Home Blog Page 405

‘मेरे परिवार को कहे जा रहे अपशब्द, मेरे लिए देश पहले’: अरशद नदीम को आमंत्रण पर नीरज चोपड़ा की सफाई, बोले – पहलगाम हमले से मैं भी दुःखी

2020 के टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) में स्वर्ण पदक और 2024 के पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद हो रही आलोचनाओं पर सफाई दी है। असल में भारतीय एथलीट ने ‘नीरज चोपड़ा क्लासिक्स’ आयोजन में पाकिस्तानी जेवलिन थ्रो खिलाड़ी अरशद नदीम को आमंत्रित किया था। इसके बाद उनकी आलोचना हो रही थी। पहलगाम आतंकी हमले में 28 निर्दोषों की जान गई है, जिसके बाद पूरे देश में शोक व आक्रोश का माहौल है।

नीरज चोपड़ा ने बयान जारी करके कहा कि वो सामान्यतः कम बोलते हैं, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि उन्हें कुछ गलत लगता है तो वो उसके विरुद्ध नहीं बोलेंगे – ख़ासकर के जब मामला उनके देशप्रेम पर सवाल उठाए जाने और परिवार के सम्मान व आदर की बात हो। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा आयोजित किए जा रहे टूर्नामेंट ‘NC क्लासिक्स’ में हिस्सा लेने के लिए अरशद नदीम को आमंत्रण भेजने के उनके फ़ैसले को लेकर काफ़ी कुछ कहा जा रहा है। नीरज चोपड़ा ने कहा कि आलोचना करते हुए उनके ख़िलाफ़ घृणा फैलाई जा रही है, उन्हें अपशब्द कहे जा रहे हैं।

उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके द्वारा नीरज चोपड़ा को आमंत्रण भेजा जाना एक खिलाड़ी द्वारा दूसरे खिलाड़ी को आमंत्रण भर था – न इससे कुछ अधिक, न कम। नीरज चोपड़ा ने कहा कि उनलोगों ने उनके परिवार को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि ‘NC क्लासिक्स’ का उद्देश्य है कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी यहाँ आएँ और भारत विश्वस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का हब बने। उन्होंने बताया कि सोमवार (21 अप्रैल, 2025) को ही सभी खिलाड़ियों को आमंत्रण भेज दिया गया था, आतंकी हमले से 1 दिन पहले ही।

नीरज चोपड़ा ने कहा, “पिछले 48 घंटों में जो कुछ भी हुआ है, उसके बाद अरशद नदीम का नीरज चोपड़ा क्लासिक में शामिल होना पूरी तरह से असंभव था। मेरे लिए मेरा देश और उसके हित सबसे पहले हैं। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके लिए मेरी प्रार्थनाएँ और संवेदनाएँ हैं। आपके साथ, और पूरे देश के साथ, मैं भी जो घटना हुई है उसे लेकर दुःखी हूँ और गुस्से में हूँ। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे देश की प्रतिक्रिया हमारी एकजुटता और ताक़त को दिखाएगी – एक राष्ट्र के रूप में, हम न्याय सुनिश्चित करेंगे।”

नीरज चोपड़ा ने कहा कि उन्होंने इतने वर्षों तक देश का प्रतिनिधत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया है, ऐसे में जब उनकी नीयत पर सवाल उठाई जाती है तो उन्हें तकलीफ होती है। उन्होंने ख़ुद को और अपने परिवार को बेवजह निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें दुःख हो रहा है कि सफाई देनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों ने जो ख़बरें फैलाई हैं, वो सिर्फ़ इसीलिए सच नहीं हो जातीं क्योंकि वो चुप रहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वो और उनका परिवार बहुत साधारण हैं, उन्हें कुछ और न बनाया जाए।

साथ ही नीरज चोपड़ा ने इसपर भी आश्चर्य जताया कि लोग कैसे पाला बदल लेते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब उनकी सीधी-सादी माँ ने 1 वर्ष पूर्व एक मासूम टिप्पणी की थी तब उनके लिए तारीफों के ढेर लग गए थे। बता दें कि नीरज चोपड़ा की माँ ने कहा था कि अरशद नदीम भी उनके लिए बेटे की तरह ही है। नीरज चोपड़ा ने कहा कि आज वही लोग उसी टिप्पणी के लिए उनकी माँ को निशाना बना रहे हैं। नीरज चोपड़ा ने आश्वासन दिया कि वो और कड़ी मेहनत करेंगे, ताकि दुनिया भारत को याद रखे और इसे अच्छे सकारात्मक कारणों से गर्व व ईर्ष्या के भाव से देखे।

उधर अरशद नदीम ने नीरज चोपड़ा का आमंत्रण ठुकरा दिया है। असल में ‘एनसी क्लासिक्स’ का आयोजन 24 मई, 2025 को होना है, जबकि इससे 2 दिन पहले ही उन्हें एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए निकलना है। वो उस समय दक्षिण कोरिया में होंगे, ऐसे में भारत नहीं आ पाएँगे। 27 से 31 मई तक वहाँ इस टूर्नामेंट का आयोजन होना है। ‘NC क्लासिक्स’ बेंगलुरु में आयोजित हो रहा है, जिसमें 2 बार के विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स, रियो 2016 ओलंपिक में गोल्ड मेडल अपने नाम करने वाले जर्मनी के थॉमस रोलर और 2015 वर्ल्ड कप चैंपियन केन्या के जूलियस यगो जैसे खिलाड़ी हिस्सा लेने आ रहे हैं।

