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चीन ने गलवान में मारे गए अपने 4 सैनिकों को किया सम्मानित, AltNews का प्रोपेगेंडा फैक्ट चेक फिर साबित हुआ फर्जी

गलवान घाटी में 15 जून 2020 की रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई, क्योंकि चीन ने पूर्वी लद्दाख में यथास्थिति को बदलने की कोशिश करते हुए गलवान घाटी में घुसपैठ की थी। इस हिंसक झड़प में जहाँ 20 भारतीय सैनिक बलिदान हुए, वहीं हमारे सैनिकों ने चीन को खदेड़ते हुए उनके 43 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।

हिंसक झड़प के बाद चीन ने अपने सैनिकों के हताहत होने का कोई आँकड़ा जारी नहीं किया था। इसके अलावा मामले में सामने आई रिपोर्टों का भी खंडन किया था। हालाँकि, अब खबर सामने आई है कि चीन ने बाद में झड़प में मारे गए 4 सैनिकों के परिवारों को सम्मानित किया है।

चीन की स्टेट मीडिया पीपुल्स डेली ने आज बताया कि चार चीनी सैनिक, जोकि पिछले साल जून में भारत मे हुए हिंसक झड़प के दौरान शहीद हुए थे, उन्हें मरणोपरांत मानद उपाधियों और प्रथम श्रेणी के योग्यता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। एक कर्नल, जिन्होंने उनका नेतृत्व किया और गंभीर रूप से घायल हो गए, उन्हें भी मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ने पीएलए शिनजियांग मिलिट्री कमांड के रेजिमेंटल कमांडर, Qi Fabao को सीमा की रक्षा के लिए वीर रेजिमेंटल कमांडर का टाइटल, चेन होंगज़ुन को बॉर्डर की रक्षा करने के लिए हीरो और चेन जियानग्रोंग, जिओ सियुआन और वांग ज़ुओरन को प्रथम श्रेणी की योग्यता से सम्मानित किया गया है।

गौरतलब है कि यह पहली बार है जब चीन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि भारत के साथ गलवान हुए टकराव के दौरान उनके सैनिक भी हताहत हुए थे। दुनिया के सामने सच को नकारने वाले चीन ने केवल चार ही सैनिकों को लेकर सूचना दी है, हालाँकि, यह बात किसी से छुपी नहीं है कि इस झड़प में 43 से ज्यादा चीनी सैनिक हताहत हुए थे।

बता दें, चीन की तरफ से आधिकारिक नाम आने से पहले चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वीबो पर अगस्त 2020 में, झड़प में मारे गए चेन सियानग्रोंग (Chen Xiangrong) के एक चीनी सैनिक की एक मकबरे की तस्वीर वायरल हुई थी।

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एक चीनी विशेषज्ञ एम टेलर फेयलर के अनुसार, गलवान घाटी में एक चीनी सैनिक की कब्र का चित्र चीन में एक सैन्य मंच पर साझा किया गया था, जिसमें मारे गए सैनिक के बारे में बताया गया था, उसकी पहचान चीनी सैनिक चेन सियानग्रोंग के रूप में हुई थी।

उल्लेखनीय है कि चीन द्वारा सम्मानित किए गए 4 सैनिकों में से एक चेन सियानग्रोंग भी है, जिसका उल्लेख मकबरे के एपिटाफ में किया गया था। और उसकी एक तस्वीर अगस्त 2020 में वायरल हो गई थी।

वहीं अब चीन के मारे गए सैनिकों को सम्मानित करने और उनके नाम सार्वजनिक करने के बाद यह सच्चाई सामने आ गई है कि अगस्त 2020 में वायरल हुई यह तस्वीर और व्यापक रूप से भारतीय मीडिया के एक वर्ग द्वारा रिपोर्ट की गई खबर, जिसमें ऑपइंडिया भी शामिल था, वास्तव में बिल्कुल सही और सटीक थी।

चीन के झूठ के विपरीत कब्र की तस्वीर एक सबूत है, हालाँकि इसके बावजूद कई भारतीय मीडिया प्लेटफॉर्म और ड्रैगन के प्रति सहानुभूति रखने वाले लोग गलवान घाटी में हुए झड़प के बाद चीन के वाहवाही करने में जुट गए थे और साथ ही देश को बदनाम करने की पूरी कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा वायरल हुई तस्वीर को फेक बताने पर तूल गए थे।

स्व-घोषित फैक्ट-चेकर्स प्रतीक सिन्हा और मोहम्मद जुबैर का पोर्टल AltNews भी एकतरफा मीडिया की इस रेस में शामिल था।

उस दौरान तस्वीर वायरल होने के ठीक बाद AltNews ने उन सैनिकों की कब्रों का फैक्ट चेक किया था, जो गलवान घाटी संघर्ष के दौरान मारे गए थे। लेख की हेडलाइन में लिखा है, “इंडिया टुडे ग्रुप, टाइम्स नाउ ने पीएलए कब्रिस्तान की पुरानी तस्वीरों को गलवान में मारे गए चीनी सैनिकों की कब्रों के रूप में दिखाया है।” और इस लेख को प्रतीक सिन्हा, मोहम्मद जुबैर और उनके एक अन्य प्रोपेगेंडाबाज ने लिखा था।

