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उदित राज ने कुम्भ पर फैलाया फेक न्यूज, 2013 की तस्वीर को जोड़ा तबलीगी जमात से: लोगों ने दिखाया आइना

दलित नेता उदित राज ने कुंभ मेले को लेकर फेक न्यूज फैलाई है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा, “1500 तबलिगी जमात भारत में कोरोना जेहाद कर रहे थे और अब लाखों साधू जुटे कुम्भ में उस जेहाद और कोरोना से निपटने के लिए।” हालाँकि, उदित राज का यह ट्वीट ज्यादा देर तक टिक न सका।

बता दें कि उदित राज ने जो तस्वीर पोस्ट की है, वह 2019 की है। गूगल पर जब हम इस तस्वीर को सर्च करते हैं तो पाते हैं कि 2019 में इसे कई लोगों द्वारा शेयर किया गया था।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना है कि यह तस्वीर 2013 के कुंभ मेले की है, जिसका इस्तेमाल कर उदित राज अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। 2013 में भी कई रिपोर्ट में इस तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है।

उदित राज के ट्वीट करते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया। एक यूजर ने लिखा, अरे बेवकूफ, यह पिछले साल की तस्वीर है।

वहीं अन्य ने लिखा, महाराष्ट्र में तो चुनाव नहीं है तो वहाँ क्या हो गया।

एक अन्य यूजर ने लिखा, “2013 की फोटो डाल कर अफवाह फैला रहा है। संज्ञान लिया जाए।” यूजर ने इस ट्वीट में दिल्ली पुलिस को भी टैग किया है।

एक यूजर ने लिखा, “सर सबसे ज्यादा केस तो आपके यहाँ से आ रहे हैं। महाराष्ट्र नंबर 1 पर है। थोड़ा आत्म निरीक्षण कीजिए सर।”

एस सोमवंशी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “पुराने कुंभ की फोटो है महोदय, बाकी काफिर की सजा आपको भी मिलेगी।”

सौरभ राय नाम के यूजर ने लिखा, “एक तो तुम 2013 की तस्वीर ट्वीट करते हो और फिर बोलते हो कि लोग तुम्हे गालियाँ क्यों देते हैं और ये बताओ की महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में कौन सा कुंभ हो रहा है जो वहाँ की हालत इतनी खराब है। इन पर बोलने की भी तो थोड़ी सी हिम्मत दिखाइए उदित राज जी।”

गौरतलब है कि उदित राज ने पिछले साल कुंभ पर होने वाले खर्चों को लेकर सवाल उठाया था। ट्विटर पर उदित राज ने लिखा था, “सरकार द्वारा किसी भी धार्मिक शिक्षा या अनुष्ठान का खर्च वहन नहीं किया जाना चाहिए। सरकार का खुद का कोई धर्म नहीं होता है। यूपी सरकार इलाहाबाद में कुंभ मेले के आयोजन में 4200 करोड़ रुपए खर्च करती है, वह भी गलत है।”

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज द्वारा इस ट्वीट के कुछ ही समय बाद इसकी जम कर आलोचना हुई और अंत में उन्होंने खुद अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया। ट्वीट डिलीट करने के बाद उदित राज ने कहा कि धर्म को राजनीतिक ताकतों से दूर रखना चाहिए और सरकार को किसी भी धर्म में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसके अलावा न तो उसे बढ़ावा देना चाहिए और न ही उसे हतोत्साहित करना चाहिए। मैंने कुम्भ मेले का उदाहरण इसलिए दिया था क्योंकि इसका खर्च बहुत ज़्यादा था।

कोरोना का कहर: दिल्ली की कब्रिस्तान में जगह नहीं, लखनऊ में बढ़ा रेट, गुजरात में एडवांस में खुद रही कब्र; कम पड़ने लगे कफन

देश और राजधानी दिल्ली में कोरोना तेजी से फैल रहा है। हर दिन कोरोना के आँकड़े पिछले रिकॉर्ड को तोड़ रहे हैं। हालात ये हैं कि मरीजों को अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही है, तो दूसरी तरफ कब्रिस्तान में भी सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। दिल्ली के ITO स्थित कब्रिस्तान ‘जदीद कब्रिस्तान अहले इस्लाम दिल्ली’ की तस्वीरें और आँकड़ा डराने वाला है। मुर्दों को सुपुर्द-ए-खाक करने की जगह बनाने के लिए JCB मशीन की मदद लेनी पड़ रही है।

कब्रिस्तान के केयरटेकर शमीम का कहना है कि अप्रैल से पहले के 55 दिनों में सिर्फ 5 कोरोना संक्रमितों की डेड बॉडी आई थी। लेकिन पिछले 3 दिन में ही 5 गुना यानी 25 डेड बॉडी आ चुकी है। एक अप्रैल से 11 अप्रैल तक 39 शवों को दफनाया जा चुका है, शमीम को कब्रिस्तान में शवों की बढ़ती तादाद और कम होती जगह की फिक्र सताने लगी है।

शमीम के मुताबिक अब सिर्फ 100 शवों को दफनाने की जगह बची है, अगर मौत का यही आँकड़ा रहा तो 10 से 12 दिनों में भर जाएगी। इसको लेकर कब्रिस्तान से जुड़ी कमेटी को जानकारी दे दी गई है। कब्रिस्तान में शवों को दफनाने का काम करने वाले वसीम की शिकायत है कि उन्हें इस काम के वक्त इस्तेमाल के लिए पीपी‌ई नहीं दी जाती। इससे उनकी जिंदगी को भी खतरा रहता है।

