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मेरठ में हिंदू लड़की को फँसाया, अगवा कर दिल्ली भेजा; जामा मस्जिद में इस्लाम कबूल करवाया जाना था: रिपोर्ट्स

उत्तर प्रदेश के मेरठ से ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का एक मामला सामने आया है। यहाँ की एक कोचिंग में पढ़ाने वाले अमान ने पहले एक छात्रा को प्रेम जाल में फँसाया। फिर धर्मांतरण कराने के लिए उसे अगवा कर दिल्ली भेज दिया। खबर के मुताबिक, दिल्ली की जामा मस्जिद में उसका धर्मांतरण कराया जाना था। हालाँकि धर्मांतरण से पहले पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर छात्रा को बरामद कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला मेरठ के शास्त्री नगर का है। यहाँ के एक हिंदू व्यापारी की बेटी एक कोचिंग सेंटर में पढ़ने जाती थी। वहाँ अमान ने अपना नाम बदलकर छात्रा को प्रेम जाल में फँसा लिया। फिर उसे अगवा कर इस्लाम धर्म कबूल करवाने की फिराक में था। इसके लिए उसने लड़की को अगवा कर अपने के दोस्त के साथ दिल्ली भेज दिया था।

लड़की के लापता होने के बाद परिजनों ने उसे ढूँढने की बहुत कोशिश की। जब वह नहीं मिली तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की। लड़की के मोबाइल की कॉल डिटेल खँगालने के बाद पुलिस ने अमान का नंबर बरामद किया। इसके बाद पूरे मामले से पर्दा उठा।

लव जिहाद और धर्मांतरण का यह मामला सामने आने के बाद मंगलवार को हिंदू संगठन और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने नौचंदी थाने में जमकर हंगामा किया था। साथ ही आरोपित अमान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

पुलिस ने घटना पर कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान पुलिस ने छात्रा का भी पता लगाकर उसे बरामद किया और उसे उसके परिजनों को सौंप दिया। जाँच के दौरान छात्रा ने खुलासा किया कि अमान उसका दिल्ली की जामा मस्जिद में धर्मांतरण कराना चाहता था।

पुलिस ने छात्रा और परिजनों के बयान के आधार पर आरोपित शिक्षक के खिलाफ नौचंदी थाने में लव जिहाद विरोधी नए कानून और अपहरण की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि आरोपित शिक्षक की हरकतों को देखते हुए एक स्कूल में पढ़ा रहे उसके भाई की भी जाँच की जा रही है।

हिंदू जागरण मंच के अध्यक्ष सचिन सिरोही ने इस मामले को लेकर कहा है कि फेसबुक और ट्विटर पर दूसरे समुदाय के युवक बार-बार मैसेज भेजकर किशोरी छात्राओं से दोस्ती करते हैं। उसके बाद उन्हें अपने प्रेमजाल में फँसाकर, फिर उन पर धर्मांतरण करने के लिए दबाव डालते हैं। फेसबुक व ट्विटर के अलावा भी कोचिंग सेंटर में हिंदू बेटियों को सावधान रहने की जरूरत है।

‘ओम जय जगदीश’ वाली हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन भी मैदान में, कहा- मोदी में मेरा भरोसा

विदेशी धरती से किसानों के लिए बनाए गए कृषि कानूनों के प्रायोजित विरोध के खुलासे के बीच हॉलीवुड अभिनेत्री-गायिका मैरी मिलबेन ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के किसानों के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है। मिलबेन का ट्वीट पॉप सनसनी रिहाना और जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग पर दिल्ली के बाहरी इलाके में चल रहे तथाकथित किसानों के विरोध पर टिप्पणी करते हुए आया है।

मैरी मिलबेन ने ट्वीट कर कहा, “आज, मैं अपने भारतीय भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करती हूँ। मुझे भारत में नए सुधारों के माध्यम से भारतीय किसानों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए महामहिम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण पर पूरा भरोसा है। कृषि वैश्विक अर्थ व्यवस्था का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसान किसी भी देश के पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। हमें हमेशा उन लोगों का ध्यान रखना चाहिए जो भूमि (किसानों) का काम करते हैं और जो भूमि (सैनिकों) की रक्षा करते हैं। अब शांति के राजदूतों के ऊपर उठने का समय है।”

