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किसानों के समर्थन में कॉन्ग्रेस का राजभवन मार्च: दिग्विजय समेत 20 नेता गिरफ्तार, उत्तराखंड में भी हाथापाई पर उतरे कॉन्ग्रेसी

ऐतिहासिक कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी तथाकथित किसानों द्वारा जारी आंदोलन को ‘जन आंदोलन’ में बदलने के लिए अपना कदम बढ़ाया है। शनिवार (जनवरी 23, 2021) को मध्य प्रदेश के भोपाल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों के समर्थन में जवाहर चौक से राजभवन तक मार्च का आयोजन किया था।

जुलूस के दौरान, पार्टी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए, झंडे लहराए और सड़क पर जाम लगा दिया। सामने आए वीडियो में प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट रूप से दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए देखा जा सकता है। जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए, भोपाल पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री जयवर्द्धन सिंह और विधायक कुणाल चौधरी समेत 20 कॉन्ग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। 

इधर, उत्तराखंड के देहरादून में भी कृषि विरोधी प्रदर्शनकारियों ने राजभवन पहुँचने के लिए पुलिस बैरिकेट्स तोड़ने की कोशिश की। जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारियों के साथ हाथापाई पर उतर गए।

किसान संयुक्त मोर्चा के तहत गाँधी पार्क से राजभवन कूच कर रहे सीटू के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हाथीबड़कला बैरिकेटिंग पर रोक लिया। वहीं किसान प्रदर्शनकारी हर्रावाला में बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें आईआईपी मोहकमपुर के पास रोका हुआ है। आशारोड़ी और सेलाकुई आदि स्थानों पर भी किसान प्रदर्शनकारी जमा थे। किसान आंदोलन की वजह से लगाए गए बैरिकेडिंग की वजह से आशारोड़ी चेक पोस्ट पर बहुत पहले से लंबा जाम लग गया।

केंद्रीय कृषि कानून के खिलाफ राजभवन कूच कर रहे किसानों ने प्रदर्शन करते हुए ट्रैक्टर रैली निकाली। भानियावाला लच्छीवाला ओवरब्रिज से होते हुए टोल बैरियर पहुँची ट्रैक्टर रैली को पुलिस ने रोक लिया। इस बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

इससे पहले, कॉन्ग्रेस नेता और सांसद रवनीत बिट्टू सिंह ने तथाकथित ‘किसान विरोध’ की प्रकृति को बदलने को लेकर हिंसा की खुली धमकी दी थी। न्यूज नेशन से बात करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा, “वे (सरकार) सोचते हैं कि हम कुछ समय बाद थक जाएँगे और धरने पर बैठ जाएँगे। लेकिन नहीं! हम लाशों का ढेर लगा देंगे। हम खून बहाएँगे और अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।”

कॉन्ग्रेस प्रायोजित हिंसा की संभावना पर इशारा करते हुए, रवनीत बिट्टू सिंह ने कहा, “हम एक नई योजना के साथ आ रहे हैं और आप इसे 1 जनवरी के बाद एक्शन में देखेंगे।” यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि भाजपा ने पहले कॉन्ग्रेस पर किसानों को गुमराह करने और ऐतिहासिक कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों को उकसाने का आरोप लगाया था।

जय श्री राम के उद्घोष से भड़कीं ममता बनर्जी, PM मोदी से कहा- बुलाकर बेइज्जती करना ठीक नहीं

ममता बनर्जी ने पराक्रम दिवस समारोह को संबोधित करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि किसी को बुलाकर उसका अपमान करना ठीक नहीं। दरअसल, जैसे ही ममता बनर्जी मंच पर भाषण देने पहुँचीं बीजेपी कार्यकर्ता तुरंत जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाने लगे, जिससे वो खफा हो गईं।

बता दें, पश्चिम बंगाल में नेताजी की 125वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में विक्टोरिया मेमोरियल में पराक्रम दिवस का समारोह चल रहा था। इस मौके पर राज्य की सीएम ममता बनर्जी भी पहुँची थी। वहीं जब ममता बनर्जी मंच पर लोगों को संबोधित करने पहुँची, वैसे ही पूरा कार्यक्रम स्थल जय श्री राम और भारत माता की जय के नारों से गूँजने लगा।

गौरतलब है इस दौरान मंच पर पीएम मोदी भी उपस्थित थे, जब बीजेपी कार्यकर्ता एक तरफ जय श्री राम तो दूसरी तरफ भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। जिसको सुनते ही टीएमसी पार्टी की सुप्रीमो बौखला गई और भाषण देने से मना कर दिया। यहीं नहीं उन्होंने तो इस कार्यक्रम को राजनीतिक कार्यक्रम तक करार दे दिया।

अपनी बौखलाहट भाजपा पर निकालते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “सरकार के कार्यक्रम की गरिमा होनी चाहिए। यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है। आपको किसी को आमंत्रित करने के बाद उसकी बेइज्‍जती करना शोभा नहीं देता है। विरोध के रूप में मैं कुछ भी नहीं बोलूँगी।” इसके बाद वह जय हिंद-जय बांग्‍ला बोलकर तुरंत मंच से नीचे उतर गईं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी एक बार पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के काफिले के सामने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने की वजह से तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। दरअसल, ममता बनर्जी 4 मई, 2019 को पश्चिम बंगाल के चंद्रकोण की आरामबाग सीट पर चुनाव प्रचार के लिए एक रैली करने जा रही थीं। इस दौरान जब ममता बनर्जी का काफिला चंद्रकोण के करीब पहुँंचा तो कुछ लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने लगे थे। जिसे सुनकर ममता भड़क गई थी और काफिले को वहीं पर रुकवाकर गाड़ी से उतरी और उन लोगों पर बरस पड़ी थी।

