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भगवान राम पर आपत्तिजनक ट्वीट, शरजील उस्मानी के खिलाफ केस दर्ज: महाराष्ट्र पुलिस करेगी जाँच

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता शरजील उस्मानी के खिलाफ महाराष्ट्र के औरंगाबाद में केस दर्ज किया गया है। उस पर भगवान राम को लेकर आपत्तिजनक ट्वीट करने के आरोप हैं।

उस्मानी के खिलाफ जाजलान जिले की अंबेड़ के रहने वाले अंबादास आंभोरे ने शिकायत की थी। हिंदू जागरण मंच से जुड़े आंभोरे ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में दावा किया है कि अपने हालिया ट्वीट में शरजील उस्मानी ने भगवान राम को लेकर विवादित ट्वीट कर सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की थी।

उस्मानी के खिलाफ अंबेड़ पुलिस ने बुधवार (19 मई 2021) को आईपीसी की धारा 295ए और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार (20 मई 2021) को कहा कि इस मामले को जालना साइबर पुलिस डिपार्टमेंट को ट्रांसफर कर दिया गया है।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब एएमयू के पूर्व छात्र नेता ने अपने विवादित ट्वीट्स के जरिए दंगा फैलाने की कोशिश की हो। उसके ट्विटर टाइमलाइन पर बहुत से विवादित कंटेट भरे पड़े हैं। हाल ही में उसने ट्वीट कर कहा था, “जय श्रीराम बोलने वाले सभी हिंदू आतंकवादी हैं।”

शरजील उस्मानी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इसके अलावा वह आपसी रंजिश में मारे गए मेवात के आसिफ को लेकर भी फेक न्यूज फैला रहा था कि उसे हिंदू संगठनों ने मारा है। जबकि, हरियाणा पुलिस ने एक बयान में किसी भी सांप्रदायिक एंगल से इनकार किया था।

आसिफ को लेकर शरजील उस्मानी का ट्वीट

पुलिस को शुरुआती जाँच में पता चला था कि आसिफ सोहना से बसपा नेता जावेद अहमद का करीबी सहयोगी था। वह नूंह से कॉन्ग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद का रिश्तेदार भी था। प्रदीप स्थानीय भाजपा नेता भल्ला का करीबी सहयोगी है, जो भाजपा के सोहना विधायक कंवर संजय सिंह के करीबी सहयोगी हैं।

क्यों ‘प्रतिभाओं की फौज’ खड़ी करने वाले राहुल द्रविड़ का एक सीरीज नहीं टीम इंडिया का फुल टाइम कोच बनना जरूरी?

इस साल की शुरुआत में विराट कोहली समेत कई स्टार खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी के बावजूद जब टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती तो एक ऐसे व्यक्ति की जमकर तारीफ हुई, जो उस दौरे पर किसी भी तरह से जुड़ा नहीं था। उस व्यक्ति का नाम था भारतीय क्रिकेट के सबसे कामयाब बल्लेबाजों में से एक राहुल द्रविड़। लेकिन द्रविड़ को उस टेस्ट सीरीज जीत का श्रेय क्यों दिया गया? दरअसल, ऑस्ट्रेलिया का उसकी ही माँद में शिकार करने वाली टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कई युवा खिलाड़ियों को द्रविड़ ने ही कोचिंग दी थी।

अब वही ‘द वॉल’ राहुल द्रविड़ भारत के जुलाई में होने वाले श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया के कोच नियुक्त किए गए हैं। इससे पहले 2014 में भारत के इंग्लैंड दौरे पर बैटिंग सलाहकार की भूमिका निभा चुके राहुल की ये टीम इंडिया के कोच के तौर पर पहली पारी होगी।

नेशनल क्रिकेट एकैडमी (एनसीए) के प्रमुख का पद संभाल रहे द्रविड़ श्रीलंका के दौरे पर युवा भारतीय टीम को कोचिंग देंगे। उन्हें ये जिम्मेदारी टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री समेत बाकी कोचिंग स्टाफ के उस दौरान टेस्ट सीरीज के लिए टेस्ट टीम के इंग्लैंड में होने की वजह से दी गई है।

भले ही एक सीरीज के लिए ही सही, लेकिन ‘मिस्टर भरोसेमंद’ के टीम इंडिया का कोच बनने से फैंस बेहद खुश हैं और उन्हें उम्मीद है कि ये भविष्य में कोच के तौर पर उनकी लंबी पारी का संकेत है।

द्रविड़ की कोचिंग से टीम इंडिया को मिली युवा खिलाड़ियों की फौज

राहुल द्रविड़ श्रीलंका के दौरे पर अपेक्षाकृत युवा भारतीय टीम को कोचिंग देंगे, जिसे काफी हद तक अंडर-19 और भारत-ए की वह टीम कहा जा सकता है जिसे पिछले कई सालों से खुद राहुल द्रविड़ ने ही कोचिंग दी थी। अंडर-19 और भारत-ए टीम के कोच के तौर पर द्रविड़ का योगदान किसी से छिपा नहीं है। उनकी कोचिंग में भारत 2018 में अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब जीत चुका है।

उनकी कोचिंग में (2016-19) निखरे ये अंडर-19 और ए टीम के क्रिकेटर अब सीनियर टीम इंडिया में भी अपनी छाप छोड़ रहे हैं। फिर चाहे वो ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर, मयंक अग्रवाल, पृथ्वी शॉ, शुभमन गिल, संजू सैमसन, देवदत्त पडिक्कल, ईशान किशान जैसे युवा बल्लेबाज हों या फिर वॉशिंगटन सुंदर, नवदीप सैनी या कमलेश नागरकोटी जैसे बेहतरीन गेंदबाज।

