प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे का शनिवार (मार्च 27, 2021) को दूसरा दिन है। अपने दौरे के दूसरे दिन सबसे पहले PM मोदी दक्षिण-पूर्व सतखिरा स्थित जेशोरेश्वरी काली मंदिर पहुँचे, यहाँ उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
Bangladesh: PM Narendra Modi placed a handmade ‘mukut’ on goddess Kaali idol. The ‘mukut’ is made of silver with gold plating and was hand-made over three weeks by a traditional artisan. pic.twitter.com/luoo1TbsBJ
बांग्लादेश के सतखीरा में स्थित मशहूर जशोरेश्वरी काली मंदिर 51 शक्तिपीठ में से एक सुगंधा शक्तिपीठ है। बताया जाता है यहाँ देवी सती की हथेलियाँ गिरी थीं। इसके बाद एक ब्राह्मण ने यहाँ मंदिर का निर्माण कराया था। ये मंदिर करीब 400 साल पुराना बताया जाता है। पीएम मोदी ने यहाँ माँ काली को हाथ से निर्मित मुकुट पहनाया, उनके चरणों में साड़ी भेंट की। इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। यह मुकुट चाँदी से बना है, जिस पर सोने की परत चढ़ाई गई है।
Bangladesh: Prime Minister Narendra Modi offers prayers at Jeshoreshwari Kali Temple in Ishwaripur, Satkhira district.
उन्होंने कहा, “मैंने कामना की कि माँ काली दुनिया को कोरोना के संकट से मुक्ति दिलाएँ। मेरी कोशिश रहती है कि मौका मिले तो इन 51 शक्तिपीठों में जाकर माथा टेकूँ। मैंने सुना है कि यहाँ नवरात्रि में जब माँ काली का मेला लगता है, तो सीमा के इस पार से भी बड़ी तादाद में भक्त यहाँ आते हैं। यहाँ एक कम्युनिटी हॉल की आवश्यकता है। यह भक्तों के लिए और आपदा के समय लोगों के लिए शरणस्थल का काम करे। भारत सरकार यह कम्युनिटी हॉल बनवाएगी।”
Bangladesh: PM Narendra Modi placed a handmade ‘mukut’ on goddess Kaali idol. The ‘mukut’ is made of silver with gold plating and was hand-made over three weeks by a traditional artisan. pic.twitter.com/luoo1TbsBJ
जेशोरेश्वरी मंदिर में पूजा अर्चना के बाद लोगों को संदेश देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले कुछ दिनो में चैत्री नवरात्र का प्रारंभ होगा। पूर्व 51 शक्तितपीठ में से एक माँ काली के चरणो में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज माँ काली के चरणों आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है।”
#WATCH “Today, I got the opportunity to offer prayers before Maa Kali…I prayed to her to free the human race from COVID19,” says Prime Minister Narendra Modi at Jeshoreshwari Kali Temple in Bangladesh pic.twitter.com/Jxz8v425xQ
पीएम मोदी ने इसके साथ ही कहा, “आज मानवजाति कोरोना के कारण सकंट से गुजर रही हैं। माँ से यही प्रार्थना है मानवजाति को कोरोना से जल्द से जल्द मुक्ति दिलाए।” प्रधानमंत्री ने कहा कि सर्वेभवन्तो जिस मंत्र को जिया है, वसुधैव कुटंबकम हमारी विरासत, पूरी मानव कल्याण के लिये प्रार्थना करते हैं। पूरे देश के कल्याण मानवजात की कल्याण की प्रार्थना करता हूँ।
पीएम मोदी ने इसके साथ ही कहा, “माँ काली का मेला लगता है, जिसमें सीमा पार से लोग आते हैं। यहाँ मल्टीपरपस कम्युनिटी हाल की आवश्यकता है। कोई काली पूजा के समय आए तो उनके उपयोग में आए। यहाँ के समाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक प्रोग्राम, आपदा, साइक्लोन के समय हर किसी के शेल्टर का स्थान बने। इस हेतु से भारत सरकार यहाँ ये कल्याण कार्य करेगी।” इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश सरकार का भी आभार व्यक्त किया।
पीएम मोदी के तय कार्यक्रम के मुताबिक, वे ओराकंडी मंदिर भी जाएँगे। ओराकांडी वहीं जगह है, जहां मतुआ समुदाय के संस्थापक हरिशचंद्र ठाकुर का जन्म हुआ था। मतुआ समुदाय बंगाल चुनाव के लिहाज से भी काफी मायने रखता है। इसके बाद पीएम राष्ट्रपिता बागाबंधु शेख मुजिबुर रहमान के स्मारक पर भी पहुँचेंगे। पीएम मोदी के आगमन को लेकर मंदिर भव्य तरीके से सजाया गया है।
इसके बाद पीएम गोपालगंज जिले के तुंगीपारा में राष्ट्रबंधु के पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की स्मारक पर भी जाएँगे। यह बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हसीना का पैतृक गाँव है। यहाँ बने स्मारक में यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। इससे पहले बांग्लादेश के 50वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यात्रा के पहले दिन शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को प्रधानमंत्री मोदी ने राजनेताओं से मुलाकात की थी।
मोदी के दौरे से पहले ही हुआ जीर्णोद्धार
बांग्लादेश सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले ही जशोरेश्वरी मंदिर का जीर्णोद्धार किया है। बांग्लादेश के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया था कि वे प्राचीन जशोरेश्वरी काली मंदिर में देवी काली की पूजा करने के लिए काफी उत्साहित हैं।
मतुआ समुदाय के सबसे बड़े तीर्थ स्थल जाएँगे
प्रधानमंत्री मोदी ओरकांडी में मतुआ समुदाय के सबसे बड़े तीर्थ स्थल ठाकुरबाड़ी में करीब 300 मतुआ धर्म प्रचारकों को संबोधित भी करेंगे। इसके बाद मोदी अपने समकक्ष शेख हसीना के साथ वार्ता करेंगे। इसके बाद वे बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद से भी मुलाकात करेंगे।
कोरोना के चलते साल 2020 में यात्रा रद्द की गई थी
बीते साल कोरोना संक्रमण के शुरुआत के बाद PM की जो विदेश यात्रा मार्च 2020 में रद्द की गई थी वो बांग्लादेश की ही थी। PM मोदी को शेख मुजीबुर रहमान जन्मशती कार्यक्रम में शरीक होने के लिए पहले 17 मार्च 2020 को बांग्लादेश की यात्रा करनी थी। हालांकि, कोविड-19 महामारी के बीच अपनी विदेश यात्राओं का सिलसिला शुरू करने के लिए उन्होंने पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश को ही चुना।
ब्रिटेन के वेस्ट यॉर्कशायर (West Yorkshire) के एक स्कूल में व्यंग्य मैग्जीन शार्ली एब्दो (Charlie Hebdo) में प्रकाशित हुए पैगंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून दिखाने पर मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने वहाँ स्कूल के बाहर प्रदर्शन करते हुए उस टीचर के सस्पेंशन की माँग की। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि स्कूल के हेडमास्टर को स्वयं इस संबंध में माफी माँगनी पड़ी और प्रदर्शनकारियों की बात मानते हुए टीचर को निलंबित कर दिया गया। वहीं मौत के खतरे के बाद उसे अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अब उनके कुछ छात्रों ने उनकी नौकरी बचाने के लिए एक याचिका शुरू की है, जिस पर 13,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। उनकी नौकरी बचाने के अभियान का समर्थन करने वाले लोगों ने उन्हें एक ‘अच्छे इंसान’ और ‘मेहनती शिक्षक’ बताते हुए कहा कि वे ‘सभी धर्मों का सम्मान करने वाले’ हैं। अन्य ने जोर देकर कहा कि स्कूल को उनके द्वारा खड़े होना चाहिए, उन्हें ‘कट्टरपंथी’ द्वारा ‘तंग’ किया जा रहा है।
