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‘गैर-हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित’- 1 नहीं, 150 मंदिरों पर लगा बैनर, असलम चौधरी की धमकियों का उत्तराखंड में जवाब

डासना शिव मंदिर में असलम चौधरी और मुस्लिम संगठनों की धमकी की प्रतिक्रिया में हिंदू युवा वाहिनी ने उत्तराखंड के 150 मंदिरों के प्रवेश द्वार पर बैनर लगाकर कहा है कि यहाँ गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबन्ध है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू संगठन का कहना है कि देहरादून के चकराता रोड, सुद्धोवाला और प्रेम नगर इलाकों में स्थित मंदिरों पर बैनर लग गए हैं, राज्य के बाकी मंदिरों पर भी यह बैनर लगाने की उनकी योजना है।

हिंदू युवा वाहिनी के राज्य महासचिव जीतू रंधावा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया के रिपोर्टर इशिता मिश्रा को बताया कि यति नरसिंहानंद सरस्वती को समर्थन देने के लिए यह कदम उठाया गया है। संयोग से, किशोर लड़के आसिफ के साथ हुई घटना के बाद, धौलाना के बसपा विधायक असलम चौधरी ने आरोप लगाया था कि मंदिर उनके पूर्वजों का है, उन्होंने कहा था कि वह मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले बोर्ड को हटा देंगे।

रंधावा ने दावा किया कि “असलम जैसों के खतरे का मुकाबला करने के लिए, हम अब उत्तराखंड के हर मंदिर के बाहर इस तरह के बैनर लगाएँगे।” रंधावा ने यह भी कहा, “मंदिर सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के लिए पूजनीय स्थान है और इसलिए, केवल उन्हीं लोगों को अनुमति दी जाएगी जो इस धर्म के हैं।”

दरअसल, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के डासना देवी मंदिर में आसिफ नाम के एक बच्चे की पिटाई का वीडियो वायरल करते हुए यह दावा किया गया था कि पानी पीने के कारण उसके साथ ऐसा किया गया। उसके बाद तो मंदिरों को बदनाम करने का एक बार फिर से सिलसिला सा चल पड़ा। यहाँ तक कि तमाम वामपंथी गिरोह के लोग और मीडिया संस्थान बिना महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का पक्ष जाने पूरे हिन्दू समुदाय को एक बार फिर से असहिष्णु साबित करने में लग गए थे।

लेकिन, जल्द ही वामपंथी और हिन्दू विरोधी ताकतों की कलई तब खुली जब मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने पूरा सच बताया कि आसिफ बच्चा नहीं है और न वह यहाँ पानी पीने आया था। बल्कि ऐसों का मकसद मंदिर में चोरी करना या रेकी करना होता है तो वहीं बच्चे की पिटाई के बाद चर्चा में आए श्रृंगी यादव ने बताया कि आसिफ शिवलिंग पर पेशाब कर रहा था इसलिए मारा। पानी तो बस पकड़े जाने पर बहाना है। महंत जी ने मंदिर के गेट पर लगे उस बोर्ड के बारे में भी बताया जिस पर मुसलमानों के मंदिर परिसर में प्रवेश न करने की बात लिखी है।

डासना मंदिर के बाहर लगा बोर्ड

इस मामले के तूल पकड़ते ही राजनीति होने लगी। यहाँ तक कि बसपा विधायक असलम चौधरी ने धमकी दे दी कि मंदिर उनके पूर्वजों का है और वह जुमे की नमाज के बाद मंदिर में प्रवेश करेंगे और वह बोर्ड भी हटाया जाएगा, जिस पर लिखा है- “यह मंदिर हिन्दुओं का पवित्र स्थल है। यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है।”

असलम चौधरी के धमकी का ही नतीजा रहा कि बोर्ड हटाने को कौन कहे बल्कि मंदिर के गेट पर उससे बड़ा बोर्ड हिन्दू संगठनों ने लगाकर एक तरह से असलम चौधरी की धमकी का जवाब अपनी दृढ़ता से दिया कि गया वो दौर अब हिन्दू इतना कमजोर नहीं है।

असलम चौधरी और मुस्लिम संगठनों के धमकियों की प्रतिक्रिया ही हिन्दू युवा वाहिनी के अनुसार उत्तराखंड के मंदिरों में देखने को मिल रही है। हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों ने देहरादून के कई मंदिरों में बैनर लगा दिए हैं। जिसपर लिखा है- “यह तीर्थ हिन्दुओं का प्रवेश स्थल है और इसमें गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है।”

देहरादून के मंदिरों में लगे बैनर

हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि वे उत्तराखंड के सभी मंदिरों में इस तरह के बैनर लगाने की योजना बना रहे हैं। वर्तमान में, देहरादून के चकराता रोड, सुद्धोवाला और प्रेम नगर इलाकों में स्थित मंदिरों में बैनर लगा दिए गए हैं।

जिसका हुआ रेप, ACP ने रिश्वत में उसी से माँगी अस्मत… रंगे हाथ पकड़ाने के बाद भी राजस्थान सरकार नर्म, नहीं किया बर्खास्त

राजस्थान की गहलोत सरकार ने रेप पीड़िता से रिश्वत में अस्मत माँगने वाले पुलिस अधिकारी को बर्खास्त करने के बजाय समय से पहले ही रिटायर कर दिया है। सरकार ने नरम रुख दिखाते हुए एसीपी कैलाश बोहरा को बर्खास्त करने के बजाय उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दिया है। इसके साथ ही उन्हें तीन महीने की एडवांस सैलरी भी दी गई है। गहलोत सरकार का ये फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है।