अजमेर, ब्यावर के बाद अब भोपाल… ‘मुस्लिम गैंग’ ने हिंदू छात्राओं को फँसाकर किया रेप, वीडियो से ब्लैकमेल कर ऐंठे पैसे: इस्लाम कबूलने का बना रहे थे दबाव

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिंदू लड़कियों के साथ रेप करने का मामला सामने आया है। पीड़िताओं का कहना है कि आरोपित लड़कों ने उन्हें अपना झूठा नाम बताकर प्रेम के जाल में फँसाया और फिर उनकी अश्लील वीडियोज बनाकर उन्हें पैसों और धर्मांतरण के लिए ब्लैकमेल करने लगे।

आरोपितों की पहचान फरहान खान, साहिल खान और अली खान के तौर पर हुई है। पुलिस ने इस मामले में 18 अप्रैल को केस दर्ज किया था, लेकिन मीडिया में ये लगभग एक हफ्ते बाद आया है। शिकायत में बताया गया है कि तीनों आरोपित उसी कॉलेज के MBA छात्र हैं जिससे पीड़िताएँ ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थीं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले फरहान खान ने अपने कॉलेज में ग्रेजुएशन कर रही छात्रा को फँसाया था। इसके बाद उसने पीड़िता के साथ संबंध बनाए और वीडियो में सब रिकॉर्ड करके उसे धमकाने लगा। आगे चलकर फरहान ने ही पीड़िता पर दबाव बनाया कि वो साहिल और अली से अपनी सहेलियों की दोस्ती करवाए।

जब डरकर पीड़िता ने ऐसा किया तो साहिल और अली ने बाकी दो लड़कियों को अलग-अलग जगह मिलने बुलाया और पहली मुलाकात में ही उनके साथ संबंध बनाकर उनकी वीडियो बना ली। इसके बाद तीनों आरोपित पीड़िताओं पर धर्म बदलने का दबाव डाल रहे थे और बार-बार निकाह करने को कह रहे थे।

इसके अलावा आरोपित कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं से आए दिन पैसे भी माँगते थे। जब ये डिमांड और ब्लैकमेलिंग ज्यादा बढ़ने लगी, तब एक पीड़िता ने पुलिस में शिकायत देने का निर्णय लिया। वह बागसेवनिया थाने पहुँची। उसने पुलिस को बताया कि उसकी दो अन्य सहेलियाँ भी इसी तरह से शिकार बनाई गई हैं।

पुलिस ने जाँच शुरू करने के दौरान उन दोनों लड़कियों की भी काउंसलिंग कराई और बाद में पूछताछ में दोनों पीड़िताओं ने बताया कि अली खान ने अशोका गार्डन के एक होटल में युवती के साथ संबंध बनाए थे और साहिल खान ने जहाँगीराबाद के एक कमरे में।

पुलिस ने पुलिस ने आगे की जाँच के लिए केस को अशोक गार्डन और जहाँगीराबाद थाने भेजा, जिसके बाद पुलिस ने फरहान खान और साहिल खान को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है जबकि अली खान की तलाश जारी है। इस केस के खुलने के बाद पुलिस को संदेह है कि जाँच में और खुलासे हो सकते हैं। तीन आरोपितों और तीन पीड़िताओं के अलावा केस में और भी पीड़िताओं का पता चल सकता है।

अभी तक की जाँच में पुलिस को फरहान के मोबाइल से कई अन्य लड़कियों की तस्वीरें मिली हैं। पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपित मध्य प्रदेश से नहीं हैं। इनमें दो बंगाल के हैं। पुलिस इस मामले में हर एंगल से जाँच कर रही है। इस केस को रेप, पॉक्सो एक्ट समेत धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही निष्पक्ष जाँच के लिए SIT भी गठित की गई है।

बता दें कि कुछ समय पहले ऐसा ही पैटर्न अजमेर और ब्यावार से देखने को मिला था। उस समय भी मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू लड़कियों को इसी तरह निशाना बनाया गया था। आरोपित, स्कूल जाती पीड़िताओं को झाँसे में लेते थे, उनके साथ अश्लील हरकतें करते थे और फिर वीडियो वायरल करके उन्हें और प्रताड़ित करते थे।

पाकिस्तानी हिंदुओं को नहीं छोड़ना पड़ेगा भारत, विदेश मंत्रालय ने किया क्लियर- जारी रहेगा वीजा: ‘आतंकी मुल्क’ को पत्र लिख मोदी सरकार ने बताया- रोक रहे सिंधु जल समझौता

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को हुए आतंकी हमले में 28 निर्दोष लोगों की जान चली गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सॉरी अरब दौरा बीच में छोड़कर भारत लौटना पड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ख़ुद घटनास्थल पर पहुँचे। इसके बाद भारत ने CCS (कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी) की बैठक के बाद न केवल सिंधु जल समझौता को निलंबित कर दिया, बल्कि पाकिस्तानियों का वीजा भी रद्द कर दिया। साथ ही पाकिस्तान के रक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों को दूतावास छोड़ने का आदेश दिया गया। अटारी-वाघा सीमा को भी बंद कर दिया गया है।

