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‘घर आ जाओ राम… क्षमा कर दो हमारी वो भूल… कैकयी ने 14 बरस का वनवास दिया, हमने 37 साल ताले में रखा’

राम मंदिर निर्माण की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, हर कोई राम-भक्ति के माहौल मे लीन होता दिख रहा है। वैसे तो सोशल मीडिया पर आए दिन भगवान राम और राम मंदिर के ऊपर कई कविताएँ, कई नारें, कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं। मगर, इनमें कुछ कविताएँ ऐसी भी होती हैं, जिन्हें बार-बार सुनने की इच्छा करे। 

कुछ ऐसी ही रचना गीतकार, लेखक और कवि मनोज मुन्तशीर ने की है। इस कविता का शीर्षक है ‘घर आ जाओ राम’।

बता दें कि गीतकार मनोज ने अपनी इस रचना को वीडियो रूप में प्रस्तुत किया है। पीछे उनकी आवाज सुनाई दे रही है। इसे ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, “’हमने वो सूरज अँधेरे में फेंक दिया, जिसने पूरी सृष्टि को उजाले में रखा… कैकयी ने तो सिर्फ़ 14 बरस का वनवास दिया था, हमने 37 साल तुम्हें ताले में रखा।”

वीडियो मे देख सकते हैं कि राम भक्त, राम मंदिर और राम चित्रण को दर्शाया गया है। इसमें वह कहते सुनाई पड़ते हैं:

आसमानों से झाँकते तुमने कई सदियाँ गुजार दीं, अब धरती को बना लो अपना धाम…
घर आ जाओ राम… पधारो अपने निवास में और क्षमा कर दो हमारी वो भूल
जो अंकित है इतिहास में…

हमने वो सूरज अंधेरे में फेंक दिया, जिसने पूरी सृष्टि को उजाले में रखा…
कैकयी ने तो सिर्फ़ 14 बरस का वनवास दिया था, हमने 37 साल तुम्हें ताले में रखा। हम वचन देते हैं तन मन और प्रण से…
तुम्हारा घर बनाएँगे… बड़े शौक और बड़ी शान से…
दीवारें इतनी मजबूत कि भेदभाव का रावण भेद न पाए… दरवाजे इतने ऊँचे कि ऊँच नीच के दानव से लाँघा न जाए।

तुम्हारा शयन कक्ष वहाँ होगा, जहाँ किसी बेबस की सिसकियाँ नींद में भी सुनाई दें…
और तुम्हारी छत इतनी खुली होगी कि तीज का चंद्रमा और ईद का चाँद दोनों दिखाई दे…
तुम्हारी खिड़कियों पर बैठे परिंदे दोहराएँगे विश्व शांति की सरगम… महल के प्रवेश द्वार पर लिखा होगा वसुधैव कुटुंबकम!

एक आँगन भी होगा। वहाँ बैठ कर गाए जाएँगे कीर्तन भजन और खड़े होकर जण-गण-मण…
तुम्हारी प्राचीरों पर जलती मशालें मौन घोषणाएँ करेंगी कि अब किसी का छप्पर फूँका न जाए…
सीता की रसोई भरी होगी अनाज और अनुराग से ताकि राम की चौखट से कोई भूखा न जाए।

हमने रख दिया तुम्हारे भवन की नींव का पहला पत्थर…
अब और न सताओ धनुरधर…
अनगिनत केवट, शबरी और सीताओं को प्रतीक्षा है तुम्हारी…
घर आ जाओ मेरे राम…मेरे मंगल भवन अमंगलहारी।

दिल्ली के दंगाइयों का केस लड़ेगी पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार, उतारी 70 वकीलों की फ़ौज: हेल्पलाइन नंबर भी जारी

दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को ‘किसान आंदोलन’ के अंतर्गत हुई ट्रैक्टर रैली के नाम पर जम कर हिंसा हुई, जिसमें 400 पुलिसकर्मी घायल हुए। इस मामले में कई केस दर्ज कर के कार्रवाई शुरू की गई और कुछ आरोपितों की गिरफ़्तारी भी हुई है। लेकिन, अब दंगाइयों को चिंतित होने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि पंजाब सरकार ने उनका केस लड़ने का बीड़ा उठा लिया है और वकीलों की टीम भी बना दी है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने इन तथाकथित किसानों के समर्थन में वकीलों की एक पूरी फ़ौज ही उतार दी है। पंजाब में 2022 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव को अब लगभग 1 वर्ष ही बचे हैं, ऐसे में वहाँ की सरकार ने 70 वकीलों की एक टीम को दंगाइयों का केस लड़ने के लिए लगा दिया है। इतना ही नहीं, इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुद सोशल मीडिया के माध्यम से ऐलान किया कि दिल्ली हिंसा के आरोपितों को राज्य सरकार की तरफ से कानूनी सहायता मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने ‘किसानों के लापता’ होने के नैरेटिव को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वो इस मामले को व्यक्तिगत रूप से केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष उठाने वाले हैं, ताकि हर व्यक्ति ‘सुरक्षित घर पहुँचे।’ सहायता के लिए 112 पर कॉल करने की अपील की गई है।

