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रामपुर में प्रियंका गाँधी, लल्लू ने कहा- गोली लगने से हुई नवरीत की मौत: यूपी में झूठ के आसरे कॉन्ग्रेस

26 जनवरी 2021 को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान नवरीत सिंह की मौत हो गई। वह पुलिस बैरिकेडिंग पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान ट्रैक्टर पलट गई और उसके नीचे दबने से उसकी मौत हो गई। आज (4 फरवरी 2021) उसके परिवार से मिलने कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी उत्तर प्रदेश के रामपुर पहुॅंची।

मौत पर सियासत कॉन्ग्रेस के लिए नई बात नहीं है। प्रियंका के इस दौरे से एक बार फिर यह साबित हुआ है।इसके जरिए कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर नवरीत की मौत पर प्रोपेगेंडा फैलाते हुए इसके लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है।

यूपी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा, “नवरीत कनाडा से आए थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।ट्रैक्टर रैली के दौरान पुलिस की गोली लगने से उनकी मौत हो गई। प्रियंका गाँधी रामपुर में आज उनके परिवार से मिलेंगी।”

प्रियंका के दौरे से पहले यह बयान देने वाले लल्लू केवल यूपी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष ही नहीं हैं। उनके बचाव में खुद प्रियंका आलेख लिखती हैं। इससे समझा जा सकता है कि इस प्रोपेगेंडा को हवा देने का इशारा उन्हें कहॉं से मिला होगा।

बता दें कि 26 जनवरी को दिल्ली में हिंसा के दौरान हुई नवरीत की मौत के बाद सोशल मीडिया पर तमाम तरह की अफवाहें फैलाई गई थी। कुछ लोगों का कहना था कि पुलिस बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश करने के दौरान उसे पुलिस ने गोली मार दी थी। कई मीडिया पोर्टलों, पत्रकारों और राजनेताओं ने फर्जी खबरों को हवा दी थी।

अफवाहों पर विराम लगाने के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से एक वीडियो जारी किया गया था। इसमें देखा गया था कि आईटीओ के पास पुलिस बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश में तेज रफ्तार ट्रैक्टर पलट जाता है। ट्रैक्टर के नीचे नवरीत दब जाता है। उसके सर पर काफी चोट लगती है और उसकी मौत हो जाती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से भी दिल्ली पुलिस के स्पष्टीकरण की पुष्टि हुई थी।

लेकिन, प्रोपेगेंडा और राजनीतिक अवसरवाद के जरिए यूपी में अपनी जमीन तलाश रही कॉन्ग्रेस को इनसे फर्क नहीं पड़ता। यही कारण है कि पार्टी सच्चाई को पूरी तरह से दरकिनार कर अपन नैरेटिव आगे बढ़ाने में लगी है।

झूठ के आसरे कॉन्ग्रेस तब गुमराह करने का प्रयास कर रही है जब उसके सांसद शशि थरूर, उसके मुखपत्र से जुड़ीं मृणाल पांडे, राजदीप सरदेसाई सहित कई लोगों पर इस मामले में एफआईआर भी हो चुकी है।

शाह फैसल की ‘घर-वापसी’: बोला – 370 पर जो किया, उस पर पछतावा… #Indiatogether का किया समर्थन

‘किसान आंदोलन’ को लेकर बहस का दायरा देश से बढ़ कर दुनिया तक पहुँच चुका है। अमेरिकी-कैरेबियाई गायिका रिहाना के इस मुद्दे पर ट्वीट करने के बाद तमाम मशहूर भारतीय नाम एकजुट होकर आगे आए

सोशल मीडिया पर #Indiatogether अभियान को आगे बढ़ाने वालों में सबसे नया नाम है जम्मू कश्मीर के पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी शाह फैसल का। संघ लोक सेवा आयोग 2010 की परीक्षा में पहला पायदान हासिल करने वाले फैसल ने सचिन तेंदुलकर के ट्वीट को रीट्वीट किया। 

रीट्वीट करते हुए शाह फैसल ने लिखा, “हाँ! घर की बात घर के अंदर ही अच्छी।”

दरअसल सचिन तेंदुलकर ने किसान आंदोलन पर रिहाना के ट्वीट की प्रतिक्रिया में ट्वीट किया था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता है। बाहरी लोग दर्शक हो सकते हैं लेकिन भागीदार नहीं। भारतीय लोग भारत को जानते हैं और उन्हें ही भारत के लिए निर्णय लेना चाहिए। हमें एक मज़बूत देश की तरह साथ खड़े रहना होगा।”        

इसके बाद एक ट्विटर यूज़र ने शाह फैसल के बीबीसी के साथ साक्षात्कार का वीडियो साझा किया। ट्वीट में यह सवाल पूछा गया, “क्या बीबीसी को दिया गया ये इंटरव्यू भी एक गलती थी? क्या आपको इसका पछतावा है?”

