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‘हमारा रिश्ता जन-जन का, मन से मन का’: मतुआ हर्टलैंड में PM मोदी, बंगाल की 70 सीटों पर इनका प्रभाव

बांग्लादेश दौरे के दूसरे दिन शनिवार (27 मार्च 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मतुआ हर्टलैंड ओरकांडी पहुँचे। मंदिर में पूजा-अर्चना की। बंगाल में इस समुदाय के लगभग दो करोड़ लोग रहते हैं और वहाँ की 70 विधानसभा सीटों पर इनका असर है

ओरकांडी मंदिर में दर्शन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मतुआ समुदाय के लोगों को संबोधित किया। इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रंगला मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने यहाँ आने की इच्छा बहुत पहले प्रकट की थी। उन्होंने कहा कि हमारा रिश्ता मन से मन का और जन से जन का है।

ओरकांडी में प्राथमिक स्कूल बनाने का ऐलान

प्रधानमंत्री मोदी ने मतुआ समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ओरकांडी में भारत सरकार लड़कियों के मिडिल स्कूल को अपग्रेड करेगी और भारत सरकार द्वारा यहाँ एक प्राइमरी स्कूल भी स्थापित किया जाएगा। ये भारत के करोड़ों लोगों की तरफ से हरिचंद ठाकुर जी को श्रद्धांजलि है।

ओरकांडी में पीएम ने कोरोना वायरस महामारी पर भी बात की। उन्होंने कहा, “कोरोन काल में दोनों ही देशों ने अपने सामर्थ को दिखाया है। मेक इन इंडिया वैक्सीन भारत-बांग्लादेश के हर जन को पहुँचे, भारत इसे अपना कर्तव्य समझता है।”

पीएम ने पश्चिम बंगाल में बनगाँव से सांसद शांतनु ठाकुर की तारीफ की। उन्होंने कहा, “मेरा सौभाग्य है की हरिचंद देव की विरासत को सँभाल रहे शांतनु ठाकुर संसद में मेरे सहयेगी हैं। मुझसे छोटे हैं पर उनसे भी हमें बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है वो बहुत कर्मठ हैं।”

पीएम मोदी ने कहा इस पवित्र अवसर की प्रतीक्षा बहुत वर्षो से थी। उन्होंने कहा, “मेरी इच्छा 2015 से है जब मैं पीएम बना था तभी से यहाँ आने की इच्छा थी वो आज पूरी हुई। उन्होंने कहा कि मुझे याद है, पश्चिम बंगाल में ठाकुरनगर में जब मैं गया था, तो वहाँ मेरे मतुआ भाइयों-बहनों ने मुझे परिवार के सदस्य की तरह प्यार दिया था। विशेष तौर पर ‘बॉरो-माँ’ का अपनत्व, माँ की तरह उनका आशीर्वाद, मेरे जीवन के अनमोल पल रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “भारत और बांग्लादेश दोनों ही देश अपने विकास से, अपनी प्रगति से पूरे विश्व की प्रगति देखना चाहते हैं। दोनों ही देश दुनिया में अस्थिरता, आतंक और अशांति की जगह स्थिरता, प्रेम और शांति चाहते हैं। यही मूल्य, यही शिक्षा हरिचंद देव ने हमें दी थी।” 

पीएम ने कहा कि किसने सोचा था कि भारत का प्रधानमंत्री कभी ओरकांडी आएगा। मैं आज वैसा ही महसूस कर रहा हूँ, जो भारत में रहने वाले ‘मतुआ संप्रदाय’ के मेरे हजारों-लाखों भाई-बहन ओरकांडी आकर महसूस करते हैं। पीएम ने कहा कि मैं बांग्लादेश के राष्ट्रीय पर्व पर भारत के आपके 130 करोड़ भाइयों-बहनों की तरफ से आपके लिए प्रेम और शुभकामनाएँ लाया हूँ। आप सभी को बांग्लादेश की आज़ादी के 50 साल पूरे होने पर ढेरों बधाई, हार्दिक शुभकामनाएँ।

इससे पहले PM मोदी दक्षिण-पूर्व सतखिरा स्थित जेशोरेश्वरी काली मंदिर गए थे, यहाँ उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पीएम मोदी ने यहाँ माँ काली को हाथ से निर्मित मुकुट पहनाया, उनके चरणों में साड़ी भेंट की। इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। यह मुकुट चाँदी से बना है, जिस पर सोने की परत चढ़ाई गई है।

27 साल पहले 27 मार्च को ही सचिन तेंदुलकर ने शुरू की थी नई इनिंग, अब उसी तारीख को आई कोरोना संक्रमित होने की खबर

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर कोरोना संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी है। सचिन के मुताबिक वे संक्रमण से बचाव के लिए हर तरह की सावधानी बरत रहे थे, लेकिन वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

उन्होंने ट्वीट में कहा है कि आज ही उन्हें संक्रमण के लक्षण महसूस आए थे। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद खुद को घर में ही क्वारंटाइन कर लिया है। उनके परिवार के अन्य लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। उन्होंने इस आपदा में कार्य कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति आभार जताते हुए लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

सचिन ने हाल में ही रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज में हिस्सा लिया था और इंडिया लेजेंड्स की टीम ने फाइनल में श्रीलंका को हराकर खिताब पर कब्जा किया था। इस दौरान सचिन का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा था। उन्होंने कोरोना संक्रमित होने की खबर 27 मार्च को दी।

