Home Blog Page 4063

‘किसान आंदोलन’ पर अपने पुराने रुख से पलटे कनाडा के PM ट्रूडो, MEA ने बताया- भारत सरकार के प्रयासों की तारीफ की

कुछ ही दिनों पहले किसान आंदोलन को लेकर भारत में आलोचना झेलने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के सुर भी बदल गए हैं। सिर्फ एक कॉल पर कनाडा को कोविड-वैक्सीन देने को राजी हो जाने के बाद जस्टिन ट्रूडो  ने किसान आंदोलन पर ही अब मोदी सरकार के रुख को सराहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता अनुराग श्रीवास्‍तव ने बताया कि कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने किसान आंदोलन पर भारत सरकार के बातचीत के प्रयासों की सराहना की है।

साथ ही, उन्होंने ये भी कहा कि ट्रूडो सरकार कनाडा में मौजूद भारतीय कूटनीतिज्ञों और परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

भारत में किसानों के प्रदर्शन को लेकर रुख बदलने के कारण कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो चर्चा में हैं। दूसरी तरफ कनाडा ने बताया है कि जस्टिन ट्रूडो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर वार्ता की और इस दौरान किसानों के प्रदर्शन के मुद्दे को उठाया गया। उधर, भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में किसानों के मुद्दे का कोई जिक्र नहीं है। इस पूरे मामले को लेकर राजनयिक विवाद खड़ा हो सकता है।

इससे पहले भी जब ट्रूडो ने किसानों के प्रदर्शन के मुद्दे को उठाया था तब भारत ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ताजा बातचीत के बारे में भारत की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को अपने कनाडाई समकक्ष जस्टिन ट्रूडो को आश्वस्त किया कि भारत कनाडा के टीकाकरण प्रयासों में पूरा सहयोग करेगा। मोदी ने ट्वीट कर कहा कि ‘मैंने ट्रूडो को आश्वासन दिया है कि भारत कनाडा द्वारा माँगे गए कोविड-19 वैक्सीन्स की आपूर्ति को सुविधाजनक बनाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक मोदी ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो को आश्वस्त करते हुए कहा था, “भारत ने जैसे कई अन्य देशों के लिए किया, ठीक उसी तरह कनाडा के टीकाकरण प्रयासों को सहयोग देने में अपना योगदान देगा।’ बयान के अनुसार, ट्रूडो ने इस अवसर पर कहा कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत की बड़ी औषधीय क्षमता का महत्वपूर्ण योगदान होगा। भारत की इस क्षमता को विश्व के साथ साझा करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

राम मंदिर के लिए ट्रस्ट के खाते में आए ₹1511 करोड़, 27 फरवरी तक चलेगा देशव्यापी अभियान

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग इकट्ठा करने को लेकर देशव्यापी अभियान चल रहा। निधि समर्पण अभियान के तहत कार्यकर्ता घर घर जाकर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं। मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते में अब तक 1511 करोड़ रुपए इकट्ठा हो चुके हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने शुक्रवार (12 फरवरी 2021) को इस बात की जानकारी दी।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया, “पूरा देश अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग कर रहा है। चंदा इकट्ठा करने के अभियान के दौरान हमारा लक्ष्य 4 लाख गाँवों और 11 करोड़ परिवारों तक पहुँचने का है। हमने इस अभियान की शुरुआत 15 जनवरी से की थी और ये 27 फरवरी तक चलने वाला है। इस अभियान के तहत मैं अभी सूरत में हूँ। लोग इस अभियान के तहत ट्रस्ट को दान कर रहे हैं। पूरे 492 सालों के बाद लोगों को अपने धर्म के लिए कुछ बेहतर करने का मौक़ा मिला है।” 

उन्होंने बताया कि इस देशव्यापी अभियान के तहत अभी तक 1511 करोड़ रुपए इकट्ठा किए जा चुके हैं। श्रीराम मंदिर के लिए देश के कोने-कोने से हर वर्ग के लोग चंदा देने के लिए आगे आ रहे हैं। हाल ही में झारखंड में भीख माँग कर गुजर-बसर करने वालों ने श्रीराम के नाम 2425 रुपए समर्पित किए थे।  

इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हुआ था। जिसमें एक वृद्ध और गरीब महिला राम मंदिर के लिए दान करने का निवेदन कर रही थी। वीडियो में कार्यकर्ता वृद्ध महिला से कहते हैं कि उन्हें 20 रुपए दान करने की ज़रूरत नहीं है, वह सिर्फ 10 रुपए ही दान करें। इसके बावजूद गरीब नज़र आने वाली वृद्ध महिला अनुरोध करती है कि वह 20 रुपए ही दान करेगी।

कार्यकर्ता महिला से कहते हैं कि उनके पास सिर्फ 10 रुपए का कूपन है, इस उम्मीद में कि शायद वृद्ध महिला उनकी बात मान जाएगी और 10 रुपए अपने पास रख लेगी। लेकिन वृद्ध महिला अपनी बात पर टिकी रहती हैं और दो कूपन की माँग करती हैं। वृद्ध महिला बताती हैं कि उनके बड़े बेटे का निधन हो चुका है, इसलिए एक कूपन उनके बेटे के नाम का रखा जाए और दूसरा खुद उनके नाम का।

‘गाना’ ने तंजिला को नौकरी से निकाला, रिंकू शर्मा की हत्या के बाद किया था विवादित ट्वीट

म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘गाना (Gaana)’ ने तंजिला अनीस को नौकरी से निकाल दिया है। उसने बजरंग दल कार्यकर्ता रिंकू शर्मा की निर्मम हत्या के बाद शुक्रवार (12 फरवरी 2021) को असंवेदनशील ट्वीट किया था। इसके जरिए उसने अप्रत्यक्ष तौर पर हत्या को जायज ठहराने की कोशिश की थी।

‘गाना’ ने सोशल मीडिया में जारी एक बयान में कहा है, “गाना देश के सभी धर्मों और समुदायों को सम्मान करता है। हाल ही में ज्वाइन करने वाली एक कर्मचारी के सोशल मीडिया पोस्ट के आलोक में हमारा कहना है कि यह हमारे मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। अब वह कंपनी की कर्मचारी नहीं है।”

इससे पहले तंजिला के खिलाफ चंडीगढ़ में आपराधिक शिकायत की गई थी। साथ ही चंडीगढ़ भाजपा के प्रवक्ता गौरव गोयल ने उसे निकाल बाहर करने की माँग ‘Gaana’ से की थी। गोयल ने ‘Gaana’ के CEO प्रशान अग्रवाल को पत्र लिखकर उनकी कंटेंट हेड तंज़िला पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के कारण रिंकू शर्मा की हत्या का जश्न मनाने का आरोप लगाया था।

उन्होंने कहा था कि भारत विभिन्न धर्मों का पोषण करने वाला देश है, जहाँ कई भाषाएँ और संस्कृतियों के लोग साथ में शांति से निवास करते हैं। लेकिन, उन्होंने ये भी कहा कि समय-समय पर कई लोगों ने इस सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने की कोशिश की है और इसमें ताज़ा नाम तंज़िला अनीस का है। उन्होंने कहा कि ‘टाइम्स इंटरनेट’ समूह की ‘Gaana’ की इस पदाधिकारी ने अप्रिय, निंदात्मक और आपत्तिजनक ट्वीट्स किए हैं।

रिंकू शर्मा की निर्मम हत्या के बाद तंजिला अनीस ने एक ट्वीट किया था। इसमें कहा गया था: बजरंग दल का कार्यकर्ता। इतना काफी है। विवाद होने पर उसने ट्वीट डिलीट करते हुए सफाई देते हुए कहा था कि उसे हत्या के बारे में जानकारी नहीं थी। उसके ट्वीट का मकसद केवल यह बताना था कि ‘कट्टरपंथी संगठन’ बजरंग दल से जुड़े व्यक्ति को ‘एक्टिविस्ट’ नहीं कहा जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि ट्विटर पर तंजिला अनीस पहले ही भी हिंदू भावनाओं को आहत करने वाले पोस्ट कर चुकी है। उसने 2012 में भगवान शिव के लिए आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया था। 2015 में तंजिला ने एक ट्वीट में कहा था कि किसी को भी इस बात के लिए नाराज होना चाहिए शेफ ज्यादातर पुरुष क्यों होते? ज्यादातर पोर्नस्टार महिलाएँ क्यों होती हैं? भारत में अधिक हिंदू क्यों हैं?