गौरतलब है कि पिछले साल भी इस कब्रिस्तान का भी कुछ ऐसा ही हाल था। इसमें से 5 बीघा जमीन कोरोना संक्रमण से मरने वालों को दफन करने के लिए आरक्षित की गई थी। दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, कुछ ही हफ्तों में इस 5 बीघे जमीन का 75 फीसदी हिस्सा भर चुका था। शमीम के हवाले से दैनिक भास्कर ने बताया था कि जिस रफ्तार से मौतें हो रही है कोरोना संक्रमितों के लिए आरक्षित यह कब्रिस्तान हफ्ते भर से भी कम समय में भर जाएगा। उन्होंने बताया था कि इसके बाद ऐसे लोगों का शव दफन करने के लिए कब्रिस्तान प्रबंधन कमिटी को और जमीन आवंटित करनी पड़ेगी। 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी सरकार के लापरवाही भरे रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “आप लोग (दिल्ली सरकार) गहरी नींद में थे और आपको झकझोर कर नींद से उठाना पड़ा। जब हम आपको झकझोरते हैं तब आप कछुए की चाल चलने लगते हैं।”

राँची में कब्र खोदने के लिए नहीं मिल रहे मजदूर

वहीं राँची के रातू कब्रिस्तान में कब्र खोदने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। कब्रिस्तान में मृतकों की लंबी कतार है क्योंकि मृतकों को दफनाने के लिए कब्र नहीं है। कब्रिस्तान में कब्र खोदने वाले मजदूर कोविड संक्रमण के डर से कब्रिस्तान से भाग खड़े हो रहे हैं। कब्र खोदने के लिए रातू कब्रिस्तान में जेसीबी की व्यवस्था की जा रही है ताकि शवों को दफनाया जा सके। मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) को भी रातू कब्रिस्तान में करीब 10 शव पहुँचे, जिनमें 2 शव कोविड पॉजिटिव मरीजों के थे लेकिन कब्र खोदने वाले मजदूर नदारद रहे।

लखनऊ में बढ़ रहा खुदाई का रेट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी शवों को दफनाने में दिक्कतें आनी शुरू हो गई हैं। शहर में बढ़ते मौतों के ग्राफ से श्मशान से लेकर कब्रिस्तानों तक की व्यवस्था प्रभावित हुई है। राजधानी के प्रमुख कब्रिस्तानों में सामान्य दिनों के मुकाबले इन दिनों कहीं अधिक मय्यतें आ रही हैं। जिससे लगातार गड्ढे खुदवाए जा रहे हैं, क्योंकि कोरोना संक्रमित लाशों को दफनाने के लिए गहरे गड्ढे खोदे जाते हैं इसलिए खुदाई का रेट भी बढ़ गया है।

गुजरात में एडवांस में खुद रही कब्र

हालात यह हैं कि जिन कब्रिस्तानों में औसतन दो-चार, दस मय्यतें दफन होने आती थीं वहाँ पर इस समय ताँता लगा हुआ है। शहर के सबसे बड़े कब्रिस्तान ऐशबाग की बात करें दो पिछले दो हफ्ते में यहाँ 210 मय्यतों को दफनाया गया है। इनमें 14 शव संक्रमित थे जिन्हें दूसरी जगह गहरा गड्ढा खोदकर दफनाया गया।

इधर गुजरात में भी कुछ ऐसा ही हाल है। कोरोना के बढ़ते कहर को देखते हुए कब्रिस्तानों में एडवांस में कब्रों की खुदाई की जा रही है। सूरत में महामारी का इतना ज्यादा प्रकोप बढ़ गया है कि शवों को लाने वाली मुर्दाघर की गाड़ियों की कमी आने लगी है। एक वाहन में कई शव ढोए जा रहे हैं। शव वाहन एक साथ कई शवों को लेकर निकलते हैं और उन्हें अलग-अलग कब्रिस्तान पर उतारते हुए चलते बनते हैं। सूरत में रहने वाले लोगों का कहना है कि इतना बुरा वक्त हमने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं देखा।

7000 वाली मस्जिद में सिर्फ 50 लोग नमाज पढ़ेंगे… प्लीज अनुमति दीजिए: बॉम्बे HC का फैसला – ‘नहीं’

रमजान के महीने में मस्जिदों में नमाज पढ़ने को लेकर बुधवार (अप्रैल 14, 2021) को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जुमा मस्जिद ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में ट्रस्ट ने 50 लोगों के साथ 5 वक्त नमाज पढ़ने की अनुमति मांँगी थी। हालाँकि कोर्ट ने मामले में सुनावई करते हुए कहा कि भले ही धार्मिक प्रथाओं को फॉलो करने का अधिकार महत्वपूर्ण है लेकिन कोविड महामारी के दौरान लोगों की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।

जुमा मस्जिद ट्रस्ट की इस याचिका पर न्यायमूर्ति आरडी धानुका और वीजी बिष्ट की डिविजन बेंच ने सुनवाई करते हुए याचिका में की गई माँग को स्वीकारने से मना कर दिया। कोर्ट में याचिकाकर्ता ने कहा कि मस्जिद एक एकड़ में फैली है और एक समय में 7 हजार से ज्यादा लोग इसमें एकट्ठा हो सकते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए मस्जिद में एक समय में पचास लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए। 

