Home Blog Page 3914

2500 डॉलर का लालच, मोगा में 3 युवकों ने लहराया था खालिस्तानी झंडा: जेल में सड़ रहे, फूटी कौड़ी नहीं मिली

तीन सिख युवकों ने 14 अगस्त 2020 को पंजाब के मोगा जिला की प्रशासनिक इमारत पर खालिस्तानी झंडा लहरा दिया था। सिख फॉर जस्टिस के नेता गुरुपतवंत सिंह पन्नू के उकसाने पर उन्होंने ऐसा किया। तीनों आज भी जेल में बंद हैं और उन्हें फूटी कौड़ी नहीं मिली है। खालसा टुडे के एडिटर इन चीफ सुखी चहल ने यह बात सार्वजनिक की है

चहल के मुताबिक तीनों युवकों का परिवार अब पन्नू को कोस रहा। उसने इस काम के बदले 2500 डॉलर देने का लालच दिया था। लेकिन, इस घटना के बाद कोई पैसा नहीं दिया।

चहल ने कहा कि भारत के बाहर रहने वाले भारत विरोधी तत्व पंजाब जैसे राज्यों में युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहे हैं। इन तीन युवकों के केस से यह सबको पता चलना चाहिए कि यदि कोई लालच में आकर भारत विरोधी कार्य कर रहा है तो वह मात्र अपने आप को संकट में डाल रहा है।

इस मामले में मोगा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124A (राजद्रोह) और 121 (सरकार के विरुद्ध बगावत) के तहत केस दर्ज किया है। इसके अलावा तीनों युवकों पर राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण अधिनियम के तहत भी धाराएँ लगाई गई हैं।

एसएसपी हरमनबीर सिंह गिल ने कहा कि तीनों युवक प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू के लालच में आ गए थे। गिल ने बताया कि पन्नू ने कई बार ऐसे कामों के लिए 2500 डॉलर अथवा 25,000 डॉलर देने का लालच दिया है और उसके इसी लालच के कारण कई युवा उसके जाल में फँस जाते हैं। एसएसपी गिल ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि तीनों युवक ऑफिस के छत पर चढ़ गए और वहाँ लगे तिरंगे को उतार कर खालिस्तान का झण्डा लगा दिया था। यह एक राष्ट्र विरोधी गतिविधि है।  

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो में कहा था कि हरियाणा जो कि पंजाब का एक भाग था, खालिस्तान का भाग बनेगा।

लुधियाना सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा था कि पन्नू और जत्थेदार साहब जो जहर फैला रहे हैं उसका असर मोगा में देखने को मिला जब सिख युवकों ने भारतीय तिरंगा उतार कर उसकी जगह खालिस्तान का झण्डा लहर दिया। कानून को इन राष्ट्र विरोधी तत्वों को गिरफ्तार करके इनके माथे पर गद्दार लिख देना चाहिए। बिट्टू ने यह भी कहा था कि समय आ गया है यह समझने का कि कौन इस देश से प्यार करता है और कौन गद्दारी।

‘सिख फॉर जस्टिस’ का नेता पन्नू पंजाब के युवाओं को भड़काने के लिए ‘किसान आंदोलन’ का भी सहारा ले चुका है। उसने भारतीय सेना के सिख जवानों को लद्दाख सीमा छोड़कर सिंघू बॉर्डर आने के लिए कहा था। साथ ही उसने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को भारत से अलग होने की सलाह भी दी थी।

पैसे को लेकर झगड़ा, किसान प्रदर्शनकारी को उसके साथी ने ही पीट-पीटकर मार डाला: टिकरी बॉर्डर पर हुआ फसाद

दिल्ली की सीमाओं पर कई महीनों से नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन चल रहा है। टिकरी बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल एक 26 वर्षीय किसान की 2 अप्रैल की रात पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोपित भी प्रदर्शनकारी ही है।

​रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब के बरनाला जिले का युवा किसान गुरप्रीत सिंह कई हफ्तों से किसान आंदोलन में सक्रिय था। वह अपने गाँव के ही किसान रणबीर सिंह उर्फ सट्टा सिंह के साथ टिकरी बॉर्डर पर ट्रॉली टेंट में ठहरा हुआ था। शुक्रवार को दोनों के बीच पैसों को लेकर झगड़ा हो गया।

