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कोविड संकट में IIT बॉम्बे का कमाल: नाइट्रोजन जनरेटर से ऑक्सीजन पैदा, खर्च नए ऑक्सीजन प्लांट का मात्र 15%

Covid-19 के संक्रमण की दूसरी लहर ने देश में चिंता का माहौल बना दिया है। विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी दबाव या रहा है लेकिन संक्रमित मरीजों के लिए अति आवश्यक ऑक्सीजन की कमी प्रमुख चिंता का विषय है। इस कमी से निपटने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों में एक नाम आईआईटी बॉम्बे का भी जुड़ गया है। देश में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए आईआईटी बॉम्बे ने एक समाधान दिया है। यह समाधान है नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने का।

भारत के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक आईआईटी बॉम्बे के शोध एवं विकास (R&D) के डीन मिलिंद आत्रेय के नेतृत्व में तकनीकी संस्थान ने नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। संस्थान के अनुसार वर्तमान ऑक्सीजन संकट के लिए यह एक सरल एवं तीव्र प्रक्रिया है। संस्थान ने सरकारी प्राधिकरणों, एनजीओ और निजी कंपनियों को साथ आने का अनुरोध किया है जिससे इस तकनीकि पर कार्य किया जा सके।

क्या है प्रक्रिया

आईआईटी बॉम्बे के द्वारा बताया गया कि विभिन्न उद्योगों में स्थित नाइट्रोजन प्लांट वातावरण से ही नाइट्रोजन ग्रहण करते हैं। इन नाइट्रोजन प्लांट्स को ऑक्सीजन जनरेटर में बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया में मात्र मॉलेक्युलर फिल्टर्स में बदलाव किया जाता है। इसके लिए प्रेशर स्विंग एडसॉरप्शन (PSA) नाइट्रोजन प्लांट्स के मॉलेक्युलर फिल्टर्स में उपस्थित कार्बन के स्थान पर जिओलाइट का उपयोग किया जाता है, जिससे PSA नाइट्रोजन प्लांट PSA ऑक्सीजन प्लांट में बदल जाता है।

संस्थान की विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस पूरे प्रयोग के लिए मात्र 3 दिन में ही सेटअप को स्थापित किया गया, जो नए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने में लगने वाले समय की तुलना में काफी कम है। इस सेटअप से 3.5 एटमॉस्फेरिक प्रेशर पर ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकता है, जिसकी शुद्धता 93-96 फीसदी होती है। इस गैसीय ऑक्सीजन का उपयोग कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के लिए किया जा सकता है। नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने की प्रक्रिया में लगने वाला खर्च नए ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना में लगने वाले खर्च का मात्र 10-15 फीसदी है।  

आईआईटी बॉम्बे के साथ इस प्रयोग में टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड (TCE) ने भी अपना योगदान दिया।  

‘बेशर्म भाई, गर्ल गैंग… पार्टी कर चुकी’ – मास्क पर ज्ञान देने आईं करीना कपूर खान को लोगों ने किया ट्रोल

देश भर में कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज हो रखी है। ऐसे में कई बॉलीवुड कलाकार हैं, जो सोशल मीडिया पर अपने फॉलोवर्स से कोविड प्रोटोकॉल्स को फॉलो करने की अपील कर रहे हैं। करीना भी उन्हीं कलाकारों की सूची में शामिल एक नाम हैं। 

हाल में उन्होंने एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने मास्क सही से न पहनने वालों पर अपना गुस्सा दिखाया। करीना ने लिखा,

“इस बात की कल्पना करना मेरे लिए मुश्किल है कि अब भी न जाने कितने लोग हैं जो देश की स्थिति को नहीं समझ रहे। अगली बार आप बाहर निकलें या मास्क को चिन से नीचे पहनें या नियम का उल्लंघन करें तो पहले डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के बारे में सोचें। वे मानसिक और शारीरिक रूप से टूटने लगे हैं। जो कोई भी ये पढ़ रहा है वो इस चेन को तोड़ने के लिए उत्तरदायी है। अब और नहीं। भारत को आपकी जरूरत है।”

करीना का यह पोस्ट दो दिन पहले उनके इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था। कई लोग इस पोस्ट पर करीना की प्रशंसा करने लगे लेकिन कुछ ने उनसे सवाल भी किया है कि आखिर वो ये सब बात अपने कजन (चचेरे भाई) को क्यों नहीं समझातीं।

एक यूजर ने कहा, “ये सेलेब्रिटियों पर भी लागू है, जो बेशर्मों की तरह छुट्टियों पर जा रहे हैं। उन तक भी अपनी बात पहुँचाओ।”

ट्रुशा नाम की यूजर ने कहा, “यही बात अपने कजन को भी समझाओ जो मालदीव में एक हफ्ते पहले तक छुट्टी मना रहा था।”

सायरा कादरी ने करीना का मजाक उड़ाते हुए पूछा कि क्या तुम अपनी गर्ल गैंग के साथ हो? और अपनी पार्टी कर चुकी हो?

