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PM मोदी के साथ मीटिंग को केजरीवाल ने बिना बताए कर दिया Live: बात हो रही थी जिंदगी बचाने की, करने लगे राजनीति

देश में कोरोना महामारी के कारण हर जगह हालत बिगड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र ने इसी स्थिति को देखते हुए शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) को सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग की। इस बैठक में महाराष्ट्र, उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल के मुख्यमंत्री शामिल हुए।

बैठक में ऑक्सीजन आपूर्ति, रमेडेसिविर जैसी आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता पर बात हुई। इससे पहले पीएम अधिकारियों से मीटिंग कर स्थिति के बाबत उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट माँग चुके थे। बैठक में शामिल सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने सुझाव दिए। 

मसलन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पीएम मोदी के साथ चल रही बैठक में कहा कि केंद्र और राज्य को मिलने वाली वैक्सीन की कीमत एक होनी चाहिए। वहीं एक मई से 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लगने वाली वैक्सीन के लिए कोरोना के टीके की उपलब्धता को लेकर केंद्र राज्य सरकारों को एक्शन प्लान जारी करे।

लेकिन, इस बैठक के बाद जो बात चर्चा में आई, वह अरविंद केजरीवाल और हर मामले में राजनीति करने वाली उनकी आदत थी। दरअसल, इस बैठक में केजरीवाल ने लाचारों की तरह पहले पीएम मोदी से ऑक्सीजन को लेकर अपील की और बाद में क्लोज डोर मीटिंग की बातचीत पब्लिक कर दी।

इस हरकत के बाद सरकारी सूत्रों ने केजरीवाल पर राजनीति करने का आरोप मढ़ा। टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल ने पीएम से हुई अपनी बातचीत का प्रसारण कर दिया, जो कि नहीं होना था। बाकी लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं थी कि अरविंद केजरीवाल क्या कर रहे हैं। किसी को सूचना दिए बगैर पीएम के साथ हुई बैठक में अपनी बात का सीएम ने प्रसारण किया।

इसके अलावा, सीएम केजरीवाल की स्पीच भी पूर्णत: राजनीति से प्रेरित थी। ऐसा पहली बार हुआ है कि पीएम के साथ हुई ऐसी निजी बातचीच को प्रसारित कर दिया गया हो। टेलीविजन वाले भी नहीं समझ पाए कि आखिर ये फुटेज आ कहाँ से रही है। लेकिन केजरीवाल को मालूम था कि उनकी स्पीच सार्वजनिक हो रही है। 

केजरीवाल द्वारा की गई इस हरकत के बाद इसे विश्वास के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने अरविंद केजरीवाल को एक आपदा कहा है। मालवीय के अनुसार, केजरीवाल बिना तैयारी के पीएम के साथ बैठक में बैठते हैं। उन्हें चीजों की कोई जानकारी नहीं है कि राजधानी में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए पहले ही चीजें की जा रही हैं और टीकों की कीमत से भी वह बेखबर हैं। मालवीय का पूछना है कि आखिर ये शख्स दिल्ली को कैसे बचाएगा।

सीएम केजरीवाल ने इस बैठक में दिल्ली में हो रही ऑक्सीजन की कमी को उजागर कर राजनीति करनी चाही और इस तरह से ये दर्शाया कि उन्हें मदद नहीं मिल रही। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, केजरीवाल ने एक जगह कहा, “दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी कमी है। क्या अगर यहाँ कोई ऑक्सीजन प्रोड्यूसिंग प्लांट नहीं होगा तो दिल्ली को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। कृपया मुझे बताएँ कि जब दिल्ली आने वाला ऑक्सीजन सिलिंडर दूसरे राज्य में रोका जाए तो केंद्र सरकार से इस संबंध में किससे बात करें।”

बता दें कि केजरीवाल की इस नासमझी पर सरकारी सूत्रों ने उन पर निशाना साधा। सूत्रों ने कहा कि केजरीवाल ने जानबूझकर वैक्सीन की कीमत पर झूठ बोला। सीएम केजरीवाल ने एयरलिफ्ट की बात कही लेकिन वो नहीं जानते कि ये पहले से हो रहा है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि केजरीवाल एकदम निचले स्तर पर गिर गए हैं। उनका पूरा भाषण किसी समाधान के लिए नहीं बल्कि राजनीति खेलने और जिम्मेदारी से बचने के लिए था।

भाजपा नेता संबित पात्रा ने केजरीवाल की इस हरकत को घटिया राजनीति कहा। उन्होंने कहा कि क्लोज डोर मीटिंग को सार्वजनिक करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए। ताकि राजीनित में नंबर बढ़ाए जा सकें।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के हालात अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत बदतर हो रहे हैं। गुरुवार को यहाँ 26 हजार से ज्यादा केस आए हैं। कुल संक्रमितों की संख्या अब बढ़कर 956,348 हो गई और सबसे चिंताजनक बात ये है कि यहाँ संक्रमण दर रिकॉर्ड भी 36 प्रतिशत हो गया है, जिसके बाद कल राजधानी में 306 मृत्यु हुई।

उनके पत्थर-हमारे अन्न, उनके हमले-हमारी सेवा: कोरोना की लहर के बीच दधीचि बने मंदिरों की कहानी

कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश के लोग न सिर्फ मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन, बल्कि कई दवाओं की कमी से भी जूझ रहे हैं। कई राज्यों में लगी पाबंदियों के कारण गरीब और प्रवासी मजदूर हलकान हैं, सो अलग। इन सबके बीच सवाल पूछे जा रहे हैं मंदिरों से, जिनकी संपत्ति पर दशकों से सरकार का कब्ज़ा है। साथ ही हिन्दू श्रद्धालु मंदिर के लिए जमा किए गए चंदे का क्या करें, ये भी वो वामपंथी तय करने की कोशिश कर रहे जो इसके खिलाफ थे।