बताया जा रहा है कि इसको लेकर गुस्साए रणबीर ने गुरप्रीत को लाठी से पीट-पीटकर बुरी तरह घायल कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित वहाँ से फरार हो गया। गुरप्रीत को घायल अवस्था में देखकर वहाँ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारी उसे इलाज के लिए बहादुरगढ़ सिविल हॉस्पिटल ले गए। लेकिन गुप्तांगों समेत शरीर के कई अंगों में गंभीर चोट आने के कारण शुक्रवार रात को गुरप्रीत की अस्पताल में ही मौत हो गई।

शुक्रवार (3 अप्रैल 2021) रात करीब नौ बजे मामले की सूचना मिलने पर सेक्टर-6 थाना से SHO जयभगवान पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर बहस हुई, जिसके बाद रणबीर ने गुरप्रीत को लाठी से पीट-पीटकर घायल कर दिया। वहाँ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारी किसानों ने गुरप्रीत को घायल अवस्था में बहादुरगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसकी मौत हो गई। हमने शव को कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है।

बता दें कि पुलिस ने मृतक युवक के परिजनों को भी इसके बारे में सूचित कर दिया है। पुलिस ने मृतक के चाचा नाहर सिंह की शिकायत पर उनके ही गाँव के निवासी रणबीर उर्फ सट्टा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

अन्ना हजारे का आंदोलन कॉन्ग्रेस की मदद के लिए था… रास्ता भटक गया और केजरीवाल सारी मलाई चाप गए?

यह अंश राहुल रोशन के द्वारा लिखी गई किताब “Sanghi Who Never Went To A Shakha” के अध्याय “Hindutva vs the Ecosystem” से लिया गया है।

नेहरू-गाँधी परिवार के विरुद्ध ‘इकोसिस्टम’ की चुप्पी को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय भी देखा गया था। अन्ना हजारे की तत्कालीन टीम में किसी भी प्रभावशाली नेता, खासकर अरविंद केजरीवाल ने, एक भ्रष्ट नेता के तौर पर सोनिया गाँधी का नाम नहीं लिया था।

अगर अन्ना हजारे का धरना एक अलग तरीके से समाप्त हुआ होता, (कॉन्ग्रेस द्वारा अन्ना के इस आंदोलन पर हमला किए जाने और आंदोलन को आरएसएस की साजिश बताए जाने के बिना) तो इस आंदोलन ने कॉन्ग्रेस की सिर्फ सहायता ही की होती। इसका एक अंत यह भी हो सकता था कि राहुल गाँधी लोकपाल की नियुक्ति का वादा करते और अपने हाथों से संतरे का जूस पिलाकर अन्ना हजारे का आमरण अनशन समाप्त करते। इसे लगातार टीवी पर चलाया जाता।

2014 में यूपीए के तीसरे कार्यकाल में राहुल गाँधी जब प्रधानमंत्री बनते तो एक नैरेटिव चला कर 2जी, कॉमनवेल्थ और कोयला घोटालों का दोष मनमोहन सिंह पर डाल दिया जाता।

2014 के लोकसभा चुनावों से कुछ समय पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह भरोसा जताया था कि इतिहास उनके साथ दयालु रहेगा। यह उनका विदाई वक्तव्य ही था क्योंकि उन्हें भी यह पता था कि चुनावों का परिणाम चाहे जो भी हो, वो दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बनाए जाएँगे।

यदि कॉन्ग्रेस चुनाव जीत जाती… और कॉन्ग्रेस के चुनाव जीतने की उम्मीदें भी बहुत ज्यादा होतीं, यदि अन्ना हजारे का आंदोलन मेरे द्वारा बताए गए उक्त तरीके से समाप्त होता… तो इतिहास मनमोहन के प्रति बिल्कुल भी दयालु नहीं होता। ऐसा इसलिए क्योंकि राहुल गाँधी को हीरो बनाने के लिए ‘दरबारी’ इतिहासकारों द्वारा मनमोहन सिंह को विलेन बना दिया जाता। इस योजना की एक रिहर्सल सितंबर 2013 में तब हुई थी, जब राहुल गाँधी ने अपनी ही सरकार का एक अध्यादेश सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था।