इस साक्षात्कार में शाह फैसल ने जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने पर भारत सरकार का जम कर विरोध किया था। इस ट्वीट का जवाब देते हुए फैसल ने लिखा, “हाँ बिलकुल! मुझे भारत के आंतरिक मसलों पर वैश्विक जनता से संवाद करते हुए अपने शब्दों के साथ कहीं ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए थी।”  

इसमें उन्होंने कहा था कि 1953 में उनके दादा की पीढ़ी के साथ धोखा किया गया था। 1987 में जम्मू कश्मीर के चुनाव के दौरान उनके पिता जी की पीढ़ी के साथ धोखा हुआ और लोकतांत्रिक संस्थानों-प्रक्रियाओं का ढाँचा ही बिगाड़ दिया गया था। अब जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद उनकी पीढ़ी के साथ भी वही हुआ।  

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पूर्व IAS अधिकारी शाह फैसल अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुरीद भी होते नज़र आए। उन्होंने भारत को ‘जगत गुरु’ की संज्ञा दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2021 को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की थी, इसमें कर्मचारियों ने टीकाकरण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए थे। 

इसी वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह फैसल ने लिखा था कि ये सिर्फ एक टीकाकरण अभियान ही नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा है। लोग उनके इस बदले रवैये से हैरान दिखे। शाह फैसल ने आगे लिखा, “ये सुशासन, मानव संसाधन का संगठन, राष्ट्र निर्माण और भारत के जगत गुरु के रूप में वैश्विक नेता के रूप में सामने आने – इन सबका गठजोड़ है।”

लाल किले पर मजहबी झंडा फहराने वाला हरमन पकड़ा गया, दिल्ली दंगों के दौरान भी शाहीनबाग में था सक्रिय

गणतंत्र दिवस पर लाल किले में भड़की हिंसा के सिलसिले में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने एक आरोपित धर्मेंद्र सिंह हरमन को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मेंद्र सिंह हरमन ने लाल किले के गुंबद पर धार्मिक झंडा लहराने के लिए दंगाइयों को उकसाया था। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एसआइटी द्वारा गिरफ्तार धर्मेन्द्र सिंह हरमन दिल्ली दंगे के दौरान शाहीनबाग में हुए उपद्रव में भी काफी सक्रिय था।

26 जनवरी को लाल किले में वीडियो फुटेज में देखे गए हरमन ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर लाल किले पर झंडे को फहराने और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का लाइव स्ट्रीम किया था। गिरफ्तार आरोपित दिल्ली के अर्जुन नगर में रहता है और ‘अखिल भारतीय परिवार पार्टी’ का सदस्य है। पुलिस ने कहा कि हरमन सिंघु सीमा पर पिछले दो महीनों से किसानों के आंदोलन का दौरा कर रहा था।

दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की विशेष जाँच टीम (एसआईटी) ने वीडियो फुटेज प्राप्त करने के बाद हरमन को गिरफ्तार कर लिया था, जहाँ उसे एक कार के ऊपर बैठे देखा जा सकता है और भीड़ को लाल किले पर सिख झंडा फहराने के लिए उकसा रहा है। एक अन्य वीडियो फुटेज में, हरमन को गणतंत्र दिवस के दंगों में भाग लेते हुए भी देखा गया था, जहाँ दंगाइयों ने उपद्रव किया था।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को भड़की हिंसा में सैकड़ों दंगाइयों ने दिल्ली में प्रवेश किया। उन दंगाइयों में से कई ट्रैक्टर चलाकर लाल किले पर पहुँचे और लाल किले के गुंबदों पर धार्मिक ध्वज फहराया। इन तथाकथित किसानों ने क्रूरता से पुलिस अधिकारियों पर लाठियों, लोहे की छड़ों, ईंटों और पत्थरों से हमला किया था, जिससे लगभग 400 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

एसआईटी इन दंगाइयों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जोर-शोर से कर रही है, और उन्हें दबोचने के लिए मोबाइल का डेटा छान रही है। इसी क्रम में, 3 फरवरी को, SIT ने हिंसा में शामिल लगभग 20 दंगाइयों की तस्वीरें जारी कीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस को गणतंत्र दिवस की हिंसा से संबंधित अब तक जनता से 1,700 से अधिक वीडियो क्लिप और सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। दिल्ली पुलिस ने अब दंगाइयों को पकड़ने के लिए संबंधित सामग्री का विश्लेषण करने के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली है।

दिल्ली पुलिस ने अभिनेता-कार्यकर्ता और खालिस्तानी समर्थक दीप सिद्धू के ठिकाने पर सूचना देने के लिए 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है, जो गणतंत्र दिवस के दंगों का मुख्य आरोपित भी है।

शरजील उस्मानी पर यूपी में भी FIR, एल्गार परिषद में कहा था- हिंदू समाज समाज सड़ चुका है

महाराष्ट्र के पुणे में एल्गार परिषद के कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण देने वाले शरजील उस्मानी के ख़िलाफ़ लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र शरजील उस्मानी के ख़िलाफ़ लखनऊ के अनुराग सिंह ने मामला दर्ज करवाया है।