स्नेहा ने कहा, “इतना बड़ा पोस्ट लिखने से बेहतर था कि आप ऑक्सीजन देश को डोनेट करतीं, वो ज्यादा मददगार साबित होता।”

प्रज्ञा तिवारी ने कहा, “अपनी गर्ल गैंग और भाई रणबीर को समझा लो, वही मालदीव में घूम रहे थे।”

एक यूजर ने पूछा कि आखिर तुम और तुम्हारा पति इस संकट के समय में देश के लिए क्या कर रहे हो? सिर्फ़ नसीहत दे रहे हो। दूसरे ने पूछा, “करीना तुम लोग बेड और ऑक्सीजन खऱीदकर भारत के अस्पतालों को क्यों नहीं दे देते।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कोरोना संक्रमण से रिकवर होने के बाद करीना कपूर खान के चचेरे भाई रणबीर कपूर और महेश भट्ट की बेटी आलिया भट्ट मालदीव के लिए निकले थे। उनकी कोरोना काल में एयरपोर्ट से फोटो भी सामने आई थी। उसे देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के अलग-अलग रिएक्शन आए। कुछ यूजर्स ने उन्हें दुत्कारा तो कुछ उनके हीरो हिरोइन होने पर सवाल खड़े करने लगे।

हिंदू मंदिरों ने कोरोना संकट में लाखों-करोड़ों का किया दान: कहीं कोविड सेंटर की व्यवस्था, कहीं हुआ खाने का इंतजाम

कोरोना महामारी से आज पूरा भारत त्रस्त हो रखा है। हर जगह स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी के कारण मौत की खबरें आ रही हैं। लोग एक राज्य से दूसरे राज्य मदद के लिए भाग रहे हैं। कहीं दवाइयों की किल्लत है तो कहीं ऑक्सीजन की।

ऐसी विकट स्थिति में केवल केंद्र या राज्य सरकारें ही महामारी से निपटने के लिए योजना नहीं बना रहीं बल्कि कई अन्य संस्थान भी अपने बूते पीड़ितों की मदद करने में लगे हैं। इसी क्रम में अलग-अलग राज्यों के विभिन्न मंदिर कोरोना संक्रमितों की सहायता के लिए आगे आए हैं। किसी ने दान पेटी देकर मदद की, तो किसी ने मंदिर परिसर को कोविड सेंटर बना दिया।

इससे पहले हम उन मंदिरों की सूची आज आपके सामने रखें, एक बात ये ध्यान रखने वाली है कि सामान्य दिनों में इन्हीं मंदिरों को वामपंथी अपने निशाने पर लेते हैं। यहाँ होने वाले धर्म-कर्म के पाठ पर आपत्ति उठाते हैं। इन्हें मिलने वाले दान पर सवाल करते हैं। लेकिन जब संकट की घड़ी आती है, तब यही मंदिर निःस्वार्थ भाव के साथ जनता की मदद को आगे आ जाते हैं। 

आइए जानें उन मंदिरों के नाम, जो इस संकट की घड़ी में वाकई संकटमोचक की भूमिका में आगे बढ़ कर आए :

पटना का महावीर मंदिर: कोरोना संकट में पटना जंक्शन पर स्थित महावीर मंदिर संक्रमितों को मुफ्त में ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए आगे आया है। आज से यानी 30 अप्रैल से यहाँ ऑक्सीजन वितरण का काम ऑनलाइन शुरू हुआ है। पिछले साल भी महावीर मंदिर ने कोरोना संक्रमण के बीच आमजन तक मदद पहुँचाई थी।

मुंबई में जैन समुदाय का मंदिर: हाल में मुंबई स्थित जैन समुदाय मंदिर को कोविड 19 सेंटर में परिवर्तित किया गया। यहाँ 100 बिस्तर वाले पैथोलॉजी लैब बनाए गए। पिछले साल इसी मंदिर के कोविड सेंटर में बदलने के बाद 2000 से अधिक मरीजों का यहाँ इलाज हुआ था।

मुंबई का श्री स्वामी नारायण मंदिर: मुंबई की बिगड़ती स्थिति देखते हुए इस मंदिर को कुछ समय पहले कोविड अस्पताल में तब्दील किया गया। मंदिर प्रमुख ने आश्वस्त किया कि यहाँ उपचार का ध्यान मंदिर समिति द्वारा रखा जाएगा।

महाराष्ट्र का संत गजानन मंदिर: प्रदेश में बुलढाणा जिले के शेगाँव में स्थित संत गजानन महाराज मंदिर, राज्य के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में से एक है। यहाँ कोरोना संदिग्धों और रोगियों के लिए 500-500 बेड के अलग-अलग आइसोलेशन परिसर बनाए हैं। इसमें एक सामुदायिक रसोई है जो 2,000 लोगों के लिए खाना तैयार करती है। ये खाना सबको मुफ्त में दिया जाता है। 

वडोडरा का स्वामी नारायण मंदिर: कोरोना मरीजों के लिए मंदिर में 500 बेड का इंतजाम किया गया है। वहाँ के सारे साधू-संत मरीजों की सेवा में जुटे हैं। मंदिर प्रशासन ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर कोविड बेड संख्या बढ़ा दी जाएगी।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर: मंदिर प्रशासन ने ऐलान किया है कि कोरोना संक्रमित लोगों को दवाएँ वितरित की जाएँगी। इसका लाभ कम आय वाले वर्ग को मिलेगा। मंदिर प्रशासन ने इस पर बजट जारी कर दिया है। पहले चरण में 5 हजार दवाई की पोटली तैयार हैं। इसमें एक सुझाव पर्ची भी दी जा रही है।

पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर: मंदिर प्रशासन ने अपने नीलाचल भक्त निवास को कोविड-19 केयर सेंटर में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। 120 बिस्तरों वाली यह सुविधा कोरोना वायरस से संक्रमित मंदिर से जुड़े अधिकारियों के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में भी काम करेगी।