मंगलवार (फ़रवरी 2, 2021) पंजाब के मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है, जिसमें केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित की जाएगी और आगे उठाए जाने वाले क़दमों के लिए आम सहमति भी बनेगी। खबर लिखे जाने के समय पंजाब भवन में ये बैठक चालू थी। राज्य में माहौल तनावपूर्ण हैं, ऐसे में सीएम अमरिंदर ने ‘अहंकार की बजाए साथ खड़े होंगे’ का आह्वान किया है।

उन्होंने कहा, “2 महीने से भी अधिक का समय बीत चुका है। हमारे किसान दिल्ली में मर रहे हैं। उन्हें पुलिस पीट रही है। गुंडे भी उनकी पिटाई कर रहे हैं। उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।” पंजाब के कैबिनेट मंत्रियों ने अमित शाह से भी मुलाकात की है। अमित शाह ने कहा कि केंद्र कभी भी किसानों से बातचीत के लिए तैयार है। पंजाब सरकार ने उन्हें ‘लापता किसानों की सूची’ भी सौंपी।

बता दें कि पंजाब के किसान और सिख धार्मिक संगठनों का दावा है कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा के बाद से 400 से अधिक किसान और नौजवान लापता हैं। दिल्ली पुलिस ने इस दावे को नकार दिया है। दूसरी ओर, दिल्ली हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें लाल किले हिंसा के लिए पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की गई थी। अदालत ने याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया है।

PM मोदी ने किया जिक्र, बचे हैं सिर्फ 6000 लोग… उस कोरवा समुदाय को ईसाई बना रहे पादरी: पंचायत से हुक्का-पानी बंद

झारखंड में लालच देकर धर्मांतरण का खेल ईसाई मिशनरियों द्वारा खेला जा रहा है, जिसमें जनजातीय समूहों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। गढ़वा स्थित धुरकी प्रखंड के खाला गाँव में ऐसे 2 दर्जन परिवारों ने ईसाई मजहब अपना लिया है। हाल ही में कोरवा समाज की एक बैठक हुई, जिसमें गाँव के 3 परिवारों को ईसाई मजहब अपनाने के लिए समाज से बहिष्कृत किया गया। साथ ही आर्थिक और शारीरिक दंड भी दिया गया।

धर्म परिवर्तन करने वाले परिवार के यहाँ शादी-विवाह, जन्म-मरण व अन्य सामाजिक कार्यों में समुदाय के किसी भी व्यक्ति के हिस्सा लेने पर 25,051 रुपए का आर्थिक व 51 लाठी का शारीरिक दंड निर्धारित किया गया है।

आदिम जनजाति को बहला-फुसला कर, लोभ-लालच देकर और बात न बनने पर धमका कर भी हिंदू धर्म छोड़ कर ईसाई मजहब अपनाने को कहा जाता है। सबसे पहले 4 भाइयों के एक परिवार को यहाँ ईसाई बनाया गया, फिर 5वें पर दबाव डाला जा रहा है।

ईसाई धर्मांतरण की घटनाओं से झारखंड का कोरवा समाज परेशान है। ऐसे तीन परिवारों को पंचायत ने तलब किया। उन्होंने स्वेच्छा से ईसाई मजहब अपनाने की बात करते हुए इसके प्रचार-प्रसार की भी बात कही। इसके बाद पंचायत ने उन्हें समाज से बहिष्कृत कर दिया।

SDO ने इस मामले में BDO को गाँव में जाँच के लिए भेजा है। अनुमंडल पदाधिकारी जयमंडल कुमार ने कहा कि मामला गंभीर होगा, तो वो खुद जाएँगे। पंचायत ने हिदायत दी है कि ईसाई मजहब अपनाने वाले परिवारों से सम्बन्ध न रखा जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 28, 2021 को ‘मन की बात’ में झारखंड के गढ़वा जिले के रंका पुलिस थाना क्षेत्र स्थित सिंजो गाँव निवासी पारा-शिक्षक हीरामन कोरवा का जिक्र किया, जिन्होंने अपने समुदाय की संस्कृति और पहचान के संरक्षण का बीड़ा उठाया है। उन्होंने कोरवा भाषा में एक डिक्शनरी भी तैयार की है। गाँव के ही प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले हीरामन ने ये डिक्शनरी अपनी 12 वर्ष की मेहनत के बाद तैयार की।

