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‘MF हुसैन की तरह भारत छोड़ा तो बॉलीवुड वालों की चड्डी उतार दूँगा’: KRK ने चेताया, अर्जुन कपूर को बताया ‘मर्द, असली दोस्त’

खुद को अभिनेता और फिल्म समीक्षक बताने वाले कमाल आर खान (KRK) ने आरोप लगाया है कि बॉलीवुड के लोग उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं और कहा कि वो मशहूर चित्रकार दिवंगत MF हुसैन की तरह हमेशा के लिए भारत छोड़ सकते हैं। उन्होंने कानूनी पचड़े से बचने के लिए देश छोड़ने की बात की। उन्होंने साथ ही चेताया कि उन्हें ज्यादा तंग न किया जाए, वरना उनके पास कई वीडियो और ऐसे राज़ हैं, जिनसे बड़े-बड़े रहस्य खुल सकते हैं।

उन्होंने कहा, “बॉलीवुड के लोगों को सोचना चाहिए कि वो कोर्ट का इस्तेमाल कर के मुझे तभी रोक पाएँगे, जब मैं भारत में रहूँगा। लेकिन, जैसे ही मैंने भारत छोड़ा, मुझे दुनिया का कोई कानून फिल्मों की समीक्षा से नहीं रोक पाएगा। अगर मैं भारत छोड़ कर चला जाता हूँ तो बॉलीवुड वाले ज़िंदगी भर अफ़सोस करेंगे, क्योंकि भाईचारा ख़त्म हो चुका होगा। मैं कई बॉलीवुड वालों की चड्डी उतार सकता हूँ। अगर मैं भारत से बाहर गया तो मैं ये सब बहुत धूम-धाम से करूँगा।”

KRK ने बॉलीवुड के लोगों को चेताया कि वो आज जो भी कह रहे हैं, अच्छी तरह नोट कर लें। उन्होंने कहा कि वो खुद फिल्मों की समीक्षा नहीं करना चाहते हैं, लेकिन बॉलीवुड वाले ही उन पर ऐसा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। इससे पहले KRK ने सलमान खान को एक टीवी अभिनेता बना कर छोड़ देने और उन्हें सड़क पर लाने की धमकी दी थी। उनके खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई 7 जून को होनी है।

KRK ने सलमान खान के खिलाफ लड़ाई में अभिनेता अर्जुन कपूर का समर्थन मिलने का दावा करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया है। उन्होंने बताया कि अर्जुन कपूर ने उन्हें फोन कर के लंबी चर्चा की। उन्होंने अर्जुन को अपने असली दोस्त करार देते हुए कहा कि वो एक ऐसे ‘मर्द’ हैं जो किसी से डरते नहीं हैं। कमाल आर खान ने वादा किया कि वो आगे अर्जुन कपूर की किसी भी फिल्म की आलोचना नहीं करेंगे।

KRK ने ट्विटर पर रखी अपनी बात

KRK ने ट्विटर पर लिखा, “क्या मेरी समीक्षा न करने से आप गदहे से घोड़े बन जाओगे? आप गदहे हो और गदहे ही रहोगे। बॉलीवुड गलत करे या सही, अगर आपको यहाँ रहना है तो उनकी हार एक करतूत का समर्थन करना पड़ेगा। अगर आप सिर्फ सच्चाई का साथ देते हैं तो आपका करियर खत्म कर दिया जाएगा। बॉलीवुड मुंबई का मालिक है और यहाँ आप उन्हें कुछ भी करने से रोक नहीं सकते। ये एक इलूमिनाती दुनिया है।”

बता दें कि गायक मीका सिंह ने KRK के ऊपर एक गाना बनाया है। इस गाने में म्यूजिक के साथ-साथ कुत्तों के भौंकने की आवाज़ें भी आ रही हैं। उन्होंने कमाल आर खान के घर के बाहर वीडियो बनाया और दावा किया कि KRK ने सलमान खान के डर सर अपना घर ही बेच डाला है। मीका ने कहा, “तू सारी उम्र मेरा बेटा ही रहेगा, मेरी ऐसी कोई लड़ाई नहीं है। तुम मेरे बेटे हो। तूने ये घर बेच दिया है अब और जितने घर हैं, उन्हें मत बेचना क्योंकि मेरी तेरे से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है।”

