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ई श्रीधरन BJP में होंगे शामिल, विजय यात्रा के दौरान लेंगे पार्टी की सदस्यता: केरल से चुनाव लड़ने की योजना?

मेट्रो मैन के नाम से मशहूर ई श्रीधरन भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले हैं। BJP ने दावा किया कि ई श्रीधरन 21 फरवरी को विजय यात्रा के दौरान पार्टी की सदस्यता लेंगे।

केरल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए यह बड़ी सफलता मानी जा रही है। केरल बीजेपी चीफ के सुरेंद्रन के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी 21 फरवरी से विजय यात्रा निकाल रही है।

केरल भाजपा चीफ के सुरेंद्र के अनुसार ई श्रीधरन ने खुद ही भारतीय जनता पार्टी के साथ काम करने की इच्छा जताई।

जिन थानों से जनता को शिकायतें, वहाँ के थानेदार हो सकते हैं सस्पेंड, तहसील ऑफिसरों पर भी कार्रवाई: CM योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (17 फरवरी 2021) को गोरखनाथ मंदिर के हिन्दू सेवाश्रम में जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएँ सुनीं। थानों और तहसील अधिकारियों के खिलाफ आ रही शिकायतों को लेकर मुख्यमंत्री काफी नाराज़ दिखे।

जनता दर्शन में आए लोग CM योगी से अपनी-अपनी समस्याएँ बता रहे थे। ये समस्याएँ जनता दरबार में जन सुनवाई के दौरान बताई गई समस्याओं के समाधान नहीं होने से संबंधित थे। यानी अधिकारियों तक जनता जब अपनी बात/समस्याएँ रखते हैं तो उसके समाधान पर तत्परता नहीं दिखाई जाती है। तभी परेशान जनता को मुख्यमंत्री से गुहार लगानी पड़ती है।

स्पष्ट निर्देश दिया गया कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले तहसील के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए। CM योगी ने बताया कि यदि लोगों की शिकायतों का समय से समाधान किया गया होता तो उन्हें यहाँ आने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।

जिलाधिकारी के विजयेंद्र पांडियन को CM योगी ने निर्देश दिया कि जिन थानों के खिलाफ सबसे ज़्यादा शिकायतें आ रही हैं, उनके थानेदारों को निलंबित किया जाए। साथ ही यह भी निर्देश रहा कि जिन तहसीलों से ज़्यादा शिकायतें मिल रही हैं, उन पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। 

हिन्दू सेवाश्रम में जनता दर्शन के दौरान लोगों की तमाम शिकायतें सुन कर योगी आदित्यनाथ काफी नाराज़ नज़र आए। वहाँ लगभग 500 फ़रियादी मौजूद थे और उन्होंने एक-एक व्यक्ति से उनकी समस्या पूछी।

आम जन की समस्याओं में लगभग आधे से अधिक मामले थाने और तहसीलों से जुड़े हुए थे। मुख्यमंत्री योगी ने इसके बाद कहा कि हर थाने में जनता की शिकायतें गम्भीरता के साथ सुनी जाएँ। लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाए, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि शिकायत करने वाला कार्रवाई से संतुष्ट हो। 

दैनिक जागरण के गोरखपुर संस्करण में प्रकाशित खबर

CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लेखपाल, तहसीलदार और नायब तहसीलदार लोगों की शिकायतें सुनें। जन सुनवाई का समय तय करके जनता की समस्या का हल निकाला जाए।

लगभग सारे आवेदन लिए गए और सख्त निर्देश के साथ अधिकारियों को सौंप दिए गए। इसके बाद थानों और तहसीलों से जुड़े इन मामलों के जल्द से जल्द निस्तारण का आदेश दिया गया।

दरअसल बुधवार की सुबह 7 बजे से ही गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित हिन्दू सेवाश्रम में फ़रियादी जुटने लगे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहुँचते ही सभी लोगों ने उनका अभिवादन किया। इस दौरान एक और ऐसी घटना हुई, जिसने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। बड़हलगंज की रहने वाली एक छोटे कद की महिला ने मुख्यमंत्री को रोक लिया।

महिला ने कहा कि उन्होंने अपनी परेशानी बताने के लिए उन्हें रोका है। मुख्यमंत्री ने भी रुक कर उस महिला की पूरी समस्या सुनी। महिला ने अपनी समस्या बताते हुए एक आवास की फ़रियाद की। नतीजतन मुख्यमंत्री ने डीएम को आदेश दिया कि महिला को आवास प्रदान कराया जाए। महिला इस बात से काफी संतुष्ट नज़र आई और खुश होकर वापस लौटी।   

बंगाल: माँ सरस्वती की मूर्ति तोड़ने वाला जलाल गिरफ्तार, सड़कों पर हिन्दुओं ने की नारेबाजी, भारी पुलिस बल तैनात

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में जलाल नाम के युवक को देवी सरस्वती की एक मूर्ति तोड़ने के आरोप में पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मूर्ति तोड़ने की यह घटना राज्य के हावड़ा जिले के डोमजूर शहर की बताई गई है।

मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को जब पूरा देश हिन्दुओं की आराध्य सरस्वती की पूजा का उत्सव बसंत पंचमी मना रहा था, उसके ठीक एक दिन बाद ही जलाल ने सरस्वती की मूर्ति को खंडित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में जलाल नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और केस की छानबीन की जा रही है।

