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तेलंगाना के भैंसा में फिर भड़की सांप्रदायिक हिंसा, घर और वाहन फूँके; धारा 144 लागू

तेलंगाना के निर्मल जिले के भैंसा नगर में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच झड़प की कल कई खबरें सामने आईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार मीडियाकर्मी, पुलिसकर्मी व आम नागरिकों को मिला कर लगभग 10 लोग घायल हुए। इनके अतिरिक्त दो घरों व एक ऑटोरिक्शा में आग लगाई गई। तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

पुलिस का कहना है कि इस संबंध में 50 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ हो रही है। उनके ख़िलाफ़ मुकदमे भी दर्ज हो गए हैं। सीसीटीवी फुटेज खँगाली गई है अब आगे की जाँच भी हो रही है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि कल करीब 8:30 बजे के बाद एक बाइक चालक और दूसरे समुदाय के व्यक्ति में जेलफेकार लेन (Zelfekar lane) पर बहस हुईं। जिसके बाद पूरी हिंसा भड़की। रिपोर्ट्स का कहना है कि हिंसा जुल्गीकार मस्जिद के आसपास हुई और एक बहस ने ही इसको भड़काया। बाद में जैसे ही पुलिस को पता चला सुरक्षाकर्मी फौरन घटनास्थल पर इकट्ठा हुए। इलाके में धारा 144 लगाई गई।

आदिलाबाद के पुलिस अधीक्षक विष्णु एस वारियर भी भैंसा हुँचे। कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है। कुछ वीडियो सामने आए हैं जिसमें लोग घर में आग लगाते और पथराव करते दिख रहे हैं।

बीजेपी के निजामाबाद से सांसद अरविंद धर्मपुरी ने अपील की, कि पुलिस अराजक तत्वों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करे। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “जाहिर है, सांप्रदायिक झड़पों के कुछ परेशान करने वाले दृश्य भैंसा से सामने आ रहे हैं। मैं तेलंगाना डीजीपी से अनुरोध करता हूँ कि इससे पहले कि ये हिंसा अधिक भड़क जाए और अधिक नुकसान पहुँचाए, वह स्थिति का जायजा लें और अतिरिक्त बलों को तैनात करें।”

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं जब भैंसा साम्प्रादायिक हिंसा का गवाह बना हो। साल 2020 में यहीं हिंदुओं और मुस्लिमों में बात बिगड़ी थी। पूरे 11 लोग घायल हुए थे। कोरबागल्ली सड़क पर 18 घरों को जलाया गया था और कई बाइक भी आग के हवाले की गई थीं। 

भाजपा सांसद राजा सिंह को इस घटना के बाद हाउस अरेस्ट किया गया था। वहीं उन्होंने हिंदुओं पर हुए हमले के पीछे AIMIM का हाथ बताया था। इसके बाद 3 फरवरी को यह पता चला था कि सरकार ने एक पत्रकार पर मामला दर्ज किया, क्योंकि उसने रिपोर्ट में बताया था कि दंगाई ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारों के बीच हिंदुओं के घर पर हमले बोल रहे थे।

‘बच्चा कितना काला होगा’: प्रिंस हैरी-मेगन ने बताया शाही परिवार का घिनौना सच, ओप्रा विन्फ्रे के इंटरव्यू में खुलासा

शाही परिवार से नाता तोड़ कर जीवन में आगे बढ़ने का निर्णय लेने के कारण प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी मेगन मार्केल (Meghan Markle) लंबे समय से चर्चा में हैं। कहा जा रहा है कि इस जोड़े ने शाही परिवार में बड़ी अजीब स्थितियों का सामना किया। मेगन को तो रंग आधारित भेदभाव भी झेलना पड़ा। हॉलीवुड स्टार ओप्रा विन्फ्रे को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने इन सब चीजों पर बात की।

ओप्रा से बात करते हुए, मेगन मार्केल ने बताया कि वह उस समय बहुत चिंतित थीं जब उन्हें पता चला कि यूके का शाही परिवार हैरी और उनके बच्चे आर्ची को कोई सुरक्षा नहीं दे रहा।

मेगन ने बताया कि जब वह गर्भवती थीं तो शाही परिवार में कई तरह की बातें होती थीं। जैसे लोग बात करते थे कि उनके आने वाले बच्चे को शाही टाइटल नहीं दिया जा सकता। जब ओप्रा ने यह सुन उनसे पूछा कि क्या ये सब आर्ची के रंग के कारण हुआ, इस पर मैकेल शांत हो गईं और एक लंबी साँस ली।

उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान, शाही परिवार यहाँ तक बात करता था कि उन दोनों के बच्चे का रंग कितना काला होगा। जब ओप्रा ने पूछा कि आखिर इस तरह की बातें उनसे करता कौन था, तब मेगन ने बताया कि वह उनका नाम नहीं बता सकती क्योंकि ये उनके लिए सही नहीं होगा।

इसके अलावा उन्होंने इस बात का खुलासा भी किया कि शाही परिवार में भेदभाव के चलते उनके मन में आत्महत्या के ख्याल भी आए। वहाँ उन्होंने अपनी परेशानी के बारे में एक शाही परिवार के वरिष्ठ सदस्य को भी बताया लेकिन उन्होंने कोई मदद करने से इंकार कर दिया।

इसी इंटरव्यू में प्रिंस हैरी ने भी कई बातों का खुलासा किया। उन्होंने उन चुनौतियों व दबावों के बारे में बताया जिसे उन्होंने शाही परिवार का हिस्सा होने के कारण फेस करना पड़ा। हैरी ने बताया कि उन्हें 2020 के शुरुआती सालों में ही आर्थिक रूप से मदद मिलना बंद हो गई थी।

उन्हें बस वही मिला जो उनकी माँ ने उनके लिए छोड़ा था। वह कहते हैं कि शायद उनकी माँ को पता था कि क्या होगा। इसीलिए इस कठिन समय में वह हर समय अपनी माँ के अस्तित्व को महसूस करते रहे। प्रिंस हैरी ने बताया कि उन्हें शाही परिवार में फँसा हुआ महसूस होता था।

बता दें कि प्रिंस हैरी और मेगन जल्द ही दूसरी बार माता-पिता बनने वाले हैं। उन्होंने बताया है कि उन्हें इस बार लड़की होगी। आर्ची (अपने बेटे) के रंग पर बात करते हुए उन्होंने कोई बातचीत साझा करने से मना किया और कहा कि वे इसके लिए सहज नहीं हैं।

मालूम हो कि प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी मेगन ने एक दूसरे को साल 2016 में डेट करना शुरू किया था। दोनों की शादी 2018 में हुई। 2020 में उन्होंने बताया कि वह शाही परिवार का नाम और इससे जुड़ी सभी जिम्मेदारियों को त्याग रहे हैं। इसके बाद उनसे शाही सुरक्षा और सभी राजशाही ठाठ छीन लिए गए।

उल्लेखनीय है कि मीडिया में हैरी और मेगन के रिश्ते को लेकर तमाम तरह की कहानियाँ हैं। मेगन पहली ऐसी दूसरे रंग की महिला हैं जिनका विवाह ब्रिटिश राजकुमार से हुआ। खबरों के मुताबिक कई हस्तियों ने इसका विरोध किया था कि उनके साथ रंग के आधार पर इस तरह का अनुचित व्यवहार हुआ।

AAP के दो और नेताओं/समर्थकों के माँ-बहन की गालियाँ देते हुए स्क्रीनशॉट वायरल, PM मोदी पर भी अश्लील टिप्पणियाँ

दिल्ली कैंट के विधायक वीरेंद्र सिंह कादियान के बाद अब 2 और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता व समर्थक के कथित स्क्रीनशॉट्स सामने आए हैं, जिनमें वो गंदी गालियाँ बकते हुए दिख रहे हैं। AAP की राष्ट्रीय सोशल मीडिया टीम के मीडिया प्रतिनिधि प्रभाकर पांडेय के वायरल स्क्रीनशॉट्स में वो माँ-बहन की गालियाँ बकते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए नजर आ रहे हैं। ये ट्वीट्स मुख्यतः 2014 के हैं।

वहीं खुद को ‘आम आदमी’ बताने वाले AAP समर्थक डेंटिस्ट हसन सफीन के भी कथित स्क्रीनशॉट्स वायरल हुए हैं, जिनमें वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार अशोभनीय और आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहे हैं। कई खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने पीएम मोदी का नाम लेकर गालियाँ बकी। ये ट्वीट्स 2015 के हैं। इनमें उन्होंने मीडियाकर्मियों पर भी अश्लील टिप्पणियाँ की हैं। भाजपा समर्थकों को उन्होंने निशाना बनाया।

