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PM मोदी को हिंदू नर्सों पर नहीं भरोसा, ईसाई से लिया कोरोना का टीका: आंबेडकर के पौत्र का दावा

डॉ. भीमराव आंबेडकर के पौत्र और वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता प्रकाश आंबेडकर ने सोमवार (1 मार्च 2021) को एक अजीबोगरीब दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को हिंदू नर्सों पर भरोसा नहीं है, इसलिए उन्होंने ईसाई नर्स से कोरोना का टीका लिया। हालाँकि बाद में आंबेडकर ने बिना कोई सफाई दिए यह ट्वीट डिलीट कर दिया।

अपने ट्वीट में प्रकाश आंबेडकर ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर दिन हिंदू धर्म का ढोल पीटते हैं। लेकिन उन्हें हिंदू नर्सों पर भरोसा नहीं है। इसलिए उन्हें एक ईसाई नर्स से टीका लगावाया। यह कैसा व्यवहार है?”

इस ट्वीट को लेकर नेटिजन्स ने उन्हें जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि इस तरह के ट्वीट के जरिए प्रकाश आंबेडकर अपने दादा बीआर आंबेडकर, जिन्हें संविधान के निर्माण का श्रेय दिया जाता है, के विरासत को मलिन कर रहे हैं।

कुछ घंटों बाद आंबेडकर ने ट्वीट डिलीट कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के एम्स में कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ली थी। PM मोदी को जो वैक्सीन दी गई, वो ‘भारत बायोटेक’ की वैक्सीन थी। पुडुचेरी की सिस्टर पी निवेदिता ने उन्हें वैक्सीन दी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों जब अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम का नामकरण पीएम मोदी पर किया गया था, तब भी प्रकाश आंबेडकर ने इसकी आलोचना की थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “क्या नेता मिला है इस देश को? इन्हें चिंता है कहीं लोग उन्हें भूल न जाएँ, इन्हें लोगों पर भरोसा नहीं, इसीलिए मरने से पहले स्टेडियम अपने नाम पर करा लिया।”

गाय और अन्य पशुओं की अंधाधुंध हत्या बंद हो: कोलकाता नगर निगम को हाई कोर्ट का निर्देश

गाय सहित अन्य पशुओं की हत्या और उनके मांस की बिक्री पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाई कोर्ट ने कोलकाता नगर निगम को मवेशियों की गैर कानूनी तरीके से हत्या और मांस बिक्री को रोकने के लिए उपायों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस थोथाथिल बी. राधाकृष्णन और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने ये निर्देश दिए। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे गाय सहित अन्य मवेशियों को अनधिकृत या अनियंत्रित तरीके से काटने और इसके बाद मांस की बिक्री करने वालों पर कार्रवाई करे।

इसके लिए खंडपीठ ने उन उपायों को सख्ती से लागू करने को कहा है जिनका जिक्र निगम ने अदालत के समक्ष दायर शपथ-पत्र में किया है। 6 जनवरी 2021 को अदालत ने इस सबंध में हलफनामा दायर करने का निर्देश निगम के आयुक्त को दिया था।

गौरतलब है कि जनहित याचिका में कहा गया था कि बकरीद व अन्य मौकों पर कानूनों का पालन किए बगैर बड़े पैमाने पर गाय सहित अन्य मवेशियों को काटा जाता है। हलफनामा दायर करते हुए निगम ने अदालत को विस्तार से बताया कि वह ऐसी स्थिति में क्या कार्रवाई कर रहा है और इस स्थिति से कैसे निपटेगा।

इसके मुताबिक बकरीद जैसे मौकों पर पशुओं की कुर्बानी के लिए निगम स्थान तय करेगा और संचार के विभिन्न माध्यमों के जरिए एक महीने पहले इसके बारे में लोगों को सूचित किया जाएगा। नगर निगम के पास 5 बूचड़खाने हैं। इनके अलावा किसी अन्य जगह की बूचड़खाने के तौर पर इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी। कसाई, मछली और मांस का व्यापार बगैर लाइसेंस के करने की अनुमति नहीं होगी।

चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि यदि निगम हलफनामे में बताए गए उपायों को सख्ती से लागू करता है तो मवेशियों को काटने की बेलगाम प्रवृत्ति बंद हो जाएगी। ऐसा नहीं होने पर अदालत ने निगम के अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की बात भी कही।

जरासंध की जेल में मकबरा क्यों? मजार की तस्वीर और फेसबुक पर सवाल को लेकर भड़का PFI, दर्ज हुई FIR

नालंदा जिले के लोगों का कहना है कि बिहार में भी अब ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ के लोग पाँव पसार रहे हैं और उनके द्वारा चलाई जा रही इस्लामी गतिविधियों को स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है। ताज़ा मामला नालंदा जिले के बिहारशरीफ में स्थित हिरण्य पर्वत (बड़ी पहाड़ी) पर स्थित एक मंदिर और मकबरे से जुड़ा हुआ है। हिन्दू कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये मकबरा अवैध है और इसकी जगह हिन्दू संरचना हुआ करती थी।

