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‘बेड दीजिए, नहीं तो इंजेक्शन देकर उन्हें मार डालिए’: महाराष्ट्र में कोरोना+ पिता को लेकर 3 दिन से भटक रहा बेटा

महाराष्ट्र में कोरोना के कारण स्थिति बेहाल है और राज्य में संक्रमितों की संख्या हर दिन बढ़ती ही जा रही है। 1 मई तक राज्य सरकार पहले ही कर्फ्यू का ऐलान कर चुकी है। अस्पतालों की स्थिति इतनी खराब है कि लोग हैदराबाद जाकर इलाज करा रहे। इन सबके बीच एक व्यक्ति का वीडियो सामने आया है, जिसमें वो अपने कोरोना पॉजिटिव पिता को अस्पताल में भर्ती करने के लिए मिन्नतें कर रहा है।

वीडियो में उक्त व्यक्ति कहता, “या तो मेरे पिता को अस्पताल में बेड दीजिए, नहीं तो उन्हें कोई इंजेक्शन देकर मार डालिए।” उक्त व्यक्ति की पहचान किशोर नाहरशेटीवर के रूप में हुई है। वो मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) की दोपहर से ही अपने बीमार पिता का इलाज कराने की मशक्कत कर रहे हैं, लेकिन अस्पताल में बेड नहीं मिल रहा। इसके लिए वो दो राज्यों का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन फायदा नहीं हुआ।

किशोर ने पहले तो महाराष्ट्र के अस्पतालों की खाक छानी, फिर पिछले 24 घंटों में तेलंगाना में भी कई अस्पतालों के चक्कर लगाए। उन्होंने वरोड़ा और फिर चंद्रपुर के अस्पताल में प्रयास किया पर उनके पिता का इलाज नहीं हो सका। यहाँ तक कि प्राइवेट अस्पतालों में भी उन्हें अपने पिता के लिए बेड नहीं मिली। वो रात के 1:50 बजे फ्लाइट लेकर तेलंगाना पहुँचे थे, 3 बजे वहाँ पहुँच गए – लेकिन उनका काम नहीं हुआ।

आज सुबह ही वो तेलंगाना से लौटे हैं और महाराष्ट्र में बेड के इंतजाम के लिए अस्पतालों का चक्कर काट रहे हैं। उनके पिता जिस एम्बुलेंस में हैं, उसके भीतर लगा ऑक्सीजन भी अब ख़त्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि वो इस तरह से अपने पिता को घर भी लेकर नहीं जा सकते। चंद्रपुर में सोमवार को कोरोना के 850 मामले सामने आए थे। जिले में अब भी 7000 सक्रिय कोरोना मरीज हैं।

महाराष्ट्र के अस्पतालों में न सिर्फ बेड्स, बल्कि वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन की भी भारी कमी है। दवाएँ नहीं मिल रहीं। ऑक्सीजन और मेडिकल सप्लाइज की उपलब्धता के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय सेना से मदद के लिए गुहार लगाई है। राज्य में ज़रूरी आवागमन को छोड़ कर बाकी सारी चीजें पहले ही प्रतिबंधित की जा चुकी है। प्रवासी मजदूर वापस लौट रहे हैं।

ट्रेनों और स्टेशनों पर खचाखच भीड़ है। महाराष्ट्र में फ़िलहाल कोरोना के 6,12,070 सक्रिय संक्रमित मरीज हैं। देश के कुल सक्रिय कोरोना संक्रमितों का 41.58% इसी राज्य में है। पिछले 1 दिन में यहाँ 58,992 नए केस सामने आए हैं। पुणे, मुंबई, ठाणे, नागपुर और नासिक क्रमशः राज्य में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं। कोरोना महाराष्ट्र में अब तक 58,804 लोगों की जान ले चुका है।

…स्कर्ट वाली का रेप हो जाता: कंपनी ने Pak कर्मचारी को निकाला, कोर्ट ने कहा – ‘मूर्ख है, बर्खास्त मत करो, रख लो’

ब्रिटेन के लंकाशायर में स्काई कंपनी के 44 वर्षीय एक पाकिस्तानी कर्मचारी ने अपनी महिला सहकर्मी को बताया कि अगर यह पाकिस्तान होता तो स्कर्ट पहनने वाली लड़कियों का बलात्कार हो जाता। यह घटना जून 2019 की है, जब लंकाशायर के एक शॉपिंग मॉल से शॉपिंग के बाद दो किशोर लड़कियाँ स्कर्ट पहन कर वहाँ से गुजर रही थीं। उसी दौरान राजा मिन्हास नाम के रिटेल सलाहकार ने किशोरियों पर यह टिप्पणी की।

इस दौरान वह अपनी सहकर्मी क्लेमेट्टी से स्काई कंपनी के प्रोडक्ट को लेकर बातचीत कर रहा था। मिन्हास ने क्लेमेट्टी से ये भी कहा, “सामान्य तौर पर जो लड़कियाँ छोटे स्कर्ट पहनती हैं, उसी के कारण उनका रेप होता है और उसके लिए वही जिम्मेदार होती हैं।”

दोनों के बीच करीब 10-15 मिनट तक गर्मागर्म बहस चली। यह बात कंपनी के बॉस तक पहुँची तो पाकिस्तानी युवक मिन्हास को सामान्य व्यवहार के नियमों का उल्लंघन करने के मामले में उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

