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रूस के 1.4 लाख हिन्दुओं को प्रताड़ित कर रहा ईसाई एक्टिविस्ट, एक रूसी हिन्दू ने वीडियो बना माँगी मदद

आप में से काफी लोगों को रूस में हिन्दू समुदाय द्वारा सामना की जा रही परेशानियों के बारे में पता होगा, क्योंकि ऑपइंडिया ने इस मामले को बार-बार उठाया है। हमने इसी सिलसिले में गुरु श्री प्रकाश जी के सुपुत्र प्रसून प्रकाश से बातचीत भी की थी, जिन्होंने अलेक्जेंडर दोर्किन द्वारा हिन्दुओं को प्रताड़ित किए जाने के बारे में बताया था। इस लेख में भी हम उस पर बार करेंगे, लेकिन उससे पहले चीजों को संक्षेप में समझते हैं। रूस 14.4 करोड़ की जनसंख्या वाला एक विशाल देश है।

रूस में 1.4 लाख हिंदू हैं। आश्चर्यजनक यह है कि वहाँ सिर्फ 10000 ही भारतीय मूल के नागरिक हैं। यानी कि लगभग 1 लाख 30 हजार हिंदू वहाँ के यानी रूसी मूल के हैं। ये हमारे लिए काफी गर्व की बात है। आखिर वहाँ रह रहे हिन्दुओं में 92% रूसी ही जो हैं। ये हिन्दू धर्म के प्रति दुनिया की समझ को दर्शाता है। रूस का एक कट्टर और कुख्यात ईसाई अलेक्जेंडर दोर्किन लगातार हिन्दुओं एवं गुरु प्रकाश को निशाना बना रहा है।

वो पिछले 20 वर्षों से रूस के हिन्दुओं को परेशान करने में लगा हुआ है। उसने ही 2011 में पवित्र पुस्तक भगवद्गीता पर प्रतिबंध लगा दिया था। श्री प्रकाश जी रूस में क्लासिकल हिंदुत्व को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उनके समर्थन में 2017 में दिल्ली स्थित रूसी दूतावास के सामने कई लोगों ने प्रदर्शन भी किया था। उनके और उनके परिवार को पिछले 6 वर्षों से परेशान किया जा रहा है। 2015 में इस तरह का पहला हमला हुआ था।

अलेक्जेंडर दोर्किन ने अफवाहों और झूठी खबरों के सहारे रूस के हिन्दुओं को परेशान करना शुरू किया है। वो उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज करवाता है और झूठे आरोप लगाता है, जिससे वो हिन्दू धर्म को छोड़ने के लिए विवश हो जाएँ। इसी तरह के एक पीड़ित रूसी नागरिक हैं सर्गेई केवशिन, जो 2006 से ही एक हिन्दू श्रद्धालु हैं। उन्होंने हाल ही में दोर्किन द्वारा एक फोरम पर हिंदुत्व को लेकर लिखे गए आपत्तिजनक बयानों का खुलासा किया, जैसे –

  • सारे हिन्दू देवी-देवता शैतान हैं।
  • हिन्दुओं की ध्यान-कला सिर्फ एक सम्मोहन है।
  • शैतान के कानून को ‘कर्मा’ कहते हैं।
  • मीराबाई एक सांप्रदायिक महिला थीं।
  • भगवान को हिन्दू जिस रूप में देखते हैं, ये अशुभ है।
  • श्रीमद्भगवद्गीता किसी भी मामले में पवित्र नहीं है।

इसी तरह के और कई बयान भी उसने दिए हैं। इसके बाद सर्गेई ने अलेक्जेंडर दोर्किन के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनके आधार पर रूस के प्रशासन ने उसके खिलाफ जाँच भी बिठाई थी। 2020 में उसके खिलाफ जाँच हुई थी। अब भी कई मामलों में तहकीकात जारी है। दोर्किन जाँच व पूछताछ से न सिर्फ भाग रहा है, बल्कि सर्गेई के खिलाफ उसने एक झूठी शिकायत भी दर्ज करा दी है।

सर्गेई ने ऑपइंडिया को बताया कि ऐसा हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए और रूसी प्रशासन को भटकाने के लिए किया जा रहा है, ताकि वो कार्रवाई से बच निकले। सर्गेई ने हाल ही में यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड कर के अंतरराष्ट्रीय हिन्दू समुदाय को इस अन्याय के खिलाफ उनका साथ देने की अपील की थी, खासकर भारत के नागरिकों को। अगर किसी भारतीय नागरिक के पास इससे जुड़े कोई सबूत या दस्तावेज हैं तो वो सीधे उन्हें भेज सकता है। उन्होंने वीडियो में कहा:

“मेरा जन्म मॉस्को में हुआ था और मैं रूस के 1.4 लाख हिन्दुओं में से एक हूँ। हिन्दू देवी-देवताओं को शैतान कहने वाले और हिन्दुओं को जंगली कहने वाले को आप क्या प्रतिक्रिया देंगे? अलेक्जेंडर दोर्किन हिन्दुओं को रूस छोड़ देने अथवा परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा है। वो अपने लेक्चरों, इंटरव्यूज और लेखों के माध्यम से दो दशक से हिन्दू धर्म को बदनाम करने में लगा हुआ है। मुझे उम्मीद है कि रूस के हिंदुओं को और मुझे न्याय मिलेगा।”