एक मुस्लिम माता-पिता ने याचिका पर हस्ताक्षर किया, जिसका नाम मोहम्मद जे था। उन्होंने कहा, “मैं स्कूल और संबंधित शिक्षक के लिए अपना समर्थन देना चाहूँगा। उन्होंने मेरी बेटी को पढ़ाया है और वह उनके बारे में बहुत बात करती है। मुझे उन्हें उसे फिर से पढ़ाते हुए देखने में कोई संकोच नहीं होगा। मुझे विश्वास है कि शिक्षक का कोई अपराध नहीं था और मुझे उम्मीद है कि जाँच के बाद वह स्कूल में वापस लौट आएँगे।”
एक अन्य हस्ताक्षरकर्ता ने कहा, “उनसे कई छात्र प्यार करते हैं, जिसमें मुस्लिम और गैर मुस्लिम दोनों हैं। बाटली ग्रामर अपने खुद के एक के लिए खड़े हो जाओ। एक अच्छे शिक्षक को मत खोओ।”
शिक्षा सचिव गेविन विलियमसन ने विरोध प्रदर्शन की निंदा की है और कहा है कि स्कूलों को कक्षा में ‘चुनौतीपूर्ण या विवादास्पद’ सामग्री दिखाने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। समुदाय के सचिव रॉबर्ट जेनरिक ने कहा कि यह बहुत परेशान करने वाला था कि शिक्षक को छिपने के लिए मजबूर किया गया है।
शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने इस प्रकार धमकियाँ देने वाले और कोरोना वायरस प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले प्रदर्शन की आलोचना की और इसे किसी भी कीमत पर अस्वीकार्य कहा। प्रवक्ता ने कहा कि विद्यालय अपने पाठ्यक्रम में, मुद्दे, विचार और सामग्रियों को शामिल करने के लिए स्वतंत्र हैं चाहे वे चुनौतीपूर्ण हों या फिर विवादित… उन्हें विभिन्न आस्था और विश्वासों के लोगों के बीच सम्मान और सहिष्णुता को बढ़ावा देने की आवश्यकता के साथ इसे संतुलित करना चाहिए, जिसमें यह तय किया जाए कि कक्षा में किस सामग्री का उपयोग करना है।
शिक्षक के पड़ोसी ने बताया कि उन्होंने कल सुबह 9.30 बजे अपना घर छोड़ दिया। वो एक काले वाहन में सवार होकर चले गए। उनकी खुद की गाड़ी अभी भी घर के पास खड़ी है। वे जल्दी में लग रहे थे और वे कल रात वापस नहीं आए।
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, बैटले ग्रामर स्कूल के हेड गैरी किबल ने, मजहबी शिक्षा का पाठ पढ़ाने के दौरान एक टीचर द्वारा इस्तेमाल शार्ली एब्दो के आपत्तिजनक कार्टून पर छात्रों के अभिभावकों से माफी माँगी। किबल ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले में आगे पड़ताल बैठाएँगे।
अभिभावकों को भेजे गए ईमेल में उन्होंने लिखा, “जाँच में ये साफ है कि पाठ पढ़ाने के दौरान इस्तेमाल किए गए संसाधन बिलकुल गलत थे और स्कूल के एक समुदाय के सदस्यों को आहत करने वाले थे। इस गलती के लिए हम ईमानदारी से और पूर्णत: माफी माँगते हैं।”
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले पेरिस में 47 वर्षीय इतिहास के एक टीचर सैमुअल पैटी का स्कूल के बाहर गला रेत दिया गया था। उनकी गलती बस इतनी थी कि क्लास में ‘शार्ली एब्दो’ अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। इसी बात पर हत्यारे ने अल्लाह हू अकबर चिल्लाते हुए घटना को अंजाम दिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के बांग्लादेश दौरे पर हैं। शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को उन्होंने बांग्लादेश के नेशनल डे के कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कुछ ऐसा कहा, जिसके बाद उनके आलोचक उस तथ्य को झूठ मानकर उन्हें ट्रोल करने लगे। लेकिन शायद उन्हें उस सत्याग्रह के बारे में जानकारी ही नहीं थी, जिसका पीएम मोदी जिक्र कर रहे थे। आईए जानते हैं क्या है पूरा मामला?
क्या कहा पीएम मोदी ने?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व और 1971 की बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में भारतीय सेना के योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद और प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ देश की स्वतंत्रता की 50 वीं वर्षगाँठ पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम ने बताया कि उन्होंने भी बांग्लादेश की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था।
उन्होंने कहा, “बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में शामिल होना मेरे जीवन के भी पहले आंदोलनों में से एक था। मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी, जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था। बांग्लादेश की आजादी के समर्थन में तब मैंने गिरफ्तारी भी दी थी और जेल जाने का अवसर भी आया था। यानी बांग्लादेश की आजादी के लिए जितनी तड़प इधर थी, उतनी ही तड़प उधर भी थी।”
भारतीय सेना के पराक्रम को किया याद
नेशनल परेड स्क्वायर पर बांग्लादेश की आजादी की स्वर्ण जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने उसकी आजादी की लड़ाई में भारतीय सेना की भूमिका को याद किया और कहा कि बांग्लादेश में अपनी आजादी के लिए लड़ने वालों और भारतीय जवानों का रक्त साथ-साथ बहा था और रक्त ऐसे संबंधों का निर्माण करेगा, जो किसी भी दबाव से टूटेगा नहीं।
ट्रोल करने में जुटे आलोचक
वहीं, पीएम मोदी के इस तथ्य के बाद उनके आलोचक उन्हें ट्रोल करने की कोशिश में जुट गए। एनडीटीवी के ‘पत्रकार’ रवीश कुमार ने इस पर व्यंग्य लिख कर पीएम मोदी पर निशाना साधने की कोशिश की तो वहीं प्रधानमंत्री की टिप्पणी का हवाला देते हुए कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय ज्ञान: हमारे प्रधानमंत्री बांग्लादेश को भारतीय ‘फर्जी खबर’ का स्वाद चखा रहे हैं। हर कोई जानता है कि बांग्लादेश को किसने आजाद कराया।’’ कॉन्ग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी निशाना साधते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘संपूर्ण राजनीतिक विज्ञान’ करार दिया।
International education: our PM is giving Bangladesh a taste of Indian “fake news”. The absurdity is that everyone knows who liberated Bangladesh. https://t.co/ijjDRbszVd
आँख मूँद कर आलोचना करने वालों को नहीं पता था कि पीएम मोदी जिस सत्याग्रह के बारे में बात कर रहे हैं, पीएम के समर्थक उसकी पूरी जानकारी सोशल मीडिया पर रख कर दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे।
12 दिन चला था सत्याग्रह, 10000+ कार्यकर्ता हुए थे गिरफ्तार
जनसंघ ने अगस्त 1971 में बांग्लादेश सत्याग्रह शुरू किया था। यह 12 दिन तक चला था। इस दौरान जन संघ के हजारों कार्यकर्ता गिरफ्तार भी हुए थे। सत्याग्रह के आखिरी दिन 1200 महिलाओं और बच्चों समेत करीब 10 हजार कार्यकर्ता जेल गेए थे। यहाँ तक कि जनसंघ के अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ने सत्याग्रह को संबोधित भी किया था।
Was Prime Minister Modi part of satyagrah organised by Jana Sangha for recognition of Bangladesh?