अब भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवा निलंबित किए जाने के संबंध में नया बयान जारी किया है। इसमें बताया गया है कि ये फ़ैसला ‘लॉन्ग टर्म वीजा’ पर आए लोगों पर लागू नहीं होता है। ये वो वीजा (LTV) हैं, जिन्हें उन पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों को दिया गया है जो प्रताड़ना के कारण भारत में आकर लंबे समय से रह रहे हैं। उन्हें देश नहीं छोड़ना होगा। बता दें कि पड़ोसी इस्लामी मुल्क़ों से प्रताड़ित हिन्दुओं के लिए CAA (नागरिकता संशोधन क़ानून) के तहत भारत की नागरिकता दिए जाने की भी व्यवस्था है। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर साफ़ किया कि पाकिस्तानी हिन्दुओं का वीजा रद्द नहीं होगा।

उधर जल शक्ति मंत्रालय के सचिव देवश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि हम सिंधु जल समझौते को निलंबित करते हैं। पत्र में कहा गया है कि पहले से अभी के समय में बहुत बुनियादी बदलाव आ गए हैं, जिनमें डेमोग्राफी परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जल बँटवारे को लेकर पहले जो सोच थी उसमें अब परिवर्तन आया है। पत्र में स्पष्ट लिख दिया गया है कि किसी भी संधि को निभाने के लिए भरोसे और ईमानदारी की ज़रूरत होती है, लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से पाकिस्तान ने सीमापार आतंकवाद को पोषित किया है, खासकर के जम्मू कश्मीर को निशाना बनाकर – उससे ये भरोसा टूटा है।

पत्र में आगे लिखा गया है, “सुरक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता की वजह से भारत अपने अधिकारों का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है, जो इस संधि के तहत उसे मिले थे। ऊपर से, जब भारत ने आपसे बातचीत का प्रस्ताव भी रखा, तो पाकिस्तान की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया। इन्हीं सब वजहों से भारत सरकार ने अब तय किया है कि Indus Water Treaty को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जा रहा है।”

इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ देश एकजुट: पहलगाम अटैक पर सर्वदलीय बैठक का संदेश, पाकिस्तान पर मोदी सरकार के एक्शन का विपक्ष ने किया समर्थन

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हिंदुओं पर आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ साफ है। हमले के बाद केंद्र की मोदी सरकार एक्शन मोड में आ गई है। गुरुवार (24 अप्रैल 2025) को दिल्ली में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें कॉन्ग्रेस नेता राहुल गांधी समेत सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में इस हमले की एकजुट होकर निंदा की गई और सभी नेताओं ने सरकार के हर कदम का समर्थन करने का भरोसा दिया।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि रक्षा मंत्री ने पहलगाम हमले और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के फैसलों की जानकारी दी। रिजिजू ने कहा कि यह घटना बहुत दुखद है और पूरा देश चिंतित है। सरकार ने साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहे हैं। सभी नेताओं ने सरकार के अब तक के कदमों और भविष्य की कार्रवाइयों का समर्थन किया। भारत ने साफ कर दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, सख्ती जारी रहेगी।

सरकार ने बताया कि पहलगाम रूट आमतौर पर जून में अमरनाथ यात्रा के लिए खोला जाता है, क्योंकि उस दौरान वहाँ तीर्थयात्री रुकते हैं। लेकिन इस बार स्थानीय टूर ऑपरेटर्स ने बिना प्रशासन को सूचित किए 20 अप्रैल 2025 से टूरिस्ट बुकिंग शुरू कर दी। इसकी वजह से वहाँ सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं हो पाई, जो हर साल जून में होती है। इस सुरक्षा चूक ने हमले का रास्ता आसान कर दिया। सरकार अब ऐसी लापरवाही रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

पाकिस्तान ने भारत की कार्रवाइयों का जवाब देते हुए शिमला समझौता रद्द करने और अपने एयरस्पेस को बंद करने की गीदड़भभकी दी है। लेकिन भारत में सभी दल एकजुट होकर सरकार के साथ खड़े हैं और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम की माँग कर रहे हैं।

गीदड़भभकी पर उतरा भिखमंगा पाकिस्तान, कहा- पानी रोका तो इसे जंग मानेंगे, रद्द कर देंगे शिमला समझौता: चीन के भरोसे अब्दुल बासित ने बुने खून बहाने के ख्वाब

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में फिर तनाव बढ़ा दिया है। पहलगाम में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए हमले के तार सीधे तौर पर पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं। इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद किया और पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया। पाकिस्तान में इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। उसने जवाब में वाघा बॉर्डर और अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। साथ ही शिमला समझौते को रद्द करने और खून बहाने की गीदड़भभकी दे रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी (एनएससी) ने भारत के पानी रोकने के फैसले को युद्ध की कार्रवाई माना है। एनएससी का कहना है कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान की 24 करोड़ जनता की जिंदगी की रीढ़ है। अगर भारत ने पानी रोका, तो इसे युद्ध माना जाएगा और पूरा दम लगाकर जवाब दिया जाएगा। बैठक में पाकिस्तान ने भारत के साथ सभी व्यापार बंद करने और भारतीय दूतावास के स्टाफ को 30 तक सीमित करने का भी ऐलान किया।

इस बीच, पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ से कहा कि भारत जल्द ही सैन्य कार्रवाई कर सकता है। बासित ने 2016 के उरी और 2019 के पुलवामा हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत नियंत्रण रेखा पार हमला कर सकता है और आतंकी ठिकानों को नष्ट करने का दावा करेगा। बासित ने सिंधु जल संधि के निलंबन को ‘प्रतीकात्मक’ बताया, क्योंकि भारत के पास अभी पानी रोकने का ढाँचा नहीं है।

अब्दुल बासित ने डर जताया है कि बलूचिस्तान में आतंकी हमले बढ़ सकते हैं और पाकिस्तान को कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए। बासित ने यह भी कहा कि चीन इसमें पाकिस्तान का साथ दे सकता है।