रूस के प्रशासन ने सर्गेई को कहा है कि उन्हें अलेक्जेंडर दोर्किन के खिलाफ कार्रवाई के लिए कुछ और सबूत या दस्तावेज मुहैया कराने होंगे, जो उसके खिलाफ जाते हों। उन्होंने अपना ईमेल अड्रेस ‘[email protected]‘ बताते हुए हिंदुओं से कहा है कि अगर उनके पास कोई भी जानकारी है तो उन्हें प्रेषित करें। उन्होंने ‘नमस्ते’ और ‘जय श्री राम’ के साथ वीडियो का अंत करते हुए इस मामले में न्याय के लिए हिन्दू एकता की वकालत की।

इससे पहले प्रसून प्रकाश ने बताया था“लगभग चार साल पहले मेरा परिवार और हमारा आश्रम (श्री प्रकाश धाम) राष्ट्रवादी रूढ़िवादी ईसाई गुंडों (कुछ हद तक ईसाई भारतीय हिन्दू समूहों के ईसाई के समान, अगर ऐसा कहना सही है) का शिकार हो गया।” इस बात की पुष्टि के लिए उन्होंने उन लेखों का ज़िक्र किया, जिसमें इस घटना का उल्लेख किया गया था। यह लेख ‘न्यूज़वीक’ और ‘डेली कॉलर’ में छपे थे।

आध्यात्मिक गुरू श्री प्रकाश ने हिंदू धर्म की इस अवहेलना को जब चुनौती दी, तो अलेक्जेंडर दोर्किन ने उन्हें और उनके परिवार को ‘विदेशी मैल’ तक कहा। 1 नवंबर 2018 को कुछ रूसी असामाजिक तत्वों ने पुलिस के कपड़े पहन कर उनके आश्रम में अनाधिकृत छापेमारी भी की थी। उन लोगों के साथ वहाँ की पुलिस ने श्री प्रकाश को रूस छोड़ने का दबाव बनाया और कभी वापस न लौटने को कहा।

आर्थिक सर्वे में भी कोरोना से निपटने के योगी सरकार के प्रयासों का डंका, WHO भी कर चुका है तारीफ

सोमवार (1 फरवरी 2021) को मोदी सरकार आम बजट पेश करेगी। शुक्रवार यानी 29 जनवरी को आर्थिक सर्वे (Economic Survey 2020-2021) पेश किया गया था। इसमें उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की जमकर तारीफ की गई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के बाद अब मोदी सरकार ने भी कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के उत्तर प्रदेश के प्रयासों का लोहा माना है।

आर्थिक सर्वे में क्या कहा गया?

आर्थिक सर्वे में कहा गया, “उत्तर प्रदेश में स्वभाविक रूप से कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रसार की जितनी आशंका व्यक्त की जा रही थी, उससे बहुत कम मामले सामने आए हैं। 690 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर के घनत्व वाले प्रदेश की सरकार महामारी के प्रसार को प्रभावी तरीके से रोक लगाने में सफल रही है।”

आर्थिक सर्वेक्षण में वर्णित क्रॉस-कंट्री विश्लेषण में कहा गया है, “भारत कोविड -19 के प्रसार और घातक परिणाम दोनों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में सक्षम है। अनुमान से 37.1 लाख कम मामले सामने आए। अमेरिका में अनुमानित मामलों से 62.5 लाख अधिक मामले आए।”

WHO भी कर चुका है तारीफ

भारत सरकार से पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी योगी सरकार की कोरोना वायरस प्रबंधन को लेकर तारीफ कर चुका है। WHO ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तकनीक की न सिर्फ तारीफ की थी, बल्कि अन्य देशों को अपनाने की सलाह भी दी थी। डब्‍ल्‍यूएचओ ने उत्तर प्रदेश की कोविड मैनेजमेंट रणनीति को सराहते हुए कहा था कि योगी सरकार की रणनीति प्रदेश में कोविड की रोकथाम करने में कारगर रही।

वैक्सीनेशन के मामले में भी नंबर-1 यूपी

कोरोना वायरस से जंग की बात हो, तो हर छोर पर योगी सरकार अपना दम दिखा रही है। प्रबंधन के बाद अब सरकार वैक्सीनेशन (Coronavirus Vaccination) में भी नंबर वन है। जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 2 लाख 95 हजार लोगों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों के वैक्सीनेशन को 4 फरवरी तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 5 फरवरी से अन्य फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाई जाएगी।

उत्तर प्रदेश न केवल टीकाकरण में अग्रणी है, बल्कि इसने देश में सबसे अधिक टेस्ट करने का भी रिकॉर्ड बनाया है। राज्य में औसतन 1.5 लाख से अधिक COVID टेस्ट प्रतिदिन किए जा रहे हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं।

गौरतलब है कि लॉकडाउन के दौरान जब लगभग हर राज्य की सरकारें राजस्व की समस्या पर हताश हो रही थीं उस समय यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार वाकई आपदा में अवसर खोजने के लिए प्रयासरत थी। उन्हीं कोशिशों का नतीजा है कि सरकार ने मात्र 8 माह में 26 लाख 62 हजार 960 लोगों को रोजगार मुहैया करवाने में सफलता पाई।

बिना पेड़ काटे ‘मोन शुगु’ कागज, खराब सब्जियों से बिजली: Mann Ki Baat में PM मोदी को तिरंगे की चिंता

किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (जनवरी 31, 2021) को ‘मन की बात’ के जरिए लोगों को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि हमारी छोटी-छोटी बातें, जो एक-दूसरे को कुछ सिखा जाए, जीवन के खट्टे-मीठे अनुभव जो, जी-भर के जीने की प्रेरणा बन जाएँ – बस यही तो है ‘मन की बात’। उन्होंने कहा कि जब वो ‘मन की बात’ करते हैं तो ऐसा लगता है, जैसे लोगों के बीच, उनके परिवार के सदस्य के रूप में उपस्थित हैं। उन्होंने लाल किला से लेकर चिली तक की बातें की।

