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फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को हरे टीशर्ट और मास्क पहने युवक ने मारा थप्पड़, घसीटते हुए ले गए सुरक्षाकर्मी: देखें Video

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में एक मास्क लगाया शख्स उन्हें थप्पड़ मारता दिख रहा है। वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर शेयर हो रही है। अब तक इस संबंध में पुलिस दो अज्ञात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। फ्रांस के राष्ट्रपति ने इस घटना को लोकतंत्र का अपमान कहा।

जानकारी के मुताबिक यह घटना उस समय हुई जब मैक्रों दक्षिण-पूर्वी फ्रांस के ड्रोम क्षेत्र के दौरे पर पहुँचे थे। उन्होंने कोविड-19 के कहर के बाद लोगों के जीवन को जानने के लिए रेस्टोरेंट्स का दौरा किया और छात्रों से मुलाकात भी की। 

इसी दौरान सुरक्षाकर्मियों से घिरे राष्ट्रपति बैरीकेड्स के पार खड़े आम जन से मिलने गए। वहीं हरे रंग का टीशर्ट, चश्मा और फेसमास्क पहने व्यक्ति ने राष्ट्रपति से हाथ मिलाने के हाथ आगे बढ़ाया। लेकिन जैसे ही राष्ट्रपति मैक्रों उसके पास आए। उसने उनका हाथ पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उनके गाल पर थप्पड़ मार दिया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने फौरन उसे पकड़ा और घसीटते हुए दूर लेकर चले गए।

बता दें कि राष्ट्रपति को थप्पड़ मारने के बाद युवक ने ‘डाउन विद मैक्रोनिया’ नारा भी लगाया और Montjoie Saint Denis भी चिल्लाया। ये फ्रांस की सेना का युद्ध में लगाया जाने वाला नारा हुआ करता था, जब फ्रांस एक राजतंत्र था। इस घटना के बाद फ्रांस के प्रधानमंत्री जीन कास्टेक्स ने नेशनल असेंबली में कहा कि लोकतंत्र का मतलब बहस और वैध असहमति है। हिंसा, मौखिक आक्रामकता और फिजिकल अटैक नहीं होना चाहिए। वहीं फार लेफ्ट लीडर जीन-ल्यूक मेलेनचॉन ने इस मामले पर राष्ट्रपति के साथ एकजुटता दिखाने के लिए ट्वीट किया।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में फ्रांसीसी सेना को सेवा देने वाले एक गुट ने राष्ट्रपति मैक्रों को इस्लाम को लेकर हिदायत दी थी। इस गुट का कहना था कि इस्लाम धर्म को रियायत देने की वजह से फ्रांस का ‘अस्तित्व’ दाँव पर लग चुका है। राष्ट्रपति को लिखे गए खुले पत्र में चेतावनी दी गई थी कि हिंसा, इस्लाम और संस्थानों के प्रति घृणा के कारण फ्रांस का पतन अनिवार्य रूप से गृहयुद्ध का कारण बनेगा और सेना को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर करेगा। 

‘ड्रग माफिया’ बयान पर बाबा रामदेव ने दी सफाई, FAIMA के लीगल नोटिस को भी बताया गलत

एलोपैथी विवाद के बीच बाबा रामदेव ने बयान दिया था कि उनकी लड़ाई IMA से नहीं बल्कि ड्रग माफिया से है जो इलाज के नाम पर बेवजह के टेस्ट कराते हैं और दवाइयों को महँगे दामों पर बेचते हैं। आज इसी बयान पर सफाई जारी करते हुए बाबा रामदेव ने इस मामले को जनऔषधि केंद्र से जोड़कर समझाया। साथ ही FAIMA के लीगल नोटिस पर उन्हें जवाब देकर उसे वापस लेने की सलाह दी।

बाबा रामदेव ने अपने हालिया ट्वीट में कुछ दवाइयों की लिस्ट को उनके असली कीमत और बाजार में बिकने वाली कीमतों के साथ प्रस्तुत करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जनऔषधि केंद्र इसलिए खोलने पड़े, क्योंकि कुछ लोग मूल औषधियों को ब्रांडेड के नामपर कई गुना ज्यादा दामों पर बेचकर आर्थिक शोषण कर रहे थे। आपके संज्ञान हेतु हम कुछ औषधियों की मूल्य सूची प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी वेदना से पीड़ित व द्रवित होकर हमने ड्रग माफिया कहा।”

बता दें कि बाबा राम देव ने एक न्‍यूज चैनल से बातचीत में कहा था– “मेरी लड़ाई उन ड्रग माफिया के खिलाफ है जो गैर जरूरी ऑपरेशन करते हैं, गैर जरूरी टेस्‍ट करते हैं। ये मैं नहीं कहता। मेदांता हॉस्पिटल के हेड डॉक्‍टर नरेश त्रेहान और एम्‍स के डायरेक्‍टर डॉक्‍टर रणदीप गुलेरिया भी यही कहते हैं।” बाबा ने कहा था कि वह आईएमए के खिलाफ नहीं है। आईएमए को अपनी राजनीति चलानी है, डॉक्‍टरों के बीच नेतागिरी करनी है तो उनके साथ लड़ाई का कोई सवाल ही नहीं है। आईएमए को वह गंभीरता से नहीं लेते।

इसके अलावा दवाओं और डॉक्टरों के ख़िलाफ़ उनकी टिप्पणी पर फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें कोई योग्यता नहीं है। वह बोले कि यह नोटिस अधूरी जानकारी और एक घंटे की लंबी बैठक के वीडियो के एक खंड पर आधारित है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, रामदेव ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) के नोटिस के जवाब में कहा, “आपके द्वारा जारी किया गया नोटिस पूरी तरह से गलत है, योग्यता से रहित है और अधूरी जानकारी के आधार पर जारी किया गया है। इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि आप अपना नोटिस तुरंत वापस ले लें।”

बाबा रामदेव ने नोटिस के जवाब में कहा कि उनके बयानों को संदर्भ से बाहर ले जाया गया। वह केवल प्रयोगात्मक चिकित्सा के अत्यधिक उपयोग पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी प्रायोगिक उपचारों के अति प्रयोग के बारे में चिंता व्यक्त की है और उनमें से कई को बाद में उपचार प्रोटोकॉल से हटा दिया गया था।

वहीं FAIMA के महासचिव सुवरंकर दत्ता ने कहा है कि वे अब इस मामले में कानूनी राय लेंगे। उन्होंने कहा, “हम अपनी अगली कार्रवाई का फैसला करने के लिए आईएमए और अन्य डॉक्टर संघों के साथ मिलकर काम करेंगे। डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा और स्व-घोषित आध्यात्मिक नेताओं द्वारा आधुनिक चिकित्सा के खिलाफ व्यवस्थित गलत सूचना अभियानों को रोकने सहित प्रमुख मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए हम इस सप्ताह सभी प्रमुख संघों की एक राष्ट्रव्यापी बैठक शुरू करेंगे।’

