मुंबई की एक विशेष POCSO अदालत ने एक 58 वर्षीय व्यक्ति को वर्ष 2018 में पाँच साल के लड़के के यौन उत्पीड़न से संबंधित एक मामले में 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। आरोपित चिकन बेचने 5 वर्षीय पीड़ित बच्चे के इलाके में जाता था। 4 अप्रैल 2018 को जब पीड़ित अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था, तब आरोपित मोहम्मद खातिर शेख ने लड़के को 2 रुपए दिए और उसे अपने घर ले गया। आरोपित ने बच्चे के कपड़े निकालकर उसके निजी अंगों को छूते हुए उस पर हस्तमैथुन किया।
घर लौटने के बाद बच्चे ने अपनी माँ को बताया कि ‘मुरगीवाला चाचा’ (चिकन विक्रेता) ने उसके निजी अंगों को छुआ था। इसके बाद, उसकी माँ ने चिकन विक्रेता शेख से इस बारे में पूछताछ की। जिसके बाद आरोपित ने लड़के की माँ से कहा कि उसे माफ कर इस घटना को भुला दिया जाए। आरोपित खातिर शेख ने कहा कि जब उसने ऐसा किया, उस पर शैतान हावी हो गया था।
बाद में, इस मामले में एक मामला दर्ज कराया गया। जाँच में चिकन विक्रेता को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 6 (उत्तेजित यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया गया था। POCSO अधिनियम की इस धारा के तहत दोषी पाए गए व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। हालाँकि, पेनीट्रेशन न होने की वजह से इस मामले में, अदालत ने आरोपित को इस मामले में 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
आरोपित मोहम्मद खातिर शेख ने अदालत में इसे ‘शैतानी गलती’ बताया। दलीलें सुनने के बाद, न्यायाधीश एमए बरालिया ने आरोपित को POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया। आरोपित के वकीलों ने अदालत को बताया कि उसकी पत्नी और पाँच बेटियाँ उसके गृहनगर में रहती है। उसकी तीन बेटियों की शादी हो चुकी है। उनकी दो बेटियों और पत्नी की जिम्मेदारी उस पर है।
इसके अलावा, आरोपित पर एक भाई की भी जिम्मेदारी है, जो कि अंधा है। इसलिए उसके परिवार और वित्तीय पृष्ठभूमि को देखते हुए उदार दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। हालाँकि अभियोजन पक्ष ने अधिकतम सजा की माँग की थी, लेकिन अदालत ने आरोपित की ‘खराब वित्तीय स्थिति’ को देखते हुए न्यूनतम सजा दी।
पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में भगदड़ मची हुई है। इसकी शुरुआत बीते दिसंबर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे पूर्व मंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे से हुई। अब डायमंड हार्बर से दो बार के विधायक दीपक हलदर ने टीएमसी को झटका दिया है। सोमवार (1 फरवरी 2021) को उन्होंने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ हलदर ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफ़ा स्पीडपोस्ट (speedpost) की मदद से पार्टी कार्यालय को भेजा। सोमवार दोपहर उनका इस्तीफ़ा कोलकाता के टोप्सिया स्थित पार्टी मुख्यालय ‘तृणमूल भवन’ पहुँच गया।
West Bengal: Trinamool Congress MLA Dipak Haldar from Diamond Harbour constituency resigns from the party. pic.twitter.com/PDqAZvsqU6
हलदर ने एक मीडिया समूह से बात करते हुए कहा, “मैं दो बार विधायक रह चुका हूँ। लेकिन 2017 के बाद से मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं जनता के लिए काम नहीं कर पा रहा हूँ। शीर्ष नेतृत्व को इस बारे में सूचित करने के बावजूद कोई बदलाव नज़र नहीं आया। मुझे किसी पार्टी कार्यक्रम के बारे में सूचित नहीं किया जाता है। मेरी अपने क्षेत्र और अपने लोगों के प्रति जवाबदेही है, इसलिए मैंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया है। बहुत जल्द मैं पार्टी के जिलाध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष को भी अपना इस्तीफ़ा भेजूँगा।”
दीपक हलदर ने अपने भविष्य को लेकर कोई खुलासा नहीं किया है। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वह मंगलवार (2 फरवरी 2021) को बरुईपुर में भाजपा में शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ हलदर पिछले काफी समय से संगठन से नाराज़ चल रहे थे और सार्वजनिक रूप से नेतृत्व की आलोचना करते थे। 2015 के दौरान दीपक हलदर को पार्टी से निलंबित किया गया था, जब एक कॉलेज में छात्रों के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच टकराव में शामिल होने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। कुछ समय बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
इसके पहले टीएमसी के 6 विधायकों ने 72 घंटों के भीतर भाजपा का दामन थाम लिया था। पश्चिम बंगाल के पूर्व वन मंत्री राजीब बनर्जी, बाली से तृणमूल विधायक बैशाली डालमिया, उत्तरपारा विधायक प्रबीर घोषाल, हावड़ा मेयर रथिन चक्रवर्ती और पूर्व विधायक सारथी चटर्जी भाजपा में शामिल हुए थे।