उन्होंने पिछले दिनों संपन्न हुए त्योहारों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले की ही तो बात लगती है, जब हम एक दूसरे को शुभकामनाएँ दे रहे थे, फिर हमने लोहड़ी मनाई, मकर संक्रांति मनाई, पोंगल, बिहु मनाया। देश के अलग-अलग हिस्सों में त्योहारों की धूम रही। 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन को ‘पराक्रम दिवस’ के तौर पर मनाया गया और 26 जनवरी को ‘गणतंत्र दिवस’ की शानदार परेड भी सबने देखी।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की सीरीज जीत पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस महीने, क्रिकेट पिच से भी बहुत अच्छी खबर मिली, जहाँ हमारी क्रिकेट टीम ने शुरुआती दिक्कतों के बाद, शानदार वापसी करते हुए ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीती। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और टीमवर्क प्रेरित करने वाला है। लेकिन, उन्होंने याद दिलाया कि इन सबके बीच दिल्ली में 26 जनवरी को तिरंगे का अपमान देख देश बहुत दुखी भी हुआ।

पीएम मोदी ने कहा कि हमें आने वाले समय को नई आशा और नवीनता से भरना है और हमने जिस तरह पिछले साल असाधारण संयम और साहस का परिचय दिया था, इस साल भी हमें कड़ी मेहनत करके अपने संकल्पों को सिद्ध करना है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पद्म पुरस्कारों के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले छिपे हुए नायकों को सम्मान देने का जो क्रम शुरू हुआ था, वो इस वर्ष भी जारी रहा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल की शुरुआत के साथ ही कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई को भी करीब-करीब एक साल पूरा हो गया है। जैसे कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई एक उदाहरण बनी है, वैसे ही, अब, हमारा टीकाकरण अभियान भी दुनिया में एक मिसाल बन रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि हम सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के साथ ही दुनिया में सबसे तेज गति से अपने नागरिकों का वैक्सीनेशन भी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के हर हिस्से में, हर शहर, कस्बे और गाँव में आजादी की लड़ाई पूरी ताकत के साथ लड़ी गई थी। भारत भूमि के हर कोने में ऐसे महान सपूतों और वीरांगनाओं ने जन्म लिया, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उन्होंने मैं सभी देशवासियों को और खासकर के युवाओं को आह्वान किया कि वो देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में लिखें। अपने इलाके में स्वतंत्रता संग्राम के दौर की वीरता की गाथाओं के बारे में किताबें लिखें। उन्होंने कहा:

“हैदराबाद के बोयिनपल्ली में एक स्थानीय सब्जी मंडी किस तरह अपने दायित्व को निभा रही है, ये पढ़ कर भी मुझे बहुत अच्छा लगा। बोयिनपल्ली की सब्जी मंडी ने तय किया है कि बचने वाली सब्जियों को ऐसे फेंका नहीं जाएगा, इससे बिजली बनाई जाएगी। पहाड़ी इलाके में सदियों से ‘मोन शुगु’ नाम का एक पेपर बनाया जाता है। इसके लिए पेड़ों को नहीं काटना पड़ता है। अमेरिका के सन फ्रांसिस्को से बेंगलुरु के लिए एक नॉन-स्टॉप फ्लाइट की कमान भारत की चार महिला पायलट्स ने संभाली। दस हजार किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा सफ़र तय करके ये फ्लाइट सवा दो-सौ से अधिक यात्रियों को भारत लेकर आई।”

प्रधानमंत्री ने देश को बताया कि पिछले दिनों झाँसी में एक महीने तक चलने वाला ‘स्ट्रॉबेरी फेस्टिवल’ शुरू हुआ। कानून की छात्रा गुरलीन ने पहले अपने घर पर और फिर अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती का सफल प्रयोग कर ये विश्वास जगाया है कि झाँसी में भी ये हो सकता है। पश्चिम बंगाल के वेस्ट मिदनापुर स्थित ‘नया पिंगला’ गाँव के एक चित्रकार सरमुद्दीन की रामायण पर बनाई पेंटिंग 2 लाख रुपए में बिकी, जिस पर पीएम मोदी ने ख़ुशी जताई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बड़ी जानकारी दी कि चिली की राजधानी सैंटिगो में 30 से ज्यादा योग विद्यालय हैं। चिली में न सिर्फ अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस भी बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है, बल्कि ‘हाउस ऑफ़ डेप्यूटीज’ में योग दिवस को लेकर बहुत ही गर्मजोशी भरा माहौल होता है। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि इसी महीने 18 जनवरी से 17 फरवरी तक, हमारा देश ‘सड़क सुरक्षा माह’ यानी ‘Road Safety Month’ भी मना रहा है। सड़क हादसे आज हमारे देश में ही नहीं पूरी दुनिया में चिंता का विषय है।

पति को बनाया पुतला: सोते वक्त लेडीज कपड़े पहनाया, फोटो ली और सोशल मीडिया पर डाला

कोरोना महामारी से सब प्रभावित हुए हैं। घरों में बंद रहने के दौरान लेकिन लोग अलग से नज़र आने का तरीका भी खोज लिए हैं। ऐसी ही एक महिला हैं फिलिपीन्स की। उन्होंने कपड़े बेचने के लिए अपने सोते हुए पति को ‘मॉडल’ में तब्दील कर दिया। 