कोरवा भाषा अब लगभग विलुप्त होने की कगार पर है, ऐसे में इस समय उसे संरक्षण और पहचान की अत्यधिक आवश्यकता है। गढ़वा में भी इनकी जनसंख्या मात्र 6000 ही बची है। हीरामन को उम्मीद है कि उनकी 50 पन्नों वाली डिक्शनरी इस भाषा के संरक्षण में काम आएगी। उनके पास अपनी डिक्शनरी को प्रकाशित करने के लिए वित्त और संसाधन नहीं थे, जिस कारण पलामू के ‘मल्टी आर्ट एसोसिएशन’ ने इसका बीड़ा उठाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस कार्य का उल्लेख किए जाने के कारण हीरामन ने ख़ुशी भी जताई और कहा कि केंद्र सरकार का समर्थन जनजातीय समूहों की संस्कृति और भाषाओं के संरक्षण में मददगार होगा, जिसमें कोरवा भी शामिल है। उन्होंने अपने शब्दकोष में दैनिक जीवन से लेकर घर-गृहस्थी में उपयोग में आने वाले शब्दों की परिभाषाएँ लिखी हैं। पीएम के सम्बोधन के बाद कई लोग इस डिक्शनरी को पढ़ना चाहते हैं।

पारा-शिक्षक हीरामन कोरवा को बधाइयों का ताँता भी लगा हुआ है। बता दें कि कोरवा भाषा में गाँव को ऊंगा, राख को तोरोज, खाना खाएँगे को लेटे जोमाउह और आग को मड़ंग कहते हैं। ऐसे ही कई शब्द अर्थ सहित इस शब्दकोष में समाए हुए हैं। हीरामन बचपन से ऐसे शब्दों को अपनी डायरी में नोट करते रहे हैं। उन्होंने इसके लिए बुजुर्गों से बातचीत की और जानकारी ली। कोरवा के पूर्वज छत्तीसगढ़ से आकर झारखंड में बसे थे।

बजट 2021 में OPC: अकेला व्यक्ति भी शुरू कर पाएगा अब अपनी खुद की कंपनी, सरकार ने दी सहूलियत

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के वर्ष 2021-22 के बजट में कई नई बातें हैं। जैसे कि यह पहला डिजिटल बजट है। कृषि और ग्रामीण विकास की आधारभूत संरचना में निवेश के लिए एक अलग कोष बनाना भी बिलकुल नया प्रयास है। इस बजट के द्वारा उन्होंने कोरोना महामारी के बाद एक नए भारत की नींव की कई ईंटें लगाई हैं। इस नाते यह बजट बिल्कुल नई सोच वाला बजट लगा।

मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया बजट में प्रस्तावित ओपीसी यानी वन पर्सन कंपनी के प्रावधान ने। अभी तक आपको कोई भी नया धंधा शुरू करना होता था तो आप पार्टनरशिप फर्म, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पब्लिक लिमिटेड आदि बनाते थे। इनके कई झमेले भी थे। जैसे कि आपको अपने अलावा डायरेक्टर खोजने पड़ते थे।

ये आसान नहीं होता था। लेकिन अब स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक अकेला व्यक्ति भी एक कंपनी आरंभ कर सकता है। इसकी घोषणा बजट में की गई। इसमें कितनी पूंजी लगेगी कितनी नहीं लगेगी, इसकी कोई भी सीमा नहीं रखी गई है।

इस कंपनी को जब चाहे आप किसी दूसरी तरह कंपनी में बदल सकते हैं। यानी किसी ने अकेले व्यक्ति की कंपनी बनाई और कुछ समय बाद उसे लगा कि उसे साझेदार चाहिए या कम्पनी का काम बढ़ गया है तो जब चाहे उसे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या पब्लिक लिमिटेड में बदल सकता है। इससे नया धंधा चालू करना और उसे बढ़ाना पहले से काफी आसान हो जाएगा।

मुझे लगता है इससे बहुत बढ़ावा मिलेगा विदेशों में बसे भारतीयों को अपनी उद्यमशीलता दिखाने में। अक्सर प्रवासी भारतीय अपनी बुद्धि और धन का उपयोग करके भारत में कुछ करने को लालायित रहते हैं। लेकिन वे यहाँ के झमेलों से बचना चाहते थे। इसके बाद वे सुगमता से एकल स्वामित्व वाली ऐसी कम्पनी बना पाएँगे।

