Home Blog Page 3980

सलमान खुर्शीद ने दिखाई जुनैद की तस्वीर, फूट-फूट कर रोईं सोनिया गाँधी; पालतू मीडिया गिरते-पड़ते पहुँची!

पार्टी का कामकाज ऑनलाइन देखने वाली कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के आधिकारिक आवास 10 जनपथ में काफी गहमागहमी देखी जा रही है। शुरुआत में ऐसा लगा था कि 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कोई बैठक बुलाई है। लेकिन, अब सूत्रों के हवाले से स्पष्ट हुआ है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के एक तस्वीर लेकर 10 जनपथ पहुँचने की वजह से सारा बखेड़ा खड़ा हुआ है।

बताया जा रहा है कि आरिज खान उर्फ ​​जुनैद की तस्वीर लेकर खुर्शीद पहुँचे थे। इसे देखते ही सोनिया रोने लगी। उनके रोने की आवाज जब गोदी मीडिया के कानों तक पहुँची तो कॉन्ग्रेस नेताओं से लेकर पालतू मीडिया तक गिरते-पड़ते 10 जनपथ तक पहुँची।

जुनैद वही आतंकी है, जिसे दिल्ली की एक सत्र अदालत ने सोमवार को 2008 के बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े मामले में दोषी ठहराया है। इस एनकाउंटर में इंडियन मुजाहिदीन का दो आतंकवादी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए थे। दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा भी बलिदान हो गए थे।

मोहनचंद शर्मा वही इंस्पेक्टर हैं जिन्हें 2020 में मरणोपरांत गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया था। विपक्ष का कहना है कि अदालत ने यह कहकर ‘असहिष्णुता’ का परिचय दिया है कि जुनैद की चलाई गोली से शर्मा की जान गई थी

वहीं, खुर्शीद वह नेता हैं, जिन्होंने फरवरी 2012 में आजमगढ़ की एक रैली में ताल ठोकते हुए कहा था कि जब उन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीरें सोनिया गाँधी को दिखाई, तब उनकी आँखों में आँसू आ गए।

सूत्रों के अनुसार यही कारण है कि अदालत का फैसला आते ही आनन-फानन में खुर्शीद 10 जनपथ पहुँच गए। कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने इस फैसले को मोदी सरकार की साजिश बताते हुए कहा है कि 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों को ‘डराने’ के लिए ऐसा किया गया है। वहीं पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा है कि इससे पता चलता है कि भारत में ‘मुसलमान खतरे’ में हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि उन्होंने पहले ही कह दिया था ‘खेला होबो’। पवार ने विपक्षी दलों की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करने की माँग की है।

इधर, कॉन्ग्रेस के जी-23 समूह के नेताओं ने सलमान खुर्शीद की इस कवायद की निंदा करते हुए तत्काल सांगठनिक चुनावों की माँग की है। इसके जवाब में अधीर रंजन चौधरी ने उन्हें ‘मोदी का दलाल’ बताया है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी का शीर्ष परिवार इस बात से भी नाराज है कि अदालत ने पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए जुनैद और परिवार की वित्तीय स्थिति का पता लगाने का निर्देश भी जाँच अधिकारी को दे दिया है। उनका मानना है कि ऐसा कर अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा को अर्थव्यवस्था में योगदान करने से वंचित कर दिया है!

प्राइम टाइम ‘प्रोपेगेंडा स्पेशलिस्ट’ रवीश कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कहा है कि वे कुछ नहीं कहना चाहते हैं, क्योंकि सर जी पहले ही कह चुके हैं- सब मिले हुए हैं। लालू यादव के पास जब यह खबर पहुँचाई गई तो उन्होंने खबरी से कहा- मार देंगे एक मुक्का त नाचे के गिर जाओगे। जाओ ओवैसिया के पास। आज हमरा तेजू सीएम होता तो ऐसा नै होता!

