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पैगंबर मोहम्मद का फोटो दिखाया, BBC हिंदी ने माँगी माफी: मजहबी संगठन ने धमकाया, खौफ या पत्रकारिता?

मुस्लिम संगठन रजा अकादमी (Raza academy) की आपत्ति के बाद बीबीसी हिंदी (BBC) ने अपने यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज से एक ऐसे वीडियो को डिलीट कर दिया है, जिसमें BBC द्वारा कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का चित्र दिखाया गया था। BBC ने अपनी इस ‘भूल’ के लिए इस मजहबी संगठन से बाकायदा माफ़ी भी माँगी है। बीबीसी के इस वीडियो का शीर्षक था- “पाकिस्तान के इस कदम से अहमदिया मुस्लिमों में डर किसलिए है?”

TOI Noida/Ghaziabad edition, date 18 Feb, page 13

दरअसल, मुंबई स्थित मुस्लिम संगठन ने बीबीसी हिंदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। तहफ़ुज़ ए नामूस ए रिसालत (टीएनआर) बोर्ड के नेताओं ने मुंबई के पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह से मुलाकात की और सोशल मीडिया पर पैगंबर मुहम्मद को चित्रित करने के लिए बीबीसी हिंदी समाचार के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

मुंबई पुलिस को सौंपे इस ज्ञापन में TNR बोर्ड के अध्यक्ष हज़रत सईद मोईन मिया ने लिखा कि बीबीसी हिंदी समाचार को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से पैगंबर मोहम्मद के चित्र वाला ये वीडियो हटाना होगा और मुस्लिमों से माफी माँगनी होगी। उन्होंने आगे लिखा है कि बीबीसी हिंदी समाचार को मुस्लिम समुदाय को भविष्य में इस तरह के कृत्यों से बचना होगा।

मजहबी संगठन का कहना है कि इस वीडियो में बीबीसी द्वारा एक चित्र दिखाया गया है और उसमें इसका नाम पैगम्बर मोहम्मद बताया है, जबकि यह इस्लाम के अनुसार ईशनिंदा है। टीएनआर नेताओं ने कमिश्नर परमबीर सिंह से शिकायत पर कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही इन लिंक और यूआरएल को जल्द से जल्द ब्लॉक करने का भी अनुरोध किया।

आमदार नारायण वाघ (@MLANarayanWagh) नाम के ट्विटर यूजर ने तमाम स्क्रीनशॉट के साथ ही एक यूट्यूब वीडियो की लिंक भी शेयर की है। इस यूट्यूब वीडियो में दावा किया गया है कि यह संगठन की आपत्ति के बाद बीबीसी हिंदी द्वारा टीएनआर नेता मोहम्मद सईद नूरी के साथ बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग है।

इस वीडियो में एक ओर से एक व्यक्ति, जो कि बीबीसी का सीनियर जर्नलिस्ट होने का दावा किया है, कहते हैं, “मैं इकबाल अहमद बीबीसी न्यूज़ हिंदी से। मेरे दोस्त ने आपसे बात की होगी। मैं खुद अभी छुट्टी पर हूँ, मेरे वालिद की बरसी है। लेकिन मुझे खबर मिली है। हम बीबीसी की तरफ से बहुत शर्मिंदा हैं, हम लोगों की तरफ से गलती हुई है। क्या है, कैसा है.. ये लंदन से मामला है। हम भी कलमागोह हैं, गलती पर हम लोग बिलकुल जाँच करवा रहे हैं। आपसे गुजारिश है कि आपके जो भी ऐतराज हैं, हम शत प्रतिशत अपनी गलती मानते हैं। हम इस वीडियो को हटवा भी रहे हैं। और लंदन से जैसे ही वो लोग आ जाएँगे, उसके बाद वहाँ से वो चीजें हटा ली जाएँगी। ऐसी कोई मंशा नहीं थी। वो किसी इंसान की बेवकूफी हो सकती है। मैं आपसे छोटा हूँ, इस मामले को रफा-दफा करा दिए जाए। कैसे भी इस बात को खत्म कर दिया जाए। और सबसे बड़ी बात कि गलती हुई है।”

दूसरी ओर से आवाज आती है, “हमारा प्रोग्राम था बीबीसी ऑफिस जाने का लेकिन आप कह रहे हैं कि दो-चार घंटे में वीडियो हट जाएगा….”

