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‘राम भक्त हनुमान की जय’ से वसीम जाफर को दिक्कत, टीम कैंप में बुलाते थे मौलवियों को: कोच से इस्तीफे के बाद आरोप

पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर संन्यास लेने के बाद से ही अक्सर अपनी ट्वीट्स को लेकर चर्चा में रहते हैं। भारत की जीत को लेकर विपक्षी देशों को हड़काना हो या फिर मजेदार मीम्स के जरिए रिप्लाई करना हो, वो सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। लेकिन, अब वो एक मजहबी विवाद में फँस गए हैं। उन्होंने मंगलवार (फरवरी 10, 2021) को उत्तराखंड क्रिकेट संघ (CAU) के मुख्य कोच के पद से इस्तीफा दे दिया।

कहा जा रहा है कि सचिव महिम वर्मा और मुख्य चयनकर्ता रिजवान शमशाद के साथ हुए विवाद के बाद उन्होंने इस्तीफा सौंपा है। वसीम जाफर इस पद पर रहने की एवज में 45 लाख रुपए प्रति सत्र की फी लिया करते थे। उन्हें सीनियर टीम का कोच बनाया गया था। उन्होंने माहिम पर टीम चयन में दखल देने के कई आरोप लगाए। हालाँकि, सचिव ने उन पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। वहीं रिजवान ने भी जाफर के आरोपों को बकवास करार दिया।

BCCI के उपाध्यक्ष रहे माहिम ने आरोप लगाया कि वसीम जाफर लगातार CAU के अधिकारियों से लड़ रहे थे और मजहबी गतिविधियों के आधार पर टीम को तोड़ने की कोशिश में लगे हुए थे। उन्होंने कहा कि जाफर का पूरा समर्थन किया गया और टीम चयन को लेकर उन्हें खुली छूट दी गई, लेकिन वो इकबाल अब्दुल्ला, समद सल्ला और जय बिस्टा को बतौर गेस्ट खिलाड़ी लेकर आ गए। कुणाल चंदेला की जगह इक़बाल को कप्तान बना दिया गया।

बता दें कि हाल ही में मुश्ताक अली ट्रॉफी में उत्तराखंड का प्रदर्शन काफी खराब रहा है और टीम 5 में से 4 मैच हार गई। अब CAU के अधिकारियों का कहना है कि घरेलू क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज होने के कारण सब उनकी बात मानते रहे। कहा जा रहा है कि विजय हजारे ट्रॉफी के लिए घोषित टीम में इक़बाल की जगह चंदेला को कप्तान बनाया गया, इसीलिए वसीम जाफर ने इस्तीफा दिया है।

सचिव ने बड़ा आरोप लगाया कि टीम के कैम्प के दौरान वसीम जाफर मौलवियों को बुलाते थे। मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान टीम के मैनेजर रहे नवनीत मिश्रा के हवाले से ‘दैनिक जागरण’ ने अपनी खबर में लिखा है कि कैम्प के दौरान आयोजन स्थल पर तीन मौलवियों को बुलाया गया था। जाफर ने कहा था कि ये जुम्मे की नमाज पढ़ाने आए हैं। आरोप है कि 2 बार ऐसा हुआ। जाफर ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है।

बता दें कि पहले उत्तराखंड टीम का स्लोगन ‘राम भक्त हनुमान की जय’ हुआ करता था, लेकिन उन्होंने इसे बदल दिया और कहा कि ये धार्मिक है। जब अधिकारियों ने सुझाव दिया कि इसकी जगह ‘उत्तराखंड की जय’ स्लोगन रखा जाए तो उन्होंने इसमें भी ‘जय’ नाम से आपत्ति जताई। इसके बाद टीम का स्लोगन ‘गो उत्तराखंड’ रख दिया गया। आरोप है कि इक़बाल को आगे बढ़ाने के चक्कर में उन्होंने चंदेला को निचले क्रम का बल्लेबाज बना दिया।

मैनेजर ने एक और खुलासा किया है कि विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान वसीम जाफर ने एक समानांतर टीम बना दी थी, जबकि टीम का चयन करना चयनकर्ताओं का काम है। साथ ही एक मेल लिख कर ये भी कहा कि मैं तुम लोगों का नौकर नहीं हूँ। मैनेजर ने उन पर बदतमीजी का आरोप लगाते हुए कहा कि अब उन्होंने जाफर के कॉल्स उठाने भी बंद कर दिए हैं। वहीं माहिम का कहना है कि बतौर कोच उनकी हर माँग पूरी की गई।

कासगंज में UP पुलिस पर हमला – कॉन्स्टेबल मृत, SI गंभीर घायल: एनकाउंटर में मारा गया शराब माफिया एलकार

उत्तर प्रदेश के कासगंज में मंगलवार (फरवरी 10, 2021) को बिकरु जैसा कांड दोहराया गया। शराब माफिया को पकड़ने गई पुलिस पर बेरहमी से हमला हुआ। हमले में एक सिपाही की हत्या कर दी गई। वहीं सब इंस्पेक्टर अर्धनग्न अवस्था में खून से लथपथ सड़क पर मिले। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर संज्ञान ले कर आरोपितों के विरुद्ध रासुका लगाने के निर्देश दिए। मृत सिपाही के परिवार को 50 लाख की मदद व एक नौकरी देने का ऐलान भी हुआ। दूसरी ओर पुलिस ने कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ में एक हत्यारोपित को मार गिराया। एनकाउंटर में मारे गए शख्स की पहचान मोती धीमर के भाई एलकार के रूप में हुई।

बता दें कि घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर कहा, “राज्य सरकार अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। कानून व्यवस्था के संबंध में किसी भी प्रकार का समझौता न करते हुए संबंधित दोषियों के विरुद्ध अविलंब व सख्त कार्रवाई की जाए।”

