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नरवाल की मस्जिद में मौलवी बनकर रह रहा था रोहिंग्या, उन्नाव और नोएडा से भी दबोचे गए

उत्तर प्रदेश के नोएडा और उन्नाव से दो रोहिंग्या पकड़े गए हैं। जम्मू-कश्मीर से भी दो रोहिंग्या को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से जाली दस्तावेज भी मिले हैं।

उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने सोमवार (मार्च 1, 2021) को उन्नाव और नोएडा से दो रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किया। आरोप है कि ये दोनों भारत में अवैध तरीके से रोहिंग्या की एंट्री करवाते थे। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय (UNHCR) में उनका पंजीकरण करा कर देश के अलग अलग शहरों में उनके रहने और रोजगार की व्यवस्था करते थे। इसके लिए फर्जी दस्तावेज भी तैयार कराते थे। ATS को दोनों की देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के सबूत हाथ लगे हैं।

म्यांमार के आकियाब जिले के निवासी

अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था (ADG) प्रशांत कुमार ने बताया कि ATS ने नोएडा से मोहम्मद फारुख व उन्नाव से शाहिद को गिरफ्तार किया है। मोहम्मद फारुख का असली नाम हसन अहमद है जो म्यांमार के आकियाब जिले का रहने वाला है। दोनों सगे भाई हैं। पूछताछ में पता चला है कि इनकी माँ और बहन भी अलीगढ़ में रहती हैं। इनके पास से 5 लाख रुपए व तमाम भारतीय दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। इनके बाकी साथियों को जिन्हें बंग्लादेश से भारत लाया गया है, उन तमाम लोगों की जानकारी जाँच टीम जुटाएगी। अभी तक 1600 रोहिंग्याओं को चिन्हित किया गया है। जिनकी तलाश जारी है।

ADG प्रशांत कुमार ने बताया कि पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपितों का बहनोई हुसैन अहमद परिवार सहित हरियाणा के नूह में रहता है। फारुख ने स्वीकार किया है कि वह अपने भाई शाहिद के साथ मिलकर रोहिंग्याओं को बांग्लादेश बॉर्डर से से भारत लाता था। 

जम्मू-कश्मीर में भी पकड़े गए दो रोहिंग्या

वहीं जम्मू-कश्मीर में भी दो रोहिंग्याओं को पकड़े जाने की खबर है। इनमें से एक नरवाल की एक मस्जिद में मौलवी बनकर रह रहा था। उसका साथी भी पकड़ा गया। इनके पास से त्रिकुटा नगर पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बरामद किया है।

जानकारी के मुताबिक म्यांमार का रहने वाला मौलवी अब्दुल गफूर पुत्र अब्दुल जब्बार इन दिनों रहीम नगर में और म्यांमार का ही उसका साथी आशिक उर रहमान बठिंडी मोड़ में रह रहा था। सूचना पर एसएचओ त्रिकुटा नगर दीपक पठानिया ने दबिश देकर दोनों को हिरासत में लिया और उनके सामान की तलाशी ली। वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों को कुछ मजहबी दस्तावेज भी मिले हैं, जिनकी जाँच की जा रही है।

फुरफुरा शरीफ के लिए ममता बनर्जी ने खोला खजाना, चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं ‘भाईजान’

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है। आदर्श अचार संहित लागू होने से कुछ ही घंटों पहले ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार ने फुरफुरा शरीफ के विकास के लिए 2.60 करोड़ रुपए आवंटित किया।

वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह फंड मुख्य रूप से 20 ऊँचे खंभों और 400 एलईडी स्ट्रीट लाइट एवं तीर्थ के अन्य सौंदर्यीकरण परियोजनाओं के लिए उपयोग किया जाएगा। वित्त वर्ष 2020-21 में, वित्त विभाग ने कम से कम 60 योजनाओं और फुरफुरा शरीफ विकास प्राधिकरण के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए आवंटित किए।”

राजस्थान के अजमेर शरीफ के बाद टालटोला स्थित फुरफुरा शरीफ दरगाह देश की दूसरी सबसे बड़ी सूफी मजार है। इस दरगाह का दक्षिण बंगाल के इलाकों में काफी प्रभाव माना जाता है। इस दरगाह से जुड़े ‘भाईजान’ नाम से मशहूर पीरजादा सिद्दीकी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने तृणमूल की परेशानियॉं पहले ही बढ़ा रखी है। लिहाजा इस ऐलान को समुदाय विशेष के मतदाताओं को लुभाने की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है।

बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने यह फैसला इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के नेता और फुरफुरा शरीफ दरगाह के मौलाना अब्बास सिद्दीकी के डर से किया है। बता दें कि ममता की पार्टी में कई नेताओं की बगावत के बाद अब एक और राजनीतिक दल इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) बंगाल में चर्चा का विषय है। इस राजनीतिक फ्रंट को बनाने वाले फुरफुरा शरीफ दरगाह के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री से भी तृणमूल कॉन्ग्रेस के खेमे में बेचैनी है, क्योंकि ममता बनर्जी ने पिछले एक दशक में मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर खासी सक्रियता दिखाई है। अब पश्चिम बंगाल में ओवैसी को बंगाल के सबसे प्रभावशाली मौलानाओं में से एक अब्बास सिद्दीकी का साथ मिल रहा है। विश्लेषक मानते हैं कि 2011 में मुस्लिम वोट बैंक के सहारे ही ममता बनर्जी ने साढ़े 3 दशक से सत्ता पर काबिज वामपंथियों को हराया था।

बता दें कि सिद्दीकी का असदुद्दीन ओवैसी को समर्थन देना राज्य में मुस्लिम वोटों की बड़ी गोलबंदी की ओर इशारा करता है, जिसका सीधा प्रभाव ममता बनर्जी पर पड़ने वाला है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सिद्दीकी तृणमूल के बंगाली मुस्लिम वोट का एक बड़ा हिस्सा छीन सकते हैं। ये वो वोट होंगे, जो अब तक दक्षिण बंगाल में तृणमूल के साथ थे और उत्तरी बंगाल में में कॉन्ग्रेस के साथ!

गौरतलब है कि हाल ही में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता फिरहाद हकीम को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए कोलकाता की एक मस्जिद में राजनीतिक भाषण देते हुए पाया गया था। फिरहाद हकीम ने कहा कि यदि राज्य में फिर से ममता बनर्जी की सरकार बनती है तो इमामों को दिया जाने वाला भत्ता (मानदेय) बढ़ा दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य में मुस्लिम मौलवियों की मासिक आय बढ़ाने की उनकी योजना है। दिलचस्प बात यह है कि उनके बगल में बैठे इमाम ने दर्शकों से ‘आमीन’ कहने का आग्रह किया था।

PK को पंजाब के सीएम ने बनाया प्रिंसिपल एडवाइजर, नेटिजन्स बोले- वे जानते हैं, बंगाल में दाल नहीं गलेगी

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आज (मार्च 1, 2021) जानकारी दी कि प्रशांत किशोर उनके प्रिंसिपल एडवाइजर (प्रधान सलाहकार) होंगे। सीएम अमरिंदर ने ट्वीट कर कहा, “ये साझा करते हुए खुश हूँ कि प्रशांत किशोर मेरे साथ बतौर प्रिंसिपल एडवाइजर जुड़ रहे हैं। उम्मीद है पंजाब के लोगों की बेहतरी के लिए काम करेंगे।”

बता दें कि प्रशांत किशोर बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC के चुनावी रणनीतिकार हैं। बीते दिनों उन्होंने दावा किया था, “मीडिया का एक वर्ग बीजेपी के समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, हकीकत यह है कि बीजेपी दहाई के आँकड़े के लिए संघर्ष कर रही है। अगर बीजेपी बंगाल में बेहतर प्रदर्शन करती है तो मैं इस जगह को छोड़ दूँगा।”

प्रशांत किशोर के पिछले दावों और कैप्टन अमरिंदर सिंह की घोषणा के बाद ये चर्चा सोशल मीडिया पर तेज हो गई है कि क्या प्रशांत किशोर बंगाल चुनाव में पराजय की आहट से डर गए हैं? शैशव मित्तल लिखते हैं, “प्रशांत बंगाल से भागे क्योंकि उन्हें दिख रहा है कि अब उनकी दाल बंगाल में नहीं गलेगी। इसलिए नया काम ढूँढ लिया। वैसे उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा 99 से ज्यादा सीट जीत गई तो वह जगह को छोड़ देंगे- क्या हुआ तेरा वादा।”

एक ट्वीट में कहा गया है कि प्रशांत किशोर सही खेल गए। उन्हें पता था कि बंगाल चुनाव के बाद उन्हें कहीं जॉब नहीं मिलेगी। ज्योतिष लिखते हैं कि इसे रणनीतिकार कहते हैं। अगर ये 2 मई तक का इंतजार करते तो शायद बिजनेस डील में नुकसान होता।

पिंटू यादव कहते हैं, “अब पंजाब की बारी है। ममता दीदी को डुबाने के बाद इन्होंने पंजाब का रुख किया है।” वहीं एक दूसरे अकाउंट से कहा गया है, “उन्होंने (प्रशांत ने) टीवी शो में कहा था कि बंगाल में अगर भाजपा 99 सीट लाई तो वह राजनीति छोड़ देंगे। उन्हें कम से कम कोई अन्य राजनीतिक जिम्मेदारी सँभालने से पहले 2 मई का इंतजार करना चाहिए। आखिर नैतिकता का सवाल है। “

