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सीतापुर जेल में बंद सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला कोरोना पॉजिटिव, अलग बैरक में किए गए आइसोलेट

उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनका बेटा अब्दुल्ला आजम कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। दरअसल, आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान इन दिनों यूपी की सीतापुर जेल में बंद है। यहाँ कुल 13 बंदियों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार देर रात मेडिकल रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इसके बाद से सभी को जेल के अंदर एक अलग बैरक में आइसोलेट कर दिया गया है।

प्रभारी जेल अधीक्षक आरएस यादव ने बताया कि जेल में 69 कैदियों की गुरुवार (29 अप्रैल 2021) को आरटीपीसीआर जाँच कराई गई थी। शुक्रवार रात इसकी रिपोर्ट आई, जिसमें रामपुर सांसद आजम खान, अब्दुल्ला आजम समेत कुल 13 बंदी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। 12 कैदियों को अलग बैरक में रखा गया है। वहीं सांसद आजम खान पहले से ही अलग बैरक में थे। 

बताया जा रहा है कि सभी का इलाज कारागार चिकित्सक ने शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग को कुछ और बंदियों की जाँच कराने के लिए कहा गया है, जल्द ही उन सभी का कोरोना टेस्ट कराया जाएगा।

बता दें कि आजम खान को पिछले साल फरवरी में जेल भेजा गया था। उनके साथ उनका बेटा अब्दुल्ला आजम भी जेल में बंद है। दरअसल, 27 फरवरी 2020 को सांसद को उसके परिवार (पत्नी और बेटे) के साथ सीतापुर की जेल में शिफ्ट किया गया था।

बीते दिनों आजम की पत्नी व रामपुर सदर सीट से विधायक तंजीन फातिमा को जमानत मिल गई थी। वहीं, 80 से अधिक मुकदमों में दोषी पाए गए आजम और उसके बेटे को जमानत नहीं मिल पाई है।

13 साल तक सेना में रह कर देश की सेवा, मेजर से रिटायर होकर बॉलीवुड में आए बिक्रमजीत कंवरपाल का कोरोना से निधन

बॉलीवुड इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। टीवी और बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता बिक्रमजीत कंवरपाल का कोरोना से निधन हो गया है। 52 वर्षीय कंवरपाल अभिनेता बनने से पहले आर्मी के अफसर रह चुके थे। वह साल 2002 में आर्मी से रिटायर्ड हो गए थे। इसके बाद उन्होंने साल 2003 में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था।

बिक्रमजीत कंवरपाल ने टेलीविजन धारावाहिकों जैसे दीया और बाती हम, ये हैं चाहतें, दिल ही तो है और 24 में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वह पेज 3, पाप, कॉरपोरेट, अतिथि तुम कब जाओगे, मर्डर 2, हे बेबी, प्रेम रतन धन पायो, साहो, द गाजी अटैक और रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर जैसी फिल्मों में भी नजर आए थे।

अभिनेता के निधन की खबर फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर दी है। अशोक पंडित के अलावा एक्टर मनोज बाजपेयी, श्रिया पिलगांवकर, रोहित रॉय, नील नितिन मुकेश सहित कई बॉलीवुड सितारों ने ट्वीट कर उनके निधन पर शोक जताया है।

फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने ट्वीट किया, “आज सुबह कोरोना के कारण अभिनेता मेजर बिक्रमजीत कंवरपाल के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ। वे एक सेवानिवृत्त सेना अधिकारी थे, जिन्होंने कई फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में सहायक भूमिकाएँ निभाई थीं। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति हार्दिक संवेदना।”

मनोज बाजपेयी ने लिखा, ”हे भगवान, कितना दुखद समाचार है। हम एक दूसरे को 14 सालों से जानते थे, 1971 फिल्म की शूटिंग पर हमारी पहचान हुई थी। बहुत हैरानी वाली खबर।”

अभिनेता नील नितिन मुकेश ने लिखा, ”बेहद दुखद खबर, मैं मेजर बिक्रमजीत को कई सालों से जनता था। मैंने और उन्होंने साथ में कई फिल्मों में काम किया था। हमारी साथ में आखिरी फिल्म बायपास रोड थी। वह एक बेहतरीन, ऊर्जा से भरे और प्रोत्साहित करने वाले इंसान थे। उन्हें हमेशा उस ही रूप में याद किया जाएगा। आपको याद करूँगा मेरे प्यारे दोस्त।”