27 मार्च की तारीख सचिन के करियर में बेहद महत्वपूर्ण है। 1994 में 27 मार्च को ही उन्होंने वन डे मैचों में भारत के लिए पहली बार पारी शुरुआत की थी। न्यूजीलैंड दौरे पर उन्हें यह मौका नवजोत सिंह सिद्धू के अनफिट होने के कारण मिला था। वह मैच भारत हार गया था, लेकिन सचिन ने 49 गेंदों पर 82 रन बनाए थे, जिसमें 15 चौके और 2 छक्के शामिल थे। इसके बाद सचिन क्रिकेट की दुनिया में कैसे छाए यह इतिहास है।

परेश रावल भी कोरोना पॉजिटिव

अभिनेता और पूर्व सांसद परेश रावल भी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “दुर्भाग्यपूर्ण, मैं कोरोना पॉजिटिव पाया गया हूँ। पिछले 10 दिनों से जो भी कोई मेरे संपर्क में आया हो वे कृपया खुद की जाँच करा लें।”

गौरतलब है कि परेश रावल से पहले भी कई बॉलीवुड सितारों के संक्रमित होने की खबर आ चुकी है। इनमें मिलिंद सोमन, आमिर खान, आर माधवन, रणबीर कपूर, मनोज बाजपेयी, कार्तिक आर्यन, सिद्धांत चतुर्वेदी, तारा सुतारिया और सतीश कौशिक जैसे नाम शामिल हैं।

सबके सामने कुल्हाड़ी से काट डाला… क्योंकि पैगंबर मुहम्मद को लेकर कुछ बोला था: ईशनिंदा में गई एक और जान

पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के झांग जिले में ईशनिंदा में एक शिया विद्वान टकी शाह की कुल्हाड़ी से काट कर निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी गई। वारदात को उस वक्त अंजाम दिया गया, जब शिया विद्वान टकी शाह अपने एक दोस्त हसनैन शाह के साथ बीते 24 मार्च को झांग जिले की शारकोट तहसील स्थित बस्ती मुराद के मेले में घूमने गए थे।

घूमने के दौरान आरोपित ने टकी शाह को लात मार दिया, जिससे वो गिर गए। इसके बाद आरोपित ने उन्हें बेरहमी से कुल्हाड़ी से काट डाला। पुलिस ने शारकोट सिटी पुलिस स्टेशन में हत्या का केस दर्ज कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

घटना में शामिल एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अज्ञात आरोपित फरार हैं। पुलिस के मुताबिक हमले के दौरान मेले में मोटरसाइकिल पर बैठे टकी शाह का बैलेंस बिगड़ गया और वह जमीन पर गिर गए। घटना में टकी शाह के दोस्त हसनैन बच गए, वह इस केस में गवाह हैं।

वैधानिक चेतावनी: नीचे का वीडियो भयंकर और खौफनाक है, कृपया कमजोर दिल वाले न देखें!

मृतक के परिजनों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि बीते दिनों वॉलीबॉल खेलने के दौरान हुए विवाद के कारण उनकी हत्या की गई है। जाँच अधिकारी तारिक महमूद ने बताया है कि मामले में गिरफ्तार एक संदिग्ध को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।

तारिक महमूद के मुताबिक संदिग्ध और पीड़ित कुछ दिन पहले वॉलीबॉल खेलते समय झगड़े थे, लेकिन उस समय मामला सुलझ गया था। बाद में आरोपित ने टकी पर कुल्हाड़ी से हमला कर उन्हें मार डाला।

झांग जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ) सरफराज विर्क ने बताया है कि आरोपित ने टकी पर पैगंबर मुहम्मद के अनुयायियों की ईशनिंदा करने का आरोप लगाया था। इसी के चलते उसकी बेरहमी से हत्या की गई।

डीपीओ के मुताबिक , “संदिग्ध ने टकी की हत्या करने के आरोप को कुबूल कर लिया है। उसने टकी शाह पर ईशनिंदा करने का आरोप लगाया है।”

ईशनिंदा कानून का दुरुपयोग

जाँच अधिकारी ने बताया कि टकी पहले से अदालत में ईशनिंदा करने के केस का सामना कर रहा था। उसके खिलाफ 2019 में ईशनिंदा का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का दुरुपयोग अल्पसंख्यकों और व्यक्तिगत मुस्लिम मामलों को निपटाने में किया जाता है। इस तरह के आरोपों को लिंचिंग या सड़क पर सतर्कता में समाप्त किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह के आरोपों में देश में 80 से अधिक लोगों को जेल में बंद किया गया है। इनमें से आधे को आजीवन कारावास या मौत की सजा का सामना करना पड़ रहा है।

पाकिस्तान में शिया हैं अल्पसंख्यक

पाकिस्तान सुन्नी मुस्लिम बहुल देश है, जो अपनी कट्टरता के लिए कुख्यात हैं। वहाँ शिया मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं। बता दें कि पाकिस्तान का पड़ोसी देश ईरान एक शिया बहुल देश है। इसीलिए दोनों के बीच आए दिन झगड़े होते रहते हैं।

‘वोट में मदद करो… बताओ डिमांड क्या है’: ममता बनर्जी ने BJP नेता को फोन किया, ऑडियो वायरल – TMC कह रही गलत

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में भाजपा कार्यकर्ता प्रलय पाल ने शनिवार (मार्च 27, 2021) को दावा किया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की सु्प्रीमो ममता बनर्जी ने उनसे चुनाव जीतने के लिए मदद माँगी। पाल का कहना है कि ममता बनर्जी ने उन्हें फोन करके नंदीग्राम में उनके लिए (ममता के लिए) समर्थन जुटाने को कहा, जहाँ भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को अपना प्रत्याशी बनाया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पाल ने कहा, “वह चाहती हैं कि मैं टीएमसी में जाकर उनके साथ काम करूँ, लेकिन मैं शुभेंदु अधिकारी और उनके परिवार के साथ लंबे समय से हूँ। मैं अब भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करता हूँ।” पाल ने बताया:

