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‘लेडीज को भेजो और उसे मारो’: ईसाई नर्स को बुर्का वाली महिलाओं ने जमकर पीटा, ईशनिंदा का इल्जाम लगा दिया अंजाम

पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में एक 30 साल की ईसाई नर्स की बेहरमी से पिटाई करने का मामला सामने आया है। पीड़ित की पहचान तबीथा नजीर गिल ( Tabitha Nazir Gill ) के तौर पर हुई है। स्थानीय रिपोर्ट्स का कहना है कि मुस्लिम सहकर्मी के साथ आपसी बहस के बाद उस पर हमला किया गया। पहले उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया फिर पिटाई की गई।

तबीथा, कराची के सोभराज मैटरनिटी अस्पताल में पिछले 9 साल से कार्यरत हैं। हैरानी की बात यह है कि उनके साथ हुई हिंसा के बाद पुलिस आई और उन्हें ही हिरासत में लेकर चली गई।

इंटरनेशनल क्रिश्चियन कन्सर्न के सूत्रों के अनुसार, अस्पताल की प्रमुख नर्स ने मरीजों से किसी प्रकार की टिप लेने और पैसे लेने से मना किया था। बस यही बात तबीथा ने उस दिन अपनी साथी को याद दिला दी, जो एक मरीज से पैसे ले रही थी। जवाब में सहकर्मी ने बेवजह उस पर ईशनिंदा का आरोप लगा दिया। बाद में उसे रस्सियों से बाँधे रखा गया, उसे प्रताड़ित किया गया और मारपीट करके पुलिस हिरासत में भेजा गया।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने गिल को रिहा कर दिया है। सैंकड़ों मुस्लिमों के दबाव में उसके ख़िलाफ़ मुकदमा भी हुआ है।

बता दें कि इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है। वीडियो में देख सकते हैं कि नर्स खुद को कमरे में बंद करके बैठी है और बाकी अन्य लोग कमरे में घुसने की कोशिश करते हैं। आदमी कहते हैं कि नर्स के पास लेडीज को भेजो और उसे मारो।

इसके बाद कुछ बुर्का पहनी महिलाएँ गुस्से में गेट खोल कर आगे बढ़ती हैं। नर्स के लिए कहा जाता है, “खोल दरवाजा रं*&।” अगले ही पल सारी महिलाएँ उस कमरे में होती हैं जिसमें नर्स ने खुद को बंद किया होता है। सब उसको घेरती हैं। पीछे से आदमी कहते हैं, “गुस्ताखी की है इसने।” इतने में बुर्का पहनी महिलाएँ उन्हें मारने लगती हैं। डंडे से भी एक महिला उस नर्स को पीटते दिख रही है। वही उसकी सहकर्मी भी उसे मारती है। 

वह लगातार कैमरे में देख कर कहती हैं कि उसने कुछ नहीं कहा। किसी को कुछ नहीं बोला। मगर, बाकी सब उससे किसी कागज पर कुछ लिखकर साइन करने को मजबूर करते रहते हैं।

बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा के फर्जी आरोप में किसी से निजी दुश्मनी निकालना, मॉब लिंचिंग करना, दिन दहाड़े हत्या करना व मास प्रोटेस्ट बेहद आम है। पाकिस्तान ने 1987 में देश के ईशनिंदा कानून में 295-बी और 295-सी धाराओं को जोड़ा था। धीरे धीरे ये मामले वहाँ तेजी से बढ़े। केवल 1987 से 2017 के बीच 1534 मामले सामने आए। इनमें 829 केवल अल्पसंख्यकों पर इल्जाम थे, जिसमें 238 आरोपित ईसाई धर्म से ताल्लुक रखते थे।

एक बजट 1959 का भी: नेहरू सरकार ने रक्षा खर्च में ₹25 करोड़ की कटौती की, 3 साल बाद चीन ने हमला कर दिया

2019 में मोदी सरकार प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में आई थी। उसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज (1 फरवरी 2021) को दूसरा आम बजट पेश किया। इसी बीच कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने माँगों की भारी-भरकम सूची आगे बढ़ा दी है, जो उनके मुताबिक़ 2021-22 के बजट में शामिल की जानी चाहिए। 

राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए बताया कि वह इस साल के बजट में क्या देखना चाहते हैं। कॉन्ग्रेस नेता के मुताबिक़ बजट में रोजगार पैदा करने के लिए MSMEs क्षेत्र, किसानों और कामगारों के लिए प्रावधान होने चाहिए। इसके अलावा बजट स्वास्थ्य क्षेत्र के खर्च में बढ़ोतरी पर केन्द्रित होना चाहिए, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की जान बचाई जा सके। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र का बजट बढ़ाया जाए जिससे बॉर्डर की सुरक्षा सुनिश्चित हो। 