उधर भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली कैंट के AAP विधायक वीरेंद्र सिंह कादियान के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए शिकायत दायर की है। चूँकि वो दिल्ली से बाहर हैं, इसीलिए उन्होंने ये FIR अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव के जरिए दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने उस ट्वीट को लेकर शिकायत की है, जिसमें कादियान कथित रूप से हिन्दू देवी-देवताओं को गाली दे रहे हैं और हिन्दू साधु-संतों को भला-बुरा कह रहे हैं।

‘सारे बाबा चु@# हैं… 33 करोड़ #गी देवता कम पड़ गए’: AAP विधायक के खिलाफ शिकायत, गाली वाले स्क्रीनशॉट्स हैं वायरल

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक वीरेंद्र सिंह कादियान के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए शिकायत दायर की है। उन्होंने ये FIR अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव के जरिए दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने उस ट्वीट को लेकर शिकायत की है, जिसमें कादियान कथित रूप से हिन्दू देवी-देवताओं को गाली दे रहे हैं और हिन्दू साधु-संतों को बुरा कह रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता बग्गा ने नई दिल्ली के DCP को प्रेषित की गई अपनी शिकायत के साथ-साथ कादियान की ट्वीट का स्क्रीनशॉट भी संलग्न किया है। उन्होंने लिखा है कि वीरेंद्र सिंह कादियान ने जिस तरह से हिन्दू देवी-देवताओं के लिए अपशब्द का प्रयोग किया है, वो हिन्दू समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन पर सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने और शांति भंग करने के आरोप लगाए हैं।

साथ ही निवेदन किया गया है कि इस मामले में जल्द एफआईआर दर्ज की जाए। वायरल हुए पुराने ट्वीट में कहा गया है, “ये सारे बाबा चु@# हैं। इनसे भी बड़े चु@# वे नमूने हैं जो इनका प्रवचन सुनने जाते हैं। मॉं के लाडलों हमारे 33 करोड़ #गी देवता कम पड़ गए थे क्या?”

बता दें कि वायरल हुए कुछ अन्य पुराने ट्वीट के स्क्रीनशॉट्स में भी कादियान खुलेआम गालियाँ बक रहे हैं। जून 2017 को दी गई रिप्लाइज में उन्होंने कई लोगों को माँ-बहन की गाली दी है। आज जब लोग अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं, ये ट्वीट्स महिलाओं के प्रति उनकी गंदी सोच का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने कई रिप्लाइज में महिलाओं के खिलाफ अश्लील व आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की हैं।

हालॉंकि कादियान ने अकाउंट हैक हो जाने का दावा करते हुए अपनी प्रोफ़ाइल डिएक्टिवेट कर ली है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी उन्होंने बात कही है।

ट्विटर यूजर्स ने भी ऐसे स्क्रीनशॉट्स वायरल होने के बाद उनकी क्लास लगाई। लोगों ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से भी पूछा कि वो इस मामले में क्या कार्रवाई करने जा रही हैं? लोगों ने उनकी मानसिक स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। लोगों ने विधायक से पूछा कि क्या हैकर्स ने इतिहास में जाकर उनके हैंडल को हैक किया? एक यूजर ने कहा कि इससे उनकी पूरी पार्टी का की सोच का पता चलता है।

12 साल की उम्र में नकी खान और उसके भाई ने किया था रेप: 26 साल बाद FIR, बेटे का होगा DNA टेस्ट

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में 26 साल पहले हुआ बलात्कार का मामला चर्चा में आया है। एक महिला ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। उसका कहना है कि साल 1994 में उसके साथ बलात्कार हुआ था, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई और एक बच्चे को जन्म दिया। अब वही बच्चा बड़ा हो गया है और अपने पिता का नाम जान उन्हें सजा दिलवाना चाहता है।

घटना के समय पीड़िता कथित तौर पर 12 साल की थी। दूसरे समुदाय के नकी खान ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना वाले दिन वह शाहजहाँपुर स्थित अपने बहन-बहनोई के घर अकेली थी। तभी, नकी खान घर में घुसा और उसको दबोच कर बलात्कार किया। इस घटना के दो दिन बाद उसके भाई गुड्डू ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। 

