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कॉन्ग्रेस की ट्रोल आर्मी को रास नहीं आया निधि राजदान का ‘आईना’, प्रोपेगेंडाबाज बता हार्वर्ड की भी याद दिलाई

कॉन्ग्रेस के ट्रोल गैंग ने 14 मार्च 2021 को कथित पत्रकार निधि राजदान को निशाने पर ले लिया। वजह, निधि ने गुजरात में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर एक आलोचनात्मक लेख लिख दिया। उन्होंने गल्फ न्यूज में एक ऑपेड लिखते हुए हालिया चुनावों में कॉन्ग्रेस के खराब प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा था कि पार्टी को नए सिरे से खुद को स्थापित करना होगा।

गल्फ न्यूज़ में कॉन्ग्रेस पर लेख को लेकर निधि के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

राजदान ने अपने लेख में आंदोलनजीवी योगेंद्र यादव का हवाला दिया, जिन्होंने 2019 में कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी को खत्म हो जाना चाहिए। उस समय योगेंद्र यादव को कॉन्ग्रेस समर्थकों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा था। राजदान ने कहा कि केरल में कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष है, क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ नेता पीसी चाको ने पार्टी छोड़ते हुए कहा था कि पार्टी में कोई लोकतंत्र नहीं है।

पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने महत्वपूर्ण जमीन खो दी है। राजदान ने बताया कि तमिलनाडु में, कॉन्ग्रेस की सहयोगी DMK ड्राइवर की सीट पर है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी ने भी अपनी जमीन खो दी है, लेकिन पूरी रिपोर्ट में कॉन्ग्रेस की आलोचना अधिक थी।

रिपोर्ट के साथ कॉन्ग्रेस समर्थकों को जो प्राथमिक मुद्दा मिला, वह यह था कि राजदान ने दावा किया कि हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी गुजरात में नंबर दो पार्टी बन गई, जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है। बीजेपी ने 6,239 सीटें जीतीं, कॉन्ग्रेस ने 1,805 सीटें हासिल कीं और AAP केवल 42 सीटें जीतने में सफल रही, जिसमें से 25 सीटें सूरत की थीं। AAP सूरत में दूसरे स्थान पर रही, लेकिन निधि ने दावा किया कि AAP पूरे गुजरात में दूसरे स्थान पर आई। इसने सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस की सेना को नाराज कर दिया।

कॉन्ग्रेस पार्टी का समर्थन करने वाले कई ट्रोल्स ने इस विशेष बिंदु को उठाया और उन पर हमला करना शुरू कर दिया। गौरव पाँधी जैसे बड़े नाम निधि को ट्रोल करने वालों में शामिल हैं।

राहुल गाँधी बोरिंग हैं- निधि राजदान

रिपोर्ट में राहुल गाँधी की कहानी का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि वह पार्टी का नेतृत्व करने वाले हैं या नहीं, यह एकतरफा और उबाऊ है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के ‘नाराज नेताओं’ का उल्लेख किया, जिन्हें G-23 के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने पार्टी की वर्तमान स्थिति के बारे में सोनिया गाँधी को पत्र लिखा था। कॉन्ग्रेस पार्टी के पतन के खिलाफ आवाज उठाने के परिणामस्वरूप गुलाम नबी आज़ाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल और अन्य को स्टार प्रचारकों की सूची से हटा दिया गया, जो पार्टी के लिए एक और झटका है।

ट्रोल किए जाने के बाद निधि ने कहा कि उनकी रिपोर्ट पढ़े बिना ही उन्हें निशाना बनाया जा रहा।

कुल मिलाकर, कॉन्ग्रेस समर्थकों को उन समस्याओं की ओर निधि का इंगित करना रास नहीं आया, जिससे पार्टी वर्तमान में जूझ रही है और उन्होंने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

देश में एक ही दिन में 25,000 से अधिक कोरोना केस: महाराष्ट्र, केरल और पंजाब में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े

जनवरी में भारत में कोरोना के मामले 10,000 से कम थे। अफसोस की बात है कि ये फिर से बढ़ रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि तीन राज्यों में हालात सबसे ख़राब हैं। 13 मार्च को भारत में 25,154 नए मामले दर्ज किए। इनमें से महाराष्ट्र में 15,602 नए मामले, केरल में 2,035 मामले और पंजाब में 1,510 नए मामले के साथ कुल 19,147 मामले सामने आए। हालाँकि केरल में मामलों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। महाराष्ट्र और पंजाब संभवतः सेकेंड वेब की तरफ बढ़ रहे हैं।