वहीं बॉलीवुड निर्देशक विक्रम भट्ट ने भी अभिनेता के निधन पर शोक जाहिर किया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर बिक्रमजीत की एक फोटो शेयर करते हुए लिखा कि मेजर बिक्रमजीत कंवरपाल का निधन हो गया। इस क्रूर महामारी ने उन्हें हमसे छीन लिया।

बता दें कि कोरोना महामारी के चलते फिल्म जगत को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब तक कई कलाकारों ने कोरोना महामारी के कारण अपनी जान गँवा दी है।

बेकाबू कोरोना: 24 घंटे में पहली बार 4 लाख+ नए मरीज, 3521 की मौत – 2.98 लाख हुए ठीक

कोरोना का प्रचंड रूप नियंत्रण में आने की बजाय हर रोज और अधिक विकराल होता जा रहा है। कोरोना हर रोज, अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़ रहा है। बीते चौबीस घंटे में देश में चार लाख से भी ज्यादा नए कोरोना मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक देश में 4,01,993 नए कोरोना मामले सामने आए हैं, जो अपने आप में बेहद डरावने हैं। इसके अलावा बीते चौबीस घंटे में 3523 लोगों की कोरोना के कारण जान भी चली गई।

कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद देश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1,91,64,969 हो गई है। वहीं 3,523 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या 2,11,853 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में अब तक 1,56,84,406 लोग रिकवर हो चुके हैं, जबकि इस समय 32,68,710 एक्टिव केस हैं। मृतकों की संख्या बढ़कर अब 2,11,853 हो गई है। आईसीएमआर के मुताबिक, देश में पिछले 24 घंटे के अंदर 19,45,299 कोरोना जाँच की गई है।

देश में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जिंदगी की जंग जीतने के लिए आज यानी 1 मई से कोविड टीकाकरण का तीसरा चरण शुरू हो रहा है। इसके अंतर्गत 18 साल से ऊपर वालों को कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी। कई राज्यों में आज टीकाकरण के तीसरे चरण की शुरुआत हो रही है, तो कई राज्यों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। भले ही टीकाकरण का तीसरा चरण आज से शुरू कर दिया गया है लेकिन राज्यों को इसे सही तरह से शुरू में करने में अभी वक्त लगेगा।

देश की राजधानी दिल्ली और महाराष्ट्र इस समय कोरोना हॉटस्पॉट बने हुए हैं। दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 27,047 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 375 मरीजों की कोरोना के कारण मौत हो गई है। अकेली दिल्ली में ही इस समय सक्रिय मरीजों की संख्या 99,361 पहुँच गई है। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक प्रभावित राज्य है कोई है तो वो है महाराष्ट्र। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 62,919 नए मामले सामने आए। 828 लोगों की कोरोना के कारण मौत हो गई। फिलहाल महाराष्ट्र में 6,62,640 सक्रिय मामले हैं।

बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पिछले 24 घंटे के दौरान मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह समेत 80 और लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद प्रदेश में संक्रमण से मरने वालों की संख्या शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को 2560 हो गई। प्रदेश में अब तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़ कर 470317 हो गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह की कोरोना संक्रमण से हुई मौत पर शोक और गहरी संवेदना व्यक्त की है।

ऐसी विकट स्थिति में केवल केंद्र या राज्य सरकारें ही महामारी से निपटने के लिए योजना नहीं बना रहीं बल्कि कई अन्य संस्थान भी अपने बूते पीड़ितों की मदद करने में लगे हैं। इसी क्रम में अलग-अलग राज्यों के विभिन्न मंदिर कोरोना संक्रमितों की सहायता के लिए आगे आए हैं। किसी ने दान पेटी देकर मदद की, तो किसी ने मंदिर परिसर को कोविड सेंटर बना दिया। बता दें कि इनमें वही मंदिर शामिल हैं, जिन्हें सामान्य दिनों में वामपंथी अपने निशाने पर लेते हैं। यहाँ होने वाले धर्म-कर्म के पाठ पर आपत्ति उठाते हैं। इन्हें मिलने वाले दान पर सवाल करते हैं। लेकिन जब संकट की घड़ी आती है, तब यही मंदिर निःस्वार्थ भाव के साथ जनता की मदद को आगे आ जाते हैं। 

