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वैक्सीन के लिए अमेरिका ने की भारत की तारीफ़: बाइडेन के शपथग्रहण में शामिल 150 से अधिक नेशनल गार्ड कोरोना पॉजिटिव

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के शपथ ग्रहण समारोह की सुरक्षा में तैनात लगभग 150 से 200 नेशनल गार्ड कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ संक्रमित जवानों का आँकड़ा इससे अधिक भी हो सकता है। जो बाइडेन के शपथ ग्रहण को मद्देनज़र रखते हुए वाशिंगटन डीसी में लगभग 25000 जवानों को तैनात किया गया था। 

दरअसल, कुछ दिनों पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों द्वारा कैपिटल हिल में किए गए हंगामे को ध्यान में रखते हुए इतने जवानों को तैनात किया गया था। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए लोगों से निवेदन किया था कि वह आगामी 100 दिनों तक मास्क पहनें। 

वहीं अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट (state department) ने वैश्विक महामारी के दौर में भारत द्वारा दक्षिण एशियाई देशों के लिए की जाने वाली ‘मुफ्त शिपमेंट’ के लिए सराहना की है। 

भारत सरकार द्वारा की जा रही वैश्विक स्तर की मदद की प्रशंसा करते हुए अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने अपने ट्वीट में लिखा, “हम वैश्विक स्वास्थ्य में भारत की भूमिका की सराहना करते हैं। भारत दक्षिण एशिया में कोविड वैक्सीन की लाखों डोज़ साझा कर रहा है। मालदीव, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल में भारत की मुफ्त शिपमेंट शुरू हो चुकी है, आने वाले समय में इसका विस्तार अन्य देशों में भी होगा।”

पिछले कुछ दिनों में भारत भूटान को 1.5 लाख, मालदीव को 1 लाख, बांग्लादेश को 20 लाख, म्यांमार को 15 लाख, नेपाल को 10 लाख और मारीशस को 1 लाख कोविड वैक्सीन की डोज़ प्रदान कर चुका है। केंद्र की मोदी सरकार ने लगभग सभी पड़ोसी देशों को कोविड वैक्सीन प्रदान करने का ऐलान किया है सिवाय पाकिस्तान। इसके अलावा भारत सरकार जल्द ही अफग़ानिस्तान और श्रीलंका को भी वैक्सीन प्रदान करेगी।           

अमेरिका में महामारी के हालातों पर बोलते हुए जो बाइडेन का कहना था कि जानकारों के मुताबिक़ मास्क पहनने से अप्रैल 2021 तक लगभग 50 हज़ार जानें बचाई जा सकती हैं। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए अमेरिका के हर नागरिक को आने वाले 100 दिनों तक मास्क पहनना चाहिए। जो बाइडेन ने 20 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। 

इस दौरान उन्होंने व्यापारिक संस्थाओं, स्कूलों को फिर से शुरू करने और यात्रा करते हुए मास्क पहनने की ज़रूरत समेत इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर की रणनीति पेश की थी। विदेश से आने वाले लोगों को अमेरिका के लिए रवाना होने से पहले कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट पेश करनी होगी और वहाँ पहुँचने के बाद उन्हें निश्चित अवधि तक क्वारंटाइन में रहना होगा।  

महामारी के मुद्दे पर अपनी कार्रवाई तेज़ करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये भी कहा था, “फ़िलहाल हम राष्ट्रीय आपातकाल का सामना कर रहे हैं। नतीजतन हम उसके मुताबिक़ ही आगे बढ़ेंगे। महामारी से होने वाले मौतों का आँकड़ा अगले महीने 4 लाख से बढ़ कर 5 लाख हो सकता है। ऐसे हालातों से बचने के लिए हमें ठोस कदम उठाने होंगे। हमें फिर से अमेरिका की जनता का भरोसा जीतना है, जिसे पिछली सरकार ने खो दिया था।” 

AAP विधायक सोमनाथ भारती को 2 साल जेल की सजा सुना अदालत ने दी बेल, एम्स में सुरक्षाकर्मियों से की थी मारपीट

दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक और दिल्ली के पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मारपीट के मामले में दोषी ठहराया है। दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट रवीन्द्र कुमार पांडेय ने 2016 में दर्ज किए गए इस मामले के 4 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया है। आप विधायक पर एम्स के सुरक्षाकर्मी के साथ मारपीट का आरोप था। 

अदालत ने भारती को दो साल जेल की सजा सुनाई। हालॉंकि बाद में उन्हें इस आधार पर जमानत दे दी गई कि वे फैसले के खिलाफ बड़ी अदालत में अपील करना चाहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सोमनाथ भारती को आईपीसी की धाराओं के अंतर्गत मारपीट करने, सरकारी काम में बाधा डालने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का दोषी पाया गया है। अदालत ने इस मामले में आरोपित बनाए गए चार अन्य लोगों जगत सैनी, दिलीप झा, राकेश पांडेय और संदीप उर्फ़ सोनू को बरी कर दिया। 

एम्स के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने 2016 में सोमनाथ भारती पर सुरक्षाकर्मी से मारपीट का आरोप लगाते हुए हौज ख़ास थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने सोमनाथ भारती पर दंगे भड़काने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया था। 

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश पुलिस ने आम आदमी पार्टी विधायक को रायबरेली जाते हुए गिरफ्तार किया था। इस दौरान सोमनाथ भारती ने तैश में आकर पुलिसकर्मियों से बहस शुरू कर दी थी, तभी एक अज्ञात व्यक्ति ने आप विधायक पर काली स्याही फेंक दी। इस घटना के बाद सोमनाथ भारती ने उत्तर प्रदेश पुलिस और मुख्यमंत्री आदित्यानाथ को सरेआम धमकी देना शुरू कर दिया। 

स्याही मुँह पर फेंके जाने से पहले की एक वीडियो में आप विधायक कहते हैं, “और आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।” आगे पुलिस उनसे रुकने को कहती है, जवाब में वह कहते हैं, “किस कानून में लिखा है, किस संविधान में लिखा है। हम कोई अनपढ़ मंत्री हैं?”

इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए नफ़रत भरी भाषा का इस्तेमाल करते हुए सोमनाथ भारती ने कहा था, “इस तरह के हमले से कुछ नहीं होगा। योगी की मौत निश्चित है! तुम लोगों ने एक हमलावर को भागने में मदद की है। तुम लोगों को समझने की ज़रूरत है। योगी से जाकर कह दो इस तरह के हमलों से कुछ हासिल नहीं होगा।” पुलिसकर्मियों से अभद्रता करने के आरोप में सोमनाथ भारती को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।   

असम में 1 लाख लोगों को मिले जमीन के पट्टे, PM मोदी ने कहा- राज्य में अब तक 2.5 लाख लोगों को मिली भूमि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (जनवरी 23, 2021) को अपर असम के शिवसागर जिले में स्थित ऐतिहासिक जेरेंगा पोथार मैदान में जनसभा को सम्बोधित किया। इस दौरान करीब 1 लाख जनजातीय लोगों को उनकी जमीन का पट्टा (स्वामित्व वाले दस्तावेज) सौंपा गया। असम में 6 सदी तक राज करने वाले अहोम वंश के लिए शिवसागर एक बड़ा स्थान था। लेकिन, पिछले वर्ष इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा इसे CAA विरोधी हब बनाने की कोशिश की गई थी।

ये असम में स्वतंत्रता के बाद अब तक का सबसे बड़ा भूमि अंशदान अभियान है। इस दौरान प्रत्येक व्यक्ति को 7 बीघा तक की भूमि के स्वामित्व के साथ-साथ घर के लिए छोटी जमीन भी दी जा रही है। असम में अप्रैल 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में लगभग 1 वर्ष बाद राज्य में पहुँचे पीएम मोदी के इस दौरे को अहम माना जा रहा है। 2016 में भाजपा ने राज्य के लोगों को ‘जाति, माटी और भेटी (मातृभूमि) की रक्षा’ का वचन दिया था।

ग्रामीण इलाकों में हर लाभार्थी को 1.08 लाख स्क्वायर फ़ीट खेती की जमीन सौंपी गई। असम में एक बीघा में 14,400 स्क्वायर फ़ीट आता है। इसके अलावा एक बीघा घर बनाने के लिए भी दिए गए। वहीं शहरी लाभार्थियों को 1.1 कट्ठा जमीन दी गई। 1 कट्ठा वहाँ 2880 स्क्वायर फ़ीट होता है। वहीं गुवाहाटी के लाभार्थियों को 1.5 कट्ठा भूमि मिली। म्युनिसिपल्टी क्षेत्र में आधिकारिक रूप से एक घर के लिए इतनी भूमि कम से कम होनी ही चाहिए।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि असम के लोगों का इतनी बड़ी संख्या में आना, उनका ये आशीर्वाद और आत्मीयता उनके लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने कहा, “आपका ये प्रेम और स्नेह मुझे बार बार असम ले आता है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि आज असम की सरकार ने लोगों के जीवन की बड़ी चिंता दूर की है और 1 लाख से ज्यादा मूल निवासी परिवारों को भूमि के स्वामित्व का अधिकार मिलने से उनके जीवन की बड़ी चिंता अब दूर हो गई है।

उन्होंने कहा कि आज ‘पराक्रम दिवस’ पर पूरे देश में अनेक कार्यक्रम भी शुरू हो रहे हैं। इसलिए एक तरह से आज का दिन उम्मीदों के पूरा होने के साथ ही, हमारे राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि के लिए प्रेरणा लेने का भी अवसर है। बकौल पीएम मोदी, असम में जब भाजपा सरकार बनी तो उस समय भी यहाँ करीब-करीब 6 लाख मूल निवासी परिवार जिनके पास ज़मीन के कानूनी कागज़ नहीं थे। उन्होंने लोगों की इस चिंता को दूर करने के लिए गंभीरता के साथ काम करने का श्रेय मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल को दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि आत्मविश्वास तभी बढ़ता है जब घर-परिवार में भी सुविधाएँ मिलती हैं और बाहर का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सुधरता है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि बीते सालों में इन दोनों मोर्चों पर असम में अभूतपूर्व काम किया गया है। उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि 5 साल पहले तक असम के 50 प्रतिशत से भी कम घरों तक बिजली पहुँची थी, जो अब करीब 100% तक पहुँच चुकी है। जल जीवन मिशन के तहत बीते 1.5 साल में असम में 2.5 लाख से ज्यादा घरों में पानी का कनेक्शन दिया गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि शिवसागर को देश के 5 सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में भी चुना गया है। 2019 में ही सरकार ने नए कानून बना कर लोगों को उनकी जमीन के अधिकार देने की योजना बना दी थी। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में ही 2.5 लाख लोगों को उनकी भूमि का अधिकार दिया गया है। असम के 70 आदिवासी समुदायों को सामाजिक सुरक्षा दी गई है। उन्होंने कहा कि असम की संस्कृति की रक्षा के लिए वाजपेयी सरकार से लेकर अब तक भाजपा गंभीर रही है।

