त सचिवों ने नए दिशा-निर्देशों के तहत वैक्सीन की लागत को लेकर चर्चा की। इसके तहत केंद्र सरकार बजट में दिए गए 35,000 करोड़ रुपए अलावा भी फंडिंग करेगी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे वैक्सीनेशन अभियान के तहत 31 दिसंबर 2021 तक 188 करोड़ डोज पर केंद्र की लागत 45,000 से 50,000 करोड़ रुपए के बीच हो सकती है।

पीएम मोदी ने कहा था, “यह निर्णय लिया गया है कि केंद्र राज्यों को पहले से दी गई 25 फीसदी टीकाकरण खरीद को अपने हाथ में ले लेगा।” 21 जून 2021 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से सभी राज्यों में कोरोना के टीके लगाए जाएँगे। प्रधान मंत्री ने स्पष्ट किया था, “किसी भी राज्य सरकार को टीकों पर कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ेगा।”

जो ‘फ्री’ टीका नहीं लगवाना चाहेंगे वे प्राइवेट अस्पतालों में टीके लगवा सकेंगे। निजी अस्पताल वैक्सीन निर्माता कंपनियों से भारत में बनने वाले सभी टीकों का 25 फीसदी सीधे तौर पर खरीद सकेंगी।

प्रधानमंत्री ने बताया था कि देश में वैक्सीन की आपूर्ति बढ़ने वाली है। सात कंपनियाँ अलग-अलग टीकों का उत्पादन कर रही हैं और अन्य तीन टीकों का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। दूसरे देशों से टीकों की खरीद में भी तेजी आई है।

बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार अगस्त से रोजाना एक करोड़ कोरोना वायरस वैक्सीन का डोज देने की तैयारी कर रही है। इस महीने (जून, 2021) करीब 100 करोड़ टीकों के लिए ऑर्डर दे दिया गया है। इस बात की जानकारी केंद्र सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने दी है।

नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल ने अगस्त से टीकाकरण के अभियान में तेजी आने की बात कही है। पॉल ने बताया कि मंगलवार को केंद्र ने भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट को 44 करोड़ टीकों का ऑर्डर दिया है। उत्तर प्रदेश पहले से ही प्रतिदिन 4.5 लाख लोगों का टीकाकरण कर रहा है, जिसे जुलाई से 10 लाख प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।

‘मेरे लिए होटल और फ्लाइट बुक करना चाहता था ‘राज’, खोलना चाहता था बुटीक और क्लब्स’: मेहुल चोकसी को लेकर बोलीं ‘मिस्ट्री गर्ल’

मेहुल चोकसी की ‘गर्लफ्रेंड’ बारबरा जराबिका ने उनके हनीट्रैप के आरोपों को नकार दिया है। उन्होंने बताया कि मेहुल चोकसी ने उनके लिए होटल बुक करने से लेकर फ्लाइट टिकट्स के रुपए देने तक का ऑफर दिया था। लेकिन, बारबरा चाहती थीं कि वो मेहुल चोकसी के साथ सिर्फ दोस्त बन कर रहें और उनका रिश्ता कारोबार तक ही सीमित रहे। बारबरा जराबिका ने बताया कि वो मेहुल चोकसी के साथ कॉफी, डिनर और एवनिंग वॉक्स के लिए जा चुकी हैं।

‘इंडिया टुडे’ को दी गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी के जीवन की ‘मिस्ट्री गर्ल’ ने बताया कि मेहुल चोकसी उनके अपार्टमेंट में भी आता था। उन्होंने बताया कि होटल और फ़्लाइट्स बुक करने के मेहुल चोकसी के ऑफर्स को वो ठुकरा देती थीं क्योंकि उन्हें लगता था कि उसके बाद उम्मीदों का जन्म होगा और इस रिश्ते को लेकर वो गलतफहमी पाल लेगा। उन्होंने बताया कि मई 2021 में चीजों में बदलाव आया।

मेहुल चोकसी जानता था कि बारबरा जराबिका प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार में हैं और वो उनके साथ बिजनेस करने की जिद कर रहा था। वो बुटीक होटल्स खोलना चाहता था, और साथ ही एंटिगुआ में क्लब्स भी खोलना चाहता था। बकौल बारबरा, चोकसी कहता था कि वो इन चीजों की फंडिंग करने की क्षमता रखता है। बारबरा का कहना है कि ये सब सुन कर इस कारोबार में उनकी भी रुचि हुई। उसने खुद को राज बताते हुए परिचय दिया था और उसे कई नंबरों से कॉल-मैसेज करता था।

