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‘किसान’ रैली में 1 की मौत: तेज रफ़्तार ट्रैक्टर के पलटने से हुआ हादसा

किसानों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के डीडीयू मार्ग पर एक ट्रैक्टर के पलट जाने से एक ‘किसान’ की मौत हो गई है। दरअसल, ड्राइवर ने काफी तेज रफ्तार से चल रही ट्रैक्टर को अचानक से मोड़ दिया। जिसकी वजह से संतुलन बिगड़ गया और ट्रैक्टर पलट गया। इस दौरान किसान की मौत हो गई।

उल्लेखनीय है कि सीमावर्ती इलाकों में पुलिस बैरिकेड तोड़ने और प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली के कई हिस्सों में पुलिस के साथ भिड़ंत के बाद किसानों के विरोध प्रदर्शन ने एक हिंसक रूप ले लिया है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को हिंसा हुई है।

दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर उत्पात

बता दें कि गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालने की बात कही थी। लेकिन मंगलवार सुबह से ही दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर उत्पात की स्थिति देखने को मिली है। दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर, आईटीओ समेत अन्य कई इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में भिड़ंत हुई है। प्रदर्शनकारियों की ओर से दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में तोड़फोड़ भी की गई है। इतना ही नहीं मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने लालकिले पर लाल-पीला झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।

दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड जारी है, लेकिन हिंसक प्रदर्शनों के साथ। मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रैक्टर परेड के दौरान आइटीओ समेत दिल्ली में कई जगहों पर किसान अराजक हो चुके हैं। गाड़ियों में तोड़फोड़ के साथ पुलिसकर्मियों को भी पीटने की खबरें आ रही हैं।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर दिल्ली में घुसे किसान प्रदर्शनकारियों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी का माहौल बिगाड़ दिया है। भारी भीड़ के साथ ट्रैक्टर लेकर घुसे ये कथित किसान प्रदर्शन के नाम पर दिल्ली में जगह-जगह तोड़-फोड़, हल्ला-हंगामा और अराजकता फैला रहे हैं। आईटीओ के पास इन्होंने एक डीटीसी बस को क्षतिग्रस्त किया है।

इसके अलावा सिंघु बॉर्डर पर ढाई महीने से जमे किसानों ने संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर में हंगामा किया, जिसके बाद उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस के एक वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई।

एक पुलिसकर्मी के साथ कुछ किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली स्थित आईटीओ में मारपीट और हाथापाई का वीडियो सामने आया है। हाथ में डंडे लिए इन किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मी को सड़क पर घेर लिया गया और उनका कॉलर पकड़कर उनके साथ लाठी-डंडों से मारपीट और हाथापाई करने लगे। तभी उन्हीं प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोगों ने आकर बीच-बचाव कर पुलिसकर्मी को सुरक्षित खींचकर निकाला।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली के नाम पर पहुँचे किसान प्रदर्शनकारियों ने अब मर्यादा की सभी हदें लाँघनी भी शुरू कर दी है। एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें देखा कि सड़क पर प्रदर्शनकारियों ने एक महिला पुलिस को घेर कर पकड़ लिया और उसे एक कोने में लेकर चले गए। महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

दिल्ली पुलिस के जवानों को किसानों की इस अराजकता के कारण उन्हें नियंत्रित करने में खासी परेशानी हो रही है। दिलशाद गार्डन में ड्यूटी के दौरान ही एक पुलिस का जवाब बेहोश होकर गिर पड़ा, जिसके बाद बाकी पुलिसकर्मियों ने उसे वहाँ फर्स्ट एड दिया। होश में आने के बाद उक्त पुलिस के जवान को अस्पताल ले जाया गया। वहीं ITO सेंटर में तो बसों को भी नुकसान पहुँचाया गया। किसान तोड़फोड़ कर आगे बढ़ते चले गए।

