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त्रिवेंद्र सिंह रावत नहीं रहेंगे उत्तराखंड के CM? BJP आलाकमान में मंथन का दौर जारी, मीडिया में अटकलों का बाजार गर्म

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर कुछ दिनों से भाजपा में उहापोह की स्थिति बनी हुई थी क्योंकि कुछ विधायकों के उनसे नाराज़ होने की खबरें सामने आई थीं। खबरों में कहा जा रहा था कि भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी या मंत्री सतपाल महाराज में से किसी एक को उनकी जगह लेने के लिए चुना जा सकता है। अब संभावना जताई जा रही है कि भाजपा आलाकमान ने उन्हें हटाने का फैसला लिया है।

उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम से जब इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “क्यों नहीं रहेंगे वो (रावत) मुख्यमंत्री? क्या कारण है जो हटाए जाएँगे? वो एक अच्छे मुख्यमंत्री हैं। भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है उन पर। वो हैं मुख्यमंत्री अभी। अच्छा कार्य किया है उन्होंने। केंद्र की सभी योजनाओं को उन्होंने निचले स्तर तक पहुँचाया है। आयुष्मान भारत कार्ड उत्तरखंड में हर व्यक्ति को मिला हुआ है।”

उन्होंने कहा कि सीएम रावत के कार्यकाल में मात्र 1 रुपए में पानी का कनेक्शन दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार्यशैली पर प्रश्न उठाना ठीक नहीं है। वहीं ABP न्यूज़ के विकास भदौरिया ने दावा किया कि उतराखंड पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर पार्टी ने सीएम त्रिवेंद्र रावत को मुख्यमंत्री से हटाने का फ़ैसला किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पर्लियामेंट्री बोर्ड की मुहर लगेगी और विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए विधायक दल की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।

इस मामले में संसद भवन में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री के साथ संगठन महासचिव बीएल संतोष की पर्यवेक्षक डॉ. रमन सिंह और प्रभारी दुष्यंत गौतम की रिपोर्ट पर मैराथन बैठक हुई। वहीं कुछ ख़बरों में ये भी कहा जा रहा था कि उन्हें नहीं हटाया जाएगा और मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए मामले को सुलझाया जाएगा। ‘अमर उजाला’ की खबर में कहा गया था कि राज्य में राजपूत-ब्राह्मण संतुलन और विधानसभा चुनाव से पहले नए चहेरे के खतरे के आकलन के बाद ही फैसला होगा।

उत्तराखंड हाल ही में प्रकृति के एक बड़े प्रकोप से उबरा है, जो भीषण आपदा का रूप ले सकती थी। इसमें 200 से अधिक लोग मारे गए। हालाँकि, उस दौरान सीएम रावत खुद घटनास्थल का दौरा कर के स्थिति की समीक्षा करते हुए चौकस दिखे थे।

‘भारतीय सेना रेप करती है’: DU में आपत्तिजनक पोस्टर, विरोध करने पर ABVP छात्रा के कपड़े फाड़े

दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस में भारतीय सेना पर अपमानजनक टिप्पणी का मामला सामने आया है। इस पर ABVP ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए शिकायत भी दायर की है। संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ पूर्व छात्रों और बाहरी लोगों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ‘भारतीय सेना हमारा रेप करती है’ लिखे पोस्टर्स लहराए गए। ABVP ने बिना अनुमति आयोजित इस कार्यक्रम का विरोध किया है।

जब ये सब हो रहा था, तब DU छात्र संघ की जॉइंट सेक्रेटरी शिवांगी खड़वाल वहाँ से गुजर रही थीं। तभी उस कार्यक्रम के कार्यकर्ताओं द्वारा आपत्तिजनक नारे लगाए गए। भारतीय सेना विरोधी पोस्टर को देख कर जब शिवांगी खड़वाल ने आयोजकों से इस कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में पूछा तो जवाब में वहाँ पर उपस्थित कार्यक्रम के लोगों ने शिवांगी और उनके साथियों पर हमला कर दिया। इस हमले के बाद छात्र और बाहरी लोगों के बीच बुरी तरह से हाथापाई हुई।

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने शिवांगी को बधाई देते हुए कहा कि ये पोस्टर देख कर वो वहाँ घुस गईं और अकेले भीड़ में घुस के उस पोस्टर को उखाड़ फेंका। शिवांगी ने दिल्ली पुलिस के समक्ष दायर की गई शिकायत में कहा है कि भारतीय सेना के अपमान वाले पोस्टर का विरोध करने पर उन्हें धक्का मारा गया और उनके कपड़े फाड़ डाले गए। शिकायत में भारतीय सेना को ‘बलात्कारी’ कहे जाने के आरोप भी लगाए गए।