याचिका में ये भी कहा गया था कि ट्रस्ट इस दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल और सावधानी का पूरी तरह पालन करेगा। अपनी माँग उठाते हुए याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के 12 अप्रैल के फैसले का उदाहरण दिया था, जहाँ प्रोटोकॉल के साथ नमाज करने की अनुमति दी गई।

सरकारी वकील ने कहा- हम किसी धर्म के लिए अपवाद नहीं बना सकते

सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार की ओर से पेश हुई वकील ज्योति चव्हाण ने याचिका में उठाई गई माँग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कोरोना के बढ़ते केसों को देखते हुए ये अनमुति नहीं दी जानी चाहिए। वह बोलीं,

“हम किसी भी धर्म के लिए अपवाद नहीं बना सकते, खासकर इस 15-दिन की प्रतिबंध अवधि में। हम इस स्तर पर जोखिम नहीं उठा सकते हैं। सभी नागरिकों को इस समय सहयोग करना चाहिए।”

ज्योति चव्हाण ने कहा कि सरकार ने घर में किसी को उनके धार्मिक कार्य करने से नहीं रोका। राज्य इस समय वैक्सीन और ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में सामाजिक समारोहों की अनुमति देना उचित नहीं होगा। याचिका के विरोध में सरकारी वकील ने कहा कि दिल्ली और महाराष्ट्र की स्थिति अलग है। दिल्ली हाईकोर्ट का ऑर्डर इस राज्य में नहीं माना जा सकता।

कोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि राज्य में कोरोना बेकाबू हालात में है और इसके संक्रमण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने अनिवार्य हैं। कोर्ट ने स्थिति के मद्देनजर कहा,

“महाराष्ट्र में मौजूदा स्थिति और जमीनी हकीकत को देखते हुए, हम याचिकाकर्ता को मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दे सकते। राज्य सरकार का प्रतिबंध आदेश जनता के हित में और महाराष्ट्र के सभी निवासियों की सुरक्षा के लिए है।”

कोर्ट ने महामारी से पैदा हुई गंभीर स्थिति को देखते हुए कहा धार्मिक प्रथाओं को फॉलो करने और मनाने का अधिकार महत्वपूर्ण है लेकिन कोविड महामारी के दौरान नागरिकों की सुरक्षा ज्यादा जरूरी है।

महाराष्ट्र में लगे कर्फ्यू वाले प्रतिबंध

मालूम हो कि महाराष्ट्र में रिकॉर्ड तोड़ कोरोना वायरस के मामलों की पुष्टि के बाद राज्य सरकार ने कुछ क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर 13 अप्रैल से कड़े प्रतिबंध की घोषणा की है, जिसमें धार्मिक स्थल भी 15 दिन के लिए बंद किए गए हैं। साथ ही ये भी कहा गया है कि धार्मिक स्थल से जुड़े लोग अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं। मंगलवार को सीएम ठाकरे ने हालातों के मद्देनजर कर्फ्यू जैसे प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए कहा कि ये नियम 14 अप्रैल की रात 8 बजे से शुरू होकर 1 मई तक रहेंगे।

एंटीलिया का गुनाह छिपाने के लिए 2 और लोगों की हत्या की योजना बना रहा था सचिन वाजे: NIA सूत्रों के हवाले से दावा

एंटीलिया केस में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एनआईए सूत्रों के अनुसार मुंबई पुलिस का निलंबित अधिकारी सचिन वाजे दो और लोगों की हत्या की योजना बना रहा था। उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर​ विस्फोटक लदी कार रखने के इस मामले की जाँच NIA ही कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, वाजे ने एक एनकाउंटर की प्लानिंग की गई थी, ताकि यह बताया जाए कि एनकाउंटर में मारे गए लोगों ने ही एंटीलिया के बाहर जिलेटिन वाली स्कॉर्पियो खड़ी की थी। पूरे प्लान को अंजाम देने के लिए 2 लोगों की पहचान हुई थी, जिनके एनकाउंटर होते ही इन्वेस्टिगेशन का पूरा केस वहीं खत्म हो जाता। लेकिन जिलेटिन की वजह से जब इस केस में टेरर एंगल आया और एटीएस के बाद NIA ने जाँच का काम सँभाला तो वाजे की सारी प्लानिंग फेल होती गई।

बता दें कि पिछले दिनों वाजे के घर में एक अज्ञात व्यक्ति का पासपोर्ट मिला था। सूत्रों के मुताबिक वाजे ने पासपोर्ट होल्डर के साथ ही एक अन्य शख्स को भी मारने का प्लान बनाया था। जाँच में सचिन वाजे के पास से NIA को कई लाख कैश, बेनामी कारतूस और बैंक खाते में जमा डेढ़ लाख रुपए मिले हैं। एजेंसी को शक है कि इस केस में मनसुख हिरेन भी साथ था। इसी वजह से उसकी जान गई।

ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरेन की मौत के मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों को संदेह है कि पिछले साल नवंबर में औरंगाबाद से चोरी हुई मारुति ईको कार में उसकी हत्या की गई होगी। हिरेन की कथित हत्या मामले में महाराष्ट्र एटीएस के एक अधिकारी ने कहा कि ठाणे जिले में हिरेन का शव मिलने से एक दिन पहले चार मार्च को ईको कार एक अन्य कार के साथ दिखाई दी थी। संदेह है कि वह कार वाजे चला रहा था।