मेरे पास अपने कुछ कारण हैं, जिनसे मुझे विश्वास है कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, कॉन्ग्रेस की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए शुरू नहीं हुआ था। अन्ना हजारे की टीम के मुख्य सदस्य स्वामी अग्निवेश को कथित तौर पर फोन से कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल (हालाँकि स्वामी अग्निवेश ने बाद में कहा था कि वो किसी और कपिल से बात कर रहे थे) से बात करते हुए सुना गया था, जहाँ उन्होंने अपने साथियों (आंदोलनकारियों) की तुलना पागल हाथी से की थी।

अग्निवेश को यह कहते सुना गया था कि अन्ना हजारे की टीम अपना रास्ता भटक चुकी है और एक पागल हाथी की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपने नियत उद्देश्य पर रुकने को तैयार नहीं है। तो, क्या इसका मतलब यही था कि अन्ना हजारे की टीम को एक सीमित तरीके में ही अपना आंदोलन बनाए रखना था और एक नियत समय के बाद उसे समाप्त करना था?

संभवतः ऐसा था भी! क्योंकि ‘इकोसिस्टम’ द्वारा सुनियोजित सीमित समय का आंदोलन कॉन्ग्रेस की ही सहायता करता। इसकी सहायता से ‘राजनैतिक वर्ग’ के भ्रष्ट होने का वातावरण निर्मित किया जाता, जिसमें कॉन्ग्रेस और भाजपा दोनों को भ्रष्टाचार रूपी एक ही सिक्के के दो पहलू दिखाए जाते। इससे जाहिर है भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा को कोई लाभ नहीं होता- जैसे 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान हुआ था, जब घरेलू सुरक्षा के मुद्दे पर शासन में बैठे दल के स्थान पर सम्पूर्ण राजनैतिक वर्ग के विरुद्ध वातावरण बनाया गया था। अन्ना हजारे के आंदोलन की इकोसिस्टम की रणनीति सफल होती लेकिन पता नहीं कैसे, इसे कॉन्ग्रेस के कम्फर्ट से आगे खींचने का निर्णय लिया गया।

ऐसा लगता है कि इसके लिए कई वैश्विक कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें 2010-12 की ‘अरब स्प्रिंग’ को महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। इस दौरान मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के कई देशों में सत्ता परिवर्तन हुआ। यहीं से भारत के ‘इकोसिस्टम’ को झूठी बँधी कि वह भी भारत में कॉन्ग्रेस के सहयोग के बिना भी सीधा शासन कर सकता है। इसी झूठी आशा के कारण वे, स्वामी अग्निवेश के शब्दों में, ‘पागल हाथी’ की तरह अपने लक्ष्य से भटक गए।

इस दौरान टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई का 2012 का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो मराठी में कहते हुए पाए गए कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल को उस आंदोलन के साथ भारत में ‘तहरीर स्क्वायर’ जैसा कुछ करने की सलाह दी थी। (राजदीप सरदेसाई ने इस वीडियो की सत्यता स्वयं प्रमाणित की, जब उन्होंने अपनी किताब ‘2014 : The Election that Changed India, Penguin Books, New Delhi, 2014 में वही बात लिखी, जिसका जिक्र वीडियो क्लिप में किया गया था) 

तहरीर स्क्वायर, मिस्त्र की राजधानी काइरो में है, जहाँ फरवरी 2011 में एक बड़ा जन आंदोलन हुआ था, जो ‘अरब स्प्रिंग’ की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में जाना जाता है। इस आंदोलन के कारण वहाँ के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। आंदोलन के पहले उन्होंने लगातार 30 वर्षों तक शासन किया था। 

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि ‘इकोसिस्टम’ ने सोचा था कि भारत में भी ‘अरब स्प्रिंग’ की तरह ही कोई क्रांति हो सकती है। यदि ऐसा था, तो वे सीधे सत्ता हासिल करने का प्रयास कर रहे थे, बजाय इसके कि कॉन्ग्रेस उन्हें सत्ता का एक छोटा सा हिस्सा दे। उनकी योजना उन अपराधियों या स्थानीय गुंडों के समान थी, जो किसी अन्य प्रत्याशी को समर्थन देने के स्थान पर खुद ही चुनाव लड़ने की सोचते हैं।

