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ट्विटर पर जलाकर मारे गए कारसेवकों की बात करना मना है: गोधरा नरसंहार से जुड़े पोस्ट डिलीट करने को कर रहा मजबूर

हाल में ट्विटर का पक्षपाती सेंसरशिप एक गंभीर चिंता का मसला बनकर उभरा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन राजनीतिक आवाजों के साथ पक्षपात करने के आरोप हैं जिनसे वह सहमत नहीं होता। इस तरह की स्थिति यूजर्स ने प्लेटफॉर्म पर गोधरा में जलाकर मारे गए कार सेवकों को लेकर बात करने वाले ​पोस्ट्स को जानबूझकर ब्लॉक करने का आरोप लगाया है।

एक यूजर ने बताया है कि उसने ‘कभी न भूलना (Never Forget)’ कैप्शन के साथ गोधरा नरसंहार की तस्वीर पोस्ट की थी। इसके बाद उसका अकाउंट एक खास समय के लिए लॉक कर दिया गया। ट्विटर ने दोबारा अकाउंट बहाल करने के लिए ट्विटर से पोस्टर डिलीट करने या फिर उसे इस कार्रवाई के खिलाफ अपील करने को कहा।

हालाँकि यूजर ने पाया कि उसका ट्वीट उसकी अपील पर गौर करने से पहले ही हटाया जा चुका है। आखिरकार, उसने अपने ट्वीट को डिलीट करने का फैसला किया, क्योंकि इसे पहले ही हटाया जा चुका था। ट्विटर पर कमेंट करते हुए यूजर ने कहा, “क्या आप ऐतिहासिक घटनाओं को बदलना चाहते हैं? क्या साबरमती नरसंहार कभी नहीं हुआ? आप मेरी पोस्ट हटा सकते हैं, लेकिन हकीकत नहीं बदल सकते!”

एक अन्य यूजर ने दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की बेरहम हत्या से जुड़ी तस्वीरें पोस्ट की। इसे ‘सेंसेटिव इन्फोर्मेशन’ के तौर पर लेबल कर दिया गया।

सेंसरशिप को लेकर ट्विटर का वामपंथी पूर्वाग्रह पिछले कुछ समय से चिंता का प्रमुख विषय रहा है। एक तरफ वे ट्वीट जो गोधरा नरसंहार के हिंदू पी​ड़ितों की बात करते हैं उन्हें डिलीट करने के लिए यूजर्स को मजबूर किया जा रहा, दूसरी तरफ प्लेटफॉर्म ने उन अकाउंट्स को ब्लॉक करने से इनकार कर दिया था जो किसान आंदोलन की आड़ में फेक न्यूज फैलाकर देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ना चाहते हैं।

हिंदू अराध्य स्थल पर क्रिश्चियन क्रॉस, माँ सीता के पद​ चिह्नों को नुकसान: ईसाई प्रचारकों की करतूत से बीजेपी बिफरी

आंध प्रदेश में मंदिरों को निशाना बनाने और मूर्तियों को खंडित करने की कई घटनाएँ हाल में सामने आई हैं। अब राज्य के गुंटूर जिले के इदलापाडू (Edlapadu) में हिंदुओं के अराध्य स्थल के पास विशालकाय क्रिश्चियन क्रॉस बनाए जाने का आरोप बीजेपी ने लगाया है। जिस जगह पर यह क्रॉस लगाया गया है, वहाँ माता सीता के पद चिह्न होने की मान्यता है। बीजेपी ने ईसाई प्रचारकों पर इस क्रॉस के निर्माण का आरोप लगाया है। आंध्र प्रदेश बीजेपी के सह प्रभारी सुनील देवधर ने ट्वीट कर बताया है कि गैर कानूनी तरीके से इस विशालकाय क्रॉस का निर्माण किया गया है।

कथित अतिक्रमण की तस्वीर साझा करते हुए सुनील देवधर ने ट्वीट किया है, “आंध्र प्रदेश के इदलापाडू में जहॉं मॉं सीता के पद चिह्न विराजमान हैं, वहॉं लगाए गए इस विशलकाय गैरकानूनी क्रॉस को देखिए। भगवान ​नरसिम्हा की तराशी हुई प्रतिमा पीछे मौजूद है। गुंटूर जिले में ईसाई माफियाओं ने कहर मचा रखा रखा है। बीजेपी और आरएसएस के लोगों ने इसका विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने ईसाई अतिक्रमणकारियों को मौन समर्थन दे रखा है।”

ऑर्गेनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार हिंदुओं के लिए यह जगह अराध्य है और सदियों से वे इस जगह पर वैवाहिक आयोजन करते रहे हैं। लेकिन, बाद में चुपके से ईसाई आए और इस पहाड़ी के खुद से जुड़े होने का दावा करने लगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जगन मोहन रेड्डी की सरकार आने के बाद उन्होंने यहाँ चर्च भी बना लिया है। बीजेपी और आरएसस के कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद एक शीर्ष नौकरशाह जो खुद ईसाई हैं, कथित तौर पर चर्च को मदद कर रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से माता सीता के पद चिह्नों को नुकसान पहुँचाते हुए एक विशालकाय क्रॉस लगा दिया गया है।

