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‘प्रिंस हैरी ने किया शादी का वादा, वारंट जारी करें’: हाई कोर्ट ने कहा- हो सकता है पंजाब के किसी गाँव के साइबर कैफे में हों

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के समक्ष एक दिलचस्प मामला सुनवाई के लिए आया। एक महिला ने अपनी अर्जी में ड्यूक ऑफ ससेक्स प्रिंस हैरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की। महिला का आरोप था कि प्रिंस हैरी ने कथित रूप से शादी करने का अपना वादा पूरा नहीं किया। याचिकाकर्ता महिला ने ‘वादा पूरा न करने’ के लिए प्रिंस हैरी के खिलाफ वारंट जारी करने की माँग की, ताकि शादी में कोई देरी न हो। 

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने भी मजेदार टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इस बात की संभावना बहुत ज्यादा है कि ‘आपके तथाकथित प्रिंस हैरी अपने सुनहरे भविष्य के लिए पंजाब में किसी गाँव के किसी साइबर कैफे में बैठे हों।’

कोर्ट ने कहा- अर्जी और कुछ नहीं बल्कि ‘दिवास्वप्न’

इस केस की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) को कहा, “यह अर्जी और कुछ नहीं बल्कि एक दिवास्वप्न है।” याचिकाकर्ता पलविंदर कौर पेशे से वकील हैं और कोर्ट में उन्होंने खुद अपनी पैरवी की। याचिकाकर्ता के विशेष अनुरोध पर अदालत ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि सोशल मीडिया में इस तरह के किस्से जगजाहिर हैं। पीठ ने कहा, “इस अर्जी पर सुनवाई करने के लिए कोर्ट कोई आधार नहीं पाता है। याचिकाकर्ता इस फर्जी बातचीत को सही मान रही है, अदालत उसके लिए केवल सहानुभूति जता सकती है।” 

महिला का दावा-प्रिंस हैरी ने शादी का वादा किया था

जस्टिस अरविंद सिंह के कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ‘यह प्रिंस हैरी से शादी करने के बारे में एक दिवास्वप्न के सिवाय और कुछ नहीं है।’ सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पाया कि अर्जी का मसौदा ठीक ढंग से तैयार नहीं था। इस अर्जी में कथित रूप से प्रिंस हैरी की ओर से भेजे गए ई-मेल्स का भी जिक्र किया गया था। याचिकाकर्ता का दावा था कि प्रिंस हैरी ने जल्द ही उससे शादी करने का वादा किया था। 

मेगन मर्केल से हुई है प्रिंस हैरी की शादी

हाई कोर्ट ने कहा, “यह सर्वविदित तथ्य है कि फेसबुक, ट्विटर जैसे अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर फर्जी आईडी के जरिए अकाउंट बनाए जाते हैं। इस बात की बहुत संभावना है कि आपके तथाकथित प्रिंस हैरी पंजाब में किसी गाँव के किसी साइबर कैफे में बैठे हों।” जज ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उन्होंने कभी ब्रिटेन की यात्रा की है, इस पर महिला वकील का जवाब ना में था। याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए ही बात की है, जहाँ उन्होंने प्रिंस चार्ल्स को भी मैसेज करने का दावा किया और कहा कि उनका बेटा प्रिंस हैरी याचिकाकर्ता के साथ इंगेज है।

इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत इस निष्कर्ष पर पहुँची कि इस याचिका को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं है। अदालत सिर्फ इस बात के लिए याचिकाकर्ता के साथ संवेदना जता सकती है कि उसने इस तरह की फर्जी बातचीत को हकीकत मान लिया। लिहाजा ये याचिका खारिज की जाती है। बता दें कि प्रिंस विलियम्स की शादी 2018 में पूर्व अभिनेत्री मेगन मर्केल से हुई। साल 2019 में जन्मे उनके बेटे का नाम आर्ची है। मर्केल एक बार फिर माँ बनने वाली हैं।

महाराष्ट्र में कूड़े के बैग में पैक हो रहे कोरोना संक्रमितों के शव, वायरल Video से उद्धव सरकार पर उठे गंभीर सवाल

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के कारण राज्य में मौतों का आँकड़ा बढ़ने के साथ प्रशासन की लापरवाही की एक और वीडियो सामने आई है। वीडियो में वायरस से जान गँवाने वालों के कोरोना संक्रमितों के शव कचरे वाले बैग में पैक दिख रहे हैं। वीडियो सामने आने पर उद्धव सरकार की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

सोमवार को भाजपा नेता किरीट सोमय्या ने इस वीडियो को अपने ट्विटर पर शेयर किया। वीडियो उस समय की है जब ठाणे के साकेत ग्लोबल अस्पताल से सारे शव दाह संस्कार के लिए एंबुलेंस में डाले जा रहे थे।

वीडियो में शवों को स्ट्रेचर पर पड़ा देखा जा सकता है। इनमें से एक पर काली पॉलीथीन चिपकाई गई है, जबकि चेहरा सफेद पॉलिथीन से ढका है। कुल 3 शव पन्नी में लिपटे साफ दिख रहे हैं। स्वास्थकर्मी धीरे-धीरे उठाकर उन्हें ठाणे की पंजीकृत एंबुलेंस MH04 KF2932 में रख रहे हैं।

किरीट सौमैया ने इस वीडियो को शेयर कर लिखा, “अब ठाकरे सरकार प्लास्टिक और कचड़ा बैग का इस्तेमाल कोविड डेड बॉडी को पैक करने के लिए कर रही है।” इस वीडियो के सामने आने के बाद कई एक्टिविस्ट और स्थानीय महा विकास आघाडी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे।

इस संबंध में एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “संभवतः शवों को पैक करने के लिए बॉडी बैग की कमी हुई हो क्योंकि पिछले कुछ दिनों में मृत्यु के आँकड़े बढ़ गए हैं, जिससे कर्मचारियों को शवों को लपेटने के लिए बेडशीट का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा।”

कथिततौर पर, साकेत ग्लोबर कोविड अस्पताल में बॉडी बैग की कमी हो गई है जबकि ठाणे के नगर निगम में एडिशनल कमीशनर गणेश देशमुख ने आरोपों को खारिज किया है। देशमुख का कहना है कि कोई बेडशीट डेड बॉडी बाँधने के लिए इस्तेमाल नहीं हुई।