रक्षा क्षेत्र का बजट बढ़ाए जाने की राहुल गाँधी की माँग का संदर्भ स्पष्ट है। पूर्वी लद्दाख स्थित एलएसी (लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल) पर भारतीय और चीनी सेना के बीच टकराव। वायनाड के सांसद ने रक्षा क्षेत्र का बजट बढ़ाने की बात की यह उल्लेखनीय है। लेकिन यही सही समय है उस दौर की ओर ध्यान देने का जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने रक्षा बजट कम कर दिया था। उसके बाद चीन ने जो किया वह भारतीय शौर्य के इतिहास पर सबसे गहरा घाव बना।

जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की सीट चीन के हवाले करना, 1962 की हार, देश का विभाजन और भी बहुत कुछ। ऐसे तमाम गलतियों का जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि जवाहर लाल नेहरू ही हैं। 

नेहरू सरकार और 1959 का रक्षा बजट

यह जवाहर लाल नेहरू की ऐसी गलती है जिस पर चर्चा बहुत कम हुई है। जब चीन और भारत के बीच तनाव के हालात थे, तब नेहरू ने 1959 के रक्षा बजट में भीषण कटौती की थी। इसके 3 साल बाद इंडो-चाइना सीनो वॉर (Indo – Sino War) हुआ, जिसमें चीनी सैनिकों ने मोर्चा लेने वाले भारतीय जवानों को पकड़ लिया और भारत ये युद्ध बुरी तरह हार गया। 

1959 के केन्द्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र में भारी कटौती हुई भी थी, लगभग 25 करोड़ रुपए! इसके अलावा केन्द्रीय बजट में 82 करोड़ रुपए की कटौती की गई थी। ये नेहरू द्वारा लिए गए विकराल निर्णयों की श्रृंखला का पहला फैसला था, जिसकी वजह से भारतीय सेना 1962 के युद्ध में बुरी तरह पराजित हुई। भारत ने सिर्फ युद्ध नहीं हारा, बल्कि अक्साई चीन स्थित कई हज़ारों स्क्वायर किलोमीटर ज़मीन पर चीन ने कब्ज़ा कर लिया। 

नेहरू की अगुवाई वाली तत्कालीन सरकार को चीन के हमलों को लेकर कई चेतावनी मिल चुकी थी, 1962 से लगभग 2.5 साल पहले चीनी सैनिकों ने सीमा पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया था। इसके बावजूद जवाहर लाल नेहरू और तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन को सेना से राय-मशवरे और चर्चा की ज़रूरत महसूस नहीं हुई। उसका नतीजा यह निकला कि भारत को अपने इतिहास की सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा।

नेहरू ने सेना द्वारा दिए गए तमाम संकेतों को नज़रअंदाज़ किया और सेना को मजबूत बनाने की कोई छोटी कोशिश तक नहीं की। रिपोर्ट्स में यहाँ तक दावा किया जाता है कि नेहरू और तत्कालीन रक्षा मंत्री वीके कृष्ण मेनन ने योजनाबद्ध तरीके से जनरल थिमैया (1957 से 1961 तक आर्मी स्टाफ के सेनाध्यक्ष) को बदनाम करने की साज़िश रची।                

1959 के पहले भी नेहरू सेना को भंग करना चाहते थे। मेजर जनरल डीके ‘मोंटी’ पाटिल (Major General DK “Monty” Palit) द्वारा लिखी गई मेजर जनरल एए ‘जिक’ रुद्रा ऑफ़ इंडियन आर्मी (Major General AA “Jick” Rudra of the Indian Army) की बायोग्राफी के मुताबिक़, “आज़ादी के कुछ साल बाद नेहरू ने कहा आखिर कैसे भारत को एक ‘डिफेंस प्लान’ की ज़रूरत है। अहिंसा हमारी नीति है। हमें सेना के लिहाज़ से कोई ख़तरा नहीं नज़र आता है। सेना को स्क्रैप (scrap) करो। सुरक्षा संबंधी ज़रूरतें पूरी करने के लिए पुलिस है।” 

हार के लिए ठहराया था नेहरू को जिम्मेदार 

पिछले साल भारत पाकिस्तान के बीच 1965 में हुए युद्ध के नायक एयर मार्शल डेंजिल कीलर (Air Marshal Denzil Keelor) का वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें उन्होंने नेहरू सरकार द्वारा की गई गलतियों का विस्तार से उल्लेख किया था जिसकी वजह से भारतीय सेना 1962 का युद्ध हार गई थी। 

वीडियो में एयर मार्शल डेंजिल कीलर 1962 के भारत-चीन युद्ध पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं, “नेहरू की गलतियों के चलते भारतीय सेना जंग हारी। नेहरू को कूटनीति की पड़ी थी और उन्होंने सेना की तरफ कभी ध्यान दिया ही नहीं, जिसकी वजह से भारत को हार का सामना करना पड़ा। हिमालय की चोटी पर पड़ने वाली सर्दी के दौरान भारतीय सेना के जवानों के पास ठंड के कपड़े तक नहीं थे।” 

सबसे अहम बात ये है कि जवाहर लाल नेहरू की वजह से भारत को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। चीन द्वारा भारतीय सीमा पर किए गए कब्ज़े को खारिज करते हुए नेहरू कहते थे, “लद्दाख और अरुणाचल की अनुपजाऊ ज़मीन और पहाड़ पर घास का एक तिनका भी नहीं उगता है।”  