अनुराग की शिकायत के आधार पर उस्मानी के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 124 ए, 153 ए, 153 ए (2), 153 बी (1) (सी), 295 ए, 298, 504, 505 (1) (बी), 505 (2) और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है।

इससे पहले पुणे में भी शरजील के खिलाफ भारतीय युवा जनता मोर्चा की शिकायत पर आईपीसी की धारा 153 ए के तहत केस दर्ज हुआ था। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा था कि पुलिस 30 जनवरी को आयोजित कार्यक्रम के वीडियो की जाँच कर रही है। उसके बयान के लिए उस पर एफआईआर दर्ज की गई है। 

उन्होंने कहा था, “वह इस समय महाराष्ट्र में नहीं है लेकिन हम उसे गिरफ्तार करेंगे, चाहे वह बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात या किसी भी राज्य में हो।” वही प्रदेश में विपक्षी दल भाजपा ने भी उस्मानी के ख़िलाफ़ जल्द से जल्द कार्रवाई की माँग की। साथ ही उस्मानी के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला चलाने को कहा।

गौरतलब है कि शरजील उस्मानी ने 30 जनवरी को एल्गार परिषद के एक कार्यक्रम में हिंदू समाज के लिए आपत्तिजनक बातें कही थीं। हिंदुओं को ‘मनुवादी’ करार देते हुए उसने इस कार्यक्रम में हिंदू समाज को बुरी तरह सड़ा हुआ बताया था। साथ ही यूपी की योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उसने कहा था योगी सरकार रोजाना एनकाउंटर कर रही हैं और एनकाउंटर में मारे जाने वाले लोग या तो मुस्लिम हैं या फिर दलित।

बता दें कि कार्यक्रम में हिंदुओं के लिए इस्तेमाल की गई ऐसी भाषा के लिए महाराष्ट्र में बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उस्मानी की गिरफ्तारी करने में मदद माँगी।

उन्होंने कहा, “शरजील उस्मानी ने 30 जनवरी को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया, हम आपसे (योगी आदित्यनाथ) अपील करते हैं कि आप उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तार करने का आदेश दें।”

मालूम हो कि ये शरजील उस्मानी पिछले साल दिल्ली दंगों के दौरान अपने एक ट्वीट के चलते चर्चा में आया था, जब इसने खुलेआम दिल्ली पुलिस पर बंदूक तानने वाले शाहरूख का समर्थन किया था। साथ ही कहा था, “मुझे शाहरुख भाई पर गर्व है। वे उस समय समुदाय के लिए लड़े, जब पूरी स्टेट मशीनरी और हिंदुत्व सेना हमारे समुदाय को मारने और लूटने में शामिल थी। वे हमारे हीरो हैं।”

इससे पूर्व उसने देश के ख़िलाफ़ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए ट्विटर पर कहा था कि वह दो दोस्तों के साथ मिलकर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हो रहे घृणित अपराधों को सबटाइटल देगा, ताकि वे वीडियो विश्व के कोने-कोने तक जाए और लोग जान पाएँ कि भारत में क्या हो रहा है।

‘तेरी माँ को गाली दूँ तो तेरी आस्था डगमगाएगी मंदबुद्धि’ – तापसी के ट्वीट पर कंगना ने दागा सवाल

किसान आंदोलन की आड़ में दिल्ली बॉर्डर पर जारी उपद्रव अब अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा प्रचार का मुद्दा बन चुका है। अमेरिकी गायिका-अभिनेत्री रिहाना से लेकर दुनिया भर के कई बड़े नाम इस मुद्दे पर मिथ्या प्रचार करने की ज़िम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।

इस बीच बॉलीवुड अदाकारा कंगना रनौत ने इस तरह के तमाम नामों को मुँहतोड़ जवाब दिया है। दुनिया के कई मशहूर चेहरों को उत्तर देने के बाद कंगना ने ताज़ा मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू को जवाब दिया है। 

दरअसल ‘किसान आंदोलन’ पर रिहाना समेत तमाम लोगों के ट्वीट को लेकर तापसी ने ट्वीट किया था। ट्वीट में लिखा था, “अगर एक ट्वीट आपकी एकता को डगमगा सकता है, एक चुटकुला आपकी आस्था को हिला सकता है या एक शो आपकी धार्मिक भावनाएँ हिला सकता है तब आपको अपने मूल्यों और तौर-तरीकों को मज़बूत करने की ज़रूरत है। न कि दूसरों के लिए ‘प्रोपेगेंडा टीचर’ बनने की।” 

इस ट्वीट का जवाब देते हुए कंगना ने लिखा, “तेरी माँ को गाली दूँ तो तेरी आस्था डगमगाएगी मंदबुद्धि? राष्ट्रीय मंचों पर उसका अपमान करूँ… मुझे पता है कि तुम लोग अपने ‘प्यार’ को मज़बूत करने के लिए कुछ नहीं करोगे, तभी तो तेरे जैसे दूसरों की रोटियों पर पलने वाले पालतू होते हैं। कभी कुछ और नहीं बन पाते हैं, चुप कर अब।” 