बताया जा रहा है कि उक्त कार्यक्रम ‘भगत सिंह छात्र एकता मंच’ नामक संस्था द्वारा आयोजित किया गया था। ABVP ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें उक्त कार्यक्रम में एक वक्ता कह रही होती हैं, “जब पुलिस आपका रेप करती है, भारतीय सेना आपका रेप करती है, फिर आप अपनी फरियाद लेकर जिस कोर्ट में जाते हो, वहाँ भी लोग बिके हुए होते हैं।” एक ही वाक्य में पुलिस, सेना और जजों को लपेट लिया गया।

ABVP ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ ऐसे कार्यक्रमों का पुरजोर विरोध करता है, जिसे बिना किसी अनुमति के आयोजित किया जाता है तथा जिसमें सेना के विरुद्ध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता हो। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से ऐसे कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की माँग की, जिन्होंने महिला दिवस के शुभ अवसर पर सेना की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया।”

मौलवियों, NGO, नेताओं की मिलीभगत से जम्मू में बसाए गए रोहिंग्या: डेमोग्राफी बदलने की साजिश, मदरसों-मस्जिदों में पनाह

म्यांमार की न तो सीमा जम्मू कश्मीर से लगी हुई है और न ही दोनों संस्कृतियों के बीच कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध है, फिर भी प्रदेश में रोहिंग्या मुस्लिमों की संख्या इतनी कैसे हुई? हजारों की तादाद में रोहिंग्या मुस्लिमों का यहाँ पहुँच कर बस जाना किसी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। असल में इससे पहले भी देश में एक खास मजहब के कट्टर लोगों द्वारा ‘डेमोग्राफी बदलने’, अर्थात जनसंख्या में दबदबा बढ़ाने की साजिश की बात होती रही है।

‘दैनिक जागरण’ की एक विस्तृत खबर के अनुसार, इस साजिश में राजनीतिक लोगों के साथ-साथ कई NGO भी शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे इतना सब कुछ अंजाम दिया गया। बांग्लादेश के रास्ते रोहिंग्या मुस्लिमों की खेप कोलकाता पहुँचती रही है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड की सीमाएँ सीधे म्यांमार से लगती हैं। पता चला है कि उन्हें मालदा लाकर वहाँ से जम्मू भेजा जा रहा था।

इन सब चीजों के तार दिल्ली से भी जुड़ते हैं, जहाँ संयुक्त राष्ट्र से सम्बद्ध संस्था द्वारा इन रोहिंग्या मुस्लिमों का पंजीकरण किया जाता है। ये संस्थाएँ ‘शरणार्थियों की मदद’ के नाम पर दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सक्रिय रहती हैं। इन तत्वों द्वारा रोहिंग्या मुस्लिमों को विश्वास दिलाया जाता है कि जम्मू कश्मीर एक मुस्लिम बहुल इलाका है, जहाँ उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी। वहाँ उन्हें इस्लाम प्रैक्टिस करने से कोई नहीं रोकेगा।

ये NGO और इस्लामी संस्थाएँ रोहिंग्या मुस्लिमों को जम्मू पहुँचाती थीं और उनकी यात्रा से लेकर रहने और खाने-पीने तक की व्यवस्था का पूरा जिम्मा उठाती थीं। जम्मू, सांबा और बाड़ी ब्राह्मणा में इनके लोग पहले से मौजूद रहते थे, जो मस्जिदों और मदरसों में इनके रहने का बंदोबस्त करते थे। फिर उन्हें झुग्गियों में बसा दिया जाता था। खास बात ये है कि उन्हें उन्हीं क्षेत्रों में बसाया जा रहा था, जहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या कम है।

साथ ही उन्हें जम्मू कश्मीर में चल रहे ‘जिहाद’ और म्यांमार में ‘बौद्धों के अत्याचार’ को जोड़ कर और कट्टर बनाया जाता है। उनसे कट्टर बातें कर के जिहादी तत्वों के लिए काम करने के लिए तैयार किया जाता था। पाकिस्तान के साथ जम्मू कश्मीर के सटे होने का उन्हें दोहरा फायदा मिलता था। उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और बांग्लादेश के मुस्लिम जम्मू में पहले से बसे हुए हैं, इसीलिए किसी को शक नहीं होता था।

