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‘भड़^*$# करना बंद करो, जाकर धंधे पर बैठ जाओ’: AAP नेता सोमनाथ भारती ने कोर्ट में महिला एंकर से माँगी माफी

साल 2018 में सुदर्शन न्यूज की एंकर रंजना द्विवेदी के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वाले आम आदमी पार्टी नेता सोमनाथ भारती ने शनिवार (मार्च 20, 2021) को अपनी बदजुबानी के लिए रंजना से माफी माँग ली। दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे मानहानि मामले में AAP विधायक ने रंजना द्विवेदी से अदालत में माफी माँगी। यह जानकारी सुदर्शन न्यूज ने अपने ट्विटर हैंडल पर दी।

न्यूज चैनल ने इसे अपनी ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि सुदर्शन की पूर्व एंकर रंजना अंकित द्विवेदी के साथ सुदर्शन न्यूज़ के प्लेटफार्म पर अभद्रता करने वाले सोमनाथ भारती ने कोर्ट में माफी माँग ली है। रंजना ने भी इस बात की पुष्टि की।

वह बोलीं कि आरोपित सोमनाथ भारती ने जो सुदर्शन न्यूज के मंच पर उनके साथ अभद्रता की थी। उस मामले में विधायक ने माफी माँगी है। आगे उन्होंने कहा कि जिस समय उनके साथ विधायक ने बदजुबानी की थी, उस समय उनकी नई-नई शादी हुई थी। उस दौरान इस घटना से नए परिवार में उनकी छवि बिगाड़ने का प्रयास हुआ, मगर उनके पति उनके साथ रहे और व्यक्तिगत रूप से भी वह ये बात ठान चुकी थीं कि इतनी आसानी से वह इस केस को नहीं छोड़ेंगीं।

बता दें कि सोमनाथ भारती ने कोर्ट में अपने बयान में कहा कि उनकी स्टेमेंट में सुदर्शन न्यूज की पत्रकार को कुछ नहीं कहा गया था। अगर किसी भी तरह से शिकायतकर्ता की भावनाएँ आहत हुईं तो वह ईमानदारी से इस मामले में माफी माँगते हैं।

भारती द्वारा मामले में अदालत के सामने माफी माँगने के बाद रंजना ने इस केस को खत्म करने के लिए अपनी सहमति दे दी। इसी के साथ उन्होंने AAP विधायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 504/509 के तहत एफआईआर भी वापस ले ली।

उल्लेखनीय है कि महिलाओं के साथ बदसलूकी करने के लिए पहचाने जाने वाले सोमनाथ भारती ने साल 2018 में सुदर्शन न्यूज की महिला एंकर से बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया था।

सुदर्शन न्यूज की महिला पत्रकार से बात करते हुए उन्होंने कहा था, “ये भड़^$# करना बंद करो। जाकर धंधे पर बैठ जाओ’। इसके बाद आप विधायक ने 2019 के चुनावों का इंतजार करने के लिए महिला एंकर से कहा और बोले, “ये भड़%गिरि नहीं चलेगी, 2019 का इंतजार कर लो।”

इस शो की क्लिप बाद में सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल हुई थी। महिला एंकर ने बाद में इस संबंध में एफआईआर भी करवाई थी। हालाँकि, मामले के तूल पकड़ने के बावजूद भी हैरानी की बात ये देखने के मिली थी कि अरविंद केजरीवाल ने उस समय अपने विधायक के रवैये तक की आलोचना नहीं की थी।

जिलेटिन की छड़ों से भी विस्फोटक है देशमुख पर लगे आरोप, उन्हें हटाकर हो निष्पक्ष जाँच: देवेंद्र फडणवीस

मुंबई के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देशमुख के इस्तीफे की माँग की। उन्होंने कहा, “पूर्व कमिश्नर ने जो आरोप लगाए हैं वह बेहद गंभीर हैं। मैं तो मानता हूँ कि जिलेटिन की जो छड़े मिली हैं उससे भी ज्यादा विस्फोटक ये आरोप हैं।”

उनके अनुसार, इन आरोपों पर गंभीरता से इसलिए भी जाँच होनी चाहिए, क्योंकि ये आरोप कार्यरत डीजी ने लगाए हैं। इन आरोपों की पुष्टि करने के लिए उन्होंने व्हॉट्सएप चैट या एसएमएस चैट भी लगाई है। जिसमें यह स्पष्ट है कि रेस्ट्रां, बार से पैसा जमा करने को कहा गया है।

देवेंद्र फडणवीस ने अपनी बात को रखते हुए कहा, “हम गृह मंत्री के इस्तीफे की माँग करते हैं। अगर वह खुद अपना पद नहीं छोड़ते हैं तो सीएम को उन्हें हटा देना चाहिए। मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि या तो केंद्रीय एजेंसियाँ इसकी जाँच करें और यदि राज्य सरकार को लगता है कि उन्हें ये जाँच केंद्रीय एजेंसियों से नहीं करवाना है, तो भी कोर्ट मॉनिटर इंक्वायरी होनी चाहिए। पूर्व सीएम के अनुसार, मामले में जाँच तभी सफल हो पाएगी जब सर्विंग गृहमंत्री अपने पद से दूर होंगे और मामले में उच्च स्तरीय जाँच होगी।

फडणवीस ने कहा, “मैंने महाराष्ट्र के इतिहास में ये कभी नहीं देखा कि डीजी रैंक का व्यक्ति, सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर, इतने सबूतों के साथ ये सारी बातें कहे।” उन्होंने ये भी पूछा कि जब पूर्व पुलिस कमिश्नर ने कहा हुआ है कि सीएम को इस विषय पर बताया गया था तो आखिर उन्होंने इस पर जाँच क्यों नहीं की। क्या सिर्फ़ अपनी सरकार को बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने उसे नजरअंदाज किया?

