Home Blog Page 407

ISF के उपद्रवियों की आगजनी, पुलिस पर भी हमला: मालदा, मुर्शिदाबाद और सिलीगुड़ी के बाद अब दक्षिणी 24 परगना में भड़की हिंसा

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर में सोमवार (14 अप्रैल 2025) को वक्फ (संशोधन) कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी। जहाँ इस्लामी कट्टरपंथी तत्वों की मौजूदगी से भरे इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ जमकर झड़प की।

इंडियन सेक्युलर फ्रंट के हिंसक प्रदर्शन में कई पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, जिसमें एक वैन और कई दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। पुलिस ने बताया कि इस झड़प में आठ पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि एक ISF कार्यकर्ता के सिर में चोट लगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISF समर्थक कोलकाता के रामलीला मैदान में वक्फ कानून के खिलाफ रैली के लिए जा रहे थे। इस रैली को भांगर के विधायक और ISF नेता नौशाद सिद्दीकी संबोधित करने वाले थे। पुलिस ने बिना अनुमति के रैली की जानकारी मिलने पर बसंती हाईवे के पास भोजेरहाट में बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका। इससे नाराज इस्लामी भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और पथराव शुरू कर दिया। हालात बेकाबू होने पर पुलिस को लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया और वाहनों में आग लगा दी। कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।” प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ISF कार्यकर्ताओं ने बसंती हाईवे पर धरना देकर रास्ता जाम कर दिया, जिससे घंटों ट्रैफिक बाधित रहा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया। कुछ देर बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हुए और इलाके में शांति बहाल हो गई।

नौशाद सिद्दीकी ने वक्फ कानून को “मुसलमानों और संविधान पर हमला” करार देते हुए इसे वापस लेने की माँग की। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी ने कहा है कि बंगाल में यह कानून लागू नहीं होगा, फिर पुलिस हमें शांतिपूर्ण रैली क्यों रोक रही है?” ISF ने बीजेपी पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने और तृणमूल कॉन्ग्रेस पर विरोध दबाने का आरोप लगाया।

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक शौकत मोल्ला ने ISF को ‘महत्वहीन पार्टी’ बताते हुए कहा, “ये लोग अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इनका कोई जनाधार नहीं है।” बीजेपी ने हिंसा के लिए ममता सरकार को जिम्मेदार ठहराया। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने इसे “जिहादी ताकतों का सुनियोजित हमला” बताया और केंद्र से हस्तक्षेप की माँग की।

यह हिंसा मुर्शिदाबाद की घटनाओं के बाद हुई, जहाँ वक्फ कानून के विरोध में शुक्रवार और शनिवार को इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा में तीन लोग मारे गए। वहाँ 200 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए। मुर्शिदाबाद के सुती, धुलियान और जंगीपुर में दुकानें, घर और होटल जलाए गए। हिंसा के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश दिया।

बता दें कि ममता बनर्जी ने शनिवार (12 अप्रैल 2025) को ऐलान किया था कि उनकी सरकार बंगाल में वक्फ कानून लागू नहीं करेगी। उन्होंने सभी धर्मों से शांति बनाए रखने की अपील की। फिर भी भांगर की घटना ने साबित कर दिया कि राज्य में तनाव कम नहीं हुआ है। पुलिस ने हाई अलर्ट जारी कर इलाके में निगरानी बढ़ा दी है।

हरियाणा के इस शख़्स को ख़ुद PM मोदी ने पहनाए जूते, जानिए क्यों 14 सालों से नंगे पाँव थे रामपाल कश्यप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जमीन से जुड़े स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। उन्हें कई बार मजदूरों पर फूल बरसाते और सफाईकर्मियों के पाँव धोते भी देखा गया है। सोचिए, अगर किसी व्यक्ति को देश का प्रधानमंत्री ख़ुद जूते पहनाए, तो उसे कैसा लगेगा। हरियाणा में यही हुआ है। कैथल के रामपाल कश्यप ने डेढ़ दशक पहले प्रण लिया था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बन जाने और उनसे मिलने के बाद ही वो जूते पहनेंगे, वरना नंगे पाँव रहेंगे। अब ख़ुद पीएम मोदी ने उनकी मुराद पूरी कर दी है।

इतना ही नहीं, इस वीडियो को ख़ुद पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करते हुए लिखा, “हरियाणा के यमुनानगर में कैथल के रामपाल कश्यप जी से मिलने का सौभाग्य मिला। इन्होंने 14 वर्ष पहले एक व्रत लिया था कि ‘मोदी जब तक प्रधानमंत्री नहीं बन जाते और मैं उनसे मिल नहीं लेता, तब तक जूते नहीं पहनूँगा।’ मुझे आज उनको जूते पहनाने का अवसर मिला। मैं ऐसे सभी साथियों की भावनाओं का सम्मान करता हूँ, परंतु मेरा आग्रह है कि वो इस तरह के प्रण लेने के बजाए किसी सामाजिक अथवा देशहित के कार्य का प्रण लें।”

प्रधानमंत्री ने सलाह दी है कि उनके लिए कोई ऐसे प्रण न ले, लेना भी हो तो देशहित व समाज कल्याण में ऐसे शपथ लें। वीडियो में उन्होंने रामपाल कश्यप को नए जूते देने के बाद पूछा, “ठीक से आ गया?”, जिसपर रामपाल ने जवाब दिया – “हाँ”। प्रधानमंत्री ने ख़ुद जूते पहनाने में उनकी मदद की। साथ ही उन्हें सलाह दी थी जूते पहनते रहना। रामपाल कश्यप ने कहा कि आपके दर्शन हो गए, अब जूते पहनूँगा। इसके बाद पीएम मोदी ने पूछा कि क्या उन्हें मन में पूरा यकीन था कि पीएम से मुलाकात होगी?