थियानमेन चौक नरसंहार: माइक्रोसॉफ्ट से गायब हुआ चीनी टैंक के सामने खड़ा होने वाला ‘टैंक मैन’, कंपनी ने बताया- ‘मानवीय भूल’

गूगल पर यदि टैंक मैन लिख कर सर्च करेंगे तो आपके सामने एक ऐसी तस्वीर होगी जिसमें एक अकेला आदमी टैंक के आगे सावधान स्थिति में निर्भय खड़ा है। ये तस्वीर चीन के थियानमेन चौक की है। जहाँ 4 जून 1989 को हजारों लोगों का नरसंहार हुआ था। यूरोपीय मीडिया के अनुसार इस घटना में 10 हजार लोग मारे गए थे।

शुक्रवार को इस नरसंहार की 32वीं बरसी थीं। ऐसे में जब अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर के सोशल मीडिया यूजर्स ने माइक्रोसॉफ्ट के सर्च इंजन बिंग पर उस अंजान टैंक मैन की तस्वीर को तलाशा तो रिजल्ट में कुछ भी नहीं मिला। लोगों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए और आशंका जताई कि तस्वीर को सेंसर किया गया है। बाद में माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन ने सफाई देते हुए इस पर बयान जारी किया।

यूएस में सर्च करने पर नहीं मिला लोगों को टैंकमैन

माइक्रोसॉफ़्ट ने अपने सर्च इंजन बिंग पर ‘टैंक मैन’ सर्च किए जाने पर कोई नतीजा ना दिखाए जाने को एक ‘आकस्मिक मानवीय भूल’ क़रार दिया। माइक्रोसॉफ़्ट का कहना है कि ये मामला ‘एक आकस्मित मानवीय भूल का नतीजा था और हम इसे ठीक करने के लिए तेज़ी से काम कर रहे हैं।

हालाँकि, ह्यूमन राइट वाच के डायरेक्टर केनेथ रॉथ ने कहा है कि उनके लिए ये मानना बहुत मुश्किल है कि ऐसा ग़लती से हुआ है। इस मामले की पहली शिकायत आने के कई घंटों बाद बिंग में टैंक मैन की तस्वीरें फिर से दिखने लगी थीं।

बता दें ‘टैंक मैन’ शब्द का इस्तेमाल एक अज्ञात व्यक्ति का वर्णन करने के लिए किया जाता है, जो जून 1989 में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के दौरान चीन के थियानमेन स्क्वायर में टैंकों के सामने खड़े होने के लिए प्रसिद्ध है। कहते हैं कि चीन, उस समय थियानमेन चौक पर हुई कार्रवाई पर ऑनलाइन होने वाली किसी भी चर्चा को सेंसर करता रहता है। ऐसे में टैंकमैन की तस्वीर न मिलने पर यूजर्स ने थियानमेन स्क्वायर नरसंहार से संबंधित जानकारियों पर संभावित सेंसरशिप के बारे में चिंता जताई। इसी के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने अपना बयान दिया।

गौरतलब है कि चीन में मीडिया के ऊपर लगे कड़े सेंसरशिप के कारण आज भी उस घटना से जुड़ी कई अहम जानकारियाँ उपलब्ध नहीं हैं। चीन की सरकारी मीडिया कम्युनिस्ट पार्टी के आदेश पर केवल वही बातें लिखती हैं जो उनके अपने फायदे की होती हैं।

एक रिपोर्ट बताती है कि चीन थियानमेन चौक नरसंहार से जुड़े सारे सबूत मिटाने की कोशिशों में लगा है। अब तक वहाँ की सरकार उस घटना से जुड़े 3 हजार से ज्यादा प्रमाणों को मिटा चुकी है और कुछ को सेंसर कर दिया है। उनके मुताबिक इस नरसंहार में केवल 200-300 लोग मारे गए थे जबकि यूरोपीय मीडिया कहता है कि 200-300 नहीं दस हजार लोग मारे गए थे।

ट्विटर के नोटिस पर कार्टूनिस्ट मंजुल का प्रोपेगेंडा- ‘फासीवाद’ का रोना, मोदी सरकार को ठहराया जिम्मेदार: जानें क्या है मामला