30-दिन का ट्रेंड

30 दिन पहले, 11 फरवरी को, भारत ने 9,353 मामले दर्ज किए थे। उस दिन, महाराष्ट्र में सिर्फ 652 मामले दर्ज किए गए थे। 5,281 मामलों के साथ केरल का सबसे अधिक योगदान था, उसके बाद पंजाब में सिर्फ 306 मामले थे।

India has reported over 25,000 cases (Image source: https://www.covid19india.org/)

अगले दिन, महाराष्ट्र में 3,000 से अधिक मामले सामने आए और तब से राज्य में संख्या बढ़ रही है। राज्य में 5 मार्च को 10,000 और 12 मार्च को 15,000 से अधिक मामले सामने आये। महाराष्ट्र में मास्क पहनने के नियम तोड़ने वाले लोगों के दृश्य अभी भी आम हैं। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें लोगों के एक बड़े समूह को एक टीकाकरण केंद्र पर एक-दूसरे को धक्का देते हुए देखा गया। सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल एक व्यक्ति को दिए गए स्लॉट में टीका लगाया जा सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संक्रमण का प्रसार न हो। हालाँकि, नियमों को ताक पर रख दिया गया था।

Maharashtra is currently the largest contributor (Image source: https://www.covid19india.org/)

केरल, जो पूरे देश में अधिकतम मामलों में योगदान देने की दौड़ में अग्रणी था, दूसरे स्थान पर आ गया है। हालाँकि, राज्य अभी भी 2,000 से अधिक मामलों में योगदान दे रहा है। विशेष रूप से, कोविड मैनेजमेंट के केरल मॉडल को वायरस फैलने के शुरुआती महीनों के दौरान कई बुद्धिजीवियों द्वारा सराहा गया था।

Kerala with 2035 new cases is on the second position (Image source: https://www.covid19india.org/)

पंजाब में फरवरी में संख्या बहुत अधिक नियंत्रण में थी। राज्य में 22 फरवरी तक 400 से कम मामले आए। इसके बाद, मामले बढ़ने लगे और 4 मार्च तक, राज्य में प्रति दिन 1000 से अधिक मामले आने शुरू हो गए। वर्तमान में, राज्य पिछले चार दिनों से 1300 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं।

Punjab has seen rise in consistent rise in the cases (Image source: https://www.covid19india.org/)

पिछले 24 घंटों में इस लिहाज से अन्य प्रमुख राज्य कर्नाटक (921 नए मामले), तमिलनाडु (695 नए मामले), मध्य प्रदेश (675 नए मामले), गुजरात (775 नए मामले), छत्तीसगढ़ (543 नए मामले), और पश्चिम बंगाल ( 276 नए मामले) हैं।

महाराष्ट्र, पंजाब और केरल में लॉकडाउन की घोषणा

महाराष्ट्र में शिवसेना की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार ने राज्य में कोविड-19 संक्रमण की बढ़ती संख्या के बीच नागपुर, नासिक, परभणी और पुणे में लॉकडाउन किया है।

लुधियाना, पटियाला, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर, नवांशहर, कपूरथला और होशियारपुर सहित कई जिलों में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले पंजाब में रात का कर्फ्यू लगाया गया है। इन जिलों में सभी आँगनबाड़ी केंद्र और स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

CPI (M) के नेतृत्व वाली केरल के साथ सीमा साझा करने वाले राज्यों ने केरल से आने वाले यात्रियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू किए हैं। कर्नाटक में, यदि कोई केरल से आ रहा है, तो उसका कोविड-19 रिपोर्ट नेगेटिव आना अनिवार्य है।

भारत में कोविड-19 मामलों की वर्तमान स्थिति और टीकाकरण

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, भारत में अब तक 1,13,59,048 मामले दर्ज किए गए हैं। 1,09,89,897 लोग ठीक हुए हैं, जबकि 1,58,607 ने अपनी जान गँवाई है। 2,97,38,409 लोगों को [राज्यवार पीडीएफ] टीका लगाया गया है, जिनमें से 2,43,07,635 को पहली खुराक मिली है, जबकि 54,30,774 को दूसरी खुराक मिली है।

आज 26 आयत हटाने की अपील, 36 साल पहले कुरान पर प्रतिबंध लगाने को दायर हुई थी याचिका: जानें क्या हुआ उस मामले का

शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी ने सुप्रीम कोर्ट में कुरान की 26 आयत को हटाने के संबंध में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि इन 26 आयत में से कुछ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली हैं, जिन्हें बाद में शामिल किया गया। इस याचिका के बद उनके खिलाफ मौलानाओं और कट्टरवादियों का आक्रोश आसमान छूने लगा है। मुरादाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता अमीरुल हसन जाफरी ने शनिवार (मार्च 13, 2021) को एक कार्यक्रम में उनका सर काट कर लाने पर 11 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की।