गौरतलब है कि मैरी लगातार तीन अमेरिकी राष्‍ट्रपतियों (राष्‍ट्रपति जॉर्ज डब्‍ल्‍यू. बुश, राष्‍ट्रपति बराक ओबामा और राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्‍प), अंतरराष्‍ट्रीय रॉयल्टी और वैश्विक नेताओं के लिए प्रदर्शन करने वाली दुनिया की नई आवाज़ों में से एक है। इसके अलावा, मैरी को व्हाइट हाउस, यूनाइटेड स्टेट्स कॉन्ग्रेस, नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल), नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन (एनबीए), मेजर लीग बेसबॉल (एमएलबी), ऑफ-ब्रॉडवे और दुनिया भर के कंसर्ट हॉल में कार्यक्रम प्रस्तोता के रूप में जाना जाता है। कल्चरल डिप्लोमेसी के तहत, मैरी संस्कृतियों के आदान-प्रदान के माध्यम से शांति और दोस्ती को बढ़ावा देने, दुनिया को एकजुट करने और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक वैश्विक आवाज बन गई है।

इससे पहले भी मैरी कई सकारात्मक वजहों से भारत सहित विश्व का ध्यान आकर्षित कर चुकी हैं। चाहे वो भारत को स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाएँ देना हो या लॉकडाउन के बीच ‘ओम जय जगदीश हरे गाकर’ दुनियाँ को एक अलग ही अनुभव जगत में ले जाना।

बता दें कि हॉलीवुड एक्ट्रेस और अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने दुनियाभर के लोगों को खास तरीके से दीवाली-2020 की शुभकामनाएँ दी थीं। उनका दीवाली की शुभकामनाओं के लिए ‘ओम जय जगदीश हरे…’ को अपनी आवाज देना, दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था।

आज हॉलीवुड एक्टर-सिंगर का PM मोदी और भारत के समर्थन में आना खासा महत्व रखता है। क्योंकि, कल ही किसान आंदोलन को लेकर भारत के खिलाफ हो रहे दुष्प्रचार पर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता एवं सिंगर्स- अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, करण जौहर, एकता कपूर, कैलाश खेर, लता मंगेशकर सहित कई अन्य सितारों ने कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों द्वारा भारत के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार पर करारा जवाब दिया था और भारत का समर्थन करते हुए एकजुटता दिखाई थी।

दरअसल, पॉप सिंगर रिहाना और एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग के किसान आंदोलन को लेकर किए गए प्रायोजित ट्वीट ने भारत में बहस को तेज कर दिया था। जिसके बाद बॉलीवुड अभिनेताओं ने सामने आकर सीधे शब्दों में ट्वीट करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे मतभेद पैदा करने वाले किसी भी चीजों पर ध्यान न दें। इसके बाद से ही ट्विटर पर #IndiaTogether (इंडिया टुगेदर) ट्रेंड कर रहा था। कल रात होते-होते भारत के प्रति दुष्प्रचार का गुब्बारा ग्रेटा फाइल्स के लीक होते ही फट गया था। जिसके चिथड़े अब भी भारत सहित वैश्विक स्तर पर सक्रिय भारत विरोधी वामपंथी-कॉन्ग्रेसी गिरोह द्वारा समेटे जा रहे हैं। और अपने इस कुकृत्य के कारण यह गिरोह एक बार फिर एक्सपोज हो चुका है।

मैरी मिलबेन का दिवाली पर गाया भजन यहाँ सुन सकते हैं:

60 साल हिमालय में साधना करने वालीं सुभद्रा माता ने देह त्यागा, उत्तरकाशी में लेंगी समाधि

सुभद्रा माता ने 98 साल की उम्र में देह त्याग दिया है। उत्तरकाशी में वह समाधि लेंगी। उन्होंने करीब 60 साल हिमालय में साधना की थी।

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आज (4 फरवरी 2021) सिलसिलेवार ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी है। ट्वीट में उन्होंने कहा है, “आप सबको एक दुःखद सूचना दे रही हूँ। मेरे गुरु श्री पेजावर स्वामी जी की वरिष्ठतम शिष्या सुभद्रा माता ने आज हरिद्वार में शरीर त्याग दिया।”

आगे उन्होंने बताया है कि गंगोत्री या गोमुख के आसपास लगातार एक दिन भी कोई नहीं रह सकता है। इसके बावजूद सुभद्रा माता उससे 10 किलोमीटर ऊपर तपोवन में लगभग 9 वर्ष रहीं। उन्होंने 60 साल से अधिक हिमालय में साधना की। उमा भारती ने बताया है कि हिमालय में रहने वाले संतों का भी यही मानना था कि माता सुभद्रा हिमालय की श्रेष्ठतम तपस्विनी थीं। लेकिन वह अपना प्रचार-प्रसार बिलकुल पसंद नहीं करती थीं। उनकी जीवन शैली और अवधारणा भी बेहद सकारात्मक और सरल थी। 