वहीं लाल किला पर किसान प्रदर्शनकारियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। वहाँ झंडे के साथ अब तक हजारों प्रदर्शनकारी जुट चुके हैं। दिल्ली पुलिस बार-बार अपील कर रही है कि किसान शांति-व्यवस्था बनाए रखते हुए प्रदर्शन करें। पुलिस ने लाठीचार्ज और आँसू गैस का भी सहारा लिया है। लाल किला और ITO मेट्रो स्टेशनों की एंट्री-एग्जिट गेट्स भी बंद कर दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी तत्व उन्हें लगातार भड़का रहे हैं।

ये भी ध्यान देने वाली बात है कि दो सप्ताह पहले प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने ऐलान किया था कि जो भी दिल्ली के लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराएगा, उसे 2.5 लाख डॉलर (1.83 करोड़ रुपए) इनाम के रूप में दिए जाएँगे। अब किसानों की ट्रैक्टर रैली लाल किला पर पहुँच गई है।

रस्सी से लाल किला का गेट तोड़ा, जहाँ से देश के PM देते हैं भाषण, वहाँ से लहरा रहे पीला-काला झंडा

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान अपनी ट्रैक्टर परेड लेकर नई दिल्ली के लाल किले तक घुस चुके हैं और उन्होंने लाल किले पर लाल-पीला झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।

मंगलवार (जनवरी 26, 2021) दोपहर लाल किले पर पहुँचे किसानों को एक गुंबद के शीर्ष पर एक झंडा लगाते हुए देखा गया। वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी ने उस जगह पर अपना झंडा लगा दिया, जहाँ पर प्रधानमंत्री हर वर्ष स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराते आए हैं।

किसानों की ट्रैक्टर परेड ने आखिरकार अब हिंसक मोड़ ले लिया है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ दिया, जिसके कारण किसानों पर आँसू गैस छोड़ी गई। एक पुलिसकर्मी के साथ कुछ किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली स्थित आईटीओ में मारपीट और हाथापाई का वीडियो सामने आया है। हाथ में डंडे लिए इन प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मी को सड़क पर घेर लिया गया और उनके साथ हाथापाई की गई। तभी उन्हीं प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोगों ने आकर बीच-बचाव कर पुलिसकर्मी को सुरक्षित खींच निकाला।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी की वर्दी खींचकर उसे कुछ लोगों ने घेर लिया और उनके साथ झड़प की। तभी पीछे से कुछ और लोग भी वहाँ पर इकट्ठे हो गए, जिनके हाथों में लाठी-डंडे भी थे और वो पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई करने लगे।

देखते ही देखते सड़क पर भीड़ जमा हो गई और कुछ और लोगों ने आकर बीच बचाव किया। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मी को बचाने वाले ये लोग भी उन्हीं प्रदर्शनकारियों के ही साथ थे, जो आज गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में नए कृषि कानूनों के विरोध में रैली निकाल रहे हैं।

आज गणतंत्र दिवस के मौके पर ऐसे कई वीडियो सामने आ चुके हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड तोड़ दिए गए, पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और सेन्ट्रल दिल्ली में आईटीओ में पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की गई।

मीलॉर्ड! आज खुश तो बहुत होंगे आप: ऑपइंडिया एडिटर के चंद सवाल

शायद अब सुप्रीम कोर्ट को लगेगा कि औरों के भी संवैधानिक अधिकार हैं, लिब्रांडू मीडिया गिरोह इसे सफल आंदोलन करार देगा, जबकि पुलिस पर तलवारों से हमले हुए हैं!