Yes, he was.
A citation awarded by Bangladesh to Vajpayee ji speaks of the rally.
आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी बांग्लादेश द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी को दिए गए प्रशस्ति पत्र को शेयर करते हुए ट्वीट किया, “क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश को पहचान दिलाने के लिए जन संघ द्वारा आयोजित सत्याग्रह का हिस्सा थे? हाँ, वह इसका हिस्सा थे। बांग्लादेश द्वारा वाजपेयी को दिया गया प्रशस्ति पत्र रैली के बारे में बताता है। पीएम मोदी ने 1978 में लिखी एक किताब में बांग्लादेश सत्याग्रह के दौरान तिहाड़ जाने के बारे में भी लिखा था।”
प्रशस्ति पत्र
इस प्रशस्ति पत्र में कहा गया है, “बांग्लादेश के लोग हमेशा अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के कारण का समर्थन करने और बांग्लादेश और भारत के बीच दोस्ती को मजबूत करने के लिए किए गए महत्वपूर्ण योगदान को याद रखेंगे।”
आलोक मिश्रा नाम के ट्विटर यूजर ने 1978 में लिखी गई एक किताब का बैक कवर शेयर किया है, जिसमें बांग्लादेश के निर्माण के लिए चले आंदोलन में नरेंद्र मोदी की भूमिका का जिक्र है।
उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “पीएम नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के निर्माण के लिए सत्याग्रह में भाग लेने और इसके लिए जेल जाने का ढाका में ज़िक्र क्या किया। उनके आलोचकों के पेट में दर्द हो गया। संदेह का माहौल खड़ा किया जाने लगा। इन आलोचकों को 1978 में प्रकाशित इस किताब के बैक कवर को देखकर मायूस होना पड़ेगा।”
“आपातकाल के बीस महीने, सरकारी तंत्र की नाकामयाबी को साबित करते हुए भूगर्भ में रहकर काम किया और संघर्ष प्रवृति को चलाए रखा। इससे पहले बांग्लादेश के सत्याग्रह के समय तिहाड़ जेल होकर आए।” इसे पढ़ने के बाद शर्म आए, तो बिना तथ्य जाने विवाद पैदा करना छोड़ देना चाहिए मोदी के आलोचकों को।
उन्होंने आगे लिखा, “इस किताब के बैक कवर पर तब आरएसएस के युवा प्रचारक रहे नरेंद्र मोदी का जो परिचय है, उसमें साफ तौर पर बांग्लादेश के निर्माण के लिए चले आंदोलन में नरेंद्र मोदी की भूमिका का जिक्र है। जिन्हें गुजराती नहीं आती, उनके लिए चौथे पैराग्राफ का गुजराती अनुवाद आगे दे रहा हूँ।”
आलोक मिश्रा ने गुजराती अनुवाद देते हुए लिखा, “आपातकाल के बीस महीने, सरकारी तंत्र की नाकामयाबी को साबित करते हुए भूगर्भ में रहकर काम किया और संघर्ष प्रवृति को चलाए रखा। इससे पहले बांग्लादेश के सत्याग्रह के समय तिहाड़ जेल होकर आए।” इसे पढ़ने के बाद शर्म आए, तो बिना तथ्य जाने विवाद पैदा करना छोड़ देना चाहिए मोदी के आलोचकों को।”
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ढाका में बांग्लादेश के राजनीतिक और सामुदायिक नेताओं से मुलाकात की, जिनमें अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि तथा बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के मुक्ति योद्धा शामिल रहे। विदेश मंत्रालय के अनुसार मोदी ने सत्तारूढ़ ग्रैंड अलायंस के नेताओं से मुलाकात की, जिस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़े विविध विषयों पर चर्चा की।
असम में 27 मार्च 2021 यानी आज सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया। वोटर अपने मत शाम 6 बजे तक डाल पाएँगे। चुनाव आयोग ने कोविड और सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए इस बार वोट डालने का समय बढ़ा दिया है।
Temperature of voters being checked, arrangement of masks, gloves, and hand sanitiser made at a primary school – designated as a polling booth – in Lahowal Assembly constituency of Dibrugarh.#AssamAssemblyPollspic.twitter.com/VOaY0Q0lGl
कोविड को देखते हुए वोटरों और मतदान कराने वाले अधिकारियों तक की सुरक्षा व स्वास्थ्य का ख्याल रखा गया है। इसके लिए मतदान केंद्रों पर मास्क, ग्लव्स और हैंड सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था चुनाव आयोग ने की है। मतदाताओं ने भी सुबह-सुबह भारी संख्या में मतदान केंद्रों तक आकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है।
असम चुनाव, पहला चरण: 47 विधानसभा, 264 उम्मीदवार, 8109815 वोटर्स
असम विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 27 मार्च को जो वोटिंग हो रही है, उसमें ऊपरी असम क्षेत्र के 11 जिलों की 42 और मध्य असम के नागाँव जिले की 5 सीटें शामिल हैं। इन 47 विधानसभा के लिए 264 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन 264 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 81,09,815 वोटर्स करेंगे।
असम विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 11,537 मतदान केंद्रों पर लैंगिक आधार पर वोटरों की बात करें तो 40,77,210 पुरुषों और 40,32,481 महिलाओं सहित 81,09,815 मतदाता वोट डालेंगे।
असम में पहले चरण के VVIP सीट और उम्मीदवार
असम के वर्तमान मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, असम कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रिपुन बोरा, असोम गण परिषद (भाजपा की सहयोगी पार्टी) के अध्यक्ष अतुल बोरा, असम जनता परिषद के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई, असम के किसान नेता और राएजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई, असम सरकार के मंत्री रंजीत दत्ता, नाबा डोली, जोजन महान, संजय किशन जैसे दिग्गज लोगों के भाग्य का फैसला आज ही EVM में कैद हो जाएगा।
वर्तमान विधायकों की बात करें तो भाजपा, कॉन्ग्रेस और असोम गण परिषद के 28 विधायकों के नाम पहले चरण के मतदान में वोटरों द्वारा निर्धारित कर दिया जाएगा।
असम चुनाव के पहले चरण में सुरक्षा
असम में पहले चरण के चुनाव के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की सुरक्षाबलों की 300 कंपनियाँ सक्रिय रहेंगी। इनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CRPF) के अलावा अन्य राज्यों और असम के राज्य सशस्त्र पुलिस (SAP) शामिल हैं।