इस पर पहला व्यक्ति कहता है, “मैं खुद उसी संस्था से जुड़ा हूँ। मेरे वालिद की बरसी है। मुझे उठाया गया कि आप हमारी तरफ से बात कीजिए। वीडियो बिलकुल हट जाएगा। ये लंदन का ममला है, वक्त का फासला है और कुछ नहीं। चार-पाँच घंटे का समय लगेगा, लेकिन हटा दिया जाएगा। किसी स्टाफ की गलती से ये हो गया। हम ये अभी करवा देते हैं।”

इसके बाद सोशल मीडिया पर बीबीसी का ये वीडियो अब नजर नहीं आ रहा है। वीडियो की यूट्यूब लिंक पर भी यही सन्देश नजर आ रहा है कि ये वीडियो अब उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर जिन लोगों द्वारा यह वीडियो शेयर किया गया था, वो ट्वीट अब भी ट्विटर पर मौजूद हैं।

बीबीसी की वेबसाइट पर यह रिपोर्ट अभी भी मौजूद है। इसका यह भी कारण हो सकता है कि मजहबी संगठन की आपत्ति सिर्फ वीडियो में पैगम्बर मोहम्मद के चित्र को दिखाए जाने को लेकर थी।

महाराष्ट्र: एक ही दिन में 5000 से ज्यादा कोरोना केस, स्वास्थ्य मंत्री संक्रमित- लॉकडाउन के साथ जारी हुईं नई गाइडलाइंस

महाराष्ट्र सरकार ने बृहस्पतिवार (फरवरी 18, 2021) को कोरोनो वायरस मामलों में एक बार फिर उछाल आने के बाद राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लॉकडाउन सहित नए कोरोना दिशानिर्देशों की घोषणा की। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे भी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं।

राजेश टोपे ने अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी अपने ट्विटर अकाउंट से सोशल मीडिया पर दी है। उनका कहना है कि उनकी तबीयत पूरी तरह से ठीक है और वह जल्द ही कोरोना से ठीक हो जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि मुंबई समेत महाराष्ट्र राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं। दो दिन पहले ही अकेले मुंबई में कोरोना संक्रमण के 700 नए मरीज सामने आए थे। इसके बाद महाराष्ट्र में सख्ती बढ़ा दी गई है।

यवतमाल में 10 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है, वहीं अमरावती में सप्ताहांत में लॉकडाउन रहेगा। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने राजधानी मुंबई के लिए नए कोविड -19 दिशानिर्देशों को भी नए सिरे से जारी किया है। सुरक्षा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।

बीएमसी ने सार्वजनिक रूप से मास्क के बिना पाए जाने पर लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। जिम और अन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ कोरोना दिशानिर्देशों का पालन ना करने पर कार्रवाई की जाएगी।

अमरावती और यवतमाल, ये दोनों ही विदर्भ में आते हैं। इस इलाके में फरवरी माह की शुरुआत से ही कोविड -19 मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज हो रही हैं। सख्ती बढ़ाने का फैसला ऐसे समय में लिया गया जब एक ही दिन में महाराष्ट्र में 5,427 नए कोविड -19 मामलों की जानकारी सामने आई। आँकड़ों में यह उछाल लगभग दो महीने से अधिक समय बाद देखा गया है।

यवतमाल जिले में प्रशासन ने दस दिनों के लिए सार्वजनिक मीटिंग्स पर रोक लगाने के साथ ही हाल ही में खुले स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। यवतमाल कलेक्टर डीएम सिंह ने कहा कि यवतमाल जिले के स्कूल (कक्षा 5 से 9 के छात्रों के लिए), कॉलेजों और कोचिंग क्लासेस 28 फरवरी तक बंद रहेंगे, जबकि 50 लोगों को ही शादी समारोहों में शामिल होने की अनुमति होगी। हालाँकि, उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल खुले रहेंगे लेकिन कोविड -19 प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू किया जाएगा।

CM योगी ने माँगी रिपोर्ट, कहा- उन्नाव पीड़िता के इलाज का खर्च उठाएगी सरकार

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का पीड़ितों के साथ नरम रुख और गैंगस्टर, दंगाइयों और भू माफियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में जहाँ एक तरफ सीएम योगी ने उन्नाव पीड़ित के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ बाहुबली माफिया कहे जाने वाले अतीक अहमद की अवैध जमीन को चुनाव आयोग को दिए जाने का निर्देश दिया है।

