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‘इस्लाम अपना लो… जन्नत जाओगे’: वसीम जाफर मामले के बाद अब ‘क्रिकेट जिहाद’ का वीडियो वायरल

वसीम जाफर के ऊपर मजहबी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप और उनके उत्तराखंड क्रिकेट टीम के मुख्य कोच पद से इस्तीफा देने के बाद लोग ‘क्रिकेट जिहाद’ शब्दावली का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी बीच पाकिस्तानी क्रिकेटर अहमद शहजाद का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो श्रीलंका के तूफानी सलामी बल्लेबाज रहे तिलकरत्ने दिलशान पर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव बनाते हुए नजर आ रहे हैं।

ये वीडियो अभी का नहीं है, बल्कि 7 साल पुराना है। ये वीडियो अगस्त-सितम्बर 2014 का है, जब श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच मैच खेला जा रहा था। वायरल वीडियो में दिलशान बल्लेबाजी कर के लौट रहे हैं और उनके साथ चल रहे अहमद शाहजाद उन्हें कह रहे हैं कि अगर आप नॉन-मुस्लिम हैं और इस्लाम अपना लेते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि फिर अपने जीवन में आप क्या करते हो, आप अंततः जन्नत हो जाओगे।

तब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी इस वीडियो का संज्ञान लिया था और इस पर जाँच बिठाई थी। हालाँकि, दिलशान ने इस वीडियो में उन्हें क्या जवाब दिया – ये स्पष्ट नहीं है। शहजाद को इसके बाद लाहौर में PCB के मुख्यालय में बुलाया गया था। उनसे पूछताछ भी की गई थी। तब उन्होंने बोर्ड के समक्ष कहा था कि ये दिलशान के साथ उनका व्यक्तिगत संवाद था और इसका क्रिकेट से कुछ लेना-देना नहीं है।

इस मामले में किसी ने भी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, जिस कारण PCB ने मामले को रफा-दफा कर दिया। दिलशान के पिता मुस्लिम ही थे और उनका नाम तुवान मुहम्मद था। हालाँकि, 1999 में डेब्यू करने के साथ ही उन्होंने अपनी मुस्लिम पहचान को त्याग दिया था। वो खुद को सिंहला-बौद्ध ही मानते हैं। उनके कोच ने भी बताया था कि दिलशान और उनके सभी भाई-बहन अपनी माँ की तरह बौद्ध हैं।

वसीम जाफर पर आरोप लगा है कि CAU के अधिकारियों से लड़ रहे थे और मजहबी गतिविधियों के आधार पर टीम को तोड़ने की कोशिश में लगे हुए थे। टीम के कैम्प के दौरान वसीम जाफर मौलवियों को बुलाते थे। टीम के स्लोगन ‘राम भक्त हनुमान की जय’ को हटा देने के आरोप भी उन पर लगे हैं। आरोप है कि इक़बाल को आगे बढ़ाने के चक्कर में उन्होंने चंदेला को निचले क्रम का बल्लेबाज बना दिया।

मोगा में खूनी भिंड़त, शराब बाँटते कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के पति ने 2 अकाली समर्थकों को गाड़ी से कुचला: 3 गिरफ्तार

पंजाब में निकाय चुनाव को लेकर माहौल गरमाने लगा है। मोगा के वार्ड नंबर नौ में मंगलवार (फरवरी 9, 2021) रात कॉन्ग्रेसी और शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ताओं के बीच खूनी भिंड़त हो गई। आरोप है कि कॉन्ग्रेसी उम्मीदवार के पति और बेटे ने अकाली समर्थकों पर गाड़ी चढ़ा दी। इससे घायल दो कार्यकर्ताओं की मौत हो गई। जबकि एक अन्य कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गया।

दरअसल, 14 फरवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों के लिए चल रहा चुनाव प्रचार उस समय उग्र रूप धारण कर लिया, जब शहर के वार्ड नंबर 9 में चुनाव प्रचार के दौरान अकाली और कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। इस दौरान कॉन्ग्रेस की महिला उम्मीदवार के पति द्वारा अकाली कार्यकर्ताओं पर गाड़ी चढ़ाने से दो अकाली कार्यकर्ताओं की मौत हो गई। जिसके बाद हरकत में आते हुए पुलिस ने कुल 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। 

बता दें कि मंगलवार रात करीब 9:15 बजे वार्ड 9 की कॉन्ग्रेस प्रत्याशी हरविंदर कौर के पति नरेंद्र पाल सिंह एवं अकाली दल के प्रत्याशी कुलविंदर कौर के परिजन भोला सिंह एवं बब्बू गिल चुनाव प्रचार के दौरान आमने-सामने हो गए। 