पूरा वीडियो यहाँ देखें

उपद्रवी ‘अन्नदाता’ को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस जान-जोखिम में डालकर बैठी सड़क पर: जगह-जगह हो रहे भयंकर तोड़-फोड़

कृषि कानून के नाम पर विरोध करने निकले कथित किसान प्रदर्शनकारी दिल्ली की सड़कों पर मनमानी कर रहे हैं। स्थिति ये है कि सुरक्षा व्यवस्था का पूरा प्लान पहले से तैयार होने के बावजूद दिल्ली पुलिस को अराजकता रोकने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई जगह किसानों का हुड़दंग रोकने के लिए पुलिसकर्मी सड़क पर बैठ गए हैं। 

ताजा तस्वीरें नांगलोई से सामने आई हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, ट्रैक्टर परेड करने वाले किसानों के क्षेत्र में पहुँचने के बाद पुलिस अधिकारी नांग्लोई क्षेत्र को ब्लॉक करने के लिए सड़क पर बैठ गए हैं।

बता दें कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर दिल्ली में घुसे किसान प्रदर्शनकारियों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी का माहौल बिगाड़ दिया है। भारी भीड़ के साथ ट्रैक्टर लेकर घुसे ये कथित किसान प्रदर्शन के नाम पर दिल्ली में जगह-जगह तोड़-फोड़, हल्ला-हंगामा और अराजकता फैला रहे हैं। आईटीओ के पास इन्होंने एक डीटीसी बस को क्षतिग्रस्त किया है।

इसके अलावा सिंघु बॉर्डर पर ढाई महीने से जमे किसानों ने संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर में हंगामा किया, जिसके बाद उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस के एक वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई।

इसी प्रकार पुलिस के वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। साथ ही पुलिस के साथ प्रदर्शनकारी किसानों ने जम कर हाथापाई भी की। इस दौरान पुलिस को हिंसा पर उतारू किसानों को रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। मुबारक चौक पर भी किसान प्रदर्शनकारी पुलिस की गाड़ी पर चढ़ गए और बैरिकेडिंग को तोड़ डाला। गाजीपुर सीमा पर भी किसान हिंसक हो गए और उन्होंने तोड़फोड़ मचाई, जिसके बाद पुलिस को उन्हें खदेड़ना पड़ा। 

दिल्ली की सड़कों पर किए जा रहे उपद्रव को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस जहाँ जान को जोखिम में डालकर सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। वहीं वामपंथी गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पुलिस को नेगेटिव दिखाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा। दर्शाया जा रहा है कि पुलिस किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़ रही है, उन पर लाठी भाँज रही है, जबकि हकीकत यह है कि अभी तक न जाने कितने पुलिसकर्मी इस संघर्ष में घायल हो गए हैं। उन पर तलवार से हमले हो रहे हैं। लाठी लेकर उन्हें दौड़ाया जा रहा है।

लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराने पर SFJ देगा ₹1.83 करोड़, पहुँच गई ‘किसानों’ की ट्रैक्टर रैली

दिल्ली में जगह-जगह जारी ‘किसानों’ का विरोध प्रदर्शन अब हिंसा और अराजकता में बदल गया है। लाल किला तक किसानों की ट्रैक्टर रैली का जत्था पहुँच चुका है और वहाँ पर उन्हें नियंत्रित करने में पुलिस को खासी परेशानी हो रही है। लाल किला पुरानी दिल्ली का एक महत्वपूर्ण स्थल है और वहाँ प्रदर्शनकारियों के पहुँचने से कानून-व्यवस्था के लिए संकट पैदा हो गया है। ये गाजीपुर सीमा से निकले किसान हैं, जिन्होंने दो पुलिस बैरिकेड्स भी तोड़ डाले हैं।

ये भी ध्यान देने वाली बात है कि दो सप्ताह पहले प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने ऐलान किया था कि जो भी दिल्ली के लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराएगा, उसे 2.5 लाख डॉलर (1.83 करोड़ रुपए) इनाम के रूप में दिए जाएँगे। अब किसानों की ट्रैक्टर रैली लाल किला पर पहुँच गई है। उधर ITO तक भी किसानों की ट्रैक्टर रैली पहुँच गई है। उन्होंने अचानक से रूट बदल दिए हैं।