MP विधान सभा में पारित हुआ धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक, शिवराज सरकार ने बनाया ‘लव जिहाद’ रोकने का सख्त कानून

मध्य प्रदेश विधानसभा में ‘मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2021’ सोमवार (मार्च 8, 2021) को पारित हो गया। विधेयक में शादी तथा किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए धर्मांतरण के मामले में अधिकतम 10 साल की कैद एवं 1 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की स्वीकृति मिलने पर यह कानून नौ जनवरी को अधिसूचित ‘मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश-2020’ की जगह लेगा। प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक मार्च को इस विधेयक को सदन में पेश किया था और सोमवार को चर्चा के बाद इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

शिवराज सरकार का कहना है कि सरकार ने सोच समझकर इस बिल को असेंबली के पटल पर रखा था। चर्चा के बाद इसे कानून बनाने का फैसला किया गया। वोटिंग के जरिए सदस्यों की रायशुमारी की गई तो ज्यादातर विधायक इसके समर्थन में दिखे।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने 1 मार्च को विधानसभा में धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2020 पेश किया था। इस विधेयक पर 5 मार्च को चर्चा होनी थी। बजट पर चर्चा होने की वजह विधेयक पर चर्चा नहीं की जा सकी। इसके बाद इस पर चर्चा के लिए महिला दिवस यानि आज का दिन तय किया गया था। सरकार की तरफ से आज सदन में बताया गया कि वो इसे कानून का दर्जा देना चाहती है।

स्पीकर गिरीश गौतम ने कॉन्ग्रेस की माँग पर इस विधेयक पर चर्चा के लिए डेढ़ घंटे का समय निर्धारित किया था। शिवराज सरकार में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कॉन्ग्रेस नेताओं को चुनौती दी थी कि यदि सही मायने में वे महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं तो इसका समर्थन करें।

कानून के अनुसार, ‘‘अब जबरन, भयपूर्वक, डरा-धमका कर, प्रलोभन देकर, बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कर विवाह करने और करवाने वाले व्यक्ति, संस्था अथवा स्वयंसेवी संस्था के खिलाफ शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित प्रावधानों के मुताबिक आरोपितों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। धर्मांतरण और इसके पश्चात होने वाले विवाह के 1 महीने पहले जिलाधीश के पास लिखित में आवेदन करना होगा। राज्य सरकार के इस कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी शादी को शून्य माना जाएगा।’’ 

बिना आवेदन किए धर्मांतरण करने वाले या ऐसा कराने वाले के लिए भी कानून में 5 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। धर्मांतरण और जबरन विवाह की शिकायत पीड़ित के साथ उसके माता-पिता, परिजन या अभिभावक कर सकते हैं। कानून के मुताबिक, धर्मांतरण या विवाह कराने वाली संस्थाओं का ​रजिस्ट्रेशन निरस्त करने का प्रावधान भी इस कानून में है।

‘भारत की समृद्ध परंपरा के प्रसार में सेक्युलरिज्म सबसे बड़ा खतरा’: CM योगी की बात से लिबरल गिरोह को सूँघा साँप

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामायण विश्व महाकोश (ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ द रामायण) की कर्टेन रेजर पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर सम्बोधन देते हुए उन्होंने सेक्युलरिज्म पर कुछ ऐसी बातें कही, जो लिबरल गिरोह को चुभ सकती है। उन्होंने कम्बोडिया के अंकोर वाट मंदिर के एक युवक की चर्चा की, जिसने उन्हें भगवान हनुमान के बारे में समझाया था। उन्होंने कहा कि वो बौद्ध था, लेकिन उसे पता था कि मूल रूप से वो हिन्दू है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “यहाँ इस तरह की चर्चा करने पर बहुत सारे लोगों के सेक्युलरिज्म को खतरा पैदा हो जाता है। ये सेक्युलरिज्म जो शब्द है- ये सबसे बड़ा खतरा है भारत की समृद्ध परम्पराओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक मंच पर स्थान दिलाने में। ये सबसे बड़ी बाधा है। रूस में भी रामलीला का मंचन होता है। कई देशों में उनकी रामलीला है। दुनिया के सभी देशों को जोड़ कर हमें इसे आगे बढ़ाना है।”

ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप 8:00 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सेक्युलरिज्म पर की जा रही बातों को सुन सकते हैं। सीएम ने कहा कि भगवान श्रीराम की परम्परा के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाना चाहिए और इस कार्य में सभी भाषाओं, लोक परम्पराओं, लोककथाओं में भगवान श्रीराम के संबंध में उपलब्ध सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम व रामायण के संबंध में जनसामान्य व संग्रहालयों आदि में उपलब्ध पांडुलिपियों को संग्रहित कर डिजिटल फॉर्म में लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। यह प्रयास स्थानीय व राज्य स्तर के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने भगवान विष्णु का अवतार होने के बावजूद खुद को मानव से इतर प्रकट करने का प्रयास नहीं किया और उन्होंने मानवीय मर्यादाओं के अंदर ही अपनी लीलाओं को रचा, यही राम जी की महानता है।

सीएम योगी ने कहा, “ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण प्रकृति और परमात्मा के समन्वय को दर्शाने का कार्य करेगा। यह विज्ञान और अध्यात्म के अनेक अनछुए पहलुओं को जानने का अवसर भी प्रदान करेगा।”

अंबानी के घर के बाहर मिले विस्फोटक केस की जाँच पहुँची NIA के हाथ, हिरेन की ‘मौत’ के बाद मुंबई पुलिस की जाँच पर उठे सवाल

दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक मिलने के बाद जो हड़कंप मचा उसने सबके मन में सवाल खड़े कर दिए। मुंबई पुलिस की जाँच से असंतुष्ट होकर पहले इस केस को एंटी टेररिज्म स्क्वॉड को सौंपा गया और अब खबर है कि इसे एटीएस से लेकर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया है। अब NIA इस केस को दर्ज कर जाँच में जुटेगी। वह मनसुख हिरेन की मृत्यु की भी जाँच करेंगे।

बता दें कि इससे पूर्व भारतीय जनता पार्टी ने मनसुख हिरेन का शव मिलने के बाद पूरे केस को हत्या का मामला कहा था। साथ ही मुंबई पुलिस जाँच पर भी सवाल उठाए थे। इन आरोपों के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार की छवि के लिए आवश्यक है कि इस मौत के राज से पर्दा उठे।

उल्लेखनीय है कि 5 मार्च को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटकों से भरी मिली कार के मालिक मनसुख हिरेन का शव मिलने की बात सामने आई थी। मुकेश अंबानी के घर के बाहर खड़ी एसयूवी के मालिक मनसुख को लेकर पहले कहा गया कि उन्होंने कलवा ब्रिज से कूदकर सुसाइड कर लिया।

हालाँकि, मनसुख की पत्नी ने सुसाइड की बात को पूर्ण रूप से नकारा। उन्होंने कहा कि उनके पति को क्राइम ब्रांच के किसी अधिकारी तावड़े का फोन आया था। उससे मिलने के लिए ही वे घर से निकले थे।

इन सबके अलावा ये भी पता चला था कि मनसुख हिरेन ने मौत से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। उन्होंने इस पत्र में कहा था कि पीड़ित होने के बावजूद उनके साथ आरोपित की तरह व्यवहार किया जा रहा है। इसमें उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ एक पत्रकार का नाम भी लिया था। उन्होंने कहा कि कि उनसे हिरासत में भी पूछताछ की गई, जिससे उनकी मानसिक प्रताड़ना हो रही है।

‘बलात्कार पीड़िता से शादी करोगे’: बोले CJI- टिप्पणी की हुई गलत रिपोर्टिंग, महिलाओं का कोर्ट करता है सर्वाधिक सम्मान

