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क्या है सिंधु जल समझौता, मोदी सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद क्यों लिया एक्शन, ‘भिखमंगा पाकिस्तान’ पर क्या होगा असर: जानिए सब कुछ

पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर भारत ने एक्शन लेना चालू कर दिया है। पाकिस्तान प्रायोजित इस आतंकी हमले के बाद भारत ने कूटनीतिक कदम उठाए हैं। भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का फैसला ले लिया है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में हुई सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने लिया है।

इसके अलावा पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करने, अटारी सीमा बंद करने और पाकिस्तानियों को देश निकाला देने का फैसला लिया है। इन सबमें सबसे बड़ी चोट सिंधु जल समझौते को रद्द करके की ही गई है। इसकी माँग भी लम्बे समय से हो रही थी।

क्या है सिन्धु जल समझौता?

भारत और पाकिस्तान, एक ही भूभाग का हिस्सा है। भारत से कई नदियाँ बह कर पाकिस्तान जाती हैं। सिंधु नदी तंत्र की नदियाँ पाकिस्तान के पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। इन्हीं के पानी के बँटवारे को लेकर किया गया समझौता सिंधु जल समझौता कहलाता है।

यह समझौता वर्ष 1960 में हुआ था। इसके लिए लगभग एक दशक तक बातचीत पाकिस्तान और भारत के बीच चली थी। तब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के तानाशाह अयूब खान ने इसको मंजूरी दी थी। सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु नदी तंत्र की 6 नदियों (व्यास, रावी, सतलुज, सिन्धु, चेनाब और झेलम) के पानी का बँटवारा होता है।

इस जल समझौते के अनुसार, पूर्वी नदियाँ (व्यास, रावी और सतलुज) के पानी पर पूरा अधिकार भारत का है। यानी इनमें बहने वाले पानी का वह किसी भी तरह से इस्तेमाल कर सकता है। भारत इन नदियों पर बाँध बना सकता है, उनकी जलधाराएँ मोड़ सकता है, उनसे नहरें निकाल सकता है और पूरा उपयोग कर सकता है।

सिंधु जल समझौते के अनुच्छेद 2 का खंड (1) कहता है, “पूर्वी नदियों का पूरा पानी भारत के अप्रतिबंधित उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा, सिवाय इसके कि इस अनुच्छेद में अन्यथा अलग से उसके लिए कोई प्रावधान किया गया हो।” पूर्वी नदियों को लेकर पाकिस्तान को दखलअंदाजी करने का कोई अधिकार नहीं है।

इसको लेकर भी अनुच्छेद 2 के खंड (2) में प्रावधान है। इसमें लिखा है, “घरेलू उपयोग को छोड़कर, पाकिस्तान सतलुज और रावी नदियों के पानी को बहने देने के लिए बाध्य होगा और उन स्थानों पर इनके पानी में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होने देगा, जहाँ ये पाकिस्तान में बहती हैं और अभी तक पूरी तरह से पाकिस्तान में प्रवेश नहीं कर पाई हैं।”

दरअसल, यह नदियाँ पाकिस्तान में अंतिम रूप से घुसने से पहले कई बार दोनों सीमाओं के इधर-उधर बहती हैं। पूर्वी नदियों के अलावा बाक़ी पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) के पानी पर पूरा अधिकार पाकिस्तान का है। समझौता के अनुसार, भारत इन नदियों को लेकर कोई भी रोक नहीं लगा सकता।

समझौते का अनुच्छेद 3 का भाग (2) कहता है, “भारत पश्चिमी नदियों के जल को बहने देने के लिए बाध्य होगा, और इसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा, कुछ परिस्थितियों को छोड़ कर।” यह परिस्थितियाँ घरेलू उपयोग और कृषि उपयोग से जुड़ी हुई हैं।

इस समझौते के तहत इन 6 नदियों के लगभग 70%-80% पानी पर पाकिस्तान को जबकि 20%-30% पानी पर भारत को अधिकार मिलता है। इसको लेकर पहले भी प्रश्न उठाए जाते रहे हैं कि इसका सीधा फायदा पाकिस्तान को मिला है और भारत का इससे कोई लाभ नहीं है।

क्यों सस्पेंड हो गया समझौता?