फ़िलिपीन्स की रहने वाली यह महिला कपड़ों का एक ऑनलाइन बुटीक चलाती हैं। नाम है – जोक्लिन मे जज़ारेनो कैडे (Jocelyn May Jazareno Caday)। इस महिला ने ये अनूठी तरकीब अपने बुटीक के कपड़े बेचने के लिए निकाली।

वायरल हुई पोस्ट वाली महिला के बुटीक का नाम जो ऑनलाइन शोप्पे (jo’s online shoppe) है। महामारी की वजह से उनके कपड़ों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसी बीच एक दिन उन्होने अपने पति को ‘आरामदायक’ स्थिति में सोते हुए देखा, तभी तय किया कि वह अपने पति को मैनीक्वीन (mannequin) में तब्दील करेंगी। 

इसके बाद महिला ने अपने पति को तमाम तरह के कपड़े पहनाए, जिसमें पैंट, स्कर्ट, टॉप, प्लाजो जैसे तमाम महिलाओं के कपड़े शामिल थे। ऐसा करते हुए महिला ने अपने पति की कई तस्वीरें भी ली और बाद में उन्हें अपने ऑनलाइन बुटीक के फेसबुक पेज पर साझा कर दिया

25 जनवरी 2021 को साझा की गई तस्वीरें फ़िलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। तस्वीरों के उस पोस्ट पर लगभग 11 हज़ार प्रतिक्रियाएँ, लगभग 6 हज़ार टिप्पणियाँ आई हैं और उसे 22 हज़ार लोगों ने साझा किया है। 

महिला ने एक तस्वीर के कैप्शन में लिखा भी है, “अगर मैनीक्वीन नहीं भी है तो कोई दिक्कत नहीं। ये है कपड़े बेचने का नया ट्रेंड।”   

Xiaomi ने किया अमेरिका की सरकार पर मुकदमा, चीनी कंपनी की डिमांड – ‘हटाया जाए निवेश पर लगा बैन’

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी श्याओमी (xiaomi) ने ‘निवेश प्रतिबंध’ को लेकर अमेरिकी सरकार पर मुकदमा दर्ज कराया है। इस प्रतिबंध की वजह से अमेरिका के लोग चीन की इस कंपनी में निवेश नहीं कर सकते हैं।

इस महीने की शुरुआत में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने श्याओमी को पेंटागन ब्लैक लिस्ट (pentagon blacklist) में रखा था। जिसकी वजह से अमेरिकी इस कंपनी में निवेश नहीं कर सकते हैं। 

डोनाल्ड ट्रंप का आरोप था कि श्याओमी चीनी सेना के संपर्क में है। हालाँकि कंपनी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि वह एक ‘कम्युनिस्ट चाइनीज़ मिलिट्री कंपनी’ नहीं है।

अमेरिका की कोलंबिया डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में श्याओमी का कहना था कि अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ़ डिफेंस द्वारा लगाए गए आरोप असंवैधानिक हैं। फ़िलहाल ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं लेकिन चीनी कंपनी पर ‘निवेश प्रतिबंध’ जारी है।

प्रतिबंध को चुनौती देते हुए श्याओमी ने अमेरिकी सरकार पर मुकदमा किया है। मुक़दमे के साथ आवेदन भी दिया गया है, जिसमें इस निवेश प्रतिबंध को वापस लेने की माँग की गई है। कंपनी का कहना है कि अगर यह प्रतिबंध जारी रहता है तो उनका बहुत ज़्यादा नुकसान होगा। 

अदालत के सामने पेश किए गए अपने आवेदन में चीनी कंपनी ने कहा, “ट्रंप प्रशासन द्वारा यह कार्रवाई अवैध है। 14 जनवरी 2021 को कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी (श्याओमी) को ‘कम्युनिस्ट चाइनीज़ मिलिट्री कंपनी’ (CCMP) कहा गया था। इसकी वजह से कोई भी अमेरिकी कंपनी या आदमी श्याओमी में निवेश नहीं कर पाएगा। कंपनी के लिए CCMP का इस्तेमाल ग़ैरक़ानूनी है, यह हटाया जाना चाहिए।”       

श्याओमी ने इसके पहले भी कहा था कि वह व्यापार संबंधी सभी नियमों का पालन करता है। न तो उसका चीनी सेना से कोई संबंध है और न ही चीनी सेना उसे नियंत्रित करती है। इसके अलावा अब कंपनी ने कहा है कि वह ‘कम्युनिस्ट चाइनीज़ मिलिट्री कंपनी’ नहीं है। 

The Wire के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन पर FIR: ‘किसान’ की मौत पर फैलाई थी फेक न्यूज, एक्शन में UP पुलिस

किसान आंदोलन के दौरान गणतंत्र दिवस के दिन मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को किसानों ने ट्रैक्टर रैली आयोजित की, जिसमें एक प्रदर्शनकारी की मौत को लेकर जम कर प्रोपेगेंडा फैलाया गया। अब उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित सिविल लाइन थाने में ‘The Wire’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ये FIR रविवार (जनवरी 31, 2021) को संजू तुरैहा ने दर्ज कराई है।

असल में सिद्धार्थ वरदराजन ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शनिवार को सुबह 10:08 बजे एक ट्वीट डाला था, जिसमें ‘The Wire’ ने किसान आंदोलन में ट्रैक्टर से स्टंट करते हुए मारे गए प्रदर्शनकारी की मौत के लिए परिजनों के हवाले से दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया था और साथ ही पोस्टमॉर्टम करने वाले उत्तर प्रदेश के डॉक्टरों पर सवाल उठाया था। इसमें डॉक्टरों की प्रतिक्रिया भी नहीं ली गई थी।