इस तरह की याचिका आज असामान्य लग सकती है। लेकिन आपको बता दें कि आज से 36 साल पहले वकील चाँदमल चोपड़ा और शीतल सिंह ने कुरान पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की माँग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया था। 29 मार्च, 1985 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक आवेदन दायर किया गया था, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय से सरकार को ‘पवित्र पुस्तक’ की प्रत्येक प्रति को ‘जब्त’ करने का निर्देश देने की अपील की गई थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 153A और 295A के आधार पर कुरान की प्रत्येक प्रति दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 95 के तहत ज़ब्त किए जाने के लिए उत्तरदायी है।

चाँदमल चोपड़ा और शीतल सिंह ने ‘काफिरों’ के खिलाफ हिंसा को लेकर आवाज उठाई थी। उन्होंने कुरान के एक आयत को उद्धृत किया, जिसमें कहा गया था, “जब पवित्र महीने समाप्त हो जाते हैं तो जहाँ भी मूर्ति-पूजा करने वाले मिले, उसे मार डालो।” यह मामला शुरू में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति खस्तगीर जे के समक्ष आया था।

उन्होंने इस याचिका पर विचार करते हुए दूसरे पक्षों को नोटिस भी जारी किया था। वरिष्ठ वकील सीएफ अली ने टिप्पणी की थी, “यह बेतुका है। पृथ्वी पर कोई भी नश्वर पवित्र धर्मग्रंथ को चुनौती नहीं दे सकता है और दुनिया की किसी भी अदालत को इस पर कोई अधिकार नहीं है।” जल्द ही, 70 से अधिक अधिवक्ताओं ने ‘खस्तगीर जे’ की अदालत का बहिष्कार करने का आग्रह करते हुए अन्य वकीलों से ‘आधिकारिक प्रस्ताव’ पारित किया।

मुस्लिम समूहों ने ऐतिहासिक याचिका का विरोध किया। जमात-ए-इस्लामी और केरल मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ कलकत्ता जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों ने ‘कुरान रक्षा समिति’ की स्थापना की। हालाँकि, उन्होंने कानून-व्यवस्था के ‘डर’ से मामले में प्रतिवादी नहीं बनने का फैसला किया।

माकपा शासित पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका को लेकर कड़ा रुख दिखाया। हलफनामे में कहा था, “अदालत के पास कुरान पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं है। दुनिया भर के मुसलमानों के पवित्र ग्रंथ प्रत्येक शब्द इस्लामी मान्यता के अनुसार अटल हैं।”

कांग्रेस और सीपीआई (एम) ने मिलाया हाथ

राज्य सरकार ने दावा किया था कि यह याचिका दुर्भावनापूर्ण इरादे से दायर की गई है और भारतीय इतिहास में ऐसी याचिका कभी दायर नहीं की गई। कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भी वाम दलों के रूख का समर्थन करते हुए याचिका का विरोध किया। बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद न्यायमूर्ति खस्तगीर इस मामले से अलग हो गए और इसे न्यायमूर्ति सतीश चंद्र के न्यायालय में भेज दिया गया। राज्य के महाधिवक्ता एस. आचार्य की सलाह पर मामले को न्यायमूर्ति बिमल चंद्र बसाक की खंडपीठ को स्थानांतरित कर दिया गया, जिसने 17 मई 1985 को याचिका खारिज कर दी।

समीक्षा याचिका और तर्क

अधिवक्ता चाँदमल चोपड़ा ने अदालत के फैसले में कई ‘त्रुटियों’ का उल्लेख किया और इस तरह उस वर्ष के 18 जून को एक और आवेदन दायर कर फैसले की समीक्षा की माँग की। जस्टिस बसाक ने अपने पहले के फैसले में यह उल्लेख किया था कि कुरान दिव्य है और इसका कोई सांसारिक स्रोत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि न्यायालय ‘पवित्र पुस्तक’ से संबंधित मामलों पर विचार नहीं कर सकता है और यह अन्य धर्मों का अपमान नहीं करता है।

कलकत्ता कुरान याचिका किताब का प्रकाशन

याचिका खारिज होने के बाद, इतिहासकार सीता राम गोयल ने चंद्राल चोपड़ा के साथ मिलकर 1986 में ‘द कलकत्ता कुरान याचिका’ नाम की पुस्तक प्रकाशित की। इस पुस्तक में मुस्लिम तुष्टिकरण और छद्म धर्मनिरपेक्षता की वोट बैंक की राजनीति पर प्रकाश डाला गया है।