“वाम शासन के दौरान जब माकपा नंदीग्राम के लोगों पर अत्याचार कर रही थी, तो वह अधिकारी परिवार ही था, जो हमारे साथ खड़ा था। मैं उनके खिलाफ कभी नहीं गया और मैं कभी इसकी हिम्मत नहीं करूँगा।”

प्रलय के अनुसार टीएमसी ने कभी नंदीग्राम के लोगों को उनका अधिकार नहीं दिया, इसलिए वह भाजपा के साथ जुड़े रहेंगे और नंदीग्राम पर शुभेंदु अधिकारी की जीत सुनिश्चित करेंगे। बता दें कि पाल के दावों को साबित करने के लिए एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर हो रही है। भाजपा बंगाल के ट्विटर अकॉउंट से भी इस संबंध में ट्वीट किया गया है।  

बीजेपी का दावा है कि चुनाव में टीएमसी की हालत खराब है, और ऐसे में ममता बनर्जी ने वोट और समर्थन के लिए मदद माँगी है। भाजपा ने ट्वीट में लिखा, “ममता दीदी ने जिले के भाजपा उपाध्यक्ष को फोन कर मदद की माँग की। वह इस बार नंदीग्राम हारने वाली हैं। उनका डर फोन कॉल में साफ दिख रहा है।”

भाजपा नेता अमित मालवीय ने लिखा, “गजब! ममता बनर्जी नंदीग्राम में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष प्रलय पॉल को कॉल करके मदद की गुहार लगाती हैं! प्रलय उन्हें बताता है कि उन्हें टीएमसी में अपमानित किया गया था और वह इस परिवार के साथ भाजपा को धोखा नहीं दे सकते।  निश्चित रूप से पिशी नंदीग्राम और टीएमसी बंगाल में हार रही है।”

भाजपा की डॉ ऋचा राजपूत लिखती हैं, “ममता दीदी ने आज सुबह नंदीग्राम भाजपा जिला उपाध्यक्ष ,प्रलय पाल को फोन किया और BJP नेता से TMC के लिए वोट मैनेज करने अनुरोध किया, BJP नेता ने मना कर दिया। समझ रहे हो खेला हो गया… नंदीग्राम में ज़मानत ज़ब्त।”

उल्लेखनीय है कि TMC ने सोशल मीडिया पर वायरल होती ऑडियो की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए हैं। टीएमसी ने कहा कि ऑडियो में सुनाई पड़ने वाली आवाज सत्यापित नहीं है। मगर प्रलय लगातार दावा कर रहे हैं कि ममता बनर्जी ने ही उनसे फोन करके कहा कि तुम्हारी डिमांड क्या है।

शुभेंदु अधिकारी के भाई की गाड़ी पर हमला, BJP कार्यकर्ता का शव: TMC वाले अलाउद्दीन का नाम भाजपा ने दिया EC को

बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान शुरू होते ही हिंसा का दौर भी जारी है। ताजा मिली जानकारी के अनुसार शुभेंदु अधिकारी के भाई सौमेंदु अधिकारी की गाड़ी पर हमला हुआ है और तोड़फोड़ की खबर भी सामने आई है।

इस घटना में गाड़ी का ड्राइवर बुरी तरह जख्‍मी हो गया है। हालाँकि, हमले के वक्त सौमेंदु अधिकारी कार में मौजूद नहीं थे। शुभेंदु अधिकारी के भाई सौमेंदु की कार पर हुए हमले के लिए उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है।

टीएमसी नेता और सौमेंदु अधिकारी के भाई दिब्येंदु अधिकारी ने कहा, “मुझे पता चला कि टीएमसी के ब्लॉक अध्यक्ष राम गोविंद दास की मदद से कॉन्टाई में वाहन (सौमेंदु अधिकारी के) पर हमला किया गया था। सौमेंदु घायल नहीं है। ड्राइवर की पिटाई की गई। मैंने पुलिस प्रेक्षक को सूचित किया है।”

वहीं बीजेपी नेता सौमेंदु अधिकारी ने कहा, “टीएमसी ब्लॉक अध्यक्ष राम गोविंद दास और उनकी पत्नी की अगुवाई में तीन मतदान केंद्रों पर मतदान में धाँधली हुई। यहाँ मेरे आगमन ने उनकी शरारतों को जारी रखने में उनके लिए समस्या खड़ी कर दी, इसलिए उन्होंने मेरी कार पर हमला किया और मेरे ड्राइवर की पिटाई की।”

इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के भाई सौमेंदु ने शनिवार को आरोप लगाया कि हल्दिया के एडिशनल एसपी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दुर्भावना और अनियमितता बरत रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) डरी हुई है और गड़बड़ी पैदा करने की कोशिश कर रही है।

नंदीग्राम से बीजेपी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर हल्दिया के एडिशनल एसपी पार्थ घोष, हल्दिया के एसडीपीओ बरुणबैद्य और नंदीग्राम पुलिस स्टेशन के कुछ अन्य अधिकारियों को चुनाव के दौरान दुर्भावना और अनियमितताओं को दूर करने में टीएमसी सदस्यों की मदद के लिए निलंबित करने की माँग की

मीडिया से बात करते हुए, सौमेन्दु अधिकारी ने कहा, “वह वहाँ गए और लोगों से मिले। हमने चुनाव आयोग से संपर्क किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान होना चाहिए। लोग वही चुनेंगे, जो वे चाहते हैं। टीएमसी डर गई है। हमने चुनाव आयोग को अलाउद्दीन का नाम दिया है, वह वहाँ अशांति पैदा कर रहा है।”

