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सतीश बनकर हिंदू युवती से शादी कर रहा था 2 बच्चों का बाप टीपू: मंडप पर नहीं बता सका गोत्र, ट्रू कॉलर ने पकड़ाया

झारखंड के एक गाँव में एक हिंदू लड़की को इस्लाम में परिवर्तित करने के प्रयास के आरोप में पुलिस ने टीपू सुल्तान नाम के एक विवाहित मुस्लिम व्यक्ति को बुधवार (फरवरी 24, 2021) देर शाम गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

आरोपित की पहचान 30 वर्षीय टीपू सुल्तान के रूप में की गई है, जिसकी शादी सात साल पहले हो चुकी है और उसके दो बच्चे भी हैं। टीपू मूल रूप से झारखंड में देवघर जिला स्थित पलाजोरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत धवन रामपुर गाँव का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, टीपू सुल्तान ने लगभग 6 महीने पहले एक स्थानीय मॉल में जिले के मसानजोर थानांतर्गत पटसीमला गाँव की एक 19 वर्षीय लड़की के साथ धनबाद के सतीश राय के रूप में दोस्ती हुई थी।

आरोपित टीपू ने न केवल अपनी पहचान हिंदू के रूप में बताई बल्कि अपने स्नातक होने का भी दावा किया। मसानजोर पुलिस स्टेशन के अधिकारी विजय कुमार सिंह के अनुसार, टीपू ने युवती को प्रभावित करने के लिए उससे कहा कि वह पेट्रोल पंप का मालिक है और हॉर्लिक्स के डीलर के रूप में भी काम करता है। पुलिस ने बताया कि दोनों ने अपनी बातचीत के पहले दिन ही मोबाइल नंबर शेयर कर लिए थे।

धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम प्रसंग बढ़ने लगा और इस बीच शादी का झाँसा देकर टीपू ने युवती के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए। पीड़िता का कहना है कि टीपू उसे एक बार धनबाद भी ले गया था और अपने दोस्त के मकान को अपना मकान बताकर दिखाया। टीपू युवती के गाँव भी गया और युवती की बूढ़ी माँ भी उन दोनों के रिश्ते के लिए तैयार हो गई थी।

ट्रू कॉलर ऐप से हुआ खुलासा 

युवती के गाँव वालों की समझदारी के कारण युवती लव-जिहाद का शिकार होने से बच गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, गत मंगलवार को टीपू जब  शादी के लिए गाँव पहुँचा। लेकिन रात में शादी की तैयारी के बीच ही गाँव के लोगों को उस पर संदेह हुआ। और उन्होंने शादी रोककर पुलिस को इसकी सूचना दी।

सूचना मिलते ही रात करीब 12 बजे मसानजोर थाना प्रभारी विजय कुमार सिंह मौके पर पहुँचे और उन्होंने आरिपित टीपू को हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि मोबाइल ऐप ‘ट्रू कॉलर’ के जरिए आरोपित की पहचान का खुलासा हुआ। शक होने पर जब पुलिस ने आरोपित का नंबर डायल किया तो ‘ट्रू कॉलर’ ऐप पर उसका नाम ‘टीपू सुल्तान’ दिखा रहा था। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 417 और 376 के तहत FIR दर्ज किया है।

गोत्र न बताने पर बढ़ा संदेह

ग्रामीणों ने जब सतीश राय उर्फ़ टीपू से उसके गोत्र के बारे में पूछा तो वह इसका जवाब नहीं दे पाया, चुप रह गया। इसके बाद लोगों का शक और भी ज्यादा गहरा गया और उन्होंने कड़ाई से पूछताछ करना शुरू कर दिया। इस दौरान जब उन्होंने आरोपित के मोबाइल से उसके गाँव में फोन लगाया तो फोन अंसारी नाम के किसी शख्स ने रिसीव किया। पीड़िता ने भी अपने बयान में आरोपित पर शादीशुदा होने की बात छुपाते हुए यौन शोषण का आरोप लगाया। 

इस बीच, आरएसएस के एक वरिष्ठ अधिकारी विक्रम पांडे ने कहा, “टीपू सुल्तान की गिरफ्तारी हिंदू लड़कियों को लव जिहाद के माध्यम से इस्लाम में परिवर्तित करने के प्रयासों के खिलाफ एक कड़े कानून को लागू करने के तात्कालिकता की गवाही है। लव जिहाद मुस्लिम कट्टरपंथी समूहों द्वारा हिंदू समुदाय के खिलाफ एक बड़ी साजिश है।”

कुरान की आयतें करती हैं सीमित परिवार की पैरवी: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी ने बताया इस्लाम को परिवार नियोजन का समर्थक

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एसवाई कुरैशी अपनी नई किताब ‘द पॉपुलेशन मिथ: इस्लाम, फैमिली प्लानिंग एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया’ (The Population Myth: Islam, Family Planning and Politics in India) में धार्मिक आधार पर भारत की आबादी और जनसांख्यिकी का विश्लेषण किया है। वह अपनी इस किताब में इस मिथक को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं कि इस्लाम में परिवार नियोजन (Family Planning) की मनाही है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त की इस किताब में विश्लेषण किया गया है कि कैसे मजहब के इन मिथकों का इस्तेमाल कर बहुसंख्यक समुदाय को डराया जाता रहा है। एसवाई कुरैशी अपनी किताब में ‘तथ्यों’ के आधार पर इन मिथकों को तोड़ने और यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि कैसे परिवार नियोजन सभी समुदायों के हित में है।