पुस्तक प्रकाशित होने के बाद, हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष इंद्र सेन शर्मा और सचिव राजकुमार आर्य को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने ‘देश में दंगे क्यों होते हैं’ शीर्षक से कुरान की 24 आयत प्रकाशित की थी। उनका कहना था कि ये आयत मुसलमानों को अन्य धर्म के लोगों के खिलाफ लड़ने की आज्ञा देते हैं और जब तक इन आयत को कुरान से हटाया नहीं जाता, तब तक देश में दंगों को रोका नहीं जा सकता है।

केरल: महिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का इस्तीफा, पार्टी ऑफिस के सामने ही सिर मुँड़वाए; महिलाओं को पर्याप्त टिकट नहीं मिलने से नाराज

केरल में कॉन्ग्रेस का संकट खत्म होता नहीं दिख रहा है। विधानसभा चुनाव में महिलाओं को पर्याप्त उम्मीदवारी नहीं मिलने से नाराज पार्टी नेता लतिका सुभाष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लतिका केरल महिला कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष थीं। विरोध जताते हुए उन्होंने तिरुवनंतपुरम में पार्टी दफ्तर के बाहर ही सिर भी मुँड़वा लिया।

केरल में कॉन्ग्रेस 92 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 86 उम्मीदवारों की सूची पार्टी ने रविवार को जारी की। इसमें लतिका सुभाष का नाम नहीं था। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा, मैं दूसरी पार्टी में शामिल होने नहीं जा रही हूं। लेकिन विरोध जताने के लिए मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

लतिका ने कहा कि कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एम रामचंद्रन ने उम्मीदवारों की सूची तैयार करते वक्त महिलाओं की दावेदारी की अनदेखी की, जो स्वीकार्य नहीं है। अब तक घोषित 91 उम्मीदवारों में से केवल 9 महिला हैं, जबकि महिला कॉन्ग्रेस ने इन चुनावों में कम से कम 20 सीटें माँगी थी।

लतिका खुद इत्तूमनूर सीट से दावेदारी जता रहीं थी। लेकिन पार्टी ने यहाँ से प्रिंस लुकोश को उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने कहा, “मैंने इत्तूमनूर से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी कि क्योंकि मैं यहाँ पैदा हुई और पली-बढ़ी हूँ।”

केरल में हाल में कई बड़े नेताओं ने कॉन्ग्रेस छोड़ी है। इनमें प्रदेश सचिव एमएस विश्वनाथन, महिला कॉन्ग्रेस सचिव सुजया वेणुगोपाल, इंटक महासचिव पीके अनिल कुमार, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य केके विश्वनाथन जैसे नेता शामिल हैं।

पार्टी केरल में 92 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस ने अभिनेता धर्माजन को कोझिकोड जिले की बालुस्सेरी सीट से उतारा है। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी को पुथुपल्ली सीट से जबकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्नीथला को हरिपद सीट से उम्मीदवार बनाया है।

SC/ST एक्ट में झूठी शिकायत पर हो कार्रवाई, पीड़ितों को मिले मुआवजा: विष्णु तिवारी का हवाला दे सुप्रीम कोर्ट में PIL

विष्णु तिवारी के मामले का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में SC/ST एक्ट के तहत झूठी शिकायतें करने वालों पर कार्रवाई और पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजे के लिए सिस्टम बनाने की अपील की गई है। याचिका भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर की है। 20 साल जेल में बिताने के बाद बरी किए गए विष्णु तिवारी के लिए भी पर्याप्त मुआवजे की माँग की गई है।

याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह आपराधिक मामलों में झूठी शिकायतें दर्ज कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और इस तरह के गलत आरोप लगाए जाने पर पीड़ितों के लिए मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश बनाए।

कपिल मिश्रा ने याचिका में विष्णु तिवारी का उल्लेख किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले दिनों विष्णु तिवारी को निर्दोष करार दिया था। तिवारी को SC/ST (अत्याचार रोकथाम) कानून के तहत अत्याचार और बलात्कार के मामले में 16 सितंबर, 2000 को गिरफ्तार किया गया था।

याचिका में गलत तरीके से दोषी ठहराए जाने और झूठे मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के कारण तिवारी को मुआवजा दिए जाने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है, “झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतें दर्ज करके कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। केंद्र को निर्देश दिया जाए कि वह फर्जी शिकायत करने वालों के खिलाफ अभियोग चलाने और कड़ी कार्रवाई करने के लिए एक सिस्टम बनाने और गलत तरीके से चलाए गए मुकदमों के पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा देने के लिए दिशा-निर्देश बनाए। गलत तरीके से मुकदमा चलने पर विधि आयोग की रिपोर्ट की सिफारिश लागू करे।”