यदि ऐसी कोई योजना थी तो वह सफल नहीं हो सकी क्योंकि अन्ना हजारे के आंदोलन को वैसा जन सहयोग प्राप्त नहीं हो सका, जैसा अरब देशों में हुए आंदोलनों को मिला था। अन्ना हजारे की टीम दिल्ली से बाहर समर्थन प्राप्त करने में असफल रही। मुंबई में भी कुछ आंदोलन शुरू हुए थे लेकिन उन्हें भी पर्याप्त सहयोग प्राप्त नहीं हो सका था और दिल्ली में भी आंदोलन कमजोर होता जा रहा था। देश के अन्य हिस्सों में भी स्थानीय प्रदर्शनों के आह्वान को कोई खास सहयोग नहीं मिला। हालाँकि आंदोलन की जो प्रमुख टीम थी, उसमें ऊर्जा बनी हुई थी और वो समय-समय पर सोशल मीडिया के मंचों में दिखाई देती थी।

‘इकोसिस्टम’ को बहुत जल्द यह आभास हो गया कि उसके द्वारा कॉन्ग्रेस को सत्ता से हटाकर सीधे शासन करने का जो सपना देखा जा रहा है, वो व्यावहारिक नहीं है। हालाँकि उन्होंने उम्मीद नहीं खोई थी और कॉन्ग्रेस को दरकिनार करने की उनकी अभिलाषा ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के रूप में अस्तित्व में आई, जिसने दिसंबर 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में बढ़िया प्रदर्शन किया। इस सफलता से उन्हें एक और आशा मिली कि 2014 के लोकसभा चुनावों में भी प्रभाव डाल पाएँगे, मगर अंत में उन्हें पता चल गया कि मोदी उनकी सोच से कहीं आगे की चीज हैं।

[Sanghi Who Never Went To A Shakha’रूपा पब्लिकेशन के द्वारा प्रकाशित (मार्च 2021) की गई है। इस पुस्तक के लेखक राहुल रोशन हैं जो एक सफल आंत्रप्रेन्योर, मीडिया प्रोफेशनल और वर्तमान में OpIndia डिजिटल समूह के सीईओ हैं]

इस लेख को आप इसके ऑरिजनल रूप में यहाँ पढ़ सकते हैं, जिसका अनुवाद ओम ने किया है।

8 अप्रैल से पहले यूपी की जेल में होगा मुख्तार अंसारी, पंजाब सरकार ने चिट्ठी लिख कहा- ले जाइए

उत्तर प्रदेश का बाहुबली और मऊ से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी चंद दिनों में यूपी की जेल में कैद दिखेगा। 2 साल तीन महीने से पंजाब की जेल में बंद मुख्तार अंसारी को यूपी की जेल में शिफ्ट करने की तारीख तय हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब सरकार ने योगी सरकार को पत्र लिखकर उसे हैंडओवर करने की बात कही है। पंजाब के अपर मुख्य सचिव गृह ने यूपी के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी को लिखे पत्र में कहा है कि 8 अप्रैल से पहले उसे यूपी पुलिस के हवाले करने की बात कही है। पत्र में 12 अप्रैल को पंजाब में एक मामले को लेकर होने वाली सुनवाई का भी जिक्र है। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसकी पेशी होगी।

चाक-चौबंद हो मुख्तार की सुरक्षा: पंजाब सरकार

बताया जा रहा है कि मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से यूपी की बांदा जेल में शिफ्ट किया जाएगा। इसको लेकर पंजाब सरकार ने पत्र में लिखा है कि मुख्तार को लाने के लिए विधिवत सुरक्षा और मेडिकल व्यवस्थाएँ हों। साथ ही शिफ्टिंग के लिए वाहन का बंदोबस्त करते वक्त अंसारी की मेडिकल रिपोर्ट्स को भी ध्यान में रखा जाए।

47 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, माफिया मुख्तार अंसारी पर 47 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसको लेकर उसे यूपी की कई अदालतों में पेश होना है। लेकिन वह अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए काफी दिनों से पंजाब की जेल में बंद है। बताया जाता है कि योगी सरकार ने अकेले मऊ में ही मुख्तार अंसारी के करीबियों के 22 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर बुलडोजर चलाने का काम किया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रास्ता हुआ था साफ

सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश भेजने का आदेश दिया था। कोर्ट ने मुख्तार की कस्टडी ट्रांसफर याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि वह यूपी की किस जेल में रहेगा, यह प्रयागराज MP-MLA कोर्ट तय करेगी।