मुंबई के कांदिवली के पावन धाम मंदिर ने एक बार फिर अपनी चार मंजिला इमारत को 100 बेड से सुसज्जित कोविड-19 क्वारंटाइन सेंटर में बदल दिया है। 100 में से, 50 बेड एक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर यूनिट, ऑक्सीमीटर, पल्स मीटर, पोर्टेबल बीपी उपकरण, मॉनिटर मशीन से लैस है। इसके अतिरिक्त, 10 डॉक्टरों सहित 50 से अधिक चिकित्सा कर्मचारी सुविधा में तैनात हैं।

इस्कॉन मंदिर: इस्कॉन मंदिर की ओर से गर्भवती महिलाओं, घर में रह रहे बुजुर्ग, बच्चों व कोरोना मरीजों के लिए फ्री में खाने की व्यवस्था की जाएगी। मंदिर की ओर से इसके लिए स्पेशल किचन शुरू की गई है। एक कॉल पर मंदिर इस खाने को फ्री में पहुँचाएगा। इस्कॉन की ओर से हेल्पलाइन नंबर 9717544444 जारी किया गया है। 

इंदौर का राधास्वामी सत्संग व्यास: कोरोना संकट में इसे देश का दूसरा सबसे बड़ा कोविड सेंटर बनाया गया है। इसे “माँ अहिल्या कोविड केयर सेंटर” नाम दिया गया है। 600 बिस्तरों वाले इस सेंटर में मरीजों के मनोरंजन की भी अच्छी व्यवस्था की गई है। आवश्यकता पड़ने पर यहाँ अधिकतम 6000 बिस्तरों की भी व्यवस्था की जा सकेगी। इसके परिसर में 10 बड़े एलईडी लगाए गए हैं, जिसमें रामायण, महाभारत के साथ ही आईपीएल का टेलीकास्ट भी किया जाएगा।

अयोध्या में राम मंदिर: कोरोना संकट को देखते हुए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ने ऑक्सीजन प्लांट को स्थापित करने की घोषणा की। इसमें 55 लाख रुपए के खर्चे को ट्रस्ट उठाएगा। ये ऑक्सीजन प्लांट दशरथ मेडिकल कॉलेज में स्थापित होगा।

तिरुपति मंदिर: दान पुण्य के नाम पर तिरुपति मंदिर का नाम अक्सर सूची में सबसे ऊपर होता है। ये मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर में है। कोरोना संकट में पिछले साल यहाँ प्रवासी मजदूरों को ठहराने की व्यवस्था हुई थी।

शिरडी साई बाबा मंदिर: पिछले साल कोरोना से लड़ाई में शिरडी के श्रीसाईंबाबा संस्थान ट्रस्ट ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए राज्य सरकार को आर्थिक मदद का ऐलान किया था। ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 करोड़ रुपए देने का निर्णय लिया था।

सिद्धिविनायक मंदिर: मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर ने  पिछले साल कोरोना संकट को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार को 10 करोड़ रुपए की मदद की थी। इसमें 5 करोड़ कोरोना के लिए और 5 करोड़ शिव भोजन के लिए दिए गए थे।

छत्तीसगढ़ का माँ महामाया मंदिर: संक्रमण से चल रही जंग में महामाया मंदिर ट्रस्ट समिति ने पिछले साल मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख 11 हजार रुपए दान दिए थे। इस दान के पीछे मंदिर का उद्देश्य संक्रमितों की मदद करना था।

सारंगपुर हनुमान मंदिर: गुजरात के बोटाद जिले में स्थित प्रसिद्ध मंदिर ने पिछले साल कोरोना वायरस मरीजों के लिए अपनी धर्मशाला को 100 बिस्तरों वाले अस्पताल में बदल दिया था।

यूपी के सिद्धार्थनगर में स्थित काली मंदिर: कोरोना संकट की गंभीरता को देखते हुए डुमरियागंज में बने इस काली मंदिर ने पिछले साल अपना पूरा दान पात्र प्रशासन को सौंप दिया था। खास बात ये थी कि ये दान पात्र पिछले 6 दशक से नहीं खुला था। लेकिन मंदिर ने महामारी के समय निपटने के लिए इसे प्रशासन को देकर नई मिसाल दी।

गोरखपुर का प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर: पिछले साल मंदिर में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए रसोई चलाई गई। मंदिर ने वायरस पीड़ितों के इलाज के लिए गोरखपुर एवं बलरामपुर के तुलसीपुर में अस्पताल का संचालन भी किया। इसके अलावा गोरखनाथ पीठ और उससे संबंधित कुछ संस्थाओं और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् ने ‘पीएम केयर फंड’ एवं ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ में अब तक 51,00000 रुपए का योगदान भी दिया।

सोमनाथ मंदिर: पिछले साल राज्य के पूर्व सीएम केशूभाई पटेल की अध्यक्षता वाले श्रीसोमनाथ ट्रस्ट की ओर से कोरोना स्थिति से निपटने के लिए 1 करोड़ रुपए का दान सीएम राहत कोष में दिया गया था।

गुजरात का अंबाजी मंदिर: सीएम रिलीफ फंड में 1 करोड़ रुपए अंबाजी मंदिर ने भी डोनेट किए थे। मंदिर ने साथ ही लॉकडाउन प्रभावित इलाकों में खाना पहुँचाने का भी किया था।

