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‘बच्चों को उर्दू छाप लिरिक्स की ट्रेनिंग’: कक्षा-1 के पाठ्यक्रम में NCERT की ‘डबल मीनिंग’ कविता पर बवाल

कक्षा 1 में पढ़ाई जाने वाली NCERT की किताब रिमझिम-1 की एक कविता सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रही है। इस कविता का शीर्षक ‘आम की टोकरी’ है। वैसे तो कविता के शीर्षक में कोई समस्या नहीं है। लेकिन कविता की भाषा को पढ़कर कुछ लोगों का कहना है कि यह डबल मीनिंग दे रही है, इसलिए इसे पाठ्यक्रम से हटा देना चाहिए।

आम की टोकरी कविता रामकृष्ण शर्मा खद्दर ने लिखी है। कक्षा 1 के पाठ्यक्रम में इसे 2006 से लगातार पढ़ाया जा रहा है। इस कविता को लेकर सबसे पहले छत्तीसगढ़ कैडर के IAS ने ट्विटर पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद कई यूजर्स भी कविता के शब्दों में गंदगी खोजकर इसे हटाने की माँग करने लगे।

आईएएस अवनीश शरण ने इस संबंध में ट्वीट में लिखा, “ये किस ‘सड़क छाप’ कवि की रचना है ?? कृपया इस पाठ को पाठ्यपुस्तक से बाहर करें।”

ट्विटर यूजर संजीव नेवार ने कविता शेयर कर लिखा, “हम अपने बच्चों को साहित्यिक शिक्षा दे रहे हैं या उन्हें उर्दूछाप लिरिक्स की ट्रेनिंग दे रहे रहे हैं।”

अभिनव प्रकाश ने इस कविता पर सरकार को लानत दी। उन्होंने कहा कि 7 सालों के बावजूद एनसीईआरटी किताब से एक सिंगल लाइन भी नहीं हटी। शर्म आनी चाहिए।

अंकिता पवार ने शिक्षा मंत्री को टैग करते हुए लिखा, “अगर ये NCERT पाठ्यक्रम में है तो इसे फौरन हटा देना चाहिए। बच्चों को ये जानने की जरूरत नहीं है कि छोकरी और छोकरा क्या है। ये पक्की बात है कि उनसे वह शिक्षा के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ेगा और न ही इसका अर्थ अच्छे संदर्भ में है।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर एक तबका जहाँ इस कविता का विरोध कर रहा है। वहीं दूसरा तबका ऐसा है जो इसमें संशोधन की गुंजाइश बता रहा है और तीसरा तबका है जो कह रहा है कि उन्हें इसमें कोई बुराई नहीं लग रही। अगर कोई इसमें अलग मतलब निकाल रहा है तो ये उसकी समस्या है।

‘जाहिल, बेशर्म, नग्न’: मोदी पर लालू की पार्टी RJD का घटिया ट्वीट, नेटिजन्स ने की कार्रवाई की ​माँग

राजनीति का स्तर कितना अधिक गिरता जा रहा है इसका एक नमूना राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने पेश किया है। पार्टी ने बुधवार (19 मई 2021) को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट किया। हालाँकि, बाद में बिना माफी माँगे ही आरजेडी ने उसे डिलीट भी कर दिया।

आरजेडी के डिलीट हो चुके ट्वीट का स्क्रीनशॉट

अपनी पोस्ट में आरजेडी ने सुशील कुमार मोदी के लिए जाहिल, बेशर्म, नग्न जैसी बातें की। पार्टी ने दावा किया कि मोदी के ट्विटर पर 2 मिलियन फॉलोवर होने के बाद भी उन्हें 100 लाइक तक नहीं मिलते हैं। उन्हें ट्विटर पर कोई भी तवज्जो नहीं देता है। बावजूद इसके वह सोशल मीडिया पर बार-बार अपनी कुंठा को मिटाने के लिए आ जाते हैं। आरजेडी ने आरोप लगाते हुए दावा किया कि सोशल मीडिया पर वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कहने पर आते हैं।

बता दें कि जिस ट्वीट में राजद ने बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री को गाली दी थी, वो वर्तमान में उसके आधिकारिक ट्विटर हैंडल से हटा लिया गया है। हालाँकि, जब तक पार्टी अपने उस विवादित ट्वीट को हटाती लोगों ने उसके स्क्रीनशॉट ले लिए थे। अब वो स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल है और उस पर कई प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री को लेकर किए गए आरजेडी के ट्वीट्स से सोशल मीडिया यूजर भड़क गए।