बता दें कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ पंजाब के एक कारोबारी ने रूपनगर में रंगदारी का मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद पंजाब पुलिस उसे जनवरी 2019 को बांदा जेल रूपनगर थाने ले आई थी। वहाँ उसे कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ से कोर्ट ने मुख्तार को रोपड़ जेल भेजने के आदेश दिए थे।

फेक न्यूज फैलाओ-अवॉर्ड पाओ: राजदीप सरदेसाई की झोली में ‘बेस्ट’ पुरस्कार, 26 जनवरी को कहा था- पुलिस की गोली से मरा किसान

अब फेक न्यूज फैलाने वालों को भी पत्रकारिता के अवॉर्ड मिल रहे हैं। हम बात कर रहे हैं इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई की, जिन्हें पत्रकारिता के कई अवॉर्ड मिले हैं। शनिवार (3 अप्रैल 2021) को ENBA अवॉर्ड्स में सरदेसाई को विभिन्न कैटेगरी में अवॉर्ड दिए गए गए। इनमें ‘बेस्ट न्यूज कवरेज’ का अवॉर्ड भी शामिल है। यह अवॉर्ड उन्हें तब मिला है जब उन पर इसी 26 जनवरी को दिल्ली में हिंसा के दौरान फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगा था और उन्हें कुछ समय के लिए इंडिया टुडे ने सस्पेंड भी किया था।

राजदीप सरदेसाई को बेस्ट ऐंकर, बेस्ट न्यूज कवरेज (राष्ट्रीय), बेस्ट टॉक शो, बेस्ट न्यूज कवरेज (अंतर्राष्ट्रीय) और बेस्ट बिजनेस प्रोग्राम के लिए अवॉर्ड दिए गए हैं। ज्ञात हो कि 26 जनवरी की हिंसा के दौरान ट्रैक्टर पलटने से एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी। उसकी मौत के संबंध में फेक न्यूज फैलाने के आरोप में सरदेसाई को एक महीने के लिए बर्खास्त किया गया था। सरदेसाई ने ट्वीट करके अवॉर्ड मिलने की खुशी जाहिर की और आलोचना करने वालों का धन्यवाद भी दिया। उन्होंने अपने ‘कार्य’ को निष्काम कर्म भी कहा।

26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान एक प्रदर्शनकारी नवरीत सिंह पुलिस बैरिकेड तोड़ने का प्रयास कर रहा था। इसी प्रयास में उसका ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस पर सरदेसाई ने ट्वीट किया कि नवरीत की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। हालाँकि पुलिस ने घटना से संबंधित एक वीडियो जारी किया जिसमें यह देखा गया कि पुलिस बैरिकेड को तोड़ने के प्रयास में नवरीत का ट्रैक्टर बुरी तरह से पलट गया। सच्चाई सामने आने के बाद सरदेसाई ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया था।  

राजदीप सरदेसाई के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इससे पहले राष्ट्रपति भवन में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की तस्वीर लगाए जाने के बाद भी सरदेसाई तस्वीर के विषय में फेक न्यूज फैलाते पकड़े गए थे। लगभग एक महीने की बर्खास्तगी के बाद 23 फरवरी को सरदेसाई पुनः इंडिया टुडे में अपने कार्य पर लौटे थे।  

‘जवान न बूथ के अंदर गए, न किसी को वोट डालने से रोका’: ममता बनर्जी के आरोपों को EC ने बताया बेबुनियाद

नंदीग्राम में चुनाव के दौरान गड़बड़ी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को 6 पन्नों का जवाब भेजा है। ममता के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। ममता ने नंदीग्राम के गोकुलनगर इलाके के एक पोलिंग बूथ पर हंगामा करते हुए आरोप लगाया था कि स्थानीय लोगों को वोट डालने से रोक जा रहा है। उन्होंने बूथ से ही राज्यपाल से बात कर इस मुद्दे पर संज्ञान लेने को कहा था। चुनाव आयोग ने ममता के आरोपों के बाद पूरी टाइमलाइन जारी की है और सबूत के तौर पर सीसीटीवी फुटेज का भी जिक्र किया है।