पंचकुला में माता मनसा देवी मंदिर: पिछले साल 21 अप्रैल को हरियाणा स्थित मशहूर माता के मंदिर की ओर से 10 करोड़ रुपए कोरोना रिलीफ फंड में दिए गए थे।

राजस्थान का रानी सत्ती मंदिर : राजस्थान के रानी सत्ती मंदिर में पिछले वर्ष 200 रूम का आइसोलेशन फैसिलिटी तैयार की गई थी।

माता वैष्णो देवी मंदिर: कटरा स्थित माँ वैष्णो मंदिर के नॉन गैजेटेड स्टॉफ ने अपनी अपनी 1 दिन की सैलरी को स्टेट रिलीफ फंड में दान किया था। वहीं गैजेटेड स्टाफ ने 2 दिन की सैलरी दान में दी थी। इसके अलावा कटरा बस्ती में जरूरतमंदों को बोर्ड उपाध्यक्ष के निर्देश पर राशन किट बाँटने का काम भी हुआ था। श्राइन बोर्ड की ओर से आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स जिला प्रशासन को दिया गया था, जिसमें 600 बेड डालने की जगह थी।

तमिलनाडु का काँची मठ: काँची मठ ने पिछले वर्ष पीएम रिलीफ फंड को 10 लाख रुपए और सीएम रिलीफ फंड को भी 10 लाख रुपए का दान दिया था। इसके अलावा महामारी से उबरने के लिए वहाँ प्रार्थना भी की थी।

उल्लेखनीय है कि हमने आपको सिर्फ उन चंद मंदिरों के नाम बताएँ हैं, जिन्हें पिछले साल से अब तक मीडिया में कवरेज मिली या वह सोशल मीडिया की वजह से ये चर्चा में आए। इनके अलावा देश-विदेश में स्थित तमाम हिंदू मंदिर हैं, जो लगातार प्रयास में जुटे हैं कि वह कैसे कोरोना से निपटने के लिए राज्य प्रशासन और आम जन की सहायता करें।

पूनावाला को Y सेक्योरिटी के मायने: अब ‘देशद्रोही’ बता किसी नम्बी नारायणन का जीवन तबाह नहीं किया जाएगा

केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला के लिए वाई-श्रेणी की सुरक्षा-व्यवस्था की घोषणा की है। अब से पूनावाला की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) की होगी। सरकार का यह फैसला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लिखे एक पत्र के बाद आया है। पत्र में प्रकाश कुमार सिंह ने लिखा था कि पूनावाला को कई ग्रुप की तरफ से धमकी मिल रही है।

जब से केंद्र सरकार ने टीकाकरण के तृतीय चरण की घोषणा की है, भारत में बनने वाली वैक्सीन की कीमतों को लेकर एक तीखी बहस छिड़ गई है। ऐसा नहीं है कि केवल कुछ राज्य सरकारों ने ही बार-बार वैक्सीन की कीमतों को अधिक बताया। ऐक्टिविस्ट, सिनेमा स्टार और सोशल मीडिया सेलेब ने भी क़ीमतों पर बयान दिए हैं, जिन पर काफी लंबी बहसें हुई हैं। कुछ ऐक्टिविस्ट तो यह माँग भी उठा चुके हैं कि सीरम इंस्टीट्यूट हर भारतीय को मुफ़्त में वैक्सीन दे।

फ़रहान अख़्तर ट्वीट कर वैक्सीन की क़ीमत को लेकर पूनावाला से सवाल कर चुके हैं। राहुल गाँधी पहले ही उन्हें न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मित्र घोषित कर चुके हैं, बल्कि आदत के अनुसार यह आरोप भी लगा चुके हैं कि प्रधानमंत्री उन्हें फायदा पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में यदि पूनावाला को धमकी मिल रही हों तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं। नेताओं या सिनेमा स्टार के समर्थक आचरण में कभी-कभी उनसे कई हाथ आगे चले जाते हैं।

पर यहाँ प्रश्न यह उठता है कि एक उद्योगपति को मिलनेवाली इस तरह की धमकियाँ क्या सोशल मीडिया पर लोगों के दो-चार दिन की प्रतिक्रियाओं का परिणाम है? कोई भी नेता यदि किसी के ऊपर जनता या देश के विरुद्ध काम करने का बार-बार गैर जिम्मेदारीपूर्ण आरोप लगाएगा तो उसके समर्थकों के मन में उस व्यक्ति के लिए क्या धारणा बनेगी और वे कैसी प्रतिक्रिया देंगे? जब राहुल गाँधी, कोई सिनेमा स्टार या कोई सोशल मीडिया इंफलुएंशर किसी के बारे में बिना तथ्य के लगातार कुछ लिखेगा तो सोशल मीडिया पर उसके समर्थकों का आचरण उनकी लिखी गई बातों के अनुसार ही तो होगा। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि पूनावाला को मिलने वाली धमकियाँ इनमें से किसी के समर्थकों की करतूत है, मेरा कहना मात्र इतना है कि एक आम सोशल मीडिया यूजर अपने नेता या अपने प्रणेता से बहुत हद तक प्रभावित रहता है।

दूसरा प्रश्न यहाँ यह भी उठता है कि हमारे देश के कुछ लोग हमारे उद्योगपतियों के लिए अपने मन में कैसी धारणाएँ पालते हैं और उसे सार्वजनिक मंचों पर कैसे रखते हैं? कल्पना करें कि अपने जिन उद्योगपतियों के लिए इन लोगों के मन में ऐसी धारणा है, यही उद्योगपति यदि किसी और देश के नागरिक होते तो उनके प्रति वहाँ के लोगों का व्यवहार वैसा ही होता जैसा हमारे यहाँ है? सीरम इंस्टीट्यूट जिस तरह के शोध करता है और जिस काम के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, उसके सीईओ के साथ ऐसे व्यवहार की कल्पना हम किसी और देश में कर सकते हैं? क्या हम सोचते हैं कि दुनिया भर में फैली ऐसी महामारी के लिए टीके बनाने वाले इंस्टीट्यूट के सीईओ को किसी और देश में धमकी मिलती या उसे वहाँ हीरो की तरह देखा जाता?