साथ ही मोदी सरकार को मंदिर बनवाने वाली सरकार बताया जा रहा, जबकि अब तक सरकार ने एक भी मंदिर नहीं बनवाया है। हाँ, विकास कार्यों के आँकड़े ज़रूर पिछली सभी सरकारों के मुकाबले दुरुस्त हैं। यहाँ हम उन 5 मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने हाल में कोरोना की दूसरी लहर से उपजे संकट के बीच जनहित में कदम आगे बढ़ाए हैं। ये मंदिर कोविड मरीजों और गरीबों की सेवा कर रहे हैं।

द्वारका स्थित ISKCON मंदिर

द्वारका के इस्कॉन मंदिर ने संकट के इस समय में जब दिल्ली में कई पाबंदियाँ लागू हैं, गरीबों तक भोजन पहुँचाने का फैसला लिया है। पिछले वर्ष भी मंदिर ने जिला प्रशासन के साथ मिल कर कई गरीबों के भरण-पोषण का जिम्मा उठाया था, जिसे इस साल विस्तार दिया जा रहा है। मंदिर से जुड़ीं महिमा सब्बरवाल ने बताया कि ‘फ़ूड फॉर लाइफ’ के तहत ‘श्रवण कुमार सेवा’ का संचालन किया जा रहा है।

ये मुहिम रविवार (अप्रैल 18, 2021) से शुरू की गई है। 15 हजार लोगों को इसके तहत डिब्बे में पैक कर के भोजन पहुँचाया गया। इसमें खिचड़ी, दाल, आलू की सब्जी और रोटी शामिल हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इसमें हल्दी, देसी घी, हींग और काली मिर्च जैसी वस्तुओं का प्रयोग किया जा रहा है। इससे लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत होगा। दक्षिण-पश्चिम व उत्तर-पश्चिमी जिले के लिए 9717544444 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

मंदिर का लक्ष्य है कि 1 दिन में ढाई लाख लोगों तक मुफ्त भोजन पहुँचाया जा सके। स्थानीय लोग भी इसे सफल बनाने के लिए मंदिर के साथ मिल कर काम कर रहे हैं। भोजन पकाते समय संक्रमण से बचाव के उपाय और सैनिटाइजेशन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। भोजन का गलत प्रयोग न हो, इसके लिए ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है कि ये ज़रूरतमंदों तक ही पहुँचे। जिस ई-रिक्शा का डिलीवरी के लिए इस्तेमाल हो रहा है, उसमें भी स्वच्छता का खास ध्यान रखा गया है।

मुंबई के जैन मंदिरों ने भी बढ़ाए कदम

महाराष्ट्र, खासकर उसकी राजधानी मुंबई इस वक़्त न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण का सबसे बड़ा हब बना हुआ है। इन सबके बीच जैन समाज के संतों और प्रबुद्ध लोगों ने जैन मंदिरों को ही कोविड सेंटर में तब्दील कर दिया है। मुंबई के कांदिवली इलाके में स्थित पावन धाम जैन मंदिर में बनाए गए 100 बेड्स वाले कोविड सेंटर में हरेक बेड के लिए ऑक्सीजन का भी इंतजाम किया गया है।

मंदिर प्रशासन ने कहा कि महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है और सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में बेड्स न मिलने के कारण लोग मर रहे हैं, ऐसे में मंदिर ने आगे आने का फैसला लिया। मंदिर के सेवादार प्रदीप मेहता ने कहा कि सेवा और दान ही सबसे ज़रूरी चीज है। पावन धाम जैन मंदिर में स्टडी रूम, मेडिटेशन रूम और किचन सहित कई सुविधाएँ हैं। अब तक यहाँ धार्मिक कार्य ही होते आए हैं।

कुछ यूँ कोविड सेंटर में तब्दील हुआ मुंबई का जैन मंदिर (वीडियो साभार: ABP)

कोविड मरीजों के लिए 100 ऑक्सीजन बेड्स वाली सेवा शुरू हो गई है। 5 मंजिला मंदिर के कर्मचारी भी अब जनसेवा में लग गए हैं। ऑक्सीजन बेड के लिए 3000 रुपए प्रतिदिन का किराया रखा गया है, जो मुंबई के अस्पतालों से काफी कम है। इन रुपयों का इस्तेमाल डॉक्टरों, मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए किया जाएगा। मरीजों को एक अच्छा वातावरण दिया जाएगा। दवाइयों की भी व्यवस्था होगी।

ओडिशा के पुरी का ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर

ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर भी जनसेवा में पीछे नहीं है। मंदिर में श्रद्धालुओं को भीड़ जुटाने से पहले ही रोक दिया गया है, ताकि सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन हो सके। सिर्फ पुजारी ही पूजा-पाठ कर रहे हैं। ‘श्री जगन्नाथ टेम्पल एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA)’ ने सेवादारों, भक्तों और उनके परिवारों के लिए एक कोविड सेंटर की स्थापना का फैसला किया। ग्रैंड रोड स्थित ‘भक्त निवास’ में सारे उपकरणों और सेवाओं के साथ इसकी व्यवस्था हुई है।

SJTA के मुख्य प्रशासक किशन कुमार ने जिला प्रशासन के साथ बैठक के बाद कहा कि इस कोविड सेंटर में डॉक्टरों, नर्सों और एम्बुलेंस की भी व्यवस्था की गई है। बुधवार (अप्रैल 28, 2021) से ये पूर्णरूपेण चालू हो जाएगा। साथ ही वहाँ कोरोना टेस्टिंग फैसिलिटी भी होगी। एम्बुलेंस के जरिए गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तुरंत बड़े अस्पताल में भेजा जाएगा। जून के बाद आयुर्वेदिक और होमियोपैथी इलाज भी होगा।

साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोग कोरोना का टीका लगाएँ, इसके लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। कुम्भ मेला से वापस आने वाले 32 सेवादारों में से मात्र एक को ही कोरोना पॉजिटिव पाया गया। नए कोविड सेंटर में ऑक्सीजन की भी व्यवस्था होगी। जगन्नाथ मंदिर से जुड़े लोगों को कोरोना संक्रमण न हो, इसके लिए पहले ही बैठक कर के सतर्कता के उपाय अपनाए गए थे।