मूल रूप से पाकिस्तान के रहने वाले मिन्हास ने पुलिस को बताया, “मैंने दो लड़कियों को जाते हुए पीछे से देखा था, दोनों लड़कियों को गलत तरीके से कपड़े पहनाए गए थे। आप उनके शरीर की बनावट को उन कपड़ों में देख सकते थे। यदि यह पाकिस्तान होता तो लोग देख रहे होते और यह बलात्कार के लिए एक खुले निमंत्रण की तरह होता।”

मामला कोर्ट में पहुँचा तो रोजगार न्यायाधिकरण के न्यायाधीश रॉबिन्सन ने आरोपित की बर्खास्तगी को अनुचित बताते हुए उसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मिन्हास ने क्लेमेट्टी के साथ चर्चा के दौरान सामान्य रूप से लोगों की पोशाक पर मूर्खतापूर्ण टिप्पणी की थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि दोनों कर्मचारी एक-दूसरे से बात कर रहे थे। क्लेमेट्टी ने खुद से कोई शिकायत नहीं की थी और न ही कोर्ट को कोई सबूत दिया। जब मामला सामने आया तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि ये इतना आगे जाएगा। आरोपित को कोर्ट ने दुराचार का दोषी ठहराया है, क्योंकि उससे बातचीत के दौरान क्लेमेट्टी को लगता था कि वो उसके सामने किस तरह के कपड़े पहनकर आए।

कोर्ट का कहना था, “मिन्हास ने कभी भी बलात्कार की घटनाओं की आलोचना नहीं की। यह उसका अपना विचार था कि एक खास तरह का पहनावा पुरुषों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।”

क्लेमेट्टी ने इस मामले में कहा, “लड़कियों को वही पहनना चाहिए जो उन्हें अच्छा लगे। किसी को भी इस आधार पर बलात्कार के बारे में बात नहीं करनी चाहिए कि कोई क्या पहनता है।”

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने हिंदू नव वर्ष पर शुभकामनाओं को ‘कट्टरता’ से जोड़ा

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा को सेक्युलरिज्म के चक्कर में अब हिंदू नववर्ष भी कट्टरपंथ लगने लगा है। उनके अनुसार बीजेपी द्वारा हिंदू नव वर्ष की शुभकामनाएँ देना ‘कट्टरता’ है।

महुआ मोइत्रा का ट्वीट

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन 12 अप्रैल 2021 को हिंदू कैलेंडर के अनुसार नया साल विक्रम संवत 2078 शुरू हुआ। बहुत सारे हिंदू नए साल का जश्न चैत्र महीने में इसकी शुरुआत पर मनाते हैं। ठीक इसी तरह बहुत सारे हिंदू, विशेष रूप से गुजरात में कार्तिक महीने में दिवाली के अगले दिन को नए साल के रूप में मनाते हैं। यही कारण है कि हिंदू धर्म में अलग-अलग समुदाय साल के अलग-अलग दिनों को नए साल के रूप में मनाते हैं। इसके अलावा भारत के विभिन्न हिस्सों में, हिंदू कैलेंडर के महीनों में भी भिन्नता देखने को मिलती है। जबकि देश के कुछ हिस्सों में यह चैत्र है, कुछ में वैशाख से शुरू हो गया है, जो बंगाल, असम और त्रिपुरा में लोगों के लिए नया साल है।

लेकिन, ऐसा प्रतीत होता है कि टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा इस बात से नाखुश थीं कि भाजपा ने हिंदुओं को नए साल की शुभकामनाएँ दी है। इतना ही नहीं वह शुभकामनाओं को ‘रेडिकलाइजेशन’ कह रही हैं।

बंगालियों को लेकर उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में नए साल की शुभकामनाएँ ‘पोइला बैसाख’ से शुरू होती हैं, न कि ‘हिंदू नव वर्ष‘ से। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की संस्कृतियाँ एक हैं और बांग्लादेश एक इस्लामिक राष्ट्र है।

महुआ द्वारा हिंदू नववर्ष को कट्टरता से जोड़ने पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने टीएमसी सांसद की क्लास लगा दी।

कुछ ने यह भी बताया कि बांग्लादेश में जो लोग पोइला बैशाख मनाते हैं, वो वास्तव में हिंदू हैं।

कुछ लोगों ने इसे हिंदुत्व को लेकर उनकी अज्ञानता बताई।

हिंदू नव वर्ष का जश्न मनाने वालों को ‘कट्टर’ बताने की कोशिश में किए गए इस ट्वीट से महुआ की हिंदू घृणा दिखती है।

कचरे की गाड़ी में रख कर श्मशान पहुँचाए जा रहे कोरोना संक्रमितों के शव: छत्तीसगढ़ से Video वायरल

कोरोना संक्रमण के बढ़ते कहर ने व्यापक स्तर पर अमानवीयता को जन्म दे दिया है। यही वजह है कि पहले महाराष्ट्र जैसे राज्य में संक्रमितों के शव को कूड़े के बैग में लपेटे देखा गया और अब ऐसी ही दिल दहलाने वाली तस्वीर छत्तीसगढ़ से आई है। ताजा तस्वीरों में देखा जा सकता है संक्रमित मरीजों का शव कूड़े वाली गाड़ी में रख कर दाह संस्कार के लिए श्मशान लाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पूरी घटना राजनंदगाँव की है। वीडियो में देख सकते हैं कि चार कर्मचारी पीपीई किट पहने हुए हैं और कोरोना से संक्रमित मरीज के शव को कूड़े की गाड़ी में से निकाल कर श्मशान घाट पर उतार रहे हैं।