5 जनवरी 2021 को पश्चिम बंगाल युवा सेवा और खेल मंत्री लक्ष्मी रतन शुक्ला ने भी पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। हालाँकि वह बतौर विधायक अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। कुला मिला कर तृणमूल कॉन्ग्रेस के कुल 17 विधायकों और 1 सांसद ने पार्टी का दामन छोड़ा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाँवों से गाजीपुर विरोध स्थल पर जाने वाले सभी ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ का एक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। जिसके चलते किसान संगठन के नेताओं को अब कानूनी कार्रवाई होने का भय सताने लगा है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इन सभी किसानों को नोटिस दिए जा सकते हैं। किसान नेताओं का दावा है कि पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों के परिवारों पर उनसे विरोध स्थल से घर लौट आने को कहने का दबाव बनाया जा रहा है।
समाचार पत्र ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब और हरियाणा के बाद, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही किसानों की सबसे अधिक संख्या को दिल्ली के बाहरी इलाकों में विरोध प्रदर्शन के लिए भेजा गया है, जिसमें विशेष रूप से गाजियाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले गाजीपुर के लोग शामिल हैं। इसी बीच, गाजीपुर में धारा 144 के जरिए निषेधात्मक आदेश लागू किए गए हैं।
किसान संगठन के नेताओं का दावा है कि पुलिस, प्रदर्शनकारियों के परिवारों से अपने परिजनों को घर लौटने को कहने का भी दबाव बना रही है। उल्लेखनीय है कि गाजीपुर के विरोध स्थल पर अधिकांश प्रदर्शनकारी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से हैं।
आगरा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक, ए सतीश गणेश ने कहा, “पिछले दो महीनों से हम किसानों को दिल्ली की ओर बढ़ने से रोकने की अपील कर रहे हैं। दिल्ली सीमा से लगे हिस्सों पर बड़े पैमाने पर आवाजाही को रोकने के लिए निवारक कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली की सीमाओं पर डेरा जमाए लोगों का डेटाबेस तैयार करने के लिए पुलिस की टीमें गाँवों में जा रही हैं। गाजियाबाद प्रशासन द्वारा धारा 144 लगाई गई है। गाजीपुर बॉर्डर पर डेरा डालने वाले लोगों को विरोध स्थल छोड़कर वापस घर जाना चाहिए।”
हालाँकि, शाहजहाँपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) एस आनंद ने कहा कि उन्होंने सिर्फ डेटा बनाए रखने के लिए उन प्रदर्शनकारियों के बारे में जानकारी दर्ज की है, जो 26 जनवरी की ट्रैक्टर रैली में भाग लेने गए थे।
उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस हिंसा में शामिल किसी भी प्रदर्शनकारी को ढूँढती है और उसे खोजने में मदद की जरूरत पड़ती है, तो उत्तर प्रदेश पुलिस आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने आगे कहा कि वे किसी भी प्रदर्शनकारी के परिवार के सदस्यों पर उन्हें घर लौटने को मजबूर करने का दबाव नहीं डाल रहे हैं।
6 फरवरी को देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की
प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने 06 फरवरी को तीन घंटे के राष्ट्रव्यापी चक्का जाम का ऐलान किया है। भारतीय किसान यूनियन (आर) के नेता बलबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वो 06 फरवरी को दोपहर 12 बजे से 03 बजे तक रोड ब्लॉक करेंगे। उन्होंने कहा कि यह चक्का जाम प्रदर्शन स्थलों पर इंटरनेट बैन, बजट में किसानों को नजरअंदाज किए जाने और अन्य मुद्दों को लेकर किया जाएगा।
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक मैसेज काफी तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे संदेश में दावा किया जा रहा है कि मुंबई का ताज होटल वैलेंटाइन डे पर एक गिफ्ट कार्ड भेज रहा है। इसके जरिए 7 दिन तक मुफ्त में ताज होटल में रह सकते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज
व्हाट्सएप पर वायरल हो रहा मैसेज
व्हाट्सएप पर फॉरवर्ड किए जा रहे इस मैसेज में लिखा है, “मुझे TAJ होटल से एक गिफ्ट कार्ड मिला और आखिरकार TAJ होटल में 7 दिनों तक मुफ्त में रहने का मौका मिला।” इस मैसेज के साथ एक लिंक भी आता है, जिस पर क्लिक करने पर एक और मैसेज आता है। इस पर लिखा होता है, “TAJ EXPERIENCES GIFT CARD TAJ होटल ने वैलेंटाइन डे मनाने के लिए 200 गिफ्ट कार्ड भेजे। आप इस कार्ड का उपयोग TAJ में किसी भी होटल में 7 दिनों तक मुफ्त में रहने के लिए कर सकते हैं। आपके पास 3 कोशिशें हैं, गुड लक!”