बता दें कि अकाली दल की महिला उम्मीदवार कुलविंदर कौर का समर्थक जगदीप सिंह उनके लिए प्रचार कर रहा था। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी हरविंदर कौर के पति व कॉन्ग्रेस नेता नरेंद्र पाल सिंह सिद्धू, उनका बेटा व चार अन्य लोग शराब बाँट रहे थे। वे गाडि़यों में हूटर लगाकर घूम रहे थे। बब्बू सिंह और इसी वार्ड से अकाली प्रत्याशी कुलविंदर कौर के रिश्तेदार जगदीप सिंह ने इसका विरोध किया तो नरेंद्र पाल सिंह सिद्धू ने अपनी गाड़ी को तेज रफ्तार से उन पर चढ़ाने का प्रयास किया। एक पत्रकार ने तत्काल सड़क किनारे छलांग लगा दी, जिससे उसकी जान बच गई।

हालाँकि, हरमिंदर सिंह उर्फ बब्बू की तो मौके पर ही मौत हो गई, जबकि जगदीश सिंह उर्फ भोला की गंभीर चोटों को देखते हुए उसे लुधियाना के डीएमसी अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन उसने वहाँ दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही शिरोमणि अकाली दल के हलका इंचार्ज बरजिंदर सिंह बराड़, अक्षित जैन अपने समर्थकों सहित सरकारी अस्पताल पहुँचे। 

जहाँ उन्होंने राज्य की सत्ताधारी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की व मीडिया से कहा कि अगर पुलिस दोषी कॉन्ग्रेसी नेताओं के खिलाफ 302 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार नहीं करती है तो मोगा में बड़े स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल भी पहुँचेंगे।

इस मामले में डीएसपी सिटी बरजिंदर सिंह भुल्लर ने बताया कि महिला अकाली प्रत्याशी के उम्मीदवार के बयानों के आधार पर कॉन्ग्रेस की महिला प्रत्याशी के पति उसके पुत्र सहित कुल 9 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब तक इस मामले में कुल 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसमें कॉन्ग्रेस नेता नरेंद्र पाल सिंह सिद्धू भी शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक नरेंद्र पाल सिंह वही कॉन्ग्रेस नेता हैं, जिन पर नगर निगम की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है। रिटर्निंग अफसर के सामने यह दस्तावेज पेश किए गए थे, लेकिन उन्होंने आपत्ति दर्ज करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि प्रत्याशी महिला हैं। उसके पति पर यह कानून लागू नहीं होगा।

गौरतलब है कि हाल ही में पंजाब के जलालाबाद में अकाली दल के नेता सुखबीर बादल की गाड़ी पर हमला हुआ था। अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेसियों ने हमला किया है। इस हमले के बाद अकाली और कॉन्ग्रेसी आपस में भिड़ गए थे। इस दौरान जमकर ईंट-पत्थर चले और कई राउंड फायरिंग भी हुई थी।

‘जल्दी करो, तिरंगा नीचे करो… निशान साहिब लगाओ’ – दंगाई इकबाल सिंह गिरफ्तार, Video में पुलिस को गोली मारने की कही थी बात

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन दिल्ली के लाल किले पर हुई हिंसा मामले में आरोपित इकबाल सिंह को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पंजाब के होशियारपुर से गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए 50,000 रुपए के इनाम का ऐलान किया गया था। इकबाल से पहले इसी मामले में 1 लाख का इनामी दीप सिद्धू गिरफ्तार हुआ।

बता दें कि कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने लाल किले पर हुई हिंसा की वीडियो जारी की थी। इस वीडियो में इकबाल सिंह दंगाइयों को भड़काने का काम कर रहा था। साथ ही तिरंगे का अपमान करने के लिए भीड़ को उकसा रहा था।

वीडियो में इकबाल सिंह भीड़ से कह रहा था कि लाल किले की ऊँचाई से तिरंगे को हटा कर निशान साहिब का चिह्न लगा दें। वीडियो में वह दंगाइयों से अपील कर रहा था कि अगर कोई लाल किले में घुसने से रोके तो पुलिस वालों से बंदूकें लेकर उन पर गोली चलाएँ। इस संबंध में कुल तीन वीडियो सार्वजनिक की गई थीं। इनमें इकबाल सिंह भीड़ को उकसाता दिखा था। वहीं पुलिस लगातार लाल किले में जाने से भीड़ को रोक रही थी। 

वीडियो में उसे कहते सुना गया था, “जल्दी करो और तिरंगा नीचे करो। वाहे गुरू, वाहे गुरू… हम अपील करते हैं कि मोदी का तिरंगा हटाकर वहाँ निशान साहिब को लगाओ। कुछ शर्म कर। बेशर्म मत हो। हम लाल किले के बाहर हैं और शांति से गेट खोलने को कह रहे हैं। बाबाजी एक शांतिपूर्ण क्रांति शुरू हो चुकी है। अगर इन्होंने गेट नहीं खोला तो हम इनकी बंदूक लेकर इन्हें मारेंगे। इसलिए बेहतर है ये मान जाएँ वरना हमारे पास हथियार हैं। हम उन्हें गोली मार देंगे।”

‘जवान’ होते ही मुस्लिम लड़की (भले वो नाबालिग हो) कर सकती है किसी से भी निकाह: HC का फैसला