घटना की वीडियो वायरल होने के बाद जब इस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शव वाहन की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नगर पंचायत और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की होती है।

वहीं राजनंदगाँव प्रेस क्लब के निदेशक अजय सोनी ने कहा कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और बेड की कमी से निपटने के लिए, राजनंदगाँव प्रेस क्लब को कोविड केंद्र में तब्दील किया गया है। यहाँ असिम्प्टोमेटिक मरीजों का मुफ्त इलाज चल रहा है। मरीजों के लिए 30 बेड की व्यवस्था की गई है। उनकी देखभाल के लिए प्रेस क्लब में स्वास्थ्यकर्मी भी हर समय उपस्थित रहेंगे।

बता दें कि कोरोना कहर की तेज रफ्तार के बीच छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में से एक है, जहाँ संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ताजा आँकड़ों के मुताबिक इस समय वहाँ 1 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं। बुधवार को भी राज्य में 14 हजार केस दर्ज किए गए, जबकि 120 लोगों ने अपनी जान गँवाई। इसके साथ राज्य में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 4 लाख 86 हजार पार कर गई है। मरने वाले भी 5000 से ज्यादा हैं। 

राज्य में प्रशासन की लापरवाही और स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत उजागर करते हुए पिछले दिनों एक और वीडियो रायपुर के अस्पताल से वायरल हुई थी। वीडियो में देखा गया था कि राज्य की राजधानी में स्थित मुख्य सरकारी अस्पताल में कोरोना मरीजों की लाशें भरी पड़ी हैं।

इसके अलावा आईसीयू और ऑक्सीजन उपकण बेड भी फुल हैं। नए कोरोना मरीजों के लिए अस्पताल में बिल्कुल भी जगह नहीं बची है। पिछले सप्ताह अस्पताल की एक वीडियो वायरल हुई थी, जिसमें साफ तौर पर लाशों को इधर-उधर बिखरे हुए दिखाया गया था। रायपुर सरकारी अस्पताल की स्थिति इस वक्त बेहद खराब हो चुकी है।

नम्बी नारायणन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिया CBI जाँच का आदेश: 27 साल पहले ‘देशद्रोह’ का आरोप लगा तबाह कर दिया था जीवन

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (अप्रैल 15, 2021) को केरल के वैज्ञानिक नम्बी नारायणन पर 1994 में लगे देशद्रोह के आरोप और उसके बाद हुई उनकी प्रताड़ना के मामले में CBI जाँच के आदेश दिए हैं। नारायणन ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)’ के वैज्ञानिक हुआ करते थे। उनका शुरू से मानना रहा है कि इस मामले में पुलिस की साजिश के कारण उन्हें फँसाया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक ने देश की सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत किया है।

उन्होंने कहा कि वो इस फैसले से खुश हैं, क्योंकि देश को क्रायोजेनिक तकनीक पाने में जो देरी हुई, उसके पीछे एक बहुत बड़ी साजिश थी और इसके तहत ही उन्हें फँसाया गया। तिरुवनंतपुरम में रह रहे नम्बी नारायणन ने कहा कि वो इस मामले में किसी केंद्रीय एजेंसी की जाँच चाहते थे। विदेशी ताकतों के लिए जासूसी का आरोप लगा कर नारायणन को देशद्रोही बताया गया था। इस मामले में गठित हाई लेवल कमिटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने भी याचिका लगा कर पुलिसकर्मियों द्वारा जाँच में गलती की गुंजाइश से इनकार नहीं किया है। ऐसे में इस मामले में पहले ही निर्दोष करार दिए जा चुके नम्बी नारायणन को राहत मिली है। कोर्ट ने केरल सरकार को पहले ही आदेश दिया था कि वो बतौर मुआवजा उन्हें 50 लाख रुपए सौंपे। केंद्र सरकार ने 5 अप्रैल को इस मामले की त्वरित सुनवाई की अपील की और इसे राष्ट्रीय मुद्दा बताया।

जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने हाई लेवल कमिटी की रिपोर्ट को स्वीकार किया और CBI को आगे इस मामले की जाँच करने को कहा। इस मामले में मालदीव की दो महिलाओं और भारत के 2 वैज्ञानिकों पर गुप्त दस्तावेजों को विदेश भेजे जाने का आरोप लगा था। सितम्बर 14, 2018 को जाँच पैनल का गठन किया गया था। कोर्ट ने माना था कि नम्बी नारायणन इस दौरान अत्यधिक अवमानना से गुजरे।

इस मामले में असीम प्रताड़ना देने के लिए कोर्ट ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश भी दिया था। न्यायालय ने माना था कि वरिष्ठ वैज्ञानिक की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाया गया और उनके मानवाधिकार का उल्लंघन हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें जिस ‘कुटिल घृणा’ का सामना करना पड़ा, उसके लिए केरल के बड़े पुलिस अधिकारी जिम्मेदार थे। अब इस मामले की जाँच CBI करेगी।

इससे कई साल पहले 1996-97 में ही CBI ने पाया था कि इस मामले की जाँच करने वाले केरल पुलिस के अधिकारियों ने ही सारी गड़बड़ी की है। CBI ने उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी केरल सरकार को लिखा था। CPI (M) के ईके नायनार तब केरल के मुख्यमंत्री थे। वामपंथी सरकार ने उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के इंतजार का बहाना बनाया। सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट आने के बाद भी एक दशक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