भाजपा विरोधी कार्टूनिस्ट मंजुल ने ट्विटर मोदी सरकार की यह कहते हुए आलोचना की कि सरकार उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाना चाहती है। शुक्रवार (04 जून) को मंजुल ने ‘ट्विटर लीगल’ के द्वारा भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए लिखा, “जय हो मोदी जी की सरकार की”।

मंजुल के द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक दूसरे ट्वीट में, यह जताते हुए कि भारत सरकार ने ट्विटर को मंजुल को चेतावनी देने के लिए कहा है, मंजुल ने लिखा, “शुक्र है मोदी सरकार ने ट्विटर को यह नहीं लिखा कि ये ट्विटर हैन्डल बंद करो। ये कार्टूनिस्ट अधर्मी है, नास्तिक है, मोदी जी को भगवान नहीं मानता।“ मंजुल ने यह भी ट्वीट किया कि अच्छा होता अगर सरकार बता देती कि दिक्कत किस ट्वीट से है क्योंकि दोबारा वैसा ही काम किया जाता जिससे लोगों को सुविधा हो जाती।  

मंजुल के द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

जी मीडिया और डीएनए के लिए कभी काम करने वाले कार्टूनिस्ट मंजुल ने फ्रीलांस में काम शुरू किया और अपने कार्टून के जरिए भाजपा विरोधी एजेंडा फैलाने लगे। इसके बाद मंजुल को लेफ्ट-लिबरल लॉबी का भी साथ मिला। मंजुल के द्वारा हाल में किए गए ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने दावा किया कि मोदी सरकार अब एक कार्टूनिस्ट से भयभीत है।

‘पत्रकार’ स्वाति चतुर्वेदी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ट्विटर के द्वारा ऐसे ईमेल भेजना सामान्य है। एक पॉपुलर ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने ट्विटर लीगल द्वारा भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट शेयर किया जिसमें वही मैसेज था जो मंजुल को भेजा गया है। मैसेज में लिखा हुआ था कि ट्विटर को भारतीय कानून एजेंसियों द्वारा यूजर (उदाहरण के लिए अंकुर सिंह) के ट्विटर एकाउंट के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई है। कार्टूनिस्ट विकासो को भी ऐसे कई ईमेल भेजे जा चुके हैं।  

ट्विटर यूजर अंकुर सिंह द्वारा ट्विटर लीगल द्वारा मिला नोटिस

ऑपइंडिया को भी मिलती रही है ट्विटर से लीगल वार्निंग :

ऑपइंडिया को भी ऐसी 100 से अधिक लीगल वार्निंग मिल चुकी हैं। यहाँ 24 जनवरी 2021 को ट्विटर लीगल द्वारा ऑपइंडिया को भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट है जिसमें वही मैसेज है जो मंजुल और अंकुर सिंह को भी भेज गया। ऐसा केवल एक मैसेज नहीं है बल्कि हिंदुओं और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या पर लगातार कवरेज के कारण ऑपइंडिया को सैकड़ों ऐसे ईमेल भेजे जा चुके हैं। यह तो सभी को पता है कि एक ऐसी लेफ्ट-लिबरल और एंटी-हिन्दू लॉबी है जो नहीं चाहती कि हमारी रिपोर्ट्स सबके सामने आएं जिससे हिंदुओं और भाजपा कार्यकर्ताओं के ऊपर होने वाले अत्याचार अनसुने रह जाएं।  

ऑपइंडिया को भेजे गए ईमेल की लिस्ट
ऑपइंडिया को भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट

मोदी सरकार को बदनाम करने की सोची-समझी रणनीति :

अगर हम मंजुल के इस प्रोपेगेंडा पर यकीन करें कि मोदी सरकार ने ट्विटर को उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है तो इस हिसाब से ऑपइंडिया, अंकुर सिंह और विकासो के खिलाफ भी भारत सरकार ही काम कर रही है। लेफ्ट-लिबरल हमेशा से ही मोदी सरकार के खिलाफ एजेंडा चलाते रहते हैं और अब मंजुल द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ चलाया जाने वाला प्रोपेगेंडा भी उसीका ही एक हिस्सा है।   

मंजुल, मोदी सरकार के खिलाफ पहले भी फेक न्यूज फैला चुके हैं। उन्होंने 2017 की एक फोटो को कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर का बता कर प्रचारित किया था जिसमें एक व्यक्ति रिक्शा में लाश को लेकर जा रहा है।  