अभिनेत्री आयशा सुल्ताना ने कोविड-19 को बताया लक्षद्वीप में केंद्र सरकार का ‘जैविक हथियार’, सुधारों से हैं नाराज

लक्षद्वीप में विकास नीतियों का विरोध करने वाले लोग अब केंद्र सरकार का विरोध करने के लिए घटिया स्तर पर उतर आए हैं। हाल में लक्षद्वीप की एक्टर व मॉडल आयशा सुल्ताना ने एक मलयालम न्यूज चैनल पर डिबेट के दौरान केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। मीडिया वन टीवी पर सुल्ताना ने कहा कि केंद्र सरकार कोरोना को स्थानीयों के खिलाफ़ एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।

डिबेट में सुल्ताना ने कहा, “केंद्र द्वारा ध्यान देने से पहले, लक्षद्वीप में COVID-19 के 0 मामले थे। अब हर दिन 100 से ज्यादा मामले आ रहे हैं। केंद्र ने जो (कोरोना) यहाँ तैनात किया है वह बायोवेपन है। मैं साफ साफ कहती हूँ कि केंद्र सरकार ने लोगों के ख़िलाफ़ बायो वेपन तैनात किया है।”

द्वीप में विकास को अवरुद्ध करने के प्रयासों में सुल्ताना ने इस डिबेट में स्वास्थ्य सुविधाओं की चरमराई हालत को छिपाया जिनके कारण वहाँ कोविड केसों में बढ़ौतरी हो रही है और पूरे मामले का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ने का प्रयास किया। 

बता दें कि एक्ट्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर लगाए गए ये इल्जाम प्रशासक प्रफुल्ल के पटेल द्वारा घोषित किए गए सुधार वाले फैसले के मद्देनजर आया। पटेल ने मालदीव के समान एक पर्यटन स्थल के रूप में द्वीपों को बढ़ावा देने के साथ-साथ निवासियों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई प्रस्तावों का ऐलान किया था।

प्रशासक पटेल द्वारा किए गए सुधारों की घोषणा

लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन (एलडीएआर) 2021 के ड्राफ्ट में गोहत्या और गोमाँस पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक नया कानून प्रस्तावित किया गया है, ये कानून अन्य राज्यों में प्रचलित कानून के अनुरूप है।

इसके अलावा ड्राफ्ट में परिवार नियोजन के महत्व के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए दो बच्चों की नीति भी शामिल है। लोगों को 2 से अधिक बच्चे पैदा करने से रोकने के लिए, कानून ने ऐसे लोगों को ग्राम पंचायत का सदस्य बनने से रोकने का प्रस्ताव रखा है। मसौदे में मादक पेय पदार्थों की बिक्री को भी द्वीपों पर रिजॉर्ट में अधिकृत करने की बात है ताकि पर्यटन स्थल के तौर पर ये द्वीप पर्यटकों को ज्यादा आकर्षित करे।

ये ड्राफ्ट रेगुलेशन, भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अंतर्गत प्रशासक को विकास के उद्देश्य से द्वीपों पर “किसी भी क्षेत्र को एक प्लॉनिंग एरिया घोषित करने” का अधिकार देता है, और प्रशासक को अधिकार के तहत सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक किसी भी भूमि का अधिग्रहण करने की भी अनुमति देता है। 

गौरतलब है कि लक्षद्वीप में ये घोषणाएँ द्वीप के विकास के लिए की गई हैं ताकि यह द्वीप भी अन्य राज्यों की तरह राजस्व पैदा करे और यहाँ टूरिज्म को बढ़ावा मिले। हालाँकि, जब से ये योजनाएँ प्रस्तावित की गई हैं तभी से कुछ राजनेता व कट्टरपंथी इनके विरोध में लगे हुए हैं। वह डर फैलाकर विकास कार्यों को अवरुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि इन सभी सुधार कार्यों से केंद्र सरकार द्वीप का भगवाकरण करना चाहती है। और, शायद सुल्ताना भी उन्हीं लोगों में से हैं जो द्वीप को विकास की ओर बढ़ता न देखकर कट्टरपंथ की ओर दिशा में ले जाना चाहती हैं जैसे कभी जम्मू कश्मीर में हुआ था। सुल्ताना का एक डिबेट में उक्त बयान इसी बात का सबूत है।

मस्जिद के पास बम बलास्ट, मदरसे की इमारत पूरी तरह हुई ध्वस्त: मौलवी समेत पाँच घायल घटना के बाद से फरार

बिहार के बाँका से मंगलवार (7 जून 2021) को दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाँका टाउन थाना क्षेत्र के नवटोलिया में नूरी मस्जिद इस्लामपुर परिसर के आगे एक मदरसे में आज सुबह 8 बजे बम विस्फोट होने से आसपास का इलाका थर्रा उठा। बम विस्फोट से मदरसा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसे के मौलवी मोहम्मद मोमिद सहित चार से पाँच लोगों के घायल होने की खबर है। सभी घायल ऑटो पर सवार होकर किसी गुप्त स्थान पर इलाज के बाद झारखंड चले गए।

मौलवी झारखंड के गोड्डा का निवासी

घटना के बाद से स्थानीय घरों के पुरुष भी फरार हैं। वहीं, यहाँ कि महिलाएँ भी कुछ भी बोलने से इनकार रही हैं। मौलवी झारखंड के गोड्डा का निवासी बताया जा रहा है। पत्रिका की रिपोर्ट अनुसार, इस घटना में एक बच्चे समेत 6 ग्रामीणों के भी जख्मी होने की सूचना है।

जागरण की रिपोर्ट में आगे यह भी बताया गया है कि मदरसा के अंदर दर्जनों की संख्या में बम रखे हुए थे। ऐसे में कुछ लोगों का कहना है कि हो सकता है कि गर्मी के कारण विस्फोट हो गया हो। वहीं, अन्य लोगों का कहना है कि मदरसा के अंदर बम बनाने के क्रम में विस्फोट हुआ होगा। बम काफी शक्तिशाली थे, क्योंकि मलवे का कई भाग सड़क के दूसरे किनारे पर जाकर गिरा है। हालाँकि, कोरोना के कारण मदरसा के बंद होने के चलते यहाँ एक भी बच्चा नहीं था। नहीं तो बड़ी घटना हो सकती थी। बम विस्फोट की जाँच के लिए फॉरेंसिक टीम को भागलपुर से बुलाया गया है।