सोमवार को ही सदन कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में कैलाश बोहरा को बर्खास्त करने का ऐलान किया था। उन्होंने साफ किया था कि किसी भी वक्त बोहरा को बर्खास्त करने के आदेश जारी किए जा सकते हैं।

शांति धारीवाल के ऐलान से उलट यूटर्न लेते हुए गहलोत सरकार ने एसपी बोहरा को बर्खास्त करने की बजाय उन्हें कंपलसरी रिटायरमेंट दे दिया है। गृह विभाग की तरफ से शनिवार (मार्च 20, 2021) को इस बारे में आदेश जारी किया गया।

आरोपित पुलिस अधिकारी का रिटायरमेंट

रेप पीड़िता से रिश्वत में इज्जत माँगने वाले एसीपी कैलाश बोहरा को कंपलसरी रिटायरमेंट देने के मामले में सरकार ने हाई लेवल स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया है। इसके साथ ही एसीपी बोहरा को तीन महीने की एडवांस सैलरी भी मिलेगी।

एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने RPF अफसर कैलाश बोहरा को रविवार (मार्च 14, 2021) को उनके ऑफिस में पीड़िता के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा। खबरों के अनुसार, पीड़िता ने जवाहर सर्कल थाने में किसी युवक के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी समेत 3 मामले दर्ज करवा रखे हैं। 

इसी केस की जाँच का हवाला देकर अधिकारी बार-बार युवती को अपने ऑफिस बुलाता और कई बार ड्यूटी पूरी होने के बाद भी मिलने के लिए दबाव बनाता। युवती लंबे समय से अधिकारी के बर्ताव से परेशान थी। उसने एसीबी के डीजी बीएल सोनी से इसकी शिकायत की। डीजी ने बताया कि आरोपित अधिकारी महिला अत्याचार अनुसंधान यूनिट में बतौर प्रभारी सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) तैनात था। 

युवती ने 6 मार्च को कैलाश बोहरा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में युवती ने कैलाश पर रिश्वत माँगने और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसी के बाद एसीबी ने अधिकारी के ख़िलाफ़ उपयुक्त एक्शन लिया।

पहले कही गई थी बर्खास्तगी की बात

मामला सामने आने के बाद विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा था कि कैलाश बोहरा को बर्खास्त किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि ये मामला काफी रेयर है इसीलिए बिना किसी प्रक्रिया के उन्हें आसानी से बर्खास्त किया जा सकता है। लेकिन गहलोत सरकार ने नरमी दिखाते हुए उन्हें बर्खास्त करने की बजाय कंपलसरी रिटायरमेंट दे दिया है।

लगातार 3 बार सांसद और शुभेंदु के पिता ‘जय श्री राम’ बोल BJP में शामिल, अमित शाह से कहा – ‘बंगाल को बचाना है’

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और नंदीग्राम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बतौर भाजपा उम्मीदवार ताल ठोक रहे शुभेंदु अधिकारी के परिवार के सदस्य कब भाजपा (BJP) में शामिल होंगे, इस पर अटकलें चल रही थीं। अब शुभेंदु के पिता और कांथी लोकसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार सांसद बने वरिष्ठ नेता शिशिर अधिकारी ने ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा का दामन थामा।

शिशिर अधिकारी पूर्वी मेदिनीपुर के एर्गा में भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने जनता से कहा, “पश्चिम बंगाल को इस क्रूरता से बचाना है। हम आपके साथ हैं। मेरा परिवार आपके साथ है। जय सिया राम! जय भारत!”

उन्होंने कहा कि अब लड़ाई मेदिनीपुर की प्रतिष्ठा की है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि उनका कहीं जाने का मन नहीं है लेकिन भाजपा में जाने के लिए TMC उन्हें धक्का दे रही थी। भाजपा नेता मनसुख मंडाविया ने उनसे मिल कर उन्हें भाजपा में आमंत्रित किया था।

शिशिर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के जिलाध्यक्ष भी थे। साथ ही वो दीघा-शंकरपुर डेवलपमेंट काउंसिल के अध्यक्ष भी थे। हाल ही में उन्हें दोनों पदों से हटा दिया गया था। उन्होंने नंदीग्राम से अपने बेटे शुभेंदु की बड़े अंतर से जीत की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि वो खुद वहाँ जाकर भाजपा के लिए चुनाव प्रचार करेंगे।

शिशिर के भाजपा में आने की पटकथा 13 मार्च को हुगली की सांसद और चुनचरु से भाजपा उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी के उनके साथ लंच करने के साथ ही लिख दी गई थी।

वहीं रैली में पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, “मैं आज बंगाल के इस कोने में आपको यह बताने आया हूँ कि 37 साल तक आपने कम्युनिस्टों की सरकार चुनी। फिर आपने दीदी की सरकार चुनी लेकिन इन दोनों सरकारों ने बंगाल का भला नहीं किया। दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा के लिए कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ता है। ऐसी सरकार चल सकती है क्या? अगर भाजपा सत्ता में आई तो सरस्वती पूजा, दुर्गा पूजा को कोई रोक नहीं पाएगा।”

अमित शाह ने कहा कि राज्य में हर काम के लिए कटमनी देनी पड़ती है, टोलाबाजी हो रही है। उन्होंने कहा कि ममता दीदी कहती हैं कि 500 रुपए ही तो लिए, उसमें क्या हुआ!

उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि भाजपा के आने के बाद 5 आना भी टोल मनी या कट मनी नहीं जाएगी। शाह ने कहा कि इस बार ममता दीदी के गुंडों को दिन में तारे दिखाई देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता दीदी अपने भतीजे को सीएम बनाना चाहती हैं।

साथ ही अमित शाह ने भाजपा के उद्देश्य की बात करते हुए कहा कि PM मोदी सोनार बांग्ला बनाना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि TMC के गुंडे ये न समझें कि बच जाएँगे। शाह ने वादा किया कि प्रदेश में 2 मई को भाजपा की सरकार बनते ही TMC के गुंडों को पाताल से भी ढूँढ कर सजा दी जाएगी। वहीं शिशिर ने तेजपुर बंदरगाह के विकास पर ममता सरकार द्वारा अड़ंगा लगाने की बात हुए कहा कि अब उनका परिवार भाजपा के साथ है।

उधर असम के बोकाखाट में पीएम मोदी ने कहा कि ‘असम दर्शन’ के तहत 9000 से ज्यादा सत्रों, नामघरों और आस्था से जुड़े दूसरे स्थानों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने का काम भाजपा सरकार ने किया है। कहा कि कॉन्ग्रेस का खज़ाना अब खाली हो गया है, उसे भरने के लिए इन्हें किसी भी कीमत पर सत्ता चाहिए। पीएम ने ध्यान दिलाया कि झारखंड में, बिहार में, महाराष्ट्र में, जिनके साथ इनका गठबंधन है, वो पश्चिम बंगाल में इनके खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।

‘अल्लाह खैर करे! ऐसे जिस्म दिखाओगी तो किस जहन्नुम में जाओगी’: हिना खान को स्विमसूट में देख भड़के कट्टरपंथी

अभिनेत्री हिना खान ने स्विमसूट में पानी के भीतर फोटोशूट कराया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उन्हें इस्लाम को लेकर नसीहत देते हुए ट्रोल किया। हिना खान ने इंस्टाग्राम पर अपनी अंडरवाटर फोटोशूट की तस्वीरें शेयर की।

हिना खान छुट्टियाँ मनाने के लिए मालदीव गई हुई हैं। इस दौरान एक इंस्टाग्राम यूजर ने उनकी तस्वीरों पर कमेंट करते हुए कहा कि माँ और दादाजी उन्हें इन कपड़ों में देखेंगे तो बेहोश हो जाएँगे। ऐसे कॉमेंट करने वाले यह अकेले नहीं थे जनाब!

बेबी ब्लू कलर के प्लंजिंग नेकलाइन डिजाइन और स्किन बेयरिंग कटआउट वाला वन पीस पहनने के कारण लोगों ने उन्हें ट्रोल किया। अदीबा हूर नामक यूजर ने उन्हें ‘बेशर्म’ करार दिया। सारा खान ने पूछा, “शर्म नहीं आ रही थोड़ी भी?”

तुसफ़ीना ज़मान नामक यूजर ने लिखा, “मुझे नहीं पता कि इस लड़की के साथ क्या गलत है।” लवंगीन खान ने लिखा, “तुम्हें शर्म आनी चाहिए।” शिखा ने पूछा, “ये कपड़े क्या कहलाते हैं?”

हिना खान के कपड़ों के लिए यूजर्स ने उन्हें किया ट्रोल (फोटो साभार: NBT)

हिना खान की तस्वीर पर ज़ेबा कुरैशी ने लिखा, “ये मुस्लिम है। लानत है ऐसी मुस्लिम पर। अल्लाह खैर करे।” वहीं शेख राइना ने पूछा, “हिना खान, क्या आप पागल हो गई हो, जो इस तरह की तस्वीरें डाल रही हो?”

एक अन्य इंस्टा यूजर ने भी सवाल दाग दिया कि आखिर उन्हें क्या होता जा रहा है। फिरदोश खान नामक कट्टरवादी ने लिखा, “अल्लाह आपको माफ़ करे। अल्लाह आपको हिदायत दे। अल्लाह आपकी आँखें खोले। इंशाअल्लाह! ऐसे ही जिस्म दिखाओगी तो कौन सी जहन्नुम में जाओगी मैम?”

हिना खान ‘स्टार प्लस’ के सीरियल्स ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ और ‘कसौटी ज़िंदगी की’ से सुर्ख़ियों में आई थीं। 2015-16 में टीवी की दुनिया की सबसे महँगी अभिनेत्री होने का ख़िताब उनके नाम था।

वो ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 8’ और ‘बिग बॉस 11’ जैसे रियलिटी शोज में भी हिस्सा ले चुकी हैं। श्रीनगर में जन्मी हिना खान के भाई आमिर एक ट्रेवल एजेंसी चलाते हैं। उन्होंने गुरुग्राम के CCA इंस्टिट्यूट से MBA किया हुआ है।