मुंगेर फायरिंग केस: अनुराग पोद्दार के परिजनों को देना ही होगा ₹10 लाख का मुआवजा, SC ने लगाई बिहार सरकार को फटकार

बिहार के मुंगेर में पिछले साल दुर्गा पूजा के दौरान हुई फायरिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज (जून 5, 2021) बिहार सरकार की विशेष याचिका को खारिज कर दिया। राज्य सरकार ने SC में पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने सरकार को मृतक के परिवार को मुआवजे के तौर पर 10 लाख रुपए देने के निर्देश दिए थे।

शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्देशों को बरकरार रखा। साथ ही अब तक मुआवजा भुगतान न किए जाने पर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई। जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने हाईकोर्ट का आदेश न मानने पर सरकार के रवैये की आलोचना की। 

कोर्ट ने कहा कि यह चौंकाने वाला है। मुंगेर पुलिस की ओर से फायरिंग मामले में समय पर जाँच क्यों नहीं की गई? इसमें FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई? हाईकोर्ट के निष्कर्ष के मुताबिक, तत्कालीन एसपी सत्तारूढ़ दल के एक राजनेता की रिश्तेदार थीं, जिसकी वजह से मामले की जाँच पर असर पड़ा।

वहीं बिहार सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता मनीष कुमार ने पीठ से कहा कि मामले में अभी जाँच चल रही है, ऐसे में मुआवजे के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी जानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि जाँच पूरी होने तक पुलिस की गलती थी ये नहीं कहा जा सकता।

हालाँकि, पीठ ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि निष्पक्ष जाँच में पुलिस की ओर से लापरवाही हुई है। उस लापरवाही के लिए मुआवजा दिया जा सकता है। निष्पक्ष जाँच पीड़ित और उनके परिवार के सदस्यों के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

पूरा मामला 26 अक्टूबर 2020 का है। मुंगेर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान घटना हुई थी। अधिकारियों ने बताया था कि जुलूस के दौरान कानून व्यवस्था बिगड़ी और गैर कानूनी गतिविधियाँ जैसे पुलिस पर पत्थर बाजी और गोलियाँ चलाईं गईं। लेकिन मामले में याचिका डालने वाले अनुराग के पिता ने बताया कि एसपी के नेतृत्व वाली मुंगेर पुलिस ने घटना के समय कोई प्रक्रिया को फॉलो नहीं किया और श्रद्धालुओं पर बर्बर ढंग से फायरिंग की।

इसके बाद इस मामले में हुई जाँच में भी पाया गया कि दुर्गा पूजा में हुई फायरिंग के दौरान 18 वर्षीय अनुराग बिलकुल निहत्था था और उस पर किसी प्रकार की कोई गैर कानूनी गतिविधि में शामिल होने के आरोप नहीं थे। इसलिए कोर्ट ने राज्य को मृतक के परिजनों को 10 लाख का मुआवजा देने के निर्देश दिए थे।

52 महीने ट्वीट नहीं किया फिर भी वेरिफाइड रहा रवीश का ट्विटर हैंडल, 6 महीने इनएक्टिव रहे तो छीन लिया वेंकैया नायडू का ब्लू टिक

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर ने भारत सरकार के नेताओं को परेशान करने और देश के नियम-कानून का मखौल उड़ाने का मन बना लिया है। तभी वो कभी ‘वैक्सीन से मौत’ की अफवाह का फैक चेक हटा देता है, कभी देश के उप-राष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल का ब्लू टिक हटा देता है और कभी सरकार के खिलाफ कोर्ट में कुतर्क देता है। लेकिन, रवीश कुमार जैसे वामपंथी पत्रकारों के प्रति Twitter गजब की नरमी दिखाता है।

अब Twitter ने बताया है कि उसने क्यों देश के उप-राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू के ट्विटर हैंडल को ‘Unverify’ कर उन्हें मिला ब्लू टिक हटा दिया। वेंकैया नायडू के ट्विटर हैंडल पर 13 लाख फॉलोवर हैं, जबकि उनके उप-राष्ट्रपति वाले आधिकारिक हैंडल पर 9.3 लाख लोग जुड़े हुए हैं। ट्विटर ने मनमानी करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत के अलावा 5 अन्य बड़े RSS नेताओं के हैंडल्स को मिला ब्लू टिक भी छीन लिया।