ये पल भावुक करने वाला, नेताजी के नाम से मिलती है नई ऊर्जा: जानिए PM मोदी ने ‘पराक्रम दिवस’ पर क्या कहा

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गर्मी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ममता बनर्जी भी ‘पराक्रम दिवस’ समारोह में शामिल हुईं। साथ ही बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी वहाँ पहुँचे। ममता और पीएम मोदी विक्टोरिया मेमोरियल पहुँचे। विक्टोरिया मेमोरियल में मंच पर आने के बाद जोरदार नारेबाजी से सीएम ममता बनर्जी नाराज हो गईं। उन्होंने भाषण देने से इनकार कर दिया। सीएम ममता ने कहा कि बुलाकर अपमान करना ठीक नहीं। साथ ही पीएम मोदी ने नेताजी की स्मृति में डाक टिकट जारी किया।

कोलकाता में आना मेरे लिए बहुत भावुक कर देने वाला क्षण

पराक्रम दिवस पर संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज कोलकाता में आना मेरे लिए बहुत भावुक कर देने वाला क्षण है। बचपन से जब भी ये नाम सुना- नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मैं किसी भी परिस्थिति में रहा हूँ, ये नाम कान में पड़ते ही मैं एक नई ऊर्जा से भर गया। इतना विराट व्यक्तित्व है उनका।

नेताजी ने आजाद भारत के सपने को नई दिशा दी थी

पीएम मोदी ने कहा कि आज के ही दिन माँ भारती की गोद में उस वीर सपूत ने जन्म लिया था, जिसने आजाद भारत के सपने को नई दिशा दी थी। आज के ही दिन ग़ुलामी के अंधेरे में वो चेतना फूटी थी, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी सत्ता के सामने खड़े होकर कहा था, “मैं तुमसे आजादी माँगूँगा नहीं, छीन लूँगा।”

नेताजी को नमन

उन्होंने कहा, “मैं नेता जी की 125वीं जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उन्हें नमन करता हूँ। मैं आज बालक सुभाष को नेताजी बनाने वाली, उनके जीवन को तप, त्याग और तितिक्षा से गढ़ने वाली बंगाल की इस पुण्यभूमि को भी नमन करता हूँ।”

नेताजी के योगदान को पीढ़ी दर पीढ़ी याद किया जाए

पीएम मोदी ने कहा कि आज जब भारत नेताजी की प्रेरणा से आगे बढ़ रहा है तो हम सभी का कर्तव्य है कि उनके योगदान को पीढ़ी दर पीढ़ी याद किया जाए। इसलिए देश ने ये तय किया है कि अब हर वर्ष हम नेताजी की जयंती, यानी 23 जनवरी को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया करेंगे।

पीएम ने कहा, “ये मेरा सौभाग्य है कि 2018 में हमने अंडमान के द्वीप का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखा। देश की भावना को समझते हुए, नेताजी से जुड़ी फाइलें भी हमारी ही सरकार ने सार्वजनिक कीं। ये हमारी ही सरकार का सौभाग्य रहा जो 26 जनवरी की परेड के दौरान INA Veterans परेड में शामिल हुए। आज हर भारतीय अपने दिल पर हाथ रखे, नेताजी सुभाष को महसूस करे, तो उसे फिर ये सवाल सुनाई देगा: क्या मेरा एक काम कर सकते हो? ये काम, ये काज, ये लक्ष्य आज भारत को आत्मनिर्भर बनाने का है। देश का जन-जन, देश का हर क्षेत्र, देश का हर व्यक्ति इससे जुड़ा है।”

नेताजी का जीवन हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा

पीएम मोदी ने कहा कि आज जब इस वर्ष देश अपनी आजादी के 75 वर्ष में प्रवेश करने वाला है, जब देश आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब नेताजी का जीवन, उनका हर कार्य, उनका हर फैसला, हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।

‘पराक्रम दिवस’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “नेताजी ने संकल्प किया था भारत की जमीन पर आजाद भारत की आजाद सरकार की नींव रखेंगे। नेताजी ने अपना ये वादा भी पूरा करके दिखाया। उन्होंने अंडमान में अपने सैनिकों के साथ आकर तिरंगा फहराया।” उन्होंने कहा कि उनके जैसे फौलादी इरादों वाले व्यक्तित्व के लिए असंभव कुछ नहीं था। उन्होंने विदेश में जाकर देश से बाहर रहने वाले भारतीयों की चेतना को झकझोरा। उन्होंने पूरे देश से हर जाति, पंथ, हर क्षेत्र के लोगों को देश का सैनिक बनाया।

पुलिस को बदनाम करने के लिए रची गई थी साजिश, किसान नेताओं ने दी थी हत्या की धमकी: योगेश सिंह का खुलासा

दिल्ली की सिंघु सीमा पर केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है। इसी बीच शुक्रवार (जनवरी 22, 2021) को किसान नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एक नकाबपोश को सामने किया, जिसने दावा किया कि उसे 4 किसान नेताओं को शूट करके आंदोलन में उपद्रव पैदा करने के लिए रुपए दिए गए थे। उसका नाम योगेश सिंह है। अब खुलासा हुआ है कि उससे ये सब जबरदस्ती कहवाया गया था।

बेरोजगार योगेश के पिता जहाँ कूक हैं, उसकी माँ लोगों के घरों में बर्तन माँज कर गुजारा करती हैं। उसकी बहन पढ़ाई करती हैं। उसने खुलासा किया है कि दिल्ली पुलिस को बदनाम करने के लिए उससे ये सब कहवाया गया था। उससे पहले उसे जम कर प्रताड़ित किया गया था। उसने खुलासा किया है कि ऐसा न करने पर उसकी हत्या तक की भी धमकी दी गई थी। उसने बताया कि उसका नाम योगेश है और वो सोनीपत का रहने वाला है।

