Home Blog Page 3916

‘1 लाख का धर्मांतरण, 50000 गाँव, 25 साल के बराबर चर्च बने’: भारत में कोरोना से खूब फले ईसाई मिशनरी

भारत में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियाँ लगातार बढ़ती ही जा रही है। कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए संकट का भी मिशनरियों ने अच्छा-खासा फायदा उठाया है। बाइबिल का हर भाषा में अनुवाद करने के मिशन पर काम कर रही संस्था ‘अनफोल्डिंग वर्ल्ड’ के CEO डेविड रीव्स के बयान से यह पता चला है। उनका दावा है कि महामारी के दौरान भारत में चर्चों ने 50,000 गाँवों को गोद लिया।

‘मिशन न्यूज़ नेटवर्क (MNN) ऑनलाइन’ से बात करते हुए डेविड रीव्स ने कहा कि भारत में महामारी के दौरान उतने चर्चों का निर्माण हुआ, जितने पिछले 25 सालों में हुआ था। उन्होंने कहा कि लाखों लोग अब जीसस क्राइस्ट पर विश्वास कर रहे हैं और चर्च में प्रार्थना करने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था भारत के विभिन्न इलाकों में लोगों को बाइबिल का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए साधन मुहैया करा रही है।

उन्होंने बताया कि ‘अनफोल्डिंग वर्ल्ड’ पादरियों को सशक्त करने के मिशन में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत के लोग महामारी में किसी से मिल-जुल नहीं सकते थे, उन्होंने प्रार्थना शुरू की। फोन और व्हाट्सएप्प से उन तक ये प्रार्थनाएँ पहुँचीं। रीव्स ने इसके बाद बड़ा दावा किया कि महामारी के दौरान 1 लाख लोगों का ईसाई धर्मांतरण किया गया। उन्होंने बताया कि हर चर्च को 10 गाँवों में प्रार्थना आयोजित करने को कहा गया।

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे पाबंदियाँ हटती चली गईं, ईसाई मिशनरी उन क्षेत्रों में सक्रिय होते चले गए। उन्होंने बताया कि इस दौरान 50,000 गाँवों तक पहुँच बनाई है और उनमें से 25% में गॉस्पेल पढ़ाने के लिए कोशिश जारी है। इन सब में छोटे चर्च खोले जाएँगे। उन्होंने कहा कि ये कार्य खासा कठिन था, क्योंकि इसमें कई मिशनरी मारे गए। उन्होंने कहा कि इसमें कई बाधाएँ हैं, लेकिन चर्च को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

बता दें कि डेविड रीव्स बाइबिल का अनुवाद करने वाली संस्था ‘JAARS’ के अध्यक्ष हैं। उनका कहना है कि चर्च और ‘ईश्वर के साम्राज्य’ के विस्तार के लिए बाइबिल का अनुवाद जरूरी है। उनकी संस्था ‘अनफोल्डिंग वर्ल्ड‘ बाइबिल की ट्रेनिंग के लिए संसाधन मुहैया कराती है। साथ ही वो दुनिया के कई चर्चों का नेटवर्क भी तैयार कर रही है। इस संस्था ने एक ओपन सोर्स बाइबिल कंटेंट भी लॉन्च किया है।

जयपुर के अस्पताल से कोरोना वैक्सीन चोरी, ब्लैक मार्किट में बेचे जाने की आशंका

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में कोरोना वैक्सीन चोरी होने का हैरानी भरा मामला सामने आया है। ये घटना राजधानी जयपुर के एक अस्पताल की है। अस्पताल से कोरोना वायरस वैक्सीन की 320 डोज चोरी हो गई है। ‘न्यूज़ 18 इंडिया’ की खबर के अनुसार, इस मामले में कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि, अभी तक ये साफ़ नहीं हुआ है कि वैक्सीन की इतनी डोज की चोरी क्यों की गई।

इस मामले में कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आशंका जताई जा रही है कि चोरी की गई वैक्सीन को ब्लैक मार्किट में बेचा जा सकता है। जो भी लोग वैक्सीन ले रहे हैं, उन्हें रजिस्टर्ड सेंटरों के माध्यम से ही ऐसा करना है, क्योंकि इन सारी चीजों का रिकॉर्ड भी मेंटेन रहना चाहिए। लेकिन, अगर कोई ब्लैक मार्किट में बेची गई वैक्सीन ले लेता है तो फिर उसके बारे में कोई जानकारी रिकॉर्ड में नहीं जा पाएगी।

ये खबर इसलिए भी चौंकाने वाली है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही खबर आई थी कि जयपुर कोरोना वैक्सीन की कमी से जूझ रहा है। इससे पहले महाराष्ट्र से खबर आई थी कि वहाँ कोरोना के दौरान दी जाने वाली Ramdesivir इंजेक्शन की भी ब्लैक मार्केटिंग चालू है। मुंबई पुलिस ने अँधेरी की एक दुकान से ऐसे 272 इंजेक्शन जब्त किए थे। अँधेरी ईस्ट के सरफराज हुसैन नामक युवक को ऐसे 12 शीशी के साथ धरा गया था।

श्रीनगर: कृष्णा ढाबा फिर खुला, 2 माह पहले आतंकियों ने हमला कर ढाबा मालिक के बेटे की कर दी थी हत्या

श्रीनगर का मशहूर शाकाहारी ‘कृष्णा ढाबा’ मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) से दोबारा चालू हो गया। 2 माह पहले इसी ढाबे पर इस्लामी आतंकियों ने गोलीबारी कर ढाबा मालिक के बेटे आकाश मेहरा की हत्या कर दी थी।