अतीक की अवैध जमीन पर चुनाव आयोग का वेयर हाउस बनाने का प्रस्ताव आवास विकास विभाग द्वारा दिया गया था। जिस पर अब योगी कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है। सरकारी मुहर लगते ही योगी सरकार के राज्य में अतीक के कब्ज़े से खाली कराई गई ज़मीन पर चुनाव आयोग का वेयर हाउस बनाए जाने का रास्ता साफ़ हो गया है। अधिकारियों द्वारा जल्द ही सारी कागजी कार्रवाई पूरे होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नए चुनाव आयोग के इस वेयर हाउस में उन सामानों को रखा जाएगा, जिन्हें चुनाव के दौरान इस्तेमाल किया जाता है। जैसे कि इसमें इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के साथ ही वीवीपैट मशीनों को भी रखा जाएगा। आयोग के कुछ अधिकारियों के बैठने का इंतजाम भी इस वेयर हाउस में किया जाएगा।

दरअसल, प्रयागराज के लूकरगंज इलाके के प्लाट नंबर 19 और 65 पर माफिया अतीक अहमद के पिता हाजी फ़िरोज़ अहमद का कब्ज़ा था। अतीक के गुर्गे इस ज़मीन पर अपनी पूरी पकड़ बनाए हुए थे और इसकी देखभाल करते थे। तकरीबन सात हज़ार स्क्वायर मीटर की इस जगह की कीमत करीब 70 लाख रूपए है।

भूमाफियाओं और बाहुबलियों पर नकेल कसते हुए योगी सरकार के अंतर्गत प्रयागराज जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन नेस्तनाबूत के तहत इस ज़मीन को अतीक के कब्जे से पिछले साल 13 सितम्बर को खाली कराया गया था। सरकारी रिकार्ड में यह ज़मीन सरकार की ही थी। अतीक के परिवार ने इस पर अवैध कब्ज़ा कर रखा था।

उन्नाव पीड़िता का पूरा खर्च उठाएगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव की घटना का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के डीजीपी एचसी अवस्थी से घटना की पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिए हैं। साथ ही अस्पताल में भर्ती पीड़िता का सरकारी खर्च पर बेहतर से बेहतर इलाज सुनिश्चित कराए जाने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने कहा कि पीड़िता के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था की जाए।

यूपी मुख्यमंत्री कार्यालय से इस संबंध में एक ट्वीट किया गया है, जिसमें कहा गया है, “UPCM योगी आदित्यनाथ ने जनपद उन्नाव की घटना का संज्ञान लेते हुए यूपी DGP से प्रकरण की रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अस्पताल में भर्ती पीड़िता का सरकारी खर्च पर बेहतर से बेहतर नि:शुल्क इलाज कराने के आदेश भी दिए हैं।”

गौरतलब है कि बुधवार (फरवरी 17, 2021) देर शाम तीन नाबालिग दलित लड़कियाँ उन्नाव के असोहा थाना क्षेत्र के बबुरहा गाँव के एक खेत में बेहोशी की हालत में मिली थी। इनमें दो की मौत हो चुकी थी, जबकि एक को सीएचसी से जिला अस्पताल और उसके बाद कानपुर रीजेंसी अस्‍पताल रेफर किया गया था।

इलाज के 12 घंटे बाद भी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। उसे बैग और ट्यूब वेंटिलेशन पर रखा गया है। अस्पताल की चाइल्ड केयर यूनिट उसका गहनता से इलाज कर रही है। वहीं मृत पाई गई दोनों लड़कियों के पोस्‍टमॉर्टम के लिए प्रशासन ने तीन डॉक्‍टरों का पैनल बनाया था।

बता दें, उन्नाव की दोनों किशोरियों का पोस्टमार्टम हो चुका है। पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों का कहना है कि दोनों किशोरियों की मौत जहरीला पदार्थ खाने से हुई है। दोनों ने मौत से करीब 6 घंटे पहले खाना खाया था। दोनों के पेट में 100 से लेकर 80 ग्राम तक खाना मिला है। खाने में जहर होने की वजह से मौत हो गई।

पीड़िता के पिता को उठा कर ले जाने वाले वीडियो की उन्नाव पुलिस ने बताई सच्चाई, कहा- भ्रामक खबरें फैलाने पर होगी कार्रवाई

उन्नाव में दो दलित लड़कियों की मौत ने राजनीतिक रंग ले लिया है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें एक व्यक्ति को उठाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ की सरकार पीड़िता के पिता को किसी अज्ञात स्थान पर ले जा रही है।

कई मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं। वायरल हो रहे वीडियो पर अब उन्नाव पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी कर सोशल मीडिया पर चल रहे नैरेटिव को खारिज कर दिया।