पंजाब एंव हरियाणा हाई कोर्ट ने इस्लामी साहित्य का हवाला देकर एक याचिका पर अपना निर्णय सुनाया। अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से मुस्लिम लड़की सयानी होते ही किसी से भी निकाह कर सकती है। अदालत के अनुसार, कानूनी रूप से परिवार भी इसमें दखलअंदाजी नहीं कर सकता।

कोर्ट में न्यायाधीश अलका सरीन ने यह फैसला मुस्लिम धार्मिक पुस्तक के आर्टिकल 195 के आधार पर सुनाया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सर डी फरदुनजी मुल्ला की किताब ‘प्रिसिपल्स ऑफ मोहम्मडन लॉ’ का हवाला दिया।

अदालत ने कहा, “मुस्लिम लड़का और लड़की अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से शादी करने के लिए स्वतंत्र हैं, उन्हें किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। ये मुस्लिम पर्सनल ला द्वारा ही तय किया गया है।” 

इस पूरे मामले पर हाई कोर्ट में मोहाली के एक मुस्लिम जोड़े ने याचिका दायर की थी। युवक 36 साल का था जबकि लड़की सिर्फ़ 17 वर्ष की। लेकिन प्रेम होने के कारण दोनों ने इस साल 21 जनवरी को एक दूसरे से निकाह कर लिया, जिससे परिवार वाले नाराज हो गए और दोनों को धमकियाँ मिलने लगीं।

हालात देखते हुए दोनों ने कोर्ट का रुख किया और अपने लिए पुलिस सुरक्षा की माँग की। अब इसी मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है तो एक लड़की को 15 साल की उम्र पूरी करने के बाद प्यूबर्टी हासिल करना माना जा सकता है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पुलिस अधीक्षक को आदेश दिए कि इस मुस्लिम जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने करवाई जाए।

अदालत ने मुस्लिम पर्सनल लॉ को दोहराते हुए कहा कि यदि कोई लड़की या लड़का निकाह के लिए राजी नहीं है या फिर मानसिक तौर पर स्वस्थ भी नहीं है तो उनकी शादी को वैध नहीं माना जाएगा, क्योंकि इसके लिए रजामंदी की जरूरत है। याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ने कहा कि जोड़े को उनके मूलभूत अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, वो भी सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उनके रिश्तेदार इसके खिलाफ़ हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं एवं पुरुषों के तलाक और शादी को लेकर अहम निर्णय दिया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जहाँ मुस्लिम महिलाएँ तलाक के बिना दूसरा निकाह नहीं कर सकतीं, वहीं मुस्लिम पुरुषों को तलाक के बिना दूसरा निकाह करने की अनुमति है। मुस्लिम पुरुष अपनी बीवी को तलाक दिए बिना ही एक से अधिक निकाह कर सकता है। मुस्लिम महिलाओं पर ये नियम लागू नहीं होता।

भारत सरकार के दिशा-निर्देशों को ट्विटर ने रखा ताक पर: कंपनी के नियम भारतीय संविधान से भी ऊपर? हो रहा है बवाल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर ने भारत सरकार द्वारा दिए गए निर्देश पर सफाई दी है। बता दें कि ‘किसान आंदोलन’ के दौरान गलत अफवाह उड़ा कर जनता को भड़काने वाले हैंडल्स पर रोक लगाने के लिए ट्विटर को कहा गया था, लेकिन उसने कुछ देर तक उन पर रोक लगा कर फिर से उन सभी को चालू कर दिया। इसके बाद भारत सरकार ने नोटिस जारी किया था, जिस पर ट्विटर ने अब सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है।

अपनी प्रतिक्रिया में उसने लिखा है कि वो पारदर्शिता को स्वस्थ सार्वजनिक चर्चाओं और विश्वास प्राप्त करने का आधार मानता है। उसने कहा कि लोग समझते हैं कि वो कैसे अपने कंटेंट्स को मॉडरेट करता है और कैसे दुनिया भर की विभिन्न सरकारों से डील करता है। उसने कहा कि वो इसके परिणामों और इससे उपजने वाली परिस्थितियों को लेकर भी पारदर्शी है। साथ ही उसने ‘ओपन इंटरनेट’ और ‘स्वतंत्र अभिव्यक्ति’ के दुनिया भर में खतरे में होने की भी बात कही।

ट्विटर ने लिखा है कि नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा के बाद कैसे उसने अपने नियमों को लागू किया और अपने मूल्यों का बचाव किया, इस सम्बन्ध में वो विस्तृत विवरण साझा करना चाहता था। उसने दावा किया कि ट्विटर लोगों की आवाज़ों को सशक्त कर रहा है और सभी के साथ अपनी सेवाओं में लगातार सुधार ला रहा है। उसने कहा कि दिल्ली हिंसा के बाद भी न्यायिक रूप से बिना पक्षपात के उसने कंटेंट्स को लेकर कार्रवाई की। ट्विटर ने गिनाया:

  • हमने ऐसे सैकड़ों हैंडल्स पर कार्रवाई की जिन्होंने हमारे नियमों का उल्लंघन किया। हिंसा भड़काना, अपशब्दों का इस्तेमाल, किसी को नुकसान पहुँचाने की कामना, धमकियों – इन सभी कंटेंट्स पर कार्रवाई की।
  • हमने सुनिश्चित किया कि ट्रेंड्स सेक्शन में ऐसा कोई भी कंटेंट न आने पाए, जो ट्विटर के नियमों का उल्लंघन करता हो।
  • प्लेटफॉर्म मैनीपुलेशन और स्पैम वाले 500 हैंडल्स को हमने सस्पेंड किया।
  • हमने ऐसी अफवाहों से भी निपटने का प्रयास किया, जिससे वास्तविक जीवन में हानि की संभावना हो। हमारी पॉलिसी के उल्लंघन वाले कंटेंट्स हटाए गए।

ट्विटर ने बताया है कि पिछले 10 दिनों में उसे भारत के केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) IT एक्ट के अनुच्छेद-69 के तहत कई निवेदन मिले, जिनमें कुछ हैंडल्स को ब्लॉक करने को कहा गया। ट्विटर ने कहा कि इनमें से दो आपात ब्लॉकिंग के लिए थे, जिन पर हमने अस्थायी रूप से अमल किया लेकिन फिर उसे रिस्टोर कर दिया क्योंकि हमें लगा कि भारतीय कानून के हिसाब से ये ठीक है।

ट्विटर ने कहा है कि इसके बाद उसे केंद्र सरकार द्वारा दिशानिर्देशों का पालन न करने को लेकर नोटिस मिला। एक तरह से यहाँ कंपनी ने भारतीय नियम-कानूनों को लेकर खुद की व्याख्या करने की ठानी है, जबकि ये कार्य अदालत का है। ट्विटर ने उलटा भारत सरकार पर ही आरोप लगा दिया है कि उसने जो निर्देश दिए वो कानून के हिसाब से सही नहीं है। अर्थात, एक विदेशी कंपनी किसी देश की सरकार से ज्यादा वहाँ का कानून समझती है। कंपनी ने कहा है:

  • हमने हानिकारक कंटेंट्स की विजिबिलिटी को कम किया। उन्हें सर्च टर्म्स में आने से रोका और साथ ही ट्रेंड्स में वो न दिखें, ऐसी व्यवस्था की।
  • MeitY के निर्देश के बाद हमने ट्विटर के नियमों का उल्लंघन करने वाले 500 हैंडल्स को सस्पेंड किया।
  • हमने ऐसे कई हैंडल्स पर रोक लगाई, जो अब भारत में नहीं दिखेंगे। हाँ, वो विदेशों में ज़रूर दिखेंगे क्योंकि हमें नहीं लगता कि ये भारतीय कानून के अनुरूप है। साथ ही हम ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ और ‘बोलने की स्वतंत्रता’ की सुरक्षा को अपना मूल्य समझते हैं। उन पर रोक लगाने का अर्थ होगा भारतीय कानून में दिए गए अभिव्यक्ति की आज़ादी के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन।
  • हमने ऐसे सभी हैंडल्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है जो राजनेताओं, पत्रकारों, मीडियाकर्मियों और एक्टिविस्ट्स के हैं। हम भारत सरकार के साथ बातचीत जारी रखेंगे और ससम्मान उनसे वार्ता करते रहेंगे।

ट्विटर ने ये भी साझा किया कि किसी हैंडल को ‘Withheld’ करने का अर्थ क्या होता है। उसने लिखा है कि अगर किसी अन्य प्रशासन से उसे कोई अनुरोध प्राप्त होता है तो उस खास क्षेत्र में उस कंटेंट को ब्लॉक कर दिया जाता है, जबकि बाकी जगह वो दिखता रहता है। साथ ही कोर्ट के सीलबंद ऑर्डर न मिलने की स्थिति में वो यूजरों को इस प्रतिबंध के बारे में विवरण देता है। साथ ही उसे बताया है कि हैंडल्स पर रोक लगाने के लिए कैसे निवेदन देना है।

यहाँ ये ध्यान देने वाली बात है कि भारत में वो राजनेताओं के हैंडल ब्लॉक न करने की बातें कर रहा है, जबकि अमेरिका में उसने वहाँ के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैंडल को ही सस्पेंड कर दिया था। भारत में अगर किसी ने वार्ड का चुनाव भी लड़ा हो तो वो ‘राजनेता’ है, तो क्या उसे भड़काऊ कंटेंट्स शेयर करने का ओहदा मिल जाएगा? यहाँ तो सारे वामपंथी एक्टिविस्ट हैं और ब्लॉग लिखने वाले भी पत्रकार हैं। तब तो इन शब्दों की आड़ में किसी पर कार्रवाई नहीं हो सकेगी।

जहाँ तक अमेरिका की बात है, वहाँ पहले संशोधन के बाद ही ‘फ्री स्पीच’ की बात है, जिसे उनके लोकतंत्र का लंबे समय से खड़ा स्तंभ बताया गया है। लेकिन, वहाँ स्पष्ट किया गया है कि ये ‘प्रेस’ की सुरक्षा के लिए है। भारत में इस तरह के किसी शब्द का मेंशन नहीं है। इस तरह से ट्विटर लगातार भारत में अमेरिका के कानून के हिसाब से चीजों की व्याख्या कर के हम पर थोप रहा है। वो अपने नियमों को भारतीय संविधान और नियम-कानून से ऊपर रख रहा है।