किसानों की पूरी कोशिश है कि वो लुटियंस दिल्ली में पहुँच कर अराजकता फैलाएँ। नंगलोई में तो दिल्ली पुलिस के जवानों को सड़क पर बैठना पड़ा, ताकि वो किसी तरह प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक सकें। गाजीपुर में बैरिकेड्स तोड़ कर किसानों ने जश्न भी मनाया। दिल्ली मेट्रो के अधिकतर स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। एंट्री-एग्जिट गेट्स बंद कर दिए गए हैं। हर ट्रैक्टर पर 10 लोग हैं और कइयों के साथ ही ट्रेलर भी लगे हुए हैं।

दिल्ली में ही प्रदर्शन के दौरान एक अन्य जगह में किसान तलवार लेकर पिल पड़े और पुलिसकर्मियों को खदेड़ने लगे। पुलिस उन्हें पीछे हटने के लिए कहती रही और किसान तलवार भाँजते हुए आगे बढ़ते रहे। इस दौरान वो धमकियाँ भी दे रहे थे।

ITO पर पुलिसकर्मी को डंडों से घोंचा, कॉलर पकड़ कर हाथापाई और मारपीट: Video

एक पुलिसकर्मी के साथ कुछ किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली स्थित आईटीओ में मारपीट और हाथापाई का वीडियो सामने आया है। हाथ में डंडे लिए इन किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मी को सड़क पर घेर लिया गया और उनका कॉलर पकड़कर उनके साथ लाठी-डंडों से मारपीट और हाथापाई करने लगे। तभी उन्हीं प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोगों ने आकर बीच-बचाव कर पुलिसकर्मी को सुरक्षित खींच निकाला।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी की वर्दी खींचकर उन्हें कुछ लोगों ने घेर लिया और उनके साथ झड़प की। तभी पीछे से कुछ और लोग भी वहाँ पर इकट्ठे हो गए, जिनके हाथों में लाठी-डंडे भी थे और वो पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई करने लगे।

देखते ही देखते सड़क पर भीड़ जमा हो गई और कुछ और लोगों ने आकर बीच बचाव किया। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मी को बचाने वाले ये लोग भी उन्हीं प्रदर्शनकारियों के ही साथ थे, जो आज गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में नए कृषि कानूनों के विरोध में रैली निकाल रहे हैं।

आज गणतंत्र दिवस के मौके पर ऐसे कई वीडियो सामने आ चुके हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड तोड़ दिए गए, पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और सेन्ट्रल दिल्ली में आईटीओ में पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की गई।

पुलिसकर्मियों को ट्रैक्टर से रौंदने की कोशिश

एक अन्य वीडियो में किसानों को ट्रैक्टर से सड़क पर करतब दिखाते हुए भी देखा जा सकता है। वह तेज रफ्तार में पुलिस की ओर अपना ट्रैकर बढ़ाते देखा जा सकता है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन का था वादा

उल्लेखनीय है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का वादा कर के किसानों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को राजधानी दिल्ली में पहुँच कर उपद्रव शुरू कर दिया है। सिंघु सीमा पर ढाई महीने से जमे किसानों ने संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर में हंगामा किया, जिसके बाद उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस के एक वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। ‘किसानों’ द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

पुलिस के वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। साथ ही पुलिस के साथ प्रदर्शनकारी किसानों ने जम कर हाथापाई भी की। इस दौरान पुलिस को हिंसा पर उतारू किसानों को रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। यही नहीं, किसान तलवार लेकर टूट पड़े और पुलिसकर्मियों को खदेड़ने लगे। पुलिस उन्हें पीछे हटने के लिए कहती रही और किसान तलवार भाँजते हुए आगे बढ़ते रहे। इस दौरान वो धमकियाँ भी दे रहे थे।

वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से विपक्षी नेता भी किसानों को भड़काते हुए नज़र आए। प्रियंका गाँधी वाड्रा ने किसानों की ट्रैक्टर रैली की तस्वीरें शेयर कर गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दी। कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है, जिनमें ग्रीन लाइन के अधिकतर स्टेशन शामिल हैं

ट्रैक्टरों पर किसान यूनियनों और भारत के झंडे लगे हैं। उनकी संख्या दसियों हजार में है। इन संगठनों ने कहा है कि वो आउटर रिंग रोड और संसद भवन तक मार्च निकालेंगे।