सिद्धार्थ वरदराजन ने ट्वीट कर के फैलाई फेक न्यूज़

मृतक नवरीत सिंह के दादा हरदीप सिंह के बयान के आधार पर उस ट्वीट और लेख में दावा किया गया था कि उसकी मृत्यु पुलिस की गोली लगने से हुई है। साथ ही डॉक्टर के ‘हाथ बँधे हुए थे और वो कुछ नहीं कर सकता था’ – ऐसा भी लिखा हुआ था। FIR में कहा गया है कि इस बयान को लेख में कुछ ऐसे प्रस्तुत किया गया, जिससे पाठक इसे डॉक्टर का ही बयान समझ कर दिग्भ्रमित हो जाएँ।

FIR के अनुसार, इस ट्वीट और लेख के कारण रामपुर के लोगों में आक्रोश बढ़ गया है और साथ ही क्षेत्र में तनाव का भी माहौल बना हुआ है। वादी का कहना है कि ये पोस्ट निश्चित रूप से षड्यंत्र के अंतर्गत जनसामान्य की क्षति करने के लिए, अनुचित लाभ कमाने के लिए और हिंसा भड़काने के लिए किया गया प्रतीत होता है। नवरीत सिंह के पोस्टमॉर्टम को लेकर इस FIR में डिटेल्स दर्ज हैं, जिसमें लिखा है:

“मृतक का पोस्टमॉर्टम जिला शासकीय चिकित्सालय, रामपुर के शासकीय चिकित्सा अधिकारी के 3 सदस्यीय पैनल द्वारा किया गया था। रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में एसपी और थाना प्रभारी को सौंपा गया था, जैसा नियमानुसार होता आ रहा है। पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी भी हुई है। डॉक्टर ने किसी को कोई बयान नहीं दिया है। तीनों डॉक्टरों ने उक्त ट्वीट और लेख का खंडन किया है। अभी तक सिद्धार्थ वरदराजन ने उसे डिलीट तक नहीं किया है।”

सिद्धार्थ वरदराजन पर सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों की जानकारी के गलत और भड़काऊ पोस्ट डालने, डॉक्टर का गलत बयान दर्शा कर ‘किसान’ की मौत के लिए पुलिस की गोली को जम्मेदार ठहराने, जनता को भड़काने, उपद्रव पैदा करने, शांति-व्यवस्था को बिगाड़ने और डॉक्टरों की छवि धूमिल करने के प्रयासों का आरोप लगाया गया है। IPC की धारा-505 और IT एक्ट, 2008 की 66A के तहत इसे गंभीर अपराध माना गया है।

सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ दर्ज FIR की प्रति का एक अंश

उक्त प्रदर्शनकारी अपने ट्रैक्टर से पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ने का प्रयास कर रहा था। ऐसे ही स्टंट के दौरान ट्रैक्टर पलट गया। ये पूरी वारदात कैमरे में भी कैद हो गई। लेकिन, राजदीप सरदेसाई की अगुआई में मीडिया का एक वर्ग ये अफवाह फैलाने में जुट गया कि उक्त प्रदर्शनकारी को पुलिस ने गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। जबकि वीडियो के अलावा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी इस दावे की पुष्टि नहीं करते

उत्तर प्रदेश पुलिस और अस्पताल के डिप्टी सीएमओ के मना करने के बावजूद द वायर ने अपने शीर्षक में बदलाव न करके भ्रामक शीर्षक को आगे बढ़ाया। हालाँकि, जिला मजिस्ट्रेट रामपुर ने उन तीन डॉक्टरों की एक हस्ताक्षरित डेक्लरेशन को साझा किया, जिन्होंने शव परीक्षण किया था और बताया था कि उपरोक्त आरोप झूठे थे। घटनास्थल पर ‘Times Now’ के पत्रकार प्रियांक त्रिपाठी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने घायल ‘किसान’ को अस्पताल नहीं ले जाने दिया।

70% सक्रिय कोरोना केस सिर्फ महाराष्ट्र और केरल में, मृतकों में 30% महाराष्ट्र के: लिबरल गैंग में चुप्पी

वामपंथियों का ‘केरल मॉडल’ अब फ्लॉप हो गया है। वहीं भाजपा विरोधी गिरोह ने जिस तरह से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ‘कोविड मैनेजमेंट’ के लिए जम कर प्रशंसा की थी, वो भी फुस्स हो चुका है। आज भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के जितने सक्रिय मामले हैं, उनमें से दो तिहाई से भी अधिक अकेले इन दोनों राज्यों में ही हैं। जहाँ केरल में CPM की सरकार है, महाराष्ट्र में शिवसेना, NCP और कॉन्ग्रेस सत्ता में हैं।

ये सभी पार्टियाँ भाजपा विरोधी खेमे की हैं। यही कारण है कि विपक्षी दल अब भारत सरकार पर कोरोना को लेकर सवाल नहीं उठा रहे। मीडिया में मोदी सरकार को सलाह देने वाले पोस्ट्स बंद हो चुके हैं। केरल और महाराष्ट्र से सीखने की नसीहत नहीं दी जा रही है। लिबरल गिरोह को डर है कि ऐसा करने पर उसके ही गढ़ की पोल खुल जाएगी। कुल सक्रिय मामलों में कर्नाटक तीसरे स्थान पर है, लेकिन वहाँ का आँकड़ा दूसरे नंबर पर काबिज महाराष्ट्र से 7 गुना कम है।

