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काशी-मथुरा मस्जिद गिरवाकर UP चुनाव से पहले सांप्रदायिक दंगे करवाए जाएँगे, BJP को मिलेंगे वोट: सुप्रीम कोर्ट का पूर्व जज

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। इसी बीच शनिवार (5 जून 2021) को उनका एक फेसबुक पोस्ट वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा है, ”अभी तो यह झाँकी है, काशी मथुरा बाकी है। जो लोग चिल्ला रहे हैं कि बीजेपी की लोकप्रियता घट रही है, वह भूल गए हैं कि उत्तर प्रदेश का चुनाव हनोज दूर अस्त। यानी चुनाव अभी दूर है।”

उन्होंने आगे लिखा कि चुनाव से कुछ समय पहले सुनियोजित ढंग से व्यापक सांप्रदायिक दंगे करवाए जाएँगे (संभवतः काशी और मथुरा मस्जिद गिरवाकर), जिससे हमारी मूर्ख जनता जिनके खोपड़े में सांप्रदायिकता का गोबर भरा है, उत्तेजित हो जाएगी और भड़भड़ा कर बीजेपी को वोट दे देगी।

मार्कंडेय काटजू की फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

पूर्व जस्टिस के इस पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। ब्रिजेश द्विवेदी नाम के एक यूजर ने उनकी पोस्ट पर लिखा, ”एक पूर्व न्यायाधीश से ऐसे गिरे हुए वक्तव्य की उम्मीद नहीं थी। यह जानते हुए भी अयोध्या श्री राम की जन्मभूमि है, उनके लिए कई वर्षों तक मुकदमा लड़ा गया, न्यायालय के निर्णय उपरांत ही निर्माण प्रारंभ हुआ। अगर समय रहते न्याय मिल जाए तो लोग आंदोलित ही न हो। आप उकसाने की बात हर समय करते हैं। सदैव हिंदुओं को आक्रांता घोषित करने से नहीं चूकते हैं। अगर सच में हिंदू आक्रामक हो जाए तो अनेक बीमारियाँ ठीक हो जाएँ।”

इसी प्रकार मार्कंडेय काटजू कई अन्य यूजर्स के निशाने पर भी आ गए हैं। हालाँकि, यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी सुर्खियों में बने रहने के लिए वह बेतुके बयान देते रहे हैं। साल 2015 में काटजू ने एक सेमिनार में कहा था, ”90 प्रतिशत भारतीय बेवकूफ होते हैं, जो धर्म के नाम पर आसानी से बहकावे में आ जाते हैं।”

इसके अलावा उन्होंने आम आदमी पार्टी की शाजिया इल्मी को किरण बेदी से सुंदर बताया था। उन्होंने कहा था, “मेरे जैसा आदमी भी जो आम तौर पर वोट नहीं देता (क्योंकि मैं सभी भारतीय राजनेताओं को लफंगा और धूर्त समझता हूँ), केवल शाजिया को वोट देता हूँ।”

मालूम हो कि काटजू सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहते हैं। उनके फेसबुक अकाउंट पर हर रोज आपको कुछ न कुछ विवादास्पद कंटेंट देखने को मिल जाएगा। इसमें से कुछ ऐसे पोस्ट भी होते हैं, जिसे कोई आम आदमी भी शेयर करने से गुरेज करेगा, लेकिन ये बेधड़क चर्चा में रहने के लिए ऐसा करते रहते हैं।

पूर्व जस्टिस होने के बावजूद इन्होंंने घटिया स्तर के बयान देकर देश को शर्मसार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। हद तो तब हो गई, जब पिछले साल सितंबर में काटजू को बैंक से करोड़ों की धोखाधड़ी कर लंदन भागे भगोड़े नीरव मोदी का समर्थन करते हुए देखा गया।

गौरतलब है कि लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर सितंबर 2020 को पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा था कि नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिल पाएगा। नीरव मोदी मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के दौरान काटजू ने आगे कहा कि अगर हीरा कारोबारी नीरव मोदी का भारत में प्रत्यर्पण किया जाता है, तो भारत में निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिल पाएगा।

130 मिनट के अपने बयान में काटजू ने यह भी आरोप लगाया था कि भारत में न्यायिक व्यवस्था चौपट हो गई है। उन्होंने दावा किया कि जाँच एजेंसियाँ जैसे- सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) राजनीतिक गुरुओं के इशारों पर काम कर रही हैं।

बता दें कि अगले साल देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में पूर्व जस्टिस का सांप्रदायिक दंगे भड़काने और माहौल खराब करने वाला ​बयान देना बेहद शर्मनाक है।

5 बड़े RSS नेताओं के ट्विटर हैंडल से हटाया गया ब्लू टिक, उप-राष्ट्रपति नायडू के अकाउंट से भी छेड़छाड़