उसने बताया कि वो जनवरी 19 को पानीपत से जा रहा था, तभी उसने कुछ किसान प्रदर्शनकारियों को नरेला में देखा। उसने देखा कि कुछ लोग कुछ महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे। योगेश ने बताया कि जब उसने किसान प्रदर्शनकारियों को उन लोगों की करतूतों के बारे में बताया, तो उन्होंने उसे ही उनमें से एक समझ कर पकड़ लिया। इसके बाद उसकी पिटाई की गई। ट्रॉली से उलटा लटका कर उसे मारा गया।

इसके अगले दिन उन किसान नेताओं ने योगेश से कहा कि उसे वही सब कुछ करना होगा, जो कहा जाएगा। साथ ही उन्होंने उसे बुरी तरह धमकाया कि अगर उसने उनका कहा नहीं माना तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। योगेश का कहना है कि उसके साथ 4 अन्य लड़के भी थे, जिन्हें किसान प्रदर्शनकारियों ने पकड़ा था। उनमें से एक का नाम सागर है। 19 तारीख की रात को किसान नेताओं ने योगेश को भोजन और शराब दी।

उसे जबरन शराब पिलाया गया। पुलिस से योगेश ने कहा कि वो किसी प्रकार के नशे का आदी नहीं है। इसके अगले दिन किसान नेताओं ने उसे बुरी तरह पीटा और हत्या की धमकी दी। उन नेताओं ने यहाँ तक दावा किया कि उसके साथ पकड़ाए अन्य लड़कों की हत्या कर दी गई है। हत्या के डर से योगेश उनका कहा मानने को राजी हो गया। जब योगेश सिंह ने पुलिस से संपर्क करना चाहा तो किसान नेताओं ने कहा कि वो उसकी ऐसी हत्या करेंगे कि उसकी लाश मिलनी भी मुश्किल हो जाएगी।

एक व्यक्ति के साथ किसान प्रदर्शनकारियों को मारपीट करते हुए उसने भी देखा था। उसने बताया कि उनमें से एक अधमरा हो गया था, जिसके बाद उसे कहाँ ले जाया गया उसे भी नहीं पता। किसानों ने उसे धमकाया कि उसने मीडिया के सामने कहना होगा कि उसे गणतंत्र दिवस के दिन आयोजित ट्रैक्टर रैली में उपद्रव के लिए और 4 किसान नेताओं को शूट करने के लिए आया था। उसे ये भी कहना था कि ये सब हरियाणा पुलिस की साजिश है।

योगेश सिंह का खुलासा

उसे कहना था कि राई पुलिस थाने के एक प्रदीप नाम के अधिकारी ने उसे ये सब करने को कहा था। इसके बाद उसे मीडिया के सामने आकर ये सब कहना पड़ा। किसान नेताओं ने उसे कहा था कि अगर वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस को इस तरह बदनाम कर देगा तो उसे छोड़ दिया जाएगा। इसी क्रम में शुक्रवार को योगेश सिंह मीडिया के सामने आया और उसने किसान नेताओं का कहा हूबहू दोहरा दिया।

उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसने ये भी कहा कि उसके साथ 10 और लोगों को भी तैयार रखा गया है, जो पुलिस की वर्दी में होंगे और आंदोलन में उपद्रव होते ही उन्हें प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करना था। उसने दावा किया कि दो जगहों पर उसकी टीम को हथियार भी दिए गए थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई किसान नेता मौजूद थे और राकेश टिकट उसके बगल में ही बैठे थे। उसने ये भी दावा किया था कि उसे 4 किसान नेताओं की तस्वीरें भी दी गई थीं, जिन्हें उसे शूट करना था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वो अपनी लाइनें बोलना भी भूल गया था। उसे किसान नेता एकाध शब्द बोल कर ये सब याद दिला रहे थे आखिर बोलना क्या है। फिर उसने कहा कि उसे व उसके साथियों को दो टीमों में बाँट दिया गया था और प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के निर्देश दिए गए थे। इस दौरान राकेश टिकैत उसे उसकी लाइनें याद दिलाते रहे। उसने मीडिया से कहा था, “हमें पहले किसानों को चेताना था। अगर वो नहीं माने तो उनके घुटनों में गोली मारनी थी।”

उसने आगे कहा था, “इसके बाद हमारी टीम के 10 लोगों को ताबड़तोड़ गोलीबारी करनी थी, जिससे ऐसा प्रतीत हो कि ये सब कुछ किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा किया जा रहा है। हम ये सब कुछ रुपए के लिए कर रहे थे और पुलिस अधिकारियों ने हम में से प्रत्येक को 10-10 हजार रुपए देने का वादा किया था। इसके बाद बूट, पगड़ी और रिब्ड जीन्स में पुलिस वर्दी में कुछ लोग आते और वो लाठीचार्ज करते।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसने कहा था कि उससे हथियारों पर नजर रखने का काम दिया गया था। साथ ही उसने दावा किया था कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की एक रैली के दौरान भी उसने लाठीचार्ज किया था। उसने विभिन्न होटलों और ढाबों में ले जाकर प्रशिक्षण दिए जाने की बात भी कही थी और दावा किया था कि वो और उसके साथी हत्यारे नहीं हैं लेकिन रुपए कमाने के लिए वो इस तरह के काम किया करते थे।

सबसे रोचक बात ये है कि किसान प्रर्दशनकारी नहीं चाहते थे कि नकाबपोश योगेश सिंह को पुलिस को सौंपा जाए। उन्होंने पुलिस से कहा भी था कि वो योगेश के साथ सख्ती से पेश नहीं आए। क्या उन्हें अपनी पोल खुलने का डर था? वो वीडियो भी वायरल हो गया है, जिसमें देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी उसे पुलिस को नहीं सौंपना चाहते हैं। लेकिन, पुलिस उसे थाने लेकर गई और वहाँ सारा राज़ खुल गया।