हिरेन उस स्कॉर्पियो कार का मालिक था, जिसमें 25 फरवरी को मुकेश अंबानी के घर के निकट विस्फोटक सामग्री रखी मिली थी। अंबानी की सुरक्षा में सेंध और हिरेन की हत्या के मामले की जाँच फिलहाल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी कर रही है, जिसने इस सिलसिले में 13 अप्रैल को वाजे को गिरफ्तार किया था।

संदेह है कि ईको कार 16 नवंबर को औरंगाबाद शहर के सिटी चौक इलाके से चोरी की गई और फिर हिरेन की हत्या में उसका इस्तेमाल किया गया। जाँचकर्ताओं को संदेह है कि हिरेन की हत्या की साजिश पिछले साल नवंबर में रची गई थी। एटीएस अधिकारी ने कहा कि 4 मार्च को ईको कार में कम से कम दो लोगों के होने के बारे में पता चला है। अधिकारी ने कहा है कि संदेह है कि आरोपितों ने हिरेन को उस वाहन में बिठाए रखा और बाद में उसकी हत्या कर दी।

उन्होंने कहा कि ईको कार का पता चलना अभी बाकी है। हो सकता है कि आरोपितों ने सबूत मिटाने के लिए उसको नष्ट कर दिया हो। पुलिस उन गैरेज में ईको कार की तलाश कर रही है, जहाँ वाहनों को नष्ट किया जाता है। एनआईए को जाँच के दौरान मुंबई में मीठी नदी से ईको कार के नंबर प्लेट के अलावा कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान और एक लैपटॉप मिला था।

थूको और उसी को चाटो… बिहार में दलित के साथ सवर्ण का अत्याचार: NDTV पत्रकार और साक्षी जोशी ने ऐसे फैलाई फेक न्यूज

बिहार का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि एक दलित व्यक्ति को थूक चाटने के लिए ‘सामंती विचारधारा के लोगों’ ने मजबूर किया। इंटरनेट पर इस वीडियो के बारे में कहा जा रहा है कि बिहार में नीतीश कुमार के राज में एक दलित के साथ सवर्ण अत्याचार कर रहे हैं। इस वीडियो में पीड़ित को उठक-बैठक करने के लिए कहा जाता है और कहवाया जाता है कि गलती नहीं करेगा।

NDTV के पत्रकार मनीष ने लिखा, “देखिए, बिहार के गया ज़िले में पंचायत चुनाव में सर उठाने के लिए सामंती लोग एक दलित को थूक चाटने की कैसे सजा दे रहे हैं। नीतीश कुमार के शासन में सब कुछ ठीक नहीं।⁦ दुष्प्रचार किया जा रहा है कि एक दलित को सामान्य वर्ग के व्यक्ति ने थूक चटवाया।⁦ अब आते हैं सच्चाई पर।⁦ बिहार पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लिया है।⁦ इसके लिए दोषी लोगों को पकड़ लिया गया है।⁦

पुलिस ने बताया कि ये मामला गया के एक गाँव का है, जहाँ उस दलित व्यक्ति को थूक चटवाया जाता है और उठक-बैठक कराया जाता है।⁦ SSP आदित्य कुमार ने बताया कि वो व्यक्ति अपने ही समुदाय की एक महिला के साथ भाग गया था।⁦ जब वो लौटा, तो उसे पंचायत में लेकर जाया गया।⁦ उसी गाँव में, जहाँ से वो भागा था।⁦ इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार गया है।⁦ आरोपितों में महिला का पिता और भाई शामिल है।⁦

महिला और युवक एक ही समुदाय के हैं।⁦ इस मामले में SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।⁦ अन्य आरोपितों की धर-पकड़ के लिए छापेमारी की जा रही है।⁦ जबकि NDTV का पत्रकार मनीष पीड़ित का एक वीडियो डाल कर अफवाह फैला रहा था कि मुखिया के पक्ष में प्रचार न करने के कारण उसके साथ ऐसा किया गया।⁦ साक्षी जोशी जैसे पत्रकारों ने भी इस अफवाह को आगे बढ़ाया।⁦

‘लानत है तुम पर, ये हराम काम है’: रमजान के पहले दिन हिना खान को स्विमिंग करते देख बरसे कट्टरपंथी

टेलीविजन की मशहूर एक्ट्रेस और बिग बॉस 11 की फेम हिना खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। आए दिन अपनी तस्वीरों को लेकर चर्चा में रहती हैं। कल (13 अप्रैल 2021) को यानी रमजान के पहले दिन उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट की और देखते-देखते इस पर 173,833 लाइक आ गए।

https://www.instagram.com/reel/CNm72z_nvZs/?utm_source=ig_embed

हिना खान अपनी इस वीडियो में स्विमिंग करती नजर आ रही हैं। बैकग्राउंड में बी प्राक का गाना, ‘बारिश की जाए’ सुनाई दे रहा है। रमजान के पहले दिन हिना को इस तरह स्विमिंग करते देख कई लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। अधिकतर लोगों ने इस अवतार में देख उनकी तरह-तरह से तारीफ की। लेकिन, कुछ मजहबी ठेकेदारों ने इस पोस्ट पर भी उन्हें ज्ञान देना शुरू कर दिया।