अभी तक उनके लिए एक और शर्त थी कि अगर वे भारत में धंधा करना चाहें तो उनको 180 दिन कम से कम भारत में रहना पड़ता था। इस समयावधि को भी कम करके 120 दिन कर दिया गया है। इसका अर्थ हुआ कि प्रवासी भारतीय अगर चाहें तो भारत में आकर ओपीसी शुरू कर सकते हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे बिना तामझाम के लोग कंपनियाँ खोल पाएँगे और ज्यादा रोजगार दे पाएँगे।

बजट का एक अन्य प्रावधान जो स्वागत योग्य है, वह है वित्त मंत्री द्वारा शोध के लिए 50000 करोड़ रुपए की व्यवस्था। ये राशि अगले पाँच साल में भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध और नई चीजों के लिए खर्च होगी।

भारत को दुनिया में आगे बढ़ना है तो शोध और नए प्रयोगों की बहुत आवश्यकता है। इस नाते ये 50000 करोड़ की राशि बहुत महत्वपूर्ण है। आशा है कि इससे भारत में शोध और नई-नई चीजें विकसित करने के नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

मुस्लिम लीग के मोहम्मद समीर की चाकुओं से गोद कर हत्या, CPI (M) के गुंडों पर आरोप: केरल की घटना

केरल में ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी है गई, जिसके बाद CPI(M) और कॉन्ग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। राज्य में हाल ही में पंचायत चुनाव संपन्न हुए, जिसके परिणामों में ‘लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF)’ ने अपना दबदबा कायम रखा, वहीं ‘यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF)’ दूसरे स्थान पर रही। IUML भी UDF का ही हिस्सा है, जिसका नेतृत्व कॉन्ग्रेस पार्टी करती है।

2019 में मुस्लिमों के प्रभाव वाले वायनाड लोकसभा क्षेत्र से जब कॉन्ग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गाँधी ने चुनाव लड़ा था, तब IUML के कैडरों को उनके पक्ष में जम कर सक्रिय किया गया था। हत्याकांड का ताज़ा मामला नीलांबर के कीझात्तूर ओरावंपरम बाजार का है। हत्या का आरोप सत्ताधारी LDF के कार्यकर्ताओं पर लगा है। आरोप है कि उन्होंने चाकुओं से गोद कर IUML कार्यकर्ता की हत्या कर डाली।

ये घटना बुधवार (जनवरी 27, 2021) की आधी रात को हुई। मृतक का नाम मुहम्मद समीर है। वो हमले में बुरी तरह घायल हुआ था, जिसके बाद उसे नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया। वहाँ उसकी मौत हो गई। अब तक इस मामले में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच अभी भी जारी है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला ने स्पष्ट कहा है कि ये CPI(M) के गुंडों द्वारा की गई राजनीतिक हत्याकांड की घटना है।

उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों के बाद से ही UDF के कार्यकर्ताओं को वामपंथियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। वहीं IUML ने भी इस हत्याकांड के लिए वामपंथी पार्टियों को ही जिम्मेदार ठहराया है। वहीं CPI (M) का कहना है कि दो समूहों के बीच विवाद हुआ था, जिसकी परिणीति इस घटना के रूप में हुई और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। मार्क्सिस्ट कैडर और इस्लामी कार्यकर्ताओं के बीच हाल के दिनों में झंझट की कई घटनाएँ हुई हैं।

मृतक मुहम्मद समीर की उम्र मात्र 26 वर्ष थी। ताज़ा घटना में भी दोनों गठबंधनों के दो परिवारों के बीच विवाद हुआ। इस दौरान मोहम्मद समीर अपने परिवार के एक सदस्य को बचाते हुए मारा गया। सीपीएम के जिला महासचिव ईएन मोहनदास ने कहा कि पार्टी को बदनाम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। UDF ने मँजेरी कॉन्स्टिट्यूएंसी के सामने विरोध में हड़ताल भी किया। 4 आरोपितों में से 3 एक ही परिवार के हैं।

बता दें कि कोरोना के मामले में केरल में स्थिति बदतर होने के कारण सरकार पहले से ही बैकफुट पर है। कुछ दिनों पहले ही खबर आई थी कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के जितने सक्रिय मामले हैं, उनमें से दो तिहाई से भी अधिक अकेले इन महाराष्ट्र और केरल में ही हैं। जनवरी का माह खत्म होने तक के आँकड़ों के अनुसार, केरल और महाराष्ट्र में भारत के कुल सक्रिय कोरोना मामलों का अकेले 69.6% मौजूद है।