साथ ही रिटायर्ड IAS अधिकारी संजय दीक्षित को मिला ब्लू टिक भी वापस ले लिया गया। अब ट्विटर का कहना है कि उप-राष्ट्रपति नायडू का हैंडल ‘Inactive’ (निष्क्रिय) था, इसीलिए इसे ‘Verified’ की श्रेणी से हटाया गया था। वेंकैया नायडू ने इस हैंडल से अंतिम बार जनवरी 2020 में ट्वीट किया था। ट्विटर के नियमानुसार, 6 महीने तक अगर हैंडल निष्क्रिय रहा तो उसे ‘Unverified’ कर दिया जाता है।

लेकिन, रवीश कुमार जैसे पत्रकारों के समय उसका ये नियम कहाँ चला जाता है? रवीश कुमार के सोशल मीडिया हैंडल को खँगालने पर आप पाएँगे कि उन्होंने अगस्त 22, 2015 में एक ट्वीट के बाद सीधा जनवरी 2020 में एक ट्वीट को एक रीट्वीट किया था, अर्थात साढ़े 4 साल का गैप। फिर उन्होंने सीधा जनवरी 2021 में एक ट्वीट और एक रीट्वीट किया, मतलब फिर 1 साल का गैप। इस साल भी उन्होंने पिछले 4 महीनों से कोई ट्वीट नहीं किया है।

इसी तरह वामपंथी कॉमेडी समूह ‘ऑल इंडिया बकचो$’ के पेज को भी इनएक्टिव रहने के बावजूद उसका ब्लू टिक नहीं छीना गया। AIB ने जून 2020 के बाद से कोई ट्वीट ही नहीं किया है। इसके संस्थापक और तथाकथित कॉमेडियन गुरसिमरत खम्भा ने तो अप्रैल 2015 के बाद से कोई ट्वीट ही नहीं किया, लेकिन उनके हैंडल पर ब्लू टिक बड़े शान से मौजूद है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में आरोपित रहीं रिया चक्रवर्ती ने अपना अंतिम ट्वीट जुलाई 2020 में किया था।

इधर इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमिडियरी गाइडलाइंस एण्ड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के तहत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत सरकार के नए आईटी कानूनों के अनुपालन के लिए कहा गया था, जिस पर ट्विटर को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि ट्विटर ने नए आईटी रूल्स के अंतर्गत नियुक्त किए जाने वाले चीफ कंप्लायन्स ऑफिसर से संबंधित कोई जानकारी साझा नहीं की है और ट्विटर द्वारा नियुक्त किए गए रेसीडेंट ग्राइवेंस ऑफिसर और नोडल कान्टैक्ट पर्सन भी ट्विटर के कर्मचारी नहीं हैं।

14 कंडोम हर खिलाड़ी को… लेकिन छूने से बचना है, शारीरिक संपर्क कम रखना है: टोक्यो ओलंपिक 2021 में अजब-गजब

जापान के टोक्यो में इस साल जुलाई में होने वाले ओलंपिक को लेकर तैयारियाँ जोरों पर हैं। इस दौरान परंपरा के अनुसार टोक्यो ओलंपिक आयोजकों द्वारा खेलों में भाग लेने वाले एथलिटों को 160000 से अधिक मुफ्त कंडोम दिए जाएँगे। यानी इसमें शामिल होने वाले 11000 एथलीटों में से प्रत्येक को लगभग 14 कंडोम देने की व्यवस्था की गई है। लेकिन रुकिए… पिक्चर अभी बाकी है।

दरअसल, यह परंपरा दुनिया भर में कोरोना वायरस फैलने से पहले से ही अपनाई जाती रही है, लेकिन कोरोना काल में ओलंपिक का सफल आयोजन कराना आयोजकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। यही कारण है कि आयोजकों ने एथलीट्स को खेल गाँव में कंडोम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। समिति ने घोषणा की है कि एथलीट्स इन कंडोम को याद के तौर पर अपने घर ले जा सकते हैं। उन्हें अपने देश में कदम रखने के बाद ही कंडोम का इस्तेमाल करना होगा।

कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए आयोजकों ने यह निर्णय लिया है, ताकि एथलीट्स एक-दूसरे के संपर्क में ना आएँ। इसके अलावा आयोजक एक वैश्विक स्वास्थ्य अभियान के हिस्से के रूप में एथलीटों को एक-दूसरे को छूने से बचने के लिए भी कह रहे हैं। समिति ने अपने कंडोम कार्यक्रम की घोषणा करते हुए 33 पन्नों की एक प्लेबुक भी जारी की है, जिसमें एथलीटों को शारीरिक संपर्क को कम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। 

समिति ने मंगलवार (1 जून 2021) को कहा कि उनका इरादा और लक्ष्य यह है कि एथलीट खेल गाँव में कंडोम का इस्तेमाल नहीं करें, बल्कि वह अपने देश वापस जाकर इसका उपयोग करें।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने सुरक्षित यौन संबंध और एचआईवी (HIV) की रोकथाम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साल 1988 में खेलों में कंडोम देने की अपनी परंपरा शुरू की थी। रियो ओलंपिक के दौरान समिति ने एथलिट्स को 450000 कंडोम दिए थे। उसकी तुलना में इस बार ओलंपिक 2021 में बेहद कम 160000 कंडोम वितरित किए जाएँगे।

तुरंत मानो नए नियम, वरना खुद होगे जिम्मेदार: Twitter को केंद्र सरकार की ओर से आखिरी नोटिस

भारत सरकार ने ट्विटर को आईटी रुल्स के अनुपालन के लिए आखिरी नोटिस जारी किया है। इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमिडियरी गाइडलाइंस एण्ड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के तहत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत सरकार के नए आईटी कानूनों के अनुपालन के लिए कहा गया था, जिस पर ट्विटर को नोटिस जारी किया गया है।

नोटिस में कहा गया है कि ट्विटर ने नए आईटी रूल्स के अंतर्गत नियुक्त किए जाने वाले चीफ कंप्लायन्स ऑफिसर से संबंधित कोई जानकारी साझा नहीं की है और ट्विटर द्वारा नियुक्त किए गए रेसीडेंट ग्राइवेंस ऑफिसर और नोडल कान्टैक्ट पर्सन भी ट्विटर के कर्मचारी नहीं हैं। नोटिस में बताया गया है कि नए आईटी रूल्स के तहत अनुपालन में असमर्थ रहने पर ट्विटर आगामी परिणामों के लिए जिम्मेदार होगा।

इससे पहले 04 जून को माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Twitter ने भारत के उप-राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू के हैंडल को ‘Unverified’ की श्रेणी में डालते हुए ब्लू टिक हटा दिया था। विवाद होने के बाद अब Twitter ने उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के हैंडल को फिर से Verify करते हुए ब्लू टिक रीस्टोर कर दिया है।

भारत के उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के अलावा माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Twitter ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेताओं को भी निशाना बनाया है। ट्विटर ने 5 बड़े RSS नेताओं के हैंडल से ब्लू टिक हटा दिया है, अर्थात उन्हें ‘Unverified’ की श्रेणी दी है।

उधर नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने अनिश्चितकाल के लिए Twitter को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। ‘गल्फ ऑफ गिनी’ में स्थित अफ़्रीकी मुल्क ने कहा कि ट्विटर उसके ‘कॉर्पोरेट अस्तित्व’ को ठेस पहुँचा रहा था, इसीलिए ये कार्रवाई की गई। Twitter ने वहाँ के राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी के एक बयान को डिलीट कर दिया था, जिसके बाद ये कार्रवाई की है।

खबर में से आधी बात बताई, आधी छिपाई… मास्क के बाद अब वैक्सीन को लेकर प्रशांत भूषण ने लोगों को किया गुमराह

प्रशांत भूषण ने एक बार फिर से कोरोना वैक्सीन को लेकर लोगों को गुमराह कर के उन्हें डराने की कोशिश की है। इसके लिए उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर का सहारा लिया, जिसकी हैडिंग में लिखा है कि उत्तराखंड पुलिस के 2000 से भी अधिक जवान कोरोना से संक्रमित हुए, जिनमें से 93% ने वैक्सीन की दोनों डोज ले रखी थी। प्रशांत किशोर ने लेख में से आँकड़ा निकाल कर ट्वीट में डालते हुए लिखा कि अप्रैल-मई में 2382 उत्तराखंड पुलिस के जवान कोरोना संक्रमित हुए।