इस दौरान वो लोगों को ये सलाह देना नहीं भूले कि कोरोना टीकाकरण के लिए जिसकी बारी आए, वो टीके जरूर लगाएँ। टीके की 2 डोज लगनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में भारत में बने टीके की डिमांड हो रही है और भारत में भी लाखों लोग अब तक टीका लगा चुके हैं। उन्होंने कहा, “हमें टीका भी लगाना है और सावधानी भी रखनी है। असम में जिस तरह से लोगों ने इस महामारी से लड़ाई लड़ी, उसके लिए वो बधाई के पात्र हैं।”

उन्होंने कहा कि असम में तेल और गैस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर बीते वर्षों में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया गया है। गुवाहटी-बरौनी गैस पाइपलाइन से नॉर्थ ईस्ट और पूर्वी भारत की गैस कनेक्टिविटी मजबूत होने वाली है।

नकाब हटा तो ‘शूटर’ ने खोले राज, बताया- किसान नेताओं ने टॉर्चर किया, फिर हत्या वाली बात कहवाई: देखें Video

दिल्ली के सिंघु सीमा पर केंद्र सरकार के 3 कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले दो महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने एक नकाबपोश को मीडिया के समक्ष पेश किया था, जिसने दावा किया कि उसे 4 किसान नेताओं को शूट करने के लिए रुपए मिले थे। अब एक नए वीडियो में इसके राज़ खुल रहे हैं। नए वीडियो में नकाब वाले व्यक्ति ने दावा किया है कि उसे दिल्ली पुलिस को बदनाम करने के लिए किसान नेताओं द्वारा प्रताड़ित किया गया था।

उक्त शख्स ने कहा, “मैं सोनीपत का योगेश सिंह हूँ। जनवरी 19 को मेरे मामा का लड़का हुआ था तो मैं दिल्ली गया था। वहाँ पर कुछ किसान नेताओं ने मुझ पर लड़की छेड़ने का आरोप लगाया और वो अपने कैम्पों में मुझे ले गए। वहाँ ले जाकर मेरी पिटाई की गई। मेरी पैंट उतार कर मुझे पीटा गया। उलटा लटका कर मारा गया। उन्होंने दबाव बनाया कि मुझे उनका कहा बोलना पड़ेगा। मैंने हामी भर दी।”

योगेश ने आगे बताया, “मेरी पिटाई के बाद उन्होंने मुझे भोजन कराया। फिर उन्होंने मुझे बताया कि क्या-क्या बोलना है। उसके बाद रात को दारू पिला कर मेरा वीडियो बना लिया गया। इसके अगले दिन वहाँ पर बिठाया गया और मेरे साथ 4 लड़के और पकड़े आगे थे, जिनमें से एक का नाम सागर है। किसान नेताओं ने कहा कि उन्होंने सागर को मार डाला है, तुम्हारे साथ ही वही करेंगे। अगर छूट कर जाना है तो मेरी बात मानो।”

शख्स ने आगे बताया कि किसान नेताओं ने उसकी पिटाई की। वो पुलिस के हवाले करने के लिए मिन्नतें करता रहा, लेकिन वो बोलते रहे कि वो पुलिस को कुछ नहीं बताते, जो करना हो खुद करते हैं। योगेश ने बताया कि उसके साथ पकड़े गए एक लड़के की पीट-पीट कर अधमरी हालत कर दी गई थी। उसने बताया कि प्रेस के सामने ये कहने को कहा गया कि राई थाने के एक व्यक्ति ने मुझे किसान नेताओं को शूट करने के लिए रुपए दिए थे।

योगेश ने किसान नेताओं को लेकर किया बड़ा दावा

उसने आगे बताया, “मैंने छूटने के डर से ये सब बोलना स्वीकार कर लिया। मैंने सोचा कि मैं पुलिस को सब सच बता दूँगा। मुझे पुलिस ले गई, जिसके बाद मैंने सब सच बता दिया। मेरा कोई साथी नहीं है। मेरे साथ जो पकड़े गए, उनमें से एक को अधमरा कर दिया गया और एक को वो मार डालने का दावा कर रहे थे। उनमें से एक किसान ही था। उन्होंने मेरी अलग-अलग कई वीडियो बनवाई है। मैं कोई नशा नहीं करता।”

योगेश ने खुद को नौवीं फेल और बेरोजगार बताते हुए कहा कि उसके पिता कुक हैं, माँ बर्तन माँजती है, वहीं उसकी बहन पढ़ाई करती है। उसने कहा कि उसके पास कोई हथियार नहीं है और न ही उसके परिवार में या उस पर पहले से कोई केस है। वो मूल रूप से उत्तराखंड का रहने वाला है।

बता दें कि मीडिया के सामने सिंघु सीमा पर किसान नेताओं द्वारा मीडिया के समक्ष पेश किए गए नकाबपोश ने कहा था कि उसे हथियार भी दिए गए और उसकी साजिश थी कि गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर मार्च के दौरान एक व्यक्ति को किसान नेताओं पर गोली चलानी थी और एक को उपद्रव करना था, अगर किसान नहीं रुकते हैं। उसने 10 लोगों की टीम द्वारा गोलीबारी की साजिश की बात करते हुए कहा था कि इसका आरोप किसानों पर मढ़ा जाना था। अब इसके पीछा का राज़ खुला है।