राजद के खिलाफ गुस्सा व्यक्त करते हुए, एक सोशल मीडिया यूजर ने पूछा कि आखिर सुशील कुमार मोदी ने अभी तक इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए शिकायत क्यों नहीं की है? यूजर्स ने इस आपत्तिजनक पोस्ट पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और उनसे बिहार पुलिस को कार्रवाई करने का निर्देश देने का आग्रह भी किया।

इसके बावजूद राजद ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर अपने घटिया आचरण के लिए माफी नहीं माँगी है।

केंद्र ने राज्यों से कहा, ‘ब्लैक फंगस’ को करें महामारी घोषित: कई राज्यों में प्रकोप, महाराष्ट्र में अब तक 52 की मौत

कोविड के बीच ”ब्लैक फंगस” (Black Fungus) या म्यूकोरमायकोसिस के बढ़ते कहर के बीच केंद्र सरकार ने गुरुवार को सभी राज्यों को “ब्लैक फंगस” को महामारी घोषित करने का निर्देश दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से ब्लैक फंगस को “महामारी रोग अधिनियम” के तहत दुर्लभ लेकिन संभावित घातक संक्रमण के तहत दर्ज करने को कहा है। हाल के दिनों में देश में कोविड-19 से उबर चुके लोगों में ब्लैक फंगस के मामले सामने आए हैं।

इसका मतलब है कि ब्लैक फंगस के सभी पुष्ट या संदिग्ध मामले (कोविड के ठीक होते रोगियों में देखी जाने वाली स्थिति) की सूचना स्वास्थ्य मंत्रालय को देनी होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने राज्यों को लिखे पत्र में कहा है, “सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल कॉलेजों को म्यूकोरमायकोसिस की जाँच, डायग्नोसिस, प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।”

राजस्थान, तेलंगाना और तमिलनाडु में ब्लैक फंगस महामारी घोषित

बुधवार (19 मई) को राजस्थान के ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने के बाद गुरुवार (20 मई) को दो और राज्यों तेलंगाना और तमिलनाडु ने भी इस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया।

तमिलनाडु में ब्लैक फंगस से पहली संदिग्ध मौत की सूचना है। थूटूकुड्डी जिले में कोविड से पीड़ित एक 57 वर्षीय व्यक्ति की सरकारी अस्पताल में ब्लैक फंगस से मौत होने की आशंका है।

वहीं तेलंगाना में सरकारी और निजी अस्पतालों में करीब ब्लैक फंगस के 80 मरीजों का इलाज चल रहा है। सरकार ने इसके इलाज के लिए गाँधी जनरल हॉस्पिटल और सरकारी अस्पताल ईएनटी हॉस्टिपल को ब्लैक फंगस के इलाज के लिए नोडल केंद्रों के रूप में चिन्हित किया है।

राजस्थान के स्वास्थ्य सचिव अखिल अरोड़ ने कहा कि अभी ब्लैक फंगस के करीब 100 से अधिक मामले हैं और उनके इलाज के लिए जयपुर स्थित सवाई मान सिंह अस्पताल में एक अलग वॉर्ड बनाया गया है।

ब्लैक फंगस के मामले शुरू में गुजरात और महाराष्ट्र में सामने आए थे और इसके बाद ये देश के कई राज्यों में फैल गया। ब्लैक फंगस से महाराष्ट्र में पिछले साल कोविड-19 फैलने के बाद से अब तक 52 लोगों के मरने की खबर है। राज्य में इस बीमारी से करीब 1500 लोगों का इलाज चल रहा है। पुणे में ही ब्लैक फंगस से पीड़ित 270 लोगों का इलाज चल रहा है

वहीं गुजरात में अब तक इसके 100 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं जबकि 40 लोग ब्लैक फंगस की वजह से आँखों की रोशनी गँवा चुके हैं जिनमें से 8 तो सूरत के ही हैं।

मध्य प्रदेश में भी ब्लैक फंगस से दो लोगों की मौत हुई है, जबकि उत्तर प्रदेश और दिल्ली में एक-एक मौत हुई हैं।

अब तक ब्लैक फंगस का प्रकोप गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना, यूपी, बिहार, तमिलनाडु और हरियाणा समेत 11 राज्यों में देखा जा रहा है।