इस पूरे मामले के विस्तृत विवरण से पहले बता दें कि PFI एक इस्लामी कट्टरवादी संगठन है, जिसका रोल दिल्ली में हुए दंगों में भी सामने आया था। हाथरस में दंगा करने की साजिश में भी इसके लोग शामिल थे। PFI के ही युवा संगठन का नाम SDPI है, जो उसी तरह की गतिविधियों में लिप्त रहता है। हाल ही में केरल में प्रतीकात्मक संघियों को जंजीर बाँध कर रैली करने और फिर एक RSS कार्यकर्ता की हत्या में इसका नाम सामने आया था।

क्या कहना है हिन्दू कार्यकर्ताओं का

हमने इस पूरे मामले को समझने के लिए बेंगलुरु में रह रहे सतीश से बातचीत की, जिन्होंने कहा कि बिहार में PFI खतरनाक रूप लेता जा रहा है। हिन्दू हितों के लिए विभिन्न संगठनों के साथ मिल कर कार्य कर रहे सतीश ने बताया कि कुछ लड़कों ने मजार के सामने तस्वीर क्लिक कराई, जिसके बाद PFI और इस्लामी कट्टरवादियों ने उन्हें काट डालने की धमकी दी है और उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं।

उन्होंने कहा, “बिहार में कई जगह मिनी पाकिस्तान बने हुए हैं और PFI खासी सक्रिय है। दिल्ली में वो दंगा भी करते हैं और वकील लगा कर दंगाइयों को छुड़ा भी ले जाते हैं। हिन्दू बस आर्टिकल लिखते रह जाते हैं। हम नहीं चाहते हैं कि हमारे लोग मारे जाएँ, जिसके बाद उनके लिए न्याय का ट्रेंड चले और क्राउडफंडिंग हो। इन सभी को जान का खतरा है। वो मारे जा सकते हैं। उन्हें जीते जी समर्थन चाहिए।”

इस मामले में माधवलाल कश्यप को मुख्य आरोपित बनाया गया है, जिनसे हमने संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि हिरण्य पर्वत को भी मुस्लिम समाज के लोग ‘पीर पर्वत’ कहते हैं, ठीक उसी तरह जैसे बिहारशरीफ को हिन्दुओं द्वारा ‘बिहार श्री’ कहा जाता है। उन्होंने बताया कि हिरण्य पर्वत पर स्थित मंदिर में भगवान शिव भी स्थापित हैं और कुछ ही दूर पर जो मकबरा है, वो जरासंध की जेल की दीवारों से गिरने के बाद बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि जरासंध महाभारतकालीन थे, जिससे इसकी पौराणिकता का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज से 650 वर्ष पूर्व इस मकबरे का निर्माण कराया गया था, जिसे मलिक इब्राहिम बयाँ ने बनवाया था। उन्होंने बताया कि तत्कालीन स्थानीय राजपूत राजाओं को पराजित कर उसने ये मकबरा बनवाया था। उसकी मृत्यु के बाद उसे वहीं दफनाया गया था। उन्होंने पूछा कि जरासंध की जेल में मकबरे का अस्तित्व कहाँ से आया?

उन्होंने इसे अतिक्रमण बताते हुए कहा कि 1991 में यहाँ प्रशासनिक अधिकारियों ने पूजा-पाठ किया था, लेकिन बाद में मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने वहाँ स्थित हिन्दू प्रतीक चिह्नों को तोड़-फोड़ दिया। बकौल माधवलाल, प्रशासन ने भी इस मामले में कार्रवाई करने की रुचि नहीं दिखाई क्योंकि हिन्दू समाज खुद सुसुप्त अवस्था में था। ये सारा विवाद माधवलाल के ही एक फेसबुक पोस्ट को लेकर है, जिसमें वो साथियों के साथ उस मजार के सामने दिख रहे हैं।

उक्त पोस्ट में लिखा है, “बिहारशरीफ बिहारश्री पहाड़ी पर बने इस ढाँचे को पुनः मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित करना है। बस एक लक्ष्य – हिन्दू स्वराज। हर हर महादेव!” उनका कहना है कि इस पोस्ट में कुछ भी आपत्तिजनक न होने के बावजूद FIR दर्ज कर ली गई और PFI वालों ने शिकायत कर दी। उन्होंने बताया कि 500 से भी अधिक मुस्लिमों द्वारा सोशल मीडिया और फोन के माध्यम से उन्हें धमकियाँ दी गई हैं।

इसी फेसबुक पोस्ट को लेकर शुरू हुआ सारा विवाद

माधवलाल ने बताया कि यहाँ अंजुमन इस्लामिया, ईमारत-ए-शरिया और सुन्नी बोर्ड जैसी संस्थाएँ चलती हैं, जिन्होंने अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल बना कर एसपी से मुलाकात की और इस मामले की शिकायत की। बता दें कि जहाँ की तस्वीर है, जो इलाका सोहसराय पुलिस थाने में आता है, FIR बिहार थाने में दर्ज की गई है और शिकायत लहेरी थाना में की गई थी। इस तरह से इस मामले में तीन थानों की पुलिस शामिल है।