किसान नेताओं ने अपने दावे को विश्वसनीय बनाने के लिए योगेश सिंह के फोन में उन चार ‘किसान’ नेताओं की तस्वीरें भी डाली, जिन्हें मारने की ‘नकाबपोश शूटर’ ने साजिश रची थी। हरियाणा पुलिस ने उसके मोबाइल फोन से चार किसान नेताओं – बलबीर सिंह राजेवाल, बलदेव सिंह सिरसा, कुलदीप संधू और जगजीत सिंह की तस्वीरें बरामद की हैं। ये तस्वीरें ‘किसान नेताओं’ द्वारा डाली गई थी, जिन्होंने उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान झूठ बोलने की धमकी दी और प्रताड़ित किया।  

‘खुले विचारों की हूँ मैं, गृहिणियाँ पसंद के पुरुषों के साथ रख सकती है एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर’: ममता बनर्जी का वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी का एक पुराना वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने खुले विचारों वाली मानसिकता का प्रदर्शन कर रही हैं। वायरल हो रहे वीडियो में टीएमसी सुप्रीमो का कहना है कि उनके विचार इतने खुले है कि उन्होंने गृहिणियों को अपनी पसंद के पुरुषों के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर रखने की अनुमति दे दी है।

बंगाली भाषा में बोलते हुए पश्चिम बंगाल की CM ने कहा, “मैं सभी गृहिणियों को यह बताना चाहती हूँ कि, यदि आप कभी भी एक्स्ट्रा-मैरिटल संबंध में रहना चाहती हैं, तो आप यह कर सकती हैं। इसके लिए मैं आपको अनुमति दूँगी।”

यह वीडियो ट्विटर पर कल से वायरल हो रही है, हालाँकि मूल रूप से इसे ट्विटर यूजर DebashishHiTs द्वारा 17 मई, 2019 को साझा किया गया था। जिसमें ममता बनर्जी यह टिप्पणी करते हुए दिखाई दे रही है।

हालाँकि, हम इस बात से हैरान है कि आखिर क्यों ममता बनर्जी को इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी करने की जरूरत पड़ गई। बता दें कि यह टिप्पणी 2018 में कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में हुए एक केबल ऑपरेटर्स की बैठक में उनके द्वारा दिया गया था। जोकि असल मे उनके विचारों से बिल्कुल विपरीत है।

दरअसल, ममता बनर्जी टीवी धारावाहिकों के मौजूदा चलन से काफी परेशान थी। जिसको लेकर पश्चिम बंगाल सीएम ने बंगाली टीवी धारावाहिक निर्माताओं को टीवी पर “एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर” जैसे “आपत्तिजनक” कंटेंट दिखाने के लिए उनकी कड़ी निंदा की थी। सीएम का मानना था कि ऐसे उदाहरण समाज में खासकर युवा पीढ़ी पर गलत मिसाल कायम करेंगे।

सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “मैं टीवी धारावाहिकों को देखती हूँ और आजकल मैं बंगाली टीवी शो के एक हिस्से को नोटिस कर रही हूँ, जो हमारे सिद्धांतों को नकारात्मक तौर पर चित्रित कर रहे हैं। टीवी सीरियलों में एक ऐसे व्यक्ति को दिखाया गया है जो अपने पिता की पहचान के बारे में नहीं जानता है। वहीं टीवी सीरियल में एक और ट्रेंड है जहाँ एक आदमी की कई पत्नियाँ हैं, जो टीवी धारावाहिकों में देखी जाने वाली एक और प्रवृत्ति है।”

उन्होंने कहा कि वह बंगाली टीवी धारावाहिक निर्माताओं से ऐसी नकारात्मकता से बचने और कुछ ऐसा दिखाने का आग्रह करती है जो सभी को प्रेरित करे।

मुनव्वर फारूकी ने कोई ‘जोक क्रैक’ नहीं किया तो जैनब सच-सच बतलाना कमलेश तिवारी क्यों रेता गया

इस्लामपरस्त लिबरल ज़ैनब सिकंदर सिद्दीकी चर्चा में हैं और ट्विटर पर #KamleshTiwari ट्रेंड कर रहा है। स्वघोषित स्तंभकार (columnist) और पोएट्री जंकी (कविता से लगाव रखने वाली) ज़ैनब वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द प्रिंट’ के लिए भी लिखने का पूरा प्रयास करती हैं। फ़िलहाल अपने एक ट्वीट की वजह से चर्चा में हैं। ट्वीट में उन्होंने कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी का ज़िक्र किया है। 

लिबरल गैंग की प्राथमिक सदस्यों में एक जैनब ने ट्वीट में मिथ्या प्रचार करते हुए लिखा है, “मुनव्वर फारूकी अभी तक जेल में बंद है। एक ऐसे जोक (चुटकुले) के लिए जो उसने ओपन माइक में सुनाया ही नहीं।” लिबरल गैंग की सदस्यता का सबसे बड़ा पैमाना यही है, खुद को ‘अल्ट्रा इंटेलेक्चुअल’ दिखाने के लिए हिन्दू शब्द के इर्द-गिर्द पूरी निर्लज्जता से नफ़रत उगलनी पड़ती है। जब नफ़रत उगली जा चुकी हो तो उसकी वकालत में उतरना पड़ता है।

कुछ ऐसा ही किया था तथाकथित स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने। वह इंदौर में कॉमेडी के नाम पर नाबालिगों के सामने अश्लीलता परोस रहा था। हिन्दू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी कर रहा था, ऐसी टिप्पणी जो दूसरे मज़हब पर की जाएँ तो सिर तन से जुदा कर दिया जाता है और इसके कितने उदाहरण हैं, उनकी कोई गिनती नहीं।  

