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पहलगाम पहला नहीं, जब कश्मीर में इस्लामी आतंकियों ने हिंदुओं का किया कत्लेआम… हिंदू नरसंहार की ये 27 घटना आपको पता होनी चाहिए

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 22 अप्रैल 2025 को चुन-चुनकर हिंदुओं को निशाना बनाया। जिनके परिजनों को गोली लगी उन्होंने खुद कैमरे पर बताया कि आतंकी आए और नाम पूछकर गोलियाँ मारीं। जिन लोगों पर उन्हें थोड़ा भी संदेह हुआ उनसे उन्होंने कलमा पढ़वाया, पुष्टि करने के लिए हिंदुओं की पैंट उतरवाई गई, खतना देखा गया। जब उन्हें लगा कि अब ये सब करने का उनपर समय नहीं है तो उन्होंने अंदाजा लगाकर ये कहते हुए गोलियाँ चला दीं, ‘ये मुस्लिम नहीं लग रहा मारो गोली।’

धर्म पूछ-पूछकर पर्यटकों पर निर्ममता से मौत के घाट उतारने की जानकारी मीडिया में सामने आई तो पूरा देश दहल गया। जगह-जगह हिंदुओं की सुरक्षा पर दोबारा सवाल उठने लगे। लोग इस तरह सहमे कि उनके सामने 90 के दशक का कश्मीर घूमने लगा। वो कश्मीर जहाँ हिंदुओं का नरसंहार कोई नया हीं है। और न ही नया है इस्लामी कट्टरपंथ या उनका आतंक।

35 साल पहले भी कश्मीर ने ऐसा ही नरसंहार देखा था। फर्क बस इतना है आज कश्मीर घूमने गए हिंदुओं को निशाना बनाया गया है और उस समय स्थानीय हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा गया था। आज मृतकों के नाम बीतन अधिकारी, समीर गुप्ता, मनीष रंजन, विनय नरवाल, शुभम द्विवेदी, प्रशांत कुमार सतपथी, एन रामचंद्रन, दिनेश अग्रवाल, भारत भूषण, जेएस चंद्रमौली, सुमित परमार समेत 28 लोग हैं। तब टीका लाल टपलू, नीककंठ गंजू, गिरिजा टिकू, पीएन कौन, एल गंजू नवीन सप्नू समेत तमाम नाम थे।

आज हम आपको 35 सालों में कश्मीर में घटी उन 25 घटनाओं का ही संक्षिप्ट विवरण देने जा रहे हैं जिनके कारण सैंकड़ों हिंदू घाटी से पलायन को मजबूर हुए।