दरअसल, हावड़ा शहर के कटलिया बाजार में सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जलाल नाम के एक व्यक्ति को सरस्वती की मूर्ति को तोड़ते हुए देखा गया था। देवी सरस्वती की मूर्ति तोड़े जाने की खबर फैलते ही हावड़ा के कटलिया झोतला इलाके में हिंदूवादी कार्यकर्त्ता सड़कों पर जमा हो गए और घटना के विरोध में नारेबाजी करने लगे।

स्थानीय हिंदुओं ने सड़क को अवरुद्ध करते हुए घटना का विरोध किया। उन्होंने माँग की कि गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके बाद पुलिस ने बताया कि मूर्ति तोड़ने के आरोप में जलाल को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले में आगे जाँच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फ़ौरन वहाँ पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए।

बंगाल भाजपा के ही कार्यकर्ता अक्षय सिंह ने अपने ट्विटर अकाउंट पर कुछ तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा है, “ममता के बंगाल में हिन्दुओं के त्योहारों मनाने की इजाजत नहीं है।”

गौरतलब है कि बंगाल में हिंदूवादी कार्यकर्ताओं से लेकर हिन्दू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार देर रात भी भाजपा नेताओं पर पत्थरबाजी और हमला किया गया, जिसमें शिबाजी रॉय को गंभीर चोट आई हैं और उन्हें अस्पताल भारती किया गया। भाजपा ने इसके पीछे टीएमसी के गुंडों का हाथ बताया है।

‘समुद्री किसानों’ से झूठ बोला राहुल गाँधी ने, सिर्फ 15 दिनों में गायब कर दिया पूरा मंत्रालय – लोकसभा में सबूत मौजूद

लोकसभा सांसद राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के नेता हैं। कल (17 फरवरी 2021) उन्होंने पुडुचेरी में ‘समुद्री किसानों’ के लिए दिल खोल कर रख दिया। ‘समुद्री किसानों’ के लिए केंद्र में मोदी सरकार के यहाँ मंत्रालय नहीं होने पर उन्होंने अपनी तकलीफ भी बताई।

अब चलते हैं 2 फरवरी को। इसी साल के 2 फरवरी को – सिर्फ 15 दिन पहले। लोकसभा में एक ‘घटना’ घटती है। राहुल गाँधी एक सवाल पूछते हैं। देश की चिंता में डूबे ये कॉन्ग्रेसी नेता विदेश दौरों से फुरसत निकाल लोकसभा में सवाल पूछते हैं – तो यह घटना ही है।

घटना से आगे बढ़ते हुए सवाल पर नजर डालिए।

लोकसभा में राहुल गाँधी द्वारा पूछा गया सवाल

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री से यह सवाल पूछा गया था। जैसे हर सांसद को जवाब मिलता है, राहुल गाँधी को भी जवाब दिया गया। जवाब प्रताप चंद्र सांरगी ने दिया। प्रताप चंद्र सांरगी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। लेकिन राहुल गाँधी भूल गए। शायद इसलिए क्योंकि सारंगी किसी ‘परिवार’ से नहीं आते, शायद इसलिए क्योंकि वो मंत्री के जैसे दिखते नहीं!

जवाब सिर्फ राहुल गाँधी ही दे पाएँगे। या प्रियंका गाँधी वाड्रा? प्रियंका वो हैं, जो लोगों के नाम भूल जाती हैं। स्मृति ईरानी तक के लिए उन्होंने कहा था – कौन? राहुल गाँधी में भूलने की बीमारी प्रियंका वाड्रा से ही लगी होगी, इसकी संभावना अधिक है।

अब पुनः लौटते हैं 17 फरवरी 2021 में। राहुल गाँधी की पुडुचेरी घटना पर। ऑपइंडिया ने रिपोर्ट की। सिंपल रिपोर्ट। लेकिन राहुल गाँधी के झूठ पर शक था। इसलिए प्रश्नवाचक चिन्ह के साथ शीर्षक दिया गया – “मछुआरों को मूर्ख समझते हैं राहुल गाँधी? मंत्रालय के नाम पर पुडुचेरी में क्यों बोला झूठ… जबकि मौजूद है मत्स्य विभाग”

जनता का प्रतिनिधि जनता से ही झूठ बोले, वो भी गाँधी परिवार का युवराज… मन यह मान नहीं रहा था। लेकिन समीर नाम के एक लड़के ने मन को झकझोर दिया। सबूत ले आया। सबूत कि राहुल गाँधी शर्तिया तौर पर झूठ बोल रहे थे। समीर के ट्वीट के बाद ट्विटर पर राहुल गाँधी का झूठ सार्वजनिक हो गया, फैल गया – मतलब वायरल हो गया।

जनता के सामने जाकर झूठ बोलने की सजा क्या है? कानून में कोई धारा है या नहीं? इस विषय पर जनता के प्रतिनिधि ही लोकसभा-राज्यसभा में वाद-विवाद करें। या सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका दायर हो और वकीलों के बीच बहस हो। लेकिन तय यह है कि झूठ बोलने की सजा जनता देती है, नाम भूलने की सजा जनता देती है – अमेठी हार के बाद प्रियंका गाँधी अपने भाई को यह बता सकती हैं कि वायनाड सदा के लिए नहीं रहने वाला!