माधवलाल के मित्र राधेश्याम ने भी इस बात की पुष्टि की कि उन्हें चारों तरफ से धमकी मिल रही है। उन्होंने बताया कि PFI काफी तेज़ी से बिहार में फ़ैल रहा है और हिन्दुओं को अगर ये ग़लतफ़हमी है कि बिहार उनसे पीड़ित नहीं है तो उन्हें समझना चाहिए कि कश्मीर, बंगाल और केरल के बाद बिहार ही उनका शिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार की तरह पटना के अशोक राजपथ पर अब सरस्वती पूजा का जुलूस निकालने का अधिकार भी हिन्दुओं से छिन चुका है।

क्या कहा है SDPI ने अपनी शिकायत में

फरवरी 15, 2021 को क्लिक की गई उस तस्वीर और उक्त फेसबुक पोस्ट को लेकर पुलिस को दिए गए ज्ञापन में SDPI ने कहा है कि माधवलाल कश्यप बजरंग दल का सदस्य है और उन्होंने अपने 8 साथियों के साथ मिल कर सैयद इब्राहिम मलिक बयाँ के ऐतिहासिक मकबरे को तोड़ने की बात की है। SDPI ने माधवलाल कश्यप पर दो समुदायों के बीच फसाद कराने की इच्छा रखने का आरोप लगाया है।

SDPI द्वारा पुलिस-प्रशासन को दिया गया ज्ञापन

साथ ही दावा किया कि इस फेसबुक पोस्ट से जिले का अल्पसंख्यक समाज खासा आहत है। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाते हुए संगठन ने कहा है कि 700 वर्ष पुराने इस मकबरे के बारे में गूगल और विकिपीडिया के अलावा इतिहास की कई पुस्तकों में भी उल्लेख है। संगठन ने इसे ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए पुलिस से कहा है कि वो इसे टूटने से बचाएँ। दावा किया गया है कि उक्त मजार ASI की निगरानी में भी है।

क्यों दर्ज हुई है FIR

दरअसल, ये FIR खुद पुलिस ने दर्ज की और FIR कॉपी में कुमार सुमन का शिकायतकर्ता के रूप में नाम लिखा है, जो नालंदा के बिहार थाना में पदस्थापित हैं। इसमें हिन्दू संगठन से जुड़े माधवलाल कश्यप के खिलाफ शिकायत करते हुए लिखा गया है कि उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिल कर बड़ी पहाड़ी स्थित मजार के सामने की तस्वीर क्लिक कर के फेसबुक पर पोस्ट की है, जिसमें उक्त ढाँचे को पुनः मंदिर बनाने की बात की गई है।

FIR में लिखा है कि इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और कइयों ने शेयर भी किया है। माधवलाल कश्यप के डिटेल्स भी इस FIR कॉपी में है और बताया गया है कि उन पर पहले से ही एक मामला दर्ज है। पुलिस के अनुसार, जाँच में स्पष्ट हुआ कि हॉस्पिटल मोड़ पर वो कुछ लोगों के साथ दिखे थे और तस्वीर में दिख रहे मजार के बारे में पुलिस को स्थानीय लोगों ने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग वहाँ फातिहा पढ़ने आते हैं।

FIR कॉपी में पुलिस की जाँच के विवरण के अनुसार, “स्थानीय लोगों ने बताया कि वो मजार की कद्र करते हैं और कभी किसी के द्वारा इस पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है। इसीलिए माधवलाल कश्यप द्वारा एक षड्यंत्र के तहत दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के लिए और सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए जो पोस्ट किया गया, वो एक संज्ञेय अपराध है। अतः दी गई धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।”

माधवलाल कश्यप के खिलाफ थाने में दर FIR की कॉपी

इस मामले में माधवलाल कश्यप पर IPC धारा-153A (विभिन्न समूहों या जातियों या समुदायों के बीच वैमनस्य फैला कर शांति भंग करना), 295A (किसी उपासना के स्थान को या व्यक्तियों के किसी वर्ग द्वारा पवित्र मानी गई किसी वस्तु को नष्ट, नुकसानग्रस्त या अपवित्र करना), 120B (आपराधिक षड्यंत्र) और 64 के अलावा IT एक्ट की धारा 66 भी लगाई गई है। साथ ही उक्त फेसबुक पोस्ट और कश्यप की फेसबुक प्रोफ़ाइल की तस्वीर भी शेयर की गई है।