18 महीने का बच्चा, 2 दिन तक भूखे-प्यासे माँ की लाश से खेलता रहा: पड़ोसियों ने छुआ तक नहीं, पुलिस ने गोद लिया

कोरोना संकट के भयावह दौर में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले कई ​किस्से सुनने और देखने को मिले हैं। महामारी की वजह से कई परिवारों में अंधेरा छा गया है। इसी बीच महाराष्ट्र के पुणे में झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है।

​रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिंपरी चिंचवड इलाके में एक महिला की कोरोना से मौत हो गई। दो दिनों तक माँ के शव के पास उनका डेढ़ साल का बच्चा बिलखता रहा, लेकिन कोरोना के डर से किसी ने भी महिला और उनके बच्चे को हाथ नहीं लगाया। मामले की सूचना पुलिस को मिलने के बाद वहाँ पहुँचीं महिला कॉन्सटेबलों ने बच्चे को गोद में उठाया और माँ की जिम्मेदारी निभाई।

पुलिस ने बताया कि उन्हें महिला का शव बीते सोमवार (26 अप्रैल 2021) को मिला था, लेकिन उनकी मौत की संभावना दो दिन पहले की बताई जा रही है। इस दौरान महिला का डेढ़ साल का बच्चा उनके शव के पास भूखा-प्यासा बिलखता रहा। लेकिन कोरोना का डर लोगों में इस कदर फैला हुआ है कि किसी ने भी बच्चे के पास जाने की हिम्मत नहीं की।

दरअसल, पिंपरी-चिंचवड के दिघी इलाके में रहने वाली मृतक महिला का नाम सरस्वती राजेश कुमार है। मूलत: उत्तर प्रदेश की रहने वाली महिला के पति गाँव गए हुए हैं। सरस्वती और उनका डेढ़ साल का बच्चा घर में अकेले रह रहे थे। इस दौरान महिला की मौत हो गई। उस समय घर में उनके डेढ़ साल के बच्चे के अलावा कोई भी नहीं था।

बच्चे को तो ये भी पता नहीं था कि अब उसकी माँ इस दुनिया में नहीं रही। वह मासूम शव के साथ कभी खेलता, कभी रोता, कभी भूख-प्यास से छटपटाता रहा। दो दिनों तक बच्चा इसी तरह बैठा रहा। हालाँकि इसके बारे में पड़ोसियों को पता चल गया था कि बच्चा अपनी माँ के शव के पास बैठा है, लेकिन ऐसे में भी कोई बच्चे को अपनी गोद में उठाने नहीं आया।

महामारी के डर से मर गई संवेदनाएँ

रिपोर्ट्स के मुताबिक आस-पड़ोस के लोगों को आशंका थी कि महिला की मौत कोरोना से हुई है। हालाँकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है, क्योंकि बच्चे की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है। आस-पास के लोगों को महिला की मौत की जानकारी तब लगी, जब दो दिन बाद घर से बदबू आने लगी। इसके बाद मकान मालिक ने पुलिस को इसकी सूचना दी। जब घर का दरवाजा खोला गया तो महिला मृत मिली और बच्चा शव के पास लेटा हुआ रो रहा था।

‘कपड़े उतारो, देखूँगा बॉडी रोल के लिए सही है या नहीं’ – कास्टिंग काउच पर ईशा अग्रवाल का खुलासा

बॉलीवुड की चमचमाती दुनिया के कुछ राज ऐसे हैं जो बेपर्दा हो चुके हैं, लेकिन बदले नहीं हैं। ग्लैमर से भरी इस दुनिया का एक सच है कास्टिंग काउच, जिसका दर्द बहुत से कलाकारों ने झेला है। अक्सर कोई ना कोई कलाकार अपने कास्टिंग काउच से जुड़े अनुभव को साझा करता है। अब ‘कहीं है मेरा प्यार’ की अभिनेत्री ईशा अग्रवाल ने भी अपने कास्टिंग काउच की चौंकाने वाली कहानी बताई है।