फिर भी ज़ैनब के मुताबिक़ मुनव्वर फारूकी ने कोई ‘जोक क्रैक’ नहीं किया। ज़ैनब सरीखे लिबरल इस्लामपरस्तों के मुताबिक़ मुनव्वर ने तो सीता-राम के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी नहीं किया और न ही मृत कारसेवकों के लिए ज़हर उगला। जिन ‘उन्मादी चुटकुलों’ से आम जनता की दूरी महज़ एक क्लिक है, ज़ैनब जैसे लिबरपंथियों के मुताबिक़ मुनव्वर ने वह चुटकुले कहे ही नहीं। 

शायद इसलिए इंटरनेट की जनता ने ज़ैनब सिकंदर सिद्दीकी को एक नाम याद दिलाया, कमलेश तिवारी। ऐसा नाम जो इस बात की नज़ीर है कि ‘शांतिप्रिय मज़हब की आस्था’ पर किसी भी तरह की टिप्पणी कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। शांतिप्रिय मज़हब पर की गई टिप्पणी के बदले कमलेश तिवारी का गला रेत दिया गया

हिंदूफोबिक मुनव्वर के ‘पीड़ित मुसलमान’ होने वाली प्रोपेगेंडा को हवा देने वाली जैनब अकेली नहीं हैं। इस फेहरिस्त में पत्रकारिता के चोले में इस्लामी एजेंडे को बढ़ाने वाली आरफा खानम शेरवानी से लेकर नबा सकवी तथा लिबरल रोहिणी सिंह तक के नाम शामिल हैं।

तभी नेटिज़न्स ने ज़ैनब से पूछा कि कोई बता सकता है ‘कमलेश तिवारी का अपराध क्या था?’

नेटिज़न्स ने लिबरल्स को याद दिलाया कि सिर्फ ‘टिप्पणी’ के चलते ही एक व्यक्ति आज इस ग्रह पर नहीं है।

कितनी विचित्र विडंबना है, धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं और उनका विरोध होता है तो साम्प्रदायिकता! लेकिन मज़हबी जज़्बात आहत होते हैं तो…। दोनों घटनाओं की स्वभाव में कितना फासला है, कमलेश तिवारी की टिप्पणी का नतीजा और मुनव्वर फारूकी की टिप्पणी का नतीजा

भ्रम में रहने वाले आबादी को दुनिया के उदाहरणों पर गौर करना चाहिए। चाहे कार्टून दिखाने के बाद कट्टरपंथी इस्लामियों द्वारा शिक्षक (सैमुएल पैटी) का गला रेतने की घटना हो या शार्ली हेब्दो कार्यालय पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी। ‘इतनी ज़्यादा सहिष्णुता’ पूरी दुनिया शायद मिल कर भी हज़म नहीं कर पाए। आखिर समस्याओं का इतना सरल हल किस मजहब में मिलता होगा? एक टिप्पणी और सिर का शरीर से रिश्ता खत्म।   

भाई की हत्या के बाद पाकिस्तान के पहले सिख एंकर को जेल से कातिल दे रहा धमकी: देश छोड़ने को मजबूर

पाकिस्तान के पहले सिख टेलीविजन एंकर हरमीत सिंह अपने छोटे भाई रविंद्र सिंह के हत्यारों द्वारा कथित तौर पर धमकी मिलने के बाद देश छोड़ने का विचार बना रहे हैं।

बता दें, पिछले साल जनवरी 2020 में हरमीत सिंह के भाई रविन्द्र सिंह की पेशावर में गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जिस वक्त वह अपनी शादी की खरीदारी करने गए थे। उनकी हत्या उसी की मंगेतर का ब्वॉयफ्रेंड एजाज और एक दूसरे शख्स इब्राहिम ने की थी। जिसके बाद पुलिस को उसका शव खैबर एजेंसी की चौकी चमकिनी पुलिस स्टेशन के पास मिला।

खबरों के मुताबिक, हरमीत सिंह का आरोप है कि उसे जेल से धमकी भरे फोन आ रहे हैं, जिसमें उसके भाई की हत्या के एक आरोपित बंद है। पुलिस की निष्क्रियता के साथ मिल रहे धमकी कॉल ने सिंह को किसी अन्य देश में जाने के लिए मजबूर कर दिया है।

हरमीत ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “ऐसी सूरत में मेरे पास पाकिस्तान छोड़ने के सिवाए और कोई दूसरा विकल्प नहीं है। वह मुझे और मेरे परिवार को धमकी दे रहा है। यदि पुलिस हत्या के आरोपित एजाज और इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती है तो आखिर वो और क्या कर सकते हैं।” सिंह ने कथित तौर पर कहा कि भारत में रहना उनके लिए कोई विकल्प नहीं है और वह किसी अन्य देश पर विचार करेंगे।

हरमीत सिंह के छोटे भाई रविन्द्र सिंह (कुछ रिपोर्ट्स में उनका नाम परविन्दर सिंह और परविंदर सिंह का भी उल्लेख है) को उनकी मंगेतर प्रेम कुमारी के बॉयफ्रेंड एजाज़ और एक अन्य व्यक्ति इब्राहिम ने मार डाला था। इस केस में प्रेम कुमारी और एजाज जमानत पर बाहर हैं जबकि दूसरा शख्स इब्राहिम अभी भी पेशावर जेल में सलाखों के पीछे है।

हरमीत सिंह ने कहा कि पेशावर जेल में बंद मोहम्मद इब्राहिम ने सरकारी नंबर के जरिए उन्हें और उनके परिवार को कॉल करके धमकी दे रहा है। हरमीत सिंह का आरोप है कि आरोपित इब्राहिम उन्हें उनके भाई के मामले में सुलह करने के लिए दबाव बना रहा है और नहीं मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा है। सिंह ने कहा कि वह यह देखकर हैरान रह गए कि इब्राहिम ने धमकी देने के लिए सरकारी नंबर का इस्तेमाल किया था।