फिरोज खान बाल काटता था… खोल रखा था सलून, महाराष्ट्र पुलिस ने इतना मारा कि मौत हो गई

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में कोविड-19 पाबंदियों का उल्लंघन करने पर एक हेयर सैलून मालिक को अपनी जान गँवानी पड़ी। कथित तौर पर दो पुलिसकर्मियों ने बुधवार (अप्रैल 14, 2021) दोपहर उसकी खुली दुकान देखने के बाद उसे इतना प्रताड़ित किया कि उसने अस्पताल पहुँचने से पहले दम तोड़ दिया।

घटना के बाद इलाके में पुलिस की इस हरकत पर बड़े पैमाने पर विरोध होने लगा। नतीजन पुलिस कमिश्नर निखिल गुप्ता को स्वयं मामले पर संज्ञान लेकर दोनों पुलिसकर्मियों का उस्मानपुर पुलिस थाने से कंट्रोल रूम में ट्रांस्फर करना पड़ा। 

दोनों पुलिस वालों की पहचान इंस्पेक्टर दिलीप तारे और सब इंस्पेक्टर प्रवीण वाघ के तौर पर हुई। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि उन्होंने घटना पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जाँच शुरू कर दी है। इस जाँच को क्राइम बैच के इंस्पेक्टर अविनाश अघाव हेड करेंगे। अगर जाँच में कोई पुलिसकर्मी या अधिकारी दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई होगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हेयर सलून के मालिक का नाम फिरोज खान था। घटना के बाद उनके परिजनों और स्टाफ ने बताया कि दोपहर में सैलून खुला देखने के बाद पुलिस ने फिरोज को बाहर बुलाया, जब वह गए तो पुलिस उन्हें मारने लगी। इस दौरान पूरी घटना सीसीटीवी में भी कैद हुई।

परिजनों के अनुसार, हल्ले-गुल्ले में खान दुकान के शटर पर जा गिरे और उनके सिर पर चोट आ गई। बेहोशी की अवस्था में उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने बताया कि फिरोज पहले ही दम तोड़ चुके थे।

अस्पताल से फिरोज का शव लेने के बाद सभी परिजन उस्मानपुर पुलिस थाने गए और दोनों पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मर्डर केस दर्ज करवाने की माँग की। देखते ही देखते सारी घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और शहर के विभिन्न कोनों से लोग आकर थाने के सामने विरोध करने लगे।

इसी दौरान नगर सांसद इम्तियाज जलील भी घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने मृतक के परिवार को सांत्वना देते हुए प्रदर्शन कर रहे लोगों को शांत कराया। इसके बाद बॉडी को GMCH ले जाया गया, जहाँ पहले पोस्टमॉर्टम हुआ और बाद में शव परिजनों को सौंप दिया गया।

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में ‘गौमांस’ वाले कॉन्ग्रेसी MLA इरफान अंसारी ने की पूजा, BJP सांसद ने उठाई गिरफ्तारी की माँग

झारखंड के मधुपुर में विधानसभा उपचुनावों के मद्देनजर कॉन्ग्रेस विधायक इरफान अंसारी के खुद को शिवभक्त बताकर बाबाधाम में पूजा अर्चना करने से बवाल हो गया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस घटना के बाद अंसारी की गिरफ्तारी की माँग उठाई है। दुबे का कहना है कि जैसे गैर मुस्लिम मक्का में नहीं जाते, वैसे बाबा बैद्यनाथ के मंदिर में गैर हिंदू प्रवेश नहीं कर सकता।

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस नेता इरफान अंसारी बुधवार (अप्रैल 14, 2021) को देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर पहुँचे थे। यहाँ मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी उनका मन विचलित होता है तो वह बाबाधाम आते हैं और चुपके से शीश नवाकर पूजा अर्चना करते हैं।

अंसारी की इसी हरकत से गोड्डा सांसद व भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी पर धार्मिक भावना के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। वह बोले कि जिस तरह काबा में गैर मुस्लिम नहीं जा सकते, उसी तरह द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ मंदिर में गैर हिंदू का प्रवेश नहीं हो सकता है। इरफान अंसारी ने वहाँ जाकर हिंदुओं की धार्मिक भावना से खिलवाड़ किया है।

सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड सरकार से अंसारी पर रासुका लगाने और देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की अपील की। उनका कहना है कि इरफान का पागलपना बढ़ गया है। वह कभी गौमाता पर बोलते हैं, कभी गंगा मैया पर, लेकिन इस बार जो किया, वह किसी भी चीज की हद है।

अपने ट्वीट में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लिखा, “आज ग्लानि हुई कि मेरे सांसद रहते, बाबा बैद्यनाथ मंदिर के गर्भगृह में कॉन्ग्रेस विधायक इरफ़ान अंसारी ने पूजा के बहाने ज्योतिर्लिंग को स्पर्श कर अपवित्र करने का प्रयास किया,आस्था के अनुसार मक्का में गैर मुस्लिम का प्रवेश वर्जित है, गर्भगृह में गौमांस भक्षण करने वालों का प्रवेश?”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, निशिकांत दुबे ने इस बाबत अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। यहाँ उन्होंने डीसी-एसपी को बर्खास्त करने की माँग उठाई। डीसी मंदिर प्रबंधन के सचिव हैं। दुबे ने घटना को शर्मसार करार देते हुए कहा कि ऐसा कभी नहीं हुआ था। एक बार फारूक अब्दुल्लाह भी मंदिर आए थे, लेकिन उन्हें भी प्रांगण तक ले जाया गया, गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं दी गई।