एसडीपीओ डीसी श्रीवास्तव, अभियान एएसपी अयोध्या सिंह, थानाध्यक्ष शंभू यादव सहित अन्य पुलिस बलों ने घटना के बारे में पूछताछ की, लेकिन स्थानीय लोग कुछ भी बताने से इनकार कर रहे हैं। डीआईजी सुजीत कुमार ने बताया कि विस्फोट में घायल किसी भी व्यक्ति का अभी पता नहीं चल पाया है। एसपी को घायलों का पता लगाने का निर्देश दिया गया है। घटनास्थल पर फॉरेंसिक जाँच दल को भी भेजा गया है, ताकि विस्फोट के कारणों और विस्फोटक के प्रकार का पता लगाया जा सके।

वहीं, बांका के एसपी अरविंद कुमार गुप्ता का कहना है कि मस्जिद के आगे बने मरदसे में बम विस्फोट मामले की जाँच वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है। इसमें अभी तक दो लोगों के जख्मी होने की सूचना मिली है। पुलिस विस्फोट किस उद्देश्य से किया गया इसको लेकर जाँच कर रही है। साथ ही मौलवी को लेकर भी जाँच जारी है। विस्फोट के कारणों का पता लगाने के लिए बांका पुलिस के अलावा बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) घटनास्थल पर हैं।

कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि 5 किलो के एलपीजी सिलेंडर के फटने से भी विस्फोट हो सकता है, लेकिन विस्फोट के बाद भी सिलेंडर अपने स्थान पर पाया गया। बिहार के गृह विभाग ने जहाँ इस मामले की गहन जाँच के आदेश दिए हैं, वहीं अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं और विस्फोटक अधिनियम की धारा-5 के तहत आपराधिक साजिश, विस्फोटक पदार्थ के संबंध में लापरवाही बरतने का मामला भी दर्ज किया गया है।

बता दें कि नवटोलिया व मजलिशपुर के बीच कई बार खूनी संघर्ष की घटना घटी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नवटोलिया के लोगों द्वारा मदरसे में बम व हथियार रखने की चर्चा है

तवलीन सिंह जैसी प्रोपगेंडा पत्रकार सोचती हैं सिर्फ BPL वालों को मिलता है फ्री राशन: जानें कौन-कौन है इस सेवा के योग्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के मद्देनजर पिछले साल की तरह इस बार भी गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ जनता को मुफ्त में नवंबर तक अनाज मुहैया कराने का ऐलान किया। इस फैसले के बाद जहाँ कई जगह पीएम की सराहना हुई तो वहीं मोदी विरोधी प्रोपगेंडा चलाने वाली कुख्यात लेखिका व पत्रकार तवलीन सिंह ने सवाल दागा कि पीएम की घोषणा के बाद वह इस कशमकश हैं कि क्या भारत में इतने सारे लोग गरीबी रेखा से नीचे आते हैं।

वैसे तो तवलीन के इस ट्वीट के नीचे सोशल मीडिया यूजर्स ने ही उन्हें सलाह दे दी कि पहले तो वह एसी कमरे में बैठकर देश के हालातों पर बात न करें तो बेहतर होगा। दूसरा उन्हें ये बताया गया है कि ये अन्न जनता को कोरोना काल में उपजी स्थिति के कारण मुफ्त में दिया जा रहा है, न कि केवल देश के उस वर्ग को जिसके पास बीपीएल कार्ड है।

अब इस बात में तो कोई संदेह नहीं है कि देश में कोरोना के कारण कई लोगों की नौकरियाँ छूटीं, कई बड़े व्यापारियों के काम ठप्प हुए, कई छोटी-बड़ी दुकानें या धंधे प्रभावित हुए… कोरोना काल में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ जनता को मुफ्त राशन मुहैया कराने वाला फैसला देश की उसी जनता के लिए है जिनकी आर्थिक स्थिति इस कोरोना काल में डगमगाई। लेकिन इसका असर उनके घर के राशन पर न पड़े इसलिए सरकार ने निर्णय लिया कि इस योजना के तहत राशनकार्ड पर हर महीने मिलने वाले अनाज के अतिरिक्त मुफ्त 5 किलो अनाज दिया जाएगा। सबसे महत्तवपूर्ण बात राशन कार्ड में जितने लोगों के नाम दर्ज हैं सबके नाम पर 5 किलों अनाज मुफ्त जाएगा।

अब तवलीन जी को राशन कार्ड और बीपीएल में फर्क नहीं पता तो देश की जनता या फिर देश की सरकार कुछ नहीं कर सकती। उन्हें इसके लिए ज्ञानवर्धन की जरूरत है। सरकार इस समय जो अन्न मुहैया करवा रही है उसके लिए जनता के पास राशन कार्ड होना अनिवार्य है। राशन कार्ड क्या होता है पहले इसे समझिए और ये जानिए कि कैसे राशन कार्ड ये नहीं दर्शाता कि इसे बनवाने वाले सारे गरीबी रेखा से नीचे के लोग हैं।

क्या होता है राशन कार्ड और कितने प्रकार होते हैं?

राशन कार्ड एक तरह का पहचान पत्र है, जिसे राज्य शासन द्वारा लागू किया जाता है। राशन कार्ड का मुख्य उपयोग स्पेशल मूल्य की दुकानों से सही या कम मूल्य से आवश्यक सामान खरीदने के लिए किया जाता है। वर्तमान में सरकार द्वारा कई प्रकार के राशन कार्ड बनते हैं। इनमें गरीबी रेखा से नीचे वाला भी राशन कार्ड बनवाता है और गरीबी रेखा से ऊपर वाला भी।

इसका प्रमुख उद्देश्य सही दाम पर दैनिक उपयोग की वस्तुएँ खरीदना होता है। बस बीपीएल वालों को फायदा ये होता है कि उन्हें थोड़े कम दाम पर खाद्य वस्तुएँ मिल जाती हैं।

राशन कार्ड को बनवाने के लिए आपकी आय क्या है ये जरूरी नहीं है बशर्ते वह बीपीएल हो। इसके लिए हर व्यक्ति जो देश का नागरिक है और उसके पास इसका स्थायी प्रमाण है, वह इसे बनवा सकता है। मुख्य रूप से तीन श्रेणी में राशन कार्ड जारी होते हैं। 

पहला अन्त्योदन राशन कार्ड: यह कार्ड सबसे गरीब परिवारों को जारी होता है जिनके पास कोई स्थिर आय नहीं होती। इसमें बुजुर्ग, बेरोजगार या लेबर श्रेणी के लोग आते हैं। इसका रंग पीला होता है। दूसरा बीपीएल राशन कार्ड: इस कार्ड के लिए एप्लाई वहीं करते हैं जिनकी सालाना आय 10,000 से कम होती है। ये नीले, गुलाबी या लाल रंग में जारी होता है। तीसरा एपीएल राशन कार्ड: इस कार्ड के लिए कोई आय सीमा नहीं निर्धारित नहीं है। बस जो व्यक्ति बीपीएल में नहीं आता वह इसके लिए एप्लाई करता है। ये नारंगी रंग में जारी होता है।

तो ये होता है राशन कार्ड। सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत जो खाद्य वस्तुएँ मुहैया करवा रही है। वो इन्हीं राशन कार्ड पर है। एक व्यक्ति अपने राशन कार्ड में अपने बच्चों और माता-पिता का नाम भी लिखवा सकता है। इसका मतलब है कि एक राशन कार्ड पर यदि 5 लोगों का नाम शामिल है तो सरकार उन पाँच लोगों के लिए अलग-अलग 5-5 किलो राशन देगी।

बीपीएल कार्ड क्या होता है?