  1. शुरुआत 1989 से हुई थी। घाटी में कश्मीरी पंडितों के सबसे बड़े और चहेते नेता टीका लाल टपलू थे। 14 सितंबर 1989 को आतंकियों ने उन्हें उस समय गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतारा था जब वह एक बच्ची को चुप कराने घर से निकले थे। इस हमले में उनका परिवार बच गया था क्योंकि घटना से 1 हफ्ता पहले दिल्ली आ गया था।
  2. दूसरी कहानी नीलकंठ गंजू की है। 4 नवंबर 1989 को जस्टिस नीलकंठ गंजू को दिनदहाड़े हाईकोर्ट के सामने मारा गया था। उनका गुनाह इतना था कि उन्होंने आतंकी मकबूल भट्ट को एक हत्या के बदले सजा ए मौत दी थी। इसी का बदला लेने के लिए जस्टिस नीलकंठ को मौत के घाट उतारा गया।
  3. गिरिजा टिकू वो अगला नाम हैं जिन्हें आतंकियों ने अपना निशाना बनाया था। वह एक स्कूल में नौकरी करती थीं और डर से जम्मू रहती थीं। एक दिन उन्हें पता चला कि स्थिति सामान्य हो गई है तो वह वापस अपनी सैलरी लेने बांदीपोरा गईं। लेकिन आतंकियों ने वहाँ उन्हें पकड़ा। उनका रेप किया और फिर उन्हें जिंदा ही उनके शरीर को आरी से दो हिस्सों में चीर दिया।
  4. 22 मार्च 1990 को अनंतनाग जिले के दुकानदार पी एन कौल के साथ ऐसी ही बर्बरता को अंजाम दिया गया। बताया जाता है कि पीएन कौल की चमड़ी जीवित अवस्था में शरीर से उतार दी गई थी और उन्हें मरने को छोड़ दिया गया था। तीन दिन जाकर उनकी लाश मिली थी।
  5. 7 मई 1990 को प्रोफेसर एल गंजू को पत्नी समेत आतंकियों ने मौत के घाट उतारा। मगर उससे पहले उनकी पत्नी से सामूहिक बलात्कार भी किया। बीके गंजू जो कि एक टेलीकॉम इंजीनियर थे और आतंकियों से बचने के लिए चावल के डिब्बे में घुसे थे। आतंकियों ने उन्हें पूरे घर में ढूँढा लेकिन वो कहीं नहीं मिले। बाद में जब आतंकी जाने लगे तभी बीच में कुछ पड़ोसियों ने चावल के डिब्बे की ओर इशारा कर दिया और आतंकियों ने उसी डिब्बे में उन्हें गोलियों से भून डाला। बाद में उनके खून से सना चावल उनकी पत्नी को खिलाया गया जिसका दृश्य कश्मीर फाइल्स में दिखाया गया है।
  6. अगली कहानी कृष्ण राजदान की है। कृष्ण को 12 फरवरी 1990 को बस में जाते हुए गोली मारी गई थी। इसके बाद उनका शरीर बस से निकाल कर बाहर किया गया था और लोगों से कहा गया था कि उन्हें लातों से मारें। पूरे शरीर को घसीट कर दिखाया गया था कि वे हिंदुओं का क्या हाल करने वाले हैं। 
  7. 24 फरवरी को अशोक कुमार के घुटनों में गोली मारी गई। फिर उनके बाल उखाड़े गए, उन पर थूका गया और फिर पेशाब किया गया। 
  8. नवीन सप्रू को भी घाटी में इसी तरह मारा गया और उनके तो मुख्य अंग में गोली मारकर उनके शरीर को जलाया गया था।
  9. 30 अप्रैल को कश्मीरी कवि सर्वानंद कौल को उनके बेटे वीरेंद्र कौल के साथ भी निर्ममता की हर हद पार कर दी गई। पहले विश्वास दिलाकर कट्टरपंथी उन्हें और उनके बेटे को अपने साथ ले गए। फिर दो दिन बाद जाकर उनकी लाश मिली। माथे पर की चमड़ी उधेड़ दी जा चुकी थी। सिगरेट से शरीर जला दिया गया था। हड्डियाँ टूटी हुई थी। आँखें निकाल ली गई थीं। इसके बाद उन्हें मारने के लिए गोली भी दागी गई थी।
  10. उन्हीं की तरह अशोक सूरी के भाई को भी पहले आतंकियों ने सिगरेट जलाकर खूब टॉर्चर किया था और बाद में कहा कि वो तो अशोक सूरी को मारना चाहते हैं जब भाई ने अधमरी अवस्था में अपने भाई को कश्मीर छोड़ने को कहा तो उन्होंने बात नहीं मानी। नतीजन आधीर रात आतंकी घर आए और धारधार हथियार से उनकी गर्दन काटकर चले गए।
  11. 26 जून 1990 को बीएल राना उस समय मौत के घाट उतारे गए जब वो अपने परिवार को लेने जा रहे थे। उनसे पहले 3 जून को आतंकियों ने उनके पिता दामोदर को मार डाला था।
  12. मुजू और दो अन्य कश्मीरी पंडितों के साथ तो ऐसी निर्ममता हुई कि उन्हें पहले खून देने के बहाने उठाया गया और फिर उनके शरीर का सारा खून निकालकर उन्हें तड़प कर मरने को छोड़ दिया गया।
  13. सोपोर के चुन्नी लाल शल्ला का भी खून बहाकर उन्हें मारा गया था। आतंकी पहले उनकी दाढ़ी देख उन्हें पहचान न सके। लेकिन तभी इंस्पेक्टर शल्ला के एक साथी सिपाही ने ही आतंकियों को बुलाया और उनके गाल की चमड़ी उतरवा उतरवा कर उन्हें तड़प कर मरने को छोड़ दिया।
  14. 28 अप्रैल 1990 को भूषण लाल रैना मारे गए। भूषण लाल अपनी माँ के साथ घाटी छोड़ने वाले थे। देर रात दोनों सामान बांध रहे थे कि तभी आतंकी आए और उनके सिर में नुकीली चीज घुसाकर उन्हें घर से बाहर खींच लिया। बाद में उन्हें नंगा करके शरीर में कील ठोंकी और जब तक दम नहीं थोड़ा तब तक तड़पाते रहे।
  15. इसके बाद 1998 को 23 कश्मीरी हिंदू मारे गए। वो उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो घाटी में हिंदुओं की वापसी की संभावना देखने वहाँ गए थे। इन सबकों एक आदेश पर रायफलों से मौत के घाट उतारा गया फिर इनके मंदिर तोड़े गए, घर में आग लगा दी गई।
  16. कश्मीरी पंडितों को मारने के क्रम में एक अमित नाम का नौजवान भी मारा गया था। उन्हें मारने का आतंकियों का प्लॉन नहीं था। उन्हें तो एक ऐसे शख्स को मारना था जो आतंकी बिट्टा कराटे को बचपन में पढ़ाई के पैसे देता। उन्हीं के धोखे में 26 साल का नौजवान बीच सड़क पर मार डाला गया था।
  17. इसी प्रकार कश्मीरी पंडितों पर हुए जुल्म की एक कहानी कश्मीरी महिला ने हाल में ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’  में शेयर की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे उनके घर के सामने भैरव मंदिर ध्वस्त कर दिया गया था और एक युवा बैंक कर्मचारी को सैंकड़ों लोगों के सामने मार दिया गया था। भीड़ ने अंतिम सांस लेने तक उस शरीर को मारा था और उस पर पेशाब भी किया था।
  18. इसी प्रकार पीड़िता मंजू को जहाँ कट्टरपंथियों ने दीवार से सटाकर पूरे शरीर पर हाथ फेरा था। वहीं मधुसूदन कौल थीं जिनकी एक हाथ की उंगली ही आतंकियों  की गोली से चली गई थी।
  19. एक पीड़ित ने बताया था कि कैसे उनके पिता को मारकर उनके शरीर को ईंट के साथ बाँधकर नदी में फेंक दिया गया था।
  20. अनुराधा नाम की महिला ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा था कि कभी किसी ने अपने पिता को नंगा नहीं देखा होगा लेकिन उन्होंने देखा था। उनके पिता के शरीर में इतनी गोलियाँ दागीं गई थीं कि शरीर ढंग से पोस्टमार्टम के बाद सिला भी नहीं गया।
  21. इसी तरह रवींद्र पंडित ने हाल में बताया कि कैसे उनके पिता सरकारी नौकरी के कारण कश्मीर रहते थे और आतंकियों ने उन्हें उनके ही बाग में लेजाकर मारा था। पाकिस्तान जिंदाबाद न कहने पर उनके शरीर में कील ठोंकी गई थीं उन्हें कंटीली तार से फंदा बनाकर लटकाया था।
  22. द कश्मीर फाइल्स फिल्म बनने के क्रम में जो रिसर्च हुई उस बीच एक महिला ने पल्लवी जोशी बताया था कि कैसे उनके पिता को मार कर 15 टुकड़ों में काटा गया और फिर झेलम नदी में बहा दिया गया।
  23. अगली कहानी सतीश कुमार टिकू की है। टिकू को भी कश्मीरी पंडित होने के कारण मारा गया था। बिट्टा कराटे ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो सतीश पंडित था और आरएसएस से जुड़ा था इसलिए उसे मारा था। कराटे वही आतंकी है जिसने 20 कश्मीरी हिंदुओं को मौत के घाट उतारा था।
  24. साल 2003 में दक्षिण कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र के नदीमार्ग गाँव में 24 कश्मीरी पंडितों को  लाइन से मौत के घाट उतारा गया था। ये वो लोग थे जिन्होंने 90 के दशक में अपना घर छोड़ने से मना कर दिया था। मरने वालों में 70 साल की बुजुर्ग महिला और 2 साल का मासूम बच्चा भी था।
  25. इसी तरह हालिया हमलों की बात करें तो 2022 में भी कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया गया था। स्कूल में चुन-चुन कर इसी पैटर्न के साथ गैर-मुस्लिम शिक्षक निशाना बनाए गए थे।
  26. इससे पहले वहीं माखनलाल बिंदरू की भी गोली मार कर पिछले साल हत्या की गई थी।
  27. उससे पहले अनंतनाग में जिले के सरपंच अजय पंडिता को मौत के घाट उतारा गया था।

पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे, CM नीतीश कुमार का सख्त संदेश, बिहार को पहली नमो रैपिड रेल: बाबा विदेश्वर नाथ की भूमि से इस्लामी आतंक के खिलाफ उद्घोष

बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर में गुरुवार (24 अप्रैल 2025) को आयोजित राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की रैली में जबरदस्त जोश दिखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही मंच पर पहुँचे, भीड़ ने ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगाकर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया।

यह रैली पीएम मोदी की पहलगाम हमले के बाद पहली सार्वजनिक सभा थी। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले की हम निंदा करते हैं। पूरा देश आतंक के खिलाफ एकजुट है।” नीतीश ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की।

पहलगाम हमले की गंभीरता को देखते हुए रैली को सादगी से आयोजित किया गया। न तो फूल-मालाओं से स्वागत हुआ, न ही कोई भव्य समारोह हुआ। पीएम मोदी ने अपने संबोधन से पहले दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा, “यह नृशंस कृत्य था। पीएम उचित समय पर इसका जवाब देंगे।” रैली में एनडीए की एकजुटता भी दिखी, जहाँ बीजेपी, जेडीयू, लोजपा (रामविलास) और अन्य सहयोगी दलों के नेता मंच पर साथ नजर आए।

रैली में पीएम मोदी ने बिहार को कई सौगातें दीं। उन्होंने लगभग 13,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें गैस, बिजली और रेलवे से जुड़ी परियोजनाएँ शामिल हैं। गोपालगंज में 340 करोड़ की लागत से बनने वाले एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला रखी गई। सबसे खास रही नमो भारत रैपिड रेल और अमृत भारत एक्सप्रेस की शुरुआत। नमो भारत रैपिड रेल पटना, मधुबनी और जयनगर को जोड़ेगी, जिससे बिहार में तेज और आधुनिक रेल सुविधा मिलेगी। इसके अलावा सुपौल-पिपरा और हसनपुर-बिथान रेल लाइनों का उद्घाटन हुआ।

मधुबनी में बाबा विदेश्वर नाथ की भूमि पर आयोजित यह रैली आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता का प्रतीक भी बनी। यहाँ पीएम मोदी ने नीतीश कुमार को “लोकप्रिय मुख्यमंत्री और मित्र” कहकर उनकी तारीफ की।

पहलगाम में हमला करने आए 2 इस्लामी आतंकियों को विनय नरवाल ने दबोच लिया, लेकिन एक ने छूटकर सिर में मार दी गोली: हिमांशी ने सुनाई लेफ्टिनेंट पति की बहादुरी की कहानी

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल ने अंतिम समय में भी आतंकियों से लोहा लिया था। हालाँकि, अकेले होने के कारण आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी। विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी ने घरवालों को फोन पर बताया था कि उनके पति विनय आतंकियों से लड़ते हुए बलिदान हुए हैं।

पहलगाम में हुए आतंकी हमले की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। विचलित करने वाली इस तस्वीर में दिखाई दे रहा है कि बैसरन में मौजूद घास के मैदान में एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ है। वह शव भारतीय नौसेना (नेवी) के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का था। पास में ही पत्नी हिमांशी गुमसुम बैठी है। दोनों की 16 अप्रैल 2025 को शादी हुई थी और 21 अप्रैल हनीमून मनाने जम्मू-कश्मीर आए थे।

हिमांशी का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कहती हुई नजर आ रही हैं, “हम लोग भेलपुरी खाने लगे, तभी आतंकी आ गए और कहा कि मुस्लिम हो। हमने नहीं कहा तो गोली मार दी।” हिमांशी ने अपने घरवालों को फोन करके बताया था कि विनय ने हमले के दौरान दो आतंकियों को दबोच लिया था, लेकिन एक आतंकी ने जैसे-तैसे खुद को छुड़ा लिया और विनय के सिर में गोली मार दी।

हिमांशी ने परिजनों को बताया कि वे लोग होटल से घूमने के लिए निकले थे। पहलगाम की वादियों की सैर के दौरान एक जगह कुछ लोग नजर आए। आतंकियों ने वहाँ आते ही अपने-अपने हथियार निकाल लिए। इससे सारे लोग डर गए। इसके बाद आतंकियों ने लोगों से उनका नाम और धर्म पूछकर गोली मारनी शुरू कर दी।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल 2025) को दोपहर करीब ढाई बजे आतंकियों ने पहलगाम के बैसरन घाटी इलाके में 28 पर्यटकों की हत्या कर दी। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन टीआरएफ ने ली है। आतंकी हमले के बाद देश भर में ग़म का माहौल है। भारत ने साफ कहा है कि वह अपराधियों को किसी हाल में नहीं बख्शेगा।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला उस क्षेत्र में हुआ, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है। यह इलाका पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवारों को गहरा शोक पहुँचाया है, बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। इस घटना ने कश्मीर के पर्यटन उद्योग पर भी एक गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