महाराष्ट्र का दिघी पोर्ट अडानी के पास: ₹10000 करोड़ का निवेश कर गेटवे तैयार करेगी कंपनी

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने सोमवार (फरवरी 15 , 2021) को 705 करोड़ रुपए में दिवालिया (बैंकरप्ट) प्रक्रिया से गुजर चुकी Dighi Port Limited (DPL- दिघी पोर्ट लिमिटेड) का अधिग्रहण कर लिया है। दिघी पोर्ट को अप्रैल में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा दिवालिया घोषित किया गया था। यह महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के राजपुरी क्रीक के किनारे स्थित है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, APSEZ ने बताया कि वह इसे JNPT (Jawaharlal Nehru Port Trust) के वैकल्पिक गेटवे के तौर पर विकसित करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश करेगी। JNPT भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट है और देश के 12 बड़े बंदरगाहों में से एक भी।

दिघी पोर्ट के 100% स्टेक अडानी पोर्ट्स के पास होने के बाद कंपनी (APSEZ) के सीईओ करन अडानी ने कहा कि दिघी पोर्ट लिमिटेड (DPL) के सफल अधिग्रहण ने अडानी पोर्ट के बंदरगाहों को बनाने के लक्ष्य में एक अन्य कीर्तिमान जोड़ा है, जिससे भारत के पूरे आर्थिक क्षेत्र में सर्विस कवरेज बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कंपनी के ग्रोथ पर फोकस, अनुभव और अधिग्रहण करने की निपुणता के साथ, उन्हें DPL को शेयरधारकों के लिए बेहतर वैल्यू वाला बनाने का विश्वास है।

इस अधिग्रहण के बाद उद्योगपति गौतम अडानी के नेतृत्व वाला APSEZ, महाराष्ट्र में ग्राहकों को अपनी सेवा दे सकेगा, जिसके अंतर्गत बड़े औद्योगिक क्षेत्र, मुंबई और पुणे क्षेत्रों का विकास शामिल है। कंपनी मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और मरम्मत करेगी और ड्राई, कंटेनर और लिक्विड कार्गो के लिए सुविधाओं के विकास में निवेश करेगी।

दिघी पोर्ट के विकास से विभिन्न उद्योगों जैसे- उपभोक्ता उपकरण, धातु, ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, और रसायन व्यवसाय महाराष्ट्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और महाराष्ट्र में औद्योगिक विकास को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। दिघी पोर्ट को मूल रूप से मुंबई के उद्योगपति विजय कलंतरी द्वारा विकसित किया गया था।

रेजोल्यूशन प्लान की शर्तों के अनुसार, राज्य बंदरगाह नियामक ‘महाराष्ट्र मेरिटाइम बोर्ड’ (MMB) और APSEZ से कंसेशन राइट्स के ट्रांसफर को भी मंजूरी मिल गई है, जिसने फाइनेंशियल क्रेडिटर्स, MMB के बकाया और दूसरे लागत और क्लेम का सेटलमेंट कर दिया है।

बंगाल में पत्थरबाजी: शुवेंदू, शिबाजी, शंकुदेव तीनों BJP नेता घायल, एक की हालत गंभीर – TMC के गुंडों पर आरोप

कोलकाता के फूलबागान में भाजपा नेता शुवेंदू अधिकारी, शंकदेब पंडा, शिवाजी सिंहा पर कुछ लोगों द्वारा बुधवार (फरवरी 17, 2021) देर रात हमला और पथराव किया गया। इसमें भाजपा नॉर्थ कोलकाता के जिलाध्यक्ष शिबाजी सिंह रॉय गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। शुवेंदु अधिकारी और शंकदेब पंडा को भी चोट आई हैं।

ट्विटर पर पायल मेहता ने घायलों का एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि भाजपा नेताओं पर यह हमला टीएमसी के गुंडों द्वारा किया गया।

वहीं, टीएमसी छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले शुवेंदू अधिकारी ने भी इस हमले का आरोप सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाते हुए कहा है कि यह हमला बुधवार की मेगा पब्लिक रैली के बाद किया गया।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि ममता बनर्जी बंगाल के लिए एक आपदा हैं और वहाँ लॉ एंड ऑर्डर जैसी कोई चीज है ही नहीं।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता बाबू मास्टर पर भी हमला हुआ था। बाबू मास्टर की गाड़ी पर भी बम से हमला किया गया था। 10-12 उपद्रवियों ने उनकी गाड़ी घेरकर गोलीबारी की थी। उस समय भाजपा नेता बाबू मास्टर बशीरहाट से कोलकाता जा रहे थे। इस हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए थे और उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

चीन में फर्जी कोरोना वैक्सीन का भंडाफोड़, गिरफ्तार कोंग ने नमक पानी का डोज बनाकर कमाए करोड़ों

दुनिया भर को जानलेवा कोरोना वायरस महामारी की ‘सौगात’ देने वाले चीन ने अब इसकी वैक्सीन को लेकर गड़बड़ घोटाला किया है। चीन में नकली कोविड वैक्सीन के धंधे का भंडा-फोड़ हुआ है। आरोप है कि कोंग नाम के शख्स ने सलाइन और मिनरल वाटर के मिश्रण को मिलाकर 58000 डोज बनाई और इसे एंटी-कोविड वैक्सीन बताकर टुकड़ों में अस्पताल सहित कई इलाकों में सप्लाई किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने फेक वैक्सीन मामले में कोंग नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। जो कि फर्जी कोविड वैक्सीन के धंधे का सरगना है। पूछताछ में पता चला कि कोरोना काल के दौरान आरोपित ने वैक्सीन की आड़ में करोड़ो की मोटी कमाई की है।

डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे अवैध धंधे से कोंग के गैंग ने करीब 20 करोड़ 17 लाख रुपए कमा लिया था। नकली वैक्सीन घोटाले में अब तक अधिकारियों ने 70 लोगों को गिरफ्तार किया है। पिछले साल ही उजागर हुए इस फेक वैक्सीन मामले में कुल 21 केस दर्ज किए गए है। चीन की राजधानी बीजिंग समेत कई प्रांतों की पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर छापा मारते हुए संदिग्ध आरोपितों को हिरासत में लिया है।

पुलिस को जाँच में पता चला कि पिछले साल से ये लोग नकली वैक्सीन बेचने में लगे हुए थे। बाजार में नमक के पानी से भरे इंजेक्शन बेचकर इन्होंने मोटा पैसा कमाया है। कोरोना वैक्सीन के नाम पर इस गिरोह ने भारी कीमत पर फर्जी टीका बेचा और खूब लाभ कमाया।

रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के चलते लोगों के डर का फायदा उठाते हुए कोंग के गैंग ने अगस्त 2020 से फर्जी वैक्सीन के घोटाले की शुरुआत की थी। लोगों ने न केवल कोरोना के डर से फर्जी वैक्सीन पर आँख मूँद कर विश्वास किया बल्कि इसके लिए इस गैंग को मुँह माँगी कीमत भी दी।

33 वर्षीय कोंग और उसके दो साथियों ने पूरी प्लानिंग के साथ इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। लोगों को शक न हो इसके लिए उन्होंने हूबहू असली वैक्सीन की पैकेजिंग की तरह ही अपने नकली डोज को तैयार किया। यह भी पता चला है कि एक बैच में इन लोगों ने 600 फर्जी वैक्सीन हॉन्ग कॉन्ग भी भेजी थी। इसके बाद अन्य देशों में इसे बेचने का सिलसिला शुरू हो गया।

चीन ने महीनों से चल रहे इस रैकेट के बारे में आधिकारिक तौर पर बुधवार (फरवरी 17, 2021) को खुलासा किया। बयान में बताया गया है कि फर्जी वैक्सीन को लेकर संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी 25 दिसंबर 2020 को ही हुई थी।

बजट सत्र पर तैनात होंगे STF कमांडों, PFI के अंसाद बदरुद्दीन और फिरोज खान की गिरफ्तारी के बाद हाई अलर्ट पर UP

लखनऊ की एक अदालत ने पीएफआई के सदस्यों अंसाद बदरुद्दीन और फिरोज खान को 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। यूपी स्पेशल टास्क फोर्स ने इन्हें मंगलवार (16 फरवरी, 2020) को लखनऊ से गिरफ्तार किया था। केरल के रहने वाले दोनों आरोपितों पर एटीएस ने देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने दो लोगों को विस्फोटक के साथ गिरफ्तार किया था। एसटीएफ का दावा है कि हिंदू संगठनों के नेता इन दोनों लोगों के निशाने पर थे।

दोनों की गिरफ्तारी के बाद से ही यूपी में अलर्ट जारी कर दिया गया है। वहीं लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने विधानसभा की सुरक्षा बढ़ाते हुए चाक-चौबंद कर दिया है। 18 फरवरी यानी गुरुवार से शुरू हो रहे बजट सत्र को लेकर पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। कोई अनहोनी न हो इसके लिए विधानसभा की सुरक्षा के लिए एटीएस (आतंकवाद निरोधी दस्‍ता) कमांडो तैनात किए जाएँगे।

राज्य पर मंडरा रहे आतंकी गतिविधियों को मद्देनजर रखते हुए संयुक्त पुलिस आयुक्त नवीन अरोड़ा ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम को लेकर लखनऊ के अधिकारियों के साथ पुलिस लाइन में बैठक की। अधिकारी ने खाका तैयार करते हुए विधान भवन में शुरू होने वाले बजट सत्र को लेकर पुलिस कर्मियों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है। साथ ही एटीएस कमांडो भी विधानभवन की सुरक्षा में तैनात रहँगे।

PFI के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने जानकारी दी कि इन दोनों के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और दस्तावेज बरामद हुए हैं। गिरफ्तार पीएफआई सदस्य वसंत पंचमी पर हिंदूवादी संगठनों के बड़े नेताओं को निशाना बनाना चाहते थे। इसके लिए पीएफआई से कई लोगों को जोड़ रहे थे।

यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया है कि इन दोनों लोगों के पास से 16 विस्फोटक, एक पिस्टल, 7 ज़िंदा कारतूस, 4800 रुपए नगद, 4 एटीएम समेत कई चीजें मिली हैं। पुलिस के इन दोनों लोगों के पास से ट्रेन के 12 टिकट और 2 पेन ड्राइव भी बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 1 साल में इस संगठन के 123 लोगों को हमने गिरफ़्तार किया है।

पुलिस का मानना है कि ये लोग किसी आंतकी मंसूबे को अंजाम देने यहाँ आए हुए थे। हो सकता है इनके साथी इन्हें विस्फोटक देने वाले थे या फिर ये विस्फोटक प्राप्त कर चुके थे। पुलिस इन लोगों से गंभीरता से पूछताछ कर रही है।