‘कॉन्ग्रेस मतलब घोटालों और झूठ की गारंटी’: असम में PM मोदी ने कहा – केरल में लेफ्ट को गाली, बंगाल में लगाते हैं गले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (मार्च 21, 2021) को असम के बोकाखाट में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित किया। उनकी ये रैली स्थानीय मोहुरा पाथर मैदान में हुई। असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए इसी महीने 27 मार्च से तीन चरणों में चुनाव होने है। काजीरंगा नेशनल पार्क से मात्र 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बोकाखाट, गोलाघाट जिले का हिस्सा है। इस जगह का महत्व इसीलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ये असम के लगभग बीचोंबीच स्थित है।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि अब ये तय हो गया है- असम में दूसरी बार भाजपा सरकार, असम में दूसरी बार NDA सरकार, असम में दूसरी बार डबल इंजन की सरकार। पीएम मोदी ने कहा कि आज वो यहाँ बैठीं सभी माताओं, बहनों, बेटियों ने जिस जिम्मेदारी और जिन उम्मीदों के साथ भाजपा की सरकार चुनी थी, उसे पूरा करने के लिए हमने जी-जान से मेहनत की है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकार के समय उसी पार्टी की लूट से बचाना एक बड़ी जिम्मेदारी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काजीरंगा सहित तमाम अभ्यारण्य व वनक्षेत्र को देश की धरोहर बताते हुए कहा कि पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी हैं और रोजी रोटी के साधन भी हैं। उन्होंने इस बात पर ख़ुशी जताई कि 5 साल में असम में वनक्षेत्र में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जहाँ कॉन्ग्रेस राज में सवाल था कि ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों के बीच आपस में कनेक्टेविटी कैसे बढ़े, लेकिन NDA के सेवाकाल में ब्रह्मपुत्र पर आधुनिक पुल बन रहे हैं, पुराने अधूरे पुलों को पूरा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राजग की सरकार ने गैंडों का शिकार करने वालों को जेल में डाला है और सरकार यहाँ की जनता के साथ-साथ पशु-पक्षियों की सुरक्षा के लिए भी कार्य कर रही है। उन्होंने लोगों को बताया कि जंगलों के बढ़ने से पर्यटन और आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं। उन्होंने भारत को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल बनाने के लक्ष्य की बात करते हुए कहा कि असम में ये सभी चीजें हैं।

उन्होंने बताया कि ‘असम दर्शन’ के तहत 9000 से ज्यादा सत्रों, नामघरों और आस्था से जुड़े दूसरे स्थानों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने का काम भी भाजपा और राजग की सरकार ने किया है। साथ ही कहा कि असम की एक और बहुत बड़ी ताकत है पेट्रोलियम और इससे जुड़े उद्योग। उन्होंने याद किया कि दशकों तक कॉन्ग्रेस असम के इस सामर्थ्य पर भी बैठी रही, लेकिन बीते 6 साल में तेल और गैस के सेक्टर में असम में 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया गया है।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि आज से 90 साल से भी पहले अंग्रेजों ने एक कानून बनाकर बैंबू को वृक्ष की कैटेगरी में डाल दिया था, जिसके तहत प्राइवेट जमीन पर उगाए गए बैंबू को काटने और उनके ट्रांसपोर्टेशन पर रोक लगाता था। आजादी के बाद भी 70 साल तक ये कानून ऐसे ही चला। उन्होंने कहा कि अब जब केंद्र में NDA सरकार है और राज्य में भी NDA सरकार है, तो डबल इंजन की ताकत असम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा:

“अब हाईवे बनाने पर डबल ताकत से काम हो रहा है क्योंकि राज्य सरकार भी असम को देश से जोड़ रही है और केंद्र सरकार भी। 50 साल से ज्यादा असम पर राज करने वाले लोग आजकल असम को 5 गारंटी दे रहे हैं। असम के लोग इनकी रग-रग से वाकिफ हैं। इन लोगों को झूठे वायदे करने की, झूठे घोषणापत्र बनाने की आदत पड़ गई है। कॉन्ग्रेस मतलब झूठे घोषणापत्र की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब कंफ्यूजन की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब अस्थिरता की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब, बम, बंदूक और ब्लॉकेड की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब हिंसा और अलगाववाद की गारंटी। कॉन्ग्रेस मतलब भ्रष्टाचार की गारंटी, घोटालों की गारंटी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि भाजपा के नेतृत्व में NDA सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन आज के कॉन्ग्रेस नेताओं को तो सिर्फ सत्ता से मतलब है, वो चाहे कैसे भी मिले। उन्होंने अंदेशा जताया कि असल में कॉन्ग्रेस का खज़ाना अब खाली हो गया है, उसे भरने के लिए इन्हें किसी भी कीमत पर सत्ता चाहिए। पीएम ने ध्यान दिलाया कि झारखंड में, बिहार में, महाराष्ट्र में, जिनके साथ इनका गठबंधन है, वो पश्चिम बंगाल में इनके खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।

साथ ही कहा कि कैसे केरल में लेफ्ट को गाली देते हैं, पश्चिम बंगाल में कुर्सी की आस में लेफ्ट को गले लगाते हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस वाले खुद को सेकुलर बताते हैं, लेकिन असम, पश्चिम बंगाल और केरल में संप्रदाय के आधार पर बने दलों के साथ दोस्ती करते हैं। पीएम मोदी ने जनता से कहा कि सत्ता के सामने कॉन्ग्रेस को कुछ नहीं दिखता और इसी कारण अब उसके नेताओं की बातों पर देश में कोई भरोसा नहीं कर रहा।

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने चाय बागान में काम करने वाले परिवारों को भी वर्षों तक अभाव में रखा, लेकिन बीते 5 सालों में भाजपा ने NDA सरकार ने चाय बागान में काम करने वाले साथियों के लिए पढ़ाई, कमाई और दवाई से जुड़ी जरूरतों के लिए एक के बाद एक कदम उठाए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि चाय जनजाति के साथियों और इस जनजाति से निकली महान विभूतियों को मान-सम्मान और स्वाभिमान का जीवन देने के लिए NDA प्रतिबद्ध हैं।

प्रधानमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि टी गार्डन्स में काम करने वाले श्रमिक साथियों की दैनिक मजदूरी बढ़े इसके लिए भी असम सरकार पूरी तरह गंभीर है।

जिन्होंने कहा – ‘इस्तीफा नहीं देंगे अनिल देशमुख’… उन्हें शरद पवार ने दिल्ली तलब किया: बदलेगी महाराष्ट्र की सत्ता?