अब बात बीपीएल (Below poverty line) की। इसे लेकर स्पष्ट कर दें कि बीपीएल कार्ड और राशन कार्ड दो अलग चीजें हैं। राशन कार्ड से खाद्य वस्तुएँ मिलती हैं। वहीं बीपीएल श्रेणी में आने वाले या बीपीएल कार्ड धारक को स्वास्थ्य, शिक्षा, सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिलता है। इसके अलावा बीपीएल कार्ड धारक यदि किसान है तो उसके ऋण ब्याज में भी कमी आती है। बीपीएल कार्ड का लाभ केवल वे ही व्यक्ति ले सकते हैं। जिनकी सालाना आय मात्र 20,000 या उस से कम होती है।

ऐसे में ये समझना जरूरी है कि बीपीएल एक सामान्य स्थिति में गरीबों को कम दाम में अनाज मुहैया व अन्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाता है। साथ ही सरकार को एक आँकड़ा देता है कि इतने लोग देश में गरीबी रेखा से नीचे है।

मगर, कोरोना में स्थिति इससे अलग है। इसलिए सरकार ने आम जन की जरूरतों को पूरा करने के लिए ये ऐलान किया है। सरकार को मालूम है कि इस कोरोना ने लोगों को हर तरह से तोड़ने का काम किया है। इसलिए पिछले साल शुरू हुई पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना की अवधि उन्होंने नवंबर तक बढ़ाई है।

8 माह में 80 करोड़ जनता के घर मुफ्त में राशन

सरकार द्वारा मामले के संबंध में जारी बयान भी बताते हैं कि उनकी कोशिश इस बीच सिर्फ यही रही कि कोविड-19 संकट का देश की खाद्य सुरक्षा और पोषण पर कोई भारी प्रभाव न पड़े। इसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू हुई ताकि खाद्य सुरक्षा लाभार्थियों को इस महामारी में किसी समस्या का न सामना करना पड़ा।

पिछले साल भी सरकार ने 8 माह के भीतर इस योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के द्वारा लाभ पहुँचाया। इसमें 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह की दर पर खाद्यान्न आवंटित किए गए। खाद्य सुरक्षा से तात्पर्य खाद्य पदार्थों की सुनिश्चित आपूर्ति एवं जनसामान्य के लिए भोज्य पदार्थों की उपलब्धता से है।

सरकार द्वारा जारी बयान

किन लाभार्थी को मिल रही सुविधा

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National food security act), 2013 के अंतर्गत लोगों को सस्‍ती दर पर पर्याप्‍त मात्रा में उत्‍तम खाद्यान्‍न उपलब्ध कराया जाता है ताकि उन्हें खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मिले और वे सम्‍मान के साथ जीवन जी सकें।

मोदी सरकार ने अपने बयान में जो 80 करोड़ लोगों के बारे में बात की है वह जनता इसी अधिनियम के तहत लक्षित है। ऊपर बयान में बताया भी गया है कि ये सुविधा इस एक्ट के तहत आने वाले लाभार्थियों को मिलने वाले मासिक लाभ के अतिरिक्त है।

जानकारी के अनुसार, इस कानून के तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत तक तथा शहरी क्षेत्रों की 50 प्रतिशत तक की आबादी को रियायती दरों पर खाद्यान्‍न उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

वन नेशन वन राशन कार्ड का मिलेगा फायदा

केंद्र सरकार ने कोरोना काल में कम दरों में मिल रही वस्तुओं को भी फ्री किया है। यानी सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि कैसे आम नागरिक की जेब पर असर पड़े बिना उनके घर का राशन तब तक भरा रहे जब तक कि कोरोना काल में राहत नहीं मिलती। इस कोविड दौर में ये सरकार की वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना का लाभ भी जनता को जरूर मिलेगा।

सरकार ने यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत पूरे देश में लागू की थी। इसमें राशन कार्ड धारक देश में कहीं से भी राशन ले सकता है। इस नेटवर्क में देश की लगभग 5.25 लाख राशन दुकानें शामिल हैं। यह व्यवस्था हर स्थान पर राशन उपलब्ध कराती है, जो बायोमैट्रिक सिस्टम पर आधारित है। अब कोरोना संकट में जब अधिकतर लोगों का काम प्रभावित हुआ है तो ये योजना प्रवासी नागरिकों को राहत देगी। इससे राशन कार्ड धारक की पहचान उसकी आँख और हाथ के अँगूठे से होती है।

80 करोड़ जनता का पेट भरने में कितना आएगा सरकार को खर्च

टाइम्स नाऊ की एक खबर के अनुसार, अपनी जनता को खाद्य सुरक्षा मुहैया कराने में सरकार को दीवाली तक 70 हजार करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। इसके अलावा फ्री वैक्सीन वाली योजना को यदि इसमें जोड़ दिया जाए तो उसका खर्चा 10 हजार करोड़ रुपए का होगा।

यानी कुल 80 हजार करोड़ रुपए का खर्च सरकार पर आएगा। बावजूद इन सब प्रयासों के तवलीन जैसे लोग मोदी सरकार पर ऊँगली उठाएँगे। सवाल ऐसे पूछा जाएगा कि लोगों को लगे यदि सरकार राशन मुफ्त में दे रही है तो देश में गरीबी है और अगर नहीं दे रही है तो सरकार को उस तबके कि चिंता ही नहीं जो लगातार कोरोना के कारण बेरोजगारी की मार झेल रहा है।

24 भाजपा कार्यकर्ता, जो बंगाल में ममता बनर्जी की जीत के उन्माद में 1 महीने के भीतर मार डाले गए…

पश्चिम बंगाल में जब से तृणमूल कॉन्ग्रेस की जीत हुई है और ममता बनर्जी की मुख्यमंत्री के रूप में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी हुई है, तभी से भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या का सिलसिला और तेज़ ही हो गया है। मतगणना के परिणाम आए 1 महीने से 1 हफ्ते ज्यादा ही हुए हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में दो दर्जन भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याएँ हुई हैं।

यहाँ हम उन 24 भाजपा कार्यकर्ताओं की बात करेंगे, पिछले एक महीने में जिनकी हत्या सिर्फ इसीलिए कर दी गई क्योंकि वो भाजपा का समर्थन करते थे।