साथ ही वो व्हाट्सएप्प और सिग्नल सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से मैसेज करता था। बारबरा ने बताया कि तब वो अक्सर उसके साथ मजाक करती थीं क्योंकि उन्हें पता नहीं था कि वो भगोड़ा है। उसने 6 महीने 8 नंबर बदले थे। उन्होंने बताया कि द्वीप पर और कई रेस्टॉरेंट्स के कर्मचारी उसे राज कह कर ही सम्बोधित करते थे। किसी को उसका असली नाम नहीं पता था। उसने अपनी पहचान और करतूतें छिपा कर रखी थीं।

बारबरा ने अपहरण के आरोपों को नकारते हुए कहा कि जो लोग जॉली हार्बर क्षेत्र को जानते हैं, उन्हें पता है कि ये सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक है, पारिवारिक इलाका है और यहाँ अपहरण जैसे वारदात नहीं होते। ANI को मेहुल चोकसी ने बताया कि अगस्त 2020 में उनकी चोकसी से जान-पहचान हुई, लेकिन तब वो महीने में एक बार ही उससे बात करती थीं। बारबरा ने कहा कि वो न तो उसकी गर्लफ्रेंड है और न ही वो उनका ‘सुगर डैडी’ है।

बारबरा ने कहा कि उनका खुद का कारोबार है और उन्हें होटल बुकिंग और फ्लाइट टिकट के लिए रुपयों या फेक जूलरी की ज़रूरत नहीं है। बारबरा के अनुसार, मेहुल चोकसी शायद क्यूबा जाना चाहता था। उसने टेक्स्ट भी किया था कि अगली मुलाकात क्यूबा में होगी। उन्होंने बताया कि वो यूरोपियन हैं और भारत की खबरों का उन्हें पता नहीं रहता है। मेहुल चोकसी ने अपना वजन काफी कम किया था और वो पहले से अलग दिखता है।

इससे पहले चोकसी ने कहा था, “पिछले साल भर से मेरी बारबरा जबारिका से दोस्ती थी। वह पहले मेरे जॉली हार्बर स्थित घर के सामने रहती थी। लेकिन बाद में कोको वे होटल शिफ्ट हो गई थी। उसके मेरे स्टाफ के साथ भी अच्छे संबंध थे और हम नियमित तौर पर मिला करते थे और अक्सर शाम को वॉक पर जाते थे।” चोकसी PNB के 13500 करोड़ रुपए का घोटाला करने वाले आरोपितों में से एक है, जिसमें उसका भाँजा नीरव मोदी समेत कई अन्य भी शामिल हैं। 

बाल ठाकरे पर फिल्म बनाने वाली स्वप्ना पाटकर ‘फेक PHD’ में गिरफ्तार, क​हा था- 8 साल से टॉर्चर कर रहे संजय राउत

शिवसेना संस्थापक बालासाहब ठाकरे के जीवन पर मराठी में बनी फिल्म ‘बालकाडु’ की निर्माता डॉक्टर स्वप्ना पाटकर को मुंबई पुलिस ने मंगलवार (8 जून 2021) को गिरफ्तार किया। यह फिल्म 2015 में रिलीज हुई थी और पाटकर हाल में शिवसेना सांसद संजय राउत पर प्रताड़ना का आरोप लगाने को लेकर चर्चा में रही हैं।

39 वर्षीय पाटकर को क्लिनिकल साइकोलॉजी में पीएचडी की फर्जी डिग्री हासिल कर एक अस्पताल में नौकरी हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट में एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि 26 मई को मुंबई के बांद्रा थाना में आईपीसी की धारा 419 (भेष बदलकर धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और 468 (धोखाधड़ी के मकसद से जालसाजी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 51 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता गुरदीप कौर सिंह ने अप्रैल में एक सीलबंद लिफाफे में पाटकर की पीएचडी डिग्री से संबंधित दस्तावेजों का एक सेट एक गुमनाम स्रोत से प्राप्त करने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

दस्तावेजों के अनुसार 2009 में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा जारी किया गया पाटकर का पीएचडी प्रमाणपत्र वास्तव में फर्जी है। इससे पहले पाटकर की वकील आभा सिंह ने बताया था कि पुलिस बिना समन उन्हें उनके घर से उठा ले गई और एफआईआर की कॉपी तक नहीं दी। पाटकर ने राउत के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में स्टॉकिंग का मामला दर्ज कर रखा है।