उन्होंने कहा, “मतदाताओं को बूथ संख्या 149 पर मतदान से रोका जा रहा है। कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है। कुछ स्थानों पर ईवीएम में खराबी है, यह सभी चुनावों में होता है, चुनाव आयोग इसे देख रहा है।”

इधर राज्य के पश्चिम मिदनापुर जिले के कोशियारी इलाके में भाजपा के एक कार्यकर्ता का शव मिला है। कार्यकर्ता की पहचान बेगमपुर इलाके के 35 साल के मंगल सोरेन के रूप में की गई है। बता दें कि केशियारी के बेगमपुर इलाके में शनिवार सुबह एक भाजपा कर्मी का शव उनके घर के अहाते से खून से लथपथ हालत में बरामद हुआ था। उनके सिर व पीठ पर जख्म के निशान हैं।

भाजपा का आरोप है कि तृणमूल समर्थकों ने उनकी पीटकर हत्या करने के बाद शव को लाकर उसके घर के अहाते में रख दिया। तृणमूल ने इस घटना में हाथ होने से इन्कार किया है। चुनाव आयोग ने इस घटना पर जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की।

जिला प्रशासन की तरफ से चुनाव आयोग को जो रिपोर्ट सौंपी गई है, उसमें मौत को स्वाभाविक बताया गया है। वहीं सालबोनी में माकपा प्रत्याशी सुशांत घोष की गाड़ी पर हमला किया गया। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप तृणमूल कार्यकर्ताओं पर लगा है। तृणमूल कर्मियों ने उनकी गाड़ी को घेरकर प्रदर्शन किया। 

स्कॉर्पियो खड़ा कर चला गया… धमकी भरा पत्र रखना भूल गया… वापस आया और फिर रखा: सचिन वाजे को NIA ने ऐसे धरा

एंटीलिया बम कांड में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की जाँच में अब सामने आया है कि निलंबित सचिन वाजे ने खुद 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास पार्क किए गए विस्फोटक से भरे स्कॉर्पियो में धमकी भरा पत्र रखा था। एनआईए ने खुलासा किया कि सचिन वाजे पहले स्कॉर्पियो के अंदर धमकी भरा पत्र रखना भूल गया था और बाद में इसे रखने के लिए वापस आया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच के दौरान, एनआईए अधिकारियों ने पाया कि वाजे ने एंटीलिया के पास बम से लदे वाहन को पार्क करने से लेकर धमकी भरे पत्र को कार के अंदर रखने तक की पूरी कवायद को खुद से कॉर्डिनेट किया। एनआईए अधिकारियों ने निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए मुलुंड टोल कलेक्शन प्वाइंट से सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किया।

25 फरवरी को, मुंबई पुलिस ने बम से लदी स्कॉर्पियो से मुकेश और नीता अंबानी को संबोधित एक पत्र बरामद किया था, जिसमें दावा किया गया था कि यह विस्फोटक सिर्फ एक ’ट्रेलर’ था और पूरे परिवार की हत्या करने की अधिक तैयारी के साथ बाद में वापस आने की धमकी दी थी।

कथित तौर पर, क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) के कार्यालय में वाजे के तहत काम करने वाले एक कॉन्स्टेबल विनायक शिंदे 25 फरवरी को एंटीलिया के पास इनोवा में विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो को ले गए थे। बाद में स्कार्पियो ड्राइवर ने इनोवा छोड़ दी थी।

भूल गया था… धमकी भरा पत्र रखने वापस आया वाजे

बाद में, दो व्यक्तियों को एक ही इनोवा में देखा गया, जो कि मुलुंड टोल से सुबह करीब 3.27 पर ठाणे में प्रवेश किया। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि सुबह 4.03 बजे के आसपास इनोवा को फिर से मुंबई में प्रवेश करते देखा गया, लेकिन इस बार एक अलग नंबर प्लेट के साथ। मुंबई पुलिस मुख्यालय में उनके CIU कार्यालय की यात्रा के दौरान वाजे द्वारा एक ही नंबर प्लेट का एक महीने से अधिक समय तक उपयोग किया गया था।

जाँच से पता चला है कि वाजे शुरू में एसयूवी के अंदर धमकी भरा पत्र रखना भूल गया था। वह इसे रखने के लिए दोबारा अपराध स्थल पर लौटा था। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। एक कैमरा टोल के पास और दूसरा सीसीटीवी कैमरा एंटीलिया के पास लगा था। फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार एक अधिकारी ने कहा:

“हमारी जाँच से पता चला है कि वाजे एसयूवी के अंदर धमकी पत्र रखना भूल गया था और इस बात का एहसास होने पर वह टाइप किए गए धमकी पत्र को वापस रखने के लिए गया। एसयूवी के पास की हरकत को पास की दुकान के सीसीटीवी कैमरे ने कैद कर लिया। वाजे को बाद में कुर्ता पहना कर जाँच दल द्वारा सीन को रीक्रिएट करने के लिए उसी स्थान पर ले जाया गया था।”

एनआईए को पता चला है कि वाजे ने एक अन्य आरोपित विनायक शिंदे को 50,000 रुपए की सहायता राशि देने का वादा किया था। एनआईए अधिकारियों ने बताया कि इनोवा के अंदर मौजूद वाजे ने सफेद रंग का कुर्ता पहना हुआ था। मुकेश अंबानी के आवास के पास बम से लदे वाहन को पार्क करते हुए, वह कम से कम 10 मिनट तक वहाँ खड़ा रहा। जिसकी तस्वीर सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। सुबह 5.18 बजे फिर से इनोवा को वाजे को घर छोड़ने के लिए मुंबई से ठाणे की ओर जाते हुए देखा गया।