एसवाई कुरैशी ने टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स को इंटरव्यू देते हुए कहा कि इस किताब में इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरान और हदीस के हवाले से बताया गया है कि कैसे इस्लाम दुनिया के पहले ऐसे कुछ धर्मों में से एक है जिसने छोटे परिवार की वकालत की, इसलिए ज्यादातर इस्लामिक देशों में जनसंख्या नीतियाँ लागू हैं।

‘इस्लाम है परिवार नियोजन के विचार का अग्रणी’

कुरैशी ने समाचार पत्र ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह मिथक है कि इस्लाम परिवार नियोजन के विचार के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि वास्तव में इस्लाम परिवार नियोजन की अवधारणा का अग्रणी है। उन्होंने कहा कि 25 साल पहले उनका भी मानना था कि इस्लाम परिवार नियोजन के खिलाफ है, लेकिन जब उन्होंने इस विषय का अध्ययन किया तो पाया कि कुरान में तो इसका ठीक उल्टा है। 

‘कुरान की आयत में परिवार नियोजन का जिक्र’

अपनी किताब में एसवाई कुरैशी ने कहा है कि इस्लाम न केवल परिवार नियोजन का समर्थक है, बल्कि इस्लाम परिवार नियोजन की विचारधारा का प्रणेता भी रहा है। वो कहते हैं, “यह आश्चर्यजनक और उल्लेखनीय है कि 1,400 साल पहले, जब दुनिया पर बढ़ती जनसंख्या का दबाव नहीं था, कुरान नियोजित परिवारों के बारे में बात कर रहा था। उदाहरण के लिए, कुरान में एक आयत कहती है: ‘युवा पुरुषों को तब शादी करनी चाहिए जब आप इसका खर्च वहन कर सको, जब आप अपने परिवार की परवरिश कर सको।’ एक व्यक्ति पैगंबर से स्पष्टीकरण माँगता है और पूछता है: ‘मैं एक गरीब आदमी हूँ लेकिन मेरी यौन इच्छाएँ हैं तो मुझे क्या करना चाहिए?’ पैगंबर कुरान के शब्दों को दोहराते हैं और उसे उपवास की कोशिश करने के लिए कहते हैं जो यौन इच्छा को दबाता है। कुरान की ये दो आयतें हैं, जो मेरे अनुसार परिवार नियोजन के विचार की पैरवी करती हैं।

‘मुस्लिम समुदाय में सबसे कम बहुविवाह’

दूसरे ‘मिथक’ के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह मिथक है कि भारत में बहुविवाह की प्रथा व्याप्त है। 1975 में सरकार द्वारा की गई बहुविवाह पर अध्ययन से पता चलता है कि भारत में सभी समुदायों में बहुपत्नी हैं और मुस्लिम में सबसे कम बहुविवाह हैं। इस्लाम केवल इस शर्त पर बहुविवाह की अनुमति देता है कि महिला अनाथ है जो खुद का गुजारा करने में असमर्थ है और यदि आप उसे अपनी पहली पत्नी के बराबर मान सकते हैं। लोगों ने इसे अनुमति के रूप में माना है जो कि सही नहीं है। कुरैशी के अनुसार, एक जनसांख्यिकी के रूप में मैं कह सकता हूँ कि हमारे लिंग अनुपात को ध्यान में रखते हुए भारत में बहुविवाह प्रथा संभव नहीं है। अगर एक आदमी दो बार शादी करता है, तो किसी दूसरे आदमी को अकेला रहना चाहिए।

‘मुस्लिम समुदाय तेजी से परिवार नियोजन को अपना रहे हैं’

उन्होंने कहा कि तीसरा मिथक यह है कि मुस्लिमों द्वारा हिंदू आबादी से आगे निकलने के लिए कई बच्चे पैदा करने की एक संगठित साजिश है। जबकि मैंने कई दक्षिणपंथी राजनेताओं ने सार्वजनिक भाषणों में कहा है कि हिंदू पुरुषों के कई बच्चे होने चाहिए। इसलिए अगर कोई संगठित साजिश है तो वह दक्षिणपंथी हिंदुओं की है। मैंने लिखा है कि मुस्लिमों के लिए हिंदुओं से आगे निकलना सांख्यिकीय रूप से कैसे असंभव है। 

कुरैशी ने दलील दी, “दशकों से भारतीयों को यह दुष्प्रचार घुट्टी की तरह घोल कर पिलाया गया कि मुस्लिम ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं ताकि हिंदुओं पर बढ़त बना सकें, और इसी तरह से मुस्लिम राजनीति सत्ता पर कब्जा करने की सोच रहे हैं।”

उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा, “दक्षिणपंथियों का आरोप है कि मुस्लिमों की संख्या एक संगठित साजिश के रूप में तेजी से बढ़ रहा है। मैं मानता हूँ कि मुस्लिम जन्म दर उच्चतम है और पिछले 70 वर्षों में जनसांख्यिकी बदल गई है। 84% हिंदू 79.8% पर आ गए हैं और मुस्लिम 9.8% से 14% हो गए हैं। लेकिन मुस्लिम समुदाय तेजी से परिवार नियोजन को अपना रहे हैं और वे जन्म दर में हिंदुओं से आगे नहीं निकलेंगे। 60 वर्षों के बाद, मुस्लिम आबादी में 4.2% की वृद्धि हुई; प्रक्षेपण यह है कि 2100 में, मुस्लिम आबादी का 18% हो जाएगा। मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं को पछाड़ने का कोई सवाल ही नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर दिनेश सिंह, जो एक विशेषज्ञ हैं, ने डेटा का अध्ययन किया और कहा कि वे कभी भी हिंदुओं से आगे नहीं निकल सकते हैं।”