अब पीड़िता ने 4 मार्च को कोर्ट के आदेश पर दोनों आरोपितों के विरुद्ध केस दर्ज करवाया है। 6 मार्च को वो अपना बयान भी दे चुकी है। पुलिस का कहना है कि डीएनए जाँच करवाकर मामले की तह तक जाया जाएगा।

पीड़िता के अनुसार, दुष्कर्म के बाद आरोपितों ने उसे धमकी दी थी कि वह किसी को कुछ न बताए। मगर, जब वह गर्भवती हुई तो सबको ये बात पता चल गई। वह समाज के डर से लखनऊ में जा बसी। जहाँ एक साल बाद उसने बेटे को जन्म दिया, जिसे बाद में हरदोई के किसी हिंदू दंपती ने गोद ले लिया।

दूसरी ओर, वर्ष 2000 में परिवार ने पीड़िता की शादी गाजीपुर में कर दी, लेकिन 6 साल बाद जब ससुराल वालों को घटना का पता चला तो उसे फिर अकेले छोड़ दिया गया। 2011 में एक दिन उसकी जिंदगी फिर तब पलटी जब हरदोई वाले परिवार ने उसे उसके बेटे के बारे में बताया। 

पीड़िता पहले उससे अपनी पहचान छिपा-छिपा कर मिली, लेकिन कुछ समय बाद उसने सच्चाई बता दी। हकीकत जान कर लड़का लखनऊ में ही रहने लगा। माँ की आपबीती सुन उसने आरोपितों को सजा दिलाने की ठानी और कहा कि अगर आरोपितों को सजा नहीं मिली तो वह आत्महत्या कर लेगा।

इसी के बाद शनिवार को महिला सदर थाने के प्रभारी निरीक्षक अशोक पाल से मिली। जहाँ विवेचक मंगल सिंह ने महिला कॉन्सटेबल की मौजूदगी में बयान दर्ज कराया। दैनिक जागरण के अनुसार प्रभारी निरीक्षक अशोक पाल का कहना है कि बयान दर्ज होने के बाद कोर्ट में अब डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। फिर संबंधित सभी लोगों को नोटिस जारी होंगे। उसी आधार पर आगे कार्रवाई बढ़ेगी।

बंगाल: भाजपा बूथ अध्यक्ष को मारी गोली, पार्टी ने कहा- TMC के गुंडों ने दिया अंजाम

पश्चिम बंगाल के नदिया जिला स्थित हरिन्घता में एक भाजपा नेता को गोली मार दी गई। इस वारदात में भाजपा नेता की जान तो किसी तरह बच गई, लेकिन वो बुरी तरह घायल हो गए। बंगाल पुलिस ने रविवार (मार्च 7, 2021) को इस घटना की जानकारी दी। भाजपा नेता संजय दास को कपिलेश्वर संतोषपुर में एक चाय की दुकान के पास जमीन पर गिरे हुए पाया गया, जिसके बाद लोग उन्हें आनन-फानन में अस्पताल लेकर गए।

संजय दास हरिन्घता के वार्ड संख्या 10 में भाजपा के बूथ अध्यक्ष हैं। पुलिस ने बताया है कि अब उनकी स्थिति खतरे से बाहर है। भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी की स्थानीय यूनिट ने कहा कि TMC द्वारा पाले गए गुंडों ने इस वारदात को अंजाम दिया। वहीं तृणमूल ने इस आरोप को नकारते हुए कहा कि दो समूहों के बीच हुए झगड़े के कारण ऐसा हुआ।

पुलिस ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर पेट्रोलिंग के दौरान जब वो रविवार को दोपहर 2:30 बजे एक चाय की दुकान के पास से गुजर रहे थे तो उन्होंने देखा कि कुछ लोग थोड़ी दूरी पर समूह बना कर जमीन पर बैठे हुए थे। पुलिसकर्मियों को देखते हुए वहाँ एक को छोड़ कर बाकी सारे भाग खड़े हुए। राणाघाट पुलिस जिले के एसपी VSR अनंतनाग ने ये जानकारी दी। पुलिस ने दावा किया है कि भाजपा नेता नशे में धुत थे।

उनका पूरा पाजामा खून से लथपथ हो गया था। पुलिस ने बताया कि उसी समूह में से एक व्यक्ति ने उन पर गोली चलाई जो सीधे जाकर उनके कमर में लगी। संजय दास के पिता ने शाम को इस मामले में नामजद आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। उन्होंने अपने बेटे के हवाले से बताया कि राजनीतिक बहस के बाद गोली चलाई गई है।