कुछ लोगों का मानना है कि वैक्सीन बनानेवाली भारतीय कंपनियाँ लोगों को मुफ़्त वैक्सीन दें। ऐसे लोगों ने कभी यह सोचा है कि इतने बड़े स्तर पर वैक्सीन बनाने के लिए जो तैयारी और निवेश चाहिए उसे लेकर किस तरह का जोखिम रहता है? लोग क्यों नहीं सोचते कि दुनिया भर के लिए वैक्सीन बनाने वाला इंस्टीट्यूट हमारे देश के लिए कितने गर्व की बात है? क्यों नहीं सोचते कि अपने उद्योगपतियों, ख़ासकर उन उद्योगपतियों के लिए जो शोध के इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र में हैं, उनके साथ यदि ऐसा व्यवहार किया जाएगा तो हमारे कितने उद्योगपति इस क्षेत्र में जाएँगे? आए दिन अपने देश में शोध के लिए सही वातावरण न होने की शिकायत की जाती है। पर ऐसा करते हुए लोग यह नहीं सोचते कि अपने एक हीरो के प्रति हमारा ऐसा व्यवहार भविष्य के दर्जनों और हीरो को इस क्षेत्र में आगे आने से रोकेगा?

धमकी देने वाले लोग चाहे जो हों पर राहत की बात है कि सरकार ने अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए उनकी सुरक्षा का यथोचित प्रबंध किया। यह इस बात को भी दर्शाता है कि न केवल अपने उद्योगों, बल्कि अपने उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों और ऐसे तमाम लोगों की सुरक्षा के प्रति सरकार अति गंभीर है। हम सोशलिज्म के उन दिनों से बहुत आगे आ चुके हैं, जिसमें सरकार या नेताओं के लिए प्रॉफिट शब्द का उच्चारण एक असंभव सा काम माना जाता है। हम नेहरू और जेआरडी टाटा के सम्बंध वाले दिनों से आगे आ चुके हैं। हम काफी हद तक यह समझने लगे हैं कि हमारे हीरो केवल एक खास वर्ग के लोग नहीं हैं। हमारे उद्योगपति भी हमारे हीरो हैं।

सरकार का यह कदम हमें यह भी बताता है कि हम केवल नेहरू जी और जेआरडी टाटा के सम्बंधों वाले दिनों से ही आगे नहीं आए हैं, बल्कि नम्बी नारायणन के दिनों से भी आगे आ चुके हैं।

‘आयशा की तरह मरना नहीं चाहती’: दहेज के लिए मुस्लिम महिला की प्रताड़ना, PM मोदी-CM योगी से लगाई गुहार

इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें दिख रही मुस्लिम महिला ने अपनी पहचान बुलंदशहर के हिना खान के तौर पर बताई है। उसका कहना है कि ससुरालवाले दहेज के लिए उसे प्रताड़ित कर रहे हैं। उसने अधिकारियों से अपनी जान बचाने की गुहार लगाई है।

हिना खान यह भी बता रही है कि इस मामले को लेकर वह पुलिस के पास भी गई, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। वीडियो में वह कहती नजर आ रही है, “मैं मरना नहीं चाहतीं मैं… आयशा की तरह जान नहीं देना चाहती।”

वीडियो में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी इंसाफ दिलाने की गुहार लगा रही है। उसका कहना है कि पिछले छह महीने से वह यहॉं से वहॉं दौड़ रही है। लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिल रही, क्योंकि अधिकारियों को देने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं।

हिना पत्रकारों से अपनी पीड़ा लोगों तक पहुॅंचाने की भी अपील कर रही है ताकि उसे इंसाफ मिल सके। उसका कहना है कि उसके ससुरालवाले उसे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और उसकी हत्या कर दी जाएगी।

वीडियो में हिना खान को आयशा का भी जिक्र करते सुना जा सकता है। आयशा ने दहेज के लिए प्रताड़ना सहने के बाद गुजरात में आत्महत्या कर ली थी। साबरमती नदी में कूदकर जान देने से पहले आयशा ने एक वीडियो रिकॉर्ड की थी। यह वीडियो वायरल होने के बाद उसके पति को गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल वह जमानत पर है।

कोविड संक्रमण के बावजूद जारी रहेगा राकेश टिकैत का ‘ड्रामा’, कहा, ‘सरकार किसानों की आवाज दबा रही’

दिल्ली में लगातार बढ़ रहे कोरोनावायरस संक्रमण के बीच भारतीय किसान संघ (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार (29 अप्रैल) को कहा कि किसान आंदोलन चलता रहेगा। टिकैत के कहने का यही मतलब था कि चाहे संक्रमण कितना भी बढ़ जाए उनकी आंदोलन की नौटंकी चलती रहेगी।