फर्जी है ‘हिन्दू खतरे में है’ का नारा

इसके साथ ही उन्होंने ‘हिंदू खतरे में है’ के नारे को फर्जी बताया। उन्होंने कहा, ‘हम पाँच हमारे पच्चीस’ या ‘हम चार हमारे चालीस’ जैसी असभ्य नारेबाजी की जा रही है। मैं उन्हें चैलेंज देता हूँ कि वो मेरे सामने एक ऐसा मुस्लिम युवक ले आए, जिसकी चार बीबी और 25 बच्चे हों- 1.3 बिलियन की आबादी में से कोई एक भी हो।

पीएम मोदी के कोरोना से संक्रमित होने की कर चुके हैं दुआ

गौरतलब है कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी वैसे तो अपनी सेकुलर छवि के लिए जाने जाते हैं, लेकिन पिछले दिनों सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उनकी कुंठा दिखाई पड़ी। उन्होंने ट्विटर पर अप्रत्यक्ष रूप से पीएम के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की कामना की। जब इसके लिए आलोचना शुरू हुई तो उन्होंने ट्वीट डिलीट कर माफी मॉंग ली। उनका कहना था कि ऐसा गलत बटन दबने के कारण हुआ था।

औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हुए ‘मेट्रो मैन’ श्रीधरन, केरल के लिए कुछ करने की चाह ने जोड़ा BJP से

‘मेट्रो मैन’ के नाम से जाने जाने वाले ई श्रीधरन केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में औपचारिक तौर पर शामिल हो गए। बृहस्पतिवार (फरवरी 25, 2021) को केरल में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री आरके सिंह की मौजूदगी में केरल के मलप्पुरम में श्रीधरन ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

इस मौके पर उन्होंने कहा, “भाजपा में शामिल होने का निर्णय मेरे जीवन का एक नया चरण है। मैं हमेशा केरल के लिए कुछ करना चाहता था… मुझे लगा कि भाजपा में शामिल होना सबसे अच्छा रहेगा और मैंने ऐसा किया है।” श्रीधरन ने सार्वजनिक बैठक में भाजपा के शीर्ष नेताओं को धन्यवाद दिया।

ई श्रीधरन के भाजपा में शामिल होने की जानकारी देते हुए भाजपा के केरल अध्यक्ष के सुरेन्द्रन ने ट्विटर पर कहा, ”पद्म विभूषण श्री ई श्रीधरन जी ने केंद्रीय मंत्री आरके सिंह जी की उपस्थिति में ऐतिहासिक ‘केरल विजय यात्रा’ के दौरान आधिकारिक तौर पर भाजपा ज्वाइन कर ली है। मेट्रो मैन जैसे लोग मजबूती से इस बात पर भरोसा करते हैं कि केवल भाजपा ही हमारे राज्य में विकास ला सकती है।” 

कयास लगाए जा रहे हैं कि ई श्रीधरन इस साल अप्रैल-मई में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार भी बनाए जा सकते हैं। श्रीधरन के भाजपा का दामन थामने से राज्य में भाजपा की पैठ मजबूत हो सकती है। हाल ही में ‘मैट्रो मैन’ ने कहा था कि उनका लक्ष्य केरल में पार्टी को सत्ता में लाना है और यदि ऐसा होता है तो पार्टी के आदेश पर वह मुख्यमंत्री बनने के लिए भी तैयार हैं।

दिल्ली मेट्रो को यथार्थ में जमीन पर उतारने के पीछे ई श्रीधरन का दिमाग और मेहनत ही मानी जाती है। दिल्ली मेट्रो के अलावा कोलकाता मेट्रो, कोच्ची मेट्रो और देश के अलग-अलग मेट्रो प्रोजेक्ट्स में भी श्रीधरन का योगदान रहा है। यही कारण है कि उन्हें भारत का मेट्रो मैन कहा जाता है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मलयाली समाचार पत्र मनोरमा से बात करते हुए ई श्रीधरन ने इस मुद्दे पर अपने विचार रखे थे। उन्होंने कहा था, “यह कोई आकस्मिक निर्णय नहीं है। मैं पिछले एक दशक से केरल में हूँ और इस प्रदेश के लिए कुछ करना चाहता हूँ। मैं अकेले सब कुछ नहीं कर सकता हूँ। भारतीय जनता पार्टी बाकियों से अलग है, इसलिए मैंने इसमें शामिल होने का फैसला लिया। मैंने केरल के लिए बहुत कुछ करने की योजना बनाई थी, जिसमें से काफी कुछ भाजपा के घोषणा पत्र में मौजूद है। सबसे पहले मैं पार्टी की सदस्यता लूँगा। इसके बाद पार्टी मुझे मेरी जिम्मेदारियों से अवगत कराएगी, अभी उन पर कोई चर्चा नहीं हुई है।”

‘अंकित शर्मा ने किया हिंसक भीड़ का नेतृत्व, ताहिर हुसैन कर रहा था खुद का बचाव’: ‘द लल्लनटॉप’ ने जमकर परोसा प्रोपेगेंडा

दिल्ली दंगों के 1 साल बीतने के बावजूद कुछ जख्म ऐसे हैं जिनका भरना कुछ परिवारों के लिए नामुमकिन है। आगामी सालों में 23-24 फरवरी की तारीख जब भी आएगी, साल 2020 के ये जख्म ताजा हो जाएँगे। उत्तर पूर्वी दिल्ली के लिए जहाँ ये तारीखें काले दिन के तौर पर दर्ज रहेंगी, वहीं कुछ मीडिया संस्थान ऐसे हैं जिनके लिए ये अवसर भी प्रोपेगेंडा चलाने का एक मौका होगा।