हरमीत सिंह ने आशंका जताई है कि अल्पसंख्यक समुदाय से होने के कारण वह अपने भाई के मामले को आगे नहीं बढ़ा पाएँगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं क्योंकि आरोपित बहुसंख्यक समुदाय से हैं।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उसकी तहरीर पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान खान और मुख्य न्यायाधीश से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को आए दिन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। वहीं इस मामले में वहाँ के अधिकारी भी उनकी किसी भी प्रकार से मदद नहीं करते हैं। अल्पसंख्यक समुदायों की लगभग हर दिन लड़कियों के अपहरण और इस्लाम में परिवर्तित होने की खबरें आती रहती हैं। यहीं नहीं पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थल भी सुरक्षित नहीं हैं। हर दूसरे दिन वहाँ मंदिर, चर्च या गुरुद्वारे पर हमला किया जाता है।

‘किसान’ नेताओं के मर्डर की कहानी को दमदार बनाने के लिए ‘नकाबपोश’ योगेश के मोबाइल में डाली 4 तस्वीरें

किसान नेताओं ने शुक्रवार रात (22 जनवरी 2021) एक नकाबपोश को शूटर बताते हुए मीडिया के सामने पेश किया था। दावा किया गया था 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान चार किसान नेताओं की हत्या की साजिश का वह हिस्सा था। ‘नकाबपोश’ योगेश सिंह ने शनिवार को चौंकाने वाले खु​लासे करते हुए बताया कि किसान नेताओं ने उसे प्रताड़ित कर पुलिस पर दोषारोपण करने को मजबूर किया था।

योगेश सिंह ने खुलासा करते हुए कहा कि किसानों ने उसका अपहरण कर लिया था और हरियाणा पुलिस को फँसाने के लिए कथित किसान नेताओं ने उसे झूठ बोलने के लिए मजबूर किया था।

शुक्रवार को हरियाणा पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए योगेश सिंह ने आज पुलिस के सामने स्वीकार कर लिया कि उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों पर कथित हमले के बारे में झूठ बोला था। सोनीपत के 19 वर्षीय निवासी ने कहा कि ‘किसान’ नेताओं ने उसे चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने हमलों की झूठी साजिश की बात नहीं कही और इसके लिए हरियाणा पुलिस को दोषी नहीं ठहराया तो वो उसे जान से मार देंगे। 

‘किसान’ नेताओं की धमकियों के बाद, योगेश सिंह वह सब कुछ करने के लिए तैयार हो गया, जिसके लिए किसानों ने उसे मजबूर किया। इसी वजह से प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसने 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली के दौरान चार किसान नेताओं को मारने की साजिश रचने वाली एक हमला टीम का हिस्सा होने की बात कबूल की।

हरियाणा पुलिस ने चार किसान नेताओं की तस्वीरें बरामद की है

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हरियाणा पुलिस सिंघु बॉर्डर पहुँची और ‘नकाबपोश’ योगेश सिंह को हिरासत में ले लिया। जाँच के दौरान, योगेश सिंह ने खुलासा किया कि उसके मन में किसान विरोध या हरियाणा पुलिस के खिलाफ कुछ भी नहीं है। सिंह ने खुलासा किया कि कुछ प्रदर्शनकारी दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाकर उसे टेंट में ले गए, जहाँ उन्होंने उसे यह कहते हुए हरियाणा पुलिस को झूठा फँसाने के लिए मजबूर किया कि उसने चार नेताओं को मारने की साजिश रची थी।

‘किसानों’ ने कथित तौर पर उसे चेतावनी भी दी कि यदि वह उनके आदेश का पालन नहीं करेगा तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अगले दिन भी, ‘किसान’ नेताओं ने उसे बेरहमी से पीटा और धमकी दी कि अगर वह उनके निर्देशों का पालन करने के लिए सहमत नहीं हुआ तो उसे मार देंगे।

सूत्रों के अनुसार, किसान नेताओं ने अपने दावे को विश्वसनीय बनाने के लिए योगेश सिंह के फोन में उन चार ‘किसान’ नेताओं की तस्वीरें भी डाली, जिन्हें मारने की ‘नकाबपोश शूटर’ ने साजिश रची थी। हरियाणा पुलिस ने उसके मोबाइल फोन से चार किसान नेताओं – बलबीर सिंह राजेवाल, बलदेव सिंह सिरसा, कुलदीप संधू और जगजीत सिंह की तस्वीरें बरामद की हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये तस्वीरें ‘किसान नेताओं’ द्वारा डाली गई थी, जिन्होंने उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान झूठ बोलने की धमकी दी और प्रताड़ित किया।  

‘नकाबपोश’ को पुलिस के हवाले करने में कर रहे थे संकोच

शुक्रवार देर रात सिंघु सीमा पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘नकाबपोश’ योगेश सिंह को मीडिया के सामने पेश करने के बाद ‘किसान’ नेता उसे पुलिस के हवाले करने से संकोच कर रहे थे।

‘किसान’ नेता उसे पुलिस के सामने पेश करने से हिचक रहे थे और इसके बजाय हरियाणा पुलिस से उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने की माँग कर रहे थे। उन्होंने पुलिस से तथाकथित किसानों के खिलाफ हमले की कथित साजिश करने वाले के लिए किसी तरह के कठोर कदम उठाने से मना किया। 

सेना राष्ट्रवादी क्यों, सरकार से लड़ती क्यों नहीं: AAP वाले रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने ‘द प्रिंट’ में छोड़ा नया शिगूफा