इसपर रामपाल कश्यप ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था। पीएम मोदी ने (सोमवार 14 अप्रैल, 2025) को हरियाणा को हिसार में पहले एयरपोर्ट की भी सौगात दी। आंबेडकर जयंती के अवसर पर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने बाबासाहेब की प्रेरणा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं, लेकिन संविधान के नाम पर राजनीतिक रोटी सेंकने वालों ने उनसे जुड़े पवित्र स्थानों का ना सिर्फ अपमान किया, बल्कि इतिहास से मिटाने का प्रयास भी किया।

ग्रेटर नोएडा में फॉक्सकॉन लगाएगा 300 एकड़ का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, 40 हजार नौकरियाँ मिलेंगी: चीन पर अमेरिकी टैरिफ से भारत को फायदा

चीनी उत्पादों पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ से भारत को फायदा हो सकता है। दुनिया भर में आईफोन की सबसे प्रसिद्ध कंपनी एप्पल अब टैरिफ के कारण चीन से अपने मैनुफैक्चरिंग प्लांट को हटाने पर विचार कर रही है। इसके लिए आईफोन बनाने वाली कंपनी फॉक्सकॉन अब उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में मैनुफैक्चरिंग प्लांट लगाने की योजना बना रहा है।

मैनुफैक्चरिंग के मेगा प्लांट लिए यमुना एक्सप्रेस के पास 300 एकड़ की जमीन खोजी जा रही है। उत्तर भारत में फॉक्सकॉन की ये पहली सुविधा होगी। भारत के दक्षिणी राज्यों में से बेंगलुरू, श्रीपरंबुदुर और हैदराबाद में मैनुफैक्चरिंग प्लांट पहले से ही लाए जा चुके हैं। साथ ही ग्रेटर नोएडा में शुरू होने वाली यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सुविधा होगी।

40 हजार नई नौकरियाँ

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नया प्लांट के शुरू होने के बाद 40 हजार से भी अधिक नौकरियाँ निकलेंगी। साथ ही प्लांट के परिसर में ही में लोगों को रहने की भी सुविधा मिलेगी। फॉक्सकॉन एप्पल के साथ सोनी और माइक्रोसॉफ्ट के लिए भी उत्पाद तैयार करती है। एक खास बात ये भी है कि दुनिया भर के लगभग 50 प्रतिशत मोबाइल फोन ग्रेटर नोएडा में तैयार होकर भारत से निर्यात किए जाते हैं। ऐसे में इस जगह को चुनना कंपनी के लिए फायदेमंद सिद्ध हो सकता है।

नोएडा में प्लांट की खास वजह

नोएडा में कई मैनुफैक्चरिंग यूनिट हैं। ऐसे में यहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सप्लायर और काम के लिए स्थानीय लोग भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे से लगे होने के कारण नोएडा आसानी से पहुँचा जा सकता है। एक्सप्रेसवे, जेवर में बन रहे नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों से जोड़ता है।

ग्रेटर नोएडा में मैनुफैक्चरिंग यूनिट खोलने से फॉक्सकॉन (Foxconn) को आगे चलकर इलेक्ट्रॉनिक्स मैनुफैक्चरिंग सर्विसेज के लिए बेहतर अवसर मिल सकते हैं। इससे कई अन्य कंपनियों के लिए भी कंपनी उत्पाद तैयार कर सकती है।

तेलंगाना ने SC आरक्षण में लागू किया वर्गीकरण का फैसला, अब 3 श्रेणियों में मिलेगा रिजर्वेशन: जानिए क्या है पूरा फैसला

तेलंगाना सरकार ने राज्य में अनुसूचित जाति आरक्षण व्यवस्था में वर्गीकरण लागू किया है। यह फैसला आरक्षण के ढाँचे में बड़ा बदलाव लाने वाला है। अब एससी समुदायों को तीन समूहों में बाँटा जाएगा ताकि आरक्षण का लाभ जरूरतमंदों तक सही तरीके से पहुँचे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (14 अप्रैल 2025) को राज्य के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति शमीम अख्तर (सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज) की अध्यक्षता में बनी आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकारी आदेश (जीओ) जारी कर दिया है।

नए आरक्षण वर्गीकरण के अनुसार

समूह I: सबसे पिछड़े 15 समुदाय – 1% आरक्षण

समूह II: मध्यम रूप से लाभान्वित 18 समुदाय – 9% आरक्षण

समूह III: अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति वाले 26 समुदाय – 5% आरक्षण