प्रशासन ने एक चिता पर जलाए 8 शव

कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के बीड जिले से एक ऐसी ही लापरवाही वाली घटना उजागर हुई थी। जहाँ प्रशासन ने आठों शवों को एक अस्थायी श्मशान पर एक ही चिता में जला डाला था। एक अधिकारी ने बताया था कि 6 अप्रैल को मजबूरी में आठ शवों को एक ही चिता पर जलाना पड़ा। संक्रमण इतनी तेजी से फैल रहा है कि अभी और मौतें होने की आशंका हैं।

महाराष्ट्र में कोरोना हुआ बेकाबू

महाराष्ट्र में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। सोमवार को यहाँ 51, 751 नए मरीज दर्ज किए गए। वहीं 258 लोगों की मौत भी हुई। एक दिन पहले की बात करें तो राज्य में 63, 294 मामले आए थे। अब तक राज्य कुल संक्रमण केसों की संख्या 34 लाख 58 हजार 996 हो गई है। वहीं मृतकों का आँकड़ा भी 58, 245 पहुँच गया है। महाराष्ट्र सरकार, राज्य में लॉकडाउन के मद्देनजर बुधवार को फैसला ले सकती है। फिलहाल के लिए राज्य में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएँ टाल दी गई हैं। 

दिल्ली में नवरात्र से पहले माँ दुर्गा और हनुमान जी की प्रतिमाओं को किया क्षतिग्रस्त, सड़क पर उतरे लोग: VHP ने पुलिस को चेताया

साउथ-वेस्ट दिल्ली के ककरौला गाँव में एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ मचाए जाने की खबर सामने आई है। असामाजिक तत्वों ने न सिर्फ मंदिर में तोड़फोड़ मचाई, बल्कि हनुमान जी की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके अलावा अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भी नुकसान पहुँचाया गया। ये घटना सोमवार (अप्रैल 12, 2021) रात की है। सुबह इस घटना के सामने आने के बाद मंदिर के पास कई लोग जमा हो गए।

विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने जानकारी देते हुए बताया, “आज भारतीय नव वर्ष व नव रात्रि के पहले दिन पश्चिमी दिल्ली के ककरौला गाँव के माता सहज कौर कुलदेवी- हनुमान मन्दिर में देवी देवताओं की मूर्तियों को तोड़े जाने की खबर आना बेहद हृदय विदारक है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार दोपहर को घटना स्थल पर प्रदर्शन किया।” उन्होंने कहा कि दिल्ली में ऐसी घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

बंसल ने कहा कि राजधानी दिल्ली में हिंदूओं व मंदिरों पर बढ़ती हमलों की घटनाओं व पुलिस-प्रशासन की उदासीनता ने हिन्दू समाज की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की। विनोद बंसल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से हिन्दुओं में आक्रोश का माहौल है और पुलिस को भी इसे समझते हुए त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।

विनोद बंसल ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना का वीडियो शेयर किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि मंदिर में स्थित माँ दुर्गा की प्रतिमा के हाथ तोड़ दिए गए हैं। साथ ही कई चीजें जमीन पर बिखरी पड़ी हुई हैं। जिस फर्श पर मूर्तियाँ स्थापित की हुई थीं, उसके भी टुकड़े-टुकड़े कर डाले गए। घटनास्थल पर पुलिस भी पहुँची। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि सुबह-सुबह जब पंडित जी वहाँ गए, तभी उन्होंने इस स्थिति को देख कर ग्रामीणों को सूचना दी।

इस एक ही परिसर में एक तरह से तीन मंदिर स्थापित हैं। एक में देखा जा सकता है कि हनुमान जी की प्रतिमा जमीन पर गिरी हुई है। वहाँ और एक भारी पत्थर भी पड़ा हुआ था। इसी तरह माँ दुर्गा की प्रतिमा के पास ईंट पाए गए। इस घटना के बाद अब मंदिर के बाहर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की माँग की। ‘हर हर महादेव’ के नारे के साथ प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे।

इस विरोध प्रदर्शन को लेकर VHP ने कहा, ” मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्ति विध्वंस से आक्रोशित हिन्दू समाज पश्चिमी दिल्ली में सड़कों पर उतर आया है। देखना यह है कि यहाँ की सरकार हिन्दू रक्षार्थ कब अपनी तन्द्रा से जागेगी।” बजरंग दल के कई कार्यकर्ता आक्रोशित लोगों का नेतृत्व कर रहे थे। मंदिर के आसपास बाजार है, जहाँ की सड़क पर ये विरोध प्रदर्शन हुआ। इसमें कई स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया।

‘सुदर्शन’ के पत्रकार नामित त्यागी ने जानकारी दी कि इलाके में स्थित 3 मंदिरों की प्रतिमाओं को खंडित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस कारण क्षेत्र में अभी भी तनाव का माहौल है। आज से नवरात्र भी शुरू है, ऐसे में कई लोग मंदिर जाकर माता का दर्शन करने वाले थे। ऑपइंडिया ने इस सम्बन्ध में दक्षिण-पश्चिम दिल्ली की पुलिस से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन नहीं उठाया गया।

वहीं बजरंग दल के संयोजक भारत बत्रा भी इस प्रदर्शन में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 788 द्वारका मोड़ पर हिन्दू कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता द्वारा विरोध प्रदर्शन अभी भी चालू है। भारत बत्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए लोगों से वहाँ जुड़ने की अपील की।

कालीन के अंदर कब तक छिपाते रहेंगे मुहम्मदवाद के खतरे… आज एक वसीम रिजवी है, एक यति नरसिंहानंद हैं; कल लाखों होंगे

बीते तीन दिनों में कई घटनाएँ हुईं, जिन पर सभ्य समाज को तत्काल संज्ञान लेकर कठोर निंदा करनी चाहिए थी। लेकिन भारतवर्ष की महान सेकुलर-परंपरा के तहत उस पर एक साजिशी चुप्पी और मानीखेज अनदेखी तारी है।