गौरतलब है कि भारत सरकार के निर्देशों की अवहेलना कर के भारतीय संविधान और नियम-क़ानून की अपने हिसाब से ऊटपटाँग व्याख्या कर रहे ट्विटर को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जवाब दिया है। लेकिन, दिलचस्प ये है कि भारत सरकार ने जवाब देने के लिए ट्विटर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया का भारतीय स्वदेशी माध्यम चुना। मंत्रालय ने ‘Koo App’ पर ट्विटर की बदतमीजी पर प्रतिक्रिया दी है।

बताते चलें कि बुधवार (3 फरवरी 2021) को केंद्र सरकार ने ट्विटर को स्पष्ट कह दिया था कि ‘किसान’ प्रदर्शन को लेकर जितने भी भड़काऊ ट्वीट हैं, उन्हें हटाया जाए वरना जेल और जुर्माना दोनों के लिए कंपनी तैयार रहे। केंद्र सरकार ने 257 अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश ट्विटर को दिया था। ये सभी अकाउंट #ModiPlanningFarmerGenocide (किसानों के नरसंहार के लिए मोदी की प्लानिंग) नाम से हैशटैग चला रहे थे। लेकिन, ट्विटर ने भारत सरकार के निर्देश को धता बता दिया।

राम मंदिर के लिए चंदा लेने निकले थे RSS कार्यकर्ता, मकसूद के परिजनों ने चलवाई गोलियाँ

राजस्थान के कोटा जिले में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा लेने निकले राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) के जिला संघ चालक दीपक शाह पर मंगलवार को (फरवरी 9, 2021) गोलियाँ दागी गईं। हमले में गोली उनकी जाँघ पर लगी। उन्हें इलाज के लिए पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया गया। बाद में वहाँ से वह MBS अस्पताल में भर्ती हुए।

पुलिस का कहना है कि दीपक शाह रामगंज मंडी के निवासी हैं। मंगलवार शाम 6 से 7 बजे के बीच वे राम मंदिर निर्माण के लिए निधि संग्रह करने निकले थे। उनके साथ जिला प्रचारक हेमंत और विभाग प्रचारक मनोज प्रताप भी थे। कुछ देर बाद जब विभाग प्रचारक मनोज प्रताप वहाँ से चले गए, तो दीपक शाह और उनके सहयोगी ने निधि संग्रह जारी रखा। मगर, थोड़ी देर में तीन बदमाश बाइक पर सवार होकर आए और दीपक शाह पर फायरिंग कर दी। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया।

घटना के बाद विधायक चंद्रकांता मेघवाल और पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजल घायल दीपक शाह से मिलने एमबीएस अस्पताल पहुँचे। दूसरी ओर रामगंजमंडी कस्बे में बड़ी संख्या में व्यापारी और RSS कार्यकर्ता थाने के बाहर एकत्रित हुए। भीड़ ने थाने में धरना-प्रदर्शन करते हुए घेराव किया। क्षेत्र में रात से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इलाके में पुलिस बल को तैनात किया गया है।

बता दें कि दीपक शाह, आरएसएस जिला संघ चालक होने के साथ-साथ स्टोन व्यापारी भी है। इस कारण व्यापारियों में भी भारी आक्रोश है। सभी ने मिल कर आरोपितों के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों का हवाला देकर कहा जा रहा है कि रामगंजमंडी क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर से दीपक शाह का कुछ दिन पहले किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। थाने में मामला भी दर्ज हुआ था। ऐसे में मंगलवार को दीपक शाह पर हुए जानलेवा हमले को उक्त घटना से जोड़ कर देखा जा रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स में आरोपित का नाम आशु पाया सामने आया है। कहा जा रहा है कि आशु ने ही अपने दो साथियों के साथ मिल घटना को अंजाम दिया, फिर फरार हो गया। पुलिस ने सूचना पाते ही इलाके में नाकाबंदी करवाई। वहीं दीपक शाह ने भी अपने बयान में मकसूद के बच्चों को आरोपित बताया।

दीपक शाह ने भी अपने बयान में कहा कि मकसूद पाया के बेटे बाबू पाया सहित अन्य लोगों ने उन पर हमला किया है। दीपक शाह ने अस्पताल में कहा कि उन्हें निधि संग्रह करने से रोकने के लिए कहा जा रहा था, जब बात नहीं मानी गई, तब ये हमला हुआ।

बता दें कि इस केस में भाजपा देहात जिलाध्यक्ष मुकुट नगर भी रामगंजमंडी पहुँचे। उन्होंने पुलिस को चेतावनी दी कि बुधवार सुबह 7 बजे तक वारदात में शामिल सभी बदमाशों को पकड़ लिया जाए अन्यथा भाजपा देहात सुबह रामगंजमंडी कस्बे को बंद करवाएगी।