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के बाद राज्य में यह पहला विधानसभा चुनाव है। ऐसे में सुरक्षा को लेकर खास ध्यान रखा गया है। पूरे राज्य में 3826 मतदान केंद्रों और 107 क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिसमें व्यापक स्तर पर सुरक्षाबलों द्वारा गश्ती की जा रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि असम में कुल 126 विधानसभा हैं। यहाँ तीन चरणों में वोटिंग होनी है। पहले चरण की वोटिंग 27 मार्च, दूसरे चरण की वोटिंग 1 अप्रैल जबकि तीसरे चरण की वोटिंग 6 अप्रैल को होगी।
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान में शनिवार (मार्च 27, 2021) सुबह 7 बजे से 30 विधानसभा सीटों के भाग्य का फैसला करने वोटर आने शुरू हो गए। राज्य में पहले चरण के चुनाव से पहले शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को देर रात पुरुलिया जिले में हिंसा देखने को मिली। पुरुलिया के बंडोयान में गरु प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सागा सुपुरुदी गाँव के बीच चुनाव आयोग के वाहन को आग लगा दी गई है।
बताया जा रहा है कि वाहन निर्वाचन अधिकारियों को मतदान केन्द्र पर छोड़ने गई थी। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक शुक्रवार रात पुरुलिया में मतदान कर्मियों को भोजन देने के बाद लौटते समय रहस्यमय परिस्थितियों में एक वाहन में आग लगा दी गई है। मामले की जाँच पुलिस ने शुरू कर दी है। ड्राइवर को पूछताछ के लिए ले जाया गया है।
West Bengal: A vehicle caught fire under mysterious circumstances as it was returning after delivering food to the polling workers in Purulia, last night. The driver has been taken for questioning. More details awaited. pic.twitter.com/SPLNohNbHO
जिस गाड़ी को आग लगाई गई वो टाटा मैजिक कार थी। आग जिस इलाके में लगाई गई वो नक्सल प्रभावित जंगलमहल क्षेत्र के तुलसिडी गाँव का हिस्सा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही गाड़ी जंगल से पार कर रही थी, अचानक कुछ लोग आए और वाहन को रोका और कथित रूप से उस पर पेट्रोलियम पदार्थ डालकर आग लगा दी।
घटना में किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। स्थानीय लोगों ने फायर ब्रिगेड को आग लगने की सूचना दी। जब तक दमकलकर्मी आग को बुझाते, तब तक गाड़ी जलकर खाक हो गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि चुनाव से पहले इलाके में दहशत फैलाने के लिए इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को टीएमसी के एक दफ्तर में बम विस्फोट हुआ। बांकुड़ा में पहले फेज की वोटिंग आज होग। टीएमसी धमाके के पीछे लेफ्ट और कॉन्ग्रेस का हाथ बता रही है, वहीं बीजेपी ने टीएमसी पर आरोप लगाए हैं कि बम बनाने के दौरान टीएमसी ऑफिस में विस्फोट हुआ। धमाके में तीन लोग घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार विस्फोट के बाद दो गुटों में झड़प भी हुई। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने इंडियन सेकुलर फ्रंट के कार्यकर्ताओं पर विस्फोट का आरोप लगाया है। इस बात को लेकर दोनों गुटो में झड़प हुई। घटना में आईएसएफ के 4 कार्यकर्ता घायल हो गए हैं। घटना के बात इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है।
वहीं भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। चुनाव प्रचार से रोके जाने के बाद अधिकारी ने कहा, “क्या यह कश्मीर है? या फिर पाकिस्तान?”
उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय के लोगों ने इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें रोका और उकसाया। हालाँकि बाद में अधिकारी अतिरिक्त पुलिस और केंद्रीय बल के कर्मियों के साथ क्षेत्र में गए। बता दें कि इससे पहले उन्होंने टीएमसी पर हमला बोलते हुए कहा था कि अगर वो दोबारा से सत्ता में लौटते हैं तो पश्चिम बंगाल कश्मीर बन जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में आज पहले चरण के चुनाव में वोटिंग हो रही है। आज बंगाल के पुरुलिया, झारग्राम, बाँकुड़ा, मेदिनीपुर और पूर्व मेदिनीपुर की 30 सीटों पर वोटिंग होगी। आईएसएफ इस बार कॉन्ग्रेस और लेफ्ट पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। आधिकारिक सीट बँटवारे के अनुसार वाम-कॉन्ग्रेस-आईएसएफ के गठबंधन की ओर से इस चरण की 30 सीटों में से 18 सीटों पर वाम दलों, 10 पर कॉन्ग्रेस और दो पर आईएसएफ ने उम्मीदवार उतारे हैं।
भाजपा भी 29 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। पार्टी ने बाघमुंडी सीट पर झारखंड की उसकी सहयोगी पार्टी आजसू ने अपना उम्मीदवार उतारा है। पहले चरण में आज पूर्व मेदिनीपुर में भी वोट डाले जाएँगे। यह क्षेत्र टीएमसी से भाजपा में आए नेता शुभेंदु अधिकारी का गृहक्षेत्र है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान संपन्न होगा।
चुनाव आयोग ने केंद्रीय बलों की करीब 684 कंपनियों को तैनात किया है जो 7,061 मतदानस्थलों पर 10,288 मतदान बूथों पर पहरा देंगी। इस चरण की अधिकतर सीटें एक समय नक्सलवाद से प्रभावित रहे जंगलमहल क्षेत्र में पड़ती हैं। ऐसे में चुनाव अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों के अलावा रणनीतिक महत्व वाले स्थानों पर राज्य पुलिस को भी तैनात किया गया है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 8 चरणों में होने हैं। पहले चरण की 30 सीटों पर शनिवार यानी 27 मार्च को वोट पड़ेंगे। जिन सीटों के लिए वोट डाले जाएँगे उनमें बांकुड़ा की चार, पुरुलिया की नौ, झाड़ग्राम की चार, पूर्व मेदिनीपुर की सात और पश्चिम मेदिनीपुर की छह सीटें शामिल हैं। साथ ही असम की 47 सीटों पर मतदान होगा।
राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल के इस चुनाव से कइयों का भविष्य और सपने दाव पर लगे हैं। एक ओर भाजपा 200 से ज्यादा सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के दावे कर रही है। दूसरी ओर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ममता बनर्जी की राजनीति और ‘बाहरी’ प्रशांत किशोर के बल पर राज्य में बहुमत के साथ दोबारा आने का दावा कर रही है।
मगर, यदि टीएमसी नेताओं में होती हलचल, जमीनी बदलाव और लोकसभा चुनावों और राज्य की वर्तमान राजनीति में आए बदलावों को देखें, तो मालूम होता है कि बीजेपी का पलड़ा भारी है और ममता बनर्जी समेत मास्टरमाइंड प्रशांत किशोर जैसों के लिए चुनाव में स्थिति आर-पार की बनी हुई है।
प्रशांत किशोर का नाम साल 2014 के चुनावों के बाद मुख्यधारा में आया था, जब उन्होंने पीएम मोदी के लिए चुनाव ‘मैनेज’ किया था। मोदी लहर में किशोर ने खुद को एक पहचान दिलवा दी और मीडिया के जरिए अपने लिए एक माहौल बनाया कि वो चुनाव में बनते बिगड़ते समीकरण को पहचान लेते हैं। हालाँकि, बाद में उन्हें तमाम असफलताओं का सामना करना पड़ा। वह न राहुल गाँधी को जनता के बीच जगह दिला पाए न प्रियंका गाँधी को। उत्तर प्रदेश में भी उनकी भूमिका क्षीण रही।
सारी चीजें देख लोगों को यह समझने में भी समय नहीं लगा कि प्रशांत किशोर का जलवा तभी तक चलता है जब उन्हें किसी ऐसे शख्स को मैनेज करना हो जो पहले ही जनता के बीच प्रसिद्ध हो। अगर उन्हें कोई बुरा ‘प्रोडक्ट’ सौंप दिया जाए तो वह उसे जनता के बीच बेच पाने में असफल रहते हैं।
लेकिन, जब किसी का राजनीति करियर संदेह में घिरता है तो मीडिया ऐसे लोगों के लिए मित्र साबित होती है। प्रशांत किशोर के साथ भी यही हुआ है। पिछले दिनों मीडिया में दो लेख प्रकाशित हुए। दिलचस्प बात यह है कि दोनों एक समय पर प्रकाशित हुए थे और उनमें कई समानताएँ भी थीं। एक लेख हिंदुस्तान टाइम्स में बरखा दत्त ने लिखा और दूसरा इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित हुआ था।
ईटी में प्रकाशित लेख में बताया गया था कि कैसे भाजपा बंगाल में अपनी पिच बढ़ा रही है और टीएमसी 9 बड़े जिलों में अपने स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है। दूसरा बरखा दत्त द्वारा का लेख था जिसमें लिखा गया था कि बंगाल में टीएमसी, भाजपा से लड़ाई लड़ रही है।
ऑनलाइन कई लोगों ने इन दोनों लेखों में समानताएँ पाई और हैरानी जताई है कि क्या ये लेख ममता बनर्जी और किशोर के गिरते भविष्य को सँभालने के लिए लिखे गए हैं।
Barkha Dutt and Vasudha Venugopal are dancing on tune of Prashant Kishor in Bengal.
अब हो सकता है कि ये आरोप सही हो या हो सकता है गलत हों। लेकिन सवाल ये उठता है कि दो अलग-अलग आर्टिकल में इतनी समानता कैसे हो सकती है। इन दोनों आर्टिकल में समान-समान बिंदु दिए गए हैं जो साबित करने का प्रयास कर रहे हैं कि ममता बनर्जी बंगाल में अपनी पकड़ अब भी नहीं छोड़ी हैं और प्रशांत किशोर खेल में शीर्ष पर बने हुए है।
See how Barkha and Vasudha write similar arguments showing that they religiously followed Prashant Kishore’s dictation.
Pic 1 : Barkha Dutt in HT Pic 2: Vasusha Venugopal in ET
बरखा दत्त ने हिंदुस्तान टाइम्स में लिखा था कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने पिछले चुनावों में व्यक्तिगत और संगठनात्मक रूप से कई गलती की थी, लेकिन अब वह उन्हें नहीं दोहराएँगीं।
अब एक पत्रकार द्वारा इस तरह के दावे क्या साबित करते हैं और किन आधारों पर ये दावे किए जाते है? क्या इस बात के कोई सबूत हैं कि ममता बनर्जी ने नरमी बरती इसलिए भाजपा बंगाल में अपनी जगह बना पाई, न कि वास्तविकता में इसलिए क्योंकि वहाँ की जनता बदलाव चाहती थी।
बरखा दत्त ऐसे दावों को करने के लिए कोई तथ्य पेश नहीं करती। उनकी जानकारी का स्रोत सिर्फ और सिर्फ प्रशांत किशोर होते हैं। तो ऐसे में तो सिर्फ दो बातें साफ होती हैं। पहली ये कि बरखा दत्त, बंगाल विधानसभा से पहले प्रशांत किशोर की इमेज बिल्डिंग का काम समांतर कर रही हैं। और ये बताना चाहती हैं कि ममता बनर्जी ने जो गलती की वो अब नहीं दोहराई जाएँगी क्योंकि प्रशांत किशोर उन्हें बचाने आ गए हैं। दूसरा ये कि भाजपा प्रदेश में जगह इसलिए बना पा रही थी क्योंकि ममता बनर्जी ने नरमी बरती, न कि इसलिए क्योंकि जनता बदलाव चाहती थी।
साल 2019 के लोकसभा चुनावों को यदि याद किया जाए तो बरखा दत्त की इस थ्योरी पर अपने आप सवाल खड़ा हो जाता है। भाजपा ने नारा दिया था कि ‘चुप चाप कमल छाप’, जिसके कारण बीजेपी ने बंगाल में लगभग वादे के मुताबिक 20 के आसपास सीटों पर विजय पाई थी।
दोनों लेखों में मुस्लिम जनसंख्या और वोट शेयर प्रतिशत पर भी बहस
इन लेखों में मुस्लिम जनसंख्या और वोट शेयर प्रतिशत पर भी बहस हुई। कमाल की बात है कि दोनों ने एक जैसे बिंदु पर इसे समझाने का प्रयास किया। बरखा दत्त ने अपने लेख में किशोर की तारीफ की। बंगाल में 30% मुस्लिम जनसंख्या का जिक्र करके 70% को सिर्फ भाजपा के लिए बताया और टीएमसी के लिए कहा कि वो 100% आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के चुनावों को याद दिलाते हुए कहा गया कि अल्पसंख्यक आबादी होने के बाद भी वह वहाँ जीत गए लेकिन यही जनमत उन्हें बंगाल में नहीं मिलने वाला।
इकोनॉमिक टाइम्स में भी बरखा दत्त की तरह ऐसे तर्क दिए गए। इसमें बताया गया कि भाजपा को चुनाव जीतने हैं तो अपने प्रदर्शन को सुधारना होगा। 24 परगना और मुर्शीदाबाद में कुल 80 विधानसभा हैं जो टीएमसी की जीत का मुआवजा भरने में उनकी मदद कर सकती है। इसके बाद इस आर्टिकल में भी मुस्लिम वोटरों का हवाला दिया गया और कहा गया कि यहाँ बिहार, उत्तर प्रदेश से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं जो टीएमसी को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अब इस स्थिति में पहले आइए यूपी और बंगाल की मुस्लिम जनसंख्या पर ही बात कर लेते हैं। टीएमसी नेता का कहना है कि बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या 30% है जो यूपी की 18 % से अधिक है। यानी लेख के अनुसार बंगाल में भाजपा सिर्फ 70% पर चुनाव लड़ेगी और टीएमसी 100 % पर। दिलचस्प बात यह है कि 2019 के लोकसभा चुनाव को देखें तो टीएमसी 43.69% पर जीती थी और भाजपा 40.64% पर।