इस इलाके की पहचान माता सीता के पद​ चिह्न और भगवान ​नरसिम्हा की तराशी हुई प्रतिमा को लेकर रही है।

बीजेपी के नेताओं ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की ट्विटर पर कड़री आलोचना की है। जगन मोहन पर सत्ता में आने के बाद आंध प्रदेश में ईसाइयत को बढ़ावा देने के आरोप भी लगते रहे हैं।

आंध्र प्रदेश बीजेपी के नेता विष्णु वर्धन रेड्डी ने हिंदुओं के अराध्य स्थल पर गैर कानूनी तरीके से क्रॉस लगाने का आरोप कन्वर्जन माफियाओं पर लगाया है। रेड्डी ने इसकी तस्वीरें भी साझा की हैं। कथित तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे हुए इस इलाके में ईसाई प्रचारकों ने मॉल भी बनाए हैं। साथ ही पूरे क्षेत्र का व्यवसायीकरण कर दिया है।

पुलिस ने दिया स्पष्टीकरण, लेकिन सवाल फिर भी है

गुंटूर पुलिस (ग्रामीण) ने एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में यह दावा किया गया कि हिंदुओं के पवित्र स्थल पर ईसाई क्रॉस जैसी संरचना का निर्माण नहीं किया गया है।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि हिंदुओं का पवित्र स्थल पहाड़ी की एक छोर पर है, जबकि क्रॉस का निर्माण हिंदुओं के पवित्र स्थल के विपरीत दिशा वाले छोर पर किया गया है।

अब वो सवाल, जो पुलिस के स्पष्टीकरण के बाद भी बचा रह गया। गुंटूर पुलिस ने अभी तक यह नहीं बताया कि ईसाई संस्था को उस पहाड़ी पर क्रॉस बनाने का अधिकार मिला था या नहीं। कई ट्विटर यूजर ने भी सवाल उठाया कि संभवतः यह जगह सरकार की है।

सवाल यह भी किया जा रहा है कि क्या ईसाई संस्था इस साइट पर क्रॉस जैसी संरचना के निर्माण की अनुमति थी? और क्या यह अनुमति सरकार ने दी थी? यदि सरकार ने अनुमति नहीं दी थी तब तो क्रॉस का यह निर्माण अवैध तरीके से ही किया गया है।

आगरा से बुर्के में अगवा हुई लड़की दिल्ली के पीजी में मिली: खुद ही रचा ड्रामा, जानिए कौन थे साझेदार

उत्तर प्रदेश के आगरा के दयालबाग से पिछले दिनों एक 17 वर्षीय लड़की को अगवा किए जाने की खबर सामने आई थी। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार (1 मार्च 2021) की रात पुलिस ने नाबालिग को बरामद कर लिया।

रिपोर्टों के अनुसार नाबालिग को 23 फरवरी 2021 (मंगलवार) को तब अगवा किया गया, जब वह अपनी बुआ के साथ दयालबाग अस्पताल से दवा लेने गई थी। घटना 26 फरवरी (शुक्रवार) को तब चर्चा में आई जब उसे अगवा किए जाने का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया में वायरल हो गया। वीडियो में नाबालिग बुर्का में आरोपित के साथ नजर आई थी। उसके पिता ने मेहताब राणा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसने 2018 में भी दो बार पीड़िता को अगवा किया था

एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस ने मेहताब की पत्नी और दो भाभियों को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ में पुलिस को जब कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली तो उसने दूसरे सिरों की पड़ताल शुरू की। सीसीटीवी फुटेज खँगालने के बाद पुलिस ने पाया कि पीड़िता और आरोपित ने दयालबाग हॉस्पिटल के बाहर से ऑटो ली थी।

इस थ्री व्हीलर का पता लगाने के बाद पुलिस ने उसके चालक से पूछताछ की। उसने दोनों को आगरा के भगवान टॉकीज के बाहर छोड़ने की बात बताई। साथ ही यह भी बताया कि पीड़िता और आरोपित दोनों टॉकीज के बाहर खड़ी एक कार में बैठकर निकल गए। सीसीटीवी फुटेज की जाँच और ऑटो ड्राइवर से मिली जानकारी का मिलान कर पुलिस ने कार की पहचान की। इसके बाद पुलिस ने कार के ड्राइवर को पकड़ा। उसने अपना नाम नीरज बताया। साथ ही दोनों को दिल्ली के तिलक नगर इलाके में छोड़ने की जानकारी दी।