पत्रकार सुशांत सिन्हा के हवाले से ट्विटर पर मोहम्मद ज़ुबैर ने इस लेख को डाला था, जिन्होंने अपने ट्वीट में दो तस्वीरें जोड़ी थीं। एक कब्रिस्तान और दूसरा जो किसी कब्र के रूप में दिखता था।

जुबैर ट्विटर

हालाँकि, ट्वीट में लगी तस्वीरों को देखते ही पता चल जाता है कि दोनों तस्वीरें फेंक है। मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा लिखे गए लेख को देखते ही यह पता चलता है कैसे AltNews ने न केवल मकबरे की तस्वीर को बदनाम करने की कोशिश की, बल्कि इस तथ्य को भी मानने से इनकार कर दिया कि वास्तव में भारत के साथ गलवान घाटी में हुए संघर्ष के दौरान चीनी सैनिक भी हताहत हुए थे।

वहीं मकबरे को लेकर ऑल्ट न्यूज़ ने अपने खबर में यूज़र गीता मोहन द्वारा किए गए एक ट्वीट को भी लगाया और मामले में खुद को बचाने की कोशिश की। ऑल्ट न्यूज़ ने लिखा सोशल मीडिया पर एक और तस्वीर वायरल हो रही है, हो सकता है कि यह हाल ही की हो, लेकिन वो ये बात कंफर्म नहीं कर पा रहे।

साभार: ऑल्ट न्यूज़

मात्र एक लाइन में बात को घुमाने की कोशिश करने के बाद उन्होंने एक अलग सेक्शन में इस बात को लेकर भी जिक्र किया कि कैसे सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरे फैलाई जा रही हैं। उस सेक्शन में ऑल्ट न्यूज़ ने पत्रकार सुशांत सिन्हा का ट्वीट लगाया और इसे गलत सूचना बताया।

सुशांत सिन्हा के ट्वीट को लगाते हुए उन्होंने बस यह उल्लेख किया कि उसने कांग्सीवा युद्ध स्मारक की छवियों को पोस्ट करते हुए दावा किया है और वह गलत सूचना फैला रहे हैं।

गौरतलब है कि AltNews द्वारा किया गया यह पूरा फैक्ट- चेक पाठकों के मन में संदेह का बीज डालने की एक धूर्त कोशिश थी कि अगर पहली छवि युद्ध स्मारक के रूप में साबित होती है और गलवान घाटी के सैनिकों की नहीं, तो दूसरी छवि कब्र वाली भी फर्जी खबर होनी चाहिए और यह अल्ट्न्यूज़ द्वारा अक्सर की जाने वाली एक स्टैंडर्ड रणनीति है।

यहाँ यह भी ध्यान देने योग्य है कि AltNews द्वारा यह एकमात्र किया गया फैक्ट चेक नहीं था, जिसने इस तथ्य को खारिज करने और अस्वीकार करने की कोशिश की कि गलवान में हुए झड़प में चीन के एक भी सैनिक हताहत नहीं हुए।

बता दें, गलवान घाटी में हुए हिंसक झड़प के एक दिन बाद ही ऑल्ट न्यूज़ इस खबर को अफवाह बताते हुए फैक्ट चेक किया कि गतिरोध के दौरान 5 चीनी सैनिक भारतीय सैनिकों द्वारा मार दिए गए थे।

चीनी राज्य प्रचार चैनल ग्लोबल टाइम्स के साथ मुख्य रिपोर्टर ने ट्वीट किया था कि गतिरोध के दौरान 5 चीनी सैनिक मारे गए और 11 घायल हुए थे। इस खबर को तब कई भारतीय पत्रकारों और मीडिया हाउसों ने चलाया था। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि ये प्रारंभिक रिपोर्ट्स थीं और बाद में 43 सैनिकों के हताहत होने की रिपोर्ट आई थी।

वहीं ऑल्ट न्यूज़ द्वारा प्रकाशित एक दूसरे लेख को शीर्षक दिया गया , “भारत-चीन विवाद: 43 चीनी सैनिक मारे गए? मीडिया आउटलेट और पत्रकार का गुमराह करना”

जहाँ एक और ऑल्ट न्यूज़ फैक्ट-चेक ने 43 सैनिकों की मौत को फेक न्यूज़ बताया वहीं में एएनआई ने बताया कि झड़प में चीन के हताहतों की संख्या 43 थी, जिसमें मृत और घायल शामिल थे।

3 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजी गईं दिशा रवि, पुलिस ने कोर्ट को बताया- जवाब देने में करती हैं आनाकानी

टूलकिट (ToolKit) मामले में हिरासत में ली गई क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि (Disha Ravi) को आज (फरवरी 19, 2021) तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस कस्टडी की अवधि खत्म होने पर पुलिस ने दिशा को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था। वहीं कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। पुलिस ने कोर्ट के सामने कहा कि वह शांतनु और निकिता के सामने दिशा से पूछताछ करना चाहती है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से आज दिशा की तीन दिन की हिरासत माँगते हुए कोर्ट को बताया कि दिशा रवि सवालों के जवाब देने में आना कानी करती हैं। उन्होंने मामले में अन्य आरोपित शांतनु को भी नोटिस दिया। वह 22 फरवरी को जाँच में शामिल होगा। ऐसे में दिशा का उनके साथ आमना-सामना करवाया जाएगा क्योंकि पूछताछ में दिशा ने निकिता और शांतनु पर सारा आरोप मढ़ा है।