कल्पना से भी बड़ी सजा दूँगा, आतंकियों को मिट्टी में मिला दूँगा: पहलगाम अटैक पर PM मोदी का खुला ऐलान, मददगारों को भी खोज-खोजकर मारेगा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मधुबनी में आतंकियों और उनके आकाओं को कड़ी चेतावनी दी। पीएम मोदी ने कहा इस हमले में आतंकियों ने मासूम लोगों को जिस बेरहमी से मारा, उससे हर भारतीय दुखी और गुस्से में है। इस हमले में किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने भाई तो किसी ने अपना जीवनसाथी। करगिल से कन्याकुमारी तक पूरा देश इस दुख में एकजुट है और हमारा गुस्सा भी एक जैसा है।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, “22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, जिससे पूरा देश व्यथित है। सभी पीड़ित परिवारों के दुख में पूरा देश उनके साथ खड़ा है। जिन परिवारजनों का अभी इलाज चल रहा है, वे जल्द स्वस्थ हों, इसके लिए भी सरकार हर प्रयास कर रही है।”

पीएम मोदी ने कहा, “मैं स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूँ कि जिन्होंने हमला किया है और जिन्होंने इसकी साजिश रची है, उन्हें उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी। सजा मिलकर रहेगी। मैं पूरी दुनिया को बिहार की धरती से कहता हूँ कि भारत हर आतंकी और उनके समर्थकों को ढूँढकर सजा देगा। हम उन्हें धरती के किसी भी कोने से खोज निकालेंगे। भारत की आत्मा को आतंकवाद से नहीं तोड़ा जा सकता। आतंकवाद को बख्शा नहीं जाएगा। हर आतंकी को ऐसी सजा दी जाएगी, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति आतंक आकाओं की कमर तोड़ कर रहेगी।”

पीएम ने उन देशों और उनके नेताओं का शुक्रिया अदा किया, जो इस मुश्किल वक्त में भारत के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, “सभी पीड़ित परिवारों के दुख में पूरा देश साथ खड़ा है। इस हमले में किसी ने अपना बेटा, भाई, पति मारा गया। देश के दुश्मनों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है। जिन्होंने ये हमला किया है उन आतंकियों को, इस हमले की साजिश करने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी और मिलकर रहेगी। आतंक को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।”

पीएम मोदी ने कहा, “मैं पूरी दुनिया को बिहार की धरती से कहता हूं कि भारत हर आतंकी और उनके समर्थकों को ढूँढकर सजा देगा। हम उन्हें धरती के किसी भी कोने से खोज निकालेंगे। भारत की आत्मा को आतंकवाद से नहीं तोड़ा जा सकता। आतंकवाद को बख्शा नहीं जाएगा। हर आतंकी को ऐसी सजा दी जाएगी, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति आतंक के आकाओं की कमर तोड़ देगी। सभी जो मानवता में विश्वास रखते हैं, वे हमारे साथ हैं। मैं उन देशों और उनके नेताओं का शुक्रिया अदा करता हूँ जो हमारे साथ खड़े हैं।”

पीएम ने आतंकवाद की जड़ें खत्म करने के लिए भारत के हर कदम उठाने का संकल्प जताया और कहा कि न्याय जरूर होगा। इसके साथ ही पीएम मोदी ने अपने भाषण में बिहार के विकास पर भी बात की। उन्होंने कहा कि गाँव मजबूत होंगे, तभी भारत मजबूत होगा। पूज्य बापू भी यही मानते थे कि गाँवों का विकास देश की तरक्की के लिए जरूरी है। पिछले एक दशक में पंचायतों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। टेक्नोलॉजी के जरिए पंचायतों को सशक्त बनाया गया है। जमीनों के दस्तावेजों को डिजिटल करने से विवाद कम हो रहे हैं। 30 हजार नए पंचायत भवन भी बनाए गए।

इस दौरान बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पीएम का स्वागत किया और कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में बिहार में बहुत काम हुआ है। उन्होंने सड़क, बाढ़ नियंत्रण और स्वास्थ्य के लिए केंद्र की घोषणाओं का जिक्र किया। नीतीश कुमार ने मखाना बोर्ड के ऐलान की भी तारीफ की। पीएम मोदी ने इस मौके पर बिहार की 869 करोड़ की रेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया और पीएम आवास योजना के तहत लोगों को घर की चाबियां सौंपीं।

जैसे हिंदू माँ-बहनों का सिंदूर उजाड़ा है, वैसे ही आतंकियों और उनके आकाओं का करेंगे सफाया: CM योगी, पहलगाम में जिसे पत्नी के सामने मारी गोली उसके परिजनों से मिले

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुस्सा प्रकट किया है। उन्होंने कहा है कि हिन्दू बहन-बेटियों का सिन्दूर उजाड़ा जाए, यह स्वीकार्य नहीं है। सीएम योगी ने यह बातें इस हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के घर पहुँच कर कही हैं। उन्हें आतंकियों ने पहलगाम में मार दिया था।

सीएम योगी ने कहा, “22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम के अंदर हुए आतंकी हमले में कानपुर का एक परिवार प्रभावित हुआ है… यह एक क्रूर, वीभत्स और कायराना कृत्य है। इसकी देश और दुनिया के हर सभी समाज ने निंदा की है। यह घटना बताती है कि आतंक अपनी अंतिम सांस ले रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “जाति-धर्म पूछ कर हिन्दू बहन-बेटियों के सामने उनका सिन्दूर उजाड़ा जाए, यह कोई सभ्य समाज स्वीकार नहीं कर सकता। भारत में यह कतई स्वीकार्य नहीं है। भारत सरकार की आतंक के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति रही है, उसी से इसका खात्मा होगा।”

उन्होंने कहा कि CCS बैठक में लिए गए निर्णयों से आतंक के खात्मे की शुरुआत हो चुकी है। सीएम योगी ने कहा कि पूरे भारत को इस दुखद घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास करना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि उन्होंने शुभम द्विवेदी के परिवार से उलाक्त कर संवेदना प्रकट की है।

सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि आतंकी छोड़े नहीं जाएँगे। उन्होंने कहा, “जिस तरीके से हिन्दू माँ-बहनों के सामने उनके सिन्दूर के साथ जो बर्बर कृत्य किया गया है, इसी प्रकार से आतंकियों और उनके आकाओं को इसकी सजा जरूर मिलेगी, इसमें कोई सन्देश किसी को नहीं होना चाहिए।”