जब भी इस पर कोई आवाज़ उठती थी तो इनकी मददगार संस्थाएँ उन्हें पीड़ित बताते हुए अपने खेल शुरू कर देती थीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, अवामी इत्तेहाद पार्टी और कॉन्ग्रेस ने रोहिंग्या मुस्लिमों को अपने वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। भले ही उन्हें वोट का अधिकार न हो, लेकिन उन्हें संरक्षण देकर मुस्लिम समाज को खुश किया जाता था और उनके खिलाफ कार्रवाई न कर के तुष्टिकरण की राजनीति की जाती थी।

जम्मू कश्मीर की अंतिम मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपने कार्यकाल में कहा था कि रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर केंद्र सरकार ही निर्णय ले सकती है। जमात-ए-इस्लामी कश्मीर जैसे कई संगठन इनके लिए काम कर रहे हैं और उनके नाम पर जुलूस निकालते रहे हैं, क्षेत्र में तनाव का माहौल बनाते रहे हैं। ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के एक गुट के अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने रोहिंग्या के लिए कश्मीर में सांत्वना दिवस का भी आयोजन किया था।

कुछ वर्षों पहले म्यांमारी आतंकी छोटा बर्मी को सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI भी जम्मू कश्मीर के ‘जिहादियों’ और म्यांमार के ‘रोहिंग्याओं’ के बीच सेतु का काम कर रही है। कोलकाता के मौलवी भी उन्हें जम्मू पहुँचाने में मदद करते हैं। जम्मू कश्मीर में उन्हें रोजगार भी आसानी से मिल जाता है। कई रोहिंग्याओं का कहना है कि वो बिना किसी जाँच के ट्रेन से यहाँ आराम से पहुँच जाते हैं।

आँकड़े कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में कुल 13600 विदेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की है। जम्मू के बेली चराना और सांबा में भी इनकी बड़ी संख्या है। ड्रग्स रैकेट और आतंकी हमलों में इनका नाम सामने आता रहता है। जम्मू के बठिंडी में रोहिंग्याओं की संख्या बहुत ज्यादा है। अब वो स्थानीय आबादी में मिल गए हैं, जिससे उनकी पहचान खासी मुश्किल हो रही है।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर में 155 ऐसे रोहिंग्या मिले थे, जो म्यांमार में अपनी सज़ा से बच कर यहाँ रह रहे थे। उन सभी को ‘होल्डिंग सेंटर’ भेज दिया गया है। पुलिस ने फॉरेनर्स एक्ट के अनुच्छेद-3(2)e के तहत ये कार्रवाई की। साथ ही पासपोर्ट एक्ट के अनुच्छेद-3 के तहत प्रवासियों के पास पुष्ट ट्रैवल दस्तावेज होने चाहिए, जो उनके पास नहीं थे। ऐसे अन्य अवैध घुसपैठियों की पहचान करने की कोशिशें भी जारी हैं। 

Women’s Day पर महिला कॉन्ग्रेस नेता से अभद्रता, बुलाया था सम्मान के लिए: अल्पसंख्यक अध्यक्ष शाहनवाज आरोपी

कॉन्ग्रेस पार्टी ने यूँ तो महिला दिवस के मौके पर सोमवार (मार्च 8, 2021) को महिलाओं के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया, लेकिन विडंबना ये देखिए कि उसी कार्यक्रम में पार्टी की एक महिला नेता का अपमान हुआ। लखनऊ में ये घटना तब हुई, जब कॉन्ग्रेस पार्टी ने शहर भर की महिलाओं को सम्मान देने के लिए बुला लिया। अभद्रता का आरोप अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष शाहनवाज आलम पर लगा है।

इस बारे में पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गाँधी के पास लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई है। पूर्व प्रदेश प्रवक्ता सदफ जाफर ने आरोप लगाया है कि उनके साथ अभद्रता कर के उन्हें मंच से उतार दिया गया। ये मामला तब सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में पार्टी अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों में जोर-शोर से जुटी हुई है। इसी क्रम में महिलाओं को मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

उक्त कार्यक्रम में मुख्य इकाई के अलावा अल्पसंख्यक विभाग ने अपनी रणनीति के तहत 100 अल्पसंख्यक श्रमजीवी महिलाओं को आमंत्रित किया था। मंच पर आसीन वक्तागण महिलाओं को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे। ऐसे में सदर जाफ़र जैसे ही आकर मंच पर बैठीं, शाहनवाज आलम आक्रोशित हो गए और उन्होंने उन्हें नीचे उतार दिया। उनके साथ सबके सामने अभद्रता की गई। ये सब कुछ प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की मौजूदगी में हुआ।