भारत के उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के अलावा माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Twitter ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेताओं को भी निशाना बनाया है। ट्विटर ने 5 बड़े RSS नेताओं के हैंडल से ब्लू टिक हटा दिया है, अर्थात उन्हें ‘Unverified’ की श्रेणी दी है। जिन 5 RSS नेताओं के ट्विटर हैंडल से ब्लू टिक हटाया गया, वो हैं – सुरेश जोशी, सुरेश सोनी, अरुण कुमार, अनिरुद्ध देशपांडे और कृष्णा गोपाल।

सुरेश सोनी और कृष्णा गोपाल RSS के सह-सरकार्यवाह हैं, वहीं अरुण कुमार ‘अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख’ के पद पर हैं। सुरेश सोनी सरकार्यवाह के पद पर हैं। जुलाई 2019 को RSS प्रमुख मोहन भागवत सहित संघ के अन्य नेताओं के ट्विटर पर आने की घोषणा की गई थी और तब के ट्वीट्स में देखा जा सकता है कि उन्हें ब्लू टिक भी मिला हुआ था। अभी तक इन्हें ‘Unverify’ किए जाने का कारण सामने नहीं आया है।

वहीं फ़िलहाल RSS और इसके मुखिया मोहन भागवत के ट्विटर हैंडल्स पर ब्लू टिक मौजूद हैं। इन दोनों हैंडल्स के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है। RSS के संपर्क प्रमुख अनिरुद्ध देशपांडे के ट्विटर हैंडल से भी वेरिफिकेशन बैज हटा दिया गया है। सुरेश भैयाजी जोशी के ट्विटर हैंडल पर 49.4 हजार, सुरेश सोनी के 33.6 हजार, अनिरुद्ध देशपांडे के 28 हज़ार, कृष्णा गोपाल के 40 हज़ार और अरुण कुमार के 35.6 हज़ार फॉलोवर्स हैं।

बता दें कि Twitter ने भारत के उप-राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू के हैंडल को भी ‘Unverified’ की श्रेणी में डालते हुए ब्लू टिक हटा दिया था। लेकिन बवाल और चौतरफा मीडिया रिपोर्टिंग के बाद इसे रिस्टोर कर दिया गया। मुंबई भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने कहा कि Twitter की ये हरकत सीधा भारत के संविधान का अपमान है। इसी तरह अन्य नेताओं ने भी Twitter का विरोध किया।

‘IMA किसी मजहब का प्रचार-प्रसार न करे’: कोर्ट ने JA जयलाल को चेताया, हिंदू धर्म के अपमान पर नहीं दिया कोई आदेश

दिल्ली की एक अदालत ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर जॉनरोज ऑस्टिन जयलाल को नसीहत दी है कि वो किसी मजहब के प्रचार-प्रसार के लिए IMA प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न करें। हालाँकि, कोर्ट ने साथ ही उस याचिका को रद्द कर दिया, जिसमें हिन्दू धर्म के अपमान के लिए उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा चलाने की अपील की गई थी। एडिशनल सेशन जज अजय गोयल ने ये फैसला सुनाया।

उन्होंने गुरुवार (जून 3, 2021) को सुनाए गए फैसले में रोहित झा नामक व्यक्ति द्वारा दायर किए गए शूट को डिसमिस कर दिया। इस दौरान जज ने पाकिस्तान के कट्टरवादी इस्लामी कवि मोहम्मद इकबाल की पंक्तियाँ ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना’ भी सुनाया। ‘उम्माह’ के पैरोकार अल्लामा इकबाल ने ‘मुस्लिम हैं हम वतन है सारा जहाँ हमारा’ लिखा था और मूर्तिपूजा का मखौल उड़ाया था।

ASJ गोयल ने अपने आदेश में लिखा, “मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा, सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा”। जज ने कहा कि मुस्लिम कवि द्वारा लिखे गए इस तराने में जो ‘हिन्दी’ शब्द है, वो हिन्दुओं की नहीं बल्कि सारे हिन्दुस्तानियों की बात करता है, भले ही उनका जाति-मजहब अलग हो। जज गोयल ने आगे लिखा कि यही तो सेक्युलरिज्म की सुंदरता है।

अदालत ने कहा कि डॉक्टर JA जयलाल ने सुनवाई के दौरान आश्वासन दिया है कि वो आगे इस तरह की गतिविधियों (IMA के माध्यम से ईसाई मजहब के प्रचार-प्रसार) में लिप्त नहीं रहेंगे, इसीलिए उनके खिलाफ कोई आदेश देने की ज़रूरत नहीं है। दिसंबर 2020 में भारत में मेडिकल प्रोफेशनल्स का सबसे बड़ा संगठन IMA के अध्यक्ष बनाए गए जॉनरोज ऑस्टिन जयलाल पर आरोप है कि वो IMA को ढाल बना कर अपने पद का दुरूपयोग करते हुए राष्ट्र को गुमराह कर रहे हैं और हिन्दुओं को ईसाई धर्मांतरण करने के लिए उकसा रहे हैं।