आइए, देखते हैं कि आँकड़े क्या कहते हैं। भारत में अब कोरोना वायरस संक्रमण के मात्र 1,66,176 मामले ही बचे हुए हैं, जिनमें से 71,474 (43.01%) केरल में और 44,199 (26.54%) महाराष्ट्र में मौजूद हैं। अब आप इन दोनों की तुलना कर्नाटक के आँकड़ों से कीजिए, जिसके बारे में हमने ऊपर बताया है। बहुत बड़ा अंतर है। सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात तो ये है कि देश की सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में मात्र 5682 सक्रिय मामले ही हैं।

इस तरह से केरल और महाराष्ट्र में भारत के कुल सक्रिय कोरोना मामलों का अकेले 69.6% मौजूद है, जो दो तिहाई (66.66%) से भी अधिक हो जाता है। अर्थात, बाकी के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना संक्रमण के बाकी 30.4% मामले हैं। इसीलिए सभी चुप हैं। उन्हें डर है कि कहीं लोगों को ये पता न चल जाए कि भाजपा शासित राज्यों ने कोरोना का अच्छा मैनेजमेंट किया है।

कोरोना के सक्रिय मामलों के आँकड़े (साभार: Covid19India)

एक दलील बार-बार ये दी जाती है कि इन राज्यों में टेस्टिंग ज्यादा होती है, इसीलिए वहाँ मामले ज्यादा निकलते हैं। कहा जाता है कि इन राज्यों ने टेस्टिंग पर जोर दिया और बेहतर प्रबंधन की ट्रैकिंग की, इसीलिए वहाँ ज्यादा मामले दिखते हैं। जबकि, आँकड़े कहते हैं कि महाराष्ट्र से पौने 2 गुना कम जनसंख्या वाले राज्य कर्नाटक ने उससे 20 लाख ज्यादा टेस्टिंग की है। जहाँ महाराष्ट्र में ये आँकड़ा 1.5 करोड़ है, तो कर्नाटक में 1.7 करोड़।

आइए, टेस्टिंग की भी बात कर लेते हैं। उत्तर प्रदेश में जहाँ 2.8 करोड़ लोगों का कोरोना के लिए टेस्ट किया गया है, बिहार दूसरे नंबर पर काबिज है और यहाँ ये आँकड़ा 2.1 करोड़ है। कर्नाटक तीसरे नंबर पर है। तमिलनाडु में 1.6 करोड़ लोगों की टेस्टिंग हुई है। महाराष्ट्र का स्थान पाँचवाँ है। इस हिसाब से ये लॉजिक भी फेल हो जाता है कि टेस्टिंग ज्यादा हुई है। पूरे भारत में अब तक 19.6 करोड़ लोगों की टेस्टिंग हो चुकी है, जिनमें 18.87% तो अकेले यूपी-बिहार में हैं। देखिए:

कोरोना की सबसे ज्यादा टेस्टिंग यूपी-बिहार में हुई (साभार: Covid19India)

ऊपर के दोनों स्क्रीनशॉट्स में आपको मृतकों का आँकड़ा भी दिख जाएगा, जो चौंकाने वाला है। कोरोना से सबसे ज्यादा 51,042 लोग महाराष्ट्र में ही मरे हैं। हाँ, 12,350 मामलों के साथ तमिलनाडु ज़रूर दूसरे स्थान पर है, लेकिन यहाँ के आँकड़े महाराष्ट्र से 4 गुना से भी कम हैं। पूरे देश में अब तक कोरोना ने 1,54,312 लोगों की जान ली है, जिनमें से 30.23% अकेले उद्धव ठाकरे के शासन वाले महाराष्ट्र में हैं।

‘कोरोना का केरल मॉडल’ पर प्रोपेगेंडा समाचार चैनल के प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार ने भी उतावलापन दिखाया और जमकर झूठ फैलाया था। रविश कुमार अपने उतावलेपन पर रोक नहीं लगा पाए और मई 13, 2020 को ही ‘केरल मॉडल’ पर जमकर ज्ञान दिया और कहा कि देश को इससे सीखना चाहिए। दिलचस्प बात ये रही कि मई 14, 2020 को ही ध्रुव राठी नाम के एक ‘सनसनीखेज दावाकार’ ने भी अपने यूट्यूब चैनल पर यही दावे करते हुए जमकर केरल की तारीफ़ कर डाली थी।

माँ को पीट-पीट कर मार डाला… घर के अंदर ही जलाया, जलती माँ के ऊपर मुर्गा सेंका… और वहीं बैठ कर खाया

35 साल का एक आदमी है – प्रधान सोय। उसकी माँ 60 साल की थी, नाम था – सुमी सोय। अब वो इस दुनिया में नहीं हैं। जिसे उन्होंने इस दुनिया में लाया, उसी बेटे प्रधान सोय ने उन्हें मार डाला – हाथ-पैर बाँध कर, डंडों से पीट-पीट कर

माँ जब मर गईं तो प्रधान सोय ने उनका ‘अंतिम संस्कार’ भी किया – लेकिन अपने तरीके से। घर के आंगन में ही अपनी माँ के मृत शरीर पर केरोसिन डाला और जला दिया। इसके बाद जलती माँ के ऊपर मुर्गा सेंका और वहीं बैठ कर खाया भी।

यह घटना झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर थाना स्थित जोजोगुटू गाँव की है। शुक्रवार (29 जनवरी 2021) को रात 8 बजे प्रधान सोय ने अपनी माँ की हत्या की थी। मार तो वो अपनी भाभी सोमवारी सोय को भी रहा था लेकिन एक महीने के दूधमुँहे बेटे को लेकर वो किसी तरह घर से जान बचा कर भागने में सफल रही।