इससे पहले एंटीलिया बम मामले में सीसीटीवी फुटेज हाथ लगी थी। इसमें सचिन एक पीपीई किट या लूज फिटिंग कुर्ता जैसी चीज पहने नजर आ रहे थे, जिसे कथित तौर पर बाद में जला दिया गया था। सचिन वाजे के ही एक स्टाफ ने इस बात की पुष्टि की थी कि घटनास्थल पर पीपीई किट में नजर आने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि खुद सचिन वाजे ही है। इसलिए NIA ने इन्हीं बिंदुओं पर वाजे को क्राइम सीन पर ले जाकर उसे ओवर साइज कुर्ता पहनवाया, मुँह पर मास्क और सिर पर रुमाल बाँधा ताकि पूरा सीन रीक्रिएट हो सके।

पिछले हफ्ते NIA ने सचिन लाजे के लैपटॉप, कुछ मोबाइल फोन, आईपैड और दस्तावेज कब्जे में लिए थे। गुरुवार को वाजे के घर और कार्यालय से कई कारें बरामद हुईं थीं, जिसके बाद वाजे पर दोबारा शक गहरा गया। NIA ने इसी केस में एक मर्सिडीज कार भी बरामद की थी। कार से 5 लाख रुपए की नकद राशि, कुछ कपड़े और एक कैश काउंटिंग मशीन बरामद हुई थी। इसी मर्सिडीज से वो नंबर प्लेट भी मिली, जो एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियों पर थी।

जशोरेश्वरी काली मंदिर में PM मोदी ने की पूजा, नवरात्रि में माँ काली के मेला के लिए भारत सरकार बनाएगी कम्युनिटी हॉल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे का शनिवार (मार्च 27, 2021) को दूसरा दिन है। अपने दौरे के दूसरे दिन सबसे पहले PM मोदी दक्षिण-पूर्व सतखिरा स्थित जेशोरेश्वरी काली मंदिर पहुँचे, यहाँ उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

बांग्लादेश के सतखीरा में स्थित मशहूर जशोरेश्वरी काली मंदिर 51 शक्तिपीठ में से एक सुगंधा शक्तिपीठ है। बताया जाता है यहाँ देवी सती की हथेलियाँ गिरी थीं। इसके बाद एक ब्राह्मण ने यहाँ मंदिर का निर्माण कराया था। ये मंदिर करीब 400 साल पुराना बताया जाता है। पीएम मोदी ने यहाँ माँ काली को हाथ से निर्मित मुकुट पहनाया, उनके चरणों में साड़ी भेंट की। इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। यह मुकुट चाँदी से बना है, जिस पर सोने की परत चढ़ाई गई है।

उन्होंने कहा, “मैंने कामना की कि माँ काली दुनिया को कोरोना के संकट से मुक्ति दिलाएँ। मेरी कोशिश रहती है कि मौका मिले तो इन 51 शक्तिपीठों में जाकर माथा टेकूँ। मैंने सुना है कि यहाँ नवरात्रि में जब माँ काली का मेला लगता है, तो सीमा के इस पार से भी बड़ी तादाद में भक्त यहाँ आते हैं। यहाँ एक कम्युनिटी हॉल की आवश्यकता है। यह भक्तों के लिए और आपदा के समय लोगों के लिए शरणस्थल का काम करे। भारत सरकार यह कम्युनिटी हॉल बनवाएगी।”

जेशोरेश्वरी मंदिर में पूजा अर्चना के बाद लोगों को संदेश देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले कुछ दिनो में चैत्री नवरात्र का प्रारंभ होगा। पूर्व 51 शक्तितपीठ में से एक माँ काली के चरणो में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज माँ काली के चरणों आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है।”

पीएम मोदी ने इसके साथ ही कहा, “आज मानवजाति कोरोना के कारण सकंट से गुजर रही हैं। माँ से यही प्रार्थना है मानवजाति को कोरोना से जल्द से जल्द मुक्ति दिलाए।” प्रधानमंत्री ने कहा कि सर्वेभवन्तो जिस मंत्र को जिया है, वसुधैव कुटंबकम हमारी विरासत, पूरी मानव कल्याण के लिये प्रार्थना करते हैं। पूरे देश के कल्याण मानवजात की कल्याण की प्रार्थना करता हूँ।

पीएम मोदी ने इसके साथ ही कहा, “माँ काली का मेला लगता है, जिसमें सीमा पार से लोग आते हैं। यहाँ मल्टीपरपस कम्युनिटी हाल की आवश्यकता है। कोई काली पूजा के समय आए तो उनके उपयोग में आए। यहाँ के समाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक प्रोग्राम, आपदा, साइक्लोन के समय हर किसी के शेल्टर का स्थान बने। इस हेतु से भारत सरकार यहाँ ये कल्याण कार्य करेगी।” इसके लिए उन्होंने बांग्लादेश सरकार का भी आभार व्यक्त किया।

पीएम मोदी के तय कार्यक्रम के मुताबिक, वे ओराकंडी मंदिर भी जाएँगे। ओराकांडी वहीं जगह है, जहां मतुआ समुदाय के संस्थापक हरिशचंद्र ठाकुर का जन्म हुआ था। मतुआ समुदाय बंगाल चुनाव के लिहाज से भी काफी मायने रखता है। इसके बाद पीएम राष्ट्रपिता बागाबंधु शेख मुजिबुर रहमान के स्मारक पर भी पहुँचेंगे। पीएम मोदी के आगमन को लेकर मंदिर भव्य तरीके से सजाया गया है।