जब कोई OK पर क्लिक करता है तो पेज सवाल-जवाब के लिए एक पेज पर रीडाइरेक्ट करता है। यहाँ पर जेंडर, होटल के रेट आदि जैसे कुछ सवाल पूछे जाते हैं और अगर उसका जवाब दे दिया तो एक और पेज खुलता है, जिस पर TATA के लोगो वाले 12 बॉक्स होते हैं। इसके बाद किसी भी बॉक्स पर क्लिक करके ये देखना होता है कि उसने यह गिफ्ट कार्ड जीता है या नहीं।
यदि कोई गिफ्ट कार्ड जीतता है, तो उस कार्ड को हासिल करने के लिए उसे अगले पेज पर जाने के लिए कहा जाता है। वहाँ जाने पर इस मैसेज को पाँच ग्रूपों या 20 लोगों को संदेश भेजने के लिए कहता है।
सच क्या है?
ताज होटल ने इस वायरल खबर का खंडन किया है। उन्होंने ट्विटर पर बयान जारी कर कहा है, “हमारे संज्ञान में आया है कि एक वेबसाइट वैलेंटाइन डे पहल को बढ़ावा दे रही है। व्हाट्सएप के माध्यम से ताज एक्सपीरियंस गिफ्ट कार्ड की पेशकश कर रही है। हम सूचित करना चाहते हैं कि ताज होटल्स/ आईएचसीएल ने इस तरह की कोई पेशकश नहीं की है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इस पर ध्यान दें और सावधानी बरतें।”
It has come to our notice that a website has been promoting a Valentine’s Day initiative, offering a Taj Experiences Gift Card via WhatsApp. We would like to inform that Taj Hotels/IHCL has not offered any such promotion. We request to take note of this and exercise due caution.
इस मामले पर मुंबई पुलिस से भी बयान जारी कर लोगों से सतर्क रहने की बात कही है। उन्होंने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, “वैलेंटाइन डे के अवसर पर मुफ्त गिफ्ट कार्ड या कूपन के बारे में संदेश वर्तमान में सोशल मीडिया पर वायरल है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे ऐसी अफवाहों पर विश्वास न करें और अज्ञात नंबरों से प्राप्त किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।”
रामपुर प्रशासन द्वारा वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन को एक दंगाई की मौत पर फ़ेक न्यूज़ फैलाने पर चेतावनी भेजे जाने के कुछ ही घंटों बाद, देश की ‘लिबरल’ आवाम पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। लिबरल तंत्र ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आगाह किया है कि वो वरदराजन पर किसी भी तरह की कार्रवाई से बचें।
ऑपइंडिया को पता चला कि उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को ‘चेतावनी दी गई’ है कि, अगर वरदराजन पर कार्रवाई की गई तो इस मामले में अमेरिकी सरकार दखल दे सकती है, क्योंकि वह एक अमेरिकी नागरिक है। सभी जानते हैं कि वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के अधिकांश सलाहकार वामपंथी हैं।
फ़ेक न्यूज़ मामले में वरदराजन पर एफ़आईआर दर्ज होने के बाद से ही ‘बुद्धिजीवी’ जमात का रुदन शुरू हो गया है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल (Wall Street Journal) के स्तंभकार सदानंद धूमे ने कहा कि फ़ेक न्यूज़ फैलाने वालों पर कार्रवाई करके ‘भारत बहुत तेजी से अंतर्राष्ट्रीय चुटकुले’ में तब्दील होता जा रहा है।
Cc: @KamalaHarris An India that is not free can be no friend to the United States—as we learned with Pakistan and Turkey, enduring friendships are made of values. Not merely shared interests. https://t.co/vegQZZwzjo
पत्रकार आतिश तासीर जिसके पिता की ‘ईशनिंदा का विरोध’ करने के लिए हत्या कर दी गई थी, उसने अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को टैग किया और भारत से दोस्ती नहीं रखने के लिए उकसाया।
पिछले बार भी विदेशी मीडिया समूहों के लिए काम करने वाले ‘पत्रकारों’ ने बवाल खड़ा कर दिया था। तब यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की बात का गलत तरीके से हवाला देने के लिए वरदराजन पर कार्रवाई की गई थी।
Anyone who cares about press freedom in India should speak up about Yogi Adityanath’s thuggish attempt to intimidate @svaradarajan for doing his job as a journalist. v @tunkuv https://t.co/LN7gBr3w7K