सोमवार की रात पुलिस ने नाबालिग को तिलक नगर के एक पीजी से बरामद किया। अपहरण के बारे में पूछे जाने पर उसने दावा किया कि वह एनईईटी (NEET) परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली आई थी। उसने यह भी दावा किया कि उसके परिजन उस पर कई तरह की बंदिशें लगाते थे, जिसके बाद वह मुख्य आरोपित मेहताब राना के साथ भाग गई थी। पढ़ाई के लिए दिल्ली जाने की उसकी बात से भी परिवार सहमत नहीं था।

पीड़िता ने बताया कि वह जनवरी 2020 में अपनी बुआ के घर गई थी। फुफेरे भाई नामित ने उसका परिचय अपने दोस्त दिव्यांशु चौहान से करवाया। दिव्यांशु 23 फरवरी को अपने ड्राइवर नीरज के साथ ग्वालियर से आगरा आया। उनके एक साथी रिंकू नाबालिग को दयालबाग हॉस्पिटल से लेकर आया और उसे बुर्का पहनने को दिया। इसके बाद वे ऑटो से भगवान टॉकीज पहुँचे, जहाँ ​नीरज और दिव्यांशु उनका इंतजार कर रहे थे। इसके बाद नीरज कार से रिंकू, दिव्यांशु और पीड़िता को लेकर दिल्ली के तिलक नगर पहुँचा।

इसके बाद पुलिस को वह तिलक नगर के पीजी में मिली। पुलिस ने जब दिव्यांशु को दबोचने की कोशिश की तो पता चला कि ग्वालियर पुलिस उसे पहले ही साइबर क्राइम के एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। इस मामले में शामिल अन्य आरोपितों की तलाश में पुलिस कई जगहों पर दबिश दे रही है। कथित तौर पर रिंकू अपनी पत्नी के साथ किसी धर्म स्थल की यात्रा पर गया है। पुलिस अब उस तक पहुँचने की कोशिश में है।

पुलिस इस बात की भी पड़ताल में लगी है कि इस घटना से मेहताब राना का किसी तरह का संबंध है या नहीं। यह बात भी सामने आई है कि नाबालिग के पिता को फोन कॉल कर बेटी को अगवा करने की धमकी दी गई थी। उनसे फोन करने वाले ने कहा था, ‘रोक सकते हो तो रोक लो’। फोन करने वाले ने खुद को मेहताब राना बताया था। यही कारण है कि लड़की के अगवा होने के बाद पीड़ित पिता ने मेहताब राना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

यहाँ यह ध्यान रखना जरूरी है कि मेरठ का रहने वाला मेहताब जो 6 बच्चों का बाप है, इससे पहले दो मौकों पर नाबालिग को अगवा कर चुका है। पूर्व में एसपी बोत्रो रोहन प्रमोद ने बताया था कि मेहताब एक होटल में पीड़िता के पिता का सहकर्मी था। आरोपित और पीड़िता एक ही इलाके में रहते थे। वह पीड़िता के घर आता-जाता रहता था। 2018 में वह लड़की को अपने घर मेरठ ले आया था। केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने मेहताब के भाई को गिरफ्तार किया था।

उस समय मेहताब के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसके दो रिश्तेदारों के खिलाफ भी इस घटना में संलिप्तता को लेकर मामला दर्ज हुआ था। रिश्तेदारों ने न केवल अप​हरण की घटना में मेहताब की मदद की थी, बल्कि पुलिस से छिपने के लिए उसे ठिकाना भी मुहैया कराया था। सख्ती के बाद आरोपित के परिवार के सदस्यों ने लड़की को पुलिस के हवाले कर दिया था। हालाँकि कुछ महीनों बाद मेहताब ने दोबारा लड़की को अगवा कर लिया था। तब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीड़िता को बरामद किया था। कोर्ट के स्टे ऑर्डर के कारण आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। लड़की के परिवार उस इसे ‘लव जिहाद’ बताते हुए आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी।

भगवान श्रीकृष्ण को व्यभिचारी और पागल F#ckboi कहने वाली सृष्टि को न्यूजलॉन्ड्री ने दिया प्लेटफॉर्म

सृष्टि जसवाल जुलाई 2020 में सुर्खियों में रही थी। उसने एक ट्वीट में भगवान श्रीकृष्ण के लिए अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद हिंदुस्तान टाइम्स (HT) ने उसे नौकरी से निकाल दिया था। अब यही सृष्टि न्यूजलॉन्ड्री के लिए लेख लिख रही है।

सृष्टि जसवाल ने भगवान श्रीकृष्ण को व्यभिचारी, F#ckboi और फोबिया ग्रसित पागल (उन्मत्त) करार दिया था। उसका कहना था कि भगवान श्रीकृष्ण के बारे में ये सब उसने हिन्दू माइथोलॉजी में पढ़ा है। इस ट्वीट को लेकर भाजपा नेता गौतम अग्रवाल ने उसके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। विवाद बढ़ने पर एचटी ने सृष्टि जसवाल को बाहर निकाल दिया था।