अपने अगले ट्वीट में कंगना ने लिखा, “बी ग्रेड लोगों की बी ग्रेड सोच। एक इंसान को अपनी मातृभूमि और परिवार के लिए खड़ा होना चाहिए। यही कर्म है और यही धर्म भी है। फ्री फंड का सिर्फ खाने वाले मत बनो, इस देश के बोझ… सिर्फ इसलिए मैं ऐसे लोगों को बी ग्रेड बुलाती हूँ, इन्हें नज़रअंदाज़ किया जाना चाहिए।” 

ऊपर खबर में ध्यान देने लायक बात यह है कि तापसी के ट्वीट को एम्बेड किया गया है जबकि कंगना के ट्वीट का स्क्रीनशॉट लगाया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्विटर ने ‘किसान’ विरोध-प्रदर्शनों को लेकर कंगना द्वारा किए गए ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

इसके पहले अमेरिकी कैरेबियाई गायिका रिहाना के ट्वीट पर कंगना ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। कंगना ने अपने ट्वीट में लिखा था, “हाँ, कृपया बताइए। पूरा भारत जानना चाहता है। अगर सरल शब्दों में कहें तो वो सुनिधि चौहान और नेहा कक्कड़ की तरह ही हैं। उसमें भला क्या खास है? वो बम-चिक करते हुए अपने नितम्बों को हिलाती हैं और ठीक कैमरे के सामने अपने कमर के निचले हिस्से (Ass) को दिखाते हुए एकदम लेंस के सामने ले जाकर हिलाती हैं। बस यही है। इससे ज्यादा कुछ खास नहीं।”     

कंगना रनौत ने रिहाना के लिए ‘बिकाऊ पोर्न सिंगर’ विशेषण का भी प्रयोग किया था। उन्होंने लिखा था, “भारत साथ है और प्रोपेगंडा के खिलाफ एक है। रिहाना! तुम शर्म करो।” उन्होंने खुद को संघी नारी बताया और रिहाना को ‘पुसी कैट डॉल’ नाम से सम्बोधित किया। उन्होंने भारत के लोगों को अपनी शक्ति भी दिखाने के लिए कहा था। पिछले 5 वर्षों में रिहाना एक गाना तक नहीं रिलीज कर सकी है।  

आत्मनिर्भर किसान भारत की रीढ़, कोरोना काल में रिकॉर्ड उत्पादन: PM मोदी ने की 1000 e-NAM मंडियों की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार (फरवरी 04, 2021) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में चौरी-चौरा शताब्दी समारोह में हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद हैं। अपने सम्बोधन की शुरुआत पीएम मोदी ने चौरी-चौरा के बलिदानियों को श्रद्धाजंलि देकर की। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मानिभर किसानों’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत ने कोरोनो वायरस के समय रिकॉर्ड कृषि उपज दर्ज की। उन्होंने आगे कहा कि फसल उगाने वाले हमारे देश के लोकतंत्र की रीढ़ हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 100 वर्ष पहले चौरी चौरा में जो हुआ वो सिर्फ एक आगजनी की घटना या एक थाने में आग लगा देने की घटना नहीं थी, चौरी चौरा का संदेश बहुत बड़ा और व्यापक था। उन्होंने कहा कि आग सिर्फ थाने में नहीं लगी थी, आग जन-जन के मन में लगी थी। यह देश के सामान्य नागरिकों का स्वत: स्फूर्त संग्राम था।

पीएम मोदी ने कहा, “आज से शुरू हो रहे कार्यक्रम पूरे साल आयोजित किए जाएँगे। इस दौरान चौरी-चौरा के साथ ही हर गाँव, हर क्षेत्र के वीर बलिदानियों को भी याद किया जाएगा। जब देश आज़ादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, उस समय ऐसे समारोह का होना इसे और भी प्रासंगिक बना देता है।

किसानों की तरक्की के लिए सरकार के उपायों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने किसानों के हित में कई कदम उठाए हैं। किसानों के लिए मंडियों को लाभदायक बनाने के लिए 1,000 और मंडियों को e-NAM से जोड़ा जाएगा।”

वहीं, इस ऐतिहासिक घटना पर प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 4 फरवरी 1922 को स्वाधीनता संघर्ष में यहाँ पुलिस और स्थानीय जनता के बीच संघर्ष में पुलिस की गोली से स्वाधीनता के लिए संघर्ष करने वाले 3 सेनानी शहीद हुए थे। उसके बाद 228 पर ब्रिटिश हुकुमत ने मुकदमा चलाया था जिनमें 225 को सजा दी गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्बोधन की प्रमुख बातें