दोनों लेखों के तर्क हैं कि बंगाल में मुस्लिम बहुमत होने के कारण भाजपा की संभावनाएँ कम हैं। क्या 40.64% वोट देखने के बाद भी ऐसी थ्योरी पर भरोसा किया जा सकता है? रही बात इस बिंदु की कि यूपी में त्रिकोणीय जंग की तो भाजपा ने राज्य में 40% वोटों से विजय हासिल की थी। लेकिन बंगाल में ऐसा नहीं हो पाएगा। तो लगता है बरखा दत्त और ईटी बंगाल में AIMIM की उपस्थिति को नकार रहे हैं।
वहाँ निश्चित तौर पर AIMIM सपा और बसपा जितनी मजबूत नहीं है, मगर उसके पास कुछ निश्चित कारण जरूर हैं। अगर किसी को ममता बनर्जी का ओवैसी के ख़िलाफ़ बयान याद हो तो साफ पता चलता है कि ममता बनर्जी को AIMIM की एंट्री होने से डर है कि 30% मुस्लिम आबादी के वोट दोनों में बँट जाएँगे।
उसके बाद शुभेंदु अधिकारी जैसे नेता भाजपा में आ रहे हैं क्या ये सब साबित नहीं करता कि भाजपा जीत के करीब पहुँच रही है। ईटी ने 9 जिलों के नाम अपने आर्टिकल में दिए हैं। दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद, नादिया, हावड़ा, बर्दवान, पूर्वी-पश्चिमी मेदिनापुर। इन सब में शुभेंदु की अच्छी पकड़ है। मुस्लिम इलाकों में शुभेंदु की अपील का अब भी महत्त्व है क्योंकि लोगों को नंदीग्राम में हुआ जन आंदोलन भुलाया नहीं है। वो टीएमसी के सबसे प्रसिद्ध नेता हैं। पूर्वी मिदनापुर जिले में उनके परिवार का भी खासा दबदबा है। तो इस बात में कोई दो राय नहीं है कि जिन मुस्लिम वोट पर टीएमसी के नेता इतरा रहे हैं। प्रशांत किशोर का बखान कर रहे हैं। वो वोट शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में आते ही बीजेपी के पक्ष में आते दिख रहे हैं।
दोनों लेखों का दावा है कि भाजपा एक समुदाय के 100% समर्थन के बाद भी 45% वोट नहीं हासिल कर पाएगी।
इन लेखों में भाजपा को लेकर माना जा रहा है कि उन्हें सिर्फ एक समुदाय का समर्थन मिला और वह 40.64% वोट जुटा पाए। लेकिन अब टीएमसी का मानना है कि अगर यही राह अपनाई गई तो भाजपा के लिए 40.64% से 44-45% पहुँच पाना बहुत मुश्किल होगा। जबकि तथ्य यह है कि भाजपा इन चुनावों में एक ताकतवर प्रतिद्वंदी है और प्रशांत किशोर के लिए नुकसान ये है कि चुनावों में जाति मुख्य कारक नहीं है। अगर भाजपा किसी भी तरह इन चुनावों में हिंदू वोटों के अलावा कुछ और वोट जुटा पाने में सफल होती है, तो इस बात में कोई संदेह नहीं है कि टीएमसी का गेम जल्दी ओवर होगा।
दोनों लेख में एक समान तर्क दिया गया है कि पार्टी के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए किशोर द्वारा कई संगठनात्मक बदलाव किए गए हैं।
अब यह तर्क पढ़ कर आपको नहीं लग रहा है कि प्रशांत किशोर को बैटमैन की तरह पेश किया जा रहा है कि वो ममता बनर्जी को चुनाव में बचाने आए हैं? कमाल की बात है कि बड़ी संख्या में टीएमसी नेताओं के भाजपा में शामिल होने को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन इसमें एक गड़बड़ है।
दरअसल, कई नेताओं ने प्रशांत किशोर के ख़िलाफ़ आवाज उठाई थी। मिहिर गोस्वामी ने लिखा था, “यह अब दीदी की पार्टी नहीं है। वह अलग है। इसीलिए दीदी के आदमियों की अब आवश्यकता नहीं है। अगर आपको रहना है, तो आपको जी हुजूरी करना होगा या यहाँ से जाना पड़ेगा।” दिलचस्प बात क्या है कि दोनों लेखों में प्रशांत किशोर के कारण जुड़े नए नेताओं की भूमिका को सकारात्मक बताया गया है जबकि हकीकत ये है कि पार्टी में विद्रोह इसी वजह से हो रहा है।
‘दीदी के बोलो’, ‘दुआरे सरकार’, ममता प्रो सेंटीमेंट और भाजपा के स्थानीय नेताओं की कमी
आर्टिकलों में टीएमसी के लिए ऐसे तर्क वास्तविकता में कोई मतलब नहीं रखते। इनका मत है कि ऐसे अभियान टीएमसी को वोट दिलाएँगे। लेकिन याद करें अगर तो मात्र ‘चुप चाप कमल छाप’ से लोकसभा चुनावों में भाजपा को जीत मिल गई थी।
तथ्यों को यदि देखें तो ममता बनर्जी के पक्ष में कैसा माहौल है, कुछ घटनाओं से मालूम पड़ता है। ममता सरकार ने राजनीति साधने के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को राज्य में लागू नहीं होने दिया। इसके कारण बंगाल के किसान मुआवजे से भी वंचित हो गए थे। जबकि एक योजना में गड़बड़ करने के कारण उससे पहले जनता के क्रोध का असर टीएमसी नेताओं को झेलना पड़ा था।
जून माह में एक टीएमसी नेता के बेटे को बनगाँव की धर्मपुकुरिया पंचायत में झाड़ू और लाठियों से मारा गया था। इन पर अम्फान तूफान में मिले मुआवजे के भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। लोगों का कहना था या तो वह सारा मुआवजा दे दें या तो सरकार को सारा पैसा लौटाएँ।
इसी प्रकार साउथ 24 परगना के कैलाशपुर गाँव में टीएमसी नेता के घर का घेराव किया गया था और उन्हें बंधक बनाया गया था। इन पर आरोप था कि इन्होंने अम्फान तूफान के मुआवजे का गलत इस्तेमाल किया और अपने परिवार वालों को इसका लाभ पहुँचाया। बाद में नेता ने मीडिया के सामने अपनी गलती भी मानी थी।
बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का ही परिणाम था कि जुलाई में, TMC को पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम में अपने 18 पंचायत सदस्यों को निलंबित करना पड़ा। इन सब पर चक्रवात अम्फान राहत कोषों के संवितरण में भ्रष्टाचार का आरोप था। इस बाबत 200 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।
हालाँकि, ये सब बरखा दत्त के विश्लेषण का हिस्सा नहीं था और न ही इस पर ईटी ने संज्ञान लिया। ये तर्क देना कि राज्य में अब भी ममता का दबदबा है, बिलकुल गलत साबित होता है, क्योंकि अगर ऐसा होता तो भाजपा लोकसभा चुनावों में 40% वोटशेयर हासिल नहीं कर पाती।
आगे हो सकता है कि किसी स्थानीय चेहरे को लाने के बजाय बीजेपी इस चुनावी खेल को ममता बनर्जी और अमित शाह की लड़ाई बना दे और अगर ऐसा नहीं होता है तो भाजपा इतनी जल्दी उस नेता का नाम तो नहीं बताने वाली।