पाकिस्तान की धमकियों के बावजूद भारत ने 20 देशों को हमले की जानकारी दी और साफ कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, संधि निलंबित रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ रहा है, लेकिन वह चीन के भरोसे गीदड़भभकी दे रहा है।

जनरल मुनीर ने पहलगाम अटैक के लिए उकसाया: अपने ही प्रोफेसर ने पाकिस्तान की खोल दी पोल, कहा- चीन में इस्लाम खत्म किया जा रहा और हम हिंदू घृणा से ग्रस्त हैं

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की पोल खोलने का काम पाकिस्तान के ही प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने किया है। उन्होंने पाकिस्तान के फौज के प्रमुख जनरल असीम मुनीर की सोच पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि मुनीर यह बयान कि ‘हम हिंदुओं से अलग हैं’ बेहद भड़काऊ है। उनके बयान के कुछ दिन बाद ही मासूम लोगों की आतंकियों ने हत्या कर दी।

प्रोफेसर इश्तियाक ने कहा कि जनरल मुनीर ने ‘टू नेशन थ्योरी’ को एक बार फिर हवा दी है। यह बयान आंतरिक बवाल से जनता का ध्यान भटकाने के लिए फौज के मुखिया द्वारा दिया गया है। इश्तियाक अहमद ने कहा कि पाकिस्तान पड़ोसी मुल्क भारत के साथ संबंध नहीं रखना चाहता, लेकिन चीन के हमारा कौन सा रिश्ता है। क्या वो हमारा मामा लगता है? चीन तो वैसे भी नास्तिक है और वहाँ इस्लाम को खत्म किया जा रहा है।”

उन्होंने पाकिस्तान के फौजी जनरल से पूछा, “वहाँ (चीन के मामले में) तो आप चुप हैं। पाकिस्तान को आपने (मुनीर ने) फिर से मुसीबत में डाल दिया है।” भारत के बँटवारे पर सहित विभिन्न मामलों को पर कई किताबें लिखने वाले प्रोफेसर इश्तियाक ने कहा कि उनके जैसे कई लोगों भारत के साथ पाकिस्तान के हालात बेहतर करने में लगे हैं, ताकि व्यापार शुरू हो सके और पाकिस्तान के हालात बेहतर हो सकें।

कश्मीर को लेकर भी उन्होने पाकिस्तान के हुक्मरानों को लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तानी के हुक्मरान और फौजी ऐसी-ऐसी दलीलें दे रहे हैं, जो पहले ही पिट चुकी हैं। उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य और कूटनीतिक असफलताओं की बात करते हुए कहा, “हम भारत से चार जंगें हार चुके हैं और भारत का एक इंच जमीन नहीं ले पाए, उल्टे अपना मुल्क ही तुड़वा लिया (बांग्लादेश)”।

प्रोफेसर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की दुनिया में फिर से बदनामी होगी और उसे अराजकता फैलाने वाला देश कहा जाएगा। तहव्वुर राणा को भी भारत वापस ले लाया है और उससे वह चीजें उगलवाई जाएगी, जिससे पाकिस्तान को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने पाकिस्तान की शहवाज शरीफ की पोल खोलते हुए कहा कि मुल्क में असली पावर तो सेना प्रमुख के पास है।

प्रोफेसर ने कहा कि बलूचिस्तान के बाद अब सिंध के लोग भी बगावत के लिए उठ खड़े हुए हैं। नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर वैसे ही आतंकवाद की आग में जल रहा है। इसलिए जनरल मुनीर ने पाकिस्तान के लोगों का ध्यान इनकी तरफ की चीजों से हटाने के लिए टू-नेशन थ्योरी को फिर से रिवाइव करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का विदेश विभाग भी बेवकूफ है, वहाँ कोई काबिल व्यक्ति नहीं है।

प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने आगे कहा कि भारत में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की यात्रा जब भारत आए हुए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सऊदी अरब में मौजूद होने के दौरान कश्मीर में हमले से पाकिस्तान की बदनामी हो रही है। उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख को लताड़ते हुए कहा कि ‘खुदा का खौफ होना चाहिए’।

पहलगाम के इस्लामी आतंकियों को ‘मिलिटेंट्स’ बता रहा था NYT, अमेरिकी संसद की कमेटी ने रगड़ा: ‘बंदूकधारी-चरमपंथी’ की खाल में पहचान छिपा रहा विदेशी मीडिया

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले पर वैश्विक मीडिया की कवरेज ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच, अमेरिकी संसद की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के बहुमत पक्ष (House Foreign Affairs Committee Majority) ने न्यूयॉर्क टाइम्स को आड़े हाथों लिया है। कमेटी ने ट्वीट करके कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहलगाम में हुए हमले को आतंकी हमला कहने के बजाय ‘मिलिटेंट्स’ यानी उग्रवादियों द्वारा हमला बताया, जो पूरी तरह गलत है।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने साफ कहा कि चाहे भारत हो या इजरायल, आतंकवाद को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स हकीकत से कोसों दूर है। कमेटी ने न्यूयॉर्क टाइम्स की हेडलाइन को ठीक करते हुए लिखा, “यह साफ-साफ आतंकी हमला था।”

बता दें कि पहलगाम में आतंकियों ने 28 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी, जिसमें से अधिकतर पर्यटक थे। पीड़ितों ने बताया कि हमलावरों ने पुरुषों की पैंट खोलकर यह चेक किया कि उनका खतना हुआ है या नहीं। जिनका खतना नहीं हुआ, उन्हें हिंदू समझकर गोली मार दी गई। आईडी कार्ड चेक किए गए और पूछा गया कि ‘मुस्लिम हो?’