बता दें कि पीएफआई का नाम यूपी के हाथरस की जातीय हिंसा में भी सामने आया था। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले साल हुई हिंसा के तार भी पीएफआई से जुड़े थे

मछुआरन ने तमिल में की राहुल गाँधी से शिकायत, कॉन्ग्रेसी CM नारायणसामी बोले- मेरी तारीफ कर रही है

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी को आज बुधवार (फरवरी 17, 2021) के दिन किसी और ने नहीं बल्कि पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने बेवकूफ बना दिया। दरअसल मछुआरा समुदाय के बीच बैठक के दौरान एक महिला द्वारा की गई शिकायत का उन्होंने गलत अनुवाद कर दिया।

कॉन्ग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी बुधवार को दो दिवसीय दौर पर पुडुचेरी पहुँचे। इस दौरान, पहले से ही अपनी सरकार बचाने का संकट झेल रहे कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री वी नारायणसामी एक विवाद में उलझ गए। उन पर आरोप लग रहे हैं कि जब एक बुजुर्ग मछुआरन ने जब राहुल से उनकी शिकायत की तो नारायणसामी ने उसकी शिकायत का झूठा अनुवाद कर राहुल को बरगला दिया। उन्होंने महिला की शिकायतों का सही अनुवाद करने की जगह कथित तौर पर यह कह दिया कि वह तो उनकी और उनकी सरकार की तारीफ कर रही है। महिला का यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है।

तमिल में बात करते हुए, दर्शकों में से एक महिला ने कहा कि पुडुचेरी में जब चक्रवात आया था तो सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस सरकार ने लोगों की मदद नहीं की। चूँकि राहुल गाँधी तमिल समझने में सक्षम नहीं तो मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने इस मौके का फायदा उठाते हुए महिला की शिकायत को अपनी तारीफ में बदल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला चक्रवात के समय उनके वहाँ भ्रमण करने और राहत सामग्री प्रदान करने की सराहना कर रही है।

हालाँकि, नारायणसामी राहुल गाँधी की आँखों में धूल झोंकने में सफल रहे, लेकिन यह सोशल मीडिया यूजर्स की नजरों से नहीं बच सका। तमिल जानने वाले सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके झूठ को पकड़ लिया। करोड़ों सोशल मीडिया यूजर्स ने जोर देकर कहा कि पुडुचेरी के मुख्यमंत्री ने खुद को एक विवेकशील नेता के रूप में चित्रित करने के लिए महिला के बयान को गलत तरीके से इस तरह पेश किया जैसे उन्होंने उनके कल्याण के लिए अथक प्रयास किए हों।

महिला जाहिर तौर पर पिछले साल नवंबर माह में चक्रवाती तूफान निवार (Cyclone Nivar) के आने पर सत्तारुढ़ कॉन्ग्रेस द्वारा किसी भी तरह की सहायता न करने को लेकर शिकायत कर रही थी। महिला ने कहा कि मुख्यमंत्री उनसे मिलने नहीं आए। हालाँकि, मुख्यमंत्री ने उनकी शिकायत को यह कहते हुए अपने पक्ष में तब्दील कर लिया कि वह केंद्र शासित प्रदेश में चक्रवात आने के समय उनके द्वारा किए गए कामों की तारीफ कर रही है।

पुडुचेरी को चक्रवात निवार ने गंभीर रूप से प्रभावित किया था। पुडुचेरी में नवंबर, 2020 में हुई कुल हानि 400 करोड़ रुपए आँकी गई थी। चक्रवात की वजह से राज्य में भारी बारिश हुई। तमिलनाडु में कम से कम तीन लोग मारे गए, 1,000 से अधिक पेड़ उखड़ गए और कुछ निचले इलाकों में भारी बारिश के बाद जल-जमाव हो गया।

राजनीतिक संकट के बीच पुडुचेरी में राहुल गाँधी

पुडुचेरी में राजनीतिक संकट के बीच और चुनाव के दौरान, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी के चुनाव अभियान को शुरू करने के लिए थे। अपने अभियान के एक हिस्से के रूप में, गाँधी ने एक बैठक में भाग लिया जहाँ उन्होंने मछुआरा समुदाय के साथ बातचीत की और बाद में छात्रों के साथ चर्चा की।

पुडुचेरी में हाल के दिनों में कॉन्ग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई है। ऐसा लग रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश का राजनीतिक ड्रामा अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों तक यूँ ही चलता रहेगा। केंद्र सरकार ने उप-राज्यपाल किरण बेदी को अपने पद से हटा दिया है। उनकी जगह तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदरराजन को पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गई है क्योंकि पार्टी के एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी (Velu Narayanasamy) सरकार ने एक विधायक के जाने से बहुमत खो दिया है। विधायक ए जॉन कुमार ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को विधानसभा से अपना इस्तीफा स्पीकर वीपी शिवाकोलुन्थु को सौंप दिया है। कॉन्ग्रेस यहाँ DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के साथ गठबंधन बना कर सत्ता में है।

100 दिनों तक दिल्ली बंधक, हिन्दू धर्म का अपमान, संविधान को गाली: वो शाहीन बाग़, जहाँ पनपा दिल्ली दंगों का बीज