यह मामला 1 अप्रैल का है जब बंगाल में दूसरे चरण की 30 सीटों पर मतदान हुआ था। इनमें एक सीट नंदीग्राम की भी थी जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेन्दु अधिकारी आमने-सामने हैं। वोटिंग के दौरान ही ममता गोकुलनगर इलाके के एक बूथ पर पहुँची थीं। इसके बाद टीएमसी के सदस्य उग्र होकर घूमने लगे। जवाब में ‘जय श्री राम’ के नारे लगे जिनसे ममता नाराज हो गईं और बूथ से ही राज्यपाल को फोन करके कहा कि उनके समर्थकों को वोट डालने से रोक जा रहा है।

केन्द्रीय सुरक्षा बलों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा था कि जवान लोगों को वोट डालने से रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो सुबह से ही इलाके में हैं और देख रही हैं कि स्थानीय लोगों को वोट नहीं डालने दिया जा रहा है, इसीलिए वो अपील करती हैं कि राज्यपाल संज्ञान लें।

ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने उन्हें ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ कहा है। आयोग ने यह भी कहा कि वह आदर्श आचार संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई पर भी विचार कर रहा है। आयोग ने सबूत के रूप में सीसीटीवी फुटेज का जिक्र किया और कहा कि ड्यूटी के दौरान केन्द्रीय बल के जवान न तो बूथ के अंदर गए और न ही उन्होंने किसी को वोट डालने से रोका।

चुनाव आयोग द्वारा ममता के आरोपों को नकारने के बाद भाजपा नेता सुनील देवधर ने ट्वीट कर कहा कि भारतीय चुनाव आयोग द्वारा ममता दीदी के झूठ का पर्दाफाश कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बंगाल और नंदीग्राम में अपनी हार नजदीक देखर क्या अब ममता केन्द्रीय सुरक्षा बलों और चुनाव आयोग पर आरोप लगाएँगी? देवधर ने आगे पूछा कि आगे क्या वे बंगाल के लोगों पर भी दोषारोपण करेंगी? अपने ट्वीट में सुनील देवधर ने चुनाव आयोग के जवाब की कॉपी भी पोस्ट की है।

अयोध्या में नागा साधु की ईंट से कूच कर हत्या, गौशाला में पड़ा मिला शव: SSP ने तैनात किया पुलिस फोर्स

अयोध्‍या के हनुमानगढ़ी में आज सबुह (4 अप्रैल, 2021) एक नागा साधु की ईंट से कूच कर नृशंस हत्या करने का मामला सामने आया है। उनका शव चरण पादुका मंदिर की गौशाला में खून से लथपथ पड़ा म‍िला।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृत महंत के गुरुभाई रामानुजदास चेला रामबरन दास का कहना है कि कन्हैया दास हनुमानगढ़ी मंदिर के पास स्थित गुलशन बाग में भोजन करने के बाद गौशाला में सो रहे थे, जहाँ उनकी हत्या कर दी गई।

बताया जा रहा है कि उनका जमीन और मकान को लेकर गोलू दास उर्फ शशिकांत दास के साथ मुकदमा चल रहा था। मौके पर पहुँचे एसपी सिटी विजय पाल सिंह के मुताबिक, आरोपित गोलू दास को हिरासत में ले लिया गया है और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है। वहीं, सूचना पाकर एसएसपी शैलेश पांडेय ने भी मौके पर पहुँच कर जानकारी ली। साथ ही विवाद बढ़ने की आशंका को देखते हुए घटनास्थल पर पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया है।

बता दें कि 45 वर्षीय मृतक साधु कन्हैया दास हनुमानगढ़ी के बसंतिया पट्टी से जुड़े गुलचमन बाग के संत थे। वह सिर्फ रात्रि विश्राम के लिए चरण पादुका गौशाला में जाते थे। शनिवार को भी वह गोशाला में रात्रि विश्राम के लिए गए थे, जहाँ उनकी हत्या कर दी गई।

पुलिस आरोपित गाेलू दास काे हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। SSP शैलेश पांडेय ने भी गोलू से काेतवाली में पूछताछ की। आरोपित मृतक का गुरुभाई है। उसका मकान व जमीन काे लेकर कन्हैया दास से विवाद चल रहा था, जिसका मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है।

गर्दन काटने की धमकी के बाद नरसिंहानंद सरस्वती के विरोध में AMU में प्रदर्शन का ऐलान

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्रों ने डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के कथित इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद विरोधी टिप्पणी विरोध में प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रदर्शन रविवार (4 अप्रैल) को शाम 5 बजे बुलाया गया है।