देडेलीस्विच की रिपोर्ट के अनुसार धुर वामपंथी प्रोपेगेंडा साइट न्यूजलॉन्ड्री के लिए सृष्टि जनवरी से अब तक तीन लेख लिख चुकी है। सृष्टि पर न्यूजलॉन्ड्री के लेख ने एक बार फिर से इस बात को साबित किया है कि घृणा और हिंदूफोबिक होना वामपंथी मीडिया संगठनों में लिखने की पहली शर्त है।

हिंदू घृणा की दुकान के तौर पर कुख्यात न्यूजलॉन्ड्री का एक ऐसा ही स्तंभकार शरजील उस्मानी भी है। इस्लामी कट्टरपंथी उस्मानी दिल्ली दंगों में आरोपित है। दिल्ली दंगों के दौरान पुलिस पर रिवॉल्वर तानने वाले शाहरुख को उसने मुजाहिद तक कहा था। दिल्ली दंगों की एक और आरोपित और पिंजरा तोड़ की सह-संस्थापक नताशा नरवाल भी इस इस पोर्टल की कॉलम‌निस्‍ट‌ रह चुकी है।

पाक प्रेम दिखाने वाले ‘न्यूजलॉन्ड्री’ को लेकर पिछले साल जी न्यूज़ के एक स्टाफ ने खुलासा किया था कि फर्जी ख़बरें चलाने वाले इस पोर्टल के लोग उन्हें लगातार फ़ोन और व्हाट्सऐप पर सुधीर चौधरी के खिलाफ बयान देने के लिए विवश कर रहे हैं। न्यूजलॉन्ड्री के ही एक पूर्व कर्मचारी ने इसके CEO अभिनंदन सेखरी की पोल-पट्टी खोलते हुए बताया था कि हिन्दुओं पर हुए अपराधों को दबाना, मुसलमानों पर हुए अपराधों में ‘हिन्दू कनेक्शन’ निकालना, सहकर्मियों को गाली देना, चिल्लाना और आम आदमी पार्टी के लिए एजेंडा चलाना, सेखरी का SoP है।

न्यूजलॉन्ड्री पर मौजूद सृष्टि जसवाल के लेख

हिंदूघृणा से सने कथित पत्रकारों को मौका देने में केवल न्यूजलॉन्ड्री ही आगे नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौत की कामना करने वाली ट्वीट को लेकर स्तुति मिश्रा पर जब द क्विंट ने कार्रवाई की तो उसे एनडीटीवी ने जगह दे दी। एनडीटीवी वही संस्थान है जिसकी डिप्टी एडिटर रही निधि सेठी को पुलवामा अटैक के बाद बलिदानी जवानों का मजाक उड़ाते देखा गया था तो उसके एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार विष्णु सोम की मेज पर ओसामा बिन लादेन का पुतला नजर आ चुका है।

‘बिके हुए आदमी हो तुम’ – हाथरस मामले में पत्रकार ने पूछे सवाल तो भड़के अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाथरस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ की सरकार पर निशाना तो साध दिया, लेकिन जब गुनाहों के आरोप उनकी अपनी पार्टी के नेता तक पहुँचे तो वो बौखला गए और उलटा पत्रकार को ही डाँट दिया। इसे लेकर सवाल पूछने वाले पत्रकार पर अखिलेश यादव ने आपत्तिजनक टिप्पणी की। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद उनकी किरकिरी हुई।

दरअसल, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे तो इस मामले में समाजवादी पार्टी के नेता पर छेड़खानी का आरोप लगने पर एक पत्रकार ने उनसे जवाब माँगा। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि सवाल ये नहीं है। फिर वो उखड़ गए और कहने लगे, “फिर बिक गए तुम? इतने में बिक गए? जरा अपना चैनल का नाम बताइए जो बिक गए हो तुम।” उक्त पत्रकार ‘प्राइम न्यूज़’ नामक चैनल का था।

उन्होंने कहा, “अब कहाँ जाकर छिप गए हो? हैसियत है तो अपने चैनल का नाम क्यों नहीं बताते?” जब उन्हें चैनल का नाम पता चल गया, तब उन्होंने कहा – “प्राइम न्यूज़ के बिके हुए आदमी हो तुम।” हाथरस की पीड़िता का वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें वो रो-रो कर न्याय की गुहार लगा रही है। पीड़िता ने बताया कि छेड़खानी के बाद हुए केस से गुस्साए आरोपित ने उसके पिता की हत्या कर दी।

पीड़िता के पिता अनीश शर्मा (बदला हुआ नाम) ने जुलाई 2018 में गौरव शर्मा नाम के आरोपित के खिलाफ अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई थी। छेड़छाड़ करने का आरोपित और विरोध करने पर हत्या-आरोपित गौरव शर्मा समाजवादी पार्टी का नेता है। वही समाजवादी पार्टी, जिसके मुखिया अखिलेश यादव इस मामले में प्रदेश की योगी सरकार को घेरते हुए ट्वीट कर रहे हैं।