इधर, दिशा की ओर से कोर्ट में सिद्धार्थ अग्रवाल ने मामले में पैरवी की। उन्होंने केस डायरी पेश करने की माँग की। अदालत को बताया गया कि दिशा रवि ने जमानत की अर्जी दी है, जो 20 फरवरी को सुनवाई के लिए आएगी।

गौरतलब है कि दिशा रवि पर किसान आंदोलन से जुड़े टूलकिट को संपादित करने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के साइबर सेल टीम ने 13 फरवरी को इस मामले में बेंगलुरु के सोलादेवनहल्ली इलाके से दिशा को गिरफ्तार किया था। वह बीबीए से ग्रेजुएट हैं और फ्राइडेज़ फॉर फ्यूचर इंडिया’ नामक संगठन की संस्थापक सदस्य भी हैं।

पुलिस का कहना है कि फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया व उसके सदस्यों द्वारा देशविरोधी हरकतें करने में टूलकिट का इस्तेमाल कोई नया मामला नहीं है। दिशा, निकिता व शांतनु तीनों फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया से कई सालों से जुड़े हुए हैं। दिल्ली पुलिस अब इस अभियान से जुड़े लोगों की आय के स्रोतों का भी पता लगा रही है।

‘दिल्ली पुलिस घर आए तो उनका घेराव करें’: किसान नेता ने वीडियो जारी कर बताया उपद्रवियों को गिरफ्तारी से बचने का तरीका

दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसा के संबंध में पुलिस लगातार उपद्रवियों की पहचान करके उनके ख़िलाफ़ एक्शन लेने में जुटी है। ऐसे में एक किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने एक भड़काऊ वीडियो जारी करके कथित किसानों से अपील की है कि यदि दिल्ली पुलिस उन्हें नोटिस दे तो वह उनके सामने पेश न हों और यदि पुलिस उन्हें पकड़ने उनके घर आए तो वह लोग उन्हें बंधक बना लें।

वीडियो में गुरनाम को कहते सुना जा सकता है, “26 जनवरी को जो दिल्ली में ट्रैक्टर परेड थी, उसको लेकर दिल्ली पुलिस अति क्रूरता कर रही है। बहुत से हमारे किसानों को पहले ही पकड़ा जा चुका है। वह अभी तक जेलों में हैं। इनके ऊपर 307 तक के मुकदमे लगा दिए गए हैं। कई ट्रैक्टर हमारे पकड़े हुए हैं, जो अभी नहीं छूटे हैं। जब किसान वहाँ पर जाता है तो उसे वहीं बैठा लिया जाता है। इसके अलावा उन लोगों पर भी कई तरह के अवैध मुकदमे दर्ज हो रहे हैं जिनकी फोटो आ गई है या वीडियो में जिनकी गाड़ी का नंबर आ गया है। पुलिस इन लोगों को नोटिस भेज रही है और कइयों को घर से आकर गिरफ्तार कर रही है।”

अपनी वीडियो में किसान नेता अन्य प्रदर्शनकारियों से या उस दिन हिंसा में शामिल उपद्रवियों से आगे अनुरोध करते हैं कि अगर किसी को दिल्ली पुलिस नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाती है तो पेश ना हों, क्योंकि वे लोग वहीं पर पकड़ रहे हैं और अगर दिल्ली पुलिस किसी के घर पर छापा मारने आए या पकड़ने आए तो उनका घेराव करें। उनको वहीं बैठाकर पूरे गाँव को इकट्ठा करें। साथ ही इन पुलिस वालों को तब तक न छोड़ा जाए जब तक जिला प्रशासन आकर आश्वासन न दे कि दिल्ली पुलिस आपके गाँव और आपके जिले में नहीं घुसेगी।

कथित किसानों को भड़काने के बाद ये किसान नेता खुद के बचाव में आखिर में इस बात को भी जोड़ते हैं कि जिस भी पुलिस वाले का घेराव किया जाए उसके साथ किसी तरह की मारपीट न हो, किसी तरह की ज्यादती न हो। उनको बैठाकर खिलाएँ-पिलाएँ, लेकिन उन्हें छोड़ा तब तक न जाए जब तक जिला प्रशासन न आ जाए।

गुरनाम कहते हैं कि सभी को इन बातों का ध्यान रखते हुए एक्शन लेना है, क्योंकि दिल्ली पुलिस का कोई और इलाज नहीं रहा है, इस तरह की ज्यादतियाँ बर्दाश्त नहीं की जाएँगीं। सभी जगह पुलिस वालों का घेराव करना शुरू कर दो।

गौरतलब है कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के आंदोलन का आज 86वाँ दिन है। वह लगातार तीनों कृषि कानून रद्द कराने की माँग पर अड़े हैं। बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने आज ही कहा है कि देश का किसान 70 वर्षों से घाटे की किसानी कर रहा है। अगर इस बार एक फसल की कुर्बानी देनी होगी तो इसके लिए किसान तैयार है। ज्यादा मजदूर लगाकर अगर फसल काटनी पड़ी तो वह उसे भी करेंगे। फसल की वजह से आंदोलन कमजोर नहीं होगा।