पूरा मामला सिढ़पुरा थाने का है। यहाँ से दो पुलिसकर्मी- सब इंस्पेक्टर अशोक सिंह और सिपाही देवेंद्र 9 फरवरी को अवैध शराब की सूचना मिलने पर दबिश देने लोकेशन पर पहुँचे थे। लेकिन शराब माफियों को इस बात की  खबर हो गई।

पहले माफियों ने दोनों पुलिसकर्मियों को बंधक बनाकर पीटा। फिर उनकी वर्दी फाड़ कर उनसे उनके हथियार छीन लिए। इसके बाद दारोगा को रास्ते में फेंक दिया गया व सिपाही को अपने साथ लेकर चले गए।

जब किसी ग्रामीण ने रास्ते में बुरी तरह घायल पुलिसकर्मी को देखा तो इसकी सूचना पुलिस को दी गई। जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुँची। तत्काल उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया। साथ ही सिपाही की तलाश शुरू हुई। लगभग 1 घंटे तक तलाशी के बाद जंगल में वह खून से लथपथ मिले। पुलिस उन्हें भी जिला अस्पताल लेकर गई लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

मालूम हो कि दोनों पुलिसकर्मी अवैध शराब के कारोबार पर सख्त कार्रवाई से पहले नोटिस चस्पा करने गए थे, मगर वहाँ उन्हें बंधक बना लिया गया और फिर उनके साथ बर्बरता से अंजाम दिया गया। कथित तौर पर दोनों कर्मियो को लाठी, डंडे के अलावा भाले जैसी धारदार चीजों से भी मारा गया। घटना के बाद कासगंज पहुँचे एडीजी अजय आनन्द ने भारी पुलिस बल के साथ वारदात स्थल का निरीक्षण किया। 

एडीजी ने बताया कि SI अशोक पाल और कॉन्स्टेबल देवेंद्र गश्त पर थे। उस दौरान वह नगला धीमर गाँव पहुँचे थे। इस गाँव में कच्ची शराब बनाने की सूचना पहले भी कई बार मिली है। मंगलवार शाम करीब 6.30 बजे CO पटियाली को पता चला कि SI और कॉन्स्टेबल के साथ मारपीट की गई है। सूचना पर कासगंज पुलिस और आस-पास के जनपदों की पुलिस घटनास्थल पर पहुँची। 

तलाश करने पर पुलिस को काली नदी की कटरी में तीन किलोमीटर की दूरी पर सिपाही और एसआई घायल हालत में मिले। सिपाही की इलाज के दौरान ले जाते समय मौत हो गई, वहीं एसआई अशोक पाल गंभीर रूप से घायल हैं। उनको इलाज के लिए अलीगढ़ रेफर किया गया है। एडीजी ने बताया कि इस वारदात में 4-6 अपराधी शामिल थे। पूरे गाँव को घेर कर तलाशी ली जा रही है। अपराधियों के ख़िलाफ़ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।

‘किसानों’ को बॉर्डर पर, खुद 5-Star होटल में: पुलिस से ऐसे बच रहा था दीप सिद्धू, बीवी के पास भागने वाला था बिहार

ट्रैक्टर रैली के नाम पर लाल किले के आस-पास हिंसा, दिल्ली पुलिस के सैकड़ों जवानों पर कातिलाना हमला और खालिस्तानी/धार्मिक झंडे के साथ लोगों को भड़काने वाला दीप सिद्धू इतना सब करने के बाद खुद फाइव स्टार होटल में रात बिताने चला गया था। इससे पहले वो सिंधू बॉर्डर गया था। दिल्ली पुलिस ने यह जानकारी दी है।

लाल किला पर दंगाइयों का नेतृत्व करने के बाद दीप सिद्धू सिंघू बॉर्डर पर जाकर और भी लोगों से मिला था। इसके बाद रात बिताने के लिए वो फाइव स्टार होटल गया, लोगों से उसकी यह मुलाकात ऐशो-आराम करते हुए होटल में भी होते रही। दिल्ली पुलिस इसकी जाँच में जुटी है कि किन-किन लोगों से सिद्धू ने मुलाकात की थी।

दिल्ली की एक कोर्ट ने पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू को 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। 26 जनवरी से पहले हिंसा की प्लानिंग और उसके बाद भाग-भाग कर वीडियो और लोगों से मेल-मिलाप कर प्रोपेगेंडा को फैलाने के पीछे की हर बात को अब पुलिस सिद्धू से उगलवाएगी।

नहीं रखा था अपने पास मोबाइल

फाइव स्टार होटल में रात बिताने के बाद सिद्धू हरियाणा-पंजाब की ओर भागा। एक्टर होने का फायदा दीप सिद्धू ने बखूबी उठाया। अपने समर्थकों से उसने रहने-खाने और यहाँ तक की मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करने तक की मदद ली।

दीप सिद्धू अपने दोस्तों तक का मोबाइल इस दौरान यूज नहीं करता था। उसे डर था कि उसके दोस्तों के मोबाइल भी सर्विलांस पर हो सकते हैं, जिससे उसका लोकेशन ट्रैक किया जा सकता है। इसी कारण वो अपने अनजान समर्थकों के मोबाइल को यूज करता था, उससे वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करवाता था।

दीप सिद्धू की विदेशी महिला मित्र और वीडियो

दीप सिद्धू के जो भी वीडियो फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आते थे, वो खुद अपलोड नहीं करता था। उसके पीछे सिद्धू की एक बेहद करीबी महिला मित्र है। सिद्धू की यह महिला मित्र अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहती है।

दीप सिद्धू का बिहार-झारखंड कनेक्शन

दीप सिद्धू की पत्नी झारखंड की रहने वाली हैं। फिलहाल वो बिहार के पूर्णिया में रहती हैं। 27 जनवरी के बाद वो पंजाब-हरियाणा के इलाके से निकल कर अपनी पत्नी के पास जाना चाहता था। लेकिन तब तक मीडिया की रिपोर्टों में यह आ चुका था कि उसकी पत्नी के आवास पर पुलिस पहले से मौजूद है। इसी कारण से उसने अपना प्लान बदल लिया।