बुधवार (23 अप्रैल, 2025) को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सिंधु जल समझौते के निलंबन की घोषणा की। भारत ने बताया कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमले में पाकिस्तान का रोल सामने आया है, ऐसे में समझौते को भारत निलंबित कर रहा है। इस हमले में 28 लोगों की हत्या इस्लामी आतंकियों ने कर दी है। मरने वाले अधिकांश हिन्दू हैं, जिन्हें धर्म पूछ कर मारा गया।

भारत ने स्पष्ट कर दिया कि यह समझौता तब ही वापस अमल में लाया जाएगा जब पाकिस्तान आतंक पर ठोस कार्रवाई करना चालू करेगा। सिंधु जल समझौते पर इतना बड़ा एक्शन इससे पहले कभी नहीं लिया गया था। यहाँ तक कि 1965 युद्ध, 1971 युद्ध और कारगिल के दौरान भी इसे कूटनीतिक विकल्पों के तहत नहीं लाया गया था।

इससे पहले 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने समझौते को ‘रिव्यू’ करने की बात कही थी। भारत इससे पहले भी कई बार पाकिस्तान को नोटिस भेज कर समझौते की शर्तों में बदलाव की माँग कर चुका है। हालाँकि, उस पर कोई आगे ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

इससे पाकिस्तान पर क्या असर?

पाकिस्तान की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी खेती पर निर्भर है। उसका खेती का इलाका भी पंजाब और सिंध में सिमटा हुआ है। बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वाह जैसे राज्य सूखे मरुस्थल जैसे हैं। पाकिस्तान में होने वाली खेती के लिए 90% पानी सिंधु नदी तंत्र से आता है। यह पानी भारत से ही बह कर जाता है।

सिंधु नदी तंत्र से आने वाला पानी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 25% हिस्से के लिए जिम्मेदार है। पाकिस्तान पहले से ही पानी की किल्लत झेल रहा है। ऐसे में भारत का यह समझौता निलंबित करना उसके लिए बड़ा झटका है। यह पानी रुकने से उसकी खेती तो प्रभावित होगी ही, कराची और लाहौर जैसे बड़े शहर भी पानी के लिए तरस जाएँगे।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के निलंबित होने के बाद यह पानी पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए भारत को नए बाँध बनाने होंगे, इससे ही पूरी तरह यह कार्रवाई अमल में आ पाएगी। हालाँकि, भारत तुरंत भी पाकिस्तान को चोट दे सकता है। भारत अपने हिस्से में इन नदियों की धाराएँ अस्थायी रूप से सेना और बाकी विभाग को काम पर लगाकर मोड़ सकता है।

इसके अलावा भारत इन नदियों में बहने वाले पानी की मात्रा, इनके जलस्तर, बहाव की गति और बाकी डाटा भी अब पाकिस्तान के साथ साझा नहीं करेगा। ऐसे में पाकिस्तान को बाढ़ और पानी में कमी का अंदाजा भी नहीं लगा पाएगा। यह स्थिति उसके लिए आगामी मानसून में और भी विकट होगी।

पाकिस्तान का क्या रुख ?

भारत के यह समझौता रद्द करने के बाद पाकिस्तान में हलचल तेज है। अभी पाकिस्तान का भारत इस फैसले पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की एक बैठक गुरुवार (24 अप्रैल, 2025) को बुलाई है। कयास हैं कि इसके बाद पाकिस्तान इस मामले को लेकर कोई प्रतिक्रिया देगा।

पाकिस्तान इससे पहले भी समझौते को रद्द करने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाने की बात कहता आया है। हालाँकि, इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ने वाला है। पाकिस्तान में इस समय इस बात को लेकर भी खौफ है कि भारत इन कूटनीतिक क़दमों के अलावा और क्या सैन्य एक्शन लेगा।

पहलगाम में रिपोर्टिंग करने गईं चित्रा त्रिपाठी पर टूटी इस्लामी भीड़, सब Video में कैद: पत्रकार ने कहा- 24 घंटे में उतर गया इनका नकाब, मंत्री बोले- कश्मीर और कश्मीरियत की यही हकीकत

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद वहाँ रिपोर्टिंग करने गईं ABP न्यूज की पत्रकार चित्रा त्रिपाठी के साथ बदसलूकी का मामला सामने आया है। वीडियो वायरल है। इसमें स्थानीय भीड़ चित्रा त्रिपाठी पर भड़कती दिख रही है। पत्रकार बार-बार चिल्लाकर बता रहीं हैं कि वो बस अपना काम करने आई हैं लेकिन भीड़ बिलकुल उनकी नहीं सुन रही और उन्हें घेरकर खड़ी है।

क्या है वायरल वीडियो में

वीडियो में दिख रहा है कि चित्रा त्रिपाठी स्थानीय महिलाओं को समझाने का प्रयास कर रही हैं कि वो सिर्फ अपने काम से यहाँ हैं, मगर पीछे खड़ी भीड़ उन्हें वहाँ रुकने नहीं देती। वो फिर कहती हैं- “मैं जर्नलिस्ट हूँ लेकिन आप मेरे साथ गाली-गलौच कर रहे हैं- ये बेहद गलत बात है… मारना है तो मार दो।”