ट्विटर का बयान अप्रत्याशित, भारत सरकार जल्द देगी प्रतिक्रिया: मंत्रालय ने ट्वीट करने के बजाय Koo App पर रखी बात

भारत सरकार के निर्देशों की अवहेलना कर के भारतीय संविधान और नियम-क़ानून की अपने हिसाब से ऊटपटाँग व्याख्या कर रहे ट्विटर को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जवाब दिया है। लेकिन, दिलचस्प ये है कि भारत सरकार ने जवाब देने के लिए ट्विटर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया का भारतीय स्वदेशी माध्यम चुना। मंत्रालय ने ‘Koo App’ पर ट्विटर की बदतमीजी पर प्रतिक्रिया दी है।

‘Koo एप’ पर भारत सरकार ने ट्विटर के ब्लॉग को लेकर जारी किया बयान

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने लिखा कि ट्विटर ने भारत सरकार के साथ बैठक करने के लिए निवेदन भेजा था। मंत्रालय के सचिव को कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करनी थी। मंत्रालय ने नोट किया कि जब इसी बीच ट्विटर ने सार्वजनिक रूप से ब्लॉग लिख कर अपनी प्रतिक्रिया जारी कर दी है, तो भारत सरकार भी जल्द ही इस सम्बन्ध में जवाब देते हुए अपना बयान जारी करेगी।

सरकार ट्विटर पर सख्त

ट्विटर के पक्षपाती रवैये और देश के कानून को अपने अनुसार तोड़-मरोड़ कर व्याख्या करने, देश-विरोधी कंटेंट पोस्ट करने वाले अकाउंट को भी ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर खुली छूट देने के मामले में अब केंद्र सरकार गंभीर हो गई है। ट्विटर अधिकारियों तक से IT मंत्रालय ने बात करने के इनकार कर दिया है। बात यहाँ तक बढ़ गई है कि ट्विटर पर जवाब देने के बजाय भारतीय प्लेटफॉर्म Koo पर मंत्रालय ने अपना पक्ष रखा है।

भारतीय प्लेटफॉर्म Koo पर IT मंत्रालय का पक्ष रखना एक संदेश है। केंद्र सरकार यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि टेक जायंट कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी। अगर वो ऐसा करना जारी रखते हैं तो उनके पर कतर दिए जाएँगे। ट्विटर से संबंधित बात ट्वीट करने के बजाय Koo पर लिखना यही संदेश है।

इसे दूसरे ढंग से सोचिए। सूत्रों वाली पत्रकारिता 2014 के बाद से लगभग खत्म हो गई है। ऐसे में अगर सारे मंत्रालय और विभाग Koo पर अपनी-अपनी बात, पॉलिसी रखने लगे तो मीडिया को भी ट्विटर के बजाय Koo पर आना होगा। तब भी क्या ट्विटर की मार्केट वैल्यू इतनी ही होगी, इंडियन कंटेंट मार्केट के संबंध में? और क्या ट्विटर इतने बड़े मार्केट से खुद को अलग-थलग करने की स्थिति में फिलहाल है?

‘हस्तमैथुन करना इस्लाम में हराम नहीं… बाएँ हाथ से छूने की है अनुमति’: जाकिर नाइक

कट्टरवादी इस्लामी उपदेशक ‘डॉक्टर’ ज़ाकिर नाइक ने पुरुषों के हस्तमैथुन की इस्लाम के हिसाब से व्याख्या की है। कई मामलों में अजीबोग़रीब फरमान सुनाने वाले मलेशिया में रह रहे भारतीय भगोड़े ने दावा किया कि पुरुष अगर बीवी की सोच में मगन होकर हस्तमैथुन करता है तो ये इस्लाम में हराम नहीं है। इससे पहले उसने ‘मेरी क्रिसमस’ की बधाई देने को इस्लाम में पाप करार दिया था और मुस्लिमों को इससे बचने की सलाह दी थी।

नवंबर 23, 2020 को उसने इस्लाम और हस्तमैथुन पर अपनी व्याख्या दी थी। अब रविवार (फरवरी 7, 2021) को उसने इसका दूसरा भाग वीडियो के रूप में जारी किया है। उसने दावा किया कि इस पर उसके ओरिजिनल वीडियो को 1 लाख से भी अधिक लोगों ने मात्र 24 घंटे में देखा था। उससे व्हाट्सएप्प के जरिए किसी ने पूछा था कि इस्लाम में हस्तमैथुन हराम है या हलाल। 27 दिनों में इसे 10 लाख लोगों ने देखा और इसका उर्दू, अरबी और इंडोनेशियन में अनुवाद भी हुआ।

इस्लामी कट्टरवादी ने दावा किया कि ये मुस्लिमों द्वारा पूछा जाने वाला सबसे सामान्य सवाल है। एक बड़े इस्लामी वेबसाइट पर भी कई मुस्लिमों ने इसे लेकर फतवा जारी करने की अपील की है। उसने कहा कि 70-80% लोग पोर्न देखते हुए हस्तमैथुन करते हैं, जो हराम है। लेकिन, उसने ये भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति की बीवी नहीं है और वो उसके बारे में सोचते हुए हस्तमैथुन करता है तो ये हराम नहीं है।