बता दें कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर बड़ा आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया है कि उन्होंने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाज़े को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा कर उन्हें देने के आदेश दिए थे।

हालाँकि, अनिल देशमुख ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए परमबीर सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह ने खुद को बचाने के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई से खुद को बचाने के लिए यह झूठा आरोप लगाया है। गृहमंत्री का कहना है कि मुकेश अंबानी मामले के साथ-साथ मनसुख हिरेन हत्याकांड में भी सचिन वाजे की संलिप्तता स्पष्ट हो रही है और आगे ये जाँच तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह तक पहुँचने की संभावना है।

मुंबई में बढ़ रहे कुत्तों से रेप के मामले, चंद महीने में आए 4 केस: तौफीक, अहमद शाह सहित कई अज्ञात आरोपितों पर FIR

ऐसे दौर में जब हर जगह महिलाएँ यौन अत्याचार के खिलाफ खुलकर बोलने लगी हैं, उस समय मुंबई में एक घटिया ट्रेंड देखने को मिला है। पिछले दिनों मुंबई से कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ जानवरों का बेरहमी से यौन उत्पीड़न किया गया। सिरफिरों ने न तो गायों को छोड़ा और न ही कुत्ते और भेड़-बकरियों को।

बीते चंद महीनों की बात करें तो मुंबई से ऐसे 4 मामले सामने आ चुके हैं। जहाँ सड़कों पर जानवरों (खासकर कुत्तों-कुतियों) को हवस का शिकार बनाया गया।

20 साल के तौफीक ने कुतिया का किया रेप

अभी कल की एक घटना है जब मुंबई के सांताक्रुज के कलीना में 20-25 वर्ष का तौफीक अहमद एक कुतिया का रेप करते सीसीटीवी में पकड़ा गया। मामला संज्ञान में आते ही पुलिस ने उसके विरुद्ध केस दर्ज कर लिया।

पशु अधिकार संस्था ‘एनिमल रेस्क्यू एंड केयर ट्रस्ट (ARAC)’ के अध्यक्ष सविता महाजन ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को बताया कि आरोपित तौफीक अहमद के खिलाफ उन्होंने वकोला थाने में FIR दर्ज कराई है। इस आपराधिक वारदात की CCTV फुटेज सहित संस्था ने सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।

उन्होंने बताया कि जहाँ ये घटना हुई, वहाँ प्राइवेट कार को पार्क किया जाता है। चूँकि वहाँ एक समय में कई कार होते हैं, इसीलिए गाड़ियों के पार्ट-पुर्जे की चोरी रोकने के लिए CCTV सर्विलांस कैमरे लगाए गए। उन्हीं कैमरों में तौफीक को चीनो नामक कुतिया का रेप करते हुए पाया गया। वह एक हॉकर है जो उस इलाके में ब्रेड बेचता है।

थाने में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस उसके स्थानीय पते पर उसे पकड़ने के लिए गई, लेकिन वहाँ पता चला कि वो अपने पैतृक घर के लिए निकल चुका है जो उत्तर प्रदेश में स्थित है। IPC की धारा-377 (अप्राकृतिक सेक्स) के तहत FIR दर्ज हुई है। 

जुहू इलाके में अहमद शाह ने 30 से ज्यादा कुत्तों का किया रेप 

तौफीक की तरह ही कुछ दिन पहले मुंबई पुलिस ने 68 वर्षीय एक व्यक्ति को कुतिया के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोपित की पहचान अहमद शाह के तौर पर हुई । वह एक सब्जी विक्रेता है, जो जुहू गली में ही रहता है। उसे एक एनजीओ वॉलिंटियर ने कुत्ते का रेप करते देखा था। इसके बाद थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

पड़ताल में पता चला कि अहमद ने करीब 30 कुत्तों का रेप किया है। वह इस काम को देर रात 3 से 4 बजे के बीच अंजाम देता। पहले वह उन्हें जानवरों का मीट खिलाता फिर जब वह उसे खाने लगते तो वही रुककर वह उनका रेप करता।

शर्मनाक बात तो यह है कि आरोपित अहमद को अपने किए का कोई पछतावा नहीं है। उसने बेशर्मी से अपने अपराध को स्वीकारते हुए कहा कि वह जानवरों को खाना देता है और जानवरों ने कभी उसे ऐसा करने से मना नहीं किया। ये सब अपराध नहीं है।

शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 8 साल की कुतिया का हुआ बलात्कार