पिछले दिनों बलात्कार के मामले में सुप्रीम कोर्ट की गई कथित टिप्पणी ‘उससे शादी करोगे’ पर शुरू हुए विवाद पर सोमवार (मार्च 8, 2021) को चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि उनके बयान की गलत तरह से रिपोर्टिंग हुई। उनकी बात वैसी नहीं थी, जैसी रिपोर्ट्स में बताई गई।

उन्होंने बताया कि बलात्कार के आरोपित से पीड़िता से उन्होंने शादी करने की बात नहीं पूछी थी। वह महिलाओं का बहुत सम्मान करते हैं और उन्होंने कुछ भी ऐसा नहीं कहा, जो महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाए।

रेप मामले में कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि मामले के संदर्भ में याचिकाकर्ता व्यक्ति से पूछा था कि क्या वह शिकायतकर्ता से शादी करेगा। उससे ‘जाओ और शादी करो’ के लिए नहीं कहा गया। कोर्ट के अनुसार उससे पूछा गया था कि क्या आप शादी करने जा रहे हैं, जिसे मीडिया में ढंग से रिपोर्ट नहीं किया गया।

गौरतलब है कि बीते दिनों रेप आरोपित मोहित सुभाष चव्हाण बनाम महाराष्ट्र सरकार केस में सुनवाई के बाद ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट्स में ऐसे बताया गया था जैसे चीफ जस्टिस ने आरोपित से कहा हो कि वह पीड़िता से शादी क्यों नहीं कर लेता। लेकिन अब सीजेआई का कहना है कि वह रिपोर्टिंग गलत ढंग से हुई। उन्होंने इस मंशा से ऐसा सवाल ही नहीं किया था। शादी वाली बात याचिकाकर्ता से सिर्फ़ पूछी गई थी। सीजेआई ने कहा, “उस सुनवाई में भी, हमने कभी सुझाव नहीं दिया कि आपको शादी करनी चाहिए। हमने पूछा था, क्या आप शादी करने जा रहे हैं।”

बता दें कि सीजेआई की ओर से मामले पर स्पष्टीकरण एक 14 साल की रेप पीड़िता के गर्भपात पर होती सुनवाई के दौरान सामने आई, जब एक वकील ने कोर्ट को लड़कियों के लिए बेहद उदार बताया। इसे सुन सीजेआई ने कहा, “यह सुन कर अच्छा लगा। हमने पिछले दो हफ्तों में बिलकुल उलटी बातें सुनी हैं।”

इसके बाद वकील ने कहा कि वह उन रिपोर्टों के विरुद्ध है। वह सिर्फ़ न्यायपालिका की छवि बिगाड़ना चाह रहे हैं। ऐसे लोगों से निपटने के लिए पूरा तंत्र होना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि कोर्ट के बयान को तोड़ा गया और संदर्भ से अलग पेश किया गया। जिस पर सीजेआई ने कहा कि एक संस्था के तौर पर इस कोर्ट ने हमेशा महिलाओं को सर्वोच्च सम्मान दिया है।

गौरतलब है कि सीजेआई की आलोचना जिस केस पर सुनवाई को लेकर हुई, वह महाराष्ट्र के एक सरकारी मुलाजिम से जुड़ा केस है। मोहित सुभाष चव्हाण नाम के आरोपित ने 2014-15 में एक 16 साल की लड़की का रेप किया था और अब पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपों का सामना कर रहा है।

कुछ दिन पहले उसे बॉम्बे हाई कोर्ट से इस संबंध में गिरफ्तारी से राहत माँगी थी। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। जहाँ आरोपित के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल एक सरकारी मुलाजिम था और केस के कारण उसे सस्पेंड कर दिया गया है। इस पर सीजेआई ने कहा कि इन सब चीजों के बारे में लड़की का रेप करने से पहले सोचना था। ये बात तो मालूम थी न कि तुम एक सरकारी कर्मचारी हो।

असमी गमछा, नागा शाल, गोंड पेपर पेंटिंग, खादी: PM मोदी ने विमेंस डे पर महिला निर्मित कई प्रॉडक्ट को किया प्रमोट