सिद्धार्थ वरदराजन के भाई टुंकु वरदराजन (Tunku Varadarajan) ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के ज़रिए एक प्रताड़ित तस्वीर तैयार करने का प्रयास किया था।
बाकी भी इसकी नक़ल करते हुए आगे बढ़े।
When News Suppression Hits Home. @tunkuv writes “My brother in India faces criminal charges for reporting a story.” Solidarity with @svaradarajan and the Wire. https://t.co/DBHyFnBNGR
Coming to this late but this is an important and must read piece by @tunkuv on his brother @svaradarajan. And the larger issue of media freedom that should concern us all https://t.co/tgtZKkmyZ9
वरदराजन ने तबलीगी जमात की करनी पर पर्दा डालने के लिए योगी आदित्यनाथ की बात का गलत हवाला दिया था। कई चेतावनियों के बावजूद वरदराजन ने न तो झूठा लेख हटाया और न ही उसके लिए माफ़ी माँगी।
योगी सरकार को निशाना बनाने की द वायर की कोशिश
इसके पहले भी ऐसा कई बार हुआ है जब ‘द वायर’ ने योगी सरकार को निशाना बनाने की कोशिश की है। पिछले साल जुलाई में जब कुख्यात गैंगस्टर विकास दूबे पुलिस एनकाउंटर में मारा गया तो ‘द वायर’ अलग ही राग अलाप रहा था। द वायर में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया था कि योगी आदित्यनाथ ‘जातिवादी’ हैं।
विकास दूबे पर द वायर में प्रकाशित रिपोर्ट
रिपोर्ट में आगे दावा किया गया था कि जितने अपराधियों का एनकाउंटर किया गया है उसमें लगभग सारे ही छोटे अपराधी थे और किसी भी मोस्ट वांटेड अपराधी का एनकाउंटर नहीं किया गया है।
वायर का यही प्रोपेगेंडा आगे भी जारी रहता है।
विकास दूबे पर द वायर में प्रकाशित रिपोर्ट
द वायर द्वारा लगाया कुछ और आक्षेप:
1. योगी सरकार का गैंगस्टर विकास दूबे पर कार्रवाई का कोई उद्देश्य नहीं था।
2. योगी सरकार सिर्फ मुस्लिम और दलितों पर कार्रवाई करती है।
3. योगी सरकार ने सिर्फ छोटे अपराधियों पर कार्रवाई की न कि उन पर जो ‘जुड़े हुए थे’।
विकास दूबे पर लिखी गई द वायर की इस रिपोर्ट का आधार सिर्फ यही था कि योगी सरकार सिर्फ मुस्लिम और दलितों पर कार्रवाई करती है। अगर योगी सरकार का विकास दूबे को पकड़ने का इरादा नहीं होता तो शुरूआती कार्रवाई ही नहीं हुई होती।
योगी सरकार के सत्ता में आने से पहले अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए विकास दूबे बेख़ौफ़ होकर घूमा और उस पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई थी। जब पुलिस विकास दूबे को गिरफ्तार करने गई थी तब उसके आदमियों ने 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। इसके बाद वह फरार हो गया था। फिर उसकी खोजबीन शुरू हुई थी और उसे मध्य प्रदेश में गिरफ्तार किया गया था। वापसी के दौरान जब उसने भागने की कोशिश की तब पुलिस ने उसे एनकाउंटर में मार गिराया था।
इसके बाद भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब ‘द वायर’ के कर्मचारियों ने प्रोपेगेंडा फैलाने का प्रयास किया था, जिसका सीधा असर क़ानून-व्यवस्था पर पड़ सकता था। ‘द वायर’ की आरफा खानम शेरवानी ने सीएए का विरोध करने वाले को रणनीति के अनुसार एक साथ बने रहने का सुझाव दिया था, जबकि इस क़ानून का देश के मुस्लिमों से कोई सरोकार ही नहीं था।
शाहीन बाग़ का मास्टरमाइंड शर्जील इमाम, भी द वायर के लिए लिखता है। फ़िलहाल राजद्रोह के आरोप में जेल के भीतर है।
क्या कहते हैं योगी आदित्यनाथ
हालाँकि इस तरह की ‘हल्की चेतावनियों’ का योगी सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, पुलिस को कार्रवाई के आदेश मिले और शनिवार को एफ़आईआर दर्ज की गई।
सीएमओ (मुख्यमंत्री ऑफिस) के अधिकारी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “अगर न्यायिक ज़रूरतों के आधार पर हमें गिरफ्तारी की आवश्यकता होगी तो हम उसे (सिद्धार्थ वरदराजन) गिरफ्तार करेंगे। अमेरिका के नागरिक वापस वहाँ जा सकते हैं अगर उन्हें भारत के क़ानून का पालन नहीं करना है।”