इस दौरान ये भी ड्यूटी पर थे। साथ ही उन्होंने ये भी कॉपी पेस्ट किया कि इनमें से 2204 पूरी तरह रिकवर हो चुके हैं, लेकिन 5 की मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने ‘Hmm’ भी लिखा। वो लोगों को ये बता कर डराने की कोशिश कर रहे हैं कि उत्तराखंड पुलिस के 2382 जवान अगर कोरोना से संक्रमित हो गए तो वैक्सीन कारगर नहीं है। लेकिन, उन्होंने इसी लेख के भीतर की कुछ चीजें बड़ी चालाकी से छिपा ली।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के जिस लेख को सुप्रीम कोर्ट के वकील ने शेयर किया, उसी में ये भी लिखा है कि जिन 5 कोरोना संक्रमित जवानों की मौत हुई, उनमें से 3 ने वैक्सीन नहीं ली हुई थी और बाकी के दोनों Comorbidities से पीड़ित थे। असल में किसी के शरीर में एक ज्यादा बीमारियाँ मौजूद हों तो इसे ऐसी हर बीमारी को comorbidity कह कर सम्बोधित किया जाता है। जिन 2 की कोरोना के कारण मौत हुई, वो पहले से कई संवेदनशील बीमारियों से पीड़ित थे।

इसी लेख में इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों में कोरोना संक्रमण के आँकड़े को लेकर उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता DIG नीलेश आनंद भरणे का बयान भी है, जिससे प्रशांत भूषण ज़रूर किनारा करना चाहेंगे। उन्होंने बताया कि संक्रमण की तीव्रता या फिर संक्रमण से मौतों का आँकड़ा बेहद ही कम था। अर्थात, वैक्सीन लेने वाले पुलिसकर्मियों में कोरोना के मामूली लक्षण ही थे। उन्होंने याद दिलाया कि ऐसा तो किसी वैक्सीन निर्माता ने भी गारंटी नहीं दी है कि टीका लेने से कोई कोरोना पॉजिटिव होगा ही नहीं।

साथ ही उन्होंने ये भी साफ़ किया कि पुलिसकर्मियों की मौत और कुंभ मेला के बीच कोई सम्बन्ध नहीं है। अगर प्रशांत भूषण उत्तराखंड पुलिस के आँकड़े मानते हैं तो उन्हें ये भी मानना चाहिए और शेयर करना चाहिए। ये भी ध्यान देने वाली बात है कि पुलिसकर्मी प्रशांत भूषण की तरह वर्चुअल सुनवाई में हिस्सा नहीं लेते, उन्हें लगातार लोगों के बीच ड्यूटी पर रहना पड़ता है और इससे उनके कोरोना संक्रमित होने के चांस भी ज्यादा रहते हैं।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब प्रशांत भूषण ने कोरोना का इस्तेमाल करते हुए लोगों को गुमराह किया हो। इसी साल अप्रैल में PIL एक्टिविस्ट भूषण ने एक लिंक शेयर करके ये दावा किया था कि फेसमास्क का इस्तेमाल कोरोना समय में कारगर नहीं है। बाद में ट्विटर ने उनके एंटी मास्क ट्वीट कोअपने प्लैटफॉर्म से हटा दिया था। मेडिकल निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए उन्होंने दावा किया था कि फेसमास्क पहनने से काफी प्रतिकूल शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव होते हैं।

‘2 साल में मर जाएँगे वैक्सीन लेने वाले’: फेसबुक-इंस्टाग्राम ने सरकारी फैक्ट-चेक को हटाया, फिर कहा – ‘गलती हो गई’

फेसबुक और इसके मालिकाना हक़ वाली फोटो एवं वीडियो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) ने कोरोना वैक्सीन को लेकर PIB के एक फैक्ट-चेक को हटा दिया, लेकिन कुछ देर बाद गलती होने की बात कहते हुए इसे फिर से रीस्टोर कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा भारतीय नियम-कानूनों की अनदेखी के हाल में कई मामले सामने आए हैं। व्हाट्सएप्प जहाँ केंद्र के खिलाफ कोर्ट पहुँच गया, Twitter ने नए IT नियमों को मानने से इनकार कर दिया था।