इस हमले में 28 लोग मारे गए, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में 24 लोगों के मारे जाने की बात कही। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले को क्षेत्र में नागरिकों पर सालों में सबसे खराब हमला बताते हुए इसे ‘आतंकी हमला’ करार दिया और दोषियों को सजा दिलाने का वादा किया।

लेकिन इस घटना को वैश्विक मीडिया ने जिस तरह से पेश किया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। ऑपइंडिया पहले ही अपनी रिपोर्ट में बता चुका है कि किस तरह से अल जजीरा, बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट और पाकिस्तानी मीडिया डॉन जैसे बड़े संस्थानों ने आतंकियों को आतंकी कहने से परहेज किया। अल जजीरा ने आतंकियों को ‘सशस्त्र व्यक्ति’ और ‘बंदूकधारी’ कहा। उसने “आतंकी हमला” शब्द को डबल कोट में लिखा, जैसे कि उसे इस शब्द पर भरोसा ही न हो।

पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने भी आतंकियों को ‘बंदूकधारी’ लिखा और जम्मू कश्मीर को ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ कहकर भारत का हिस्सा मानने से इनकार किया। डॉन ने पहलगाम को ‘मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्र’ करार दिया और हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन ‘कश्मीर रेजिस्टेंस’ को ‘लिटिल नोन ग्रुप’ कहकर छोटा दिखाने की कोशिश की।

वाशिंगटन पोस्ट ने भी आतंकियों को ‘बंदूकधारी’ कहा और लिखा कि हमला ‘बिना किसी भेदभाव’ के किया गया, जबकि पीड़ितों ने साफ बताया कि हमला धर्म के आधार पर किया गया। वाशिंगटन पोस्ट ने यह भी लिखा कि भारत सरकार ने मुस्लिम बहुल इलाकों में असहमति को दबाने के लिए सख्त कार्रवाई की, जो इस हमले से ध्यान हटाने की कोशिश लगती है।

बीबीसी ने भी जम्मू कश्मीर को ‘भारत प्रशासित कश्मीर’ लिखा और आतंकवाद को ‘अलगाववादी विद्रोह’ कहकर हल्का करने की कोशिश की। बीबीसी ने यह भी दावा किया कि जम्मू कश्मीर में 5 लाख भारतीय सैनिक तैनात हैं, जो अतिशयोक्ति लगता है। बीबीसी ने आतंकियों को ‘चरमपंथी’ और ‘बंदूकधारी’ कहकर संबोधित किया। जर्मन मीडिया डीडब्ल्यू ने भी ‘भारत प्रशासित कश्मीर’ और ‘बंदूकधारी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक मीडिया ने आतंकवाद को हल्का दिखाने की कोशिश की हो। भारत में आतंकवाद को लेकर पहले भी कई बार ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो आतंकियों का बचाव करते नजर आते हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान आतंकवाद को सही तरीके से पेश करने से पीछे हटते हैं और सिर्फ अपने हितों को ध्यान में रखकर काम करते हैं।

पहलगाम आतंकी हमले और गुजरात में पकड़े गए ₹21000 करोड़ के ड्रग्स के बीच कनेक्शन: हमले के लिए लश्कर जुटा रहा था फंडिंग, NIA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने पहलगाम हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने बताया है कि पहलगाम में जो आतंकी हमला हुआ है, उसका सीधा संबंध गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़े गए 21,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स के जखीरे से है। एजेंसी ने सितंबर 2021 में तकरीबन 3,000 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी थी।

NIA ने कहा है कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) नाम का आतंकी संगठन ड्रग्स बेचकर जेहाद के लिए पैसा जुटा रहा था। एजेंसी का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा उन पैसों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा एवं अंजाम देने के लिए करना चाह रहा था। इसके साथ ही वह देश के युवाओं को नशे का आदी बनाकर भारत को कमजोर करना चाहता था।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट में कहा, “देखिए पहलगाम में उन्होंने (आतंकी) पर्यटकों के साथ क्या किया? उन्होंने मासूम पर्यटकों पर गोली चलाई।” उन्होंने आगे इस खेप के जरिए भी वह ऐसा ही करना चाह रहा था। पहले भी इसी तरह से ड्रग्स की खेप अफगानिस्तान से भारत लाई गई थी। यह खेप वैध कागजात के साथ लाया गया था, जिनमें टाल्क स्टोन होने की बात कही गई थी।

एनआईए का कहना है कि ड्रग्स बेचकर जो भी पैसा मिलता था, उसे दिल्ली के कुछ गोदामों में रखा जाता था और फिर वहाँ से एलईटी तक पहुँचाया जाता था। एनआईए ने साफ कहा कि यह भारत में पकड़ी गई ड्रग्स की सबसे बड़ी खेप है। एजेंसी ने हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार नाम के एक व्यक्ति को भी इस ड्रग्स के धंधे में शामिल बताया है, जो फिलहाल जमानत माँग रहा है।

एनआईए ने कोर्ट में कहा है कि अफगानिस्तान में बैठे ड्रग्स तस्करों ने 2,999.2 किलोग्राम की बड़ी मात्रा में हेरोइन भारत भेजी थी। इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और ईरान के कुछ लोगों ने मदद की थी। इसकी कीमत 21,000 हजार करोड़ रुपए थी। इसे ईरान के रास्ते लाया गया था और टाल्क स्टोन बताकर मुंद्रा पोर्ट पर उतारा गया था।