BJP-RSS जैसे काम कर रहा है तू, हो जाएगा ‘सर तन से जुदा’ – कौसर हसन को PFI से मिली धमकी

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सूफी इस्लामिक बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता कौसर हसन मजीदी को कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट इंडिया (PFI) की ओर से धमकी भरा पत्र मिला है। कौसर के अनुसार उर्दू भाषा में लिखे गए इस पत्र में पीएफआई ने उनका सिर कलम करने की बात कही है। उन्होंने पुलिस में अपनी शिकायत दी और पड़ताल में पुलिस ने पाया कि वाकई पत्र में धमकी दी गई है।

खबरों के अनुसार, परमपुरवा निवासी कौसर हसन, सूफी इस्लामिक बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता होने के साथ-साथ एसआरए पब्लिक स्कूल के संचालक हैं। पिछले कुछ माह से वह लगातार संदिग्ध गतिविधियों के लिए कुख्यात पीएफआई पर बैन लगाने की मुहीम चला रहे हैं। साल 2020 के नवंबर में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इस संगठन को प्रतिबंधित करने की बात कही थी।

इसके बाद कौसर के सूफी इस्लामिक बोर्ड ने संगठन के ख़िलाफ़ हैशटैग भी चलावाया, जो काफी समय तक इंटरनेट पर नजर आया। उन्होंने संगठन प्रतिबंध के अलावा सोशल मीडिया भी बैन किए जाने की माँग की।

अब महीनों बीत जाने पर इस संबंध में मजीदी के घर में डाक से पत्र आया। पत्र कमाल खान पीएफआई ऑफिस नाम से भेजा गया। पत्र में उन्हें गद्दार बताते हुए भाजपा और संघ जैसे काम करने, विरोध प्रदर्शन करने और अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम के ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए माफी माँगने की बात कही गई। साथ ही कहा गया कि यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनका सिर कलम कर दिया जाएगा और जनाजे के लिए तरसना पड़ेगा।

न्यूज 18 के अनुसार, कौसर ने यह पत्र पढ़ कर सुनाया। उन्होंने कहा, “पिछले कई महीने से तुझे बराबर समझाया जा रहा है, लेकिन तू और तेरा सूफी इस्लामी बोर्ड अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। तुझे अच्छी तरह से मालूम है कि पीएफआई, कौम के मजलूमों और कमजोर लोगों की पहचान है। ये कोई खास मसलक की तंजीम नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान के मुसलमानों की आवाज है।”

पत्र में आगे लिखा गया, “तेरे जरिए बार-बार ऐसे काम किए जा रहे हैं, जो भाजपा और संघ करती है। कभी तू उलेमा के खिलाफ लिखता है, कभी दावते इस्लामी के खिलाफ तहरीक चलाता है और अब तेरे हाथ पीएफआई तक पहुँच गए। हजरत सरवर चिश्ती साहब का पुतला फूँक कर तू ये समझ बैठा है कि दुनिया फतह कर ली। अभी भी वक्त है, समझ जा वरना तेरा अंजाम भी वही होगा, जो गद्दारों का होता है। यानी सिर तन से जुदा हो जाएगा। इस खत के जरिए तुझे आगाह किया जा रहा है कि अभी भी मौका है।”

इसमें कौसर को यह भी कहा गया है, “तौबा कर और अपने सदर मन्सूर खान और मुफ्ती वसीम अशरफ से भी तौबा करवा दे, वरना तुम तीनों जनाजे के लिए तरस जाओगे।”

गौरतलब हो कि इस संबंध में मजीदी ने पुलिस को सूचित कर दिया है। पुलिस भी पत्र भेजने वालों की जाँच कर रही है। अभी तक की जाँच में पता चला है कि भेजे गए पत्र में वाकई धमकी भरी शब्द हैं। मामले की जाँच हो रही है।मजीदी के घर के बाहर पुलिस को तैनात कर दिया गया है।

पंजाब मेल से दिल्ली आ रहे थे 1000+ किसान प्रदर्शनकारी, रेलवे ने रूट बदल कर पहुँचा दिया मुंबई – FACT CHECK