उन्नाव पुलिस ने ‘भारत समाचार’ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “वीडियो के संदर्भ में की गई जाँच से प्रकाश में आया कि पीड़िता के पिता को चक्कर आ जाने एवं अस्वस्थ महसूस होने पर ग्राम प्रधान द्वारा उठा कर अन्य स्थान पर ले जाया जा रहा था। वीडियो में कोई पुलिस/ SOGकर्मी नहीं है। निवेदन है कि मामले की संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुए भ्रामक तथ्यों को प्रसारित करने से बचें।”

बता दें कि भारत समाचार ने वीडियो शेयर करते हुए दावा किया था, “उन्नाव पुलिस का बड़ा कारनामा सामने। पीड़िता के पिता को उठा ले गई पुलिस। सादी वर्दी में आई पुलिस पिता को उठा ले गई। पिता को किसी से भी मिलने पर रोक लगाई। रोते-बिलखते पिता को टाँग कर ले गई पुलिस। पिता को जबरन उठा ले जाने का वीडियो।”

ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस ने भी इस वीडियो को शेयर किया। उन्होंने लिखा, उन्नाव की पीड़िता के पिता को जबरन उठाकर ले जा रही अजय सिंह बिष्ट की कठपुतली पुलिस। पीड़िता के परिवार को नज़रबंद कर, मानवधिकार कूड़े में डाल  दिए गए हैं।”

ईस्ट उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस सेवादल ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश में मानवाधिकार का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। उन्नाव में पीड़िता के पिता को अजय बिष्ट की पुलिस उठा के ले जा रही है। अपने देश में तो इस पर आवाज़ नहीं उठेगी, कोई बाहर वाला उठाया तो ये ‘इंटर्नल मैटर’ हो जाएगा।”

इसके साथ ही भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह ने इसे शेयर करते हुए लिखा, “उन्नाव में हाथरस कांड को दोहराया जा रहा है। पीड़िता के पिता को पुलिस जबरन उठाकर ले जा रही है। ये यूपी पुलिस की अत्यंत ही भयावह छवि है। योगी सरकार पर भरोसा नहीं।” इसके अलावा भी कई लोग धड़ल्ले से वीडियो को शेयर कर रहे हैं।

एक और टूलकिट से राजधानी में भारी अशांति फैलाने की साजिश में थे एक्टिविस्ट: दिल्ली पुलिस ने किया खुलासा

पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा शेयर किए गए किसानों के आंदोलन की आड़ में भारत को बदनाम करने वाले ‘टूलकिट’ गूगल दस्तावेज की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने पुष्टि की है 26 जनवरी को किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में सोशल मीडिया पर टूलकिट के जरिए अशांति फैलाने वाले आरोपितों ने एक और टूलकिट तैयार की थी जिसके जरिए वो 4 और 5 फरवरी को ट्विटर पर दिल्ली में फिर से अशांति फैलाना चाहते थे।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने कहा कि टूलकिट बनाने वाले एक्टिविस्टों’ ने सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों को उकसाने के लिए दूसरे टूलकिट में 26 जनवरी की ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा को भड़काने के लिए हैशटैग की मदद से शांति भंग करने की कोशिश करते, लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हो पाए।

टूलिकट मामले की जाँच कर रहे पुलिसकर्मियों ने कहा कि दूसरा दस्तावेज़ निकता जैकब, शांतनु मुलुक द्वारा बनाया गया था – दो कार्यकर्ता जिन पर पहली टूलकिट बनाने और उसे साझा करने का आरोप लगाया गया है। इनमें एक यूके-आधारित कार्यकर्ता मरीना पैटरसन भी शामिल हैं, जो कथित तौर पर वैश्विक आंदोलन ‘एक्‍सटिंशन रेबेलियन’ के साथ जुड़ी हैं।

मामले से जुड़े एक दूसरे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “दूसरी टूलकिट में जिस योजना का जिक्र था उसे पूरा नहीं किया जा सका। हमें संदेह है कि इसका कारण था कि पहली ही टूलकिट गलती से स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा 3 फरवरी को ट्वीट कर दिया गया था। दिशा रवि ने इस टूलकिट को ग्रेटा के साथ साझा किया। चूँकि Google टूलकिट दस्तावेजों में आपत्तिजनक सामग्री थी, इसलिए दिशा रवि घबरा गई, उसने ग्रेटा से ट्वीट को हटाने के लिए कहा, एडमिन राइट लिया और टूलकिट से उसका नाम हटा दिया।”