पिछले दिनों राउत ने मुंबई के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक मामला दायर किया था। इसमें ट्विटर इंडिया और गूगल इंडिया को उन सभी ट्वीट और अन्य डिजिटल सामग्रियों को हटाने के लिए निर्देश देने की गुहार लगाई थी, जिसमें मराठी फिल्म निर्माता ने उनके खिलाफ आरोप लगाए हैं।

शिकायत में राउत ने दावा किया था कि उन पर किए गए ट्वीट भ्रामक हैं और देश की ‘शांति और सद्भाव को नुकसान’ पहुँचा सकते हैं। यह दावा करते हुए कि ट्वीट्स अपमानजनक हैं और पाटकर के ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक किया जाना चाहिए, राउत ने कहा था कि यह आरोप ‘भारत और विशेष रूप से महाराष्ट्र राज्य में राजनीतिक और सामुदायिक समूहों के बीच भेदभाव पैदा कर सकते हैं।’

गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल में पाटकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई थी। उन्होंने खुद को एक शिक्षित और सबल भारतीय महिला बताते हुए पत्र में लिखा था कि उन्हें सहानुभूति नहीं, इंसाफ चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया था कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के सह-संपादक संजय राउत पिछले 8 वर्षों से अपनी पार्टी के रुतबे और सिस्टम पर पकड़ का इस्तेमाल कर न सिर्फ उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, बल्कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित कर रहे हैं।

पाटकर ने बताया था कि राउत के इशारे पर पुलिस ने उन पर ‘धंधा करने’ का आरोप भी लगाया था। उन्होंने कहा था कि 2017 में खुद संजय राउत ने फोन पर धमकी दी और 2018 में कॉन्ट्रैक्ट पर आदमी रख कर उनका पीछा कराया गया। बकौल स्वप्ना, उनके सोशल मीडिया हैंडल्स को हैक कर कभी सुसाइड नोट तो कभी अश्लील सामग्रियाँ डाली गईं, लेकिन पुलिस ने साफ़ कह दिया कि संजय राउत के खिलाफ वो FIR दर्ज नहीं कर सकते।

पीएम को लिखे पत्र में कहा था कि ‘शिवसेना भवन’ की तीसरी मंजिल पर बुला कर उनके रिश्तेदारों से मारपीट की गई। उनसे संपर्क काटने को मजबूर किया गया। साथ ही सब ख़त्म करने के लिए 4 करोड़ रुपए की वसूली का प्रस्ताव रखने का आरोप भी लगाया गया था।

स्वप्ना ने पत्र में लिखा था, “पुलिस से पूछताछ करवा के भी जब संजय राउत की राक्षसी ख़ुशी को संतुष्टि नहीं मिलती तो मुझे परेशान, प्रताड़ित और बदनाम कर के मेरा चरित्र-हनन किया जाता है। वो कहते हैं कि पुलिस के पास जाओगी तो भी कुछ नहीं होगा। 2013 में मेरे ऊपर 2 बार हमला हुआ। जाँच अभी तक चल रही है। कोई आरोपित नहीं मिला। 2014 में ACP प्रफुल्ल भोंसले ने बिना कारण मेरे खिलाफ जाँच शुरू की। मुझ पर संजय राउत से फिरौती माँगने का आरोप लगाया गया। 2015 में मेरा पीछा करना शुरू किया गया। धमकियाँ मिलीं। मैं किससे बात करूँ और किससे नहीं, इस पर नियंत्रण करने की कोशिश की गई। मैं कहाँ जा रही हूँ, क्या कर रही हूँ – संजय राउत का सब पर ध्यान रहता था। मुझे रोज ईमेल भेज कर बताना होता था कि मैं कहाँ गई और किससे मिली। बात न मानने पर पुलिस का नया मामला बन जाता था।”

CM शिवराज के नवनियुक्त मीडिया सलाहकार की छुट्टी, पुराने गोमूत्र और मोदी पर तंजिया ट्वीट ने ठोकी आखिरी कील

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा हाल ही में नियुक्त किए गए मीडिया सलाहकार तुषार ने मंगलवार (जून 8, 2021) को ट्विटर पर इस जॉब ऑफर को ठुकराने की घोषणा की थी।