ट्विटर ऑफिस में अमित शाह की घुसपैठ: जैक के कंप्यूटर से हेरफेर कर वामपंथियों को कर रहे सस्पेंड – व्यंग्य

भारत में फेक न्यूज़ फैलाने वाले कई वामपंथी सोशल मीडिया हैंडलों पर रोक लगा दी गई है। ये कार्रवाई ट्विटर ने की है। वामपंथी मीडिया पोर्टल ‘द कारवाँ इंडिया’, अभिनेता सुशांत सिंह, संजुक्ता, मोहम्मद आसिफ खान, हंसराज मीणा, आरती और संयुक्त किसान मोर्चा सहित कई हैंडलों पर रोक लगा दी गई।

कार्रवाई ट्विटर ने की है, लेकिन गिरोह विशेष का क्रंदन चालू हो गया है – मोदी सरकार के खिलाफ। ऑपइंडिया के वरिष्ठ संवाददाता ने इस दौरान अलग-अलग लोगों से मिल कर जाना कि आखिर वो क्या सोच रहे हैं।

हम सबसे पहले पहुँचे कॉन्ग्रेस के भावी अध्यक्ष राहुल गाँधी के पास, जिन्होंने ट्विटर की इस हरकत पर बयान देते हुए कहा, “ये पूँजीपतियों का बजट है। ये गरीब विरोधी बजट है। इससे किसानों पर बड़ी मार पड़ी है। करदाताओं को कुछ नहीं मिला है। बजट में केवल अम्बानी-अडानी का ख्याल रखा गया है। पीएम मोदी ने देश बेच दिया। सारी सरकारी कंपनियाँ बेच दी गईं। ये बजट उद्योगपतियों के लिए है।”

पास खड़े रणदीप सुरजेवाला ने राहुल गाँधी को याद दिलाया कि उन्होंने दूसरा बयान पढ़ दिया है, जो पिछले 7 वर्षों से बजट के दौरान वो पढ़ते आए हैं। अकचकाने के बाद राहुल गाँधी ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताते हुए आगे कुछ कहने से इनकार कर दिया।

इसके बाद हम सीधा नासा के तकनीक से लैस AltNews के दफ्तर पहुँचे, जहाँ एकदम मातम का माहौल था। प्रतीक हाथ में कंघी लिए आईने के सामने खड़े मिले तो हम भी बयान के लिए लपक लिए।

उन्होंने अपनी टीम के द्वारा इन्वेस्टीगेशन के बाद निकाली गई कुछ तस्वीरें दिखा कर दावा किया कि अमित शाह ने ट्विटर के CEO जैक के दफ्तर को हाईजैक कर लिया है। हमने देखा कि तस्वीरों में अमित शाह सचमुच कुछ लोगों के साथ कम्प्यूटर सिस्टम पर बैठे हुए हैं और उन्हें निर्देशित कर रहे हैं। प्रतीक ने आगे कहा कि अमित शाह संघियों के साथ ट्विटर के दफ्तर में घुस कर ये हेराफेरी कर रहे हैं।

इस तस्वीर की पुष्टि करते हुए सलीम यादव ने अपने शब्दों को दाँत से चबा कर जीभ से चाटते हुए कहा, “जैसा कि आप देख सकते हैं, अमित शाह के साथ इस तस्वीर में 15 लोगों के उपस्थित होने की बात कही जा रही है। 5 और 1 में से 5 रहने दीजिए और दोनों का योग कर के आए 6 नामक संख्या को 5 के बाद रख दीजिए। ये 56 बन जाता है। बड़ी ही अशुभ संख्या है।” आगे के शब्दों को सलीम यादव चबा कर खुद ही घोंट गए, जो हमें समझ नहीं आया।

इस आरोप की पुष्टि आशुतोष और उदित राज ने भी की है। जब हम वहाँ पहुँचे तो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के प्रबल दावेदार उदित राज अपने मित्र आशुतोष के साथ कौवों को दाना खिला रहे थे। हमारे देखते ही आशुतोष जोर-जोर से रोने लगे और अपना बयान देने लगे, लेकिन जब हमने कहा कि हमारे पास कैमरा नहीं है तो उन्होंने बयान देने से इनकार कर दिया। चूँकि जल्द ही गिद्धों की सभा होनी थी, वो वहाँ के लिए चलते बने।

गिद्धों की सभा में तो हम नहीं गए, लेकिन वहाँ से कुप्ता और बाजदीप को निकलते हुए ज़रूर देखा। अभी तक किसान नेताओं ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है कि जैक के दफ्तर के हैक होने का सम्बन्ध तीनों कृषि कानूनों से है या नहीं। हाँ, कुछ ने दबी जुबान में ये ज़रूर कहा कि ये CAA और NRC का पहला कदम है, जिसके तहत पहले सोशल मीडिया से नागरिकता जाएगी और फिर उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत का विजन है यह बजट, इसके दिल में गाँव और किसान हैं: PM मोदी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आम बजट की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ये बजट कोरोना वायरस संक्रमण के काल में आत्मनिर्भर भारत का विजन है। पीएम ने लोक लुभावन और विकासशील बजट के लिए वित्त मंत्री और उनकी टीम को बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा कि इस बजट के केंद्र में किसान है।