हमले में मारे गए 22 वर्षीय आकाश के पिता रमेश कुमार ने बताया कि वह अपने ढाबे को खोलने में अब सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कश्मीर को अपना घर बताते हुए वह बोले, “हम यहाँ पैदा हुए और पूरी जिंदगी यही रहे। अब हम कहाँ चले जाएँ?” रमेश कहते हैं, “जिंदगी, निरंतर चलते रहना है, इसलिए मैं अपने काम पर लौट आया हूँ।”

कृष्णा ढाबे पर फरवरी में हुआ था आतंकी हमला

17 फरवरी को आकाश मेहरा को इस्लामी आतंकियों ने कृष्णा ढाबा पर गोली मारी थी। आकाश को घटना के फौरन बाद SMHC अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहाँ उसकी मौत हो गई। कश्मीर पुलिस ने जाँच के बाद बताया कि इस आतंकी हमले की ज़िम्मेदारी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन मुस्लिम जाँबाज फ़ोर्स ने ली। वहीं कुछ चश्मदीदों ने कहा कि आतंकवादी आकाश मेहरा पर गोलीबारी करके तुरंत वहाँ से फ़रार हो गए। 

घटना के बाद मुस्लिम जाँबाज फोर्स ने अपनी ओर से एक बयान भी जारी किया था। इसमें उसने बताया कि हिन्दू युवक पर इसलिए हमला किया क्योंकि वह उन्हें ‘बाहरी’ मानता है।

उल्लेखनीय है कि रमेश कुमार का मशहूर शाकाहारी ढाबा शहर के दुर्गानगर इलाके में मौजूद है। इस ढाबे के नज़दीक यूएन मिलिट्री ऑब्ज़र्वरर्स ग्रुप फॉर इंडिया एंड पाकिस्तान (UNMOGIP), जम्मू और कश्मीर के मुख्य न्यायाधीशों के आवास जैसे अहम कार्यालय मौजूद हैं। आकाश पर हमला उस समय हुआ था जब यूरोपियन यूनियन और आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इस्लामिक नेशन के कई देश केंद्र शासित राज्यों का मुआयना करने आए थे।

बता दें कि गैर कश्मीरियों पर इस्लामी आतंकी समूह अक्सर निशाना साधे बैठे रहते हैं। साल 2019 के अक्टूबर माह में 5 प्रवासी मजदूर मारे गए थे और इसी साल की शुरुआत में एक सतपाल नाम के सोनार को निशाना बनाया गया था।

इसके अलावा राजनीति पार्टी के कई नेता भी इन आतंकियों के निशाने पर रहते हैं। इसी महीने भाजपा नेता अनवर खान के गार्ड पर ओपन फायर हुई थी। वहीं मार्च में बीडीसी चेरयमैन व भाजपा की राज्य सचिव फरीदा खान पर सोपोर में हमला हुआ था। घटना में एक पुलिसकर्मी समेत दो लोग मारे गए थे।

‘200 गज का प्लॉट दे या हमारी हसरतें पूरी कर’: जेठ-ससुर की शबनम पर नीयत बिगड़ी, शौहर ने दिया तीन तलाक

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपने शौहर पर दहेज में 200 गज का प्लॉट न मिलने पर तीन तलाक देने का आरोप लगाया। वहीं जेठ और ससुर को लेकर उसने शिकायत की है कि वह दोनों उसके साथ अश्लील हरकत करते थे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधीक्षक के सामने शबनम नाम की महिला ने बताया कि पिछले साल उसका निकाह सिविल लाइंस के हिमगिरि सोनकपुर निवासी वसीम के साथ 26 मई को हुआ। निकाह के समय वसीम ने बताया कि वह अविवाहित है। लेकिन निकाह के बाद पता चला कि उसकी पहले से शादी है और पहली बीवी के साथ कोर्ट में मुकदमा चल रहा है।

शबनम के मुताबिक, वह सब जानते हुए अपने घर की इज्जत के लिए कुछ समय चुप रही, लेकिन बाद में वसीम समेत सभी ससुराल वाले उससे दहेज में 200 गज के प्लॉट की माँग करने लगे। इस बीच जेठ और ससुर ने भी उसके साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। दोनों का यही कहना था कि या तो दहेज में 200 गज का प्लॉट दे या फिर हमारी हसरतें पूरी कर।

शबनम के मना करने पर उसे 31 दिसंबर 2020 को ससुराल वालों ने मारपीट कर मायके भेज दिया। समाज में बात पहुँचने के बाद मामले पर पंचायत हुई। लेकिन ससुराल वालों ने साफ कहा कि जब तक माँग पूरी नहीं होगी, तब तक वह उसे घर में घुसने नहीं देंगे।

इसके बाद पीड़िता को एक दिन उसके शौहर वसीम का मैसेज आया, जिसमें उसने तीन बार तलाक लिख कर शबनम को अपनी ओर से तलाक दिया था। जब महिला ने इस ज्यादती पर शिकायत की, तो उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में वह अपनी अर्जी लेकर एसएसपी के पास गई। जहाँ पुलिस अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और सिविल लाइन्स पुलिस को घटना पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

बता दें कि इससे पहले यूपी के मुरादाबाद जिले में भोजपुर नगर पंचायत अध्यक्ष रहमत जहाँ ने अपने पति के ऊपर तीन तलाक का आरोप लगाया था। रहमत का कहना था कि भ्रष्टाचार में साथ न देने पर उनके शौहर ने उनकी इतनी पिटाई की, कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ गई।

इस केस में मालूम हो कि शफी अहमद पहले खुद भी पंचायत का चेयरमैन था, जिसके ख़िलाफ़ शिकायत करते हुए रहमत ने अपने देवर, शौहर के बहनोई और कुछ अन्य रिश्तेदारों पर बदसलूकी का आरोप लगाया था।

14 सिम कार्ड, 1 व्हाट्सएप कॉल और मुंबई की बार डांसर… ATS ने कुछ यूँ सुलझाया मनसुख हिरेन की हत्या का मामला