इससे पहले प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी। वीडियो में देख सकते हैं कि भारी तादाद में किसान बैरीकेडिंग के पार खड़े होते हैं, फिर धीरे धीरे उस पर चढ़ना शुरू कर देते हैं और देखते ही देखते यह भीड़ बैरिकेड्स को तोड़ कर आगे की ओर भागते हैं।

हिंदुओं को धमकी देने वाले के अब्बा, मोदी को 420 कहने वाले मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता: ‘लोकतंत्र की हत्या’ गैंग के मुँह पर 3 पद्म अवॉर्ड्स

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। कुल 119 लोगों को इन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें से 7 को देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण मिला। पद्म पुरस्कारों में 3 नाम ऐसे भी हैं, जो सबका ध्यान खींच रहे हैं। वो तीन नाम हैं – मौलाना वहीदुद्दीन खान (पद्म विभूषण), तरुण गोगोई (पद्म भूषण) और कल्बे सादिक (पद्म भूषण)।

खान और सादिक को ये सम्मान अध्यात्म (Spiritualism) के क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों के लिए मिला है, वहीं 15 वर्षों तक असम के मुख्यमंत्री रहे गोगोई को समाज सेवा के लिए किए गए उनके कार्यों के लिए ये सम्मान मरणोपरांत मिला। वो सबसे ज्यादा लंबे समय तक असम के सीएम का कार्यभार संभालने वाले नेता थे और राज्य में हिंसक समूहों को नियंत्रित करने में उनकी भूमिका थी। वो केंद्र में मंत्री भी रहे थे।

वहीं 96 वर्षीय मौलाना वहीदुद्दीन खान इस्लामी स्कॉलर हैं जो शांति के लिए कार्य करने का दावा करते हैं। उन्होंने कुरान शरीफ की व्याख्या भी लिखी है और उसे अंग्रेजी में भी अनुवादित किया है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘द मुस्लिम’ ने दुनिया भर के प्रभावशाली मुस्लिमों की सूची में उन्हें रखा है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ स्थित बड़हरिया गाँव में हुआ था। वो इस्लाम से जुड़ी उर्दू और अंग्रेजी पत्रिका भी चलाते हैं।

जहाँ तक कल्बे सादिक की बात है, वो अपने अनुयायियों में इस्लामी उपदेशक, सुधारक और शिक्षाविद के रूप में जाने जाते रहे हैं। लखनऊ के एक शिया परिवार में उनका जन्म हुआ था। उन्हें भी ये सम्मान मरणोपरांत मिला है। उनकी मृत्यु नवंबर 24, 2020 को हो गई थी। उन्होंने AMU से आर्ट्स में स्नातक किया था। एक समय मल्टीपल वीजा होने के कारण अमेरिका ने उन्हें एंट्री नहीं दी थी और लंदन भेज दिया था।

मौलाना कल्बे सादिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक थे और उन्होंने मई 2015 में मोदी सरकार के 1 वर्ष पूरा होने पर कहा था, “एक वर्ष के लिए मैं केंद्र की मोदी सरकार को 420 नंबर देता हूँ। यह सरकार 420 से भरी हुई है। जो कहती है वो करती नहीं है। मोदी सरकार खुद भ्रष्टाचार में फँसी हुई है। अगर ऐसा नहीं है तो कब का काला धन देश में वापस आ गया होता।” उन्होंने सपा के आज़म खान की तारीफ की थी और पीएम मोदी को बड़े-बड़े वादे करने वाला बताया था।

मौलाना वहीदुद्दीन के बेटे हैं जफरुल इस्लाम खान, जो जम्मू कश्मीर से लेकर CAA तक के मुद्दों पर मोदी सरकार के खिलाफ अभियान चलाते रहे हैं। जफरुल इस्लाम ने भारत के हिन्दुओं को अरब का धौंस दिखाया था। वो दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं। उन्होंने कहा था, “भारत के मुस्लिमों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।”