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को बढ़ावा दिया। पीएम ने बताया कि उन्होंने महिला स्वयं-सहायता समूहों द्वारा बनाई गई एक पारंपरिक असमिया गमछा खरीदी थी। नरेंद्र मोदी अक्सर अपनी गर्दन पर गमछा लपेटे नजर आते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आपने मुझे बहुत बार गमछा डाले हुए देखा है। यह बेहद आरामदायक है। आज, मैंने काकातीपापुंग विकास खंड के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाया गया एक गमछा खरीदा है।” इसके साथ पीएम नरेंद्र मोदी ने वेबपेज का लिंक और स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है, जहाँ से उत्पाद खरीदा जा सकता है।

प्रधानमंत्री द्वारा शेयर किया गया स्क्रीनशॉट

पीएम नरेंद्र मोदी ने केरल में महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद का भी प्रचार किया। उन्होंने कहा, “मुझे केरल में महिलाओं द्वारा निर्मित क्लासिक पाम क्राफ्ट निलाविलक्कू का बेसब्री से इंतजार है। यह सराहनीय है कि कैसे हमारी #NariShakti ने स्थानीय शिल्प और उत्पादों को संरक्षित और लोकप्रिय बनाया है।”

पीएम मोदी द्वारा केरल के प्रोडक्ट को प्रमोट किया गया

प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल से हस्तनिर्मित जूट फ़ाइल फ़ोल्डर को भी प्रमोट किया। उन्होंने कहा, “राज्य के आदिवासी समुदायों द्वारा निर्मित, आप सभी के घरों में पश्चिम बंगाल का जूट उत्पाद होना चाहिए!”

पीएम मोदी द्वारा प्रमोट किया गया प्रोडक्ट

नरेंद्र मोदी ने यह भी घोषणा की कि उन्होंने नागालैंड से एक पारंपरिक नागा शाल खरीदा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने नागा शाल खरीदी

इसके अलावा पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर खादी के उत्पाद को प्रमोट किया। नरेंद्र मोदी ने कहा, “खादी महात्मा गाँधी और भारत के समृद्ध इतिहास के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। एक खादी कॉटन मधुबनी पेंटेड स्टॉल से खरीदा।”

पीएम मोदी द्वारा प्रमोट किया गया खादी प्रोडक्ट

नरेंद्र मोदी ने गोंड पेपर पेंटिंग को उजागर करने के लिए भी अपने मंच का उपयोग किया। उन्होंने अपने द्वारा खरीदी गई पेंटिंग की एक तस्वीर साझा की।

गोंड पेपर पेंटिंग

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री वर्षों से महिला सशक्तीकरण के मुखर समर्थक रहे हैं। उन्होंने अपनी नीतियों द्वारा देश की महिलाओं के उत्थान और इस तरह से समाज को समग्र रूप से उत्थान की दिशा में आगे ले जाने के लिए बहुत कार्य किया है।

आरक्षण की सीमा 50% से अधिक हो सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को भेजा नोटिस, 15 मार्च से सुनवाई

सवाल नंबर 1: क्या इंद्रा साहनी जजमेंट (मंडल कमीशन केस) पर पुनर्विचार की जरूरत है? 1992 के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50% तय की थी।

सवाल नंबर 2: क्या 102वाँ संवैधानिक संशोधन राज्यों की विधायी क्षमता को प्रभावित करता है। यानी, क्या राज्य अपनी तरफ से किसी वर्ग को पिछड़ा घोषित कर आरक्षण दे सकते हैं या 102वें संशोधन के तहत अब यह अधिकार केवल संसद को है?

इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को नोटिस जारी किया। मराठा आरक्षण पर रोक को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी किया। महाराष्ट्र सरकार ने 102वें संवैधानिक संशोधन की व्याख्या की जरूरत बताते हुए अदालत से यह अपील की थी।

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (मार्च 8, 2021) को सुनवाई करते हुए जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली 5 जजों की पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल भी चाहते हैं कि इस मामले में सभी राज्यों को सुना जाए। सुप्रीम कोर्ट विचार कर रही है कि क्या 102वाँ संविधान संशोधन संघीय ढाँचे पर गलत प्रभाव डालता है और इंद्रा साहनी फैसला पर एक बड़ी पीठ द्वारा पुनर्विचार की आवश्यकता है।

महाराष्ट्र की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट को राज्यों से ये जानना है कि क्या आरक्षण की मौजूदा सीमा को 50% से अधिक किया जा सकता है? इस मामले में 15 मार्च 2021 से प्रतिदिन सुनवाई शुरू होने वाली है। कपिल सिब्बल ने भी अदालत में कहा कि सभी राज्यों को नोटिस जारी किया जाना चाहिए, क्योंकि ये एक संवैधानिक पश्न है जिसका असर सभी पर पड़ेगा।

वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया कि उसे सिर्फ महाराष्ट्र और केंद्र सरकारों को सुन कर फैसला नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे कम महत्ता वाले मामलों में भी कई राज्यों को पक्ष बनाया गया है और ऐसी ही परंपरा भी रही है। महाराष्ट्र में जो भी सरकार हो, वो मराठा आरक्षण की बातें करती रहती हैं। 2018 में नौकरी और शिक्षा में मराठा आरक्षण को 16% कर दिया था। 2019 में बॉम्बे उच्च-न्यायालय ने मराठा आरक्षण को बरकरार रखा, लेकिन आरक्षण को घटा कर नौकरी में 13 प्रतिशत और उच्च शिक्षा में 12 प्रतिशत कर दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट की याचिका को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यह आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले में दिए गए फैसले का उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि मराठा आरक्षण 2020-21 में लागू नहीं होगा। अगर इंद्रा साहनी जजमेंट की पुनः समीक्षा होती है तो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ का गठन किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लग-अलग विषयों के आरक्षण से जुड़े अलग-अलग कई केस हैं, जो इस सुनवाई से जुड़े हुए हैं। वहीं सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले में आर्टिकल 342ए की व्याख्या भी शामिल है, ये सभी राज्य को प्रभावित करेगा। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि महाराष्ट्र में EWS आरक्षण को मिला दें तो ये 72% हो जाता है, जो 50% से कहीं ज्यादा अधिक है।

बाटला हाउस एनकाउंटर केस में इंडियन मुजाहिदीन आतंकी आरिज खान दोषी करार, 15 मार्च को होगी सजा

बहुचर्चित बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े एक केस में दिल्‍ली की एक अदालत ने इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी आरिज खान को दोषी करार दिया है। अदालत ने कहा कि यह साबित हो गया है कि एनकाउंटर के वक्‍त खान भागने में कामयाब हो गया था। अदालत ने खान को आईपीसी की धारा 186, 333, 353, 302, 307, 174A, 34 के तहत दोषी पाया है।

उसे आर्म्‍स ऐक्‍ट की धारा 27 के तहत भी दोषी करार दिया गया है। आरिज खान को कितनी सजा होगी, अदालत इसकी घोषणा 15 मार्च को दोपहर 12 बजे करेगी। एक दशक तक फरार रहने के बाद फरवरी 2018 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे गिरफ्तार किया था।

अदालत ने कहा कि यह साबित हो चुका है कि आरिज खान और उसके सहयोगियों ने जान-बूझकर सरकारी कर्मचारियों को चोट पहुँचाई। अदालत ने यह भी कहा कि खान ने इंस्‍पेक्‍टर एमसी शर्मा पर गोली चलाई जिससे उनकी जान गई

कोर्ट में कहा था, मुझे झूठे केस में फँसाया गया

आरिज खान ने पिछले साल सितंबर में कोर्ट के सामने कहा था कि उसे झूठे मामले में फँसाया गया है। पटियाला हाउस कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव के समक्ष अंतिम दलील के दौरान उसने कहा था कि उस समय उसके फ्लैट से जुड़े होने या वहाँ उसकी उपस्थिति साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है। अदालत ने आठ साल पहले एक अन्य आतंकवादी शहजाद अहमद को इस मामले के सिलसिले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