  • चौरी चौरा शताब्दी के इन कार्यक्रमों को लोकल कला, संस्कृति और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास किया गया है। ये प्रयास भी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति हमारी श्रद्धांजलि होगी।
  • सामूहिकता की जिस शक्ति ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ा था, वही शक्ति भारत को दुनिया की बड़ी ताकत भी बनाएगी। सामूहिकता की यही शक्ति आत्मनिर्भर भारत अभियान का मूलभूत आधार है।
  • कोरोना काल में भारत ने दुनिया के 150 से ज्यादा देशों के नागरिकों की मदद के लिए दवाइयाँ भेजी। दुनिया के अलग-अलग देशों से अपने 50 लाख से अधिक नागरिकों को स्वदेश लाने का काम किया। भारत ने अनेक देशों के हजारों नागरिकों को सुरक्षित उनके देश भेजा।
  • आज भारत खुद कोरोना की वैक्सीन बना रहा है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों से भी तेज़ गति से टीकाकरण कर रहा है। भारत मानव जीवन की रक्षा के लिए दुनिया भर को वैक्सीन पहुँचा रहा है। तो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की आत्मा को गर्व महसूस होता होगा।
  • बजट के पहले कई दिग्गज यह कह रहे थे कि देश ने इतने बड़े संकट का सामना किया है तो सरकार को टैक्स बढ़ाना ही पड़ेगा, देश के आम नागरिक पर बोझ डालना ही पड़ेगा, लेकिन इस बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। बल्कि सरकार ज्यादा से ज्यादा खर्च करेगी।
  • इस बजट में देशवासियों पर कोई बोझ नहीं बढ़ाया गया। बल्कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने ज़्यादा से ज़्यादा खर्च करने का फैसला लिया है। ये खर्च देश में चौड़ी सड़के बनाने के लिए होगा, नई बसें और रेल चलेगी, युवाओं को ज़्यादा अच्छे अवसर मिले उसके लिए बजट में अनेक फैसले लिए हैं।
  • महामारी की चुनौतियों के बीच भी हमारा कृषि क्षेत्र मजबूती से आगे बढ़ा और किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन करके दिखाया। हमारा किसान अगर और सशक्त होगा, तो कृषि क्षेत्र की प्रगति और तेज होगी।
  • कोरोना काल में भारत ने जिस तरह से इस महामारी से लड़ाई लड़ी है। आज उसकी तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है। अब देश का प्रयास है कि हर गांव, कस्बे में भी इलाज की ऐसी व्यवस्था हो कि हर छोटी मोटी बीमारी के लिए शहर की तरफ न भागना पड़े।
  • हमारे देश की प्रगति का सबसे बड़ा आधार हमारे किसान भी रहे हैं। चौरी-चौरा संग्राम में हमारे किसानों की सबसे बड़ी भूमिका थी, किसान आगे बढ़ें, आत्मनिर्भर बने इसके लिए पिछले 6 सालों में किसानों के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं।
  • अब e-NAM से और 1000 मंडियाँ जोड़ी जाएँगी। ग्रामीण क्षेत्र के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए किया गया है। इसका सीधा लाभ देश के किसान को होगा। ये सभी फैसले हमारे किसान को आत्मनिर्भर बनाएँगे, कृषि को लाभ का व्यापार बनाएँगे।
  • हमें संकल्प लेना है- देश की एकता हमारे लिए सबसे पहले है। देश का सम्मान हमारे लिए सबसे बड़ा है। इसी भावना के साथ हमें हर एक देशवासी को साथ लेकर आगे बढ़ना है।

नाजिया की परीक्षा न छूटे, इसलिए बढ़ाई गई ट्रेन की स्पीड: भाई अनवर के ट्वीट पर रेलवे ने घंटे भर पहले पहुँचाई ट्रेन

भारत सरकार के कई मंत्रालय अब आम लोगों की सुविधा के लिए भी तत्पर रहते हैं। फिलहाल इसी सूची में अब नाम आया है रेल मंत्रालय का। रेलवे ने एक आम नागरिक की मदद के लिए खुद आगे आकर सामान्य परिस्थितियों से ऊपर उठ कर काम किया।

एक छात्रा को परीक्षा देने के लिए वाराणसी जाना था। वो जिस ट्रेन से वाराणसी जा रही थीं, वह लगभग 2:30 घंटे देरी से चल रही थी। परीक्षा छूटने वाली थी। तभी उसने सोशल मीडिया की मदद ली, रेलवे से गुहार लगाई। रेल मंत्रालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए सक्रियता दिखाई। ट्रेन की रफ़्तार बढ़ाई गई और ट्रेन समय से पहले वाराणसी पहुँच गई

नाजिया तबस्सुम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली छात्रा हैं। वाराणसी के वल्लभ विद्यापीठ बालिका इंटर कॉलेज में उनकी डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) की परीक्षा का केंद्र था। परीक्षा 12 बजे से शुरू होनी थी।

उनका आरक्षण (रिजर्वेशन) छपरा-वाराणसी सिटी एक्सप्रेस (05111) में उत्तर प्रदेश के मऊ से था। ट्रेन का मऊ पहुँचने का समय सुबह के 6:25 था लेकिन ट्रेन वहाँ 2 घंटे 53 मिनट की देरी से (9 बज कर 18 मिनट) पर पहुँची। नाजिया ने इस बारे में अपने भाई अनवर जमाल से बात की। 