29 अप्रैल को हरियाणा के भिवानी में प्रेम नगर गाँव में किसान महा पंचायत को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि Covid-19 संक्रमण की दूसरी लहर के बाद भी किसान दिल्ली बॉर्डर में प्रदर्शन स्थल से नहीं हटेंगे।

टिकैत ने कहा, “Covid-19 के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार किसानों की आवाज को दबाना चाहती है। हम सरकार से बात करने को तैयार हैं। गुजरात में किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं लेकिन अगर किसानों का मुद्दा नहीं सुलझा तो भाजपा सरकार गुजरात मॉडल को पूरे देश में लागू कर देगी।“

टिकैत ने भी राम मंदिर के लिए मिले दान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए दान देने से अच्छा है कि नए एम्स खोलने के लिए लोगों से दान की अपील की जाए। हरियाणा सरकार पर आरोप लगाते हुए टिकैत ने कहा कि सरकार 6 सालों तक सत्ता में रहने के बाद भी भिवानी में एक मेडिकल कॉलेज भी नहीं बना सकी।

एक अन्य किसान नेता गुरनाम सिंह चारुनी ने राकेश टिकैत की भाषा बोलते हुए कहा कि अगर सरकार पूरे देश में भी सीआरपीसी की धारा 144 लगा देती है तब भी किसान आंदोलन चलता रहेगा।

पंजाब और हरियाणा के कई किसान पिछले 5 महीनों से मोदी सरकार द्वारा पास किए गए कृषि कानूनों को रद्द करने की माँग करते हुए दिल्ली की ओर आने वाले राजमार्गों में धरने पर बैठे हुए हैं।

सितंबर 2020 में मोदी सरकार ने इन कृषि कानूनों को पास किया था। ये तीन कृषि कानून हैं, कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) अधिनियम 2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं सुरक्षा) मूल्य निर्धारण समझौता अधिनियम 2020, आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020.

पहले भी यह रिपोर्ट दी जा चुकी है कि दिल्ली बॉर्डर के आसपास होने वाले प्रदर्शन और किसान रैलियों के कारण दिल्ली और उसके आसपास के राज्यों में Covid-19 संक्रमण तेजी से फैला। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) के द्वारा जीनोम सीक्वेंसिंग के आधार पर प्राप्त डाटा में बताया गया है कि कोरोनावायरस के यूके स्ट्रेन कई उत्तरी राज्यों में प्रभावी हुआ जिनमें पंजाब भी शामिल है। केंद्र सरकार की प्रयोगशालाओं के दो वैज्ञानिकों ने यह भी जानकारी दी कि पंजाब में बड़ी सँख्या में लोगों के जमा होने के कारण कोरोनावायरस के यह स्ट्रेन दिल्ली, उत्तरप्रदेश और हरियाणा में फैल गया।

Covid-19 संक्रमण ने दिल्ली को बहुत अधिक नुकसान पहुँचाया है। गुरुवार (29 अप्रैल) को संक्रमण से दिल्ली में 395 मौतें हुईं। इसी दिन दिल्ली के अंदर 24,235 नए संक्रमित मरीज मिले और संक्रमण दर बढ़कर 32.82 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आँकड़ों से यह पता चला है कि पिछले आठ दिनों से दिल्ली में लगातार 300 से अधिक मौतें हुई हैं।

UP सरकार नहीं चाहती थी पंचायत चुनाव, कारण था कोरोना संक्रमण… इलाहाबाद HC के फैसले के बाद कराना पड़ा

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर प्रश्न उठ रहे हैं। Covid-19 के संक्रमण के बीच उत्तर प्रदेश में हो रहे पंचायत चुनावों के कारण लगातार राज्य सरकार की आलोचना हो रही है किन्तु सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार पंचायत चुनाव नहीं कराना चाहती थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के कारण राज्य में चुनाव कराने पड़े। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि राज्य में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 10 मई के पहले पूरी हो जानी चाहिए।

रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि एक रिट याचिका पर निर्णय देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 4 फरवरी को राज्य सरकार को यह आदेशित किया था कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया 10 मई के पहले पूरी हो जानी चाहिए।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि विनोद उपाध्याय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के विरुद्ध दायर की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए 4 फरवरी को न्यायालय ने यह आदेश दिया था। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि उच्च न्यायालय का यह आदेश भी था कि राज्य चुनाव आयोग पंचायत चुनाव में आरक्षण और सीट आवंटन की प्रक्रिया भी 15 मार्च तक पूरी कर ले।

हाथरस के एक ग्राम प्रधान विनोद उपाध्याय की याचिका पर जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने सुनवाई की थी। याचिका में उपाध्याय के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 243-E के प्रावधानों के तहत उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने के लिए न्यायालय द्वारा आदेशित किए जाने की माँग की गई थी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव चार चरणों में आयोजित किए गए, जिनका परिणाम 2 मई को घोषित किया जाएगा।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि पंचायत चुनाव पिछले साल दिसंबर से ही लंबित थे। महामारी के कारण पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन का कार्य भी प्रभावित हुआ था। इसी विषय में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई थी और माँग की गई थी कि सरकार चुनावों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करे।

उत्तर प्रदेश के सरकारी प्रवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि चुनाव आयोजित कराने के न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव का नोटिफिकेशन जारी किया लेकिन चुनावों को कोविड प्रोटोकॉल के तहत ही संपन्न कराने की पूरी व्यवस्था की गई।