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख का नाम 100 करोड़ की वसूली के प्रयास में आने के बाद उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। वहीं शरद पवार की NCP के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि अनिल देशमुख इस्तीफा नहीं देंगे।

NCP के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि परमबीर सिंह ने किसी को खुश करने के लिए ये पत्र लिखा है। उन्होंने शिवसेना का भी बचाव करते हुए कहा कि सचिन वाजे को पार्टी से जोड़ना ठीक नहीं।

परमबीर सिंह ने अपने पत्र की एक प्रति राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भी भेजी है, जिसमें लिखा है कि एंटीलिया केस में गिरफ्तार किए गए निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के माध्यम से अनिल देशमुख ने 100 करोड़ प्रतिमाह की उगाही का लक्ष्य रखा था। वहीं NCP के संस्थापक-अध्यक्ष शरद पवार ने अनिल देशमुख से लंबे समय तक फोन पर बातचीत की, जिसमें देशमुख ने सफाई में अपना पक्ष रखा।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी बातचीत कर के अपने बचाव में पक्ष रखा। भाजपा नेता राम कदम ने पूछा है कि सचिन वाजे अपनी गाड़ी में कैश गिनने वाली मशीन लेकर क्यों चलते थे? उन्होंने अनिल देशमुख का नार्को टेस्ट और इस्तीफे तक अपना आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी का पक्ष नहीं ले रही, लेकिन परमबीर सिंह के खुलासे के बाद अनिल देशमुख से पूछताछ होनी चाहिए।

परमबीर सिंह ने पत्र में दावा किया है कि सचिन वाजे ने अनिल देशमुख से कहा था कि 1 महीने में 100 करोड़ की उगाही का लक्ष्य बहुत ज्यादा है और वो मुश्किल से इसका आधा ही जुटा सकते हैं, जिसके बाद उन्हें ‘नए तरीके ईजाद करने’ का निर्देश गृह मंत्री से मिला था। उधर संसद सत्र के दौरान दिल्ली में रह रहे शरद पवार ने अपने भतीजे व महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार के साथ-साथ जयंत पाटिल को भी वहीं तलब किया है।

उद्धव ठाकरे की सरकार दबाव में आ गई है और तीन पार्टियों के सूत्रधार के रूप में काम कर रहे बुजुर्ग शरद पवार अब इन नेताओं से बातचीत कर के अनिल देशमुख के राजनीतिक भविष्य पर फैसला लेंगे। नागपुर में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि चूँकि उद्धव सरकार के 15 महीने हो गए हैं, उसे 1500 करोड़ रुपए की उगाही का हिसाब जनता को देना चाहिए।

परमबीर सिंह के पत्र की एक और बड़ी बात ये है कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण के साथ-साथ दादर एंड नगर हवेली लोकसभा क्षेत्र से 7वीं बार सांसद बने मोहन डेलकर की आत्महत्या वाले मामले का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट के हिसाब से दादर एंड नगर हवेली में अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी थी लेकिन गृह मंत्री देशमुख उन पर बार-बार केस रजिस्टर करने का दबाव बना रहे थे और नहीं चाहते थे कि वो इस पर वकीलों की राय लें।

‘भारत में BJP के खिलाफ एक ही असली नेता’: ममता को Pak राजनयिक का साथ, पहले पॉर्न स्टार के लिए किया था ट्वीट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब पाकिस्तान की भी खासी दिलचस्पी हो आई है। नई दिल्ली में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर के रूप में कार्य कर चुके रिटायर्ड राजनयिक अब्दुल बासित ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी की तारीफों के पुल बाँधे हैं। उन्हें ‘बंगाल की बाघिन’ बताते हुए बासित ने ‘अरब न्यूज़’ के एक लेख में लिखा है कि उन्हें मार्च 2015 और मार्च 2016 में ममता बनर्जी से मुलाकात का मौका मिला।

अब्दुल बासित 2016 में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान कोलकाता गए थे। उन्होंने लिखा है कि पहली बैठक के दौरान ही ‘दीदी’ ने अपनी नम्रता, राजनीतक कुशाग्रता और बुद्धिमता से उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उन्होंने लिखा है कि वो इस बैठक की यादों को हमेशा सँजो कर रखेंगे। तब वो समय था, जब कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात के कारण भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तीखापन था और अब्दुल बासित का कहना है कि भारत के ‘कठोर रवैये’ से पाकिस्तान चकित था।

अब्दुल बासित ने लिखा है कि उस बैठक में उन्होंने ममता बनर्जी को बताया कि वो भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को ठीक करने के लिए क्या कर रहे हैं। उन्होंने अपने लेख में कहा कि पश्चिम बंगाल का चुनाव खासा जहरीला हो गया है और भारत में एक ही ऐसा नेता बचा है, जो भाजपा के खिलाफ खड़े होने की असली ताकत रखता है। उन्होंने लिखा है कि कमजोर हुई कॉन्ग्रेस पार्टी का नेतृत्व क्षीण हो रहा है और इसका भविष्य धुँधला दिख रहा है।

उन्होंने कश्मीरी अलगावादियों को ‘कश्मीरी नेताओं’ कह कर सम्बोधित करते हुए लिखा है कि उन लोगों के साथ उनके बैठक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बड़ा मुद्दा बना दिया’, जिसकी पाकिस्तान ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने लिखा है कि पूर्व की सरकारें ऐसी बैठकें खुद आयोजित करवाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर में नवंबर 2014 में होने वाले चुनावों के लिए पीएम मोदी ने ऐसा किया, जहाँ भाजपा को 25 सीटें मिलीं।