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) HS पनाग को लगता है कि भारतीय सेना राष्ट्रवाद की विचारधारा से प्रभावित हो रही है और ये परेशानी की बात है। वो अक्सर भाजपा के विरोध में लिखने के लिए ‘द प्रिंट’ जैसे संस्थानों का रुख करते हैं और इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया है। इसके लिए उन्होंने याद किया है कि कैसे नेहरू ने जनरल केएम करियप्पा को स्वतंत्र भारत का पहला सेना प्रमुख नियुक्त किया था और उन्होंने ही भारतीय सेना पर ‘सिविलियन कंट्रोल’ स्थापित किया था।

इसमें सबसे पहली आश्चर्य वाली बात तो ये है कि सेना राष्ट्र के लिए लड़ती है, राष्ट्र के नागरिकों की आपदा के समय सहायता करती है और राष्ट्र की सीमा की सुरक्षा करती है, तो फिर उसके राष्ट्रवादी होने से किसी को क्यों दिक्कत होनी चाहिए? क्या देशद्रोहियों के हाथ में देश की रक्षा की जिम्मेदारी दे दी जाए? राष्ट्र के लिए कार्य करने वला राष्ट्रवादी ही तो है। हर वो व्यक्ति जो देश के लिए कुछ न कुछ योगदान दे रहा है, राष्ट्रवादी ही तो है।

दूसरी चौंकाने वाली बात ये है कि भारतीय सेना को उपदेश देने के लिए पनाग ने जवाहरलाल नेहरू का नाम लिया है, जिनकी गलत नीतियों की वजह से चीन से भारत को हार मिली थी और न सिर्फ देश को अपनी भूमि गँवानी पड़ी, बल्कि कई जवानों को बलिदान भी होना पड़ा। अगर नेहरू इतने बड़े रणनीतिकार थे और सेना को उनकी बात माननी चाहिए तो फिर नेहरू ने अपने रक्षा मंत्री के साथ मिल कर जनरल KS थिमैय्या का अपमान किया था- ये बात भी सबको बताई जानी चाहिए।

पूर्व एयर मार्शल डेंजिल कीलोर दो टूक कहते हैं कि 1962 का युद्ध भारत केवल पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कारण हारा। उन्होंने उस समय एयरफोर्स का समर्थन नहीं किया। न ही सेना के जवानों को गर्म कपड़े उपलब्ध कराए। भारत यदि हारा तो उसकी वजह नेहरू थे। उन्होंने कहा था कि 1962 के युद्ध में सेना के हाथ में कुछ नहीं था। वो युद्ध बेहद राजनीतिक था, जिसे नेहरू ने हारा। शुरू भी उन्होंने किया और हारे भी वे।

देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने ही ‘Scrap The Army’ जैसे वाक्य कहे थे, क्योंकि तब उन्हें लगता था कि सेना की अब कोई ज़रूरत ही नहीं है। क्या HS पनाग इस बात पर भी उनका समर्थन करेंगे? उन्होंने जिक्र क्या है कि कैसे फील्ड मार्शल करियप्पा ने सेना को राजनीति से दूर रखने की बात की थी और नेहरू ने उन्हें कम प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और ‘अर्द्ध राजनेता’ के रूप में काम न करने की सलाह लिखित में दी थी।

मतलब अब भारतीय सेना इस डिजिटल युग में भी पाषाणकालीन बनी रहे? जब दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों के हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट हैं और वो जनता से सीधे जुड़े हुए हैं, ऐसे समय में क्या हमारे सेना के जवान देश-दुनिया से कट कर रहें? अगर सेना को लेकर दुष्प्रचार फैलाया जाता है तो उसका जवाब न दिया जाए? आज हर एनकाउंटर और आतंकियों के मारे जाने के बाद सेना पर छींटाकशी होती है, क्या ये राजनीति नहीं?

पनाग चाहते हैं कि सेना को लेकर जम कर राजनीति हो, उसे बदनाम किया जाए, भ्रम फैलाया जाए, दुष्प्रचार हो, लेकिन सेना को इसका जवाब देने का हक़ नहीं हो क्योंकि ये राजनीतिक हो जाएगा। पनाग आज लिख रहे हैं कि सेना सरकार के पक्ष में बयान देती है और उन्हें चेताने की बजाए उनके बयानों की प्रशंसा होती है। उनका कहना है कि जनरल नरवणे ने ये कह कर गलती की कि सेना का आधुनिकीकरण पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का हिस्सा है।

असल में 2019 लोकसभा चुनाव से पहले राफेल-राफेल चिल्लाने वाले विपक्षी नेता स्वप्न देख रहे थे कि भारतीय सेना भी उनके सुर में सुर मिलाए। सेना कहे कि उन्हें राफेल कि जरूरत ही नहीं है। सेना कहे कि राफेल में घोटाला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट और आम जनता, दोनों की अदालतों में पटखनी खाने वाले ये विपक्षी नेता हर मौके पर भारतीय सेना को बदनाम करने में लगे रहते हैं। हर घटना पर अफवाह फैलाई जाती है।

हाल ही में लोयापुरा में 3 आतंकवादियों का एनकाउंटर हुआ। मानवाधिकार की दुहाई देने वाले आरोप लगाने लगे कि सेना के जवान ने इनाम के चक्कर में ‘निर्दोष और निहत्थे नागरिकों’ को मार डाला। क्या सेना इस दुष्प्रचार के सबूत न पेश करे और जवाब न दे? जम्मू-कश्मीर पुलिस ने वीडियो शेयर कर के बता दिया कि तीनों आतंकियों को 2 दिन तक घेर कर आत्मसमर्पण के लिए कहा गया, लेकिन वो गोलीबारी करने लगे और जवाबी कार्रवाई में मारे गए।

‘द प्रिंट’ में HS पनाग का लेख

ये तो बस एक उदाहरण था। विपक्षी नेताओं, मानवाधिकार एक्टिविस्ट्स और वामपंथी मीडिया संस्थानों की वजह से हर साल ऐसे हजार मौके आते हैं। भारतीय सेना चुप बैठी रहेगी और सच्चाई को सामने नहीं लाएगी तो देश-दुनिया में उसकी नकारात्मक छवि बना दी जाएगी। जब ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान हमारे देश के लिए है और भारतीय सेना इसमें सहभागिता कर रही है तो क्या गलत है? वो किसी और देश की सेना तो नहीं!