अधिकारी के आगे बताया, जाँच दल ने पहले ही Google को लिख दिया है कि दोनों टूलकिट से जुड़ी जानकारी दें जैसे कि वे वास्तव में कहाँ बनाए गए थे, उन्हें किसने प्रारूपित और संपादित किया था और किसके साथ साझा किया गया था।

टूलकिट का मामला

गौरतलब है कि पॉप स्टार रिहाना और पोर्न स्टार मिया खलीफा जैसी अन्य अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नक्शेकदम पर चलते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में चल रहे किसान विरोध के लिए अपना समर्थन दिखाने के लिए ट्विटर पर पोस्ट शेयर किया था।

इस दौरान ग्रेटा ने अनजाने में एक ‘टूलकिट‘ भी ट्वीट कर दिया जोकि भारत के खिलाफ एक कथित साजिश के तहत बनाया गया था। हालाँकि इस ट्वीट के बाद से ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। इस टूलकिट के जरिए यह पता चला कि कैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत विरोधी ताकतें अशांति पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

इस पूरे खेल का खुलासा करते हुए पुलिस साइबर सेल के जॉइंट कमिश्नर प्रेमनाथ ने दिशा की गिरफ्तारी के बाद कहा था, “जैसा कि हम जानते हैं कि 26 जनवरी को बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। 27 नवंबर से किसान आंदोलन चल रहा था। 4 फरवरी को हमें टूलकिट के बारे में जानकारी मिली, जो कि खालिस्तानी सगठनों की मदद से बनाई गई थी।”

दिल्ली पुलिस ने बताया कि दिशा ने टूलकिट को एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर शेयर किया फिर सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई। उन्होंने कहा कि टूलकिट को विश्वस्तर पर फैलाने की योजना थी और इसमें गलत जानकारियाँ दी गईं थीं।

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि मीडिया हाउसों और ‘फैक्ट चेकर्स’ के नामों का भी टूलकिट में उल्लेख है। उन्होंने कहा कि आरोपित ही यह बता पाएँगे कि पैट्रिक फ्रेडरिक का नाम टूलकिट में क्यों है।

इस टूलकिट का संबंध खालिस्तानी संगठन Poetic Justice Foundation (पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन) से है और इस टूलकिट को चार फरवरी को बनाया गया था। टूलकिट में ‘भारत की पहचान योग और चाय’ की छवि को नुकसान पहुँचाने से लेकर दूतावासों को भी नुकसान पहुँचाने की बात है। इससे भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई।

कालिंदी कुंज में 4 गायों को काट कर अवशेष मंदिर के पास फेंका, कार्रवाई न करने पर BJP और हिंदू संगठन करेंगे प्रदर्शन

दिल्ली के कालिंदी कुज इलाके से गाय को काट कर फेंकने का मामला सामने आया है। घटना कालिंदी कुंज थाने के मदनपुर खादर इलाके की है। यहाँ पर कम से कम 4 गायों को काट कर फेंकने की बात कही जा रही है।

इस बाबत ऑपइंडिया ने बीजेपी के पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रभु नारायण से बात की। बता दें कि घटना के बारे में सबसे पहले इनको ही जानकारी मिली। जिसके बाद उन्होंने मामले को उजागर किया। उन्होंने बताया कि घटना रात के 2 से 4 बजे के बीच हुई है। उन्होंने बताया कि आरोपित ने गाय को काट कर उसके अंदर का लोथड़ा तीन-चार जगहों पर फेंक रखा है।

वो कहते हैं, “कुल मिलाकर आरोपितों ने 4 गायों को काटा। एक उन्होंने शीतला माता मंदिर पॉकेट-1 के पास फेंका। दूसरे गाय का अवशेष उन्होंने डी ब्लॉक के पार्क के पास स्थित मंदिर के पास फेंके। इसके अलावा कंचनकुंज के नाले के पास उन्होंने गाय का सिर और बाकी अपशिष्ट फेंके। वहाँ पर हमें एक आईडी कार्ड भी मिला था। जो हमने ACP को दे दिया है।”

उनका कहना है कि आरोपित गाय के अपशिष्ट को फेंकने के लिए वहाँ गए थे, मगर गलती से उन्होंने उसका सिर भी फेंक दिया, जो कि वो फेंकते नहीं हैं। यहीं पर नाले में उसका पर्स गिर गया। जिसमें उसके आईडी कार्ड थे। बरामद हुई आईडी कार्ड के मुताबिक उसका नाम इसानुल होडा और उसके पिता का नाम अब्दुल जलील है। 