प्रदर्शन से जुड़ा हुआ एक संदेश सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है जिसमें लिखा है, “पैगंबर मोहम्मद की खिलाफत में नरसिंहानंद सरस्वती के द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान के विरोध में 4 अप्रैल 2021 को प्रदर्शन किया जाएगा।”  

इस वायरल हो रहे संदेश में लिखा है कि प्रदर्शन विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी कैंटीन से शुरू होकर डक प्वाइंट तक जाएगा। इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने सोशल मीडिया में यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ जान से मार देने की धमकी वाला एक पोस्ट भी लिखा था।

अमानतुल्लाह ने यति के विरुद्ध शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने यति नरसिंहानंद सरस्वती के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की थी। वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने यूपी पुलिस से अमानतुल्लाह के विरुद्ध कार्यवाई करने की माँग की है। अमानतुल्लाह ने सोशल मीडिया पर नरसिंहानंद की गर्दन काटने की धमकी दी थी।

मैं किसी से माल-पानी नहीं लेता, काम एक नंबर का होना चाहिए… जितना पैसा चाहिए मिलेगा: गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को वर्चुअल माध्यम से झारखंड की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें 3550 करोड़ रुपए की लागत से 539 किलोमीटर की 21 सड़क परियोजना शामिल हैं।

इस दौरान गडकरी ने झारखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान ठेकेदारों द्वारा की जाने वाली लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सड़कों के किनारे पौधारोपण नहीं होने पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही उन्होंने सोरेन से पौधारोपण के कार्य की ड्रोन से शूटिंग करवाकर रिकॉर्ड तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री को सभी लापरवाह ठेकेदारों का पैसा रोकने की सलाह देते हुए कहा कि ये कॉन्ट्रैक्टर निचले स्तर पर मैनेज करते हैं, मैं इन्हें छोड़ूँगा नहीं।

केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सड़कों के एक्सपेंशन ज्वाइंट की क्वालिटी का मामला सामने आया है। मैं क्वालिटी से किसी भी तरह का समझौता नहीं करूँगा। अगर काम में किसी भी तरह की कमी रही तो मैं ठेकेदार को लगाकर सड़कों को उखड़वा दूँगा। इसकी सजा अधिकारी और ठेकेदार दोनों भुगतेंगे। इतना समझ लें कि मैं किसी से कोई भी माल-पानी नहीं लेता हूँ। इसलिए काम एक नंबर का होना चाहिए।

पौधारोपण नहीं होने पर बिगड़े गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हमारे बजट में जब पेड़ लगाने के लिए फंड पहले से शामिल है तो पेड़ क्यों नहीं लगे? इसके लिए सभी ठेकेदारों को नोटिस भेजने और उस क्षेत्र के विधायक और सांसदों को मौके पर जाकर इसकी जाँच करने को कहा। उन्होंने लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। मंत्री ने ठेकेदारों की रेटिंग करने का निर्णय लिया है। जिन ठेकेदारों की रेटिंग खराब होगी, अगले ठेके में उनकी रेटिंग घटा दी जाएगी और उन्हें कोई काम नहीं दिया जाएगा।

गडकरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री सोरेन से कहा, “समस्या यह है कि आपके पास अच्छे पीडब्ल्यूडी के अधिकारी नहीं हैं। अगर आप हमें अच्छे अधिकारी नहीं दे सकते हैं तो हम उन्हें बाहर से लाएँगे। जो पीडब्ल्यूडी अधिकारी जिस कार्य के लिए रखे गए हैं, उनसे आप वही काम लीजिए। उन्हें दूसरे कामों में मत लगाइए। उन्हें हम सैलरी देते हैं।”

वीडियो आप इस लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं: झारखण्ड में 21 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण

जितना पैसा चाहिए हम देंगे, काम अच्छा होना चाहिए

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि झारखंड के 675 करोड़ रुपए के वार्षिक प्लान को मैं इस साल के लिए बढ़ाकर 5 हजार करोड़ रुपए कर देता हूँ, लेकिन पहले राज्य के चीफ इंजीनियर से 5 मुख्यमंत्री हजार करोड़ रुपए का प्लान तैयार करके भेजने को कहे। मेरे पास पैसे की कमी नहीं है। आप केवल भूमि अधिग्रहण करें और फिर मुझसे जितना माँग सकते हैं माँगे। गडकरी ने कहा कि उन्हें केवल क्वालिटी का काम और भूमि अधिग्रहण व पर्यावरण क्लीयरेंस समय पर होना चाहिए। ऐसा हुआ तो अगले 3 साल में पश्चिमी यूरोप और अमेरिका के लेवल की रोड झारखंड को बनाकर दूंगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मैं ये वचन देता हूँ कि झारखंड के साथ किसी भी तरह का भेजभाव नहीं होगा। सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक तौर पर पिछड़ इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।”