पीएम ने इस बजट को किसानों के पक्ष वाला बताते हुए कहा कि बजट में किसानों के हित में कई प्रावधान किए गए हैं। किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। किसानों को आसानी से और ज्यादा ऋण मिल सकेगा। देश की मंडियों को और मजबूत करने के लिए प्रावधान किया गया है। ये निर्णय दिखाते हैं कि इस बजट के दिल में गाँव हैं, किसान हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बजट नए भारत के आत्मविश्वास को उजागर करने वाला है। बजट देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव लाएगा, साथ ही युवाओं को कई मौके देने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे बजट बहुत कम देखने को मिलते हैं, जिसकी शुरुआत में अच्छे रिस्पॉन्स आए। कोरोना के चलते कई एक्सपर्ट्स मानकर चल रहे थे कि सरकार आम लोगों पर बोझ बढ़ाएगी, लेकिन सरकार ने बजट साइज बढ़ाने पर जोर दिया। चुनौतियों के बावजूद सरकार ने बजट को पारदर्शी बनाने पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि आज के बजट में आत्मनिर्भरता का विजन भी है और हर वर्ग का समावेश भी है। हम इस बजट में जिन सिद्धांतों को लेकर चले हैं, वे हैं- ग्रोथ के लिए नए अवसरों, नई संभावनाओं का विस्तार करना। युवाओं के लिए नए अवसरों को बनाना। इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नए-नए क्षेत्रों को विकसित करना है। नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर इस बजट में जोर दिया गया है।

पीएम ने कहा कि महिलाओं का जीवन आसान बनाने के लिए उनके स्वास्थ्य, पोषण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर व्यवस्थागत सुधार किए गए हैं। ग्रोथ और जॉब क्रिएशन में बहुत लाभ होगा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत कोरोना काल में काफी प्रो-एक्टिव रहा है और ये बजट कोरोना काल के आत्मनिर्भर भारत के मिशन को और आगे ले जाएगा। पीएम ने कहा कि ये ऐसा बजट है जिसे विशेषज्ञों ने भी सराहा है।

‘किसान’ आंदोलन को माओवादियों का खुला समर्थन, PM मोदी को बताया- दलाल

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे कथित किसान आंदोलन में माओवादियों की घुसपैठ को लेकर आशंका बहुत समय से जताई जा रही थी। अब वे खुल कर सामने आ गए हैं। माओवादियों ने पूरे प्रदर्शन को समर्थन का ऐलान किया है

तीन अलग-अलग माओवादी संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी करके पूरे प्रोटेस्ट के प्रति एकजुटता दिखाई है। इस बयान में अपील की गई है कि तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन को जारी रखा जाए।

प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने कहा कि देश भर में किसानों का आंदोलन ब्रिटिश भारत के रॉलेट एक्ट के विरोध की याद दिलाता है। ब्रिटिश काल से अब के समय की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साम्राज्यवादी दलाल कहा। 

अभय ने आरोप लगाया “केंद्र सरकार किसानों की दलीलों के प्रति अपना अड़ियल रवैया दिखा रही है।” इस बयान में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2021) के मौके पर हुई हिंसक ट्रैक्टर परेड रैली का पुरजोर और गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया है। इसमें कहा गया कि परेड वाले दिन किसानों के मार्ग में जान-बूझकर बैरिकेडिंग की गई थी। आँसू गैस छोड़े गए थे और लाठी चार्ज किया गया।

कानून-व्यवस्था के बिगड़ने के लिए माओवादियों ने पुलिस को जिम्मेदार बताया है। साथ ही दीप सिंधू और लख्खा जैसे लोगों को भाजपा का एजेंट कहा है। यह भी आरोप लगाया कि किसानों को लाल किले की ओर जान-बूझकर बढ़ने दिया गया।

किसान नेताओं पर हुए मुकदमों को इस बयान में ‘ब्राह्मणी हिंदूत्व फासीवादी मोदी सरकार के षड्यंत्रकारी प्लॉन’ का हिस्सा कहा गया है। बयान में पीएम मोदी को पाखंडी, जुमलेबाज तक बताया गया है। उन्हें साम्राज्यवादी और दलाल कॉर्पोरेट घरानों का प्रधान सेवक बताकर किसानों से अपील की गई कि इस लड़ाई को लंबा लड़ें।

क्रांतिकारी आदिवासी महिला संगठन दंडकारण्य की प्रमुख रानीता हिचमी और दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संगठन के विजय मरकाम ने भी कानूनों को वापस लेने की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘ये कानून कॉर्पोरेट कंपनियों का पक्ष लेंगे’। साथ ही यह भी दावा किया कि इससे देश की 80 प्रतिशत जनता प्रभावित होगी।