प्रभु नारायण ने कहा कि ये लोग इधर-उधर घूमती गायों को कुछ खिला देते हैं, जिससे वह अधमरा होकर वहीं पड़ी रहती है। इसके बाद वो वहीं पर उसे काटकर गाड़ी में भर कर चल देते हैं। अवशेष को फेंक देते हैं।

कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि बरामद आईडी कार्ड के आधार पर तफ्तीश कर रही है। पुलिस का कहना है कि वो बदरपुर के हरि नगर का रहने वाला है। 

पूर्व मंडल अध्यक्ष ने पुलिस पर मामला दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस गाड़ी लेकर आ गई और कहा कि इसको जल्दी से भरो इसमें। तुम्हें कैसे पता कि गाय है, सूअर हो सकता है, भैंस हो सकता है। इसके बाद वो लोग इस बात पर अड़ गए कि चेक करवाया जाए कि गाय का है या नहीं। तब जाकर SHO और ACP ने सैंपल इकट्ठा किया। उनका कहना है कि पुलिस का रवैया सहयोगात्मक नहीं है। 

उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने कल (फरवरी 19, 2021) तक कार्रवाई नहीं की या फिर संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो रविवार (फरवरी 21, 2021) को भारतीय जनता पार्टी और हिंदू संगठन प्रदर्शन करेंगे, विशाल जुलूस निकालेंगे। उन्होंने बताया कि स्थानीय नागरिक विपिन चौहान ने 100 नंबर पर कॉल करके शिकायत दर्ज करवाई थी। वहीं गौरक्षा संगठन से गब्बर चौहान समेत अन्य लोग भी वहाँ पर आए थे। हालाँकि, हमने पुलिस से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन उठा कर एक लाइन सुन कर काट दिया। दोबारा कॉल करने पर रिसीव नहीं हुआ।

‘आंदोलन ख़त्म करने को कहा तो हम अपनी फसल जला देंगे’: राकेश टिकैत ने मोदी सरकार को दी धमकी

‘किसान’ नेता राकेश टिकैत ने आज हरियाणा के पुनिया में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी सरकार को धमकी दी कि यदि सरकार किसानों के विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने पर जोर देती है, तो किसान खड़ी फसलों को आग लगा देंगे।

हरियाणा के खरक पूनिया में आयोजित महापंचायत में टिकैत ने कहा कि केंद्र न सोचे कि किसान फसल की कटाई के लिए वापस चले जाएँगे और आंदोलन खत्म हो जाएगा। टिकैत ने कहा, “हम अपनी फसलों को जला देंगे लेकिन वापस नहीं जाएँगे। सरकार यह न सोचे कि विरोध दो महीने में खत्म हो जाएगा। हम फसल कटाई के साथ-साथ विरोध करेंगे। फसलों की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं। जरूरत पड़ी तो हम अपने ट्रैक्टरों को पश्चिम बंगाल में भी ले जाएँगे। किसानों को वहाँ भी एमएसपी नहीं मिल रही है।”

खरकपुनिया गाँव में राकेश टिकैत ने किसानों से आह्वान किया कि उन्हें एक फसल की कुर्बानी देनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार कहती है फसल की कटाई का समय आ गया है, इसलिए किसान वापस गाँव चले जाएँगे, लेकिन किसान फसल की कुर्बानी देने को तैयार रहें। किसानों ने भी हाथ उठाकर टिकैत की बात का समर्थन किया। 

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के सब्र का इम्तिहान ले रही है। उन्होंने कहा कि कानून वापसी तक किसान कहीं जाने वाला नहीं है। कानून वापसी से ही किसानों की घर वापसी संभव है। इसके साथ ही सरकार को एमएसपी पर कानून भी लाना होगा।

टिकैत ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उनका अगला लक्ष्य 40 लाख ट्रैक्टरों का है, देशभर में जाकर 40 लाख ट्रैक्टर इकट्ठा करेंगे। ज्यादा समस्या की तो ये ट्रैक्टर भी वहीं हैं, ये किसान भी वही हैं, ये फिर दिल्ली जाएँगे। इस बार हल क्रांति होगी, जो खेत में औजार इस्तेमाल होते हैं, वे सब जाएँगे। 

विरोध करने वाले किसानों ने 26 जनवरी 2021 को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान ट्रैक्टर रैली निकाली। इस दौरान रैली हिंसक हो गई। दंगाइयों ने पुलिस पर तलवार से हमला किया। दंगाई किसानों ने लाल किले पर निशान साहिब सहित, खालिस्तानी झंडे भी फरहराए।