हालाँकि, किसी भी वरिष्ठ नेता ने तब हस्तक्षेप करने की जहमत नहीं उठाई। पार्टी आलाकमान ने महिलाओं के सम्मान की बात करते हुए लिखित शिकायत के जवाब में कहा है कि कार्रवाई की जाएगी। वहीं आलम का कहना है कि ये सब व्यवस्था के तहत किया गया और किसी के साथ अभद्रता नहीं हुई। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यक्रम में इस तरह की हरकत के बाद पार्टी की किरकिरी हुई है।

‘क्या मदर टेरेसा जैसे इस्लाम न मानने वाले लोग जहन्नुम जाएँगे?’: भगोड़े जाकिर नाइक का मजेदार जवाब ला सकता है पेट में मरोड़

भगोड़े इस्लामवादी और घृणास्पद उपदेशक जाकिर नाइक ने दावा किया कि ईसाई धर्म प्रचारक मदर टेरेसा गैर-मुस्लिम होने के कारण जहन्नुम में जाएँगी।

यह पूछे जाने पर कि क्या मदर टेरेसा जैसे ‘धर्मी’ और ‘अच्छे’ लोगों को गैर-मुस्लिम होने के बावजूद वो जहन्नुम में जाएँगी, उन्होंने जवाब में कहा, “जन्नत (स्वर्ग) जाने के चार रास्ते हैं। समय के टोकन से, जो धर्मी हैं, जो दावा (Dawah) करते हैं और जो लोगों को धैर्य और दृढ़ता के लिए प्रेरित करते हैं। जन्नत जाने के लिए न्यूनतम चार मानदंड आवश्यक हैं।”

ज़ाकिर नाइक ने 10 वीं कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों से ‘जन्नत के चार चरणों’ की तुलना की। उसने इस बात पर जोर दिया कि भले ही किसी को 5 विषयों में 99 अंक मिले हों और सिर्फ एक विषय में 10 अंक हासिल करने में सफल रहा हो, तो, इसका अर्थ यह होगा कि छात्र असफल हो गया है। अपने तर्कहीन तर्क को जारी रखते हुए, नाइक ने दावा किया कि जन्नत सभी चार चरणों के सफल समापन पर ही प्राप्त किया जा सकता है।

(Video Courtesy: Youtube/Zakir Naik)

उन्होंने कहा, “मान लीजिए कि मदर टेरेसा धर्मी थीं। इस्लाम में, धर्मी लोगों में बहुत सी चीजें शामिल हैं जो मुझे विश्वास है कि मदर टेरेसा के पास नहीं थी। ईमान (इस्लाम में आस्था) के बारे में क्या? अगर वह शिर्क (इस्लाम के अलावा किसी भी मजहब का पालन करता है तो यह प्रतिबंधित है)” उन्होंने कहा कि शिर्क करना इस्लाम और ईसाई धर्म के अनुसार एक अपराध है। नाइक ने अपने सामान्य अंदाज में बुक ऑफ ड्युटेरोनॉमी, बुक ऑफ एक्सोडस और सूरह अल मदीह का हवाला दिया।

घृणा फैलाने वाले इस्लामी उपदेशक ने दावा किया कि वे सभी जो ईसा मसीह (मरियम के पुत्र) को ‘अल्लाह’ मानते हैं, वह उसके लिए जन्नत को ‘हराम’ बना देगा। जाकिर नाइक ने इस्लाम का हवाला देते हुए कहा, “आग (जहन्नुम) उसके रहने की जगह होगी और उसके बाद उसकी कोई मदद नहीं की जाएगी।” इसके बाद उसने निष्कर्ष निकाला कि मदर टेरेसा ने यीशु मसीह को भगवान के रूप में माना और इस प्रकार उसे ‘अल्लाह’ के बराबर रखा। इसलिए, कुरान के अनुसार, अगर कोई शिर्क करता है, तो वह मदर टेरेसा हो या कोई और हो, वे जन्नत नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों जाकिर नाइक का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसे यह कहते हुए सुना गया था कि मैरी क्रिसमस कहना हराम है, इसके लिए जहन्नूम में जाना होगा। वीडियो में कट्टरपंथी जाकिर कहता है, “अपने उद्देश्य तक पहुँचने के लिए तुम गलत ज़रिया नहीं चुन सकते हो। जो उनके लिए हराम है वह तुम्हारे लिए भी हराम है। जब तुम किसी को मैरी क्रिसमस कहते हुए इसकी बधाई देते हो तो इसका मतलब है कि तुम स्वीकार कर रहे हो कि वो (जीसस) भगवान की संतान है और ऐसा करना शिर्क (पाप) है। ऐसा इसलिए क्योंकि वहाँ के लोग मानते हैं कि जीसस क्राइस्ट भगवान की संतान हैं। चाहे वह ईसाई धर्म से जुड़ी प्रक्रियाओं का हिस्सा हों या नहीं, वो लोग इसलिए ख़ुशी मनाते हैं क्योंकि यह जीसस का जन्मदिन है।”