क्या कहना है पुलिस का

इस मामले में हमने बिहारशरीफ पुलिस से भी संपर्क किया। क्षेत्र के SDPO डॉक्टर शिब्ली नोमानी ने कहा कि पुलिस ने FIR किसी संगठन के कहने पर नहीं दर्ज की है, बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया गया है क्योंकि हमें कई लोगों से इस तरह की सूचनाएँ मिली थीं। उन्होंने कहा कि सरस्वती पूजा के आसपास इस तरह का फेसबुक पोस्ट किया गया, जिससे माहौल बिगड़ने की भी आशंका थी।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने पूरे मामले की जाँच के बाद ही FIR दर्ज की है। उन्होंने इस आरोप को नकार दिया कि PFI की शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई है। उन्होंने पूछा कि क्या जिस तरह की टिप्पणी फेसबुक पर की गई है, वो आपत्तिजनक नहीं है? साथ ही कहा कि आरोपित के ही एकाउंट से ये पोस्ट हुआ है। क्योंकि इसमें किसी और का कोई रोल होता या उनका अकाउंट हैक हुआ होता तो उन्हें पुलिस में मामला दर्ज कराना चाहिए था।

मकबरे की जगह पहले हिन्दू संरचना होने की बात पर उन्होंने कहा कि इस पर बयान देने के लिए वो अधिकृत नहीं हैं। लेकिन उन्होंने ये भी पूछा, “अगर आप कहें कि यहाँ गुरुद्वारा है और हम इसे कुछ और बना देंगे। यहाँ मंदिर, मस्जिद या चर्च है और कोई कहे कि इसे वो कुछ और बना देंगे। क्या ये ठीक है?” उन्होंने कहा कि पुलिस का काम सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने से रोकना है और इसीलिए पुलिस का हरकत में आना ज़रूरी था।

₹50 करोड़ में बिका 10 सेकेंड का वीडियो: नहीं कर सकते चोरी, NFT का किया गया है इस्तेमाल

अगर कोई चीज मुफ्त में ऑनलाइन उपलब्ध हो तो क्या आप उसे खरीदने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करेंगे? लेकिन, अब जमाना बदल रहा है। क्रिप्टो की दुनिया में गोते लगाने वाले निवेशक अब ऑनलाइन एसेट्स के लिए करोड़ों खर्च कर रहे हैं। अब एक 10 सेकेंड्स का वीडियो क्लिप 6.6 मिलियन डॉलर (48.43 करोड़ रुपए) में बिका है। ये ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का कमाल तो है ही, लेकिन आइए जानते हैं इस वीडियो में क्या है।

उस वीडियो में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सड़क पर लेटे हुए हैं और उनके ऊपर पक्षी मँडरा रहे हैं। साथ ही उनके शरीर पर कुछ आपत्तिजनक चीजें भी लिखी हुई हैं, जिनमें ‘लूजर’ भी शामिल है।

50 करोड़ रुपए वाले वीडियो में उल्टा लेटे हुए डोनाल्ड ट्रम्प के पास एक पेड़ है और सड़क पर कुछ लोग पैदल चहलकदमी कर रहे हैं। इस वीडियो में देखने में कुछ भी खास नहीं लगता। लेकिन, इसे खरीदने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया गया है।

इस वीडियो को पूरी तरह कम्प्यूटर की मदद से तैयार किया है और इसके सत्यापन के लिए ब्लॉकचेन का इस्तेमाल किया गया है। इस वीडियो की कोई चोरी नहीं कर सकता, क्योंकि इस पर इसके क्रिएटर का डिजिटल सिग्नेचर भी है। इससे इसके असली मालिक का पता चलता रहेगा। इस डिजिटल वीडियो में ‘Non-Fungible Token (NFT)’ का इस्तेमाल किया गया है। ऑनलाइन निवेश में ये जाना-पहचाना नाम है।

Bitcoin के दाम आसमान छू रहे हैं। कई अन्य ऑनलाइन एसेट्स, जिन्हें Altcoins भी कहते हैं – उनकी खासी माँग है। इसमें एक रुपए से भी कम के टोकन से लेकर लाखों रुपए तक के उपलब्ध हैं और हाल के दिनों में सबने अच्छा रिटर्न दिया है। ऐसे में NFT टोकंस की भी खासी माँग है। पिछले कुछ दिनों में इसके बाजार में करोड़ों डॉलर का उछाल आया है। बड़े निवेशक भी इधर आकर्षित हो रहे हैं।

उक्त वीडियो की बात करें तो इसे मियामी के निवासी पाब्लो रोड्रिगोएज फ्राइले ने खरीदा है। अब इसके बाद डिजिटल आर्ट्स तैयार करने की होड़ सी लगने की संभावना है।

इस वीडियो को डिजिटल आर्टिस्ट बिपल ने बनाया है। पाब्लो ने कहा कि आप मोनालिसा पेंटिंग की तस्वीर क्लिक कर के आ सकते हैं लेकिन उसका कोई मूल्य नहीं है क्योंकि आपके पास उसकी उत्पति और उस कार्य के इतिहास का कोई सबूत नहीं है।