मनहूर शान और फवजिया करीम जैसे कट्टरपंथियों ने उन्हें बताया कि रमजान शुरू हो गया है, कुछ तो शर्म करो।

एक अन्य यूजर imzabiullahkhan ने हिना के लिए लिखा कि ये सब बकवास करना बंद करो। वहीं राजिया अहमद नाम के इंस्टा यूजर ने कहा लानत है तुम पर, रमजान में ऐसी वीडियो।

एडवोकेट MA बसीर ने कहा, “अब बस करो ये हराम काम। रमजान है तिलावत करो। कब्र में क्या जवाब दोगे ये सब हराम करे।”

अंसारी सफीना लिखती हैं, “हर रमजान में इसका यही हाल रहता है। झूठ का हिजाब पहनकर दिखावा करना आता है बस।”

सोफिया अजीम खान ने लिखा, “रमजान आ गया मैडम थोड़ी इंसान बन जाओ, ज्यादा की उम्मीद नहीं है आपसे।”

बता दें कि इन मजहबी ठेकेदारों के ये जवाब सिर्फ़ हिना की स्विमिंग करती वीडियो पर नहीं है, बल्कि उन्होंने आज जो अपनी एक पीले सूट में फोटो ट्विटर और इंस्टाग्राम पर शेयर की और अल्लाह से माफी माँगते हुए सबकी सलामती की दुआ की, उसमें भी एक गजल नाम की यूजर ने उन्हें लिखा है कि अल्लाह तुम्हें तभी माफ करेगा जब तुम एक्टिंग से जायरा वसीम की तरह तौबा कर लोगी। 

CBSE 10वीं की बोर्ड परीक्षा रद्द, मनीष सिसोदिया ने कहा-12वीं के छात्र भी प्रमोट हों

देश में कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए सरकार ने CBSE की 10वीं बोर्ड की परीक्षाओं को इस साल निरस्त कर दिया है, वहीं 12वीं की परीक्षा फिलहाल के लिए टाल दी गई है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अब 10वीं के नतीजे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए मापदंड के आधार पर तय होंगे, जबकि 12वीं की परीक्षा के लिए बोर्ड 1 जून को स्थिति की समीक्षा करेगा।

इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा, “4 मई से 14 जून तक आयोजित होने वाली 10वीं की बोर्ड परीक्षाएँ रद्द कर दी गई हैं। 10वीं क्लास के छात्रों को आतंरिक मूल्याँकन के आधार पर अगली क्लास में भेजा जाएगा। अगर कोई छात्र मूल्याँकन से संतुष्ट नहीं है तो कोरोना से हालात सामान्य होने पर वह परीक्षा दे सकता है।”

दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, “मुझे खुशी है कि 10वीं की परीक्षा रद्द की गई और 12वीं की परीक्षा ​स्थगित की गई है। 12वीं कक्षा के बच्चों के मन में जो चिंता बनी रहेगी, उसको दूर किया जा सकता था। मैं अपील करता हूँ कि 12वीं कक्षा के छात्रों को भी आतंरिक मूल्यांकन के आधार पर प्रमोट किया जाए।”

बता दें कि देश में कोरोना केस बढ़ने के कारण सीबीएसई की परीक्षाओं को रद्द करने की माँग पिछले काफी समय से उठ रही थी। ऐसे में पीएम मोदी ने आज शिक्षा मंत्रालय के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। इसी बैठक में फैसले के बाद ही शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षाओं को रद्द और स्थगित करने की घोषणा की।

इससे पहले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई नेता कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते खतरों के मद्देनजर सीबीएसई परीक्षाओं को रद्द करने की माँग कर रहे थे।

‘कल के कायर आज के मुस्लिम’: यति नरसिंहानंद को गाली देती भीड़ को हिन्दुओं ने ऐसे दिया जवाब

गाजियाबाद के डासना में स्थित शिव-शक्ति पीठ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ इस्लामी कट्टरवादियों में इतना गुस्सा है कि अमानतुल्लाह खान जैसे विधायक से लेकर गाली-मोहल्लों में मुस्लिम बच्चों तक, उनके खिलाफ आपत्तिजनक बातें कर रहे हैं। हरियाणा के पानीपत स्थित यमुनानगर में भी इसी मुद्दे पर सोमवार (अप्रैल 12, 2021) हिन्दू और मुस्लिम समाज के लोग आमने-सामने आ गए थे।

यमुनानगर आमने-सामने आ गए हिन्दू और मुस्लिम

ऑपइंडिया ने कुछ स्थानीय लोगों से बात कर जाना कि असल में हुआ क्या था। असल में मुस्लिमों का जिस तरह से भड़काऊ विरोध प्रदर्शन पूरे देश में चल रहा है, उसकी एक झलक वहाँ भी देखने को मिली। लेकिन, वहाँ के हिन्दू संगठनों ने भी महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के समर्थन की योजना बनाई। उनका प्लान था कि शांति से धरना दिया जाएगा और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

इस विरोध-प्रदर्शन के आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम पर चर्चा के दौरान ही उनके पास ख़ुफ़िया विभाग के लोगों के फोन आने लगे, जो प्रशासन की तरफ से इसे टाल देने का निवेदन कर रहे थे। बाद में उन्होंने चेताया कि प्रदर्शन में कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने आश्वासन दिया कि वे माइक का प्रयोग नहीं करेंगे। यहाँ अचानक से एंट्री होती है मुस्लिम भीड़ की।