सांसद निशिकांत दुबे के अनुसार, इरफान का यह प्रयास मधुपुर चुनाव में हिंदू-मुस्लिम भावना भड़काने के लिए हुआ है। इस संबंध में वह मुख्य सचिव से बात कर चुके हैं। अब भाजपा चुनाव आयोग और मुख्य सचिव से मिल कर कार्रवाई की माँग करेगी।

बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता इरफान अंसारी झारखंड के जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं। इससे पहले वह गोड्डा लोकसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बुधवार को बाबाधाम पहुँचकर पूजा अर्चना करने के बाद उन्होंने जब खुद को शिवभक्त बताया तो भाजपा ने इसका खुलकर विरोध किया और बिना देर किए राँची स्थित मुख्य निर्वाचन कार्यालय में इसकी शिकायत करवाई।

भाजपा की ओर से कहा गया कि बैद्यनाथ धाम मंदिर में हिन्दू धर्म को छोड़कर किसी अन्य धर्म के व्यक्ति के जाने और पूजा-अर्चना करने पर पूरी तरह से मनाही है। ऐसे में इरफान अंसारी बाहरी होकर मंदिर गए और वहाँ उन्होंने पंडा समाज और ब्राह्मणों को नीचा दिखाया।

पार्टी की ओर से यह भी बताया गया कि कॉन्ग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर के गर्भ गृह में न केवल पूजा अर्चना की, बल्कि अमर्यादित, धार्मिक उन्माद फैलाने जैसा शब्दों का प्रयोग भी किया। पार्टी ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि आखिर देवघर उपायुक्त और पुलिश अधीक्षक ने उन्हें ये अनुमति दी कैसे? पार्टी का कहना है कि देवघर के उपायुक्त लगातार ऐसे काम कर रहे हैं, जिससे जेएमएम प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बने।

‘मुहर्रम के कारण दुर्गा विसर्जन को रोका’ – कॉन्ग्रेस के साथी मौलाना सिद्दीकी का ममता पर आरोप

पश्चिम बंगाल के फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीर मौलाना अब्बास सिद्दीकी राजनीतिक रूप से काफी महत्वाकांक्षी हैं। बंगाल में इनके बड़े फॉलोवर्स हैं। मौलाना अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए कॉन्ग्रेस और वामपंथियों के साथ मिलकर 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

द हिंदू को दिए इंटरव्यू में मौलाना सिद्दीकी ने कहा, “मैं केवल मुसलमानों को नहीं, बल्कि सभी गरीबों और वर्तमान राजनीतिक ढाँचे से खुद को ठगा महसूस कर रहे लोगों को संबोधित कर रहा हूँ। मैं उन सभी के साथ गठबंधन के लिए तैयार था, जो मेरी शर्तों को मानने के साथ मुझे सीटें देता, लेकिन ममता बनर्जी तैयार नहीं हुईं, जबकि कॉन्फ्रेंस और लेफ्ट फ्रंट ने मेरी शर्तों को माना।”

बता दें कि मौलाना सिद्दीकी का पश्चिम बंगाल में बड़ा जनाधार है। राज्य के कम से कम पाँच जिलों, उत्तर और दक्षिण परगना, हावड़ा, हुगली, नादिया और पूर्वी मिदनापुर के कुछ हिस्सों तक में उसके फॉलोवर्स की भारी तादात है।

सिद्दीकी ने भाजपा के लिए रास्ता आसान करने के सवाल पर जोर देकर कहा कि वह नबाना या राज्य सचिवालय में बीजेपी की पहुँच को आसान नहीं होने देंगे। बंगाल का चुनाव अब तक के सर्वाधिक ध्रुवीकरण के दौर में है। अब्बास सिद्दीकी कहते हैं, “अगर कोई मुझे जाहिल और असभ्य कहता है तो मैं उससे पूछता हूँ कि जब 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा जीती थी तो उस वक्त तो मैं था ही नहीं।” अब्बास सिद्दीकी ने ममता बनर्जी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा:

“ममता बनर्जी के कार्यों के कारण भाईचारे का अंत हो रहा है। प्रशासन ने मुहर्रम के कारण दुर्गा विसर्जन को रोक दिया था। इसकी माँग किसने की? कहा गया था कि इमामों को 2,500 रुपए मिलेंगे, लेकिन इस बात का खुलासा नहीं किया गया कि वो पैसा वक्फ बोर्ड से आया था। जब ममता का जनाधार खिसकने लगा तो उन्होंने मंदिरों के पुजारियों को भी पैसे देने की बात कही। हम केवल वही चाहते हैं, जो संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार हैं। इस तरह की राजनीति के कारण सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ है कि समुदायों के बीच भाईचारा प्रभावित हुआ है। बंगाल में भाजपा के आगमन के लिए खुद ममता बनर्जी ही जिम्मेदार हैं। वह वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री थीं और मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भाजपा केवल मजबूत हुई है।”