बता दें कि इससे पूर्व में कई बार ऐसे कयास लगाए गए थे इस कथित किसान आंदोलन को वामपंथियों द्वारा हाईजैक किया जा चुका है, जहाँ कभी दिल्ली दंगों की साजिश रचने वालों की तस्वीर दिख रही थी, कभी भीमा कोरेगाँव हिंसा का षड्यंत्र रचने वालों की। हालाँकि, किसान नेता इस बात से इनकार करते रहे और इसे अपनी लड़ाई बताते रहे। कुछ समय पहले समाचार चैनल ‘इंडिया टीवी’ पर प्रसारित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों का विरोध एक स्वत: आंदोलन नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के खिलाफ वामपंथी संगठनों द्वारा सावधानीपूर्वक रची गई साजिश है

मोदी कराएगा किसानों का नरसंहार: सरकार ने किए 250 ट्वीट, अकाउंट ब्लॉक

भड़काऊ ट्वीट करने को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा (सोमवार 01, 2021) को 250 ट्वीट और ट्विटर अकाउंट्स पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि किसान आंदोलन के बीच इन ट्विटर अकाउंट्स पर यह रोक हालात सामान्य हो जाने तक सिर्फ अस्थाई तौर पर लगाईं गई है। बताया जा रहा है कि ये वो ट्विटर अकाउंट्स हैं, जिन्होंने शनिवार (30 जनवरी) को #ModiPlanningFarmerGenocide (मोदी किसानों की हत्या की योजना बना रहा है) हैशटैग चलाते हुए फर्जी, भड़काऊ ट्वीट्स किए थे।

नरसंहार के लिए उकसाना पब्लिक आर्डर के लिए एक गंभीर खतरा है और इसलिए इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 ए के तहत इन ट्विटर अकाउंट और ट्वीट्स पर रोक लगाने का आदेश दिया। भारत में कई ट्विटर अकाउंट्स पर रोक लगाने पर ट्विटर ने बयान जारी करते हुए कहा कि यदि हमें किसी अधिकृत संस्था से इस बारे में अनुरोध प्राप्त होता है, तो समय-समय पर किसी विशेष देश में कुछ सामग्री पर समय-समय पर रोक लगा दी जाती है।

गौरतलब है कि सोमवार सुबह ही, सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) ने वामपंथी प्रोपेगंडा मीडिया संस्थान ‘द कारवाँ इंडिया’ के हैंडल पर रोक लगा दी। फेक न्यूज़ फैलाने वाले ‘द कारवाँ इंडिया’ के ट्विटर हैंडल पर ‘Account Withheld’ लिखा आ रहा है।

कारवाँ इंडिया ने एक लेख के माध्यम से दावा किया था कि दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को हुई एक प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस की गोली से हुई थी। इसी तरह राजदीप सरदेसाई और सिद्धार्थ वरदराजन ने भी झूठ फैलाया था। सिद्धार्थ के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है। वहीं राजदीप को ‘इंडिया टुडे’ ने ऑफ एयर कर दिया। कारवाँ के अलावा संजुक्ता और ‘किसान एकता मोर्चा’ का भी हैंडल रोका गया

इसके साथ ही अब ‘कारवाँ’ न तो ट्विटर के माध्यम से कोई कंटेंट शेयर कर सकता है और न ही अपने वामपंथी प्रोपेगंडा को आगे बढ़ा सकता है। लोगों ने भी ट्विटर के इस कदम से ख़ुशी जताई। अब जिन नए प्रतिबंधित अकाउंट्स के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें से एक कॉन्ग्रेस समर्थक संजुक्ता बसु भी हैं।

शशि थरूर पर एक से ज्यादा FIR है जिस मामले में, उसी पर फिर फैलाया फेक न्यूज… ट्विटर लगा रहा सब पर रोक

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली की पुलिस ने वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर पर फेक न्यूज़ फैलाने के लिए मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन तमाम एफ़आईआर के बाद भी कॉन्ग्रेस नेता को दंगाई नवरीत सिंह की ऑटोप्सी (autopsy) को लेकर दावे करने से नहीं रोक पाई

31 जनवरी को शशि थरूर ने अपने ट्वीट में लिखा कि नवरीत की ऑटोप्सी रिपोर्ट के मुताबिक़ उसकी ठुड्डी और कान की हड्डियों में छेद था। इसके बाद थरूर ने सवाल उठाया कि क्या डॉक्टर्स को चुप कराया गया है। 

नवरीत की गोली से मौत को लेकर शशि थरूर का ट्वीट

कॉन्ग्रेस नेता ने अपने ट्वीट में वामपंथी प्रचार पुरोधा ‘द वायर’ की रिपोर्ट का हवाला दिया। यह और बात है कि इसी वजह से द वायर के एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन पर एफ़आईआर हुई है। अपने दूसरे ट्वीट में थरूर ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें गोली (bullet) के घाव का आरोप लगाया गया था। 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में सीएमओ (चीफ मेडिकल ऑफिसर) मनोज शुक्ला का बयान मौजूद है। इसमें उन्होंने कहा था कि ज़मीन पर तेज गति से टकराने की वजह से घाव बने होंगे, और दंगाई नवरीत की मौत तब हुई थी, जब वह पुलिस बैरीकेडिंग तोड़ने के लिए ट्रैक्टर चला रहा था और वह पलट गया।