जयप्रकाश यादव

6 जून को उत्तर 24 परगना के बैरकपुर इलाके में भाजपा के पार्टी कार्यकर्ता पर बम से हमला कर हत्या कर दी गई। मृत कार्यकर्ता का नाम जयप्रकाश यादव बताया गया। बंगाल भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) को इस हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। स्थानीय सांसद अर्जुन सिंह ने भी बताया कि भाटपाड़ा के वार्ड नंबर 1 में तृणमूल के गुंडों ने भाजपा के कार्यकर्ता जे.पी. यादव के सिर पर बम मारकर उसकी हत्या कर दी।

अनिल बर्मन

उत्तर बंगाल के कूचबिहार जिले में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक कार्यकर्ता का शव जंगल में पेड़ से झूलता हुआ पाया गया। बीजेपी ने इसे हत्या बताते हुए सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया है। टीएमसी ने आरोपों को नकार दिया। ये घटना 30 मई की है। कार्यकर्ता की पहचान सिताई इलाके के निवासी अनिल बर्मन के रूप में हुई।

राजा सामंतो

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के क्षेत्र डायमंड हार्बर के साधुरघाट गाँव में भाजपा के बूथ अध्यक्ष की हत्या कर दी गई। 29 मई को साउथ 24 परगना में हुई इस घटना में भाजपा कार्यकर्ता को पीट-पीट कर बेरहमी से मार डाला गया।

धीरेन बर्मन

कूचबिहार जिले के सीतलकुची में भाजपा के एक और कार्यकर्ता को मौत के घाट उतारने का आरोप सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर लगा। मृतक की पहचान 34 साल के धीरेन बर्मन के तौर पर हुई। आरोप लगे कि उन्हें बर्बर तरीके से मौत के घाट उतारा गया। वह सीतलकुची ग्राम पंचायत के 234 नंबर बूथ के सक्रिय कार्यकर्ता थे। खेत के लिए निकले धीरेन का अपहरण किया गया और फिर मार डाला गया।

प्रोसेनजीत दास

23 मई को को दमदम पार्क में एक बीजेपी कार्यकर्ता का शव फंदे से झूलता हुआ पाया गया। बताया गया कि उन्होंने आत्महत्या की है। उनकी पहचान 40 वर्षीय प्रसेनजीत दास के रूप में हुई। वह दमदम पार्क के हरिचंद पल्ली का रहने वाले थे। चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद प्रसेनजीत हमले के डर से गए थे, लेकिन उन्हें अपने पिता की शारीरिक बीमारी के कारण घर लौटना पड़ा। वो पहले से दहशत में थे

वहीं TMC ने उन्हें मानसिक रूप से पागल और अवसादग्रस्त बता दिया। इलाके के बदमाशों ने उनकी पिटाई भी की थी।

निर्मल मंडल

आरोप है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस समर्थकों ने 19 मई को हमला कर निर्मल मंडल को घायल कर दिया था। एक दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनाव बाद हिंसा में मारे गए भाजपा समर्थक निर्मल मंडल के परिजन को बारूईपुर पार्टी सांगठनिक जिला कार्यालय में पाँच लाख रुपए का चेक पार्टी कोष से दिया था

घनश्याम राणा

हुगली के आरामबाग में खानकुल विधानसभा क्षेत्र के सकरीपारा किशोरपुर ग्राम पंचायत के बूथ संख्या 13 में पार्टी का काम देखने वाले घनश्याम राणा की पिटाई का आरोप TMC के गुंडों पर लगा, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

अरिंदम मिडी

16 मई को फाल्टा विधानसभा में बीजेपी कार्यकर्ता अरिंदम मिडी का शव फंदे से लटकता हुआ पाया गया। बता दें कि बीजेपी ने उनके बूथ (नंबर 205) में बढ़त बनाई थी। वो पंचकोली गाँव के रहने वाले थे।

धर्मा मंडल

14 मई को धर्मा मंडल नामक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में उनके घर पर हमला किया गया और उनकी पिटाई की गई। TMC के गुंडों द्वारा पिटाई के बाद वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद ये उनकी मौत हो गई।

मनोज जायसवाल

ठीक उसी दिन पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता मनोज जायसवाल का शव पड़ा हुआ मिला। ये घटना बीरभूम के नलहाटी विधानसभा क्षेत्र में हुई।

मालदा में डबल मर्डर

भाजपा ने मालदा में अपने दो कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर लगाया। यहाँ दो भाजपा कार्यकर्ताओं का शव एक ही पेड़ से लटका मिला, जिनकी पहचान 21 वर्षीय मनोज और 19 साल के चैतन्य मंडल के रूप में हुई।

अरूप रुईदास

बाँकुरा में अरूप रुईदास नामक भाजपा कार्यकर्ता का शव पेड़ से लटकता मिला। वो इंडस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के बूथ एजेंट थे।

अभिजीत सरकार

2 मई को को अभिजीत सरकार नामक एक भाजपा कार्यकर्ता ने TMC के गुंडों की हरकतों के बारे में बताया। उसके कुछ ही देर बाद उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने कई बेसहारा कुत्तों को पाला था, जिनका कोई नहीं था। उनमें से एक मादा कुत्ते ने कुछ बच्चों को भी जन्म दिया था। अभिजीत सरकार ने उस कुत्ते की तरफ इशारा करते हुए कहा कि गुंडों ने इसके बच्चों को भी नहीं बख्शा और उन सभी को मार डाला।

उन्होंने रोते-रोते इन हरकतों के बारे में बताया। एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया था कि उनके घर और NGO दफ्तर को तोड़ डाला गया है। कुत्ते के 5 बच्चे को मार डाला गया। उन कुत्तों के बच्चों की तस्वीरें अभिजीत सरकार ने अपने फेसबुक हैंडल से शेयर की थी। उन्होंने बताया कि कोलकाता के बेलिहाता में वॉर्ड संख्या 30 से हिंसा की शुरुआत हुई और परेश पॉल व स्वप्न समंदर जैसे तृणमूल नेताओं के नेतृत्व में ये सब हुआ। 

शोभा रानी मंडल

पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जिन मृत कार्यकर्ताओं के परिजनों से मुलाकात की, उनमें से शोभा रानी मंडल का परिवार भी था। शोभा रानी मंडल के बेटे कमल मंडल नॉर्थ 24 परगना के भाटपारा स्थित जगद्दल विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 177 पर भाजपा के बूथ अध्यक्ष हैं। आरोप है कि TMC के गुंडों ने कमल पर हमला कर दिया और बेटे को बचाने के चक्कर में जख्मी हुईं माँ की मौत हो गई।

कमल मंडल और उनकी पत्नी को छड़ी से पीटा गया था। बुजुर्ग शोभा रानी मंडल की हत्या से उन्हीं की हमनाम 85 वर्षीय शोभा मजूमदार की हत्या की खबर लोगों के जेहन में फिर से ताज़ा हो गई। शोभा मजूमदार के बेटे भाजपा में सक्रिय थे, इसीलिए उनके परिवार पर हमला हुआ था। हमले में जख्मी होने के बाद वो चल बसी थीं।