काशी विश्वनाथ मंदिर की रसोई से गरीबों को भोजन

वाराणसी भी कोरोना से बेहाल है। ऐसे में यहाँ के विश्वनाथ मंदिर की रसोई ने गरीबों का पेट भरने का जिम्मा उठाया है। कई NGO के साथ मिल कर कोरोना मरीजों को भी भोजन पहुँचाया जा रहा है। कोरोना के कारण मरने वालों के शवों को भी हाथ नहीं लगाना है, ऐसे में परिजनों के लिए अंतिम-संस्कार एक बड़ी समस्या है। इसीलिए, मारवाड़ी समाज ने कोविड मरीजों को अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन, दवा तथा आकस्मिक मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया है।

स्वामीनारायण मंदिर का कोविड सेंटर

गुजरात के वड़ोदरा में भी मंदिरों ने बढ़-चढ़कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हाथ बढ़ाया है। BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर ने 300 बेड्स वाले कोविड सेंटर की स्थापना की है। अतलदरा में 3.5 एकड़ में इस फैसिलिटी की स्थापना हुई है। ICU कमरों, पंखों और कूलर के अलावा यहाँ ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की भी व्यवस्था होगी। जल्द ही 200 और बेड्स को जोड़ कर कोविड सेंटर की क्षमता को 500 बेड्स तक किया जाएगा।

मंदिर से जुड़े ज्ञान वत्सल स्वामी ने बताया कि मंदिर ने दवाओं के लिए स्टोर, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अलग से कमरों और मरीजों के परिजनों के लिए रेस्ट रूम्स की भी व्यवस्था की है। मंदिर द्वारा ये पहल किए जाने के बाद शहर के कई अन्य धार्मिक स्थल भी सामने आए हैं और स्वामीनारायण मंदिर से प्रेरणा लेकर लोगों की मदद कर रहे हैं। जहाँ सरकारें और प्रशासन भी पस्त हैं, वहाँ मंदिरों ने मदद का हाथ बढ़ाया है।

कई अन्य मंदिर भी कर रहे मदद, ‘गिरोह विशेष’ चुप

इन मंदिरों के अलावा कई अन्य छोटे-बड़े मंदिर भी जनसेवा में लगे हैं, जिनके बारे में हम आपको बताते रहेंगे। पिछले साल भी जब कोरोना ने सिर उठाया था, तब देश भर के मंदिरों ने पीएम केयर्स में दान देने से लेकर लोगों की मदद तक, सब कुछ किया था। कई हिंदू मंदिरों ने दान में करोड़ों रुपए खर्च किए थे, जरूरतमंदों के लिए भोजन और आश्रय प्रदान किया था और संकट के समय राष्ट्र का समर्थन करने के लिए खड़े हुए थे।

वहीं इसी बीच कुछ मजहबी स्थलों से मदद की बात तो दूर, उलटा कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह देने पर पुलिस पर ही ईंट-पत्थर से हमले की ख़बरें आ रही हैं। राजस्थान के सांगनेर स्थित जामा मस्जिद में जब पुलिस लॉकडाउन का पालन कराने गई तो पुलिस पर ईंट-पत्थरों से हमला किया गया। गुजरात के कपड़वंज स्थित अली मस्जिद में भीड़ जुटाने से रोका गया तो पुलिस पर हमला हुआ।

विरार हो या भंडारा, सवाल वहीः कब तक जड़ता को मुंबई स्पिरिट या दिलेर दिल्ली बता मन बहलाते रहेंगे

महाराष्ट्र के विरार के एक अस्पताल में आग लगने से तेरह लोगों की मृत्यु हो गई। कोविड अस्पतालों में होनेवाली यह अकेली दुर्घटना नहीं है। इससे पहले नासिक के एक अस्पताल में ऑक्सीजन टैंक लीक होने से चौबीस लोगों की मृत्यु हो गई थी।

दो दिन पहले ही मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को राज्य में COVID रोकने के लिए पर्याप्त कोशिशें न कर पाने का दोषी बताते हुए अपनी टिप्पणी में कहा था कि ‘आपको भले ही शर्म न आए पर हमें शर्म आती है कि हम इस घिनौने और घटिया समाज के सदस्य हैं’।

उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी उस समय आई जब महाराष्ट्र सरकार ने न्यायालय के उस आदेश का पालन करने में असमर्थता प्रकट की जिसमें न्यायालय ने सरकार को नागपुर के लिए ऐंटी बायआटिक इंजेक्शन रेमडेशेविर के दस हज़ार वायल ख़रीदने का आदेश दिया था।

इसमें कोई दो राय नहीं कि चीनी वायरस COVID-19 की दूसरी लहर बहुत तेज है और देश के अधिकतर राज्यों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। पर ऐसा क्यों है कि महाराष्ट्र सरकार के संक्रमण रोकने के प्रयास शुरू से ही असफल दिखाई देते रहे हैं? कुछ लोगों का तो यहाँ तक मानना है कि दरअसल राज्य संक्रमण की पहली लहर पर भी असरदार तरीक़े से क़ाबू पाने में असफल रहा।

इन सब के ऊपर राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीरता का आलम यह है कि पिछले बीस दिनों में कोविड केयर अस्पतालों में आग लगने की दो घटनाएँ हो चुकी हैं। ऑक्सीजन टैंक लीक होने की घटना अभी बिलकुल ताज़ा है। जनवरी महीने में भंडारा जिले के एक अस्पताल में आग लगने की घटना हुई थी, जिसमें दस बच्चों की मृत्यु हो गई थी। कोविड संक्रमण के बाद केयर यूनिट बने पर उनमें व्यवस्था और बेड की कमी की समस्या एक वर्ष में कम हुई ही नहीं।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अधिकतर सरकारें गंभीर नहीं दिखाई देतीं, पर महाराष्ट्र सरकार की बात ही अलग है। पिछले एक वर्ष में कोविड के गंभीर संकट के बावजूद सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर मीडिया और समाज में बहस होती रही है, फिर चाहे वह गठबंधन की आपसी खींचतान हो या प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार। ऊपर से केंद्र के साथ राज्य सरकार का समन्वय किसी से छिपा नहीं है। स्वास्थ्य संकट के इस काल में राज्य सरकार की केंद्र को पत्र लिखने से लेकर वैक्सीन की कमी का हल्ला करने तक पर्याप्त राजनीति भी किसी से छिपी नहीं है।

ऊपर से असंवेदनशीलता देखिए कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अस्पताल में आग लगने से तेरह लोगों की मृत्यु राष्ट्रीय मीडिया लायक़ समाचार नहीं है। कौन से रसातल में पहुँच गई है सरकारी संवेदना? हम किसी दुर्घटना को क्या अब ऐसे आँकेंगे कि उसकी ख़बर राष्ट्रीय मीडिया लायक़ है या लोकल मीडिया लायक़? क्या यह देखकर कार्रवाई होगी कि कितने अख़बारों ने उस ख़बर को फ़्रंट पेज पर छापा या कितने न्यूज़ चैनल ने उसे ब्रेकिंग न्यूज़ बनाया? सरकारें यह कौन सा विमर्श चलाना चाहती हैं?