साल 2020 के अक्टूबर माह में मुबंई के पवई में गैलेरिया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के अंदर नूरी नाम की एक कुतिया का रेप हुआ था, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। बाद में उसे एनिमल केयर सेंटर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर्स ने बताया कि उसके प्राइवेट पार्ट्स से 11 इंच की लकड़ी की छड़ी मिली थी, जिसे ईलाज के दौरान निकाल दिया गया।

बॉम्बे एनिमल राइट्स (BAR) के कार्यकर्ता विजय किशोर मोहनानी ने इस पर कहा था, “22 अक्टूबर को स्थानीयों ने हमें सूचित किया कि नूरी को गैलेरिया में गंभीर रूप से घायल पाया गया। हमें संदेह है कि कुछ सरफिरे जो या तो गैलेरिया के अंदर काम करते हैं या पास में रहते हैं, उन्होंने एक दोस्ताना कुत्ते के साथ ऐसी क्रूरता को अंजाम दिया।” इस केस में बता दें कि अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ था। सोशल मीडिया पर कई जगह नूरी की वीडियो वायरल हुई थी।

दिहाड़ी मजदूर ने किया कुतिया का रेप

नूरी के बाद नेरुल रेलवे स्टेशन के बाहर एक कुतिया के रेप की वारदात सामने आई थी। आरोपित की पहचान महेंद्र डी पवार के तौर पर हुई थी। स्टेशन कॉम्प्लेक्स की सीसीटीवी फुटेज में पूरा वाकया कैद था, जिसे देखने के बाद फौरन एनिमल राइट्स ग्रुप के पास भेज दिया गया था।

PFA एक्टिविस्ट विजय रंगरेर ने इस पर बताया था, “लगभग एक हफ्ते पहले (घटना के समय), नेरुल स्टेशन कॉम्प्लेक्स के पश्चिम की ओर एक मादा कुत्ते का यौन शोषण करते हुए एक देर रात के सीसीटीवी फुटेज हमारे पीएफए ​​मुंबई यूनिट -2 को भेजे गए थे।” इसके बाद वह और उनके सहयोगी आदित्य पाटिल घटनास्थल पर पहुँचे और अपराध के बारे में पूछताछ करने लगे। जल्द ही, उन्होंने आरोपित महेंद्र डी पवार का पता लगा लिया।

पड़ताल में पता चला कि आरोपित दिहाड़ी मजदूर था जो नेरुल स्टेशन पर ही सोता था। घटना वाले दिन उसने शराब पी हुई थी और एक कुतिया का रेप कर रहा था। उन्होंने बताया कि कुछ समय तक महेंद्र उनकी पकड़ से बाहर था। लेकिन बाद में स्थानीयों की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

गृहमंत्री अनिल देशमुख ने दिया था सचिन वाजे को ₹100 करोड़/महीने वसूली का लक्ष्य: परमबीर सिंह ने CM उद्धव को लिखा पत्र

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर बड़ा आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया है कि उन्होंने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाज़े को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा कर उन्हें देने के आदेश दिए थे।

बता दें कि परमबीर सिंह को हाल ही में मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद से हटाया गया था। इसके बाद आज (शनिवार) को उन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे को एक चिट्ठी लिखी। इसमें उन्होंने अनिल देशमुख पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट के हेड सचिन वाजे को महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने पिछले कुछ महीनों में कई बार अपने सरकारी आवास ज्ञानेश्वर पर बुलाया था।

परमबीर सिंह ने चिट्ठी में ये भी कहा कि सचिन वाजे ने उन्हें बताया था कि अनिल देशमुख ने उससे हर महीने जेल से, रेस्ट्रां, होटल, बार आदि जगहों से 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा था। उनके मुताबिक गृहमंत्री ने वाजे को बताया था कि मुंबई में लगभग 1750 बार, रेस्ट्रां और अन्य जगह हैं। यदि प्रत्येक से 2-3 लाख रुपए एकत्रित किए जाएँ तो हर महीने 40-50 करोड़ मिल जाएँगे। बाकी का कलेक्शन अन्य माध्यमों से किए जा सकते है।

मालूम हो कि इस पत्र को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसमें कोई हस्ताक्षर भी नहीं दिख रहे। हालाँकि, इसमें बताया गया है कि फरवरी के मध्य और उसके बाद गृह मंत्री ने वाजे को अपने सरकारी आवास पर बुलाया था। तब गृह मंत्री के एक-दो कर्मचारी और उनके निजी सचिव भी वहाँ मौजूद थे। वहीं उन्हें पैसा इकट्ठा करने के आदेश दिए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अनिल देशमुख ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए परमबीर सिंह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह ने खुद को बचाने के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई से खुद को बचाने के लिए यह झूठा आरोप लगाया है।

गृहमंत्री का कहना है कि मुकेश अंबानी मामले के साथ-साथ मनसुख हिरेन हत्याकांड में भी सचिन वाजे की संलिप्तता स्पष्ट हो रही है और आगे ये जाँच तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह तक पहुँचने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले के सामने आते ही भाजपा ने राज्य के गृहमंत्री अनील देशमुख से इस्तीफे की माँग भी कर दी है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा, “पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त का कहना है कि असल में जबरन वसूली करने वाला और कोई नहीं बल्कि महाराष्ट्र का गृह मंत्री अनिल देशमुख है, सचिन वाजे से कई बार मिलता था। देशमुख पब आदि से पैसा निकाल रहे थे। भाजपा की माँग है कि अनिल देशमुख को बर्खास्त किया जाना चाहिए।”