गौरतलब है कि प्रशांत किशोर पहली बार कैप्टन अमरिंदर सिंह से नहीं जुड़े हैं। पंजाब के 2017 के विधानसभा चुनावों के समय भी उन्होंने कॉन्ग्रेसी की रणनीति तैयार करने में मदद की थी। उस समय अमरिंदर सिंह ने कहा भी था, “मैं बहुत बार कह चुका हूँ कि पीके और उनकी टीम के काम ने हमारी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।”

‘हिंदू होना और जय श्रीराम कहना अपराध नहीं’: ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष रश्मि सामंत का इस्तीफा

रश्मि सामंत ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। कर्नाटक से आने वाली रश्मि ने हाल ही में स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनकर इतिहास रचा था। अपनी हिंदू पहचान और उपनिवेशवाद विरोधी विचारों को लेकर ऑनलाइन निशाना बनाए जाने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया है।

कुछ पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सामंत को निशाना बनाते हुए इसे नस्ली और असंवेदनशील बताया गया। इन पोस्टों के जरिए उन्हें नस्लवादी, यहूदी विरोधी, इस्लामोफोबिक, ट्रांसफ़ोबिक बताने की कोशिश की गई। यहाँ तक कि उनके हिंदू होने को लेकर भी निशाना साधा गया। सामंत को 11 फरवरी को प्रतिष्ठित पद के लिए चुना गया था, लेकिन ऑनलाइन आलोचना और दुर्व्यवहार का सामना करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

दरअसल रश्मि सामंत ने 2017 में जर्मनी में बर्लिन होलोकास्ट मेमोरियल की यात्रा के दौरान एक पोस्ट में कुछ तस्‍वीरें पोस्‍ट की थीं, जिसमें वह मलेशिया के बुद्ध मंदिर के बाहर खड़ी हैं। इसके कैप्‍शन में उन्‍होंने लिखा था- चिंग चांग। ऑक्सफोर्ड द्वारा प्रकाशित होने वाले एक साप्ताहिक स्टूडेंट अखबार ‘चेरवेल’ द्वारा इस खबर को प्रकाशित करने के बाद विवाद गहरागया। एक अन्य कैप्शन में, रश्मि ने एक छात्र संघ अध्यक्षीय डिबेट में केप कॉलोनी के पूर्व प्रधानमंत्री (वर्तमान दक्षिण अफ्रीका) सेसिल रोड्स और एडॉल्फ हिटलर के बीच तुलना की।

इसके अलावा, ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट यूनियन के अभियान ने नस्लीय जागरूकता और समानता (CRAE) के लिए और ऑक्सफोर्ड SU LGBTQ अभियान ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति-चुनाव के लिए सोशल मीडिया पोस्ट की आलोचना की।

उपरोक्त आरोपों के अलावा, रश्मि को एक समर्पित हिंदू होने के लिए भी निशाना बनाया गया था। ऑक्सफोर्ड के एक फैकल्टी मेंबर ने रश्मि के माता-पिता को विवाद में घसीटते हुए एक पोस्ट किया, जिसमें उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर भगवान श्री राम की तस्वीर दिखाने के लिए हमला करते हुए आरोप लगाया गया कि रश्मि के छात्र परिषद चुनावों को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वित्त पोषित किया गया था।

इस अपमानजनक पोस्ट में, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सदस्य ने रश्मि पर इस्लामोफोबिक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह तटीय कर्नाटक से आई है, जिसे फैकल्टी सदस्य ने ‘इस्लामोफोबिक सुदूर ताकतों का गढ़’ कहा। प्रोफेसर ने डिकोलोनाइजेशन पर विचारों के लिए भी सामंत पर हमला किया और ऐसा करने के लिए, कई पश्चिमी लोगों के बीच प्रचलित हिंदू संस्कृति और परंपराओं की विकृत समझ का प्रदर्शन किया।

रश्मि ने बाद में अपने पद से इस्तीफा दे दिया और कर्नाटक के उडुपी जिले में अपने घर लौट आईं। इससे पहले रश्मि सामंत ने ओपन लेटर लिखकर सोशल मीडिया पर अपने इस्‍तीफे की घोषणा की। अपने पत्र में, रश्मि ने ऑक्सफोर्ड में छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में चुने जाने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया।

उन्होंने अपने हिंदू होने और सोशल मीडिया पोस्टों के लिए परेशान किए जाने के बारे में भी बात की। रश्मि विशेष रूप से एक फैकल्टी सदस्य द्वारा अपने माता-पिता पर किए गए अनुचित हमले और सार्वजनिक तौर पर उनकी धार्मिक भावनाओं का अपमान करने से आहत थीं।

रश्मि ने कहा, “यह सच कि मैं हिंदू हूँ। यह मुझे ऑक्सफोर्ड एसयू का अध्यक्ष बनने के लिए असहिष्णु या अनफिट नहीं बनाता है। इसके विपरीत, मैं वास्तविक अर्थों में विविधता के मूल्य को समझती हूँ, हालाँकि विकसित दुनिया की पेचीदगियों के लिए मेरा संपर्क सीमित है।”