इसके बाद पीएम गोपालगंज जिले के तुंगीपारा में राष्ट्रबंधु के पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की स्मारक पर भी जाएँगे। यह बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हसीना का पैतृक गाँव है। यहाँ बने स्मारक में यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। इससे पहले बांग्लादेश के 50वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यात्रा के पहले दिन शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को प्रधानमंत्री मोदी ने राजनेताओं से मुलाकात की थी।

मोदी के दौरे से पहले ही हुआ जीर्णोद्धार

बांग्लादेश सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले ही जशोरेश्वरी मंदिर का जीर्णोद्धार किया है। बांग्लादेश के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया था कि वे प्राचीन जशोरेश्वरी काली मंदिर में देवी काली की पूजा करने के लिए काफी उत्साहित हैं।

मतुआ समुदाय के सबसे बड़े तीर्थ स्थल जाएँगे

प्रधानमंत्री मोदी ओरकांडी में मतुआ समुदाय के सबसे बड़े तीर्थ स्थल ठाकुरबाड़ी में करीब 300 मतुआ धर्म प्रचारकों को संबोधित भी करेंगे। इसके बाद मोदी अपने समकक्ष शेख हसीना के साथ वार्ता करेंगे। इसके बाद वे बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद से भी मुलाकात करेंगे।

कोरोना के चलते साल 2020 में यात्रा रद्द की गई थी

बीते साल कोरोना संक्रमण के शुरुआत के बाद PM की जो विदेश यात्रा मार्च 2020 में रद्द की गई थी वो बांग्लादेश की ही थी। PM मोदी को शेख मुजीबुर रहमान जन्मशती कार्यक्रम में शरीक होने के लिए पहले 17 मार्च 2020 को बांग्लादेश की यात्रा करनी थी। हालांकि, कोविड-19 महामारी के बीच अपनी विदेश यात्राओं का सिलसिला शुरू करने के लिए उन्होंने पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश को ही चुना।

पैगंबर मोहम्मद के कार्टून पर टीचर सस्पेंड क्यों, नौकरी दो उन्हें… कट्टरपंथियों के खिलाफ हजारों लोगों का अभियान

ब्रिटेन के वेस्ट यॉर्कशायर (West Yorkshire) के एक स्कूल में व्यंग्य मैग्जीन शार्ली एब्दो (Charlie Hebdo) में प्रकाशित हुए पैगंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून दिखाने पर मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने वहाँ स्कूल के बाहर प्रदर्शन करते हुए उस टीचर के सस्पेंशन की माँग की। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि स्कूल के हेडमास्टर को स्वयं इस संबंध में माफी माँगनी पड़ी और प्रदर्शनकारियों की बात मानते हुए टीचर को निलंबित कर दिया गया। वहीं मौत के खतरे के बाद उसे अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अब उनके कुछ छात्रों ने उनकी नौकरी बचाने के लिए एक याचिका शुरू की है, जिस पर 13,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। उनकी नौकरी बचाने के अभियान का समर्थन करने वाले लोगों ने उन्हें एक ‘अच्छे इंसान’ और ‘मेहनती शिक्षक’ बताते हुए कहा कि वे ‘सभी धर्मों का सम्मान करने वाले’ हैं। अन्य ने जोर देकर कहा कि स्कूल को उनके द्वारा खड़े होना चाहिए, उन्हें ‘कट्टरपंथी’ द्वारा ‘तंग’ किया जा रहा है।

एक मुस्लिम माता-पिता ने याचिका पर हस्ताक्षर किया, जिसका नाम मोहम्मद जे था। उन्होंने कहा, “मैं स्कूल और संबंधित शिक्षक के लिए अपना समर्थन देना चाहूँगा। उन्होंने मेरी बेटी को पढ़ाया है और वह उनके बारे में बहुत बात करती है। मुझे उन्हें उसे फिर से पढ़ाते हुए देखने में कोई संकोच नहीं होगा। मुझे विश्वास है कि शिक्षक का कोई अपराध नहीं था और मुझे उम्मीद है कि जाँच के बाद वह स्कूल में वापस लौट आएँगे।”

एक अन्य हस्ताक्षरकर्ता ने कहा, “उनसे कई छात्र प्यार करते हैं, जिसमें मुस्लिम और गैर मुस्लिम दोनों हैं। बाटली ग्रामर अपने खुद के एक के लिए खड़े हो जाओ। एक अच्छे शिक्षक को मत खोओ।”

शिक्षा सचिव गेविन विलियमसन ने विरोध प्रदर्शन की निंदा की है और कहा है कि स्कूलों को कक्षा में ‘चुनौतीपूर्ण या विवादास्पद’ सामग्री दिखाने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। समुदाय के सचिव रॉबर्ट जेनरिक ने कहा कि यह बहुत परेशान करने वाला था कि शिक्षक को छिपने के लिए मजबूर किया गया है।

शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने इस प्रकार धमकियाँ देने वाले और कोरोना वायरस प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले प्रदर्शन की आलोचना की और इसे किसी भी कीमत पर अस्वीकार्य कहा। प्रवक्ता ने कहा कि विद्यालय अपने पाठ्यक्रम में, मुद्दे, विचार और सामग्रियों को शामिल करने के लिए स्वतंत्र हैं चाहे वे चुनौतीपूर्ण हों या फिर विवादित… उन्हें विभिन्न आस्था और विश्वासों के लोगों के बीच सम्मान और सहिष्णुता को बढ़ावा देने की आवश्यकता के साथ इसे संतुलित करना चाहिए, जिसमें यह तय किया जाए कि कक्षा में किस सामग्री का उपयोग करना है।