याचिका में डॉक्टर JA जयलाल के इंटरव्यूज और लेखों का हवाला देते हुए माँग की गई थी कि IMA अध्यक्ष को ऐसा कुछ भी लिखने या मीडिया में बोलने से मना किया जाए, जो हिन्दू धर्म या आयुर्वेद का अपमान करता हो। कोर्ट ने कहा कि सेक्युलरिज्म भारतीय संविधान के मूलभूत पहलुओं में से एक है और और इसे ज़िंदा रखने की जिम्मेदारी किसी एक संप्रदाय की नहीं है, बल्कि सभी भारतीयों को इसके लिए संचित प्रयास करने होंगे।

लेकिन, साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने की भी स्वतंत्रता है, लेकिन इसमें किसी अन्य धर्म का अपमान नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सरकारों, अधिकारियों, सार्वजनिक संगठनों और प्राइवेट बॉडीज द्वारा किसी एक मजहब के ऊपर दूसरे को बढ़ावा देना सेक्युलरिज्म के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतें निष्पक्षता को किनारे करती है, भेदभाव को बढ़ावा देती है और बराबरी के व्यवहार को ख़त्म करती है।

कोर्ट ने कहा कि किसी संस्था द्वारा एक्सक्लूसिव रूप से किसी खास मजहब को बढ़ावा देने का अर्थ है कि वो संविधान के सेक्युलर कैरेक्टर के खिलाफ जा रहा है और नैतिकता के संवैधानिक मूल्य के पालन से इनकार कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी परिस्थिति का फायदा उठा कर किसी पर दबाव या लालच के जरिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने याद दिलाया कि सुश्रुत सर्जरी के देवता हैं और सर्जरी एलॉपथी का अहम हिस्सा है।

ASJ गोयल ने कहा कि ये विवाद एलॉपथी और आयुर्वेद का बन गया है लेकिन वो इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि इलाज की सभी विधियाँ महत्वपूर्ण हैं और परिस्थितियों के हिसाब से सभी के अपने फायदे-नुकसान हैं। साथ ही चेताया कि बड़े पदों पर बैठे लोगों को गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि IMA का उद्देश्य मेडिकल कर्मचारियों का हित है, इस मंच का इस्तेमाल किसी के मजहब के प्रचार-प्रसार में न हो।

कब्रिस्तान में शहाबुद्दीन-परिवार की गुंडई: नियम तोड़ कर कब्र को किया जा रहा था पक्का, पुलिस ने रोका

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन मौत के बाद भी विवादों में है। दरअसल, यह विवाद दिल्ली गेट स्थित जदीद कब्रिस्तान को लेकर है। ​यहाँ बिहार के पूर्व सांसद की कब्र को पक्का किया जा रहा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कब्रिस्तान की कमेटी ने इस पर तुरंत संज्ञान लिया और कब्र के निर्माण को रुकवाने के लिए पुलिस बुलाई। बताया जा रहा है कि आज (5 जून 2021) से कब्र का निर्माण कार्य रुक गया है।

कब्र पक्की करने के मामले की जाँच हो

मंसूरी वेलफेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष हसनैन अख्तर मंसूरी का कहना है कि आम लाेगों के लिए अलग और पूर्व सांसद के लिए अलग नियम नहीं हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में ही कब्रिस्तान कमेटी ने एक कानून बनाकर जदीद कब्रिस्तान में कब्र को पक्की करने पर रोक लगा दी थी। अब जगह घेर कर इस कब्र को कैसे पक्का किया जा रहा है। इसकी जाँच होनी चाहिए।

मालूम हो कि ये वही कब्रिस्तान है, जहाँ पहली और दूसरी लहर में कोरोना की वजह से मरने वाले लोगों के शवों को दफनाने के लिए बहुत कम जगह बची थी। वहीं, इसे लेकर इंतजामिया कमेटी लगातार हिदायत देती रही कि लोग कब्र को पक्का ना करें।

बता दें कि तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे शहाबुद्दीन का कोरोना संक्रमण के कारण बीते 1 मई 2021 को निधन हो गया था। उसके परिवार वाले शव को बिहार के सीवान स्थित पैतृक गाँव प्रतापपुर में दफनाना चाहते थे, लेकिन कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए इसकी मंजूरी नहीं मिली। इसके कारण शहाबुद्दीन के शव को दिल्ली स्थित जदीद कब्रिस्तान में दफना दिया गया था।

कब्र पक्का करने को लेकर गहराया विवाद

अब उसी कब्र को पक्का करने को लेकर विवाद गहराया है, जिस पर कब्रिस्तान कमिटी की कब्र को पक्की करने की मनाही है। बताया जाता है कि जब इसे पक्का करने की शुरुआत हुई तो कब्रिस्तान की कमेटी ने उसे रुकवाने की भी कोशिश की, लेकिन फिर से काम जारी रहा। हालाँकि अब यह निर्माण कार्य रोक दिया गया है।