याचिका में यह भी कहा गया है कि विशेष अधिनियमों के तहत झूठी शिकायत करने पर यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 व यौन उत्पीड़न के मामलों में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी कोई मुकदमा नहीं चल पाता है। झूठे मुकदमों के पीड़ितों को भी आर्थिक मुआवजा नहीं मिलता।

BJP नेता ने इस याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार और विधि आयोग को पक्षकार बनाया है। याचिका में विशेष कानूनों के तहत आरोपित बनाए गए विचाराधीन कैदियों के मामलों के जल्द निपटारे के लिए एक सिस्टम बनाए जाने और निश्चित समय के भीतर विचाराधीन कैदियों के मामलों पर फैसला किए जाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाने का अनुरोध किया गया है।

गौरतलब है कि विष्णु तिवारी के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। संस्था ने उत्तर प्रदेश के DGP और और मुख्य सचिव को जवाब देने को कहा था। NHRC ने पूछा कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? साथ ही पीड़ित विष्णु तिवारी को राहत और उनके पुनर्वास के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं, NHRC ने इसका भी विस्तृत विवरण माँगा था।

मंदिर में मुस्लिम लड़की ने हिंदू से की शादी, हाई कोर्ट ने कहा- शादी मान्य नहीं, लिव इन में रह सकते हैं: जानें फैसले का आधार

18 साल की मुस्लिम लड़की। 25 साल का हिंदू युवक। दोनों ने 15 जनवरी 2021 को दुराना गाँव के शिव मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की। फिर पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जोड़े ने अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी शादी को वैध नहीं माना।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जोड़े ने सुरक्षा के लिए पहले पुलिस से गुहार लगाई थी। वहाँ से निराशा मिलने के बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन जस्टिस अरुण कुमार त्यागी की पीठ ने उनकी शादी को वैध नहीं माना। अदालत ने कहा कि शादी से पहले महिला ने हिंदू धर्म स्वीकार नहीं किया था। लिहाजा हिंदू रिवाजों से एक मुस्लिम महिला और एक हिंदू पुरुष के बीच शादी मान्य नहीं होगी।

साथ ही अदालत ने कहा कि दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता नंबर 1 (महिला) बालिग होने के नाते अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ, उसकी पसंद की जगह पर रहने की हकदार है और दोनों याचिकाकर्ता, विवाह की प्रकृति में लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने के और उनके जीवन की सुरक्षा के लिए भी और स्वतंत्रता के हकदार होंगे।”

दोनों की सुरक्षा के लिए अंबाला के एसपी को कदम उठाने के निर्देश भी अदालत ने दिए। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान अदालत ने नंदकुमार और एक अन्य बनाम केरल राज्य और अन्य: 2018 (2) आरसीआर (सिविल) 899 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया।

गौरतलब है कि पिछले महीने पंजाब ऐंड हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मुस्लिम नाबालिग की शादी को वैध ठहराया था। अदालत ने कहा था कि मुस्लिम लॉ माहवारी के बाद शादी को जायज मानता है। इस मामले में मुस्लिम महिला की आयु 17 साल और उससे विवाह करने वाले की उम्र 36 साल थी।

इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक विवाहित जोड़े की पुलिस सुरक्षा के लिए दायर याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि लड़की जन्म से मुस्लिम थी। उसने शादी से एक महीने पहले हिंदू धर्म अपनाया था। इस फैसले में अदालत ने कहा था कि धर्मांतरण केवल शादी के उद्देश्य से हुआ।

‘सचिन वाजे के 6 से ज्यादा बिजनेस, शिवसेना नेता पार्टनर’: 25 मार्च तक NIA की कस्टडी में रहेगा, संजय राउत ने किया बचाव

25 फरवरी 2021 को मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ के बाहर विस्फोटक लदी एक स्कॉर्पियो खड़ी मिली थी। इस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने शनिवार (13 मार्च 2021) की रात मुंबई क्राइम ब्रांच में रहे ​सचिन वाजे को गिरफ्तार किया था। बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने बताया है कि वाजे के आधा दर्जन से ज्यादा बिजनेस हैं। उनका दावा है कि वाजे के पाटर्नर शिवसेना के नेता हैं।

सोमैया ने कहा, “मुंबई के पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के 6 से अधिक बिजनेस हैं- मल्टीबिल्ड इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, टेकलीगल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, डीजीनेक्स्ट मल्टीमीडिया लिमिटेड और भी कई हैं। इसमें बिजनेस पार्टनर कौन है? शिवसेना के नेता संजय माशेलकर और विजय गवई। सचिन वाजे चीज क्या है?”