काम पर लग गए ‘कॉन्ग्रेसी’ पत्रकार: पश्चिम बंगाल में ‘मौत’ वाले मौलाना से गठबंधन और कलह से दूर कर रहे असम की बातें

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस कट्टरवादी मौलाना की पार्टी के साथ गठबंधन कर रही है। ऐसे में पत्रकारों (कॉन्ग्रेसी) ने बंगाल चुनाव से ध्यान भटका कर असम की बातें करनी शुरू कर दी है। पत्रकार रोहिणी सिंह लगातार सोशल मीडिया पर असम की बातें कर रही हैं।

ओपिनियन पोल में भी वहाँ भाजपा को वापसी करते हुए दिखाया जा रहा है, बावजूद इसके रोहिणी सिंह सरीखे पत्रकार कॉन्ग्रेस के प्रचारक बन कर दिन-रात एक हुए हैं।

रोहिणी सिंह ने ट्विटर पर लिखा, “जितने भी राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उन सब में असम में कॉन्ग्रेस का प्रचार अभियान सटीक तरीके से चल रहा है। साथ ही सभी नेताओं ने ध्यान भी दिया हुआ है। सभी नेता ठीक तरह से साथ मिल कर कार्य कर रहे हैं। अभी शुरुआती दौर में कुछ भी कहना मुश्किल है कि क्या होगा, क्योंकि भाजपा राज्य में खासी मजबूत है।”

ट्विटर पर उन्होंने कॉन्ग्रेस की खूब तारीफ की। साथ ही वो अपने हैंडल से गौरव गोगोई के ट्वीट्स भी रीट्वीट कर रही हैं, जो असम में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता हैं।

उन्होंने उनकी बड़ाई करते हुए लिखा भी कि गौरव गोगोई जैसे ‘युवा नेता’ अपनी पार्टी के लिए कड़ी मेहनत करते हुए चुनाव प्रचार में लगे हैं, वहीं आनंद शर्मा जैसे अनुभवी और विभिन्न पदों पर बैठे नेता चुनाव के बीच में अपनी ही पार्टी पर हमला बोल रहे हैं। उन्होंने दोनों को एकदम उलटा करार दिया। उनका इशारा G-23 की तरफ था।

जम्मू में कॉन्ग्रेस के 23 अनुभवी नेताओं ने मिल कर आलाकमान को कड़ा संदेश दिया। पार्टी में लोकतंत्र की स्थापना और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने की माँग की गई।

रोहिणी सिंह ने ये भी लिखा कि असम का चुनाव पश्चिम बंगाल से खासा रोचक होगा। जब एक व्यक्ति ने खंडित जनादेश की भविष्यवाणी की तो रोहिणी ने लिखा कि कॉन्ग्रेस वहाँ रोचक चुनाव प्रचार अभियान चला रही है और देखते हैं कि क्या होता है।

दरअसल, ये सब इसीलिए किया जा रहा है ताकि पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस की कलह और इस्लामी कट्टरपंथियों से गठजोड़ को छिपाया जा सके।

पश्चिम बंगाल में गठबंधन को लेकर कलह अब सामने है। प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी और आनंद शर्मा आपस में लड़ रहे हैं। फुरफुरा शरीफ के मौलाना अब्बास सिद्दीकी को गठबंधन में शामिल किया गया है, जो भारतीयों को वायरस से मरने की दुआ माँगता है। साथ ही वो मुस्लिमों के बहुमत में होने की बात भी करता है।

फ़िलहाल प्रियंका गाँधी चुनाव प्रचार के क्रम में असम पहुँची हुई हैं और चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों के साथ उन्होंने पत्तियाँ तोड़ते हुए कई तस्वीरें भी क्लिक करवाई हैं, जिन्हें कॉन्ग्रेस ने सोशल मीडिया पर शेयर किया।

साधुरु टी गार्डन में प्रियंका ने मजदूरों के साथ मुलाकात की। हालाँकि, इस दौरान वो कई बार असहज भी नजर आईं और अपने सिर पर रखे गमछे को संभालती हुई दिखीं, जिसे मजदूर महिलाओं ने ठीक किया।

‘शिवसेना से जान का खतरा’: कंगना रनौत ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- मुंबई से सारे केस शिमला कर दें ट्रांसफर

कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल ने सुप्रीम कोर्ट से जान की सुरक्षा की गुहार लगाई है। कंगना ने अपने खिलाफ चल रहे मामले को हिमाचल प्रदेश ट्रांसफर करने का अनुरोध करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र में उन्हें शिवसेना से जान का खतरा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया है कि मुंबई की अदालतों में उनके खिलाफ चल रहे सभी मामलों को शिमला में ट्रांसफर किया जाए।