खास बात ये है कि द्रविड़ की कोचिंग में निखरे युवा खिलाड़ी न केवल टीम इंडिया बल्कि आईपीएल में भी अपनी धाक जमा रहे हैं। यानी टेस्ट, वनडे हो या फटाफट क्रिकेट द्रविड़ के शिष्य हर फॉर्मेट में खुद को बीस साबित कर रहे हैं।

टीम इंडिया में पिछले कुछ सालों के दौरान चमकने वाले ज्यादातर युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का श्रेय राहुल द्रविड़ को ही जाता है, जो हर फॉर्मेट के लिए तैयार हैं। खुद इन युवा खिलाड़ियों न केवल अपने खेल में सुधार बल्कि मानसिक मजबूती और मुश्किल समय से उबरने में ‘राहुल सर’ के मंत्र को ही अपना अस्त्र बनाने की बात कही और कामयाब भी रहे।

ऐसे में फैंस की महान खिलाड़ी राहुल द्रविड़ को टीम इंडिया का पूर्णकालिक कोच बनते देखने का सपना अतिश्योक्ति नही है, जो खिलाड़ी युवा टीम को तराशकर प्रतिभाओं का समुद्र तैयार कर सकता है, वो भारतीय टीम को दुनिया की सबसे ताकतवर टीम बनाने में भला क्यों कसर छोड़ेगा। इंटरनेशनल क्रिकेट में 48 शतकों 24 हजार से ज्यादा रन द्रविड़ की महानता की बानगी हैं। पर उससे भी ज्यादा युवा प्रतिभा को पहचानने और तराशने की उनकी क्षमता कमाल की रही है।

कोहली-शास्त्री युग में राहुल द्रविड़ कब टीम इंडिया के कोच बनेंगे, ये कह पाना तो अभी मुश्किल है, लेकिन जिस दिन भी ऐसा हुआ, वो भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम युग की शुरुआत होगी!

स्वास्थ्य सिस्टम के इतिहास से ऑक्सीजन सप्लाई के भूगोल तक.. 15000 हार्ट सर्जरी वाले डॉक्टर ने राजदीप की यूँ ली क्लास

प्रोपेगंडा पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ‘नारायणा हेल्थ’ के संस्थापक डॉक्टर देवी शेट्टी का ‘इंडिया टुडे’ समाचार चैनल पर इंटरव्यू लेते समय अपने मोदी विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहा, लेकिन उन्हें करारा जवाब मिला। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की कमी से लोगों की मौत हो रही है, ऐसे में बेड्स और ऑक्सीजन सप्लाई के मामले में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के कौन से तरीके अपनाए जाएँ?

इस प्रश्न के जवाब में 30 से भी अधिक मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों का संचालन करने वाले डॉ देवी शेट्टी ने कहा कि सबसे पहले तो सभी लोग सरकार की आलोचना करने में लगे हुए हैं क्योंकि ये सबसे आसान है। उन्होंने कहा कि आज भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की जितनी संख्या है, इसका प्रबंधन दुनिया की कोई भी सरकार नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, UK या किसी भी देश की सरकार इतनी बड़ी संख्या में कोरोना मामलों से नहीं निपट सकती।

उन्होंने कहा कि भारत में संक्रमितों की संख्या काफी ज्यादा है और बताया कि उन्होंने इसका खासा अध्ययन किया है कि ये कैसे हुआ। उन्होंने कहा, “सरकार ने कोई गलती नहीं की है। मेरा विश्वास कीजिए, केंद्र सरकार ने असाधारण कार्य किया है। सरकार ने लोगों तक ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए सब कुछ किया है। लेकिन, दिक्कत ये है कि ऑक्सीजन की ज़रूरत सीधा 900 मीट्रिक टन से 9000 MT पहुँच जाए, तो इसे पूरा करने के लिए कोई लॉजिस्टिकल सपोर्ट सिस्टम ही मौजूद नहीं है।”

उन्होंने आगे समझाया कि लोगों को भले ही लगता हो कि फैक्ट्रियों में बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन है, लेकिन इनका मात्र 3% ही ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है और देश में 1000 से भी कम टैंकर्स हैं जिनका इस काम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने आगे समझाया कि इन टैंकरों की गति 30 मील (48.28 किलोमीटर) प्रति घंटे से ज्यादा की रफ़्तार से आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने जानकारी दी कि ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाले अधिकतर स्टील प्लांट्स पूर्वी व पश्चिमी भारत में ही हैं।

पद्मश्री व पद्म भूषण से सम्मानित डॉ देवी शेट्टी ने राजदीप सरदेसाई को भूगोल समझाते हुए कहा कि कोरोना के अधिकतर मरीज उत्तर भारत में हैं और इन टैंकरों को पूर्वी और पश्चिमी भारत से हजारों किलोमीटर की दूरी तय करनी है, जो कि एक दुस्साध्य कार्य है। 15,000 से भी अधिक हार्ट सर्जरी का कीर्तिमान रच चुके डॉक्टर शेट्टी ने स्पष्ट कहा कि सरकार ने मरीजों तक ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए सरे संभव माध्यमों व संसाधनों का इस्तेमाल किया।