गौरतलब है कि 13 सितंबर 2008 को दिल्ली के करोल बाग, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और ग्रेटर कैलाश में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 26 लोग मारे गए थे। जबकि 133 जख्मी हुए थे। दिल्ली पुलिस ने उस वक्त जाँच में पाया था कि, बम ब्लास्ट को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया था।

अस्‍पताल में इंस्‍पेक्‍टर शर्मा ने तोड़ा था दम

19 सितंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पाँच आतंकी बाटला हाउस के एक फ्लैट में किराए पर मकान लेकर रह रहे हैं। 19 सितंबर 2008 की सुबह इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा आतंकियों को पकड़ने के लिए टीम लेकर बाटला हाउस में बिल्डिंग नंबर एल-18 के फ्लैट नंबर 108 में पहुँचे। उसी वक्त आतंकियों के साथ मुठभेड़ में उन्हें तीन गोलियाँ लग गईं। बाद में इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस दौरान दो आतंकियों को मार गिराया गया था।

कॉन्ग्रेस नेता ने महिला दिवस पर मिस इंडिया रनर अप को गिफ्ट में दिए रद्दी कागज के टुकड़े: इस ‘सनक’ से हर कोई हैरान

मुंबई महिला कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष अजंता यादव ने वीएलसीसी फेमिना मिस इंडिया 2020 की रनर अप रहीं मान्या सिंह यादव का ऐसा सम्मान किया है जिस पर हर कोई हैरान है। 7 मार्च को, ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ की पूर्व संध्या पर अजंता यादव ने अपनी और अपनी टीम की फोटो माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर डाला, जिसमें वह मान्या सिंह यादव को सम्मानित कर रही हैं।

कॉन्ग्रेस प्रमुख राहुल गाँधी को टैग करते हुए, महिला समानता और सशक्तीकरण और सबसे पुरानी पार्टी के अन्य सदस्यों की ‘पथप्रदर्शक’ कॉन्ग्रेस महिला अध्यक्ष ने ट्वीट किया, “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या के अवसर पर’ मैंने और मेरी टीम मुंबई महिला कॉन्ग्रेस ने वीएलसीसी फेमिना मिस इंडिया 2020 रनर अप मान्या सिंह का उनके घर पर सम्मानित किया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।”

अजंता यादव का ट्वीट

अब मिस इंडिया रनर अप रहीं मान्या के पिता ओमप्रकाश का आरोप है कि कॉन्ग्रेस नेता अजंता यादव ने उनकी बेटी को सम्मानित करने के नाम पर एक गिफ्ट बैग दिया। जब यह गिफ्ट वाला बैग खोला गया तो उसमें रद्दी कागज भरे हुए थे और उसमें मान्या की एक फटी हुई तस्वीर थी। मीडिया से बात करते हुए, ओमप्रकाश ने कॉन्ग्रेस नेता द्वारा दिया गया गिफ्ट बैग दिखाया और इसके अंदर के रद्दी कागज को दिखाया। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे सनकी व्यवहार कहकर आलोचना भी कर रहे हैं।

फेमिना मिस इंडिया 2020 की रनर अप मान्या सिंह उत्तर प्रदेश के कुशीनगर की रहने वाली हैं। वह मिस इंडिया 2020 का ताज नहीं जीत सकीं, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से लोगों का दिल जीत लिया। उनकी कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो चाँदी के चम्मच के साथ पैदा नहीं होती हैं।

मान्या सिंह के पिता एक ऑटो-रिक्शा चालक हैं और उनका यह सफर काफी मुश्किलों से भरा था। मान्या आगे बताती हैं कि उनकी कई रातें ऐसी भी गुजरी हैं जब बिना खाना और नींद के रात बितानी पड़ी है। लेकिन उनके माता- पिता ने हमेशा उनका सपोर्ट किया। उनकी माँ ने उनकी परीक्षा की फीस भरने के लिए अपने गहने तक गिरवी रख दिए और हमेशा पैशन को फॉलो करने के लिए कहा। 