उन्होंने कहा, “मैंने अपने कदम पीछे खींचे, क्योंकि मेरे संस्कारों ने मुझे ‘संवेदनशील’ होना सिखाया। उन लोगों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील, जिन्होंने मुझ पर अपना विश्वास दिखाया, मैं अपने उन विचारों के लिए संवेदनशील हूँ कि मुझे मनुष्यों का सम्मान करना है और और छात्र समुदाय के कल्याण के लिए संवेदनशील हूँ, जो एक कामकाजी एसयू के हकदार हैं और व्यक्तिगत स्तर पर, साइबरबुलिंग के उन प्रभावों के प्रति संवेदनशील हूँ जो ‘संवेदनशीलता’ के नाम पर मेरे खिलाफ टारगेट किया।”

इंडिया अहेड न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में, सामंत ने खुद का बचाव करते हुए कहा कि उनके द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट 5 साल पहले किए गए थे, जब वह किशोरी थी और मुद्दों के बारे में अपनी प्रतिबद्धता नहीं बनाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा दिए गए कैप्शन दूसरों को चोट पहुँचाने के इरादे से नहीं दिए गए थे।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक फैकल्टी सदस्य द्वारा विवाद में घसीटे जाने के बारे में पूछे जाने पर सामंत ने कहा कि हिंदू होना और ‘जय श्रीराम’ कहना अपराध नहीं है और वह इस बात से हैरान थी कि पद से इस्तीफा देने के लिए उन पर दबाव बनाने के लिए उनके माता-पिता की धार्मिक भावनाओं और अभिव्यक्तियों का खुले तौर पर अपमान किया गया ।

महाराष्ट्र: MLA अबू आजमी ने पूछा- मुस्लिम आरक्षण कब, उद्धव के मंत्री ने कहा- जल्द

महाराष्ट्र में जब ​सरकार बनाने के लिए शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने महा विकास अघाड़ी का गठन किया था तो मुसलमानों के लिए आरक्षण की बात कही थी। अब उद्धव ठाकरे सरकार में कॉन्ग्रेस कोटे से मंत्री असलम शेख ने कहा है, “हम मुस्लिम आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले दिनों में इससे जुड़े फैसले लिए जाएँगे।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सीएए-एनआरसी का विरोध हो रहा है, इसलिए इस बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है। वे समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी की माँग पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

बता दें कि अबू आजमी ने सोमवार (मार्च 01, 2021) को उद्धव सरकार से विधानसभा सत्र में सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव लाने की माँग करते हुए कहा कि 5% मुस्लिम आरक्षण पर कानून पारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार ऐसा करने में विफल रहती है तो वे सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे और आंदोलन करेंगे।

महाराष्ट्र में बजट सत्र 1 मार्च यानी आज से शुरू होकर 10 मार्च तक चलेगा। बजट सत्र के पहले दिन सपा नेता अबू आजमी हाथों में बैनर लेकर विधानसभा पहुँचे। इस दौरान उन्होंने हाई कोर्ट द्वारा पारित 5 फीसदी मुस्लिम आरक्षण को लागू करने और जिस तरह देश के 13 राज्यों ने सीएए और एनआरसी को अपने राज्यों में लागू नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया है, उसी तरह महाराष्ट्र विधान सभा में प्रस्ताव पारित करने की माँग उठाई।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “हाई कोर्ट द्वारा पारित 5% मुस्लिम आरक्षण को लागू करने और जिस तरह देश के 13 राज्यों ने CAA, NRC अपने राज्यों में लागू नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया है, उसी तरह महाराष्ट्र विधान सभा में प्रस्ताव पारित करे महाविकास अघाड़ी सरकार। इन्हीं माँगो के साथ महाराष्ट्र बजट सेशन की शुरुआत।”

सपा भी सत्ताधारी महा विकास अघाड़ी का हिस्सा है। आजमी की मॉंग को लेकर मंत्री असलम शेख ने कहा कि मुस्लिम आरक्षण को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। शेख का यह बयान शिवसेना और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मुसीबत बढ़ा सकती है, क्योंकि वे हिंदुत्व की राजनीति का दावा करते रहे हैं।

बंगाल ‘लैंड जिहाद’: मटियाब्रुज में शेख मुमताज और उसके गुंडों का उत्पात, दलित परिवारों पर टूटा कहर

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मुस्लिम बहुल मटियाब्रुज के झुग्गियों में रह रहे हिन्दू परिवारों को जम कर प्रताड़ित किया जा रहा है। कथित तौर पर दलित परिवारों को घर छोड़ने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है ताकि भू-माफिया उनकी जमीनें हड़प लें। शेख मुमताज नाम के एक व्यक्ति पर आरोप है कि अपने साथियों के साथ मिल कर हिन्दुओं को इलाके से भगाना चाह रहा है। इसके लिए महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है।