उन्होंने स्वीकारा कि लोगों की जानें जा रही हैं और ये काफी दुःखद है कि हम लोगों की बेशकीमती जान बचाने में नाकामयाब हो रहे हैं पर इस रोग की प्रकृति ही यही है। लेकिन, उन्होंने वास्तविकता का भान कराते हुए ये भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद से ही लगभग हर सरकारों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को नज़रअंदाज़ किया। उन्होंने याद दिलाया कि स्वास्थ्य इन्फ्रस्टरक्चर के विकास पर देशों से ध्यान नहीं दिया गया, और आज हम उसके दुष्परिणाम भुगत रहे हैं।

हालाँकि, इस इंटरव्यू के दौरान जब ‘हार्ट सर्जरी के हेनरी फोर्ड’ कहे जाने वाले डॉक्टर शेट्टी बोल रहे थे, तब शांत से राजदीप सरदेसाई अजीब से एक्सप्रेशंस के साथ बोर हो रहे थे। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “अर्बन नक्सल पत्रकार सोच रहा होगा कि ज़मीन फटे और मैं अंदर समा जाऊँ!” अभिनेता परेश रावल ने टिप्पणी की, “धरती माँ भी ऐसा ज़हर निगल ने से इनकार कर देगी!”

इससे पहले राजदीप सरदेसाई ने प्रोपेगंडा फैलाया था कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने पंजाब को केवल 71 करोड़ रुपए दिए हैं। उन्होंने भ्रम पैदा करने की कोशिश की थी कि कॉन्ग्रेस शासित पंजाब के साथ भेदभाव हो रहा है। साथ ही पैसा जुटाने के लिए पंजाब में शराब की बिक्री शुरू करने की राज्य सरकार की दलील का समर्थन भी किया था। जबकि सच्चाई ये है कि पजांब को वर्ष 2020-21 के लिए राज्य आपदा प्रबंधन कोष (SDRMF) की पहली किस्त में 247 करोड़ रुपए मिले हैं।

भारत से TikTok पर बैन के बाद अब कंपनी के CEO का इस्तीफा, हुआ था 45300 करोड़ रुपए का नुकसान

शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस के को-फाउंडर और सीईओ झांग यिमिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गुरुवार (20 मई 2021) को कहा कि उनके अंदर कंपनी के लिए मैनेजेरियल स्किल की कमी होने कारण वह अपना पद छोड़ रहे हैं और अब वो कंपनी में दूसरा पद संभालेंगे।

उनकी जगह कंपनी के दूसरे सह-संस्थापक लियाँग रूबो बाइटडांस के नए सीईओ बनेंगे। वो फिलहाल कंपनी के एचआर विभाग के हेड हैं। वहीं झांग यिमिंग कंपनी के लिए रणनीतिकार के तौर पर कार्य करेंगे।

झांग ने कर्मचारियों के नाम लिखे एक नोट में कहा, “अभी भी कई चीजें ऐसी हैं जिन पर हमें सुधार करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि इस क्षेत्र में कोई दूसरा चीजों का ज्यादा बेहतर तरीके से चला सकता है। हकीकत तो ये है कि मेरे पास एक अच्छा मैनेजर बनने की स्किल की कमी अभी भी है।”

उन्होंने कहा, “मुझे संगठन और बाजार के सिद्धांतों का विश्लेषण करने में ज्यादा रुचि है, बजाय इसके कि लोगों को मैनेज करने का काम करूँ। मैं बहुत अधिक ओपन नहीं रहता है।” इस मामले में बाइटडांस ने एक बयान जारी कर कहा है कि अगले 6 महीनों तक झांग और लियांग साथ मिलकर काम करेंगे। ताकि चीजों को आसान बनाया जा सके।

गौरतलब है कि चीन की वामपंथी सरकार ने तेजी से बढ़ रहे टेक सेक्टर पर पिछले महीने नियमों को और सख्त कर दिया है। साथ ही इस पर फाइन भी लगाया है। जिन कंपनियों पर फाइन लगा है, उनमें बाइटडांस का भी नाम शामिल है। इन कंपनियों पर मोनोपॉली के आरोप हैं।

टिकटॉक समेत 59 चीनी एप्स पर बैन

इससे पहले केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) मंत्रालय ने TikTok समेत 59 चीनी एप्स को नोटिस भेज कर उन्हें भारत में हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। इन सभी कंपनियों को सरकार ने एक प्रश्नावली सौंपी थी, जिसका इन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया था। इन सभी पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने का आरोप था।

चीनी एप्स के बैन किए जाने से चीन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। चीन के मुखपत्र “ग्लोबल टाइम्स:” की जुलाई 2020 में इस बात को स्वीकार किया था कि भारत में प्रतिबंधित किए जाने के बाद TikTok की पैरेंट कंपनी Bytedance को 600 करोड़ डॉलर (उस दौरान की करेंसी एक्सचेंज के अनुसार लगभग 45300 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ था।

ईद पर कन्नौज में लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, वीडियो वायरल होने पर मौलाना समेत चार गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में ईद पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने की घटना सामने आने के बाद मौलाना समेत चार कट्टरपंथियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने ये कदम घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद उठाया।

दरअसल, जब ये कट्टरपंथी देशविरोधी नारे लगा रहे थे, उसी दौरान किसी ने अपने घर के भीतर से इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो में स्पष्ट तौर “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाने की आवाज सुनी जा सकती है।

घटना कन्नौज स्थित गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के जलालाबाद कस्बे की है, जहाँ ईद का चाँद देखने के बाद एक दिन पहले इमाम चौक पर इकट्ठे हुए कुछ लोगों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। जिले के एसपी के आदेश पर पुलिस ने जलालाबाद निवासी सलमान, साहिद, मेराज उर्फ छोटू को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। साथ ही पेशे से इमाम मोहम्मद अफजल निवासी ग्राम फत्तेपुर थाना मूसानगर जनपद कानपुर देहात को भी उसके आवास से पकड़ लिया जबकि बाकियों की तलाश की जा रही है।