राइट टू प्रोटेस्ट का मतलब यह नहीं कि कभी भी, कहीं भी बैठ जाएँ: SC ने शाहीन बाग प्रदर्शन पर पुनर्विचार याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (फरवरी 13, 2021) को शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ धरने को लेकर अपने पुराने फैसले पर विचार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध का अधिकार ‘कभी भी’ और ‘हर जगह’ नहीं हो सकता। 12 ऐक्टिविस्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट से अक्टूबर 2020 के उस फैसले पर पुनर्विचार की अपील की थी, जिसमें शीर्ष अदालत ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग के प्रदर्शनों को अवैध ठहराया था।

अदालत ने कहा कि धरना-प्रदर्शन लोग अपनी मर्जी से और किसी भी जगह नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि विरोध जताने के लिए धरना प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसकी भी एक सीमा तय है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में दिए गए फैसले को बरकरार रखा। 

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में फैसला सुनाया था कि धरना-प्रदर्शन के लिए जगह चिन्हित होनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति या समूह इससे बाहर धरना-प्रदर्शन करता है, तो नियम के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को हटाने का अधिकार पुलिस के पास है। धरना प्रदर्शन से आम लोगों की जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। धरने के लिए सार्वजनिक स्थान पर कब्जा नहीं किया जा सकता।

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में शाहीन बाग के प्रदर्शन को गैर कानूनी बताया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने कनिज़ फातिमा सहित 12 ऐक्टिविस्ट्स की ओर से दायर याचिका में मामले की सुनवाई खुली अदालत में करने के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया।

जस्टिस एसके कॉल, अनिरुद्ध बोस और कृष्ण मुरारी की तीन जजों वाली पीठ ने पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा, “विरोध करने का अधिकार हर जगह और किसी भी वक्त नहीं हो सकता। कुछ विरोध-प्रदर्शन कभी भी शुरू हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले धरना प्रदर्शनों के लिए किसी ऐसे सार्वजनिक स्थान पर कब्जा नहीं किया जा सकता, जिससे दूसरों के अधिकार प्रभावित हों।”

कोर्ट ने टिप्पणी की कि संविधान विरोध-प्रदर्शन और असंतोष व्यक्त करने के अधिकार देती है, लेकिन कुछ कर्तव्यों की बाध्यता के साथ। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हमने सिविल अपील में पुनर्विचार याचिका और रिकॉर्ड पर विचार किया है। हमने उसमें कोई गलती नहीं पाई है।

गौरतलब है कि साल 2019 में दिल्ली का शाहीन बाग सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में सामने आया था। कोरोना वायरस महामारी के चलते बीते साल मार्च में लगाए गए लॉकडाउन के बाद शाहीन बाग में प्रदर्शन खत्म हो गया था। प्रदर्शन में शामिल लोग और आलोचक इस कानून को ‘मुस्लिम विरोधी’ बता रहे थे।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ करीब 100 दिनों तक लोग सड़क रोक कर बैठे थे। दिल्ली को नोएडा और फरीदाबाद से जोड़ने वाले एक अहम रास्ते को रोक दिए जाने से रोज़ाना लाखों लोगों को परेशानी हो रही थी। इतना ही नहीं दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों की साजिश भी शाहीन बाग में ही रची गई थी।

एक्सक्लूसिव: खतरे में कॉन्ग्रेस के हजारों समर्थकों की निजी जानकारी, वॉलंटियर्स बहाली के लिए बनाई गई वेबसाइट में बड़े सिक्योरिटी लूपहोल्स

जमीन पर विलुप्त होती कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने सोशल मीडिया कैम्पेन को मजबूत करने के लिए 5 लाख ‘सोशल मीडिया वॉरियर्स’ की भर्ती की घोषणा की थी। अब खुलासा हुआ है कि कॉन्ग्रेस के इस ऑनलाइन अभियान में कई सिक्योरिटी लूपहोल्स हैं। पार्टी के आईटी सेल ने इस मामले में सीधे-सादे आईटी सिक्योरिटी सिस्टम का इस्तेमाल करने तक की जहमत नहीं उठाई, जिससे वेबसाइट से हजारों कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के डेटा लीक होने की आशंका है।

अपनी ऑनलाइन आर्मी के लिए आवेदनों को स्वीकृत करने के लिए पार्टी ने एक नई वेबसाइट बनाई है। अब ये वेबसाइट एक तरह से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की एक सार्वजनिक डेटाबेस बन कर रह गई है, जहाँ उनमें से कइयों के फोन नंबर, पता, ईमेल, सोशल मीडिया प्रोफाइल्स और अन्य व्यक्तिगत सूचनाओं के विवरण पड़े हुए हैं। आशंका है कि ये ऑनलाइन अभियान अब कहीं एक साइबर स्कैम में न बदल जाए।