सीएम योगी ने कहा है कि यह सरकार आतंकियों पर से मुकदमा वापस लेने वाली नहीं बल्कि उनका सफाया करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि इस घटना के परिणाम अब जो आएँगे, उसको पूरा देश देखेगा। सीएम योगी के साथ इस दौरान और कई बड़े नेता शुभम द्विवेदी के घर मौजूद रहे।

दो माह पहले हुई थी शुभम की शादी

12 फरवरी 2025 को शुभम का विवाह ऐशान्या के साथ हुआ था। शादी के बाद पूरे परिवार ने कश्मीर घूमने की योजना बनाई थी और 17 अप्रैल को वे सभी कश्मीर पहुँचे थे। जिस समय शुभम की हत्या की गई, उस समय वे पत्नी ऐशान्या के साथ घुड़सवारी करने के लिए ऊपर पहाड़ी पर निकले थे। वहीं, शुभम के पिता और अन्य परिजन नीचे ही ही रुक गए थे।

मृतक शुभम की पत्नी ऐशान्या ने बताया कि जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, उसी समय हमलावर आए। आतंकियों ने उनसे उनका नाम पूछा और कलमा पढ़ने को कहा। इसके बाद आतंकियों ने उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने आनन-फानन में उन्हें कश्मीर भेजा। कश्मीर के अस्पताल में शुभम की उपचार के दौरान मौत हो गई।

पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने हिंदुओं का किया कत्लेआम, वैष्णो देवी भी नहीं जा रहे लोग: जम्मू-कश्मीर में टूरिज्म धड़ाम, 90% बुकिंग कैंसिल

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले का असर अब देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों पर दिख रहा है। इस हमले के बाद लगभग 90% पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा बुकिंग रद्द करवा दी है। पर्यटक इस हमले के बाद नहीं जम्मू-कश्मीर नहीं जाना चाहते।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई ट्रैवल एजेंसियों ने कहा है कि उनके पास जम्मू-कश्मीर के लिए होने वाली 90% बुकिंग रद्द हो गई है। बुकिंग एजेंसियों ने बताया है कि यह यात्राएँ आगामी गर्मी की छुट्टियों में होने वाली थीं लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लोग वहाँ नहीं जाना चाहते।

दिल्ली एक ट्रैवल एजेंसी ने बताया है कि मई में कश्मीर जाने वाले 25 लोगों ने भी अपनी बुकिंग रद्द करने के लिए अनुरोध किया है। एक दूसरी ट्रैवल एजेंसी के मालिक ने बताया है कि कश्मीर जाने के लिए उनके पास बस, फ्लाइट और होटल की पहले से ही कई परिवारों की बुकिंग थी, लेकिन हमले की खबर फैलते ही उन्हें लगातार बुकिंग रद्द करने के लिए फोन आने लगे।

कश्मीर में यात्रा करवाने के लिए काम करने वाली एक एजेंसी के मालिक ने मीडिया ने बताया कि उनके पास अप्रैल और मई के महीने के लिए 20 से ज्यादा बुकिंग थीं, जिनमें से लगभग सभी रद्द हो गई हैं। उन्होंने बताया कि लोग अपनी बुकिंग का पैसा वापस भी माँग रहे हैं।

जम्मू कश्मीर में हुए इस हमले के बाद ट्रैवल एजेंसिया भी सांसत में पड़ी हैं। एक एजेंसी ने बताया है कि कि एक बार फ्लाइट और होटल की बुकिंग हो गई तो वे नॉन-रिफंडेबल होती है, लेकिन आतंकी हमले के बाद ट्रैवल एजेंसियों पर पर्यटकों द्वारा कैंसिलेशन और पैसें वापस करने के लिए पर दवाब है।

इस बीच पर्यटकों को अपनी टिकट कैंसिल करने पर कैंसिलेशन चार्ज न देना पड़े, इसके लिए पर्यटन मंत्रालय ने सभी बुकिंग एजेंसियों से यात्रियों के साथ सहयोग की अपील करते हुए कैंसलेशन शुल्क नहीं लेने की अपील भी की है।

जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थलों के अलावा धार्मिक स्थानों पर भी लोग जाने से बच रहे हैं। एक ट्रैवल एजेंसी ने मीडिया को जानकारी दी है कि पहलगाम में आतंकी हमले के बाद वैष्णों देवी के दर्शन के लिए जा रहे परिवारों ने भी अपनी बुकिंग रद्द कर दी है।

गौरतलब है कि कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को इस्लामी आतंकियों ने हमला किया। उन्होंने यहाँ मौजूद हिन्दू पर्यटकों को अलग किया। इसके लिए उन्होंने उनके आईडी कार्ड देखे और कुरान की आयतें पढ़ने को कहा। कई पुरुषों के पैंट खोल कर देखे गए।

इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई है। इनमें 2 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। एक दर्जन से अधिक पर्यटक घायल भी हैं, जिनका इलाज चल रहा है। इस हमले को लेकर देश में काफी गुस्सा है और इसके बदले की माँग की जा रही है। भारत ने पाकिस्तान पर इस संबंध में कई कूटनीतिक एक्शन लिए हैं।

नई दिल्ली में आधी रात हुई पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक की पेशी, फौजी सलाहकारों को भारत छोड़ने का हुक्म: पहलगाम हमले के बाद ‘आतंकी मुल्क’ पर धड़ाधड़ कूटनीतिक स्ट्राइक

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के साथ ही भारत ने दिल्ली में पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक साद अहमद वराइच को तलब किया और औपचारिक पर्सोना नॉन ग्रेटा नोट सौंपा।

पर्सोना नॉन ग्रेटा एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ होता है “अवांछित व्यक्ति”। यह आमतौर पर एक राजनयिक या राजनयिक कर्मचारी के लिए प्रयोग किया जाता है जिसे किसी देश द्वारा अवांछित घोषित किया गया है और उसे देश को छोड़ने के लिए कहा जाता है। भारत ने तीन पाकिस्तानी राजनयिकों को औपचारिक अवांछित व्यक्ति यानी पीएनजी घोषित किया। अब ये लोग भारत में नहीं रह सकते। इनमें पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा , नौसेना और वायु सेना के सलाहकार शामिल है।