बिहार के किशनगंज से बाइक चोरी हुई और उसी सिलसिले में छापेमारी पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के पंजीपाड़ा थाने में करने वहाँ के थाना प्रभारी अश्विनी कुमार गए। वहाँ की मस्जिद से बाकायदा ऐलान कर भीड़ इकट्ठा की गई और उनकी भीड़ हत्या हुई। पूरे देश में फासीवाद का विधवा विलाप कर, लिंचिंग का रोना रोनेवाले तमाम सेकुलर गायब हैं। कुमार का जब शव घर पहुँचा तो उनकी माता भी सदमे से चल बसीं। एक साथ दो चिताएँ जलीं।

उधर, कानपुर में यति नरसिंहानंद और वसीम रिजवी के ‘सर तन से जुदा’ करने वाले पोस्टर सरेआम लगे। यति नरसिंहानंद की फोटो को सड़क पर तो खैर कई जगहों पर चिपकाया गया- मुस्लिम बहुल इलाकों में, जहाँ के बाशिंदे उनके फोटो पर पैर रखकर चल सकें। दिल्ली के एक चुने हुए विधायक ने नरसिंहानंद के सिर और जुबान काटने की बात कही। ये वही विधायक है जिसने पिछले साल दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों में मुस्लिम भीड़ को उकसाया था, दिल्ली में अवैध तरीके से रोहिंग्या मुसलमानों को बसाया था और जब-तब संविधान विरोधी बयानबाजी करता रहता है।

और, सुप्रीम कोर्ट ने वसीम रिजवी की उस याचिका को ‘फ्रिवलस’ (बेतुका, बचकाना, वाहियात) बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ‘आसमानी किताब’ की 26 हिदायतों को बदलने की बात कही थी। न केवल ख़ारिज किया, बल्कि 50 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोक दिया। ये 26 आयतें कथित तौर पर वैसी थीं, जिनमें दूसरे मजहबी लोगों (यानी काफिरों, गैर-मुस्लिमों, मुशरिकों) के कत्लोगारत की बात है, या हिंसा को उकसाया गया है।

आप अगर देखें, तो ये तीन घटनाएँ भले ही अलग-अलग दिखें, लेकिन ये मूलतः हैं एक ही। मुस्लिमों का ‘डर’ हमारे सेकुलर समाजतंत्र पर हावी है और उससे कोई भी नहीं बच सकता है। यही वजह है कि वे (यानी मुसलमान) अगर अंग्रेजी में कहें तो ‘टेस्टिंग द वाटर्स’ कर रहे हैं। पहले वे बयानबाजी करते हैं, फिर करामात करते हैं। जिन लोगों ने 1947 में बँटवारा या 1990 का कश्मीर देखा है, हाल-फिलहाल के कैराना और दरभंगा-मधुबनी देखे हैं, उनको बहुत अच्छे से यह पता होगा। जामा मस्जिद का इमाम बुखारी हो या हैदराबाद का वकील और उसका भाई ओवैसी, ये सभी समय-समय पर हिंदू विरोधी बयान देकर तापमान की जाँच करते हैं, देखते हैं कि प्रतिक्रिया क्या हो रही है?

बिहार का लगभग आधा हिस्सा यानी पूरा सीमांचल भयंकर डेमोग्राफिक चेंज का शिकार है। बंगाल के बारे में क्या ही कहा जाए, जो भी है वह सबकी आँखों के सामने है। ये हिंसा के उन्मादी, जेहादी क्या रुकने वाले हैं? मुझे तो नहीं लगता, जब तक इनको ‘आयरन फिस्ट’ से न रोका जाए, एक कठोर शासन, कठोर कानून संहिता लागू न हो। हालाँकि, हमारे देश में ठीक उलटा है। इनके लिए शरिया है, सेकुलर तहजीब के नाम पर इनको कत्ल तक की छूट है, लेकिन हिंदुओं के लिए कहीं कोई न्याय नहीं है।

वसीम रिजवी क्या हैं, मैं नहीं जानता, लेकिन एक पत्रकार होने के नाते मैं सबसे पहले उन पर ही शक करता हूँ, क्योंकि हमारा पहला काम होता है- हरेक पर शक करो। वे सुर्खियों में आना चाहते थे या क्या करना चाहते थे, वे जानें लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दूरगामी साबित होगा, जैसे शाहबानो का फैसला हुआ था, जैसे तीन तलाक का हुआ और यह भविष्य के लिए एक मिसाल बनेगा।

रिजवी शिया हैं। मुसलमानों के दर्जनों फिरके और जात हैं, जिनमें रिजवी शिया हैं और शायद कथित तौर पर ऊँची जात के भी। यह बड़ी हिम्मत की बात थी कि खुद एक मुस्लिम होते हुए उन्होंने ‘आसमानी किताब’ पर बात करने की कोशिश की, जिसका रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने बंद कर दिया। यह तो सोचने की बात है कि 1400 वर्षों से पूरी दुनिया को अशांत करनेवाला एक ‘विचार’ जब तक ‘विचार योग्य’ न माना जाएगा, दुनिया तबाह तो होती ही रहेगी। यह विचार भी खुद उसी कौम के भीतर से आना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला क्यों काबिलेगौर है, यह आप नरसिंहानंद के सिर काटने के सरेआम पोस्टर लगाने से लेकर दिल्ली के एक विधायक की जहरीली जुबान तक देख सकते हैं। ‘सर जुदा, तन जुदा’ के नारे लगाती भीड़ या मानसिकता पहले भी कमलेश तिवारी की गर्दन काट चुकी है, शार्ली हेब्दो के कार्टूनिस्ट को हलाक कर चुकी है, यह हम सबने देखा है।

मुहम्मद या मुहम्मद की बातों पर चर्चा क्यों नहीं होगी? 2021 में भी समाज को 600 ईस्वी की रिवायतों से चलाने की क्या जिद है, धरती को चपटा मानने की और बुराक घोड़े को जस का तस स्वीकारने की क्या जिद है। समय के साथ बाकी बिबलियोलेटरस (किताब पर आधारित) मजहबों ने भी खुद को बदला है। चाहे ईसाइयत हो या कुछ और, फिर मुहम्मदवाद जब दूसरों को तकलीफ दे रहा है, तो उस पर चर्चा तक से तकलीफ?