कुल मिलाकर, एससी वर्ग के लिए पहले से मौजूद 15% आरक्षण को अब इन तीन समूहों में बाँट दिया गया है।

इस फैसले की घोषणा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल) पर की गई। मंत्री रेड्डी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा, “पहले की सरकारों ने केवल प्रस्ताव पास किए, हमने उसे जमीन पर उतारा है।”

अब राज्य में होने वाली सभी सरकारी भर्तियाँ और शैक्षिक दाखिले इसी नए मॉडल के तहत होंगे। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 2026 की जनगणना में एससी की आबादी बढ़ने पर आरक्षण प्रतिशत को फिर से तय किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने खोला रास्ता

इस कदम की नींव अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की संविधान पीठ के ऐतिहासिक फैसले ने रखी थी। कोर्ट ने 6:1 बहुमत से यह स्पष्ट किया था कि एससी/एसटी समुदायों के भीतर उप-वर्गीकरण किया जा सकता है ताकि असल में वंचित समूहों को अधिक फायदा मिल सके। 2004 के ई.वी. चिन्नैया फैसले को पलटते हुए कोर्ट ने कहा कि सभी जातियाँ समान रूप से पिछड़ी नहीं होतीं, इसलिए आरक्षण का बँटवारा भी समान रूप से नहीं हो सकता।

चरक पूजा में श्रद्धालुओं पर हमला: मालदा-मुर्शिदाबाद के बाद अब सिलीगुड़ी में मुस्लिम भीड़ का उत्पात, साधुओं को भी नहीं छोड़ा

मालदा व मुर्शिदाबाद के बाद बाद अब पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हिन्दू विरोधी हिंसा शुरू हो गई है। साधुओं पर भी हमले की ख़बर है। स्थानीय भाजपा विधायक शंकर घोष ने जानकारी दी कि रविवार (13 अप्रैल, 2025) को वार्ड संख्या 4 के 2 लड़के चरक पूजा के लिए महानंदा नदी का जल लेने गए थे, लेकिन नदी किनारे बैठे 5 लड़कों ने उन दोनों हिन्दू लड़कों पर बोतल फेंके। जब उन दोनों ने इसका विरोध किया तो उन्हें बुरी तरह पीटा गया। शंकर घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब हिन्दू होना पाप हो गया है।

विधायक शंकर घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐसा माहौल बनाया है। दोनों घायल हिन्दू लड़कों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। शंकर घोष ने याद दिलाया कि कैसे शमशेरगंज में हरगोविंद दास और उनके बेटे चन्दन दास को घर में घुसकर मार डाला गया। उधर ‘रिपब्लिक बांग्ला’ ने अपनी ख़बर में 2 साधुओं पर हमले की ख़बर दी है। पीड़ित लड़कों में से एक माणिक सरकार ने बताया कि वो लोग चरक पूजा में लगे हुए थे, उसी दौरान उनपर बोतलों से हमला किया गया।

उन्होंने बताया कि विरोध करने पर कुछ देर बाद वो लोग ख़तरनाक हथियारों के साथ लौटे। घटनास्थल पर पत्थर और डंडे पड़े हुए देखा जा सकते हैं। वहीं साधुओं पर हमले के वीडियो में क्षतिग्रस्त गाड़ी देखी जा सकती है। घटना सिलीगुड़ी के ज्योतिनगर की है। ‘उत्तर बांग्ला संवाद’ के अनुसार, कई घरों में भी तोड़फोड़ की गई। टोटो क्षतिग्रस्त कर दिया गया। ईंट-पत्थर फेंके गए। सिलीगुड़ी के कमिश्नर C सुधाकर और डिप्टी कमिश्नर (हेडक्वार्टर) तन्मय सरकार मौके पर पहुँचे।

घटनास्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस के जवान कैम्प कर रहे हैं। शहर को अलर्ट पर रखा गया है, पुलिस स्थिति के नियंत्रण में होने की बात कह रही है। उधर मुर्शिदाबाद में राज्य के 23 दक्ष पुलिस अधिकारियों को मामला सँभालने के लिए भेजा गया है। मुर्शिदाबाद और मालदा में लगभग 400 हिन्दू परिवारों ने पलायन किया है। वक्फ कानून के विरोध के नाम पर दंगे हुए। मुस्लिम भीड़ ने रेलवे सेवा ठप्प कर दी। सार्वजनिक व प्राइवेट वाहनों को आग के हवाले किया गया।

गुना में बुलडोजर एक्शन को लेकर हिंदुओं का प्रदर्शन, पुलिस ने किया लाठीचार्ज: हनुमान जयंती शोभायात्रा पर मस्जिद के पास हुई थी पत्थरबाजी