50 करोड़ हिंदुओं के मरने की दुआ

पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भाईचारे का राग अलाप रहे मौलाना फुरफुरा शरीफ के वही पीरजादा हैं, जिन्होंने अप्रैल 2020 में वायरस से 50 करोड़ हिंदुओं के मरने की दुआ माँगी थी। उन्होंने वायरल वीडियो में कहा था, “बहुत जल्द मेरे पास खबर आई है कि पिछले दो दिनों से मस्जिदों में आग लगाई जा रही है, माइक जलाए जा रहे हैं। मुझे लगता है कि एक महीने के अंदर ही कुछ होने वाला है। अल्लाह हमारी दुआ कबूल करे। अल्लाह हमारे भारतवर्ष में एक ऐसा भयानक वायरस दे कि भारत में दस-बीस या पचास करोड़ लोग मर जाएँ। क्या कुछ गलत बोल रहा मैं? बिलकुल आनंद आ गया इस बात में।” इसके बाद वहाँ मौजूद भीड़ ने भी मौलवी की कही बात पर खूब शोर के साथ अपनी सहमति दर्ज कराई थी।

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव का ऐलान होने से कुछ ही घंटों पहले ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार ने फुरफुरा शरीफ के विकास के लिए 1 मार्च 2021 को 2.60 करोड़ रुपए आवंटित किया था। गौरतलब है कि बंगाल में ममता मुस्लिम वोटों के सहारे ही सत्ता पर काबिज होती आई हैं।

खुद को ओवैसी का बड़ा फैन बताने वाले मौलाना सिद्दीकी चुनाव के समय गरीबों और दलितों की बात कर रहे हैं, लेकिन बीते साल 28 नवंबर 2020 में उन्होंने कहा था, “हम मुस्लिम यहाँ पर बहुसंख्यक हैं। आदिवासी, मथुआ और दलित हिन्दू नहीं हैं, इसीलिए यहाँ हम मेजॉरिटी में हैं।”

‘जब गैर मजहबी मरते हैं तो खुशी…’ – नाइजीरिया का मंत्री, जिसके अलकायदा-तालिबान समर्थन को लेकर विदेशी मीडिया में बवाल

नाइजीरिया के संचार मंत्री इसा अलियू पंतामी (Isa Aliyu Pantami) को लेकर कुछ दिन पहले विदेशी समाचार में खबर चली कि पंतामी के संबंध बोको हरम नाम के आतंकी संगठन से हैं और अमेरिका की खूफिया एजेंसी ने उन्हें अपनी वॉचलिस्ट में रखा हुआ है। 

अब यूएस खूफिया एजेंसी की वॉचलिस्ट सार्वजनिक नहीं है, इसलिए उस रिपोर्ट के दावों को खारिज कर दिया गया। साथ ही कई अन्य वेबसाइट्स ने फैक्ट चेक करके बिंदुवार तरीके से बताया कि कैसे रिपोर्ट में लिखी बातें गलत हैं जबकि पंतामी का असलियत में बोको हरम से कोई लेना-देना नहीं है। 

इसी बीच इसा को लेकर एक बहस और उठी। इसमें दावा किया गया कि इसा पंतामी भले ही बोको हरम से कोई संबंध न रखता हो, मगर वह अलकायदा और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों का खुलकर समर्थन करता है।

इस नई बहस का आधार इसा पंतामी के कुछ पुराने बयान हैं। इसमें वह जिहाद को लेकर कह रहा है, “यह जिहाद हर एक आस्तिक के लिए एक दायित्व है, विशेष रूप से नाइजीरिया में।” आगे वह दुआ करते हुए कहता है, “या अल्लाह, तालिबान और अलकायदा को जीत दिलाओ।”

जाहिर है कि कोई भी शख्स इस प्रकार जिहाद का महिमामंडन और आतंकी समूहों की जीत की प्रार्थना बिना इस्लामी कट्टरपंथी हुए नहीं करेगा। शायद यही वजह है कि जब बोको हरम पर सफाई देते हुए नाइजीरिया के मंत्री ने दावा किया कि वह आतंकियों के ख़िलाफ पिछले 15 साल से बोल रहे हैं, उस समय लोगों को उनकी पुरानी बातें याद आ गईं।

पीपुल गैजेट की रिपोर्ट में एक 2019 में प्रकाशित एक अकादमिक दस्तावेज ‘डिबेटिंग बोको हरम’ का जिक्र है। इसी का हवाला देकर रिपोर्ट में बताया गया कि एक बार पंतामी ने शांति और समझ के नाम पर अहलुस सुन्ना समुदाय के राजनेताओं और धार्मिक नेताओं को बुलाया, लेकिन बातें जिहाद की हुई और अंत में ये दुआ की गई कि अल्लाह तालीबान और अलकायदा को जीत दिलाए।

बता दें कि केवल एक बार ही ऐसा नहीं हुआ, जब इसा ने इस प्रकार खुल कर अलकायदा के लिए बोला, बल्कि साल 2006 में अलकायदा नेता के मरने पर पंतामी ने खेद व्यक्त किया था। इसके अलावा एक समय वह भी था, जब ओसामा बिन लादेन पर विचार पूछे जाने पर पंतामी ने स्वीकारा था कि जब गैर मजहबी मरते हैं तो उन्हें इसकी खुशी होती है… लेकिन शरीया बिना कारण उन्हें मारने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने कहा था, “हमारा उत्साह हमारे पाक मजहब पर हावी नहीं होना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि बोको हरम से संबंधों पर न्यूज छापे जाने से इसा नाराज थे। उन्होंने कहा था कि कई प्रकाशकों को वह उन्हें अपमानित करने के लिए कोर्ट में ले जाएँगे। हालाँकि, मालूम हो कि कई रिपोर्टस के अनुसार, 48 साल के इस नाइजीरिया मंत्री को लेकर कहा जाता है कि नाइजीरिया की राजनीति में कदम रखने से पहले इसा कई संस्थानों में जाकर नफरत भरी स्पीच देता था। मगर, साल 2019 में इसे संचार मंत्री बनाया गया, जिसके बाद इस पर आरोप लगे कि वह अपने पद का इस्तेमाल कट्टरपंथ फैलाने के लिए करता रहा है।