उत्तर प्रदेश पुलिस ने रविवार (जनवरी 31, 2021) को गोरखपुर जिले में 81 लोगों की हिस्ट्रीशीट खोली। इस लिस्ट में साल 2017 में गोरखपुर BRD मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन कांड (जिसमें कई बच्चों की मौत हुई थी) के बाद सुर्खियों में आए डॉक्टर कफील खान का नाम टॉप 10 में शामिल है।
डॉ. कफील का नाम हिस्ट्रीशीटर लिस्ट में शामिल होने के बाद विपक्षी नेताओं और उसके मीडिया गिरोह के सदस्यों ने ट्वीट्स की झड़ी लगा दी। उन्होंने अपने ट्वीट्स से यह साबित करने की कोशिश की कि क्यों योगी सरकार का फैसला गलत है।
राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने ’डॉक्टर’ की प्रशंसा करते हुए ट्वीट किया, “एक ऐसा डॉक्टर, जो लोगों की मदद के लिए कहीं भी/ हर जगह पहुँचता है, उसे हिस्ट्रीशीटर कहा जा रहा है। शर्म करो! शर्म करो!”
A people’s doctor who reaches with a helping hand anywhere/everywhere is being called a history Sheeter. Shame! Shame! #DrKafeel_is_not_historysheeter
कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की स्तंभकार संजुक्ता बसु ने भी इस मुद्दे पर बोलते हुए इसे डॉ. कफील खान के खिलाफ योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत अहंकारी लड़ाई बताया।
फर्जी खबरों के पुरोधा अभिसार शर्मा ने भी योगी सरकार पर निशाना साधते हुए खान के लिए विलाप किया। उसने लिखा, “कोई कसर नहीं छोड़ रही योगी आदित्यनाथ सरकार कफील खान को परेशान करने के लिए। अदालत कह चुकी है कि उनका भाषण सामाजिक एकता का प्रतीक था। सुप्रीम कोर्ट तक ने योगी सरकार की अपील खारिज कर दी। एक इंसान से इतनी नफरत?”
आम आदमी पार्टी के समर्थक विजय फुलारा ने डॉ. कफील खान के खिलाफ की गई कार्रवाई को ‘राजनीतिक साजिश’ बताया। उन्होंने लिखा, “योगी द्वारा राजनीतिक षड्यंत्र कर कफील खान को फँसाया गया।”
जब भाजपा सरकार के खिलाफ बोलने की बात आती है, तो कॉन्ग्रेस के वफादार भला कहाँ पीछे रहने वाले। उन्होंने भी इस मौके को लपका और इसे यूपी सरकार का ‘प्रतिशोध’ कहा। कॉन्ग्रेस समर्थक ललन कुमार ने लिखा, “योगी आदित्यनाथ ने अपनी गलती छिपाने के लिएकफील खान को प्रताड़ित किया, जेल भेजा। वह एक अच्छे इंसान हैं। सरकार उनसे अपराधियों जैसा व्यवहार न करे।”
योगी आदित्यनाथ ने अपनी गलती छिपाने के लिए @drkafeelkhan को प्रताड़ित किया, जेल भेजा।
UP govt and Mr. Yogi Adityanath should put an end to their politics of vengeance. Let Dr Kafeel Khan be. He is a doctor who wants to serve people . Why the vendetta? #DrKafeel_is_not_historysheeter
— Pankhuri Pathak पंखुड़ी पाठक پنکھڑی (@pankhuripathak) February 1, 2021
डॉ. कफील खान को फँसाने के योगी सरकार के फैसले से समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के अन्य विपक्षी दल के सदस्य भी चिढ़ गए।
@drkafeelkhan हिस्ट्री-शीटर नहीं हैं! हम सब उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि डॉ कफील खान का नाम हिस्ट्री-शीटर से हटा दिया जाए! वह बहुत विनम्र और उदार व्यक्ति और मानवता वादी एक अच्छे डॉक्टर है जिसकी इस वक्त देश को आवश्यकता है!#DrKafeel_is_not_historysheeterpic.twitter.com/IcrNQqm2lu
गौरतलब है कि 2017 में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में 72 नवजात बच्चों की मौत के बाद डॉ. खान को लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किया गया था। उसे बाद में गिरफ्तार भी किया गया था।
डॉक्टर कफील पर यूपी पुलिस द्वारा 2 साल जाँच के बाद लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप हटा दिए गए थे। हालाँकि उस पर अभी भी निजी प्रैक्टिस चलाने और दो अन्य आरोप लगे हुए हैं। 9 महीने जेल में बिताने के बाद उसे 2018 में रिहा कर दिया गया था। लेकिन अभी भी वो अपनी नौकरी से सस्पेंड है।