इसके बाद कुछ लोग चित्रा से बात करने लगते हैं और पीछे से एक समूह जोर-जोर से गोदी मीडिया हाय-हाय के नारे लगाते रहता है। वीडियो में कुछ मुस्लिम युवकों का ‘गुलिस्तां हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं’ जैसे नारे लगाते भी देखा गया। इसके अलावा – कश्मीर से आवाज आई- ‘हिंदू मुस्लिम भाई-भाई भी चिल्लाते लोगों को देखा गया।’

‘कश्मीर की यही हकीकत’

वीडियो को सोशल मीडिया पर असम के मंत्री अशोक सिंघल ने भी साझा किया है। उन्होंने लिखा, “चित्रा त्रिपाठी की लगभग लिंचिंग हो गई थी। यही कश्मीर और कश्मीरियत की हकीकत है। आप आप उन लोगों के साथ शांति वार्ता नहीं कर सकते जिनका अस्तित्व आपके विनाश पर निर्भर करता है।”

‘पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाकर दिखाओ’

वीडियो को सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने साझा किया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा- “24 घंटे से कम समय में ही नकाब उतर गए! कल हिंदुओं को उनका नाम पूछ कर, उनका धर्म जान कर मार दिया गया। आज श्रीनगर में जो पत्रकार हिंदुओं को निशाना बनाने पर रिपोर्टिंग कर रहे थे उन्हें स्थानीय लोगों ने निशाना बनाया। रिपब्लिक टीवी और एबीपी की महिला पत्रकारों को घेर कर हूटिंग की गई और ‘गोदी मीडिया हाय हाय’ के नारे लगाए गए।”

उन्होंने चित्रा त्रिपाठी को घेरकर की गई इस तरह की हूटिंग को शर्मनाक करार देते हुए नारा लगाने वालों से पूछा कि गुर्दा है तो पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगा कर दिखाओ।”

बता दें कि इस वीडियो के सामने आने के बाद एक तरफ जहाँ चित्रा त्रिपाठी को लोग मजबूत रहने के लिए हौंसला दे रहे हैं। वहीं एक धड़ा ऐसा है जो उन्हें घेरकर प्रताड़ित किए जाने को सही ठहरा रहा है। इन समूह के हिसाब से हर गोदी मीडिया के साथ ऐसा ही होना चाहिए। उनका कहना है कि गोदी मीडिया ये क्यों दिखा रहा है कि इस्लामी आतंकियों ने हिंदुओं को निशाना बना दिया जबकि आपको बता दें कि हकीकत ही यही है कि ये बातें खुद चश्मदीदों और पीड़ितों ने बताई हैं।

पीड़ितों ने खुद कहा है कि आतंकी आए, नाम पूछा, पैंट उतरवाकर खतना देखा और हिंदू निकलने पर लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। बावजूद इसके ये धड़ा इस हमले को ऐसे दिखाने पर जुटा है जैसे इसमें सारी गलती मीडिया कि है कि वो क्यों इस्लामी कट्टरपंथियों का चेहरा उजागर कर रही हैं।

सिंधु जल समझौता निलंबित, पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द, अधिकारियों को देश-निकाला, अटारी सीमा बंद: पहलगाम हमले के बाद एक्शन में भारत

भारत ने अब बयानबाज़ी की जगह एक्शन के जरिए पाकिस्तान को जवाब देना शुरू कर दिया है। जहाँ एक तरफ जम्मू कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में 28 भारतीयों का ख़ून बहाने वाले आतंकियों के ख़िलाफ़ सफाया अभियान शुरू कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ़ भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबावों की परवाह किए बिना इतिहास में हुए भूलों को सुधारने की कार्रवाई शुरू कर दी है। अपना सऊदी अरब दौरा बीच में ही स्थगित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमले के एक दिन बाद बुधवार (23 अप्रैल, 2025) को भारत लौट आए। इसके बाद CCS (कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी) की बड़ी बैठक हुई।

भारत ने बड़ा फ़ैसला लेते हुए न केवल सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया है, बल्कि भारत में मौजूद कई पाकिस्तानी राजनयिकों एवं कर्मचारियों ‘अवांछनीय’ करार दिया है, जिसके बाद उन्हें अपने मुल्क़ वापस लौटना पड़ेगा। साथ ही अनंतनाग पुलिस ने इस ख़तरनाक हमले में शामिल सभी आतंकियों की सूचना के लिए 20 लाख रुपए का इनाम रखा गया है। साथ ही गुरुवार (24 अप्रैल, 2025) को इस संबंध में सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को इसके लिए सभी दलों से बात करने की जिम्मेदार सौंपी गई है।