प्रवक्ता के अनुसार मतदाताओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। गाँवों के सैनिटाइजेशन का काम भी किया गया। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते राज्य चुनाव आयोग ने यह निर्णय भी लिया था कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशी के साथ 5 से अधिक व्यक्ति नहीं होंगे।

मुफ्त में ऑक्सीजन देगा महावीर मंदिर, 150 लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर प्रतिदिन: जानें क्या है प्रक्रिया

कोरोना संकट के समय में पटना का महावीर मंदिर संकटमोचक की तरह कोविड मरीजों की मदद करने आगे बढ़ा है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, महावीर मंदिर के परिसर में आज से ऑक्सीजन सिलेंडर फ्री में भरे जाएँगे।

मंदिर के सचिव ने बताया, “हमारा लक्ष्य 150 लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर प्रतिदिन देना है। भीड़ से बचने के लिए ये काम ऑनलाइन बुकिंग के जरिए होगा। हम उन्हें स्लॉट देंगे और मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिल करेंगे।”

बता दें कि मंदिर परिसर में इस काम की शुरुआत आज यानी 30 अप्रैल को जरूरतमंद रोगियों को नि:शुल्क ऑक्सीजन वितरित करके की गई।

यहाँ से ऑक्सीजन पाने की प्रक्रिया मेंं इन खास बातों का ध्यान दें:

  • ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए ऑनलाइन बुकिंग करना अनिवार्य है।
  • ऑनलाइन ऑक्सीजन बुकिंग के बाद अपना बुकिंग स्टेटस चेक करें।
  • यह ऑक्सीजन पूर्णतः नि:शुल्क है। किसी से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा।
  • इसके लिए मरीजों को आधार कार्ड, मेडिकल पर्ची, जिसमें ऑक्सीजन बुकिंग आईडी स्लिप हो, अपने साथ लाना अनिवार्य है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, महावीर मंदिर के परिसर में इस शुभ काम की शुरुआत न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने की। आचार्य कुणाल ने बताया कि महावीर मंदिर ट्रस्ट ने ऑक्सीजन प्लांट बिठाने के लिए पूरे देश में संपर्क किया। लेकिन किसी ने भी 4 माह के पहले इसे क्रियान्वित करने का आश्वासन नहीं दिया। तभी मंदिर की ओर से स्थानीय स्तर पर ऑक्सीजन सस्ते दर में मुफ्त वितरण करने का निर्णय लिया। 

आचार्य किशोर कुणाल ने कहा कि उनका लक्ष्य प्रतिदिन 150 जरूरतमंद रोगियों को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने का है। ऑक्सीजन सिलेंडर का वितरण ऑनलाइन सिस्‍टम से होगा। उन्होंने कहा, “हम लोगों ने छोटे साइज के सिलेंडर खरीदने की बहुत कोशिश की, लेकिन इसकी उपलब्धता नहीं होने से लोगों को 10.2 लीटर के सिलिंडर में ही ऑक्सीजन दे पाने में समर्थ होंगे।”

न्यास सचिव ने यह जानकारी भी दी कि 1 मई यानी शनिवार से चिरैयाटाँड पुल के पास कंकड़बाग में स्थित महावीर आरोग्य संस्थान में कोविड रोगियों के लिए 40 बेड वाला अस्पताल आरंभ किया जा रहा है। वहीं बेगूसराय में भी शनिवार या सोमवार से महावीर अग्रसेन सेवा सदन में 25 बेड के साथ कोविड अस्पताल प्रारंभ करने की तैयारी है।

कैसे पहचानें असली और नकली Remdesivir, IPS अधिकारी ने दो ट्वीट से समझाया

देश भर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। अस्पतालों में कोविड के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टर रेमडेसिविर इंजेक्शन की माँग कर रहे हैं। इसी बीच रेमडेसिविर की माँग अधिक और सप्लाई ​कम होने के कारण इसकी कालाबाजारी की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ लोग जरूरतमंदों को ऊँचे दामों पर नकली इंजेक्शन बेच रहे हैं। ऐसे में रेमडेसिविर इंजेक्शन असली है या नकली, ये जानना बेहद जरूरी हो गया है।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की डीसीपी और आईपीएस अधिकारी मोनिका भारद्वाज ने दो ट्वीट के जरिए रेमडेसिविर की नकली और असली शीशी की पहचान कैसे की जाए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने रेमडेसिविर इंजेक्शन के असली और नकली पैकेट की तस्वीरें शेयर करते हुए बताया है कि कि हम असली रेमडेसिविर के पैकेट की पहचान कैसे कर सकते हैं।

आईपीएस अधिकारी मोनिका भारद्वाज ने सोमवार (26 अप्रैल 2021) को दो ट्वीट कर बताया कि नकली और असली रेमडेसिविर शीशी के बीच की पहचान कैसे की जाए। IPS ऑफिसर ने इंजेक्शन के नकली पैकेट पर मौजूद कुछ गलतियों की तरफ इशारा किया है, जो इसे असली पैकेट से अलग करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

मोनिका ने असली और नकली रेमडेसिविर के बीच के अंतर को तस्वीरों में उजगार किया है, जो इस प्रकार हैं-

1.नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर इंजेक्शन के नाम से ठीक पहले ‘Rx‘ नहीं लिखा हुआ है।

2. पैकेट पर लिखी गई तीसरी लाइन में एक कैपिटलाइजेशन एरर है। असली पैकेट पर 100 mg/Vial (V Capital) लिखा हुआ है, जबकि नकली पैकेट पर 100 mg/vial (v small) लिखा हुआ है।