अनवर ने भारतीय रेलवे को टैग करते हुए ट्वीट किया। ट्वीट में उसने अपनी बहन की परीक्षा की समय सारिणी (टाइम टेबल) भी साझा की। उसने ट्वीट में अपनी समस्या भी लिखी और बताया कि ट्रेन लगभग ढाई घंटे देरी से चल रही है। ऐसे में उसकी बहन की परीक्षा छूट सकती है, उसकी मदद की जाए।

ट्वीट में ट्रेन और टिकट से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इसके ठीक बाद रेलवे के ट्विटर हैंडल ने अनवर से उससे संपर्क करने की जानकारी माँगी। संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन देते हुए अनवर से कहा कि ट्रेन समय से पहुँच जाएगी। इस मामले को लेकर कंट्रोल रूम को सूचित किया गया और तत्काल प्रभाव से ट्रेन की रफ़्तार बढ़ाई गई।

नतीजा यह निकला कि जो ट्रेन ढाई घंटे की देरी से चल रही थी, वह समय से पहले (लगभग 11 बजे) ही वाराणसी पहुँच गई। जैसे ही नाजिया परीक्षा केंद्र पर पहुँच गई, उनके भाई ने ट्वीट करके भारतीय रेलवे का आभार जताया।

इस संबंध में उत्तर पूर्वी रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि छात्रा की मदद नियमानुसार की गई है। बलिया फेफना रेलखंड पर प्रस्तावित स्पीड ट्रायल के वजह से कम किया गया था।            

पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन: किसानों को भड़काने के लिए कनाडा के खालिस्तानी समूह की भयानक रणनीति, है NDTV ‘कनेक्शन’ भी

अब तक हम सभी लोग यही मानकर चल रहे थे कि नवम्बर माह से चल रहे ये किसान आन्दोलन सिर्फ अन्नदाताओं की कृषि कानूनों से नाराजगी का ही परिणाम है। लेकिन वामपंथी एक्टिविट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा गलती से किए गए ट्वीट में जो दस्तावेज सामने आए हैं, उससे किसान आंदोलनों के मूल में छिपे खालिस्तान समर्थकों के तार भी एक के बाद एक कर सामने आने लगे हैं।

किसान आन्दोलन का खाका तैयार करने वाली इस ‘टूल किट’ की तह में जाने पर ये सभी एक ही स्रोत पर मिलते नजर आते हैं और वो है खालिस्तान के विचार के समर्थन के जरिए भारत विरोध। इन दस्तावेजों में भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ किसान आंदोलन के नाम पर की जा रही साजिश का अजेंडा कई चरणों में दिया गया है। इसमें अब ऐसे ही कनाडा आधारित एक समूह ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का भी जिक्र सामने आया है, जिसका किसान विरोध को भड़काने में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।

पोएटिक जस्टिस फॉउंडेशन का रोल

भारत के किसानों के विरोध के खिलाफ वैश्विक अभियान के पीछे कनाडा का ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ बहुत सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसकी वेबसाइट से वास्तविकता का पता चलता है कि यह सब सामान्य से कहीं अधिक भयावह है।

दरअसल, इन डॉक्यूमेंट को पढ़ने से पता चलता है कि ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ (Poetic Justice Foundation) नामक समूह ने भी लोगों को भड़काने और सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। दिलचस्प बात ये है कि इस समूह द्वारा एक वेबसाइट तैयार की गई है जिसका नाम है ‘आस्क इण्डिया व्हाय’ यानी, ‘भारत से पूछो, क्यों’?

कनाडा का यह छोटा सा संगठन ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ किस तरह से लोगों को भड़काने का काम कर रहा है, इसका उदाहरण उन्हीं की वेबसाइट ‘आस्क इंडिया व्हाय’ पर नजर आ रहे हैं। इसमें लिखा गया है कि सरकार किसानों की जान ले रही है।

साथ ही, 1984 में हुए दंगों का डर भी लोगों के बीच रखा गया है, जिसका उद्देश्य यह भय पैदा करना है कि सरकार किसानों के दमन के लिए फिर ऐसा कुछ कर सकती है। यहाँ पर ध्यान देने वाली बात है कि हाल ही में ट्विटर पर एक ऐसा भी अजेंडा चलाया गया था, जिसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों के नरसंहार की तयारी कर रहे हैं।

ग्रेटा थनबर्ग ने जो एक दस्तावेज भूल से सार्वजानिक किया उसमें सोशल मीडिया पर इस पूरे अजेंडे की प्लानिंग की एक ‘पावर पॉइंट स्लाइड’ भी है। इस पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का लोगो लगा हुआ है। कनाडा के इस एनजीओ की वेबसाइट ‘आस्क इंडिया’ पर किसानों जुड़े तमाम प्रोपेगेंडा सामग्री की भरमार है और उनकी सोशल मीडिया साइट्स पर देश-विरोधी, खालिस्तान समर्थन वाली सामग्री भरपूर मौजूद है।