TOI की रिपोर्ट में आगे नवरीत के परिजनों की बात दोहराई गई है, जिनका कहना था कि ऑटोप्सी करने वाले ‘डॉक्टर्स में से एक’ को गोली का घाव नज़र आया था। फ़िलहाल डॉक्टर्स ने मीडिया या किसी भी अन्य व्यक्ति से बात करने के लिए साफ़ मना कर दिया है। 

हास्यास्पद यह है कि जिन लिबरल मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट के आधार पर ये लोग फेक न्यूज वाली लिंक शेयर कर रहे हैं, उसी मीडिया संस्थान के संपादकों पर न सिर्फ FIR हो रही है बल्कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट भी रोके जा रहे हैं।

शशि थरूर पर एफ़आईआर 

जैसे ही थरूर, सरदेसाई समेत कई वामपंथी और लिबरल्स ने दावा किया कि गणतंत्र दिवस पर दंगाई नवरीत की मौत गोली लगने की वजह से हुई है, वैसे ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन सभी पर सीआरपीसी (कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर) की धारा 154 के तहत एफ़आईआर दर्ज कर ली।

इस एफ़आईआर में शशि थरूर, इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई, नेशनल हेराल्ड के सीनियर कंसल्टिंग एडिटर मृणाल पांडेय, कौमी आवाज़ के एडिटर ज़फर आगा, कारवाँ मैगज़ीन के एडिटर और संस्थापक परेश नाथ, कारवाँ के एडिटर अनंत नाथ और इसके एग्जीक्यूटिव एडिटर विनोद के जोस और एक अज्ञात शामिल हैं। 

दिल्ली पुलिस ने शशि थरूर और राजदीप सरदेसाई पर आईपी इस्टेट पुलिस थाने में आईपीसी (इंडियन पेनल कोड) की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 153 (दंगे भड़काना), 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझ कर अपमानित करना) और 505-1 बी (जनता में भय पैदा करने का उद्देश्य) के तहत एफ़आईआर दर्ज की है। इस एफ़आईआर में परेश नाथ, अनंत नाथ, विनोद के जोस, मृणाल पांडेय और ज़फ़र आगा का नाम शामिल है। 

मध्य प्रदेश पुलिस ने भी शशि थरूर और 6 अन्य लोगों पर दंगाई की मौत के मामले में फेक न्यूज़ फैलाने के लिए एफ़आईआर दर्ज की है।        

13 ग्राफिक्स, जरूरी आँकड़े: आसान भाषा में समझिए आम बजट को

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (फरवरी 1, 2021) को आम बजट पेश किया। इसके बाद हर कोई अपने-अपने तरीके से इस बजट की समीक्षा करने में लगा हुआ है। इस वर्ष बजट में सरकार ने किसानों और खेती से जुड़े सेक्‍टर्स के साथ ही इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर भी खासा ध्‍यान दिया है।

ग्राफिक्स से समझिए क्या है बजट 2021-2022

केंद्र सरकार ने ‘आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना’ का ऐलान किया है, जिसके लिए 64180 करोड़ रुपए के भारी बजट का प्रबंध किया गया है।

टैक्सपेयर्स के मामले में इस बार के बजट में दो बड़े एलान हुए हैं। पहला ऐलान यह हुआ है कि 75 साल से ज्यादा उम्र के ऐसे बुजुर्ग जो केवल पेंशन और जमा से होने वाली ब्याज आय पर निर्भर हैं, उन्हें इनकम टैक्स फाइलिंग से राहत दी जाएगी।

वहीं दूसरा बड़ा ऐलान होम लोन लेने वालों के लिए रहा। सस्ते मकान की खरीद के लिए होम लोन के ब्याज पर 1.5 लाख रुपए तक के अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन को और एक साल बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। यानी अब करदाता इस अतिरिक्त डिडक्शन का लाभ 31 मार्च 2022 तक ले सकेंगे।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए फिस्कल डेफिसिट GDP का 6.8% रहने की संभावना है। साथ ही वित्त वर्ष 2021-22 के लिए खर्च Rs 34.5 लाख करोड़ हो सकता है। इसके साथ ही वित्त वर्ष फिस्कल डेफिसिट GDP का 9.5% संभव है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत किसानों को कनसेसनल क्रेडिट बूस्ट दिया गया। किसानों के लिए आपातकालीन कार्यशील पूँजी का प्रावधान किया गया। इसके साथ ही राज्य सरकारों के उधार लेने की सीमा को बढ़ाया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत स्कूल शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने के लिए देश भर से 15,000 स्कूलों को मॉडल स्कूल के तौर पर चयनित किया जाएगा। ये चयनित स्कूल अन्य स्कूलों के लिए मेंटरशिप और हैंडहोल्डिंग का कार्य करेंगे। गैर सरकारी संगठनों/ निजी स्कूलों/राज्यों के साथ भागीदारी में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित किए जाएँगे।