8 फ़रवरी 2021 को राहुल गाँधी के एक वीडियो संदेश के साथ इस वेबसाइट को लॉन्च किया गया था। कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने व्यक्तिगत डिटेल्स भर कर आवेदन दिया। लेकिन, उन्हें नहीं पता था कि इस प्रक्रिया में कई लूपहोल्स हैं। पिछले 5 दिनों से ये ऑनलाइन सिक्योरिटी लूपहोल्स ज्यों के त्यों बने हुए हैं। इस वेबसाइट ‘incsmw.in’ पर वॉलंटियर्स को अपने व्यक्तिगत विवरण सहित शैक्षिक योग्यता के बारे में भी बताना था।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के डेटा हुए लीक

उन्हें बताना था कि वो प्रतिदिन कितने घंटे पार्टी के लिए ऑनलाइन कार्य करने में सक्षम हैं। इस व्यक्तिगत डेटा को केवल कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके आईटी सेल द्वारा आंतरिक प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाना था। लेकिन अब ये सबके सामने खुलेआम लीक हो रहा है। ट्विटर यूजर ‘@rsgovin’ ने इस बारे में खुलासा किया। हालाँकि, उसने कार्यकर्ताओं के संपर्क डिटेल्स छिपा दिए ताकि कार्यकर्ताओं को कोई परेशान या प्रताड़ित न करे।

जैसा कि आप ऊपर देख सकते हैं, न सिर्फ बिहार बल्कि इसी तरह से कई अन्य प्रदेशों के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के भी व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक हो गए हैं। ऑपइंडिया ने भी जब उक्त ट्विटर यूजर के दावे की पुष्टि के लिए डिटेल्स चेक किए तो पाया कि सच में कॉन्ग्रेस की वेबसाइट पर कार्यकर्ताओं का सार्वजनिक डेटा लीक होने से उनकी सूचनाएँ रिस्क पर हैं। इन कार्यकर्ताओं ने तो विश्वास किया था कि पार्टी उनके डिटेल्स सुरक्षित रखेगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

ट्विटर यूजर @rsgovin ने एक थ्रेड में बताया है कि वेबसाइट पर जिनलोगों ने डाटा डाला है, उनकी निजी जानकारियॉं खतरे में है। यूजर ने कहा कि कुछ तकनीकी क्वेरीज के बाद कोई भी व्यक्ति इन डिटेल्स को प्राप्त कर सकता है। उसने वेबसाइट पर डाले गए कुछ विवरण की जॉंच की तो उसे सही पाया। यूजर ने बताया है कि कॉन्ग्रेस की इस वेबसाइट के सिक्योरिटी प्रोटोकाल्स इतने कमजोर हैं कि एडमिनिस्ट्रेटर एरिया में भी लॉगइन किया जा सकता है। ऑपइंडिया की खबर लिखे जाने तक भी ये लूपहोल्स बने हुए थे और कॉन्ग्रेस ने इसे दुरुस्त नहीं किया था।

रिंकू शर्मा के परिजनों के लिए लोगों ने जुटाए ₹40 लाख: न्याय के लिए VHP का देशव्यापी अभियान, 2500 जगहों पर दी जाएगी श्रद्धांजलि

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली के मंगोलपुरी में रिंकू शर्मा की हत्या के बाद पीड़ित परिजनों को आर्थिक सहायता देने के लिए ऑनलाइन अभियान शुरू किया है। इसके जरिए खबर लिखे जाने तक 40 लाख रुपए जुटाए गए थे। क्राउडकैश नामक वेबसाइट और फिल्म निर्माता मनीष मुंद्रा द्वारा दी गई 5 लाख की रकम को मिला कर इतनी धनराशि आई है। इस रकम को पीड़ित परिवार के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

मनीष मुंद्रा ने यहाँ तक वादा किया है कि अगर जनता कुल मिला कर 90 लाख रुपए जुटा देती है तो फिर वो इसमें 10 लाख जोड़ कर इसे 1 करोड़ रुपए कर देंगे। कपिल मिश्रा ने भी इसके लिए 1 करोड़ की धनराशि जुटाने का लक्ष्य रखा है। कपिल मिश्रा ने संकल्प जताया कि हम न तो परिवार को अकेला पड़ने देंगे और न ही कमजोर। उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मदद तो दूर, अब तक संवेदना के एक शब्द तक नहीं कहे हैं।