अमेरिका से लेकर यूरोप तक में, भारत में भी, ईरान में, अरब में पूर्व-मुस्लिमों की संख्या बढ़ी है, जिन्होंने मुहम्मवादी की कट्टरता से आजिज आकर उसका दामन छोड़ दिया है।

इंसान को आखिरकार अपनी आजादी चाहिए। कालीन के अंदर आप मुहम्मदवाद के ख़तरे भले छिपाते रहें, लेकिन आखिरकार उसके अंदर के लोग ही उस पर खुली बातचीत करने जमा होंगे। आज एक वसीम रिजवी है, कल लाखों होंगे…

(डिस्क्लेमर: यह पोस्ट माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के ऊपर टिप्पणी नहीं है)

‘कॉन्ग्रेस में शरीफ होना पाप, प्रशांत किशोर की फौज को खुश कर मिलता है टिकट’: पंजाब के पार्टी नेता ने खोले राज

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले प्रशांत किशोर के विरोध में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में मची भगदड़ से आप बखूबी परिचित हैं। हाल ही में उनका क्लबचैट ऑडियो सामने आया था, जिसमें वह बंगाल चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के जबर्दस्त प्रभाव को बयाँ कर रहे थे। उसके बाद से वह लगातार बंगाल चुनावों में ममता बनर्जी की संभावित हार से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि भविष्य की परियोजनाओं जिनमें पंजाब में कॉन्ग्रेस के लिए काम करना भी शामिल है, पर बंगाल के नतीजों की छाया नहीं पड़ने देने के मकसद से वे ऐसा कर रहे हैं।

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही प्रशांत किशोर को अपना प्रधान सलाहकार बना चुके हैं। उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनावों में भी पंजाब और उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के लिए काम किया था। लेकिन, पंजाब के एक कॉन्ग्रेस नेता की किताब चुनाव से पहले प्रशांत किशोर और पार्टी दोनों की मुसीबत बढ़ा सकती हैं।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता व पंजाब राज्य उद्योग विकास कार्पोरेशन के चेयरमैन कुमार कृष्ण कुमार बावा की किताब ‘संघर्ष के 45 साल’ रिलीज हुई है। इसमें बताया गया है कि कैसे पंजाब में कॉन्ग्रेस का टिकट पाने के लिए पहले प्रशांत किशोर की फौज को खुश करना जरूरी होता है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट में कृष्ण कुमार बावा की किताब के हवाले से कॉन्ग्रेस की भीतरी सच्चाई पर कई खुलासे किए गए हैं। बावा ने अपनी किताब में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के काम करने के तरीकों को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि यहाँ (कॉन्ग्रेस में) शरीफ होना पाप है। कई लोग जो कॉन्ग्रेस की विचारधारा से जुड़े भी नहीं है, वे भी यहाँ प्रशांत किशोर की फौज को खुश करके टिकट ले लेते हैं, जबकि शरीफ होने के नाते उन जैसों को साइड कर दिया जाता है। 2017 में उनके साथ ऐसा ही कुछ हुआ था। जहाँ पहले उन्हें लुधियाना पूर्वी हलके से चुनाव में उतारने की बात हुई, लेकिन बाद में उनका टिकट कट गया। 

गौरतलब है कि मैसेजिंग एप क्लबहाउस पर प्रशांत किशोर के साथ बातचीत में लुटियंस मीडिया के कई चेहरे शामिल थे। मसलन, रवीश कुमार, साक्षी जोशी, आरफा खानम शेरवानी, रोहिणी सिंह, स्वाति चतुर्वेदी वगैरह। इस दौरान प्रशांत किशोर ने कहा था, “मोदी के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी नहीं है। मोदी का पूरे देश में एक कल्ट बन गया है। 10 से 25 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिनको मोदी में भगवान दिखता है। चाहे वो सही दिखे या गलत, वो एक अलग बहस का मुद्दा हो सकता है। यहाँ का हिंदी भाषी मोदी का कोर बेस सपोर्ट है और मोदी काफी पॉपुलर हैं। अगर आप इधर सर्वे कर कर रहे हैं तो मोदी-ममता समान रूप से पॉपुलर हैं।”

जलियाँवाला नरसंहार वाले जनरल डायर का स्वर्ण मंदिर में सिरोपा दे हुआ था सम्मान, अमरिंदर के पुरखे भी थे अंग्रेजों के वफादार

जलियाँवाला बाग़ नरसंहार के बारे में भला किस भारतीय को नहीं पता है, जब पंजाब के अमृतसर में वैशाखी के मेले में 1000 लोगों को मार डाला गया था और 1500 घायल हुए थे। ये नरसंहार अंग्रेज अधिकारी जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर के आदेश पर हुआ था। जनरल डायर, जो भारतीयों को ‘दुष्ट’ मानता था और उन्हें सबक सिखाना चाहता था। लेकिन, क्या आपको पता है कि अकाल तख़्त ने उसे सिरोपा देकर सम्मानित किया था।

सिरोपा फ़ारसी के शब्द सर-ओ-पा (सिर से पाँव तक) से आया है, जिसका मतलब हुआ किसी को कोई कपड़ा देकर सम्मानित करना। सिख समाज का पुराना इतिहास रहा है, जिसके हिसाब से गुरु या जत्थेदार किसी को सिरोपा देकर सम्मानित करते हैं। जानने लायक बात ये है कि जनरल डायर को जलियाँवाला नरसंहार के कुछ ही दिन बाद सम्मानित किया गया था, वो भी अमृतसर के पवित्र स्वर्ण मंदिर में।

जलियाँवाला बाग़ नरसंहार के कुछ दिनों बाद जनरल डायर को अकाल तख़्त स्वर्ण मंदिर ले जाया गया, जहाँ उससे कहा गया कि वो भी निकालसेन साहिब (जनरल निकोलस) की तरह सिख बन जाए, लेकिन उसने इससे साफ़ इनकार कर दिया। जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर का बायोग्राफर इयान कॉल्विन लिखता है कि अकाल तख़्त के जत्थेदार ज्ञानी अरुर सिंह ने उसे सिरोपा देकर सम्मानित किया था।

उस समय गुरुद्वारा के सुधार के लिए आंदोलन भी चल रहा था, जिस पर इस घटना का खासा असर पड़ा। बता दें कि हरमंदिर साहिब में स्थित अकाल तख़्त सिख समुदाय के 5 तख्तों में से एक है, जिसकी स्थापना छठे सिख गुरु हरगोविंद ने की थी। इसे धरती पर खालसा का सबसे बड़ा स्थल माना जाता है और सिख समाज का प्रवक्ता माना जाने वाला जत्थेदार यहीं बैठता है। तब जत्थेदार की नियुक्ति अंग्रेज सरकार ही करती थी।