साथ ही पाकिस्तानियों के लिए किसी भी प्रकार की वीजा की सुविधा को निलंबित कर दिया गया है। एक के बाद एक करके मोदी सरकार ने पाकिस्तान की नकेल कस दी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने इन फ़ैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि नई दिल्ली में मौजूद पाकिस्तान के रक्षा, सैन्य, नौसेना-विषयक अधिकारियों व एयर अडवाइजर्स को देश छोड़ने के लिए कह दिया गया है। उन्हें इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। साथ ही इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाई कमीशन से भी सभी कर्मचारियों को वापस बुला लिया गया है। दोनों हाई कमिशनों में ऐसे सभी पदों को रद्द कर दिया गया है।

सर्विज एडवाइजरों के पाँच सपोर्ट स्टाफ भी दोनों हाई कमिशनों से हटाए जाएँगे। 1 मई, 2025 से कार्रवाई करते हुए हाई कमीशन में मौजूद कर्मचारियों की संख्या को 55 से 30 पर लाया जाएगा। अटारी स्थित इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट को भी बंद कर दिया गया है। इस रास्ते से यहाँ वैध तरीके से आने वालों को 1 मई, 2025 तक वापस जाने के लिए कह दिया गया है। साथ ही SAARC वीजा एक्सेम्पशन स्कीम (SVES) के तहत भारत में मौजूद सभी पाकिस्तानियों का वीजा रद्द कर दिया गया है।

उन्हें देश छोड़ने के लिए 48 घंटों का समय दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित CCS की बैठक में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की गई। सभी सशस्त्र बलों को हाई अलर्ट पर रहने को बोल दिया गया है। न केवल इस घटना को अंजाम देने वाले आतंकियों, बल्कि उनके पीछे जो लोग हैं उन्हें भी सज़ा देने का ऐलान किया गया है। तहव्वुर राना को 26/11 आतंकी हमला के मामले में भारत लाए जाने का उदाहरण देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर भागने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।

‘ये PM को सन्देश – मुस्लिम कमजोर महसूस कर रहे’: रॉबर्ट वाड्रा ने 28 शवों के ऊपर सेंकी ‘हिंदुत्व’ से घृणा की रोटी, पहलगाम पर बोले – नमाज पढ़ने से रोकती है सरकार

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को हुए इस हमले में 28 पर्यटकों को मार दिया गया। इनमें 24 हिंदू समेत दो विदेशी नागरिक भी शामिल थे। आतंकियों ने मारने से पहले उनका धर्म पूछा, आईडी जाँची और फिर मुस्लिम न होने पर उन्हें गोली मारी। इस घटना पर हर कोई शोक जता रहा है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी अब भी मुस्लिमों को विक्टिम दिखाने की कोशिश कर रही है।

वायनाड से सांसद और कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा के नाम पर एजेंडा चलाया है। उन्होंने मुस्लिमों के साथ सहानुभूति जताई। उन्होंने कहा, “आईडी देखना और उसके बाद लोगों को मार देना असल में प्रधानमंत्री को एक संदेश है कि मुस्लिम कमजोर महसूस कर रहे हैं। सेक्युलर होने से ही देश की प्रगति हो सकती है।”

सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने पहलगाम आतंकी हमले में मुस्लिमों को कसूरवार ठहराने की बजाय उन्हें विक्टिम ही बता डाला। अपने बयान में रॉबर्ट ने कहा, “ये मेरा अपना विचार है कि ये सरकार हिंदुत्व का प्रचार करती है और मस्जिदों का सर्वे करती है तो मुस्लिम असहज और परेशान होते हैं। उनके लिए दुखदायी है जब सरकार उन्हें कहती है कि आप इस जगह पर नमाज नहीं पढ़ सकते, इस तरह की बातें लोगों के बीच सांप्रदायिक अस्थिरता और तनाव पैदा करती हैं।”

रॉबर्ट ने आगे कहा, “अगर आप इस आतंकी हमले पर ध्यान से समझेंगे तो पाएँगे कि आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म इसलिए पूछा क्योंकि हमारे देश में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई लोगों के बीच एक विभाजन आ गया है। सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने के कारण इस तरह के आतंकी संगठन ये सोचेंगे कि हिंदू लोग मुस्लिम के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। धर्म और राजनीति को अलग होना चाहिए। अगर इसे नहीं रोका गया तो इस तरह के आतंकी हमले होते रहेंगे। उनकी सोच है कि मुस्लिमों को दबाया जा रहा है।”