एंटीलिया मामले में समय के साथ जाँच में नए खुलासे हो रहे हैं। एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अम्बानी के घर के बाहर बम लदी कार का मिलना, कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या और इन सबके पीछे पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का हाथ होने की बात पहले ही सामने आ चुकी है। अब पता चला है कि इस केस को सॉल्व करने की वजह एक बार डांसर बनी। महाराष्ट्र आतंक निरोधी दस्ता (ATS) उस तक सबसे पहले पहुँची थी।

इसी साल 4 मार्च को मनसुख हिरेन के मोबाइल फोन पर एक व्हाट्सएप कॉल आया था। इस कॉल को ट्रेस करने के बाद मुंबई पुलिस उक्त बार डांसर तक पहुँची। उसके जरिए ही क्रिकेट बुकी गोरे को गिरफ्तार किया गया। 4-5 मार्च को ही मनसुख हिरेन की हत्या भी हुई थी। पुलिस ने लगभग 9000 यूजर्स के फोन का डेटा उस दिन खँगाला था। मुंबई के रेती बंदर की खाड़ी मुम्ब्रा से उस दिन जो भी गुजरा, ये उन लोगों के डेटा थे।

इन सबके बीच अब मुंबई पुलिस ने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को बरख़ास्त करने की कार्यवाही शुरू कर दी है, जो फ़िलहाल NIA की गिरफ्त में है। मनसुख हिरेन की हत्या उसने ही की थी। मनसुख के व्हाट्सएप कॉल की जाँच के बाद पुलिस को पता चला कि उन्हें एक ऐसे नंबर से कॉल आया था, जो गुजरात के भुज से खरीदा गया था। दुकानदार ने पूछताछ में बताया कि उसने नरेश गोरे को ऐसे 14 सिम कार्ड बेचे हैं।

गोरे ने इनमें से एक सिम कार्ड अपनी बार डांसर दोस्त को दे दिया था। ATS ने ये कड़ी मिलाकर गुजरात से नरेश गोरे और गुजरात के ही एक होटल से विनायक शिंदे को दबोचने में कामयाबी पाई थी। महाराष्ट्र के गृह विभाग की सिफारिश के बाद वाजे को बरख़ास्त किया जाएगा और उसके खिलाफ IPC की धारा 311 (2) के तहत मुकदमा चलेगा, जो ऐसे कृत्य में लिप्त सरकारी अधिकारी को बरख़ास्त करने का प्रावधान देता है।

मुंबई की गामदेवी पुलिस मनसुख हिरेन की स्कॉर्पियो चोरी होने की जाँच कर रही है। उसमें बम बरामद होने के मामले की जाँच NIA के हाथों में है। मनसुख हिरेन की हत्या की जाँच ATS के हाथों में है। उधर इस मामले की जाँच का नेतृत्व कर रहे NIA अधिकारी अनिल शुक्ला का 6 साल का कार्यकाल सोमवार को पूरा हो गया। अब वो वापस अपने AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम एंड यूनियन टेरिटरीज) कैडर में लौट जाएँगे।

कहा जा रहा है कि इससे जाँच पर थोड़ा असर तो पड़ेगा, लेकिन एजेंसी में रूटीन प्रक्रिया के तहत ऐसा होता रहता है। उनकी जगह कोई IGP स्तर का अधिकारी लेगा। किसी IPS को सामान्यतः केंद्रीय एजेंसियों में 5 साल के लिए तैनात किया जाता है। हालाँकि, अगर वो अधिकारी और उसका पैरेंट कैडर चाहे तो एक-एक वर्ष के लिए 2 बार ये अवधि बढ़ाई जा सकती है। शुक्ला का कार्यकाल पहले ही 1 वर्ष बढ़ाया जा चुका है और दूसरे के लिए उन्होंने एक्सटेंशन की इच्छा नहीं जताई है।

सचिन वाजे के घर से जब्त एक पासपोर्ट की गुत्थी भी सुलझाई जा रही है। NIA का मानना है कि ये पासपोर्ट जिस व्यक्ति का है, वाजे उसका एनकाउंटर करने वाला था। इसके साथ वो एक और व्यक्ति का एनकाउंटर कर अपनी पुरानी ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ वाली छवि को फिर से पाने की कोशिश में था। दोनों आपराधिक प्रवृत्ति के लोग थे। साथ ही वे वाजे के जानने वाले भी थे। स्कॉर्पियो जब्त होने के कुछ ही घंटों बाद चीजें उसके मनमुताबिक नहीं हुईं, तो उसका प्लान धरा का धरा रह गया।

इस मामले में CBI राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख से भी पूछताछ कर रही है। कुछ ही दिनों पहले एंटीलिया बम विस्फोट मामले की जाँच के सिलसिले में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मुंबई पुलिस ने एपीआई रियाजुद्दीन काजी को भी निलंबित कर दिया। काजी को पूरे मामले की अच्छी जानकारी थी क्योंकि स्कॉर्पियो, जिसका इस्तेमाल एंटीलिया के बाहर जिलेटिन की छड़ें लगाने के लिए किया गया था और जिसके बारे में विक्रोली पुलिस स्टेशन में चोरी का मामला दर्ज था, ठाणे में वाजे के अपार्टमेंट में पार्क किया गया था, लेकिन उसने कुछ नहीं बोला।

मुंबई में हो क्या रहा है! बिना टेस्ट ₹300 में कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट, ₹10000 देकर क्वारंटाइन से मिल जाती है छुट्टी: रिपोर्ट

कोरोना की दूसरी लहर लगातार बढ़ रही है। महाराष्ट्र इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है। मंगलवार (अप्रैल 12, 2021) को राज्य में 60 हजार से ज्यादा नए केस दर्ज किए गए, जबकि पूरे देश में 1.8 लाख के करीब मामले सामने आए। सिर्फ़ मुंबई की बात करें तो वहाँ एक दिन में 9986 केस आए हैं और स्थिति जस की तस है।