मोदी के बाद योगी को PM के रूप में देखना चाहती है जनता, राहुल गाँधी फिर नकारे गए: सर्वे से खुलासा

नरेंद्र मोदी के बाद देश की जनता प्रधानमंत्री के रूप में किसे देखना चाहती है? ‘इंडिया टुडे’ द्वारा कराए गए सर्वे में पता चला है कि उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके लिए उनकी पहली पसंद हैं। हालाँकि अभी भी ज्यादातर लोगों का यही मानना है कि अगली बार भी पीएम मोदी ही बनें।

3-13 जनवरी, 2021 को किए गए इस सर्वे में लोगों ने कहा है कि वो नरेंद्र मोदी के बाद योगी आदित्यनाथ को अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। 12,232 लोगों में किए गए इस सर्वे में 67% ग्रामीण और 33% शहरी जनसंख्या को शामिल किया गया था।

सर्वे के मुताबिक 38% लोग चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी ही अगले प्रधानमंत्री बनें, वहीं 10% लोग ऐसे भी हैं जो योगी आदित्यनाथ को देश की बागडोर सँभालते हुए देखना चाहते हैं। वहीं 8% लोग केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को प्रधानमंत्री का पद सुशोभित करते हुए देखना पसंद करेंगे। कुल मिला कर लगभग आधी जनता इन तीनों भाजपा नेताओं के पक्ष में फैसला देते हुए दिख रही है, दूसरी पार्टियों के नेताओं के पक्ष में काफी कम लोगों ने राय दी।

लोगों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी में अमित शाह कि धमक बढ़ रही है। 30% लोगों ने कहा है कि वो पार्टी में नरेंद्र मोदी का स्थान ले सकते हैं। यहाँ भी योगी आदित्यनाथ का दबदबा कायम है। 21% लोग मानते हैं कि पार्टी में भी पीएम मोदी का स्थान सीएम योगी ही ले सकते हैं। राहुल गाँधी एक बार फिर से नकार दिए गए हैं, क्योंकि मात्र 7% लोग ही उन्हें बतौर प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं।

3% लोगों ने राजनाथ सिंह के नाम पर मुहर लगाई, वहीं मायावती, अखिलेश यादव, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, नीतीश कुमार और नितिन गडकरी मात्र 2-2% लोगों की ही पसंद बन पाए। इन सबके बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो प्रियंका गाँधी (3%), सोनिया गाँधी (4%), ममता बनर्जी (4%) और अरविंद केजरीवाल (5%) को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। इस सर्वे के बाद सीएम योगी की लोकप्रियता आसमान छूती दिख रही है।

इंडिया टुडे के ‘Mood of the Nation’ सर्वे में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ तीसरी बार देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री चुने गए हैं। ममता बनर्जी इस सर्वे में खिसक कर चौथे पायदान पर आ गई हैं। उनसे ऊपर आँध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगनमोहन रेड्डी और दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं। योगी आदित्यनाथ को इंडिया टुडे के इस सर्वे में 24% वोट मिले हैं। अरविंद केजरीवाल के हिस्से 15% वोट आए। जगनमोहन रेड्डी को 11% और ममता बनर्जी को सिर्फ 9% वोट मिले हैं।

‘नकाब के पीछे योगेंद्र यादव’: किसान नेताओं को ‘शूट करने’ आए नकाबपोश की कहानी में लोचा कई

गणतंत्र दिवस (जनवरी 26, 2021) से पहले दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में एक के बाद एक नए मोड़ सामने आ रहे हैं। किसान नेताओं ने एक नकाबपोश को मीडिया के सामने पेश किया, जिसने दावा किया कि उसे किसान नेताओं को गोली मारने के लिए रुपए मिले थे। किसान नेताओं को ‘शूट करने आए’ नकाबपोश को पुलिस को सौंप दिया गया है। इससे पहले एक किसान नेता ने खुद अपनी गाड़ी की खिड़कियाँ तोड़ कर दिल्ली पुलिस पर आरोप मढ़ दिए थे।

सिंघु सीमा पर किसान नेताओं द्वारा मीडिया के समक्ष पेश किए गए नकाबपोश ने कहा कि उसे हथियार भी दिए गए हैं और उसकी साजिश थी कि गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर मार्च के दौरान एक व्यक्ति को किसान नेताओं पर बन्दूक चलानी थी और एक को उपद्रव करना था, अगर किसान नहीं रुकते हैं। उसने 10 लोगों की टीम द्वारा गोलीबारी की साजिश की बात करते हुए कहा कि इसका आरोप किसानों पर मढ़ा जाना था।

उसने कहा, “स्टेज पर जो 4 लोग होंगे, उन्हें शूट करने की योजना थी। जिसने ये टास्क हमें दिया है, वो हमसे मिलने आता था तो उसका चेहरा कवर्ड रहता था।” उसन दावा किया कि उसे उन किसान नेताओं की तस्वीरें भी दी गई हैं, जिन्हें शूट किया जाना था। फ़िलहाल नकाबपोश को दिल्ली पुलिस ले गई है। लोगों ने इस खबर पर जम कर प्रतिक्रिया दी है। कइयों को इस नकाबपोश की बातों पर भरोसा नहीं है।