वीडियो: 16 राज्यों की 1000 महिलाओं ने अस्सी घाट पर किया शिव तांडव स्तोत्र का पाठ, अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर भव्य आयोजन

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर काशी में अस्‍सी घाट पर देश भर से 1000 नारी शक्ति की जुटान एक अनोखे आयोजन के लिए हुई। इससे पूर्व गंगा नदी के तट पर शिव तांडव स्तोत्र के लयबद्ध आयोजन के लिए देश के 16 राज्यों से 1000 महिलाएँ काशी पहुँच कर तैयारियों में जुटी रहीं।

मुंबई की संस्था फाउंडेशन फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट इन एकेडमिक फील्ड की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अस्सी घाट पर इसका आयोजन किया गया। महिलाओं और युवतियों ने वाराणसी में ‘शिव तांडव स्तोत्र’ पाठ के दौरान कोरोना की गाइडलाइन्स का पालन भी किया।

सोमवार (मार्च 8, 2021) को अस्सी घाट पर गंगा आरती के पूर्व शुभ मुहूर्त में एक साथ हजार महिलाओं के स्‍वर जाह्नवी तट पर गूँजी तो आस्‍था के स्‍वर से भगवान शिव की नगरी काशी गुंजायमान हो उठी। हर हर महादेव के उद्घोष के साथ शुरू हुए आयोजन में लाल रंग के परिधान में सजी महिलाओं और युवतियों ने एक साथ शिव स्तोत्र का पाठ ढलते सूर्य के साथ शुरू किया तो वातावरण धर्म और आध्‍यात्‍म से एकाकार नजर आया। हाथों में गंगा और शिव आरती के लिए बाती जल उठी और शिव स्‍तुति का आयोजन शुरू हुआ तो घंट घडियालों से भी गंगा तट गूँज उठा। 

आयोजन में दूर दराज से शामिल होने आए लोगों के लिए यह आयोजन जहाँ अनोखा अनुभव रहा वहीं इंटरनेट मीडिया में भी आयोजन के स्‍वर गूँजे और झंकृत होते नजर आए। हर-हर महादेव का उद्घोष और बाबा की स्‍तुति में शिव तांडव का यह अद्भुत और अनोखा आयोजन काशी के लिए भी किसी अनूठे उत्‍सव सरीखा ही नजर आया। शिव तांडव स्तोत्र के पाठ के साथ ही घाटों पर गंगा आरती का भी आयोजन शुरू हुआ तो जाह्नवी के तट पर दीयों की रोशनी से गंगा तट भी मानों रोशनी से नहाया नजर आने लगा। जैसे-जैसे शाम होने लगी आयोजन में शामिल होने के लिए लोगों की भी घाट पर भारी जुटान शुरू हो गई।  

‘सोनिया जी रोई या नहीं? आवास में तो मातम पसरा होगा’: बाटला हाउस केस में फैसले के बाद ट्रोल हुए सलमान खुर्शीद

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 2008 के बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में शामिल आतंकी आरिज खान को दोषी करार दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरिज उर्फ जुनैद के मौका-ए-वारदात पर मौजूद होने को साबित करने में सफल रहा। दोषी की सजा पर फैसले के लिए अदालत ने 15 मार्च की तारीख तय की है।

अदालत के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद का पुराना बयान शेयर किए जाने लगा। साथ ही लोग आरिज खान के दोषी होने पर कॉन्ग्रेसी नेता को ट्रोल करने लगे। उस समय सलमान खुर्शीद ने कहा था कि बाटला हाउस की तस्वीरें देख सोनिया गाँधी की आँखों में आँसू आ गए थे।

पूर्व सैनिक और बीजेपी के सदस्य मेजर सुरेंद्र पुनिया ने ट्विटर पर लिखा, “बाटला हाउस एनकाउंटर वाले आतंकवादी आरिज खान को आज कोर्ट ने दोषी करार दे दिया। यह खबर सुनकर मैडम सोनिया जी रोई या नहीं? कोई बता सकता है क्या? जो दो आतंकवादी उस मुठभेड़ में मारे गए थे उनकी मौत पर मैडम के आँसू नहीं रूके थे यह बात उन्हीं के ख़ास सलमान ख़ुर्शीद साहब ने कही थी।”

वहीं नीलंबर पाठक ने लिखा, “सोनिया गाँधी, दिग्वियजय सिंह, सलमान खुर्शीद, अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों जिन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर को फेक बताया था, इस फैसले के बाद पुलिसवालों के परिवार व पूरे देश से माफी माँगेंगे।”

एक अन्य यूजर हर्षवर्धन त्रिपाठी ने ट्विटर पर लिखा, “मुझे लगा कि आज सोनिया गाँधी भला किस वजह से ट्रेंड में हैं तो पता चला कि सलमान ख़ुर्शीद के मुताबिक़, सोनिया गाँधी जिस वजह से रोईं थीं, वही आज सच हो गई। इंडियन मुजाहिदीन का आतंकवादी आरिज खान 2008 में बाटला हाउस एनकाउंटर में पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या दोषी पाया गया। अब सोनिया जी?”