‘डेढ़ महीने पहले चाँदनी चौक में केजरीवाल सरकार द्वारा तोड़ा गया था हनुमान मंदिर’: ‘भक्तों’ ने रातों-रात फिर बनाया

दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में दिल्ली नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेश पर 50 साल पुराना हनुमान मंदिर तोड़ा था। अब उसी जगह पर रातों-रात एक बार फिर मंदिर का निर्माण कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ फ़िलहाल इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है कि निर्माण कैसे हुआ और किसने कराया। वहीं दूसरी तरफ उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर का कहना है कि मंदिर का निर्माण ‘हनुमान जी के भक्तों’ ने कराया है। 

दरअसल, जनवरी 2021 के पहले हफ्ते में चाँदनी चौक का सौंदर्यीकरण हो रहा था। इस बीच वहाँ मौजूद हनुमान मंदिर तोड़ा गया था, जिस पर दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार की काफी आलोचना हुई थी। वहीं उत्तरी दिल्ली नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मुद्दे पर कहा था कि अदालत के आदेशानुसार मंदिर ‘अतिक्रमण’ की श्रेणी में आता था इसलिए उसे तोड़ा गया। कई मीडिया रिपोट्स में बताया गया है कि भक्तों ने खुद से ही चंदा इकट्ठा करके मंदिर का अस्थायी पुनर्निर्माण कराया है। 

इसके अलावा लोगों ने मंदिर में हनुमान की वही मूर्ति स्थापित की है, जो पहले वाले मंदिर में मौजूद थी। सोशल मीडिया पर नए अस्थायी पुनर्निर्माण की कई तस्वीरें भी आई हैं। शुकवार (19 फरवरी 2021) को सुर्ख़ियों में आई इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि स्टील का मंदिर खड़ा कर दिया गया है। आस-पास के लोग इसके भीतर स्थापित की गई हनुमान जी की मूर्ति की पूजा करते हुए नज़र आ रहे हैं। 

इस घटना पर उत्तरी दिल्ली के मेयर जय प्रकाश ने ट्वीट करते हुए बताया कि राम जी और हनुमान के मंदिरों को उनके भक्तों द्वारा बनाया गया है। ऐसा करने के दौरान नियमों की अनदेखी की गई है लेकिन हमें आम जनता की आस्था का भी ख़याल रखना होगा। इस ट्वीट में अस्थायी रूप से बनाए गए मंदिर की दो तस्वीरें भी मौजूद थीं। तस्वीर में कई लोग पूजा करते हुए देखे जा सकते हैं।

इसके बाद जय प्रकाश ने अपने ट्वीट में लिखा, “चाँदनी चौक में विराजे पवनसुत हनुमान। जय श्री राम आज दोपहर 12:30 बजे हनुमान मंदिर का दर्शन करके आशीर्वाद प्राप्त करूँगा।” 

इसके अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी रातों रात बने हनुमान मंदिर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा ने हमेशा इसे दोबारा स्थापित करने की बात कही है। आम जनता ने इस मंदिर का निर्माण किया है और ये केजरीवाल सरकार के मुँह पर तमाचा है। अब तो अरविंद केजरीवाल को खुद मंदिर जाकर दर्शन के बाद प्रायश्चित करना चाहिए। 

दरअसल, चाँदनी चौक के अधिकृत क्षेत्र में किसी भी तरह के सिविल कार्य के किए अधिकारियों की अनुमति की ज़रूरत होती है। चाँदनी चौक ऐतिहासिक क्षेत्र है जहाँ व्यापारियों और पुरानी हवेलियों का गढ़ है। इसे राजधानी का अहम पर्यटन क्षेत्र भी माना जाता है और यह दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आता है।

3 जनवरी को चाँदनी चौक स्थित लगभग 50 साल पुराने हनुमान मंदिर पर सुबह 4 बजे के आस-पास बुलडोजर चला दिया गया था। देर रात हुई इस कार्रवाई की वजह से जनता में इसे लेकर काफ़ी आक्रोश था। इस घटना की वजह से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। 

100% तीन और विधायक देंगे कॉन्ग्रेस से इस्तीफा, पार्टी खो देगी सदन में विश्वास मत: पुडुचेरी में BJP नेता का दावा

पुडुचेरी की विधानसभा में कॉन्ग्रेस के तीन और विधायक पार्टी से इस्तीफा देने को तैयार हैं। यह ताजा दावा भाजपा नेता ने शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को किया है। इससे पहले चार कॉन्ग्रेस नेता पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। इनमें से दो ने भाजपा भी ज्वाइन कर ली है। जिनके नाम ए नमस्सिवम ( A Namassivayam) और ई थेप्पनथन ( E Theeppainthan) हैं।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में भाजपा के इंचार्ज निर्मल कुमार सुराणा ने कहा कि अन्य दो कॉन्ग्रेस विधायक- मल्लदी कृष्ण राव और ए जॉन कुमार भी जे पी नड्डा के नेतृत्व वाली भाजपा में शामिल होंगे।