उसे 10 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सीएए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषण के लिए जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था। खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए अपने भाषण में कुछ भड़काऊ टिप्पणियाँ की थीं। उसने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि वह एक हत्यारे हैं, जिनके कपड़े खून से सने हैं।
किसी महान विचारक ने कहा था कि जो आदमी दूसरों के लिए गड्डा खोदता है, एक दिन वो खुद ही उस गड्डे में गिर जाता है। फिर एक दिन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) के हस्तक्षेप के बाद भारत में लगभग 250 ट्वीट्स और ट्विटर अकाउंट पर रोक लगा दी गई। और इस तरह भारत के वाम-उदारवादियों ने उस दवा का स्वाद चखा, जिसे वो बस दूसरों के लिए ही इस्तेमाल करते आए थे।
यह एक्शन उन अकाउंट के खिलाफ की गई, जो गत शनिवार को ट्विटर पर #ModiPlanningFarmerGenocide हैशटैग ट्रेंड करते हुए फर्जी और भड़काऊ सामग्री ट्वीट कर रहे थे। जिन लोगों के ट्विटर अकाउंट पर फिलहाल रोक लगाई गई है, उनमें वामपंथी फेक न्यूज़ वेबसाइट ‘कारवाँ’ का ट्विटर अकाउंट, कॉन्ग्रेस समर्थक संजुक्ता बसु से लेकर सुशांत सिंह जैसे ‘नरसंहार परस्त’ दंगाई मानसिकता के लोग शामिल हैं।
ये अकाउंट ब्लॉक क्या किए गए कि हमेशा की तरह ही वामपंथी, और कथित उदारवादी गिरोह का दोहरा चरित्र फिर सामने आ गया। ट्विटर पर बैठा उदारवादी वामपंथी गिरोह फ़ौरन सक्रीय हो गया और ट्विटर को फासिस्ट बताने लगा। विरोध करने वाले ये वही ‘निष्पक्ष’ उदारवादी लोग हैं, जो कुछ ही दिन पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर अकाउंट बंद किए जाने का जश्न मना रहे थे। यही वामपंथ का वास्तविक चरित्र भी है- दूसरी किसी भी आवाज या विचारधारा का दमन!
हालाँकि, डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर अकाउंट प्रतिबंधित कर दिया जाना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों के नरसंहार की योजना बनाने वाला बताने वालों पर अस्थाई रोक, ये दोनों ही घटनाएँ एकदम अलग हैं।
ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप पर प्रतिबंध सिर्फ इस नतीजे पर पहुँचकर लगाया कि उनके कहने या उकसाने पर ही उनके समर्थकों ने अमेरिकी संसद में हुई घटना को अंजाम दिया। इसके कुछ ही दिनों बाद भारत में गणतंत्र दिवस के अवसर पर कथित किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर दंगे-फसाद किए गए।
इन्हीं किसान आंदोलनों के बीच जिन अकाउंट पर रोक लगाई गई, वो किसानों के नरसंहार किए जाने जैसी किसी काल्पनिक स्थिति का भय बेच रहे थे और वह भी लोकतान्त्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री के हाथों! यह द्वेष की भावना से फैलाया जा रहा भय फर्जी ख़बरों के आधार जो विनाशकारी परिणाम और हिंसा को जन्म दे सकता है।
इसके बावजूद, वाम-उदारवादी यह दावा करते देखे जा सकते हैं कि इन ट्विटर अकाउंट पर रोक लगाया जाना फासीवादी फैसला था। ये वाम-उदारवादी आज इन्हीं दंगाई मानसिकता वाले लोगों का समर्थन करते सिर्फ इस वजह से नजर आ रहे हैं क्योंकि वो एक ही राजनीतिक विचारधारा, या यूँ कहें कि पूर्वग्रहों का समर्थन करते हैं।
निश्चित तौर पर, जो लोग उन दंगाई मानसिकता के लोगों के अकाउंट पर रोक लगने पर रुदन कर रहे हैं, अराजकता का भी समर्थन करते हैं, और नहीं चाहते कि किसानों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किसी निष्कर्ष पर पहुँचे।
इसी बहाने, भारत के वाम उदारवादियों का चरित्र एक बार फिर खुलकर सामने आ ही गया है। वो जो अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के ध्वजवाहक थे, डोनाल्ड ट्रंप की अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध लगाने पर खुश थे मगर आज अब अपने ही गिरोह पर लगे प्रतिबंध (वह भी अस्थाई) पर बिलख रहे हैं।