24 फरवरी 2021 को द लल्लनटॉप ने अपने यूट्यूब चैनल पर दिल्ली दंगों पर ‘दहली’ शीर्षक के साथ एक डॉक्यूमेंट्री अपलोड की। इसमें उन्होंने शाहीन बाग की शुरुआत से दिल्ली दंगों के आखिरी दिन तक की एक-एक बात को कवर करने की कोशिश की।

हालाँकि, हर पहलू को दिखाने के चक्कर में लल्लनटॉप शायद भूल गया कि उनकी डॉक्यूमेंट्री का झुकाव किस ओर हो रहा है और किस तरह एक प्रकार का नैरेटिव बना रहे हैं।

शाहीन बाग को शांतिपूर्ण प्रदर्शन बताने से लेकर कपिल मिश्रा को हिंसा भड़काने का जिम्मेदार बताने का काम इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए बखूबी किया गया। इसमें जामिया में हुई फायरिंग को दिखाया गया, कपिल गुर्जर जिसके बाद में AAP से जुड़े होने के प्रमाण मिले थे, उसकी फुटेज तब तक दिखाई गई जब तक वह जय श्रीराम बोलता नहीं दिखा और ये नहीं जताया कि उसने गोली हिंदू होने के नाते चलाई है।

वहीं वीडियो में पुलिस पर गोली तानने वाला शाहरूख भी दिखा लेकिन चंद सेकेंड के लिए। वो भी इस तुलना के साथ कि जैसे कपिल गुर्जर ने बंदूक उठाई थी वैसे ही तस्वीर शाहरूख की है। 

अंकित शर्मा पर लगा हिंसक भीड़ के नेतृत्व करने का इल्जाम?

अब पूरी डॉक्यूमेंट्री पर बात करें तो बहुत बिंदु हैं जो दर्शाते हैं कि कैसे इसमें एक विशेष समुदाय को मासूम दिखाने का प्रयास हुआ और ये बताने की कोशिश हुई कि पूरे दंगों में उनकी कोई गलती नहीं थी। पीड़ितों के वर्जन की संख्या भी देंखे तो शायद द लल्लनटॉप ज्यादा हिंदू पीड़ितों के पास नहीं जा पाया।

खैर हमें इससे आपत्ती नहीं है। लेकिन, एक बात जिस पर शायद कम लोगों का ध्यान जाए वो यह कि इस पूरी 1 घंटे 8 मिनट की वीडियो में जहाँ विशेष समुदाय के पीड़ितों के जख्म उनके परिजनों के दर्द तक जूम कर करके दिखाए गए, वहीं अंकित शर्मा जिन्हें ताहिर हुसैन की बिल्डिंग में बर्बरता से मार दिया गया, उन पर सच्चाई बताना तो दूर हिंसा करने वाली भीड़ का नेतृत्व करने के इल्जाम लगा दिए गए।

इंडिया टुडे के पत्रकार ऐश्वर्या पालीवाल ने इस डॉक्यूमेंट्री के 43 मिनट वाले स्लॉट के बाद बेहद गंभीर हाव-भाव के साथ बताने की कोशिश की कि जो लोग बता रहे हैं कि अंकित शर्मा आईबी के स्टॉफ से थे, वो बात बाद में निकली, उससे पहले वहाँ के लोगों का कहना था कि अंकित भीड़ का हिस्सा थे और भीड़ को लेकर मुस्लिम बहुल इलाकों में जा रहे थे।

अंकित शर्मा का हाथ और इंडिया टुडे के पत्रकार ऐश्वर्या पालीवाल

अब पालीवाल की बातों का क्या मतलब है, उन्हें ऐसी जानकारी देने वाले कौन से स्रोत हैं, इस पर ऑपइंडिया को बताने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन हमारे पास अंकित के परिवार के कुछ शब्द हैं, जिन्हें पढ़कर आज लगता है कि उन्हें पहले से पता था कि आखिर में न्याय तो मिलेगा नहीं लेकिन उसके बदले अंकित को दंगाई घोषित जरूर कर दिया जाएगा।

क्या कहा था अंकित के परिवार ने?

जब दंगे हुए थे और अंकित की लाश नाले में मिलने से सब सकते में आ गए थे, उस समय ऑपइंडिया ने सच जानने के लिए अंकित के घरवालों से बात की थी। अंकित के भाई अंकुर ने तब कहा था,

“मेरे भाई अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन ने मारा है। वो यहाँ दंगाइयों का सबसे बड़ा सरगना है। वही दंगे करवा रहा है। जब मेरे भाई को इस्लामी दंगाई घसीटते हुए ले जा रहे थे, तब वही उन्हें निर्देश दे रहा था कि क्या और कैसे करना है। अरविंद केजरीवाल मेरे भाई को दंगाई साबित कर देंगे। मेरा भाई दंगाई नहीं था। वो एक सरकारी अधिकारी था, जो लोगों को समझा रहा था कि झगड़ा मत करो। वो दोनों तरफ के लोगों को जानता था, इसलिए उन्हें समझाने गया था।”

दिलचस्प बात यह है कि अंकित के भाई ने जिस ताहिर हुसैन पर अपने भाई की हत्या का इल्जाम लगाया, उसी ताहिर हुसैन को लेकर सारी चीजें आज कोर्ट में स्पष्ट हैं। लेकिन तब भी डॉक्यूमेंट्री यही कहती है कि उसके बारे में लोग क्या कह रहे थे और कैसे वो उस दिन खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था।

ये प्रोपगेंडा फैलाने का तरीका नहीं है तो क्या है? सोचने वाली बात है कि यदि लोगों के हवाले से ही बातों को रखना है तो लोग तो ये भी कह रहे थे कि अंकित शर्मा को घसीटकर ताहिर की बिल्डिंग में ले जाया गया, उसी के कहने पर उनकी हत्या हुई। फिर क्यों इसमें एक ही तरह के लोगों की बातें बताई गईं?