मिस ब्यूटी टॉप ऑफ द वर्ल्ड 2019 का खिताब जीत चुकीं ईशा अग्रवाल ने स्पॉटबॉय को दिए एक इंटरव्यू में कास्टिंग काउच का खुलासा किया। ईशा अग्रवाल ने बताया, “मनोरंजन जगत में मेरा सफर आसान नहीं रहा। मुझे इसमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लातूर जैसे छोटे कस्बे से आना और मुंबई की गलियों में नाम बनाना किसी चुनौती से कम नहीं है। जब आप एक छोटे शहर से आते हैं तो सबसे पहले आपके शोबिज में जाने के विचार को स्वीकार नहीं करते हैं, इसलिए अपने आप में यह एक बड़ी चुनौती है। लेकिन किसी तरह मैंने खुद को साबित करके अपने माता-पिता को मना लिया और पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद मुंबई पहुँच गई और ऑडिशन देने लगी।”

ईशा अग्रवाल ने आगे बताया, “कास्टिंग काउच आज भी सच है। जब मैं मुंबई में नई आई थी तो एक कास्टिंग पर्सन ने मुझे अपने ऑफिस में बुलाया था। जब मैं अपनी बहन के साथ उसके ऑफिस में पहुँची तो उसने कहा कि उसने कई बड़े कलाकारों को कास्ट किया है और मुझे भी वो अच्छा प्रॉजेक्ट देगा। अचानक से उसने मुझसे कहा कि मैं अपने कपड़े उतार दूँ क्योंकि उसे मेरा शरीर देखना है। इसका कारण उसने बताया कि वो मेरे शरीर को देखकर बताएगा कि वो रोल के लिए फिट है या नहीं। मैंने उसके ऑफर को तुरंत मना कर दिया और अपनी बहन के साथ बाहर निकल गई। उसने मुझे कई दिन मैसेज भेजे लेकिन फिर मैंने उसे ब्लॉक कर दिया।”

ईशा अग्रवाल ने मुंबई में अपने सपने पूरे करने के लिए आने वाले लोगों को सलाह दी। ईशा अग्रवाल ने कहा, “आपको बहुत से लोग मिलेंगे, जो कहेंगे कि वो बड़ी कास्टिंग कंपनी से हैं उनसे बच के रहें। वो आपको कई ऑफर देंगे, लेकिन इस ट्रैप से आपको बचना है। हमेशा सही का चुनाव करें, अगर आप में काबिलियत है तो बिना किसी कॉम्प्रोमाइज के आपको सफलता जरूर मिलेगी।”

गौरतलब है कि हाल ही में दंगल की फेम एक्ट्रेस फातिमा सना शेख ने इस पर बात की थी।  एक इंटरव्यू में फातिमा ने कास्टिंग काउच पर बड़ा बयान दिया था। फातिमा ने कहा था, “बेशक मैं भी कास्टिंग काउच का शिकार हुई हूँ। मेरे साथ कई बार ऐसा हुआ है, जब मेरे को कहा गया था कि अगर काम चाहिए तो सेक्स करना पड़ेगा। वहीं कई बार मेरे प्रोजेक्टस भी दूसरे लोगों के पास पहुँच गए, क्योंकि उनके पास रिफरेंस था।”

मर गया था, फिर मौत पर संशय… अब पक्की मौत: तेजाब डाल मारने वाला शहाबुद्दीन कोरोना वायरस से मरा

नोट1: अब खबर पक्की हो गई है। मोहम्मद शहाबुद्दीन मर गया है।

नोट2: मोहम्मद शहाबुद्दीन के मौत की यह रिपोर्ट जो पहले लिखी गई थी, उसमें अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। समाचार एजेंसी ने अपने ट्वीट को डिलीट करते हुए नई जानकारी दी है। इसके अनुसार परिवार वालों और RJD के नेता के विरोधाभाषी बयान के कारण यह गलतफहमी हुई है।

ABP न्यूज के विकास भदौरिया की मानें तो मोहम्मद शहाबुद्दीन अभी जिंदा है और उसका इलाज चल रहा है।

बिहार के सिवान के पूर्व आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का कोरोना से शनिवार (मई 1, 2021) को मौत हो गई। दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में पूर्व RJD सांसद शहाबुद्दीन की कोरोना से मौत हो गई। दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में अपराधी और हत्यारे शहाबुद्दीन ने आज आखिरी साँस ली।

कई मामलों में सजा काट रहा मोहम्मद शहाबुद्दीन काफी समय से तिहाड़ जेल में बंद था। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उसे दिल्ली के पंडित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