अनुसूचित जनजाति के स्टूडेंट्स को बढ़ावा देने के लिए 750 एकलव्य मॉडल स्कूलों की स्थापना का लक्ष्य है। प्रति स्कूल 20 करोड़ के आवंटन को बढ़ाकर 38 करोड़ किया गया है। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में यह राशि 48 करोड़ होगी।

वित्त मंत्री ने घोषणा की कि शहरी स्वच्छ भारत मिशन 2.0 को 2021-2026 से 5 वर्षों की अवधि में 1,41,678 करोड़ रुपए का कुल वित्‍तीय आवंटन किया जाएगा।

वित्त वर्ष 2021-22 के आम बजट में स्वास्थ्य व देखभाल, वित्तीय पूँजी और बुनियादी ढ़ांँचा, आकांक्षी भारत के लिए समग्र विकास, मानव संसाधन विकास, अनुसंधान व नवाचार और न्यूनतम सरकार- अधिकतम शासन पर जोर दिया गया है।

नोट: यह सभी ग्राफिक्स सरकारी वेबसाइट से ली गई है।

‘कंजूस’ केजरीवाल सरकार: CCTV पर ₹1100 करोड़ लेकर खर्च किया एक-चौथाई से भी कम, Wi-Fi पर एक-तिहाई से भी कम

2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले, आम आदमी पार्टी ये वादा कर के सत्ता में आई थी कि अगर वो सत्ता में आती है, तो दिल्ली में 15 लाख CCTV कैमरे लगाएगी। लेकिन 15 लाख CCTV कैमरा लगाने की बात कहकर सत्ता में आई अरविन्द केजरीवाल सरकार इन CCTV कैमरा के इन्स्टाइलेशन के प्रति कितनी तत्पर है, इसकी जानकारी RTI कार्यकर्ता विवेक पांडेय को मिले जवाब बता रहे हैं।

दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार द्वारा CCTV कैमरा लगाने पर किए गए व्यय और कार्य की प्रगति के सम्बन्ध में एक RTI में खुलासा हुआ है कि अपने वादों की तुलना में केजरीवाल सरकार अभी धरातल पर आधा भी लक्ष्य पूरा कर पाने में नाकामयाब रही है। यही नहीं, CCTV कैमरा लगाने के लिए उन्हें जो फंड मिला, वो अब तक उसका इस्तेमाल कर पाने में भी असमर्थ रहे हैं।

रीवा, मध्य प्रदेश के RTI कार्यकर्ता विवेक पांडेय ने दिल्ली सरकार से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत CCTV कैमरा के सम्बन्ध में कुछ सवाल किए थे। नवंबर 05, 2020 को दायर की गई इस RTI में विवेक ने कुल 6 सवालों की जानकारी माँगी।

2015 से लेकर 2020 तक CCTV पर व्यय

इनमें सबसे पहले सवाल में वर्ष 2015 से लेकर 2020 तक दिल्ली सरकार द्वारा पूरी दिल्ली में CCTV कैमरा लगाने के लिए जारी किए गए धन की जानकारी माँगी गई थी। इसके जवाब में बताया गया है कि 571.40 करोड़ रूपए का फंड सम्बंधित विभाग द्वारा CCTV लगाने के पहले चरण के लिए प्राप्त कर लिए गए, जो कि 5 साल तक बिजली कैमरा लगाने और इसमें खर्च होने वाली बिजली के भुगतान में इस्तेमाल किया जाना है। इसके अलावा, 613.53 करोड़ रूपए का फंड फेज-2 के लिए सम्बंधित विभाग द्वारा जारी किया गया है।

RTI कार्यकर्ता ने अपने दूसरे सवाल में 2015 से लेकर 2020 तक CCTV कैमरा लगाने में खर्च किए गए धन की जानकारी माँगी है। इसके जवाब में विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, CCTV कैमरा लगाने में अब तक (जनवरी 28, 2021) मात्र 264.37 करोड़ ही खर्च हो सके हैं।

RTI कार्यकर्ता विवेक पांडेय के तीसरे प्रश्न के जवाब में बताया गया है कि 2015 से 2020 तक लगभग 1 लाख 32 हजार CCTV कैमरा ही लगाए जा सके हैं। जबकि अरविन्द केजरीवाल सरकार ने 2015 में 15 लाख CCTV कैमरा लगाने की बात को अपना चुनावी अजेंडा बनाया था।

सिर्फ 7000 वाइ-फाइ हॉटस्पॉट

इसी RTI से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में केजरीवाल सरकार वर्ष 2015 से लेकर 2020 के बीच लगाए गए मुफ्त वाइ-फ़ाइ हॉटस्पॉट की संख्या 7000 है। और इसमें दिल्ली सरकार ने 99.50 करोड़ रूपए खर्च किए हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, दिसंबर, 2019 में फिर घोषणा की थी कि पहले फेज में दिल्ली में कुल 11 हजार वाइ-फाइ हॉट स्पॉट लगाए जाएँगे।

