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NDTV ने भीम आर्मी के गुंडों को बचाया, दलित दूल्हे और मंदिर के भक्तों के बीच हाथापाई की एकतरफा रिपोर्टिंग की?

NDTV ने रविवार (फरवरी 7, 2021) को एक रिपोर्ट पब्लिश किया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के गुराडिया माता गाँव में गुंडों द्वारा एक दलित विवाह जुलूस को रोक दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना शनिवार (फरवरी 6, 2021) को हुई। NDTV ने दावा किया कि ‘गुंडों’ ने न केवल शादी के जुलूस को रोका, दलित दूल्हे दीपक और उसके परिजनों के साथ गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार और मारपीट भी की। रिपोर्ट में कहा गया कि पीड़ित परिवार द्वारा 8 लोगों के खिलाफ शामगढ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई थी। पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 323, 294, 506, 147, 149 और अन्य के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

NDTV रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

NDTV ने इस बात पर भी जोर दिया कि मंदसौर राज्य के कैबिनेट मंत्री और भाजपा विधायक हरदीप सिंह डांग का विधानसभा क्षेत्र है। मामले में एफआईआर का हवाला देते हुए, समाचार पोर्टल ने बताया कि दीपक की शादी के जुलूस को ग्रामीणों द्वारा रोका गया। इसमें आगे दावा किया गया कि आरोपित ने दूल्हे और उसके परिवार के सदस्यों की पिटाई की और जुलूस को आगे बढ़ने से रोक दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स में ‘भीम आर्मी’ एंगल की तरफ इशारा

हालाँकि, फलाना दिखाना की एक रिपोर्ट ने इस स्टोरी को विस्तार से कवर किया और मामले के तथ्यों पर प्रकाश डाला। उनकी रिपोर्ट के अनुसार, रविवार रात लगभग 8 बजे, दलित दूल्हे दीपक मेघवाल की शादी का जुलूस देवनारायण मंदिर से सटे रास्ते से गुजर रहा था। रास्ते में देवनारायण मंदिर पर ग्रामीणों द्वारा कथा का अनुष्ठान चल रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, दीपक की बारात में तेज संगीत और डीजे थे, जिसकी वजह से मंदिर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान में बाधा पहुँच रही थी। भक्तों ने दीपक और उनके परिवार के सदस्यों से संगीत को कम करने का अनुरोध किया। हालाँकि, इससे ‘भीम आर्मी’ के नशे में धुत्त गुंडे नाराज हो गए। संगीत को कम करने के बजाय बारात में शामिल भीम आर्मी के गुंडों ने गाली गलौज शुरू कर दी और शराब के नशे में तलवार भी लहराने लगे। जिससे दोनों पक्षों में टकराव बढ़ गया।

कथित तौर पर, भीम आर्मी के सदस्यों ने मंदिर के बाहर जुलूस को रोक दिया और बहुत तेज़ आवाज़ में संगीत बजाते रहे। उन्होंने गाने बजाए और मंदिर के बाहर ‘जय भीम’ के नारे लगाए, जबकि मंदिर में कथा चल रही थी। इससे मंदिर में भक्तों और ‘भीम सेना’ के गुंडों के बीच हाथापाई हुई। पुलिस को सूचना देने पर पुलिस मौके पर पहुँची और बारात फिर से शुरू किया गया। हालाँकि, दलित वर्ग द्वारा राजपूत समाज पर बारात रोकने और दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ने से मना करने का आरोप लगाते हुए एससी एसटी एक्ट के तहत 8 लोगों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

इससे पहले ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी

समाचार आउटलेट फलाना दिखाना ने बताया कि दलित विवाह की बारातें नियमित रूप से गुजरती हैं और इससे पहले ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी। घटना के 8 दिन पहले, द्वारकालाल नाम के एक अन्य दलित दूल्हे ने स्थानीय लोगों या मंदिर के भक्तों के साथ कोई हाथापाई किए बिना, शांतिपूर्ण तरीके से बारात निकाली थी।

जब दीपक की बहन की शादी पिछले साल मार्च में हुई थी, तब भी राजपूत समुदाय के सदस्य शादी में शामिल हुए थे और समारोह शांतिपूर्वक संपन्न हुआ था। समाचार पोर्टल ने जोर देकर कहा कि यह पहली बार था जब भीम आर्मी के गुंडों ने क्षेत्र में शांति और सद्भाव को बाधित करने के लिए एक बारात में घुसपैठ करने की कोशिश की।

ऑपइंडिया ने शामगढ़ पुलिस से बात की

ऑपइंडिया से बात करते हुए, हेड कांस्टेबल (शामगढ़ पुलिस स्टेशन) ने बताया कि एफआईआर में नामजद 8 आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि राजपूत समुदाय और दलितों के बीच हाथापाई की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुँची। हेड कांस्टेबल ने हमें बताया कि पुलिस ने जल्द ही स्थिति को शांत करा दिया और बारात फिर से आगे बढ़ा दिया गया।

उन्होंने बताया कि जहाँ दलित समुदाय ने राजपूतों पर जुलूस को बाधित करने का आरोप लगाया है, वहीं राजपूतों ने जोर-शोर से संगीत बजाने और महिलाओं पर जानबूझकर भद्दे इशारे करने का आरोप लगाया। यह कहते हुए कि हाल ही में इस तरह का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था, उन्होंने बताया कि एक अन्य दलित दूल्हे की बारात को शांतिपूर्वक हाल ही में गुजरने की अनुमति दी गई थी। हालाँकि उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि भीम सेना के सदस्य जुलूस का हिस्सा थे या नहीं।

NDTV ने दलित लड़के को घोड़े की सवारी करने के लिए मारे जाने के बारे में फर्जी खबर फैलाई

यह पहली बार नहीं है कि NDTV ने एकतरफा रिपोर्टिंग का हो। मार्च 2018 में, NDTV ने बताया कि एक 21 वर्षीय दलित व्यक्ति, प्रदीप राठौड़ को गुजरात के भावनगर में घुड़सवारी के लिए ‘उच्च जाति के लोगों’ ने मार डाला। व्यक्ति के पिता ने आरोप लगाया था कि कुछ राजपूत पुरुषों ने उसके बेटे के खिलाफ दुश्मनी निकाली, क्योंकि उसने लगभग दो महीने पहले एक घोड़ा खरीदा था और राजपूतों ने उसे घोड़े को न बेचने पर मारने की धमकी दी थी।

यह स्टोरी तेज़ी से ट्विटर पर वायरल हुई। हालाँकि, पुलिस द्वारा की गई जाँच से पता चला कि कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि उसे घोड़ा रखने के लिए मारा गया था। पुलिस ने दावा किया कि वह लड़कियों को परेशान करता था और ग्रामीण उसकी गतिविधियों से नाराज थे और पुलिस को संदेह था कि इसी वजह से उसे मारा गया हो। पुलिस का दावा है कि ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि जब भी राठौड़ लड़कियों के सामने आता था तो वह घोड़े और मोटरसाइकिल पर स्टंट करता था।

न वुहान की लैब से, न जानवरों से.. कोरोना की उत्पत्ति के साक्ष्य अपर्याप्त- चीनी विशेषज्ञ और WHO का दावा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि कोरोना वायरस के चीन की किसी प्रयोगशाला से फैलने की संभावना नहीं मिल पाई हैं। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि हो सकता है कि इसने किसी मध्यवर्ती प्रजाति के जरिए मानव शरीर में प्रवेश किया होगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और चीनी विशेषज्ञ मिशन की एक संयुक्त टीम ने मंगलवार (फरवरी 09, 2021) को COVID-19 महामारी की उत्पत्ति की जाँच की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि कोरोनो वायरस महामारी चीन के वुहान से दुनियाभर में फैली, इसके साक्ष्य अपर्याप्त हैं और सिर्फ उनके आधार पर इस नतीजे पर नहीं पहुँचा जा सकता।

एक प्रेस ब्रीफिंग में, चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के विशेषज्ञ और COVID-19 पैनल के प्रमुख लियांग वानियान ने दावा किया कि दिसंबर, 2019 से पहले शहर में वायरस फैल गया था या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए ‘पर्याप्त सबूत’ नहीं हैं।

चाइना टीम के प्रमुख लियांग वानियन ने कहा, ”दिसंबर 2019 से पहले आबादी में Sars-Cov-2 के फैलाव के संकेत नहीं मिले हैं। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं है कि क्या वायरस इससे पहले शहर में फैला था।

WHO के वायरस एक्सपर्ट पीटर बेन एम्ब्रेक ने कहा कि अध्ययन का फोकस यह निर्धारित करना था कि क्या कोरोनो वायरस का कोई ’पिछला इतिहास भी था’ और क्या यह दिसंबर, 2019 से पहले भी मौजूद था? गौरतलब है कि विश्व में वुहान में ही दिसंबर 2019 में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला सामना आया था।

पीटर बेन एम्ब्रेक ने कहा कि टीम को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता लगे कि संक्रमण दिसंबर 2019 से पहले वुहान या अन्य किसी स्थान पर फैला। उन्होंने कहा कि इस बात के सबूत मिले हैं कि दिसंबर 2019 में वुहान के हुनान बाजार में यह काफी फैल गया था। उन्होंने कहा कि लैब से वायरस के लीक होने की थ्योरी की संभावना बेहद कम है।

चीनी विशेषज्ञ ने यह भी राय रखी कि संभव है कि कोरोना वायरस चीन के बाहर पैदा हुआ हो। चीनी स्वास्थ्य आयोग के विशेषज्ञ ने यह भी तर्क दिया कि कोरोना वायरस के 2019 के अंत में मध्य चीनी शहर वुहान में पता लगने से पहले किसी अन्य क्षेत्रों से वहाँ पहुँचा होगा।

चीन ने उस संभावना को दृढ़ता से खारिज कर दिया है और अन्य किसी सम्भावित सिद्धांतों की आशंका जताई है कि वायरस कहीं और उत्पन्न हुआ हो सकता है। टीम इस बात के लिए कई सिद्धांतों पर विचार कर रही है कि मनुष्यों में यह रोग पहले कैसे पहुँचा।

डब्लूएचओ के वैज्ञानिकों ने यह भी दावा किया है कि वैश्विक स्वास्थ्य निकाय को कोरोनो वायरस के जानवर से उत्पत्ति के स्रोत भी नहीं मिले हैं। हालाँकि, जब से महामारी जानकारी में आई है, तभी से वैज्ञानिकों और महामारी विज्ञानियों ने लगातार दावा किया है कि कोरोना वायरस चमगादड़ों में उत्पन्न हुआ होगा और एक अन्य स्तनपायी के माध्यम से मनुष्यों तक पहुँच गया।

दीप सिद्धू को भाजपा एजेंट बताने वाले ‘किसानों’ ने अरेस्ट होते ही बदला रंग, रिहाई का रो रहे रोना

मंगलवार (फरवरी 09 2021) को, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जानकारी दी कि उन्होंने अभिनेता और खालिस्तान समर्थक दीप सिद्धू को गिरफ्तार किया है। दीप सिद्धू की भूमिका किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान गणतंत्र दिवस पर हिंसा भड़काने और लाल किले पर उत्पात में पाई गई थी।

सोमवार रात करीब 10.30 बजे दीप सिद्धू को करनाल से गिरफ्तार किया गया है। वह पुलिस के रडार पर कई दिन से था। गिरफ्तारी से पूर्व, दिल्ली पुलिस ने दीप सिद्धू, जुगराज सिंह, गुरजोत सिंह और गुरजंत सिंह की सूचना देने वाले को 1 लाख रूपए का नकद इनाम देने की घोषणा की थी।

दीप सिद्धू का ‘किसान’ से ‘भाजपा एजेंट’ तक का सफर

पिछले साल 28 नवंबर को सोशल मीडिया पर दीप सिद्धू का वीडियो वायरल होने के बाद अभिनेता और खालिस्तान समर्थक दीप सिद्धू प्रमुखता से किसान आन्दोलन के बीच चेहरा बनकर सामने आए। सिद्धू ने झूठे आरोप लगाए थे कि सरकार ने किसानों की जमीनों को छीनने के लिए कृषि कानूनों को पारित किया है।

दीप सिद्धू के वीडियो को ट्विटर पर आम आदमी पार्टी (AAP), कॉन्ग्रेस और वाम-उदारवादियों का खूब समर्थन भी मिला। उन्हें ‘किसान’, ‘किसान का बेटा’ कहकर शुरू से ही किसान-विरोधी कानून आंदोलन से जोड़ दिया गया। यह और तथ्य है कि दीप सिद्धू ने बरखा दत्त के साथ एक साक्षात्कार में खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले की निंदा करने से इनकार कर दिया था।

खालिस्तान के प्रति उनके खुले समर्थन के बावजूद कृषि कानूनों का विरोध कर रहे लोगों ने दीप सिद्धू को अपना पूरा समर्थन दिया। भारत के 71वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर, यही दीप सिद्धू उन्मादी भीड़ का हिस्सा थे। इस भीड़ ने 26 जनवरी को लाल किले पर भारतीय तिरंगे का अपमान करते हुए सिखों के मजहबी झंडे को फहरा दिया था और उन्हें उकसाने वालों में दीप सिद्धू प्रमुख आरोपित हैं।

इस घटना के सामने आने के फ़ौरन बाद, वाम-उदारवादियों ने उन्हें ‘भाजपा एजेंट’ साबित करना शुरू कर दिया। इन लोगों ने फ़ौरन अभिनेता और भाजपा सांसद सनी देओल के साथ दीप सिद्धू की तस्वीरों को प्रसारित करना शुरू कर दिया।

हालाँकि, खुद दीप सिद्धू ने इस बात का खुलासा किया था कि वह भाजपा से नहीं जुड़े थे और 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सनी देओल के चुनाव प्रचार में शामिल होने के लिए वो खेद व्यक्त कर चुके थे।

लाल किले पर हुए उत्पात में दीप सिद्धू का नाम आते ही कॉन्ग्रेस और कृषि कानून विरोधी इकोसिस्टम तब केंद्र सरकार पर दीप सिद्धू को गिरफ्तार नहीं किए जाने को लेकर भाजपा पर आरोप लगा रहे थे। और अब, जब दिल्ली पुलिस ने सिद्धू को गिरफ्तार कर लिया है, तो कई कार्यकर्ता दीप सिद्धू की रिहाई की माँग कर रहे हैं।

दीप सिद्धू के गिरफ्तार होते ही फूट पड़े ‘किसान समर्थक’

जाने-माने ‘किसान’ कार्यकर्ता, पपलप्रीत सिंह, ने सिद्धू की गिरफ्तारी के बाद खालिस्तान से सहानुभूति रखने वाले दीप सिद्धू को अपना खुला समर्थन दिया है। अभिनेता की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए, उन्होंने जोर देकर कहा कि वह अभिनेता के साथ खड़े हैं।

एक अन्य ट्विटर यूजर, एच बरार ने ट्वीट किया, “हम वीर (बहादुर) दीप सिद्धू के लिए प्रार्थना करते हैं। सतगुर हर कीमत पर उसकी रक्षा करें। किसानों के विरोध में उनके द्वारा निभाई गई भूमिकाओं को न भूलें, उन्होंने युवाओं को कितना प्रेरित किया है। ”

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा, “दीप सिद्धू को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। ये दुख की बात है।” कुंवरवीर ने लिखा, “दीप सिद्धू के खून की जिम्मेदारी संघ (किसान) नेताओं की होगी।”

एक अन्य कृषि कानून विरोधी, नेहा शर्मा ने दीप सिद्धू को किसानों के अधिकारों का ‘योद्धा’ बताया और जोर देकर कहा कि वह सिद्धू के साथ खड़ी हैं। उसने सिद्धू की गिरफ्तारी पर निराशा व्यक्त की।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कॉन्ग्रेस पार्टी, जो कि कृषि कानूनों का विरोध करने में सबसे आगे रही है और पंजाब में अपनी ही सरकार होने के बावजूद किसानों के विरोध प्रदर्शनों को प्रायोजित कर रही है, ने किसान की आवाज के रूप में सिद्धू का महिमामंडन किया।

नवंबर माह में, जैसे ही दीप सिद्धू मोदी सरकार के खिलाफ विरोध का चेहरा बने, कॉन्ग्रेस पार्टी ने खुले तौर पर पगड़ी पहने अभिनेता के ‘किसान’ होने का दावा किया था और कृषि कानूनों के खिलाफ उनके विरोध का समर्थन किया था।

कुछ किसान नेताओं के अनुसार, गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर झंडा फहराने के लिए दीप सिद्धू और उनके समर्थकों का गिरोह जिम्मेदार था। बूटा सिंह बुर्जगिल, अध्यक्ष बीकेयू (डकौंडा), ने ‘द प्रिंट’ से कहा था, “दीप सिद्धू और उनके समूह ने लाल किले पर झंडे फहराए। वे पहले दिन से आंदोलन में समस्या पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। हम उसी परेड वाले रास्ते पर जा रहे हैं, जिसकी हमने घोषणा की थी।”

हालाँकि, तथाकथित किसान विरोध के वास्तविक इरादे सामने आने के बाद, कॉन्ग्रेस के इकोसिस्टम ने पंजाब के अभिनेता को अपने राजनीतिक बयान को बनाए रखने के लिए बलि का बकरा बना दिया, और सिद्धू को ‘भाजपा एजेंट’ के रूप सामने रखना शुरू कर दिया।

कॉन्ग्रेस आईटी सेल के सदस्य गौरव पाँधी, जिसने 28 नवंबर को दीप सिद्धू के कार्यों का बचाव किया था, ने सिद्धू की पीएम मोदी के साथ ली गई एक बेहद रेंडम तस्वीर के आधार पर सिद्धू को भाजपा से जोड़ दिया था।

मंगलवार को दीप सिद्धू की गिरफ्तारी के साथ ही दीप सिद्धू के भाजपा समर्थक होने के वाम-उदारवादी तर्क ध्वस्त हो गया है। ऐसे में, अब जबकि खालिस्तान समर्थक का बचाव करने के लिए कुछ भी नहीं बचा है, इनमें से कई लोगों ने सोशल मीडिया पर चुप्पी बना रखी है। हालाँकि, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ ने अपनी गरिमा का भी त्याग कर दिया है और दीप सिद्धू की रिहाई की माँग करते हुए खुलकर आगे आए हैं।

प्रियंका वाड्रा ने लोगों को भड़काने के लिए फिर शेयर की फर्जी तस्वीर, पोल खुलने पर झूठ बोलते नजर आए कॉन्ग्रेसी

कॉन्ग्रेस नेताओं में अपने शीर्ष नेतृत्व के प्रति इतनी अधिक वफादारी है कि यदि गाँधी परिवार से कोई कुछ फर्जीवाड़ा भी कर दे, तो भी वह उस पर यकीन नहीं करते। मंगलवार (फरवरी 9, 2021) को कुछ ऐसा ही कॉन्ग्रेस नेता डॉ विनीत पुनिया के साथ हुआ। विनीत पुनिया ने अपनी वफादारी सिद्ध करने के लिए पॉलिटिकल कीड़ा नाम के सक्रिय ट्विटर हैंडल पर ऊँगली उठाई और दावा किया कि प्रियंका गाँधी ने फर्जी तस्वीर शेयर ही नहीं की। नतीजतन कुछ ही देर में सबूत सामने आए व उन्हें खुद सबके सामने शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।

दरअसल, पिछले दिनों किसान आंदोलन को भावनात्मक तड़का देने के लिए एक फोटो शेयर की गई। इस फोटो में सेना का जवान अपने पिता से मिल रहा था। सोशल मीडिया पर इस फोटो को ये कहकर बेचा गया कि जवान छुट्टी मिलते ही सीधे दिल्ली बॉर्डर पर आया, जहाँ पिता को देख उसकी आँख भर आई।

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भी इस तस्वीर को 6 फरवरी 2021 को शेयर किया। अपने ट्वीट पर दो तस्वीरें डालकर प्रियंका ने लिखा, “छुट्टी मिलते ही अपने पिता से दिल्ली बॉर्डर पर मिलने आए जवान की आँखे भर आईं। 75 दिनों से इनके पिता अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। और पूँजीपतियों की सरकार की यह हिमाक़त कि उन्हें आतंकवादी, देशद्रोही, षड्यंत्रकारी कहते हैं? शर्म आनी चाहिए मौक़ापरस्त बेईमानों की सरकार को।”

प्रियंका गाँधी के अलावा कॉन्ग्रेस ने भी यह तस्वीर को ट्वीट कर मोदी सरकार पर निशाना साधा। कॉन्ग्रेस ने लिखा, “जिस किसान और जवान को इस भाजपाई हुकूमत के अहंकार ने आमने-सामने खड़ा कर दिया है, वो दोनों ही देश सेवा के लिए समर्पित हैं और उनमें एक-दूसरे के प्रति सहयोग का भाव है। भाजपा की साजिशें हमारे किसान और जवान को बांँट नहीं सकती।”

अब वर्तमान में इस तस्वीर को प्रियंका गाँधी के हैंडल से डिलीट कर दिया गया है। वहीं कॉन्ग्रेस का ट्वीट खबर लिखने तक अकॉउंट पर मौजूद है। कॉन्ग्रेस नेता पुनिया का कहना है कि फर्जी पॉलिटिकल कीड़ा को शर्म आनी चाहिए, क्योंकि ‘प्रियंका जी’ ने ऐसा ट्वीट किया ही नहीं है।

हालाँकि, पूनिया के इस आरोप के बाद पॉलिटिकल कीड़ा ने प्रियंका के ट्वीट का अर्काइव पेश कर दिया है। हैंडल ने बताया है कि वे लोग कॉन्ग्रेस की भाँति कोई भी दावा बिना सबूत के नहीं करते हैं।

बता दें कि जिन तस्वीरों को लेकर कॉन्ग्रेस समेत कई लोग किसान आंदोलन पर भावनात्मक पोस्ट कर रहे हैं उसकी सच्चाई यह है कि ये तस्वीर दिल्ली की है ही नहीं। ये पंजाब की है। जिसका फैक्ट चेक इंडिया टुडे ने भी किया है। इसके अलावा पॉलिटिकल कीड़ा का कहना है कि ये तस्वीर लुधियाना के बस स्टैंड से है जहाँ ऐसे भावनात्मक पल अक्सर दिखते रहते हैं।


NDTV कर्मचारी ने बिना डाक्यूमेंट्स के फ्लाइट मिस होने का ठिकरा एयर इंडिया पर फोड़ा: लगाया अनाप-शनाप आरोप

NDTV की कर्मचारी शिबांगी सिन्हा रॉय ने सरकारी एयरलाइन्स कंपनी एयर इंडिया को उनके दस्तावेज उपलब्ध न कराने, खराब इंटरनेट और फ्लाइट मिस होने के लिए दोषी ठहराया। दरअसल, शिबांगी एयर इंडिया को उड़ान से पहले आवश्यक डॉक्यूमेंट्स नहीं दे पाई, जिसकी वजह से उनकी फ्लाइट मिस हो गई। इससे खफा NDTV कर्मचारी ने ट्विटर पर एयर इंडिया को निशाने पर लिया।

NDTV कर्मचारी, जो पिछले दिनों ‘द वायर’ और ‘द कारवाँ’ जैसे वामपंथी मीडिया पोर्टल्स से जुड़ी थीं, ने मंगलवार (फरवरी 9, 2021) को ट्वीट्स का थ्रेड पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने एयर इंडिया को गलत दस्तावेजों, बुरे इंटरनेट और नियमों का पालन न करने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया।

NDTV के कर्मचारी शिबांगी सिन्हा रॉय द्वारा पोस्ट किए गए ट्वीट्स के थ्रेड का स्क्रीनशॉट
NDTV के कर्मचारी शिबांगी सिन्हा रॉय द्वारा पोस्ट किए गए ट्वीट्स के थ्रेड का स्क्रीनशॉट

शिबांगी सिन्हा रॉय ने एयर इंडिया से पूछा कि क्या वे ‘उत्पीड़न के लिए 500 रुपए अतिरिक्त लेते हैं?’ उन्होंने एयर इंडिया के कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि वो उनसे ऐसे बात कर रहे थे जैसे वो ‘कोई वांटेड आतंकवादी’ हो। बौखलाई हुई NDTV कर्मचारी ने पूछा, “कौन आपको इस तरह से लोगों से बात करने की अनुमति देता है?”

अपने ’कष्टप्रद अनुभव’ को बयाँ करते हुए उन्होंने लिखा कि यह सब तब शुरू हुआ जब उन्होंने दस्तावेजों से भरा बैग खो दिया। वह कहती है कि उनके फोन पर सभी जरूरी दस्तावेज थे, लेकिन खराब इंटरनेट के कारण वह उन्हें एक्सेस नहीं कर पाई।

जब उसने एयरलाइन से मदद माँगी, तो कथित तौर पर एक एयर इंडिया स्टाफ उन पर ‘चिल्ला’ उठा। उन्हें उम्मीद थी कि एयर इंडिया का स्टाफ उन्हें अपना निजी मोबाइल वाईफाई उपलब्ध कराएगा, जिसे स्टाफ ने मना कर दिया। रॉय ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने उन्हें यह कहते हुए जवाब दिया, “अपके जैसे बहुत लोग आते हैं।”

रॉय ने एयर इंडिया को टैग करते हुए लिखा, “एक सह-यात्री ने मुझे हॉटस्पॉट दिया, उसके बाद मैंने एयरपोर्ट के अंदर प्रवेश किया। प्रवेश करने पर, आपके कर्मचारियों ने मुझे 15 मिनट तक और इंतजार करवाया। और अब, आपके स्टाफ परवीन कौर और जितेंद्र ने मुझे बताया कि बोर्डिंग बंद हो गई है। टेक ऑफ से 1 घंटा पहले।”

यह हाइलाइट करने के लिए कि एयर इंडिया के स्टाफ ने उन्हें टेक ऑफ से 1 घंटा पहले उन्हें बताया कि बोर्डिंग बंद हो गया है, उन्होंने इसे कैपिटल लेटर में लिखा। वह एयर इंडिया के कर्मचारियों परवीन कौर और जितेंद्र की भर्त्सना की कि उन्होंने उसे फ्लाइट में चढ़ने नहीं दिया, जबकि टेक ऑफ होने में एक घंटा बाकी था।

शायद NDTV कर्मचारी, जो सोचती हैं कि भारत को ‘हिंदू आतंकवादियों से खतरा’ है, को एयरलाइन के नियमों के बारे में पता नहीं है। एयर इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर उल्लिखित चेक-इन काउंटर क्लोजर समय स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट करता है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों के लिए काउंटर क्लोजिंग समय प्रस्थान से 60 मिनट पहले है।

एयर इंडिया के आधिकारिक वेब पेज पर दी गई जानकारी

रॉय को इसी के बारे में बताया गया था, जिससे यह स्पष्ट रूप से साफ हो गया कि एयर इंडिया के कर्मचारियों को उनसे कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं थी, वो सिर्फ प्रोटोकॉल का पालन कर रहे थे।

हालाँकि, एयर इंडिया एनडीटीवी कर्मचारी के पास पहुँची। उन्होंने उनको हुई असुविधा के लिए माफी माँगी और उनसे ई-मेल आईडी और फोन नंबर जैसी उनकी व्यक्तिगत जानकारी माँगी ताकि वे उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए उनसे संपर्क कर सकें।

महिलाएँ लकड़ियाँ काटती थीं, अब उनके पास है उज्जवला गैस: मोदी सरकार की तारीफ में PDP सांसद ने कहा- जो हुआ वो कहना चाहिए

मोदी सरकार की नीतियों के मुरीद केवल मोदी समर्थक नहीं है- इस बात को आज पॉपुलर डेमोक्रेटिक फ्रंट (PDP/ पीडीरी) के नेता मीर मोहम्मद फयाज ने संसद में साबित कर दिया। फयाज ने पिछले 6 साल में मोदी सरकार द्वारा लागू की गई योजनाओं की तारीफ करते हुए बताया कि इसका फायदा जम्मू कश्मीर को और वहाँ की महिलाओं को कितना-कितना हुआ।

पीडीपी सांसद मीर मोहम्मद फयाज ने उज्जवला योजना की तारीफ करते हुए कहा, “मैंने देखा है कि जो उज्जवला स्कीम है या बाकी स्कीम है। मैं जब कमेटी का चेयरमैन था तो हमें साल में 5 लाख रुपए मिलते थे। आज वहाँ बैठे लोग कहते हैं कि उन्हें 5 करोड़ रुपया मिला। जो हुआ वो कहना चाहिए। इसी तरह गैस का। कल तक हमारी लेडीज जंगल से लकड़ी लाती थीं। आज उनके घरों में भी गैस है। जो काम हुआ वो कहना चाहिए।”

फयाज ने इस दौरान कई भाजपा नेताओं के नाम लेकर उनका आभार व्यक्त किया। वह बोले, “यहाँ पर पीयूष गोयल हैं। अरुण जेटली थे। जेपी नड्डा थे। प्रधानमंत्री हैं। सभी ने हमारा साथ दिया। जब भी हम अपने स्टेट के मसले लेकर इनके पास गए इन लोगों ने कभी हमें मना नहीं किया। अगर कभी प्रॉब्लम हुई तो वो जो हमारे स्टेट में हमारे लोग बैठे हैं, जो ब्यूरोक्रेट्स है उनके कारण हुई। यहाँ से हमें कभी किसी चीज से मना नहीं किया गया। उसके लिए मैं इन सभी का शुक्रियादा करता हूँ।”

मीर मोहम्मद फैयाज ने विदाई के दौरान राज्यसभा में काम करने को बहुत बड़ा तजुर्बा बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें यहाँ से बहुत कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने अपने मुल्क के लिए काम किया। उसका झंडा बुलंद किया। मगर उन्हें दुख तब होता है जब उन्हें देशद्रोही कहा जाता है।

वह बताते हैं कि जब जब जम्मू कश्मीर के बारे में फैसला लिया गया उस समय के प्रधानमंत्री ने जो कहा हमने अमल किया। अभी आज हमारे प्रधानमंत्री ने चुनाव की बात कही तो वहाँ लोग निकले। जो हुआ वो कहना चाहिए।

इरफान, महबूब, अहमद ने कर लिया था परमार वंश के राजमहल पर कब्जा: अब वहाँ के नीलकंठेश्वर मंदिर का अतिक्रमण साफ

मध्य प्रदेश के उदयपुर स्थित प्राचीन नीलकंठेश्वर मंदिर तक पहुँचने का रास्ता अब लगातार ठीक होता जा रहा है, क्योंकि निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। जो रास्ता आज से 2 हफ्ते पहले तक मात्र 10 फ़ीट का था, वो अब 30 फ़ीट का हो गया है। मार्ग को सुगम बनाने में न सिर्फ प्रशासन, बल्कि स्थानीय लोगों ने भी खासी रुचि दिखाई और योगदान दिया। लोगों ने स्वेच्छा से अपने घरों को 10-15 फ़ीट खोद डाला और सड़क व नाली के लिए रास्ता दे दिया।

रास्ते की चौड़ाई के लिए काम शुरू

इस बीच लोगों का कारोबार भी प्रभावित हुआ लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि विकास कार्य पहले है और उसमें कोई बाधा नहीं पहुँचाएगा। उदयपुर महल को भी प्रशासन ने अतिक्रमण मुक्त कर दिया है। इसके बाद नीलकंठेश्वर मंदिर तक सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया। वहाँ जितने भी कब्जाधारी थे, प्रशासन ने सबको समझाया कि वो खुद अतिक्रमण किए गए जगहों को छोड़ दें। हालाँकि, किसी मकान को तोड़ने की नौबत नहीं आई।

लोगों ने खुद ही सड़क-नाले पर किए अतिक्रमण तोड़ डाले

‘पत्रिका’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, कुछ लोगों ने पहले ही लिखित में अपनी सहमति प्रशासन को दे दी थी और कुछ ने नायब तहसीलदार दौजीराम अहिरवार के साथ मंदिर परिसर में हुई बैठक में इसका निर्णय लिया। एक मोहम्मद हामिद का बयान दिया गया है, जिन्होंने कहा कि प्रशासन के 10 फ़ीट जगह माँगने की एवज में 15 फ़ीट दिया गया है। उन्होंने कहा कि उदयपुर के बेहतर विकास के लिए सभी प्रयासरत हैं।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन का दिया भरपूर साथ

प्रशासन का प्रयास है कि महाशिवरात्रि तक सारे कार्य पूरे हो जाएँ, ताकि श्रद्धालु नए सुगम रास्ते से महादेव के दर्शन के लिए जाएँ। नालियों के लिए खुदाई चालू है और जल्द ही यहाँ नई नालियाँ और सड़कें दिखने लगेंगी। अधिकारियों ने इससे पहले कई बार इलाके का दौरा कर के लोगों को कानून का महत्व समझाते हुए अतिक्रमण हटाने की अपील की थी। साथ ही सामुदायिक शांति बनाए रखने को भी कहा गया।

जो रास्ता कभी सिर्फ 10 फीट चौड़ा था, वो अब काफी चौड़ा हो गया है

मध्य प्रदेश के विदिशा शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर उदयपुर एक प्राचीन नगर है। आठ हजार आबादी की इस बस्ती में हजार-बारह सौ साल की इमारतें आज भी काफी हद तक बची हुई हैं। यहाँ परमार राजवंश के वास्तुशिल्प के अनुसार दीवार-दरवाजे, मंदिर, महल, तालाब, बावड़ी, कमरे, दीवारें और गलियाँ हैं। इस जगह की प्रसिद्धि नीलकंठेश्वर मंदिर से है, जो राजा भोज के बाद की पीढ़ी में हुए महाराज उदयादित्य ने बनवाया था। 

अतिक्रमण हटने से दूर से ही नजर आ जाता है नीलकंठेश्वर मंदिर

बता दें कि महल की एक दीवार को तोड़कर सीमेंट और लोहे का दरवाजा लगा दिया गया था और पुरानी दीवार पर एक साइन बोर्ड टाँग दिया गया था- ‘निजी संपत्ति, उदयपुर पैलेस, खसरा नंबर-822, वार्ड नंबर-14।’ इस पर काजी सैयद इरफ़ान अली, महबूब अली और अहमद अली का नाम लिखा था।

नोट: ऑपइंडिया के लिए यह लेख विजय मनोहर तिवारी ने लिखा है।

43 वर्षीय शख्स ने नाबालिग बच्ची का रेप कर काटा गला: कोलकाता पुलिस ने किया गिरफ्तार

कोलकाता के जोराबगन इलाके में एक 43 वर्षीय शख्स को एक नाबालिग बच्ची का रेप और फिर उसकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपित की पहचान बिहार के बेगूसराय जिले के बलिया के रहने वाले रणवीर तांती उर्फ रघुबीर के रूप में हुई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) मुरलीधर शर्मा ने इसकी जानकारी दी। बता दें कि मामले में यह दूसरी गिरफ्तारी है।

पूछताछ के दौरान आरोपित ने बताया कि उसने एक सिक्योरिटी गॉर्ड के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपित सिक्योरिटी गार्ड राम कुमार को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। आरोपित को सोमवार (फरवरी 08, 2021) दोपहर में गिरफ्तार किया गया। रात भर पूछताछ के बाद 43 वर्षीय शख्स ने अपना जुर्म कबूल लिया है।

पुलिस के सामने उसने गार्ड के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम देने की बात कबूल की। शख्स के खिलाफ पोक्सो एक्ट, आईपीसी की धारा 302, 376 बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता सोवाबाजार की रहने वाली थी और अपने मामा के घर जोराबगन आई हुई थी।

पुलिस अधिकारी ने बताया, “घटना की शाम आरोपित पूरी तरह नशे में धुत था और उसने चॉकलेट और खाने की चीजों का लालच देकर बच्ची को बुलाया और उसका यौन उत्पीड़न किया। उसके बाद उसने बच्ची का गला घोंट कर हत्या कर दी। उसकी मौत सुनिश्चित करने के लिए उसका गला काट दिया। ऐसा लगता है कि अपराधी नाबालिग पीड़िता को जानते थे। इसीलिए उन्होंने उसे मार डाला।” पुलिस को बच्ची के शव के आसपास सीढ़ियों से कुछ दाँत और बाल मिले।

बुधवार (फरवरी 03, 2021) से उसकी कोई खोज खबर नहीं थी जिसके बाद परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कोलकाता के जोराबागान इलाके में गुरुवार (फरवरी 04, 2021) सुबह नौ साल की एक बच्ची का शव एक बहुमंजिला इमारत की सीढ़ियों के पास रहस्यमय हालात में मिला। बच्ची की हत्या गला रेतकर की गई थी। दाँत तोड़ दिए गए थे। बच्ची के शरीर पर पूरे कपड़े भी नहीं थे। शरीर पर चोट के कई निशान थे।

शहर के संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) मुरलीधर शर्मा के नेतृत्व में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। कथित तौर पर बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया है और इसके बाद सबूत मिटाने के लिए उसकी हत्या की गई है।

सबूतों को इकट्ठा करने के लिए कोलकाता पुलिस की होमिसाइड सेल की एक फोरेंसिक टीम और अधिकारी भी मौके पर पहुँचे हुए थे। शुरुआती जाँच में आया है कि बच्ची को कुछ खिलाने या खिलौने का लालच देकर आरोपित अपने साथ लाया होगा। पुलिस ने जाँच पड़ताल के बाद दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

विश्व में किसी मुसलमान को गौरव होना चाहिए, तो हिंदुस्तान के मुसलमान को: गुलाम नबी आजाद, राज्य सभा में आखिरी दिन

राज्यसभा में कॉन्ग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल पूरा हो रहा है। उनके सम्मान में आज (फरवरी 9, 2021) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई सांसदों ने विदाई भाषण दिया। इसके बाद जब गुलाम नबी आजाद के बोलने की बारी आई तो उन्होंने कहा कि वो खुशकिस्मत हैं कि पाकिस्तान नहीं गए और उन्हें अपने हिंदुस्तानी मुसलमान होने पर फक्र है।

इसे आप वीडियो में 4:00 से 6:10 के बीच सुन सकते हैं

गुलाम नबी आजाद ने आगे कहा, “मेरी हमेशा ये सोच रही है कि हम बहुत खुशकिस्मत है कि हम जन्नत यानी हिंदुस्तान में रह रहे हैं। मैं तो आजादी के बाद पैदा हुआ। लेकिन आज गूगल के जरिए और यूट्यूब के जरिए मैं पाकिस्तान के बारे में पढ़ता हूँ और देखता हूँ। मैं उन खुशकिस्मत लोगों में से हूँ जो कभी पाकिस्तान नहीं गया। लेकिन जब मैं देखता हूँ कि पाकिस्तान में किस तरह के हालात हैं तो मुझे हिंदुस्तानी होने पर फख्र होता है कि हम हिंदुस्तानी मुसलमान हैं। बल्कि मैं तो कहता हूँ कि आज विश्व में किसी मुसलमान को गौरव होना चाहिए तो वो हिंदुस्तान के मुसलमान को होना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “हम पिछले 30-35 सालों से अफगानिस्तान और इराक जैसे देशों को भी देख रहे हैं। दुनिया में ऐसे कई देश हैं जो आपस में लड़ रहे हैं। वहाँ हिंदू या ईसाई नहीं है, वहाँ मुसलमान हैं फिर भी आपस में लड़ाई कर रहे हैं। जो समाज में बुराई हैं, आज हम गौरव से यह कह सकते हैं कि हमारे देश के मुसलमानों में वह बुराईयाँ नहीं हैं।”

जम्मू और कश्मीर के पूर्व सीएम 15 साल पुरानी आतंकी घटना को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “मैं जब नवंबर 2005 में सीएम था तो दरबार कश्मीर में शिफ्ट हुआ। मई में यह हमला हुआ। उस समय आतंकी ऐसे ही स्वागत करते थे। वह यह एहसास दिलाते थे कि हाँ वो हैं। इस आतंकी हमले के बाद मैं जब हवाई अड्डे पहुँचा और उन बच्चों और परिजनों को देखा जो यहाँ घूमने आए थे, तो मुझे बहुत दुःख हुआ। मुझे लगा कि जो यहाँ घूमने और तफरी करने आए थे, उनके साथ क्या हो गया। उनमें से कुछ बच्चे मेरे पैर से लिपट कर रोने लगे। किसी के पिता गुजर गए थे तो किसी की माँ। मेरी चीख निकल गई। मैं उन्हें कैसे जवाब देता कि जो यहाँ घूमने आए थे, उनके हवाले मैं उनके परिजनों की लाशें दे रहा हूँ।”

उन्होंने कहा कि मेरी दुआ है कि यह आतंकवाद खत्म हो जाए। कश्मीरी पंडितों और अपने 41 साल के संसदीय जीवन को याद कर गुलाम नबी आजाद ने कहा, “गुजर गया वो जो छोटा सा इक फसाना था, फूल थे, चमन था, आशियाना था, न पूछ उजड़े नशेमन की दास्ताँ, न पूछ थे चार दिन के मगर नाम आशियाना तो था।”

इससे पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद की तरीफ करते हुए पीएम मोदी भावुक हो गए। गुलाम नबी आजाद की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब वह कोरोना महामारी पर सदन में विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक बुलाने पर विचार कर रहे थे तब आजाद ने फोन कर उन्हें सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाने का सुझाव दिया था।

पीएम मोदी ने उन्हें एक बेहतरीन मित्र बताते हुए कहा, “सदन के अगले नेता प्रतिपक्ष को आजाद द्वारा स्थापित मानकों को पूरा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। आजाद ने अपने दल की चिंता जिस तरह की, उसी तरह उन्होंने सदन की और देश की भी चिंता की।”

लड़कियों का रेप, प्रेगनेंट करना और बच्चे के जन्म के बाद दूध निकालना… इंटरनेट पर सब कुछ Live

नाइजीरिया के अबुजा में प्रशासन अधिकारियों ने एक ह्यूमन मिल्क फैक्ट्री से 115 महिलाओं को रेस्क्यू किया है। इन महिलाओं की उम्र 16 से 22 साल के बीच की बताई जा रही है। फैक्ट्री में इनका रेप होता था। फिर प्रेगनेंसी के बाद इनका दूध निकाल कर उससे पनीर, मक्खन और ताजे दूध जैसे डेयरी उत्पाद तैयार करके बेचे जाते थे। 

रिपोर्ट के अनुसार, इनमें अधिकांश महिलाएँ 3 साल पहले अपने घरों से गुमशुदा हुई थीं। रेस्क्यू के दौरान पीड़िताओं में अधिकतम उम्र की महिला 22 साल की है। अब पुलिस को आशंका है कि अपराधियों ने इनकी कुछ वीडियो बना कर डार्क वेब प्लेटफॉर्म पर भी डाली है, जिसे बिटकॉइन के जरिए पेमेंट करने वाले देखते हैं।

खबर के अनुसार, लड़कियों का रेप और उन्हें प्रेगनेंट करने का काम इंटरनेट पर लाइव आ आकर किया जाता था। इसके अलावा बच्चे के जन्म के बाद इनसे दूध लिया जाता था और बाद में अधिकांश उत्पादों को पूरी प्रक्रिया के वीडियो के साथ देश से बाहर उपभोक्ताओं को भेजा जाता था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ लोग स्वयं लड़कियाँ चुनते थे कि उन्हें किस लड़की से दूध चाहिए। इसके बाद लड़की को उस दिन अलग से खाना खिलाया जाता था। उनसे अलग से अनुरोध होता था कि वह लड़की अपने मुँह से कस्टमर का नाम लेकर बोले कि ये दूध तुम्हारे लिए है।

मालूम हो कि इस भयावह प्रकरण के संबंध में सोशल मीडिया पर लोग इसे एक तरकीब बता रहे हैं ताकि नाइजीरिया में क्रिप्टोकरेंसी बैन हो सके। कुछ लोग इसे सरकार का प्रोपगेंडा कह रहे हैं। वहीं कुछ लोगों को ये सब एक बड़ा मजाक लग रहा है।

एक यूजर लिखता है, “मैं विश्वास नहीं कर पा रहूँ कि लोग ऐसी बकवास चीजों को फ्रंट पेज पर डालते हैं। कुछ वाकई में कहीं न कहीं बहुत गलत है।” यूजर्स का मानना है कि सिर्फ़ बिटकॉइन को बदनाम करने के लिए ऐसी कहानी रची जा रही है।