हंसमुख शाह नाम के व्यक्ति ने ट्वीट करते हुए लिखा, “बाटला हाउस का आतंकी आरिज, दोषी करार दिया गया है, जिसके कारण सोनिया गाँधी छाती पीटकर फूट-फूटकर रोई थीं और ये बात कॉन्ग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद ने बताई थी। आज तो 10 जनपथ रोड पर सोनिया गाँधी के आवास में मातम पसरा होगा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “बाटला हाउस एनकाउंटर वाले आतंकवादी आरिज खान को आज कोर्ट ने दोषी करार दे दिया। यह खबर सुनकर मैडम सोनिया रोई या नहीं?? कोई बता सकता है क्या? जो दो आतंकवादी उस मुठभेड़ में मारे गए थे उनकी मौत पर मैडम के आँसू नहीं रूके थे यह बात उन्हीं के ख़ास सलमान ख़ुर्शीद ने कही थी।”

मिथुन दा के बाद क्या बीजेपी में शामिल होंगे सौरभ गांगुली? इंटरव्यू में खुद किया बड़ा खुलासा: देखें वीडियो

लंबे वक्त से अटकलें लगाई जा रही हैं कि बंगाल टाइगर के नाम से प्रख्यात क्रिकेटर सौरव गांगुली बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। ऐसा कहा जा रहा था कि सौरव गांगुली कोलकाता की मेगा रैली का हिस्सा बनेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं लेकिन ‘आज तक’ से बात करते हुए सौरव गांगुली ने जो कहा, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दादा का विचार राजनीति में आने का है, हालाँकि उन्होंने सीधे सवाल का गोल-गोल जवाब दिया लेकिन जो कुछ भी कहा उसका यही मतलब निकाला जा रहा है कि गांगुली, राजनीतिक पारी शुरू कर सकते हैं।

राजनीति बुरी तो नहीं: गांगुली

रिपब्लिक बांग्ला से बातचीत के दौरान जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष सौरव गांगुली से सीधे तौर पर पूछा गया था कि वो राजनीति का रूख कर सकते हैं, जिस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तक की जिंदगी में मैंने बहुत कुछ देखा है, लाइफ ने मुझे हमेशा बढ़िया मौके दिए हैं, देखते हैं कि आगे क्या होता है, वैसे राजनीति बुरी तो नहीं। हमारे पास बहुत अच्छे नेता हैं जिन्होंने देश के विकास के लिए काफी अच्छा काम किया है और लगातार कर भी रहे हैं, मैं हमेशा इसका आदर करता हूँ।” फिलहाल दादा के इस नर्म रवैये से तो यही आभास हो सकता है कि वो जल्दी ही कुछ बड़ा ऐलान करने वाले हैं।

(Video Courtesy: Youtube/Republic World)

इसके साथ ही सौरभ गांगुली ने शुक्रवार को इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट में शतक लगाने वाले भारतीय विकेटकीपर ऋषभ पंत की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि पंत आने वाले सालों में तीनों फॉर्मेट में सर्वकालिक महान खिलाड़ी बनेंगे।

दबाव में खेली पंत की शतकीय पारी को लेकर गांगुली ने कहा कि वह कितना शानदार है? अविश्वसनीय, दबाव में खेली गई शानदार पारी। न तो पहली बार और न ही आखिरी बार ऐसा होगा। आने वाले सालों में पंत सभी फॉर्मेट में एक महान बल्लेबाज बनेगें। इसी तरह से आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखें। वह मैच विजेता और विशेष खिलाड़ी बनें रहेंगे।

मैं अब पूरी तरह से ठीक हूँ: गांगुली

अपने स्वास्थ्य के बारे में उन्होंने कहा कि अब वो पूरी तरह से ठीक हैं और काम पर वापस लौट आए हैं, उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। गौरतलब है कि इंडियन क्रिकेट टीम का बड़ा नाम सौरव गांगुली को जनवरी महीने की शुरुआत में दिल कौ दौरा पड़ा था, वो जिम करते हुए अपने घर में गिर पड़े थे, जिसके बाद उनकी एंजीयोप्लास्टी की गई थी।