ये घटना ऐसे वक़्त में सामने आई है जब रविवार को ही बंगाल की अपनी पहली चुनावी रैली में कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में एक विशाल भीड़ के समक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर राजनीतिक हिंसा का आरोप लगाते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं के बलिदान को याद किया। उन्होंने 80 वर्ष की एक बूढ़ी महिला के घर में घुस कर किए गए हमले की जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शायद ही बंगाल में कोई माँ है, जो इनकी करतूतों के कारण रोई न हो।

राजस्थान: FIR दर्ज कराने गई थी महिला, सब-इंस्पेक्टर ने थाना परिसर में ही 3 दिन तक किया रेप

राजस्थान के अलवर से बलात्कार की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। रेप का आरोप एक पुलिस अधिकारी पर ही लगा है। मिली जानकारी के मुताबिक एक महिला खड़ेली थाना में अपने पति के खिलाफ FIR लिखवाने गई थी। वहाँ तैनात सब-इंस्पेक्टर ने थाना परिसर में ही उसके साथ रेप किया।

इस वारदात के सामने आने के बाद जयपुर रेंज के आईजी और अलवर के पुलिस अधीक्षक ने थाने पहुँच कर स्थिति का जायजा लिया और पूरे मामले की जानकारी ली। असल में 26 वर्षीय पीड़िता का अपने पति के साथ विवाद चल रहा है, जिसे लेकर वो 2 मार्च 2021 को अपने पति के खिलाफ FIR दर्ज करवाने खेड़ली थाना पहुँची थीं। आरोप है कि खेड़ली थाने में तैनात सेकेंड ऑफिसर भरत सिंह ने पीड़िता को पति से विवाद के निपटारे का झाँसा दिया।

पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद वो थाना परिसर में ही बने आवास में पीड़िता को लेकर गया और वहाँ उसके साथ रेप किया। महिला का आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर इतने पर ही नहीं रुके। उसने अगले दो दिन भी पीड़िता को बुलाया और उसके साथ रेप किया। पीड़िता जब भी थाने में उक्त SI के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने पहुँचती थी तो पुलिस टालमटोल करती थी और उसे भगा देती थी। इस कारण वो मामला नहीं दर्ज करा पा रही थी।

आरोपित SI की उम्र 54 साल है। महिला का पति उसे तलाक देना चाहता था, जिसके बाद वो फ़रियाद लेकर थाने पहुँची थी। उसने वादा किया था कि वो उसके पति के साथ मामला सेटल करा देगा। 5 दिन पूर्व अरावली विहार थाने में पोस्टेड एएसआई रामजीत गुर्जर के खिलाफ भी एक महिला ने रेप का मामला दर्ज कराया था। उसे लाइन हाजिर तो किया गया है, लेकिन अब तक गिरफ़्तारी की कार्रवाई नहीं हुई है।

पीड़िता ने पुलिस पर इस मामले को छिपाने के आरोप लगाया है। जयपुर रेंज के आईजी हवा सिंह घुमारिया और पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम रविवार को खेड़ली थाने पहुँचे और पूरे मामले की शुरुआती जाँच के बाद FIR दर्ज की गई। आरोपित पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालाँकि, अब तक निलंबन की कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता ने राजस्थान सरकार से न्याय की माँग की है।

2019 में राजस्थान के चुरु जिले में एम दलित युवक की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में भी पुलिस पर रेप के आरोप लगे थे। मृतक की 35 वर्षीय भाभी और परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया था।

पीड़िता के पति ने कहा था, “30 जून को चोरी के एक केस में पुलिस मेरे 22 वर्षीय भाई को पकड़ कर ले गई। 3 जुलाई को पुलिस उसे वापस घर ले आई मगर उसी दिन फिर से उठाकर ले गई। पुलिस मेरी पत्नी को भी साथ ले गई। बाद में 6-7 जुलाई की रात पुलिस ने मेरे भाई पर खूब अत्याचार किए और उसकी हत्या कर दी। मेरी पत्नी जो इस अत्याचार की गवाह थी, उसके साथ पुलिस ने गैंगरेप किया। उसके नाखून उखाड़ दिए। उसकी आँखों और उंगलियों को चोट पहुँचाई।”