इन तीन पाकिस्तान के राजनयिकों को एक हफ्ते के भीतर भारत छोड़ना होगा। इधर ये भी कहा जा रहा है कि भारत भी अपने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग से अपने रक्षा, नौसेना और वायु सेना के सलाहकारों को वापस बुलाएगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति यानी सीसीएस की बैठक ली। 24 अप्रैल 2025 को सर्वदलीय बैठक भी हो रही है। इसमें पहलगाम आतंकी हमले के बाद की स्थिति, सुरक्षा, पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए कदमों समेत तमाम मुद्दे पर चर्चा होगी।

भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े कदम उठा लिए हैं। सिंधु जल समझौता रद्द करना, अटारी पोस्ट बंद करना, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर रोक लगाना और इसके बाद उच्चायोग के तीन सलाहकारों को देश छोड़ने का आदेश देना शामिल है।

सिंधु जल समझौता 1960 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ था जिसके तहत सिंधु और उसकी सहायक नदियाँ सतलुज, रावी, व्यास, चिनाव का पानी पाकिस्तान को मिलेगा। लेकिन अब भारत ने कहा है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देना जारी रखेगा, भारत सिंधु जल समझौते को नहीं मानेगा

अटारी का चेक पोस्ट पाकिस्तानी व्यापारियों के लिए अहम है जो सड़क मार्ग से आवाजाही करते हैं। अब इनकी एंट्री बंद हो जाएगी। हालाँकि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं वो 1 मई से पहले इस रास्ते से सीमा पार कर सकते हैं।

सार्क वीजा छूट भी पाकिस्तानी नागरिकों के लिए भारत ने रद्द कर दिए हैं। अब पाकिस्तान का नागरिक भारत नहीं आ पाएगा।

बगैर गोली चलाए भारत ने पाकिस्तान का हुक्का पानी बंद कर बड़ा कूटनीतिक हमला किया है। इन फैसलों से भीख का कटोरा लेकर दुनियाभर में घूम रहा पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को गर्त में जाते हुए देखेगा। भारत ने अपने 5 बड़े फैसलों से साबित कर दिया है कि देश अब आतंकी हमले के खिलाफ जोरदार एक्शन ले रहा है।

क्या है सिंधु जल समझौता, मोदी सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद क्यों लिया एक्शन, ‘भिखमंगा पाकिस्तान’ पर क्या होगा असर: जानिए सब कुछ

पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर भारत ने एक्शन लेना चालू कर दिया है। पाकिस्तान प्रायोजित इस आतंकी हमले के बाद भारत ने कूटनीतिक कदम उठाए हैं। भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का फैसला ले लिया है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में हुई सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने लिया है।

इसके अलावा पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करने, अटारी सीमा बंद करने और पाकिस्तानियों को देश निकाला देने का फैसला लिया है। इन सबमें सबसे बड़ी चोट सिंधु जल समझौते को रद्द करके की ही गई है। इसकी माँग भी लम्बे समय से हो रही थी।

क्या है सिन्धु जल समझौता?

भारत और पाकिस्तान, एक ही भूभाग का हिस्सा है। भारत से कई नदियाँ बह कर पाकिस्तान जाती हैं। सिंधु नदी तंत्र की नदियाँ पाकिस्तान के पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। इन्हीं के पानी के बँटवारे को लेकर किया गया समझौता सिंधु जल समझौता कहलाता है।

यह समझौता वर्ष 1960 में हुआ था। इसके लिए लगभग एक दशक तक बातचीत पाकिस्तान और भारत के बीच चली थी। तब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के तानाशाह अयूब खान ने इसको मंजूरी दी थी। सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु नदी तंत्र की 6 नदियों (व्यास, रावी, सतलुज, सिन्धु, चेनाब और झेलम) के पानी का बँटवारा होता है।

इस जल समझौते के अनुसार, पूर्वी नदियाँ (व्यास, रावी और सतलुज) के पानी पर पूरा अधिकार भारत का है। यानी इनमें बहने वाले पानी का वह किसी भी तरह से इस्तेमाल कर सकता है। भारत इन नदियों पर बाँध बना सकता है, उनकी जलधाराएँ मोड़ सकता है, उनसे नहरें निकाल सकता है और पूरा उपयोग कर सकता है।

सिंधु जल समझौते के अनुच्छेद 2 का खंड (1) कहता है, “पूर्वी नदियों का पूरा पानी भारत के अप्रतिबंधित उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा, सिवाय इसके कि इस अनुच्छेद में अन्यथा अलग से उसके लिए कोई प्रावधान किया गया हो।” पूर्वी नदियों को लेकर पाकिस्तान को दखलअंदाजी करने का कोई अधिकार नहीं है।

इसको लेकर भी अनुच्छेद 2 के खंड (2) में प्रावधान है। इसमें लिखा है, “घरेलू उपयोग को छोड़कर, पाकिस्तान सतलुज और रावी नदियों के पानी को बहने देने के लिए बाध्य होगा और उन स्थानों पर इनके पानी में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होने देगा, जहाँ ये पाकिस्तान में बहती हैं और अभी तक पूरी तरह से पाकिस्तान में प्रवेश नहीं कर पाई हैं।”

दरअसल, यह नदियाँ पाकिस्तान में अंतिम रूप से घुसने से पहले कई बार दोनों सीमाओं के इधर-उधर बहती हैं। पूर्वी नदियों के अलावा बाक़ी पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) के पानी पर पूरा अधिकार पाकिस्तान का है। समझौता के अनुसार, भारत इन नदियों को लेकर कोई भी रोक नहीं लगा सकता।

समझौते का अनुच्छेद 3 का भाग (2) कहता है, “भारत पश्चिमी नदियों के जल को बहने देने के लिए बाध्य होगा, और इसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा, कुछ परिस्थितियों को छोड़ कर।” यह परिस्थितियाँ घरेलू उपयोग और कृषि उपयोग से जुड़ी हुई हैं।

इस समझौते के तहत इन 6 नदियों के लगभग 70%-80% पानी पर पाकिस्तान को जबकि 20%-30% पानी पर भारत को अधिकार मिलता है। इसको लेकर पहले भी प्रश्न उठाए जाते रहे हैं कि इसका सीधा फायदा पाकिस्तान को मिला है और भारत का इससे कोई लाभ नहीं है।

क्यों सस्पेंड हो गया समझौता?