मध्य प्रदेश के गुना में हनुमान जयंती के जुलूस पर हुए पथराव के बाद तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा। सोमवार (14 अप्रैल 2025) को विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल ने हिंसा करने वालों के खिलाफ हनुमान चौक पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता हमलावरों के घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान कुछ नकाबपोश युवकों ने बस्तियों में पथराव किया, जिससे हालात और बिगड़ गए। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसपी संजीव कुमार सिन्हा ने खुद लाठी लेकर उपद्रवियों को खदेड़ा। उन्होंने कहा, “स्थिति सामान्य है, पुलिस तैनात है। असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई होगी।” कलेक्टर किशोर कान्याल ने भी अफवाहों से बचने की अपील की।

बता दें कि शनिवार (12 अप्रैल 2025) को कर्नलगंज इलाके में मदीना मस्जिद के पास जुलूस पर हमला हुआ। डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद पथराव और हिंसा में बदल गया। हमलावरों ने पत्थर, बेल्ट और धारदार हथियारों से हमला किया। बीजेपी पार्षद ओमप्रकाश कुशवाह (गब्बर) के 11 साल के बेटे अकुल सहित कई लोग घायल हुए। हनुमान की वेशभूषा में समर्थ नामक युवक पर बेल्ट से हमला हुआ, उनके कपड़े फाड़े गए और गालियाँ दी गईं। एक वायरल वीडियो में युवक तलवार लहराता दिखा। पुलिस ने मुख्य आरोपित विक्की खान, यूसुफ खान समेत 17 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पार्षद कुशवाह ने शिकायत में बताया कि आमीन पठान ने उनके ड्राइवर रजत ग्वाल पर पिस्तौल से गोली चलाई, जो कान के पास से निकली। रजत पर लाठी-डंडों से हमला हुआ, जिसमें उनके हाथ में चोट आई। हिंदू संगठनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की माँग की। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने देर रात एसपी से बात कर हालात की जानकारी ली और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

लोगों का कहना है कि त्योहारों के समय माहौल खराब करने की कोशिश की गई। प्रशासन ने ड्रोन और फ्लैग मार्च से निगरानी बढ़ा दी है। कर्नलगंज में शांति है, लेकिन तनाव बरकरार है। फिलहाल, पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर हालात पर काबू पा लिया है।

‘मुस्लिमों के लिए संविधान से पहले शरीयत’: आंबेडकर जयंती पर झारखंड के मंत्री हफीजुल हसन अंसारी का ऐलान, कहा – हमारे सीने में है क़ुरान

झारखंड के खेल एवं युवा मामले व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने शरीयत को संविधान के ऊपर बताया है। बड़ी बात ये है कि उन्होंने ये बयान बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर सोमवार (14 अप्रैल, 2025) को दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शरीयत उनके लिए सबसे बड़ा है। मुस्लिमों की बात करते हुए हफीजुल हसन अंसारी ने कहा कि हम सीने में क़ुरान और हाथ में संविधान रखते हैं। ‘News11 डिजिटल’ से बात करते हुए उन्होंने ये बयान दिया।

उन्होंने कहा कि पहले हम शरीयत को पकड़ेंगे, इसके बाद संविधान को – इस्लाम में वही है। झारखंड की जिस गठबंधन सरकार में वो मंत्री हैं, उसका हिस्सा कॉन्ग्रेस भी है। एक तरफ राहुल गाँधी अपने हर कार्यक्रम में संविधान का रट्टा लगते रहते हैं, वहीं दूसरी हफीजुल हसन अंसारी के बयान को लेकर उनकी पार्टी ने चुप्पी साधी हुई है। 2024 का पूरा लोकसभा चुनाव संविधान बचाने के नाम पर लड़ा गया। आज I.N.D.I. गठबंधन का मंत्री खुलेआम शरीयत की वकालत कर रहा।

झारखंड की प्रदेश भाजपा ने मंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जिनके सीने में शरीया है, उनके लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के रास्ते खुले हैं। हिंदुस्तान सिर्फ बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर के संविधान से चलेगा और सबसे ऊपर रहेगा।” वहीं गोड्डा से भाजपा संसद निशिकांत दुबे ने कहा, “कॉन्ग्रेस तथा उनके सहयोगियों के लिए बाबासाहेब आंबेडकर जी के संविधान का कोई मूल्य नहीं है। यह हैं झारखंड सरकार के मंत्री हफीजुल अंसारी, इनके अनुसार पहले शरिया क़ानून यानी मुस्लिम संविधान, फिर कोई संविधान। मीडिया कुछ नहीं बोलेगा क्योंकि यह इंडी गठबंधन कह रहा है।”

हफीजुल हसन अंसारी 2021 से ही गोड्डा के मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उससे पहले 4 बार उनके अब्बा हाजी हुसैन अंसारी यहाँ से MLA रह चुके हैं। वो झारखंड में मंत्री बनने वाले पहले व एकमात्र मुस्लिम थे। उनके बाद उनके बेटे को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय सौंपा गया। हाजी हुसैन अंसारी कोरोना पीड़ित होने के बाद चल बसे थे। उनकी ओपन हार्ट सर्जरी भी हुई थी। झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा जनजातीय समाज की जमीनें हड़पने व उनकी लड़कियों को फँसाने के मामले सामने आते रहे हैं।