एक व्यक्ति ने इसकी तुलना ‘वेलकम’ फिल्म में गैंगस्टर मजनूँ शेट्टी के एक चमचे से की, जो हर बात में ‘मेरी एक टाँग नकली है..’ वाला डायलॉग बोलता था। एक व्यक्ति ने पूछा कि इस तरह के स्क्रिप्ट्स आखिर लिख कौन रहा है? ‘द स्किन डॉक्टर’ ने इसकी तुलना उन नेताओं से की, जिन्होंने गाँधीजी की प्रतिमा के सामने जाकर घड़ियाली आँसू बहाए थे। ‘कह के पहनो’ ट्विटर पेज ने तो यहाँ तक कह दिया कि मास्क में ये योगेंद्र यादव ही है। हालाँकि, ऑपइंडिया इस दावे की पुष्टि नहीं करता।

एक व्यक्ति ने ध्यान दिलाया कि उक्त नकाबपोश बीच में ही अपनी लाइनें भूल जाता है, तो एक किसान नेता उसे याद दिला रहा है। दिलीप पंचोली नामक यूजर ने आरोप लगाया कि ये किसान नेता खुद उपद्रव कर के सारे आरोप दिल्ली पुलिस पर मढ़ना चाहते हैं। कुछ यूजर्स ने उससे ओवर एक्टिंग के 50 रुपए काटने की अपील किसान नेताओं से की। लोगों ने इस वीडियो की ‘स्क्रिप्ट और एक्टिंग’ पर सवाल उठाए।

वहीं किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच 11वें राउंड के बैठक से पहले रुलदू सिंह मनसा ने दावा किया था कि उनकी गाड़ी के शीशे दिल्ली पुलिस ने तोड़ डाले हैं। वहीं इसके बाद एक अन्य वीडियो सामने आया, जिसमें वो खुद ये करतूत करते दिख रहे हैं। इसमें वो किसान नेताओं के बीच खुद हॉकी स्टिक से अपनी गाड़ी तोड़ रहे हैं और आसपास दिल्ली पुलिस का कोई जवान नहीं दिख रहा। पता चला कि दिल्ली पुलिस के रोकने पर उन्होंने खुद ऐसा किया था।

अपनी ही गाड़ी के शीशे तोड़ते किसान नेता

बताते चलें कि केंद्र सरकार और नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे कथित किसान संगठनों के बीच शुक्रवार (22 जनवरी 2021) को 11वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। संगठनों के अड़ियल रवैए को देखते हुए सरकार ने भी अब बातचीत की अगली तारीख नहीं दी है। अपनी ओर से दिए गए प्रस्तावों पर विचार करने को कहा है। ‘किसान’ नेताओं के अड़ियल रवैए से जनसामान्य का जीवन भी प्रभावित होने लगा है। राकेश टिकैत जैसे नेता हर सुरक्षा मानक को नकारते हुए 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली करने पर अड़े हैं

बाल ठाकरे का ‘हिंदुत्व’ साफ, सोनिया-पवार के ‘सेकुलरिज्म’ को उद्धव सलाम: इन 5 मामलों से समझिए

बाल ठाकरे की पहचान क्या थी? उनके रहते शिवसेना को किस तेवर के लिए जाना जाता था? यकीनी तौर, पर हिंदुत्व के मुद्दे पर आक्रामक रुख ही बाल ठाकरे और शिवसेना की पूँजी रही। इसके लिए उन्होंने ‘सेकुलर राजनीति’ के सामने झुकने से इनकार कर दिया। दोस्त होते हुए भी कभी शरद पवार से राजनीतिक तौर पर हाथ नहीं मिलाया।

बाल ठाकरे 1990 में इस्लामी आतंकियों के हाथों नरसंहार का शिकार हुए कश्मीरी पंडितों की मदद करने वाले कुछ लोगों में से एक थे। घाटी में जनवरी 19, 1990 की रात जो हुआ, उसके बाद कश्मीरी पंडित जम्मू और दिल्ली के अलावा, महाराष्ट्र भी पहुँचे।

इनमें वे छात्र भी शामिल थे, जिन्होंने 12वीं की क्लास पूरी कर ली थी, लेकिन अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए उनके पास विकल्प नहीं बचा था। तब बाल ठाकरे ने इंजीनियरिंग कॉलेजों को कश्मीरी पंडित छात्रों के लिए आरक्षित करने और डोनेशन की रकम माफ करने के निर्देश दिए थे।

आज उन्हीं बाल ठाकरे की शिवसेना का अस्तित्व एक ऐसे राजनीतिक दल की मेहरबानी तक सीमित हो चुका है, जिसने आजादी के बाद से लेकर आज तक हिन्दू हितों के प्रत्यक्ष विरोध को सिर्फ समर्थन ही नहीं दिया, बल्कि सेकुलरिज्म के नाम पर हिन्दुओं का हर सम्भव दमन करने की कोशिश भी की।

बाल ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना 1960 के दशक में की थी। यह वो दौर था जब समाजवादी कहे जाने वाले जॉर्ज फर्नांडिस के आह्वान पर मुंबई ठहर जाती थी। बाल ठाकरे ने धीरे-धीरे कर अपने लिए तब ‘मराठा गौरव’ के नाम पर पहचान बनानी शुरू की थी। ठाकरे ने एक प्रखर हिंदूवादी छवि को चुना और इसे लेकर बेहद सजग भी रहे। ठाकरे ने हाथ में रुद्राक्ष रखी और भगवा को ही अपनी विचारधारा का आधार बनाया। लेकिन बाल ठाकरे ने शायद ही कभी सोचा होगा कि उनके बेटे उद्धव के नेतृत्व में उनकी शिवसेना सत्ता सुख के लिए हिंदुत्व वाली पहचान ही कुर्बान कर देगी।

इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण यही था कि भाजपा के खिलाफ जब महाअघाड़ी गठबंधन की तैयारियाँ की जा रहीं थीं, उसी समय कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ तालमेल बैठाते हुए शिवसेना ने कहा कि यह दल विचारधारा के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक उद्देश्यों के लिए होगा।

कॉन्ग्रेस से गठबंधन

निश्चित तौर पर, कॉन्ग्रेस की साथ राजनीतिक समीकरण बनाने के बारे में सोचना ही वह पहला फैसला था, जिसे शायद बाल ठाकरे अपने रहते कभी नहीं लेते। यह कुर्सी के बदले विचारधारा का खुला समझौता था क्योंकि कम से कम पिछले कुछ दशकों में कॉन्ग्रेस और शिवसेना के सम्बन्ध को ‘राजनीतिक अछूत’ तक कहा जाता था।

उग्र हिंदुवादी विचारधारा के लिए जानी जाने वाली शिवसेना सत्तालोभ में भाजपा से अपना क़रीब तीस वर्ष पुराना रिश्ता तोड़कर एनसीपी और कॉन्ग्रेस की गोद में बैठ गई। इस गठबंधन के समय उद्धव ठाकरे का एक बयान भी सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा, “मैंने अमित शाह से कहा कि मैंने अपने पिता से वादा किया था कि महाराष्ट्र में शिवसेना का मुख्यमंत्री बनेगा, या तो आपके साथ या फिर आपके बिना।”

आज हालात यह है कि कॉन्ग्रेस की संतुष्टि के लिए बाल ठाकरे की शिवसेना खुलकर राम मंदिर निर्माण का जश्न तक नहीं मना सकती।

कश्मीर की आजादी का समर्थन

बाल ठाकरे का कश्मीरी हिन्दुओं के लिए जो मत था, वह आज की शिवसेना में नदारद है। इस बात पर शिवसेना ने गत वर्ष जनवरी माह में ही ‘फ्री कश्मीर’ का प्लेकार्ड लहराने वाली महिला का समर्थन कर खुली मुहर लगा डाली थी। इस महिला का बचाव करने के लिए संजय राउत ने कहा था कि केंद्र सरकार ने कश्मीर में कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं और इन प्रतिबंधों से मुक्त कराने के भाव से ही वह पोस्टर लहराया गया था।

पालघर में साधुओं की हत्या

क्या कोई ये सोच भी सकता था कि शिवसेना के कार्यकाल में ही महाराष्ट्र में पुलिस की मौजूदगी में साधुओं की हत्या और वो भी ‘मॉब लिंचिंग’ की जाएगी? लेकिन यह वीभत्स घटना भी इतिहास का हिस्सा बनी जब अप्रैल 2020 को मुंबई से 140 किलोमीटर दूर पालघर जिले में भीड़ ने दो साधुओं और उनके वाहन चालक की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। अब महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने इस मामले में 89 आरोपितों को जमानत दे दी है।

मुस्लिमों को आरक्षण

मुस्लिमों को नौकरी और प्रमोशन में आरक्षण शिवसेना के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार का एजेंडा था। इसके तहत, महाराष्ट्र में 5% मुस्लिम आरक्षण के लिए कानून बनने जा रहा था। दावा किया गया कि उद्धव ठाकरे कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई। लेकिन जब इस फैसले के सामने आने पर शिवसेना के ‘अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’ की नीति सामने आई तो उद्धव ठाकरे ने इस फैसले से पल्ला झाड़ लिया।

हिंदूवादी पत्रकार-एक्टिविस्ट का पीछा

शिवसेना ने द्वेष की भावना से हिंदूवादियों पर अत्याचार को अपनी नई पहचान बना लिया है। साल 2020 तो मानो शिवसेना ने अपनी विचारधारा को यह आकार देने में ही बिता दिया और लगभग वर्षभर यही विवाद अखबारों से लेकर न्यूज़ चैनल्स की मुख्य हेडलाइन रहा। यही नहीं, ट्विटर पर नजर आने वाले हिंदूवादी विचारधारा के आम लोगों, जिनमें समित ठक्कर जैसे कॉमेडियंस का भी नाम शामिल है, जमकर जेल में भरा गया और एक के बाद एक केस चलाए गए।

महाराष्ट्र सरकार अपने सहयोगी, या कहें तो माई-बाप कॉन्ग्रेस की आन-बान-शान को सुरक्षित रखने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। कभी अपराधियों को बचाने के लिए दूसरे राज्यों की पुलिस को रोका गया तो कभी शिवसेना अपराधी मानसिकता और विचारधारा को संरक्षण देती नजर आई।

बात चाहे रिपब्लिक न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की ‘विच हंटिंग’ की हो, या फिर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ कॉन्ग्रेस पोषित ट्विटर ट्रोल्स को संतुष्ट करने के लिए चलाए गए अभियान; शिवसेना ने महिलाओं के अपमान से लेकर हिंदूवादी विचारधारा के खिलाफ जमकर मोर्चा खोले। कंगना रनौत ने तो मुंबई को ‘पाक ऑक्युपाइड कश्मीर’ की संज्ञा भी दे डाली और बदले में प्रतिशोध की भावना से उनके दफ्तर को भी गिरा दिया गया। यह शिवसेना के ‘फ्री स्पीच’ मॉडल का ही एक नमूना था।