अंकित शर्मा और ताहिर हुसैन

वास्तविकता ये हैं कि चाँद बाग, जहाँ अंकित मारे गए वो एक मुस्लिम बहुल इलाका है तो पालीवाल से पूछा जाना तो बनता है अंकित कौन से मुस्लिम बहुल इलाके में जा रहे थे? सच यही है कि उस दिन इस्लामी भीड़ ने अंकित पर हमला किया था। और हमला भी ऐसा कि अंकित की आंते तक फाड़ दी गई थीं। मारते हुए भीड़ की क्या मंशा थी इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि 6 लोगों ने उन पर 400 से ज्यादा बार हमले किए थे और मारने के बाद उन्हें एक नाले में फेंक दिया गया था।

आज उन दंगों के 1 साल बीतने के बाद हम मोहम्मद नासिर खान की आँख में गोली मारने वाले किसी हिंदू को जायज नहीं ठहराते, लेकिन ये तो पूछ सकते हैं जब द लल्लनटॉप नासिर की आपबीती सबके सामने ला सकता है, तो अंकित शर्मा के साथ हुई बर्बरता बताने से क्या परहेज है? दर्शकों के मन में ये प्रश्न क्यों छोड़ा जा रहा है कि जैसे अंकित को उसके किए का फल मिला, वो खुद मारकाट मचाने जा रहे थे और उनका शिकार हो गया।

चाँद बाद की दरगाह

इस वीडियो की शुरुआत में ही एक पीर बाबा की दरगाह दिखाई है, वीडियो के अंत तक किसी मंदिर के पुजारी का वर्जन क्यों नहीं लिया। वो तस्वीर जिसमें कुर्ते टोपी वाला पीड़ित जिस पर हिंसक भीड़ लाठी भाँज रही है, यदि वह दृश्य डराने वाला है तो क्या विनोद का शव भयभीत करने वाला नहीं है जिसे गली में फेंककर मजहबी नारों के साथ उसके बेटे को धमकी दी गई थी कि पूरी रात लाशों का सिलसिला जारी रहेगा।

द लल्लनटॉप! 23-24 फरवरी 2020, दिल्ली दहली थी, आग में झुलसी थी, 50 से ज्यादा लोगों ने अपनों को खोया था। लेकिन उन सबकी पृष्ठभूमि हिंदूवादी संगठनों या नेता की एंट्री से बहुत पहले से तैयार हो रही थी। आज इन बातों के तमाम सबूत मौजूद हैं। पुलिस पर हमले से लेकर आम जन की हत्याओं के पीछे किसकी साजिश थी, इसके भी खुलासे हो रहे हैं। ऐसे में इतनी घटिया प्रयास यदि न ही किए जाएँ तो वह आम पाठक और दर्शक के लिए बेहतर होंगे, क्योंकि हासिल इन सबका कुछ नहीं होगा, बस फर्क पड़ेगा तो आपकी नैतिकता और विश्वसनीयता पर, जिसे पहले ही गाली पड़ती है।

आमिर खान की बेटी इरा अपने संघी हिन्दू नौकर के साथ फरार.. अब होगा न्याय: Fact Check से जानिए क्या है हकीकत

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की बेटी इरा खान की एक युवक के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में इरा खान एक युवक के साथ देखी जा रही हैं, जिसने अपने माथे पर तिलक लगा रखा है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस फोटो में नजर आ रहा हिंदू युवक आमिर के घर का ‘संघी नौकर’ है, जो इरा को भगा कर ले गया है।

सोशल मीडिया पर इस दावे को बड़े स्तर पर शेयर किया जा रहा है

एक फेसबुक यूजर ने ये फोटो शेयर करते हुए लिखा, “आमिर खान जो हिंदुओं को नीचा दिखाने हिंदू नौकर रखा था उसकी बेटी इरा खान अपने हिन्दु नौकर को लेके फरार ..!!”

वहीं एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “आमिर खान की बेटी इरा खान अपने हिन्दू नौकर के साथ फरार… किरण खान राव को फिर डर लगने लगेगा।”

इसी तस्वीर को शेयर करते हुए एक यूजर ने लिखा, “आमिर खान जिसने हिन्दुओ को नीचा दिखाने के लिए हिन्दू नौकर रखा था… उसी आमिर खान की बेटी इरा खान अपने ही हिन्दू नौकर को लेकर फरार हो गई।”

सच क्या है?

बता दें कि सोशल मीडिया पर इरा खान के साथ जिस युवक की फोटो वायरल है, वो फिटनेस ट्रेनर नूपुर शिखरे हैं। उनके साथ इरा के भाग जाने की बात बिलकुल बेबुनियाद है। सोशल मीडिया पर जो तस्वीर वायरल हो रही है, वो नूपुर ने 17 नवंबर 2020 को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट की थी। नूपुर ने 17 नवंबर 2020 को वायरल फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा था, “क्योंकि हमें तैयार होना और मुस्कुराना पसंद है, शुभ दीपावली!”