आज अस्पताल में लगी आग में तेरह लोगों की मृत्यु के तुरंत बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जाँच के आदेश तो दे दिए पर इस आदेश की बात पर एक प्रश्न उठता है कि क्या हम फिर दशकों पीछे जा रहे हैं जिसमें सरकारें दुर्घटनाओं को रोकने से अधिक जाँच कमीशन बैठाने को लेकर गंभीर रहती हैं? साथ ही यह प्रश्न भी उठता है कि ऐसे जाँच कमीशन से क्या फ़ायदा जिसकी रिपोर्ट समय पर नहीं आती या आती भी है तो क़ानूनी दाँव-पेंच की वजह से अक्सर उस पर कार्रवाई नहीं होती। कई बार तो कार्रवाई होने तक ऐसी दुर्घटनाओं में मरने वालों के रिश्तेदार भी शायद नहीं बचते।

हर बार जब ऐसी दुर्घटना होती है, बहस वही पुराने मुद्दे पर पहुँच जाती है कि अस्पताल का प्लान कैसा था? कैसे पास हुआ था? क्या प्लान के पास होने में कोई भ्रष्टाचार हुआ था? क्या पर्याप्त सुविधाएँ थीं जो अस्पताल में होनी चाहिए? ये ऐसे प्रश्न हैं जो दशकों से अपनी जगह टिके हुए हैं। कोई कोशिश भी नहीं करता कि उनका उत्तर दे जिससे नए और आधुनिक प्रश्न उठें जो हमारे विकास की गवाही भी दें।

पर नहीं। हम इन्हीं पुराने प्रश्नों को खड़ा करके बहस करते रहेंगे ताकि ख़ुद को एक सजग समाज के रूप में प्रस्तुत कर सकें। बहस करके काम पर चल देंगे और अपनी इस जड़ता को मुंबई स्पिरिट या दिलेर दिल्ली की संज्ञा देकर मन को सांत्वना देते रहेंगे।

B.1.618 ट्रिपल म्यूटेंट कोरोना वायरस: 60 दिनों में 12% केस इसी के, टीकों-एंटीबॉडी का मुकाबला करने में भी सक्षम

भारत में कोरोना की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है। देश में प्रतिदिन कोरोना के लाखों केस सामने आने से स्थिति चिंताजनक बन गई है। गुरुवार रात 12 बजे तक भारत में 332,503 नए कोरोना संक्रमित मिले। इस दौरान 2256 कोरोना मरीजों की मौत हो गई।

कोरोना संक्रमण के बढ़ते रूप के लिए अभी तक देश में डबल म्यूटेंट वायरस को जिम्मेदार माना जा रहा था। लेकिन अब तीन बार रूप बदल चुके (ट्रिपल म्यूटेंट) वायरस का पता चला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से लिए गए कई सैंपल में ट्रिपल म्यूटेंट वायरस मिला है। इसे B.1.618 नाम दिया गया है।

बताया जा रहा है कि वैज्ञानिकों ने B.1.618 को बंगाल स्ट्रेन का नाम दिया है। नया वेरिएंट तीन अलग-अलग कोविड स्ट्रेस से मिलकर बना है। यानी कि कोरोना वायरस के इस स्ट्रेन ने तीन बार रूप बदला है, जो काफी घातक है। यह शरीर के इम्युन कवच को भेद रहा है, जिससे पहले कोरोना से संक्रमित हो चुके लोग या फिर वैक्सीन लगवा चुके लोग भी इसकी चपेट में आ जा रहे हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बायॉलजी (IGIB) में जीनोम म्यूटेशन रिसर्चर विनोद सकारिया ने कहा, “बंगाल में हाल के महीनों में B.1.618 बहुत तेजी से फैला है। B.1.617 के साथ मिलकर इसने पश्चिम बंगाल में बड़ा रूप धारण कर लिया है।”

कोलकाता से 50 किलोमीटर दूर कल्याणी में नैशनल इंस्टिटयूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG) ने पिछले साल 25 अक्टूबर को एक मरीज में बंगाल स्ट्रेन को पहली बार पाया था। इस साल जनवरी तक यह बड़ी तादाद में फैल गया। असोसिएट प्रोफेसर श्रीधर चिन्नास्वामी ने कहा कि बंगाल स्ट्रेन कथित डबल म्यूटेंट से अलग है। यह देश के कई हिस्सों में फैल गया है।

क्या है ट्रिपल म्यूटेशन

भारत में इससे पहले डबल म्यूटेशन वाला वेरिएंट मिला था, यानी जिसमें कोरोना के दो अलग स्ट्रेन मिल गए हों। अब मिले ट्रिपल म्यूटेशन वेरिएंट में कोरोना के तीन स्ट्रेन मिल गए हैं।

भारत की 10 लैब में वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग

विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस में हो रहे बदलाव (म्यूटेशन) की वजह से कई देशों में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ट्रिपल म्यूटेशन वाला वायरस कितना घातक है और कितनी तेजी से फैलता है? इसको लेकर फिलहाल, भारत की 10 लैब में वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग (कोरोना के नए स्ट्रेन का पता) हो रही है।

एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, B.1.618 वैरिएंट में एक बदलाव वैसा ही है, जैसा ब्राजील और साउथ अफ्रीकी वैरिएंट में देखने को मिला था। इस बदलाव को E484K कहते हैं। एक रिसर्च के अनुसार, इस बदलाव से वायरस टीकों या पिछले इन्‍फेक्‍शन से पैदा हुई एंटीबॉडी का मुकाबला करने में सक्षम हो जाता है। E484K म्यूटेशन एक प्रमुख इम्यून एस्केप वेरिएंट है, जो दुनिया भर में उभरते हुए वंशों में पाया जाता है।

बता दें कि ग्‍लोबल रिपॉजिटरी GISAID में भारत की ओर से सबमिट डेटा के अनुसार, पिछले 60 दिनों में जितने भी वैरिएंट सीक्‍वेंस किए गए हैं, उनमें से 12% सैम्‍पल B.1.618 के हैं। यह तीसरा सबसे आम वैरिएंट है। सबसे ज्‍यादा 28% सैम्‍पल्‍स में B.1.617 वैरिएंट मिला है, उसके अलावा B.1.1.7 (यूके वैरिएंट) भी काफी सारे सैम्‍पल्‍स में पाया गया है।

गौरतलब है कि भारत में कोरोना के मामलों ने दुनिया भर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। देश में महामारी से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 1,86,927 हो गई है। अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,62,57,164 हो गई है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस में हो रहे म्यूटेशन की वजह से सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में साधुओं की हत्या में एक गिरफ्तार, कुदाल से काट दिया था गला

बिहार के मधुबनी के खिरहर स्थित ऐतिहासिक धरोहर नाथ धाम पर दो साधुओं की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। हरलाखी प्रखंड अंतर्गत आने वाले इस इलाके में मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) की रात दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। आरोपित का आपराधिक इतिहास खँगालने पर पता चला कि उसके चाचा ने वर्ष 2014 में तत्कालीन थानाध्यक्ष रामचंद्र मंडल पर गोलीबारी की थी।

एसपी सत्यप्रकाश ने घटनास्थल पर जाकर मामले की छानबीन की थी और उसके बाद से ही पुलिस आरोपित की गिरफ़्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी। पुलिस ने आरोपित दीपक चौधरी को बासोपट्टी स्थित ब्राह्मण टोल से धर-दबोचने में सफलता पाई है। पूछताछ में उसने हत्या का आरोप कबूल करते हुए कहा कि उसने अकेले ही इस घटना को अंजाम दिया था। उसने कहा कि ये मामला दानपेटी के रुपयों के विवाद से जुड़ा हुआ है।

दीपक चौधरी का कहना है कि दोनों साधुओं ने दानपेटी के रुपए में से उसे हिस्सा नहीं दिया था, इसीलिए उसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। हत्या आरोपित ने बताया कि उसने दोनों साधुओं का सिर धड़ से अलग करने में 2 घंटे का समय लिया। फिर उसने दोनों शवों को अकेले घसीट कर 100 मीटर दूर भूसा घर में छिपा दिया। एक के सिर को मंदिर परिसर में ही गड्ढा खोद कर छिपा दिया। फिर बाल्टी में पानी भर कर उसने घटनास्थल पर लगे खून को साफ़ किया।

इसके बाद वो उनमें से एक साधु की ही साइकल से कुदाल लेकर अपने घर गया और वहाँ दोनों चीजें छिपा दी, जबकि वो खुद बासोपट्टी के ही एक मंदिर में जाकर छिप गया। तीसरे साधु नारायण मुखिया का बयान ले लिया गया है और आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। 3 साधुओं में से जिन 2 की हत्या हुई, वो बाहरी थे। जबकि गाँव के एक साधु जो साथ में सोए हुए थे, वो बच गए। इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

‘मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन’ ने इस मुद्दे को उठाते हुए खिरहर थाना क्षेत्र में बढ़ते अपराध पर चिंता जताई और आशंका व्यक्त की कि इस दोहरे हत्याकांड में और भी लोगों का हाथ हो सकता है, पुलिस को बारीकी से जाँच करने की ज़रूरत है। संगठन के पूर्व राष्ट्रीय संगठन मंत्री राघवेंद्र रमण ने कहा कि मंदिर से कुछ ही दूरी पर एक व्यक्ति को चाकू मारा गया था, जिस मामले में अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है।

‘दैनिक भास्कर’ के स्थानीय संस्करण में प्रकाशित खबर (साभार)

मधुबनी में दोनों साधुओं के शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। बुधवार को शाम 5 बजे के बाद दोनों का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। परिवार व गाँव-समाज के लोगों का कहना है कि दोनों ही साधु हँसमुख थे और उनका हँसता चेहरा अब भी उनके जेहन में है। एक साधु हीरादस का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गाँव सिरियापुर में बछराजा नदी के किनारे हुआ। दूसरे मृतक भगवानपुर निवासी आनंद मिश्र का अंतिम संस्कार भी भगवानपुर में हुआ।

उधर ऑपइंडिया ने इसी इलाके में विश्वामित्र आश्रम विशौल के महंत ब्रजमोहन दास पर हमले का मुद्दा भी उठाया था। इस घटना से 2 रात पहले उनके मठ पर हमला हुआ था, जिसके बाद उन्होंने पुलिस-प्रशासन से साधु-संतों की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। हरलाखी थानाध्यक्ष प्रेमलाल पासवान ने मठ में दो चौकीदारों की नियुक्ति कर दी है। महंत के आवदेन के आधार पर जाँच भी शुरू कर दी गई है।

शाहनवाज दूत है, कोरोना मरीजों के लिए बेच डाला कार: 10 महीने पुरानी खबर मीडिया में फिर से क्यों?