उत्तम घोष

उत्तम घोष भी भाजपा के कार्यकर्ता थे। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में एक जगह है रानाघाट। यहीं के गंगनापुर इलाके में उत्तम घोष भाजपा के लिए काम कर रहे थे। उन्हें मतगणना के दिन ही आधी रात को मार डाला गया। उनकी हत्या का आरोप भी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर लगा।

होरोम अधिकारी

होरोम अधिकारी पश्चिम बंगाल में भाजपा के कार्यकर्ता थे। वे साउथ 24 परगना के सोनारपुर दक्षिण इलाके में कार्यरत थे। उनकी हत्या कर दी गई। उनकी हत्या को लेकर मीडिया या सोशल मीडिया में ज्यादा कुछ नहीं है। भाजपा ने अपनी जिन कार्यकर्ताओं की हत्या की बात कही थी, उनमें उनका नाम भी शामिल है।

मोमिक मोइत्रा

पश्चिम बंगाल का सीतलकूची आपको याद होगा, जहाँ चुनाव के दौरान ही अर्धसैनिक बलों को घेर लिया गया था और आत्मरक्षा में जब CISF ने गोली चलाई तो 4 हमलावरों की मौत हो गई थी। ममता बनर्जी का एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वो लाशों की राजनीति की बातें कर रही थीं। उसी इलाके में माइक मोइत्रा नाम के भाजपा कार्यकर्ता भी सक्रिय थे, जिनकी मतगणना के बाद हत्या कर दी गई।

गौरव सरकार

पश्चिम बंगाल के बीरभूम का एक इलाका है बोलपुर। यहाँ गौरव सरकार नामक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। सोशल मीडिया पर उनके शव की तस्वीर खूब वायरल हुई और लोगों ने पूछा कि आखिर उनकी गलती क्या थी? भाजपा कार्यकर्ताओं ने सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। उनके शव पर कमल निशान का झंडा भी डाला गया था।

हराधन रॉय, चन्दन रॉय

पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने जम कर हिंसा की। यहाँ भाजपा के कार्यकर्ता हराधन रॉय की हत्या कर दी गई। ये वो इलाका है, जहाँ भाजपा ने मात्र 69 वोटों से जीत दर्ज की है। हराधन रॉय के साथ-साथ यहाँ एक और भाजपा कार्यकर्ता चन्दन रॉय की भी हत्या कर दी गई। उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं।

मिंटू बर्मन

कूच बिहार में ही मिंटू बर्मन नामक भाजपा कार्यकर्ता की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। मिंटू बर्मन को जल्दी-जल्दी में उनके साथी अस्पताल लेकर गए, जहाँ इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।

बिस्वजीत महेश

बिस्वजीत महेश की हत्या की खबर गुरुवार (मई 6, 2021) को आई। पश्चिमी मेदिनीपुर के घटल संगठन जिले में वो भाजपा के ‘शक्ति केंद्र प्रमुख’ के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि तृणमूल के गुंडों ने काफी बेरहमी से उनकी हत्या की। उनकी लाश क्षत-विक्षत अवस्था में मिली। उनके शरीर से आसपास काफी खून बह चुका था।

देबब्रत मैती

देबब्रत मैती को भी टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से मार दिया, ऐसे आरोप हैं। नंदीग्राम के रहने वाले देबब्रत की इतनी पिटाई की गई थी कि अस्पताल में इलाज के दौरान ही वो चल बसे।

माणिक मंडल

भाजपा कार्यकर्ता माणिक मंडलउन 6 लोगों में थे, जिनकी चुनावी नतीजे आने के 24 घंटों के भीतर हत्या कर दी गई थी। कूच बिहार जिले के सीताकुलची में ये घटना हुई।

‘राज’ बन फ्लर्ट किया, गिफ्ट में दी डायमंड की नकली रिंग: मेहुल चोकसी ने ‘गर्लफ्रेंड’ को भी दिया धोखा

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के आरोपित भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की कथित गर्लफ्रेंड बारबरा जाबारिका (Barbara Jabarica) ने इंडिया टुडे के साथ खास बातचीत में कई खुलासे किए हैं। बारबरा ने बताया, “मैं मेहुल चोकसी की दोस्त थीं। उसने मुझे अपना नाम ‘राज’ बताया था।”

बारबरा के अनुसार पिछले साल चोकसी उनसे मिला था। उसने उनसे बढ़ानी शुरू की और फ्लर्ट किया। बाद में डायमंड और ब्रेसलेट गिफ्ट में दिए, लेकिन वे नकली निकले।

दरअसल, सोमवार (7 जून 2021) को चोकसी ने आरोप लगाया था कि बारबरा उसके अपहरण की पूरी योजना का एक अहम हिस्सा थी। उसने दावा किया था कि जब उसे पीटा जा रहा था और बोट पर ले जाया गया, तब बारबरा ने उसकी मदद करने की कोशिश भी नहीं की।

चोकसी के इन आरोपों को लेकर बारबरा ने कहा है कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उनका नाम मेहुल चोकसी के वकीलों और परिवार के लोगों ने शामिल किया है। जब से ये विवाद हुआ है, तब से मैं और मेरा परिवार तनाव में है।

बारबरा ने अपनी बात की पुष्टि के लिए एक व्हाट्सएप चैट भी जारी किया है। इसमें मेहुल चोकसी का नंबर Raj New के नाम से सेव है। चैट में बारबरा को मनाने की कोशिश की जा रही है। मालूम हो कि मेहुल चोकसी को डोमिनिका की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वह खुद को निर्दोष बता रहा है, उसने जमानत की अर्जी भी दायर कर दी है।

बारबरा द्वारा जारी व्हाट्सएप चैट (साभार: आजतक)

दरअसल, भगोड़े हीरा कारोबारी चोकसी का भारत आने से बचने के लिए इसे एक नया दाँव माना जा रहा है। उसने हाल ही में एंटीगुआ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह अपनी दोस्त बारबरा जाबारिका से मिलने गया था तो उसे 8 से 10 लोगों ने बेरहमी से पीटा और उसका फोन, घड़ी व वॉलेट छीन लिया। चोकसी ने जबरन मार-पीटकर डोमिनिका ले जाए जाने का भी आरोप लगाया था।

चोकसी ने कहा था, “पिछले साल भर से मेरी बारबरा जबारिका से दोस्ती थी। वह पहले मेरे जॉली हार्बर स्थित घर के सामने रहती थी। लेकिन बाद में कोको वे होटल शिफ्ट हो गई थी। उसके मेरे स्टाफ के साथ भी अच्छे संबंध थे और हम नियमित तौर पर मिला करते थे और अक्सर शाम को वॉक पर जाते थे।” 