पागल, मूर्ख, नस्लवादी, सूअर, मदरफ*#… ट्रंप को ओबामा ने दे रखे थे कई नाम, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की बातें किताब से जगजाहिर

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके पूर्ववर्ती बराक ओबामा ने कई नाम दे रखे थे। मसलन, पागल, नस्लवादी, सेक्सिस्ट सूअर, मूर्ख आदमी, भ्रष्टाचारी मदरफ*#। एक किताब के हवाले से विदेशी मीडिया की रिपोर्टों में यह दावा किया गया है।

इस किताब का नाम है: Battle for the Soul: Inside the Democrats’ Campaigns to Defeat Trump। लेखक हैं एडवर्ड इसाक डोवर (Edward-Isaac Dovere)। डोवर अटलांटिक के स्टाफ राइटर हैं। यह किताब अगले सप्ताह बाजार में आएगी।

किताब में डोवर ने बताया है कि ट्रंप के लिए एक बार ओबामा ने कहा था, “मैंने नहीं सोचा था कि यह इतना बुरा होगा… मैंने नहीं सोचा था कि हमारे पास एक नस्लवादी, सेक्सिस्ट सूअर होगा… वह च*** पागल हो गया है।” रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ट्रंप के लिए बराक ओबामा सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोलते। लेकिन पर्दे के पीछे वह अपनी स्पष्ट राय रखते थे। उन्होंने ट्रंप के लिए भी यह बातें गुस्से में कही थी।

रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप को लेकर ओबामा की सोच जगजाहिर है। लेकिन शायद ही इससे पहले कभी इस पर खुल कर रिपोर्ट की गई गई हो। इसके मुताबिक शुरुआत में ओबामा ने राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप की संभावना को प्राथमिकता दी थी। लेकिन 2017 से उनके विचार बदल गए और कई अन्य अमेरिकियों की तरह वे ट्रंप को पागल कहने लगे। सबसे हैरान करने वाली टिप्पणी उनकी ‘that corrupt motherf***er’ थी। ये शब्द उन्होंने तब कहे थे जब उन्हें पता चला कि ट्रम्प बिना किसी सहयोगी के पुतिन के साथ बात कर रहे हैं।

गार्जियन की रिपोर्ट में बताया गया है कि जोनाथन एलन और एमी पर्नेस की किताब  ‘Lucky: How Joe Biden Barely Won the Presidency’ की तरह डोवर ने भी अपनी किताब में ओबामा और बाइडन की रिलेशनशिप पर भी बात की है। इसमें कहा गया है कि दोनों के बीच संबंध सहज नहीं थे, क्योंकि वे 8 साल सत्ता में थे। 

एलन और पार्नेस की तरह डोवर ने ओबामा के संदेहों पर चर्चा करते हुए बताया कि कैसे बाइडन के बेहतर अतीत के बावजूद चर्चा ये थी कि वह इस समय काफी बुजुर्ग हैं। इसके अलावा जो बाइडन की पत्नी जिल बाइडन की बात का भी इस रिपोर्ट में जिक्र है क्योंकि उन्होंने कमला हैरिस को लेकर आपत्तिजनक शब्द कहे थे।

उन्होंने अपने समर्थकों से कहा था कि कमला, जो पर हमला बोलने के लिए किसी भी घटिया हद (Kamala could ‘go f*** herself’ for attacking Joe for supporting racist policies) तक जा सकती हैं। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि 2020 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जो बाइडन ने कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना।

पंचायत चुनाव में जान गँवाने वाले शिक्षकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा, सरकारी नौकरी: CM योगी का आदेश

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान ड्यूटी पर लगे जिन भी शिक्षकों की मौत हुई है, उनके परिजनों को योगी आदित्यनाथ सरकार ने मुआवजा देने का निर्णय लिया है। राज्य की भाजपा सरकार ने इस सम्बन्ध में मुख्य सचिव को आवश्यक निर्देश दिए हैं और साथ ही चुनाव आयोग को भी लिखा है। मृत शिक्षकों के परिजनों को वित्तीय मदद के साथ-साथ एक सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। सीएम योगी ने ऐसी घटनाओं पर दुःख भी जताया है।