इस घटना के 80 साल बाद शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के मुखिया और अरुर सिंह के नाती सिमरजीत सिंह मन ने माँग की थी कि अकाल तख़्त को इस निर्णय को लेकर माफ़ी माँगनी चाहिए, क्योंकि ये एक ‘पंथी गलती’ थी और पंथ माफी माँग लेता है तो उनके नाना की आत्मा को शांति मिलेगी। नरसंहार 13 अप्रैल 1919 को हुआ था और इसके 7 साल बाद जुलाई 23, 1927 को कई बीमारियों से पीड़ित डायर ब्रेन हेमरेज के कारण काल के गाल में समा गया।

कहते हैं कि तत्कालीन जत्थेदार ने जनरल डायर के सिख होने की भी घोषणा कर दी थी, जबकि वो खुलेआम सिगरेट पिया करता था। स्वर्ण मंदिर में जब ये सब हो रहा था तब वहाँ सिख समाज के कई अन्य नेता और धर्मगुरु भी मौजूद थे। जनरल डायर ने कहा था कि एक ब्रिटिश अधिकारी अपने बाल लंबे नहीं कर सकता, इसलिए वो सिख नहीं बनेगा। इस पर ज्ञानी अरुर सिंह ने यहाँ तक कह दिया कि वो बाल छोटे रख कर भी सिख बन सकता है।

लेकिन, जनरल डायर ने दूसरी आपत्ति जताई कि वो कभी धूम्रपान नहीं छोड़ सकता है। इस पर जत्थेदार ने कहा कि वो धीरे-धीरे इन चीजों को छोड़ने की कोशिश करे तो इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है। जत्थेदार ने कहा कि अंत में वो एक सिगरेट हर साल पी सकता है, जिसके लिए कोई दिक्कत नहीं है। इसके बाद उसे सिखों के युद्ध के 5 प्रतीक भेंट किए गए। फिर उसके सिख होने की घोषणा की गई।

2002 में सिमरजीत सिंह मन ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) के बजट सत्र को संबोधित करते हुए माफ़ी की माँग की थी। पंजाब में ही पले-बढ़े डायर को भी क्लीनचिट देने के लिए इतिहास में कई प्रयास हुए हैं। कहा जाता है कि उसने पंजाब के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’ ड्वायर के कहने पर ऐसा किया था। हालाँकि, 13 मार्च 1940 को ड्वायर को मौत के घाट उतार कर क्रांतिकारी उधम सिंह ने बदला पूरा किया था।

कहते हैं कि तब पंजाबियों में से अधिकतर ने जनरल डायर की प्रशंसा और सम्मान जारी रखी थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि वो सैकड़ों भारतीयों को मौत के घाट उतारने वाले इस क्रूर अधिकारी के प्रति वफादार रहेंगे तो ब्रिटिश सरकार में उन्हें मिला रुतबा भी जारी रहेगा। क्या आपको पता है कि जलियाँवाला बाग़ नरसंहार की जिन्होंने कभी निंदा नहीं की, उसमें पटियाला के तत्कालीन महाराजा भूपिंदर सिंह भी शामिल थे।

भूपिंदर सिंह पंजाब के वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दादा थे। अमरिंदर सिंह की पत्नी और सिमरजीत सिंह मन की पत्नी बहनें हैं। ऐसे में ये सब आपस में जुड़े हुए हैं। उस समय प्रताप सिंह खैरों ने ही सिखों को अंग्रेजो से लड़ने को कहा था, जो बाद में राज्य के मुख्यमंत्री भी बने। महाराजा के जीवनीकार के नटवर सिंह लिखते हैं कि नरसंहार के बाद भी भूपिंदर सिंह ने अंग्रेजों को संपूर्ण समर्थन दिया हुआ था।

चर्चिल ने इस घटना की निंदा की, लेकिन पंजाब के किसी राजा में ऐसी हिम्मत नहीं हुई। स्वर्ण मंदिर में डायर को सिरोपा से सम्मानित करने में सुंदर सिंह मजीठिया का नाम भी आता है, जिन्होंने अमृतसर के खालसा कॉलेज की स्थापना की थी। उनका कहना था कि वे सिखों के हित से जुड़े मामले अंग्रेज सरकार के सामने नरम तरीके से उठाते हैं। उन्होंने 1920 में SGPC का प्रथम अध्यक्ष बनाया गया था।

बाद में उन्होंने ‘खालसा नेशनल पार्टी’ बनाई और चुनाव जीत कर ब्रिटिश राज में पंजाब के राजस्व मंत्री बने। 1936 से 1941 में अपनी मृत्यु तक वो इस पद पर रहे। मजीठिया ‘खालसा दीवान’ थे। इसे स्कूल-कॉलेज वगैरह खोलने के लिए बनाया गया था। ‘सिख हिस्ट्री रिसर्च बोर्ड’ के सदस्य परमबीर सिंह कहते हैं कि SGPC की स्थापना से पहले तख़्त को महंत लोग ही चलाया करते थे, जिनकी ब्रिटिश के साथ साँठगाँठ थी।

जलियाँवाला नरसंहार के कुछ ही दिनों बाद डायर ने कई सिख नेताओं को बैठक के लिए बुलाया था और कुछ दिनों बाद उसे सम्मानित किया गया। कुर्सी बचाने की चाहत में महाराजा भूपिंदर सिंह समेत सभी प्रमुख नेता अंग्रेजों के साथ रहे। ‘A History of the Sikhs: 1839-2004’ में खुशवंत सिंह लिखते हैं कि जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर ने जत्थेदार, महाराजा और अन्य सिख नेताओं से कहा था कि वो सभी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ब्रिटिश सरकार के प्रति सकारात्मक माहौल बनाएँ।

उसने गाँव-गाँव में प्रचार करवाया कि सरकार अब भी मजबूत है और उसकी कोई गलती नहीं है। पगड़ी और कृपाण देकर उसे स्वर्ण मंदिर में सम्मानित किया गया। महात्मा गाँधी भी कुछ दिनों बाद जलियाँवाला पहुँचे और लोगों से कहा कि स्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ा गुण जो चाहिए, वो है निर्भयता। इसके बाद एक ‘सेन्ट्रल सिख लीग’ बना, जिसमें अंग्रेज समर्थक सिख नेताओं और गुरुओं का विरोध करने वाले सिख शामिल हुए।