हाल ही में संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किए गए वक्फ संशोधन क़ानून को लेकर भी हफीजुल हसन अंसारी ने विरोध जताया। उन्होंने वक्फ को 1400 वर्ष पुराना कॉन्सेप्ट बताते हुए केंद्र सरकार पर मुस्लिमों को जेल में भेजने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वक्फ एक्ट भाजपा का एक राजनीतिक स्टंट है, कल को ईसाई व जनजातीय समाज को निशाना बनाते हुए भी क़ानून बनाए जाएँगे। उन्होंने देश-दुनिया में अराजकता की धमकी देते हुए कहा कि मुस्लिम सब्र में है, कब्र में नहीं।

निकाह से किया इनकार तो बांग्लादेश ने अपनी ही मॉडल को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, 30 दिन के लिए जेल में ठूँस दिया: जानिए क्यों मेघना आलम के पीछे पड़ी यूनुस सरकार

2020 में ‘मिस अर्थ बांग्लादेश’ बनीं मॉडल मेघना आलम को गिरफ़्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने मुल्क़ के कूटनीतिक संबंधों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। वहीं उनके अब्बा ने अरब मुल्क़ के एक राजनयिक पर इस मामले का ठीकरा फोड़ा है। पुलिस का कहना है कि फ़िलहाल बिना किसी चार्ज के मेघना आलम को हिरासत में रखा गया है, क्योंकि उन्होंने कुछ ‘महत्वपूर्ण शख़्सियतों’ पर ग़लत आरोप लगाकर बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों को बिगाड़ा है।

पुलिस के प्रवक्ता मोहम्मद तालेबुर रहमान ने कहा कि जिन शख़्सियतों पर आरोप लगाया गया है वो विदेशी नागरिक हैं। 30 वर्षीया मॉडल के अब्बा ने कहा कि ढाका में एक अरब मुल्क़ के पूर्व राजदूत के साथ संबंधों के कारण उनकी बेटी को गिरफ़्तार किया गया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी और उक्त राजदूत रिलेशनशिप में थे, लेकिन उसके बीवी-बच्चे होने के कारण मेघना आलम ने निकाह के प्रस्ताव को नकार दिया था। वहीं मेघना आलम ने लाइव स्ट्रीम के जरिए दिखाया कि उनके घर में पुलिस घुस गई है।

पुलिस का कहना है कि मेघना आलम ने अपनी हरकतों से राज्य की सुरक्षा को बाधित किया है और वित्तीय हितों को भी नुकसान पहुँचाया है। बांग्लादेश के ‘स्पेशल पॉवर्स एक्ट’ के तहत उन्हें गिरफ़्तार किया गया है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में रखा जा सकता है। मानवाधिकार संगठनों ने इसकी निंदा की है। ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने इस गिरफ़्तारी को ‘कठोर’ बताते हुए कहा कि या तो मेघना आलम को किसी अंतरराष्ट्रीय मुहर वाले क़ानून के तहत आरोपित किया जाए, या उन्हें रिहा किया जाए।तक

यहाँ तक कि बांग्लादेश की नई सरकार के क़ानूनी सलाहकार आसिफ नज़रुल ने भी कहा कि ये गिरफ़्तारी उचित नहीं है। हालाँकि, इस पूरे मामले में जो बातें निकलकर आ रही हैं वो किसी रोमांचक फ़िल्मी कहानी से कम नहीं हैं। जिस अरब मुल्क़ की बात उनके पिता ने की, वो सऊदी अरब है। पुलिस का कहना है कि राजदूत एसा आलम को ब्लैकमेल कर उनसे मेघना आलम ने 5 मिलियन डॉलर (43.04 करोड़ रुपए) वसूलने की कोशिश की थी। एसा युसूफ अपने मुल्क़ वापस लौट चुके हैं।

एक फेसबुक पोस्ट के जरिए मेघना आलम ने आरोप लगाया था कि एसा युसूफ उन्हें डरा रहे हैं, ताकि वो सच्चाई पोस्ट न करें। बाद में बांग्लादेशी मॉडल ने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया था। मेघना का कहना था कि उन्हें धमकियाँ मिल रही हैं और वो सुरक्षित नहीं हैं। सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई के लिए ‘फ्री मेघना’ भी ट्रेंड कराया गया। कोर्ट ने फ़िलहाल उन्हें 1 महीने जेल में रखने की अनुमति दी है। रेजाउल करीम मलिक नामक पुलिस अधिकारी को गिरफ़्तारी सही तरीके से न करने के लिए निलंबित भी किया गया है। मेघना आलम ब्यूटी संगठन भी चलती हैं।

जेल में TMC का नेता रहा शेख शाहजहाँ, पर 14 महीने बाद भी खौफ में संदेशखाली: महिलाएँ बोलीं- हथियारों संग खुलेआम घूम रहे उसके गुंडे, देते हैं धमकी

पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद हिंसा और हिन्दुओं के पलायन की वजह से सुर्खियों में बना हुआ है। हिन्दू यहाँ से पलायन करने को मजबूर हैं। पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं पर अत्याचार का कोई पहला मामला नहीं है। मुर्शिदाबाद से ठीक एक वर्ष पहले संदेशखाली में हिन्दुओं पर TMC के नेता रहे शाहजहाँ शेख की अत्याचार की कहानी सामने आई थी।

शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गे इस इलाके में जो महिला पसंद आती थी, उसको अपना निशाना बनाते थे। बात ना मानने पर उसके घरवालों को तंग किया जाता था। यौन शोषण करने के साथ ही शाहजहाँ शेख ने यहाँ लोगों की जमीन और आर्थिक संसाधनों पर कब्जा कर लिया था।

इस घटना को साल भर बीतने के बाद भी संदेशखाली की हवाओं में डर का माहौल है। देश भर की मीडिया की सुर्ख़ियों में बना रहने वाला शाहजहाँ शेख जेल में है लेकिन उसके गुर्गे अब भी लोगों को धमकाते हैं। दैनिक भास्कर ने संदेशखाली में एक वर्ष बाद जाकर पीड़ित महिलाओं से बात की है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि शाहजहाँ शेख जेल में है, लेकिन संदेशखाली की महिलाएँ आज भी डरी हुई हैं। बताया जा रहा है कि शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों को जेल में पूरी आराम है। रिपोर्ट बताती है कि संदेशखाली में शाहजहाँ शेख के गुंडे अभी भी महिलाओं को धमकियाँ दे रहे हैं।

शाहजहाँ जेल में, लेकिन धमकियाँ जारी

संदेशखाली में शाहजहाँ शेख के खिलाफ FIR करने वाली एक महिला ने बताया कि पिछले साल जब आंदोलन हुआ तो वह आंदोलन का हिस्सा थी। उन्होंने बताया कि उनके बेटे और पति गुजरात में रहते हैं और अकेले रहने के चलते उन्हें धमकियाँ मिलती हैं।

एक और पीड़ित ने बताया कि शाहजहाँ शेख के गुर्गे आज भी एक्टिव हैं और लोगों को धमकाते हैं। पीड़ित ने बताया कि सोशल मीडिया पर भी धमकी दी जा रही है, हालाँकि ये फेक आईडी से दी जाती है। पीड़िता ने बताया कि धमकी देने वाले अपनी पहचान नहीं उजागर करते हैं।

पीड़िता ने बताया, “वह कहते हैं कि उसके दादा का घर यहीं है। वह कभी-कभी यहाँ आता है। वह मुझे धमकाता है कि तुमने शाहजहाँ शेख और उसके साथियों के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करके सही काम नहीं किया। वह मुझे जान से मारने की धमकी देता है। वे शिबू हाजरा और आमिर शाहजहां के चेले हैं।”

एक और पीड़िता पियाली दास ने बताया, “पहले लोग चाय की दुकान पर खड़े होकर एक दूसरे का हालचाल भी नहीं पूछ पाते थे। बहुत डर लगता था। अब स्थिति ठीक है, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार में शाहजहाँ शेख जेल में बैठकर भी लोगों को धमका रहा है।”

आगे उन्होंने बताया, “मेरे दोस्त रुबिन मंडल का परिवार यहीं नदी के उस पार रहता है। उनकी सब्जी मंडी थी, जिसे शाहजहाँ शेख ने दो साल पहले हड़प कर अपने नाम पर रजिस्टर करवा लिया था। उनके परिवार को आज भी धमकियाँ मिलती हैं कि जिस दिन शाहजहाँ बाहर आएगा, उस दिन उन पर हमला होगा। यह धमकी शाहजहाँ के गुर्गे मस्तान ने दी है।”

उन्होंने आगे बताया, “मुझे झूठे मामले में फंसाया गया था। मैं करीब 7 दिन जेल में रही। मुझ पर महिलाओं से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाने का आरोप लगाया गया। उस समय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा आई थीं। मैं उनकी टीम के साथ थी।”

पियाली ने आगे बताया, “मैंने उन्हें बताया कि कई महिलाओं ने शिबू हाजरा और शाहजहाँ शेख के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें भगा दिया। फिर रेखा शर्मा ने मुझे अपना अनुवादक बनाया और पुलिस स्टेशन ले गईं… मैंने सच्चाई बताई और मेरी मदद शुभेंदु अधिकारी ने की थी।”

अब भी हैं जमीन-तालाब छिनने की कहानियाँ

शाहजहाँ शेख ने सिर्फ महिलाओं को नहीं प्रताड़ित किया बल्कि उसने यहाँ की अर्थव्यवस्था पर भी कब्जा कर लिया था। एक पीड़ित जोशना दास ने बताया कि शाहजहां और शिबू हाजरा ने उनकी 7.5 बीघा जमीन भी हड़प ली है।

उन्होंने दावा किया कि दो साल पहले, हाजरा उनकी जमीन हड़पना चाहता था और जब उनके परिवार ने उसका विरोध किया, तो उनके बड़े बेटे की हत्या कर दी गई। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि शेख शाहजहाँ ने उनके परिवार को अपने खेत पर काम करने के लिए मजबूर किया, और उन्हें पैसे भी नहीं दिए की।”