बता दें कि चोकसी पंजाब नेशनल बैंक के 13500 करोड़ रुपए का घोटाला करने वाले आरोपितों में से एक है, जिसमें उसका भाँजा नीरव मोदी समेत कई अन्य भी शामिल हैं। वह 23 मई को एंटीगुआ से लापता हो गया था, और बाद में डोमिनिका में पकड़ा गया था। डोमिनिका की पुलिस ने उस पर देश में अवैध तरीके से एंट्री करने का आरोप लगाया है। यह भी आरोप है कि भारत को प्रत्यर्पण किए जाने से बचने के लिए वह एंटीगुआ और बारबूडा से भाग गया था।

जम्मू-कश्मीर का वेयान बना 100% टीकाकरण वाला देश का पहला गाँव, 18 कि.मी. पैदल चलकर पहुँचे स्वास्थ्यकर्मी

अनुच्छेद 370 हटने के बाद और केंद्रशासित प्रदेश बनने के साथ ही आतंक के साये से निकलने को बेचैन जम्मू-कश्मीर नीत नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। जब देश में कोरोना महामारी को रोकने के लिए आवश्यक टीके की माँग को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा हो, ऐसे में एक पूरे गाँव का टीकाकरण कर दिया जाना किसी उपलब्धि से कम नहीं है, खासकर आतंकवाद से सिसकते एक प्रदेश के गाँव के लिए।

जम्मू-कश्मीर के बाँदीपोरा जिले का वेयान गाँव देश का पहला ऐसा गाँव बन गया है, जहाँ सभी पात्र लोगों (18 वर्ष से ऊपर) को कोविड-19 का टीका लग चुका है। इस उपलब्धि के कारण यह गाँव पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि वेयान गाँव में कुल 362 वयस्क रहते हैं और सभी का टीकाकरण हो गया है। स्वास्थ्यर्किमयों की कड़ी मेहनत और अथक प्रयास के कारण ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सका है। दरअसल, वेयान गाँव बाँदीपोरा जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन इस गाँव तक पहुँचने के लिए 18 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी होती है।

कोविड का टीका लगाते स्वास्थ्यकर्मी (तस्वीर साभार-दैनिक जागरण)

इस गाँव में पूर्ण टीकाकरण होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ कुछ खानाबदोश परिवार भी रहते हैं। ये परिवार पशुओं को चराने के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाकर अपना बसेरा बनाकर कुछ दिनों के लिए वहीं रहते हैं। इस गाँव में इंटरनेट की भी सुविधा नहीं है। इसलिए यहाँ के लोग टीकाकरण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण भी नहीं करा सकते थे।

गाँव में कोविड-19 के टीकाकरण अभियान को ‘जम्मू-कश्मीर मॉडल’ के तहत लागू किया गया। इस मॉडलमें तेज गति से सभी पात्र लोगों के टीकाकरण करने की एक 10 सूत्री रणनीति है। जम्मू-कश्मीर में कोविड टीके को लेकर शुरुआत में लोगों में झिझक होने के बावजूद 45 से अधिक आयु वर्ग के करीब 70 प्रतिशत लोगों को टीके की खुराक दी जा चुकी है, जो राष्ट्रीय औसत का दोगुना है।

वहीं, वेयान गाँव की इस उपलब्धि पर जम्मू-कश्मीर सरकार के मीडिया सलाहकार यतीश यादव ने कहा कि इस केन्द्रशासित प्रदेश में टीकाकरण अभियान को और अधिक तेज किया जा रहा है।

केरल में महिला को फ्लैट में बंद करके बेरहमी से पीटा, बलात्कार आरोपित मार्टिन जोसेफ फरार

केरल के एर्नाकुलम में 27 वर्षीय एक महिला को फ्लैट में बंद कर उसके साथ मारपीट और दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वारदात को अंजाम देने वाला कोई और नहीं, बल्कि महिला का लिव-इन पार्टनर है। उसने कथित तौर पर महिला को फ्लैट में बंद कर दिया था। दोनों शहर के मरीन ड्राइव इलाके के एक फ्लैट में साथ रहते थे।

आरोपित मार्टिन जोसेफ पुलिकॉट ने लंबे समय से कथित तौर पर महिला को एक फ्लैट में बंद कर रखा था। यहाँ वह उसको बेहरमी से पीटता और उसका बलात्कार करता था। एर्नाकुलम के स्थानीय सेंट्रल पुलिस स्टेशन के अनुसार, पीड़िता के पूरे शरीर पर चोट के निशान मिले हैं।

इंटिमेट तस्वीरें जारी करने की देता था धमकी

बताया जा रहा है कि आरोपित मार्टिन महिला को कथित तौर पर धमकी देता था कि अगर उसने इस बारे में किसी को भी बताने की कोशिश की तो वह उसकी सभी इंटिमेट तस्वीरें जारी कर देगा। आखिरकार, इसी साल मार्च में महिला उसकी कैद से भागने में सफल रही और अब वह दूसरी जगह रह रही है।

एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस स्टेशन के एसएचओ (SHO) ने कहा, “आरोपित ने पीड़िता से पाँच लाख रुपए भी ले लिए थे। उसने 8 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।” जाँच अधिकारियों के अनुसार, मार्टिन अभी फरार है, लेकिन उसने अग्रिम जमानत के लिए केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

शुक्र है PM मोदी हैं! पब्लिक की होगी फ्री वैक्सीनेशन, प्रोपेगेंडा के नए टीके की तलाश में विपक्ष

पिछले करीब एक वर्ष में कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई में वैक्सीन और वैक्सीनेशन एक ऐसा विषय रहा जिस पर बहस, विमर्श और दुष्प्रचार आवश्यकता से अधिक हुआ। जिस पर राष्ट्र के संघीय ढाँचे से सम्बंधित राजनीति, शासन प्रणाली, नेतृत्व क्षमता, अनावश्यक प्रश्न और प्रोपेगेंडा ने लगभग पूरे देश को उलझाए रखा। विशेषज्ञों के क्षेत्रों में गैर विशेषज्ञों के अति ज्ञान से लेकर बेवकूफी तक के दर्शन हुए। वैज्ञानिकों की बातों को तमाम लोग अवैज्ञानिक तरीके से काटते नजर आए।

विशेषज्ञों द्वारा लिए गए चिकित्सा और स्वास्थ्य सम्बन्धी निर्णयों पर गैर विशेषज्ञ से लेकर पढ़े-लिखे बेवकूफ प्रश्न करते बरामद हुए। सरकार द्वारा गठित समितियों के निर्णयों को किसी एक व्यक्ति पर थोपने की कोशिश की गई। तमाम विषयों पर राज्य सरकारों के नेतृत्व पेंडुलम की तरह झूलते नज़र आए। महामारी काल में भी विपक्ष की राजनीति को बिना किसी हिचक के विरोध की राजनीति में बदलते देखा गया। प्रोपेगेंडा के अलग स्तर दिखाई दिए। 