ओवैसी की AIMIM का पोस्टर, यति नरसिंहानंद और वसीम रिजवी का ‘सिर धड़ से अलग’: एक्शन में यूपी पुलिस

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) ने डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती और शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी के ख़िलाफ़ ‘सिर तन से जुदा’ का पोस्टर लगाया। इस पोस्टर के सबसे ऊपर हरी पट्टी में AIMIM कानपुर लिखा था। नीचे धारदार हथियार दिखा कर यति नरसिंहानंद और रिजवी का सिर उनके शरीर से अलग दिखाया गया था।

कानपुर नगर की पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए बताया कि उन्होंने 12 अप्रैल को लगाए गए इन आपत्तिजनक व धार्मिक रूप से भड़काऊ पोस्टर को लगाने के संबंध में चमनगंज थाने में धारा 153ए, 295 ए के तहत शिकायत दर्ज कर ली है। अब आरोपितों की पहचान कर आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस के अनुसार, विवादित पोस्टर हटा दिए गए हैं।

यति नरसिंहानंद ने इस पोस्टर को अपने ट्विटर पर शेयर कर लिखा, “यह AIMIM का नहीं इस्लाम का वास्तविक दृश्य है। सामूहिक हिंसा का जन्मदाता है इस्लाम और यह मुहम्मद के अनुयायी असदुद्दीन ओवैसी की राजनीतिक पार्टी AIMIM का बैनर है।”

धार्मिक रूप से भड़काऊ पोस्टर के अलावा एक अन्य पोस्टर भी कानपुर में देखा गया। इसमें सबसे ऊपर AIMIM कानपुर लिखा है और नीचे एक बच्चा और कुत्ता, रिजवी और नरसिंहानंद के मुँह में पेशाब करते दिखाए गए हैं।

बता दें कि 9 अप्रैल को मध्य प्रदेश के बालाघाट में पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के 4 लोगों को यति नरसिंहानंद के पोस्टर लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान मातिन अजहरी, शोएब खान, कासिम खान और रजा खान के तौर पर हुई थी। गिरफ्तारी का विरोध करते हुए AIMIM के जिला प्रभारी नाजिम खान ने कहा था, “पूरे मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, हमारे समुदाय के चार सदस्यों को उनका पोस्टर लगाने के लिए गिरफ्तार किया गया है।”

बालाघाट, यति नरसिंहानंद, पोस्टर
यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ पोस्टर लगाने और गाली देने के मामले में चार गिरफ्तार (साभार: न्यूज क्लिक)

मालूम हो कि प्रेस क्लब में यति नरसिंहानंद के बयान के बाद से वह कट्टरपंथियों के निशाने पर बने हुए हैं। 9 अप्रैल को ही बरेली के इस्लामिया ग्राउंड में मुस्लिम इकट्ठा होकर उनके खिलाफ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगा रहे थे।

AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी यति नरसिंहानंद पर कथित तौर पर पैगंबर की तौहीन करने को लेकर गुस्सा जाहिर कर चुके हैं। ट्विटर पर ओवैसी ने लिखा था कि पैगंबर का अपमान बिलकुल बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने पूछा था, “क्‍या धर्मगुरुओं के वेश में छिपे ये अपराधी इस्‍लाम से अपना अप्राकृतिक जुड़ाव खत्‍म कर सकते हैं? आप जो चीज पसंद नहीं करते, उस पर इतना समय क्‍यों खपाते हैं। मुझे यकीन है कि आपके अपने धर्म में भी काफी कुछ होगा जिस पर चर्चा हो सकती है।”

यति नरसिंहानंद की किस बात से नाराज हैं कट्टरपंथी?

बीते 1 अप्रैल को गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के मुख्य पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक कार्यक्रम में पैगंबर मुहम्मद की विशेषताओं को उजागर करने में हिंदुओं से निडर होने का आग्रह किया था।

उन्होंने कहा था, “अगर इस्लाम की वास्तविकता, जिसके लिए मौलाना कहते हैं कि यदि आप मुहम्मद के बारे में बोलते हैं, तो हम आपका सिर कलम कर देंगे, हिंदुओं को इस डर से छुटकारा मिलना चाहिए। हम हिंदू हैं। अगर हम भगवान राम, और अन्य हिंदू देवताओं की विशेषताओं के बारे में कह सकते हैं, तो मुहम्मद हमारे लिए कुछ भी नहीं है। हम मुहम्मद के बारे में और सच क्यों नहीं बोल सकते थे?”

AAP विधायक अमानतुल्ला खान ने पैगंबर मुहम्मद की आलोचना के लिए यति नरसिंहानंद सरस्वती का सिर कलम करने का आह्वान किया था। उसकी शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की थी। बाद में महंत का सिर काटने की धमकी के मामले में AAP विधायक के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था।

वसीम रिजवी पर क्यों गुस्सा?

शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी ने कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में कुरान की 26 आयत को हटाने के संबंध में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि इन 26 आयत में से कुछ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली हैं, जिन्हें बाद में शामिल किया गया। इस याचिका के दाखिल होने के बाद से लगभग हर मुस्लिम समूह उनसे नाराज था और उनका सिर कलम करने के लिए इनाम का ऐलान कर रहा था। कल (12 अप्रैल 2021) इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिजवी की याचिका को खारिज करते हुए उन पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया था।

लालू यादव की सलामती के लिए उनकी बेटी रखेंगी रोज़ा, अल्लाह-पाक से न्याय की भी दुआ करेंगी

“कल से रमज़ान का पाक महीना शुरू हो रहा है! इस साल हमने भी फैसला किया है कि पूरे महीने अपने पापा के सेहतयाबी और सलामती के लिए रोज़े रखूँगी! पापा की हालत में सुधार हो और जल्दी न्याय मिल सके, इसकी भी दुआ करूँगी! साथ ही मुल्क में अमन चैन हो, इसलिए ईश्वर/अल्लाह से कामना करूँगी।”