वहीं, इरा ने 11 फरवरी 2021 को ‘#myvalentine’ और ‘#dreamboy’  जैसे हैशटैग्स का इस्तेमाल करते हुए नूपुर शिखरे संग एक फोटो शेयर की थी और लिखा था, “तुम्हारे साथ और तुमसे वादा करना फख़्र की बात है।” इरा खान के इस पोस्ट के चलते इस बात की लगभग पुष्टि हो चुकी है कि वह नुपुर शिखरे को डेट कर रही हैं

इरा खान द्वारा साझा की गई एक तस्वीर में दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्करा रहे हैं। दूसरी तस्वीर इरा खान के कज़िन की शादी की है। इसके बाद की तस्वीर में दोनों एक दूसरे के नज़दीक खड़े हैं। चौथी तस्वीर में दोनों लंच कर रहे हैं और पाँचवी तस्वीर ‘कैंडिड’ है।

इरा की इस पोस्ट के बाद मीडिया में नूपुर और इरा के रिश्ते के बारे में कई रिपोर्ट छपी थीं। नूपुर शिखरे एक फिटनेस ट्रेनर हैं जो कुछ समय से इरा खान को ट्रेनिंग दे रहे हैं। नूपुर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इरा को ट्रेनिंग देते हुए कई वीडियो शेयर किए हैं। नूपुर बॉलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन को भी ट्रेनिंग दे चुके हैं।

हमें ऐसी कोई भी मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें आमिर खान के बेटी के किसी ‘संघी हिंदू नौकर’ संग भाग जाने की बात लिखी हो। स्पष्ट है कि आमिर खान की बेटी इरा खान के किसी हिंदू नौकर संग भाग जाने की बात कोरी अफवाह और भ्रामक है।

इरा खान, आमिर खान और उनकी पूर्व पत्नी रीना दत्ता की बेटी हैं। 2019 के दौरान Euripides’ Medea के नाट्य रुपांतरण के साथ इरा खान ने अपने निर्देशन करियर की शुरुआत की थी। इसके पहले तक इरा खान बॉलीवुड की दुनिया में बहुत सक्रिय नहीं थीं।  

मोदी सरकार का विरोध करने स्कूटी से निकलीं CM ममता गिरने से बाल-बाल बचीं: देखें वीडियो

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार (फरवरी 25, 2021) को इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सवार होकर पेट्रोल-डीजल के बढ़ती कीमतों का विरोध करने निकलीं। इस दौरान राज्य सचिवालय नबान्न की ओर जाते वक्त एक जगह वह स्‍कूटी पर से अपना संतुलन खो बैठीं और गिरती-गिरती बचीं। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि ममता बनर्जी ठीक से स्कूटी नहीं चला पा रही हैं और एक जगह तो वह संतुलन ही खो बैठीं, जहाँ वह गिरने से बाल-बाल बचीं। जिस समय ममता बनर्जी की स्‍कूटी का बैलेंस बिगड़ा उस वक्‍त वहाँ सिक्योरिटी मौजूद थी और उन्‍होंने स्‍कूटी को फौरन संभाल लिया। वो गिरने से तो बच गईं लेकिन इस दौरान उनका मोबाइल फोन भी सड़क पर गिर गया।

स्कूटर पर सवार ममता बनर्जी ने गले में तख्ती टाँग रखी थी। जिस पर ईंधन के दाम में वृद्धि के खिलाफ नारे लिखे थे। गिरते गिरते बची सीएम ममता संभलने के बाद भी स्कूटी चलाना जारी रखा। हालाँकि, बाद में राज्य सरकार में मंत्री एवं कोलकाता के महापौर फरहाद हकीम स्कूटी चलाने लगे।

बता दें, ममता बनर्जी ने हेलमेट पहन रखा था और हाजरा मोड़ से राज्य सचिवालय के बीच 7 किलोमीटर का सफर स्कूटर पर तय करते हुए सड़क के दोनों ओर लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया।

वहीं ट्विटर पर वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया यूज़र्स ने पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी के जमकर मजे लिए। किसी ने कहा इतना ड्रामा क्यों करना जब चलाना नहीं आता। तो किसी ने इसके पीछे भी मोदी योगी का हाथ बताया।

मुकेश अंबानी के ‘एंटीलिया’ के पास खड़ी मिली विस्फोटक से भरी SUV: 20 जिलेटिन छड़ें बरामद, जाँच में जुटी क्राइम ब्रांच

मुंबई से एक बड़ी खबर सामने आई है। दुनियाभर में रहिशों में गिने जाने वाले और देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी के घर से कुछ दूरी पर खड़ी सिल्वर कलर की स्कॉर्पियो कार से 20 जिलेटिन छड़ें बरामद हुई हैं। खबर सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। अंबानी के घर के पास काफी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

लावारिस गाड़ी में विस्फोटक मिलने की जानकारी मिलते ही मुंबई पुलिस की बम निरोधक दस्ता, मुंबई डॉग स्क्वायड ने एंटीलिया के बाहर पहुँचकर मामले में खोजबीन चालू कर दी। पुलिस ने इलाके में नाकाबंदी करते हुए आसपास के सभी सीसीटीवी कमरे खंगालने और संदिग्ध चीजों की जाँच शुरू की। पुलिस और बम निरोधक दस्ते की टीमों ने कार को अपने कब्जे में ले लिया और हर एंगल से तफ्तीश कर रही है।

पुलिस के अनुसार, स्कॉर्पियो गाड़ी काफी देर तक अंबानी के घर के परिसर के बाहर खड़ी थी। शक होने पर सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस को इसकी जानकारी दी। घटनास्थल का दौरा करने वाले मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जिलेटिन छड़ें मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि गाड़ी के अंदर जिलेटिन की 20 छड़ें मिली हैं।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने इस बारे में कहा, “मुंबई में मुकेश अंबनी के घर से कुछ दूरी पर एक स्कॉर्पियो मिली है, जिसमें कुछ जिलेटिन पाया गया है। इस मामले की पूरी जाँच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रहा है। जो भी असलियत है, जल्द से जल्द सामने आएगी।” मौके पर मौजूद क्राइम ब्रांच मामले में आतंकी एंगल की भी जाँच कर रही है।