उन्होंने पीटीआई को बताया, “वह दोनों (कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने वाले नेता) भाजपा से जुड़ने वाले हैं। वह हमारे शीर्ष नेतृत्व से बात कर रहे हैं” बीजेपी नेता का मानना है कि कॉन्ग्रेस सदन में शत प्रतिशत विश्वास मत खोने वाली है।

हालाँकि, सवालों के जवाब देते हुए बीजेपी नेता ने उन तीन कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम बताने से इंकार किया जो भाजपा से जुड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा, “मैं अभी नहीं बता सकता। वह (तीनों विधायक) नारायणस्वामी सरकार से नाखुश हैं और इस्तीफा देना चाहते हैं। ये बात 100 प्रतिशत पक्की है कि वह इस्तीफा देंगे।” सुराणा ने कहा कि जो कोई भी भाजपा की विचारधारा स्वीकारता है और इससे जुड़कर पुडुचेरी के विकास पर काम करना चाहता है, पार्टी उसे लेने को तैयार है।

गौरतलब है कि 22 फरवरी को पुडुचेरी में बहुमत साबित करने की बात उठने के बाद सत्ताधारी कॉन्ग्रेस ने गुरुवार को बैठक की थी । हालाँकि, इसमें पार्टी ने भविष्य की कार्रवाई के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया और विश्वास मत से एक दिन पहले फिर से मिलने का संकल्प लिया।

बता दें कि पुडुचेरी की 33 सदस्यीय विधानसभा में कुल 30 विधायक चुनकर आते हैं। ऐसे में वर्तमान में यहाँ स्पीकर समेत कॉन्ग्रेस के दस सदस्य हैं। जबकि इसके गठबंधन सहयोगी DMK के पास तीन सदस्य हैं और माहे क्षेत्र भी स्वतंत्र रूप से इसका समर्थन करता है।

इसी प्रकार नए सदस्यों के जुड़ने के साथ सदन में विपक्ष के कुल 14 सदस्य हो गए हैं, जिन पर कॉन्ग्रेस का कहना है कि उन तीन नेताओं को विपक्ष में अभी नहीं गिना जाना चाहिए जो हाल में शामिल हुए और उन्हें कॉन्फिडेंस मोशन के दौरान वोट करने का भी अधिकार नहीं होना चाहिए। विपक्ष के पास सिर्फ़ 11 की शक्ति है न कि 14 की।

मालूम हो कि साल 2016 में पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस ने 15 सीटें जीती थीं। कॉन्ग्रेस को 3 डीएमके और 1 निर्दलीय विधायक का समर्थन मिला था। मगर अब सदन में कॉन्ग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 10 हो गई है। 4 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि एक को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण पार्टी से बाहर निकाला जा चुका है।

बीवी पायल अब्दुल्ला से तुरंत तलाक चाहिए उमर अब्दुल्ला को, पहुँचे SC: निकाह के बाद त्याग दिया था ‘नाथ’ सरनेम

जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला का अपनी पत्नी पायल अब्दुल्ला से वैवाहिक संबंधों को लेकर चल रहा विवाद अभी भी दिल्ली उच्च न्यायालय में अटका हुआ है। इसका कारण यह है कि उनकी पत्नी के वकील ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग कार्यवाही के लिए अभी तक भी सहमति नहीं दी है, जबकि उमर अब्दुल्ला जल्द तलाक लेना चाहते हैं।

आखिरकार अब उमर अब्‍दुल्‍ला ने सुप्रीम कोर्ट की मदद लेने का फैसला लिया है। उमर अब्दुल्ला ने एक याचिका के जरिए दिल्‍ली हाईकोर्ट के उस सर्कुलर को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है कि दूरस्‍थ माध्‍यम की सुनवाई (वर्चुअल सुनवाई) के लिए दोनों पक्षों को सहमत होना जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई एसए बोबडे और जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए नोटिस जारी किया है।

उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी सितंबर 01, 1994 को हुई थी। दोनों ही साल 2009 से अलग रह रहे हैं। पायल नाथ एक सिख फैमिली से थी और उनके पिता मेजर जनरल रामनाथ सेना से रिटायर्ड हैं। गौरतलब है कि दिल्ली HC ने राहत देने से इंकार करने के बाद उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई और कहा कि सर्कुलर के खिलाफ उसकी याचिका को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार (फ़रवरी 18, 2021) को उमर अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अप्रैल, 2020 को जारी सर्कुलर को चुनौती देने पर सहमति जताई है। साथ ही, पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया और प्रतिक्रिया भी माँगी।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री की इस याचिका पर जल्‍द सुनवाई के लिए मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले को सही समय पर ही सुना जाएगा। इस मामले में उमर अब्दुल्ला की ओर से कॉन्ग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल केस लड़ रहे हैं।

कपिल सिब्बल ने कहा कि वैवाहिक मामले में अन्य पक्ष अंतिम सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जल्द सुनवाई की सहमति नहीं दे रहा है। कपिल सिब्बल ने दलील दी कि दूसरा पक्ष ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही में उपस्थित हुआ है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वो दूसरे पक्ष को सहमति देने के लिए बाध्य कर सकते हैं?