Twitter ने उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू के हैंडल से ब्लू टिक हटाया, विवाद होने पर रीस्टोर किया; उधर नाइजीरिया में हुआ बैन

माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Twitter ने भारत के उप-राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू के हैंडल को ‘Unverified’ की श्रेणी में डालते हुए ब्लू टिक हटा दिया है। इससे पहले एम वेंकैया नायडू के ट्विटर हैंडल पर ब्लू टिक का निशान था, जो अब नहीं है। मुंबई भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने कहा कि Twitter की ये हरकत सीधा भारत के संविधान का अपमान है। इसी तरह अन्य नेताओं ने भी Twitter का विरोध किया।

दरअसल, Twitter की नीति कहती है कि अगर किसी ने अपने हैंडल का यूजरनेम बदला है या फिर अकाउंट निष्क्रिय या अधूरा हो जाता है तो उसे मिला ब्लू टिक हटाया जा सकता है। ब्लू टिक तब भी हटाया जाता है, जब यूजर अब उस स्थिति में नहीं है जब उसे ये दिया गया था। जैसे, किसी ने अपना पद छोड़ दिया हो। साथ ही जो Twitter के सत्यापन वाले मापदंडों का पालन नहीं करते, उनका ब्लू टिक भी छीन लिया जाता है।

हालाँकि,एम वेंकैया नायडू ने जुलाई 23, 2020 के बाद से लेकर अब तक तक इस हैंडल से कोई ट्वीट नहीं किया है। इस हैंडल पर उनके 13 लाख फॉलोवर्स हैं। Twitter की नीति ये भी कहती है कि अगर 6 महीने लगातार लॉगिन नहीं हुआ हो तो वो उस हैंडल को ‘निष्क्रिय’ की श्रेणी में डाल सकता है। वेंकैया नायडू ‘M Venkaiah Naidu (@MVenkaiahNaidu)’ वाले हैंडल से सक्रिय रहते हैं, जिसे ब्लू टिक मिला हुआ है।

ट्विटर ने भारत के उप-राष्ट्रपति के हैंडल से हटाया ब्लू टिक

उधर नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने अनिश्चितकाल के लिए Twitter को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। ‘गल्फ ऑफ गिनी’ में स्थित अफ़्रीकी मुल्क ने कहा कि ट्विटर उसके ‘कॉर्पोरेट अस्तित्व’ को ठेस पहुँचा रहा था, इसीलिए ये कार्रवाई की गई। Twitter ने वहाँ के राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी के एक बयान को डिलीट कर दिया था, जिसके बाद ये कार्रवाई की है। कंपनी ने इसकी पुष्टि की है कि नाइजीरिया में उसके ऑपरेशन्स बंद करने का आदेश दिया गया है, जो हैरान करने वाला है।

सेना के जनरल रह चुके 78 वर्षीय राष्ट्रपति ने नाइजीरिया के दक्षिण-पूर्व इलाके में हिंसा कर रहे आतंकियों को चेतावनी दी थी कि उनकी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएँगी। नाइजीरिया ने देश के अलगाववादी आंदोलन को समर्थन देने का आरोप भी ट्विटर और उसके सीईओ जैक पर लगाया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने नाइजीरिया की इस कार्रवाई का विरोध किया। चीन, तुर्की और म्यांमार पहले ही Twitter को बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं।

भारत में भी ट्विटर ने सरकार के नियमों का पालन करने में कोताही दिखाई है, जिसके बाद केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उसके लिए कड़े शब्दों का प्रयोग किया था। दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई भी हुई थी। लेकिन, इसके बाद ट्विटर ने केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन का पालन करने के लिए हामी भर दी। दिल्ली HC ने उसे नोटिस भी दे रखा है, जिस पर 6 जुलाई को अगली सुनवाई होनी है।

अपडेट: विवाद होने के बाद अब Twitter ने उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के हैंडल को फिर से Verify करते हुए ब्लू टिक रीस्टोर कर दिया है।

गैवीनाथ धाम: जहाँ औरंगजेब ने शिवलिंग पर चलाई थी तलवार लेकिन सेना सहित जान बचाकर भागा, आज भी हैं निशान

भारत के कई ऐसे महान मंदिर रहे जो इस्लामिक आक्रान्ताओं का शिकार हुए। अयोध्या, काशी और मथुरा सहित देश के कई बड़े-छोटे मंदिरों को इस्लामिक कट्टरपंथी आक्रान्ताओं ने अपने मजहबी उन्माद की भेंट चढ़ा दिया लेकिन कई ऐसे दिव्य मंदिर भी थे, जहाँ ये आक्रांता अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके। ऐसा ही एक त्रेताकालीन मंदिर पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थित है, जहाँ मुगल आक्रांता औरंगजेब और उसकी सेना ने शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास किया था लेकिन उसे अपनी सेना सहित जान बचाकर भागना पड़ा।