‘घमंडी किसान’ नेताओं को दीप सिद्धू की धमकी

दीप सिद्धू ने 28 जनवरी 2021 की रात को फेसबुक लाइव किया था और अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है। सिद्धू ने किसान नेताओं को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने अंदर की बातें खोलनी शुरू कर दी तो इन नेताओं को भागने की राह नहीं मिलेगी।

‘पृथ्वी लोक पर स्वरा भास्कर से बेहतर कोई अभिनेत्री नहीं’: स्वरा ने जोड़े हाथ, कंगना का उड़ाया मजाक

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर एक फैन के सामने हाथ जोड़े और साथ ही ऑंखें बंद कर हँसने वाली इमोजी भी डाली। उक्त फैन ने स्वरा भास्कर को ‘पृथ्वी लोक’ की सबसे बेहतर अभिनेत्री बताते हुए लिखा था कि मंगल ग्रह पर सच में कंगना रनौत जैसी अभिनेत्री नहीं। इसके बाद स्वरा भास्कर ने उसकी ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी। उक्त व्यक्ति ने बीबीसी के एक ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए ऐसा लिखा था।

उस ट्ववीट में कंगना रनौत के हवाले से उनका बयान छपा था कि फ़िलहाल उनसे बेहतर शैली और विविधता वाली कोई अभिनेत्री नहीं है। कंगना रनौत ने अपनी आने वाली फ़िल्में ‘धाकड़’ और ‘थलाईवी’ को लेकर ऐसा कहा था। जहाँ ‘थलाईवी’ में वो जयललिता का किरदार अदा कर रही हैं, ‘धाकड़’ एक एक्शन फिल्म है। जयललिता के युवावस्था के दिनों के किरदार और फिर राजनीतिक सफर के किरदार में उन्हें कई बार लुक्स और हावभाव बदलने पड़े।

वामपंथियों ने सोशल मीडिया पर कंगना रनौत का ये कहते हुए मजाक उड़ाया कि उनके पास कितने ऑस्कर अवॉर्ड्स हैं, जिसके जवाब में उन्होंने पूछा कि सबसे ज्यादा ऑस्कर जीतने वाली मेरिल स्ट्रीप के पास कितने पद्म और राष्ट्रीय अवॉर्ड्स हैं? उन्होंने कहा कि वो ‘गॉडफादर’ के मुख्य अभिनेता मार्लोन ब्रांडो की तरह हैं। जैसे ब्रांडो ने ऑस्कर को धता बता दिया था, ठीक वही चीज वो फिल्मफेयर के साथ करती हैं।

कंगना रनौत ने अंत में ऐलान किया कि उनके खिलाफ जितने भी कमेंट्स आए, वो ट्रोल्स थे लेकिन कोई एक भी वैसी अभिनेत्री का नाम नहीं बता पाया, जिसके पास उनसे अधिक विविधता और शैली हो। इसी दौरान प्रशांत भूषण ने ‘मनकर्णिका’ में नकली घोड़े के साथ शूटिंग किए जाने का वीडियो अपलोड कर दिया। इस पर लोगों ने उनसे पूछा कि फिल्मों में जो मारपीट होती है, आप क्या समझते हैं कि वो एकदम सच्ची है?

हाल ही में कंगना ने दिलजीत दोसाँझ को खालिस्तानी बताया था। कंगना ने कहा था कि उन्होंने दिलजीत को यह बात करने की चुनौती दी थी कि वह खालिस्तानी नहीं है, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को गुमराह किया जा रहा है और उन्हें खालिस्तान के बारे में एक सपना दिखाया गया है। उन्होंने चीन पर भारत को 1000 साल के लिए गुलाम करने की रणनीति की साजिश करने का आरोप लगाया।

‘दुर्गन्ध इतनी कि साँस भी नहीं, रेडियो-एक्टिव डिवाइस है कारण’ – चमोली आपदा पर रैणी गाँव के लोग

उत्तराखंड के चमोली में आई आपदा के कारणों को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। जहाँ पहले ग्लेशियर फटने को इसका कारण बताया जा रहा है, वहीं ISRO के सैटेलाइट डेटा कहते हैं कि हिमस्खलन के कारण ऐसा हुआ। अब रैणी गाँव के लोगों में चर्चा है कि इसके पीछे किसी रेडियो एक्टिव-डिवाइस का हाथ हो सकता है। दरअसल, आशंका जताई जा रही है कि ये वही रेडियो-एक्टिव डिवाइस है, जो 1965 में एक खोजी दल के पास थी और गुम हो गई थी।

ये खोजी अभियान नंदा देवी पर्वत पर चल रहा था। कहा जा रहा है कि हीट प्रोड्यूस करने वाले इसी डिवाइस के कारण ये घटना हुई है, जिससे पूरे तपोवन क्षेत्र में तबाही आई। 1965 में अमेरिका की CIA और भारत की IB ने न्यूक्लियर पॉवर वाले सर्विलांस इक्विपमेंट नंदा देवी पर्वत पर स्थापित किया था। चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ऐसा किया गया था। हालाँकि, पर्वतारोहियों की टीम एक बर्फीली तूफ़ान में फँस गई, जिससे उन्हें डिवाइस को वहीं छोड़ कर वापस लौटना पड़ा।

इसके एक वर्ष बाद वो फिर से वहाँ लौटे, लेकिन उन्हें वो यंत्र नहीं मिला। खोजी अभियान चला, लेकिन फिर भी कुछ थाह नहीं लगा। चूँकि उस यंत्र की जीवन अवधि 100 वर्ष है, वो अभी भी सक्रिय हो सकता है। रविवार (फरवरी 7, 2021) को आई आपदा के कारण ऋषिगंगा नदी में भयंकर उफान आया और वो रास्ते में आने वाली हर चीज को बहाती चली गई। जुगजु गाँव की एक महिला ने बताया कि दुर्गन्ध इतनी तगड़ी थी कि लोग साँस नहीं ले पा रहे थे।