तुषार ने लिखा था, “मैंने निर्णय लिया है कि मैं शिवराज सिंह चौहान द्वारा दी गई जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं कर पाऊँगा और इस संबंध में सीएम को मैंने अपनी असमर्थता बता दी है।”

तुषार का यह ट्वीट मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नियुक्त होने की घोषणा के 22 घंटे के भीतर आया है।

नियुक्ति की घोषणा होने पर इससे पहले तुषार ने सोमवार को ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था, “आप में से कई लोग मुझे पर्दे के पीछे काम करने वाले (नेपथ्य) के तौर पर जानते हैं। मैं साल 2001 से ही देश भर के राजनेताओं और कई मुख्यमंत्रियों के साथ काम करते आ रहा हूँ।”

उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा था, “आज मेरी किस्मत ने मुझे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यालय में उनके मीडिया सलाहकार के रूप में भेजा है। मुझे अपनी शुभकामनाएँ दें। अधिक जानकारी बाद में।”

तुषार की नियुक्ति की घोषणा होने के कुछ ही देर बाद उनके पुराने ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इस ट्वीट में उन्होंने गोमूत्र के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा था।

इनमें से एक में देख सकते हैं कि एक ट्विटर यूजर ने लिखा था कि बाबा रामदेव ने कहा है कि सरकार उन्हें पेट्रोल पंप लगाने की अनुमति दे और वह तेल 35-40 में बेचेंगे। इसके जवाब में तुषार ने कहा था, “गौमूत्र से बनाएँगे? मुझे विश्वास है कि बाबा उस बात को लेकर बहुत उत्साहित हैं, जिसे उदय चोपड़ा कानूनी रूप में चाहते हैं।”

इसके अलावा तुषार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था और उनके व्यक्तिगत जीवन को लेकर कटाक्ष किया था।

2014 के बाद जब ‘जय श्रीराम’ ने नाम पर लिचिंग की फेक खबरें आने लगी, तब भी उन्होंने कटाक्ष किया था। तुषार अक्सर विपक्षी दलों की भाषा बोलते नजर आते हैं और इन्ही ट्विट्स के वायरल होने के बाद उन्होंने जॉब ऑफर ठुकराने की घोषणा की है।

आगरा का पारस अस्पताल सील, महामारी एक्ट में FIR: हॉस्पिटल मालिक ने 22 मरीजों की मौत की बात नकारी

अपडेट: उत्तर प्रदेश के आगरा में जिलाधिकारी के आदेश पर मरीजों की ऑक्सीजन सप्लाई रोकने के वायरल आरोप में पारस हॉस्पिटल पर कार्रवाई की गई है। पारस हॉस्पिटल के मालिक का एक वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है। इसके साथ ही अस्पताल के संचालक पर महामारी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज करने के भी निर्देश दिए गए हैं। शुरूआती जाँच तहत प्रमुख सचिव (गृह) ने पारस अस्पताल के मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

हालाँकि, कार्रवाई के बाद एक विस्तृत वीडियो पारस हॉस्पिटल के मालिक डॉ अरिंजय जैन का आया है। जिसमें उन्होंने मीडिया में वायरल मॉक ड्रिल वीडियो के आधार पर 22 कोविड मरीजों के मरने के दावे को ख़ारिज किया है। एवं आगे की जाँच में भी पूरा सहयोग करने को कहा है।

वहीं आगरा के जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने भी ऑक्सीजन से मरीजों के मरने के दावे को ख़ारिज करते हुए कहा है यदि ऐसी कोई बात होती तो आगरा जैसी छोटी शहर होने के कारण हाय-तौबा मच जाती। उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर आँकड़े भी जारी किए हैं। जिसमें किल्लत की कोई बात नहीं है।

सरकारी रिकॉर्ड की बात करें तो 26 अप्रैल को पारस हॉस्पिटल में चार कोरोना मरीजों की मौत दर्ज है। डीएम प्रभु नारायण सिंह ने कहा था कि 26 और 27 अप्रैल को ऑक्सीजन की कमी हुई थी, लेकिन प्रशासन अस्पतालों को ऑक्सीजन लगातार पहुँचाती रही। उन्होंने कहा था कि 26 अप्रैल को पारस हॉस्पिटल में कोरोना के 97 मरीज भर्ती थे, जिनमें से चार की मौत हो गई थी। वहीं मामले में योगी सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इस मामले को जघन्य अपराध बताते हुए कार्रवाई की बात कही थी।