3. असली पैकेट पर For use in लिखा हुआ है, जबकि नकली पैकेट पर for use in लिखा हुआ है। यानी दोनों में सिर्फ Capital F का अंतर है।

4. असली पैकेट के पीछे चेतावनी लेबल (Warning Label) लाल रंग में है, जबकि नकली पैकेट पर Warning लेबल काले रंग में है।

5. नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर ‘Warning’ लेबल के ठीक नीचे मुख्य सूचना ‘Covifir’ (ब्रैंड नाम) is manufactured under the licence from Gilead Sciences में Inc नहीं लिखा हुआ है।

6.Manufactured by के नीचे Hyderabad के बाद india लिखा है, जो कि India होना चाहिए।

अंत में उन्होंने बताया कि रेमडेसिविर वाले पैकेट पर पूरे पते में स्पेलिंग की गलतियाँ हैं। जैसे नकली पैकेट पर Telangana की जगह Telagana लिखा हुआ है।

एक अन्य ट्वीट में, मोनिका भारद्वाज ने स्पष्ट किया, ये ट्वीट जानकारी देने के लिए किए गए हैं। अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने ट्विटर पर एक असली रेमडेसिविर पैकेट की फोटो भी शेयर की है, ताकि वे इसे देखकर नकली से अलग कर सकें।

बता दें कि गाजियाबाद पुलिस और अपराध शाखा की टीम ने मंगलवार को (27 अप्रैल) कोरोना काल में दिल्ली-एनसीआर में रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की कालाबाजारी करते देश के प्रख्यात न्यूरो सर्जन मोहम्मद अल्तमश और उनके दो साथियों को गिरफ्तार किया था। हजरत निजामुद्दीन का रहने वाला डॉ. अल्तमश लंबे समय तक एम्स में अपनी सेवाएँ दे चुका है और उसके देश के कई बड़े नेताओं के साथ अच्छे संबंध हैं। पुलिस ने इसके कब्जे से 70 रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा दो अक्टेमरा इंजेक्शन व 36 लाख दस हजार रुपए नकद और एक लग्जरी कार भी बरामद की थी।

ऑक्सीजन के लिए ओडिशा कर रहा दूसरे राज्यों की दिल खोल मदद, केरल बढ़ाने में लगा है सिर्फ अपना रिजर्व

एक ओर जहाँ भारत के कई राज्य ऑक्सीजन की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं ओडिशा एक ऐसा राज्य है जो दूसरे राज्यों को ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहा है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार ओडिशा से 90 कंटेनर्स के माध्यम से 1675.781 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन आठ राज्यों को भेजी जा चुकी है। वहीं दूसरी ओर केरल ने राज्य में ऑक्सीजन के रिजर्व को 1000 मीट्रिक टन तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।  

22 अप्रैल 2021 को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुछ अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से ऑक्सीजन की आपूर्ति को लेकर बात की थी। इसके बाद ओडिशा सरकार ने मंगलवार को यह सूचना दी कि Covid-19 से बुरी तरह संक्रमित 8 राज्यों को 1676 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा चुकी है।

ओडिशा पुलिस के एडीजी वाय के जेठवा ने बताया कि राउरकेला, जयपुर, ढेंकानाल और अंगुल से ऑक्सीजन टैंकर भेजे जा रहे हैं। एक डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाकर मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है।

उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक चार राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और हरियाणा को सर्वाधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है। आंध्र प्रदेश को 644 मीट्रिक टन जबकि तेलंगाना को लगभग 324 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है। वहीं ओडिशा से मध्य प्रदेश और हरियाणा को क्रमशः 216 मीट्रिक टन और 187 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति हुई है।

इन चार राज्यों के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ को भी ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है। महाराष्ट्र को 112 मीट्रिक टन तो उत्तरप्रदेश को लगभग 114 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति हुई। वहीं छत्तीसगढ़ को 61 मीट्रिक टन एवं तमिलनाडु को भी लगभग 16 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ओडिशा से सप्लाई किया गया।

ऑक्सीजन की आपूर्ति में किसी प्रकार की देर न हो, इसलिए बाकायदा एक डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाकर ओडिशा पुलिस की निगरानी में मेडिकल ऑक्सीजन को इन राज्यों के लिए भेजा गया।

जहाँ एक ओर ओडिशा, अन्य राज्यों की मदद के लिए लगातार ऑक्सीजन भेज रहा है वहीं केरल ने 510 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का रिजर्व तैयार किया है। इसे और बढ़ा कर 1000 मीट्रिक टन किए जाने का लक्ष्य है।

केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने बताया कि Covid-19 से संक्रमित और सामान्य मरीजों के लिए ऑक्सीजन के वितरण के बाद राज्य में 510 मीट्रिक टन ऑक्सीजन रिजर्व स्टॉक में है। ऑक्सीजन की उपलब्धता की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 510 मीट्रिक टन ऑक्सीजन रिजर्व को बढ़ा कर 1000 मीट्रिक टन तक किया जाना चाहिए।

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स से एक लाख ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर खरीदने के लिए फंड जारी करने की अनुमति दी थी। साथ ही 500 अतिरिक्त PSA ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए भी फंड जारी किया गया। इसके पहले ऐसे ही 713 PSA ऑक्सीजन प्लांट के लिए पीएम केयर्स से फंड जारी किया गया था।