बुधवार (23 अप्रैल, 2025) को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सिंधु जल समझौते के निलंबन की घोषणा की। भारत ने बताया कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमले में पाकिस्तान का रोल सामने आया है, ऐसे में समझौते को भारत निलंबित कर रहा है। इस हमले में 28 लोगों की हत्या इस्लामी आतंकियों ने कर दी है। मरने वाले अधिकांश हिन्दू हैं, जिन्हें धर्म पूछ कर मारा गया।

भारत ने स्पष्ट कर दिया कि यह समझौता तब ही वापस अमल में लाया जाएगा जब पाकिस्तान आतंक पर ठोस कार्रवाई करना चालू करेगा। सिंधु जल समझौते पर इतना बड़ा एक्शन इससे पहले कभी नहीं लिया गया था। यहाँ तक कि 1965 युद्ध, 1971 युद्ध और कारगिल के दौरान भी इसे कूटनीतिक विकल्पों के तहत नहीं लाया गया था।

इससे पहले 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने समझौते को ‘रिव्यू’ करने की बात कही थी। भारत इससे पहले भी कई बार पाकिस्तान को नोटिस भेज कर समझौते की शर्तों में बदलाव की माँग कर चुका है। हालाँकि, उस पर कोई आगे ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

इससे पाकिस्तान पर क्या असर?

पाकिस्तान की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी खेती पर निर्भर है। उसका खेती का इलाका भी पंजाब और सिंध में सिमटा हुआ है। बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वाह जैसे राज्य सूखे मरुस्थल जैसे हैं। पाकिस्तान में होने वाली खेती के लिए 90% पानी सिंधु नदी तंत्र से आता है। यह पानी भारत से ही बह कर जाता है।

सिंधु नदी तंत्र से आने वाला पानी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 25% हिस्से के लिए जिम्मेदार है। पाकिस्तान पहले से ही पानी की किल्लत झेल रहा है। ऐसे में भारत का यह समझौता निलंबित करना उसके लिए बड़ा झटका है। यह पानी रुकने से उसकी खेती तो प्रभावित होगी ही, कराची और लाहौर जैसे बड़े शहर भी पानी के लिए तरस जाएँगे।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के निलंबित होने के बाद यह पानी पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए भारत को नए बाँध बनाने होंगे, इससे ही पूरी तरह यह कार्रवाई अमल में आ पाएगी। हालाँकि, भारत तुरंत भी पाकिस्तान को चोट दे सकता है। भारत अपने हिस्से में इन नदियों की धाराएँ अस्थायी रूप से सेना और बाकी विभाग को काम पर लगाकर मोड़ सकता है।

इसके अलावा भारत इन नदियों में बहने वाले पानी की मात्रा, इनके जलस्तर, बहाव की गति और बाकी डाटा भी अब पाकिस्तान के साथ साझा नहीं करेगा। ऐसे में पाकिस्तान को बाढ़ और पानी में कमी का अंदाजा भी नहीं लगा पाएगा। यह स्थिति उसके लिए आगामी मानसून में और भी विकट होगी।

पाकिस्तान का क्या रुख ?

भारत के यह समझौता रद्द करने के बाद पाकिस्तान में हलचल तेज है। अभी पाकिस्तान का भारत इस फैसले पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की एक बैठक गुरुवार (24 अप्रैल, 2025) को बुलाई है। कयास हैं कि इसके बाद पाकिस्तान इस मामले को लेकर कोई प्रतिक्रिया देगा।

पाकिस्तान इससे पहले भी समझौते को रद्द करने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाने की बात कहता आया है। हालाँकि, इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ने वाला है। पाकिस्तान में इस समय इस बात को लेकर भी खौफ है कि भारत इन कूटनीतिक क़दमों के अलावा और क्या सैन्य एक्शन लेगा।

पहलगाम में रिपोर्टिंग करने गईं चित्रा त्रिपाठी पर टूटी इस्लामी भीड़, सब Video में कैद: पत्रकार ने कहा- 24 घंटे में उतर गया इनका नकाब, मंत्री बोले- कश्मीर और कश्मीरियत की यही हकीकत

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद वहाँ रिपोर्टिंग करने गईं ABP न्यूज की पत्रकार चित्रा त्रिपाठी के साथ बदसलूकी का मामला सामने आया है। वीडियो वायरल है। इसमें स्थानीय भीड़ चित्रा त्रिपाठी पर भड़कती दिख रही है। पत्रकार बार-बार चिल्लाकर बता रहीं हैं कि वो बस अपना काम करने आई हैं लेकिन भीड़ बिलकुल उनकी नहीं सुन रही और उन्हें घेरकर खड़ी है।

क्या है वायरल वीडियो में

वीडियो में दिख रहा है कि चित्रा त्रिपाठी स्थानीय महिलाओं को समझाने का प्रयास कर रही हैं कि वो सिर्फ अपने काम से यहाँ हैं, मगर पीछे खड़ी भीड़ उन्हें वहाँ रुकने नहीं देती। वो फिर कहती हैं- “मैं जर्नलिस्ट हूँ लेकिन आप मेरे साथ गाली-गलौच कर रहे हैं- ये बेहद गलत बात है… मारना है तो मार दो।”

इसके बाद कुछ लोग चित्रा से बात करने लगते हैं और पीछे से एक समूह जोर-जोर से गोदी मीडिया हाय-हाय के नारे लगाते रहता है। वीडियो में कुछ मुस्लिम युवकों का ‘गुलिस्तां हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं’ जैसे नारे लगाते भी देखा गया। इसके अलावा – कश्मीर से आवाज आई- ‘हिंदू मुस्लिम भाई-भाई भी चिल्लाते लोगों को देखा गया।’