असल में न्यायालय के पास स्थित अनाज मंडी के जिस गेट पर हिन्दुओं ने महंत नरसिंहानंद के समर्थन की योजना बनाई थी, ठीक वहीं पर मुस्लिमों ने भी विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाई – ठीक 1 दिन पहले। हिन्दू कार्यकर्ता कहते हैं कि ये शरारत जान-बूझकर की गई थी। अगर वे थोड़ी और देर से पहुँचते तो दरी बिछाने की जगह भी नहीं मिलती। अधिकारियों ने कहा कि दूसरा पक्ष अगर आता है तो वे उनका प्रदर्शन बाद में करा लेंगे, पहले हिन्दू कार्यकर्ता ज्ञापन देंगे।

हमने इस पूरे मामले को समझने के लिए स्थानीय हिन्दू नेता उदयवीर शास्त्री से बात की, जिन्होंने बताया कि ठीक उसी समय पर मुस्लिम भीड़ इकट्ठी हो गई और वो हिन्दुओं के टेंट तक पहुँचने लगी। जब आपत्ति जताई गई तो प्रशासन मुस्लिम भीड़ को थोड़ी दूर ले गया। उदयवीर शास्त्री ने कहा, “हमने हिन्दुओं को स्पष्ट कह दिया था कि यमुनानगर की पवित्र भूमि पर महंत नरसिंहानंद की तस्वीर पर न तो जूते पहनाए जाएँगे, न ही उनका पुतला फूँकने दिया जाएगा।”

इसी विरोध-प्रदर्शन में शामिल रहे आदित्य रोहिल्ला ने बताया कि मुस्लिम भीड़ पूरी साउंड सिस्टम लेकर आई थी, जिसके बाद उन्हें समझाने के लिए हिन्दू कार्यकर्ता गए। उन्होंने निवेदन किया कि माइक बंद कर दिया जाए, क्योंकि इधर भी माइक का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। इसके बाद साउंड बंद हो गया। लेकिन, कुछ देर बाद उन्होंने साउंड फिर चालू कर दिया और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगने लगे।

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं। जब हिन्दू कार्यकर्ता भी आक्रामक हुए, तब जाकर पुलिस ने माइक बंद करवाया। अधिकारियों को डाँट-डपट कर उनके दोहरे रवैये की याद दिलाई गई, तब जाकर मामला शांत हुआ। मुस्लिम भीड़ को वहाँ से हटाया गया, हिन्दुओं ने अपना ज्ञापन दिया। उनका कहना है कि प्रशासन ने उन्हें बताया कि भीड़ को भगा दिया गया है। उदयवीर शास्त्री ने इस पर चिंता जताई कि हिन्दू जहाँ सोशल मीडिया पर वीर बने रहते हैं, मुस्लिम समाज सड़क पर उतरता है। उन्होंने कहा:

“अगर कोई अधर्म को बर्दाश्त करता है तो वो अपराधी की श्रेणी में आता है, चाहे वो हिन्दू समाज से हो। भगवद्गीता में ‘स्वधर्मे निधनं श्रेयः’ कहा गया है, अर्थात अपने कर्तव्यों को करिए। लेकिन, मैं पूछता हूँ कि जहाँ ‘अहिंसा परमो धर्मः’ पढ़ाया जाता है, वहीं ‘धर्म हिंसा तथैव च’ को क्यों छिपा लिया जाता है? जैसे अहिंसा धर्म है, वैसे ही धर्म के लिए हिंसा भी धर्म है। अगर हम घर में बैठे रहेंगे तो वही 800 वर्ष पुराना इतिहास खुद को दोहराएगा। आज कुछ संत अपनी भूमिका निभाने लगे, तो हिन्दू जल्द जागेगा।”

उदयवीर शास्त्री ने कहा कि डासना वाली घटना के बारे में उन्हें और उनके साथियों को जो जानकारी प्राप्त हुई है, उससे पता चलता है कि उनकी स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी लंका में विभीषण की थी। उन्होंने कहा कि हिन्दू एक शांत समुदाय है, लेकिन साथ ही चौपाई ‘अतिशय रगड़ करे जो कोई अनल प्रकट चन्दन से होई’ का जिक्र भी किया, जिसका अर्थ है कि ज्यादा रगड़ने से चन्दन से भी अग्नि प्रज्वलित हो जाती है।

उन्होंने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के साथ भी यही होता है, उन्हें परेशान किया जाता रहा और क्षेत्र में हिन्दू बहन-बेटियों के साथ छेड़छाड़ हुआ। उन्होंने उस घटना का भी जिक्र किया, जब वहाँ के विधायक असलम चौधरी के बेटे को छेड़छाड़ के आरोप में पीटा गया था। उन्होंने कहा कि इस तरह बार-बार हुई घटनाओं के कारण वो आहत हो गए और उन्होंने इस्लाम को सही से जानने का प्रयास किया।

महंत यति से प्रभावित उदयवीर शास्त्री ने कहा कि इस्लाम के अध्ययन से महंत यति ने जो भी पाया, वे वही बोल रहे हैं। अगर उससे किसी को तकलीफ है तो वह त्रुटि बताए और उसकी निंदा करे, लेकिन ये ‘सर तन से जुदा’ की बात क्यों? हलाल करने की बातें क्यों? उन्होंने पूछा कि ये देश संविधान से चलता है, न्यायालय है, ऐसे में ये चीजें कहाँ से लाई जा रही हैं? उदयवीर शास्त्री इसका दोष मुस्लिमों की बढ़ती जनसंख्या को भी देते हैं।

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के समर्थन में उतरे हिन्दू

हिन्दुओं को जगाने के लिए क्या कहते हैं उदयवीर शास्त्री?