एजेंसी ने यह भी कहा कि इस मामले में गवाह ने एक व्यक्ति ने बयान दिया था कि लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के मारे गए गुर्गे लतीफ राथर ने उसे बताया था कि दिसंबर 2021 में मोहम्मद इकबाल अवान और अफगानिस्तान/पाकिस्तान स्थित ड्रग तस्करों ने उसके साथ कश्मीर मुद्दे, अनुच्छेद 370 पर चर्चा की थी।

उस गवाह ने NIA को आगे कहा था कि लतीफ ने अपने कोड नाम मलिक को हरियाणा के एक व्यक्ति से 10 और 15 लाख वसूलने के लिए दिल्ली/हरियाणा सीमा पर भेजा था। एजेंसी ने अदालत को बताया, “इस पैसे का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा के नए रंगरूटों के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए किया गया था।”

यूँ ही अडानी के पीछे नहीं पड़ा था हिंडनबर्ग, राहुल गाँधी के अंकल सैम पित्रोदा का हाथ होने का रिपोर्ट में दावा: मोसाद ने बिगाड़ दिया गेम, OpIndia ने भी इस नेक्सस को लेकर जताया था संदेह

भारतीय कारोबारी समूह अडानी ग्रुप के मुखिया की गौतम अडानी की मदद मोसाद और इजरायली प्रधानमन्त्री नेतन्याहू ने की थी। उन्होंने यह मदद अमेरिकी शोर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग के हमले के बाद की थी ताकि कारोबारी समूह इसका सामना कर सके।

इजरायल के जवाबी हमले के चलते ना सिर्फ अडानी समूह वापस बाजार में उभर कर वापस आया, बल्कि उसके ऊपर आरोप लगाने वाली हिंडनबर्ग रिसर्च पर ताला जड़ गया। यह सारी बातें हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स में खुली हैं। इन्हीं रिपोर्ट में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और सैम पित्रौदा का भी नाम है।

नेतन्याहू ने बढ़ाया मदद का हाथ

समाचार वेबसाइट स्पुतनिक इंडिया की एक रिपोर्ट में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के अडानी को सहायता करने का जिक्र किया गया है। इस रिपोर्ट बताया गया है कि जनवरी, 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च के अडानी के खिलाफ आरोपों से भरी रिपोर्ट प्रकाशित की।

रिपोर्ट बताती है कि इसके एक सप्ताह बाद ही 31 जनवरी, 2023 को अडानी समूह ने इजरायल के हाइफा पोर्ट को खरीदा। इसी दौरान उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हुई। रिपोर्ट बताती है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अडानी से इस रिपोर्ट के विषय में पूछा, इसका जवाब में अडानी ने बताया कि रिपोर्ट झूठ है और इससे उनके व्यापार को कोई खतरा नहीं है।

स्पुतनिक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने लेकिन इस पर चिंता जताई और साफ़ कर दिया कि वह किसी भी ऐसे हमले को स्वीकार नहीं करेंगे। नेतन्याहू की चिंता के पीछे हाइफा पोर्ट की डील थी जो अडानी के साथ पूरी हुई थी, यह इजरायल के लिए काफी महत्वपूर्ण थी और इसे अडानी ने कई हजार करोड़ में खरीदा था।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बारे में कहा, “हाँ, हम जानते हैं कि यह फर्जी है। लेकिन अगर आपको कोई खतरा नहीं दिखता है, तो भी हमें चिंतित होना चाहिए। अगर यह आपको कमजोर करता है, तो यह न केवल इस पोर्ट डील को बल्कि भारत के साथ मिलकर हमने जो कुछ भी अब तक हासिल किया है, उसे नुकसान पहुँचा सकता है।”

इसी मामले पर एक ऑनलीफैक्ट्स नाम की एक वेबसाइट ने भी एक बड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमे कमोबेश यही जानकारियाँ हैं। उसके अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के इस वादे के बाद मोसाद ने एक ऑपरेशन चालू किया। यह ऑपरेशन मोसाद की ज़ोमेत और केशेत नाम की दो यूनिट ने चालू किया।

रिपोर्ट कहती है कि एक साइबर जबकि एक परम्परागत तरह से खुफिया ऑपरेशन करने में माहिर है। इसके बाद इन्होने अमेरिका से लेकर यूरोप और भारत तक जानकारी जुटाना चालू कर दिया। यह टीमें हिंडनबर्ग के ऑफिस तक पहुँचे।

ऑफिस हैक किया, सारी जानकारी निकाली

ऑनलीफैक्ट के अनुसार, मोसाद के एजेंट इसके बाद न्यूयॉर्क स्थित हिंडनबर्ग के दफ्तर पहुँचे। मोसाद के एजेंटों ने इसके बाद इस दफ्तर में आने-जाने वाले हर आदमी के बारे में जानकारी इकट्ठा की। उन्होंने यहाँ दरवाजों, दीवालों और बाकी जगह अपने खुफिया डिवाइस लगाए और सारी जानकारी इकट्ठा करना चालू किया।

रिपोर्ट बताती है कि इसके बाद उन्हें पता चला कि हिंडनबर्ग सिर्फ अकेले ही काम नहीं कर रही बल्कि उसकी मदद तमाम NGO, मीडिया, वकील और बाकी लोग कर रहे हैं। इस काम में कई ऐसे लोग भी जुड़े हुए थे, जिनको पैसा कमाना था। रिपोर्ट बताती है कि अडानी के खिलाफ इस हमले में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी भी शामिल थी।