महिला का ये भी कहना है कि अगर ये सिर्फ बर्फ और बर्फीले कचरों के कारण होती, तो वो इस तरह से नहीं होती। वहाँ के बुजुर्गों ने अपनी अगली पीढ़ी को उस रेडियो एक्टिव डिवाइस के बारे में बता रखा है, ऐसे में लोगों में आशंकाओं का बाजार गर्म है। TOI की खबर के अनुसार, ग्रामीणों को आशंका थी कि उस यंत्र के कारण एक दिन सभी बह जाएँगे। लोग सरकार से उस यंत्र का थाह-पता लगाने की माँग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि उस यंत्र के पास क्षमता है कि वो गर्मी पैदा कर के बर्फ और पानी को प्रभावित कर सके, लेकिन उसे एक सील किए गए चैंबर में होना चाहिए क्योंकि इससे वो इस तरह से काम नहीं कर सकता। हर कुछ वर्ष पर कई एजेंसियाँ यहाँ की प्रकृति के अध्ययन के लिए सर्वे करती है अंतिम सर्वे 2016 में हुआ था। 2018 में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी उस डिवाइस को प्रदूषण का कारण बताया था।

चमोली में राहत कार्य अभी भी जारी है और अब तक 32 लाशें बरामद हुई है। गायब लोगों की कुल संख्या 197 है। भारतीय सेना, ITBP, NDRF, और SDRF के 600 कर्मी राहत-कार्य में लगे हुए हैं। राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि राशन वितरण, स्वास्थ्य सेवा और कनेक्टिविटी को सुचारु करने के लिए प्रयास जारी है। 2.5 किलोमीटर के HRT टनल में अभी भी 30-35 लोग फँसे हैं, जिन्हें निकालने के लिए प्रयास जारी है।

राम मंदिर निर्माण के लिए कॉन्ग्रेस की बागी MLA अदिति सिंह ने दिए ₹51 लाख की समर्थन राशि

राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर में निधि समर्पण अभियान चलाया जा रहा है। कई सियासी नेता मंदिर निर्माण में अपना सहयोग दे रहे हैं। इस बीच, उत्तर प्रदेश के रायबरेली सदर सीट से कॉन्ग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 51 लाख रुपए चंदे में दिए हैं। इस दौरान उन्होंने कहा, “मैं अपनी टीम और समर्थकों की तरफ से विश्व हिंदू परिषद को योगदान दे रही हूँ। इसमें सभी ने सहयोग किया है।”

अदिति सिंह ने कहा, “आज अगर पापा होते तो वो कार्यक्रम को देखकर बहुत खुश होते। ये हम लोगों के जीवन में बहुत बड़ी चीज हो रही है। उन्‍होंने कहा आज कार्यक्रम की जो पवित्रता है हम उसको बनाए रखें। हम आज पार्टी लाइन पर बात ना करें। हम जातिवाद, धर्मवाद से ऊपर उठ कर बात करें।”

इस मौके पर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि राम जन्मभूमि के निर्माण कार्य का नींव का कार्य मकर संक्रांति से शुरू हो गया। 400 फीट लंबा 250 फीट चौड़ी, 50 फीट गहरा मलबा हटाया गया है। मंदिर की नींव की तैयारी के लिए देश के इंजीनियररिंग संस्था आईआईटी बॉम्बे, गुहाटी, मद्रास, एनआईटी ने टाटा और एलएनटी ने गुण दोष के आधार पर चर्चा की। 400 फीट जमीन की गहराई पर रिसर्च किया गया। सरयू नदी का किनारा है, नदी कभी भी अपना बहाव बदल सकती है, उस पर चर्चा हुई। भगवान का यह मंदिर 36 से 39 महीनों में बन जाएगा।

दान देने वालों को 50 फीसदी आयकर छूट

चंपत राय ने बताया कि मंदिर बनाने में पत्थर और ताँबे का उपयोग होगा, लोहे का उपयोग नहीं होगा। मंदिर की बाउंड्री वाल लगभग 6 एकड़ में बनेगी। मंदिर निर्माण के लिए सम्पूर्ण समाज के समर्पण का अभियान चल रहा है। समर्पण का अभियान 45 दिन का है, जो 27 फरवरी को पूरा हो जाएगा।

उन्‍होंने कहा कि लगभग 5 लाख गाँव का समर्पण हमें मिलेगा। शहरों के लोग भी समर्पण करेंगे। उन्‍होंने कहा कि आधी आबादी तक पहुँचने का लक्ष्य है। 3 तरह के कूपन है, 10, 100 और 1000 रुपए और अधिक देने वालो के लिए रसीद छापी है। दान देने वालों को 50 फीसदी आयकर छूट मिलेगी।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की रायबरेली सदर सीट से कॉन्ग्रेस की विधायक अदिति सिंह ने सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया कि चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद से वह दो बार ही रायबरेली में आम जनता से मिली हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बाद उन्होंने कभी भी जिले की जनता से मुलाकात करने की कोशिश नहीं की और न ही वह किसी कार्यक्रम में शामिल होने आई हैं।

उन्होंने कहा था, “अगर जनता आपको वोट देकर चुनती है, तो उस जनता की आपको प्रत्येक तरह से मदद और मुलाकात करते रहनी चाहिए। हम किसी पार्टी विशेष की बात नहीं कर रहे हैं। हम सभी राजनीतिक नेताओं की बात करते हैं जो भी चुनाव जीत कर आता है वह अपनी जनता के प्रति पूरी तरह से जिम्मेदार होना चाहिए। जो अच्छा काम करेगा, उसकी तारीफ भी करूँगी।”