स्थानीय एक्टिविस्ट सूरज कुमार सिंह ने ऑप इंडिया को बताया कि शेख मुमताज कई दिनों से ‘बाड़ी (किसी झुग्गी में कुछ घरों का समूह)’ को खाली कराना चाह रहा है। उन्होंने बताया कि रविवार (फरवरी 28, 2021) को हालात तब बिगड़ गए, जब शेख मुमताज का बेटा अपने कई साथियों और गुंडों के साथ वहाँ पर आ धमका और इलाके के हिन्दुओं को पीट-पीट कर धमकाने लगा।

उन्होंने कहा कि इन दलित हिन्दू बंगाली परिवारों की गलती सिर्फ यही है कि ये बंगाल में रहते हैं। मटियाब्रुज में ये हिन्दू अल्पसंख्यक है। उन्होंने बताया कि इलाके में अब हिन्दुओं के लिए अपनी पहचान के साथ जीवन-यापन करना भी मुश्किल हो चुका है। शेख मुमताज के बारे में पता चला है कि वह पेशे से एक निजी कंपनी में प्रमोटर है और उसका दावा है कि करीब 6 साल पहले वह इस जमीन को ‘खरीद’ चुका है।

दूसरी तरफ, यहाँ रह रहे हिन्दू इस जमीन पर रहने वाले 6 हिन्दू परिवारों का दावा है कि यह उनका पुश्तैनी घर है। उनके पास जमीन के कागज़ हैं और उन्होंने कोर्ट में मामला भी दर्ज करा रखा है, जो अभी विचाराधीन है। बावजूद इसके उन पर मुमताज अपने साथियों को लेकर आए दिन हमला करता है।

गुंडों की तरफ से इन हिन्दू परिवारों को जान से मार डालने की धमकियाँ भी दी जाती हैं। पीड़ितों का कहना है कि ताज़ा वारदात से 1 दिन पहले बार-बार पुलिस से किसी अनहोनी की आशंका जताने के बावजूद भी उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। उनका आरोप है कि पुलिस ने अब तक आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, क्योंकि वे रसूख वाले हैं।

रविवार की घटना के बारे में सूरज ने बताया कि शेख मुमताज का पक्ष 40-45 गुंडों के साथ आ धमका और हिन्दू परिवारों में जो मिल गया उसकी पिटाई की गई। पीड़ित अस्पताल से भी लौट आए, क्योंकि उन्हें डर था कि पीछे उनकी जमीनें और घर न कब्ज़ा लिए जाएँ। बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं की भी पिटाई की गई।

मटियाब्रुज में हिन्दू परिवारों कि प्रताड़ना

साथ ही शेख मुमताज और उसके गुंडों पर ये भी आरोप है कि वे लोग वहाँ स्थित मंदिर में गोमांस के टुकड़े फेंक देते हैं और तनाव का माहौल पैदा करने के प्रयास में लगे रहते हैं। बताया जाता है कि वे हिन्दुओं को भगाकर अपने लोगों को बसाना चाहते हैं। प्रशासन का सहयोग न मिलने के कारण अल्पसंख्यक हिंदू लाचार बताए जाते हैं।

हिन्दू कार्यकर्ताओं और संगठनों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में इस तरह का ‘लैंड जिहाद’ अब आम बात है, जिसके तहत बांग्लादेश और म्यांमार से आए रोहिंग्या मुस्लिमों और घुसपैठियों को बसाया जाता है। साथ ही इसकी कीमत हिन्दुओं को अपनी संपत्ति खो कर चुकानी पड़ती है। भाजपा भी आगामी विधानसभा चुनाव में घुसपैठियों को मिली छूट को मुद्दा बनाते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस को घेर रही है।

इस घटना को लेकर हमने पुलिस का पक्ष जानने की कई बार कोशिश की। लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। पुलिस से संपर्क होते ही हम इस खबर को अपडेट करेंगे।

रुपए भर की सिगरेट के लिए जब नेहरू ने फूँकवा दिए थे हजारों: किस्सा भोपाल-इंदौर और हवाई जहाज का

पंडित जवाहरलाल नेहरू को कई कारणों से याद किया जा सकता है। आप उन्हें भारत के पहले प्रधानमंत्री, या भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री (इंदिरा गाँधी) के पिता या स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद कर सकते हैं। नेहरू को ऐसे व्यक्ति के रूप में भी याद किया जा सकता है, जो सेना या दूरदर्शिता के महत्व को स्वीकार नहीं करते थे। या फिर भारत में होने वाली हर अच्छी चीज के लिए जिम्मेदार (कम से कम कॉन्ग्रेस ऐसा ही सोचती है!)।

नेहरू के जीवन और उनसे जुड़ी कहानियों के इतने पहलू थे कि हर बार, एक दिलचस्प किस्सा सामने आएगा… जो या तो आपको चौंका देगा या विस्मित कर देगा।