ये रॉबर्ट वाड्रा का ही पहले का कभी बयान था कि आतंक का कोई मजहब नहीं होता। आज जब आतंकवादियों ने धर्म को सीधे हमले में शामिल कर दिया तो रॉबर्ट वाड्रा बड़ी चालाकी से इस पर पर्दा डाल कर मुस्लिमों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और सेक्युलरिज्म का पाठ पढ़ा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट नहीं, पाकिस्तान की कुटाई है पहलगाम में हुए इस्लामी आतंकी हमले का जवाब: कपिल सिब्बल चाहते हैं कश्मीर पर नेहरू वाली भूल फिर करे भारत

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लगातार आंतकियों पर कार्रवाई की माँग हो रही है। हमले में शामिल 2 आतंकी पाकिस्तानी भी थे। लोगों की माँग है कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए। लेकिन इस बीच पहलगाम आतंकी हमले के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की लिबरल जमात ने माँग कर दी है। इस बार यह अटपटी माँग करने वाले कपिल सिब्बल हैं।

राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने पहलगाम हमले के बाद कहा, “यह मामला राज्य प्रायोजित आतंकवाद का है। हमारे कानूनों के अनुसार, पाकिस्तान को आंतकी राष्ट्र ठहराया जाना चाहिए। इस आतंकी हमले के जिम्मेदारों को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में दोषी ठहराया जाना चाहिए।”

सिब्बल ने आगे कहा, “मैं गृह मंत्री से माँग करता हूँ कि पाकिस्तान को हमारे क़ानून के अनुसार आतंकी राष्ट्र घोषित किया जाए और फिर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय लेकर जाया जाए। वह इस न्यायालय में पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करने की माँग करें।”

जहाँ यह 100% सच है कि पाकिस्तान की शह पर यह हमला हुआ है और वह स्वयं में एक आतंकी राष्ट्र है, लेकिन इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में नहीं ले जाया जा सकता। इस मामले पर भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ के मसले को खुद ही निपटा लेगा।

भारत का स्टैंड है कि कश्मीर और उससे जुड़ा कोई भी मामला अंतरराष्ट्रीय नहीं है और इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नहीं ले जाया जाएगा। कश्मीर का सीमा विवाद का मामला हो या फिर पाकिस्तान का कश्मीर के बड़े हिस्से पर अनाधिकृत कब्जा, भारत इसे द्विपक्षीय तरीके से हल करने की बात करता आया है।

ऐसे में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना कहीं से भी ठीक नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर का मुद्दा ले जाना भारत के लिए कभी लाभदायक नहीं रहा है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू यह गलती एक बार कर चुके हैं। आजादी के बाद पाकिस्तान में कश्मीर पर हमले को वह संयुक्त राष्ट्र लेकर गए थे।

इसके बाद कश्मीर का मामला फंस कर रह गया और भारतीय सेना आगे के आगे बढ़ने के बजाय भारत को भी सीजफायर करना पड़ा। इसके चलते कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान समेत तमाम इलाका पाकिस्तान के अनाधिकृत कब्जे में चला गया। यह कब्ज़ा 7 दशक के बाद भी जारी है।

इस बीच स्पष्ट हो चुका है कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच भारत को लेकर पक्षपात करते हैं। 3 दशक से कश्मीर को आतंक की आग में झोंकने के बाद भी पाकिस्तान पर वह कोई कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। ना ही वह पाकिस्तान से यह कह पाए हैं कि वह भारत को उसका इलाका वापस करे।

पहलगाम हमले के बाद जहाँ पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की सलाह देना मूर्खता भरी बात है। यह तब और मूर्खता भरा काम होगा जब भारत 1972 में पाकिस्तान के साथ शिमला समझौता कर चुका है। इसमें पाकिस्तान ने इस बात पर हामी भरी थी कि वह भारत के मामले को द्विपक्षीय स्तर पर हल करेगा।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी मामले को ले जाने का मतलब यह होगा कि भारत इन मामलों में अपने स्तर हल नहीं कर सकता। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मदद माँगना दिखाएगा कि वह अकेले ही पाकिस्तान को उसके पापों के लिए भी नहीं दण्डित कर सकता।

ऐसे में कपिल सिब्बल की यह राय एकदम अप्रासंगिक है और सच्चाई से कोसों दूर है। यह राय उसी कॉन्ग्रेसी मानसिकता से उपजती है जो सोचता है कि पाकिस्तान को दशकों तक शह देने वाले अंग्रेज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के साथ न्याय करेंगे। पाकिस्तान का एक ही इलाज है जो मोदी सरकार करती आई है।

एक तरफ उसे अप्रासंगिक बना देना और जब भी वह कोई ऐसी हरकत करे तो उसे ऐसी सजा देना कि वह खुद काँप जाए। 2016 में आतंक के कैम्पों पर सर्जिकल स्ट्राइक और 1019 में बालाकोट में हुआ हवाई हमला मोदी सरकार की इसी दृढ़ता का उदाहरण था। पहलगाम का जवाब इससे भी बड़ा होना चाहिए।