अपने एक और ट्वीट में उमा भारती ने लिखा, “मैं सुभद्रा माता को लगभग 20 वर्षों से जानती थीं। उनकी इच्छा थी कि मैं ही उनका अंतिम संस्कार करूँ और उन्होंने उत्तरकाशी में ही अपने लिए समाधि बनवा ली थी। उन्होंने मुझे और बालकृष्ण को अनुमति दी थी कि उसी समाधि में हमेशा के लिए स्थापित कर दिया जाए।”

पिछले कुछ वर्षों से सुभद्रा माता हरिद्वार के कनखल स्थित रामकृष्ण अस्पताल में थीं। वहाँ मौजूद संतों और चिकित्सकों ने उनकी काफी समय तक सेवा की। कल (5 फरवरी 2021) को सुभद्रा माता को उत्तरकाशी में समाधि दी जाएगी। इस दौरान बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और अन्य साधु-संत वहाँ एकत्रित होंगे।

उमा भारती ने बताया है कि माता सुभद्रा बेहद दयालु और सहज स्वभाव की थीं। सभी के लिए स्नेह की भावना रखती थीं। वह पिछले कई दिनों से उमा भारती को याद कर रही थीं इसलिए वह आज ही उनसे मिलने के लिए निकली थीं। लेकिन रास्ते में ही उन्हें उनके देह त्यागने का समाचार मिला।

दिल्ली पुलिस की FIR में ग्रेटा का नाम नहीं, कंगना के ट्वीट डिलीट कर फिर बेनकाब हुआ ट्विटर

कथित किसान आंदोलन में अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की घुसपैठ की हकीकत टूलकिट सामने आने के बाद साफ हो गई है। दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज किया है। इस बीच कंगना रनौत का ट्वीट जिसमें केवल रिहाना के ट्वीट का जवाब था, उसे ट्विटर ने डिलीट कर दिया है।

दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर प्रवीर रंजन ने बताया कि इस संबंध में जॉंच के लिए मामला दर्ज किया गया है, लेकिन एफआईआर में किसी का नाम नहीं है। इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में बाल कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किए जाने की बात कही गई थी। इंडिया टुडे पत्रकार गौरव सांवत ने बताया था कि ग्रेटा के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153 ए और धारा 120बी के तहत मामला दर्ज हुआ है। 

ग्रेटा का ट्वीट, जो अब डिलीट हो चुका है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई विदेश मंत्रालय के बयान के बाद सामने आई है जिसमें उन्होंने हर अंतरराष्ट्रीय शख्सियत से कहा था कि वह इस किसान आंदोलन के मुद्दे पर बोलने से पहले इसके बारे में समझ लें।

Excerpt from documents shared by Greta Thunberg

ग्रेटा के टूलकिट शेयर किए जाने के बाद भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ा है और ये स्पष्ट हुआ है कि कैसे इस प्रदर्शन की आड़ में विदेशी हस्तियाँ भारत के ख़िलाफ़ माहौल बना रही है। 

दिल्ली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद ग्रेटा का एक और ट्वीट सामने आया है। इसमें उसने कहा है, “हम भारत में किसानों के आंदोलन के प्रति एकजुट हैं।”

गौरतलब है कि ग्रेटा थनबर्ग और रिहाना जैसे लोगों के सुनियोजित प्लान पर टूलकिट सामने आने के बाद से चर्चा गरम है। कुछ लोगों को पहले से इस तरह के हस्तक्षेप की आशंका थी। कंगना रनौत उन्हीं लोगों में शामिल थीं, जिन्होंने रिहाना को कड़ा जवाब दिया था।

रिहाना ने किसान आंदोलन की खबर शेयर करके पूछा था कि हम इसके ऊपर क्यों नहीं बात कर रहे। बस इसी पर कंगना ने उन्हें लिखा,  “कोई इसलिए बात नहीं कर रहा क्योंकि ये आतंकी है जो भारत को बाँटना चाहते हैं, ताकि चीन यूएस जैसे ही हमारे खंडित देश पर कब्जा कर ले। इसलिए चुप बैठो बेवकूफ, हम कठपुतलियों की तरह अपना देश नहीं बेचते।”

कंगना का ट्वीट

इस ट्वीट के दो दिन बाद और अंतरराष्ट्रीय मंशा का खुलासा होने के अगले ही दिन जैक डॉर्सी के ट्विटर ने 4 फरवरी 2021 को कंगना का यह ट्वीट डिलीट कर दिया। बदले में उन्हें बताया गया कि ट्विटर नियमों का उल्लंघन करने पर उनके ख़िलाफ़ यह कार्रवई हुई है।

कंगना का डिलीट हुआ ट्वीट

‘तुम्हारा कीमा बना कुत्तों को खिलाऊँगा’: रमजान ने बीवी को कुल्हाड़ी से काटा, जान बचाने के लिए मारी गोली