दोनों लेखों में किए गए हर दावे के पीछे कोई तर्क नहीं है। ये लेख जमीनी हकीकत से अवगत कराने की बजाय प्रशांत किशोर को मसीहे की तरह पेश करते हैं। अब यही लेखों का प्रमुख उद्देश्य था, ये सिर्फ इसके लेखक ही बता सकते हैं।
19 साल की लड़की को अगवा कर जबरन धर्मांतरण के मामले की आरोपित चाँद बीवी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। यूपी पुलिस ने लव जिहाद विरोधी कानून के तहत उसे आरोपित बनाया था।
यह मामला सीतापुर के तंबौर थाना क्षेत्र का है। लड़की के पिता ने इस संबंध में गाँव के ही जुबराईल और अन्य लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत की थी। यह बात भी सामने आई थी कि लड़की के घर से पैसे और जेवरात भी गायब थे। लड़की को अगवा करने की यह घटना 29 नवंबर 2020 की है।
लड़की के पिता ने आरोप लगाया था कि जुबराईल अपने साथियों के सहयोग से उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले गया है। उन्होंने उसका जबरन धर्मांतरण कराने के आरोप भी लगाए थे।
चाँद बीवी ने यह दावा करते हुए जमानत माँगी थी कि उसका नाम एफआईआर में नहीं था और उसे झूठे तरीके से इसमें फँसाया गया है। उसने यह भी कहा कि पीड़िता उसके पास से बरामद नहीं हुई थी। पीड़िता अपहरण के तुरंत बाद अपने पिता के साथ थाने में हाजिर हुई थी। उसने कहा कि जब सीआरपीसी की धारा 161 के तहत पीड़िता का बयान जाँच अधिकारी के सामने दर्ज किया गया, तब भी उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाए गए थे।
अतिरिक्त सरकारी अभियोजक ने यह कहते हुए उसे जमानत दिए जाने का विरोध किया कि पीड़ित पक्ष के अतिरिक्त बयान में यह बात विशेष रूप से कही गई है कि धर्मांतरण के लिए जिनलोगों ने दबाव बनाया, उनमें एक याचिकाकर्ता भी थी।
जस्टिस मोहम्मद फैज आलम की एकल पीठ ने माना कि धारा 164 के तहत दिए बयान में याचिकाकर्ता पर कोई आरोप नहीं लगाया गया था। पीठ को बताया गया है कि धारा 164 के तहत अपने बयान में अभियोजक ने उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया। वास्तव में, उसने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह जिबराईल के साथ अपनी मर्जी से गई थी। वह उससे प्यार करती है और उसने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया।
पीठ ने कहा कि तथ्यों को ध्यान में रखते हुए और चार्जशीट दायर होने की वजह से वह याचिकाकर्ता को जमानत दिए जाने के उपयुक्त मानते हैं। चाँद बीवी को अदालत ने स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना अपना इलाका नहीं छोड़ने, ट्रायल में सहयोग करने, पीड़ित पक्ष या चश्मदीद पर कोई दबाव नहीं बनाने और किसी तरह के अपराध में संलिप्त नहीं रहने की शर्त पर जमानत दे दी।
इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन अपने विरोधियों का खात्मा करने के लिए थैलियम का इस्तेमाल करने को कुख्यात था। अब दिल्ली में एक दामाद ने इसी जहर से अपनी सास और साली की हत्या कर दी है। उसकी पत्नी कोमा में है।
वरुण अरोड़ा नाम के किस कातिल दामाद को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। देवेंद्र मोहन शर्मा ने पुलिस को बताया कि उनके दामाद ने ही उन्हें और उनके पूरे परिवार को ‘स्पेशल फिश’ में थैलियम मिलाकर खिलाई थी। इससे उनकी पत्नी और एक बेटी की मौत हो चुकी है। एक बेटी जो वरुण की पत्नी है वह अभी कोमा में है।
उन्होंने बताया कि उनका वरुण काफी गुस्सैल स्वभाव का है। वह शादी के कुछ महीने बाद से ही उनकी बेटी दिव्या के साथ गाली-गलौच करने लगा था। उसके 5 साल के करीब दो जुड़वा बच्चे हैं। पिछले साल दिव्या दोबारा गर्भवती हो गई थी, लेकिन डॉक्टर ने उसकी जान को खतरा बताते हुए गर्भपात की सलाह दी। लेकिन वरुण उस पर बच्चे को जन्म देने का दबाव डाल रहा था। दिव्या के अबॉर्शन करवाने के बाद वरुण और उसका परिवार उसे प्रताड़ित करने लगा।
इसके बाद दिव्या इंद्रपुरी स्थित अपने मायके आ गई। देवेंद्र मोहन का अनुसार जनवरी में एक दिन वरुण ने दिव्या को कॉल कर बताया कि वह आ रहा है और सबको अपने हाथों से बनी मछली खिलाएगा। वह दोपहर के वक्त उनके घर आया और अपने बच्चों और खुद को छोड़कर उनके परिवार के सभी लोगों को मछली खिलाई। इसके बाद देवेंद्र मोहन की छोटी बेटी प्रियंका शर्मा (आयु 27 वर्ष) की 15 फरवरी को मौत हो गई। 21 मार्च को उनकी पत्नी अनीता शर्मा की भी मौत हो गई। बड़ी बेटी दिव्या 4 मार्च से कोमा में है। पुलिस ने जब अनीता शर्मा का पोस्टमार्टम कराया तो उनके शरीर में थैलियम की भारी मात्रा मिली। दिव्या की जॉंच किए जाने पर उसके खून में भी थैलियम की अत्यधिक मात्रा मिली।
इस मामले पर डीसीपी (वेस्ट) उर्जिवा गोयल ने कहा, ”हत्या और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किये जाने के बाद अरोड़ा से पूछताछ की गई। इसमें उसने थैलियम खरीदने और अपनी सास अनीता, पत्नी दिव्या, ससुर देवेन्द्र मोहन और साली प्रियंका से बदला लेने के लिए उन्हें जहर खिलाने की बात स्वीकार की है। अरोड़ा ने कहा कि उसके ससुराल वाले उसका अपमान करते थे।”
डीसीपी ने बताया कि ग्रेटर कैलाश में उसके घर से थैलियम मिला है। पुलिस ने आरोपित के लैपटॉप को कब्जे में लेकर उसकी इंटरनेट हिस्ट्री देखी तो दंग रह गई। हिस्ट्री में इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन से संबंधित कंटेंट मिला। माना जा रहा है माना जा रहा है कि इसी से उसने ससुराल में सबको थैलियम देकर मारने की सोची।
क्या होता हैथैलियम
थैलियम एक धीमा जहर है। थैलियम के संपर्क में आने के शुरुआती 48 घंटों में उल्टी, डायरिया, चक्कर आना जैसे लक्षण महसूस होते हैं। कुछ दिन में यह नर्वस सिस्टम को डैमेज करना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे माँसपेशियां बेकार हो जाती हैं, याद्दाश्त चली जाती है और आखिर में इंसान कोमा में चला जाता है। थैलियम के जहर से मौत होने में तीन हफ्तों का समय लग सकता है।