इस बीच मिड डे ने महाराष्ट्र में कोरोना के नाम पर हो रहे एक और भ्रष्टाचार को उजागर किया है है। रिपोर्ट के मुताबिक कई टूर एंड ट्रैवल ऑपरेटर लोगों को 300 रुपए में कोविड 19 की नेगेटिव रिपोर्ट दे रहे हैं। इससे पहले 10 से 12 हजार रुपए देकर विदेश से आने वालों को क्वारंटाइन की जगह घर भेजे जाने की बात सामने आई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में लॉकडाउन जैसी पाबंदियों के बाद कई लोग अपने घर लौटने को मजबूर हैं। कई राज्यों ने महाराष्ट्र से लौटने वालों के लिए कोविड-19 RT-PCR की नेगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य कर दिया है। लोगों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर टूर एंड ट्रैवल्स वालों ने नया धंधा शुरू किया है। यहाँ वे यात्रियों को 300 रुपए में कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट उपलब्ध कराते हैं, वो भी बिना टेस्ट के।

इस पूरी जालसाजी का खुलासा मिड-डे के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ, जिसे मिड-डे ने घाटकोपर गोपाल भुवन स्टॉप और बोरिवली एसजीएनपी बस स्टॉप पर किया। मिड डे ने पाया कि कई ऑपरेटर इस नए धंधे को धड़ल्ले से चला रहे हैं और गुजरात तथा राजस्थान जाने वालों को 300 से 500 रुपए में कोविड-19 की नेगेटिव रिपोर्ट दे रहे हैं।

इसी क्रम में मीरा रोड पर एक टूर बस ऑपरेटर का भंडाफोड़ क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को किया। लेकिन बावजूद इसके बाकी ट्रैवल एजेंट अपना बिजनेस चलाते रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, मिड डे के रिपोर्टर, गोपाल भुवन बस स्टॉप पर ऑपरेटर्स के दफ्तर गए और अपना स्टिंग किया। इस दौरान उन्हें 300 से 500 रुपए में नेगेटिव रिपोर्ट मुहैया करवाई गई। वहीं बस में काम करने वालों ने बताया कि रिपोर्ट की आवश्यकता सिर्फ़ महाराष्ट्र से गुजरात जाते हुए चेक प्वाइंट पर पड़ती है।

घाटकोपर से उदयपुर जाने वाले ड्राइवर ने बताया की अगर सुरक्षा बहुत कड़ी होती है तो फेक रिपोर्ट वालों को चेक प्वाइंट पर किसी लोकल नंबर प्लेट वाली गाड़ी में बैठाकर चेकप्वाइंट पार करवा दिया जाता है। सबको लगता है कि वह वहीं के निवासी हैं। लेकिन चेकप्वाइंट के पार होते ही यात्री दोबारा बस में चढ़ता है और उसे उसके स्थान पर छोड़ा जाता है।

पूछताछ में मिड डे को एक बस के क्लीनर ने भी यही सारी बातें बताईं। साथ ही कहा कि RT-PCR टेस्ट ऑनलाइन होता है। उसने रिपोर्टर को अपने टेस्ट रिपोर्ट भी दिखाई। इतना ही नहीं, बोरिवली के टूर ऑपरेटर तो इस बात पर भी कॉन्फिडेंट नजर आए कि अगर कुछ हुआ तो हर चीज के लिए वह जिम्मेदार होंगे।

उन्होंने कहा कि उनके दिए फर्जी सर्टिफिकेट असली वाले से भी ज्यादा बढ़िया हैं, क्योंकि उनकी पहले ही सीमा पर तैनात पुलिस कर्मियों से साँठ-गाँठ हो रखी है, जिसके चलते पुलिस वाले उन्हें जाने देते हैं जबकि बाकी बस वालों को, यानी नियम पालन करने वालों को कई घंटे इंतजार करना पड़ता है।

स्टिंग ऑपरेशन में हुई बातचीत

इस रिपोर्ट में मिड डे ने अपने स्टिंग ऑपरेशन के दौरान जिन लोगों से बात की, उस बातचीत के अंश भी हैं। इसमें मिड डे रिपोर्टर ने मारुति नंदन ट्रैवल्स के रमेश से बात की। रमेश ने बताया कि टिकट का 2500 रुपए लगेगा और रिपोर्ट का 500 रुपए। इस पर रिपोर्टर ने पूछा कि क्या वह रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध करवा देंगे। उसने मिड डे के रिपोर्टर से कहा कि 24 घंटे में इसका इंतजाम हो जाएगा, बस 500 रुपए देने होंगे।

इसके बाद एक मणिक नाम के बस ड्राइवर ने भी कहा कि वह रिपोर्ट अरेंज कर देगा। मणिक ने बताया कि एक बार सीमा पर उसकी बस पकड़ ली गई थी लेकिन उसने पुलिस से कहा, “सर मेरी बस मुझे दे दो, मैं मुंबई वापस जा रहा हूँ। उन्होंने कहा अगर वापस लौट रहे हो तो हम जाने देंगे। मैं वापस आ गया। लोगों को मिनी वैन और रिक्शे में बॉर्डर क्रॉस करवा दिया गया। एक आदमी का 1200 रुपए लगा।” मिड डे ने मणिक से पूछा कि रिपोर्ट में दिक्कत क्या थी। इस पर मणिक ने कहा कि अधिकारियों ने कहा कि रिपोर्ट फर्जी है और 20 लोगों के पास ऐसी रिपोर्ट थी।