त्रेताकालीन हैं भगवान गैवीनाथ

विंध्य समेत पूरे मध्य भारत में आस्था का केंद्र गैवीनाथ मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले से 35 किमी दूर बिरसिंहपुर नामक कस्बे में स्थित है। त्रेतायुग में यह स्थान देवपुर कहलाता था। इस स्थान और गैवीनाथ मंदिर का वर्णन पदम पुराण के पाताल खंड में मिलता है।

देवपुर में राजा वीर सिंह का राज्य हुआ करता था। राजा ठहरे महाकाल के अनन्य भक्त तो घोड़े पर सवार होते और पहुँच जाते महाकाल की नगरी उज्जैन। सालों तक ऐसा ही चलता रहा लेकिन जब राजा वृद्ध हुए तब उन्होंने महाकाल से अपनी व्यथा बताई। तब महाकाल ने राजा के स्वप्न में देवपुर में ही दर्शन देने की बात कही। उसी समय नगर के ही गैवी यादव नामक व्यक्ति के यहाँ चूल्हे से शिवलिंग निकला लेकिन गैवी की माँ उस शिवलिंग को दोबारा जमीन के अंदर कर देती।

गैवीनाथ धाम (फोटो : पत्रिका)

महाकाल एक दिन फिर से राजा वीर सिंह के स्वप्न में आए और बताया कि वह जमीन से निकलना चाहते हैं लेकिन गैवी की माँ उन्हें फिर जमीन में धकेल देती है। अंततः राजा गैवी के घर पहुँचे और जिस स्थान से शिवलिंग चूल्हे से बाहर आने का प्रयास कर रहा था, उस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया और महाकाल के आदेश के अनुसार भगवान शिव इस स्थान पर गैवीनाथ के रूप में प्रतिष्ठित हुए। गैवीनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग को भगवान महाकाल का ही रूप माना जाता है।

औरंगजेब भागा था अपनी जान बचाकर

बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम भी मुस्लिम आक्रान्ताओं की हिन्दू घृणा का शिकार हुआ था। यह अलग बात है कि आक्रांता न तो मंदिर का और न ही भगवान की मूर्ति का कुछ बिगाड़ सके। स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार आज से 317 साल पहले 1704 में मुगल आक्रांता औरंगजेब हिन्दू मंदिरों को नष्ट करने के क्रम में इस स्थान पर पहुँचा था।

औरंगजेब के साथ उसकी सेना भी थी। औरंगजेब ने पहले अपनी तलवार से शिवलिंग पर प्रहार किया लेकिन उसे तोड़ने में असफल रहने पर उसने अपनी सेना को आदेश दिया, जिसके बाद शिवलिंग को हथौड़े और छेनी से तोड़ने का प्रयास किया गया। कहा जाता है कि शिवलिंग पर पाँच प्रहार किए गए थे। पहले प्रहार में शिवलिंग से दूध निकला, दूसरे प्रहार में शहद, तीसरे प्रहार में खून और चौथे प्रहार में गंगाजल। जैसे ही औरंगजेब के सैनिकों ने शिवलिंग पर पाँचवाँ प्रहार किया, लाखों की संख्या में भँवर (मधुमक्खी) निकली। औरंगजेब और उसकी पूरी सेना तितर-बितर हो गई और किसी तरह अपनी जान बचाकर भागी।

आज भी गैवीनाथ धाम में शिवलिंग पर तलवार के निशान हैं और खंडित शिवलिंग की ही पूजा होती है। हिन्दू धर्म में खंडित मूर्तियों की पूजा प्रतिबंधित है किन्तु गैवीनाथ धाम देश का इकलौता मंदिर है, जहाँ खंडित शिवलिंग ही पूजे जाते हैं और उनकी मान्यता पूरे हिन्दू धर्म में है।

बिरसिंहपुर के गैवीनाथ धाम स्थित शिवलिंग (फोटो सोर्स : सोशल मीडिया)

बिरसिंहपुर के निवासी कहते हैं कि इसी शिवलिंग के कारण न केवल मंदिर की अपितु उनके शहर और उनकी माँ-बेटियों की रक्षा भी हो सकी। यही कारण है कि पूरे विंध्य क्षेत्र में गैवीनाथ धाम का महत्व भारत के किसी भी बड़े मंदिर की भाँति ही है।

मंदिर में स्थापित शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि जमीन के अंदर कितनी गहराई तक शिवलिंग है, इसके विषय में कोई नहीं जानता। स्थानीय मान्यता है कि चारधाम धाम यात्रा तभी पूरी मानी जाती है, जब चार धामों का जल भगवान गैवीनाथ को अर्पित किया जाए। वैसे तो यह मंदिर हमेशा से ही भक्तों से भरा रहता है लेकिन सावन महीने और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों में यहाँ भक्तों की संख्या लाखों तक पहुँच जाती है।

कैसे पहुँचे?