तुर्की में पुलिस ने एक महिला को उसके शौहर की हत्या के इल्जाम में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। महिला का कहना है कि उसे लंबे समय से प्रताड़ित किया जा रहा था। शौहर उसका रेप करता था और उसे मारता-पीटता था।

मृतक की पहचान 36 साल के रमजाम इपेक (Ramazan Ipek) के तौर पर हुई है। स्थानीय रिपोर्टस के अनुसार, रमजान की बीवी मेलेक इपेक (Melek Ipek) का कहना है कि उसके शौहर ने उसे मारने की धमकी दी थी। साथ ही उसे व उसके बच्चों को कहा था कि वह उनके टुकड़े-टुकड़े करके कुत्तों को खिला देगा।

वह बताती है कि 12 साल के वैवाहिक जीवन में जब कभी भी वो अस्पताल में भर्ती हुई तो उससे यही कहा जाता कि अगर उसने पुलिस को कुछ भी बताया कि उसे मार दिया जाएगा। महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि उसका पति उसे मारने से पहले उसका रेप करता और बहुत प्रताड़ित करता था।

तुर्की के एंटाल्या शहर में 7 जनवरी को हुई इस घटना की आरोपित मेलेक के अनुसार उसे अपने शौहर का डर था, इसलिए घरेलू हिंसा को लेकर उसने कभी पुलिस को शिकायत नहीं की। मगर घटना वाले दिन वह इतना डर गई कि उसे गोली चलानी पड़ी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों के दो बच्चे हैं। एक 9 साल का और दूसरा 7 साल का। मेलेक बताती है कि रमजान उससे कहता था, “प्रोटेक्शन ऑर्डर भी तुम्हे नहीं बचा पाएगा। मैं तुम्हारे खिलाफ़ गवाही दूँगा। अगर उन्होंने मुझे जेल में बंद कर दिया तो मैं छूटने के बाद तुम्हें और बच्चों को मार डालूँगा। जब तुम खत्म हो जाओगी तो तुम्हारी लाश का कीमा बनाऊँगा और कुत्तों को खिलाऊँगा ताकि किसी को पता भी न चले कि तुम मर गई हो।”

घटना वाले दिन भी मेलेक को बहुत पीटा गया था। हाथ बाँधकर उसके साथ रेप किया गया। इसके अलावा उसे कई जगह कुल्हाड़ी से काटा गया था। रमजान ने धमकी दी थी कि वापस लौटने के बाद वह उसे खत्म कर देगा।

रमजान का भयावह रूप देख मेलेक डर गई थी, इसलिए उसने उस दिन किसी तरह उस समय खुद को हथकड़ियों से मुक्त कर राइफल उठाई और निशाना दरवाजे पर लगाया। जैसे ही वह लौटा। उसने धमकी दी कि वह अंदर न आए वरना गोली चलेगी। वह तब भी उसके पास आता रहा और मेलेक ने घबरा कर गोली चला दी।

मेलेक के अनुसार, “मैं उसे मारना नहीं चाहती थी, लेकिन कोई अन्य विकल्प भी नहीं था। अगर वो नहीं मरता तो वो मुझे और मेरी बेटियों को मार देता।” लोगों का कहना है कि ये केस स्पष्ट तौर पर सेल्फ डिफेंस का है। लेकिन अभियोजन पक्ष ने इस बिंदु को नकारते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा दिलवा दी। बच्चों को एक संस्था को सौंपा गया है। घटना के सामने आने के बाद महिला को रिलीज करने की माँग चल रही है। अब तक इस माँग पर 42,000 लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं।

भारत के खिलाफ साजिश, बॉम्बे HC की वकील निकिता जैकब भी फँसी; ग्रेटा फाइल्स से खुली पोल

दिल्ली पुलिस ने भारत विरोधी अभियानों की साजिश रचने के लिए उच्च न्यायालय की वकील निकिता जैकब के खिलाफ 4 फरवरी को शिकायत दर्ज की है। दरअसल, लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) ने दिल्ली पुलिस के पास शिकायत दर्ज करते हुए राजद्रोह के आरोपों के तहत एफआईआर की माँग की है।

एलआरओ ने एक ट्वीट करते हुए बताया, “भारतीय संसद से पारित कृषि कानून के खिलाफ अभियान चलाने के लिए विदेशी हस्तियों द्वारा अभियान को व्यवस्थित करने के लिए @DelhiPolice के पास @AamAadmiParty की नेता मुंबई HC की वकील निकिता जैकब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। उनके खिलाफ राजद्रोह के तहत एफआईआर माँग की गई है।”