‘कश्मीर की यही हकीकत’

वीडियो को सोशल मीडिया पर असम के मंत्री अशोक सिंघल ने भी साझा किया है। उन्होंने लिखा, “चित्रा त्रिपाठी की लगभग लिंचिंग हो गई थी। यही कश्मीर और कश्मीरियत की हकीकत है। आप आप उन लोगों के साथ शांति वार्ता नहीं कर सकते जिनका अस्तित्व आपके विनाश पर निर्भर करता है।”

‘पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाकर दिखाओ’

वीडियो को सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने साझा किया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा- “24 घंटे से कम समय में ही नकाब उतर गए! कल हिंदुओं को उनका नाम पूछ कर, उनका धर्म जान कर मार दिया गया। आज श्रीनगर में जो पत्रकार हिंदुओं को निशाना बनाने पर रिपोर्टिंग कर रहे थे उन्हें स्थानीय लोगों ने निशाना बनाया। रिपब्लिक टीवी और एबीपी की महिला पत्रकारों को घेर कर हूटिंग की गई और ‘गोदी मीडिया हाय हाय’ के नारे लगाए गए।”

उन्होंने चित्रा त्रिपाठी को घेरकर की गई इस तरह की हूटिंग को शर्मनाक करार देते हुए नारा लगाने वालों से पूछा कि गुर्दा है तो पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगा कर दिखाओ।”

बता दें कि इस वीडियो के सामने आने के बाद एक तरफ जहाँ चित्रा त्रिपाठी को लोग मजबूत रहने के लिए हौंसला दे रहे हैं। वहीं एक धड़ा ऐसा है जो उन्हें घेरकर प्रताड़ित किए जाने को सही ठहरा रहा है। इन समूह के हिसाब से हर गोदी मीडिया के साथ ऐसा ही होना चाहिए। उनका कहना है कि गोदी मीडिया ये क्यों दिखा रहा है कि इस्लामी आतंकियों ने हिंदुओं को निशाना बना दिया जबकि आपको बता दें कि हकीकत ही यही है कि ये बातें खुद चश्मदीदों और पीड़ितों ने बताई हैं।

पीड़ितों ने खुद कहा है कि आतंकी आए, नाम पूछा, पैंट उतरवाकर खतना देखा और हिंदू निकलने पर लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। बावजूद इसके ये धड़ा इस हमले को ऐसे दिखाने पर जुटा है जैसे इसमें सारी गलती मीडिया कि है कि वो क्यों इस्लामी कट्टरपंथियों का चेहरा उजागर कर रही हैं।

सिंधु जल समझौता निलंबित, पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द, अधिकारियों को देश-निकाला, अटारी सीमा बंद: पहलगाम हमले के बाद एक्शन में भारत

भारत ने अब बयानबाज़ी की जगह एक्शन के जरिए पाकिस्तान को जवाब देना शुरू कर दिया है। जहाँ एक तरफ जम्मू कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में 28 भारतीयों का ख़ून बहाने वाले आतंकियों के ख़िलाफ़ सफाया अभियान शुरू कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ़ भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबावों की परवाह किए बिना इतिहास में हुए भूलों को सुधारने की कार्रवाई शुरू कर दी है। अपना सऊदी अरब दौरा बीच में ही स्थगित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमले के एक दिन बाद बुधवार (23 अप्रैल, 2025) को भारत लौट आए। इसके बाद CCS (कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी) की बड़ी बैठक हुई।

भारत ने बड़ा फ़ैसला लेते हुए न केवल सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया है, बल्कि भारत में मौजूद कई पाकिस्तानी राजनयिकों एवं कर्मचारियों ‘अवांछनीय’ करार दिया है, जिसके बाद उन्हें अपने मुल्क़ वापस लौटना पड़ेगा। साथ ही अनंतनाग पुलिस ने इस ख़तरनाक हमले में शामिल सभी आतंकियों की सूचना के लिए 20 लाख रुपए का इनाम रखा गया है। साथ ही गुरुवार (24 अप्रैल, 2025) को इस संबंध में सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को इसके लिए सभी दलों से बात करने की जिम्मेदार सौंपी गई है।

साथ ही पाकिस्तानियों के लिए किसी भी प्रकार की वीजा की सुविधा को निलंबित कर दिया गया है। एक के बाद एक करके मोदी सरकार ने पाकिस्तान की नकेल कस दी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने इन फ़ैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि नई दिल्ली में मौजूद पाकिस्तान के रक्षा, सैन्य, नौसेना-विषयक अधिकारियों व एयर अडवाइजर्स को देश छोड़ने के लिए कह दिया गया है। उन्हें इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। साथ ही इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाई कमीशन से भी सभी कर्मचारियों को वापस बुला लिया गया है। दोनों हाई कमिशनों में ऐसे सभी पदों को रद्द कर दिया गया है।

सर्विज एडवाइजरों के पाँच सपोर्ट स्टाफ भी दोनों हाई कमिशनों से हटाए जाएँगे। 1 मई, 2025 से कार्रवाई करते हुए हाई कमीशन में मौजूद कर्मचारियों की संख्या को 55 से 30 पर लाया जाएगा। अटारी स्थित इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट को भी बंद कर दिया गया है। इस रास्ते से यहाँ वैध तरीके से आने वालों को 1 मई, 2025 तक वापस जाने के लिए कह दिया गया है। साथ ही SAARC वीजा एक्सेम्पशन स्कीम (SVES) के तहत भारत में मौजूद सभी पाकिस्तानियों का वीजा रद्द कर दिया गया है।

उन्हें देश छोड़ने के लिए 48 घंटों का समय दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित CCS की बैठक में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की गई। सभी सशस्त्र बलों को हाई अलर्ट पर रहने को बोल दिया गया है। न केवल इस घटना को अंजाम देने वाले आतंकियों, बल्कि उनके पीछे जो लोग हैं उन्हें भी सज़ा देने का ऐलान किया गया है। तहव्वुर राना को 26/11 आतंकी हमला के मामले में भारत लाए जाने का उदाहरण देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर भागने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।