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पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का इन्स्टाग्राम अकाउंट

03 फरवरी को ग्रेटा थनबर्ग ने जो डॉक्यूमेंट ट्वीट किए, उन दस्तावेज में उल्लेख किया गया है कि ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ द्वारा ही किसानों के आंदोलन के लिए विरोध प्रदर्शन की सामग्री और सोशल मीडिया टेम्पलेट बनाए गए थे।

Poetic Justice Foundation
आन्दोलन में भूमिका को लेकर पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का विवरण

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस संगठन ने 26 जनवरी की हिंसा को लेकर भी खूब माहौल बनाया था-

पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का इन्स्टाग्राम अकाउंट

इस संगठन ने अपनी वेबसाइट ‘AskIndiaWhy’ पर लिखा है, “हम सबसे सक्रिय रूप से #FarmersProtest में शामिल हैं, जिसने दुनिया भर में भारतीय प्रवासियों को किसानों के प्रति भारत की दमनकारी नीतियों के लिए एक विद्रोह के रूप में सक्रिय किया है।”

किसानों के विरोध को इस संगठन ने ‘दुनिया के सबसे लम्बे चले किसान आंदोलनों में से एक’ के रूप में बताया है, जैसा दुनिया ने कभी नहीं देखा।

भारत सरकार पर हमला करते हुए यह संगठन कहता है, “प्रधानमंत्री मोदी के फासीवादी शासन में भारत ने खुद को एक क्रूर हिंदू राष्ट्रवादी शासन के रूप में पेश किया है।”

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खुद को खालिस्तानी बताते हैं इस संगठन के ‘एक्टिविस्ट’

इस डॉक्यूमेंट में एमओ ढोलीवाल नाम के एक व्यक्ति का भी जिक्र सामने आया है, जो कि पोएटिक जस्टिस फॉउंडेशन’ का एक सदस्य है। एमओ ढोलीवाल ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स पर सितंबर, 2020 में खुद को खालिस्तानी समर्थक बताया है। इस पोस्ट में ढोलीवाल ने ‘स्वतंत्र पंजाब’ की जमकर वकालत भी की है।

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अब अगर इस तमाम आंदोलन की क्रियाविधि और इसे नेटवर्क पर एक और नजर दौड़ाएँ तो पता चलता है कि यह सब कितना सुव्यवस्थित तरीके से किया गया। आपको याद ही होगा कि किसान आंदोलन के बीच दिल्ली सीमा पर मौजूद ‘किसानों’ के लिए ‘ट्रॉली टाइम्स’ नाम का एक समाचार पत्र भी शुरू किया गया था।

किसान विरोध का NDTV कनेक्शन

इस ट्रॉली टाइम्स के ‘स्तम्भकार’ वामपंथी समाचार चैनल एनडीटीवी के भी स्तम्भकार हैं। इनमें से एक नाम है हरजेश्वर पाल सिंह का। हरजेश्वर पाल ‘ट्रॉली टाइम्स’ के लिए लिखते हैं और हरजेश्वर पाल ही NDTV के लिए भी लिखते हैं और ‘दी क्विंट’ के लिए भी।

श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज, चंडीगढ़ में इतिहास के प्रोफेसर हरजेश्वर पाल सिंह कहते हैं कि आर्थिक कारणों ने गायकों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मजबूर किया है। प्रोफेसर पाल स्वतंत्र विचार रखने के लिए स्वतंत्र भी हैं। हालाँकि, यह तमाम नेटवर्क वामपंथ के रास्ते से होते हुए किसान आन्दोलन में अपनी दस्तक देकर खालिस्तान के विचार के एकीकरण पर ही जोर देते नजर आते हैं।

ग्रेटा थनबर्ग की एक छोटी सी भूल ने इस तमाम अजेंडा की पोल खोलकर रख दी है। अभी ये देखना बाकी है कि इस वामपंथी ‘टूलकिट’ से और क्या प्रपंच बाहर निकलने बाकी हैं।

छत्तीसगढ़ में 16 साल की आदिवासी लड़की से गैंगरेप, पत्थरों से मार पिता की भी हत्या: अब्दुल सहित 6 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के कोरबा में 16 साल की नाबालिग के साथ बलात्कार की घटना सामने आई है। नाबालिग की हत्या के बाद आरोपितों ने पत्थर से कूच कर उसकी हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आरोपितों ने पीड़िता के पिता और उनकी चार साल की पोती को भी जान से मार दिया। 

कोरबा जिले के एसपी अभिषेक मीणा ने इस घटना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वारदात 29 जनवरी 2021 को लेमरू पुलिस थाना अंतर्गत गधुपरोदा गाँव में अंजाम दी गई थी। फ़िलहाल इस घटना के कुल 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

आरोपितों की पहचान संतराम मझवार (45), अब्दुल जब्बार (29), अनिल कुमार सारथी (20), परदेसी राम पनिका (35), आनंद राम पनिका (25) और उमाशंकर यादव (21) के रूप में हुई है। मामले के सारे आरोपित सतरेंगा गाँव के रहने वाले हैं।