दिल्ली के पूर्व मंत्री मिश्रा ने ऐलान किया कि वे सोमवार (फरवरी 14, 2021) को पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि रिंकू शर्मा अपने घर में अकेला कमाने वाले थे, जिन्होंने हमारे लिए अपने जीवन को बलिदान कर दिया। फ़िलहाल हैदराबाद में जनसम्पर्क कर रहे कपिल मिश्रा दिल्ली लौटने के बाद पीड़ित परिवार से मिलेंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका दर्द जाना था।

उधर विश्व हिंदू परिषद ने ऐलान किया है कि रामभक्त रिंकू शर्मा को बजरंग दल के कार्यकर्ता रविवार (फरवरी 14, 2021) को देशव्यापी श्रद्धांजलि देंगे। बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सिंह सोलंकी ने बताया कि जिला केंद्रों सहित लगभग 2500 स्थान पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी दिए जाएँगे। VHP न्याय के लिए पूरे देश में अभियान चलाएगी।

विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन ने परिजनों से मिलने के बाद कहा कि पिछले कुछ समय से मुस्लिम समाज में आक्रामकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “बात-बात पर हमले भी बढ़ रहे हैं। इस्लामिक जिहादी खुलेआम हिंदुओं की मॉब लिंचिंग कर रहे हैं। इन सबके बावजूद पुलिस-प्रशासन व देश की सेक्युलर बिरादरी मूकदर्शक बनी हुई है। दुर्भाग्य से पुलिस-प्रशासन द्वारा अपनी नाकामी को छुपाने हेतु नई-नई कहानियाँ गढ़ी जा रही हैं। स्थानीय पुलिस ने यदि समय पर कार्यवाही की होती तो रिंकू आज अपने परिजनों के बीच होता।”

मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि हमलावर रिंकू शर्मा को परिवार सहित जिंदा जलाने की फिराक में थे। रिंकू शर्मा की माँ राधा ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने किचन से गैस सिलिंडर निकाल लिया था और उसमें आग लगाने की कोशिश की थी, ताकि पूरे घर को जलाया जा सके और आग में झुलस कर पूरे परिवार की मौत हो जाए। वो गैस सिलिंडर में आग लगाने ही जा रहे थे, तभी रिंकू की माँ ने अपने बेटों के साथ मिल कर किसी तरह आरोपितों से सिलिंडर छीन लिया। 

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में किसानों ने राहुल गाँधी के फाड़े पोस्टर, काफिला रोक कर दिखाए काले झंडे

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में किसानों ने शुक्रवार (12 फरवरी 2021) की राहुल गाँधी के पोस्टर फाड़े और विरोध में नारे लगाए। श्रीगंगानगर में उनका काफ़िला रोक कर काले झंडे भी दिखाए। राहुल गाँधी राजस्थान के दो दिवसीय दौरे पर थे और इस दौरान उन्हें कृषि क़ानूनों पर भाषण भी देना था। दो दिवसीय दौरे के पहले दिन राहुल गाँधी ने पीलीबंगा और श्रीगंगानगर में रैलियों को सम्बोधित किया। 

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए जयवीर सिंह नाम के किसान ने राहुल गाँधी पर आरोप लगाया कि यह दौरा उनके राजनीतिक मुनाफ़े के लिए किया गया है, वह किसानों की समस्याओं पर कोई बात नहीं कर रहे हैं। राहुल गाँधी सिर्फ किसानों को मूर्ख बनाने का प्रयास कर रहे थे। जयवीर सिंह ने कहा, “हम पिछले 3 महीनों से कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं लेकिन आज जो हुआ उसे कॉन्ग्रेस रैली कहा जाना चाहिए। ये लोग किसानों का झंडा लेकर हमें बेवकूफ़ बना रहे हैं। जब हमने 1 नवंबर को कृषि क़ानूनों के विरोध में मार्च निकाला था तब कॉन्ग्रेस सरकार ने किसानों को जयपुर में दाख़िल होने की अनुमति नहीं दी थी। ये लोग कह रहे हैं कि भाजपा सरकार किसानों में दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दे रही है, तो इनकी (कॉन्ग्रेस) सरकार कैसे अलग हुई?” 