IPL में काली पट्टी बाँधकर उतरेंगे खिलाड़ी, हैदराबाद Vs मुंबई के मैच में नहीं होंगे पटाखे और चीयरलीडर्स: सचिन, कोहली और बुमराह जैसे खिलाड़ियों ने जताया शोक

हैदराबाद के राजीव गाँधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में बुधवार (23 अप्रैल 2025) को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2025 में सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) और मुंबई इंडियंस (एमआई) के बीच मुकाबला होगा। इस दौरान खिलाड़ी और अंपायर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए काली पट्टी पहनेंगे।

बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार, मैच शुरू होने से पहले एक मिनट का मौन रखा जाएगा। साथ ही मैच के दौरान चीयरलीडर्स और आतिशबाजी भी नहीं होगी। यह कदम पीड़ितों के प्रति सम्मान और एकजुटता दिखाने के लिए उठाया गया है।

पहलगाम में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले पर कई क्रिकेटरों ने इस हमले पर दुख जताया है। विराट कोहली ने इंस्टाग्राम स्टोरी लगाई और लिखा, “पहलगाम में मासूम लोगों पर हुए इस भयानक हमले से बहुत दुखी हूँ। पीड़ितों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदना। शांति और न्याय की प्रार्थना करता हूँ।”

विराट कोहली की इंस्टाग्राम स्टोरी

सूर्यकुमार यादव ने लिखा, “पहलगाम में हुए कायराना हमले की खबर से स्तब्ध हूँ। आइए, आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हों और पीड़ितों के परिवारों के लिए प्रार्थना करें।”

सचिन तेंदुलकर ने कहा, “पहलगाम में मासूम लोगों पर हमले से बहुत दुख हुआ। भारत और पूरी दुनिया पीड़ित परिवारों के साथ है।”

केएल राहुल और जसप्रीत बुमराह ने भी पीड़ितों के लिए प्रार्थना की।

बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन घास के मैदान में हुए इस आतंकी हमले में 2 विदेशी नागरिकों समेत 28 लोगों की मौत हो गई। भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग के बैसरण इलाके में हमलावरों को पकड़ने के लिए व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है। दिल्ली पुलिस को भी पर्यटक स्थलों और महत्वपूर्ण जगहों पर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

‘बर्बर हमला, निर्ममता से छीन लीं ज़िंदगियाँ’: पहलगाम हमले पर सुप्रीम कोर्ट के जजों-वकीलों ने रखा 2 मिनट का मौन, कश्मीर को बताया भारत का मुकुट मणि

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी में आतंकी गोलीबारी में 28 लोगों की मौतों की निंदा की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पिछले कुछ दिनों से वक़्फ़ क़ानून की स्क्रूटनी और राष्ट्रपति के लिए राज्यों के बिल को लेकर डेडलाइन तय करने के कारण जनता में सुप्रीम कोर्ट के प्रति आजकल आक्रोश वाला माहौल है। मुर्शिदाबाद में हिन्दुओं के पलायन को लेकर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की याचिका भी सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी थी। अब पहलगाम में 28 पर्यटकों की निर्मम हत्या के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बयान जारी किया है।

हमले के एक दिन बाद बुधवार (23 अप्रैल, 2025) को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में गहरा दुःख और क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि इस पाशविक व अंधाधुंध गोलीबारी ने पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोरकर रख दिया है। इस नृशंस कृत्य को आतंकवाद करार देते हुए देश की सर्वोच्च न्यायालय ने पारित किए गए प्रस्ताव में कहा कि ये आतंकवाद की क्रूरता और अमानवीयता की भयावहता की याद दिलाता है। सुप्रीम कोर्ट ने उन 28 मृतकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की, जिनकी ज़िंदगियाँ इस बर्बर हमले में असमय ही बड़ी निर्ममता से छीन ली गईं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने बयान में कहा, “हम शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और घायल लोग शीघ्र स्वस्थ हों। यह देश पीड़ितों और उनके परिजनों के साथ इस असीम वेदना की घड़ी में पूरी मजबूती से खड़ा है। भारत की मुकुटमणि कश्मीर की सुंदरता का आनंद ले रहे पर्यटकों पर किया गया यह हमला मानवता के मूल्यों और जीवन की पवित्रता पर एक गहरा प्रहार है, और सुप्रीम कोर्ट इसकी कड़ी भर्त्सना करता है।”