सोमवारी सोय ने ही इस पूरी घटना की जानकारी ग्रामीणों को दी। लेकिन माँ के हत्यारे प्रधान सोय को ग्रामीण रात में नहीं पकड़ पाए। वो उन पर भी हमला करने लगा था। सुबह होने पर जब सोमवारी सोय अपने घर के आंगन में पहुँचीं तो देखा कि उनकी सास की अधजली लाश वहाँ पड़ी है। इसके बाद हत्यारे प्रधान सोय ने अपनी माँ की अधजली लाश को घर के जलते चूल्हे में डाल दिया और भागने की कोशिश करने लगा। तभी ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया।

गाँव के लोगों ने सुबह पुलिस को बुलाकर मामले की जानकारी दी। हत्यारे की भाभी ने बताया कि शुक्रवार रात को शराब पीने को मना करने पर प्रधान सोय ने लाठी-डंडों से माँ को पीट-पीट कर मार डाला।

गाँव वालों ने बताया कि प्रधान सोय ने 5 साल पहले 2016 में अपने पिता गोपाल सोय की भी हत्या कर दी थी। जिसके चलते उसे जेल हो गई थी। वो कुछ दिन पहले ही जमानत पर छूट कर आया था और अब उसने अपनी माँ की हत्या कर दी।

‘अम्फान राहत कार्य में घोटाला, अपने ही MLA के क्षेत्र में सड़क नहीं बनने देते’: 5 बड़े TMC नेताओं ने थामा BJP का हाथ

एक बार फिर से तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेताओं का पार्टी से मोहभंग हुआ है। शनिवार (जनवरी 31, 2021) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में नई दिल्ली में TMC के 5 बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थामा, जिसमें राज्य के पूर्व वन मंत्री राजीब बनर्जी भी शामिल थे। उन्होंने हाल ही में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उनके अलावा वैशाली डालमिया, प्रबीर घोषाल, रतिन चक्रवर्ती और रुद्रनिल घोष भाजपा में शामिल हुए।

खेल मंत्री रहे लक्ष्मी रतन शुक्ल के इस्तीफे के बाद से ही पूर्व BCCI प्रमुख जगमोहन डालमिया की बेटी वैशाली के भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। वो BCCI अध्यक्ष सौरभ गांगुली की भी करीबी हैं। पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि इन पाँचों नेताओं के पार्टी में आने से ‘सोनार बांग्ला’ के अभियान को मजबूती मिलेगी। राजीब बनर्जी अन्य असंतुष्ट नेताओं के साथ दिल्ली पहुँचे थे।

असल में अमित शाह को शनिवार को पश्चिम बंगाल के लिए निकलना था और हावड़ा में उनका भाषण भी होना था, लेकिन इजरायली दूतावास के पास हुए बम विस्फोट के कारण उन्हें अपनी योजना स्थगित करनी पड़ी और वो देर रात तक बैठकें लेते रहे। अब हावड़ा में मंच से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सम्बोधन देंगी। सभी असंतुष्ट नेता स्पेशल प्लेन से दिल्ली पहुँचे थे। उनके साथ पूर्व विधायक पार्थसारथी चट्टोपाध्याय भी थे।

रूद्रनील घोष अभिनेता हैं। इन सभी के साथ भाजपा उपाध्यक्ष मुकुल रॉय और पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय भी थे। विजयवर्गीय ने कहा कि लोगों को अब एहसास होने लगा है कि पश्चिम बंगाल का विकास सिर्फ भाजपा ही कर सकती है। उन्होंने कहा, “बंगाल के लोग जान गए हैं कि इतने वर्षों तक TMC ने उन्हें सिर्फ ठगा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा वहाँ सरकार बनाएगी और ‘सोनार बांग्ला’ बनेगा।”

ये पहली बार नहीं है जब TMC के मंत्री-विधायकों व अन्य असंतुष्ट नेताओं ने भाजपा का दामन थामा हो। राजीब बनर्जी ने बताया कि मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद उन्हें अमित शाह का फोन कॉल आया था और उन्होंने उन्हें दिल्ली बुलाया। बकौल बनर्जी, अमित शाह ने उन्हें कहा कि वो भाजपा का संदेशा TMC के ऐसे अन्य असंतुष्टों तक पहुँचाएँ, जो बेहतर तरीके से जनसेवा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें राज्य के विकास का आश्वासन मिला है, इसीलिए वो भाजपा में आए हैं।

अभिनेता रूद्रनील घोष ने पश्चिम बंगाल में आए अम्फान चक्रवात के बाद हुए राहत कार्यों में बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया और उसके खिलाफ मुखर भी थे। चक्रवात पीड़ितों में रुपए बाँटे गए थे, जिसमें उन्होंने धाँधली का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि वो राज्य के भविष्य के लिए एक बेहतर किरदार निभाना चाहते हैं। वहीं प्रबीर घोषाल इससे नाराज थे कि उनके क्षेत्र में एक सड़क के मरम्मत कार्य में पार्टी का धड़ा बाधा बन रहा था।

इससे पहले टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संबोधित इस्तीफे का पत्र लिखते हुए राजीब ने कहा था, ”मैं अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस की सदस्यता के साथ-साथ इससे जुड़े सभी पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूँ। मैं उन सभी चुनौतियों और अवसरों के लिए आभारी हूँ, जो मुझे दिए गए हैं और मैं हमेशा पार्टी के सदस्य के तौर पर बिताए अपने समय को याद रखूँगा।”

मुस्लिमों को खतरे में बताने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्रकार ने ले ली क्लास, हकलाते हुए आए नजर

अक्सर इस्लामवादियों का महिमामंडन करने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की ज़ी टीवी के एंकर अमन चोपड़ा ने क्लास लगा दी। दरअसल, हर मुद्दे पर मुस्लिमों को असुरक्षित बताने वाले अंसारी खुद ही नहीं बता पाए कि किस तरह से मुसलमान भारत मे असुरक्षित है।