कोई व्यक्ति एक ही चीज को दो बार कैसे बेच सकता है? यह संभव है! गंगा-जमुनी तहजीब और मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए भारतीय मीडिया संस्थान इस तरह का कमाल करते रहते हैं। ऐसे में मुंबई के मलाड में रहने वाले शाहनवाज शेख को ‘ऑक्सीजन मैन’ का नाम दे दिया गया और जून 2020 में जिस चीज के लिए उनके बारे में खबरें छपी थीं, इसके 10 महीने बाद अप्रैल 2021 में भी उसी खबर को दोबारा चला कर उनकी पीठ थपथपाई गई।

सबसे बड़ी बात तो ये कि ‘न्यूज़ 18’, ‘इंडिया डॉट कॉम’ और ‘इंडिया टुडे’ जैसे पोर्टलों ने न सिर्फ इस खबर को फिर से चलाया, बल्कि ये भी नहीं बताया कि यह एक पुरानी खबर है। अब जब कोरोना की दूसरी लहर से लोग परेशान हैं और कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी की बात सामने आ रही है, ऐसे में इस खबर को दोबारा चलाने के पीछे क्या कारण था, वो समझ से परे है। खासकर, ये छिपा कर कि ये अब की खबर नहीं है।

‘इंडिया टाइम्स’ ने पिछले साल चलाई थी ये खबर, ‘लोकमत’ ने अब चलाई

जून 2020 में भी भारत में कोरोना के कारण स्थिति गंभीर थी और संक्रमितों की संख्या देश भर में लगातार बढ़ रही थी। तभी शाहनवाज शेख का बयान ‘द क्विंट’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ जैसे मीडिया संस्थानों ने चलाया था, जिसमें वो कहते दिख रहे थे कि उन्हें कोविड-19 मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करने में आर्थिक समस्या आ रही थी, इसीलिए उन्होंने अपनी ‘ड्रीम कार’ कस्टमाइज्ड फोर्ड एंडेवर को बेच दिया।

शाहनवाज शेख ने बताया था कि इन रुपयों से उन्होंने कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर्स का इंतजाम किया। तब प्रकाशित हुई ख़बरों के अनुसार, शाहनवाज के एक दोस्त थे, जो उनके बिजनेस पार्टनर भी थे। दोनों बचपन से दोस्त थे और साथ काम करते थे। दोस्त की एक कजन बहन मुम्ब्रा में रहती थी, जो 6 महीने की गर्भवती थी। एक दिन अचानक उसे साँस लेने में तकलीफ होने लगी। उसका पति उसे अस्पताल में भर्ती कराना चाहता था।

‘न्यूज़ 18’ ने चालाकी से छिपाई कार बेचने की तारीख़, फिर से चलाई खबर

जून-जुलाई 2020 में शाहनवाज द्वारा बताई गई कहानी की मानें तो दोस्त की बहन को ऑटो रिक्शा से कई अस्पतालों में ले जाया गया लेकिन बेड नहीं मिला। किसी में ऑक्सीजन नहीं था, किसी में बेड्स नहीं थे, किसी में वेंटिलेटर नहीं था तो किसी ने कोरोना टेस्ट कराने को कहा। उसकी मौत हो गई और इसके बाद शाहनवाज लोगों को बचाने लगे। उन्होने अपनी SUV को एम्बुलेंस बना दिया। एक टीम बनाई और लॉकडाउन में लोगों की मदद की, उन्हें भोजन दिया।

‘इंडिया डॉट कॉम’ ने तो ऐसे चलाया जैसे ये कल की ही खबर हो

‘न्यूज़ 18’ की हालिया खबर में भी यही कहानी दोहराई गई है और कहा गया है कि शाहनवाज पिछले साल से ही एक बड़े कोरोना वॉरियर रहे हैं। बताया गया है कि अब तक उन्होंने 4000 लोगों की मदद की है और रोज उन्हें 500-600 फोन कॉल्स आते हैं। जबकि, ‘इंडिया डॉट कॉम’ की खबर में बताया गया है कि ‘कुछ ही दिनों पहले’ शाहनवाज ने अपनी कार बेच कर 160 ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की।

‘इंडिया टुडे’ ने भी इसी तरह ‘कुछ दिन पहले’ SUV बेचने की बात की और इस खबर को प्रकाशित किया। अब चैनल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से माफ़ी माँगते हुए कहा है कि ये एक पुरानी खबर है, जो फिर से चल रही है। लेकिन साथ ही ‘इंडिया टुडे’ ने जोड़ा, “लेकिन हमें निश्चित रूप से ऐसे और भी लोगों की ज़रूरत है।” लेकिन, इस स्टोरी को डिलीट नहीं किया गया है और ये साइट पर मौजूद है।

पिछले साल ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘द क्विंट’ ने शाहनवाज के हवाले से ही बनाया था वीडियो

इसी खबर में ये भी लिखा है कि शाहनवाज ने पिछले वर्ष भी अपनी कार बेच दी थी। भला एक ही SUV को 2 बार एक ही काम के लिए कैसे बेचा जा सकता है? खबर में इसके आगे शाहनवाज शेख के पिछले साल के बयान को ही हूबहू छाप दिया गया है। पिछले साल भी ‘द क्विंट’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के वीडियोज में शाहनवाज ही एक दीवार के बैकग्राउंड के साथ अपनी कहानी बता रहे थे। बीच-बीच में उनके ‘सामाजिक सेवा कार्यों’ का स्लाइडशो चलाया गया था।

13 मरीज अस्पताल में जल कर मर गए, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा – ‘यह नेशनल न्यूज नहीं’

महाराष्ट्र में शुक्रवार सुबह अस्पताल में आग लगने से 13 कोविड मरीजों की दर्दनाक मौत को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि यह राष्ट्रीय खबर नहीं है। मीडिया को ये बयान देते समय देश के सर्वाधिक कोरोनावायरस प्रभावित राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बिना मास्क लगाए नजर आए।

यह घटना शुक्रवार तड़के मुंबई के विरार स्थित विजय वल्लभ अस्पताल में एसी में शॉर्ट-शर्किट की वजह से आग लगने से हुई, जिससे आईसीयू में इलाज करा रहे 17 में से 13 मरीजों की मौत हो गई।

मुंबई में अस्पताल में 13 लोगों की मौत नेशनल न्यूज नहीं: राजेश टोपे

मुंबई के विजय वल्लभ कोविड केयर हॉस्पिटल में 13 लोगों की आग लगने से मौत के मामले में सवाल पूछे जाने पर महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा, ”हम ऑक्सीजन के बारे में बात करेंगे, रेमडेसिविर के बारे में बात करेंगे, यह घटना जो घटी है वो नेशनल न्यूज नहीं है। लेकिन राज्य सरकार की तरफ से पूरी मदद करेंगे।”