पुलिस ने इन सभी के खिलाफ धारा 153 (B) व 505 (2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों को मंगलवार (18 मई) को जेल भेज दिया गया।

देश विरोधी नारे लगाए जाने को लेकर प्रभारी निरीक्षक राजा दिनेश सिंह ने कहा है कि केस में 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिशें की जा रही हैं। इस मामले में जिले के एसपी प्रशांत वर्मा ने कहा है कि पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। टीम ने चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और कार्रवाई का जा रही है।

हिंदू जागरण मंच की सक्रियता से पकड़े गए आरोपित

जलालाबाद में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाने की घटना सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिंदू जागरण मंच ने मामले को सक्रियता से उठाया। संगठन के प्राँतीय मंत्री राजेश कटियार ने इस मामले में पुलिस को आमरण अनशन करने की चेतावनी भी दी थी। हालाँकि, मामले में चार आरोपितों के गिरफ्तार होने के बाद उन्होंने पुलिस की तारीफ भी की है।

मंदिर के पैसों से चलने वाला 1000+ साल से भी पुराना अस्पताल: जहाँ थे डॉक्टर, सर्जन, नर्स… दीवार पर लिखी उपचार विधियाँ

आज जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस संक्रमण की मार झेल रही है और भारत में इस महामारी की दूसरी लहर तबाही मचा रही है, अस्पतालों में बेड्स की किल्लत से मरीज परेशान हैं। ऑक्सीजन, वेंटिलेटर्स और बेड्स की व्यवस्था करने में सरकारों के पसीने छूट रहे हैं। इन सबके बीच हमें किसी और से नहीं, खुद के ही इतिहास से सीखने की ज़रूरत है। इसे समझने के लिए हमें चलना पड़ेगा अप्पन वेंकटेश पेरुमल मंदिर।

ये मंदिर तमिलनाडु से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कांचीपुरम में स्थित है, जो एक प्राचीन शहर है। इस मंदिर को चोल राजाओं ने बनवाया था। इसकी दीवारों पर अब भी उस अस्पताल के सबूत मौजूद हैं, जो 1000 वर्ष पहले संचालित किए जाते थे। 1100 वर्ष से भी पूर्व संचालित होने वाले 15 बेड्स के इस अस्पताल में कई डॉक्टर और सर्जन हुआ करते थे। दूरद्रष्टा हिन्दू राजाओं ने नागरिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा था।

दीवार पर ये भी खुदा हुआ है कि कैसे उस समय विभिन्न मेडिकल प्रक्रियाओं और सर्जरी के जरिए लोगों का इलाज किया जाता था। डॉक्टरों को उनका वेतन अनाज के रूप में दिया जाता था। मरीजों को भोजन किस तरह से और कैसा दिया जाता है, ये भी अंकित है। डॉक्टर को उनके कार्य के हिसाब से वेतन दिया जाता था। साथ ही उन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के भी विवरण हैं, जिनसे मरीजों का इलाज किया जाता था।

ग्रेनाइट की दीवार पर ये नक्काशी कमाल की है, जो उस समय की उन्नत तकनीक की ओर इशारा करती है। इस अस्पताल को वीरराजेन्द्र चोल ने बनवाया था, जो दक्षिण भारत के महान राजा राजेंद्र चोल के बेटे थे। वो अपने बड़े भाइयों राजाधिराज चोल और राजेंद्र चोल II के सहयोगी के रूप में शासन करते थे। वेदों, शास्त्रों और व्याकरण के अध्ययन के लिए उन्होंने विद्यालय और छात्रावास भी बनवाया था।

इस अस्पताल को 1069 AD में चेयर, वेगवती और पलर नदी के संगम स्थल पर बनवाया गया था। थिरुमुकुड्डल में स्थित वेंकटेश मंदिर को भगवान विष्णु के भक्त सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक मानते हैं। इस अस्पताल में 2 फिजिशियन, 2 डॉक्टर, और एक नाई हुआ करता था जो छोटे-छोटे ऑपरेशन्स करता था। 2 ऐसे कर्मचारी थे, जो आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ जुटाते थे। साथ ही मरीजों की देखभाल के लिए नर्स और अन्य कर्मचारी भी थे।

55 फ़ीट लम्बा ये अभिलेख 33 पंक्तियों में लिखा गया है। ऊपर से नीचे तक 540 स्क्वायर फ़ीट क्षेत्र में इसे अंकित किया गया है। इसे भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे विस्तृत अभिलेख के रूप में जाना जाता है। इसका 95% हिस्सा तमिल में है, जबकि 5% ग्रन्थ लिपि में अंकित है। बुखार, फेफड़ों की गड़बड़ी और जलशोथ जैसी बीमारियों से लड़ने के उपचार और दवाओं का विवरण इसमें उपलब्ध है। ऐसी 19 दवाओं के बारे में बताया गया है।

इस अस्पताल का इस्तेमाल मुख्यतः मंदिर के कर्मचारियों और छात्रावास के छात्रों के इलाज के लिए किया जाता था। आम जनता को भी यहाँ इलाज की सुविधा दी जाती थी। करीब 100 वर्ष पूर्व इस अभिलेख को डिकोड किया गया था। ये आयुर्वेदिक के साथ साथ ‘सिद्ध तकनीक’ के इलाज की ओर भी इशारा करता है। इस अस्पताल को राजा द्वारा मंदिर को दिए जाने वाले दान से संचालित किया जाता था।