इस मामले में अगली सुनवाई अब दो सप्ताह के बाद होगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने अप्रैल 26, 2020 के सर्कुलर को चुनौती देने वाली अब्दुल्ला की याचिका को पिछले साल 03 नवंबर को खारिज कर दिया था। उमर अब्दुल्ला ने दलील दी थी कि सुनवाई अदालत के 2016 के एक आदेश के खिलाफ उनकी विवाह संबंधी अपील फरवरी, 2017 से अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है।

वहीं, सुनवाई अदालत ने अब्दुल्ला की तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। कोरोना वायरस महामारी के बीच अदालतों के सीमित कामकाज के दौरान इस पर सुनवाई नहीं हो सकी क्योंकि उमर अब्दुल्ला से अलग हो चुकीं उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला ने वर्चुअल सुनवाई के लिए अपनी सहमति नहीं दी।

कृष्णा ढाबा के बाद श्रीनगर के शिव शक्ति मिष्ठान भंडार पर आतंकियों ने की गोलीबारी: 2 पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त

हाल ही में आतंकवादियों ने श्रीनगर स्थित डलगेट इलाके में मौजूद शाकाहारी ‘कृष्णा ढाबा’ पर गोलीबारी की थी। कृष्णा ढाबा के बाद श्रीनगर के ही बारजुला क्षेत्र में शिव शक्ति मिष्ठान भंडार पर आतंकवादियों ने हमला किया है। आतंकियों द्वारा अंजाम दी गई गोलीबारी की इस वारदात में दो पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए हैं। 

इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। इसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे आतंकवादी बेख़ौफ़ होकर पुलिसकर्मियों पर गोली चलाता है। बलिदानी पुलिसकर्मियों की पहचान हवलदार सुहैल अहमद और मोहम्मद युसूफ के रूप में हुई है।

एके-47 से लैस आतंकवादी बाज़ार में घुसता है और पुलिस वालों पर पीछे से गोलियों की बौछार कर देता है। वारदात को अंजाम देने के ठीक बाद वह मौके से फ़रार हो जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन टीआरएफ़ ने ली है।

कश्मीर ज़ोन पुलिस द्वारा किए गए ट्वीट के अनुसार, “आतंकवादियों ने श्रीनगर स्थित बारजुला में पुलिस पार्टी पर हमला किया। इस आतंकी घटना में दो पुलिस वालों को गोली लगी है, उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पूरे इलाके को सुरक्षित कर दिया गया है और मामले की जाँच भी शुरू कर दी गई है। आगे मिलने वाली जानकारी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।” जिस इलाके में गोलीबारी हुई है, उससे कुछ ही दूरी पर पुलिस थाना मौजूद है। 

अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक़ घायल पुलिसकर्मियों को चिकित्सकों ने उपचार के दौरान मृत घोषित कर दिया। जिस वक्त आतंकवादियों ने उन पर हमला किया, उस वक्त वह मिठाई की दुकान पर खड़े थे। फ़िलहाल पुलिस ने इस वारदात को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को गिरफ्तार करने के लिए खोजबीन अभियान शुरू कर दिया है। अभी तक एक संदिग्ध हिरासत में भी लिया गया है। 

17 फरवरी 2021 को आतंकवादियों ने कश्मीर के श्रीनगर स्थित डलगेट इलाके में एक मशहूर शाकाहारी ढाबे के मालिक पर गोली चला दी थी। यह ढाबा होटल ललित से महज़ कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित था जहाँ जम्मू कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर आए विदेशी राजनयिक रुके हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आतंकवादियों ने मशहूर कृष्णा ढाबा मालिक रमेश कुमार मेहरा के बेटे आकाश मेहरा (22) पर गोली चलाई थी। यह शाकाहारी ढाबा श्रीनगर के अति सुरक्षित इलाके में मौजूद है। 

आतंकियों ने आकाश पर क्लोज़ रेंज से गोली चलाई थी, जिसकी वजह से वह बुरी तरह घायल हुआ था। घटना के ठीक बाद घायल को तुरंत एसएमएचएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कश्मीर पुलिस के मुताबिक़ इस आतंकी हमले की ज़िम्मेदारी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन मुस्लिम जाँबाज फ़ोर्स ने ली थी। इस घटना के बारे में कुछ चश्मदीदों का कहना था कि आतंकवादी आकाश मेहरा पर गोलीबारी करके वहाँ से फ़रार हो गए। इसेक बाद पुलिस ने घटनास्थल से मिले सीसीटीवी फुटेज की जाँच करना शुरू कर दिया था। 

बंगाल में शांतिपूर्ण विधानसभा चुनाव के लिए तैनात होंगी पैरा मिलिट्री की 125 कंपनियाँ: गृह मंत्रालय ने दिया आदेश

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले गृह मंत्रालय ने पैरा मिलिट्री फोर्स की 125 कंपनियाँ राज्य में तैनात करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय ने यह कदम राज्य में शांतिपूर्ण तरह से चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिहाज से उठाया है।