इस खुलासे में बताया गया है कि मोसाद को हिंडनबर्ग की जाँच के दौरान अमेरिका के एक और पते के बारे में पता चला जो कि अडानी के खिलाफ शामिल था। स्पुतनिक की रिपोर्ट कहती है कि यह पता कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा से जुड़ा हुआ था। वहीं ऑनलीफैक्ट की वेबसाइट बताती है कि इस पते का कम्यूटर भी हैक कर लिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, हैक किए गए कम्यूटर से कई चौंकाने वाली जानकारियाँ मिली। बताया गया कि इसी कम्यूटर में अडानी को नुकसान पहुँचाने सम्बन्धी ईमेल मिले। यह भी पता चला कि इस साजिश में और भी कई लोग जुड़े थे जो भारत के थे। कई बड़े कारोबारी घराने भी इस कम में शामिल मिले।

अडानी ने वापस हिंडनबर्ग पर किया वार

यह सब पता चलने के बाद अडानी ने हिंडनबर्ग पर वार किया। इसके लिए मोसाद ने ‘ऑपरेशन जेपलिन’ लॉन्च किया। दरअसल, जेपलिन भी एक हवाई गुब्बारे का नाम था। इस ऑपरेशन के लिए अडानी से मोसाद के लोग स्विट्ज़रलैंड में मिले थे। यह मुलाक़ात जनवरी, 2024 में हुई थी।

अडानी को पता चला कि तीन अलग-अलग देशों में बैठे हुए शेयर मार्केट ऑपरेटर उनके खिलाफ गड़बड़ी कर रहे हैं। यह पता चला कि वह यह काम एक अमेरिकी फंड के लिए कर रहे थे जो कि चीन के भरोसे चल रही थी।

अडानी को सिर्फ यही नहीं पता चला, बल्कि उन्हें यह भी मालूम हुआ कि भारत के भीतर से भी कई प्रतिद्वंदी कारोबारी घराने भी उनके खिलाफ साजिश में शामिल हैं। यही नहीं, अडानी के खिलाफ एक राजनीतिक पार्टी के लोग भी शामिल थे, यह भी पता चला।

रिपोर्ट बताती है कि अडानी ने इसके बाद अहमदाबाद में एक अपनी टीम बिठाई। इसने इस बात की जाँच की कि कहाँ से उनके खिलाफ सूचनाएँ फैलाई जा रही हैं। इसके बाद अडानी ने अमेरिका में तब सत्ताधारी डेमोक्रेट पार्टी में भी खेमे ढूंढ लिए। उनका समर्थन उस खेमे ने किया जो चीन के खिलाफ थे।

अडानी ने अक्टूबर, 2024 तक 350+ पेज का एक डोजियर हिंडनबर्ग के खिलाफ बनाया। इसमें उनके खिलाफ साजिश करने वाले NGO, कारोबारी घराने, एक महिला नेता और पत्रकारों समेत बाकी के विषय में सबूत थे। यहाँ तक कि अडानी ने उन अख़बारों की भी जानकारी निकाली जो उनके खिलाफ प्रोपेगेंडा कर रहे थे।

रिपोर्ट कहती है कि इसके बाद कैसे अमेरिका, USAID और बाकी ने मिलकर अडानी पर हमला किया, यह बात फ्रांसीसी संस्थान मीडियापार्ट ने छाप दी। इसके बाद सच्चाई सामने आई।

हिंडनबर्ग को भी करवा दिया बंद

रिपोर्ट कहती है कि यह सब सामने आने के बीच अमेरिका बायडेन प्रशासन ने एक बार फिर अडानी को एक मुकदमे के माध्यम से पीछे धकेलने का प्रयास किया लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। यहाँ तक भारत ने खुले तौर पर अमेरिका की इस बीच आलोचना की।

अडानी समूह ने इसके बाद हिंडनबर्ग को कानूनी तौर पर चुनौती देने का फैसला किया। अडानी समूह ने हिंडनबर्ग के फाउंडर नाथन एंडरसन को एक 7 पन्ने का कानूनी नोटिस भेजा। इसमें उनके सारे कारनामों की लिस्ट थी और उस पर होने वाली कानूनी कार्रवाई के विषय में भी जानकारी थी।

इसके चलते एंडरसन को समझ आया कि उसने कहाँ हाथ डाला है। एंडरसन इसके बाद समझौते के लिए रास्ता ढूंढना लगा। उसने एक बार अडानी समूह से जुड़े एक व्यक्ति से भी मुलाकात की। रिपोर्ट कहती है कि एंडरसन ने इसके बाद हामी भरी कि वह हिंडनबर्ग पर ताला जड़ देंगे अगर अडानी उन पर मुकदमा ना करें।

यह समझौता हो गया और जनवरी, 2025 में हिंडनबर्ग ने अपना बोरिया बिस्तर समेटने का ऐलान कर दिया। इसे ऐसे दिखाया गया कि हिंडनबर्ग को नाथन अपने मन से बंद कर रहे हैं, लेकिन असल में यह अडानी के दबाव का कमाल था। इस बीच अमेरिका में सरकार भी बदल गई और ट्रम्प प्रशासन का रवैया अडानी के प्रति और नर्म था।

इस तरह कभी जो हिंडनबर्ग रिसर्च कहता था कि वह अडानी समूह पर ताला डलवाएगा, वह खुद ही 2 साल के भीतर बोरिया बिस्तर समेटने पर मजबूर हो गया। इसमें सबसे बड़ा किरदार रहा गौतम अडानी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का।