प्राचीन भारत या मध्यकाल में संचालित होने वाला ये अकेला भारतीय अस्पताल नहीं है। इसके अलावा थिरुवक्कम, तंजावुर और श्रीरंगम में भी ऐसे अस्पताल चलाए जाते थे। अस्पतालों को तब ‘अतुलार सलाई’ कहा जाता था। ASI भी योजना बना रहा है कि 9वीं सदी के इस मंदिर के प्रांगण में अभिलेख में वर्णित किए गए आयुर्वेदिक पेड़-पौधे लगाए जाएँ। आज वामपंथी जब ‘मंदिर की जगह अस्पताल’ वाला नैरेटिव फैलाते हैं, तब उन्हें जानना चाहिए कि पहले दोनों अलग नहीं हुआ करते थे।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को लज्जित करने के उद्देश्य के पीछे केजरीवाल की मंशा क्या है?

अरविन्द केजरीवाल ने अचानक कोरोना का एक सिंगापुरी वैरिएंट खोजा और मन ही मन आर्किमिडीज की तरह यूरेका यूरेका चिल्लाते हुए घोषणा कर दी कि यह वैरिएंट “हमारे बच्चों” के लिए बहुत खतरनाक है। उन्होंने केंद्र सरकार से माँग की कि सिंगापुर से आने वाली उड़ानें तुरंत बंद कर देनी चाहिए। उन्हें पता था कि इसका असर होगा इसीलिए उन्होंने यह बयान दिया था। असर हुआ भी।

सिंगापुर सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने भारतीय राजदूत से अपना विरोध दर्ज कराया। वहाँ के विदेश मंत्री की ओर से वक्तव्य जारी किया गया। मेरे व्हाट्सएप ग्रुप में सिंगापुर में रहने वाले एक मित्र ने बताया कि केजरीवाल के बयान को लेकर वहाँ सेलेब और यू-ट्यूबर्स से भी बहुत तीखी प्रतिक्रिया आ रही है। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि एक आम सिंगापुरी की प्रतिक्रिया कैसी होगी?

भारत का विदेश मंत्रालय भी तुरंत हरकत में आया। मंत्रालय के प्रवक्ता ने वक्तव्य जारी करके बताया कि कोरोना का सिंगापुरी वैरिएंट जैसा कुछ नहीं है। साथ ही यह भी बताया गया कि कैसे भारत और सिंगापुर के रिश्ते हर तरह से अच्छे रहे हैं और कोरोना की दूसरी तीव्र लहर से लड़ने में भारत की मदद करने वाले देशों में सिंगापुर सबसे पहले आगे आया। ऐसे में यह सबके लिए आवश्यक है कि बिना जानकारी के ऐसे बयान न दें। बाद में खुद विदेश मंत्री को वक्तव्य जारी करके कहना पड़ा कि अरविन्द केजरीवाल के वक्तव्य को भारत का वक्तव्य न माना जाय।

परिस्थिति काबू में आते-आते काफी नुकसान हो चुका है, जिसका असर शायद कुछ दिनों बाद पता चले। सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं से लगा कि आम भारतीय के साथ-साथ पत्रकारों और संपादकों तक ने माना कि केजरीवाल को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था। पत्रकारों और संपादकों द्वारा ऐसा कहा जाना एक अनूठी घटना है जो शायद दशकों में एक बार ही हो सकती है।

वैसे कुछ पत्रकारों ने अपनी सशर्त आलोचना में कुछ ऐसा भी कहा जिसका अर्थ था; माना कि केजरीवाल द्वारा दिया गया यह बयान सही नहीं था पर विदेश मंत्रालय को दूसरे देश के सामने उनके बारे में ऐसा नहीं कहना चाहिए था। इनमें कुछ वे लोग भी थे, जिन्होंने एक समय भारतीय सांसदों द्वारा अमेरिका को पत्र लिखकर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वीजा न दिए जाने को न केवल उचित ठहराया था बल्कि काफी हद तक सेलिब्रेट भी किया था। 

जो कुछ भी हुआ उससे अनेकों प्रश्न उठते हैं। प्रश्न यह है कि अचानक केजरीवाल को ऐसा बयान देने की आवश्यकता क्यों पड़ गई? क्या यह बयान देने से पूर्व उन्होंने विदेश मंत्रालय या केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को कोई पत्र लिखा था या प्रधानमंत्री के साथ किसी मीटिंग में अपनी चिंता व्यक्त की थी? उनके पास यह रिपोर्ट कहाँ से आई कि सिंगापुर में कोरोना का कोई नया वैरिएंट मिला है जो केवल बच्चों को संक्रमित कर रहा है? यह किसी वैज्ञानिक पत्रिका में छपा था या किसी और देश के विशेषज्ञों ने इस बात को उठाया था? और यदि इस तरह की रिपोर्ट थी तो केवल केजरीवाल को कैसे पता चला? यह रिपोर्ट भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय तक क्यों नहीं पहुँची? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो उठाए जाने चाहिए और यह केजरीवाल की जिम्मेदारी है कि यदि वे अपने दावों या बयानों को गंभीर मानते हैं तो आगे आकर इन प्रश्नों का उत्तर दें। 