25 फरवरी तक CRPF, CISF और BSF की कंपनियाँ बंगाल पहुँचेंगी। इससे पहले बंगाल राज्य से इनकी तैनाती को लेकर योजना बनाने को कहा गया है। राज्य सरकार से कोरोना प्रोटोकॉल्स को ध्यान में रखते हुए इन कंपनियों की आवाजाही व अन्य जरूरतों के इंतजाम सुनिश्चित करने को भी कहा है। ये कंपनियाँ संवेदनशील इलाकों में तैनात की जाएँगी। इस संबंध में सीएपीएफ के नोडल अधिकारी जल्द ही राज्य सरकार के साथ चर्चा शुरू करेंगे।

बता दें कि इससे पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा सांसद स्वप्नदास गुप्ता के नेतृत्व में चुनाव आयोग को पत्र लिख कर सेंट्रल फोर्स को राज्य में तैनात करने की माँग की थी। चुनावों के मद्देनजर पार्टी ने यह माँग इसलिए उठाई थी ताकि इलेक्शन निष्पक्षता के साथ संपन्न हों। पार्टी ने कहा था कि ऐसे पुलिस कर्मी भी पूरी प्रक्रिया से दूर रहने चाहिए जिन पर बीते समय में किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े होने का आरोप हो।

गौरतलब है कि बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले कानून को ताक पर रख कर आए दिन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं। पिछले दिनों की बात है जब टीएमसी छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले अरिंदम भट्टाचार्य को दीवारों पर लिख कर हत्या की धमकी दी गई थी। दीवारों पर लिखा गया था, “7 दिन में शांतिपुर छोड़ो वरना अपनी हत्या के लिए तुम खुद जिम्मेदार होगे।” अरिंदम ने इस घटना की जानकारी होने पर चुनौती स्वीकार करते हुए कहा था, “मैं शांतिपुर छोड़कर नहीं जाऊँगा।”

इसके अलावा 3 जनवरी की रात भाजपा नेता कृष्णेंदु मुखर्जी (Krishnendu Mukherjee) की कार पर फायरिंग करने का भी एक मामला सामने आया था। जिसके बाद भाजपा नेता ने इसका आरोप सत्ताधारी टीएमसी के गुंडों पर लगाया था। वहीं टीएमसी के एक नेता की वीडियो वायरल हुई थी। उसमें वह खुलेआम जनता को बीजेपी के ख़िलाफ़ भड़काते दिखे थे। वीडियो में वह लोगों से कह रहे थे, “जहाँ भी तुम बीजेपी को देखो, मै बता रहा हूँ, उन्हें पीटकर भगा देना। उन्हें पता होना चाहिए कि हम उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे।”

कुणाल कामरा पर आपराधिक मामला के लिए याचिका: मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती, 2 मार्च को सुनवाई

हाल ही में मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया था जिसके बाद ‘कॉमेडियन’ कुणाल कामरा के खिलाफ़ आपराधिक मामले को रद्द कर दिया गया था। जिसमें उस पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के लिए एफ़आईआर दर्ज करने की माँग की गई थी, अब उत्तर प्रदेश स्थित वाराणसी की सेशन कोर्ट ने मजिस्ट्रेट आदेश को चुनौती देने वाली संशोधन/पुनर्विचार याचिका (revision petition) स्वीकार कर ली है। दरअसल, कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की एडिटेड तस्वीर साझा की थी, जिसमें अदालत के ऊपर लगे हुए तिरंगे की जगह भारतीय जनता पार्टी का झंडा लगा हुआ था। 

कामरा पर आपराधिक मामला ख़त्म करने वाले आदेश को चुनौती

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक़ एडिशनल सेशन जज अनुराधा कुशवाहा की अदालत ने 11 फरवरी 2021 को संशोधन याचिका पर नोटिस जारी किया था। इस मामले पर अगली सुनवाई 2 मार्च 2021 को होनी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की एक तस्वीर ट्वीट की थी, जिसका रंग भगवा था और उसके ऊपर भाजपा का झंडा लगा हुआ था। इसके अलावा उसने देश की सबसे बड़ी अदालत पर अपमानजनक टिप्पणी भी की थी। इस संशोधन याचिका में मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके तहत कुणाल कामरा के खिलाफ़ आपराधिक मामले को खारिज कर दिया गया था। 

यह पुनर्विचार/संशोधन याचिका सौरभ तिवारी नाम के वकील ने दायर की थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि कामरा की हरकत ने लोगों की भावनाओं को आहत किया है और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है।

अपराध सोशल मीडिया पर हुआ इसलिए नहीं तय हो सकता न्याय क्षेत्र 

मजिस्ट्रेट के आदेश से हतोत्साहित होकर सौरभ तिवारी ने वाराणसी की सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और वहीं पर एफ़आईआर दर्ज करने की माँग उठाई थी। क्योंकि ये कृत्य सोशल मीडिया पर किया गया था, इसका मतलब ये हुआ कि जितनी जगहों में ट्विटर का उसका पोस्ट देखा गया उतनी जगहों पर अपराध को अंजाम दिया गया। सौरभ तिवारी ने निवेदन किया था कि कामरा को राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम की रोकथाम 1971 की धारा 2 और भारतीय दंड संहिता की धारा 153 बी (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन), 505 (लोक रिष्टिकारक वक्तव्य) के तहत हिरासत में लिया जाना चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट में कामरा पर अवमानना का मामला