‘सरकार वैक्सीन को इतनी जल्दी क्यों लाना चाहती है’ या ‘हम वैक्सीन को लेकर इतने जल्दी में क्यों हैं’, जैसे प्रश्न से शुरू होकर ‘सरकार ने हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेशों को क्यों बेंच दी’, तक की दूरी तय करने में कुछ व्यक्तियों, संस्थाओं, बुद्धिजीवियों, मीडियाकर्मियों और राजनेताओं को छह महीने भी नहीं लगे। ‘हम देश में बनी वैक्सीन नहीं लगवाएँगे’ से शुरू होकर ‘मोदी जी हमें वैक्सीन नहीं दे रहे हैं’ तक की दूरी बमुश्किल पाँच महीने में तय कर ली गई।

‘मोदी जी वैक्सीन बनाने वाले अपने कैपिटलिस्ट मित्रों को फायदा पहुँचाने के लिए देश की गरीब जनता के साथ धोखा कर रहे हैं’ से लेकर ‘मोदी जी ने हमारी वैक्सीन पहले देशवासियों को क्यों नहीं दी’, तक पहुँचने में नेताओं को ढाई महीने भी नहीं लगे। ‘विदेशी वैक्सीन निर्माताओं से राज्य सरकारें खुद वैक्सीन खरीदेंगी’ कहने से लेकर ‘हमारे राज्य विदेशी वैक्सीन निर्माताओं के सामने वैक्सीन के लिए लड़ रहे हैं, ये क्या अच्छा लगता है?’ कहने में डेढ़ महीने नहीं लगे। ‘राज्य सरकारों को अपने निर्णय लेने का अधिकार मिले’ से ‘केंद्र सरकार सब कुछ वापस अपने हाथ में ले’ कहने में विपक्षी मुख्यमंत्रियों को एक महीना भी नहीं लगा। 

आवश्यकता थी प्रधानमंत्री के बोलने की इसलिए वे बोले। आवश्यकता इसलिए थी कि राज्य सरकारें केंद्र के वैक्सीनेशन प्रोग्राम के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक जाने से लेकर वैक्सीन की कमी के लिए केंद्र सरकार को दोषी बताने तक, सब कुछ आजमा चुकी पर वैक्सीनेशन को लेकर उनकी अपनी जिम्मेदारियों की बात कहीं नहीं हो रही थी। जब केंद्र सरकार ने इस विषय में राज्य सरकारों को वैक्सीन खरीदने और वैक्सीनेशन प्रोग्राम खुद लागू करने का अधिकार दिया तब इन्होने उसे सहर्ष स्वीकार किया था। भारतीय वैक्सीन निर्माताओं द्वारा राज्य सरकारों को वैक्सीन की कोट की गई कीमत को लेकर भी प्रश्न उठाए गए। प्रश्न यह था कि ये वैक्सीन निर्माता केंद्र सरकार से जो दाम ले रहे हैं उसी दाम में वैक्सीन राज्य सरकारों को क्यों नहीं मिलनी चाहिए? यह बात और है कि दिल्ली में अधिकतर वैक्सीन निजी अस्पतालों में लगाईं गई, जहाँ ऐसी कीमतें वसूल की गई जो खरीद मूल्य से बहुत अधिक थी। पंजाब सरकार ने तो बाकायदा नियम बनाकर वैक्सीन निजी अस्पतालों को मुनाफे में बेंची और इसके विरुद्ध शोर मचाए जाने पर अस्पतालों से वैक्सीन वापस ले ली।

विपक्षी नेताओं, केंद्र सरकार विरोधी मीडिया, इकोसिस्टम और कार्टूनों तक ने वैक्सीन के विरुद्ध एक माहौल बनाया। उसी का असर है कि तमाम ग्रामीण और शहरी इलाकों में वैक्सीन के प्रति आज भी एक तरह का डर है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और कई कॉन्ग्रेसी नेता वैक्सीन के प्रति भ्रम फैलाते नज़र आए। साथ ही एक इकोसिस्टम ने विदेशी वैक्सीन की एंट्री को मँजूरी के लिए माहौल तैयार करने की कोशिश की, बिना यह सोचे कि केंद्र सरकार पहले से ही विदेशी निर्माताओं और उनके भारतीय सहभागियों के संपर्क में थी। जब सरकार ने विदेशी वैक्सीन के आयात की इजाजत दी तो एक तरह से राज्य सरकारों और इस इकोसिस्टम की बाँछें खिल गई।

राज्य सरकारों ने शायद यह अनुमान लगाया था कि दुनिया भर के वैक्सीन निर्माता बहुत बड़े स्टॉक लेकर बैठे हैं और ये ग्लोबल टेंडर फ्लोट करके उनसे बिड मँगवा कर वैक्सीन खरीद लेंगे। पर बीस दिन में ही निर्णयों को लेकर स्वतंत्रता की उनकी यह माँग जब उन पर भारी पड़ने लगी तब यह कसमसाहट भी शुरू हो गई कि कैसे केंद्र को सब कुछ वापस अपने हाथ में लेने के लिए माहौल बनाया जाए। इन सरकारों की सोच दर्शाती है कि विषय को लेकर उनकी समझ और तैयारी किस स्तर की थी।

अब जबकि केंद्र सरकार ने वैक्सीन की खरीद और राज्य सरकारों को मुहैया कराने की जिम्मेदारी खुद ले ली है, वैक्सीनेशन प्रोग्राम के सुचारु रूप से वापस पटरी पर आने की संभावना है। राज्य सरकारें अपनी भूमिका वैसे ही निभाएँगी जैसा उन्हें निभाना चाहिए? क्या अब राज्य सरकारों को या विपक्ष को केंद्र सरकार, उसके स्वास्थ्य मंत्रालय या प्रधानमंत्री से शिकायत नहीं रहेगी? इस प्रश्न का उत्तर समय देगा।

केंद्र सरकार के इस निर्णय को लेकर जिस तरह से क्रेडिट लेने और देने की होड़ मची हुई है, वह दर्शाता है कि ऐसे निर्णयों को या ऐसी घोषणा का विपक्ष या मोदी विरोधियों के लिए क्या महत्व है। वैसे भी, अभी तो घोषणा को चौबीस घंटे भी नहीं हुए हैं। ऐसे में विपक्ष की असली प्रतिक्रियाएँ जानने के लिए उसे थोड़ा और समय देना आवश्यक है। अभी तो विरोध के नए तरीके खोजे जा रहे होंगे। नया स्क्रीनप्ले लिखा जा रहा होगा। उसके क्रियान्वन को लेकर ब्रेन स्टॉर्मिंग की जाएगी और फिर पता चलेगा कि देशवासियों के हितों के लिए चिंतित लोग उन हितों की रक्षा में क्या करते हैं।

वैसे जाते-जाते मेरा भी एक प्रश्न है; ये अदार पूनावाला को धमकी किसने दी थी?