किसानों के नाम पर राहुल गाँधी की राजनीतिक रैली: किसान 

जयवीर सिंह ने कहा कि किसान राहुल गाँधी से बात करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मिलने की अनुमति माँगी। अनुमति भले दी गई थी, लेकिन बाद में किसानों को उनसे मिलने नहीं दिया गया था। जयवीर सिंह के अनुसार, “वह (राहुल गाँधी) हमसे मिले बिना बच्चों की तरह चले गए, इसलिए हमने उनके पोस्टर फाड़े और हम ये फिर से करेंगे।” एक और किसान ने कहा कि राहुल गाँधी किसानों से बात नहीं करना चाहते थे, वह सिर्फ अपनी रैली में भीड़ इकट्ठी करना चाहते थे। किसानों का आरोप है कॉन्ग्रेस ने यह रैली सिर्फ अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए की थी। इसके लिए उन्होंने किसान आंदोलन का इस्तेमाल किया। 

कैसे कॉन्ग्रेस ने दी आंदोलन की चिंगारी को हवा 

यह दिलचस्प है कि किसानों ने जयपुर में राहुल गाँधी का विरोध तब किया जब कॉन्ग्रेस किसानों के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देने में लगी हुई है। कॉन्ग्रेस के लिए सिर्फ एक बात अहमियत रखती है, कैसे इस मौके का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए किया जाए। कॉन्ग्रेस पहले इन्हीं क़ानूनों की वकालत कर रही थी। अब वही कॉन्ग्रेस प्रदर्शनकारियों का पूरा समर्थन कर रही है। 

हाल ही में कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने ऐसी टिप्पणी की जो हमेशा की तरह एक व्हाट्सएप फॉरवर्ड’ ही साबित हुआ। उन्होंने कहा था, “इस मामले का कोई अंत नहीं है। सरकार अपने अभिमान में ऐसा सोचती है कि वह किसानों को लाचार कर सकती है, लेकिन किसानों को बेवकूफ़ नहीं बनाया जा सकता है। भारत के किसान प्रधानमंत्री से ज़्यादा जानते हैं। इस मुद्दे का इकलौता हल यही है कि सरकार कृषि सुधार क़ानूनों को वापस ले।” 

इसके पहले राहुल गाँधी ने कहा था कि 3 कृषि क़ानूनों के चलते भारत का कृषि क्षेत्र 2-3 उद्योगपतियों के पास चला जाएगा। इस तरह की निराधार बयानबाज़ी के भीषण परिणाम हुए थे, पंजाब में तमाम जियो (jio) टावर्स में तोड़फोड़ की गई थी। खुद पंजाब के मुख्यमंत्री ने पूरे फसाद का विरोध किया था, लेकिन असल में उनकी ही पार्टी ने इस पूरे विवाद को हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।  

आंदोलन के दौरान कॉन्ग्रेस ने खूब डर पैदा किया जिसकी वजह से खालिस्तानी तत्व खुल कर सामने आए और उन्होंने गणतंत्र दिवस के मौके पर आंदोलन को हिंसात्मक रूप दे दिया। जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस ने पूरे षड्यंत्र को खुद बढ़ावा दिया वहीं खुद जयपुर में किसानों को प्रवेश की अनुमति तक नहीं दी। एक तरफ कॉन्ग्रेस आक्रामक होकर प्रधानमंत्री मोदी सरकार पर हर तरह के हमले कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अपनी सरकार वाले राज्यों को इन सबसे दूर रखना चाहती है।   

टिकरी बॉर्डर पर ‘किसानों’ ने दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल पर किया हमला, सिर में गंभीर चोटें

टिकरी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस के एक कॉन्स्टेबल पर ‘किसानों’ द्वारा हमला किए जाने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कॉन्स्टेबल जितेंद्र राणा पर शुक्रवार (12 फरवरी 2021) को हमला किया गया। उनके पैर और सिर में गंभीर चोंटे आई हैं।

एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उन पर हमला उस वक्त किया गया जब वे लापता किसानों के पोस्टर चिपका रहे थे। राणा नागलोई थाने में तैनात हैं। उनकी ड्यूटी टिकरी बॉर्डर पर लगी थी।