पंजाब के किसान और धार्मिक संगठनों का दावा है कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा के बाद से 400 से अधिक किसान और नौजवान लापता हैं। दिल्ली पुलिस ने इस दावे को नकार दिया है। दूसरी ओर, दिल्ली हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें लाल किले हिंसा के लिए पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की गई थी। अदालत ने याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया है।
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि 26 जनवरी की हिंसा के बाद कई लोगों द्वारा अवैध बंदी और लापता होने के बारे में कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। दिल्ली पुलिस ने 44 मामले दर्ज किए हैं और अब तक 122 लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने बताया कि 44 दर्ज मामलों और 122 गिरफ्तारी की जानकारी दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर डाल दी गई है। साथ ही बताया कि दिल्ली पुलिस की तरफ से की गई कार्रवाई पारदर्शी है, इसलिए इस तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।
वहीं 26 जनवरी के दिन लाल किले पर हुई हिंसक घटनाओं को लेकर दाखिल याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
याचिका सेवानिवृत्त आईपीएस ऑफिसर जोगिंदर तुली की तरफ से लगाई गई थी, जिसमें कहा गया था कि 26 जनवरी को लाल किले पर हिंसक घटनाओं के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए जाएँ।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने यह कहते हुए जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया कि अदालत के लिए इस मामले में हस्तक्षेप करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि पुलिस ने 26 जनवरी की घटना के सिलसिले में प्राथमिकियाँ दर्ज की हैं।
बता दें कि तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की माँग के समर्थन में राष्ट्रीय राजधानी में 26 जनवरी को निकाली गई किसानों की ट्रैक्टर परेड अराजक हो गई थी। उस दिन प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह अवरोधक हटा दिए थे। वे पुलिस के साथ भिड़ गए थे, उन्होंने वाहन पलट दिए थे और लाल किले पर धार्मिक ध्वज लगा दिया था।
इसकेबाद पंजाब से जुड़े कई किसान और धार्मिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि दिल्ली हिंसा के दौरान 400 से ज्यादा युवा और बुजुर्ग किसान लापता हैं। कुछ संगठनों ने यह भी आरोप लागाया कि लापता लोग दिल्ली पुलिस के हिरासत में है।
इस सिलसिले में पंजाब के कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, सुखविंदर सिंह सरकारिया कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी और भारत भूषण आशु ने बजट के बाद नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने किसानों के प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की सूची सार्वजनिक करने का आग्रह किया।
बताया जा रहा है कि लापता किसानों को ढूँढने के लिए प्रेम सिंह भंगू, राजिंदर सिंह दीप सिंह वाला, अवतार सिंह, किरणजीत सिंह सेखो व बलजीत सिंह की एक कमेटी भी बनाई गई है। इसके साथ ही किसानों की ओर से एक नंबर (8198022033) भी जारी किया गया है। इस नंबर पर फोन कर लापता किसानों के बारे में जानकारी दी जा सकती है।
इससे पहले पंजाब ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन नाम के एनजीओ का कहना था कि पंजाब से दिल्ली में रिपब्लिक डे की किसान परेड के लिए आए करीब सौ किसान गायब हैं। पंजाब ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन के अलावा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, खालरा मिशन और पंथी तालमेल संगठन जैसे विभिन्न संगठनों ने गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने की घोषणा की थी।
ट्विटर इंडिया ने गणतंत्र दिवस के मौके पर हुए दंगों के बाद उठी क़ानूनी माँग को मद्देनज़र में रखते हुए कई ट्विटर एकाउंट्स पर रोक लगा दी है। इसमें सबसे चर्चित है घनघोर वामपंथी मीडिया समूह/पोर्टल ‘द कारवाँ इंडिया’ के हैंडल पर लगाई गई रोक। इसके अलावा भी कई ट्विटर अकाउंट पर कार्रवाई हुई है।