नाबालिग के पिता गैंगरेप मामले के मुख्य आरोपित संतराम मंझवार के यहाँ जुलाई 2020 से मवेशी चराने का काम करते थे। वह मूल रूप से बरपानी गाँव के रहने वाले थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित मंझवार 29 जनवरी को पीड़िता, उनके पिता और 4 साल की पोती को दो पहिया वाहन से घर छोड़ने के लिए जा रहा था।

इसी दौरान मंझवार कोरई नाम के गाँव के पास रुका। उसने वहाँ शराब पी। तभी उसके अन्य साथी भी मौके पर पहुँच गए। इसके बाद आरोपितों ने मिल कर पीड़िता, उनके पिता और पोती को गधुपरोदा स्थित पहाड़ी के जंगलों में ले गए। ठीक यहीं पर सभी आरोपितों ने नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया। 

बलात्कार के बाद आरोपितों ने तीनों पर डंडे और पत्थरों से कई बार हमले किए और उन्हें जंगल में छोड़ कर फ़रार हो गए। तीनों के घर वापस नहीं लौटने की वजह से परेशान परिजनों ने लेमरू पुलिस थाने में तीनों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू करके 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ शुरू की। आरोपितों द्वारा दिए गए बयान के आधार पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची, जहाँ ये वारदात अंजाम दी गई थी। उस समय सिर्फ पीड़िता ज़िंदा थी, बाकी दो लोगों की मृत्यु हो चुकी थी। पुलिस पीड़िता को स्थानीय अस्पताल लेकर गई लेकिन गंभीर चोटों की वजह से उसकी रास्ते में ही मृत्यु हो गई। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नाबालिग ‘पहाड़ी कोरवा जनजातीय समुदाय’ की सदस्य थी, जो कि विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) की श्रेणी में आता है। पुलिस ने घटनाक्रम में आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की धारा 302, 376 (2) जी, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजातीय (अत्याचार निवारण अधिनियम) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।            

पुलिस के लिए DTC बस नहीं – केजरीवाल सरकार का आदेश… लेकिन किया ‘किसानों’ के लिए रात में पानी की व्यवस्था

प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ के लिए एक बजे रात अपने विधायक को भेज कर पानी की व्यवस्था करवाने वाले अरविंद केजरीवाल ने नया फ़रमान जारी किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात की गई डीटीसी (DTC) बसों को तत्काल प्रभाव से डिपो में लौटने का आदेश दिया है।

दिल्ली के परिवहन विभाग ने डीटीसी को निर्देश दिया है कि दिल्ली पुलिस को दी गई 576 बसें वापस की जाएँ। दरअसल ‘किसान आंदोलन’ को मद्देनज़र रखते हुए तैनात किए गए पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही के लिए लो फ्लोर डीटीसी बसों का इस्तेमाल किया गया है।

‘किसान आंदोलन’ में अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 576 डीटीसी बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ दिल्ली सरकार ने डीटीसी से इस मुद्दे पर रिपोर्ट माँगी थी। जिसमें यह पता चला कि 20 फ़ीसदी से अधिक बसें विशेष किराए पर चल रही हैं। 

26 जनवरी को किसान आंदोलन की आड़ में हुई हिंसा के दौरान काफी बसें क्षतिग्रस्त हुई थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ विशेष किराए पर चल रही डीटीसी बसों को वापस बुलाने का फैसला किया गया है। इसके अलावा एक और अहम फैसला लिया गया है, जिसके मुताबिक़ डीटीसी बसों की सेवा लेने के लिए पुलिस या किसी भी सुरक्षा एजेंसी को दिल्ली सरकार से अनुमति लेनी होगी।

दिल्ली के परिवहन मंत्री और डीटीसी बोर्ड के चेयरमैन कैलाश गहलोत के अनुसार अब से विशेष किराए पर डीटीसी बसों की सेवा लेने के लिए दिल्ली सरकार की अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा 26 जनवरी को हुई हिंसा को देखते हुए दिल्ली सरकार और व्यवस्थाएँ देख सकती है।

डीटीसी में कुल 3762 बसें हैं, जिसमें 3400 बसों से सेवाएँ ली जाती हैं। 26 जनवरी को अवकाश होने की वजह से सिर्फ 1975 बस सेवाएँ दे रही थीं। इसमें सरोजिनी नगर, वजीरपुर और गाजीपुर डिपो की लगभग 40 बसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं। नतीजतन उस दिन शाम को सिर्फ 900 बसें बाहर भेजी गई थीं।

डीटीसी श्रेणी में सिर्फ लो फ्लोर बसें ही मौजूद हैं, इनके बड़े आकार के अलावा इंजन बंद होने के समय इन्हें खिसकाना लगभग नामुमकिन है। इसकी वजह से इन बसों का इस्तेमाल सड़कें जाम करने के लिए किया जाता है।