शाहजहाँ जेल पहुँचा तो हिन्दुओं में आई शक्ति

संदेशखाली में पहली बार पूजा और मेला लगाने की बात हो रही है। यहाँ पैसे के अभाव में हालाँकि मंदिर नहीं बन पाया है लेकिन झोपड़ीनुमा घर में भगवान की मूर्ति स्थापित की गई है। महिलाओं के मुताबिक “शाहजहाँ जब जेल के बाहर था तो कोई हिन्दू त्यौहार नहीं मनाया जाता था। गाँव में कोई मंदिर नहीं था और मेला नहीं हो सकता था। अब गाँव में शांति है। हमें गाँव में मंदिर बनवाने के लिए मदद की दरकार है।”

2021 में 80000 हिन्दू परिवारों को छोड़ना पड़ा था घर, मालदा-मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ का आतंक याद दिला रहा पुराने दिन: नावों में सवार होकर कर रहे पलायन

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर उपखंड अंतर्गत शमशेरगंज ब्लॉक के धुलियान शहर में 11 और 12 अप्रैल को हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। मुस्लिम समुदाय की भीड़ द्वारा किए गए उत्पात के चलते अब हिंदू समुदाय के लोग क्षेत्र से पलायन कर रहे हैं।

भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें सैकड़ों हिंदू परिवारों को नावों के जरिए गंगा नदी पार करते हुए देखा जा सकता है। ये लोग धुलियान से निकलकर मालदा जिले के कालियाचक तृतीय उपखंड स्थित पार लालपुर शहर की ओर जा रहे हैं।

वीडियो में एक व्यक्ति को कहते हुए सुना जा सकता है, “हमारे हिंदू भाई-बहन अपनी जान बचाने के लिए यहाँ आ रहे हैं।” वहीं, पृष्ठभूमि में एक अन्य व्यक्ति लोगों को आश्वस्त करता नजर आ रहा है, “तनाव न लें। हमने आपके आश्रय और भोजन की व्यवस्था की है। कृपया इस दिशा में जाएँ। आपकी मदद करने के लिए लोग हैं।”

फिलहाल प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन घटनास्थल पर बढ़ती असुरक्षा की भावना के चलते कई परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

मुर्शिदाबाद ज़िले के धुलियान क्षेत्र में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के चलते बड़ी संख्या में हिंदू परिवारों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि अब तक करीब 40-50 नावों के जरिए हजारों हिंदू नागरिकों को धुलियान से नदी पार लालपुर पहुँचाया गया है।

वीडियो में एक बुजुर्ग महिला रोते हुए बताती हैं कि उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए अपना गृहनगर छोड़ दिया। वहीं एक अन्य महिला ने कहा, “उन्होंने (मुस्लिम भीड़ ने) सब कुछ जला दिया है।”

पीड़ितों के अनुसार, हिंसा के दौरान केवल हिंदुओं के घरों को चुन-चुनकर आग के हवाले किया गया, जबकि मुस्लिम घर पूरी तरह सुरक्षित रहे। इस घटना के बाद लालपुर के स्थानीय लोगों ने सभी पीड़ित हिंदुओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने ट्वीट किया, “ममता बनर्जी के शासन में राज्य प्रशासन वहाँ हिंदुओं के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने में बुरी तरह विफल रहा है।”

बांग्लादेश में दशकों पहले हिंदू समुदाय पर हमले हुए थे और अब वही मानसिकता पश्चिम बंगाल में सक्रिय हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिहादी तत्व ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए राज्य में हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।

मुर्शिदाबाद में हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर की गई हिंसा

इस बीच, मुर्शिदाबाद से एक हिंदू महिला ने बताया कि उनके इलाके में खुलेआम बमबारी की घटनाएँ हुईं, जिससे उन्हें जान बचाकर अपना घर छोड़ना पड़ा। वहीं एक अन्य महिला ने दावा किया कि “कुछ लोगों ने हमें धमकी दी और कहा कि चूँकि मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक पारित कर दिया है, इसलिए अब हिंदुओं को यहाँ रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में शुक्रवार (11 अप्रैल, 2025) को जुम्मा नमाज के बाद हिंसा भड़क उठी। यह हिंसा कथित तौर पर केंद्र सरकार द्वारा पारित वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध की आड़ में की गई, लेकिन इसका निशाना बना हिंदू समुदाय।

सुती और शमशेरगंज इलाकों में मुस्लिम भीड़ ने सड़कों पर उतरकर भारी उत्पात मचाया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का बहाना लेकर कुछ चरमपंथियों ने हिंदुओं की दुकानों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।

इस दौरान एक हिंदू दंपति की मिठाई की दुकान, ‘शुभा स्मृति होटल’, को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया और उसका सारा सामान लूट लिया गया। दुकान के मालिक ने रोते हुए कहा, “मेरी यहाँ एक मिठाई की दुकान थी”, और फिर अपने जल चुके होटल की ओर इशारा किया। उनकी पत्नी ने बताया, “उन्होंने हमारा सारा सामान लूट लिया, नकदी भी ले गए… अब हम क्या खाएँगे?”