इसके बाद मणिक ने किसी को फोन करके बताया कि 6 लोगों को उदयपुर जाना है, टिकट का इंतजाम होगा? जिस पर एक ब्लू शर्ट में संकेत नाम का आदमी वहाँ आया और सारी जानकारी लेने के बाद कहा कि 2500 रुपए लगेंगे और कोविड रिपोर्ट के साथ स्लीपर बस में 2800 रुपए। पैसे देने की बात पर संकेत ने कहा कि यदि आज पैसे दे दिए जाएँगे तो काम कल तक हो जाएगा। इसके बाद भी यदि पुलिस फेक रिपोर्ट पहचान ले तोकिन बावजूद फेक रिपोर्ट के 50 से 100 रुपए रास्ते में देने को तैयार रहना कि कहीं पुलिस फेक रिपोर्ट पहचान ले।

रिपोर्ट में इसी तरह फैल्कॉन बस लाइन के रोहित जैसवाल और लंदन परी बस के क्लीनर राठौड़ और ड्राइवर से भी बातचीत के अंश हैं। रोहित ने जहाँ पूछताछ में कहा कि इस काम के लिए 400 से 500 रुपए अतिरिक्त लगेंगे और डॉक्यूमेंट्स में आधार कार्ड लगेगा। वहीं लंदन परी बस के ड्राइवर ने बताया कि बिन रिपोर्ट के चेकप्वाइंट पार करने नहीं दिया जाएगा और उन्हें वापस लौटना पड़ेगा। अगर रिपोर्ट मिल गई तो फिर राजस्थान तक कोई सवाल नहीं होगा।

इतने पर राठौड़ ने बताया कि आजकल रिपोर्ट ऑनलाइन मिल रही है। जब पूछा गया कि वो अपनी दिखाए तो उसने रिपोर्ट दिखा कर कहा कि इसके लिए सिर्फ आधार लगता है और ये उनके ऑफिस में ही बन जाती है। ड्राइवर ने भी रिपोर्टर को नेगेटिव रिपोर्ट लेकर चलने को कहा। वह बोला कि अगर ऐसा नहीं किया तो पैदल बॉर्डर पार करना होगा और रात में महिलाओं के लिए ये ठीक नहीं है, इसलिए रिपोर्ट लेना सबसे सही है।

10-12 हजार रुपए लेकर विदेश से आए लोगों को भेज रहे थे घर

बता दें कि इससे पहले भी मुंबई के हालातों को उजागर करती मिड डे ने एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे BMC के अधिकारी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बाहरी देशों से आए लोगों को 7 दिन के अनिवार्य क्वारंटाइन में रखने की बजाय उनसे 10-12 हजार रुपए लेकर उन्हें एयरपोर्ट से निकलने में मदद कर रहे हैं। 

मिड-डे ने खुलासा किया था कि एयरपोर्ट पर बीएमसी अधिकारियों को इसलिए तैनात किया गया कि वो कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देश जैसे- ब्रिटेन, यूरोप, मिडिल ईस्ट और साउथ अफ्रीका, से आए यात्रियों का 7 दिन का क्वारंटाइन सुनिश्चित करें, लेकिन अधिकारी उनसे पैसों की लेन-देन कर उन्हें छोड़ रहे हैं। समाचार पत्र ने अपनी पड़ताल में यह भी पाया कि यात्रियों को एयरपोर्ट से निकालने के लिए एक विस्तृत व्यवस्था है।

छबड़ा में कर्फ्यू जारी, इंटरनेट पर पाबंदी बढ़ी: व्यापारियों का ऐलान- दोषियों की गिरफ्तारी तक नहीं खुलेंगी दुकानें

राजस्थान के बाराँ स्थित छबड़ा में आबिद, फरीद और समीर की चाकूबाजी के अगले दिन भड़की हिंसा में मुस्लिम भीड़ ने 6 दर्जन के करीब दुकानें जला डाली थी। कई पुलिसकर्मियों को घायल किया और बिजली-पानी की सेवाओं को नुकसान पहुँचाया। मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) को प्रशासन ने कर्फ्यू 48 घंटे के लिए बढ़ा दिया। STF, RAC और पुलिस ने गली-मुहल्लों में मार्च किया। इंटरनेट सेवा पर पाबंदी भी गुरुवार शाम तक बढ़ा दी गई है।

छबड़ा में हुए दंगों के मामले में अब तक 25 गिरफ्तारियाँ हुई हैं। शांति समिति की बैठक प्रशासन की मौजूदगी में हुई। DM ने शांति बनाए रखने की अपील की है। छबड़ा व्यापार संघ का कहना है कि दोषियों की गिरफ़्तारी तक दुकानें नहीं खुलेंगी। व्यापारियों ने पुलिस-प्रशासन पर नाकामी के आरोप लगाए। पथराव, आगजनी, संपत्ति को नुकसान, राजकार्य में बाधा और पुलिस पर हमला सहित कई मामला दर्ज किया गया है।

धरनावदा चौराहा मुकदमा में गुर्जर समुदाय के ही कुछ लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिनमें देवराज गुर्जर, नंदसिंह गुर्जर और महेंद्र गुर्जर के अलावा दिलखुश मीणा और लाखन के नाम हैं। मुकदमा संख्या 74 दर्ज कर फिरोज, आशिक, नदीम, अहमद, शहजाद, फतेहशाह, नियामत, अब्दुल, गुलाम, साबिर, अख्तर, यासीन, परवेज, जहूर, शहीद, शेरू, साजिद, रिजवान और मुन्ना की गिरफ़्तारी हुई है।

कारोबारियों ने नुकसान के भी आँकड़े दिए हैं। उनका कहना है कि इलेक्ट्रिक दुकानों में 25-30 लाख, किराने में 2 करोड़, जूते-चप्पल में 25 लाख, कपड़े की दुकानों में 50 लाख और मोबाइल की दुकानों में 40-50 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है कि शांति समिति की बैठक भी असफल रही, क्योंकि दोनों पक्षों के लोग अपनी-अपनी माँगों पर अड़े रहे।