अंतरराष्ट्रीय पॉप स्टार रिहाना और पोर्न स्टार मिया खलीफा के नक्शेकदम पर चलते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग ने भारत में चल रहे किसान विरोध के समर्थन में ट्वीट किया था। जिसके बाद उसने एक ‘टूलकिट‘ को लेकर भी ट्वीट किया, जिसमें उसने बताया कि किसान समर्थन में रुचि रखने वाले लोग इसका उपयोग कर सकते हैं।” हालाँकि, यह टूलकिट सिर्फ एक रिसोर्स फ़ाइल नहीं थी, बल्कि यह एक खतरनाक दस्तावेज था, जिसमें देखा गया कि कैसे एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत विरोधी ताकतें भारत के लोकतंत्र में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर सबके सामने इस धमाकेदार ट्वीट के खुलासे के तुरंत बाद ग्रेटा ने दस्तावेज़ को डिलीट कर दिया और इससे जुड़े सभी दस्तावेजों को या तो प्राइवेट बना दिया गया या उसे ट्रांसफर या पूरी तरह खत्म कर दिया गया। लेकिन जब तक वह ऐसा करती उससे पहले सोशल मीडिया यूज़र्स बहुत सारी सामग्री डाउनलोड, सॉर्ट और उसे काफी लोगों तक वायरल कर चुके थे।

कैसे हुआ निकिता जैकब का पर्दाफाश

गौरतलब है कि दस्तावेजों की जाँच करते समय यह पता चला कि निकिता जैकब कथित रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने से पहले दस्तावेजों की एडिटिंग कर रही थी। यहाँ हम आपको गूगल दस्तावेज़ों की एडिट हिस्ट्री के कुछ स्क्रीनशॉट दिखा रहे हैं, जिनका उपयोग सोशल मीडिया पर भारत विरोधी आंदोलन को व्यवस्थित रूप से करने के लिए किया जा रहा था।

Nikita edited the document Global Tweet Storm on 23 January
Nikita edited the document AskIndiaWhy on 22 January

बेनकाब होने के बाद जैकब ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया

डिलीट किया गया निकिता का एकाउंट

कौन है निकिता जैकब

ट्विटर पर डिलीट किए गए प्रोफाइल के अनुसार बॉम्बे हाई कोर्ट की वकील निकिता जैकब पर्यावरणविद और कथिततौर पर आम आदमी पार्टी से जुड़ी हुई हैं। ट्विटर यूजर विजय पटेल के अनुसार, वह “सॉलिडैरिटी विद इंडियन फार्मर्स” नाम के दस्तावेज़ की ओनर थी, जिसे 30 जनवरी, 2020 को क्रिएट किया गया था। वह न्यूज़ इन्फ़्यूज़ नाम से इंस्टाग्राम पर एक प्रोपेगैंडा अकाउंट भी चलाती है।

वहीं इंस्टाग्राम पर भी उसने अब अपने एकाउंट और न्यूज़ इन्फ्यूज़ अकाउंट को प्राइवेट कर दिया है।

निकिता का पर्सनल इंस्टाग्राम एकाउंट
निकिता का प्रोपेगैंडा पेज

इसके अलावा डॉक्यूमेंट में एक और यूजर मरीना पत्तरसन का भी नाम शामिल था, जिसे बार-बार एडिट करते हुए देखा गया था। उसने भी अपना ट्विटर एकाउंट डिलीट कर दिया है।

अयोध्या में जिस जमीन पर बन रही मस्जिद वो हमारी: दिल्ली की 2 बहनें, रानी और रमा हाईकोर्ट पहुँचीं

दिल्ली की दो बहनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने उस पाँच एकड़ जमीन पर अपना दावा बताया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या के पास मस्जिद निर्माण के लिए आवंटित किया गया था। याचिका बुधवार (3 फरवरी 2021) को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दायर की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस याचिका पर सुनवाई 8 फरवरी को हो सकती है। 

याचिका दायर करने वाली बहनों का नाम रानी कपूर (रानी बलूजा) और रमा रानी पंजाबी है। इन्होंने अपनी याचिका में लिखा है कि उनके पिता ज्ञान चंद्र पंजाबी विभाजन के दौरान 1947 में पंजाब से भारत आए और तत्कालीन फैजाबाद (अब अयोध्या) जिले में बस गए। बहनों ने याचिका में दावा किया है कि उनके पिता को नाजुल विभाग ने धन्नीपुर गाँव में लगभग 28 एकड़ ज़मीन लगभग पाँच साल के लिए आवंटित की थी। ये जमीन तय अवधि से ज़्यादा समय तक उनके पास थी। 