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति अपनी नई किताब ‘बाय मैनी ए हैप्पी एक्सीटेंड’ को प्रोमोट करने के लिए शो पर पहुँचे थे। उसी दौरान ज़ी न्यूज़ के एंकर ने कुछ ऐसे पेचीदा सवाल अंसारी से पूछे, जिसने उन्हें उनके ही द्वारा कही गई बातों पर शर्मिंदा कर दिया और वो जवाब देते वक्त हकलाते हुए नजर आए।

साक्षात्कार के दौरान समाचार एंकर ने 10 साल पद पर बने रहने के बाद भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में उसे छोड़ने से पहले अंसारी द्वारा दिए गए अंतिम इंटरव्यू का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के अंदर ‘स्वीकार्यता का माहौल’ खतरे में है। देश के मुस्लिमों में बेचैनी का अहसास और असुरक्षा की भावना है।

यहाँ अंसारी ने एक बार फिर दोहराया कि राष्ट्र में मुसलमानों के बीच वास्तव में एक “असुरक्षा की भावना” है।

न्यूज एंकर अंसारी से सवाल करता है कि क्या वह भी उसी तरह महसूस करते है? क्योंकि वह भी एक मुसलमान हैं। इस पर पूर्व वीपी ने जवाब देने के बजाय यह कहते हुए मना कर दिया कि इस विषय पर एक अलग बहस की आवश्यकता है। हालाँकि, इस दौरान एंकर अमन चोपड़ा हामिद अंसारी से पूछते हैं कि क्या हाल ही में मोदी सरकार द्वारा किए गए फैसले सीएए, ट्रिपल तालक, राम मंदिर ने तो कहीं नहीं भारतीय मुसलमानों को असुरक्षित महसूस करने के लिए मजबूर किया है, जैसा कि अंसारी ने कहा है।

जिस पर हामिद अंसारी कहते है कि वह इसके लिए कोई कारण नहीं दे सकते है। तब चोपड़ा यह कहते हुए हस्तक्षेप करते हैं कि वास्तव में कोई ठोस कारण है ही नहीं, यही कारण है कि अंसारी इस पर कोई बात नहीं बोल रहे।

जिसके बाद न्यूज़ एंकर ने चालाकी से लिंचिंग के विषय को लेकर पूछा कि क्या यह एक कारण है कि मुसलमान असुरक्षित हैं। अपने शब्दों को ध्यान से चुनने की पूरी कोशिश करने के बावजूद हामिद अंसारी स्वीकार करते हैं कि यह एक कानून व्यवस्था का मुद्दा है।

इंटरव्यू के दौरान अमन चोपड़ा कहते हैं, “सर, लिंचिंग सिर्फ मुसलमानों कि ही नहीं हिंदुओं की भी की जाती है, वे असुरक्षित क्यों नहीं हैं?” जिसे सुन हामिद अंसारी थोड़े गुस्से में हो जाते हैं और कहते हैं कि उन्हें यकीन नहीं है कि हिंदुओं को लिंचिंग होती है या नहीं।” जिस पर अंसारी को घेरते और उन्हें पक्षपाती कहते हुए अमन चोपड़ा कहते हैं, “इस मामले में तो वह कई हिंदुओं को भी गिना सकते है जिनकी लिंचिंग पश्चिम बंगाल और केरल में हुई है।”

चोपड़ा ने दोहराया कि लिंचिंग का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है और यह कानून व्यवस्था का मुद्दा है। अंसारी ने बदतमीजी से चीख-चीख कर अनजाने में यह घोषणा कर दी कि लिंचिंग वास्तव में धार्मिक रूप से प्रेरित है। जब चोपड़ा ने कहा, “लिंचिंग धर्म देखकर थोड़ी न होता है।” जिस पर चिढ़ कर पूर्व-वीपी कहते है, “तो क्या देखकर होता हैं।” और यह भी कहा कि जब से हिंदू राष्ट्रवादी बीजेपी ने भारत में सत्ता हासिल की है, देश के अल्पसंख्यकों की लिंचिंग बढ़ गई है।

वहीं न्यूज़ एंकर ने हामिद अंसारी को यह कहते हुए नसीहत दी कि भारत ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, उन्होंने 10 साल तक दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति का पद संभाला, लेकिन फिर भी आपने देश के उपराष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के आखरी दिन लोगों को यह कहते हुए भ्रामित किया कि देश में मुसलमानों में असुरक्षा और बेचैनी की भावना है।

अमन चोपड़ा के तेज तर्रार सवालों ने हामिद अंसारी को वास्तव में उनकी किताब के प्रोमोशन की जगह किसी और दिशा में भटका दिया और वह अपने द्वारा ही दिए बयानों पर स्पष्टीकरण नहीं दे पाएँ। साथ ही उन्हें उनके किताब के लिए देने वाले भाषण से भी वंचित कर दिया।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं था जब हामिद अंसारी ने मुसलमानों को उकसाते हुए कहा हो कि देश में मुस्लिम खतरे में हैं। उन्होंने पहले भी कहा है कि मोदी के शासन में भारत में इस्लाम और मुसलमान दोनों परेशान है। इसके अलावा उन्होंने इस्लामिक शरिया अदालतों के पक्ष में जाने के लिए अक्सर अपनी इस्लामी प्रवृत्तियों का प्रदर्शन किया है। इससे पहले पूर्व वीपी ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के चित्र के विरोध के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों का समर्थन किया था।

हामिद अंसारी के पूरे इंटरव्यू को यहाँ देखें