कॉन्ग्रेस नेता गोविन्द सोनी ने माँग की है कि अधिकारी नुकसान का आकलन कर इसकी भरपाई करें। शांति समिति की बैठक में एक पक्ष के 4 लोग पहुँचे तो दूसरे पक्ष के लोग बाद में नगर सभागार पहुँचे। भाजपा मंडल अध्यक्ष सीपी गेरा ने भी पुलिस पर ढिलाई का आरोप लगाया है। विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने कहा कि दंगे और आगजनी करने वाले कितने भी प्रभावशाली हों, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

स्थानीय अख़बार में प्रकाशित खबर (साभार: दैनिक भास्कर)

बैठक में DM और SP इन माँगों पर मौन साधे रहे। उन्होंने कहा है कि आरोपितों को चिह्नित कर उनका राउंडअप किया जा रहा है। हालाँकि, लोग संतुष्ट नहीं हुए। कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री प्रमोद जैन भाया ने क्षतिग्रस्त दुकानों का दौरा किया और अधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश दिया। वे व्यापारियों से मिले और मुआवजे की माँग को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया।

विधायक सिंघवी का कहना है कि इस मामले की जाँच दूसरे प्रदेश के अधिकारियों से कराई जानी चाहिए, ताकि कार्रवाई निष्पक्ष हो। उन्होंने किसी जज (वर्तमान/रिटायर्ड) से जाँच की माँग की। वहीं भाजपा की 4 सदस्यीय जाँच कमिटी को छबड़ा जाने से रोक दिया गया। उन्हें कोटा में ही रोक दिया गया और अधिकारियों ने वहीं जाकर उनसे मुलाकात की। साथ ही छबड़ा के लोगों से भी फोन पर ही बात कराई गई।

स्थानीय अख़बार में घटना की कवरेज (साभार: पत्रिका)

अधिकारी कह रहे हैं कि नुकसान की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में समय लगेगा। एक युवा व्यापारी बैठक में ही रो पड़ा, जिसके बाद लोगों ने उसे दिलासा दिया। भाजपा की जाँच कमिटी के अध्यक्ष सांसद सुखबरी सिंह जौनपुरिया ने कहा कि नाकाम प्रशासन ने घटना को छिपाने के लिए दोनों तरफ बराबरी की बात कही है, जो गलत है। उन्होंने कहा कि चाक़ूबाजों की तुरंत गिरफ़्तारी होती तो नौबत यहाँ तक आती ही नहीं।

वहीं गुर्जर नेता विजय सिंह बैंसला ने ऑपइंडिया को बताया था कि गुर्जर समुदाय के लोग दंगाइयों के निशाने पर थे। पहले कमल गुर्जर के साथ फरीद, आबिद और समीर ने चाकूबाजी की। अगले दिन जब दोनों समुदाय के लोगों के बीच बैठक हो रही थी तो मुस्लिम इलाके से गुजर रहे एक गुर्जर युवक पर हमला किया गया। इसके बाद हिंसा के दौरान पुलिस को भी निशाना बनाया गया।

‘मंत्री मेरे पिता को लौटाएँगे’: झारखंड के मंत्री अस्पताल का कर रहे थे निरीक्षण, बाहर बुजुर्ग की हो गई मौत

झारखंड की राजधानी राँची के सदर अस्पताल से प्रशासन की लापरवाही का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में एक महिला अपने पिता के शव के पास रो-रोकर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री पर अपना गुस्सा उतार रही है। महिला को कहते सुना जा सकता है कि वह डॉक्टर-डॉक्टर चिल्लाती रही, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी।

घटना मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) की है। महिला अपने बीमार पिता को सुबह से तमाम प्राइवेट अस्पतालों में ले जाकर थक चुकी थी और कहीं भी बेड उपलब्ध न होने के कारण वह हजारीबाग से उन्हें राँची के सदर अस्पताल लेकर आई। इसी बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता अस्पताल का निरीक्षण करने पहुँच गए। 

महिला ने आरोप लगाया कि वह लगातार डॉक्टरों से अपने पिता को देखने को कह रही थी, लेकिन कई घंटे उसकी किसी ने एक न सुनी। उन्हें घंटों बाहर गर्मी में इंतजार करना पड़ा। बहुत देर बाद डॉक्टर उन्हें अंदर लेकर गए, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अपने पिता का शव अस्पताल से बाहर लाते हुए महिला की नजर स्वास्थ्य मंत्री पर पड़ी और महिला ने वहीं सबके सामने उन पर चिल्लाना शुरू कर दिया।

महिला ने कहा, “मंत्री जी! हम डॉक्टरों के लिए चिल्लाते रहे लेकिन कोई भी मेरे पिता को देखने नहीं आया। हम बाहर खड़े थे कि उन्हें अस्पताल में एडमिट कर लिया जाए, लेकिन वहाँ कोई भी नहीं था, उन्हें देखने के लिए। अंत में इलाज न मिलने से उनकी मौत हो गई।” महिला ने चिल्ला कर पूछा, “क्या मंत्री मेरे पिता को लौटाएँगे।”

महिला ने उन लोगों पर भी अपना गुस्सा उतारा जो वोट लेने के लिए आ जाते हैं, लेकिन उन्हें कोई मतलब नहीं होता आम जन किस दर्द से गुजर रहे हैं। वह बताती हैं कि इस समय हालात बहुत बुरे हैं और लोग इलाज के अभाव में मर रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने घटना के संबंध में कहा कि इस समय हर जगह परेशानियाँ हैं और वह इससे निपटने का प्रयास कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “हर दिन कोविड मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हम बेडों का उसी हिसाब से इंतजाम कर रहे हैं। हमने प्राइवेट अस्पतालों से 50 प्रतिशत बेड कोविड मरीजों के लिए आरक्षित रखने को कहा है… जो भी गलतियाँ हैं हम उन्हें सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।”