पंजाब के फिरोजपुर से रोहतक होकर दिल्ली में घुसने वाली ‘पंजाब मेल’ से 1000 प्रदर्शनकारी ‘किसान आंदोलन’ में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आ रहे थे, लेकिन भारतीय रेलवे को ‘परिचालन सम्बन्धी दिक्कतें’ आ गईं, जिससे ये ट्रेन दिल्ली में आई ही नहीं और प्रदर्शनकारियों के मंसूबे धरे के धरे ही रह गए। ‘पंजाब मेल’ रोहतक से झज्जर, रेवाड़ी और मथुरा होते हुए निकल गई। रेलवे ने ‘परिचालन सम्बन्धी बाध्यताओं’ को इसका कारण बताया है।

इसी कारण ट्रेन का रूट डायवर्ट करना पड़ा। वहीं अधिकारियों का कहना है कि रोहतक से शकूरबस्ती के बीच ओवरहेड उपकरणों में कुछ खराबी आ गई थी, जिस कारण ऐसा करना पड़ा। हालाँकि, कई किसान नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि चूँकि ‘पंजाब मेल’ से सैकड़ों प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुँचने वाले थे, इसीलिए उसे दिल्ली में रोका ही नहीं गया। योगेंद्र यादव ने भी दावा किया कि 1000 किसानों के होने के कारण ‘पंजाब मेल’ दिल्ली नहीं लाई गई।

योगेंद्र यादव के दावे के बाद कइयों ने इसे आगे बढ़ाया

भारत की सबसे पुरानी ट्रेनों में से एक ‘पंजाब मेल’ दिल्ली में 20 मिनट के लिए रुकती आई है। रोहतक के बाद इसका अगला हॉल्ट नई दिल्ली होता है। लेकिन, सोमवार (फ़रवरी 1, 2021) को ये रोहतक से दिल्ली आए बिना ही मुंबई के लिए निकल गई। वहीं कई अन्य ट्रेनों के परिचालन में भी रुकावट आई। बहादुरगढ़ में कुछ ट्रेनों को रोकना पड़ गया। किसान यूनियनों का कहना है कि ये किसान बहादुरगढ़ में ही उतरने वाले थे, लेकिन ऐसा प्रतिबंधित कर दिया गया।

रूट डाइवर्ट होने के कारण जम कर उड़े अफवाह

वहाँ से बॉर्डर की दूरी मात्र 4 किलोमीटर रह जाती है। किसान संगठनों का कहना है कि इन प्रदर्शनकारियों को रोहतक और रेवड़ी में उतरने को मजबूर किया गया। वहीं मथुरा में भी सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के पहुँचने की उम्मीद है, जिस कारण वहाँ भी भारी पुलिस बल की तैनाती रही। लेकिन, भीड़ सामान्य ही थी और जैसी आशंका थी, वैसा नहीं हुआ। नॉर्दर्न रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार ने भी इस बात से इनकार किया कि किसानों के कारण ट्रेन का रूट डायवर्ट हुआ।

उधर दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में शामिल संगठनों ने शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) को पूरे देश में ‘चक्का जाम’ का ऐलान किया है। किसान नेताओं ने कहा कि उस दिन दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक सभी राष्ट्रीय और स्टेट राजमार्गों पर ट्रैफिक बाधित किया जाएगा। ये सब तब हो रहा है, जब केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि आम बजट में किसानों के सारे संशयों को स्पष्ट कर दिया गया है।

म्यांमार में तख्तापलट के पीछे चीन का हाथ? रोहिंग्या नरसंहार वाले जनरल के हाथ में सत्ता: US लगा सकता है नए प्रतिबंध

म्यांमार में सेना द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को बरखास्त कर के सत्ता अपने हाथ में लेने के बाद अब अमेरिका ने दक्षिण एशियाई देश पर नए प्रतिबंध लगाने की बात कही है। राष्ट्रपति जो बायडेन ने सोमवार (फरवरी 1, 2021) को कहा कि अमेरिका प्रतिबंध वाले कानूनों की समीक्षा के बाद उचित कार्रवाई करेगा। वहीं म्यांमार में सेना द्वारा आपातकाल लगाने के पीछे चीन का हाथ भी बताया जा रहा है।

सेनाध्यक्ष मिन ऑन्‍ग ह्लेनिंग को इस वर्ष रिटायर होना था, लेकिन अब देश की सत्ता उनके हाथों में है। उनके खिलाफ पहले से यूएस और यूके जैसे देशों ने कई प्रतिबंध लगा रखे हैं। इन देशों ने उन पर रोहिंग्या मुस्लिमों के नरसंहार का आरोप लगाया है। जबकि चीन उनका खासा सम्मान करता रहा है। हाल ही में चीन के विदेश मंत्री यांग यी ने दोनों देशों को भाई बताते हुए म्यांमार के सेनाध्यक्ष की ‘सैन्य पुनरोद्धार’ के लिए पीठ थपथपाई थी।