पुलिस का कहना है कि गाड़ी में एक धमकी भरा पत्र भी मिला है। महाराष्ट्र सरकार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर को अंबानी परिवार की सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया है। एंटिलिया के आसपास सादी वर्दी में भी पुलिसवाले भी मौजूद हैं।

जानकारी के लिए बता दें, जिलेटिन एक विस्फोटक सामग्री है। अगर तकनीकी भाषा में बात करें तो इसे नाइट्रोसेल्यूलोज या गन कॉटन भी बोला जाता है। जो कि बम ब्लास्ट के काम आता है। इसे नाइट्रोग्लिसरीन या नाइट्रोग्लायकोल में तोड़कर इसमें लकड़ी की लुगदी या शोरा मिलाया जाता है। यह धीरे-धीरे जलता है और आमतौर पर बिना डेटोनेटर्स के विस्फोट नहीं कर सकता।

ज्यादातर इसका प्रयोग गिट्टी क्रशर पर चट्टानों को तोड़ने के लिए किया जाता है। पहाड़ों को तोड़ने के लिए भी विस्फोटक के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके इस्तेमाल के दौरान काफी सावधानी रखनी पड़ती है क्योंकि कई बार पहाड़ों पर काम करने वाले मजदूर इसका शिकार हो जाते हैं।

भाजपा के विरुद्ध कैंपेन के लिए किसान करेंगे बंगाल की ओर कूच: BKU नेता नरेश टिकैत की धमकी

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गुरुवार (फरवरी 25, 2021) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को धमकी दी है कि पार्टी कैंडिडेट्स के ख़िलाफ़ किसान पश्चिम बंगाल की ओर कूच करेंगे। 

अयोध्या में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हम भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करेंगे। हम पश्चिम बंगाल के लोगों से भाजपा को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल को वोट देने का अनुरोध करेंगे क्योंकि यह झूठे वादों पर चुनाव जीतते हैं।”

बस्ती में होने वाली किसान महापंचायत में भाग लेने से पहले भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने अयोध्या में बजरंगबली का आशीर्वाद लिया और रामजन्मभूमि भी गए। उन्होंने कहा,  “भगवान राम हमारे पूर्वज हैं, मैं पहली बार अयोध्या आया हूँ, मुझे बहुत खुशी है।”

उन्होंने कहा कि जिस बीजेपी ने भगवान राम के नाम पर सत्ता हासिल की है और उन्हीं राम के वंशजों पर जुल्म कर रही है। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने अयोध्या आकर भगवान से पीएम को सदबुद्धि देने की प्रार्थना की है ताकि वह किसानों की परेशानी का समाधान कर सकें।

वह बोले, “हमें सरकार और संयुक्त किसान मोर्चा के साथ एक सार्थक वार्ता चाहिए ताकि इस परेशानी से निपटा जा सके। लेकिन उससे पहले वह उन केसों को वापस लें जो उन्होंने किसानों पर दर्ज किए हैं।”

दिलचस्प बात यह है कि कथिततौर पर पहली बार टिकैत ने कानूनों को निरस्त करने की माँग नहीं की और इसके बजाय मोदी सरकार को उन प्रावधानओं में संशोधन करने को कहा जो उनके अनुसार, किसानों के हित में नहीं हैं। टिकैत ने कहा कि अगर जरूरत है तो नए कानूनों को किसान समर्थन में संशोधित किया जाए, लेकिन पूरी पारदर्शिता के साथ।

टिकैत के अनुसार किसान विरोधी कानून के खिलाफ जो आंदोलन चल रहा है, वह सिर्फ किसान हित के लिए है। उनके मुताबिक वह किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल एक माँग कर रहे हैं कि सरकार किसान विरोधी कानून को वापस ले। उन्होंने कहा कि किसान कृषि कानून में संशोधन की माँग कर रहे हैं और वार्ता को भी तैयार है लेकिन सरकार किसानों को लेकर गंभीर नहीं है।

‘ज्यादा गर्मी ना दिखाएँ, जो जिस भाषा को समझेगा, उसे उस भाषा में जवाब मिलेगा’: CM योगी ने सपाइयों को लताड़ा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर समाजवादी पार्टी पर तल्ख होते जा रहे हैं। आज बजट सत्र में सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कराने के दौरान बेहद सख्त रुख अपनाते हुए विपक्षियों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता ज्यादा गर्मी ना दिखाएँ, जो जिस भाषा को समझता है, उसे उसी भाषा में समझाया जाता है।

दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ ने संबोधन के दौरान किसानों का मसला उठाया, जिस पर समाजवादी पार्टी के सदस्य सदन में शोरगुल करने तथा बेवजह टिप्पणी करने पर उतारू हो गए। जिसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई। वहीं सीएम योगी द्वारा सपा के कार्यकर्ताओं को लताड़े जाने के बाद विधान परिषद का माहौल गर्मा गया।

बता दें पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आप लोग सदन की गरिमा को सीखिए, मैं जानता हूँ कि आप किस प्रकार की भाषा और किस प्रकार की बात सुनते हैं, और उसी प्रकार का डोज भी समय-समय पर देता हूँ।” इसको सुनते ही सपा के सदस्य आग बबूला हो गए और बहस करने लग गए।

सपा सदस्यों की हरकतों को देख योगी आदित्यनाथ का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया और उन्होंने कहा, “गर्मी यहाँ दिखाने की आवश्यकता नहीं है, सदन है, इसकी मर्यादा का पालन कीजिए, और पालन करना सीखिए, जो जिस भाषा को समझेगा, उसे उस भाषा में जवाब मिलेगा, अगर बोलते हैं तो सुनने की भी आदत डालिए।”