लेकिन, ये वीडियो उन सबके साथ ऑथेंटिकेटेड अथवा सत्यापित है। डॉलर, शेयर बाजार के स्टॉक्स या सोना – ये सब इन सबको अन्य चीजों से बदला जा रहा है, प्रतिस्थापित किया जा सकता है और अतः इसका कोई एक मालिक नहीं हो सकता। अर्थात, ये ‘Fungible’ हैं। अब आप समझ गए होंगे कि ‘Non Fungible’ क्या है – ये यूनिक है। इसे इंटरचेंज नहीं किया जा सकता। ये अपने आप में एक वर्चुअल दुनिया है।

सपा नेता छेड़खानी भी करता है, हत्या भी… और अखिलेश घेर रहे योगी सरकार को! आरोपित के खिलाफ लगेगा NSA

उत्तर प्रदेश का हाथरस एक बार फिर सुर्खियों में है। मामला फिर से हत्या और छेड़छाड़ से जुड़ा है। एक किसान अनीश शर्मा (बदला हुआ नाम) को खेत में काम करते समय गोली मार दी गई। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।

मृतक अनीश शर्मा की बेटी पूजा शर्मा (बदला हुआ नाम) ने आरोपितों के खिलाफ थाने जाकर शिकायत दर्ज करवाई है। हाथरस स्थित सासनी थाना से पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची और पंचायतनामा कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया।

सासनी थाना ने अनीश शर्मा (बदला हुआ नाम) के हत्या की जब जाँच-पड़ताल की तो मामला 2 साल पहले की एक घटना से जुड़ा पाया गया। दरअसल अनीश शर्मा ने जुलाई 2018 में गौरव शर्मा नाम के आरोपित के खिलाफ अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई थी।

छेड़छाड़ करने का आरोपित और विरोध करने पर हत्या-आरोपित गौरव शर्मा समाजवादी पार्टी का नेता है। वही समाजवादी पार्टी, जिसके मुखिया अखिलेश यादव इस मामले में प्रदेश की योगी सरकार को घेरते हुए ट्वीट कर रहे हैं।

हत्या हुई है, बजाय अपराधी के पकड़ने के पूर्व CM अखिलेश का सारा ध्यान ‘अबकी बार भाजपा बाहर’ लिखने पर रहा। जबकि सच्चाई पीड़िता के ऊपर लगे वीडियो में भी सुनी जा सकती है और विधायक देवमणि द्विवेदी के ट्वीट से आरोपित को पहचाना भी जा सकता है।

6ठी, 8वीं और 9वीं की 3 छात्राएँ शाहजहाँपुर से लापता: UP पुलिस की कई टीमें तलाश में

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हाल ही में एक व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया था। बताया गया कि उन्होंने अपनी बेटी के साथ छेड़खानी का विरोध किया, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई। अब शाहजहाँपुर में तीन नाबालिग लड़कियों के गायब होने की घटना सामने आई है।

शाहजहाँपुर की ये तीन नाबालिग छात्राएँ 6ठी, 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़ती हैं। तीनों स्कूल से घर नहीं लौटीं, जिसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कई टीमें लगी हुई हैं।

ये घटना शाहजहाँपुर के सदर थाना बाजार क्षेत्र की है। जिले के एसपी समेत सभी अधिकारी क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। इस सम्बन्ध में कुछ लोगों से पूछताछ जारी है और लगातार छात्राओं की तलाश की जा रही है।

इसी जिले में पिछले हफ्ते 4 और 7 साल की चचेरी बहनों के साथ वारदात की खबर आई थी, जो मदरसे में पढ़ती थीं। दोनों हैंडपंप पर नहाने गई थीं, उसके बाद गायब हो गईं। जहाँ एक का शव मिला था, वहीं दूसरी अर्धनग्न व घायल अवस्था में खेत में मिली थी।

कुछ दिनों पहले शाहजहाँपुर में ही BA की एक छात्रा अधजली और नग्न अवस्था में मिली थी। उसने बताया था कि 4 लोग उसे खेत में ले जाकर रेप का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उसके चिल्लाने से लोग इकट्ठा होने लगे तो उस पर केरोसिन डाल कर आग लगा कर भाग गए।

6ठी, 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्राओं के मामले में भी लड़कियों के माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चियों के घर न लौटने पर वो खोजते हुए स्कूल भी गए, लेकिन वो वहाँ भी नहीं मिलीं।

उसके बाद उन्होंने पुलिस में मामला दर्ज कराया। ऑपइंडिया ने शाहजहाँपुर के CO (सिटी) प्रवीण यादव से संपर्क किया, जिन्होंने बताया कि उक्त घटना सत्य है और लड़कियाँ गायब हुई हैं। उनके अनुसार पुलिस की कई टीमें नाबालिगों की तलाश में लगाई गई हैं।

शाहजहाँपुर के CO (सिटी) प्रवीण यादव ने बताया कि लड़कियों की बरामदगी के लिए पुलिस लगी हुई है और जल्द ही इसका खुलासा किया जाएगा। उनके अनुसार पुलिस की एक टीम हरिद्वार भी गई है।