वहीं संजय राउत ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मेरा मानना है कि सचिन वाजे एक बहुत ही ईमानदार और सक्षम अधिकारी हैं। उसे जिलेटिन की छड़ें पाए जाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। एक संदिग्ध मौत भी हुई। मामले की जाँच करना मुंबई पुलिस की जिम्मेदारी है। किसी केंद्रीय टीम की जरूरत नहीं थी।”

पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र के सीएम और गृह मंत्री उनके बचाव में इस तरह आ रहे हैं, जैसे वे उनके वकील हों। मुझे लगता है कि अभी तो केवल एक एंगल सामने आया है, लेकिन मनसुख हिरेन की मौत का मामला अभी तक हल नहीं हुआ है। जाँच से पता चलेगा कि कौन शामिल था और उसका क्या इरादा था।”

सचिन वाजे को आज (14 मार्च) को वाजे को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने 25 मार्च तक उसे NIA की कस्टडी में भेज दिया। इससे पहले सचिन वाजे ने ठाणे की एक अदातल में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जो खारिज कर दी गई थी। कोर्ट से NIA ने सचिन वाजे की 14 दिन की कस्टडी माँगी थी। NIA ने कहा है कि यह एक बड़ी साजिश है। इसमें कई लोगों के शामिल होने का संदेह है।

इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि सचिन वाजे ने कबूल कर लिया है कि वो षड्यंत्र का हिस्सा थे। सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि वह इस पूरे षड्यंत्र का एक बहुत छोटा सा हिस्सा है। बड़े खिलाड़ी शिवसेना के वे नेता हैं, जिनका उसने नाम लिया है।

सचिन वाजे के बारे में बता दें कि उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहा जाता रहा है। कोल्हापुर के रहने वाले वाजे 1990 बैच के अधिकारी हैं, जिन्होंने 1992-2004 के बीच 63 अपराधियों का एनकाउंटर किया। घाटकोपर ब्लास्ट से जुड़े मामले में ख्वाजा यूनुस की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी, जिसके बाद CID जाँच हुई और वाजे गिरफ्तार हुए। निलंबन के बाद वो शिवसेना में चले गए, लेकिन 2020 में उन्हें शिवसेना की सरकार में फिर वर्दी मिल गई।

ममता बनर्जी को एक और चोट, टॉलीगंज से बाबुल सुप्रियो को उतारकर BJP ने टीएमसी की ‘सेफ’ सीट का गणित बिगाड़ा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम में नामांकन के दौरान लगी चोट का सियासी फायदा उठाने की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने पूरी कोशिश की। लेकिन जल्दी ही यह बात स्पष्ट हो गई कि टीएमसी जिसे ‘हमला’ बता रही है, वह असल में हादसा थी। इसके बाद यह खबर आई कि ममता बनर्जी टॉलीगंज से भी विधानसभा का चुनाव लड़ सकती हैं, जो पार्टी के लिए सेफ सीट मानी जाती है।

लेकिन, बीजेपी ने रविवार (14 मार्च 2021) को बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है, उससे जाहिर है कि वह ममता बनर्जी के लिए कोई भी सीट सुरक्षित नहीं रहने देगी। उसने टॉलीगंज से केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को मैदान में उतारा। फिलहाल इस सीट से तीन बार के विधायक अरूप विश्वास टीएमसी के आधिकारिक उम्मीदवार हैं। लेकिन बताया जाता है कि टिकट देने के साथ ही उन्हें अपना प्रचार धीमा रखने के निर्देश देते हुए यह बता दिया गया था कि ममता खुद यहाँ से मैदान में उतर सकती हैं। इस सीट पर 10 अप्रैल को मतदान होगा। नामांकन भरने की अंतिम तारीख 23 मार्च है।

मीडिया रिपोर्टों में टीएमसी सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि चोट लगने के बाद ममता बनर्जी को एहसास है कि वह अब नंदीग्राम में धुआंधार प्रचार नहीं कर सकती। शुभेंदु अधिकारी के बीजेपी में जाने के बाद इस इलाके में पार्टी कैडरों के गिरे मनोबल को उठाने के लिए ममता ने यहाँ से चुनाव लड़ने का फैसला किया था। लेकिन, अब बदले हालात में कयास लग रहे हैं कि वह दूसरी सीट से भी चुनाव लड़ेंगी और वह सीट दक्षिण कोलकाता की टॉलीगंज होगी। यह बंगाली फिल्म उद्योग का केंद्र है और अब तक टीएमसी के लिए सेफ रही है। लेकिन, सांसद बाबुल सुप्रियो की उम्मीदवारी ने इस सीट को भी हाई प्रोफाइल और कड़े मुकाबले का रणक्षेत्र बना दिया है।

बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए 8 चरणों में चुनाव में होना है। चुनाव 27 मार्च से शुरू होकर 29 अप्रैल तक होंगे। मतों की गिनती 2 मई को होगी। बीजेपी ने रविवार को तीसरे चरण के लिए 27 और चौथे चरण के लिए 36 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया। इनमें बाबुल सुप्रियो के अलावा कई अन्य सांसदों के भी नाम हैं।

पार्टी महासचिव अरुण सिंह ने बताया कि अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी अलीपुरद्वार से, डोमजूर से राजीव बनर्जी और सिंगुर से रबींद्र भट्टाचार्य उम्मीदवार होंगे। स्वप्न दासगुप्ता (तारकेश्वर), सांसद निशित प्रमाणिक (दिनहट्टा) और अभिनेता यश दास गुप्ता (चंदिताला) से चुनाव लड़ेंगे। सांसद लॉकेट चटर्जी को चुंचुरा से पार्टी ने मैदान में उतारा है।

केरल में 115 सीटों पर चुनाव लड़ेगी बीजेपी

भारतीय जनता पार्टी ने केरल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों का एलान कर दिया है। केरल में बीजेपी 115 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने जा रही है। केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 25 सीटें अपनी चार सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ी हैं। बीजेपी ने ‘मेट्रो मैन’ ई श्रीधरन को भी टिकट दिया है। वो पलक्कड से चुनाव लड़ेंगे।

तमिलनाडु में बीजेपी ने जारी की 17 उम्मीदवारों की लिस्ट

बीजेपी ने तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 17 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। धारापुरम से प्रदेश अध्यक्ष एल मुरूगन को टिकट दिया गया है। वहीं खुशबू सुंदर को थाउजेंड लाइट्स से टिकट मिला है। बीजेपी राज्य में एआईएडीएमके साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है।

आतंकी अख्तर से पूछताछ के बाद सचिन वाजे गिरफ्तार: तिहाड़ में फोन और एंटीलिया के बाहर बम कनेक्शन खोज रही पुलिस

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 13 मार्च को तिहाड़ जेल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने इंडियन मुजाहिद्दीन (IM) के आतंकी तहसीन अख्तर के बैरक से मिले मोबाइल फोन को लेकर पूछताछ की। अख्तर को बम बनाने के लिए जाना जाता है। वह यासीन भटकल का करीबी सहयोगी है, जिसने इंडियन मुजाहिद्दीन आतंकवादी समूह की स्थापना की थी।

कथित तौर पर फोन का इस्तेमाल टेलीग्राम चैनल बनाने के लिए किया गया था, जिसमें जैश-उल-हिंद एक समूह था। इसी चैनल से 27 फरवरी की रात मुकेश अंबानी के घर के बाहर एसयूवी खड़ी करने की जिम्मेदारी ली गई थी। इसी समूह ने इस साल जनवरी में इज़राइल दूतावास के पास कम तीव्रता वाले बम विस्फोट की जिम्मेदारी भी ली थी।

रिपोर्टों से पता चला है कि जेल नंबर 8 में उसके बैरक से दो स्मार्टफोन बरामद किए गए थे। शुक्रवार को पुलिस ने अख्तर से पूछताछ करने के लिए स्थानीय अदालत से अनुमति माँगी। हिंदुस्तान टाइम्स ने एक जेल अधिकारी के हवाले से कहा, ”विशेष सेल अधिकारी तहसीन अख्तर से पूछताछ कर रहे हैं। हमने उन्हें गुरुवार (मार्च 11, 2021) रात को फोन सौंप दिया था। वे 13 मार्च की दोपहर में आए और अभी भी अंदर पूछताछ कर रहे हैं।”

कई आतंकवादियों ने फोन का इस्तेमाल किया- रिपोर्ट्स

जब पुलिस को फोन के बारे में पता चला और उसने एक निजी साइबर एजेंसी की मदद से इसका पता लगाया, तो पाया कि यह फोन या तो तिहाड़ जेल में या फिर इसके आस-पास ऑपरेट किया जा रहा है। शुरुआती जाँच के दौरान, पुलिस ने पाया कि कम से कम पाँच अन्य आतंकवादियों ने फोन का इस्तेमाल किया।

ऐसा माना जाता है कि इज़राइली दूतावास के बाहर हुए धमाके में भी इसी फोन का इस्तेमाल किया गया होगा। उप-जेल नंबर 8 में दर्ज अन्य आतंकवादी हैं, जिनके अल-कायदा और अंडरवर्ल्ड अपराधियों से संबंध हैं।

भारत में कई विस्फोटों में अख्तर की भागीदारी

अख्तर 2006 से 2013 तक बम विस्फोटों की सीरीज में शामिल था, जिसमें वाराणसी में 2006 विस्फोट, मुंबई में 2011 के सीरियल धमाकों और हैदराबाद में 2013 के विस्फोट शामिल हैं। उसे 2013 के हैदराबाद विस्फोट मामले में शामिल होने के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी।