ऐसा ही एक किस्सा सिगरेट के प्रति उनके प्यार के बारे में है। अनगिनत तस्वीरों में वह धूम्रपान करते हुए दिखाई देते हैं। निष्पक्ष होने के लिए, उनके समय में, धूम्रपान को स्टेटस सिंबल या ‘कूल’ दिखने का एक तरीका माना जाता था, लेकिन यह एक बुरा नशा है, जिससे छुटकारा पाना मुश्किल है। अगर उस दौरान लोगों को तम्बाकू के दुष्परिणामों का पता चल जाता, तो शायद मुकेश जिंदा होता

नेहरू और सिगरेट ब्रांड 555

पूर्व पीएम नेहरू के बारे में एक कहानी है, जो आज भी किसी को भी लुभा सकती है। भोपाल की अपनी एक यात्रा पर, वह राजभवन में रुकने वाले थे। हालाँकि, कर्मचारियों को पता चला कि उनका पसंदीदा सिगरेट ब्रांड राजभवन में उपलब्ध नहीं है। यह वास्तव में, भोपाल में उपलब्ध नहीं था, और नेहरू अपने भोजन के बाद एक सिगरेट पीने के शौकीन थे।

आम तौर पर, लोगों को लगेगा कि राज भवन के कर्मचारियों ने उनके लिए कोई दूसरा ब्रांड पेश किया होगा। लेकिन नहीं! मध्य प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक उनकी पसंदीदा सिगरेट का स्टॉक इंदौर से एयरलिफ्ट किया गया!

मध्य प्रदेश राजभवन के वेबसाइट से साभार

जानकारी के मुताबिक किसी को ‘555’ ब्रांड की सिगरेट के कुछ पैकेट इंदौर एयरपोर्ट से लाने का काम दिया गया था। एक विमान ने पैकेज प्राप्त करने के लिए भोपाल से इंदौर के लिए उड़ान भरी, सिगरेट एकत्र की और वापस उड़ान भरी।

वैसे नेहरू-गाँधी परिवार के अपने निजी सुखों के लिए राष्ट्रीय संसाधनों का उपयोग करने का प्यार पीढ़ियों से चला आ रहा है। उनके पोते राजीव गाँधी, भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, INS विराट का निजी टैक्सी के रूप में इस्तेमाल करते थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी 1987 में नए साल का जश्न मनाने के लिए अपने पूरे परिवार और खास मित्रों के साथ एक लक्षद्वीप गए थे। इस दौरान उनके इटालियन ससुराल वाले भी मौजूद थे।

मेहमानों की सूची में राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गाँधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, उनकी विधवा माँ आर. मैनो, उनके भाई और एक मामा शामिल थे। साथ ही पूर्व सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया और उनके बच्चे अभिषेक और श्वेता भी मौजूद थे। INS विराट को देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था, लेकिन उसे गाँधी परिवार को छुट्टी मनाने के लिए ले जाने के लिए भेजा गया।

इतना ही नहीं, उनकी छुट्टी के लिए सभी सुविधाओं को व्यवस्थित करने के लिए सरकारी कर्मचारियों और नौसेना के सैनिकों को तैनात किया गया था। सेना के एक विशेष हेलीकॉप्टर को उनकी सेवा में 24×7 तैनात की गई थी, पूरा प्रशासन राजीव गाँधी के निजी मेहमानों के मनोरंजन की व्यवस्था देख रहा था। आप हमारे पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में अधिक जानकारी यहाँ हमारे आर्काइव में देख सकते हैं।

गोधरा में जलाए गए हिंदू स्वरा भास्कर को याद नहीं, अंसारी की तस्वीर पोस्ट कर लिखा- कभी नहीं भूलना

किसी भी मामले में सच्चाई को अपने मनमुताबिक तोड़-मरोड़कर पेश करना स्वरा भास्कर की पहचान है। बात चाहे दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में इस्लामी दंगाइयों के हिंसक रूप को छिपाने की हो या फिर दंगों के मुख्य आरोपित उमर खालिद के साथ खड़े होने की, स्वरा भास्कर हर जगह नजर आती हैं। 28 फरवरी 2021 को दोबारा स्वरा ने यही सब किया। इस बार मामला गुजरात दंगों से जुड़ा था। स्वरा ने एक मुस्लिम व्यक्ति की तस्वीर शेयर की और लिखा, ‘कभी न भूलना।’

स्वरा शायद गुजरात दंगे याद दिलाना चाहती थीं, मगर लगता है उन्हें ये नहीं पता कि ये सब शुरू कहाँ से हुआ था। तभीं, वह भूल गईं ये बताना कि गुजरात दंगे उस गोधरा कांड के रोष में भड़के थे जहाँ ट्रेन के डिब्बे में आग लगा दी गई और जिसमें 59 कारसेवक जलकर खाक हो गए थे।