उन्होंने ध्यान दिलाया कि किस तरह मुस्लिमों को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए उकसाया जाता है और बच्चों की शिक्षा मदरसों में होती है, जहाँ वो कट्टरवादी बनते हैं। उन्होंने आतंक का गढ़ माने जाने वाले इस्लामी मुल्कों का जिक्र किया, जहाँ बच्चों को बंदूकें थमा दी जाती हैं। वो वसीम रिजवी से भी सहमत हैं, जिन्होंने कुरान की कुछ आयतें हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। वे चीन का उदाहरण देते हैं, जहाँ आधी दाढ़ी रखने, छोटा पजामा पहनने और बच्चों का नाम मोहम्मद रखने पर पाबंदी है।

उदयवीर कहते हैं कि वो ये सब इस्लाम के भले के लिए कर रहे हैं, सामाजिक सुधार के लिए ये आवश्यक है। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने इतिहास की भी याद दिलाई। भारत को हिन्दुओं का देश बताते हुए उन्होंने कहा कि जिन्होंने भी इस्लाम अपनाया, उन्होंने गर्दन कटने के डर से ही ऐसा किया, क्योंकि इस्लाम की उत्पत्ति ही हिंसा से हुई थी।

उदयवीर शास्त्री स्पष्ट कहते हैं कि जो कल के कायर थे, वो आज के मुस्लिम हैं। साथ ही वो कहते हैं कि जो आज के कायर हैं, वो भी भविष्य के मुस्लिम होंगे। ‘वीर भोग्य वसुंधरा’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ये धरती बलिदान माँगती है और महाराणा प्रताप व छत्रपति शिवाजी से लेकर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव तक, लाला लाजपत राय व सरदार पटेल से लेकर लाल बहादुर शास्त्री तक – सभी ने इस धरती के लिए बलिदान दिया।

वहीं वहाँ जमे मुस्लिमों ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने स्वामी नरसिंहानंद को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है और उन्हें यूँ ही बदनाम किया जा रहा है। उच्चाधिकारियों ने मौके पर पहुँच कर दोनों तरफ से ज्ञापन स्वीकार किया। हिन्दू संगठनों ने कहा कि समाज में द्वेष भावना भड़काने के खिलाफ इन पर मुकदमा किया जाए। हिन्दू संगठन के कुछ युवाओं और पुलिस के बीच माइक बंद कराने को लेकर बहस भी हुई।

UP में अब ऑनलाइन मिलेगी शूटिंग की अनुमति, कार्तिक आर्यन की फिल्म को सीतापुर में शूट की मिली इजाजत

उत्तर प्रदेश में अब फिल्मों, टीवी सीरियल की शूटिंग की अनुमति ‘फिल्म बंधु’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ली जा सकेगी। इसके लिए फिल्म के निर्माता-निर्देशक को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। फिल्म बंधु उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) को कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत ये परिवर्तन किया गया है ताकि अधिक से अधिक फिल्मों और सीरियल की शूटिंग उत्तर प्रदेश में हो सके। शूटिंग शुरू होने से एक तरफ जहाँ रोजगार सृजित होंगे, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय कलाकार को लाभ मिलेगा।

नोएडा में फिल्म सिटी की स्थापना के ऐलान के बाद से प्रदेश सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जिससे फिल्म उद्योग को प्रदेश में बढ़ावा दिया जा सके। प्रदेश सरकार ने शूटिंग में अनुमति को अब ऑनलाइन कर दिया है। फिल्‍म इंडस्‍ट्री को राहत देने के लिए यूपी सरकार ने अनुमति देने के लिए ऑनलाइन सिंगल विंडो की शुरुआत की है। इसमें सबसे पहले अभिनेता कार्तिक आर्यन की अभिनीत फिल्म ‘भूल भुलैया 2’ को ऑनलाइन अनुमति दी गई है। फिल्‍म की शूटिंग सीतापुर जिले में होनी है। जिलाधिकारी सीतापुर ने सिंगल विंडो सिस्‍टम के तहत ऑनलाइन शूटिंग की अनुमति प्रदान कर दी है। 

राज्य सरकार की फिल्म नीति में फिल्म निर्माताओं को सब्सिडी का प्रावधान है, जो राज्य के अधिकारियों द्वारा व्यवस्थित किए जा रहे संचालन के अलावा यूपी में शूट करते हैं। यूपी में शूटिंग के दौरान 38 फिल्मों को सरकारी सब्सिडी मिला है। आगे 40 फिल्में सब्सिडी प्राप्त करने के लिए कतार में हैं।