शिक्षक के पड़ोसी ने बताया कि उन्होंने कल सुबह 9.30 बजे अपना घर छोड़ दिया। वो एक काले वाहन में सवार होकर चले गए। उनकी खुद की गाड़ी अभी भी घर के पास खड़ी है। वे जल्दी में लग रहे थे और वे कल रात वापस नहीं आए। 

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, बैटले ग्रामर स्कूल के हेड गैरी किबल ने, मजहबी शिक्षा का पाठ पढ़ाने के दौरान एक टीचर द्वारा इस्तेमाल शार्ली एब्दो के आपत्तिजनक कार्टून पर छात्रों के अभिभावकों से माफी माँगी। किबल ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले में आगे पड़ताल बैठाएँगे। 

अभिभावकों को भेजे गए ईमेल में उन्होंने लिखा, “जाँच में ये साफ है कि पाठ पढ़ाने के दौरान इस्तेमाल किए गए संसाधन बिलकुल गलत थे और स्कूल के एक समुदाय के सदस्यों को आहत करने वाले थे। इस गलती के लिए हम ईमानदारी से और पूर्णत: माफी माँगते हैं।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले पेरिस में 47 वर्षीय इतिहास के एक टीचर सैमुअल पैटी का स्कूल के बाहर गला रेत दिया गया था। उनकी गलती बस इतनी थी कि क्लास में ‘शार्ली एब्दो’ अख़बार में प्रकाशित पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। इसी बात पर हत्यारे ने अल्लाह हू अकबर चिल्लाते हुए घटना को अंजाम दिया था।

1978 में एक किताब आई थी, बांग्लादेश की आजादी के 7 साल बाद… फोटो ‘अनजाने’ मोदी की थी… क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के बांग्लादेश दौरे पर हैं। शुक्रवार (मार्च 26, 2021) को उन्होंने बांग्लादेश के नेशनल डे के कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कुछ ऐसा कहा, जिसके बाद उनके आलोचक उस तथ्य को झूठ मानकर उन्हें ट्रोल करने लगे। लेकिन शायद उन्हें उस सत्याग्रह के बारे में जानकारी ही नहीं थी, जिसका पीएम मोदी जिक्र कर रहे थे। आईए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

क्या कहा पीएम मोदी ने? 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व और 1971 की बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में भारतीय सेना के योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद और प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ देश की स्वतंत्रता की 50 वीं वर्षगाँठ पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम ने बताया कि उन्होंने भी बांग्लादेश की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था

उन्होंने कहा, “बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में शामिल होना मेरे जीवन के भी पहले आंदोलनों में से एक था। मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी, जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था। बांग्लादेश की आजादी के समर्थन में तब मैंने गिरफ्तारी भी दी थी और जेल जाने का अवसर भी आया था। यानी बांग्लादेश की आजादी के लिए जितनी तड़प इधर थी, उतनी ही तड़प उधर भी थी।”

भारतीय सेना के पराक्रम को किया याद

नेशनल परेड स्क्वायर पर बांग्लादेश की आजादी की स्वर्ण जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने उसकी आजादी की लड़ाई में भारतीय सेना की भूमिका को याद किया और कहा कि बांग्लादेश में अपनी आजादी के लिए लड़ने वालों और भारतीय जवानों का रक्त साथ-साथ बहा था और रक्त ऐसे संबंधों का निर्माण करेगा, जो किसी भी दबाव से टूटेगा नहीं।

ट्रोल करने में जुटे आलोचक

वहीं, पीएम मोदी के इस तथ्य के बाद उनके आलोचक उन्हें ट्रोल करने की कोशिश में जुट गए। एनडीटीवी के ‘पत्रकार’ रवीश कुमार ने इस पर व्यंग्य लिख कर पीएम मोदी पर निशाना साधने की कोशिश की तो वहीं प्रधानमंत्री की टिप्पणी का हवाला देते हुए कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय ज्ञान: हमारे प्रधानमंत्री बांग्लादेश को भारतीय ‘फर्जी खबर’ का स्वाद चखा रहे हैं। हर कोई जानता है कि बांग्लादेश को किसने आजाद कराया।’’ कॉन्ग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी निशाना साधते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘संपूर्ण राजनीतिक विज्ञान’ करार दिया।

आँख मूँद कर आलोचना करने वालों को नहीं पता था कि पीएम मोदी जिस सत्याग्रह के बारे में बात कर रहे हैं, पीएम के समर्थक उसकी पूरी जानकारी सोशल मीडिया पर रख कर दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे। 

12 दिन चला था सत्याग्रह, 10000+ कार्यकर्ता हुए थे गिरफ्तार

जनसंघ ने अगस्त 1971 में बांग्लादेश सत्याग्रह शुरू किया था। यह 12 दिन तक चला था। इस दौरान जन संघ के हजारों कार्यकर्ता गिरफ्तार भी हुए थे। सत्याग्रह के आखिरी दिन 1200 महिलाओं और बच्चों समेत करीब 10 हजार कार्यकर्ता जेल गेए थे। यहाँ तक कि जनसंघ के अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ने सत्याग्रह को संबोधित भी किया था।

आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी बांग्लादेश द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी को दिए गए प्रशस्ति पत्र को शेयर करते हुए ट्वीट किया, “क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश को पहचान दिलाने के लिए जन संघ द्वारा आयोजित सत्याग्रह का हिस्सा थे? हाँ, वह इसका हिस्सा थे। बांग्लादेश द्वारा वाजपेयी को दिया गया प्रशस्ति पत्र रैली के बारे में बताता है। पीएम मोदी ने 1978 में लिखी एक किताब में बांग्लादेश सत्याग्रह के दौरान तिहाड़ जाने के बारे में भी लिखा था।”