अब जब दिल्ली में चल रहे तथाकथित किसान आंदोलन के 3 महीने पूरे होने को हैं, हमें लगभग 1.5 वर्ष पहले शुरू हुए एक और ‘आंदोलन’ को याद करना चाहिए, जो अंत होते-होते दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में बदल गया था। ठीक उसी तरह, जैसे ‘किसान आंदोलन’ ने गणतंत्र दिवस के दिन 500 पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया। अंतर इतना था कि शाहीन बाग़ के बाद हुए दंगों ने 50 से भी अधिक लोगों की जान ले ली।

आम लोगों को परेशान करने वाला आंदोलन, जिस पर मीडिया को था नाज

आइए, एक बार फिर से याद करते हैं कि कैसे एक ऐसे आंदोलन को संविधान बचाने की लड़ाई के रूप में दिखाया गया, जहाँ संविधान को ही गालियाँ दी गईं और महात्मा गाँधी को अपशब्द कहे गए। गाँधी और आंबेडकर की तस्वीरों के साथ राष्ट्रीय ध्वज लगा कर बैठे जिन प्रदर्शनकारियों के महिमामंडन में मीडिया जुटा था, वहाँ असल में भारत में अस्थिरता फैलाने की नींव डाली जा रही थी और देश को खंडित करने की बातें हो रही थीं।

सबसे पहले याद करते हैं कि कैसे शाहीन बाग़ आंदोलन की वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। 100 दिनों से भी अधिक समय तक चले इस उपद्रव के दौरान उस सड़क को इतने ही दिनों तक रोक कर रखा गया, जहाँ से प्रतिदिन 1 लाख से भी ज्यादा गाड़ियाँ गुजरती थीं। बच्चों को स्कूल के लिए देर होती थी, मरीज सही समय पर अस्पताल न पहुँचने के कारण मरते थे और कामकाजी लोगों को दूसरे रास्तों से दफ्तर जाना पड़ता था।

ये विरोध प्रदर्शन एक खास मजहब का था, लेकिन वामपंथी मीडिया ने दिखाया कि यहाँ कश्मीरी पंडितों के साथ एकता दर्शाई जा रही है। जिन कश्मीरी पंडितों को इस्लामी कट्टरपंथ ने घाटी से भगा दिया, वही इस्लामी कट्टरपंथ उनका साथ देने की बातें करके मीडिया में महान बन रहा था और वामपंथी उसे बना भी रहे थे। वहाँ एक खास मजहब ने महिलाओं को ढाल बना कर भाजपा के खिलाफ एक राजनीतिक और मजहबी लड़ाई लड़ी।

फ़रवरी 2020 आते-आते छात्रों की बोर्ड परीक्षाएँ भी शुरू हो गई थीं। कई बार सुप्रीम कोर्ट में सड़क खाली कराने की याचिका डाली गई, लेकिन शुरू में इसे पुलिस का मामला बता कर ख़ारिज कर दिया गया। कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन के दौरान महामारी एक्ट का खुलेआम उल्लंघन हुआ। अंत में दिल्ली पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद उनका उद्देश्य भी सफल हो ही गया था।

क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने

इन प्रदर्शनकारियों ने ऐसा नंगा नाच मचाया था कि सुप्रीम कोर्ट तक को कहना पड़ा कि ‘विरोध प्रदर्शन के अधिकार’ का मतलब ये बिलकुल भी नहीं है कि आप कहीं भी और कभी भी अनिश्चितकाल के लिए बैठ जाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शाहीन बाग़ आंदोलन के दौरान जिस तरह से सड़क को अवरुद्ध किया गया, वो स्वीकार्य नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि आप अपने अधिकार के लिए सार्वजनिक जगहों पर कब्ज़ा कर के दूसरों के अधिकारों के आड़े नहीं आ सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया था कि प्रदर्शन के अधिकार का उपयोग कुछ निश्चित कर्तव्यों को ध्यान में रख कर ही किया जाना चाहिए। प्रदर्शन दूसरों के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए। दलील दी गई थी कि ब्रिटिश राज में ऐसे ही प्रदर्शन होते थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक लोकतंत्र में होने वाले प्रदर्शनों की तुलना उससे नहीं होनी चाहिए। इसके खिलाफ समीक्षा याचिका भी दायर हुई, जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस फैसले को सही माना।

वामपंथियों की सबसे बड़ी बात ये है कि वो सुप्रीम कोर्ट तक को नहीं बख्शते। राम मंदिर पर फैसले के दौरान भी देश के सर्वोच्च न्यायालय को जम कर खरी-खोटी सुनाई गई है। सबसे पहले CJI रहे दीपक मिश्रा के खिलाफ तीन जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाई गई, उसके बाद उनके खिलाफ महाभियोग लाने की कोशिश की गई। उन्हीं तीन जजों में से एक रंजन गोगोई CJI बने, लेकिन राम मंदिर फैसले के बाद उन्हें भी ‘Spineless’ घोषित कर दिया गया।

अब यही गिरोह विशेष CJI एसए बोबडे पर निशाना साधते हुए कभी उन पर भाजपा नेता की बाइक की सवारी करने का आरोप लगाता है तो कभी सोशल मीडिया और उनके खिलाफ ट्रेंड चलाए जाते हैं। यही दबाव की राजनीति है। जिस संस्था को संविधान निर्माताओं ने संविधान की व्याख्या का अधिकार दिया है, उसके फैसले को भी प्रभावित करने की कोशिश होती है। फिर भी वामपंथी ‘संविधान प्रेमी’ होने का टैग नहीं खोते।