दरअसल, आगरा में एक पारस नाम के निजी अस्पताल के मालिक द्वारा अस्पताल के कोविड और गैर-कोविड वार्ड में भर्ती गंभीर रोगियों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद करने की बात कही थी, जिसका वीडियो वायरल हो गया था। वीडियो वायरल होने के बाद जिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ आर सी पांडे ने एक समिति गठित कर मामले की शुरूआती जाँच शुरू की थी। घटना 26 अप्रैल की बताई जा रही है और यह वीडियो 7 मई को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

वायरल वीडियो में ऑक्सीजन संकट के मॉक ड्रिल के कारण 5 मिनट में 22 गंभीर मरीजों के मौत की बात कही जा रही है। वीडियो में हॉस्पिटल का संचालक एक शख्स से कहता है कि इससे 22 लोग मर गए थे। यह पूरी बातचीत 26/27 अप्रैल को सामने आए ऑक्सीजन संकट को लेकर बताई जा रही है। लेकिन अब इसमें डॉ ने सफाई दी है कि कोई मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई थी। वीडियो का सन्दर्भ भी अधूरा है।

क्या केदारनाथ के सेट पर ड्रग्स लेते थे सारा-सुशांत? रिया चक्रवर्ती के बयान के बाद नीतीश भारद्वाज ने बताई ये बात

सुशांत सिंह राजपूत मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को दिए बयान में सारा अली खान और सुशांत पर आरोप लगाया था कि वह दोनों साथ में ड्रग्स लेते थे। अब इस मामले पर केदारनाथ के को-एकटर नीतीश भारद्वाज ने अपना बयान दिया है। उनका कहना है कि फिल्म की शूट के दौरान उन्हें कभी महसूस नहीं हुआ कि दोनों की आँख नशे के कारण भारी हो या उन्होंने ड्रग्स लिया हो।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में जब नीतीश भारद्वाज से पूछा गया कि क्या सुशांत-सारा सेट पर ड्रग्स लेते थे। तो उन्होंने रिया के दावों के उलट बताया,

“एक दिन, पूजा गौर मुझे टीवी इंडस्ट्री के बदलते माहौल के बारे में बता रही थीं और फिर अचानक बातचीत ड्रग्स को लेकर होने लगी। इस पर सारा ने मुझे बताया कि उन्होंने सुना है फिल्म इंडस्ट्री भी ड्रग्स की समस्या से जूझ रही है। मुझे साफतौर पर याद है कि उन्हें इससे दूर रहने के लिए कहा था, क्योंकि उनका आगे एक बेहतर करियर है। सारा ने मुझे यकीन दिलाया कि उन्होंने कभी भी ड्रग्स को नहीं छुआ है और ऐसा कभी नहीं करेंगी।”

नीतीश ने आगे खुलासा किया कि सुशांत सिगरेट पीते थे और तेज दिमाग के थे। उनके अनुसार,

ड्रग्स करने वाला कोई व्यक्ति उनके जैसा फुर्तीला नहीं होता, न ही वे उतनी समझदारी से बात करते हैं। कम से कम, मुझे तो यही लगता है। मैं स्मोक नहीं करता हूँ, मैंने कभी तंबाकू या नशीली दवाओं से भरी सिगरेट नहीं जलाई है। लेकिन मुझे पता है कि अगर आप ऐसी सिगरेट पीते हैं, तो इसकी एक अलग गंध होती है। मैंने कभी सुशांत और सारा को नशे से भारी आँखों के साथ या किसी ट्रिप पर नहीं देखा था। वे सामान्य थे। सुशांत एक अलग जोन में रहते थे। हम कॉस्मोलॉजी, ग्रहों और आकाशगंगाओं के बारे में बात करते थे।”

बता दें कि इससे पहले मीडिया रिपोर्टों के हवाले से रिया के बयानों पर ये चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी कि वह सारा के साथ ड्रग्स लिया करती थीं और सारा ने ही केदरनाथ के दौरान सुशांत को भी मारिजुआना की लत लगाई थी। रिपोर्टों की माने तो नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया का यह बयान चार्जशीट में भी शामिल किया गया है।

शराब के साथ भगवान शिव का स्टिकर, हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले Instagram के खिलाफ FIR

दिल्ली के रहने वाले मनीष सिंह ने एक स्टिकर में भगवान शिव को आपत्तिजनक तरीके से दिखाने को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एक हाथ में शराब और दूसरे हाथ में मोबाइल फोन के साथ भगवान शिव को दिखाने वाला स्टिकर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला है।