उनको उस वक्त एक स्टेंट लगाया गया था, वो अस्पताल से घर लौट आए थे लेकिन उसके दस दिनों बाद ही उनकी हालत फिर से खराब हुई और उनकी एक बार फिर से एंजीयोप्लास्टी की गई और उन्हें दो और स्टेंट लगाए गए हैं। फिलहाल वो 31 जनवरी को अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए थे और इन दिनों वापस बीसीसीआई का काम संभाल रहे हैं।

बंगाल में 8 चरण में चुनाव कराए जाएँगे

बता दें कि पश्चिम बंगाल में 8 चरण में चुनाव कराए जाएँगे। पहले चरण के लिए 27 मार्च को चुनाव होंगे, दूसरे चरण के लिए 1 अप्रैल को चुनाव होंगे, तीसरे चरण के लिए 6 अप्रैल को वोट डाले जाएँगे, चौथे चरण का चुनाव 10 अप्रैल को , 5वें चरण का चुनाव 17 अप्रैल को, 6ठें चरण का चुनाव 22 अप्रैल, सांतवे चरण का 26 अप्रैल और आठवें चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, मतगणना 2 मई को होगी।

‘गा$ चाटू हो तुम मोदी के’: गालीबाज AAP विधायक कादियान के बाद केजरीवाल ‘गैंग’ के वायरल हुए कई घटिया ट्वीट

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक वीरेंद्र सिंह कादियान के अपमानजनक व नारी विरोधी ट्वीट्स के बाद कई पार्टी सदस्य एक जैसे विवाद में शामिल पाए गए हैं। दरअसल सोमवार (8 मार्च 2021) को AAP के आईटी सेल हेड प्रभाकर पांडे के भी कुछ ट्वीट वायरल हुए। ये ट्वीट 2014 में किए गए थे। 

ट्वीट्स को देख कर पता लगता है कि उन्हें मोदी समर्थकों से कितनी घृणा है कि वह 7 साल पहले भी उनके परिजनों को भी माँ-बहन की गाली देने से गुरेज नहीं करते थे।

प्रभाकर पांडे के ट्वीट के स्क्रीनशॉट

शर्मनाक बात ये है कि प्रभाकर ने सिर्फ़ ट्विटर यूजर को भद्दी-भद्दी गालियाँ नहीं दी बल्कि यूजर की माँ को भी तमाम अभद्र बातें कहीं। हालाँकि जब सोशल मीडिया पर ये सब ट्वीट वायरल होने शुरू हो गए तो AAP सदस्य ने अपना अकॉउंट प्राइवेट कर दिया।

प्रभाकर पांडे के ट्वीट के स्क्रीनशॉट
प्रभाकर पांडे के ट्वीट के स्क्रीनशॉट
प्रभाकर पांडे ने किया अकॉउंट प्राइवेट

AAP समर्थक डॉ सफीन और उनकी अभद्र भाषा

एक अन्य आम आदमी पार्टी समर्थक डॉ सफीन भी इस बीच अपने आपत्तिजनक ट्वीट के कारण चर्चा में आए। एक में उन्हें उन्हें अकॉउंट्स से लिखा देखा जा सकता है, “गा% चाटू हो तुम मोदी के।” इसके अलावा दूसरे ट्वीट में देख सकते हैं कि डॉ सफीन लिखते हैं, “गां% फटना किसे कहते हैं, ये जानना हो तो बीजेपी की फटी हुई देख लो AAP की रैली से। पुलिस उनके हाथ में है और उन्होंने मंजूरी नहीं दी।”

साल 2015 में डॉ सफीन ने भारतीय मीडिया को भी टारगेट किया था। इसमें सफीन ने लिखा था, “मीडिया: हम लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं। जनता: कम%$ घु$% दो स्तंभ अपनी गा% में, ईमान तो बेच दिया।”

एक महिला ट्विटर यूजर पर निशाना साधते हुए AAP के इसी समर्थक ने कहा, “पूरी बीजेपी और कॉन्ग्रेस को अपनी गा% में डाल दे फिर भी इनकी इतनी औकात नहीं कि AK को हिला भी सके।”

आम आदमी पार्टी के ट्रोल और नारी विरोधी रवैया

इसी तरह एक और AAP ट्रोल कपिल भी बेहूदगी पार करने में अपने नेताओं से अलग नहीं हैं। कपिल ने साल 2014 के अपने ट्वीट में लिखा, “भाजपा का विज्ञापन? अरविंद केजरीवाल, शाजिया इल्मी, तेरी माँ की चू%…किसको चू*&^ बना रहा है।”