शाहीन बाग़ प्रदर्शनों के दौरान भी प्रशांत भूषण और इंदिरा जयसिंह जैसे न जाने कितने ही बड़े अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट में तैयार रहते थे, वामपंथियों को बचाने के लिए। उसी दौरान जामिया में भी हिंसा हुई, जहाँ उपद्रवी छात्रों की तरफ से बड़े-बड़े वकील सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट ने तो कमिटी तक बना दी प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कोरोना आने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाया।

इस्लामी कट्टरपंथी से ज्यादा हिन्दू विरोधी आंदोलन था शाहीन बाग़

इसमें कोई शक नहीं है कि शाहीन बाग़ का आंदोलन इस्लामी कट्टरपंथी उपद्रव था, लेकिन इससे भी ज्यादा ये हिन्दू विरोधी अभियान था। एक ऐसा मंच, जहाँ से हिन्दू धर्म और हिन्दुओं के खिलाफ जो कुछ किया जा सकता था, किया गया। ऐसे पोस्टर्स शेयर किए गए, जिनमें पवित्र हिन्दू प्रतीक चिह्न स्वस्तिक को टूटते हुए दिखाया गया था। बुर्का पहनी महिलाओं को बिंदी लगाए हुए दिखाया गया। फैज की कविताओं के जरिए हिन्दू विरोधी नैरेटिव बनाए गए।

दिल्ली के शाहीन बाग़ की जब बात होती है तो पूरे देश में कई शाहीन बाग़ बनाने की कोशिश हुई, ये हमें नहीं भूलना चाहिए। भोपाल में मस्जिदों से ऐसे पैम्प्लेट्स बाँटे गए, जिनमें सिंधियों की दुकानों का बहिष्कार करने को कहा गया। क्यों? क्योंकि उन्होंने CAA का समर्थन किया था। ‘जिस दिन हम हिन्दुओं से ज्यादा हो गए, उन्हें पटक-पटक कर मारेंगे’ – एक बुर्कानशीं महिला का वीडियो सभी लोगों ने देखा।

तमिलनाडु में दुकानदारों को CAA के समर्थन में बनाई गई वस्तुओं को बेचने पर धमकाया गया। इसी शाहीन बाग़ में अफजल गुरु को हुई फाँसी की सज़ा को गलत ठहराया गया। एक तो किसी आतंकी को संसद हमले के 12 वर्षों बाद सज़ा मिली, इसके लिए पूरी वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई – फिर भी उसका समर्थन हुआ। शाहीन बाग़ में खुलेआम कहा गया कि ये मुस्लिमों का आंदोलन है और सेक्युलर नहीं है।

बाहर मीडिया तो था ही इसे सेक्युलर साबित करने के लिए। शरजील इमाम की चर्चा के बिना शाहीन बाग की बात अधूरी है, जो इसके आयोजकों में से एक था। उसने महात्मा गाँधी को फासिस्ट बताया, जिन्ना की तारीफ की, असम को भारत से खंडित कर अलग करने की बातें की और पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग करने के लिए उकसाया। उसने ‘असम में कत्लेआम’ की झूठी अफवाह भी फैलाई।

हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि शाहीन बाग़ का उपद्रव हिन्दू 100 दिनों तक सहते रहे लेकिन देश में जहाँ-जहाँ भी CAA के समर्थन में रैलियाँ हुईं, उनमें से कई जगहों पर मुस्लिम भीड़ द्वारा उस पर हमला किया गया। केरल में दलितों को पानी नहीं पीने दिया गया, क्योंकि उन्होंने CAA का समर्थन किया था। ‘सेवा भारती’ ने उनकी मदद की। ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या’ और ‘हिन्दुओं की कब्र खुदेगी’ वाले नारे हमें नहीं भूलने हैं।

मीडिया, फिल्म और राजनीतिक जगत की हस्तियों का खुला समर्थन

वामपंथियों की एक बेशर्मी भरी खासियत ये है कि उनके आंदोलन पूर्णतः राजनीतिक होकर भी ‘निष्पक्ष’ बन जाते हैं। राकेश टिकैत के मंच से RLD के जयंत चौधरी का भाषण होगा, लेकिन आंदोलन ‘निष्पक्ष’ रहेगा। कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद का वीडियो भी इसी तरह सामने आया था, जिसमें वो एक बुर्कानशीं महिला के छोटे बच्चे को CAA और मोदी विरोधी नारे सीखा रहे थे। लेकिन नहीं, आंदोलन तो गैर-राजनीतिक था न?