कुणाल कामरा पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट में अवमामना का मामला चल रहा है। अटॉर्नी जनरल ऑफ़ इंडिया केके वेणुगोपाल ने पिछले साल नवंबर में इस मामले पर सुनवाई की अनुमति प्रदान की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई थी। न्यायाधीश अशोक भूषण, सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने दिसंबर 2020 में कामरा के खिलाफ़ दायर की तीन अवमानना याचिका स्वीकार की थी। अवमानना के एक मामले की सुनवाई 22 फरवरी 2021 को है।    

‘गलवान में मरे थे हमारे सैनिक’ – चीन ने 8 महीने तक छुपाया, पहली बार अब अपने 4 जवान को किया मरणोपरांत सम्मानित

15 जून 2020 की रात चीन ने भारतीय सैनिकों पर कायरता पूर्वक हमला किया था और गलवान घाटी में घुसपैठ करके पूर्वी लद्दाख वाले क्षेत्र में यथास्थिति (status quo) बदलने का प्रयास किया था। इसके बाद वहाँ हिंसक झड़प हुई थी और भारतीय सेना के जवान चीनी सेना के जवानों को पीछे धकेलने में कामयाब रहे थे। इस दौरान 20 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे, वहीं चीन के 43 सैनिकों की मृत्यु हुई थी। 

इस घटना के बाद से ही चीन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘डैमेज कंट्रोल’ करना शुरू कर दिया था। चीन ने अपने सैनिकों की मृत्यु और हताहत होने को लेकर तमाम झूठे दावे किए थे और भ्रमित करने वाला अभियान चलाया था। अब उसी चीन ने उन 4 सैनिकों को मरणोपरांत सम्मानित किया है, जो भारतीय सीमा में की गई घुसपैठ में शामिल थे। 

चीनी मीडिया समूह पीपल्स डेली (People’s Daily) के मुताबिक़, “4 चीनी सैनिक जिन्होंने जून में हुए सीमा विवाद की वजह से अपनी जान गँवाई, उन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया जा रहा है। एक कर्नल जिसने सैनिकों की अगुवाई की और वह गम्भीर रूप से घायल हुआ था, उसे भी सम्मानित किया जा रहा है।” 

हालाँकि इसके पहले अगस्त 2020 में चीन ने डंके की चोट पर दावा किया था कि चीनी सैनिकों की मृत्यु नहीं हुई है। इसके पहले कई रिपोर्ट्स सामने आई थीं, जिनमें दावा किया गया था कि भारतीय जवानों के साथ टकराव में चीनी सैनिकों की जान गई थी। इसके बावजूद चीन लगातार पीपल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों की मौत का संज्ञान नहीं ले रहा था।  

Massachusetts Institute of Technology के चीनी विशेषज्ञ एम टेलर फायलर के मुताबिक़ एक चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 19 साल के चीनी सैनिक के मकबरे की तस्वीर वायरल हुई थी, जिसकी मौत ‘भारतीय-चीन सेना के बीच टकराव’ के दौरान हुई थी। उसके मकबरे पर लिखा था

“चेन जियांग्रो (Chen Xiangro) का मकबरा। फुजियान (fujian) स्थित पिंगनान (pingnan) की 69316 टुकड़ी का जवान। जून 2020 में भारतीय सीमा पर मौजूद जवानों के साथ हुई हिंसक झड़प में अपनी जान गँवाई। उसे मरणोपरांत सेंट्रल मिलिट्री कमीशन द्वारा याद किया जा रहा है।” 

मकबरे पर ये भी लिखा था कि सैनिक जो एक्शन में मर गया था (किल्ड इन एक्शन), वह दिसंबर 2001 में पैदा हुआ था यानी उसकी उम्र सिर्फ 19 साल थी। मकबरे में उसकी यूनिट के बारे में भी जानकारी दी हुई थी। 69316 यूनिट जो कि सीमा पर तैनात की जाती है और वो उत्तरी गलवान घाटी के नज़दीक स्थित टियानवेनडियान (Tianwendian) से आती है। इस तरह की तस्वीरें बताती हैं कि गलवान घाटी में चीनी सैनिक तैनात किए गए थे। 

इसके अलावा और भी रिपोर्ट्स सामने आई थीं, जिसमें इस तरह के दावे किए गए थे। भारत के तमाम वामपंथी मीडिया समूहों ने सच्चाई बयान करने वाली इन तस्वीरों का काउंटर किया था। चीन ने खुद इन तस्वीरों से किनारा कर लिया था।

अब चीन का अपने 4 सैनिकों को मरणोपरांत सम्मानित करना दिखाता है कि अनुमान से कहीं अधिक चीनी सैनिकों की मौत हुई। यानी गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुए टकराव में चीन के मृत सैनिकों की संख्या काफी ज़्यादा है।  

15 जून को चीनी सैनिकों ने लद्दाख सीमा पर एलएसी के पास भारतीय सेना के जवानों पर हमला कर दिया था। चीनी सेना की इस कायरता भरी हरकत के चलते 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। केंद्र सरकार ने शहीदों को सम्मानित किया था और सरकारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद घायल सैनिकों से मुलाक़ात की थी।