जानकारी के मुताबिक मोहम्मद शहाबुद्दीन वेंटिलेटर पर था। हालत गंभीर होने के चलते उसने आज दम तोड़ दिया। बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और जेल प्रशासन को आदेश दिया था कि वह पूर्व आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का इलाज करवाए और निगरानी भी करे। 

तिहाड़ जेल प्रशासन को शहाबुद्दीन के कोरोना संक्रमित होने के पता तब लगा, जब 20 अप्रैल को उसकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। जिस तरह के लक्षण उसके शरीर में नजर आए, उसके मद्देनजर कोरोना संक्रमण जाँच कराई गई। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही शहाबुद्दीन को तुरंत तिहाड़ जेल के डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश पर शहाबुद्दीन को 18 घंटों के लिए अपने परिजनों से मुलाकात के लिए समय दिया गया था। कड़ी सुरक्षा में उसे परिजनों से मुलाकात कराया गया। उच्च-न्यायालय ने सशर्त पैरोल के तहत उसे सुविधा दी थी कि वो 6-6 घंटे के लिए दिल्ली में कहीं भी मुलाकात कर सकता है। बता दें कि ये सब चंदेश्वर प्रसाद उर्फ़ चंदा बाबू की मृत्यु के बाद हुआ, जिनके 3 बेटों को शहाबुद्दीन ने मार डाला था।

शहाबुद्दीन ने चंदा बाबू के दो बेटों को तेजाब से नहला कर मार डाला। इस मामले में उनका तीसरा बेटा गवाह था लेकिन इससे पहले कि वो अदालत पहुँचता, उसकी भी हत्या कर दी गई। लेकिन, इस मामले में आरोपित शहाबुद्दीन का उस समय कुछ नहीं हो पाया। नाम से ही सीवान और आसपास के इलाक़े थर-थर काँपते थे।

1980 के दशक तक सिवान की सियासत में आपराधिक तत्वों का बोलबाला था। 1980 के दशक में कई अपराधों में नाम आने के बाद शहाबुद्दीन ने सियासत में एंट्री की। एक दौर था, जब तेजाब कांड हो, चंद्रशेखर हत्याकांड हो या सिवान में कोई भी अपराध, शहाबुद्दीन का नाम हमेशा सुर्खियों में रहता था। जिले के अस्पताल हो, स्कूल हों या बैंक या फिर कोई भी दफ्तर… हर जगह ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर शहाबुद्दीन का कानून चलता था।

गुजरात के भरूच में कोविड अस्पताल में लगी भीषण आग: 18 लोगों की मौत, कई घायल

गुजरात के भरूच में एक कोविड 19 अस्पताल में आग लग गई। इस घटना में 18 लोगों की मौत हुई है। घटना के बाद मरीजों को यहाँ से दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं लगा है। बताया जा रहा है कि आग शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) देर रात 12:30 बजे के आसपास लगी।

इस घटना में कई मरीज घायल भी हुए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियाँ आग बुझाने पहुँच गईं। पटेल वेलफेयर अस्पताल की पहली मंजिल में कोरोना मरीजों के लिए कोविड केयर सेंटर बनाया गया था।

भरूच के एसपी राजेंद्र सिंह चुडासमा ने बताया कि आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “सुबह 6.30 बजे की सूचना के अनुसार, त्रासदी में मरने वालों की संख्या 18 हो गई है। आग लगने के तुरंत बाद, हमने 12 लोगों की मौत की पुष्टि की थी।” 

जानकारी के मुताबिक, चार मंजिला यह अस्पताल भरूच-जंबूसर हाईवे पर स्थित है। इसे एक ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। फायर ऑफिसर शैलेश संसिया ने बताया कि अस्पताल की पहली मंजिल पर कोविड वार्ड बनाया गया था। एक घंटे के भीतर आग पर काबू पा लिया गया। साथ ही, फायर फाइटर्स और स्थानीय लोगों की मदद से करीब 50 लोगों को बचा लिया गया और उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मृतकों में 14 मरीज और 2 नर्स शामिल हैं, वहीं अन्य मृतकों के बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल पाई है। जिस समय अस्पताल में आग लगी उस वक्‍त वहाँ पर 70 मरीज भर्ती थे, जिसमें से 24 मरीज आईसीयू में एडमिट थे। मौके पर पहुँचे अधिकारियों का कहना है कि अस्‍पताल की जाँच की जा रही है। मृतकों की संख्‍या बढ़ भी सकती है।