मजनू का टीला: पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की इस तरह से मदद कर रहा ‘सेवा भारती’, केजरीवाल सरकार ने छोड़ा बेसहारा

कोरोना से हर किसी का हाल बेहाल है। ऐसे में ऑपइंडिया की टीम निकली मजनू का टीला स्थित पाकिस्तान से आए उन हिन्दू शरणार्थियों का हाल-चाल लेने कि किस तरह से उन्होंने पूरा लॉकडाउन काटा, कौन सी मुसीबतें झेलीं? अभी के क्या हालात हैं और वहाँ ज़िन्दगी कितनी पटरी पर आई है? क्या किसी ने उनकी इस संकट के समय सुध ली, मदद की या नहीं? कैसे वह इस महामारी के समय खासतौर से दिल्ली में कोरोना की विकट परिस्थितियों के समय अपना जीवन चला रहे हैं?

हमें इसकी आवश्यकता इसलिए भी पड़ी कि हालिया कुछ रिपोर्टों और वीडियो में यह बात सामने आई थी कि कुछ NGO के लोग वहाँ सिर्फ बिस्कुट या किलो दो किलो चावल लेकर जाते हैं। मदद के नाम पर फोटो और तस्वीरें खिंचाते हैं फिर पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों के नाम पर अपनी दुकान चलाने के बावजूद भी उनकी जमीनी स्तर पर कोई मदद नहीं करते हैं। सोचने का विषय यह भी है कि ऐसे लोग कहाँ से इतनी कठोरता लेकर आते हैं कि जो खुद असहाय है उसको भी अपने मतलब के लिए इस तरह से इस्तेमाल करते हैं।

मजनू का टीला : पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी कैंप में उम्मीदें तलाशती ज़िन्दगी

ऐसा नहीं है कि इस तरह की हरकतों का उन शरणार्थियों को कुछ पता न हो वो जानते हैं। लेकिन बहुत हद तक खुद की मेहनत पर भरोसा रखने वाले उन पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों ने ऑपइंडिया को बताया कि कौन लोग हैं जो वास्तव में न सिर्फ इस कोरोना काल बल्कि जब से वह यहाँ बसे हैं तब से उनकी भरपूर मदद कर रहे हैं।

ऑपइंडिया ने लगभग 150 परिवार के करीब 650 पाकिस्तानी हिन्दुओं वाले इस शरणार्थी शिविर का जायजा लिया कि किस तरह से वहाँ लोग अभी रह रहे हैं। ज़्यादातर लोग अपनी झुग्गियों में थे तो कुछ यहाँ वहाँ भटकते और खाते हुए भी मिले। वहाँ के हालात उनकी बेबसी की कहानी खुद ही बयान कर रहे थे।

इस बाबत ऑपइंडिया ने यहाँ के प्रधान धर्मवीर सोलंकी से बात की। वो पाकिस्तान से भारत तीर्थ यात्रा के बहाने अपने बाकी कुटुंब के साथ 2013 में आए थे। उन्होंने हमसे बात करते हुए बताया कि कोरोना के दौर में बड़ी मुश्किल से सभी का समय बीता। हालाँकि, शुरू से ही आरएसएस और सेवा भारती के लोग हमारी मदद करते रहे हैं तो कोरोना और लॉकडाउन के दौरान भी आरएसएस और सेवा भारती ने उनकी मदद की।

उन्होंने हमें बताया कि पाकिस्तान से आने के कुछ समय बाद जब सरकार से कागज मिला तब से दूसरे के यहाँ मजदूरी करके इस आस में किसी तरह जीने का संघर्ष करने लगे कि एक दिन वो भारत के हैं और भारत के ही हो जाएँगे। CAA कानून बन जाने के बाद उनकी उम्मीद जगी थी लेकिन अभी उनकी नागरिकता पर मुहर लगना बाकी है। जिसकी ख़ुशी और दर्द दोनों उन्होंने ऑपइंडिया से साझा किया। धर्मवीर जी ने कहा कि अब तो और भी विकट परिस्थिति है, क्योंकि लोग कोरोना के डर की वजह से काम भी नहीं दे रहे हैं। इसकी वजह से वहाँ रह रहे लोगों की स्थिति और भी ख़राब होती जा रही है।