ज़िंदगी भर कॉन्ग्रेस की राजनीति करने वाले पूर्वोत्तर के तरुण गोगोई, नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले और उन पर व उनकी सरकार पर आरोप लगाने वाले कल्बे सादिक और हिन्दुओं को अरब देशों का डर दिखाने वाले जफरुल इस्लाम के बूढ़े अब्बा मौलाना वहीदुद्दीन खान – मोदी सरकार ने इन तीनों को शीर्ष 2 पद्म पुरस्कारों से सम्मानित कर के उनका मुँह बंद कर दिया है जो देश में लोकतंत्र न होने और मोदी द्वारा ‘विरोधियों के दमन’ का राग छेड़ते रहते हैं।

DTC बस को तोड़ा, तलवारबाजी करते बढ़ रहे… पुलिस को धकियाते-रगेदते संसद और लाल किला की ओर ‘किसान’

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर दिल्ली में घुसे किसान प्रदर्शनकारियों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी का माहौल बिगाड़ दिया है। सामने आ रही तस्वीरें डराने वाली हैं। भारी भीड़ के साथ ट्रैक्टर लेकर घुसे ये कथित किसान प्रदर्शन के नाम पर दिल्ली में जगह-जगह तोड़-फोड़, हल्ला-हंगामा और अराजकता फैला रहे हैं। आईटीओ के पास इन्होंने एक डीटीसी बस को क्षतिग्रस्त किया है।

इस घटना की वीडियो भी आई है। वीडियो में देख सकते हैं कि डीटीसी बस पर भारी भीड़ ने हमला किया हुआ है। उसे गिराकर तोड़ने का प्रयास हो रहा है।

हिस्ट्रॉरिक ट्रैक्टर मार्च के ट्विटर से ऐलान हुआ है कि उनका एक जत्था लाल किला की ओर जा रहा है।

इसी तरह आईटीओ से आई वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे हल्ला करते हुए भीड़ नारे लगाते हुए सड़क पार कर रही है और गाने भी साथ-साथ चल रहे हैं। भीड़ की पहुँच से संसद भी ज्यादा दूर नहीं है।

बता दें कि आज से पहले दिल्ली ने ऐसे नजारे जामिया हिंसा और उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों के दौरान देखे थे, जब पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। उस समय भी डीटीसी की बस को निशाना बनाया गया था और सैंकड़ों की भीड़ ने सड़कों पर आकर उत्पात मचाया था।

आज भी स्थिति यह है कि हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़ रहे हैं। खबर है कि संजय गाँधी ट्रांसपोर्ट नगर पर प्रदर्शनकारी पुलिस के एक वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। ‘किसानों’ द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं। साथ ही पुलिस के वाहन को भी क्षतिग्रस्त किया गया।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने इस ‘नृशंस’ हत्याकांड का अनावरण करते हुए बताया है कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी। तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने कहा कि जैदपुर थाना क्षेत्रान्तर्गत बीबीपुर के एक सरसों के खेत में एक युवती का नग्न शव मिला था।

एसपी ने बताया, “शव को तत्काल पोस्टमॉर्टेम के लिए भेज दिया गया था और मृतका के पिता के बयान के आधार पर FIR दर्ज की गई है। हत्याकांड के खुलासे के लिए 5 टीमें तत्काल गठित की गई थीं, जिसमें हमारी सर्विलांस की टीम भी शामिल थी। कई थानों की फोर्स लगाई गई, ताकि इसे वर्कआउट किया जा सके। दिन-रात मेहनत कर के उन्होंने इस घटना का पर्दाफाश किया है। मैनुअल इंटेलिजेंस की टीम भी लगाई गई थी।”

एसपी ने जानकारी दी है कि विभिन्न स्तर पर चले जाँच अभियान के दौरान स्थानीय लोगों से भी बातचीत की गई और उनकी भावनाओं को जाना गया। पुलिस ने जाँच के बाद पाया कि इस घटना का वादी ही हत्यारा है। युवती के भाई ने उसे रास्ते से हटाने के लिए सारी साजिश रची थी और इस घटना के लिए उसने एकाध हफ्ते पहले ही माता-पिता को भी मना लिया था। ये लोग लड़की को रास्ते से किसी तरह हटाना चाहते थे।