पुस्तक “In the Dragon’s Shadow: Southeast Asia in the Chinese Century” के लेखक सेबेस्टियन स्ट्रांगियो ने कहा कि अब अमेरिका जैसे देशों के पास यहाँ हस्तक्षेप करने का न तो लोकतांत्रिक और आर्थिक माध्यम बचा है और न ही उनका अधिकार है। हाँ, चीन का प्रभाव ज़रूर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में जिस तरह से लोकतंत्र का स्तर गिरा है, उससे उन्हें ऐसे मामलों में बोलने का नैतिक अधिकार ख़त्म हो गया है।

चीन एक पार्टी शासन के हिसाब से चलता है, ऐसे में डोनाल्ड ट्रम्प ने नीति अपनाई थी कि एशिया में लोकतांत्रिक देशों को बढ़ावा दिया जाए, जहाँ ‘खुला एवं स्वतंत्र’ माहौल है। म्यांमार में 1990 से ही कई प्रतिबंध लगते रहे थे, जिसका खामियाजा वहाँ की जनता को भुगतना पड़ा है। जो बायडेन ने विश्व के सभी देशों को म्यांमार में सेना द्वारा नेताओं को रिहा करने की माँग करने के लिए कहा है। नोबेल विजेता आंग सान सू की ने भी पिछले दिनों सेना के रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया था।

इस कारण यूएस कॉन्ग्रेस में उनके समर्थक कम हुए हैं और लोकतांत्रिक एक्टिविस्ट के रूप में उनकी छवि को लेकर सवाल उठे हैं। चीन अब तक ताज़ा घटनाक्रम पर शांत रहा है और उसने म्यांमार को दोस्त बताते हुए सभी पक्षों को मिल-बैठ कर समझौता करने को कहा है। म्यांमार का एक तिहाई व्यापार चीन से ही होता है, अमेरिका से 10 गुना ज्यादा। म्यांमार में चीन का निवेश 20.5 बिलियन डॉलर (1.57 लाख करोड़ रुपए) है।

उधर म्यांमार की सेना ने पुरानी सरकार के 24 मंत्रियों को हटा कर उनकी जगह 11 नए नाम जारी किए हैं। नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLFD) के अधिकतर नेता जेल में हैं। पूर्व सैन्य जनरल म्यिंट स्वे को कार्यकारी राष्ट्रपति बनाया गया है। सेना ने चुनाव में धाँधली के आरोप भी लगाए हैं। NLFD ने नवंबर में हुए चुनाव में 396 सीटें जीती थीं। यंगून में बैंक बंद रहे और सेना की पेट्रोलिंग होती रही। लोगों में डर का माहौल है, ऐसे में कइयों ने महीने भर की खरीददारी कर डाली है।

म्यांमार ने 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से दो – 1962 में एक और 1988 में एक के बाद एक दो तख्तापलट देखे हैं। एक दशक पहले तक म्यांमार में सैनिक शासन ही था और चूँकि ये सैनिक शासन लगभग 50 साल तक था, इसलिए म्यांमार का लोकतंत्र अभी जड़ें नहीं जमा सका है। पिछले हफ्ते भी म्‍यांमार में तनाव के हालात हुए थे। उस समय सेना के प्रवक्‍ता ने कहा था कि नवंबर में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की उसकी शिकायतों पर ध्‍यान नहीं दिया गया तो तख्‍तापलट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

रमजान बना पिंटू, एक बच्चे की माँ को प्रेम जाल में फँसाया: शारीरिक संबंध बनाकर रिकॉर्ड किया अश्लील वीडियो

गुजरात के अहमदाबाद में 31 साल की महिला के रेप के इल्जाम में 23 साल के रमजान घाँची को गिरफ्तार किया गया। रमजान पर आरोप है कि उसने पिंटू बनकर महिला से दोस्ती की। बाद में जगह-जगह घुमा-फिरा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। उसकी अश्लील वीडियो बनाई। 

पीड़िता ने शिकायत करवाते हुए कहा कि आरोपित एक इलेक्ट्रिशियन है। कुछ समय पहले जब वह उसके घर काम करने आया, तभी दोनों के बीच दोस्ती हुई। बातचीत में उसने बताया कि उसका नाम पिंटू है। महिला को लगा कि वह उसी के धर्म का है। 

वह उससे बात करती रही। थोड़े दिन में दोस्ती प्रेम में बदली और दोनों घूमने के लिए  सांणद, चोटीला, जूनागढ़ जैसे अलग-अलग स्थानों पर जाने लगे। इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए और रमजान ने उसकी अश्लील वीडियो बनाई।