द कारवाँ के ट्विटर अकाउंट पर रोक
अभिनेता सुशांत सिंह के ट्विटर अकाउंट पर रोक लगाई गई है, जिसका यूज़रनेम Sushant_Says है।
imMAK02 नाम के ट्विटर यूज़र पर भी कार्रवाई हुई है।
‘ट्राइबल आर्मी’ (tribal army) के संस्थापक हंसराज मीणा के ट्विटर अकाउंट पर भी रोक लगाई गई है।
Aartic02 नाम का ट्विटर अकाउंट भी कार्रवाई के दायरे में आया है।
सलीम डॉट कामरेड (Salimdotcomrade) नाम के ट्विटर अकाउंट पर भी रोक लगाई गई है।
‘ट्रेक्टर 2 ट्विटर’ (Tractor2Twitter) अकाउंट पर भी रोक लगाई गई।
राहुल गाँधी की प्रचंड समर्थक संजुक्ता के अकाउंट पर भी रोक लगाई गई है।
संजुक्ता के एकाउंट पर रोक
इसके अलावा किसान एकता मोर्चा के ट्विटर अकाउंट पर भी कार्रवाई हुई है।
गणतंत्र दिवस के दौरान आंदोलन की आड़ में किए गए दंगों के बाद ट्विटर इंडिया ने यह कार्रवाई की है। ‘द कारवाँ इंडिया’ ने एक आंदोलनकारी की मौत को लेकर फ़ेक न्यूज़ फैलाई थी। असल में आंदोलनकारी की मौत दुर्घटना में हुई थी, जबकि दावा यह किया जा रहा था कि उसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।
सोमवार (फरवरी 1, 2021) को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट प्रस्तुत किया और कोविड -19 महामारी की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़े बुरे प्रभाव के बाद इसे पुनर्जीवित करने के उपायों की घोषणा की। हालाँकि, जब सीतारमण बजट पेश कर रही थीं, इस दौरान लोगों की नजर पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी पर पड़ी।
राहुल गाँधी के उदासीन चेहरे और झपकती पलकों को देखकर साफ पता चल रहा था कि वो ‘बोर’ हो रहे हैं। ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी ने उन्हें जबर्दस्ती वहाँ बिठा दिया हो और वो किसी तरह से वहाँ से निकलना चाहते हों। इस तस्वीर में राहुल गाँधी अपना सिर पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं और आँखें भी आधी बंद है, जैसे कि वो हल्की नींद में हों, झपकी ले रहे हों। उनकी तस्वीर देखकर ऐसा लग रहा है जैसे वो इससे छुटकारा पाना चाहते हों।
इसके तुरंत बाद यह तस्वीर ट्विटर पर वायरल हो गई, जिससे मीम्स और जोक्स की बौछार शुरू हो गई। वैसे ये पहली बार नहीं है, इससे पहले भी राहुल गाँधी की संसद में आँख मारने वाली तस्वीर वायरल हुई थी।
देखें माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर वायरल ट्वीट्स:
एक ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि राहुल गाँधी सोच रहे होंगे, “किधर फँस गया रे बाबा… खिड़की भी नहीं है कि बाहर देख सकूँ… मोबाइल भी नहीं कि ट्वीट कर लूँ… बजट से बैंकॉक अच्छा।”
एक अन्य यूजर ने लिखा कि राहुल गाँधी शायद यह बोलना चाह रहे हों कि अरे जल्दी बोल, जर्मनी निकलना है। बता दें कि राहुल गाँधी ज्यादातर विदेश यात्रा पर रहते हैं और इसको लेकर उन्हें लगातार ट्रोल किया जाता रहा है।
बता दें कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट पेश किए जाने के बाद आरोप लगाया कि सरकार की योजना भारत की संपत्तियों को अपने पूँजीपति मित्रों को सौंपने की है।उन्होंने ट्वीट किया, ”सरकार लोगों के हाथों में पैसे देने के बारे में भूल गई। मोदी सरकार की योजना भारत की संपत्तियों को अपने पूँजीपति मित्रों को सौंपने की है।”
Forget putting cash in the hands of people, Modi Govt plans to handover India’s assets to his crony capitalist friends.#Budget2021
कॉन्ग्रेस नेता ने बजट पेश किए जाने से पहले कहा था कि बजट में छोटे एवं मझोले कारोबारियों की मदद करने के साथ स्वास्थ्य और रक्षा खर्च में बढ़ोतरी किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा था, “बजट -2021 में एमएसएमई, किसानों और कामगारों की मदद की जानी चाहिए ताकि रोजगार का सृजन हो सके । लोगों के जीवन बचाने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च बढ़ाया जाए। सीमाओं की सुरक्षा के लिए रक्षा खर्च में बढ़ोतरी हो।”