सैम-पित्रोदा के NGO और राहुल गाँधी के विदेशी दौरों को लेकर उठते रहे हैं सवाल

जैसे इस पूरे मामले में मोसाद ने सैम पित्रोदा को लेकर जो सन्देश जताया है, इसी तरह के सवाल उनके NGO की USAID से फंडिंग पर प्रश्न ऑपइंडिया ने उठाए थे। इसके अलावा राहुल गाँधी की विदेश यात्राओं और भारतीय हितों को नुकसान पहुँचाने के प्रयास सम्बन्धी बात भी ऑपइंडिया ने की थी।

मेरा नाम ‘भारत’ है… सुनते ही इस्लामी आतंकियों ने पत्नी और 3 साल के बेटे के सामने मार दी गोली, पहलगाम में सुशील की इसलिए हुई हत्या क्योंकि नहीं पढ़ पाए ‘कलमा’

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल 2025) को किया गया आतंकी हमला धर्म के नाम पर की गई थी। इस हमले में जान गँवाने वाले अधिकांश लोगों से धर्म पूछकर उनको गोली मारी गई थी। हमले में जान गँवाने वालों में भारत भूषण, सुशील नथानियल, नीरज उधवानी और दिनेश मिरानिया भी हैं, जिनसे आतंकियों ने धर्म पूछा, कलमा पढ़ने को कहा और फिर गोली मार दी।

बेंगलुरु के रहने वाले 35 वर्षीय ‘भारत भूषण’ को आतंकियों ने केवल ‘नाम’ सुनकर गोली मार दी। वे अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने के लिए कश्मीर गए थे। वहाँ आतंकियों ने उन्हें और उनके परिवार को घेर लिया और नाम पूछा। भारत भूषण का एक 3 साल का बेटा है, जो हमले के समय उनकी गोद में था। उन्होंने आतंकियों को बता, “मेरा नाम भारत है”।

फिर पूछा कि वह हिंदू है या मुस्लिम। इस पर भारत भूषण ने जवाब दिया कि वह हिंदू हैं। इसके बाद आतंकियों ने उनके गोद से बच्चे को पास में खड़ी पत्नी को सौंपने के लिए कहा और फिर उन्हें गोली मार दी। भारत भूषण की हत्या उनकी पत्नी डॉक्टर सुजाता और तीन साल के मासूम बेटे के सामने की गई। डॉक्टर सुजाता एक अस्पताल में बच्चों की डॉक्टर हैं।

पहलगाम आतंकी हमले में इंदौर के रहने वाले ईसाई परिवार के 58 वर्षीय सुशील नथानियल को भी गैर-मुस्लिम होने के कारण गोली मार दी गई। सुशील नथानियल LIC में कार्यरत थे। वे अपनी पत्नी जेनिफर, बेटी आकांक्षा और बेटे ऑस्टिन के साथ बैसरन में थे। परिजनों के मुताबिक, आतंकियों ने पहले उन्हें घुटनों पर बैठाया और फिर कलमा पढ़ने के लिए कहा।

हालाँकि, सुशील कलमा नहीं पढ़ पाए। इसके बाद आतंकियों ने उनसे उनका धर्म पूछा तो उन्होंने ईसाई बताया। इसके बाद आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। वहीं, पास में खड़ी उनकी बेटी आकांक्षा के पैर में भी गोली लग गई। इस दौरान सुशील की पत्नी जेनिफर भागने की कोशिश की और इसमें वह घायल हो गईं। बेटा ऑस्टिन भी फिलहाल सुरक्षित है।

राजस्थान के जयपुर के रहने वाले नीरज उधवानी को वहाँ अपनी जान गँवानी पड़ी। मालवीय नगर के मॉडल टाउन निवासी नीरज दुबई में चार्टर्ड एकाउंटेंट के तौर पर कार्यरत थे। वे अपनी पत्नी आयुषी के साथ शादी समारोह में शामिल होने के लिए शिमला आए हुए थे। शिमला में शादी अटेंड करने के बाद दोनों कश्मीर घूमने चले गए।

इस्लामी आतंकियों ने हमले के दौरान नीरज उधवानी से उनका परिचय पत्र (आई कार्ड) दिखाने के लिए कहा था। इसके बाद उनसे उनका धर्म पूछा गया। उन्हें भी गैर-मुस्लिम होने के कारण आतंकियों ने अपनी गोली का निशाना बना लिया। जानकारी के अनुसार, हमले के दौरान नीरज की पत्नी आयुषी होटल में थी। दोनों की दो साल पहले ही शादी हुई थी।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कारोबारी दिनेश मिरानिया को भी इस हमले में अपनी जान गँवानी पड़ी है। घटना के दिन दिनेश परिवार के साथ बैसरन घाटी पहुँचे। वे अपने बच्चों के साथ घूम ही रहे थे। इतने में वहाँ आतंकी आ गए लोगों की घेराबंदी कर ली। आतंकियों ने नाम जानने के बाद उनके पूछा कि ‘तेरा धर्म क्या है।’

जैसे ही उन्होंने अपना धर्म हिंदू बताया, आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। जिस दिन आतंकियों ने दिनेश की गोली मारकर हत्या की, उस दिन उनकी शादी की साल गिरह थी। दिनेश के चचरे भाई मनीष सिंघानिया ने बताया कि हमले के बाद उन्होंने फोन किया तो बच्चों ने बताया कि आतंकियों ने उनसे धर्म पूछकर और हिंदू सुनने पर गोली मार दी।