छत्तीसगढ़: नक्सली हमले में 22 जवान बलिदान-21 अब भी लापता, असम में प्रचार कर रहे कॉन्ग्रेसी CM बघेल

छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के बीजापुर जिले में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में बलिदान हुए जवानों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। 21 जवान अब भी लापता हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार नक्सलियों ने शनिवार को घेर कर 700 जवानों पर हमला किया था। रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बलिदानी जवानों की संख्या 30 बताई गई है। साथ ही कहा गया है कि घटनास्थल से एक वीडियो आया है जिसमें 20 जवानों के शव मौके पर ही दिखाई पड़ रहे हैं।

इतने बड़े नक्सली हमले के बावजूद छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल असम में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। रविवार (4 अप्रैल 2021) की सुबह गुवाहाटी से उनका एक हैरान करने वाला बयान सामने आया। इसमें उन्होंने कहा कि उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत हुई है। सीआरपीएफ के डीजी को छत्तीसगढ़ भेजा गया है। साथ ही उन्होंने रविवार शाम तक खुद के छत्तीसगढ़ लौटने की बात कही।

बघेल ने यह भी बताया कि घायल हुए ​जिन 7 जवानों को रायपुर लाया गया है वे खतरे से बाहर हैं। 21 लापता जवान की तलाश में सर्च ऑपरेशन चल रहा है।

बीजापुर के एसपी कमललोचन ने बताया है कि लापता जवानों की तलाश में गहन अभियान चल रहा है। एनकाउंटर के दौरान गंभीर रूप से घायल 7 जवानों को रायपुर इलाज कि लिए रेफर किया गया है, जबकि 24 जवानों का बीजापुर के अस्पताल में इलाज चल रहा है।

CRPF के डीजी ने एनकाउंटर में 12-15 नक्सलियों को मार गिराए जाने की बात कही है। 20 नक्सलियों के घायल होने की भी खबर है। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराजन के मुताबिक कोबरा बटालियन के एक कमांडो का भी शव बरामद किया गया है। मौके पर मौजूद अपने रिपोर्टर के हवाले से एएनआई ने 14 शव बरामद किए जाने की बात कही है।

एंटी नक्सल ऑपरेशन के उप महानिरीक्षक ओपी पाल ने जानकारी दी है कि इस अभियान में तर्रेम, उसूर, पामेड़ और सुकमा जिले के मिनपा और नरसापुरम से लगभग 2000 जवान शामिल थे। जानकारी के मुताबिक एनकाउंटर साइट पर करीब 250 नक्सलियों के होने का अनुमान था। सुरक्षा बलों की इस संयुक्त टीम में सीआरपीएफ की कमांडो बटालियन, जिला रिजर्व गार्ड और स्पेशल टास्क फोर्स के जवान थे।

10 दिन में नक्सलियों का दूसरा बड़ा हमला

बीते 10 दिन में नक्सलियों ने जवानों पर यह दूसरा बड़ा हमला किया है। इससे पहले 23 मार्च को नारायणपुर में नक्सलियों ने पुलिस जवानों की बस को आईडी ब्लास्ट से उड़ा दिया था। इस हमले में भी 5 जवान बलिदान हो गए थे, जबकि 14 अन्य जख्मी हुए थे। बस में 24 जवान सवार थे।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इतना बड़ा हमला तब हुआ जब 20 दिन पहले से ही नक्सलियों के मूवमेंट की खबर थी। 17 मार्च को नक्सलियों ने बयान जारी कर छत्तीसगढ़ सरकार से बातचीत का भी प्रस्ताव दिया था। इसके लिए तीन शर्तें रखी थी, जिनमें सशस्त्र बलों को हटाने, नक्सली संगठनों से प्रतिबंध हटाने और अपने नेताओं की रिहाई शामिल थी।