न्यूज़क्लिक का ‘अर्बन नक्सल’ गौतम नवलखा, न्यूजलॉन्ड्री और दूसरे वामपंथी पोर्टल्स से गठजोड़: ₹30 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (फरवरी 9, 2021) को न्यूज़क्लिक के संस्थापक और प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के घर पर छापा मारा। बताया जा रहा है कि डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के ऑफिस पर भी छापा मारा गया है।

सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को मनी लांड्रिंग निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत PPK NEWSCLICK स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े आय की जाँच के लिए दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में 10 से अधिक जगहों पर तलाशी ली। बता दें कि कंपनी पर 3 साल में 30 करोड़ रुपए से अधिक धन प्राप्त करने का आरोप है।

सूत्रों का कहना है कि अवैध तरीके से कमाई गई इस धनराशि का कंपनी की मुख्य व्यावसायिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। कहा गया कि यह धन पत्रकारों या कार्यकर्ताओं को वेतन के नाम पर बाँटा गया था। लाभार्थियों में तीस्ता सीतलवाड़ से जुड़े लोग भी शामिल हैं। अन्य लाभार्थियों में गौतम नवलखा, प्रंजॉय गुहा ठाकुरता आदि शामिल हैं।

सूत्रों का कहना है कि लाभार्थी प्रथम दृष्टया सर्विस के प्रावधान से जुड़े हुए प्रतीत नहीं हो रहे हैं। सूत्रों ने वाइकिंग सिस्टम इंटरनेशनल इंक नामक एक अमेरिका बेस्ड कंपनी का भी उल्लेख किया है। इनकी वेबसाइट के अनुसार, NewsClick का स्वामित्व PPK NEWSCLICK Studio Private Limited के पास है। प्रबीर पुरकायस्थ कंपनी के निदेशक हैं। वहीं प्रांजल पांडे अतिरिक्त निदेशक हैं। उनके खिलाफ भी छापे मारे गए थे।

कौन हैं प्रबीर पुरकायस्थ?

न्यूज़क्लिक के संपादक होने के अलावा, प्रबीर पुरकायस्थ एक इंजीनियर और ‘साइंस एक्टिविस्ट’ हैं। वह ‘फ्री सॉफ्टवेयर मूवमेंट ऑफ इंडिया’ (FSMI) के अध्यक्ष भी हैं। 2017 में, ‘विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में काम करने वाले सोलह मुक्त सॉफ्टवेयर मूवमेंट (FSM) एक साथ आए और FSM का एक राष्ट्रीय गठबंधन बनाने का फैसला किया’। इसी के परिणामस्वरुप एफएसएमआई का गठन हुआ।

एफएसएमआई के लक्ष्यों में ‘फॉरवर्ड फ्री सॉफ्टवेयर और इसके वैचारिक निहितार्थ हमारे राष्ट्र के सभी कोनों को विकसित डोमेन से वंचितों तक ले जाना’ और ‘मुफ्त सॉफ्टवेयर के उपयोग में कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं के बीच जागरूकता पैदा करना’ शामिल है।

Prabir Purkayastha is the president of FSMI
Prabir Purkayastha is the president of FSMI

प्रबीर पुरकायस्थ कथित तौर पर दिल्ली विज्ञान मंच (डीएसएफ) के संस्थापक सदस्य भी हैं। इसकी वेबसाइट के अनुसार, “दिल्ली विज्ञान मंच (डीएसएफ) का गठन वर्ष 1978 में सोसाइटी अधिनियम के तहत पंजीकृत एक जनहित संगठन के रूप में किया गया था। मंच का प्राथमिक उद्देश्य विज्ञान और विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीतियों को लोकप्रिय बनाने सहित विज्ञान और समाज इंटरफेस पर काम करना था।”

Prabir Purkayastha is a founding member of the Delhi Science Forum
Prabir Purkayastha is a founding member of the Delhi Science Forum

सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर (SFLC) के अनुसार, “उन्होंने कई प्रमुख पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में बड़े पैमाने पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति के मुद्दों को लिखा और प्रकाशित किया है, जिनमें ‘आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक’, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और दिल्ली के विज्ञान फ़ोरम प्रकाशन शामिल हैं।”

उनके कॉलम भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की आधिकारिक वेबसाइट में भी हैं। उन कॉलम में, वह ‘Covid-19 Pandemic and the Pathologies of Late Capitalism’ और अन्य मामलों के बारे में बात करते हैं।

His columns have appeared on the official website of the CPI(M)

प्रबीर पुरकायस्थ ने उन संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को भी संबोधित किया है, जो ओमिडयार नेटवर्क सहित विदेशों से धन प्राप्त करते हैं। वह कई कंपनियों में निदेशक भी हैं। वह स्टार्टअप्स सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड (एसएसपीएल), सग्रीक प्रोसेस एनालिस्ट प्राइवेट लिमिटेड, पीपी कनेक्ट मीडिया प्राइवेट लिमिटेड सहित कई अन्य में निदेशक हैं।

गौतम नवलखा के साथ संबंध

सबसे दिलचस्प बात यह है कि एसएसपीएल में, प्रबीर पुरकायस्थ के साथ गौतम नवलखा भी एक निर्देशक थे। गौतम नवलखा भीमा कोरेगाँव मामले में गिरफ्तार किए गए ‘अर्बन नक्सलियों’ में से एक है और कथित तौर पर पाकिस्तान के आईएसआई के साथ उनके संबंध हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद यह बताया गया कि गौतम नवलखा हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों के साथ भी संपर्क में थे।

Gautam Navlakha and Prabir Purkayastha were Directors at Startacus Software Private Limited (Source: ZaubaCorp)