सीएम योगी ने कहा, “आजादी के पहले जो नेता शब्द सम्मान का प्रतीक था। आजादी के बाद आज ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई कि आज वही शब्द अपमानजनक प्रतीत होने लगा। अगर किसी को लगता है कि वह जितनी उद्दंडता कर लेगा, जितनी जोर से सदन में चिल्ला लेगा, उसके लिए उसकी तारीफ होगी, तो मुझे लगता है कि यह उसकी गलतफहमी है। जनता इसको बहुत अच्छे ढंग से नहीं लेती है।”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “सदन में चिल्लाने से काम नहीं चलता, विश्वसनीयता का संकट खत्म हुआ, नेता विरोधी दल (अहमद हसन) को छोड़ दें तो उनके जो अन्य सहयोगी हैं, उनसे बहुत उम्मीद भी नहीं की जाती। उनका बहुत पुराना इतिहास भी रहा है महिलाओं का अपमान करने का।

स्टेट गेस्ट हाउस कांड कौन नहीं जानता है? आजादी के पहले नेता सम्मानित शब्द था, आजादी के बाद नेता शब्द का सम्मान खत्म हुआ, हर कोई इसके लिए जिम्मेदार है, इसके बारे में हम सब को सोचने की जरूरत, जनता को प्रेरित करना हम सबका दायित्व है।”

सीएम योगी ने कहा, “सदन के अंदर तो कम से कम इन चीजों को बचाकर रखिए। अच्छी चीजों को स्वीकारा जाता है और बुरी चीजों को छोड़ा जाता है, लेकिन यहाँ पर उल्टा देखने को मिलता है। बुरी चीजों को कन्वेंशन मानकर और भी बुरा कैसे किया जाए, इसके लिए कॉम्पटिशन किया जाता है। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। इससे हमारे नेता और कार्यकर्ता विश्वसनीयता के संकट से गुजरते हैं। इसीलिए लोग उन्हें संदेह की नजरों से देखते हैं।”

‘दुनिया को अखंड भारत की ज़रूरत, जो क्षेत्र खुद को अलग मानते हैं उन्हें भी भारत से जुड़ना आवश्यकता’: संघ प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत गुरुवार (25 फरवरी 2021) को ‘अखंड भारत’ के विषय पर विचार रखते हुए नज़र आए। उन्होंने कहा भारत ने पाकिस्तान जैसे देशों की कमर तोड़ दी है, अब ऐसे देश चिंता में ही रहते हैं। सिर्फ हिन्दू धर्म की मदद से ‘अखंड भारत’ सम्भव है, कोई चेहरा इसकी संकल्पना पूरी नहीं कर सकता है। इस ब्रह्माण्ड के कल्याण के लिए ‘यशस्वी अखंड भारत’ का निर्माण करने की ज़रूरत है। इसलिए लोगों को अपने भीतर के राष्ट्र प्रेम को भी जगाना पड़ेगा, संगठित होना पड़ेगा। 

एक पुस्तक विमोचन के मौके पर अपने विचार रखते हुए संघ प्रमुख ने कहा, “बहुत से लोगों ने इस बारे में संदेह जताया था था कि क्या देश को विभाजित किया जा सकता है, लेकिन ऐसा हुआ। अगर देश के विभाजन के 6 महीने पहले इस बारे में पूछा होता तब शायद ही किसी को इसका अनुमान होता। लोग जवाहर लाल नेहरू से पूछ रहे थे कि पाकिस्तान के निर्माण का नया मुद्दा सामने आ रहा है। जब उनसे पूछा गया कि ये सब क्या है? तब नेहरू ने जवाब में कहा, विभाजन मूर्खों का सपना है।”

इसके बाद मोहन भागवत ने कहा, “लार्ड वावेल (lord wavell) ने भी ब्रिटिश संसद में कहा था कि ईश्वर ने भारत को एक बनाया है। ऐसे में भारत को कौन विभाजित कर सकता है। इन सब के बावजूद भारत विभाजित हुआ, जो सबकी नज़रों में असम्भव था वह भी हुआ। इसलिए ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि ‘अखंड भारत’ जो सभी को असम्भव लगता था, वह नहीं हो सकता। आने वाले समय में अखंड भारत की ज़रूरत है। भारत से अलग होने वाले क्षेत्र जो वर्तमान में खुद को अलग मानते हैं, उनके लिए भारत से जुड़ना आवश्यकता है। ऐसे कई क्षेत्र जो खुद को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं उनमें अस्थिरता है।”

मोहन भागवत के मुताबिक़ उन अलग क्षेत्रों में असंतोष है। उन क्षेत्रों ने तमाम प्रयास किए लेकिन उन्हें कोई समाधान नहीं मिला। उनकी तमाम समस्याओं का एक ही समाधान है और वह ‘अखंड भारत’ है। हम उन्हें साथ जोड़ने की बात कर रहे हैं न कि उन्हें दबाने की। जब हम अखंड भारत की बात करते हैं तब हमारा उद्देश्य शक्ति हासिल करना नहीं होता है। हम सिर्फ ‘सनातन’ धर्म के ज़रिए सभी को संगठित करना चाहते हैं जो कि मानवता का धर्म है। जिसे पूरी दुनिया फ़िलहाल हिन्दू धर्म के नाम से जानती है। गांधार अफगानिस्तान बन गया, क्या वहाँ पर तब से अब तक शांति व्यवस्था बन पाई है। ऐसे ही पाकिस्तान भी बना लेकिन क्या वहाँ पर भी शांति व्यवस्था बन पाई है? वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से सब सम्भव है।