इस बीच राज्य के भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने महिला के पिता की मौत का इल्जाम राज्य सरकार पर लगाया। भाजपा अध्यक्ष ने लिखा, “राज्य सरकार की लापरवाही के कारण अपने पिता को खो देने से स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष महिला ने आपा खो दिया। आखिर मुख्यमंत्री को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कब होगा।”

इससे पहले भाजपा अध्यक्ष ने राज्य में कोरोना के हालत से निपटने के लिए सीएम को पत्र लिखा था। पत्र में मुख्यमंत्री से मरीजों के लिए बेड, पर्याप्त ऑक्सीजन सप्लाई, अतिरिक्त वेंटिलेटर और पर्याप्त पैरा मेडिकल स्टाफ रखने की बात कही गई थी।

बता दें कि इस समय कोरोना के कारण कई बड़े राज्यों की स्थिति बद्तर होती जा रही है। झारखंड में कल 2844 नए संक्रमित मरीज मिले। इसके साथ ही राज्य में सक्रिय कोरोना संक्रमित मरीजों का आँकड़ा बढ़कर 17,155 हो गया। सक्रिय मरीजों का राज्य के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। वहीं राज्य में कोविड-19 संक्रमितों का आँकड़ा अब 1 लाख 44 हजार 594 हो गया है।

कर्फ्यू का ऐलान होते ही महाराष्ट्र से प्रवासी मजदूरों की वापसी शुरू: स्टेशनों पर खचाखच भीड़, चलाई जा रही अतिरिक्त ट्रेनें

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने ‘ब्रेक द चेन’ नाम से नई पाबंदियाँ लगाई हैं। इसमें लॉकडाउन की तरह सख्ती से काम लिया जाएगा। मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) की रात मुख्यमंत्री ने कर्फ्यू का ऐलान किया। उसके बाद राजधानी मुंबई स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर प्रवासियों की भारी भीड़ जुट गई, जिनमें अधिकतर मजदूर थे। महाराष्ट्र में 14 अप्रैल की रात से 15 दिनों का कर्फ्यू लगाया गया है।

जहाँ कई प्रवासियों को पहले से ही इस घोषणा का अंदेशा था तो उन्होंने अपना टिकट करा लिया था, वहीं अधिकतर ऐसे थे जिन्हें टिकट नहीं मिल पाया लेकिन वो किसी तरह ट्रेन में जगह बना कर अपने घर पहुँचना चाहते थे। अधिकतर लोग जनरल टिकट खरीद कर स्टेशन में घुसे। सेंट्रल रेलवे अब वहाँ से उत्तर भारतीय राज्यों में जाने वाली ट्रेनों की संख्या में इजाफा कर रहा है, लेकिन लोगों की भीड़ कम नहीं हो रही।

मंगलवार तक 2000 से भी अधिक लोगों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया था। ट्रेनों के आने से पहले से ही कन्फर्म टिकट वाले कई प्रवासी मजदूर बड़ी-बड़ी पंक्तियों में खड़े दिखे। उनमें से अधिकतर का मानना है कि फिर पिछले साल वाली स्थिति आ सकती है, इसलिए घर लौटना ही उचित है। 2 महीने पहले ही मुंबई लौटे एक व्यक्ति ने कहा कि वो जिस फर्नीचर की दुकान में काम करता है, उसके मालिक ने छुट्टियों पर जाने को कह दिया है।

प्रवासी मजदूरों का कहना है कि अब वे अपने परिवार का गुजर-बसर करने के लिए क्या करेंगे, ये उन्हें समझ नहीं आ रहा है। हीरे की पॉलिश करने वाले कारखाने में काम करने वाले एक मजदूर का कहना है कि कंपनी ने दो हफ्ते तक कारखाना बंद रखने की बात कही है। पिछले साल के अनुभवों के आधार पर प्रवासी मजदूरों का दावा है कि कर्फ्यू की अवधि फिर बढ़ाई जाएगी। अब वो कर्फ्यू खत्म होने के बाद ही वापस आने की बात कह रहे हैं।

आज बुधवार को भी उत्तर भारतीय राज्यों के लिए मुंबई से 10 ट्रेनें जा रही हैं। ऐसे हर ट्रेन में वेटिंग लिस्ट में 100-1500 लोग हैं। इसे देखते हुए मुंबई सेंट्रल और बांद्रा से एक-एक और ट्रेनें चलाई जाएँगी। मजदूरों के लिए बस से जाना संभव नहीं हो पा रहा है, क्योंकि एक टिकट का दाम 5000 रुपए है। सड़क मार्ग से भी उनका पलायन चालू है। पिछले 10 दिनों में यूपी-बिहार के लिए मुंबई से 100 बसें आई हैं।

पिछले साल लॉकडाउन के दौरान ऐसी 1000 बसें चली थीं। लेकिन, पिछले साल इन बसों को टैक्स में छूट दिया गया था, जिस कारण एक टिकट का दाम 3000 रुपए था। यूपी-बिहार में पंचायत चुनाव भी होने हैं। ट्रक संगठनों का कहना है कि उनके संघ में 90 लाख ट्रक वाले हैं, जिनमें से 14 लाख महाराष्ट्र के हैं। इनमें ड्राइवरों से लेकर समान चढ़ाने-उतारने वाले तक, सभी प्रवासी हैं। उनका कहना है कि पलायन हुआ तो काफी दिक्कतें आएँगी।

‘होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया (HRAWI)’ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप शेट्टी ने मुख्यमंत्री ठाकरे को पत्र लिख कर कहा है कि कर में छूट के साथ-साथ स्पेशल टीकाकरण अभियान भी चलाया जाए, ताकि आर्थिक रूप से इस डूबते सेक्टर का भला हो। उन्होंने कहा कि 20% कर्मचारी जा चुके हैं और पूर्ण लॉकडाउन हुआ तो बाकी भी निकल जाएँगे। उन्होंने ये बात कर्फ्यू के ऐलान से पहले ही कही थी।