कॉन्ग्रेस के मणिशंकर अय्यर शाहीन बाग़ जाते हैं, लेकिन इसे गैर-राजनीतिक बताया जाता है। AAP नेता अमानतुल्लाह खान वहाँ सारी व्यवस्थाएँ संभाले रहता है, लेकिन इसे सेक्युलर आंदोलन बताया जाता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसका समर्थन करते हैं, लेकिन इसे राजनीति से अलग बताया जाता है। एक पूर्णतः राजनीतिक उपद्रव, जो भाजपा के खिलाफ था, जिसमें विपक्षी दलों के कई नेताओं की भूमिका थी – उसे जनसामान्य का आंदोलन बताने की कोशिश हुई।

नसीरुद्दीन शाह ने देश भर में घूम-घूम कर कई स्थानों पर CAA विरोधी आंदोलनों को सम्बोधित किया। फरहान अख्तर बिना कुछ जाने-समझे प्रदर्शन स्थल पर जाकर बैठ गए। अभिनेता सुशांत सिंह शाहीन बाग़ गए। ज़ीशान अयूब और स्वरा भास्कर जैसे फ़िल्म जगत के लोगों का तो तब से काम-धाम ही यही बन गया। पूरे देश में हर राज्य में जगह-जगह शाहीन बाग़ बनाने की कोशिश हुई। उपद्रव की साजिश देश भर में थी।

मीडिया के कई पोर्टल्स का काम ही यही रह गया था कि वो शाहीन बाग़ से ‘पॉजिटिव स्टोरीज’ निकालें और दिखाएँ कि कैसे ये अरब स्प्रिंग से भी बड़ा आंदोलन है। जब जामिया में लदीदा फरदाना जैसी ‘छात्राओं’ को आगे करके उनके गिरने, दौड़ने और भागने के एक-एक मोमेंट्स HD कैमरे में कैद किए गए और बरखा दत्त जैसों से उन्हें ‘Shero’ बताया, तब भी सामने आया था कि कैसे मीडिया इसे एक बड़ा आंदोलन बनाने की तैयारी में है।

छात्रों की अराजकता के जरिए आंदोलन को दी गई थी धार

शाहीन बाग़ जिस तरह से देश के कई शहरों में हो रहा था, ठीक उसी तरह AMU और जामिया जैसे कई कॉलेज थे, जहाँ छात्रों ने मजहबी कट्टरता का अखाड़ा बना कर रख दिया था। दिसंबर 2019 में ही जामिया के बाहर जम कर हिंसा हुई और छात्र यूनिवर्सिटी में जाकर लाइब्रेरी में छिप गए। जब पुलिस कार्रवाई हुई तो वीडियो शेयर कर-करके दिल्ली पुलिस को बदनाम किया जाने लगा। CCTV फुटेज शेयर करने के मामले में पुलिस के साथ सहयोग नहीं किया गया।

बाद में ऐसे कई वीडियो आए जिससे उन तथाकथित छात्रों की पोल खुली। ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्था तक से बयान जारी करवाए गए। पुलिस के साथ झड़प हुई। बसें जलाई गईं। बाद में सारा फोकस ‘पुलिस की क्रूरता’ की बेहूदी बातों पर रखा गया। शाहीन बाग़ में किसी ने खिलौने वाले बंदूक से फायरिंग कर दी तो उसे ज्यादा तवज्जोह दी गई और इसके जरिए ‘हिन्दू आतंकवाद’ का शिगूफा फिर से छोड़ा गया।

इसी तरह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पुलिस द्वारा माइक से बार-बार सहयोग के लिए कहे जाने के बावजूद हिंसा हुई। NHRC ने भी अपनी जाँच में माना कि छात्रों की तरफ से हिंसा शुरू की गई थी और पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मजबूरी में बल-प्रयोग किया। संस्था ने मना कि क्षेत्र को सांप्रदायिक दंगे से बचाने के लिए ये ज़रूरी था। ‘छात्रों’ के मास्क में मजहबी कट्टरवादियों ने अपना एजेंडा चलाया।

ठीक इसी तरह 80 वर्ष से ऊपर की उम्र की मुस्लिम दादियों को, जिन्हें CAA के बारे में कुछ पता ही नहीं था, टीवी चैनलों पर बहस में स्थान दिया गया और इसके सहारे अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगंडा के लिए तस्वीरें जुटाई गईं। बिल्किस दादी को ‘Times’ ने सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में स्थान दिया। इसी तरह विदेशों में इस उपद्रव को ‘छात्रों और महिलाओं का आंदोलन’ कह कर प्रचारित किया गया, ताकि कोई आलोचना न कर सके।

शाहीन बाग़ आंदोलन ही था दिल्ली दंगों का कारण

अंत में, इन चीजों को देख कर कहा जा सकता है कि शाहीन बाग़ ही दिल्ली दंगों का कारण था। दिल्ली के अन्य स्थानों पर ही इसी तरह से मार्गों पर कब्ज़ा की कोशिश की गई और जब हिन्दुओं ने, आमजनों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने दंगा शुरू कर दिया। शाहीन बाग़ में जो लोग शामिल थे, दिल्ली दंगा के आरोपित भी वही लोग थे। ताहिर हुसैन, इशरत जहाँ, उमर खालिद, खालिद सैफी और अमानतुल्लाह खान जैसे लोगों के इसमें नाम सामने आए।

अर्थात, 100 दिनों तक हिन्दू धर्म और उसके प्रतीक चिह्नों का अपमान हुआ तो ठीक, जब हिन्दुओं ने इसका विरोध किया तो ये भड़क गए। उन्होंने 100 दिनों तक सड़क कब्ज़ा कर रखी तो ठीक, एक कपिल मिश्रा ने सड़क खाली करने को कह दिया तो उन्होंने दंगे कर दिए। उन्होंने खुद के विरोध के अधिकारों का रट्टा लगा कर हिंसा की तो ठीक, हिन्दुओं ने आत्मरक्षा में प्रतिकार किया तो गलत। यही कारण है कि कई दिनों तक चला ये प्रोपेगंडा का खेल दंगे में बदल गया।