फ्रांसीसी MP ओलिवियर की हैलिकॉप्टर क्रैश में मौत, राफेल बनाती है उनकी पारिवारिक कंपनी

फ्रांस के नॉरमैंडी में हुए हेलिकॉप्टर क्रैश में फ्रांसीसी अरबपति व दक्षिणपंथी राजनीतिज्ञ ओलिवियर डसॉल्ट/दसॉ (Olivier Dassault) की मृत्यु हो गई। डसॉल्ट 69 वर्ष के थे। उनके दादा मार्केल डसॉल्ट (Marcel Dassault) ने वह कंपनी शुरू की थी जो राफेल का निर्माण करती है।

जानकारी के अनुसार, डौविल (Deauville) में नॉरमैंडी के तटीय रिजॉर्ट से उड़ान भरने के कुछ देर बाद हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना में ओलिवियर के साथ हेलिकॉप्टर का पायलट भी मारा गया। ओलिवियर अपने निजी हेलिकॉप्टर से छुट्टियाँ मनाने गए थे।

बता दें कि ओलिवियर, सर्ज डसॉल्ट के सबसे बड़े बेटे थे। साल 2018 में उन्हें उनके दो छोटे भाइयों और एक बहन के साथ अपने पिता की संपत्ति मिली थी। अकेले उनके हिस्से 6 बिलियन यूरो आए थे। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इम्मैनुअल मैक्रो ने उनकी मृत्यु की बात जान कर ट्विटर पर अपना दुख जताया। उन्होंने कहा कि ओलिवियर फ्रांस को प्रेम करते थे।

राष्ट्रपति ने लिखा, “ओलिवियर डसॉल्ट फ्रांस से बेहद प्यार करते थे। देश की उन्होंने उद्योग, नेता, वायु सेना के कमांडर के तौर पर काफी सेवा की। इस तरह उनका आकस्मिक निधन एक बहुत बड़ी क्षति है। उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदना।”

वहीं फ्रांसीसी एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो ने बताया कि विमान Aérospatiale AS350 ecureuil, एक निजी मैदान से टेक ऑफ करने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बीईए ने जाँच शुरू की है। पड़ताल के लिए 5 जाँचकर्ताओं को घटनास्थल के लिए भेजा जा रहा है। 

बता दें कि डसॉल्ट, साल 2002 से कंजरवेटिव लेस रिपब्लिकन्स पार्टी (conservative Les Republicans) के सांसद थे और उन्हें अपने भाई-बहनों के साथ दुनिया के 361वें सबसे आदमी के रूप में जाना जाता था। बीते दिनों राजनीतिक कारणों और हितों के टकराव से बचने के लिए उन्होंने दसॉ बोर्ड से अपना नाम वापस ले लिया था।

सबसे आगे उत्तर प्रदेश: 20 लाख कोरोना वैक्सीन की डोज लगाने वाला पहला राज्य बना

उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ 20 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन का लाभ मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस उपलब्धि पर संतोष जाहिर किया है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सारी चीजें पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए और पोर्टल पर प्रत्येक दिन के टीकाकरण के आँकड़ों को अपलोड किया जाए। ये आँकड़े जिलावार दर्ज कर सार्वजनिक किए जाएँगे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि नियमित मॉनीटरिंग करते हुए लक्षित आयु वर्ग के अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया जाए। रविवार (मार्च 7, 2021) को उन्होंने अपने सरकारी आवास पर कोरोना के खिलाफ लड़ाई को लेकर चल रही तैयारियों की समीक्षा की और ज़रूरी निर्देश दिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिले में बने इंटीग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेंटरों का उपयोग भी टीकाकरण के लिए किया जाए।

महाराष्ट्र और केरल को छोड़ दें तो पूरे देश में कोरोना संक्रमण में खासी कमी आई है और उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने याद दिलाया कि नए आने वाले कोरोना मामलों में उल्लेखनीय कमी आने के बावजूद खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, इसलिए प्रत्येक स्तर पर पूरी सतर्कता और सावधानी की आवश्यकता है।