सतना जिले से नजदीकी हवाईअड्डा खजुराहो में स्थित है। गैवीनाथ धाम से खजुराहो हवाईअड्डे की दूरी लगभग 142 किमी है। इसके अलावा बिरसिंहपुर पहुँचने के लिए सतना तक ट्रेन से पहुँचा जा सकता है। सतना रेलवे स्टेशन पूर्वी मध्य प्रदेश का एक बड़ा और व्यस्त रेलवे स्टेशन है और यहाँ से बस, टैक्सी एवं निजी वाहन के माध्यम से बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम पहुँच सकते हैं। प्रयागराज और वाराणसी के लोग रीवा होते हुए इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं। रीवा से गैवीनाथ धाम की दूरी लगभग 58 किमी है।       

कोविशील्ड वाला सीरम अब बनाएगा Sputnik-V भी: क्षतिपूर्ति पर बोली सरकार- स्वदेशी कंपनियों का रखा जाएगा ख्याल

भारत में वैक्सीनेशन अभियान की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने शुक्रवार (जून 4, 2021) को महाराष्ट्र के पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट (SII) को रूस की  Sputnik V का उत्पादन करने की अनुमति दे दी। इस बीच केंद्र सरकार ने फाइजर द्वारा भारत में क्षतिपूर्ति पर छूट माँगने वाले मामले पर स्पष्ट किया कि उनकी ओर से किसी विदेशी या भारतीय कोविड वैक्सीन निर्माताओं को किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति छूट देने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है

DGCI ने दी अनुमति

जानकारी के अनुसार, सीरम इंस्टीट्यूट में Sputnik V के उत्पादन के लिए अनुमति देने के साथ DCGI ने कुछ शर्ते रखी हैं। डीसीजीआई की ओर से तय की गई शर्तों के मुताबिक सीरम इंस्टिट्यूट को सेल बैंक और वायरस स्टॉक ट्रांसफर के लिए अपने और गमलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के बीच हुए एग्रीमेंट की कॉपी जमा करनी होगी।

इसके अलावा, SII को सेल बैंक और वायरस स्टॉक आयात करने के लिए RCGM अनुमति की एक प्रति और वायरल वेक्टर वैक्सीन Sputnik V के अनुसंधान और विकास को शुरू करने के लिए आरसीजीएम अनुमति की एक प्रति जमा करनी होगी।

बता दें कि, सीरम इंस्टीट्यूट ने पुणे स्थित अपने लाइसेंस प्राप्त हडपसर केंद्र में परीक्षण, जाँच एवं विश्लेषण के लिए कोविड-19 वैक्सीन स्पूतनिक-V को बनाने की अनुमति माँगते हुए डीसीजीआई को आवेदन दिया था। इससे पहले  SII ने 18 मई को जैव प्रौद्योगिकी विभाग की ‘जेनेटिक मैनीपुलेशन रिव्यू कमेटी (आरसीजीएम)’ को भी आवेदन देकर अनुसंधान एवं विकास कार्य करने के लिए स्ट्रेन या कोशिका बैंक का आयात करने की अनुमति माँगी थी।

क्षतिपूर्ति पर अभी फैसला नहीं

एक ओर जहाँ वैक्सीनेशन अभियान को तेज करने के लिए भारत में स्पूतनिक वी के उत्पादन को डीजीसीआई ने अनुमति दे दी है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी कंपनी फाइजर ने भारत में कोरोना वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभाव पर क्षतिपूर्ति से छूट देने की माँग की है।

ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए नीति आयोग सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी के पॉल ने बताया कि विदेशी या घरेलू वैक्सीन को क्षतिपूर्ति से छूट देने पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। उनके मुताबिक फाइजर से बातचीत चल रही है और रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि फाइजर को छूट देने की स्थिति में सरकार स्वदेशी कंपनियों का भी पूरा ख्याल रखेगी, जिन्होंने देश में वैक्सीन उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई है।

वक्फ बोर्ड का अस्पताल, अतीक स्टाफ-मोहसिन संचालक: OT में बंद कर कूटा, दाढ़ी साफ कर दी सजा

मध्य प्रदेश मे पुराने भोपाल स्थित एक अस्पताल में मुस्लिम कर्मचारी को अस्पताल संचालक द्वारा पीटने और उसकी दाढ़ी काटने का मामला सामने आया है। कर्मचारी पर आरोप है उसने अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग मरीज से अभद्रता की थी। इसके चलते अस्पताल के संचालक मोहसिन खान ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर कर्मचारी हाफिज मोहम्मद अतीक की पिटाई कर दी।

मामला पुराने भोपाल के न्यू कबाड़खाना में स्थित शिफ़ा अस्पताल का है। अस्पताल वक्फ बोर्ड का है जिसका संचालन मोहसिन खान द्वारा किया जाता है। मीडिया खबरों के अनुसार घटना दो दिन पुरानी बताई जा रही है। हाफिज मोहम्मद अतीक शिफ़ा अस्पताल में एम्बुलेंस ड्राइवर है। कुछ दिनों पहले उसे मरीजों को अटेंड करने की ड्यूटी दी गई थी। अतीक के अनुसार घटना वाले दिन भी वह अपनी ड्यूटी में था, लेकिन किसी ने उसका वीडियो बनाकर संचालक मोहसिन खान को भेज दिया और उससे कहा कि अतीक ने मरीज के साथ अभद्रता की है।