सचिन वाजे मनसुख हिरेन के पोस्टमार्टम के समय मौजूद था अस्पताल के बाहर: वीडियो फुटेज से हुआ बड़ा खुलासा

मुंबई के एंटीलिया केस में काली स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की मौत के मामले में निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से जुड़ा एक नया खुलासा हुआ है। रिपब्लिक टीवी के अनुसार, उन्हें एक वीडियो मिली है जिससे पता चला है कि जिस दिन हिरेन का शव ठाणे के अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया उस दिन वाजे अस्पातल के बाहर ही था।

समाचार चैनल द्वारा जारी की गई वीडियो फुटेज में देख सकते हैं कि 5 मार्च 2021 को वाजे अस्पताल के बाहर खड़े होकर कुछ अधिकारियों से बात कर रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये वीडियो इसलिए भी अहम है क्योंकि 3 मार्च को सचिन वाजे ने एंटीलिया बम केस को अपने हाथ में लिया और जब हिरेन की मौत का मामला 5 मार्च को उजागर हुआ तब वह रात में अस्पताल में भी पहुँच गया। ऐसे में सवाल उठता है कि वह आखिर अस्पताल में कर क्या रहे थे।

बता दें कि मनसुख हिरेन की मौत की जाँच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) कर रही है। फिलहाल वाजे 25 मार्च तक उन्हीं की हिरासत में है। शुक्रवार की रात एनआईए, एक फॉरेंसिक टीम के साथ मिल कर वाजे को क्राइम सीन पर लेकर गई थी। पुलिस के पास वीडियोज हैं जिसमें वाजे को घटनास्थल के पास जाते देखा जा सकता है।

इससे पहले चूँकि सचिन वाजे के ही एक स्टाफ ने इस बात की पुष्टि की थी कि घटनास्थल पर कि पीपीई किट में नजर आने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि खुद सचिन वाजे ही है। इसलिए NIA ने इन्हीं बिंदुओं पर वाजे को क्राइम सीन पर ले जाकर उसे ओवर साइज कुर्ता पहनवाया, मुँह पर मास्क और सिर पर रुमाल बाँधा ताकि पूरा सीन रीक्रिएट हो सके।

पिछले हफ्ते NIA ने सचिन लाजे के लैपटॉप, कुछ मोबाइल फोन, आईपैड और दस्तावेज कब्जे में लिए थे। गुरुवार को वाजे के घर और कार्यालय से कई कारें बरामद हुईं थीं, जिसके बाद वाजे पर दोबारा शक गहरा गया। NIA ने इसी केस में एक मर्सिडीज कार भी बरामद की थी। कार से 5 लाख रुपए की नकद राशि, कुछ कपड़े और एक कैश काउंटिंग मशीन बरामद हुई थी। इसी मर्सिडीज से वो नंबर प्लेट भी मिली, जो एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियों पर थी।

‘मोदी आया तो आतंकी बनेंगे, बंगाल बनेगा अफगानिस्तान और हम तालिबान’: जुमे की नमाज के बाद लगे भारत विरोधी नारे

बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगाँठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मार्च 2021 को देश की राजधानी ढाका जाने वाले हैं। ऐसे में खबर है कि शुक्रवार (मार्च 19, 2021) को वहाँ के मुस्लिम और कुछ छात्र कार्यकर्ताओं ने उनके इस दौरे के विरोध में प्रदर्शन करते हुए मार्च निकाला है।

जुमा की नमाज के बाद 500 मुस्लिमों ने बैतुल मोकर्रम मस्जिद के बाहर मार्च किया। वीडियो में देख सकते हैं कि बड़ी तादाद में इस्लामी टोपी पहने और बड़ी-बड़ी दाढ़ी रखे लोग सड़कों पर भारत और भारत के प्रधानमंत्री के विरुद्ध नारेबाजी कर रहे हैं। इन सभी के हाथ में चप्पल है और ये माँग कर रहे हैं कि प्रधानमत्री मोदी के ढाका दौरे को निरस्त किया जाए।

दूसरे प्रोटेस्ट में छात्र कार्यकर्ताओं ने ढाका यूनिवर्सिटी के कैंपस के बाहर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों के बैनर पर लिखा था, “गो बैक मोदी” “गो बैक इंडिया” “गो बैक किलर मोदी।”

प्रदर्शनकारियों ने मार्च के दौरान इल्जाम लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी हिंदू नेशनलिस्ट पार्टी भारत में मुस्लिमों को दबा रही है। उन्होंने ये भी इल्जाम लगाए कि आए दिन भारतीय सीमा पर बांग्लादेशी मारे जा रहे हैं। हालाँकि, सच्चाई ये है कि भारतीय सीमा पर गोली सिर्फ़ उन पर चलती है जो या तो तस्करी करते पकड़े जाते हैं या फिर घुसपैठ करते हुए।