अब्दुल बासित का कहना है कि ममता बनर्जी ने उन्हें ध्यान से सुना और नरेंद्र मोदी की विपक्षी नेता होने के बावजूद उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने ममता बनर्जी को ‘सच्ची देशभक्त और राजनेता’ करार दिया। बकौल बदल बासित, ममता बनर्जी ने अपने राज्य की परियोजनाओं व गरीबों की भलाई के लिए हुए कार्यों के बारे में बताया और अब्दुल बासित ने जब सिंध और पश्चिम बंगाल की साझेदारी का सुझाव देते हुए कराची व कोलकाता के ‘ट्विनिंग’ की बात की तो उसमें भी उन्होंने रुचि दिखाई।

अब्दुल बासित का कहना है कि इन प्रस्तावों को ममता बनर्जी ने आधिकारिक रूप से केंद्रीय विदेश मंत्रालय के समक्ष भेजने को कहा। इसके बाद ममता बनर्जी ने बासित से पूछा कि क्या उन्होंने कोलकाता की मटन बिरयानी खाई है? अब्दुल बासित के होटल में पश्चिम बंगाल की सीएम ने मटन बिरयानी भिजवाई। पूर्व राजनयिक का कहना है कि ये उनके लिए एक कभी न भूलने वाली ट्रीट थी। अब्दुल बासित ने लिखा कि वो किसकी जीत चाहते हैं, ये समझना कठिन नहीं है।

अब्दुल बासित अक्सर अजीब कारणों से विवाद में रहते हैं। एक बार उन्होंने एक ऐसा ट्वीट रीट्वीट किया था, जिसमें एक अडल्ट फिल्म कलाकार जॉनी सीन्स के स्क्रीनशॉट को कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वहाँ की पीड़ित जनता बताकर दिखाया जा रहा था। बासित ने कबूल किया था कि आतंकी बुरहानी वानी के मारे जाने के बाद उन्होंने शोभा डे से एक लेख लिखवा कर पाकिस्तानी प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाया था।

UP पुलिस पर रफीक ने परिवार के साथ किया हमला, 2 की हालत गंभीर: पत्थरबाजों में महिलाएँ भी, हरकत में आए SP खुद

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में कहिजरी थाने की पुलिस दहेज़-उत्पीड़न के मामले में एक पिता-पुत्र को पकड़ने गई थी, लेकिन पुलिस टीम पर ही हमला हो गया और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। आरोपितों ने ही पुलिस पर हमला किया, जिनमें रफीक के नेतृत्व में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएँ भी थीं।

उत्तर प्रदेश पुलिस पर जम कर ईंट-पत्थर चलाए गए। आत्मरक्षा के लिए पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी। इस घटना में चौकी इंचार्ज और एक सिपाही के अलावा शिकायतकर्ता महिला भी घायल हो गई। चौकी इंचार्ज की हालत गंभीर है और उनका इलाज चल रहा है।

एसपी केशव कुमार चौधरी ने पुलिस बल के साथ आरोपितों की तलाश में दबिश दी है। दहेज उत्पीड़न का ये मामला भीखदेव के रहने वाले अजमल की पत्नी शाह बेगम ने दर्ज कराया था। 2 वर्ष पहले दर्ज कराए गए इस मामले में शौहर के अलावा ससुर रफीक उर्फ़ हक्कल को भी आरोपित बनाया गया था।

18 मार्च को शाह बेगम ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य पूनम कपूर के सामने भी ये मामला उठाया था। इसके बाद पुलिस ने रफीक को हिरासत में भी लिया था लेकिन समझौता होने के कारण उसे फिर से छोड़ दिया गया।

शाह बेगम अपने मायके कबीरनगर में रह रही थी। उसे लेकर पुलिस चौकी इंचार्ज गजेंद्र पाल सिपाहियों के साथ भीखदेव पहुँचे। समझौते के तहत पीड़िता को ससुराल में ही रुकना था, जिसके लिए पुलिस वहाँ गई थी। जब हमला हुआ, तब पुलिस रफीक के बड़े बेटे हसर अली से पूछताछ कर रही थी।

तभी अचानक से आरोपितों के साथ घर की महिलाओं अफरुन, असरुन, रईशा व चांदतारा ने हमला कर दिया। पुलिसकर्मी इधर-उधर भागे और किसी तरह जान बचा कर वायरलेस से सूचना दी। पथराव के बीच चौकी इंचार्ज को ईंट-पत्थर लगे और वो मौके पर ही बेहोश हो गए। सिपाही समर सिंह भी लहूलुहान हो गए। रसूलाबाद थाने की पुलिस ने वहाँ आकर पीड़िता व अन्य घायलों को कानपुर के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया।

आरोपितों की तलाश में पुलिस की 5 टीमें गठित की गई हैं और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किए जाने की बात कही गई है। रफीक के खिलाफ पहले से ही कई संगीन मामलों में मुक़दमे दर्ज हैं। DIG कानपुर ने अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल लिया। शिवली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार देने के बाद कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया है। एसपी मौके पर कैम्प कर रहे हैं।