हालाँकि, इससे पहले चुनावी ड्यूटी के दौरान हुई शिक्षकों की मौत के सरकारी आँकड़ों पर सवाल भी उठे थे। प्राथमिक शिक्षक संघ की सूची के अनुसार, प्रदेश के सभी 75 जिलों में 1621 शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षा मित्रों व बेसिक शिक्षा विभाग कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर एक मौत दुःखद है और सरकार की संवेदना सभी पीड़ितों के साथ है।

विवाद को ख़त्म करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग से नियमों में संशोधन का आग्रह किया है। योगी सरकार ने गाइडलाइन में ड्यूटी अवधि में कोविड संक्रमित शिक्षक- कर्मचारियों की मौत को शामिल करने को कहा है। इस सम्बन्ध में पहले से जो गाइडलाइंस हैं, उन्हें भी बदला जाएगा। चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों में संशोधन कर मुआवजे की राशि तय की जाएगी। मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव (पंचायती राज) इस सम्बन्ध में राज्य निर्वाचन आयोग से बात करेंगे।

सीएम योगी ने ध्यान दिलाया कि चुनाव आयोग की गाइडलाइंस जिस वक्त जारी हुई थीं उस समय कोरोना नहीं था, इसीलिए इसमें संशोधन ज़रूरी है। इससे पहले सरकारी आँकड़ों में मात्र 3 मौतें ही दिखाई जा रही थीं, जबकि शिक्षक संघ का दावा इससे कई गुना ज्यादा का है। संगठन ने ऐसे प्रत्येक मामले में पीड़ित परिजनों के लिए 1 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा की माँग की है। सीएम योगी के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने भी सरकार के फैसले की पुष्टि की है।

‘घर में घुसकर मारेंगे, ई थेथर है’: बिहार के मोदी से इतना क्यों चिढ़ता है लालू-राबड़ी का कुनबा

नवंबर 2017: लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव सुर्खियों में थे। वजह उन्होंने सुशील कुमार मोदी के बेटे की शादी में उपद्रव करने की सार्वजनिक तौर पर धमकी दी थी। ‘घर में घुसकर मारेंगे’ टाइप की बातें खुलेआम कही थी।

मई 2021: लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की पार्टी तथा उनके बाल-बच्चों ने एक बार फिर सुशील कुमार मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। राजनीति और भाषा की मर्यादा से परे राजद ने उनके लिए ‘जाहिल, बेशर्म, नग्न और सड़ांध’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। लालू की एक बेटी उन्हें ‘थेथर’ बता ‘थूर’ देने की बात कर रहीं हैं।

आखिर लालू का कुनबा बार-बार सुशील मोदी के पीछे पड़ने को क्यों मजबूर हो जाता है? वो भी ऐसे वक़्त में जब बीजेपी एक तरह से उन्हें राज्य की राजनीति से अलग भी कर चुकी है। इसका जवाब है सुशील मोदी के चुभते सवाल। जरा उनके ताजा सवालों पर गौर करिए;

  • सरकारी आवास की जगह तेजस्वी यादव ने अवैध तरीके से पटना में अर्जित दर्जनों मकानों में से किसी को कोविड अस्पताल क्यों नहीं बनाया?
  • कांति देवी ने मंत्री बनने के बदले जो दो मंजिला भवन गिफ्ट किया था, उसमें बचे 10 फ्लैट में अस्पताल क्यों नहीं खोला गया?
  • तेजस्वी यादव के परिवार में दो बहनें एमबीबीएस डाक्टर हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में उनकी सेवाएँ क्यों नहीं ली गईं?

मोदी ने ये सवाल तब पूछे जब बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने पटना के 1, पोलो रोड स्थित अपने सरकारी आवास को कोविड केयर सेंटर में तब्दील करने का ऐलान किया। कहा कि कोरोना मरीजों का मुफ्त इलाज होगा। मुफ्त खाना दिया जाएगा। साथ ही बिहार सरकार को पत्र लिखकर इस सेंटर को अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल करने और इलाज के लिए मरीजों को भेजने की माँग की।

जिस वक्त देश चीनी वायरस कोरोना के संक्रमण से जूझ रहा है, तेजस्वी यादव की यह राजनीति हैरान नहीं करती। कॉन्ग्रेस का टूलकिट बता चुका है कि महामारी के इस दौर में भी हमारे विपक्षी नेता अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए किस हद तक गिरने को तैयार हैं। उसके सामने तेजस्वी यादव का यह ड्रामा (उनके विरोधियों के अनुसार) कहीं ठहरता भी नहीं।