गौतम नवलखा पीपी न्यूज़क्लिक स्टूडियो के “स्वतंत्र पार्टनर” थे, जहाँ उन्हें 17 अप्रैल, 2017 को पद पर नियुक्त किया गया था। यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि न्यूज़क्लिक के वर्तमान मालिक PPK NEWSCLICK स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड भीमा कोरेगाँव हिंसा के 10 दिन बाद 11 जनवरी, 2018 को संयुक्त हुआ।

Source: ZaubaCorp

यह सब घटनाएँ एक बहुत ही संदिग्ध शृंखला की ओर इशारा करता है। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रबीर पुरकायस्थ और गौतम नवलखा को सितंबर 1993 में एसएसपी के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। गौतम नवलखा को अप्रैल 2017 में PP NEWSCLICK STUDIO LLP के स्वतंत्र भागीदार के रूप में नियुक्त किया गया था।

DIGIPUB न्यूज़ इंडिया फाउंडेशन

डिजिटल युग के लिए एक स्वस्थ और मजबूत समाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण को सुनिश्चित करने में मदद करने के इरादे से डिजिटल मीडिया संगठनों द्वारा DIGIPUB न्यूज़ इंडिया फाउंडेशन (Digipub) का गठन किया गया था। इसका उद्देश्य एक मंच का निर्माण करना है, जो डिजिटल समाचार मीडिया संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है।

संगठन के प्रमुख संस्थापक सदस्यों में Alt News, Newsclick, Newslaundry, Scroll, The News Minute, The Quint और The Wire आदि शामिल हैं। नामों में आकाश बनर्जी, फेय डिसूजा, प्रंजॉय गुहा ठाकुरता और नेहा दीक्षित शामिल हैं।

ZaubaCorp के अनुसार, प्रबीर पुरकायस्थ Digipub के निर्देशकों में से एक थे। Digipub के अन्य निदेशकों में द न्यूज मिनट के धनाय राजेंद्रन, न्यूज़लॉन्ड्री के अभिनंदन सेखरी और द क्विंट के रितु कपूर शामिल हैं।

The Directors of Digipub

तब शास्त्री नहीं झुके थे, अब मोदी पीछे नहीं हटेंगे: तब भी हुआ था ‘किसान आंदोलन’, ‘हरित क्रांति’ को वामपंथियों ने खून से जोड़ा था

खेती करने की आधुनिक प्रक्रिया, ज्यादा उत्पादन देने वाले बीज, नई तकनीक, नए उपकरण और कृषि क्षेत्र के साथ उद्योग का मिश्रण – क्या आप सोच सकते हैं कि अगर कोई सरकार किसी गरीब देश में घाटे में जाते किसानों के लिए ऐसा कुछ करना चाहे तो उसका विरोध होगा? जी हाँ, भारत में ‘हरित क्रांति’ का भी जम कर विरोध हुआ था। ठीक उसी तरह, जैसे आज ‘किसान आंदोलन’ चल रहा है, कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ

लाल बहादुर शास्त्री के रहते ही एक तरह से इस अभियान की शुरुआत हो गई थी, लेकिन उनके असामयिक निधन के पश्चात इंदिरा गाँधी कुर्सी पर बैठीं और ये उनके खाते में गया। ताज़ा कृषि सुधार कानूनों में दो कदम और आगे बढ़ कर किसानों को सीधा इंडस्ट्री से जोड़ा जा रहा है, कोल्ड स्टोरेज जैसे इंफ़्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निवेश होगा और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में शर्तों को तय करने का अधिकार भी किसानों को ही दिया गया है।

हरित क्रांति के खिलाफ भी ‘किसान आंदोलन’: पढ़िए क्या कहा PM ने

राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे याद किया। उन्होंने सोमवार (फरवरी 8, 2021) को कहा कि जब भी कोई नई चीज आती है तो असमंजस का माहौल रहता है। साथ ही उन्होंने हरित क्रांति के विरोध को भी याद किया। तब भी कई आशंकाएँ थीं, कई आंदोलन हुए – ये चीजें दस्तावेजों में वर्णित हैं। प्रधानमंत्री ने याद किया कि कैसे कृषि सुधारों में सख्त फैसले लेने के लिए शास्त्री कैबिनेट में कोई कृषि मंत्रालय लेना ही नहीं चाहता था। पीएम मोदी ने कहा:

“नेताओं को लगता था कि हाथ जल जाएँगे और किसान नाराज हो जाएँगे तो उनकी राजनीति ही समाप्‍त हो जाएगी। अंत में शास्‍त्री जी को, सुब्रमण्यम जी को कृषि मंत्री बनाना पड़ा था और उन्होंने सुधारों की बाते की, योजना आयोग तक ने भी उसका विरोध किया था। वित्त मंत्रालय सहित पूरी कैबिनेट के अंदर भी विरोध का स्‍वर उठा था। लेकिन, देश की भलाई के लिए शास्‍त्री जी आगे बढ़े। ये वामपंथी दल आज जो भाषा बोलते हैं, वही उस समय भी बोलते थे। वे यही कहते थे कि अमेरिका के इशारे पर शास्‍त्री जी ये सब कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि कैसे वामपंथी हमेशा कहते रहते कि अमेरिका के इशारे पर कॉन्ग्रेस ये कर रही हैं, वो कर रही है। उन्होंने दशकों तक भारत में राज करने वाली कॉन्ग्रेस के नेताओं को याद दिलाया कि आज मेरे खाते में जमा है, वो सब वो पहले आपके बैक अकाउंट में था। उन्होंने याद किया कि कैसे अमेरिका का एजेंट कह दिया जाता था कॉन्ग्रेस के नेताओं को। कृषि सुधारों को छोटे किसानों को बरबाद करने वाला बताया गया था।

फिर पीएम मोदी ने ध्यान दिलाया कि कैसे देश भर में तब हजारों प्रदर्शन आयोजित हुए थे। बड़ा अभियान चला था। इस माहौल में भी लाल बहादुर शास्‍त्री और उसके बाद की सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती रही, उसी का परिणाम है कि जो हम कभी PL-480 मँगवा कर खाते थे, आज देश के किसानों के अपनी मिट्टी से पैदा की हुई चीजें खाते हैं। उन्होंने माना कि रिकार्ड उत्पादन के बावजूद भी हमारे कृषि क्षेत्र में समस्याएँ हैं।

जब हरित क्रांति को बता दिया गया था ‘रेड रेवोलुशन’

तब भी ‘किसान आंदोलन’ के पीछे यही वामपंथी पार्टियाँ ही थीं और उन्होंने तो हरित क्रांति की आलोचना करते-करते ये तक कह दिया था कि इसका ग्रीन आगे चल कर ‘रेड’ हो जाएगा। उन्होंने हरित क्रांति को खून से जोड़ दिया था। आइए, अब इसका बैकग्राउंड देखते हैं। 1957 के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को बहुमत तो मिला था, लेकिन CPI केंद्र से लेकर कई राज्यों में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर चुकी थी।

केरल में संयुक्त मोर्चे की वामपंथियों की सरकार बन चुकी थी और वो लैंड रिफॉर्म्स के मुद्दे पर आगे बढ़ रहे थे, जिसे कॉन्ग्रेस छूना ही नहीं चाहती थी। मौसम बिगड़ने और उत्पादन कम होने के साथ-साथ किसानों को अनाज का भाव न मिलने के बाद नेहरू ने कृषि समस्याओं पर अध्ययन के लिए एक अमेरिकी टीम का गठन किया। टीम ने पाया कि किसानों को उन्नत बीज, खाद, उपकरण, वैज्ञानिक सलाह और समर्थन मूल्य की ज़रूरत है।

सिंचाई के लिए आधुनिक तरीके अपनाने पर भी जोर था। इसे ‘जॉनसन रिपोर्ट’ के नाम से जाना गया, जिसमें कहा गया कि भारत में जिस हिसाब से जनसंख्या बढ़ रही है, उससे फ़ूड सप्लाई पर एक बहुत बड़ा दबाव आकर बैठ गया है। इतने लोगों का पेट भरना भविष्य में मुश्किल होगा। इसके बाद ‘एग्रीकल्चर डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम’ बना, जिसने ‘हरित क्रांति’ के आधार के रूप में काम किया। कुछ जिलों में रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही की योजना बनाई गई।

रिपोर्ट को तैयार करने के पीछे रही संस्था ‘फोर्ड फाउंडेशन’ ने माना था कि IDAP को लागू करने में लोगों ने उतनी सक्रियता नहीं दिखाई। इसके लिए जिन लोगों को जिम्मेदारी दी गई थी, वही सक्रिय नहीं रहे। अब समय आया लाल बहादुर शास्त्री का, जिन्होंने आते ही नेहरू प्रशासन से अपनी जगह बनानी शुरू की और अपने अनुभवों के आधार पर कृषि सुधारों को आगे बढ़ाया और कई नई योजनाएँ तैयार की।

लाल बहादुर शास्त्री ने योजना आयोग की शक्तियाँ कम की और निर्णय लेने की क्षमता अपने मंत्रियों को देकर प्लानिंग कमीशन को कैबिनेट की अडवाइजरी बना दी। इसके बाद सी सुब्रमण्यन को देश का कृषि मंत्री बनाया गया। उन्होंने ओपन मार्किट में सरकार द्वारा मार्किट प्राइस से अधिक पर अनाज खरीद कर स्टोर किए जाने का प्रस्ताव दिया। 1964 में ‘फ़ूड ग्रेन्स प्राइसेज कमिटी’ की रिपोर्ट के आधार पर ‘परमानेंट एग्रीकल्चर प्राइसेज कमिशन’ बनाया गया।

आगे की नीतियों में इस कमिशन की बड़ी भूमिका रही। इसका परिणाम ये हुआ कि न सिर्फ अनाज के दाम बढ़े और किसानों को अधिक भाव मिलने लगा, बल्कि उत्पादन भी बढ़ गया। कम्युनिस्ट शास्त्री से चिढ़ते थे। एक वामपंथी नेता हीरेन मुखर्जी ने तो उन्हें ‘स्प्लिट पर्सनालिटी’ तक कह दिया था, जिसके जवाब में शास्त्री ने कहा था कि वो इतने मासूम नहीं हैं, जितने दिखते हैं। वो सख्त फैसले लेने में विश्वास रखते थे।

खुद जयराम रमेश ने लिखा है कि कैसे कृषि विशेषज्ञ स्वामीनाथन ने सी सुब्रमण्यम को ज्यादा उत्पादन देने वाले बीजों के बारे में बताया था। गेहूँ की इन वराइटिज की खेती के खिलाफ जम कर विरोध प्रदर्शन हुआ। 1965 में 250 टन गेहूँ के बीज की इम्पोर्ट के लिए प्रयास किया गया। अगले ही वर्ष 1800 टन बीज आयात हुआ। 1965 में मानसून की खराब स्थिति ने कृषि क्षेत्र को और भी हाशिए पर धकेल दिया था।

तभी निर्णय लिया गया कि 1971 के बाद खाद्यान्न इम्पोर्ट नहीं किए जाएँगे और खेती को आधुनिक बनाया जाएगा। वैज्ञानिक पद्धतियों को जोड़ा गया कृषि में। लेकिन, वामपंथियों को इन मशीनों से भी नफरत थी और वो इन सबको विदेशी चाल बताते थे। आज की तरह ही कई आर्थिक विशेषज्ञों ने भी इसका विरोध किया था। वामपंथी दल कहते थे कि छोटे किसान बर्बाद हो जाएँगे। कैबिनेट तक में विरोध के बावजूद ये हुआ और सफल रहा, जिससे कृषि में बड़ा बदलाव आया।

इसीलिए, आंदोलनजीवियों को समझना चाहिए कि कृषि में सुधार के लिए और किसानों को और ज्यादा स्वतंत्रता देने के लिए जो कानून लाए गए हैं, उन्हें लेकर लोगों को न बरगलाएँ। अगर सच में इनमें कुछ गड़बड़ी होती तो 11 राउंड की वार्ता के बाद भी स्थिति जस की तस नहीं होती। ये उसी तरह राजनीतिक रूप से प्रेरित आंदोलन है, जैसे तब हुआ था। हरित क्रांति का विरोध करने वाले ही आज किसान आंदोलन के नाम पर अराजकता फैला रहे हैं।

गूगल ने दी ‘टूलकिट’ के राज खोलने पर सहमति, दिल्ली पुलिस ने माँगी थी सूचना

हाल ही में किसान आंदोलन को भड़काने में जिस ‘टूलकिट’ का जिक्र सामने आया था, दिल्ली पुलिस ने उसे बनाने वालों के संबंध में शुक्रवार (फरवरी 05, 2021) को गूगल और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से ईमेल आईडी, डोमेन यूआरएल और कुछ सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देने को कहा था। बताया जा रहा है कि गूगल ने इस टूलकिट को बनाने वालों की जानकारी साझा करने के लिए अपनी सहमती दे दी है।

उल्लेखनीय है कि किसान आन्दोलन को लेकर पॉप सिंगर रिहाना के ट्वीट के बाद जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) ने ‘गलती से’ एक ‘टूलकिट’ ट्विटर पर शेयर कर डाली थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने भारत सरकार के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध छेड़ने के इरादे से ये ‘टूलकिट’ तैयार करने वाले ‘खालिस्तान समर्थक’ निर्माताओं के खिलाफ FIR दर्ज की थी।

इस ‘टूलकिट’ में मौजूद डॉक्यूमेंट के सम्बन्ध खालिस्तान-समर्थक समूह ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ से जुड़े नजर आए थे। इसमें पता चला था कि गत 26 जनवरी को हुई हिंसा सहित पिछले कुछ अन्य घटनाक्रमों को एक नियत और योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था और इसका लक्ष्य भारत के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध छेड़ना है।

अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने बताया था कि इस ‘टूलकिट’ का लक्ष्य भारत सरकार के खिलाफ वैमनस्य और दुष्प्रचार के साथ ही, विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृति समूहों के बीच वैमनस्य की स्थिति पैदा करना है। गौरतलब है कि स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया, लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट ग्रेटा ने डिलीट भी कर दिया था। हालाँकि, तब तक बहुत देर भी हो चुकी थी। इस डॉक्यूमेंट से यह स्पष्ट हो गया है कि किसान आन्दोलन एक सोची समझी रणनीति के साथ शुरू किया गया था और 26 जनवरी का उपद्रव भी इसी रणनीति का हिस्सा था।

कुरान की कसम खाकर कॉन्ग्रेस नेताओं ने जताई पार्टी से वफादारी, वीडियो वायरल होने पर बताया फर्जी

कॉन्ग्रेस पार्टी के इंदौर अध्यक्ष विनय बाकलीवाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि वह कथित तौर पर पार्टी के मुस्लिम कार्यकर्ताओं को कॉन्ग्रेस से वफ़ादारी के लिए मजहब की पवित्र किताब कुरान की शपथ दिला रहे थे। हालाँकि, इस वीडियो पर विवाद बढ़ने के बाद अब कॉन्ग्रेस नेता ने इसे ‘एडिट’ किया हुआ वीडियो बताया है।

बताया जा रहा है कि यह वीडियो 1 फरवरी को बनाया गया था। पार्टी के राज्य प्रवक्ता डॉ अमीन-उल खान सूरी ने सोमवार (फरवरी 08, 2021) को कहा, “इस तरह की शपथ लेना बहुत आम बात है। यह वीडियो एक सम्मेलन में उपस्थित पार्टी कार्यकर्ताओं का है, जहाँ सभी पाँच संभावित पार्षद उम्मीदवार मौजूद थे। बाकलीवाल ने उन्हें शपथ दिलाई कि जो भी उनके बीच टिकट प्राप्त करेगा, अन्य चार लोग उसकी पूरे दिल से मदद करेंगे और वे पार्टी को विजयी बनाने की दिशा में काम करेंगे।”

इस वायरल वीडियो में बाकलीवाल शहर के मुस्लिम बहुल चंदन नगर क्षेत्र में पार्षद के टिकट के पाँच दावेदारों को कथित तौर पर कुरान की कसम खिला रहे हैं और उन्हें इस बात के लिए पाबंद कर रहे हैं कि कॉन्ग्रेस द्वारा इनमें से जिस भी व्यक्ति को उम्मीदवार घोषित किया जाएगा, अन्य नेता मार्च-अप्रैल में संभावित चुनावों में उसके पक्ष में ईमानदारी से काम करेंगे।

हालाँकि, इस वीडियो को लेकर जब कॉन्ग्रेस को सोशल मीडिया पर घेरा जाने लगा तो कॉन्ग्रेस की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने दावा किया कि वीडियो से छेड़-छाड़ की गई है।

वायरल वीडियो पर बवाल मचने के बाद बाकलीवाल ने कहा, “मैंने पार्षद के टिकट के दावेदारों को कुरान की कसम नहीं खिलाई। कॉन्ग्रेस को बदनाम करने के लिए साजिश के तहत मेरे मूल वीडियो से छेड़छाड़ कर नया वीडियो तैयार किया गया है और इसे वायरल किया जा रहा है।”

रिपोर्ट के अनुसार, शहर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वह उनके वीडियो से छेड़छाड़ के मामले की जाँच के संबंध में पुलिस से शिकायत करेंगे।