बहनों का याचिका में कहना है कि उनके पिता का नाम राजस्व रिकॉर्ड में शामिल किया गया था। कुछ समय बाद उनका नाम हटा दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन आयुक्त के समक्ष अपील की थी जिसे बाद में स्वीकृति दी गई थी। याचिका के मुताबिक़ अधिकारियों ने चकबंदी प्रक्रिया के दौरान उनके पिता का नाम फिर से हटा दिया था। दोनों बहनों ने अधिकारी द्वारा जारी किए गए इस आदेश के खिलाफ निपटान अधिकारी, अयोध्या (सदर) के समक्ष अपील की थी। 

इस अपील को संज्ञान में लिए बिना अधिकारियों ने उनकी कुल 28 एकड़ ज़मीन में से 5 एकड़ ज़मीन मस्जिद के निर्माण के लिए वक्फ बोर्ड को आवंटित कर दी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब तक यह विवाद निपटान अधिकारी के सामने लंबित है, तब तक इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड के हवाले किए जाने से रोक लगाई जानी चाहिए। नवंबर 2019 में रामजन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए धन्नीपुर गाँव में 5 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी।       

भारत के खिलाफ वैश्विक षड्यंत्र, 3 महीने से प्लानिंग: रिहाना, ग्रेटा के ट्वीट थे पूर्व नियोजित, 5 स्क्रीनशॉट से सब का खुलासा

गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में अराजकता फैलाने वाले, लाल किले पर कब्जा करने वाले, तिरंगे का अपमान करने वाले कथित किसान प्रदर्शनकारियों के किसान आंदोलन को पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग व अंतरराष्ट्रीय गायिका रिहाना ने 2 फरवरी को अपना समर्थन दिया।

समर्थन में ट्वीट करने के बाद बेबी प्रोटेस्टर ग्रेटा थनबर्ग ने किसान आंदोलन पर एक और ट्वीट किया, जिससे जाने-अनजाने भारत के ख़िलाफ़ तैयार किए जा रहे वैश्विक अभियान का खुलासा हो गया। दरअसल, उसने भारत में चल रहे किसान आंदोलन के संबंध में अपने ट्विटर हैंडल से एक (ToolKit) टूलकिट शेयर किया। इसमें बताया गया था कि यदि कोई भारत के किसान आंदोलन का समर्थन करना चाहता है तो वह क्या-क्या कर सकता है। 

दिलचस्प बात यह है कि ग्रेटा ने इस टूलकिट को कुछ ही देर में डिलीट जरूर कर दिया मगर तब तक सच्चाई का खुलासा हो चुका था। इस डॉक्यूमेंट से मालूम चल चुका था कि अचानक जो विदेशी समर्थन इन कथित किसानों को मिल रहा है, वो कहीं से भी असली नहीं है बल्कि इसकी तैयारी नवंबर से ही चल रही थी।

इसमें सूचीबद्ध तरीके से वो सारे एक्शन लिखें हैं कि आखिर ‘Farmer Protest’ के लिए दुनिया भर में क्या-क्या किया जा सकता है। इससे यह भी ज्ञात हुआ कि भारत में अशांति फैलाने के प्रयास 26 जनवरी को हुए दंगों से पहले शुरू हो चुके थे। दस्तावेज में पूर्व निर्धारित ट्वीट्स भी शामिल थे, जिन्हें पोस्ट किया जाना था। जब ऑपइंडिया की ओर से इन्हें जाँचा गया तो उनमें से कुछ शब्दश: नवंबर 2020 में ट्विटर पर पोस्ट किए मिले।

सबसे खास बात यह है कि पूरे टूलकिट को देखने के बाद साफ पता चलता है कि ग्रेटा थनबर्ग और गायिका रिहाना के ट्वीट भी पूर्व नियोजित थे और वास्तविक समर्थन से उनका सरोकार नहीं था।

इस टूलकिट में एक शीर्षक है, “भारतीय किसानों के साथ एकजुटता- ट्विटर पर तूफान (‘Solidarity with Indian farmers – Twitter storm’) इसमें यह बताया गया है कि कैसे पूरे आंदोलन को वैश्विक पहचान दिलाई जाएगी। इसमें दो influencer के नाम हैं। पहला ग्रेटा थनबर्ग और दूसरा रिहाना। ”

ग्रेटा थनबर्ग द्वारा शेयर किए गए डॉक्यूमेंट का स्क्रीनशॉट

शीट में बक़ायदा पूरा प्लान नजर आता है। इसमें सब बताया गया है कि ट्वीट करते हुए किसे टैग करना है और किसे लक्षित करना है। डॉक्यूमेंट के स्क्रीनशॉट में ग्रेटा और रिहाना के नामों को अलग से देखा जा सकता है। इसी तरह टैग और हैशटैग भी इस लिस्ट में उल्लेखित किया गया है। वहीं रिहाना का बिल्कुल वही ट्वीट उस डॉक्यूमेंट में शामिल है, जो उन्होंने 2 फरवरी को ट्वीट किया।