उन्होंने आरएसएस और सेवा भारती से जुड़ें कुछ नाम भी गिनाए जो न सिर्फ उनकी बल्कि गोशाला के जानवरों की भी मदद कर रहे हैं। दिल्ली में जबकि बीजेपी की सरकार नहीं है फिर भी आरएसएस के लोग सेवा भावना से भरकर लगातार उनकी मदद को तैयार हैं। वहीं जब हमने धर्मवीर जी से दिल्ली सरकार से मिलने वाली मदद के बारे में सवाल किया तो उनका साफ़ कहना था कि केजरीवाल सरकार से जुड़ा कोई व्यक्ति जब इतने सालों में मदद को नहीं आया तो कोरोना में क्या कहें? उन्होंने कहा कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार उनकी नहीं सुन रही। उन्होंने यह बी बताया कि केजरीवाल के लोग यहाँ 5-6 साल पहले आए थे। इसके बाद नहीं आए। उस समय उन्होंने बिजली लगाने का वादा किया था, लेकिन कुछ भी नहीं किया। जैसे-तैसे सोलर लैंप और और जुगाड़ से वो लोग बिजली का काम चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को दिल्ली सरकार की तरफ से राशन भी नहीं मिला।

मजनू का टीला : पाकिस्तान से आए सोना दास ने सुनाई बस्ती की व्यथा, किसी तरह घर सँभालने की जद्दोजहद करतीं शरणार्थी महिला

यह पूछे जाने पर कि आरएसएस और सेवा भारती के लोग उनकी और किस तरह से सेवा करते हैं तो उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें पता चलता है कि कोई बीमार है, उनकी गाड़ी आती है और मरीज को डॉक्टर के पास ले जाकर दवाइयाँ दिलवा देते हैं। इस तरह से भी सेवा भारती ने काफी मदद किया। उन लोगों ने गायों के लिए कम से कम 50,000 रुपए का चारा दिया। सेवा भारती के लोगों ने मास्क, दवाई और राशन को लेकर भी काफी मदद की।

पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी बस्ती के हालात जानने के लिए हमने सोना दास से भी बात की। उन्होंने बताया कि विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस के लोग यहाँ पर उनकी मदद के लिए आते हैं, मगर वो अपनी आजीविका चलाने के लिए मेहनत भी कर रहे हैं। वो लोग जब भी काम मिलता है मजदूरी, रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। लेकिन कोरोना के समय उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार को इनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए।

मजनू का टीला स्थित पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी शिविर में हमारी पड़ताल में हमें एक बार फिर से निस्वार्थ भाव से सेवा कार्यों में लगे आरएसएस और उसकी सेवा विंग सेवा भारती के स्वयं सेवक ही मिले। जिस समय हम वहाँ रिपोर्टिंग करने गए थे तो गौशाला के लिए चारा लेकर भी आरएसएस का एक स्वयं सेवक वहाँ आया था। जब हमने उनसे कैमरे पर कुछ बोलने के लिए कहा तो उनका कहना था हमारा काम सेवा करना है। बयान के लिए आप इस क्षेत्र के सेवा भारती इंचार्ज से बात कीजिए।

मजनू का टीला: ग्राहकों के इंतजार में कैंप के बाहर हिन्दू शरणार्थियों की कुछ दुकानें

जैसा कि ऑपइंडिया ने पहले भी रिपोर्ट किया है और यहाँ भी वही बात सामने आई कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काफ़ी समय से जरूरतमंदों के लिए बेहतरीन काम कर रहा है और लगातार जनसेवा में लगा हुआ है। न सिर्फ मजनू का टीला बल्कि संघ के संगठन ‘सेवा भारती’ ने पूरी दिल्ली में ग़रीबों को खाना खिलाने से लेकर बेसहारा लोगों को ज़रूरी संसाधन मुहैया कराने के लिए दिन-रात एक किया हुआ है। इसी कड़ी में सेवा भारती ने मजनूँ का टीला स्थित पाकिस्तानी हिन्दू रिफ्यूजी कैंप में रह रहे हिन्दू शरणार्थियों का भी भरपूर सहयोग किया।

मजनू का टीला: भगवान भरोसे हर रोज नए सपने देखते हैं पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी

बता दें कि पिछले साल भी कोरोना काल में सेवा भारती ने जरूरतमंदों की बढ़-चढ़ कर मदद की थी। पश्चिम दिल्ली के हस्तसाल नगर में जोमी चर्च (Zomi Church) से जुड़े 50 परिवारों के लगभग ढाई सौ सदस्य राशन और खाद्य सामग्री से परेशान थे। इस चर्च में ज्यादातर नार्थ-ईस्ट के लोग थे, खासकर मिजोरम के निवासी थे। जानकारी मिलने पर सेवा भारती संगठन के कार्यकर्ता इस चर्च के जरूरतमंद लोगों के पास पहुँचे और उन्होंने राशन तथा अन्य चीजें उपलब्ध करवाईं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े इस संगठन ने कोरोना वॉरियर्स के लिए सहयोग राशि देने का भी ऐलान किया था। संगठन ने कहा था कि सफाईकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी और पत्रकार ऐसी विपरीत परिस्थितियों में अपना दायित्व निभा रहे हैं और समाज की मदद करने के लिए अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं। ऐसे में संगठन ने फैसला लिया कि अगर गैर सरकारी सफाईकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी (अनुबंधित) या कोई पत्रकार कोविड-19 से प्रभावित हैं तो उनकी भी मदद की जाएगी।

रेलवे स्टेशनों से लेकर बस स्टेशनों तक फँसे लोगों की मदद की गई। सबसे बड़ी बात कि दिल्ली के रेडलाइट एरिया में रहने वाली 986 महिलाओं तक लगातार राशन-सामग्री पहुँचाई गई। इसके अलावा घुमंतू लोगों का भी ध्यान रखा गया, जिनके पास सरकार भी नहीं पहुँच पाती है।