45 लाख बिहारी अब होंगे ममता के साथ? तेजस्वी-अखिलेश का TMC को समर्थन, दीदी ने लालू को कहा पितातुल्य

उत्तर प्रदेश और बिहार के दो बड़े नेताओं ने पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी का समर्थन किया है। तेजस्वी यादव ने तो यहाँ तक कहा कि बंगाल में भाजपा के सारे केंद्रीय मंत्री से लेकर सांसद तक लगे हुए हैं लेकिन ‘दूल्हे’ का कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने पूछा कि भाजपा में कौन ऐसा है, जो ममता बनर्जी जैसा अनुभव रखता हो। उन्होंने कहा कि अनुभव के आधार पर ममता को फिर सीएम चुना जाना चाहिए।

तेजस्वी यादव ने पश्चिम बंगाल में रह रहे बिहारियों से ममता बनर्जी को जिताने की अपील की। पश्चिम बंगाल के हिन्दीभाषी वोटरों को लुभाने के लिए TMC द्वारा तेजस्वी और अखिलेश से अपील करवाई जा रही है। दोनों नेताओं ने भाजपा को बंगाल के लिए ‘बाहरी’ करार दिया और दावा किया कि पार्टी यहाँ आकर विभाजन की राजनीति खेल रही है। अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के ममता बनर्जी को समर्थन का ऐलान किया।

सोमवार (मार्च 1, 2021) की शाम को बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने ममता बनर्जी से उनके दफ्तर में मुलाकात की। हालाँकि, बिहार में CPM और कॉन्ग्रेस उनकी पार्टी राजद के साथ गठबंधन में हैं लेकिन तेजस्वी यादव ने इन दोनों पार्टियों के नेताओं से मुलाकात करना भी गवारा नहीं समझा। केरल में लेफ्ट के खिलाफ खड़ी कॉन्ग्रेस पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को हराने के लिए लेफ्ट के साथ है।

यूपी-बिहार के वोटरों की संख्या पश्चिम बंगाल में 45 लाख के करीब बताई जाती है। तृणमूल पोषित मीडिया का कहना है कि तेजस्वी और अखिलेश की अपील से हिन्दीभाषी वोटर भाजपा से दूर होंगे। तेजस्वी यादव ने कहा, “हम ममता बनर्जी की जीत के लिए पूरी ताकत लगा देंगे। उन्हें जहाँ भी ज़रूरत होगी, हम मौजूद होंगे। भाजपा कितनी भी कोशिशें कर ले, बंगाल एक अलग जगह है। बंगाल की संस्कृति, विरासत और प्रकृति को बचाने की ज़रूरत है।”

तेजस्वी ने कहा कि लोकतंत्र को तबाह करने की कोशिश हो रही है, इसीलिए इसे बचाने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि ये उनके पिता और राजद सुप्रीमो लालू यादव का निर्देश है कि ममता बनर्जी के साथ खड़ा हुआ जाए। वहीं ममता बनर्जी ने भी तेजस्वी के तारीफों के पुल बाँधे और कहा कि 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में असल में उनकी जीत हुई थी, लेकिन भाजपा ने साजिश कर के उन्हें हरा दिया।

ममता बनर्जी ने दावा किया कि आज नहीं तो कल तेजस्वी यादव को सत्ता में आना ही है। ममता बनर्जी ने लालू यादव को पितातुल्य बताते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य की भी कामना की। राजद बंगाल में 10 सीटें चाहता है और इसीलिए उसके नेताओं ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ बैठक भी की है। कहा जा रहा है कि ब्रिगेड ग्राउंड में कॉन्ग्रेस-लेफ्ट-ISF की रैली में तेजस्वी जानबूझ कर नहीं पहुँचे।

खुद वामपंथी दलों में ममता के खिलाफ लड़ाई को लेकर एकमत नहीं है। कहा जा रहा है कि बिहार में लेफ्ट के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने ही तेजस्वी यादव को उस रैली में न जाने की सलाह दी थी और वो अपनी पार्टी के नेताओं को भी ममता के खिलाफ लड़ाई को भूल कर भाजपा को राज्य से बाहर रखने की कोशिश करने को कह रहे हैं। भाजपा ने तेजस्वी व अखिलेश के बयानों को नकारते हुए कहा कि वो अपने ही राज्यों में सत्ता में नहीं हैं, उनकी बातों का कोई मोल नहीं।

उधर तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार ने फुरफुरा शरीफ के विकास के लिए 2.60 करोड़ रुपए आवंटित किया। ये सब तब हो रहा है, जब फुरफुरा शरीफ का मौलाना अब्बास सिद्दीकी न सिर्फ लेफ्ट के साथ गठबंधन में है बल्कि रैलियाँ भी साथ कर रहा है। पश्चिम बंगाल के वित्त विभाग ने कम से कम 60 योजनाओं और फुरफुरा शरीफ विकास प्राधिकरण के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए आवंटित किए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री से भी तृणमूल कॉन्ग्रेस के खेमे में बेचैनी है।