यह कोई छुपी हुई बात नहीं है कि इनमें से ज्यादातर फैसले स्पष्ट रूप से अपनी सहयोगी कॉन्ग्रेस और उसकी प्रमुख सोनिया गाँधी के ‘सम्मान’ में लिए गए थे। अर्णब गोस्वामी को निशाना बनाया जाना तभी से शुरू हुआ जब उन्होंने पालघर में साधुओं की मॉब लॉन्चिंग पर ‘एंटोनिया माइनो’ से कुछ सवाल पूछ डाले थे।

हालाँकि, पिछले कुछ दशकों को छोड़ दें तो कॉन्ग्रेस से शिवसेना की करीबी कोई नई बात भी नहीं है। शिवसेना अब गर्व के साथ ‘सोनिया सेना’ का तमगा लेकर घूम रही है, इसमें कम से कम उसका राजनीतिक अस्तित्व तो जिन्दा है।

राजस्थान: बोलेरो पर कॉन्ग्रेस MLA वाजिब अली की फोटो और स्टीकर, गोमांस की 4 बोरियाँ मिली

राजस्थान के भरतपुर से गोमांस तस्करी का मामला सामने आया है। ये घटना सिकरी के बर्रू गाँव में हुई, जहाँ बुधवार (जनवरी 20, 2021) की रात को गोमांस की तस्करी के लिए प्रयोग की जा रही बोलेरो गाड़ी पकड़ी गई। इस गाड़ी पर नगर विधायक वाजिब अली के नाम और उनके चुनावी स्टिकर्स चिपके थे। वाजिब अली कॉन्ग्रेस के विधायक हैं।

राजस्थान पुलिस का कहना है कि विधायक के नाम पर पिछले दो वर्षों से गोमांस की तस्करी की जा रही थी। इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। गाड़ी जिसके नाम पर है, पुलिस ने उसका भी विवरण और पता निकाल लेने का दावा किया है। लेकिन, अब तक पुलिस ने किसी की गिरफ़्तारी नहीं की है। गोमांस से भरी 4 बोरियाँ तब पकड़ी गईं, जब वो बर्रू गाँव से पालकी की तरफ जा रही थी।

रास्ते में गाड़ी एक व्यक्ति के मकान से टकरा गई, जिसके बाद ये खुलासा हुआ। जिसके घर से गाड़ी टकराई थी, उस व्यक्ति का नाम पदम है। जब दुर्घटना की आवाज़ सुन कर वह अपने पड़ोसियों के साथ बाहर निकला तो बोलेरो में सवार आरोपित गोलीबारी करते हुए वहाँ से भाग निकले। इस मामले में रेवती शर्मा के बेटे संजय ने FIR दर्ज कराई है। इसमें हनीफ के बेटे, खुर्शीद के बेटे मुरसलीम और सलीम को नामजद बनाया गया है।

संजय ने अपनी शिकायत में लिखा है कि टक्कर की आवाज़ सुन कर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुँच गए थे। लोगों का कहना है कि इस गाड़ी को उन्होंने इससे पहले भी कई मौकों पर इधर से गुजरते हुए देखा है। गाड़ी के मालिक का नाम साहबदीन है, जो बिलोड का रहने वाला है। साहबदीन ने दावा किया है कि उसने इस गाड़ी को पालकी के मुरसलीम को बेच दी थी। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

राजस्थान के सीकरी में गोमांस तस्करी की घटना

उधर विधायक वाजिब अली ने कहा है कि उक्त बोलेरो गाड़ी से उनका कोई सम्बन्ध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ये उन्हें बदनाम करने के लिए कोई बड़ी साजिश हो सकती है। विधायक ने पुलिस में भी लिखित शिकायत देकर गाड़ी मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। वाजिब अली बसपा के उन 6 विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने पाला बदल कर कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया था। वो राज्य की अल्पसंख्यक समिति के सदस्य भी हैं।

विधायक वाजिब अली का पुलिस को बयान

राजस्थान में पिछले वर्ष भी गोमांस तस्करी और गोहत्या के कई मामले सामने आए थे। जून 2020 में गो तस्करों ने एक गौशाला (गाय-आश्रय) पर हमला कर महंत की पिटाई की थी और तीन गायों को लेकर भाग गए थे। इससे पहले अलवर ज़िले के तिजारा क्षेत्र में, जो मेवात के अंतर्गत आता है, पुलिस ने अरंडका गाँव में निषाद नाम के एक व्यक्ति के घर पर छापा मारा था और गायों का माँस और खाल बरामद की थी।

टीकाकरण अभियान से PM मोदी के मुरीद हुए शाह फैसल, भारत को बताया- जगत गुरु: लोगों ने पूछा- इसका फ्यूज कंडक्टर किसने निकाला?

कोरोना की वैक्सीन देने के मामले में भारत विश्व रिकॉर्ड बनाता हुआ दिख रहा है। शनिवार (जनवरी 16, 2021) को शुरू हुए वृहद और व्यापक टीकाकरण अभियान के 6 दिनों में ही टीका लेने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स की संख्या 10 लाख पार कर गई है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व IAS अधिकारी शाह फैसल भी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुरीद होते दिख रहे हैं और उन्होंने भारत को ‘जगत गुरु’ की संज्ञा दी।

दरअसल, शुक्रवार (जनवरी 22, 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की, जिन्होंने टीकाकरण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इसी वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह फैसल ने लिखा कि ये सिर्फ एक टीकाकरण अभियान ही नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा है। लोग उनके इस बदले रवैये से हैरान दिखे।

शाह फैसल ने आगे लिखा, “ये सुशासन, मानव संसाधन का संगठन, राष्ट्र निर्माण और भारत के जगत गुरु के रूप में वैश्विक नेता के रूप में सामने आने- इन सबका गठजोड़ है।” वहीं कुछ मुस्लिमों ने उनके इस बयान पर उन्हें गालियाँ भी दी। मोहम्मद आसिफ खान ने शाह फैसल को ‘सावरकर से भी बड़ा चमचा और जूते चाटने वाला’ बता दिया। वहीं कुछ अन्य लोगों ने पूछा कि शाह फैसल का फ्यूज कंडक्टर किसने निकाल दिया?