प्रदेश में अब तक 5.96 लाख लोग ई-संजीवनी एप से ऑनलाइन कंसल्टेंशन का लाभ भी ले चुके हैं। इस मामले में भी उत्तर प्रदेश पूरे देश में अव्वल है। सीएम ने ई-संजीवनी ऐप का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश देते हुए कहा कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे जोड़ा जाए। उन्होंने कोविड अस्पतालों की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने की सलाह दी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोगों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और मास्क लगाने जैसी सलाहों के साथ कोरोना के खिलाफ जागरूकता फैलाई जाए।

उन्होंने जागरूकता सृजन की कार्यवाही में विभिन्न संचार माध्यमों के साथ-साथ पब्लिक एड्रेस सिस्टम का भी व्यापक उपयोग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने टेस्टिंग कार्य पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश देते हुए फोकस टेस्टिंग किए जाने पर जोर दिया। सीएम ने कहा, “समस्त जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी अपने जनपदों में वैक्सीनेट किए गए लोगों का डाटा नियमित रूप से प्रतिदिन शाम 5 बजे तक पोर्टल पर दर्ज कराएँ। कोविड वैक्सीनेशन कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।”

हाल ही में ये भी खबर आई थी कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाला उत्तर प्रदेश, 19.48 लाख करोड़ रुपए के साथ सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के मामले में भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया है। 2019-2020 में यूपी पाँचवें स्थान पर था और 2020-2021 में, उसने तमिलनाडु के साथ अपनी स्थिति बदलने के लिए, तीन रैंक की छलाँग लगाई। 

रेल इंजनों पर देश की महिला वीरांगनाओं के नाम: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भारतीय रेलवे ने दिया सम्मान

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के मौके पर भारतीय रेलवे ने देश के इतिहास में हुई महिला वीरांगनाओं और शासकों की गाथाओं को जनता तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया है। पहली बार ऐसा उनके नाम रेलवे के इंजनों पर अंकित किए गए हैं। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, इंदौर की रानी अहिल्याबाई और रामगढ़ की रानी अवंतीबाई इनमें प्रमुख हैं। ऐसे ही दक्षिण भारत में कित्तूर की रानी चिन्नम्मा शिवगंगा की रानी वेलु नचियार को सम्मान दिया गया।

इन सभी रानियों के नाम पर भारतीय रेलवे ने इंजनों का नामकरण किया है। खासकर के देश के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाली भारतीय वीरांगनाओं को सम्मान दिया जा रहा है। उन महिलाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए अपने प्राणों तक की भी आहुति दे दी। इस तरह के रेल इंजनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं और लोग उन्हें पसंद कर रहे हैं। उन्हें जम कर शेयर किया जा रहा है।

ये अभियान उत्तर रेलवे के दिल्ली रेल मंडल के तुगलकाबाद डीजल लोको शेड द्वारा शुरू किया गया है। शेड के डब्ल्यूडीपी 4बी और डब्ल्यूडीपी 4डी जैसे शक्तिशाली और आधुनिक डीजल इंजनों पर भारत की वीरांगनाओं और महिला शासकों के नाम बड़े-बड़े अक्षरों में अंकित किए गए हैं। दिल्ली रेल मंडल ने खुद से ये पहल की है। इसके लिए रेलवे बोर्ड से कोई आदेश नहीं आया था। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी इसकी तारीफ की है।

इंजन के दोनों तरफ सामने और दाई-बाई ओर नाम अंकित किए गए हैं। पीयूष गोयल ने लिखा, “अदम्य नारी शांति को सलाम!” भारतीय रेलवे के तुगलकाबाद डीजल शेड ने इन वीरांगनाओं को सम्मान देते हुए कहा कि उन्होंने लोहे के चरित्र को प्रदर्शित किया, इसीलिए उच्च-गति के इंजनों पर उन्हें सम्मान दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लोगों को ये चीज खूब पसंद भी आ रही है। पीयूष गोयल को इसके लिए लोगों ने धन्यवाद दिया।

रानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1767 से 1795 तक मालवा राज्य पर शासन किया। शिवभक्त अहिल्याबाई ने इस दौरान देश में अलग-अलग जगह पवित्र नदियों के किनारे घाटों के निर्माण कराए। महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के खिलाफ अंतिम साँस तक लड़ीं। रानी चिन्नम्मा ने 1824 में अंग्रेजों की हड़प नीति के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष शुरू किया था। अवंतीबाई रेवांचल में मुक्ति आंदोलन की सूत्रधार रहीं। वेलु नचियार ने तमिलनाडु में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।