भगवान शिव का आपत्तिजनक स्टीकर

शिकायतकर्ता का कहना है कि भगवान शिव लाखों हिंदुओं के पूजनीय हैं। ये लाखों लोगों के दिलों में बसते हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम के अधिकारियों पर गंभीर अपराध करने का आरोप लगाया है। दरअसल, यह स्टिकर एक ग्राफिक्स इंटरचेंज फॉर्मेट (जीआईएफ) में था। भगवान शिव का यह स्टिकर बेहद आपत्तिजनक है।

इंस्टाग्राम के खिलाफ शिकायत

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपित देवों के देव महादेव के ऐसे स्टिकर (GIF) जानबूझकर यहाँ प्रयोग कर रहा है। ऐसा करके वह मेरी और लाखों हिंदुओं की भावनाओं को आहत कर रहा है।

इसके साथ ही शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि इस स्टिकर को केवल हिंदू समुदाय के लोगों को उकसाने, वैमनस्य (घृणा) और शत्रुता को बढ़ावा देने के इरादे से इस्तेमाल किया गया है। आरोपित व्यक्तियों के इस व्यवहार से भगवान शिव के भक्त उत्तेजित हो सकते हैं, जिसके कारण हिंदू समुदाय में शांति भंग हो सकती है।

इंस्टाग्राम के खिलाफ शिकायत

इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने माँग की है कि इंस्टाग्राम के सीईओ (CEO) और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 और 295ए और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

पिंजरे में कैद बार गर्ल्स को बाहर से लगाया ताला, मो. नसीम के घर निकाह में रात भर हुआ अमानवीय डांस

मनुष्य इतना स्वार्थी हो गया है कि वह अपने फायदे के लिए किसी को भी नुकसान पहुँचाने से गुरेज नहीं करता। अगर हम ये कहें कि स्वार्थी व्यक्ति से बड़ा खतरनाक कोई नहीं हो सकता, तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। दरअसल, बिहार के भोजपुर से एक अमानवीय तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है।

इस तस्वीर में कुछ लोग अपने मनोरंजन के लिए पिंजड़े में बंद युवतियों को नचा रहे हैं। जी हाँ, यह वही बिहार है, जहाँ महिला सशक्तीकरण की दिशा में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक, भोजपुर के कोइलवर थाना क्षेत्र के कोइलवर चौक वार्ड नंबर 10 में मोहम्मद नसीम के घर भागलपुर से बारात आई थी। इस दौरान कोरोना के नियमों की धज्जियाँ तो उड़ाई ही गई। साथ ही जमकर अश्लीलता भी परोसी गई।

हद तो तब हो गई जब इन लोगों ने एक पिंजरे के जैसा स्टेज बनाकर उसके अंदर बार बालाओं को जानवरों की तरह ठूँस दिया और रात भर उनसे डांस करवाया। इस मामले को लेकर BDO बीबी पाठक ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए हमें इसकी जानकारी मिली है। थाने में बात करके इस पर जाँच शुरू की जाएगी। जाँच सही साबित होने पर इन पर कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, कोइलवर गाँव के ही संजय सोलंकी कहा कि बार बालाओं को एक पिंजरे में कैद करके डांस करवाना अमानवीय है। उन्होंने बताया कि इस पिंजरे में कलाकार युवतियों को डालकर एक बड़े ताले से लॉक कर दिया गया था, उसके अंदर वह डांस कर रही थीं। जगह इतनी कम थी कि वे चाहकर भी इसमें थकने के बाद नहीं बैठ सकती थीं।

अपना पेट भरने के लिए मजबूरी में करते हैं डांस

खैर, कोरोना संकटकाल में अपना पेट भरने के लिए स्थानीय डांसर को ये सब काम मजबूरी में करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अभी लॉकडाउन के दौरान कोई काम नहीं रह गया है। इस समय हम लोगों को खाने की भी दिक्कत हो गई है। पहले एक दिन के 1500 रुपए मिलते थे, लेकिन अभी अब सब काम बंद हो गया है।

कोरोना महामारी के दौरान देश भर में लोगों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। कोई रोजगार के लिए, कोई भोजन के लिए तो कोई दवा के लिए जद्दोजहद कर रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी कुछ लोग अपने मनोरंजन के लिए लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने से बाज नहीं आ रहे हैं, जो कि बेहद शर्मनाक है।