पुलिस का कहना है कि माँ-बाप पहले तो इसके लिए नहीं तैयार हुए, लेकिन बाद में वो भी युवती की हत्या करने को लेकर राजी हो गए। घटना से एक दिन पहले मृतका के भाई ने अपने खेत में जाकर उस स्थान को चिह्नित किया, जहाँ वो शव फेंकने वाला था। पूरी तरह से तैयारी कर के वो वापस आया और घर पर माता-पिता के साथ मिल कर उसी रात हत्या की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, उन्होंने पहले घर में ही युवती की हत्या करने का प्लान बनाया।

बाराबंकी एसपी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि लालच में आकर परिवार ने युवती को घर में मार डालने की योजना को त्याग दिया। चूँकि हाल के दिनों में दलित युवतियों की रेप अथवा हत्या के बाद पीड़ित परिवारों को बड़ी रकम बतौर मुआवजा मिली, ऐसा सोच कर युवती के परिवार वालों ने भी आर्थिक लाभ कमाने की सोची। पुलिस ने इसे एक षड्यंत्र करार दिया है, जिसके तहत केस को घुमाने की भी कोशिश की गई।

एसपी यमुना प्रसाद ने कहा, “जनवरी 16 युवती के परिवार वाले उसे खेत में ले गए। वहाँ माँ ने उसका पाँव पकड़ा और भाई ने गला दबाया। मौत सुनिश्चित करने के लिए उसके दुपट्टे से भी उसका गला घोंट दिया। इसके बाद उसके प्राइवेट पार्ट्स पर एक डंडे से प्रहार किया, जिससे वहाँ इंजरी हो जाए और ये दिखने में रेप का मामला प्रतीक हो। उसकी चप्पलों को बगल में फेंक दिया गया। सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।”

पुलिस ने बताया कि इस दौरान परिवार ने उन सभी लोगों को इस मामले में फँसाने की कोशिश की, जिनसे उनकी दुश्मनी थी या नहीं बनती थी। पुलिस ने ऐसे कई लोगों को थाने लाकर उनसे गहन पूछताछ की। एसपी ने बताया कि आसपास के सभी खेतों के मालिकों और मजदूरों की सूची बना कर उनसे पूछताछ की गई। आसपास के मुर्गीफार्म और सिंचाई करने वाला या वहाँ बैठ कर शराब पीने वाले लोगों तक से पूछताछ हुई।

लेकिन जाँच में जो निकला, उससे पुलिस के भी होश उड़ गए। अब तीनों आरोपितों को जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दलित युवती की लाश से कपड़े भी उसके परिवार वालों ने ही हटाए थे। पुलिस को शक तब हुआ, जब पोस्टमॉर्टेम में रेप की पुष्टि नहीं हुई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस घटना को जातीय रंग दिए जाने की भी साजिश थी और हाथरस की तर्ज पर फैब्रिकेट किया जा रहा था। इसे ‘दलित बनाम सवर्ण’ बनाया जाना था। जाँच के क्रम में पुलिस ने 70 लोगों से पूछताछ की।

भाजपा विधायक राम नरेश रावत ने भी ऐसा ही शक जताया था, लेकिन मीडिया ने उनके बयान को विवादित करार दिया। रायबरेली की बछरावाँ के विधायक रावत ने शक जताया था कि मृतका के माँ-बाप ही हत्यारे हो सकते हैं। उन्होंने पीड़िता के गाँव जाकर ग्रामीणों से मुलाकात की थी और घटना को समझा था। उन्होंने पुलिस से भी बातचीत की थी। ग्रामीणों ने विधायक से शिकायत की थी कि इस एक मामले में ऐसा लगता है जैसे सारा गाँव ही हिरासत में जा रहा है।