प्रासंगिक बने रहने की बाजीगरी

असल में 90 के दशक से बिहार की राजनीति कुछ चंद नामों के इर्द-गिर्द ही सिमटी रही है। लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी, रामविलास पासवान। राजनीति के मौसम विज्ञानी कहे जाने वाले पासवान दिवंगत हो चुके हैं। लालू पहले खुद राज्य के मुख्यमंत्री रहे और फिर जब जेल जाने लगे तो अपनी पत्नी राबड़ी देवी को भनसाघर (रसोईघर) से निकाल सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया। नीतीश कुछ वक्त को छोड़ दे तो करीब 15 साल से राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

वहीं सुशील मोदी बिहार में अरसे तक विपक्ष के नेता और उपमुख्यमंत्री रहे हैं। बावजूद वे ऐसे नेता नहीं है जिनका पूरे राज्य में प्रभाव हो। वे ऐसे वक्ता भी नहीं कि आप उनको सुनने को लालायित रहें। उनके अंदाज में ऐसा कुछ नहीं है जो उन्हें खास बनाता है। जबकि, लालू, नीतीश या फिर पासवान की चर्चा हो तो आप दर्जनों खूबियाँ-खामियाँ गिना दें।

2020 के विधानसभा चुनावों में तो यह स्पष्ट दिख रहा था। नतीजों से पहले और उसके ठीक बाद राजनीतिक हलकों में एक सवाल हर कोई पूछ रहा था। इस बार सुशील मोदी का क्या होगा? जब उन्हें राज्यसभा में भेज दिया गया तो माना गया कि वे बिहार की राजनीति की चर्चा से बाहर हो गए हैं। लेकिन वे बार-बार खुद को चर्चा के केंद्र में लाने में सफल रहते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि सुशील मोदी बीते तीन दशक से बिहार की राजनीति में प्रासंगिक क्यों बने हुए हैं? वजह लालू विरोधी राजनीति का वो चेहरा होना है, जो कभी लालू के साथ नहीं दिखा। नीतीश कुमार की तो राजनीतिक शुरुआत ही लालू के साथ हुई है। बीजेपी को छोड़ने के बाद भी वे लालू के पास ही गए थे। पासवान और शिवानंद तिवारी जैसे भी कभी लालू के साथ तो कभी उनके विरोध में दिखे। लेकिन, बिहार का यह मोदी कभी लालू के लिए बैटिंग करते नहीं दिखा। चारा घोटाले से लेकर यूपीए जमाने में केंद्र में मंत्री रहते की गई लालू की कारगुजारियों तक, वे वह चेहरा हैं जो हमेशा मुखर रहे।

इतना ही नहीं पार्टी के भीतर एक धड़े की नाराजगी और नीतीश कुमार के प्रति निष्ठावान होने के आरोपों के बावजूद, जब भी मौका आया सुशील कुमार मोदी ने अपनी पार्टी, अपने लोग, अपने विचार के प्रति हर हाल में निष्ठावान रहने की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। साबित किया है कि विनम्रता और खामोशी से भी राजनीतिक विरोधियों की चौतरफा घेराबंदी कर उन्हें परास्त किया जा सकता।

पटना में बाढ़ के दौरान मोदी की यह तस्वीर काफी वायरल हुई थी (साभार:TOI)

यही वह ताकत है, जो पटना में बारिश से आए बाढ़ में बेबस खड़े राज्य के वित्त मंत्री की उनकी तस्वीरों पर भारी पड़ती है। वे जानते हैं कि बिहार की राजनीति में जब तक लालू परिवार की कारगुजारियाँ रहेंगी, सुशील मोदी प्रासंगिक बने रहेंगे। तेजप्रताप से लेकर रोहिणी आचार्य तक की चिढ़ बताती है कि बिहार के इस मोदी ने उनके परिवार के राजनीतिक सफर को बार-बार कितना मुश्किल बनाया है।

UNESCO के विश्व धरोहर स्थल: बनारस के गंगा घाट और नर्मदा का भेड़ाघाट शामिल, कांचीपुरम के मंदिर को भी मिली जगह

यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में भारत के 6 स्थानों को शामिल किया गया है। केन्द्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में शामिल कराने के लिए देश से 9 स्थानों का नाम भेजा गया था, जिसमें से 6 स्थानों को स्वीकृति मिली है।

यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में भारत से वाराणसी के गंगा घाट, तमिलनाडु के कांचीपुरम मंदिर, मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश के जबलपुर के भेड़ाघाट, महाराष्ट्र के मराठा मिलिट्री आर्किटेक्चर और कर्नाटक के हीरे बेनाकल को जगह मिली है।

इन 6 स्थानों के संभावित सूची में शामिल होने के बाद भारत से यूनेस्को विश्व धरोहर सूची के लिए दिए गए नामों की कुल सँख्या 48 हो गई है। 2019 की गाइडलाइंस के अनुसार किसी भी स्थान को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए पहले उसे संभावित स्थलों की सूची में शामिल किया जाता है। इस गाइडलाइन के बाद यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में अब भारत के 48 स्थान शामिल हैं।

साल 2020 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर और ओरछा शहरों को यूनेस्को के विश्व धरोहर शहरों की सूची में शामिल किया गया था। ओरछा एक ऐसा स्थान है, जहाँ भगवान राम की पूजा राजा राम के रूप में होती है। इसके अलावा गुजरात के अहमदाबाद को यूनेस्को की विश्व हेरिटेज सिटी घोषित किया जा चुका है। अहमदाबाद भारत का पहला ऐसा शहर था, जिसे विश्व धरोहर शहर घोषित किया गया था।  

वर्तमान में भारत में 38 विश्व धरोहर स्थल मौजूद हैं। इन्हें दो भागों में बाँटा गया है, एक हैं सांस्कृतिक और दूसरे प्राकृतिक। 2017 में भारत के चार स्थानों में आयोजित होने वाले कुंभ मेला को भी यूनेस्को के सांस्कृतिक अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया गया था। दुनिया भर में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में भारत छठवें स्थान पर आता है।

साल 2019 में गुलाबी शहर के नाम से मशहूर जयपुर की चारदीवारी (परकोटा) को UNESCO (United Nation Educational scientific Cultural Organisation) ने विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था।

जिस पीड़िता के कारण MP में बना ‘लव जिहाद’ कानून, उनकी संदिग्ध मौत: कॉन्ग्रेस नेता था आरोपित सिकंदर खान, मिल चुकी है जमानत

मध्य प्रदेश में जिस महिला के साथ हुए अपराध के कारण ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून का खाका तैयार करने की शुरुआत हुई थी, उसकी संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई है। उक्त पीड़िता की मौत मई 4, 2021 को ही हो गई थी लेकिन मीडिया में अब जाकर ये खबर सामने आई है। सोशल मीडिया में मंगलवार (मई 18, 2021) को लोगों ने जब इससे सम्बंधित चीजें शेयर करनी शुरू की, तब मामला प्रकाश में आया।

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय थाना पहुँच कर विरोध दर्ज कराया। मामला कुछ यूँ था कि आरोपित सिकंदर उर्फ समीर उर्फ अतीक मंसूरी ने पीड़िता को छद्म हिंदू नाम रख कर अपने प्रेमजाल में फंसाया था। सिकंदर नजीराबाद के अहमद नगर का रहने वाला है। सितम्बर 11, 2020 को उसके खिलाफ बलात्कार सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था। चूँकि पीड़िता तब नाबालिग थी, इसीलिए पॉस्को एक्ट भी लगाया गया।

इस घटना के तूल पकड़ने के बाद कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपित का फार्म हाउस भी ध्वस्त कर दिया गया था। आरोपित सिकंदर खान कॉन्ग्रेस का नेता था और पूर्व-मुख्यमंत्री कमलनाथ की तस्वीर के साथ अपने पोस्टर्स लगाया करता था। उक्त घटना मध्य प्रदेश के सतना स्थित कोलगवाँ की थी। आरोपित के घर से जाँच के दौरान कई बड़े नेताओं के लेटर पैड मिले थे। साथ ही हवाला, ब्याज, अड़ीबाजी, रेल टिकट दलाली, प्लाॅट ब्रिकी के कई दस्तावेज जब्त हुए थे।

इससे साफ़ था कि आरोपित का काफी लम्बा-चौड़ा फैला हुआ था। भोपाल में घर और बैंक के लॉकर से सीडी, डीवीडी, नकदी, चेक भी मिले थे। उसे कोर्ट में पेश करने के बाद केंद्रीय जेल भेज दिया गया था। इस घटना के कुछ दिनों बाद राज्य सरकार ने इसकी चर्चा करते हुए बेटियों को न्याय दिलाने हेतु ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनाने की बात कही थी। विहिप और बजरंग दल के लोग पीड़िता के घर भी पहुँचे।