किसान ‘रेल रोको’ प्रदर्शन का दिखा न्यूनतम असर, 8 ट्रेन जोन रही बिल्कुल सुरक्षित: ज्यादातर रेल ट्रैक रहे क्लियर

तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज करते हुए प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों का आज चार घंटे के राष्ट्रव्यापी ‘रेल रोको’ आंदोलन किया था। हालाँकि, यह प्रदर्शन बिना किसी अप्रिय घटना के पूरा हो गया। देशभर में ट्रेनों के परिचालन पर इसका काफी कम असर देखा गया। ट्रेन नाकाबंदी के कारण देश में कुछ स्थानों पर कुछ ट्रेनों रोका गया, लेकिन ज्यादातर रेल ट्रैक क्लियर रहे।

देश के कुल 18 रेलवे क्षेत्रों में से 8 ट्रेनों के क्षेत्र में एक भी ट्रेन रोकने जैसा मामला सामने नहीं आया है। यह सभी जोन विरोध प्रदर्शन से दूर ही रहे। रेल रोको विरोध प्रदर्शन से जो आठ जोन सुरक्षित रहे उनमें उत्तर मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे, दक्षिणी रेलवे, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, उत्तर पूर्व रेलवे मध्य रेलवे और दक्षिण पश्चिम रेलवे शामिल थे।

बता दें रेल रोको’ ’विरोध की घोषणा कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) द्वारा की गई थी। किसान यूनियन के कार्यकर्ता आज देश के कई स्थानों पर मौजूद रेलवे स्टेशनों पर एकत्र हुए और 12 बजे से 4 बजे तक यानी चार घंटे के विरोध प्रदर्शन के तहत रेल पटरियों को ब्लॉक कर दिया था।

गणतंत्र दिवस के मौके पर उग्र हुए प्रदर्शनकारियों की हरकतों को मद्देनजर रखते हुए रेलवे ने विरोध प्रदर्शन के दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में आरपीएसएफ की 20 अतिरिक्त कंपनियों को तैनात कर दिया था।

गौरतलब है कि उत्तरी क्षेत्र में भी ‘रेल रोको’ विरोध का प्रभाव बहुत ही कम देखने को मिला। जहाँ से लगभग 25 ट्रेनों को रेगुलेट किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब और हरियाणा में कई स्थानों पर ट्रेनों की आवाजाही बाधित किया। लेकिन चार घंटे के लिए विरोध प्रदर्शन के कारण, ट्रेनों को रद्द करने के बजाय कुछ देरी के साथ चलाया गया।

उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस ट्रैक्टर रैली के बाद किसानों द्वारा किया गया रेलवे नाकाबंदी तीसरा बड़ा विरोध प्रदर्शन था। एक तरफ जहाँ 26 जनवरी को तथाकथित किसानों ने दिल्ली में जमकर उपद्रव मचाया था, तो वहीं घटना को मद्देनजर रखते हुए 6 फरवरी को हुए ‘चक्का जाम’ को भी पुलिसकर्मियों की सख्ती के अंतर्गत ही किया गया था। किसान नेताओं ने घोषणा की थी कि ‘रेल रोको’ विरोध शांतिपूर्ण होगा और यात्रियों को असुविधा नहीं होगी।

कुछ घंटे पहले गर्लफ्रेंड ने दिया था बच्चे को जन्म, उसकी माँ के साथ फ़रार हुआ बॉयफ्रेंड

देश और दुनिया में अक्सर ऐसी घटनाएँ होती हैं जो अजीबो गरीब होती हैं। ऐसी घटनाएँ जिन्हें सुनने के बाद उन पर भरोसा करना तक मुश्किल होता है। कुछ इस तरह का मामला सामने आया है ब्रिटेन ने ग्लास्टरशेयर क्षेत्र से, जहाँ दो बच्चों का पिता अपनी गर्लफ्रेंड की माँ के साथ भाग गया। भागने वाले युवक की उम्र 29 वर्ष है और महिला (गर्लफ्रेंड की माँ) की उम्र 44 वर्ष। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात ये है कि युवक की गर्लफ्रेंड ने कुछ ही घंटों पहले एक बच्चे को जन्म दिया था। 