Covid-19 से लड़ाई में अब ‘गब्बर’ का भी साथ: पंजाब किंग्स और राजस्थान रॉयल्स ने भी दिया योगदान

भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच कई देशों ने सहायता का हाथ आगे बढ़ाया है। विभिन्न देशों से वेंटीलेटर, ऑक्सीजन के उपकरण और दवाएँ भारत भेजी जा रही हैं। इन सब के बीच क्रिकेट के कई खिलाड़ी भी इस महामारी में मदद के लिए आगे आ रहे हैं। सचिन तेंदुलकर, ब्रेट ली और पैट कमिंस के बाद अब शिखर धवन, वेस्टइंडीज के बल्लेबाज निकोलस पूरन और आईपीएल की टीम पंजाब किंग्स ने Covid-19 संक्रमण से लड़ने में अपने हिस्से का योगदान देने का निर्णय लिया है।

भारत के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने ट्विटर के माध्यम से यह सूचना दी कि वह ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए 20 लाख रुपए का दान देंगे और साथ ही आगामी मैचों में बेहतर प्रदर्शन करने पर उन्हें जो भी नकद पुरस्कार मिलेगा, वह भी मिशन ऑक्सीजन के जरिए दान में दिया जाएगा।

धवन ने लिखा, “वर्षों से मुझे इस देश के लोगों से बहुत प्यार और सहयोग प्राप्त हुआ। इसके लिए मैं हृदय से शुक्रगुजार हूँ। अब मेरी बारी है कि मैं इस देश के लोगों की मदद के लिए कुछ करूँ।“

साथ ही धवन ने फ्रंटलाइन वर्कर्स का भी धन्यवाद किया और लोगों को कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन करने की सलाह दी।

शिखर धवन के अलावा वेस्टइंडीज के बाएँ हाथ के बल्लेबाज निकोलस पूरन ने भी चाइनीज कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने में भारत को मदद देने की इच्छा जताई है। ट्विटर के माध्यम से निकोलस पूरन ने इसकी जानकारी दी।

पूरन ने कहा कि कई देश इस महामारी से जूझ रहे हैं लेकिन वर्तमान में भारत में यह समस्या गंभीर है। उन्होंने कहा कि वह अपने योगदान के रूप में आईपीएल के वेतन का एक भाग अवेयरनेस और वित्तीय सहायता के रूप में देना चाहते हैं। निकोलस पूरन आईपीएल में पंजाब किंग्स का हिस्सा हैं।

आईपीएल टीम की बात करें तो पंजाब किंग्स ने भी Covid-19 के संक्रमण से लड़ने के लिए अपना योगदान देने की बात कही है। पंजाब किंग्स ने अपने अधिकारिक ट्विटर एकाउंट से ट्वीट करके बताया कि टीम, राउंड टेबल इंडिया नाम के संगठन के माध्यम से ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर के लिए सहायता उपलब्ध कराएगी।

इसके अलावा आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स और दिल्ली कैपिटल्स भी कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए सहायता उपलब्ध कराने की बात कर चुके हैं। राजस्थान रॉयल्स जहाँ 7.5 करोड़ रुपए दान में देगी, वहीं दिल्ली कैपिटल्स 1.5 करोड़ रुपए दान में देने की घोषणा कर चुकी है। इसके अलावा राजस्थान रॉयल्स के तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट ने अपने आईपीएल वेतन का 10% हिस्सा दान में देने का निर्णय किया है।  

11 साल की रेहाना को अब्बा ने कमरे में भूख से तड़पा कर मार डाला, चुपचाप दफना कर फरार

महाराष्ट्र के जलगाँव से 11 वर्षीय एक बच्ची की मौत का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बच्ची की मौत भूख से तड़प कर हुई। पड़ताल में पता चला कि रेहाना नाम की इस बच्ची की मौत से पहले उसके पिता ने उसे कमरे में कई दिन बिना खाना-पीना दिए बंद रखा और बाद में मौत हो जाने पर चुपचाप दफना भी दिया।

पूरा मामला रजा कॉलोनी का है। इस संबंध में रेहाना के चाचा ने पुलिस के पास शिकायत लिखवाई। नवभारत टाइम्स के मुताबिक, लड़की के चाचा को अपने भाई पर पहले संदेह हुआ और तभी उन्होंने पुलिस स्टेशन जाकर इसकी जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जाँच की तो मालूम चला कि जावेद और उसकी बीवी फरार हैं।