हिन्दू संगठनों से मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी 24-25 अप्रैल को सहेली के साथ दिल्ली गई थी। वो 28-29 अप्रैल को वहाँ से लौट आई थी। लौटने के बाद उसकी तबीयत खराब लग रही थी। उसने बाजार से दवा लेकर खाई। 4 मई की शाम को उसे साँस लेने में दिक्कत आने लगी। पिता ने बताया कि वो उसे अस्पताल ले जाने के लिए ऑटो लेकर आए, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी।

बेला चौकी स्थित गाँव में अंतिम-संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मई 18 को परिवार वापस आ गया। मृतका के पिता ने पुलिस-प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी और हिन्दू नेताओं व पदाधिकारियों द्वारा मदद के आश्वासन के बावजूद किसी पर कुछ आरोप नहीं लगाया है। आरोपित सिकंदर भी अप्रैल 24 को जमानत पाने में कामयाब रहा था। कई लोगों ने उस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है, क्योंकि पीड़िता में उसके जेल जाने के बाद थाना व SP के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया था कि आरोपित का भाई रहीस उस पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बना रहा है। सिकंदर को जबलपुर हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। अगले दिन केंद्रीय जेल को भी आदेश की प्रति मिल गई थी। 40 वर्षीय सिकंदर ने फेसबुक के जरिए नाबालिग से संपर्क किया था। पुलिस को शिकायत मिली थी कि उसने कई अन्य महिलाओं को भी अपना शिकार बनाया है। सिकंदर पर आरोप है कि वो महिलाओं के अश्लील वीडियो बना कर उन्हें पोर्न वेबसाइट्स पर अपलोड कर दिया करता था।

TikTok वीडियो में सुसाइड करने की एक्टिंग… हमीदुल्लाह ने मारी अपने ही सिर में गोली, मौके पर मौत

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के स्वात जिले में बुधवार (मई 19, 2021) को एक टिकटॉक यूजर ने अपनी वीडियो बनाने के दौरान खुद ही को गोली मार ली। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, 19 साल का हमीदुल्लाह लोडेड पिस्तौल लेकर वीडियो बना रहा था। इसी दौरान उसने गलती से ट्रिगर दबा दी। गोली चलते ही लड़के की मौके पर मौत हो गई।

पूरी घटना कबाल इलाके की है। पुलिस का कहना है कि हमीदुल्लाह की वीडियो बनाने में उसकी सहायता करने वाले दोस्त, जल्दी से उसे अस्पताल भी लेकर गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अब इस पूरी घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

पुलिस ने हमीदुल्लाह का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले में तहकीकात शुरू कर दी है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बातचीत में पुलिस अधिकारी ने बताया, “लड़का लोडेड पिस्तौल के साथ सुसाइड करने की एक्टिंग दिखा रहा था। उसने बंदूक अपने सिर पर लगाई और गलती से उसे चला दिया। दुर्भाग्य से लड़का वहीं मर गया क्योंकि गोली सीधे उसके सिर में लगी। बचने का कोई चांस नहीं था।”

पुलिस ने बताया कि उनके पास वह वीडियो है, जिसमें हमीदुल्लाह मजाक-मजाक में गन पहले लोड करता है और फिर बेखौफ उसे अपने सिर पर लगाता है। पुलिस का कहना है कि लड़का कॉलेज छात्र था और टिकटॉक का बहुत बड़ा फैन था। मगर, इस प्लेटफॉर्म के लिए अपनी वीडियो बनाने के वक्त ही उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने कहा कि हमीदुल्लाह घर से बंदूक ले गया था। लेकिन उसे ये नहीं पता था कि वो लोडेड है। मृतक के दोस्तों के अनुसार, हमीदुल्लाह अपनी वीडियो के लिए गाना तक सोच चुका था। बस वीडियो शूट करनी बाकी थी।

गौरतलब है कि वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म टिकटॉक के कारण यह पहली मौत नहीं है। इससे पहले भी कई टिकटॉक यूजर्स अपनी वीडियो बनाने के लिए ऐसी नादानियाँ कर चुके हैं, जिसकी वजह से उनकी या उनके साथी की जान गई। पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के भिलाई में ही एक टिकटॉक यूजर की वीडियो बनाने के दौरान पानी मे डूबकर मौत हुई थी।