रिपोर्टों के मुताबिक राणा कुछ समझ पाते उससे पहले ही तथाकथित आंदोलनकारी ‘किसानों’ ने उन पर हमला कर दिया। हमले की वजह से उन्हें कई टाँके भी लगे हैं। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल को उपद्रवी समझ लिया था, क्योंकि वह वर्दी में नहीं थे। हमले के बाद मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने राणा को बचाया।       

बता दें कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के नाम पर ‘किसानों’ ने जमकर हिंसा की थी। लाल किले पर धार्मिक झंडा फहरा दिया था। इस हिंसा में 300 से अधिक पुलिसवाले घायल हो गए थे।

जिससे 27 साल पहले की थी पूछताछ, उसने की अजीत डोभाल के दफ्तर की रेकी: आतंकी के खुलासे के बाद NSA की सुरक्षा कड़ी

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल आतंकियों के निशाने पर हैं। ताज़ा खुलासे के बाद डोभाल की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक गिरफ्तार आतंकी ने खुलासा किया है कि उसने सरदार पटेल भवन सहित नई दिल्ली के कई हाई प्रोफ़ाइल दफ्तरों की रेकी की थी। आतंकी ने बताया है कि पाकिस्तान के एक हैंडलर के कहने पर उसने ऐसा किया।

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की खबर के अनुसार, 2016 में हुए उरी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में पुलवामा हमले के बाद हुए बालकोट एयरस्ट्राइक के बाद से ही अजीत डोभाल आतंकियों के निशाने पर हैं, क्योंकि इन दोनों का खाका तैयार करने में उनकी अहम भूमिका थी। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि उन पर बढ़े खतरे के बारे में सुरक्षा एजेंसियों और केंद्रीय गृह मंत्रालय को आगाह कर दिया गया है।

अजीत डोभाल भारत के उन लोगों में हैं, जिनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। जम्मू-कश्मीर स्थित शोपियाँ के जैश आतंकी हिदायतुल्लाह मलिक को 6 फ़रवरी को गिरफ्तार किया गया था। उससे पूछताछ के दौरान ही सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक वीडियो लगा, जिसमें अजीत डोभाल के दफ्तर की रेकी की गई थी। जम्मू के गंग्याल पुलिस थाने में मलिक के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

अनंतनाग में गिरफ्तार किए गए मलिक के पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार भी जब्त किए गए थे। हिदायतुल्लाह 24 मार्च 2019 को श्रीनगर से दिल्ली के लिए इंडिगो फ्लाइट से निकला था और अजीत डोभाल के दफ्तर के बाहर सुरक्षा तथा CISF की तैनाती के डिटेल्स जुटाए थे। फिर उसने इसका वीडियो अपने पाकिस्तानी आका को भेजा।

उसे अपने आका के बारे में ज्यादा नहीं पता लेकिन वो उसे ‘डॉक्टर’ के नाम से बुलाता है। इसके बाद हिदायतुल्लाह मलिक दिल्ली से एक बस से कश्मीर लौटा। मई 2019 में मलिक को एक आत्मघाती हमले के लिए पाकिस्तानी आकाओं ने ह्युंडई सैंट्रो कार भी दी थी। एक बैंक कैश वैन से उसने नवंबर 2020 में शोपियाँ में इरफ़ान ठोकर, उमर मुस्ताक और रईस मुस्तफा के साथ मिल कर 60 लाख रुपए लूट लिए थे।

उसने पूछताछ में अपने 10 पाकिस्तानी आकाओं के कॉन्टैक्ट डिटेल्स व अन्य विवरण दिए हैं। उसने 2019 में जैश ज्वाइन की थी। पहले वो जमीन पर उसके लिए काम करता था, फिर उसने एक मुखौटा संगठन तैयार किया। बता दें कि 1994 में जब आतंकी अज़हर मसूद (जैश का संस्थापक) गिरफ्तार किया गया था तो अजीत डोभाल ने उससे कड़ी पूछताछ की थी।

रिंकू शर्मा के परिवार को जिंदा जलाने की थी साजिश, अस्पताल ले जाते वक्त भी रास्ता रोककर किया था हमला: रिपोर्ट्स

दिल्ली के मंगोलपुरी में 10 फरवरी 2021 की रात बजरंग दल के कार्यकर्ता रिंकू शर्मा पर घर में घुसकर हमला किया गया था। अगले दिन उनकी मौत हो गई थी। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से इस मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। इनके मुताबिक हमलावरों के निशाने पर रिंकू शर्मा का पूरा परिवार था। इतना ही नहीं सबूतों को मिटाने के इरादे से रिंकू को अस्पताल ले जाते वक्त रास्ता रोका गया था और अस्पताल में भी हमला हुआ था।