हस्तमैथुन को लेकर ज़ाकिर नाइक का वीडियो (भारत में प्रतिबंधित)

उसने पूछा कि अपनी बीवी के बारे में सोचने में क्या हराम होगा? उसने कहा कि कुरान के चैप्टर 23 के सुरा संख्या 5-7 के आधार पर कई विद्वान इसे इस्लाम में हराम मानते हैं, जिसमें बताया गया है कि असली मुस्लिम वही है, जो शुद्धता का अनुसरण करे और अपने प्राइवेट पार्ट्स को अवैध यौन कृत्यों के लिए इस्तेमाल न करे। उसने कहा कि ये सिर्फ प्राइवेट पार्ट्स की सुरक्षा के लिए है, कुरान में कहीं हस्तमैथुन पर प्रतिबंध नहीं है।

उसने कहा, “पैगम्बर मुहम्मद ने लोगों को अपने प्राइवेट पार्ट्स को जब तक उसकी इच्छा हो, तब तक छूने की अनुमति दी है, बशर्ते वो बाएँ हाथ से किया गया हो। पैगम्बर मुहम्मद ने कहा है कि ये आपका द्रव है और आप जब चाहें तब उसे निकाल सकते हैं।” ज़ाकिर नाइक ने कहा कि दो तरह के हस्तमैथुन होते हैं – एक आप खुद करते हैं और एक पार्टनर से करवाते हैं। उसने कहा कि कहीं ऐसा नहीं लिखा है कि बीवी को शौहर के प्राइवेट पार्ट्स छूने का हक़ नहीं।

उसने कहा कि जब बीवी द्वारा अपने शौहर के प्राइवेट पार्ट्स को छूने की अनुमति है तो फिर खुद से तो ये सब किया ही जा सकता है। इससे पहले उसने कहा था कि अगर कोई मुस्लिम दीन (मजहब) का अनुसरण करता है, तभी उसे भारत जैसे देश में ब्यूरोकेट बनना चाहिए। उसने कहा था कि मुस्लिमों के पास ब्यूरोकेट बनने का एक ही कारण होना चाहिए और वो है अपने मजहब का प्रचार-प्रसार करना, अपने मजहब के कर्तव्यों का पालन करना।

पिछले साल ज़ाकिर नाइक ने कहा था कि पत्रकार रवीश कुमार हों या ‘समुदाय विशेष का पक्ष लेने वाले’ अन्य दूसरे धर्मों वाले, उन सभी के लिए समान सज़ा की ही व्यवस्था है। ज़ाकिर नाइक ने अपने अनुयायियों को समझाया था कि जन्नाह अलग-अलग तरह के होते हैं, जैसे फिरदौस और फिरदौस आला। नाइक ने कहा था कि जब कोई जन्नत में जाता है तो सबके लिए अलग-अलग लेवल की व्यवस्था की गई है, सारे जन्नाह समान नहीं होते।

राम मंदिर के लिए कॉन्ग्रेसी MLA ने दिया चंदा, फोटो वायरल हुई तो मुस्लिमों से माँगी माफी: लगाया RSS पर आरोप

राम मंदिर निर्माण में चंदा राशि देने का नाटक करने के बाद अब केरल के कॉन्ग्रेस विधायक एल्धोस कुन्नापिल्ली (Eldhose Kunnappilly) ने मुस्लिम समुदाय से माफी माँगी है। कॉन्ग्रेस नेता ने मुस्लिम समुदाय से कहा है कि अगर उन्होंने किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई तो वह क्षमा माँगते हैं। 

मालूम रहे कि इससे पहले एल्धोस की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें वह आरएसएस कार्यकर्ताओं को मंदिर निर्माण के लिए चंदा दे रहे थे। उस फोटो में उन्होंने हाथ में राम  मंदिर की तस्वीर वाला एक कार्ड भी पकड़ा हुआ था। हालाँकि द न्यूज मिनट की रिपोर्ट में बताया गया कि एक वीडियो में वह राम मंदिर निर्माण में चंदा देने के लिए माफी माँग रहे हैं। 

कॉन्ग्रेस नेता इस वीडियो में RSS पर इल्जाम लगाते हैं कि उनसे चालाकी से पैसे लिए गए। कुन्नापिल्ली ने कहा कि कुछ लोग उनके पास मंदिर निर्माण के लिए चंदा लेने आए, मगर उन्हें ये नहीं बताया गया कि वह आरएसएस से हैं। न ही इसका उल्लेख किया कि वह चंदा राम मंदिर के लिए ले रहे हैं। खुद को बेगुनाह बताते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने 1000 रुपए का दान दिया, जो वह अमूमन देते हैं। मगर बाद में फैला दिया गया कि वह राम मंदिर के लिए था।