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने सभी न्यायधीशों, अधिवक्ताओं, अदालती कर्मचारियों और रजिस्ट्री के सभी सदस्यों ने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए और पीड़ित परिजनों के प्रति एकजुटता दर्शाते हुए 2 मिनट का मौन भी रखा। बता दें कि लश्कर-ए-तैय्यबा (LeT) के सीनियर कमांडर सैफुल्लाह खालिद को हमले के पीछे का साजिशकर्ता बताया है। NIA ने 3 आतंकियों का स्केच भी जारी किया है। मृतकों में सेना के लेफ्टिनेंट समेत IB के अधिकारी तक शामिल हैं।

पीड़ितों के बयान से छेड़छाड़ कर The Wire ने की झूठ की फायरिंग: इस्लामी आतंकियों को सुरक्षा कवच देना था मकसद, लोगों ने लताड़ा तो चुपके से खबर की अपडेट

वामपंथी प्रोपेगेंडा चलाने वाले न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ की इस्लामी कट्टरपंथियों को बचाने की हमेशा से ही आदत रही है, लेकिन 22 अप्रैल को यह अपनी नीचता की एक और हद तक पहुँच गया। वायर ने पहलगाम आतंकी हमले की एक पीड़ित और प्रत्यक्षदर्शी की हिंदुओं का नाम पूछकर मारे जाने की बात को ही नकार दिया।

कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 20 से ज्यादा पर्यटकों को मार दिया गया। आतंकियों ने हर एक से उनका धर्म पूछा और मुस्लिम न होने पर उन्हें मार दिया। ऑनलाइन सोशल मीडिया साइट पर हमले से जुड़े वीडियो और रिपोर्ट्स वायरल हो रही हैं जिनमें ये बताया गया कि आतंकियों ने पीड़ितों की आईडी जाँची, उनका धर्म पूछा और फिर प्वाइंट ब्लैंक पर उन्हें गोली मार दी गई।

वायर की ओर से एक रिपोर्ट पब्लिश की गई जिसे जहाँगीर अली ने लिखा है। इसमें उसने आतंकी हमले के एक प्रत्यक्षदर्शी की बात कही है। इस प्रत्यक्षदर्शी की वीडियो ऑनलाइन अपलोड हुई थी। और सोशल मीडिया पर आते ही ये वीडियो वायरल हो गई। इस वीडियो में एक महिला हमले के कारण पूरी तरह सदमे में थी। उसे साफ तौर पर कहते हुए देखा जा सकता है कि आतंकियों ने उनके पास आकर उनका नाम पूछा और मुस्लिम न होने पर उनके पति को गोली मार दी।

इस वीडियो में एक आदमी को भी देखा जा सकता है जो जमीन पर निर्जीव पड़ा हुआ है और उसकी पैंट कमर से नीचे खिसकी हुई है। वीडियो में एक अन्य आदमी भी दिख रहा है जिसकी गर्दन के पास खून निकल रहा है और उसकी टी-शर्ट खून से लथपथ है।

वायर ने पीड़ित महिला की बात को नकारते हुए ये लिखा कि उसके पति को मुस्लिम होने के कारण गोली मारी गई।

सोशल मीडिया पर लताड़े जाने के बाद वायर ने अपनी भूल को तुरंत सुधार लिया। ये करतूत वायर की उस प्रवृत्ति को बेपर्दा करता है जिसमें वह हेट क्राइम के नाम पर मुस्लिमों के पीड़ित होने की बात करता है और अगर अपराधी मुस्लिम ही निकल आए तो उसे चालाकी से छुपा देता है।

‘द वायर’ की यह करतूत कोई नई बात नहीं है। यह पोर्टल लंबे समय से ऐसी पत्रकारिता करता रहा है, जिसमें हिंदुओं को निशाना बनाया जाता है और इस्लामी कट्टरपंथ को बचाने की कोशिश की जाती है। चाहे वह कश्मीर में आतंकी हमलों को जायज ठहराना हो या भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देना, ‘द वायर’ हमेशा विवादों में रहा है। इस बार भी उसने पीड़ितों की सच्चाई को दबाकर अपनी एंटी-भारत छवि को और मजबूत किया।

पहलगाम आतंकी हमले में वायुसेना कर्मी की मौत, पत्नी संग गए थे छुट्टियाँ मनाने: गुजरात के एक बैंककर्मी और पिता-पुत्र की भी हत्या

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल 2025) को हुए एक इस्लामी आतंकी हमले में अब तक 28 पर्यटकों की जान चली गई है। मृतकों में देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल हैं। ये लोग परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने और कुछ लोग शादी के बाद हनीमून मानने के लिए यहाँ आए हुए थे।

इस आतंकी हमले में भारतीय वायुसेना के एक जवान 30 साल के कॉर्पोरल तागे हेलियांग ने भी अपनी जान गँवा दी है। श्रीनगर स्थित वायुसेना बेस पर तैनात हेलियांग अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले थे। वे अपनी पत्नी के साथ पहलगाम में आए हुए थे। इसी दौरान आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें उन्होंने अपनी जान गँवा दीं।