नेपाल के सेना प्रमुख ने ली ‘मेड इन इंडिया’ कोरोना वैक्सीन, पड़ोसी देश को भारत ने फिर भेजी 10 लाख की खेप

दुनिया भर में अब ‘मेड इन इंडिया’ वैक्सीन की धूम दिख रही है। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत में बनी वैक्सीन की माँग दुनिया के कई देश कर रहे हैं और उनमें से कइयों को तो इसकी खेप मुफ्त में उपलब्ध कराई गई है। अब नेपाल के सेना प्रमुख पूर्ण चंद्र थापा ने ‘मेड इन इंडिया’ कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लेकर भारत में बनी वैक्सीन की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता को आगे बढ़ाने का कार्य किया है।

पिछले ही महीने नेपाल को भारतीय कोरोना वैक्सीन की दूसरी खेप मिली, जिसमें 10 लाख डोज मुहैया कराए गए थे। जिस ‘AstraZeneca’ के वैक्सीन की खेप नेपाल को मुहैया कराई गई, उसे सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा ‘Covishield’ नाम से बनाया गया है। जनवरी 2021 में नेपाल में इसके आपात प्रयोग को मंजूरी दी गई थी। भारत द्वारा खेप भेजते ही वहाँ टीकाकरण अभियान शुरू हो गया था।

नेपाल को जो वैक्सीन की दूसरी खेप भेजी गई है, उससे वहाँ के बुजुर्गों का टीकाकरण किया जाएगा। 60 वर्ष से अधिक की उम्र के लोगों को प्राथमिकता के रूप में वैक्सीन दी जाएगी। नेपाल में 8.73% जनसंख्या बुजुर्गों की है। मार्च 7 को टीकाकरण अभियान का वहाँ दूसरा फेज शुरू किया जाना है। भारत ने पाकिस्तान को छोड़ कर लगभग सभी पड़ोसी देशों को ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करा दी है।

नेपाल में लगभग 2.75 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो गए थे, ऐसे में वहाँ वैक्सीन की बड़ी आवश्यकता थी। वहाँ कोरोना की वजह से 2000 से भी अधिक लोग अपनी जान गँवा चुके हैं।

जब 2015 में नेपाल में बड़ा भूकंप आया था, तब भी 6 घंटे के भीतर राहत कार्य के लिए पहुँचने वाला भारत पहला देश था। नेपाल के सातों प्रान्त में वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से किसी नुकसान की खबर नहीं है। अब वहाँ की सीमाएँ भी खुलने लगी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मार्च 2021 के पहले ही दिन सुबह-सुबह कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ली। उन्होंने दिल्ली AIIMS में कोरोना वैक्सीन ली। PM मोदी को जो वैक्सीन दी गई, वो ‘भारत बायोटेक’ की वैक्सीन है। पुडुचेरी की सिस्टर पी निवेदिता ने उन्हें वैक्सीन दिया।

बंगाल में ‘भाईजान’ पर कॉन्ग्रेस में तकरार, आनंद शर्मा और अधीर रंजन के बीच जुबानी जंग

पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। लेकिन, कॉन्ग्रेस की भीतरी लड़ाई थमती नहीं दिख रही। विधानसभा में टीएमसी और बीजेपी को टक्कर देने का दम भरने वाली कॉन्ग्रेस के अंदर ही अब गठबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस और वाम मोर्चा एक साथ चुनावी मैदान में हैं। इस गठबंधन में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) को शामिल करने पर कॉन्ग्रेस के नाराज नेताओं के समूह G-23 के सदस्य आनंद शर्मा ने सवाल उठाए हैं।

कॉन्ग्रेस की विचारधारा के खिलाफ है ISF से गठबंधन 

आनंद शर्मा ने सोमवार (मार्च 1, 2021) को ट्वीट करते हुए कहा, “आईएसएफ जैसे दलों के साथ कॉन्ग्रेस का गठबंधन पार्टी की मूल विचारधारा के खिलाफ है, जो कि गाँधी और नेहरू के धर्मनिरपेक्षता वाले सिद्धांत पर आधारित है। इन मुद्दों को कॉन्ग्रेस कार्यसमिति पर चर्चा होनी चाहिए थी।”

गठबंधन को बताया शर्मनाक 

पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की नवगठित पार्टी आईएसएफ के साथ गठबंधन को शर्मनाक बताते हुए उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा, “सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने में कॉन्ग्रेस चयनात्मक रुख नहीं अपना सकती। हमें सांप्रदायिकता के हर रूप से लड़ना है। पश्चिम बंगाल प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की उपस्थिति और समर्थन शर्मनाक है, उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।”