रोहिणी आचार्य नाम की महिला ने यह ट्वीट किया है। ट्वीट के साथ एक फोटो है, जिसमें भारत के कानून के अनुसार सजा पा चुका कैदी लालू प्रसाद यादव है और साथ में एक बच्चा। शायद यह बच्चा रोहिणी आचार्य का ही होगा क्योंकि खुद रोहिणी आचार्य लालू यादव की बेटी हैं।

लालू यादव जन्म से हिंदू है। अब का कैदी और पहले का नेता लालू यादव खुद को यदुवंशी और असली हिंदू बताते-बताते खप भी चुका है। खप गया क्योंकि चारा घोटालेबाज इस नेता को जमानत के लिए कॉन्ग्रेसी कपिल सिब्बल का दाँव CBI के आगे फेल हो गया। हिंदू लालू की बेटी रोहिणी आचार्य अब न्याय की उम्मीद में कानून को छोड़ अल्लाह के पास पहुँच गई है। लेकिन यह देश चलता तो कानून से ही है, शायद वो नहीं जानती!

MGM मेडिकल कॉलेज से कहानी शुरू

लालू तब मुख्यमंत्री हुआ करते थे, कैदी नहीं था। तब झारखंड बिहार से अलग भी नहीं था। लालू को अपनी बेटी से बहुत प्यार था। बड़ी वाली मीसा भारती को डॉक्टर बनवाया था MGM में दाखिला करा कर। फिर पढ़ाई के दौरान एकाध साल के भीतर ही PMCH में ट्रांसफर करवा दिया था। बवाल हुआ था।

बवाल CM लालू का क्या बिगाड़ लेता? मीसा के बाद वाली लालू की बेटी का नाम रोहिणी है। हिंदू लालू की वही रोहिणी, जिसने रोज़े वाला ट्वीट किया है। रोहिणी का भी दाखिला MGM मेडिकल कॉलेज में करवाया जाता है। यहाँ के गर्ल्स होस्टल में रोहिणी जब रहती थीं, तो उनका लोकल गार्डियन जमशेदपुर का एसपी होता था। लेखक की निजी रिश्तेदार भी उसी होस्टल में थी, इसीलिए यह जानकारी।

मीसा से कम किस्मत वाली रही रोहिणी एक मामले में। वो मामला था MGM से PMCH में ट्रांस्फर का। मीसा वाले बवाल के बाद कुछ कोर्ट-कचहरी हुआ था, जिसके कारण कम रैंक वाले बच्चे-बच्चियों का पढ़ाई के दौरान अच्छे रैंक वाले कॉलेज में ट्रांस्फर पर रोक लग गई थी (रैंक से कन्फ्यूज नहीं होना है, MGM में मैनेजमेंट सीट के रास्ते भी दाखिला होता था)। जिसका बाप CM था, उसकी बेटी को 450 किलोमीटर दूर जमशेदपुर में रहना पड़ रहा था। बेटी रोहिणी इस ‘अन्याय’ के खिलाफ काश उस साल भी रोज़ा रखती तो शायद अल्लाह-पाक की ओर से कुछ मिल सकता था। शायद ‘आसमानी’ किताब पर भरोसा तब कम था!

MBBS से पहले शादी

2002 में रोहिणी की शादी कर दी गई… पूरे हिंदू तौर-तरीके से। शादी की चर्चा ज्यादा नहीं क्योंकि तब लोकल से लेकर नेशनल मीडिया तक में सिर्फ इसी शादी के चर्चे थे। पटना के कई बिजनेसमैन इस शादी को लेकर घाटे में चले गए थे। लेकिन हिंदू रोहिणी ने उस साल इन बिजनेसमैन को न्याय दिलाने के लिए रोज़े नहीं रखे थे। आखिर बाप वाला प्यार दूसरों के लिए कैसे?

बाप अपराधी भले हो, लेकिन बेटियाँ उन्हें कभी अपराधी नहीं मानतीं। लालू जेल में आरोपित नहीं है। वो सजा काट रहा है। लालू को कानून ने साबित कर दिया है कि वो अपराधी है, सजा दी जा चुकी है। लेकिन बेटी रोहिणी को यह मंजूर नहीं। वो ‘आसमानी’ किताब के भरोसे अब रोज़ा रख कर अपने बाप के लिए न्याय माँग रही हैं।

छबड़ा में मुस्लिम भीड़ के सामने पुलिस भी थी बेबस: अब चारों ओर तबाही का मंजर, बिजली-पानी भी ठप

राजस्थान के बाराँ जिले के छबड़ा में सांप्रदायिक तनाव के बाद जिस तरह से मुस्लिम भीड़ का कहर बरपा, उससे इलाके के लोग काँप गए हैं। छबड़ा की सूरत बदल गई है और तबाही का मंजर साफ़ दिख रहा है। दुकानों में लगी आग को बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। कई दुकानदारों के लाखों के माल राख हो गए। बाइक, बस, कार- जो दिखा सब जला डाला गया। एक तीन मंजिला मिनी मार्ट को भी आग के हवाले कर दिया गया।

‘दैनिक भास्कर’ की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, उस मार्ट के मालिक संदीप लुहाड़िया ने बताया कि 500 से 50,000 रुपए की कीमत वाले 600-700 मोबाइल फोन लूट लिए गए। उन्होंने बताया कि उन्हें लगातार इस वारदात को लेकर फोन आ रहा था, लेकिन वो घटनास्थल पर पहुँचे भी तो दूर से अपने कारोबार की बर्बादी का मंजर देखते रहे। मात्र 15-20 मिनट में उन्हें 35 लाख रुपए का नुकसान हो गया।

दुकान में बचे तो सिर्फ कुछ टूटे-फूटे मोबाइल फोन्स और खाली डब्बे। सभी दंगाई हथियारों से लैस थे। दरअसल, ये सब कुछ रविवार (अप्रैल 11, 2021) को शुरू हुआ था। हिन्दुओं की दुकानों को निशाना बनाया गया। पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागे तो पुलिस को ही दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। पुलिस अधिकारियों के पास जवाब नहीं था, इसलिए वो मीडिया से बचते रहे। कई शोरूम भी जला डाले गए। राज्य में गुर्जर समाज के कई नेताओं ने बैठक कर घटना की निंदा की है।