उधर CM उद्धव ठाकरे ने सभी संगठनों से मदद की अपील करते हुए कहा कि राज्य में हालात गंभीर हैं। 14 अप्रैल रात 8 बजे से पूरे राज्य में अगले 15 दिनों तक धारा 144 यानी बिना जरूरत के आना-जाना प्रतिबंधित होगा। ये जनता कर्फ्यू है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि वो इन प्रतिबंधों को लॉकडाउन का नाम नहीं देंगे। जरूरी सेवाओं को छोड़कर सारे दफ्तर बंद रहेंगे। ई-कॉमर्स, बैंक, मीडिया, पेट्रोल पंप, सुरक्षा गार्ड जैसे लोगों को इसमें छूट दी गई है।

महाराष्ट्र में 14 अप्रैल की रात से धारा 144 के साथ ‘Lockdown’ जैसी सख्त पाबंदियाँ, उद्धव को बेस्ट CM बताने में जुटे लिबरल

महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने राज्य में कोरोना की बेकाबू होती रफ्तार पर काबू पाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने पीएम से अपील की है कि राज्य में विमान से ऑक्सीजन भेजी जाए। टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाई जाए। इसके अलावा उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कोरोना से लड़ाई जारी है। हमें लगा था कि हम कोरोना से जंग जीत चुके हैं लेकिन ऐसा नहीं है। पिछले साल जब कोरोना ने देश में कदम रखा था तब की सुविधा और अब की सुविधा में फर्क है। पहले महाराष्ट्र में जाँच के लिए एक-दो लैब थे, अब 523 लैब हैं।

CM उद्धव ठाकरे ने सभी संगठनों से मदद की अपील करते हुए कहा कि राज्य में हालात गंभीर हैं। ठाकरे ने कहा कि हम बुधवार रात आठ बजे से सख्त प्रतिबंध लागू करने जा रहे हैं। 14 अप्रैल रात 8 बजे से पूरे राज्य में अगले 15 दिनों तक धारा 144 यानी बिना जरूरत के आना-जाना प्रतिबंधित होगा। ये जनता कर्फ्यू है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि मैं इन प्रतिबंधों को लॉकडाउन का नाम नहीं दूँगा।

मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन शब्द का इस्तेमाल न करते हुए इसे ‘ब्रेक द चेन अभियान’ करार दिया। ठाकरे ने साफ किया कि जरूरी सेवाओं को छोड़कर सारे दफ्तर बंद रहेंगे। ई-कॉमर्स, बैंक, मीडिया, पेट्रोल पंप, सुरक्षा गार्ड जैसे लोगों को इसमें छूट दी गई है।

उन्होंने कहा कि लोकल ट्रेन और बस सेवा केवल आवश्यक सेवाओं के लिए चलेगी। पेट्रोल पंप, सेबी से संबंधित वित्तीय संस्थान और निर्माण कार्य चालू रहेंगे। रेस्तराँ आदि खुले रहेंगे, लेकिन वहाँ बैठकर खाने पर रोक होगी। सिर्फ होम डिलिवरी और टेक-अवे की सुविधा रहेगी।

उन्होंने आगे कहा कि हमने लंबे समय तक विचार किया है, लेकिन अब सख्त कदम उठाने का वक्त आ गया है। हमें इस मामले में ब्रिटेन से सीख लेने की जरूरत है। उद्धव ठाकरे ने नए डॉक्टरों से अपील की कि वे कोरोना के संकट में मदद करें। इसके अलावा उन्होंने रिटायर्ड डॉक्टरों से भी कोरोना संकट में आगे आने की अपील की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हम कोरोना के पीक तक पहुँचे हैं या नहीं, यह कह नहीं सकते। आँकड़ों में कब तक इजाफा जारी रहेगा, यह भी नहीं कहा जा सकता। ऐसे में हमें कोरोना वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को तेज करना होगा ताकि आने वाली लहर को कमजोर किया जा सके। हमने पिछली बार आप लोगों की मदद से कोरोना को नियंत्रित किया था, लेकिन इस बार हालात अलग हैं।

महाराष्ट्र में मंगलवार को कोरोना के 60,212 नए मामले सामने आए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राशन की दुकानों से 3 किलो गेंहूँ, 3 किलो चावल मुफ्त में मिलेगा। कार्ड धारकों को 3 महीने तक मुफ्त राशन दिया जाएगा। 12 लाख मजदूरों को 1500-1500 रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। 

वहीं, जो पत्रकार पहले केवल ट्वीटर थ्रेड के कारण उद्धव को बेस्ट CM बताने में लगे थे। वह अब फिर काम पर लग गए हैं। वह कह रहे हैं कि पूर्ण लॉकडाउन न लगाकर उद्धव ने कोरोना की जंग जीत ली है। ऐसे ट्वीट करके वह भले ही उन्हें पुनः बेस्ट CM साबित करने में लग गए हों, लेकिन सच्चाई इससे परे है। जिसे मुख्यमंत्री भी देश के समक्ष कबूलते नजर आ रहे हैं कि उनके राज्य में कोरोना के कारण भयावह स्थिति का मंजर देखने को मिल रहा है।

बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन को लेकर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ महत्‍वपूर्ण बैठक की थी। इस बैठक में राज्‍य के लॉकडाउन से प्रभावित होने वाले लोगों के लिए एक वित्‍तीय पैकेज तैयार करने को लेकर चर्चा की गई थी। इसके बाद लॉकडाउन को लागू करने और उसकी अवधि को लेकर अंतिम फैसला लिया गया था। रविवार को हुई टास्क फोर्स के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने 8 दिनों का लॉकडाउन लगाने, जबकि टास्क फोर्स के कुछ सदस्य 14 दिनों के सख्त लॉकडाउन के पक्ष में थे।