कुछ दिन बाद पीड़िता को कहीं से पता चला कि लड़का दूसरे धर्म का है और उसका नाम रमजान घाँची है। यह जानकर महिला परेशान हो गई और युवक के खिलाफ़ शिकायत करवाई। उसने बताया कि दोनों 14 महीनों से रिलेशन में थे। युवक ने उसे कई जगह घुमाया और मारपीट भी की।

युवती की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित को अहमदाबाद के जुहापुरा इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया है कि दो माह पहले युवती ने आरोपित से शादी के लिए कहा था, लेकिन वह उससे शादी करने की बजाय धमकी देता रहा। जब बात ज्यादा बढ़ी तब महिला ने आपबीती अपने घर के सदस्यों को बताई।

आनंदनगर पुलिस अधिकारी का कहना है कि पीड़िता का 14 साल का बेटा है। वह 5 साल से अपने पति से अलग रहती है। दो साल पहले उसे इलेक्ट्रिशियन की जरूरत पड़ी, तब वह उसके संपर्क में आई। घर से जाते हुए रमजान महिला को अपना नंबर देकर गया, जिसके चलते दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई।

6 फरवरी को पूरे देश में चक्का जाम करेंगे किसान, तलवारों के हमले से निपटने के लिए तैयार हुई दिल्ली पुलिस

दिल्ली में चले रहे ‘किसान आंदोलन’ में शामिल संगठनों ने शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) को पूरे देश में ‘चक्का जाम’ का ऐलान किया है। किसान नेताओं ने कहा कि उस दिन दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक सभी राष्ट्रीय और स्टेट राजमार्गों पर ट्रैफिक बाधित किया जाएगा। ये सब तब हो रहा है, जब केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि आम बजट में किसानों के सारे संशयों को स्पष्ट कर दिया गया है।

उन्होंने किसानों से इस दिशा में सकारात्मक रूप से सोचने की अपील की। उन्होंने कहा कि APMC मंडियों के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता बजट में ही दिखाई दे जाती है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर भी बजट में सरकार की मंशा साफ़ कर दी गई है। बता दें कि ताज़ा आम बजट में APMC मंडियों को कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स दिए गए हैं, जिससे उनके आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में ये भी गिनाया कि कैसे 2013-14 के मुकाबले अब सरकार कई गुना ज्यादा अनाज की खरीद कर रही है और इसके लिए MSP से 1.5 गुना अधिक तक दाम चुकाए गए हैं। साथ ही यूपीए सरकारों के मुकाबले MSP में बढ़ोतरी भी हुई है। जबकि किसान संगठन अब पूछ रहे हैं कि कृषि और उससे जुड़े विभागों के संयुक्त बजट में कटौती क्यों की गई है?

उनका कहना है कि 2020-21 में कृषि के लिए 1.54 लाख करोड़ रुपए के मुकाबले अबकी 1.48 लाख करोड़ रुपए के फंड्स का प्रावधान है। योगेंद्र यादव का कहना है कि पिछले वर्ष कृषि के लिए GDP का 5.1% दिया गया था, जो अब मात्र 4.3% रह गया है। वहीं किसान नेता दर्शन पाल ने ‘चक्का जाम’ में 3 मुद्दों पर विरोध की बात कही – तीनों कृषि कानूनों, सरकार के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘दमनकारी अभियान’ और बजट में किसानों के प्रति ‘अन्याय’।

वहीं दूसरी तरफ अब दिल्ली पुलिस को हिंसक प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस को पहनने के लिए खास शील्ड दिए गए हैं, जो उन्हें तलवारों से हमले से बचाएँगे। साथ ही स्पेशल डिजाइन वाले तलवार भी उन्हें दिए गए हैं, जिससे तलवारधारी प्रदर्शनकारियों को उनसे दूर रखने में मदद मिलेगी। जनवरी 26 और उसके बाद से पुलिस पर तलवार से हमले की कई घटनाएँ हो चुकी हैं।

उधर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाँवों से गाजीपुर विरोध स्थल पर जाने वाले सभी ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ का एक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। जिसके चलते किसान संगठन के नेताओं को अब कानूनी कार्रवाई होने का भय सताने लगा है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इन सभी किसानों को नोटिस दिए जा सकते हैं। किसान नेताओं का दावा है कि पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों के परिवारों पर उनसे विरोध स्थल से घर लौट आने को कहने का दबाव बनाया जा रहा है।