पनाग ने आरोप लगाया है कि सेना प्रमुख वित्त मंत्री को बजट के लिए धन्यवाद देते हैं और पीएम मोदी की योजना की बात करते हैं। उन्होंने उन पर सरकार के मंत्री की तरह व्यवहार करने का आरोप मढ़ दिया। उनका कहना है कि रिटायरमेंट के बाद पोस्ट का लालच देकर सेना के अधिकारियों से राजनीतिक दल अपनी विचारधारा का अनुसरण करवा रहे हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रवाद का दोहन और सेना की कमजोरी करार दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) HS पनाग से बस एक सवाल है। राजेश पायलट को राजनीति में कौन लेकर आया था और उससे पहले वो कहाँ कार्यरत थे? कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रिटायरमेंट के बाद कौन सी पार्टी ज्वाइन की? उस समय कौन सा राष्ट्रवाद था और किस पार्टी का? खुद HS पनाग ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली थी और अपनी बेटी अभिनेत्री गुल पनाग के लिए जम पर चुनाव प्रचार किया था।

इस तरह से तो खुद HS पनाग का लिंक एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ गया? फिर ऐसे में उन्हें क्यों न किसी खास विचारधारा के लिए काम करने वाले व्यक्ति माना जाए, अगर उनके ही तर्क को यहाँ लगाएँ तो? इसके लिए उन्होंने अमेरिका का उदाहरण दिया है कि वहाँ डोनाल्ड ट्रम्प और सेना आमने-सामने आ गए थे। तो क्या वो चाहते हैं कि सेना गैर-राजनीतिक भी बनी रहे और राजनेताओं से लड़ाई-झगड़े भी करती रहे? ये कैसा तर्क है।

भारत अब अमेरिका के कानून के हिसाब से तो नहीं चलेगा न। अमेरिका में क्या कभी ओबामा, क्लिंटन या बुश को किसी ने सत्ता से बाहर होने के बाद सेना को गाली देते हुए देखा है? क्या किसी अमेरिकी मीडिया में अपनी सेना को निर्दोषों को मार डालने को लेकर कोई लेख देखा है? जबकि उनकी सेना कई देशों में फैली हुई है। अमेरिका में न ‘द प्रिंट’ जैसे संस्थान हैं और न ही HS पनाग जैसे दोहरे रवैये वाले लोग जो खुद किसी पार्टी में चले जाएँ और दूसरे ऐसा करें तो पूरी सेना को ही बदनाम करने में लग जाएँ।

मोदी के बंगाल पहुँचने से पहले BJP कार्यकर्ताओं पर हमला, TMC के गुंडों पर हिंसा का आरोप

पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे विधानसभा चुनावों की तारीखें नजदीक आ रही हैं। वहाँ की स्थानीय सियासत गरम होती जा रही है। पश्चिम बंगाल में आए दिन बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले किए जाते हैं। ताजा मामला हावड़ा का है जहाँ पर बीजेपी कार्यकर्ताओं पर शनिवार (जनवरी 23, 2021) को हमला हुआ। बीजेपी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन पर ये हमला साधारण हमला नहीं है बल्कि ये राजनीतिक हमला है और उन्होंने ये आरोप लगाया है कि ये हमला सत्तारूढ़ टीएमसी ने करवाया है।

भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने मीडिया से बातचीत में बताया, “हमारे कार्यकर्ताओं पर आज हमला किया गया। अगर टीएमसी इस तरह की राजनीति करना चाहती है, तो उन्हें उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा।”

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पदयात्रा के दौरान बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। जिसके बाद कई सड़कों पर जाम लगा दिया गया। इसके अलावा कई जगहों पर मोटर साइकिलें भी जलाई गईं। बीजेपी ने आरोप लगाते हुए कहा कि टीएमसी के गुंडों के हमले में उनके कार्यकर्ता घायल हुए हैं। जबकि टीएमसी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकार दिया है।

इस बीच में पीएम मोदी पश्चिम बंगाल पहुँचेंगे। पीएम मोदी यहाँ ‘पराक्रम दिवस’ के कार्यक्रम में शामिल होंगे। बता दें कि आज पूरे भारत में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्म जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

पीएम मोदी आज कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘पराक्रम दिवस’ समारोह को संबोधित करेंगे। वहीं सीएम ममता बनर्जी भी आज कोलकाता में पदयात्रा निकाल रही हैं। 8 किमी लंबी पदयात्रा करने से पहले ममता बनर्जी ने पीएम मोदी के ‘पराक्रम दिवस’ कार्यक्रम पर सवाल उठाए हैं।

कोलकाता पहुँचने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि कोलकाता पहुँच रहा हूँ। यहाँ पर पराक्रम दिवस में शामिल होऊँगा और नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित करूँगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विक्टोरिया हॉल में बंगाली समाज के 200 नामी गिरामी व्यक्तियों के साथ संवाद करेंगे। इसके लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा न्यौता भेजा गया है। इस कार्यक्रम में बंगाल के कला और संस्कृति से जुड़े लोग शामिल होंगे।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पूर्वी मिदनापुर में टीएमसी और बीजेपी के कार्यकर्ता भिड़ गए थे। पूर्वी मिदनापुर के कोंटाई में एक कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किए जाने के बाद लगभग 15 भाजपा कार्यकर्ता घायल हो गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेता शुभेंदु अधकारी के नंदीग्राम कार्यालय में तोड़फोड़ की।