पत्रकारों द्वारा ये पूछे जाने पर कि 13 लोगों की मौत को वह नेशनल न्यूज नहीं मान रहे हैं तो टोपे ने कहा, ”राज्य सरकार की हद तक हम पूरी मदद करेंगे। उन्हें राज्य सरकार की तरफ से 5 लाख रुपए और महानगरपालिका की तरफ से 5 लाख रुपए दिया जाएगा, 10 लाख रुपए की मदद दी जाएगी, जो नासिक में घटना घटी है, उसी टाइप में हम मदद करेंगे।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय वल्लभ अस्पताल एक निजी संस्था है, जो कोविड अस्पताल के रूप में कार्य करती है। टोपे ने कहा कि इस घटना की विस्तृत जाँच की जाएगी और रिपोर्ट 10 दिन में हासिल करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र में महज दो दिन के अंदर ही यह अस्पताल में दुर्घटना की वजह से ये कोविड मरीजों की मौत की दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले महाराष्ट्र के नासिक में बुधवार (21 अप्रैल, 2021) को टैंकर से ऑक्सीजन लीक होने की वजह से 24 कोरोना मरीजों की मौत हो गई थी। यह घटना नासिक के जाकिर हुसैन हॉस्पिटल में घटी थी।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को राज्य में 67,013 नए केस मामले सामने आए। इस दौरान 62,298 मरीज ठीक भी हुए हैं और 568 मरीजों की मौत हो गई। राज्य में अभी 40,94,840 संक्रमित केस हैं, जिसमें 6,99,858 एक्टिव मामने हैं और कुल 33,30,747 मरीज ठीक हो चुके हैं।

डॉ आमिर खान गिरफ्तार, ₹4000 का इंजेक्शन बेच रहा था ₹60000 में: कोरोना पीड़ितों को ठगने में MR इमरान भी शामिल

इंदौर के एक अस्पताल में कोरोना वायरस संक्रमण का फायदा उठा कर मरीजों को लूटने वाले दो लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें से एक डॉक्टर है तो एक मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव। जिन पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, उन्हें ही मरीजों की आपात स्थिति का फायदा उठा कर अपनी कमाई करते हुए दबोचा गया। अस्सिस्टेंट ड्यूटी डॉक्टर आमिर खान और MR इमरान खान के खिलाफ अंकिता यादव नामक महिला ने शिकायत की थी।

दोनों पर आरोप है कि उन्होंने कोरोना पीड़ित को दिए जाने वाले इंजेक्शन का न सिर्फ नकली बिल बनाया, बल्कि उसे 60,000 रुपए में बेचा। ये घटना मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित मयूर अस्पताल की है। खजराना TI दिनेश वर्मा ने बताया कि अंकिता यादव की बहन प्रीति कोरोना पीड़ित हो गई थीं और उन्हें इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहाँ डॉक्टर ने एक अर्जेन्ट इंजेक्शन लिखा और उसे खरीद कर लाने को कहा।

उसी अस्पताल में मौजूद डॉक्टर आमिर खान ने महिला से कहा कि वो इस इंजेक्शन को उपलब्ध करा सकता है। जब महिला ने बिल माँगा तो उसने इनकार कर दिया। फिर 60,000 रुपए का ऑनलाइन पेमेंट लेकर इंजेक्शन दे दिया। बाद में उसने महिला के मोबाइल नंबर पर बिल भेज दिया। पड़ताल में पता चला कि बिल पर छपा नंबर MR इमरान खान का था। बिल उसने ही छपवाए थे। वो लंबे समय से आमिर के साथ मिल कर ठगी के कारोबार में लगा था।

आमिर खान इससे पहले स्वर्णबाग कॉलोनी में हेल्थ प्लस नाम से क्लिनिक चलाता था। दोनों के खिलाफ जयदीप साधवानी नामक शख्स ने भी शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि वो लाइफ विजन नामक फर्म चलाते हैं, जो किसी व्यक्ति को सीधे दवाई नहीं देता। सिर्फ अस्पताल और मेडिकल स्टोर्स को ही दवाई सप्लाई की जाती है। अंकिता यादव बिल लेकर उनके पास ही पहुँची थीं और साइन करने को कहा था।

लेकिन, उन्होंने भाँप लिया कि वो एक फर्जी बिल था। उन्होंने नंबर पर कॉल किया तो इमरान ने बताया कि वो इन्फोबेल में कार्यरत है। अंसार खान का बेटा आमिर सिल्वर कॉलोनी का रहने वाला है, जबकि जबकि बाबू खान का बेटा इमरान शाहीबाग का निवासी है। जिस इम्युनोसीन अल्फा इंजेक्शन को वो 60,000 में बेचते थे, उसकी सामान्य कीमत 4000 रुपए है। मयूर अस्पताल इंदौर के रोतला रिंग रोड पर स्थित है।

अम्मी कोविड वॉर्ड में… फिर भी बेहतर बेड के लिए इंस्पेक्टर जुल्फिकार ने डॉक्टर का सिर फोड़ा: UP पुलिस से सस्पेंड

प्रयागराज के एक अस्पताल में एक कोरोना मरीज को भर्ती कराने के लिए बेड नहीं मिला तो उसके परिजनों ने एक डॉक्टर की ही पिटाई कर डाली, जिसके बाद विरोधस्वरूप अन्य डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए। ये बवाल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कोविड-19 लेवल थ्री स्वरूपरानी अस्पताल (SRN Hospital) में हुआ। शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) को तड़के सुबह 3 बजे कोरोना संक्रमित मरीज के परिजनों और डॉक्टर के बीच झड़प हुई।

कोरोना पीड़ित एक बुजुर्ग महिला थी, जिनकी मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए बेटे जुल्फिकार ने एक डॉक्टर की पिटाई कर दी। जुल्फिकार प्रतापगढ़ में बतौर इंस्पेक्टर तैनात है। हालाँकि, अपने डॉक्टर को पिटते देख कर अस्पताल के बाकी कर्मचारी भी उग्र हो गए और उन्होंने इंस्पेक्टर जुल्फिकार की भी जम कर पिटाई की, जिससे वो अधमरा हो गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने उक्त इंस्पेक्टर को सस्पेंड करने का आश्वासन दिया है।