सूचना निदेशक और फिल्म बंधु के सचिव शिशिर ने कहा, “सिंगल विंडो क्लियरेंस अधिक से अधिक फिल्म निर्माताओं को यूपी के विभिन्न शहरों में आकर्षित करेगी। हमने पहले ही अपना पोर्टल ‘www.filmbandhuup.gov.in’ लॉन्च कर दिया है, जिसके माध्यम से सब्सिडी और अन्य अनुमतियों के लिए आवेदन भेजे जा सकते हैं।”

जॉली एलएलबी, टॉयलेट एक प्रेमकथा, बाला, मुल्क और आर्टिकल-15 जैसी फिल्मों की शूटिंग यूपी में हो चुकी है, जो बॉक्‍स आफिस पर सुपरहिट हुई थी। बीते फरवरी में धनीपुर हवाई पट्टी में मशहूर फिल्म अभिनेता जॉन अब्राहम ने अपनी फिल्म ‘अटैक’ की शूटिंग की थी। इसके लिए जॉन के प्रोडक्शन हाउस ने जनवरी में प्रदेश सरकार से शूटिंग की अनुमति माँगी थी। एक महीने बाद फरवरी में अनुमति मिली। प्रदेश सरकार ने शूटिंग में अनुमति को अब ऑनलाइन कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों आला अफसरों के साथ बैठक में यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि वर्तमान परिस्थितियों में देश को एक अच्छी फिल्म सिटी की आवश्यकता है। प्रदेश यह जिम्मेदारी को लेने के लिए तैयार है। यहाँ पर एक बेहतरीन फ़िल्म सिटी बनाई जाएगी। इसके लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे का क्षेत्र बेहतर होगा।

योगी आदित्यनाथ ने इस घोषणा के साथ यह भी कहा था कि ये फ़िल्म सिटी फ़िल्म निर्माताओं को एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराएगी। साथ ही, रोजगार सृजन की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी प्रयास होगा। उन्होंने इस सिलसिले में भूमि के विकल्पों के साथ यथाशीघ्र कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। इस घोषणा के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि बॉलीवुड को जिस तरह से मुंबई से खत्म करने या शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है, उसे वह बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी कोरोना संक्रमित, अखिलेश यादव की भी रिपोर्ट आई थी पॉजिटिव

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस लगातार बढ़ता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बाद अब राज्य के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने खुद को घर में आइसोलेट कर लिया है। मुख्यमंत्री योगी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

उन्होंने लिखा, “शुरुआती लक्षण दिखने पर मैंने कोविड की जाँच कराई और मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मैं सेल्फ आइसोलेशन में हूँ और डाॅक्टरों की सलाह का पूर्णतः पालन कर रहा हूँ। सभी कार्य वर्चुअली संपादित कर रहा हूँ।” हाल ही में उन्होंने कोरोना का पहला डोज लिया था।

सीएम योगी ने ट्वीट कर बताया है कि प्रदेश सरकार की सभी गतिविधियाँ सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। इस बीच जो भी लोग उनके संपर्क में आए हैं, वह अपनी जाँच अवश्य करवा लें और एहतियात बरतें। बता दें कि इससे पहले आज (अप्रैल 14, 2021) सुबह ही पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके अलावा योगी सरकार में मंत्री आशुतोष टंडन की भी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद को मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) से ही आइसोलेट कर लिया था। वह अपना सारा कामकाज अपने आवास से वर्चुअली कर रहे थे। कोरोना स्थिति पर रोजाना होने वाली टीम 11 की बैठक को उन्होंने मंगलवार को वर्चुअली ही संबोधित किया था। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को ट्वीट करके बताया था कि उनके कार्यालय के कुछ अधिकारी कोरोना से संक्रमित हुए हैं। यह अधिकारी उनके संपर्क में रहे हैं, अतः उन्होंने एहतियातन अपने को आइसोलेट कर लिया है एवं सभी कार्य वर्चुअली कर रहे हैं। आज सीएम की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई है। 

कोरोना संक्रमण के मामले में देश में दूसरे स्‍थान पर यूपी

कोरोना संक्रमण के मामले में यूपी देश में दूसरे स्‍थान पर पहुँच गया है। आँकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में रोज कोरोना के कंफर्म हो रहे केसों की संख्या भी पिछले एक हफ्ते में 204 प्रतिशत तक बढ़ गई है। मंगलवार को यहाँ एक दिन में 18021 नए केस सामने आए। यह प्रदेश में अभी तक का सबसे बड़ा आँकड़ा है। 24 घंटों के दौरान यहाँ 85 कोविड मरीजों की मौत हो गई। राज्य में इस समय 95,980 पॉजिटिव केस हैं।

आइसोलेशन में रहते हुए सीएम योगी कोरोना मरीजों के लिए इंतजामों पर निगरानी रखे हुए हैं। यूपी में कोविड मरीजों के लिए 4000 से अधिक एम्बुलेंस की व्यवस्था की जा रही है।  

इस बीच योगी सरकार ने प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मद्देनजर गैर सरकारी अथवा निजी क्षेत्र के अस्पतालों में विभिन्न जाँचों के शुल्क एक बार फिर से तय कर दिए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधा देने वाले निजी अस्पताल व जाँच करने वाली प्राइवेट लैब मनमाना शुल्क न वसूल सकें। मंगलवार को अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने शुल्क की दरों के आदेश जारी कर दिए। निजी अस्पतालों को चेतावनी भी दी गई है कि अगर वे आदेश का उल्लंघन करेंगे तो उनके विरुद्ध महामारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।