दूसरे ट्वीट में कपिल ने लिखा, “अपनी बहन का फोन नंबर समझ रखा है जो वो रेलवे की टॉयलेट में लिख के छोड़ के आती है।”

AAP विधायत वीरेंद्र सिंह कादियान के विवादित ट्वीट

गौरतलब है कि इन आप समर्थकों के ट्वीट वायरल होने से पहले  दिल्ली की कैंट विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक के स्क्रीनशॉट वायरल हुए थे। इनमें अपशब्दों की भरमार थी। देवी-देवताओं से लेकर महिलाओं, हिंदुओं, पत्रकारों और राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को माँ-बहन तक की गाली दी गई थी।

एक ट्वीट में वीरेंद्र सिंह ने लिखा था, “ये सारे बाबा चू%^* हैं। इनसे बड़े चू%^* हैं वो नमूने जो इनका प्रवचन सुनते हैं। माँ के लाडलो हमारे 33 करोड़ डॉगी देवी देवता कम पड़ गए थे?”

इसके अलावा कुछ ट्वीट्स में देख सकते हैं कि वो सोशल मीडिया पर खुलेआम गालियाँ बक रहे थे। जून 2017 को दी गई रिप्लाइज में उन्होंने कई लोगों को माँ-बहन की गाली दी है। 

बता दें कि ट्वीट पर हुए विवाद के बाद वीरेंद्र सिंह कादियान ने अकाउंट हैक हो जाने का दावा करते हुए अपनी प्रोफ़ाइल डिएक्टिवेट कर ली है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी उन्होंने बात कही है। सोशल मीडिया में यूजर्स पूछ रहे हैं कि उनके 2016-2020 तक के कई ट्वीट्स निकल के सामने आए हैं, क्या इतने वर्षों तक उनका हैंडल हैक ही रहा? बता दें कि कादियान के ट्वीट्स बताकर जो स्क्रीनशॉटस वायरल हो रहे हैं वे हालिया नहीं हैं।

टिकट मिलने के बाद भी छोड़ा ममता का हाथ: सरला मुर्मू के साथ 5 विधायक हुए बीजेपी के, TMC के लिए संकट गहराया

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले एक के बाद एक सियासी उथल-पुथल सामने आ रही है। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी छोड़कर पहले ही कई नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। सोमवार (मार्च 8, 2021) को टीएमसी के 5 विधायकों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। जिन टीएमसी नेताओं ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ा है, उनमें सोनाली गुहा, दीपेंदू बिस्वास, रबिन्द्रनाथ भट्टाचार्य, जटू लाहिड़ी, शीतल सरदार और हबीबपुर से टीएमसी उम्मीदवार सरला मुर्मू शामिल हैं।

इन सभी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, शुभेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय की मौजूदगी में बीजेपी ज्वाइन किया। रबिन्द्रनाथ भट्टाचार्य 2001 से सिंगुर विधानसभा सीट से टीएमसी के विधायक रहे हैं। वो सिंगुर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। इस बार टीएमसी ने उनको टिकट नहीं दिया था।

टीएमसी ने बयान जारी कर कहा कि पार्टी ने हबीबपुर निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बदला है। टीएमसी ने इसके पीछे कारण दिया कि सरला मूर्मू का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। टीएमसी के लिए पहला मामला है, जब किसी उम्मीदवार ने पार्टी की ओर से टिकट मिलने के बाद पार्टी छोड़ दी हो। सरला मुर्मू के अलावा टीएमसी के 14 अन्य नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें थी। इसमें जिनमें मालदा जिला परिषद के अध्यक्ष गौर चंद्र मंडल और टीएमसी के कॉर्डिनेटर अमलान भादुड़ी का भी नाम सामने आ रहा था।

हालाँकि, मुर्मू से इस संबंध में अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है। तृणमूल और भाजपा के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ‘करो या मरो’ के जबरदस्त मुकाबले में किसी उम्मीदवार को बदलने का यह पहला मामला है। बता दें कि मालदा जिले में 26 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होना है।

मालदा जिले में 12 विधानसभा सीट हैं। इस चुनाव में टीएमसी ने उम्मीदवारी के लिए कई मशहूर हस्तियों, महिलाओं और युवाओं को आगे रखा है। टीएमसी ने अब तक 294 में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। वहीं तीन सीट उसने अपने सहयोगी दल को दी हैं। 2016 के चुनाव में इस सीट से टीएमसी का सूपड़ा साफ हो गया था और भाजपा के झोले में दो सीटें आई थीं। वहीं कॉन्ग्रेस ने सबसे ज्यादा आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी।