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लड़कियों का रेप, प्रेगनेंट करना और बच्चे के जन्म के बाद दूध निकालना… इंटरनेट पर सब कुछ Live

नाइजीरिया के अबुजा में प्रशासन अधिकारियों ने एक ह्यूमन मिल्क फैक्ट्री से 115 महिलाओं को रेस्क्यू किया है। इन महिलाओं की उम्र 16 से 22 साल के बीच की बताई जा रही है। फैक्ट्री में इनका रेप होता था। फिर प्रेगनेंसी के बाद इनका दूध निकाल कर उससे पनीर, मक्खन और ताजे दूध जैसे डेयरी उत्पाद तैयार करके बेचे जाते थे। 

रिपोर्ट के अनुसार, इनमें अधिकांश महिलाएँ 3 साल पहले अपने घरों से गुमशुदा हुई थीं। रेस्क्यू के दौरान पीड़िताओं में अधिकतम उम्र की महिला 22 साल की है। अब पुलिस को आशंका है कि अपराधियों ने इनकी कुछ वीडियो बना कर डार्क वेब प्लेटफॉर्म पर भी डाली है, जिसे बिटकॉइन के जरिए पेमेंट करने वाले देखते हैं।

खबर के अनुसार, लड़कियों का रेप और उन्हें प्रेगनेंट करने का काम इंटरनेट पर लाइव आ आकर किया जाता था। इसके अलावा बच्चे के जन्म के बाद इनसे दूध लिया जाता था और बाद में अधिकांश उत्पादों को पूरी प्रक्रिया के वीडियो के साथ देश से बाहर उपभोक्ताओं को भेजा जाता था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ लोग स्वयं लड़कियाँ चुनते थे कि उन्हें किस लड़की से दूध चाहिए। इसके बाद लड़की को उस दिन अलग से खाना खिलाया जाता था। उनसे अलग से अनुरोध होता था कि वह लड़की अपने मुँह से कस्टमर का नाम लेकर बोले कि ये दूध तुम्हारे लिए है।

मालूम हो कि इस भयावह प्रकरण के संबंध में सोशल मीडिया पर लोग इसे एक तरकीब बता रहे हैं ताकि नाइजीरिया में क्रिप्टोकरेंसी बैन हो सके। कुछ लोग इसे सरकार का प्रोपगेंडा कह रहे हैं। वहीं कुछ लोगों को ये सब एक बड़ा मजाक लग रहा है।

एक यूजर लिखता है, “मैं विश्वास नहीं कर पा रहूँ कि लोग ऐसी बकवास चीजों को फ्रंट पेज पर डालते हैं। कुछ वाकई में कहीं न कहीं बहुत गलत है।” यूजर्स का मानना है कि सिर्फ़ बिटकॉइन को बदनाम करने के लिए ऐसी कहानी रची जा रही है।

संदेश: व्हाट्सऐप के देशी विकल्प को जल्द सार्वजानिक कर सकती है मोदी सरकार

भारत में कोरोना वायरस महामारी के दौरान ‘आत्मनिर्भर’ और ‘स्वदेशी’ जैसी क्रांतियों ने खूब जोर पकड़ा है। सोशल मीडिया पर भी यह मुहिम खूब लोकप्रिय रही क्योंकि ट्विटर की देश-विरोधी नीतियों और मैसेंजर ऐप व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर भी खूब बवाल जारी रहा।

इसी बीच, मोदी सरकार ने देश के लिए अपनी स्वदेशी मैसेजिंग ऐप ‘संदेश’ (Sandes) लॉन्च की है। इसे फेसबुक की ही मैसेंजर ऐप व्हाट्सऐप का देसी वर्जन बताया जा रहा है। ‘सन्देश’ ऐप वर्तमान में सरकारी कर्मचारियों द्वारा उपयोग की जा रही है, लेकिन बहुत जल्द यह ऐप सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए लॉन्च की जाएगी।

बताया जा रहा है कि संदेश ऐप अभी टेस्टिंग फेज में है। वर्तमान में आम जनता को इसका उपयोग करने की अनुमति नहीं है। ‘सन्देश’ को एंड्रॉयड और आईफोन, दोनों ही प्लैटफॉर्म्स के लिए लाया जाएगा। इस चैटिंग ऐप में वॉयस संदेश और डेटा भेजा जा सकता है। WhatsApp की नई प्राइवेसी पॉलिसी के बाद छिड़ी बहस के बाद लोगों का भरोसा इस पर उठने लगा और तभी से लोग इसके विकल्प के इन्तजार में हैं।

‘संदेश’ ऐप GIMS.gov.in की वेबसाइट पर मौजूद है। इस ऐप पर अशोक चक्र का चिन्ह देखा जा सकता है, जिसमें तीन लेयर्स दी गई हैं और ये मिलने पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा बनाते हैं। सन्देश एप्लिकेशन को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एक शाखा, नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

ट्विटर के बदले स्वदेशी ‘कू’

हाल ही में, ट्विटर की भारत-विरोधी नीतियों के बाद स्वदेशी माइक्रोब्लॉगिंग स्टार्टअप ‘कू’ भी लोगों के बीच लोकप्रियता बटोर रही है। भारत सरकार का इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी अपने तमाम संगठनों के साथ ट्विटर छोडकर ‘कू’ का रुख कर चुका है। ‘कू’ Made in India ऐप है, जो ट्विटर के विकल्प के तौर पर अपनी भाषा में लोगों को अपने विचार व्यक्त करने की आजादी देगा।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब सरकार खालिस्तानी और भारत-विरोधी अकाउंट को हटाने के अपने आदेशों के उलंघन करने पर ‘ट्विटर’ के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। समाचार चैनल ‘न्यूज़18’ के अनुसार, “जिन ट्विटर अकाउंट पर एक्शन लेने का आदेश दिया गया था वो खालिस्तानी समर्थक, या पाकिस्तान द्वारा समर्थित और विदेशों से संचालित होने वाले अकाउंट हैं। कई खाते भी स्वचालित बॉट्स हैं, जिनका इस्तेमाल किसानों के विरोध के नाम पर गलत सूचना और भड़काउ सामग्री शेयर करने के लिए किया गया था।”

सरकार ने ट्विटर (Twitter) के सीईओ जैक डोर्सी (Jack Patrick Dorsey) की ट्विटर गतिविधि, जो भारत विरोधी पूर्वग्रह का संकेत देती हैं, का भी संज्ञान लिया है। इस पर मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, “यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि कुछ दिनों पहले जैक डोर्सी (Jack Patrick Dorsey) ने किसान विरोध के समर्थन में विदेशी आधारित हस्तियों द्वारा किए गए कई ट्वीट लाइक किए थे। इसे देखते हुए, ट्विटर द्वारा सरकार के आदेशों की अवहेलना कई सवाल खड़े करती है।”

सिर्फ 2 मिनट का मोबाइल कनेक्शन, लटकने के लिए लोहे की रॉड: उत्तराखंड त्रासदी में ऐसे बचे 12 लोग

उत्तराखंड में रविवार (फरवरी 7, 2021) की सुबह पानी के हाहाकार के बाद घंटों तक एक अंधेरी टनल में लोहे की रॉड पर लटके 12 लोगों के लिए 2 मिनट का मोबाइल कनेक्शन जीवनदान साबित हुआ।

तपोवन-विष्णुगढ़ एनटीपीसी हाइडल पावर प्रोजेक्ट में जिन 12 लोगों को निर्माणाधीन टनल से बचाया गया उन्होंने जीवन का नया सवेरा देख कहा कि उन सबने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन 2 मिनट के मोबाइल कनेक्शन ने उनकी जिंदगी बचाई।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार रविवार दोपहर टनल से बचाए गए 26 साल के बसंत बहादुर ने कहा, “टनल में आमतौर पर मोबाइल नेटवर्क नहीं होते। हमें केवल 2 मिनट के लिए यह नेटवर्क मिला जो हमारे अधिकारी को कॉल करने के लिए काफी था।”

टनल से रेस्क्यू हुए लोगों में एक जियोलॉजिस्ट भी शामिल थे। इनकी पहचान के श्रीनिवास के तौर पर हुई है। श्रीनिवास कहते हैं, “दो दिनों की बारिश और बर्फबारी के बाद रविवार को मौसम साफ था, और ऐसा नहीं था कि बहुत बारिश हुई थी। हमने कभी इसका अनुमान नहीं लगाया। हमने लोगों को पुकारते सुना, हमें बाहर निकलने के लिए कहा गया। हमने बाहर भागने की कोशिश की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पानी और मलबा अंदर आ गया था और हम सभी 12 लोग फँस गए थे। हमने लोहे की सलाखों को पकड़ कर खुद को बचाने की कोशिश की।”

टनल में फँसे इन लोगों की मानें तो सुरंग 3 मीटर चौड़ी और 6 मीटर ऊँची थी। जहाँ पानी भरने लगा था और कुछ ही देर में उनके नीचे कम से कम 2 मीटर ऊँचा बर्फ का ठंडा पानी था। उन सबके पास लटके रहने के सिवा कुछ और चारा नहीं था। कुछ समय बाद उन्होंने महसूस किया कि जल स्तर स्थिर हो गया और सुरंग के मुहाने की ओर बढ़ने लगा। ठंडे पानी ने उनके जूतों को पानी से भर दिया था और इतने लंबे समय तक लोहे की सलाखों पर लटके रहने के बाद सबके हाथ सख्त हो गए थे। 

बसंत बताते हैं कि वह तपोवन में तीन साल से काम कर रहे हैं। उस दिन भी उन्होंने 8 बजे से काम शुरू किया और साढ़े 10 बजे उन्हें एक भयानक आवाज सुनाई दी। उन्हें भागने का मौका भी नहीं मिला। पानी और मलबा तेजी से आया। बस एक उम्मीद थी वो था मोबाइल नेटवर्क। जैसे ही उन्होंने अपने सुपरवाइजर को फोन किया। करीब 2-3 घंटे में उन्हें बचा लिया गया। राहतकर्मी खुदाई वाली मशीन के साथ आए और रस्सियों के उपयोग से सबको बाहर निकाल लिया गया।

डॉ ज्योति खंबारा के अनुसार, “12 में से किसी को भी ज्यादा चोटें नहीं आई हैं। लेकिन हाँ, शरीर पर कुछ खरोंच के निशान थे और सबके शरीर बहुत ठंडे थे। उन्हें कोई ज्यादा चोट नहीं आई। मगर वे एक बहुत भारी मानसिक तनाव से गुजरे हैं। हम जो कर सकते हैं, वो कर रहे हैं।”

वे मुझे घूरते रहे… फिर ब्रेस्ट व बट सर्जरी की दी सलाह: प्रियंका चोपड़ा ने ‘अनफिनिश्ड’ में किए कई बड़े खुलासे

सामाजिक मुद्दों पर अपने दो तरह के रवैये के कारण विवादों में रहने वाली बॉलीवुड-हॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने 20 साल के फिल्मी करियर में कई उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। सन् 2000 में विश्व सुंदरी का ख़िताब पाने के बाद वह आगे बढ़ती रहीं और अब एक ऐसा समय आया कि उन्होंने अपनी पूरी जर्नी को किताब का रूप दिया है। इस किताब का नाम ‘अनफिनिश्ड’ है जो आज रिलीज होने वाली है।

द इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट में इस किताब के हवाले से प्रियंका से जुड़े एक वाकए का जिक्र किया गया है। जहाँ उन्होंने बताया है कि कैसे एक फिल्ममेकर ने शुरूआती दौर में उन्हें प्लास्टिक सर्जरी करवाने की सलाह दी थी। 

रिपोर्ट के अनुसार, किताब में प्रियंका ने लिखा,

“जब मैं एक प्रोड्यूसर/डायरेक्टर से मिली तो कुछ बातचीत के बाद उन्होंने मुझे खड़े होकर घूमने के लिए कहा मैंने ऐसा ही किया। वह काफी समय तक मुझे घूरते रहे और मुझे देखते ही रहे फिर उन्होंने कहा कि मुझे ब्रेस्ट सर्जरी करवानी चाहिए। साथ ही अपने जबड़े और बट्ट का आकार भी ठीक करवाना चाहिए। अगर मैं अभिनेत्री बनना चाहती हूँ तो मुझे ये सब ठीक करवाना चाहिए। उन्होंने मुझसे कहा कि वो लॉस एंजिलिस में एक डॉक्टर को जानते हैं जिनके पास वो मुझे भेज देंगे। इस घटना के बाद मैं खुद को कमतर आँकने लगी थी।”

किताब में प्रियंका के इस वर्जन पर जब द एशियन स्टाइल मैग्जीन ने सवाल किया तो उन्होंने इसके जवाब में कहा, “मैंने किसी चीज़ की किसी को सफाई देने के लिए किताब नहीं लिखी है। मैं अपने जीवन में ऐसी जगह थी जहाँ मैं बैठी और मैंने मील के पत्थर दर्ज किए। ये सब सिर्फ़ इसलिए हुआ क्योंकि मैंने चीजों को दिल में दबा कर रखा और मैं उनसे प्रभावित नहीं हुई।”

वह कहती हैं, “मैं एंटरटेनमेंट बिजनेस की एक महिला हूँ जो कि एक पित्रसत्तात्मक जगह है, मुझे यहाँ बहुत टफ होना पड़ा, जब मनोरंजन करने वाले अपनी कमियाँ दिखाते हैं तो लोगों को उन्हें नींचा दिखाने में मज़ा आता है। मैंने अपना काम किया और उन बातों के बारे में बात नहीं की जिनसे मैं उबर चुकी हूँ।”

प्रियंका कहती हैं, “मैं बहुत बड़ी हो चुकी हूँ और आत्मविश्वासी हूँ। इसलिए अतीत की बातों पर चर्चा करना आसान हो जाता है। यह किताब किसी प्रकार की सफाई पेश नहीं कर रही। यह मेरी आखों से मेरे जीवन की कहानी है।”

‘कपड़े धोता हूँ… झुग्गी में रहता हूँ’: दिल्ली से BJP का टिकट मिलने पर सियाराम ने कहा – ‘अंतिम वर्ग के व्यक्ति की पार्टी’

दिल्ली नगर निगम के 5 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस ने अपने कैंडिडेट्स के नामों की घोषणा कर दी है। ऐसे में भाजपा की ओर से नामांकन के आखिरी दिन मैदान में एक ऐसे उम्मीदवार को उतारने का ऐलान हुआ, जिनका बैकग्राउंड सुन कर शायद आप भी आश्चर्यचकित रह जाएँ। ये नाम है- कल्याणपुरी से सियाराम कनौजिया का। 

सियाराम के अनुसार वह झुग्गी में रहते हैं और कपड़े धोने का काम करते हैं। उनका मानना है कि भाजपा ही एक मात्र ऐसी पार्टी जो समाज के अंतिम वर्ग के व्यक्ति को मुख्यधारा में लाने का काम करती है। कल नामांकन के आखिरी दिन आवेदन करने जा रहे सियाराम का एक अलग अंदाज देखने को मिला। वह पूरी तरह से भगवा में रमे अपनी विक्की पर बैठ, नॉमिनेशन दाखिल करवाने गए।

अपने अलग अंदाज पर मीडिया से बात करते हुए कनौजिया ने कहा, “मैं धोबी समाज से हूँ बेटा। भारतीय जनता पार्टी ही ऐसी पार्टी है, जो सारे समाज को सम्मान देती है। मैं 30 साल से भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता हूँ। मैं झुग्गी में रहता हूँ। कपड़ा धोने का काम करता हूँ। धुलाई प्रेस का काम है। धोबी घाट पर हमारी झुग्गी है। कपड़ा धोने-सुखाने के बाद समाज की सेवा करता हूँ। हमें बीजेपी ने जो सम्मान दिया है, मैं अपने शीर्ष नेतृत्व का बाराम्बार प्रणाम करता हूँ। उनका धन्यवाद करता हूँ कि जो पंडित दीन दयाल उपाध्याय की सोच थी कि अंतिम पंक्ति में बैठे हुए व्यक्ति को सम्मान मिलेगा। आज वो सम्मान मिला है हमें। इसलिए हम विक्की से आए हैं। ”

सियाराम कनौजिया अपनी विक्की को हवाई जहाज बताते हैं। साथ ही अपनी जीत के लिए आश्वस्त होकर कहते हैं कि जीत उन्हें सौ प्रतिशत जीत मिलेगी। केजरीवाल ने जो 13000 करोड़ रुपए सफाई कर्मचारियों के नहीं दिए, उस पर बात करते हुए सियाराम ने कहा कि यदि वह जीते तो उनकी (AAP) ईंट से ईंट बजा देंगे। वहीं कॉन्ग्रेस पर बात करते हुए कहते हैं, “कॉन्ग्रेस तो कुछ है ही नहीं। वह चद्दर तान कर सो गई है।”

गौरतलब है कि कल्याणपुरी वार्ड से भाजपा ने जहाँ सियाराम कनौजिया को अपना प्रत्याशी चुना है। वहीं आम आदमी पार्टी ने इस सीट पर धीरेंद्र उर्फ बंटी गौतम को उतारा है। वह कोंडली विधानसभा क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ता रह चुके हैं। कॉन्ग्रेस ने इस वार्ड से धर्मपाल मौर्या को उतारा है।

मालूम हो कि दिल्ली की जिन सीटों पर उप-चुनाव होना है, उनमें से 2 उत्तरी दिल्ली नगर निगम और 3 पूर्वी दिल्ली नगर निगम की सीटें हैं। इन सीटों के लिए 28 फरवरी को मतदान होगा और 3 मार्च वोटों की गिनती की जाएगी। नॉमिनेशन को फाइल करने की आखिरी तारीख 8 फरवरी थी। वापस लेेने के लिए अंतिम तिथि 13 फरवरी तय की गई है।

YouTube पर भी बेरोजगार हो जाएँगे अभिसार शर्मा: वेबसाइट के ऑफिस और मालिक के घर ED का छापा

‘न्यूज़क्लिक’ वेबसाइट के मालिकों और शेयर होल्डर्स के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रेड मारी है। धान को गेहूँ बताकर चर्चा में आने वाले पत्रकार से ट्विटर ट्रोल बने अभिसार शर्मा (Abhisar Sharma) ने यह जानकारी दी। रिपोर्ट कम और अपना दुखड़ा सुनाते हुए उन्होंने यह भी लिखा कि ‘न्यूज़क्लिक’ ही वो वेबसाइट है, जिस पर वो अपने वीडियो पोस्ट करते हैं।

ये सूचना खुद गालीबाज अभिसार शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट से दी है। रेड की सूचना देते हुए अभिसार शर्मा ने लिखा है, “इसी चैनल (न्यूज़क्लिक) पर मैं अपने शो ‘बोल के लब आज़ाद हैं तेरे’ और ‘न्यूज़ चक्र’ करता हूँ।

गौरतलब है कि यूट्यूब पर वीडियो बनाने और ट्विटर पर लोगों को गाली देने से पहले अभिसार शर्मा समाचार चैनल ABP न्यूज पर एंकरिंग करते थे। बताया जा रहा है कि ईडी कुछ संदिग्ध कंपनियों से विदेशी धन लेने और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यूज़ क्लिक वेबसाइट के डायरेक्टर्स और उनके कार्यालयों पर छापे मार रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ये छापेमारी न्यूज़ क्लिक के मालिक प्रबीर पुरकायस्थ और संपादक प्रांजल के घर पर की जा रही हैं। ‘द हिंदू’ के अनुसार, यह छापेमारी दिल्ली स्थित कार्यालय पर की जा रही है। अभिसार शर्मा के इस ट्वीट पर लोग अपनी-अपनी तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ ट्विटर यूजर्स का कहना है कि क्या इस रेड के बाद ये (अभिसार) अब यूट्यूब पर भी बेरोजगार हो जाएगा?

इस रेड के बाद ट्विटर पर अब वामपंथी मीडिया गिरोह भी सक्रीय हो चुका है और इस रेड को लेकर सीधा सरकार पर ही हमला बोल दिया है। रोहिणी सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया रखते हुए लिखा है, “यह सरकार अब भी इसका ध्यान भी नहीं रखती है कि प्रतिशोध की भावना इतनी स्पष्ट ना दिखाई दे।”

जला कर मारने आया था प्रेमिका को, जल कर खुद ही मर गया: शादी न होने से था खफा

मुंबई में प्रेमिका की हत्या की कोशिश में एक कथित प्रेमी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। खबर है कि महानगर के एक इलाके में एक आशिक अपनी प्रेमिका को जिंदा जलाने के लिए उसके घर गया था। लेकिन प्रेमिका ने उसे मौका-ए-वारदात के दौरान इतनी कस कर पकड़ा कि वह खुद ही आग की लपटों में जल कर मर गया। वहीं प्रेमिका की मौत की खबरें भी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कही जा रही हैं।

डीसीपी महेश रेड्डी ने बताया कि पूरी घटना 6 फरवरी 2021 को जोगेश्वरी ईस्ट के गाँधी नगर इलाके में लड़की के आवास की है। उससे पहले कथिततौर पर लड़की के घरवालों ने बेटी की शादी विजय खाम्बे नाम के युवक से करवाने से मना की थी। इसी के बाद वह पीकर आया और लड़की को तंग करने लगा। लड़की ने धीरे-धीरे उससे दूरी बनाई। मगर लगातार उसकी ऐसी हरकतों से वह तंग आ गई।

6 फरवरी को विजय ने लड़की के हालचाल के बहाने उससे संपर्क किया और उसके घर उस समय जा पहुँचा जब वहाँ कोई नहीं था। अपने साथ वह एक बोतल पेट्रोल भी ले गया। बातचीत में विवाद बढ़ा तो उसने सारा पेट्रोल लड़की के ऊपर डाला और उसमें आग लगा दी।

पूरे शरीर में आग लगते ही लड़की ने विजय को इतनी कस कर पकड़ा कि वह खुद ही आग की लपटों में फँस गया। इसके बाद दोनों घर से बाहर निकल गए। तभी पड़ोसियों ने दोनों को जलते देखा। उन्होंने किसी तरह आग को बुझाया और दोनों को ट्रॉमा सेंटर अस्पताल ले गए। वहाँ से उन्हें जेजे अस्पताल भेजा गया।

हॉस्पिटल में इलाज के दौरान विजय कुछ ही देर में मृत घोषित कर दिया गया। जबकि लड़की की मौत की खबर बाद में आई। मुंबई पुलिस ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया है। बाकी आगे की जाँच भी अभी की जा रही है।

बता दें कि 30 साल का विजय खाम्बे और नीलिमा के बीच 4 साल से प्रेम संबंध था। दोनों के बीच घर के लोगों के विरोध के चलते 4 महीने से संबंध खराब थे। लड़की घर का काम करती थी और लड़का मजदूरी करता था। मेघवाड़ी पुलिस लड़की के भाई की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर जाँच कर रही है।

ग्लेशियर टूटने से नहीं आई चमोली आपदा… सैटेलाइट डेटा से ISRO का खुलासा: अब तक 31 शव बरामद, रेस्क्यू जारी

उत्तराखंड के चमोली में पानी के तेज़ बहाव के बाद विद्युत् परियोजनाओं के बाँध टूटे और भयंकर तबाही आई। हालाँकि, सरकार ने त्वरित रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, जो अब भी जारी है। अब तक 31 लाशें मिल चुकी हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्य की तरफ से इस हादसे के बाद चल रहे राहत कार्य हेतु 11 करोड़ रुपए डोनेट किए हैं। अभी तक दूसरे टनल को खोलने में सफलता नहीं मिली है।

दूसरे रास्ते से उसमें घुसने की कोशिश की जा रही है। गायब लोगों को ढूँढने का प्रयास जारी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन किया था। उन्होंने पूरे हालात की जानकारी ली। DRDO की 2 टीमें ग्लेशियरों का अध्ययन कर इस तबाही का मूल कारण पता करने में जुटी है। वहीं दूसरे टनल में 35 लोग फँसे हैं, जिनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास जारी है। दूसरा रास्ता ड्रिल किया जा रहा है।

तपोवन टनल में ITBP, SDRF और NDRF की संयुक्त टीम पानी का स्तर जाँचने के लिए घुसी है। पश्चिम बंगाल स्थित मिदनापुर के पुरुलिया के 5 मजदूर बह गए, जिनकी मौत हो गई। लापता लोगों की कुल संख्या 200 है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खुद रात को चमोली में ही कैम्प किया और आज भी वो वहाँ स्थिति का जायजा लेते रहे। उत्तर प्रदेश सरकार के 3 मंत्रियों को उत्तराखंड भेजा जा रहा है।

इस आपदा में गायब लोगों की सूची जारी कर दी गई है। रेस्क्यू टीमों के साथ मलबे में कई परिजन भी अपनों को ढूँढ रहे हैं। बचाव दल रस्सी और आवश्यक पैकेज के माध्यम से मलारी घाटी क्षेत्र तक पहुँचने में सफल हो गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब आसानी से वहाँ राशन भेजा जा सकता है। इससे पहले हेलीकॉप्टर के माध्यम से केवल सीमित स्टॉक की आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन अब कोई समस्या नहीं आएगी।

ISRO के वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट डेटा के आधार पर दावा किया है कि हिमस्खलन के कारण ये आपदा आई। बर्फ की एक चोटी के खिसकने के बाद लाखों मीट्रिक टन बर्फ और पहाड़ी का हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया, जिसने इस आपदा को जन्म दिया। हाल ही में यहाँ से गुजरे सैटेलाइट की जानकारियों के आधार पर ये निष्कर्ष निकला। ये भी बताया गया है कि वहाँ कोई ग्लेशियर था ही नहीं, बर्फ की चोटी थी।

‘शादी इंशाअल्लाह होगी’: एजाज खान और पवित्रा पुनिया एक दूसरे को कर रहे डेट

‘बिग बॉस-14’ से सुर्खियाँ बटोरने वाले एजाज खान और पवित्रा पुनिया ने इस बात की पुष्टि की है कि वो दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं और रिलेशनशिप में हैं। पवित्रा ने कहा कि प्यार एक खूबसूरत एहसास है – इसका उन्हें शुरू से यकीन था। उन्होंने कहा कि बिग बॉस में दोनों के बीच लड़ाइयाँ होती थीं और अब एक-दूसरे के लिए फीलिंग्स हैं। उन्होंने बताया कि बाहर निकल कर दोनों ने एक-दूसरे से प्यार का इजहार किया।

वहीं एजाज खान ने कहा कि बिग बॉस के घर के अंदर वो खासे संशय में थे क्योंकि वहाँ सभी हरकतें और क्रियाकलाप खेल के हिसाब से होते हैं, पर पवित्रा की तरफ से जो भी होता था, वो वास्तविक था। उन्होंने कहा कि अब बाहर निकल कर वो दोनों के बीच झगड़े के क्लिप्स देखते हैं तो कहते हैं कि उन्हें पवित्रा पर गुस्सा क्यों नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि पवित्रा के लिए उनके मन में शुरू से फीलिंग्स थी और वो उन्हें अपने जीवन पर ‘टॉर्चर’ करने के लिए तैयार हैं।

एजाज ने कहा कि अभी शादी के लिए बहुत पापड़ बेलने हैं। उन्होंने कहा, “शादी इंशाअल्लाह होगी और बहुत सही वक़्त पर होगी। हम दोनों इस मामले में इंतजार कर रहे हैं और सब कुछ सही रहा तो इसी साल शादी भी हो जाएगी। अभी हमारे घर वाले बहुत फैले हुए हैं। पहले उन्हें समेट लें, फिर इस बारे में सोचेंगे।” वहीं पवित्रा ने कहा कि भविष्य के बारे में कोई नहीं बता सकता, लेकिन चीजें जल्द ही साकार होंगी।

‘एंटरटेनमेंट टाइम्स’ को दिए गए इंटरव्यू में एजाज ने बताया कि दोनों के भाई-बहन एक-दूसरे से मिल चुके हैं और अब माता-पिता व उनके जनरेशन के लोगों का मिलना बाकी है। पवित्रा ने कहा कि एक सच्चे रिलेशनशिप में लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं। एजाज ने कहा कि पहले बिग बॉस में झूठ के मुद्दे पर बहस होती थी, अब वास्तविक चीजों पर होती है। एजाज ने कहा कि जब भी झगड़ा होता है, वो सॉरी बोलते हैं।

आतंकी हमला, 8 पर्यटकों की हत्या… और राज्य सभा में रोने लगे PM मोदी: किया गुलाम नबी आजाद को भी याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (फ़रवरी 9, 2021) को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आज़ाद की विदाई में सम्बोधन दिया, जिनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। उन्होंने आज़ाद सहित कार्यकाल पूरा कर रहे चार सांसदों को सदन की शोभा बढ़ाने वाला, सदन में जीवंतता लाने वाला और सदन के माध्यम से जनसेवा में रत नेता बताया। इनमें शमशेर सिंह, मीर मोहम्मद और नजीर अहमद का भी कार्यकाल पूरा हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने चारों को अपने-अपने अनुभव और ज्ञान का सदन को लाभ देने व क्षेत्र की समस्याओं को रख कर देश के प्रति योगदान करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मीर मोहम्मद और नजीर अहमद पर लोगों का बहुत कम ध्यान गया होगा, लेकिन सदन का कोई भी ऐसा सत्र नहीं है, जब इनके साथ अलग-अलग विषयों पर उन्हें मिल-बैठ कर चर्चा करने का अवसर न मिला हो। कश्मीर की बारीकियों के मुद्दे पर अक्सर चर्चा होती थी।

उन्होंने कहा कि ये दोनों कभी-कभी परिवार के साथ भी आते थे। पीएम मोदी ने कहा कि इन दोनों ने उन्हें कई जानकारियाँ दी, जिससे उनका उन सबके साथ व्यक्तिगत रिश्ते बन गए थे। उन्होंने कहा कि इन दोनों की प्रतिबद्धता और क्षमता देश व जम्मू-कश्मीर के काम आएगी। शमशेर सिंह के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें याद भी नहीं है कि कई वर्षों तक वो उनके साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने शमशेर को अपना पुराना साथी बताया।

उन्होंने बताया कि दोनों पुराने दिनों में स्कूटर पर साथ घूमते थे और आपातकाल के दौरान साथ ही जेल गए थे। पीएम मोदी ने कहा कि सदन में उनकी उपस्थिति 96% है, जो बताती है कि मृदुभाषी और सरल शमशेर सिंह ने जनता के दिए दायित्व को शत प्रतिशत निभाया। उन्होंने विश्वास जताया कि जम्मू कश्मीर के ये चारों अपने जीवन के सबसे उत्तम कार्यकाल में रहे हैं, क्योंकि वो एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव के साक्षी बने हैं।

उन्होंने चिंता जताई कि गुलाम नबी आज़ाद के बाद इस पद को जो भी नेता संभालेंगे, उन्हें उनसे मैच करने में काफी दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि आज़ाद अपने दल के साथ-साथ अपने देश और सदन की भी चिंता करते थे। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपना दबदबा कायम रखने का मोह कइयों को होता है, लेकिन आज़ाद भी शरद पवार की तरह देश को प्राथमिकता देने वाले नेता हैं।

उन्होंने कहा कि गुलाम नबी आज़ाद ने हर काम को बखूबी निभाया है और कोरोना काल में जब वो नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे, तभी आज़ाद ने उन्हें फोन कर के सर्वदलीय बैठक बुलाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उनकी बात मान कर बैठक हुई भी। पीएम मोदी ने कहा कि 28 वर्ष का कार्यकाल बहुत बड़ा होता है, जिसमें आज़ाद को सत्ता और विपक्ष, दोनों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा:

“ये बहुत पहले की बात है। मैं तब चुनावी राजनीति में नहीं था, संगठन का कार्य करता था। शायद अटल जी की सरकार रही होगी। तब मैं संसद में किसी कार्य से आया था तो गुलाम नबी आज़ाद के साथ खूब बातें हुई। पत्रकारों की नजर पड़ी तो वो सोचने लगे कि इन दोनों का मेल कैसे हो सकता है। पत्रकारों के पूछने पर आज़ाद ने जवाब दिया कि अख़बारों, टीवी और बैठकों में हमें भले ही आप लड़ते-झगड़ते देखते हो, लेकिन इस सदन की छत के नीचे हम परिवार हैं। यहाँ हम सब एक-दूसरे के सुख-दुःख बाँटते हैं।”

इस दौरान उन्होंने गुलाम नबी आज़ाद के एक शौक के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि सरकारी बँगले में रहने वालों का दिमाग अंदर रखे सोफे सेट और दीवारों तक रहता है, लेकिन आज़ाद ने ऐसा बगीचा बनाया है, जो आपको कश्मीर की घाटी की याद दिला देगा। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज़ाद को इसका गर्व है। वो नई-नई चीजें जोड़ते हैं और उनका बँगला हर साल प्रतिस्पर्धा में नंबर एक आता है।

नरेंद्र मोदी ने बताया कि जब गुलाम नबी आज़ाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे, तब वो गुजरात के सीएम हुआ करते हैं और दोनों में काफी निकटता भी थी। उन्होंने कहा कि हर घटना के समय दोनों के बीच संपर्क बना रहता था। उन्होंने एक वाकया सुनाते हुए कहा कि गुजरात के कई पर्यटक जम्मू कश्मीर जाते हैं और ऐसे ही एक पर्यटन दल पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। उसमें 8 लोगों की मौत हो गई।

प्रधानमंत्री इस आतंकी वारदात को याद कर के भावुक हो उठे और बताया कि इस घटना के बाद उन्हें सबसे पहले गुलाम नबी आज़ाद का फोन कॉल आया। बकौल पीएम मोदी, वो फोन सिर्फ सूचना देने के लिए नहीं किया गया था बल्कि उनके आँसू भी रुक नहीं रहे थे फोन पर। उस समय प्रणव मुखर्जी देश के रक्षा मंत्री हुआ करते थे। पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने मुखर्जी को फोन कर के डेड बॉडीज को वापस लाने के लिए भारतीय वायुसेना के जहाज की मदद माँगी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलाम नबी आज़ाद को राज्यसभा में दी विदाई

मुखर्जी ने उन्हें आश्वासन दिया कि व्यवस्था की जा रही है। लेकिन, रात में फिर आज़ाद का एयरपोर्ट से ही फोन आया और जैसे अपने परिवार के सदस्य की चिंता की जाती है, ठीक वैसी ही चिंता उन्हें भी थी। प्रधानमंत्री इस घटना के बारे में बताते-बताते अचानक से रो पड़े और उन्होंने ग्लास में रखा पानी पीकर फिर अपनी बात शुरू की। हालाँकि, इस दौरान सदन के सदस्यों ने मेज थपथपा कर उनका हौसला बढ़ाया।

पीएम मोदी ने आगे बताया कि पद और सत्ता जीवन में आते रहते हैं लेकिन उन्हें कैसे पचाना है, ये मायने रखता है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस घटना के दौरान जो कुछ भी हुआ, वो उनके लिए बड़ा भावुक था। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन फिर फोन कॉल आया और आज़ाद ने पूछा कि सारे डेड बॉडीज पहुँच गए? पीएम ने कहा कि एक मित्र के रूप में वो घटनाओं और अनुभवों के आधार पर सभ्य और नम्र गुलाम नबी आज़ाद का आदर करते हैं और उन्हें विश्वास है कि देश के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा उन्हें चैन से बैठे नहीं देगी।