वह कहते हैं, “मैं सेकुलर इंसान हूँ और मुझे दुख हुआ कि उन्होंने मुझे बेवकूफ बनाया।” अपनी वीडियो में वह मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने पर बोले, “मैं RSS के प्रोपेगेंडे पर दुख व्यक्त करता हूँ, अगर यह किसी भी समुदायों की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।”

बता दें कि एक तरफ कॉन्ग्रेस नेता का दावा है कि उनसे धोखे से चंदा लिया गया। वहीं केरल कौमुदी की रिपोर्ट में बताया गया कि राम मंदिर के लिए दान देने की तस्वीर वायरल होने के बाद, कुन्नापिल्ली पर पार्टी का भारी दबाव था। वह आगामी चुनाव लड़ना चाहते हैं और उसी की तैयारी कर रहे हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले केरल के अलाप्पुझा जिले में राम मंदिर के लिए कॉन्ग्रेस नेता द्वारा शुरू किया गया अभियान विवादों में आया था। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रघुनाथ पिल्लई ने कदाविल मंदिर में चंदा इकट्ठा करने के काम का उद्घाटन किया था। जिसके बाद राजनीतिक उठा-पटक शुरू हो गई। कम्युनिस्ट पार्टी ने कॉन्ग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए कहा था कि पार्टी को राम मंदिर डोनेशन रैली में भाग लेने के बाद सेकुलरिज्म पर बात करने का अधिकार नहीं है।

प्रियंका चोपड़ा का बॉयफ्रेंड अलमारी में… मौसी ने पकड़ लिया था: शादी तक पहुँच गई थी बात, फिर वापस आना पड़ा

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा आजकल अपनी संस्मरण पुस्तक ‘अनफिनिश्ड’ के कारण लगातार सुर्ख़ियों में बनी हुई हैं। उनकी ये किताब कई बड़े बुक स्टोर्स पर भी उपलब्ध हो गई है। इसी पुस्तक में उन्होंने अपनी व्यक्तिगत ज़िंदगी के बारे में भी बहुत कुछ बताया है और कुछ मजेदार किस्से सुनाए हैं। इनमें से एक किस्सा है कि कैसे उन्होंने मौसी के डर से अपने बॉयफ्रेंड को अलमारी में छिपा दिया था, लेकिन पकड़ी गईं।

अपनी लव लाइफ का एक वाकया शेयर करते हुए प्रियंका चोपड़ा ने इस पुस्तक में लिखा है कि जब वो टीनएजर हुआ करती थीं, तभी उन्होंने कुछ वर्ष अमेरिका में बिताए थे। वहाँ पर वो अपनी मौसी के यहाँ रहा करती थीं। वहाँ उन्हें स्कूल में भी भर्ती करा दिया गया था। प्रियंका ने बताया है कि इसी दौरान बॉब नाम के एक लड़के से उन्हें प्यार हो गया और दोनों एक-दूसरे को डेट करने लगे। तब इंडियानापोलिस में रह रही प्रियंका 10वीं में पढ़ती थीं।

प्रियंका चोपड़ा ने बताया कि वो लड़का एकदम फनी था और साथ में ही रोमांटिक भी था। वो पूरी तरह उसके प्यार में डूब चुकी थीं और बात शादी तक भी पहुँच गई थी। उन्होंने बताया कि ऐसे ही एक समय वो बॉब के साथ टीवी देख रही थीं, तभी उनकी मौसी किरण अचानक से घर में आ गईं। ये उनके घर आने का वक़्त नहीं था, जिस कारण दोनों निश्चिंत बैठे थे। लेकिन, प्रियंका ने आनन-फानन में अपने बॉयफ्रेंड को अलमारी में बंद कर के छिपा दिया।

हालाँकि, उनकी मौसी को शक हो चुका था और उन्होंने तुरंत कहा कि वो अलमारी खोलें। बॉब को अलमारी में देख कर मौसी काफी नाराज हो गईं और उन्होंने प्रियंका की माँ से इस पूरे प्रकरण की शिकायत कर डाली। इसके कुछ ही समय बाद उन्हें भारत वापस बुला लिया गया। बॉब ने प्रियंका को एक चेन भी तोहफे में दी थी। उनकी पुस्तक ‘अनफिनिश्ड’ मंगलवार (फ़रवरी 9, 2021) को सार्वजनिक बिक्री के लिए आई है।

इसी किताब में उन्होंने बताया है कि कैसे एक फिल्ममेकर ने शुरुआती दौर में उन्हें प्लास्टिक सर्जरी करवाने की सलाह दी थी। उन्होंने लिखा, “जब मैं एक प्रोड्यूसर/डायरेक्टर से मिली तो कुछ बातचीत के बाद उन्होंने मुझे खड़े होकर घूमने के लिए कहा मैंने ऐसा ही किया। वह काफी समय तक मुझे घूरते रहे और मुझे देखते ही रहे फिर उन्होंने कहा कि मुझे ब्रेस्ट सर्जरी करवानी चाहिए। साथ ही अपने जबड़े और बट्ट का आकार भी ठीक करना चाहिए।”