एंटीलिया बम कांड मामला

गौरतलब है कि हाल ही में, बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के घर (एंटीलिया) के बाहर एक संदिग्ध कार बरामद हुई थी। मामले में मुंबई पुलिस के विवादित अधिकारी सचिन वाजे को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है। सचिन वाजे से शनिवार (मार्च 13, 2021) को 12 घंटे तक पूछताछ की गई और फिर देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 

वाजे की गिरफ्तारी के बाद मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर मिली स्कॉर्पियो कार को लेकर बड़ा खुलासा हुआ। ख़बरों में बताया गया कि एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो वही थी, जिसका इस्तेमाल अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के दौरान सचिन वाजे ने किया था।

ख़बरों में कहा जा रहा है कि ATS को अब वो CCTV फुटेज भी मिल गया है, जिसमें अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी से उसका कनेक्शन सामने आ रहा है। ये भी पता चला है कि उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर फेक है।

कमला नेहरू ट्रस्ट: कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद के बेटे सहित 12 पर FIR, रायबरेली में 5 बीघा जमीन हथियाने का मामला

कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में कमला नेहरू ट्रस्ट की जमीन से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने FIR दर्ज की है। जिला प्रशासन ने ट्रस्ट को जमीन देने में सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ करने वाले ट्रस्ट के पदाधिकारी, तत्कालीन अधिकारी और कर्मी समेत 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। ADM (वित्त एवं राजस्व) ने शहर कोतवाली में इसकी तहरीर दी थी, जिसके आधार पर मामला दर्ज हुआ।

अब इस मामले में सीधे कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार पर आरोप लग रहे हैं। शहर के सिविल लाइंस स्थित करीब 5 बीघा भूमि कमला नेहरू ट्रस्ट के नाम की गई थी। यह ट्रस्ट प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पत्नी के नाम पर है। उस पर एक महाविद्यालय बनाया जाना था। इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया था। लेकिन, जमीन पड़ी हुई थी और कई लोगों ने यहाँ पर दुकानें खोल ली थीं।

16 दिसंबर 2020 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद अवैध अतिक्रमण को जिला प्रशासन ने हटवाया। दीवानी न्यायालय में इस मामले में सुनवाई चल रही थी, लेकिन अब नया ट्विस्ट आ गया हो। ADM प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने इस मामले में कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद शीला कौल के बेटे विक्रम कौल, ट्रस्ट के सचिव सुनील देव, तत्कालीन ADM (वित्त एवं राजस्व) मदनपाल पाल आर्य, सब-रजिस्ट्रार घनश्याम, प्रशासनिक अधिकारी विन्धवासिनी प्रसाद, नजूल लिपिक रामकृष्ण श्रीवास्तव और गवाह सुनील तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

इन सबके अलावा सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ के मामले में तत्कालीन तहसीलदार कृष्ण पाल सिंह, प्रभारी कानूनगो प्रदीप श्रीवास्तव, लेखपाल प्रवीण कुमार मिश्रा, नजूल लिपिक छेदीलाल जौहरी समेत अन्य पदाधिकारियों पर FIR दर्ज की गई है। सिटी मजिस्ट्रेट ने जब दस्तावेजों की जाँच की तो कई जगह सफ़ेद रंग लगा था। तत्कालीन DM की अनुमति नहीं ली गई थी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने FIR की कॉपी शेयर करते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस और जमीन का गहरा नाता है। जमीन पर काम करने का नहीं, जमीन लूटने का। अमेठी में ‘सम्राट साइकिल के नाम पर गरीबों की जमीन लूटने के बाद अब तैयारी थी सोनिया गाँधी के इलाके रायबरेली में बेशकीमती जमीन हथियाने की। लेकिन, योगीराज में दाल ना गली, उल्टे कमला नेहरू ट्रस्ट पर ही हो गई संगीन FIR।”

दिसंबर 2020 में कमला नेहरू ट्रस्ट के नाम से दर्ज जमीन विवाद मामले को लेकर जिला प्रशासन ने अवैध रूप से कब्जा जमाए लोगों की दुकानों और मकान पर बुलडोजर चलवाया था। कमला नेहरू ट्रस्ट चालीस साल पहले एक शैक्षिक समाज, स्कूल और अस्पताल बनाने के उद्देश्य से बनाया गया था। कमला नेहरू एजुकेशनल सोसायटी की स्थापना 1976 में रायबरेली के सिविल लाइंस इलाके में सिधौली के रहने वाले कैलाश चंद्र द्वारा की गई थी।