दैनिक जागरण के संजय सलिल की रिपोर्ट के अनुसार हमलावर रिंकू शर्मा को परिवार सहित जिंदा जलाने की फिराक में थे। रिंकू शर्मा की माँ राधा ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने किचन से गैस सिलिंडर निकाल लिया था और उसमें आग लगाने की कोशिश की थी, ताकि पूरे घर को जलाया जा सके और आग में झुलस कर पूरे परिवार की मौत हो जाए।

खबर के अनुसार, हमलावरों ने घर में घुस कर मृतक के ऊपर लाठी-डंडों से वार करना शुरू कर दिया। वो गैस सिलिंडर में आग लगाने ही जा रहे थे, तभी रिंकू की माँ ने अपने बेटों के साथ मिल कर किसी तरह आरोपितों से सिलिंडर छीन लिया। रिंकू के भाई मन्नू ने भी बताया है कि आरोपितों ने उनके घर पर पूरे परिवार को मार डालने के इरादे और साजिश के साथ ही धावा बोला था।

हमलावर चाहते थे कि उनकी करतूतों का कोई सबूत या गवाह नहीं बचे। मन्नू ने बताया कि हमलावर रिंकू की पीठ में चाकू घोंप कर वहाँ से भाग गए थे। लेकिन जब उसे अस्पताल ले जाया जा रहा था तो दोबारा से लौट कर उन्होंने रास्ता रोका और लाठी-डंडे से वार किया।

‘दैनिक जागरण’ के स्थानीय संस्करण में प्रकाशित खबर (साभार)

मन्नू ने बताया कि हर मंगलवार हनुमान चालीसा पढ़ने और राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के कारण उन्होंने ये साजिश की। उन्होंने बताया कि हमलावर पाँचों भाई और उनकी बीवियों के साथ-साथ उनके परिवार वाले भी साथ में थे। उनकी संख्या 30-40 थी। माँ ने बताया कि अधिकतर पड़ोसी छत से देख रहे थे।

मन्नू ने बताया कि आरोपित ताजुद्दीन ने माँ का गला दबाने की कोशिश की और जाहिद ने रिंकू के पीठ में धँसे चाकू को घूमा कर और गहरा धँसा दिया। पुलिस ने 5 लोगों की गिरफ़्तारी की बात कही है। माँ का रो-रो कर बुरा हाल था, जिस कारण उनके गले से आवाज़ भी नहीं निकल रही थी। परिजनों ने बताया कि हमलावर गाली भी बक रहे थे। उन्हें पहले भी सूचना मिली थी कि हत्या की साजिश रची जा रही थी।

वे पीठ में धँसे चाकू को अपने साथ लेकर जाना चाहते थे, ताकि यहाँ कोई सबूत न रह जाए। साथ ही वो रिंकू शर्मा को अस्पताल भी नहीं पहुँचने देना चाहते थे। ICU की तरफ ले जाए जा रहे रिंकू शर्मा की पीठ में धँसे चाकू को निकाल कर ले जाने की कोशिश हुई। एक हमलावर ने चाकू पकड़ कर जोर से हिला दिया, जिससे वो रिंकू शर्मा के पीठ में और गहरा धँस गया।

आज तक की रिपोर्ट में आकाश नामक चश्मदीद के हवाले से कहा गया है, “जब जाकर देखा तो रिंकू के घर पर अटैक हुआ था। लोग डंडे मार रहे थे। भीड़ बहुत थी। उसकी फैमिली को बचा रहे थे। तभी शोर मचा कि रिंकू को चाकू लग गया है। फिर सब संजय गांधी अस्पताल आए। अस्पताल में जाहिद के मामा तवजुद्दीन ने मेरे साथ बदसलूकी की।”

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि रिंकू शर्मा हत्याकांड की जाँच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। इससे पहले पुलिस ने कहा था कि मामले में हर एंगल से जाँच की जा रही है। पुलिस ने कहा था कि वह पीड़ित परिवार से लगातार संपर्क बनाए हुए है और उनसे जो भी सूचना मिल रही है, उस पर काम किया जा रहा है। शुरुआत में पुलिस ने कम्युनल एंगल से इनकार किया था।