हम तालिबानी बन जाएँगे- बांग्लादेशी प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों में से एक मोहम्मद अनवर ने कहा कि भारत की अधीनस्थ हसीना सरकार ने मोदी को आमंत्रित किया है, हम इसका विरोध करने के लिए यहाँ हैं। वहीं बांग्लादेशी हिंदू कार्यकर्ता राजू दास द्वारा शेयर एक अन्य वीडियो में एक मुस्लिम व्यक्ति को कहते सुना सकता है, “अगर नरेंद्र मोदी को बांग्लादेश आने को कहा गया तो हम आतंकी बन जाएँगे। बंगाल बनेगा अफगानिस्तान और हम बनेंगे तालिबान।”

प्रदर्शनकारी कहता है, “हम ओसामा बिन लादेन की हुंकार के साथ उठेंगे। हम किसी भी बाधा को पार कर लेंगे। हम रसूल के फौजी हैं, बम और बुलेट्स से नहीं डरते। बस याद रहे अल्लाह तुम्हारे साथ है। हम ये बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस्लाम, कुरान और देश की खातिर हम साथ में लड़ेंगे।” बता दें कि पूरे प्रदर्शन में ये प्रदर्शनकारी पीएम मोदी को आतंकी बताते हुए सुनाई दिए और तिरंगे पर क्रॉस का निशान लगाए दिखे।

भारत के ख़िलाफ़ पहले भी इस्लामी संगठनों ने किया था विरोध

ऐसा ही नजारा पिछले साल फरवरी में भी बांग्लादेश में देखने को मिला था। ढाका की प्रमुख मस्जिद के बाहर दिल्ली में हुए दंगों के लिए भारत सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुआ था। सैंकड़ों की संख्या में मुस्लिम बैतुल मोकर्रम मस्जिद के बाहर इकट्ठा हुए थे और उन्होंने रैली में शामिल होकर जोर-जोर से पीएम मोदी के विरुद्ध नारेबाजी की थी।

प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि हसीना सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शेख मुजीबुर रहमान की 100वें जन्मदिवस पर न बुलाए। उनका मत था कि ये आमंत्रण 1971 में हुए युद्ध का अपमान है। उस समय मार्च का आयोजन 6 मुस्लिम राजनीतिक समूहों ने किया था। स्थिति ऐसी थी कि भारी तादाद में पुलिस को मौके पर मौजूद रहना पड़ा था।

भारत में रहकर बांग्लादेशी छात्रा कर रही थी भारत विरोधी काम

पिछले साल ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बांग्लादेशी छात्रा को भारत छोड़ने का फरमान सुनाया था। छात्रा पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। अफसरा अनिका मीम नाम की यह छात्रा पश्चिम बंगाल की विश्वभारती विश्वविद्यालय में पढ़ रही थी। छात्रा को कोलकाता में फॉरन रिजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस की तरफ से नोटिस थमाया गया था। उसे 29 फरवरी 2020 तक भारत छोड़ने को कहा गया था।

दरअसल, मीम ने 8 फरवरी को CAA के खिलाफ पश्चिम बंगाल में आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। यह प्रदर्शन बीरभूम जिले में हुआ था और लेफ्ट विंग के छात्रों की तरफ से आयोजित किया गया था। अनिका बांग्लादेश की कुश्तिया जिले की रहनेवाली थी। उसने सीएए विरोधी प्रदर्शनों की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट की थीं। उसने 2018 में विश्वभारती यूनिवर्सिटी के डिजाइनिंग कोर्स में दाखिला लिया था। 

उस पर आरोप था कि साल 2019 में भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को संसद से पास किया था, उसके बाद से वह उसका विरोध कर रही थी। छात्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से सीएए विरोधी प्रदर्शन की तस्वीरें शेयर की थी। बाद में वह पोस्ट काफी वायरल हुआ था और उसकी काफी आलोचना भी हुई थी। इसके बाद छात्रा को फॉरन रिजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस की तरफ से 14 फरवरी को नोटिस थमा दिया गया। उसे 15 दिन का समय दिया गया था।

‘BDO रहते मैंने बिना जाँच-पड़ताल वोटर लिस्ट में जोड़े थे आप सब के नाम’: कॉन्ग्रेस उम्मीदवार का खुलासा, सालों से चल रहा खेल

असम में कॉन्ग्रेस की एक उम्मीदवार ने खुद ही उस आरोप को सिद्ध कर दिया, जो भाजपा उस पर कई वर्षों से लगाती रही है और राज्य में कई लोगों का भी ऐसा मानना है। दरअसल, नगाँव के बटद्रवा विधानसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार सिबमोनी बोरा ने साबित कर दिया कि बिना वेरिफिकेशन के वोटर लिस्ट में कई लोगों का नाम जोड़वाने में सरकारी अधिकारियों ने मदद की है। बोरा पहले BDO रही हैं।

उन्होंने बतौर सरकारी अधिकारी अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि जब वो BDO हुआ करती थीं तो उन्हें चुनावी ड्यूटी भी मिलती थी और उस दौरान वो बिना किसी वेरिफिकेशन के लोगों को वोट डालने के लिए अंदर भेज देती थीं। उन्होंने कहा, “इस तरह मैं क्षेत्र के लोगों की सेवा राजनीति जॉइन करने से पहले से ही करती आ रही हूँ, जब मैं सरकारी अधिकारी थी।” बता दें कि असम में लगातार 15 वर्ष कॉन्ग्रेस की सरकार थी।