युवक की गर्लफ्रेंड का नाम जेस औड्रिज (Jess Aldridge) है, 24 वर्षीय युवती ने हाल ही में दूसरे बच्चे को जन्म दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बच्चे के जन्म से ठीक पहले जेस अपनी माँ जार्जिना (Georgina) के घर पर रहने के लिए आई थी। कुछ ही समय बाद जार्जिना ने जेस के पति रेयान शेल्टर (Ryan Shelton) के साथ फ़्लर्ट करना शुरू कर दिया। फिर दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और वो एक दूसरे के नज़दीक आए। इसके बाद जेस अस्पताल में बच्चे को जन्म देने आई और वहाँ उसे पता चला कि उसका पति रेयान और उसकी माँ जार्जिना एक साथ भाग चुके हैं। 

इतना ही नहीं दोनों लगभग 60- 65 किलोमीटर की दूरी पर एक नए घर में साथ रह रहे हैं। इस घटना की जानकारी मिलते ही जेस ने एक समाचार समूह से बात करते हुए कहा, “मुझे इस बात की उम्मीद थी कि एक नवजात बच्चे की नानी उसे प्यार करेगी लेकिन उन्होंने ठीक उल्टा काम किया। जिस वक्त में मेरी माँ को मेरे बच्चे पालने में मदद करनी चाहिए, उस वक्त वो मेरे बॉयफ्रेंड के साथ समय बिता रही हैं। यह मेरे साथ सरासर धोखा है।” 

इसके अलावा जेस का ये भी कहना था कि उसकी माँ और उसके बॉयफ्रेंड के बीच पिछले कुछ समय से फ़्लर्ट जारी था। दोनों एक साथ बैठ कर शराब पीते थे और देर रात जागते हुए किचन के पास हँसी मज़ाक करते थे। बच्चे का जन्म होने के लगभग घंटे भर बाद उसे मैसेज मिला जिसमें रिश्ता ख़त्म करने की बात थी। दरअसल जेस की पहले से ही दो बेटियाँ हैं और वह अपनी माँ के पास इस उम्मीद से गई थी कि उसे बच्चों की देखभाल करने में थोड़ी मदद मिल जाएगी। इन बातों के ठीक विपरीत उसके साथ ही धोखा हो गया।     

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस प्रमुख की अमिताभ, अक्षय को धमकी, कहा- ‘पेट्रोल-डीज़ल पर नहीं बोले तो नहीं होंगे देंगे फिल्मों की शूटिंग’

महाराष्ट्र के कॉन्ग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने देश के दो दिग्गज बॉलीवुड कलाकारों को धमकी दी है। पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों को लेकर कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि अक्षय कुमार और अमिताभ बच्चन क्यों मोदी सरकार के विरोध में नहीं बोल रहे हैं। अगर वो पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों पर अपनी राय नहीं रखेंगे तो वह महाराष्ट्र में अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार की फिल्मों की शूटिंग नहीं होने देंगे और न ही प्रदेश में उनकी फिल्म रिलीज़ होने देंगे।  

मीडिया वालों से बात करते हुए कॉन्ग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा, “आपने देखा होगा कि जब केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी तब अमिताभ बच्चन जी हों या अक्षय कुमार जी हों। पेट्रोल और डीज़ल के बारे में ट्वीट के ज़रिए बताते थे कि 25 और 30 रुपए का पेट्रोल ये लोग महँगा बेच रहे हैं। आज अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम कम होने के बाद भी, जिस तरह से डीज़ल पेट्रोल के दाम बढ़ा कर हिन्दुस्तान की जनता का जेब काटने का ‘महापाप’ नरेन्द्र मोदी की सरकार कर रही है। अब आप (अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार) क्यों नहीं बोल रहे हैं? अब अगर वो नहीं बोलेंगे तो हम महाराष्ट्र में अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार की शूटिंग रोकेंगे और उनकी फिल्म भी रिलीज़ नहीं होने देंगे।” 

महाराष्ट्र के कॉन्ग्रेस मुखिया पटोले ने कहा कि संप्रग की सरकार लोकतांत्रिक तरीके से काम करती थी इसलिए कलाकारों को विरोध करने का अधिकार था। इसके अलावा नाना पटोले ने ट्वीट के ज़रिए भी पेट्रोल डीज़ल और एलपीजी के दाम कम किए जाने का निवेदन किया। दरअसल, देश के दो राज्यों राजस्थान और मध्य प्रदेश में पेट्रोल की कीमत 100 रुपए हो चुकी है। पूरे देश में पेट्रोल पर सबसे ज़्यादा वैट (36%) कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में वसूला जा रहा है।