अब इस प्लानिंग को समझने के लिए कुछ बेसिक तथ्य पर गौर करने की आवश्यकता है। जैसे रिहाना ने 2 फरवरी को अपना ट्वीट किया और ग्रेटा ने 3 फरवरी को अपना ट्वीट किया। दोनों का नाम सूची में था और ट्वीट भी डॉक्यूमेंट में लिखे थे। इन्होंने हैशटैग भी वही इस्तेमाल किया, जिसका जिक्र टूलकिट में था। इस दस्तावेज में ये भी लिखा था कि 4 और 5 फरवरी को भारी मात्रा में किसानों के समर्थन में ट्वीट किया जाए।

ग्रेटा थनबर्ग द्वारा शेयर किए गए डॉक्यूमेंट का स्क्रीनशॉट

ये टूलकिट साबित करता है कि ग्रेटा और रिहाना जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के ट्वीट पूर्व नियोजित थे न कि कोई त्वरित प्रक्रिया। हम यदि ऐसे भी सोचें कि हो सकता है रिहाना का ट्वीट बाद में दस्तावेज में जोड़ा गया तो ये गौर करने वाली बात है कि ग्रेटा के टूलकिट पोस्ट करने से 4 घंटे पहले रिहाना ने ट्वीट किया था। अगर ये सब पहले से प्लान नहीं किया होता तो डॉक्यूमेंट में रिहाना के ट्वीट का जिक्र सबसे आखिर में होना था न कि सबसे ऊपर… जैसा कि हम दस्तावेज के स्क्रीनशॉट में देख रहे हैं।

इस डॉक्यूमेंट को यदि कोई देखे तो मालूम होता है कि पूरे-पूरे ट्वीट पहले से लिखे हुए थे, जिनमें से कुछ ट्वीट के साथ एम्बेड लिंक भी शामिल था, जिस पर क्लिक करते ही वह आपको ट्विटर पर पहुँचा रहे थे ताकि उसे जस का तस पोस्ट किया जा सके।

इस सूची में रिहाना का नाम दूसरे नंबर पर नजर आता है लेकिन उसके ट्वीट के साथ ये ऑप्शन नहीं मेंशन है कि ‘यहाँ क्लिक करके इसे ट्वीट करें।’ जो साबित करता है कि शायद रिहाना के ट्वीट करने से पहले इसे लिखा गया।

किसी को नहीं पता कि रिहाना और ग्रेटा ने ये सब कनाडाई खालिस्तानी सांसद जगमीत सिंह के कहने पर किया या फिर पीआर एजेंसी ने उनसे ये सब करवाया। हमने पहले बताया था कि रिहाना और जगमीत सिंह के बीच बातचीत होती है। ऐसे में हो सकता है कि अनुरोध पर रिहाना ने इसे किया हो।

गौरतलब है कि ये दस्तावेज एक पुख्ता सबूत हैं, जो साबित करते हैं कि भारत के ख़िलाफ़ न केवल देश के भीतर बल्कि विदेश में भी प्रोपगेंडा तैयार हो रहा है। ये डॉक्यूमेंट यह भी बता रहा है कि प्रोपगेंडा बाजों का मकसद प्रदर्शन को चलाते रहने का है, चाहे तो कानून को वापस ही क्यों न ले लिया जाए। जाहिर है ये प्रोटेस्ट कहीं से कहीं तक कृषि कानूनों से संबंधित नहीं है। इनका मकसद सिर्फ़ अराजकता फैलाना है और वैश्विक स्तर पर मोदी सरकार को घेरना है।

इस्लाम नहीं अपनाया तो फतवा जारी कर हिन्दू परिवार का हुक्का-पानी बंद: एक्शन में UP पुलिस, आरोपितों की तलाश जारी

मामूली से विवाद के बाद बरेली के इकराम सिंह पर गाँव के लोग अब इस्लाम अपनाने का दबाव बना रहे हैं। समुदाय विशेष के लोगों द्वारा फतवा जारी कर उनके परिवार का हुक्का-पानी बंद करने तक की धमकी भी दी जा रही हैं और इस्लाम ना अपनाने के कारण इकराम सिंह के बच्चों के लिए दूध, सब्जी और राशन भी नहीं खरीदने दिया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, बरेली के परसोना गाँव में इकराम सिंह के परिवार को पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा था। हाल ही में इकराम सिंह ने बरेली पुलिस के ट्विटर अकाउंट को टैग करते हुए वीडियो ट्वीट किया था। इकराम सिंह ने इस वीडियो में बताया था कि उनके गाँव के दूसरे मजहब के लोगों ने पंचायत कर उनके परिवार का हुक्का-पानी बंद करने की घोषणा की है।