पुलिस अधिकारियों ने भाग कर अपनी जान बचाई, क्योंकि कुछ मुस्लिम युवक उनके पीछे पड़े हुए थे। दुकानों और गुमटियों के अलावा एक दर्जन से भी अधिक वाहनों में भी आग लगाई गई। कई वाहन जो उस ओर जा रहे थे, उपद्रव की सूचना मिलते ही चालकों ने वापस लौटने में ही भलाई समझी। आसपास के थानों और जिलों से पुलिस बल बुलाना पड़ा। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा है।

मोदी कैबिनेट में जल शक्ति मंत्रालय का दायित्व सँभाल रहे शेखावत ने कहा, “यह कुंभकरण की नींद में सोने वाली सरकार है जहाँ भ्रष्टाचार का दीमक तंत्र को खोखला कर रहा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति तार-तार हो चुकी है। मुख्यमंत्री सो रहे हैं और राज्य जल रहा है। बाराँ के छाबड़ा में विचलित करते दृश्य साक्षात देखने को मिले। स्थिति चिंताजनक है। मामूली कहासुनी के बाद चाकू से हमला और फिर उस विवाद का थोड़े से समय में सांप्रदायिक हिंसा में बदल जाना राजस्थान की दुर्दशा का एक और चित्र है।”

सोमवार को भी छबड़ा में सन्नाटा पसरा रहा और 50 हजार की जनसंख्या घरों में ही दुबकी रही। पुलिस ने वहाँ कर्फ्यू लगा दिया है। इंटरनेट बंद है। न दूध की सप्लाई चालू है, न पानी की। बिजली की अधिकतर लाइनें जलाई जा चुकी हैं, तो भरी गर्मी में बत्ती भी गुल है। मेडिकल ज़रूरतों से ही लोग घर के बाहर निकल रहे हैं, लेकिन उन्हें भी कड़ी पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल दुकानें तक लूट ली गई हैं।

कई पुलिसकर्मी घायल हैं। सरकारी संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ है। कुछ लोगों को ही अब तक हिरासत में लिया जा सका है। फायर ब्रिग्रेड की गाड़ी भी तोड़ डाली गई थी। थाने में भी समुदाय विशेष के युवकों ने पत्थरबाजी की थी। प्रशासन ने शांति समिति की बैठक की, जिसमें व्यापारियों ने अपनी पीड़ा जाहिर की। अब तक 69 दुकानों के नष्ट होने और 15 करोड़ रुपए तक के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

कस्बे से होकर छबड़ा जा रहे गुर्जर समाज के नेता व कर्नल किरोड़ीसिंह बैंसला के पुत्र विजय बैंसला को कवाई पुलिस ने रोक लिया। उनके कई समर्थक रात तक बैंसला कवाई थाना परिसर में ही जमे रहे। मामले में गुर्जर समाज को भारी क्षति पहुँची है, इसलिए उन्होंने समाज के लोगों से बात कर स्थिति का जायजा लिया। भाजपा ने एक जाँच समिति बनाई है, जिसमें सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, विधायक संदीप शर्मा, विधायक चंद्रकांता मेघवाल और आनंद गर्ग शामिल हैं। भाजपा ने एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार एक पक्ष का समर्थन कर रही है।

बता दें कि छबड़ा कस्बे के धरनावदा चौराहे पर शनिवार शाम को नज्जीपुरा निवासी कमल गुर्जर अंगूर खरीद रहे थे, इसी दौरान फरीद, आबिद और समीर ने उनकी बाइक ठोक दी। कमल और इन युवकों के बीच कहासुनी होने लगी, जिसके बाद इन्होंने कमल को चाकू घोंप दिया। फिर दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। कमल को बचाने पहुँचे दुकानदार राकेश धाकड़ पर भी हमला हुआ। आरोप है कि तीनों को गिरफ्तार करने में पुलिस ने देरी की।

कॉन्ग्रेस MLA और पूर्व कॉर्पोरेटर पर FIR: ऑन ड्यूटी बदतमीजी और धमकी के बाद डॉक्टर ने दे दिया था इस्तीफा

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के एक विधायक और एक पूर्व कॉर्पोरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दोनों पर एक डॉक्टर के साथ बदतमीजी का आरोप है। भोपाल (दक्षिण-पश्चिम) से विधायक व पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और पूर्व कॉर्पोरेटर गुड्डू चौहान के खिलाफ मध्य प्रदेश पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। इन दोनों ने अस्पताल के परिसर में ही ऑन-ड्यूटी डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार किया था। उक्त डॉक्टर हबीबगंज के जेपी हॉस्पिटल में कार्यरत थे।

ये मामला एक मरीज की मौत से जुड़ा है। पीड़ित डॉक्टर योगेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन ये संभव नहीं हो सका। डॉक्टर ने कहा कि उन्हें ये अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ, इसीलिए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। उनके लिखित शिकायत के बाद सोमवार (अप्रैल 12, 2021) को मामला दर्ज हुआ। सबूत के रूप में CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान मौजूद हैं।

पुलिस ने इस मामले में IPC की धरा 353 (लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से भयोपरत करने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और धारा 189 (सरकारी कर्मचारी को क्षति पहुँचाने की धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। ये घटना शनिवार को दोपहर 12 बजे की है। कोलर कॉलोनी के 35 वर्षीय मरीज तख्त सिंह सख्या को ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण जेपी अस्पताल में लाया गया था।

दोपहर के 2:54 बजे अस्पताल के इमरजेंसी रूम में ही उनकी मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इसे मौत का कारण बताया। इस मामले में परिजन पीसी शर्मा को बुला कर ले आए। फिर शर्मा और चौहान ने डॉक्टर को उनका कॉल न उठाने के लिए धमकी दी और बदतमीजी की। डॉक्टर को जम कर डाँटा गया और साथ ही बहस की गई।

इस पूरी घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करके खेद जताते हुए कहा था, “आज हमारे डॉक्टरों के साथ जैसा बर्ताव किया गया, वह शर्मनाक है और किसी को भी डॉक्टरों के साथ बदतमीजी करने का कोई अधिकार नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि हमें राजनीति से ऊपर उठ कर एक साथ मिलकर कोरोना वॉरियर्स की सहायता करनी चाहिए। वो अपनी जान को जोखिम में डाल हमारी सेवा करते हैं।”