‘श्री हरि हिंदू होटल एंड लॉज’ नामक एक अन्य हिंदू प्रतिष्ठान में भी तोड़फोड़ की गई। इन हमलों के दृश्य समाचार एजेंसी ANI द्वारा साझा किए गए, जिनमें साफ तौर पर हिंसा और बर्बरता को देखा जा सकता है।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कुछ हिंदू मंदिरों पर भी हमले हुए हैं और मूर्तियों के अपवित्र किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इस पर ‘रिपब्लिक बांग्ला’ द्वारा साझा एक वीडियो में तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद खलीलुर रहमान ने यह स्वीकार किया कि जंगीपुर क्षेत्र में एक मंदिर में तोड़फोड़ हुई है। इन घटनाओं ने पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंसक भीड़ ने न सिर्फ हिंदू व्यापारियों की दुकानों को निशाना बनाया बल्कि कई परिवारों के घरों में घुसकर लूटपाट और तोड़फोड़ भी की। हालात इतने बेकाबू हो गए कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसा में फँसी एक एंबुलेंस को भी नहीं छोड़ा।

रिपोर्ट में बताया गया कि हमलावरों ने पहले एंबुलेंस के ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई की और फिर वाहन को आग के हवाले कर दिया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “हम बहुत डरे हुए थे और अपने घरों के अंदर बंद हो गए थे। मैंने अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कमरे में बंद कर दिया था।”

हमलावरों को लेकर इलाके के ही एक हिंदू निवासी ने कहा, “ये लोग बाहरी नहीं थे, बल्कि यहीं के स्थानीय मुस्लिम युवक थे। उन्होंने हमारे वाहनों पर हमला किया। मैंने खुद देखा कि कैसे एक व्यक्ति ने हमारे परिवार की गाड़ी को तोड़ा।”

एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें एक हमलावर को मुर्शिदाबाद में एक हिंदू परिवार के वाहन को नुकसान पहुँचाते हुए देखा जा सकता है। ANI से बात करते हुए एक अन्य हिंदू पीड़ित ने बताया, “उन्होंने हमारी बाइकें जला दीं, दुकानें लूट लीं और आग लगा दी। रात भर हम सो नहीं पाए। पुलिस भी वहाँ से भाग रही थी, कोई सुरक्षा नहीं थी। अब देखते हैं सरकार मुआवजा देती है या नहीं।”

हिंसा की शिकार हुईं अमर भगत की पत्नी मंजू भगत ने ‘आज तक‘ को बताया, “भीड़ ने पहले सामने के गेट से घुसने की कोशिश की, नाकाम होने पर पीछे से घुसने लगे। हमारे घर में तोड़फोड़ की गई, बाइकें तोड़ी गईं, टीवी, गद्दे, कुर्सियाँ और बाकी कीमती सामान लूट लिया गया।”

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “हम सब छत पर छिपे हुए थे। हम भगवान का नाम ले रहे थे। अगर उस समय मेरी बेटी को कुछ हो जाता, तो मैं क्या करती?”

मुर्शिदाबाद में हिंसक वारदात, हिंदू समुदाय प्रभावित

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में हुई चुनावी हिंसा ने राज्य की सामाजिक संरचना पर गहरा असर डाला है। खासकर 2021 के विधानसभा चुनाव और 2023 के पंचायत चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर हिंदू समुदाय को निशाना बनाया गया, जिसके कारण हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर पलायन करना पड़ा।

भाजपा अध्यक्ष JP नड्डा ने 2021 के चुनाव के बाद कहा था कि उस दौरान हुई राजनीतिक हिंसा से लगभग 80,000 से 1,00,000 हिंदू परिवार विस्थापित हुए। इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने पड़ोसी राज्य असम के धुबरी जिले में शरण ली, क्योंकि पश्चिम बंगाल में उन्हें कोई सुरक्षा या संरक्षण नहीं मिला।

2023 के पंचायत चुनाव भी हिंसा से अछूते नहीं रहे। चुनावी प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर बमबारी, आगजनी और राजनीतिक हत्याएँ देखी गईं। इसके बाद जुलाई 2023 में कूच बिहार जिले से भी हिंदुओं के पलायन की रिपोर्ट सामने आई, जिसे ऑपइंडिया ने जिसकी रिपोर्टिंग करके इसका दस्तावेजीकरण किया था।

स्थानीय लोगों और रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंसा के दौरान पुलिस की भूमिका या तो नाकारा रही या पक्षपातपूर्ण। राज्य प्रशासन पर आरोप लगते रहे हैं कि वह सत्तारूढ़ दल ‘तृणमूल कॉन्ग्रेस’ (TMC) के कार्यकर्ताओं की हिंसा को नजरअंदाज करता है, या उसकी अनदेखी करता है।

ममता बनर्जी सरकार पर एक बार फिर कानून-व्यवस्था सँभालने में विफल रहने के आरोप लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि सत्ता में आने के बाद से ही टीएमसी सरकार राजनीतिक विरोधियों और अल्पसंख्यक वोट बैंक की रक्षा के नाम पर बहुसंख्यक हिंदू समुदाय की अनदेखी कर रही है।