इकराम सिंह की शिकायत थी कि गाँव के लोग उन्हें अपनी दुकान से सामान तक नहीं खरीदने दे रहे हैं। समाचार पत्र ‘दैनिक जागरण’ की एक खबर के अनुसार, यह भी आरोप है कि इकराम के भाई राजीव को भी धार्मिक टिप्पणी का मुकदमा दर्ज कर फर्जी केस में फंसा दिया गया था। इस भय से जेल से बाहर आने के बाद उनका भाई अपने परिवार के साथ पहले ही गाँव छोड़कर अपने ससुराल में जाकर रहने लगा।

बताया जा रहा है कि जब इकराम सिंह ने पुलिस से शिकायत की तो पुलिस ने गाँव जाकर पंचायत भी की और मामले को शांत करा लिया था, लेकिन इकराम सिंह का कहना है कि पुलिस के जाने के बाद भी हालात नहीं बदले और उन्हें अभी भी पलायन के लिए या फिर इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

ऐसे में, स्थानीय हिंदूवादी संगठनों ने इकराम का हौंसला बढ़ाया और उनके घर पर हनुमान चालीसा के आयोजन की बात कही। मामला बढ़ता देख पुलिस ने गाँव जाकर मामले की जाँच की है और समुदाय विशेष के 3 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज कर ली है।

एनबीटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसपी सिटी रविंद्र कुमार ने कहा कि समुदाय विशेष के तीन लोगों के खिलाफ इकराम सिंह की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और एक पुलिस दल को आरोपितों की तलाश में लगा दिया गया है।

रामपुर में प्रियंका गाँधी, लल्लू ने कहा- गोली लगने से हुई नवरीत की मौत: यूपी में झूठ के आसरे कॉन्ग्रेस

26 जनवरी 2021 को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान नवरीत सिंह की मौत हो गई। वह पुलिस बैरिकेडिंग पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान ट्रैक्टर पलट गई और उसके नीचे दबने से उसकी मौत हो गई। आज (4 फरवरी 2021) उसके परिवार से मिलने कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी उत्तर प्रदेश के रामपुर पहुॅंची।

मौत पर सियासत कॉन्ग्रेस के लिए नई बात नहीं है। प्रियंका के इस दौरे से एक बार फिर यह साबित हुआ है।इसके जरिए कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर नवरीत की मौत पर प्रोपेगेंडा फैलाते हुए इसके लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है।

यूपी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा, “नवरीत कनाडा से आए थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।ट्रैक्टर रैली के दौरान पुलिस की गोली लगने से उनकी मौत हो गई। प्रियंका गाँधी रामपुर में आज उनके परिवार से मिलेंगी।”

प्रियंका के दौरे से पहले यह बयान देने वाले लल्लू केवल यूपी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष ही नहीं हैं। उनके बचाव में खुद प्रियंका आलेख लिखती हैं। इससे समझा जा सकता है कि इस प्रोपेगेंडा को हवा देने का इशारा उन्हें कहॉं से मिला होगा।

बता दें कि 26 जनवरी को दिल्ली में हिंसा के दौरान हुई नवरीत की मौत के बाद सोशल मीडिया पर तमाम तरह की अफवाहें फैलाई गई थी। कुछ लोगों का कहना था कि पुलिस बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश करने के दौरान उसे पुलिस ने गोली मार दी थी। कई मीडिया पोर्टलों, पत्रकारों और राजनेताओं ने फर्जी खबरों को हवा दी थी।

अफवाहों पर विराम लगाने के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से एक वीडियो जारी किया गया था। इसमें देखा गया था कि आईटीओ के पास पुलिस बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश में तेज रफ्तार ट्रैक्टर पलट जाता है। ट्रैक्टर के नीचे नवरीत दब जाता है। उसके सर पर काफी चोट लगती है और उसकी मौत हो जाती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से भी दिल्ली पुलिस के स्पष्टीकरण की पुष्टि हुई थी।

लेकिन, प्रोपेगेंडा और राजनीतिक अवसरवाद के जरिए यूपी में अपनी जमीन तलाश रही कॉन्ग्रेस को इनसे फर्क नहीं पड़ता। यही कारण है कि पार्टी सच्चाई को पूरी तरह से दरकिनार कर अपन नैरेटिव आगे बढ़ाने में लगी है।

झूठ के आसरे कॉन्ग्रेस तब गुमराह करने का प्रयास कर रही है जब उसके सांसद शशि थरूर, उसके मुखपत्र से जुड़ीं मृणाल पांडे, राजदीप सरदेसाई सहित कई लोगों पर इस मामले में एफआईआर भी हो चुकी है।