वीडियो मिलने के बाद संचालक मोहसिन खान ने अपने दो साथियों मुदस्सिर और शहरोज के साथ मिलकर ऑपरेशन थिएटर में रात डेढ़ बजे मोहम्मद अतीक को बंधक बनाया। अतीक ने बताया कि संचालक और उसके साथियों द्वारा उसकी पिटाई की गई, गाली-गलौज की गई और ट्रिमर से उसकी दाढ़ी काट दी गई। हालाँकि अतीक का कहना है कि उसे साजिश के तहत फँसाया गया है और उसकी दाढ़ी काटना एक बड़ा जुर्म है। अतीक ने वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है। उसने कहा है कि यदि दोषियों को सजा नहीं मिली तो वह जान दे देगा।

हालाँकि अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि यदि अतीक दोषी है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी या उसे नौकरी से निकाल देना चाहिए था। उसे इस तरह सजा देना गलत है। मामले में हनुमानगंज थाने में पुलिस ने अस्पताल संचालक मोहसिन खान और उसके साथियों पर मामला दर्ज कर लिया है।  

यूपी पुलिस ने BJP नेता नारायण सिंह भदौरिया को किया गिरफ्तार, हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह को भगाने में की थी मदद

उत्तर प्रदेश में कानपुर साउथ के भाजपा अध्यक्ष के पद से हटाए जाने के बाद नारायण सिंह भदौरिया को आज (जून 4, 2021) नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सिंह पर आरोप है कि उसने हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह को पुलिस की गिरफ्त से भागने में मदद की।

अपराधियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए योगी सरकार ने भाजपा नेता का हिस्ट्रीशीटर के साथ नाम आते ही उसके विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए थे। ऐसे में यूपी पुलिस ने आज नारायण सिंह भदौरिया को नोएडा से गिरफ्तार किया। साथ ही मनोज सिंह को भी पकड़ लिया गया है।

मामले में अब तक 5 गिरफ्तारी हो चुकी हैं। गुरुवार को हिस्ट्रीशीटर को भगाने वाला रणधीर सिंह तोमर गिरफ्तार हुआ था। वहीं शुक्रवार सुबह नोएडा में अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर नारायण सिंह भदौरिया, रॉकी यादव और गोपाल शरण चौहान को गिरफ्तार किया गया। इन अभियुक्तों को कानपुर नगर लाकर पूछताछ की जाएगी और न्यायालय में पेश किया जाएगा।

पूरा मामला 2 जून का है जब नारायण सिंह ने अपने समर्थकों के साथ मनोज सिंह को पकड़ने पहुँची पुलिस पर हमला किया। दरअसल बुधवार को नौबस्ता के उस्मानपुर स्थित एक गेस्टहाउस में भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी चल रही थी और मनोज सिंह भी उसमें शामिल होने पहुँचा था। इस बीच नौबस्ता पुलिस को इसकी भनक लगी कि हिस्ट्रीशीटर मनोज पार्टी में शामिल होने के लिए आया है। पुलिस की एक टीम सादे कपड़ों में उसे दबोचने के लिए पहुँच गई।

पुलिस ने मनोज सिंह को दबोच लिया और पकड़कर ले जाने लगी। लेकिन इसी बीच भदौरिया और उसके समर्थक जीप के पास आ गए। जिलामंत्री ने इस दौरान अपने समर्थकों के साथ पुलिस टीम का घेराव किया और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की कर अपराधी को छुड़ा लिया।

बाद में भाजपा नेता और उनके समर्थकों ने पुलिस के साथ भिड़कर मनोज को गिरफ्तार करवाने से मना कर दिया और फिर उन्हीं के समर्थकों में से किसी ने सिंह की भागने में मदद भी की। पूरी घटना की वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई, तो लोगों ने पुलिस प्रशासन से आरोपितों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की माँग की।

बता दें कि मनोज सिंह के विरुद्ध 27 मुकदमे दर्ज हैं। इनके अलावा वह हत्या के प्रयास मामले में भी आरोपित है। ऐसे में उसे भागने में मदद करने के बाद और पद से हटाए जाने पर भदौरिया ने सब चीजों से अनभिज्ञ होने की नौटंकी भी की। वीडियो जारी कर उसने कहा कि वह सादे कपड़ों में मनोज सिंह को पकड़ने आई पुलिस को पहचान नहीं पाया था।