27 फरवरी 2002 की सुबह गोधरा रेलवे स्टेशन पर रुकी साबरमती एक्सप्रेस में 59 कारसेवक मारे गए थे, जिसके बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। पूरी 6 साल की पड़ताल के बाद ये बात सामने आई थी कि उस दिन ट्रेन में आग लगाने के पीछे मुस्लिम भीड़ का हाथ था।

स्वरा न केवल इस्लामी बर्बरता पर पर्दा डाल रहीं हैं बल्कि ये भी बता रही हैं कि उन दंगों को नहीं भुलाया जाना चाहिए, जो गोधरा कांड के आक्रोश में भड़के। इसके अलावा वह एक मुस्लिम व्यक्ति ‘कुतुबुद्दीन अंसारी’ की तस्वीर दिखा कर उन हिंदुओं की हत्या पर भी पर्दा डाल रही हैं जो बर्बरता से मारे गए। शर्मनाक बात यह है कि तस्वीरों में दिखने वाले कुतुबुद्दीन अंसारी वही शख्स हैं जो साल 2016 में निवेदन कर चुके हैं कि उनकी तस्वीर इस्तेमाल कर राजनीतिक प्रोपेगेंडा न चलाया जाए।

मुंबई मिरर को दिए इंटरव्यू में अंसारी ने कहा था, “मैं 43 साल का हूँ। पिछले 14 साल में राजनीतिक पार्टियों, बॉलीवुड और आतंकी संगठनों द्वारा मेरा इस्तेमाल और गलत इस्तेमाल दोनों हुआ। काश मैं 2002 में मर जाता, क्योंकि मैं अपने बच्चों को जवाब नहीं दे पाता, जब वो पूछते हैं कि पापा जब भी हम आपकी तस्वीर देखते हैं तो आप रोते हुए या भीख माँगते हुए क्यों दिखते हो।”

उक्त बयान उसी व्यक्ति का है जिसकी तस्वीर स्वरा ने शेयर की, लेकिन उन्हें इन सब बातों से क्या? उन्हें क्या मतलब है कि कोई व्यक्ति किस मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहा है, उन्हें बस अपना प्रोपेगेंडा चलाना है। कुतुबुद्दीन अंसारी के आँसू से वामपंथियों लिबरलों का कोई वास्ता नहीं है, इसलिए वे गुजरात दंगों की बात आते ही उनकी तस्वीर इस्तेमाल करने लगते हैं।

याद दिला दें कि अभी बीते साल इसी तरीके को हिंदुओं के विरुद्ध माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। उस समय स्वरा भास्कर ने उमर खालिद का साथ दिया था उसे एक्टिविस्ट कहा था। इसके बाद जब खालिद पर यूएपीए लगा तब भी स्वरा खुल कर उसका साथ देने से नहीं चूकी थीं और यूएपीए हटाने की माँग की थी।

बता दें कि दिल्ली पुलिस की एफआईआर के मुताबिक दिल्ली दंगे सुनियोजित साजिश का थे जिसे उमर खालिद और उसके साथियों ने मिलकर रचा था। साजिश के तहत खालिद ने दो अलग-अलग जगहों पर भड़काऊ भाषण दिए थे और लोगों से अपील की थी कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति देश में आए तो उन्हें अपना विरोध उनके आगे दिखाना है ताकि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले।

आरिफ बना राजवीर, शादी का वादा कर फैशन डिजाइनर से रेप; गर्भवती होते ही ठुकराया

उत्तर प्रदेश के कानपुर में मोहम्‍मद आरिफ नाम के युवक ने ‘राजवीर केसर‍िया’ बनकर हिंदू युवती से पहले फेसबुक पर दोस्‍ती की। फिर शादी का झाँसा देकर उसका रेप किया। गर्भवती होने पर युवती ने जब युवक पर शादी का दबाव बनाया तो उसने इनकार करते हुए सारे रिश्ते तोड़ लिए। परेशान युवती ने युवक के घरवालों की तलाश की और उनसे मिली। इसके बाद उसे पता चला कि राजवीर केसर‍िया असल में मोहम्‍मद आरिफ है। युवक के इस झूठ का पता चलते ही युवती के होश उड़ गए। पीड़ि‍ता ने युवक के खि‍लाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।

क्‍या है पूरा मामला? 