वहीं कुछ लोग शेहला रशीद को भी टैग कर के पूछते नज़र आए कि शाह फैसल को क्या हुआ है? कुछ लोगों ने लिखा कि ये तो अंदर से संघी निकला। वहीं जम्मू-कश्मीर के कुछ मुस्लिमों ने उन पर धोखाधड़ी का आरोप मढ़ा। एक यूजर ने पूछा कि क्या उनकी तबीयत ठीक है? इरफ़ान नाम के यूजर ने लिखा कि उनके ट्विटर हैंडल के साथ-साथ दिमाग भी हैक हो चुका है। एक ने पूछा कि क्या उन्होंने ‘नागपुर वाली वैक्सीन’ ले ली है?

शाह फैसल को जून 2020 में 9 महीने की हिरासत के बाद रिहा किया गया था। वो दिल्ली एयरपोर्ट पर तुर्की भागते हुए पकड़े गए थे। वो तुर्की जाकर वहाँ अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के मोदी सरकार के फैसले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना चाहते थे। शाह फैसल ने राजनीतिक पार्टी भी बनाई थी, जिसमें शेहला रशीद सरीखे लोग शामिल हुए थे। हालाँकि, ये राजनीतिक पार्टी चल नहीं सकी और फुस्स हो गई।

भारत में अब तक 13 लाख लोगों को कोरोना के टीके दिए जा चुके हैं। इससे पहले अमेरिका में 10 दिनों में 10 लाख का आँकड़ा पार हुआ था। इस हिसाब से ये दुनिया का सबसे तेज़ कोरोना टीकाकरण अभियान है। यूके में तो एक सप्ताह में मात्र 1.3 लाख को ही वैक्सीन दिए गए थे। पूरी दुनिया में 5.7 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। इजरायल ने अपने देश में 38% लोगों का टीकाकरण कर दिया है।

अगस्त 2020 में शाह फैसल ने कहा था कि जम्मू कश्मीर की राजनीतिक वास्तविकता अब पूरी तरह बदल गई है और वो राज्य के लोगों को कल्पनायुक्त और अव्यावहारिक सपने नहीं दिखाना चाहते। उन्होंने कहा था कि उनके बारे में एक धारणा बना दी गई है कि वे देशद्रोही हैं। पूर्व IAS अधिकारी ने कहा था कि पिछले कुछ सालों में उनके समस्यात्मक बयानों के कारण उनके देशविरोधी होने की बात कही गई।

पवन पुत्र की तस्वीर साझा कर ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत को कहा Thank You, बोले- हम सम्मानित महसूस कर रहे

कोरोना वैक्सीन देने के लिए आज (जनवरी 22, 2021) ब्राजील के राष्ट्रपति जैर बोलसोनारो ( Jair Bolsonaro) ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। अपने संदेश में उन्होंने भगवान पवन पुत्र हनुमान की तस्वीर साझा कर दर्शाया कि हनुमान जी स्वयं पहाड़ और वैक्सीन लेकर भारत से ब्राजील जा रहे हैं।

जैर बोलसनारो ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, “नमस्कार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। वैश्विक बाधा को दूर करने के प्रयासों में भारत के एक महान भागीदार होने के लिए ब्राजील आज खुद को बेहद सम्मानित महसूस कर रहा है। ब्राजील को कोविड वैक्‍सीन के रूप में मदद करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।”

बोलसोनारो का यह संदेश रामायण की उस कथा से प्रेरित है जहाँ भगवान राम के भाई लक्ष्मण युद्ध के दौरान घायल हो जाते हैं और उन्हें बचाने के लिए हनुमान जी संजीवनी बूटी सहित पूरा गंधमर्धन (गंधमादन) पर्वत एक रात में वहाँ लेकर आ जाते हैं। इसी संजीवनी बूटी से फिर मूर्छित लक्ष्मण होश में आते हैं।

ब्राजील राष्ट्रपति द्वारा साझा तस्वीर में हम Obrigado लिखा देख रहे हैं, पुर्तगाली में इसका अर्थ आभार होता है।

बता दें कि विश्वव्यापी महामारी के समय में भारत अपने दूसरे देशों को भी मदद मुहैया करवा रहा है। इसी कड़ी में ब्राजील ने भारत से वैक्सीन की मदद माँगी थी और डिलीवरी के लिए एक प्लेन भेजने का ऑफर रखा था।

पिछले कुछ दिनों की बात करें तो भारत कोरोना वैक्सीन की डेढ़ लाख डोज भूटान को भेज चुका है। इसी प्रकार मालदीव में 1 लाख डोज, बांग्लादेश में 20 लाख, म्यांमार में 15 लाख, नेपाल में 10 लाख, सेशल्स को 50हजार और मॉरीशस को 1 लाख डोज़ पहुँचाई गई है। इसके अलावा खबर यह भी है कि सीरम इंस्टीट्यूट कोविशिल्ड वैक्सीन को ब्राजील और मोरक्को को भेजेगा। दक्षिण अफ्रीका और सऊदी अरब को भी आने वाले दिनों में खेप भेजी जाएगी।