गैंगस्टर मुख्तार अंसारी दो सप्ताह के भीतर उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में शिफ्ट किया जाएगा। फिलहाल वह पंजाब के रोपड़ जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उसे यूपी पुलिस को सौंपने के निर्देश दिए।
विधायक मुख्तार अंसारी की हिरासत को लेकर यूपी सरकार ने शीर्ष अदालत में रिट याचिका दाखिल कर रखी थी। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली खंडपीठ इस पर सुनवाई की। पीठ ने कहा, “यह निर्देश दिया जाता है कि मुख्तार अंसारी को 2 सप्ताह के भीतर यूपी पुलिस की हिरासत में सौंप दिया जाए। वह बांदा जेल में रहेंगे। बांदा जेल के अधीक्षक चिकित्सा सुविधाओं की देखरेख करेंगे।” पीठ ने अंसारी की वह याचिका भी खारिज कर दी है जिसमें उसने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की सुनवाई उत्तर प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की माँग की थी।
मऊ से विधायक माफिया मुख़्तार अंसारी की हिरासत सौंपने से पंजाब सरकार लगातार आनाकानी कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट में भी पंजाब सरकार की तरफ से बताया गया था कि किसी राज्य को इस प्रकार के स्थानांतरण का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। वहीं, यूपी का कहना था कि अंसारी के खिलाफ राज्य में कई गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनकी सुनवाई होनी है। लेकिन, पंजाब ने चिकित्सा आधार पर उसे रोपड़ जेल में भेज दिया। यूपी सरकार की ओर से दलील रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी पंजाब पर अंसारी के बचाव का आरोप लगाया।
Supreme Court orders transfer of gangster-turned-politican Mukhtar Ansari to jail in Uttar Pradesh from Punjab within two weeks, to face trials there.
गौरतलब है कि मुख़्तार अंसारी उगाही के एक कथित मामले में जनवरी 2019 से ही पंजाब के जेल में बंद है। योगी सरकार द्वारा बार बार आग्रह के बावजूद पंजाब सरकार उसकी हिरासत देने से अब तक इनकार करती रही है। माफिया मुख्तार अंसारी और उसके करीबियों के खिलाफ यूपी की योगी सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्तार अंसारी ने पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी का भी हवाला देकर यूपी की जेल में शिफ्ट किए जाने से बचने की कोशिश की थी। 8 फरवरी को हुई सुनवाई में उसने अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि वह एक ऐसे परिवार से है, जिसके सदस्य भारत के स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा थे। उसकी याचिका में कहा गया था, “प्रतिवादी ऐसे परिवार का हिस्सा है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत बड़ा योगदान दिया है। भारत को हामिद अंसारी जैसा नेता दिया जो उपराष्ट्रपति रहे। इसके अलावा बाबा शौकतुल्ला अंसारी ओडिशा के राज्यपाल थे। माननीय न्यायमूर्ति आसिफ अंसारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे।”
दो दिवसीय दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (26 मार्च 2021) को बांग्लादेश पहुँचे। ढाका के नेशनल परेड ग्राउंड में उन्होंने अपनी बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना के साथ राष्ट्रीय दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बांग्लादेश की मुक्ति युद्ध के नायकों को नमन किया। वहीं शेख हसीना ने भारत को अपने देश के विकास का सबसे अच्छा भागीदार बताया।
पीएम मोदी ने कहा, “मैं सभी भारतीयों की तरफ से आप सभी को बांग्लादेश के सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई देता हूँ। मैं बंगबंधु शेख मुजिबुर रहमान को श्रद्धांजलि देता हूँ, जिन्होंने बांग्लादेश और यहाँ के लोगों के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।” बांग्लादेश की आजादी को लेकर भारतीयों की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था। बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में शामिल होना, मेरे जीवन के भी पहले आंदोलनों में से एक था।”
#WATCH live from Dhaka, Bangladesh: PM Modi speaks at the National Day program as its Guest of Honour. (Source: DD) https://t.co/ASTFRZd9wc
उन्होंने कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि बांग्लादेश के आजादी के 50 वर्ष और भारत की आजादी के 75 वर्ष का पड़ाव, एक साथ ही आया है। हम दोनों ही देशों के लिए, 21वीं सदी में अगले 25 वर्षों की यात्रा बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमारी विरासत भी साझी है, हमारा विकास भी साझा है। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत और बांग्लादेश दोनों ही देशों की सरकारें इस संवेदनशीलता को समझकर, इस दिशा में सार्थक प्रयास कर रही हैं। हमने दिखा दिया है कि आपसी विश्वास और सहयोग से हर एक समाधान हो सकता है। हमारी भूमि सीमा समझौता भी इसी का गवाह है।
मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था: PM @narendramodi
बांग्लादेश की मुक्ति में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के प्रयासों और भारतीय सेना की भूमिका को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “यहाँ के लोगों पर पाकिस्तानी सेना के अत्याचार हमें व्यथित कर देता था, कई दिनों तक इन तस्वीरों ने हमें सोने नहीं दिया।”
India has now become one of our best development partners: Bangladesh’s Prime Minister Sheikh Hasina pic.twitter.com/FMCStlNnLE
इस दौरान पीएम मोदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान की छोटी बेटी शेख रेहाना को गाँधी शांति पुरस्कार 2020 प्रदान किया। यह पुरस्कार मरणोपरांत शेख मुजीबुर रहमान को दिया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि यह भारतीयों के लिए गर्व की बात है कि हमें शेख मुजीबुर रहमान को गाँधी शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का अवसर मिला है। उन्होंने बांग्लादेश के युवाओं के लिए स्वर्ण जयंती स्कॉलरशिप की भी घोषणा की।