सर्वानंद सोनवाल के मुख्यमंत्री बनने से पहले दिवंगत कॉन्ग्रेस नेता तरुण गोगोई ने वहाँ हैट्रिक लगाई थी। एक न्यूज़ चैनल द्वारा शेयर किए गए वीडियो में सिबमोनी बोरा को कहते हुए सुना जा सकता है, “मैं और मेरे पिता जनता के लिए वर्षों से काम कर रहे हैं। मैं दावा कर सकती हूँ कि आप में से अधिकतर को मेरे कारण वोट डालने का अधिकार मिला। जब मैं यहाँ BDO थीं तो वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन/अपडेट के लिए कई बार सुनवाई हुई।”

उन्होंने आगे कहा, “तब मैं बिना किसी के घर गए या जाँच-पड़ताल किए ही सभी आवेदनों को स्वीकार कर लेती थी और वोटर लिस्ट को अपडेट कर देती थी। जो यहाँ आज वोट देने आएँगे, उन्हें मैंने इस लायक बनाया है। अगर मैंने उस वक़्त ऐसा नहीं किया होता तो आप सभी के मताधिकार छिन गए होते।” उन्होंने कहा कि ऐसे वोटरों को अब डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनेगी।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार ने अपने भाषण में खुद खोली अपनी पार्टी की पोल

उन्होंने रैली में आए लोगों को डराया कि अगर कॉन्ग्रेस-AIDUF सरकार सत्ता में नहीं आती है तो उन सभी को अपने मताधिकार से वंचित होना पड़ेगा। बता दें कि असम में वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए अधिकारियों की मौजूदगी में सार्वजनिक सुनवाई होती है, जिसमें साबित करना होता है कि उक्त नागरिक मतदाता है और अवैध घुसपैठिया नहीं। चुनाव आयोग इसके लिए राज्य के ही सरकारी अधिकारियों की मदद लेता है।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के इस बयान से साफ़ हो गया है कि अधिकारियों की मदद से अवैध घुसपैठियों को भी मताधिकार देने का खेल लंबे समय से चल रहा है। सिबमोनी का मुकाबला भाजपा नेत्री और असम सिनेमा की पूर्व अभिनेत्री अंगूरलता डेका से है, जो वहाँ की वर्तमान विधायक हैं। बटद्वारा असम में वैष्णव संप्रदाय के जनक शंकरदेव की जन्मस्थली है। बांग्लादेश से बड़ी संख्या में घुसपैठिए यहाँ आकर बसे हुए हैं।

असम में भाजपा को सत्ता में न लौटने देने के लिए कॉन्ग्रेस CAA और NRC के मुद्दे उछाल रही है। असम में 27 मार्च से 6 अप्रैल तक होने वाले 15वें विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ को भी हथियार बनाया है। पार्टी ने ‘CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर असम पुलिस द्वारा गोली चलाने’ का वीडियो शेयर किया, लेकिन वो 2017 का वीडियो निकला जो झारखंड पुलिस का मॉक-ड्रिल था।

MP में महिला ने बलात्कार का प्रयास कर रहे आरोपित का हँसिया से काटा गुप्तांग, दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

मध्यप्रदेश के सीधी जिले में एक 45 साल की महिला ने एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति के गुप्तांग को काट डाला। कथिततौर पर वह व्यक्ति महिला का रेप करने के इरादे से उसके घर में घुसा था। 

पूरा मामला गुरुवार (मार्च 18, 2021) को रात 11 बजे का है। उमरिया गाँव में महिला अपने घर पर अपने 13 साल के बच्चे के साथ अकेली थी। उसका पति काम से बाहर गया हुआ था। तभी आरोपित आया और जबरदस्ती करने लगा। बेटे को लगा कोई चोर है तो वह खुद को बचाने के लिए घर से बाहर निकल गया।

पुलिस के मुताबिक, महिला ने करीब 20 मिनट तक खुद को छुड़ाने का प्रयास किया। मगर जब आरोपित उसके ऊपर से नहीं हटा तो महिला ने खाट के नीचे से एक हँसिया निकाली और उसका गुप्तांग काट डाला।

सीधी जिले के खड्डी पुलिस चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह राजपूत ने शनिवार को महिला की शिकायत के हवाले से बताया कि गुरुवार को रात को 11 बजे रमेश साकेत (45) महिला के घर में जबरदस्ती घुस गया और महिला के साथ कथित रूप से जोर जबरदस्ती करने लगा और जब महिला ने विरोध किया तो वह मारपीट पर उतारू हो गया।

इसके बाद खुद को छुड़ाकर महिला पुलिस के पास पहुँची और शुक्रवार रात 1:30 बजे इस संबंध में शिकायत करवाई। पुलिस ने फौरन आरोपित को अस्पताल पहुँचाया। वहाँ से उसे संजय गाँधी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया और आगे के ईलाज के लिए उसे रेवा जिले के अस्पताल में भेज दिया गया।