दिल्ली सरकार की ओर से RTI में दिए गए जवाब

उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त वाइ-फाइ 2015 में आम आदमी पार्टी के चुनावी वादों में से एक था। पार्टी 70 में से 67 सीटों के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन इन वादों की वास्तविकता RTI में मिले जवाब बयाँ कर रहे हैं। RTI में केजरीवाल सरकार ने बताया है कि 2015 से लेकर 2020 तक इन वाइ-फ़ाइ के इन्स्टाइलेशन में वो अब तक 99.50 करोड़ रूपए में से मात्र 28.70 करोड़ रूपए ही खर्च कर पाए हैं।

हालाँकि, पिछले वर्ष सम्पन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले, अरविंद केजरीवाल सीसीटीवी कैमरों और फ्री वाइ-फाइ में देरी के लिए उपराज्‍यपाल और केंद्र सरकार को दोषी ठहराते रहे। केजरीवाल से कई बार यह सवाल पूछा गया तो उन्‍होंने कहा था कि उपराज्‍यपाल ने सीसीटीवी और मुफ्त वाइ-फाइ की फाइलों को अपनी स्‍वीकृति देने में काफी समय लगाया। जबकि RTI में यह स्पष्ट है कि दिल्ली सरकार के पार इसके लिए भरपूर फंड मौजूद है और वो इसे खर्च तक नहीं कर पा रही।

इससे पहले एक अन्य RTI में यह भी खुलासा हुआ था कि कोरोना वायरस से लड़ने के नाम पर दिल्ली सरकार के एलजी/सीएम रिलीफ फंड में 3469.99 लाख (34 करोड़ 69 लाख 99 हजार) रुपए आए। इसमें से दिल्ली सरकार ने मात्र 1702.44 लाख (17 करोड़ 2 लाख 44 हजार) रुपए ही खर्च किए। आश्चर्यजनक तौर पर कोरोना संक्रमण को रोकने पर इसमें से एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया।

RTI एक्टिविस्ट विवेक द्वारा ही दायर की गई एक और RTI से खुलासा हुआ था कि दिल्ली सरकार ने 2012-13 से अब तक विज्ञापनों पर 659.02 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। इसका 77% वर्ष 2015 से केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान खर्च किया गया।

The Caravan पर ट्विटर ने लगाई रोक: ‘किसान’ की मौत पर फैला रहा था फेक न्यूज – कई लिबरलों के भी अकाउंट गायब!

सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) ने वामपंथी प्रोपेगंडा मीडिया संस्थान ‘द कारवाँ इंडिया’ के हैंडल पर रोक लगा दी है। फेक न्यूज़ फैलाने वाले ‘द कारवाँ इंडिया’ के ट्विटर हैंडल पर ‘Account Withheld’ लिखा आ रहा है। इसके साथ ही अब कारवाँ न तो ट्विटर के माध्यम से कोई कंटेंट शेयर कर सकता है और न ही अपने वामपंथी प्रोपेगंडा को आगे बढ़ा सकता है। लोगों ने भी ट्विटर के इस कदम से ख़ुशी जताई।

ट्विटर ने कारवाँ के हैंडल पर लगा दी रोक

दरअसल, कारवाँ इंडिया ने एक लेख के माध्यम से दावा किया था कि दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को हुई एक प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस की गोली से हुई थी। इसी तरह राजदीप सरदेसाई और सिद्धार्थ वरदराजन ने भी झूठ फैलाया था। सिद्धार्थ के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है। वहीं राजदीप को ‘इंडिया टुडे’ ने ऑफ एयर कर दिया। कारवाँ के अलावा संजुक्ता और ‘किसान एकता मोर्चा’ का भी हैंडल रोका गया

ट्विटर ने बताया है कि एक लीगल मामले के परिणामस्वरूप कारवाँ के हैंडल पर रोक लगाई गई है। हालाँकि, इसके बाद लिबरल गिरोह के कुछ लोगों का रुदन भी शुरू हो गया। सैकत दत्ता ने दावा किया कि भारत में सभी मीडिया संस्थान खतरे से गुजर रहे हैं और उन पर तलवार लटक रही है। वहीं कुछ लोगों ने ये भी कहा कि अब कारवाँ के बाद AltNews की बारी है, क्योंकि वो भी ऐसी हरकतें करता ही रहा है।

कारवाँ ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बेटे विवेक को लेकर भी फेक न्यूज़ फैलाई थी। इस लेख के आधार पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने तो माफ़ी माँग ली, लेकिन बेशर्म कारवाँ के खिलाफ केस चलता रहा। मैगजीन में एक लेख के माध्यम से बिना किसी सबूत के आरोप लगाया गया था कि विवेक डोभाल कई कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का संचालन करते हैं और उन्होंने नोटबंदी के दौरान बड़ी मात्रा में ब्लैक मनी को व्हाइट किया।