भाजपा ने अध्यक्ष पद से किया भदौरिया को मुक्त

इससे पहले कल, भाजपा ने पार्टी सदस्य नारायण सिंह भदौरिया के खिलाफ एक अपराधी को भागने में मदद करने और पुलिस कर्मियों को उसे गिरफ्तार करने से रोकने के मामले में कड़ी कार्रवाई की थी। भाजपा ने गुरुवार को जारी पत्र में कहा था, “दो जून को हुई घटना का संज्ञान लेते हुए भाजपा कानपुर दक्षिण अध्यक्ष नारायण सिंह भदौरिया को तत्काल प्रभाव से उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। जिले से तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है, जो 24 घंटे के भीतर घटना की जाँच रिपोर्ट देगी। यह रिपोर्ट पार्टी के क्षेत्रीय और राज्य संगठन के साथ साझा की जाएगी।”

‘यीशु मसीह छोड़ कोई रक्षा करने नहीं आएगा’: हाईकोर्ट ने कहा- दूसरे धर्मों को नहीं दिखा सकते नीचा, राहत से इनकार

दूसरे धर्मों को नीचा दिखाकर यीशु को एक मात्र रक्षक बताने वाले युवक को राहत देने से कर्नाटक हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे धर्मों को नीचा दिखाने का अधिकार नहीं है। प्रीसिला डिसूजा बनाम कर्नाटक राज्य मामले में जस्टिस एचपी संदेश ने सुनवाई करते हुए आरोपित के विरुद्ध दर्ज शिकायत को रद्द करने से मना किया। कोर्ट ने कहा कि किसी एक व्यक्ति द्वारा कोई धर्म मानने से उसे दूसरे धर्म का अनादर करने का मौलिक अधिकार नहीं मिल जाता।

लाइव लॉ के अनुसार, इस संबंध में एक महिला ने आरोपित व्यक्ति के विरुद्ध शिकायत की थी। महिला ने बताया था कि आरोपित उसके निवास पर आया और बाकी धर्मों को नीचा दिखाते हुए कहा कि न भगवद्गीता और न कुरान मन को शांति देंगे। यीशु मसीह को छोड़कर कोई रक्षा करने नहीं आएगा।

अपने ऊपर हुई इसी शिकायत के मद्देनजर आरोपित ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसका तर्क था कि उसके ऊपर हुआ केस भारत के संविधान अनुच्छेद, 14, 21 और 25 का उल्लंघन करता है। हालाँकि, कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद कहा कि आरोपित पर विशेष आरोप लगे हैं कि उसने किसी अन्य धर्म का अपमान किया।

कोर्ट ने कहा कि शिकायत के बयानों और गवाहों के बयानों को पढ़ने के बाद, यह स्पष्ट है कि धर्म का प्रचार करते समय उन्होंने (आरोपित) विशेष रूप से उल्लेख किया कि अन्य धार्मिक ग्रंथ कोई उम्मीद नहीं देते और केवल यीशु मसीह ही उनकी रक्षा कर सकते हैं।

याचिका में चूँकि ये भी कहा गया है कि ये मामला धारा 298 लगाने वाला नहीं है। इसलिए इस पर कोर्ट ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि कानून की स्थापना करते समय जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों जिनका उद्देश्य किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को उसके धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करना है, के संबंध में आईपीसी की धारा 295 (ए) लागू की गई, और जाँच के बाद जाँच अधिकारी ने धारा 298 लागू किया… इसलिए, याचिकाकर्ताओं के वकील की यह दलील कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप आईपीसी की धारा 298 को आकर्षित नहीं करते हैं और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ प्रक्रिया का मुद्दा भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन होगा, स्वीकार नहीं किया जा सकता है।”

गौरतलब है कि इससे पहले तमिलनाडु के पेरंबलुर जिले के वी कलाथुर (मुस्लिम बहुल इलाके ) में हिंदू मंदिरों से जुलूस या भ्रमण निकालने का विरोध होने पर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी। यहाँ इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदू त्योहारों को ‘पाप’ करार दे रखा था। इस केस में कोर्ट ने अपने फैसले के दौरान टिप्पणी की थी,

“केवल इसलिए कि एक धार्मिक समूह विशेष इलाके में हावी है, इसलिए दूसरे धार्मिक समुदाय को त्योहारों को मनाने या उस एरिया की सड़कों पर जुलूस निकालने से नहीं रोका जा सकता है। अगर धार्मिक असहिष्णुता की अनुमति दी जाती है, तो यह एक धर्मनिरपेक्ष देश के लिए अच्छा नहीं है। किसी भी धार्मिक समूह द्वारा किसी भी रूप में असहिष्णुता पर रोक लगाई जानी चाहिए।”

अदालत ने आगे कहा था, “इस मामले में, एक विशेष धार्मिक समूह की असहिष्णुता उन त्योहारों पर आपत्ति जताते हुए दिखाई जा रही है, जो दशकों से एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं। गलियों और सड़कों से निकलने वाले जुलूस को सिर्फ इसलिए प्रतिबंधित करने की माँग की गई क्योंकि इलाका मुस्लिम बहुल है यहाँ कोई भी हिंदू त्योहार या जुलूस नहीं निकाला जा सकता है।”