मान्या आगे बताती हैं कि 14 साल की उम्र घर से भाग गई थी। उसके माता-पिता ने उसके फैसले का समर्थन किया और मुंबई भी स्थानांतरित हो गए। वह वहाँ पर दिन के वक्त वो पढ़ाई करती थी, शाम को बर्तन धोती थी और रात के वक्त कॉल सेंटर में काम करती थी। रिक्शा भाड़ा बचाने के लिए वो काफी दूर तक चलती थी। आज वो Femina Miss India के स्टेज पर है वह सिर्फ और सिर्फ अपने माता- पिता और भाई की वजह से। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने मुझे सिखाया कि आपको अगर खुद पर विश्वास है तो आपके सपने पूरे हो सकते हैं।

तेलंगाना के भैंसा में फिर भड़की सांप्रदायिक हिंसा, घर और वाहन फूँके; धारा 144 लागू

तेलंगाना के निर्मल जिले के भैंसा नगर में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच झड़प की कल कई खबरें सामने आईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार मीडियाकर्मी, पुलिसकर्मी व आम नागरिकों को मिला कर लगभग 10 लोग घायल हुए। इनके अतिरिक्त दो घरों व एक ऑटोरिक्शा में आग लगाई गई। तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

पुलिस का कहना है कि इस संबंध में 50 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ हो रही है। उनके ख़िलाफ़ मुकदमे भी दर्ज हो गए हैं। सीसीटीवी फुटेज खँगाली गई है अब आगे की जाँच भी हो रही है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि कल करीब 8:30 बजे के बाद एक बाइक चालक और दूसरे समुदाय के व्यक्ति में जेलफेकार लेन (Zelfekar lane) पर बहस हुईं। जिसके बाद पूरी हिंसा भड़की। रिपोर्ट्स का कहना है कि हिंसा जुल्गीकार मस्जिद के आसपास हुई और एक बहस ने ही इसको भड़काया। बाद में जैसे ही पुलिस को पता चला सुरक्षाकर्मी फौरन घटनास्थल पर इकट्ठा हुए। इलाके में धारा 144 लगाई गई।

आदिलाबाद के पुलिस अधीक्षक विष्णु एस वारियर भी भैंसा हुँचे। कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है। कुछ वीडियो सामने आए हैं जिसमें लोग घर में आग लगाते और पथराव करते दिख रहे हैं।

बीजेपी के निजामाबाद से सांसद अरविंद धर्मपुरी ने अपील की, कि पुलिस अराजक तत्वों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करे। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “जाहिर है, सांप्रदायिक झड़पों के कुछ परेशान करने वाले दृश्य भैंसा से सामने आ रहे हैं। मैं तेलंगाना डीजीपी से अनुरोध करता हूँ कि इससे पहले कि ये हिंसा अधिक भड़क जाए और अधिक नुकसान पहुँचाए, वह स्थिति का जायजा लें और अतिरिक्त बलों को तैनात करें।”

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं जब भैंसा साम्प्रादायिक हिंसा का गवाह बना हो। साल 2020 में यहीं हिंदुओं और मुस्लिमों में बात बिगड़ी थी। पूरे 11 लोग घायल हुए थे। कोरबागल्ली सड़क पर 18 घरों को जलाया गया था और कई बाइक भी आग के हवाले की गई थीं। 

भाजपा सांसद राजा सिंह को इस घटना के बाद हाउस अरेस्ट किया गया था। वहीं उन्होंने हिंदुओं पर हुए हमले के पीछे AIMIM का हाथ बताया था। इसके बाद 3 फरवरी को यह पता चला था कि सरकार ने एक पत्रकार पर मामला दर्ज किया, क्योंकि उसने रिपोर्ट में बताया था कि दंगाई ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारों के बीच हिंदुओं के घर पर हमले बोल रहे थे।