जानकारी के मुताबिक, नवाबगंज थाना क्षेत्र में रहने वाली युवती पेशे से फैशन डिजाइनर है। मोहम्‍मद आरिफ नाम के एक युवक ने राजवीर केसरिया नाम से फेसबुक आईडी बनाई और युवती से अपनी पहचान छ‍िपाकर दोस्‍ती की। युवक ने युवती की नौकरी लगवाने का लालच दिया था। बातचीत बढ़ती गई और दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए। 

युवक ने युवती को शादी का झाँसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। इस बीच युवती गर्भवती हो गई। उसने यह बात प्रेमी राजवीर केसरिया को बताई और शादी का दबाव बनाने लगी। इसके बाद राजवीर ने उससे बातचीत बंद कर दी। पीड़िता ने युवक के परिजनों से संपर्क किया तो उसे पता चला कि उसका असली नाम राजवीर केसरिया नहीं, बल्कि मोहम्मद आरिफ है। वह लखनऊ नहीं, बल्कि रायबरेली का रहने वाला है। इसके बाद युवती ने पुलिस से शिकायत की बात कही तो आरिफ ने जान से मारने की धमकी भी दी।

पुलिस कर रही युवक की तलाश 

इस मामले में पीड़िता ने आरोपित प्रेमी आरिफ के खिलाफ नवाबगंज थाने में तहरीर दी है। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर रेप, एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है। थाना प्रभारी नवाबगंज देवेंद्र दुबे बताया कि पुलिस ने पीड़ित युवती की तहरीर पर राजवीर उर्फ मोहम्मद आरिफ के खिलाफ IPC की धारा 417, 376, 504, 506 और SC/ST एक्ट के तहत केस पंजीकृत करते हुए आरोपित को जेल भेज दिया है।

हालाँकि इस केस में एंटी लव जिहाद कानून नहीं लगाया गया है। प्रभारी का कहना है कि चूँकि दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे, इसलिए यह मामला लव जिहाद का नहीं है। फिलहाल हर पहलू की जाँच चल रही है।

केरल हाई कोर्ट के 2 पूर्व जज BJP में, मेट्रो मैन श्रीधरन के बाद चुनावी राज्य में एक और बड़ी एंट्री

केरल समेत देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। केरल में भाजपा का अब तक उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं रहा है। लेकिन इस बार राज्य में पार्टी का कुनबा लगातार मजबूत होता जा रहा है। इसी क्रम में केरल हाईकोर्ट के दो पूर्व जज ने भाजपा ज्वाइन की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार (फरवरी 28, 2021) को केरल हाई कोर्ट के पूर्व जज पीएन रविंद्रन और वी चितंबरेश बीजेपी में शामिल हो गए।

हाई कोर्ट के पूर्व जजों के अलावा रविवार को 18 अन्य भी बीजेपी में शामिल हुए। इसमें कई महिला कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केरल बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन की मौजूदगी में एक कार्यक्रम में सभी का पार्टी में स्वागत किया। इसके लिए बीजेपी की जारी ‘विजय यात्रा’ के दौरान त्रिपुनिथुरा में विशेष आयोजन किया गया था।

एबीवीपी कार्यकर्ता भी रह चुके हैं ये जज

केरल हाई कोर्ट के जज जस्टिस वी चिताम्बरेश समारोह में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि वह दिल्ली में हैं। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक पत्र में लव जिहाद कानून का समर्थन करने के बाद दोनों पूर्व न्यायाधीशों के नाम हाल ही में चर्चा में था। चितंबरेश ने कहा कि वह अपने छात्र जीवन के दौरान विक्टोरिया कॉलेज, पलक्कड़ में सक्रिय एबीवीपी कार्यकर्ता रहे थे।

चितंबरेश ने कहा, “मैं बीजेपी का साथी रहा हूँ। अब, मैंने आधिकारिक रूप से पार्टी को गले लगा लिया है। मैं कोच्चि में दिल्ली में होने वाले समारोह में शामिल नहीं पाया।” अन्य जो बीजेपी में शामिल हुए हैं- वे पूर्व डीजीपी वेणुगोपाल नायर, एडमिरल बी आर मेनन और बीपीसीएल सोमचूडन के पूर्व महाप्रबंधक। पूर्व महिला कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता शिजी रॉय सहित 12 अन्य कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भी बीजेपी में शामिल हो गए।

गौरतलब है कि इससे पहले ‘मेट्रो मैन’ ई श्रीधरन औपचारिक तौर पर 25 फरवरी को केरल के मलप्पुरम में आयोजित एक रैली में बीजेपी में शामिल हुए थे। तब मंच पर उनके साथ केंद्रीय मंत्री आरके सिंह भी मौजूद थे। केरल की राजनीति में मेट्रो मैन की एंट्री को काफी अहम माना जा रहा है।

इस मौके पर उन्होंने कहा था, “भाजपा में शामिल होने का निर्णय मेरे जीवन का एक नया चरण है। मैं हमेशा केरल के लिए कुछ करना चाहता था… मुझे लगा कि भाजपा में शामिल होना सबसे अच्छा रहेगा और मैंने ऐसा किया है।” 

बता दें कि केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग ने कर दी है। केरल में एक चरण में 6 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि वोटों की गिनती 2 मई को होगी। केरल में इस समय लेफ्ट की सरकार है, हाल ही में संपन्न हए निकाय चुनाव में भाजपा ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था।