बताया जा रहा है कि ताज़ा मामले में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद Instagram और फेसबुक ने फिर से PIB के उस फैक्ट-चेक को दोबारा प्रकाशित किया। उक्त फैक्ट-चेक में PIB ने ‘कोरोना वैक्सीन से मौत’ के आँकड़ों की जाँच की थी। फेसबुक के प्रवक्ता ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि गलती से इस कंटेंट को ब्लॉक कर दिया गया था, लेकिन अब इसे वापस प्रकाशित कर दिया गया है। ये पोस्ट मई 25, 2021 को सोशल मीडिया पर डाली गई थी।

इसके बाद बिना किसी स्पष्टीकरण के फेसबुक ने चेतावनी जारी करते हुए PIB पर झूठी ख़बरें प्रकाशित करने का आरोप मढ़ दिया और कहा कि उसके पेज को हटाया भी जा सकता है। इसके बाद PIB ने केंद्रीय आईटी मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया, जिसने फेसबुक और इंस्टाग्राम से संपर्क कर के दोबारा इस कंटेंट को पब्लिश कराया। इन सोशल प्लेटफॉर्म्स ने कैसे फैक्ट-चेकर्स नियुक्त कर रखे हैं, सरकार जल्द ही इसकी जानकारी तलब कर सकती है।

क्या था PIB के उस वैक्सीन फैक्ट-चेक में, जिसे इंस्टाग्राम-फेसबुक ने हटाया

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में लिखा था कि कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद अगले 2 सालों में ही लोगों की मौत हो जाएगी। फ़्रांसिसी नोबेल पुरस्कार के विजेता लुक मोन्टैग्नीर के हवाले से उनकी तस्वीर के साथ ये बयान चलाया जा रहा था कि किसी ने कोरोना की कोई भी वैक्सीन ली हो, उसके बचने की कोई संभावना नहीं है। इसमें ये भी लिखा था कि हमें बड़े पैमाने पर लोगों के अंतिम संस्कार के लिए तैयार रहना चाहिए।

PIB ने बताया था कि ये खबर भी बिलकुल फर्जी है और उन्होंने इस तरह का कोई बयान ही नहीं दिया है। इसी तरह जापान के नोबेल विजेता तासुकु होंजो के हवाले से भी उसकी तस्वीर लगा कर इसी तरह के बयान चलाए जा रहे हैं। इसमें लिखा है कि होंजो ने वुहान के लैब में काम किया है, जबकि ये भी झूठ है। वैज्ञानिकों ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। ‘कोरोना वैक्सीन लेने से महिलाओं एवं पुरुषों में संतानहीनता (Infertility) की समस्या आ सकती है’ – ये दावा भी फर्जी है।

16 साल की लड़की से कार में गैंगरेप: FIR के बाद मुंबई पुलिस ने ‘नागिन 3’ के एक्टर पर्ल वी पुरी को किया गिरफ्तार

टीवी के मशहूर अभिनेता पर्ल वी पुरी को मुंबई में नाबालिग से रेप व छेड़छाड़ के आरोप में पॉक्सो एक्ट के तहत शुक्रवार (4 जून 2021) देर रात गिरफ्तार किया गया। ऐसे में ‘नागिन 3’ (Naagin 3) सीरियल में अहम भूमिका निभाने वाले पर्ल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई के मलाड में मालवानी पुलिस ने पर्ल वी पुरी समेत छह अन्य लोगों के खिलाफ भी रेप का मामला दर्ज किया है।

16 वर्षीय पीड़िता ने कहा कि पहले एक शख्स ने कार में उसके साथ रेप किया, फिर इसमें शामिल अन्य आरोपितों ने बारी-बारी से उसके साथ रेप किया। पुलिस ने सभी छह आरोपितों को हिरासत में ले लिया है और उनसे इस मामले पर पूछताछ की जा रही है। पर्ल को शुक्रवार (4 जून 2021) की रात पीड़िता और उसके परिवार द्वारा मालवानी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने के बाद गिरफ्तार किया गया।

पर्ल वी पुरी (Pearl V Puri) टीवी की दुनिया का जाना-माना नाम है। यह एक्टर बेपनाह प्यार, ब्रह्मराक्षस 2 और नागिन 3 जैसे कई सीरियल्स में नजर आ चुके हैं। हाल ही में वह एकता कपूर के सुपरनेचुरल ड्रामा नागिन 3 में सुरभि ज्योति के साथ रोमांस करते हुए नजर आए थे। बता दें कि पर्ल कुछ म्यूजिक वीडियोज में भी काम कर चुके हैं।