पुलिस ने आरोपित के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 354, 456, 294, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया। वहीं आरोपित ने भी महिला के ख़िलाफ़ शिकायत लिखवाई। शिकायत के आधार पर महिला के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 327 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ।

बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि आरोपित व्यक्ति को महिला ने ही अपने घर में साँप मारने के लिए बुलाया था। जहाँ महिला और उसके बेटों ने मारपिटाई करके उसका गुप्तांग काट दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक गुप्तांग के रीट्रांसप्लान्ट की संभावना से इंकार किया जा रहा है। उसकी उम्र 48 साल की है। वह सेमरिया जिले के सीधी का रहनेे वाला है।

कितनी पीढ़ियों तक जारी रहेगा शिक्षा और नौकरी में आरक्षण? सुप्रीम कोर्ट ने मराठा रिजर्वेशन पर सुनवाई के दौरान पूछा

शिक्षा और नौकरी में कितनी पीढ़ियों तक आरक्षण जारी रहेगा? इस सवाल का जवाब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने मराठा रिजर्वेशन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान जानना चाहा। 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने शुक्रवार (मार्च 19, 2021) को इस पर सुनवाई की।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि आरक्षण पर कैपिंग रखने के मंडल कमेटी के फैसले पर दोबारा विचार करने की ज़रूरत है। इस दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि कितनी पीढ़ियों तक शिक्षा और नौकरी में ये आरक्षण जारी रहेगा। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि यदि 50% आरक्षण हटा दिया जाए तो संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मिलने वाला समानता का अधिकार तो प्रभावित नहीं होगा।

बता दें कि 5 जजों की संवैधानिक पीठ में न्यायाधीश अशोक भूषण, एल नागेश्वर राव, एस अब्दुल नजीर, हेमंत गुप्ता और एस.रवीन्द्र भट्ट शामिल हैं। ये पीठ महाराष्ट्र राज्य आरक्षण अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसके तहत मराठा के लिए 16% आरक्षण किया गया था।

मंडल फैसले पर दोबारा विचार हो: मुकुल रोहतगी

अदालत में आरक्षण कानून के पक्ष में बहस करते हुए रोहतगी ने मंडल जजमेंट के कई आयामों पर बात की। उन्होंने कहा कि 10% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण देने वाले केंद्र सरकार के फैसले ने 50% कैप को भंग कर दिया। उन्होंने कहा कि कई कारणों से मंडल कमेटी के फैसले पर दोबारा से गौर करने की जरूरत है, जिसे 1931 की जनगणना पर आधारित तैयार किया गया था, लेकिन आज जनसंख्या 135 करोड़ पहुँच गई है।

कोर्ट ने रोहतगी की दलीलों पर सवाल पूछा, “अगर आरक्षण पर कोई कैप नहीं रहेगी, तो समानता की कोई बात ही नहीं रह जाएगी। घूम-फिरकर फिर उसी चीज से निपटना होगा। इससे जो नई असमानता पैदा होगी, उस पर आपका क्या कहना है? हम इसे (आरक्षण को) आखिर कितनी पीढ़ियों तक जारी रखने वाले हैं?”

पीठ ने यह भी कहा कि आजादी के 70 साल बीत चुके हैं, और राज्यों को कई लाभकारी योजनाएँ चल रही हैं, और ‘क्या हम स्वीकार कर सकते हैं कि कोई विकास नहीं हुआ है, कोई भी पिछड़ी जाति आगे नहीं बढ़ी है?’

इस पर रोहतगी ने कहा, “हम बिल्कुल आगे बढ़े हैं। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि देश में आज पिछड़ी श्रेणियों की संख्या 50 से घटकर 20 फीसदी हो गई है। मैं ये नहीं कह रहा कि पिछले नियम ख़राब थे। मैं बस ये कह रहा कि देश की आबादी काफी बढ़ चुकी है और मुमकिन है कि पिछड़े वर्ग की आबादी भी बढ़ गई। इसलिए आरक्षण के नियमों पर दोबारा विचार की ज़रूरत है।”

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने 8 मार्च को भी सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी करके पूछा था कि क्या आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी से ज़्यादा बढ़ाया जाना चाहिए? इसका मकसद दो सवालों के जवाब तलाशने हैं। पहला, क्या इंद्रा साहनी जजमेंट (मंडल कमीशन केस) पर पुनर्विचार की जरूरत है? 1992 के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50% तय की थी। दूसरा, क्या 102वाँ संवैधानिक संशोधन राज्यों की विधायी क्षमता को प्रभावित करता है। यानी, क्या राज्य अपनी तरफ से किसी वर्ग को पिछड़ा घोषित कर आरक्षण दे सकते हैं या 102वें संशोधन के तहत अब यह अधिकार केवल संसद को है?

क्या है मराठा आरक्षण विवाद?

साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने पढ़ाई और नौकरी में मराठा आरक्षण को 16% कर दिया था। 2019 में बॉम्बे उच्च-न्यायालय ने मराठा आरक्षण को बरकरार रखा, लेकिन आरक्षण को घटा कर नौकरी में 13 प्रतिशत और उच्च शिक्षा में 12 प्रतिशत कर दिया।बॉम्बे हाईकोर्ट की याचिका को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यह आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले में दिए गए फैसले का उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि मराठा आरक्षण 2020-21 में लागू नहीं होगा। 

दत्‍तात्रेय होसबोले बने RSS के सरकार्यवाह, जानिए उनके बारे में सब कुछ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में दत्‍तात्रेय होसबोले को राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ का सरकार्यवाह चुना गया है। अब दत्‍तात्रेय होसबोले, भैय्याजी जोशी की जगह लेंगे। बता दें कि 73 वर्षीय भैय्याजी जोशी 3-3 वर्षों के लिए 4 बार सरकार्यवाह रहे हैं। वहीं होसबोले 2009 से संघ के सह सरकार्यवाह थे।

आरएसएस के नए सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का यह चुनाव बेंगलुरु के चेन्नहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में चल रही प्रतिनिधि सभा में शनिवार (मार्च 20, 2021) को हुआ। बता दें कि आज इस बैठक का आखिरी दिन है। संघ की प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से अगले तीन साल के लिए दत्तात्रेय को सरकार्यवाह चुना है।

आरएसएस ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी, “बेंगलुरु: आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) ने श्री दत्तात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह चुन लिया। वह 2009 से ही आरएसएस के सह- सरकार्यवाह थे।”

गौरतलब है कि आरएएसस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने बताया कि भैय्याजी जोशी ने इच्‍छा प्रकट की थी कि वह 12 सालों से इस दायित्‍व को सँभाल रहे हैं और अब ये जिम्‍मेदारी किसी युवा को दी जानी चाहिए। उन्‍होंने उम्र की वजह से ये निर्णय लिया है। हालाँकि उनका स्‍वास्‍थ्‍य बिल्‍कुल ठीक है। जिस पर निर्णय लेते हुए दत्‍तात्रेय होसबोले को तीन वर्षों के लिए सर्वसम्‍मति से चुना गया है और अब वह संघ में नंबर दो के पद पर पहुँच गए हैं।

संघ में ऐसे होता है चुनाव

संघ में हर तीन साल बाद जिला संघचालक, विभाग संघचालक, प्रांत संघचालक और क्षेत्र संघचालक के साथ-साथ सरकार्यवाह का चुनाव होता है। हालाँकि, आवश्यकतानुसार बीच में भी कुछ पदों पर जरुरत होने पर बदलाव होता रहता है। क्षेत्र प्रचारक और प्रांत प्रचारकों के दायित्व में बदलाव भी प्रतिनिधि सभा की बैठक में होता है। बता दें कि संघ में प्रतिनिधि सभा निर्णय लेने वाला सर्वोच्च विभाग है।

बता दें कि एबीपीएस की वार्षिक बैठक अलग-अलग स्थानों पर होती है लेकिन हर तीसरे वर्ष यह नागपुर स्थित आरएसएस के मुख्यालय में होती है जहाँ सरकार्यवाह का चुनाव होता है। बहरहाल, महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस वर्ष इसे बेंगलुरु में स्थानांतरित कर दिया गया है।

कौन हैं दत्तात्रेय होसबोले

अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक 66 वर्षीय दत्तात्रेय होसबोले कर्नाटक के शिवमोगा जिले से आते हैं। वह साल 1968 में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से जुड़े थे। आपातकाल के समय दत्‍तात्रेय होसबोले ने गिरफ्तारी भी दी थी। असम में यूथ डेवलपमेंट सेंटर को विकसित करने में उन्‍होंने महत्‍वपूर्ण भूमिका भी निभाई है। शुरू में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) के साथ जुड़े जो आरएसएस की छात्र शाखा है।

13 वर्ष की उम्र में संघ से जुड़ाव

जानकारी के मुताबिक, दत्तात्रेय होसबोले का जन्म एक दिसंबर 1954 को हुआ। दत्तात्रेय 1968 में 13 वर्ष की आयु में संघ के स्वयंसेवक बने और 1972 में संघ की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। अगले 15 वर्षों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री रहे। 1978 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक सदस्य बने और 1990 में प्रचारक की जिम्मेदारी सँभाली। दत्तात्रेय होसबोले विद्यार्थी परिषद में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय महामंत्री के साथ-साथ अखिल भारतीय संगठन मंत्री भी रह चुके हैं। पहले वह संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख रहे और उसके बाद सह सरकार्यवाह का दायित्व सँभाला।

जेपी आंदोलन में गए जेल

इंदिरा गाँधी के दौर में हुए 1975-77 के जेपी आन्दोलन में भी वे सक्रिय थे और लगभग पौने दो वर्ष ‘मीसा’ के अंतर्गत जेल मे भी रहे। जेल से उन्होंने दो पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। विद्यार्थी परिषद के अलग-अलग पदों पर रहते हुए पूर्वोत्तर से दक्षिण तक काम किया।

वह संघ के ऐसे तेजतर्रार प्रचारक हैं, जो कन्नड़, तमिल, हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में धाराप्रवाह बोलते हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने इंदिरा गाँधी सरकार में देश पर थोपे गए आपातकाल का तीखा विरोध किया था।