अपनी जाँच के बाद पुलिस ने तहसीलदार की मौजूदगी में बच्ची के शव को जमीन से निकाला और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। रिपोर्ट में पता चला कि बच्ची की मृत्यु भूख के कारण हुई। सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस आरोपितों की तलाश में है। वहीं आसपास के लोगों को यकीन नहीं हो रहा कि ऐसी घटना उनके पड़ोस में घटी है।

गौरतलब है कि लड़कियों और महिलाओं को अपशकुन मानकर उनके साथ ऐसे अत्याचार लंबे समय से होते आए हैं। अभी कुछ दिन पहले ऐसी घटना मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई थी। वहाँ एक फैसल इकबाल नाम के युवक ने अपनी बीवी को अपशकुन मानकर तीन तलाक दे दिया था।

पुलिस ने बताया था कि महिला का पति उसे मनहूस व अपशकुन बता कर उसे प्रताड़ित करता था, इस पर उनका अक्सर विवाद भी होता था। पुलिस के मुताबिक, निकाह के समय लड़के की माँ का इंतकाल हो गया था। यही कारण था कि वह अपनी पत्नी को मनहूस कहता था। जब महिला ने इसका विरोध किया तो उसके साथ अभद्रता हुई। बाद में झगड़े होने लगे। 14 मार्च को फैसल ने गुस्से में तीन तलाक दे दिया। 

कोविड संकट में IIT बॉम्बे का कमाल: नाइट्रोजन जनरेटर से ऑक्सीजन पैदा, खर्च नए ऑक्सीजन प्लांट का मात्र 15%

Covid-19 के संक्रमण की दूसरी लहर ने देश में चिंता का माहौल बना दिया है। विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी दबाव या रहा है लेकिन संक्रमित मरीजों के लिए अति आवश्यक ऑक्सीजन की कमी प्रमुख चिंता का विषय है। इस कमी से निपटने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों में एक नाम आईआईटी बॉम्बे का भी जुड़ गया है। देश में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए आईआईटी बॉम्बे ने एक समाधान दिया है। यह समाधान है नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने का।

भारत के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक आईआईटी बॉम्बे के शोध एवं विकास (R&D) के डीन मिलिंद आत्रेय के नेतृत्व में तकनीकी संस्थान ने नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। संस्थान के अनुसार वर्तमान ऑक्सीजन संकट के लिए यह एक सरल एवं तीव्र प्रक्रिया है। संस्थान ने सरकारी प्राधिकरणों, एनजीओ और निजी कंपनियों को साथ आने का अनुरोध किया है जिससे इस तकनीकि पर कार्य किया जा सके।

क्या है प्रक्रिया

आईआईटी बॉम्बे के द्वारा बताया गया कि विभिन्न उद्योगों में स्थित नाइट्रोजन प्लांट वातावरण से ही नाइट्रोजन ग्रहण करते हैं। इन नाइट्रोजन प्लांट्स को ऑक्सीजन जनरेटर में बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया में मात्र मॉलेक्युलर फिल्टर्स में बदलाव किया जाता है। इसके लिए प्रेशर स्विंग एडसॉरप्शन (PSA) नाइट्रोजन प्लांट्स के मॉलेक्युलर फिल्टर्स में उपस्थित कार्बन के स्थान पर जिओलाइट का उपयोग किया जाता है, जिससे PSA नाइट्रोजन प्लांट PSA ऑक्सीजन प्लांट में बदल जाता है।

संस्थान की विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस पूरे प्रयोग के लिए मात्र 3 दिन में ही सेटअप को स्थापित किया गया, जो नए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने में लगने वाले समय की तुलना में काफी कम है। इस सेटअप से 3.5 एटमॉस्फेरिक प्रेशर पर ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकता है, जिसकी शुद्धता 93-96 फीसदी होती है। इस गैसीय ऑक्सीजन का उपयोग कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के लिए किया जा सकता है। नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने की प्रक्रिया में लगने वाला खर्च नए ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना में लगने वाले खर्च का मात्र 10-15 फीसदी है।  

आईआईटी बॉम्बे के साथ इस प्रयोग में टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड (TCE) ने भी अपना योगदान दिया।