इनमें गीतकार जावेद अख्तर द्वारा कंगना रनौत के खिलाफ दायर किया गया आपराधिक मानहानि का मामला भी शामिल है। कंगना रनौत और उनकी बहन ने कहा कि ये सारे मामले बनावटी हैं और दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से दायर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचाने और उन्हें प्रताड़ित करने के लिए ये सब किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्याय-व्यवस्था पर भरोसा है, लेकिन मुंबई में जान-माल का खतरा है।

अपनी याचिका में दोनों ने कहा, “इस पर ध्यान देना ज़रूरी है कि महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार हमें प्रताड़ित कर रही है।” साथ ही संजय राउत द्वारा कंगना रनौत को ‘हरामखोर लड़की’ कहें जाने वाले बयान का भी जिक्र किया गया है। कंगना रनौत के पाली हिल बँगले को लेकर भी BMC ने केस दायर किया है। कुल 4 ऐसे मामले हैं, जिन्हें शिमला ट्रांसफर करने का अनुरोध किया गया है। इनमें आपराधिक मामले भी हैं।

‘बीवी के सामने गर्लफ्रेंड को वीडियो कॉल करता था शौहर, गर्भ में ही मर गया था बच्चा’: आयशा की आत्महत्या के पीछे की कहानी

अहमदाबाद के साबरमती नदी में हँसते-हँसते कूद कर आत्महत्या कर लेने वाली आयशा ने उससे ठीक पहले एक वीडियो बनाया। उससे साफ़ झलक रहा था कि उसके वैवाहिक रिश्ते में सब ठीक नहीं है।

23 वर्ष की आयशा की शादी राजस्थान के जालौर निवासी आरिफ खान से 2018 में हुई थी। वहीं की एक लड़की से आयशा के शौहर आरिफ का अफेयर था और आयशा के सामने ही वो वीडियो कॉल पर उससे बातें करता था। खुलासा हुआ है कि आरिफ अपनी प्रेमिका पर जम कर रुपए लुटाता था और इसीलिए बीवी आयशा के अब्बा से दहेज़ की माँग करता था।

आयशा के वकील ज़फर का कहना है कि निकाह के 2 महीने बाद से ही दिक्कतें शुरू हो गई थीं और गरीब माता-पिता की इज्जत बचाने के लिए आयशा चुप थी। वो पढ़ाई के अलावा घर-परिवार के काम में भी निपुण थी। इसी तरह एक बार डेढ़ लाख रुपए की जिद के कारण आरिफ अपनी गर्भवती बीवी को मायके छोड़ गया था।

अवसाद की वजह से आयशा को ब्लीडिंग होने लगी और सर्जरी के बावजूद गर्भ में पल रहे बच्चे को नहीं बचाया जा सका। आयशा के पिता का कहना है कि आरिफ के पिता ने कभी उनका फोन नहीं उठाया।

गुजरात पुलिस जालौर में आरिफ के घर पहुँची तो परिवार वालों ने बताया कि वह एक शादी में गया था और वहीं से कहीं चला गया। इसके बाद मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरिफ को सोमवार (मार्च 1, 2021) की रात पाली से अरेस्ट कर लिया गया।

आयशा ने आत्महत्या से पहले अपने पिता को फोन कॉल कर के सब बता दिया था। आयशा ने बताया था कि आरिफ उसे लेने नहीं आएगा। जब आयशा उसे फोन कर के उससे मिन्नतें कीं, तो आरिफ ने कहा कि मरना है तो मर जाओ और फिर वीडियो भेज देना।

आयशा अहमदाबाद के रिलीफ रोड पर स्थित एसवी कॉमर्स कॉलेज में इकोनॉमिक्‍स से MA की पढ़ाई कर रही थी। साथ ही एक प्राइवेट कंपनी में जॉब भी करती थी।

आयशा के अब्बा ने कहा है कि उनकी बेटी ने अपने शब्दों में शौहर आरिफ को माफ कर दिया लेकिन वो किसी को माफ नहीं करेंगे और उसे फाँसी की सजा दिलाकर रहेंगे। उन्होंने कहा, “चाहे कोई कुछ भी दे दे लेकिन मैं अपनी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार उसके हत्यारों को कभी भी माफ नहीं करूँगा।”

आयशा के आत्महत्या के बाद उसके शौहर का एक व्हाट्सएप्प स्टेटस वायरल हुआ था, जिसमें उसने लिखा था – “कौन छोड़ गया, ये महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इम्पोर्टेन्ट ये है कि कौन साथ है।”

आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में आयशा ने कहा था, “प्यार करते हैं आरिफ से। उसे परेशान थोड़े न करेंगे। उसे आज़ादी चाहिए, आज़ाद रहे वो। चलो, अपनी ज़िंदगी तो यहीं तक है। मैं खुश हूँ कि मैं अल्लाह से मिलूँगी। मैं उनसे पूछूँगी कि मुझसे क्या गलती हुई। अच्छे माँ-बाप मिले, दोस्त भी बहुत अच्छे मिले- फिर भी कमी कहाँ रह गई? सुकून के साथ जाना चाहती हूँ। और अल्लाह से मैं ये भी कहूँगी कि मुझे दोबारा इंसानों की शक्ल न दिखाए।”

योगी के पहुँचते ही ‘जय श्रीराम’ से गूँज उठा बंगाल, लव जिहाद और गोहत्या पर ममता को घेरा

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (2 मार्च 2021) को बंगाल के मालदा में रैली की। इस दौरान ‘जय-जय श्री राम’ के नारों से पूरा कार्यक्रम स्थल गूँज रहा था।

सीएम योगी ने कहा कि कभी देश को नेतृत्व देने वाला बंगाल आज बदहाल है। सत्ता के संरक्षण में अपराध और आतंकवाद देश की सुरक्षा के लिए चुनौती बन गई है। उन्होंने कहा कि बंगाल शक्ति की पूजा के लिए जाना जाता है। लेकिन अब यहाँ दुर्गापूजा पर पाबंदी लगाई जाती है। गोवंश की हत्या होती है। राम का नाम नहीं लेने दिया जाता है।

उन्होंने कहा, “आज बंगाल में सत्ता प्रायोजित अपराध और आतंकवाद न केवल यहाँ की सुरक्षा के सामने संकट खड़ा कर रहा है, बल्कि देश की सुरक्षा को भी चुनौती देता दिखाई देता है। आज बंगाल में दुर्गापूजा पर प्रतिबंध लगाया जाता है। ईद में जबर्दस्ती गौ हत्याएँ कराई जाती हैं।”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बंगाल में जय श्रीराम का नारा लगाने से रोका जाता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामभक्तों पर गोली चलवाने वालों का हाल सबने देखा है। बंगाल में भी जो राम द्रोही हैं, उनका कोई काम नहीं है।

सीएए के विरोध की आड़ में हुई हिंसा को लेकर भी उन्होंने बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस और उसकी मुखिया ममता बनर्जी को घेरा। उन्होंने सीएए लागू होने के बाद बंगाल में हुई हिंसा को सत्ता प्रायोजित करार दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल की सरकार घुसपैठियों के साथ खड़ी है। उसे राज्य की जनता से कोई मतलब नहीं है।

आयुष्मान भारत सहित अन्य केंद्रीय योजनाओं को लागू नहीं करने के लिए भी योगी ने ममता सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बंगाल में लव जिहाद को अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन यहाँ की सरकार इसे रोक नहीं पा रही।

उन्होंने कहा, “जब बंगाल में अराजकता और बदहाली दिखाई देती हैं तो पूरे देश को पीड़ा होती है। आज बंगाल में गरीबी और बदहाली है। बंगाल में केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लागू नहीं होने दिया जाता है।”

रैली से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा था, “नमस्कार बंगाल…। सनातन संस्कृति की जागृत धरा पर आज आप सभी के बीच उपस्थित होने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हो रहा है। ‘वंदे मातरम्’ के अमर उद्घोष से सम्पूर्ण देश की राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने वाली वीर भूमि को मेरा नमन। जय श्री राम।”

‘प्राइवेट पार्ट में हाथ घुसाया, कहा पेड़ रोप रही हूँ… 6 घंटे तक बंधक बना कर रेप’: LGBTQ एक्टिविस्ट महिला पर आरोप

LGBTQ+ एक्टिविस्ट दिव्या दुरेजा पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं। एक योग शिक्षिका ने उनके ऊपर ये आरोप लगाए। साथ ही ‘LGBTQ एक्टिविस्ट ने मेरा रेप किया’ वाला प्लाकार्ड लेकर सोशल मीडिया पर अपना रोष भी प्रकट किया।

इंस्टाग्राम पर Elodie नामक महिला ने ये आरोप लगाया है। उन्होंने नॉर्थ गोवा के पर्नेम पुलिस थाने में FIR भी दर्ज कराई है। इंस्टाग्राम पर अपना दुःख बयाँ करते हुए उन्होंने लिखा:

“इसके बारे में लिखना काफी कठिन और दर्द भरा है। यहाँ तक कि ये शर्मिंदगी भरा भी है, इसके बावजूद भी कि मुझे पता है कि जो भी हुआ, उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूँ। मेरा शोषण करने वाली की लोकप्रियता को देखते हुए काफी समय तक हिचकिचाने के बाद मैं समुदाय के लिए इसे अच्छा समझती हूँ कि जो भी हो, उसके बारे में मैं बताऊँ। इसके लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन, मैं दोनों माध्यमों का इस्तेमाल करूँगी।”