इस हमले में हैदराबाद में तैनात इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी मनीष रंजन भी मारे गए हैं। बिहार के मूल निवासी रंजन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गर्मी की छुट्टियों में कश्मीर गए थे। जानकारी के अनुसार, उनके परिवार के सदस्य सुरक्षित हैं। रंजन पिछले दो वर्षों से IB के हैदराबाद कार्यालय के मंत्रालय अनुभाग में कार्यरत थे।

मनीष रंजन के अलावा, हरियाणा के करनाल जिले के रहने वाले नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट 26 वर्षीय विनय नरवाल भी इस आतंकी हमले का शिकार बने हैं। अभी 6 दिन पहले यानी 16 अप्रैल 2025 को ही उनकी शादी हुई थी और वे अपनी नवविवाहिता पत्नी के साथ छुट्टियाँ मनाने के लिए पहलगाम आए हुए थे।

इसके अलावा, गुजरात के सूरत के रहने वाले एक बैंककर्मी शैलेश कलाथिया भी इस इस्लामी आतंकी हमले में मारे गए हैं। वे मुंबई में कार्यरत थे और अपनी पत्नी शीतल, बेटी नीति और बेटे नक्ष के साथ पहलगाम में छुट्टियाँ मना रहे थे। दुख की बात यह है कि अगले दिन यानी 23 अप्रैल को शैलेश कलाथिया का 44वाँ जन्मदिन था।

इस आतंकी हमले में भावनगर के यतीश परमार और उनके बेटे स्मित परमार की भी मौत हो गई है। यतीश परमार 16 अप्रैल 2025 को पत्नी काजल और बेटा संग जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हुए थे। जानकारी के अनुसार वे मोरारी बापू का प्रवचन सुनने गए थे। हमले में गुजरात के तीन अन्य पर्यटक भी घायल हुए हैं, जिनके नाम विनुभाई डाभी, मनिका पटेल और रिनू पांडे हैं।

पाकिस्तान के पंजाब से साजिश, POK से बुलाए आतंकी: सैफुल्लाह खालिद है पहलगाम में हिन्दुओं के कत्लेआम का मास्टरमाइंड, NIA ने जारी किए 3 इस्लामी दहशतगर्दों के स्केच

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड की पहचान कर ली गई है। जाँच एजेंसियों ने पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा (LeT) के सीनियर कमांडर सैफुल्लाह खालिद को हमले के पीछे का साजिशकर्ता बताया है। खालिद मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को हुए हमले में 28 लोगों की मौतों का जिम्मेदार हैं। जिनमें अधिकांश हिंदू थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सैफुल्लाह खालिद ने पाकिस्तान के गुजरानवाला शहर से इस आतंकी हमले की साजिश रची थी। इसके अलावा POK के दो अन्य आतंकवादियों ने भी हमले की योजना में भूमिका निभाई है। पहलगाम आतंकी हमले की पूरी जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैय्यबा के हिट स्कवॉड द रजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है।

गौरतलब है कि पहले भी खालिद ने कश्मीर नीति को लेकर पाकिस्तान की रणनीति में बदलाव पर निराशा जताई थी। खासकर 2019 में भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद उसने कश्मीर में लश्कर-ए-तैय्यबा के अभियानों को कम करने के पाकिस्तानी सरकार के फैसले की भी आलोचना की। कहा था कि इसकी वजह बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती हिंसा है।

NIA ने तीन स्केच जारी किए

  • राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ के बाद तीन स्केच जारी किए हैं। इन इस्लामी आतंकियों की पहचान आसिफ फुजी, सुलेमान शाह और अबू तल्हा के रूप में हुई है। ये सभी मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत के जिम्मेदार हैं, जिनमें अधिकांश हिंदू थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमला करने वालों मे 7 लोग शामिल थे। इनमें से 3 की पहचान कर ली गई है। चार आतंकियों ने हमला किया और आदिल गुरी और आसिफ शेख समेत तीन आतंकी ने हमले के दौरान इनकी सहायता की। NIA पहलगाम आतंकी हमले की ज़मीनी स्तर पर जाँच कर रही है। बुधवार (23 अप्रैल, 2025) को जाँच एजेंसी घटनास्थल पर पहुँची।

वहीं, आतंकी हमले से जुड़े एक आतंकी की तस्वीर भी सामने आई है। जो कि सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। ये तस्वीर हमले के वक्त कैमरे में कैद की गई थी। इसमें एक आतंकी स्लेटी कुर्ता-पजामा पहने हाथ में AK-47 लिए हुए है। कथित तौर पर तस्वीर को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से संबंधित बताया जा रहा है।