इंस्पेक्टर के साथ उसके दो अन्य भाई भी डॉक्टर की पिटाई में शामिल थे। अस्पताल कर्मियों ने उनकी भी धुनाई की। इसके बाद डॉक्टर और मेडिकल कर्मियों ने हड़ताल कर दिया, जिससे अस्पताल में हाहाकार मच गया। उत्तर प्रदेश में फ़िलहाल कोरोना के 2,59,810 मामले हैं, जिनमें से 16,988 (6.53%) प्रयागराज में ही हैं। लखनऊ में 54,967 (21.15%) सक्रिय मामलों के बाद राज्य में प्रयागराज का ही स्थान है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे और उन्होंने आक्रोशित डॉक्टरों को शांत कराया। इंस्पेक्टर को तत्काल सस्पेंड कर के उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर त्वरित विधिक कार्रवाई करने का आश्वासन वरिष्ठ अधिकारियों ने दिया, लेकिन इसके बाद भी जूनियर डॉक्टर नहीं माने और हड़ताल जारी रखा। सुबह से ही अस्पताल में मरीजों की हालत खराब है और व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है।

इंस्पेक्टर जुल्फिकार की अम्मी अप्रैल 18 से ही अस्पताल में भर्ती थीं और कोरोना पॉजिटिव आने के कारण उन्हें कोविड वॉर्ड में भर्ती कर दिया गया। जबकि इंस्पेक्टर अपनी अम्मी के लिए बेहतर वॉर्ड में बेड चाहता था। इसी बात को लेकर डॉक्टर के साथ बहस हुई और जुल्फिकार समेत तीनों भाइयों ने मिल कर डॉक्टर को ग्लूकोज चढ़ाने वाले स्टैंड से इतना मारा कि उनका सिर फट गया। IG केपी सिंह स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हुए हैं।

अस्पताल के EMO डॉक्टर सूर्यभान कुशवाहा समेत सभी डॉक्टरों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के दौर में वे लोग अपनी जान की परवाह न करते हुए काम कर रहे हैं, लेकिन तीमारदारों द्वारा जिस तरह मारपीट की जा रही है, इससे उनमें भय का माहौल पैदा हो रहा है। सिटी एसपी दिनेश सिंह भी कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 4 पुलिसकर्मी मौके पर थे, जिन्होंने डॉक्टर को नहीं बचाया।

थरूर और पवार ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की ‘मौत की खबर’ फैलाई, बाद में डिलीट किए ट्वीट्स

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को श्रद्धांजलि दे दी! शशि थरूर ने ट्विटर पर लिखा, “पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के गुजर जाने से मैं बेहद दुःखी हूँ। मैं उनके साथ अपनी कई सकारात्मक बातचीत को याद करता हूँ। एक बार उन्होंने और दिवंगत केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मुझे BRICS की बैठक के लिए मॉस्को जाने वाली संसदीय समिति का नेतृत्व करने को कहा था।”

‘न्यूज़ 18’ ने चलाई सुमित्रा महाजन के ‘निधन’ की खबर

दरअसल, ‘न्यूज़ 18’ ने मध्य प्रदेश के इंदौर से लगातार 30 वर्षों तक सांसद रहीं सुमित्रा महाजन के निधन की खबर चलाई थी। चैनल ने गुरुवार (अप्रैल 22, 2021) को रात 11:19 बजे ये खबर चलाई, जिसे बाद में डिलीट कर लिया गया। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं सुमित्रा महाजन को NCP सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी ‘भावपूर्ण श्रद्धांजलि’ देते हुए इसे राजनीतिक और सामाजिक क्षति करार दिया।

वहीं महाराष्ट्र के सुपर CM कहे जाने वाले शरद राव पवार ने भी ट्विटर पर लिख डाला कि उन्हें ‘सुमित्रा महाजन के निधन’ का दुःख है और परिजनों को शक्ति मिले, ऐसी वो कामना करते हैं। पत्रकार रुबिका लियाकत ने भी लिखा, “सुमित्रा महाजन नहीं रहीं! ॐ शांति।” इसी तरह सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दे दी। हालाँकि, अधिकतर ने बाद में अपने ट्वीट्स डिलीट कर लिए। अब आपको बताते हैं कि सच्चाई क्या है।

मध्य प्रदेश में भाजपा के नेता कैलाश विजयवर्गीय ने बताया है कि ‘ताई’ एकदम स्वस्थ हैं और साथ ही उनकी लंबी उम्र की भी कामना की है। इसके बाद थरूर ने अपने ट्वीट डिलीट करते हुए विजयवर्गीय को धन्यवाद दिया और लिखा, “मुझे समझ नहीं आता कि किस चीज से दुष्प्रेरित होकर लोग इस तरह की बुरी ख़बरें फैलाते हैं। मैं सुमित्रा जी के लंबे जीवन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए कामना करता हूँ।”

थरूर ने लिखा कि उन्होंने एक स्रोत को विश्वसनीय समझते हुए उस पर भरोसा किया था, लेकिन अब वो ये जान कर खुश हैं कि सुमित्रा महाजन ज़िंदा हैं। उन्होंने लिखा कि वो अपनी बात को वापस लेते हुए भी खुश हैं। सुमित्रा महाजन के परिजनों ने भी किसी अफवाह पर विश्वास न करने की सलाह देते हुए कहा कि वो एकदम स्वस्थ हैं। उनके छोटे बेटे मंदार महाजन ने वीडियो जारी कर के बताया कि उनकी माँ की कोरोना रिपोर्ट भी नेगेटिव आई है।

वहीं खुद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी इन ख़बरों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि आखिर न्यूज़ चैनल्स बिना इंदौर प्रशासन से पुष्टि किए हुए इस तरह की खबर कैसे चला सकते हैं? उन्होंने बताया कि उनकी भतीजी ने शशि थरूर के दावे का जवाब दिया है, लेकिन साथ ही पूछा कि इस तरह से सार्वजनिक रूप से घोषणा करने की कौन सी हड़बड़ी थी? बता दें कि उन्हें बस हल्का बुखार आया था, जिसके बाद उन्होंने कोविड टेस्ट कराया था।