उन्होंने लिखा कि पिछले सप्ताह एक ‘TEDx वक्ता, LGBTQ एक्टिविस्ट और मेन्टल हेल्थ एडवोकेट दिव्या दुरेजा द्वारा मेरा अपहरण किया गया, यौन शोषण किया गया और मारपीट की गई। उन्होंने बताया कि दिव्या को गिरफ्तार किया जा चुका है लेकिन उन्हें डर है कि बाहर निकल कर वो किसी और के साथ भी ऐसा ही करेगी। बकौल पीड़िता, दिव्या ने उनसे इंस्टाग्राम पर संपर्क कर के साथ में लंच की पेशकश की थी।

पीड़िता का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य और LGBTQ एक्टिविस्ट होने के कारण वो दिव्या से खासी प्रभावित थीं, इसलिए उन्होंने लंच के लिए हामी भर दी। वहाँ उनकी एक अन्य दोस्त भी थी, जो फेमिनिज्म पर पुस्तक लिख रही है।

Elodie का कहना है कि वो लंच के लिए दिव्या को लेने अश्वेम स्थित ‘होटल सी व्यू रिसोर्ट’ गईं, जहाँ दिव्या ने उन्हें अपने होटल के कमरे में बुलाया और बालों को ठीक करने को लेकर मदद माँगी। पीड़िता ने आगे लिखा है:

“उसने मुझे मेरे पीठ के दर्द को ठीक करने का झूठा वादा किया और इसी बहाने उसने मुझे ड्रग्स देकर अपने कमरे में 6 घंटों तक बंद रखा। साथ ही उसने भूत-प्रेतों से बात करने वाली एक तंत्र क्रिया करने का भी ढोंग रचाया। उसने दवा किया कि हम दोनों एक-दूसरे से पिछले जन्म से ही जुड़े हुए हैं और हमारा मिलना लिखा हुआ था। और इस तंत्र क्रिया के बाद दोनों हमेशा के लिए साथ हो जाएँगे। आप जितना सोच सकते हैं, मुझे उससे कहीं ज्यादा विक्षिप्तता महसूस हुई। उसने मुझे बिना रुके 1 लिटर पानी पिला डाला। वो कह रही थी कि मुझे नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाने के लिए ये ज़रूरी है।”

Elodie का कहना है कि इसके बाद दिव्या उसे पीछे से खींचने लगी और ‘बेबी, तुम ये कर सकती हो’ – ऐसा ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। पीड़िता ने आगे बताया कि दिव्या ने उन्हें दीवार से सटा कर आँखें बंद कर के खड़ा कर दिया और 4 घंटे तक ऐसे ही रखा। जब भी वो आँखें खोलतीं, दिव्या दुरेजा जोर-जोर से चिल्लाने लगतीं। वो दावा करती रहीं कि ये एक प्रकार की तंत्र क्रिया है, जिससे दोनों एक हो जाएँगे।

वहीं FIR कॉपी के भीतर लिखा है कि दिव्या ने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स के भीतर अपनी उँगलियाँ घुसा डालीं और उसके शरीर पर जगह-जगह किस करने लगी। Elodie ने एक अंग्रेजी कविता भी पोस्ट की, जिसमें दिव्या ने लिखा कि दोनों हमेशा के लिए एक हो जाएँगे, यही भाग्य में लिखा है। पीड़िता ने लिखा कि काफी देर खड़े रखने के बाद दिव्या ने उन्हें बिस्तर पर भेजा। इसके आगे का हिस्सा और भी शॉकिंग है, जिसके अनुसार:

“उसने मेरे वजाइना में हाथ घुसा दिया। वो गहरी और गहरी घुसाती चली गई। मुझे खासा दर्द हो रहा था लेकिन वो कह रही थी कि वो एक पेड़ रोप रही है। जब मैं दर्द से चिल्ला कर वहाँ से जाने के लिए कहने लगी तो उसने कहा कि आओ प्यार करें। काफी देर बाद उसने कहा कि अब आत्मा ने आदेश दिया है कि वो जा सकती है। कई वेटरों ने भी ऐसा सुना और पुलिस के सामने बताया। दिव्या को फिर कस्टडी में लिया गया।”

पीड़िता ने इंस्टाग्राम पर बयाँ किया अपना दर्द

इंस्टाग्राम पर इतना सब कुछ सामने आने के बाद लोगों ने पीड़िता के साथ सहानुभूति जताई। लोगों ने ईश्वर से उन्हें शक्ति देने की प्रार्थना की। Elodie ने भी कई स्टोरीज डाल कर खुद के दर्द के बारे में लोगों को बताया और मदद के लिए उनका धन्यवाद किया। इस मामले में FIR में IPC की धारा-342 (किसी को गलत तरीके से बंधक बनाना) और धारा-354 (किसी स्त्री की लज्जा भंग करना और उसका उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया गया है।