विदेश मंत्रालय से जारी हुई विज्ञप्ति के बाद भी दिल्ली सरकार की ओर से इस मामले को समाप्त करने की मंशा नहीं देखी गई। केजरीवाल के बचाव में उनके डिप्टी मनीष सिसोदिया उतरे और उन्होंने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने मुख्यमंत्री का बचाव किया। बचाव तो क्या किया, कहा जा सकता है कि वही सारी बातें की जो केजरीवाल ने की थी।

मनीष सिसोदिया ने भी “अपने बच्चों” को लेकर चिंतित होने का दावा ठोंका और बताया कि; मोदी जी को सिंगापुर की चिंता है पर हमें हमारे बच्चों की चिंता है। इस बयान से सिसोदिया यह बात गोल कर गए कि केंद्र सरकार को सिंगापुर की नहीं बल्कि भारत-सिंगापुर संबंधों की चिंता है। 

इन नेताओं के सलाहकारों को चाहिए कि वे इन्हें बताएँ कि लोकतंत्र या राजनीति में वाक्पटुता का महत्व है पर हर कदम पर इसका इस्तेमाल करना नेतृत्व की अक्षमता दर्शाता है। सिसोदिया के प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे निम्न बिंदु यह रहा कि उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय से जारी विज्ञप्ति के बावजूद केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए यह कहा कि; ये लोग हमें ब्रिटिश वैरिएंट से भी आगाह नहीं कर पाए थे। इन्हें पता है कि सिंगापुर सरकार कोरोना के किसी वैरिएंट को सिंगापुर वैरिएंट कहे जाने से नाराज है, उसके बावजूद सिसोदिया ब्रिटिश वैरिएंट की बात कर रहे हैं। सुनकर लगा जैसे यह काम जानबूझ कर किया जा रहा है ताकि भारत के और देशों से सम्बन्ध पर बुरा असर हो। प्रश्न यह भी उठता है कि सिसोदिया के इस बयान के पीछे मंशा क्या थी? आखिर संवैधानिक पद पर बैठा एक जिम्मेदार नेता ऐसे बयान क्यों दे रहा है जो दो देशों के बीच सम्बन्ध बिगाड़ सकते हैं?             

कोरोना से हर राज्य लड़ रहा है। राज्यों के मुख्यमंत्री उपलब्ध संसाधनों को बढ़ाने में लगे हैं ताकि महामारी से लड़ाई में आसानी हो। सबकी कोशिशें जारी हैं ताकि इस पर जल्दी काबू पाया जा सके। इस लड़ाई में और मुख्यमंत्री तो अपने अफसरों से मीटिंग करते या सुविधाओं की निरीक्षण करते दिखते हैं पर केजरीवाल ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनकी मीटिंग न्यूज़ एजेंसी के कैमरे और माइक के साथ होती है। वे सुबह से ही कैमरे के सामने बैठ जाते हैं और कोरोना के विरुद्ध दिल्ली की लड़ाई को अपने बयानों से नेतृत्व देते हैं। उनके बयानों के साथ उनके जो पोज दिखाई देते हैं उनमें वे बिल्कुल किसी दर्शनशास्त्री से लगते हैं, जो इस लड़ाई में नेतृत्व क्षमता और वैज्ञानिक तरीकों में कम और दर्शनशास्त्र और बयानशास्त्र में अधिक विश्वास रखता है।   

बयानों से कोरोना की रोकथाम के इस केजरीवाली दर्शन ने तबसे और जोर पकड़ा है जबसे दिल्ली में ऑक्सीजन ऑडिट की बात उठी है। जबसे यह बात उच्चतम न्यायलय में उठी, उन्होंने अपने बयानों को एक अलग ही स्तर पर पहुँचा दिया है। प्रश्न यह है कि इन बयानों से घरेलू राजनीति में उद्देश्य के अनुसार विमर्श करवाने की मंशा समझ आती है पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को लज्जित करने के उद्देश्य के पीछे क्या मंशा है?

मजे की बात यह है कि ऐसे बयान देते हुए उनके पास तथ्यों की जानकारी भी नहीं रहती। तथाकथित सिंगापुर वैरिएंट पर बयान के साथ वहाँ से आने वाली उड़ानों को रद्द करने के केजरीवाल के बयान को ही ले लें। ऐसा बयान देने से पहले उन्हें यह पता क्यों नहीं है कि सिंगापुर से आने वाली उड़ानें मार्च महीने के तीसरे सप्ताह से ही बंद हैं? यह बात अपने बयानों के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाती है। ऐसा नहीं कि भारत को लज्जित करने का बयान केजरीवाल ने पहली बार दिया है।  इससे पहले वे बालाकोट स्ट्राइक को लेकर बयान दे चुके हैं जिसका पाकिस्तानी सरकार और मीडिया ने अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस्तेमाल किया।  

समय आ गया है कि किसी को जवाब न देने वाले केजरीवाल प्रश्नों से दो-चार हों और उनके जवाब दें। जवाब न देने से प्रश्न खत्म नहीं होते। उन्हें यह विचार करने की आवश्यकता है कि उनके ऐसा बार-बार करने से क्या केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार या भारत की छवि पर ही बुरा असर पड़ रहा है? साथ ही उन्हें यह समझने की आवश्यकता है कि जीवन में सब कुछ राजनीति के बारे में नहीं होता। किसी भी नेता का यह विश्वास कि सब कुछ ‘मैनेज’ किया जा सकता है, एक दिन अचानक गायब हो जाता है। यदि आज नहीं तो कल व्यवस्था और अव्यवस्था पर उठते प्रश्नों के सामने केजरीवाल को आना ही होगा पर शायद तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

नेवी ने डूबे जहाज पी-305 से 186 लोगों को बचाया, लापता लोगों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Tauktae तूफान आखिरकार गुजर गया है, लेकिन अपने पीछे यह तबाही का मंजर छोड़ गया। तूफान में फंसकर अरब सागर में डूबे चलते जहाज पी-305 बार्ज पर मौजूद 273 लोगों में से अब तक 188 लोगों को भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने बचा लिया है, 37 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

नौसेना के एक अधिकारी के मुताबिक, यह छोटा जहाज था जो मुंबई से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर खड़ा था, चक्रवात में फंसने के बाद यह डूब गया था। इस बीच इंडियन नेवी ने जानकारी दी है कि युद्धपोत आईएनएस कोच्चि पी-305 से बचाए गए 186 लोगों में से 125 लोगों को लेकर बुधवार (19 मई 2021) सुबह मुंबई पहुँचा। उसके साथ 22 लोगो के शवों को भी साथ लाया गया।

नौसेना के प्रवक्ता के मुताबिक, आईएनएस तेग, आईएनएस बेतवा, आईएनएस ब्यास, पी8I विमान और हेलीकॉप्टरों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालाँकि, समय बीतने के साथ ही लोगों के बचने की उम्मीदें भी कम होती जा रही हैं। दूसरी ओर नौसेना और कोस्ट गार्ड की टीम ने गाल कंस्ट्रक्टर में फंसे 137 लोगों को मंगलवार ( 18 मई 2021) को सुरक्षित बचा लिया था।

अधिकारियों ने जानकारी दी है कि बार्ज एसएस-3 पर मौजूद 196 लोग और ऑयल रिग (तेल का कुँआ) सागर भूषण पर मौजूद 101 लोग सुरक्षित हैं। सभी को तट तक लाया जा रहा है। इंडियन नेवी के उप प्रमुख वाइस एडमिरल मुरलीधर सदाशिव ने इस बचाव अभियान को बीते 4 दशक का सबसे कठिन अभियान बताया है।

पी-305 से रेस्क्यू किए गए लोगों ने बताया है कि इस बार्ज की हालत पहले से ही खराब थी। बीते 8 मई, 2021 को ही कुछ दूसरे बार्ज की नावों से यहाँ से बाहर चले गए थे। तूफान (Tauktae) शुरू होने से पहले यह ऑयल रिग के पास खड़ा था, लेकिन तूफान के कारण इसका लंगर छूट गया, जिससे यह बहने लगा। माना जा रहा है कि लाइफ जैकेट पहने होने के कारण लोग लहरों के साथ दूर बह गए होंगे।

रेस्क्यू किए गए लोगों की आपबीती

नौसेना द्वारा रेस्क्यू किए गए एक व्यक्ति ने बताया कि वो रातभर पानी में तैरता रहा, उसे ये भी नहीं पता कि नौसेना ने उसे कब रेस्क्यू किया। पता ही नहीं चला। वहीं कोल्हापुर, महाराष्ट्र के रहने वाले मनोज गीते ने बताया कि वह केवल इस उम्मीद में 7-8 घंटे तक तैरते रहे कि कोई तो उन्हें बचाएगा और आखिरकार इंडियन नेवी ने उन्हें बचा लिया। पी-305 से जिन लोगों ने समुद्र छलाँग लगाई थी वो बचाए जाने से पहले करीब 17-18 घंटे तक समुद्र में ही तैरते रहे।

रेस्क्यू किए गए लोगों में से एक व्यक्ति ने बताया कि 12 लोगों का एक ग्रुप एक साथ समुद्र में कूदा था, जिसमें से 10 को बचा लिया गया है, लेकिन 2 लोग अभी भी लापता हैं।

प्रोपेगंडा फैलाने के लिए 5 ‘दोस्त’ मीडिया संस्थान, बॉलीवुड से मदद: कॉन्ग्रेस के टूलकिट का वो हिस्सा, जिस पर नहीं गया आपका ध्यान

सोशल मीडिया पर एक ‘टूलकिट’ खासा वायरल हुआ, जिसके बारे में बताया गया कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा अपने नेताओं को दी गई निर्देशावली है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हिंदुत्व, कुम्भ और देश को बदनाम करने का पूरा खाका है। ‘इस टूलकिट’ का एक हिस्सा ऐसा भी है, जिस पर ज्यादा बात नहीं हुई। इसमें उन मीडिया संस्थानों के बारे में बताया गया है, जिनकी मदद लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं को प्रोपेगंडा फैलाना है।

टूलकिट के इस हिस्से में बताया गया है कि ‘द प्रिंट’, ‘द वायर’, ‘द क्विंट’ और ‘आउटलुक’ जैसे मीडिया संस्थानों में कोविड-19 को लेकर जो भी लेख प्रकाशित होते हैं, उन्हें शेयर किया जाए और वायरल किया जाए। ऐसे मीडिया भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को बदनाम करने के लिए किस हद तक गिरते हैं, ये किसी से छिपा नहीं है। इन संस्थानों ने महाराष्ट्र और केरल की सरकारों के खिलाफ कुछ नहीं लिखा, जहाँ कोरोना सबसे ज्यादा बेकाबू है।

इस ‘टूलकिट’ में कॉन्ग्रेस नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वो इन मीडिया संस्थानों में लिखे कोरोना सम्बंधित लेखों को खूब प्रचारित करें और उन्हें हाइलाइट करें। दो मीडिया संस्थान ऐसे भी हैं, जिन्हें इनसे भी ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। इसमें लिखा है कि अगर कोई स्टोरी अन्य मीडिया संस्थानों में प्रकाशित नहीं होती है तो उन्हें ‘कारवाँ’ या पार्टी के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ को भेजा जाए। यानी, कॉन्ग्रेस की साँठगाँठ से इन मीडिया संस्थानों में नकारात्मक लेख प्रकाशित किए जा रहे थे।

इस ‘टूलकिट’ के एक पॉइंट में ‘समान विचारधारा’ वाले बॉलीवुड सेलेब्स से मदद लेने की बात भी की गई है। उनसे ट्वीट्स, मीम्स, कॉमिक वीडियोज और कार्टून्स के अलावा अन्य ऐसे वायरल पोस्ट्स को शेयर करवाने की बात की गई है, जिसमें मोदी सरकार को निशाना बनाया गया हो। समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर कुछ ‘कॉम्स सेन्स सलाह’ देने का भी निर्देश दिया गया है। ऐसा दिखाने को कहा गया है, जैसे मोदी सरकार और इसके मंत्रीगण मूर्ख हों।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बिगाड़ने के लिए किस तरह से विदेशी मीडिया के साथ हाथ मिलाया गया था, वो भी देखिए। भारत में विदेशी मीडिया संस्थानों के कॉरेस्पोंडेंट्स के माध्यम से पीएम मोदी को सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। विदेशी मीडिया में लेख लिखने वाले भारतीय प्रोपेगंडा पत्रकारों को पॉइंट्स दिए गए, ताकि वो मोदी सरकार को बदनाम कर सकें। स्थानीय पत्रकारों को जलती चिताओं और लाशों की तस्वीरें देकर रिपोर्ट बनवा उसे वायरल करवाने की भी साजिश थी।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया है कि ये ‘टूलकिट’ सौम्या वर्मा ने तैयार किया है। वो प्रोफेसर राजीव गौड़ा के दफ्तर में कार्यरत हैं। MV राजीव गौड़ा कॉन्ग्रेस के सांसद रहे हैं और UPA काल में कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं। कर्नाटक कॉन्ग्रेस कमिटी ने उन्हें प्रवक्ता और घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष बनाया था। फ़िलहाल वो IIM बेंगलुरु में प्रोफेसर हैं। कॉन्ग्रेस की विचारधारा को फैलाने के लिए वो कई ऑनलाइन कार्यक्रम चलाते हैं।

सरकार लाएगी इंटरनेशनल चैनल, भारत का दृष्टिकोण रखने में मिलेगी मदद, विदेशी मीडिया के ‘प्रोपेगेंडा’ की होगी काट

नेशनल ब्रॉडकास्टर दूरदर्शन ने एक इंटरनेशनल चैनल लॉन्च करने का फैसला किया है। सरकार ने ये कदम कोविड की दूसरी लहर के दौरान कई बड़े अंतराराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों द्वारा भारत के बारे में नकारात्मक और भ्रामक खबरें प्रकाशिक करने के बाद उठाया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूरदर्शन ने पिछले हफ्ते डीडी इंटरनेशनल के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया, जिसमें निजी कंपनियों से नए चैनल के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का मसौदा तैयार करने के लिए टिप्पणियां माँगी गईं। परियोजनाओं पर अंतरराष्ट्रीय प्रसारकों/मीडिया घरानों को सलाह देने के अनुभव के साथ प्रतिष्ठित वैश्विक सलाहकारों से बोलियां आमंत्रित की गईं।

डीडी इंटरनेशनल की 24×7 वर्ल्ड सर्विस शुरू करने की योजना

प्रसार भारती के सीईओ एस. एस. वेम्पति ने कहा कि इस तरह की एक परियोजना पिछले कुछ समय से चल रही थी। उन्होंने कहा, “दूरदर्शन के लिए अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति स्थापित करना लंबे समय से लंबित रणनीतिक उद्देश्य रहा है। प्रसार भारती बोर्ड ने अपनी पिछली बैठक (मार्च) में एक उपयुक्त रणनीति सलाहकार को शामिल करके इसके लिए एक परियोजना रोडमैप विकसित करने की अनुमति दी थी। यह ईओआई उसी दिशा में एक कदम है।’

डीडी इंटरनेशनल के तहत वैश्विक स्तर पर ब्यूरो स्थापित किए जाएंगे जिनकी वर्ल्ड सर्विस स्ट्रीमिंग चौबीसों घंटे होंगी।

क्या यह बीबीसी या अलजजीरा जैसे चैनलों के भारतीय वर्जन की तरह होगा? इस पर वेम्पति ने कहा कि “अभी यह बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की तरह समाचार पर अधिक आधारित होगा” लेकिन बाद में यह “विकसित” हो सकता है क्योंकि भारत में बहुत से अंतर्राष्ट्रीय हित सांस्कृतिक हैं।

हालाँकि, लगभग एक दशक से इस परियोजना के विभिन्न पदों से जुड़े रहे एक अधिकारी ने बताया किया यह विचार 10 वर्षों से अधिक समय से अस्तित्व में है, और “हर बार जब प्रसार भारती के नेतृत्व में बदलाव होता है, तो कुछ कार्रवाई होती है।” अधिकारी ने कहा कि जब दूरदर्शन इंडिया को अंग्रेजी चैनल बनाया गया था, तब चर्चा हुई थी कि इसे “एक अंतरराष्ट्रीय चैनल बनाया जाएगा”। लेकिन दूरदर्शन समाचार के केवल अंग्रेजी संस्करण को दिखाने से इसने कंटेंट के “डुप्लीकेशन” को ही जन्म दिया।