म्यूटेट होकर बदलते वायरस की तरह रणनीति में भी हो परिवर्तन: 10 राज्यों के CM और DM के साथ PM मोदी की मीटिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (20 मई) देश के 10 राज्यों के मुख्यमंत्री और इन्हीं राज्यों के जिलों के DM के साथ कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण और रोकथाम के उपायों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने मीटिंग में इस बात पर जोर दिया कि जब तक माइनर स्केल पर संक्रमण मौजूद है, तब तक चुनौती है और सबसे निचले स्तर पर इस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई से फायदा पूरे देश को होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि इस नई चुनौती से लड़ने में रणनीति के साथ संवेदनशीलता और हौसला बनाए रखने की आदत ही काम आई। जिस प्रकार अपने जिले में अधिकारी लोगों की छोटी से छोटी समस्याएँ भी सुलझाते हैं, वही भावना आज भी काम आ रही है।

मीटिंग में चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों के अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर काम आ सकते हैं और कई राज्यों के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा भी किए हैं। पीएम मोदी ने मीटिंग में कहा कि कई अधिकारियों से अनेकों इनोवेटिव समाधान प्राप्त हुए हैं।

राज्य और जिला अधिकारियों के अनुभवों और फीडबैक के महत्व के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इनकी सहायता से व्यवहारिक नीतियाँ बनाने में सहायता मिली है और टीकाकरण में भी अधिकारियों से प्राप्त सुझावों को शामिल किया गया है।

सबसे निचले स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम की आवश्यकता पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भले ही संक्रमित सक्रिय मरीजों की सँख्या में गिरावट आ रही हो किन्तु जब तक संक्रमण सबसे निचले स्तर तक मौजूद है, खतरा बना हुआ है। इसके लिए पीएम मोदी ने अपील की कि गाँवों समेत जिले के सभी इलाकों में कोविड के सभी प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए और इसके लिए टेस्टिंग एवं डिस्टेंसिंग की रणनीति अपनाना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। 

पीएम मोदी ने महामारी से लड़ने में अपने तौर-तरीकों में बदलाव करने को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि यदि वायरस म्यूटेट होकर बार-बार बदलता है तो हमें भी हर बार अपनी रणनीति में परिवर्तन करना चाहिए।

राज्यों और जिलों के अधिकारियों के साथ कोरोना वायरस पर चर्चा के लिए मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन के वेस्टेज का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वैक्सीन का वेस्टेज रोकना जरूरी है क्योंकि यदि वैक्सीन का एक भी डोज बर्बाद हुआ तो इसका मतलब यही है कि हम किसी एक जीवन को जरूरी सुरक्षा कवच नहीं दे पाए हैं।

पीएम मोदी ने अधिकारियों से कहा कि दूसरी लहर में वायरस के म्यूटेशन से युवाओं और बच्चों पर ज्यादा खतरा आया है लेकिन जिले में अधिकारियों के प्रयासों से यह खतरा गंभीर नहीं हो पाया लेकिन फिर भी आगे की तैयारी होनी चाहिए।

जीवन की सुरक्षा के साथ जीवन को चलाने की आवश्यकता पर भी पीएम मोदी ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि गरीबों को मिलने वाले राशन की सप्लाई सही ढंग से हो और उसकी कालाबाजारी को रोकना अधिकारियों के लिए सबसे आवश्यक है जिससे इस लंबी लड़ाई को जीतने में आसानी हो।

पिछले कुछ दिनों से देश में लगातार कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों की सँख्या रोजाना मिलने वाले नए संक्रमित मरीजों से अधिक है। सक्रिय मरीजों की सँख्या भी अब घट रही है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में देश भर में 3,69,077 मरीज स्वस्थ हुए हैं जबकि इसी दौरान नए संक्रमितों की सँख्या 2,76,110 रही।

सक्रिय मरीजों की जो सँख्या 35 लाख से भी अधिक पहुँच रही थी वह अब घटकर 31,29,878 है। साथ ही देश भर में 18 करोड़ से अधिक लोगों को टीके भी लग चुके हैं। पिछले 24 घंटे में देश भर में 20.55 लाख टेस्ट हुए जो अब तक का सर्वाधिक आँकड़ा है लेकिन इस दौरान संक्रमण दर 13.44% रिकॉर्ड की गई।