इस घटना की चश्मदीद रही घायल पीड़िता ने बयान देते हुए कहा कि ससुराल वाले उसे जान से मार देना चाहते थे। उसने कहा कि उसके पति अजमत अली और ससुर रफीक के अलावा ननद अफरूँ, अकरम अली, नन्दोई वाजिद अली, मुस्कान सहित सभी ने मारा। उसने कहा कि लोहे के डंडे का भी इस्तेमाल किया गया था। पूरे मामले में पुलिस ने बस इतना कहा कि समझौते के तहत पीड़िता को घर में रखो, जिस पर उग्र होकर हमला किया गया।

महाराष्ट्र गृह मंत्री ने किसे बुलाया… कैसे-किससे वसूली का दिया टारगेट: पढ़ें परमबीर सिंह का WhatsApp चैट

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर और अब महाराष्ट्र के DG (होमगार्ड) परमबीर सिंह के उस पत्र से बवाल मचा हुआ है, जिसमें उन्होंने राज्य के गृह मंत्री और NCP नेता अनिल देशमुख पर विवादित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के माध्यम से प्रतिमाह 100 करोड़ रुपए की वसूली की कोशिश के आरोप लगाए हैं। सबूत के रूप में परमबीर सिंह ने ACP संजय पाटिल के साथ व्हाट्सएप्प (Whatsapp) पर हुई बातचीत का हवाला भी दिया है। जानिए क्या है उस चैट में।

इस चैट की शुरुआत परमबीर सिंह के ये पूछने से होती है कि जब पाटिल ने ‘HM सर’ से फरवरी में मुलाकात की थी तो उन्होंने बार व ऐसे अन्य संस्थानों के बारे में क्या कहा था और कुल कितनी रकम की उगाही की बात कही थी? जब उधर से कुछ मिनट्स तक कोई जवाब नहीं आता है तो परमबीर सिंह ‘अर्जेन्ट प्लीज’ का मैसेज भेजते हैं। इस पर पाटिल जवाब देते हैं कि मुंबई के ऐसे 1750 व अन्य प्रतिष्ठानों से 3-3 लाख उगाही की बात हुई थी। Whatsapp चैट इस प्रकार है:

ACP पाटिल: हर महीने कुल 50 करोड़ की वसूली। मिस्टर पलांडे ने 4 मार्च को DCP भुजबल एनफोर्समेंट के सामने ऐसा कहा था।
परमबीर सिंह: तो इससे पहले आप HM सर से कब मिले थे?
ACP पाटिल: हुक्का ब्रीफिंग से 4 दिन पहले।
परमबीर सिंह: वाजे और HM सर की बैठक की तारीख़ क्या थी?
ACP पाटिल: सर मुझे सटीक तारीख़ याद नहीं है।
परमबीर सिंह: आपने कहा था कि आपकी बैठक से कुछ ही दिनों पहले?
ACP पाटिल: हाँ सर, लेकिन ये फरवरी से ख़त्म होने से पहले।
परमबीर सिंह: पाटिल, मुझे कुछ और सूचनाएँ चाहिए। क्या वाजे HM सर से मुलाकात करने के बाद तुमसे मिला?
ACP पाटिल: हाँ सर, वो मुझसे मिला था।
परमबीर सिंह: क्या उसने तुम्हें कुछ बताया कि वो HM सर से क्यों मिला था?
ACP पाटिल: उस बैठक का उद्देश्य, जैसा कि मुझे बताया गया था, यह था कि मुंबई में 1750 प्रतिष्ठान हैं और प्रत्येक से 3 लाख की वसूली के बाद ये आँकड़ा 40-50 करोड़ के बीच होगा।
परमबीर सिंह: HM सर ने आपसे भी यही बात कही थी?
ACP पाटिल: 4 मार्च को उनके PS पलांडे ने मुझसे ऐसा कहा था।
परमबीर सिंह: हाँ, आपकी पलांडे से मुलाकात हुई थी।
ACP पाटिल: हाँ सर, मुझे बुलाया गया था।

परमबीर सिंह के पत्र की एक और बड़ी बात ये है कि उन्होंने इस पूरे प्रकरण के साथ-साथ दादर एंड नगर हवेली लोकसभा क्षेत्र से 7वीं बार सांसद बने मोहन डेलकर की आत्महत्या वाले मामले का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट के हिसाब से दादर एंड नगर हवेली में अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी थी लेकिन गृह मंत्री देशमुख उन पर बार-बार केस रजिस्टर करने का दबाव बना रहे थे और नहीं चाहते थे कि वो इस पर वकीलों की राय लें।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के गृह मंत्री ने दयानेश्वर स्थित अपने आवास पर कई पुलिस अधिकारियों को बुलाया है और उन्हें कहा है कि किसी खास प्रकरण में उन्हें जाँच को किस दिशा में ले जाना है। परमबीर सिंह ने इसे अवैध और न्यायपालिका का उल्लंघन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ वाजे ही नहीं बल्कि कई अधिकारियों को अपने आवास पर बुला कर देशमुख ने ‘कलेक्शन टारगेट’ दिए थे।

जबकि अनिल देशमुख का कहना है कि अब परमबीर सिंह को लगता है कि एंटीलिया मामले में वो मुसीबत में हैं तो उन्होंने ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार को ब्लैकमेल करने के लिए ये आरोप लगाए हैं। सीएम उद्धव ने पत्र की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए। सीएम व गृह मंत्री ने एक-दूसरे का विरोधाभासी बयान जारी किया। इसके कुछ ही देर बाद परमबीर सिंह ने मीडिया से कहा कि ये पत्र उन्होंने ही भेजा है और अब वो इसकी हस्ताक्षरित कॉपी पुनः सेंड करने जा रहे हैं।

ACP पाटिल से मिल व्हाट्सएप्प पर खेला खेल: परमबीर सिंह के ‘100 करोड़ी’ लेटर पर CM उद्धव के उलट अनिल देशमुख

मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हाल ही में ट्रांसफर किए गए परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर आरोप लगाया कि राज्य के गृह मंत्री और NCP नेता अनिल देशमुख ने विवादित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को हर महीने रेस्टॉरेंट्स, बार और पब से 100 करोड़ रुपए की वसूली का लक्ष्य दिया था। इस पत्र में एंटीलिया के बाहर बम वाले कार से लेकर मनसुख हिरेन की मौत को लेकर कई सवाल थे।

इसके बाद अनिल देशमुख ने बयान जारी कर आरोपों का खंडन किया, जबकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस पत्र की प्रमाणिकता पर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस पत्र पर परमबीर सिंह के हस्ताक्षर नहीं थे और इसे जीमेल अकाउंट से भेजा गया था। उन्होंने कहा कि चूँकि इस अहस्ताक्षरित पत्र को परमबीर सिंह के आधिकारिक मेल से नहीं भेजा गया था, इसीलिए संभव है कि ये पत्र पूरा का पूरा फेक ही हो।

उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। शिवसेना सुप्रीमो ने कहा कि जिस मेल अकाउंट से पत्र आया, वो ‘[email protected]’ था, जबकि परमबीर सिंह का सरकारी मेल एड्रेस ‘[email protected]’ है। इसी बीच अनिल देशमुख ने एक नया विस्तृत बयान जारी कर दिया। उन्होंने इसमें अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा बताते हुए इसे उन्हें और MVA सरकार को बदनाम करने की साजिश करार दिया। अपने बयान में उन्होंने कहा:

“मैं आपका ध्यान कुछ बिंदुओं की तरफ आकर्षित करना चाहता हूँ, जिससे पता चलता है कि परमबीर सिंह झूठ बोल रहे हैं। सचिन वाजे की गिरफ़्तारी के बाद वो इतने दिनों तक चुप क्यों थे? उन्होंने शुरू में क्यों कुछ नहीं कहा? मार्च 16 को उन्हें पता चला कि उनका ट्रांसफर किया जाना है तो फिर अगले दिन से उन्होंने साजिश शुरू कर दी। उन्होंने अपने करीबी ACP संजय पाटिल को कुछ प्रश्न व्हाट्सएप्प पर भेजे और बदले में मनपसंद उत्तर पाया। ये उनकी एक बड़ी साजिश का हिस्सा है, जिसके माध्यम से वो सरकार को बदनाम करना चाहते हैं।”

महाराष्ट्र के गृह मंत्री के बयान में आरोप लगाया गया है कि 16 वर्षों से निलंबन की अवस्था में चल रहे सचिन वाजे को फिर से पदस्थापित करने का निर्णय परमबीर सिंह का ही था और अब खुद को बचाने के लिए वो इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने परमबीर सिंह के आरोपों को आधारहीन बताते हुए उन्हें साबित करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि वो मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएँगे। उन्होंने कहा कि सचिन वाजे फरवरी में ही सिंह से मिले थे, फिर उस समय क्यों नहीं उन्होंने कुछ कहा?

बकौल अनिल देशमुख, अब परमबीर सिंह को लगता है कि एंटीलिया मामले में वो मुसीबत में हैं तो उन्होंने ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार को ब्लैकमेल करने के लिए ये आरोप लगाए हैं। इस तरह से मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने एक-दूसरे का विरोधाभासी बयान जारी किया। इसके कुछ ही देर बाद परमबीर सिंह ने मीडिया से कहा कि ये पत्र उन्होंने ही भेजा है और अब वो इसकी हस्ताक्षरित कॉपी पुनः सेंड करने जा रहे हैं।

इसके बाद कयासों का अंत हुआ और मीडिया में परमबीर सिंह द्वारा हस्ताक्षरित पत्र भी जारी हो गया, जो उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकरे को भेजा है। मुंबई कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने कहा कि अगर परमबीर सिंह के आरोप सच्चे हैं तो सवाल NCP सुप्रीमो शरद पवार से पूछा जाना चाहिए, जो MVA सरकार के सूत्रधार हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को इस मामले में अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए।

परमबीर सिंह ने चिट्ठी में ये भी कहा कि सचिन वाजे ने उन्हें बताया था कि अनिल देशमुख ने उससे हर महीने जेल से, रेस्ट्रॉं, होटल, बार आदि जगहों से 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा था। उनके मुताबिक गृहमंत्री ने वाजे को बताया था कि मुंबई में लगभग 1750 बार, रेस्ट्रॉं और अन्य जगह हैं। यदि प्रत्येक से 2-3 लाख रुपए एकत्रित किए जाएँ तो हर महीने 40-50 करोड़ मिल जाएँगे। बाकी का कलेक्शन अन्य माध्यमों से किए जा सकते हैं।

इस प्रकरण पर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, “पूर्व कमिश्नर ने जो आरोप लगाए हैं वह बेहद गंभीर हैं। मैं तो मानता हूँ कि जिलेटिन की जो छड़े मिली हैं, उससे भी ज्यादा विस्फोटक ये आरोप हैं।”

उनके अनुसार, इन आरोपों पर गंभीरता से इसलिए भी जाँच होनी चाहिए, क्योंकि ये आरोप कार्यरत डीजी ने लगाए हैं। इन आरोपों की पुष्टि करने के लिए उन्होंने व्हॉट्सएप चैट या एसएमएस चैट भी लगाई है। जिसमें यह स्पष्ट है कि रेस्ट्रां, बार से पैसा जमा करने को कहा गया है।