अधीर रंजन चौधरी ने सोमवार को आनंद शर्मा के बयान का जवाब देते हुए कहा कि वो एक राज्य के प्रभारी हैं और बिना किसी अनुमति के अपने दम पर कोई फैसला नहीं लेते हैं। कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सोमवार को घोषणा की कि वाम दलों के साथ अब तक हुई चर्चा में सीटों की साझेदारी पर यह सहमति बनी है कि उनकी पार्टी 92 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इन सीटों पर कॉन्ग्रेस के प्रत्याशियों की सूची दो दिन में जारी कर दी जाएगी।

बता दें कि रविवार (फरवरी 28, 2021) को फुरफुरा शरीफ दरगाह के मौलाना अब्बास सिद्दीकी ने जहाँ राज्य भर के वामपंथी उम्मीदवारों को तो अपना समर्थन दे दिया, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए ऐसा नहीं किया। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में गठबंधन की पहली रैली आयोजित हुई। रैली में सिद्दीकी ने कहा कि वो चुनावी राजनीति में भागीदारी चाहते हैं, वो लेफ्ट को धन्यवाद करना चाहते हैं क्योंकि उसने अपनी सीटों का ‘बलिदान’ कर उन्हें 30 सीटें दी हैं।

‘भाईजान’ नाम से मशहूर पीरजादा सिद्दीकी फुरफुरा शरीफ के प्रमुख हैं। यह दरगाह देश की दूसरी सबसे बड़ी सूफी मजार है। इस दरगाह का दक्षिण बंगाल के इलाकों में काफी प्रभाव माना जाता है। पीरजादा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने सत्ताधारी तृणमूल की नींद पहले से ही उड़ा रखी है। अब वे कॉन्ग्रेस में भी विवाद की वजह बन गए हैं।

वरवरा राव को बेल की करें समीक्षा, जज शिंदे की भी हो जाँच: कम्युनिस्ट आतंक के मारे दलित-आदिवासियों की गुहार

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के दलितों और आदिवासियों ने सर्वोच्च न्यायालय और बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा है। इसमें वरवरा राव को जमानत देने पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही जस्टिस शिंदे के खिलाफ भी जाँच की माँग की गई है। बता दें कि जस्टिस शिंदे, उन जजों में से एक हैं, जिन्होंने एल्गार परिषद-भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले के आरोपित वरवरा राव को जमानत दी थी।

यह पत्र ‘कम्युनिस्ट हिंसा पीड़ित आदिवासी दलित संघर्ष कमिटी’ की तरफ से लिखा गया है। यह समिति मध्य प्रदेश के बालाघाट से है। पत्र में समिति ने दावा किया है कि वरवारा राव को जमानत देने के फैसले से नक्सली हिंसा के शिकार दलित और आदिवासी पीड़ा में हैं।

Source: lawmarathi.com

समिति ने पत्र में उल्लेख किया है कि वरवरा राव माओवादी है और देश भर में हिंसक माओवादियों का खुलेआम वकालत और समर्थन करता है। पत्र में न्यायमूर्ति शिंदे और उनके परिवार के सदस्यों को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आकर रहने और माओवादियों के अत्याचारों को देखने के लिए कहा गया है।

इसके अलावा, समिति ने न्यायमूर्ति शिंदे द्वारा ‘अर्बन नक्सल’ वरवरा राव को दी गई जमानत आदेश की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निगरानी जाँच की भी माँग की है। समिति ने शीर्ष अदालत से यह भी कहा है कि वह अवैध संपत्ति रखने के लिए शिंदे की जाँच के लिए आयकर विभाग को निर्देश दे। समिति ने शीर्ष अदालत से यह भी आग्रह किया है कि वह न्यायमूर्ति शिंदे की अध्यक्षता वाले मामलों की जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की एक समिति नियुक्त करे।

पत्र में कहा गया है, “हम सभी नक्सल पीड़ित लोग आपसे दरख्वास्त करते हैं कि जज शिंदे द्वारा आज तक सुनवाई किए हुए मामलों की सर्वोच्च न्यायालय के जजों की कमिटी द्वारा जाँच हो तथा जज शिंदे द्वारा आज तक अर्जित की गई संभाव्य अवैध संपत्ति की जाँच इनकम टैक्स विभाग द्वारा करने की अनुशंसा सर्वोच्च न्यायालय करे।”

पिछले हफ्ते, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 6 महीने के लिए चिकित्सा आधार पर 81 वर्षीय कवि-कार्यकर्ता और भीमा कोरेगाँव मामले के आरोपित वरवरा राव को जमानत दी। यह आदेश न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और मनीष पितले की पीठ ने पारित किया था।

राव को नवंबर 2018 में भीमा कोरेगाँव मामले के संबंध में नौ अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिसे पुणे पुलिस ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को स्थानांतरित कर दिया था। जुलाई 2020 में, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने राव पर आरोप लगाया था कि उन्होंने स्वास्थ्य के आधार पर जमानत के लिए आवेदन करने के बाद कोरोना वायरस के प्रकोप का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास किया था।