प्रशस्ति पत्र

इस प्रशस्ति पत्र में कहा गया है, “बांग्लादेश के लोग हमेशा अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के कारण का समर्थन करने और बांग्लादेश और भारत के बीच दोस्ती को मजबूत करने के लिए किए गए महत्वपूर्ण योगदान को याद रखेंगे।”

आलोक मिश्रा नाम के ट्विटर यूजर ने 1978 में लिखी गई एक किताब का बैक कवर शेयर किया है, जिसमें बांग्लादेश के निर्माण के लिए चले आंदोलन में नरेंद्र मोदी की भूमिका का जिक्र है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “पीएम नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के निर्माण के लिए सत्याग्रह में भाग लेने और इसके लिए जेल जाने का ढाका में ज़िक्र क्या किया। उनके आलोचकों के पेट में दर्द हो गया। संदेह का माहौल खड़ा किया जाने लगा। इन आलोचकों को 1978 में प्रकाशित इस किताब के बैक कवर को देखकर मायूस होना पड़ेगा।”

उन्होंने आगे लिखा, “इस किताब के बैक कवर पर तब आरएसएस के युवा प्रचारक रहे नरेंद्र मोदी का जो परिचय है, उसमें साफ तौर पर बांग्लादेश के निर्माण के लिए चले आंदोलन में नरेंद्र मोदी की भूमिका का जिक्र है। जिन्हें गुजराती नहीं आती, उनके लिए चौथे पैराग्राफ का गुजराती अनुवाद आगे दे रहा हूँ।”

आलोक मिश्रा ने गुजराती अनुवाद देते हुए लिखा, “आपातकाल के बीस महीने, सरकारी तंत्र की नाकामयाबी को साबित करते हुए भूगर्भ में रहकर काम किया और संघर्ष प्रवृति को चलाए रखा। इससे पहले बांग्लादेश के सत्याग्रह के समय तिहाड़ जेल होकर आए।” इसे पढ़ने के बाद शर्म आए, तो बिना तथ्य जाने विवाद पैदा करना छोड़ देना चाहिए मोदी के आलोचकों को।”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ढाका में बांग्लादेश के राजनीतिक और सामुदायिक नेताओं से मुलाकात की, जिनमें अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि तथा बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के मुक्ति योद्धा शामिल रहे। विदेश मंत्रालय के अनुसार मोदी ने सत्तारूढ़ ग्रैंड अलायंस के नेताओं से मुलाकात की, जिस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़े विविध विषयों पर चर्चा की।

बंगाल के उलट असम में सब शांत, मतदान केंद्रों पर भारी भीड़: गड़बड़ी के क्षेत्रों की पहचान कर ताबड़तोड़ गश्त

असम में 27 मार्च 2021 यानी आज सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया। वोटर अपने मत शाम 6 बजे तक डाल पाएँगे। चुनाव आयोग ने कोविड और सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए इस बार वोट डालने का समय बढ़ा दिया है।

कोविड को देखते हुए वोटरों और मतदान कराने वाले अधिकारियों तक की सुरक्षा व स्वास्थ्य का ख्याल रखा गया है। इसके लिए मतदान केंद्रों पर मास्क, ग्लव्स और हैंड सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था चुनाव आयोग ने की है। मतदाताओं ने भी सुबह-सुबह भारी संख्या में मतदान केंद्रों तक आकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है।

असम चुनाव, पहला चरण: 47 विधानसभा, 264 उम्मीदवार, 8109815 वोटर्स

असम विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 27 मार्च को जो वोटिंग हो रही है, उसमें ऊपरी असम क्षेत्र के 11 जिलों की 42 और मध्य असम के नागाँव जिले की 5 सीटें शामिल हैं। इन 47 विधानसभा के लिए 264 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन 264 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 81,09,815 वोटर्स करेंगे।

असम विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 11,537 मतदान केंद्रों पर लैंगिक आधार पर वोटरों की बात करें तो 40,77,210 पुरुषों और 40,32,481 महिलाओं सहित 81,09,815 मतदाता वोट डालेंगे।

असम में पहले चरण के VVIP सीट और उम्मीदवार

असम के वर्तमान मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, असम कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रिपुन बोरा, असोम गण परिषद (भाजपा की सहयोगी पार्टी) के अध्यक्ष अतुल बोरा, असम जनता परिषद के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई, असम के किसान नेता और राएजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई, असम सरकार के मंत्री रंजीत दत्ता, नाबा डोली, जोजन महान, संजय किशन जैसे दिग्गज लोगों के भाग्य का फैसला आज ही EVM में कैद हो जाएगा।

वर्तमान विधायकों की बात करें तो भाजपा, कॉन्ग्रेस और असोम गण परिषद के 28 विधायकों के नाम पहले चरण के मतदान में वोटरों द्वारा निर्धारित कर दिया जाएगा।

असम चुनाव के पहले चरण में सुरक्षा

असम में पहले चरण के चुनाव के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की सुरक्षाबलों की 300 कंपनियाँ सक्रिय रहेंगी। इनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CRPF) के अलावा अन्य राज्यों और असम के राज्य सशस्त्र पुलिस (SAP) शामिल हैं।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के बाद राज्य में यह पहला विधानसभा चुनाव है। ऐसे में सुरक्षा को लेकर खास ध्यान रखा गया है। पूरे राज्य में 3826 मतदान केंद्रों और 107 क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिसमें व्यापक स्तर पर सुरक्षाबलों द्वारा गश्ती की जा रही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि असम में कुल 126 विधानसभा हैं। यहाँ तीन चरणों में वोटिंग होनी है। पहले चरण की वोटिंग 27 मार्च, दूसरे चरण की वोटिंग 1 अप्रैल जबकि तीसरे चरण की वोटिंग 6 अप्रैल को होगी।